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रामानुजगंज और बलरामपुर में मितानिनों का सम्मेलन, कृषि मंत्री की सहभागिता

रायपुर. उत्कृष्ट कार्य करने वाली मितानिनों का किया गया सम्मान नगरपालिका परिषद रामानुजगंज के पंडित दीनदयाल सभागार में स्वस्थ्य पंचायत मितानिन सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आदिमजाति विकास एवं किसान कल्याण, मछली पालन एवं पशुधन विकास मंत्री  रामविचार नेताम द्वारा मां सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ी महतारी की छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने रामानुजगंज में महतारी सदन व विकासखंड अंतर्गत सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मितानिनों की बैठक हेतु शेड निर्माण की घोषणा की। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के सरपंच, एएनएम एवं मितानिन दीदियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मंत्री  नेताम ने कहा कि कठिन और विपरीत परिस्थितियों में भी मितानिन दीदी सभी निरंतर सेवा भाव से कार्य करती है। मितानिनों के सहयोग से ही स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होता है। साथ ही संस्थागत प्रसव हेतु लोगों को प्रेरित किया जाता है। इस दौरान उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने को कहा। सम्मेलन के दौरान जन-संवाद आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न समस्याओं एवं मांगों से संबंधित कुल 260 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें नए मितानिन नियुक्ति से संबंधित आवेदन, महतारी वंदन योजना, आंगनबाड़ी समस्या, सड़क निर्माण, मितानिन प्रोत्साहन राशि, हैंडपंप नाली निर्माण से संबंधित आवेदन प्राप्त हुए। मंत्री  नेताम ने विभिन्न आवेदनों का तत्काल निराकरण करते हुए शेष प्रकरणों पर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए।  इस दौरान पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मती पुष्पा नेताम, नगर पालिका परिषद रामानुजगंज अध्यक्ष  रमन अग्रवाल, जनपद अध्यक्ष  मुंद्रिका सिंह, उपाध्यक्ष  सुनील तिवारी, गणमान्य नागरिक  शैलेश गुप्ता, ’’ तारावती सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण,जनपद सीईओ  रणवीर साय, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी व बड़ी संख्या में मितानिन उपस्थित थे। 

मेडिकल छात्रा की मौत को लेकर परिजनों ने किया थाने पर प्रदर्शन

भोपाल एमबीबीएस फस्ट ईयर की छात्रा रोशनी कलैश की मौत के मामले में धीमी कार्रवाई से नाराज छात्रा के परिजन और ग्रामीण आज अलीराजपुर से भोपाल पहुंचे और कोहेफिजा थाने के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में अलीराजपुर के अलावा भोपाल में पढ़ने वाले समाज के कई अन्य छात्र-छात्राएं एवं नाते-रिश्तेदार भी शामिल हुए। थाने के अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह बड़े अधिकारी को बुलाने पर अड़े रहे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल डीसीपी शालिनी दीक्षित मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से बात की उनके समझाने के बाद परिजन और ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया।प्रदर्शन करने वालों का कहना था कि छात्रा खुदकुशी नहीं कर सकती है, इसलिए हर एंगल पर जांच की जानी चाहिए। अधिकारियों ने परिजनों को ठोस जांच का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही छात्रा के परिजनों और गांव से आए लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार बीती 10 फरवरी को गांधी मेडिकल कॉलेज की मेडिकल छात्रा रोशनी का शव हॉस्टल में संदिग्ध हालत में मिला था। इस मामले में कहा जा रहा था कि छात्रा ने टॉयलेट क्लीनर पी लिया था। रोशनी के शव के पास ही एसिड की बॉटल भी मिली थी। जब वह सुबह कॉलेज के लिए अपने कमरे से बाहर नहीं निकली, तो साथ में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स उसे बुलाने के लिए पहुंचे थे, तब मामले का खुलाास हुआ था। परिजनों ने हॉस्टल पर लगाए गंभीर आरोप। छात्रा के परिजनों का कहना है कि वह हॉस्टल में नीचे रहती थी, जबकि उसका शव ऊपरी मंजिल वाले बाथरूम में मिला था। परिजनों ने जब सीसीटीवी कैमरे चैक किए तो छात्रा ऊपर-नीचे आते-जाते नहीं दिखाई दी। इसके अलावा परिजनों का यह भी आरोप है कि छात्रा की मौत के बाद न तो पुलिस को सूचना दी गई और न ही परिजनों को बताया गया। बल्कि उसे उठाकर सीधे अस्पताल पहुंचा दिया गया।हॉस्टल  द्वारा दिखाए गए फुटेज से परिजन संतुष्ट नहीं हैं, वह छात्रा की मौत को लेकर साजिश बता रहे हैं।परिजनों का कहना है कि पुलिस उनके बयान दर्ज कर रही है, लेकिन जब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, वह वापस गांव नहीं लौटेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बागेश्वर धाम में सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन में नव दम्पतियों को दिया आशीष

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बेटे-बेटियों का विवाह करने के लिए सामूहिक विवाह सबसे उत्तम माध्यम है। समाज में ख़र्चीले विवाहों का प्रचलन चिंतनीय है। मितव्ययिता जरूरी है। हमारा समाज परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। बदलते वक्त के साथ हमें अपनी सोच भी बदलने की जरूरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने स्वयं अपने पुत्र का विवाह उज्जैन में एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में किया हैं। शादियों में अनावश्यक खर्च से हमें बचना ही चाहिए। सामूहिक विवाहों से हुई बचत परिवार के लिए अन्य सुविधा जुटाने के लिए उपयोगी हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि विवाह और मृत्यु भोज जैसे कार्यक्रमों में फिजूलखर्ची और दिखावे को बंद करने की आवश्यकता है। बागेश्वर धाम में हो रहे सामूहिक विवाह एक यज्ञ के समान हैं। अच्छाइयां ही हमेशा याद रहती हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने भारतीय संस्कृति की भावना को मजबूत करने के लिए छतरपुर को कैंसर अस्पताल की सौगात दी है। हमारे देवस्थान चमत्कारिक होते हैं। मंदिर के आसपास अस्पताल भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को बागेश्वर धाम सरकार में आयोजित सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज जितने भी बेटे-बेटियों का विवाह हुआ है, इन्हें किसी भी रोजगार या काम-धंधे की आवश्यकता है, तो सरकार सभी को हर जरूरी सहायता उपलब्ध करायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे जीवनकाल के 16 संस्कारों में विवाह सबसे बड़ा संस्कार है। यह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की राह दिखाता है। उन्होंने सामूहिक विवाह सम्मेलन में शामिल हुए 300 नव दंपतियों को शुभकामनाएं दी। भारतीय सनातन संस्कृति को आघात पहुंचाने के लिए दुनियाभर के आक्रांताओं ने भारत भूमि पर आक्रमण किए। गुजरात के देवधाम सोमनाथ मंदिर पर भी आक्रमण किया, लेकिन पिछले 75 साल से सोमनाथ मंदिर की भव्यता दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में भी रामलला भव्य मंदिर में विराजे हैं। उन्होंने कहा कि बागेश्वर धाम ने सनातन संस्कृति को नई दिशा दी है। राज्य सरकार बेटियों के विवाह के लिए मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के जरिए 51 हजार रुपए की राशि प्रदान कर रही है। सनातन संस्कृति में हर साल तीन ऐसी तिथियां हैं, जब बगैर मुहूर्त के विवाह किए जा सकते हैं। देवउठनी एकादशी, बसंत पंचमी और अक्षय तृतीया। इन तीनों तिथियों पर पर कन्याओं के सामूहिक विवाह आयोजित किए जाएं। सामूहिक विवाह से शादियों में होने वाले बेहिसाब खर्चों में कमी आ रही है। समाज में हो रहे सकारात्मक बदलावों को सभी को अपनाना चाहिए। बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृष्ण के वंशज हैं। वे गौशाला, गौ-मंदिर और गौमाता के लिए न्यास बनाने का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में उज्जैन में बाबा महाकाल का भव्य महाकाल लोक निर्मित हुआ है। स्थानीय विधायक  अरविंद पटेरिया ने कहा कि बागेश्वर धाम में आयोजित यह 7वां सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन है। पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बागेश्वर धाम सहित संपूर्ण बुंदेलखंड के विकास का संकल्प लिया है। वे क्षेत्र के गरीब परिवारों की बेटियों के पिता बनकर शिक्षा, चिकित्सा एवं विवाह में हर संभव सहायता कर रहे हैं। सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन में पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप अहिरवार, खजुराहो सांसद  विष्णुदत्त शर्मा, विधायक  भगवानदास सबनानी, विधायक मती ललिता यादव, पूर्व विधायक  प्रद्युम्न सिंह, मती अर्चना सिंह सहित जनप्रतिनिधि, साधु-संत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।  

उद्यानिकी को बढ़ावा देने पर जोर, मंत्री कुशवाह ने अधिकारियों को दिए अहम निर्देश

भोपाल. उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाह ने शुक्रवार को सतना जिले में विभागीय योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिले में उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाने किसानों को अधिकारी नहीं, बल्कि उनके मित्र बनकर प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि जिले में उत्पादित प्रमुख उद्यानिकी फसलों के किसानों को खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करायी जा सकती है। मंत्री  कुशवाह ने कहा कि कृषि वर्ष 2026 में उद्यानिकी विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक किसानों को उद्यानिकी की योजनाओं से जोड़कर उद्यानिकी के रकबे का विस्तार करना है। उद्यानिकी अमला किसानों को फूड प्रोसेसिंग, मसालों की खेती और औषधीय खेती की ओर प्रोत्साहित करे। उन्होंने निर्देश दिये कि कृषि आदानों की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए। मंत्री  कुशवाह ने कहा कि सतना जिले में प्याज और टमाटर के बहुतायत में उत्पादन को देखते हुए टमाटर, प्याज के शैम्पू, पेस्ट, पावडर एवं अन्य प्रसंस्करण यूनिट लगाने जिला स्तर पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित करें। सतना और मैहर जिले में लगभग 2 लाख हितग्राहियों को मिल रही है सामाजिक सुरक्षा पेंशन सामाजिक न्याय मंत्री  कुशवाह ने कहा कि सभी पात्र हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन उपलब्ध कराई जाये। वर्तमान में सतना जिले में एक लाख 23 हजार और मैहर जिले में 69 हजार से अधिक हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन वितरित की जा रही है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों को समय-सीमा में और उनकी आवश्यकता के अनुसार सुविधाएँ मुहैया कराना राज्य सरकार का लक्ष्य है। मंत्री  कुशवाह ने कहा कि दिव्यांगजनों के यूडीआईडी कार्ड अभियान चलाकर बनाये जायें तथा कृत्रिम अंग और सहायक उपकरणों का वितरण शिविर लगाकर किया जाये। बैठक में सीईओ जिला पंचायत  शैलेन्द्र सिंह, अपर कलेक्टर  विकास सिंह सहित उद्यानिकी एवं सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। स्व. दयानंद कुशवाह की विचारधारा को आगे बढ़ाने की जरूरत : मंत्री  कुशवाह सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण मंत्री  कुशवाह ने सतना प्रवास के दौरान पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य तथा समाज सेवी स्व. दयानंद कुशवाह की प्रथम पुण्य तिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में श्रद्धा-सुमन अर्पित किये। उन्होंने कहा कि स्व. दयानंद कुशवाह ने शोषित, दलित और पीड़ित वर्ग के लिये संघर्ष किया। उनके द्वारा किये गये कार्यों को सदैव याद रखा जायेगा। श्रद्धांजलि सभा में नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री मती प्रतिमा बागरी, सांसद  गणेश सिंह, विधायक  सिद्धार्थ कुशवाह,  सुरेन्द्र सिंह गहरवार, डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह सहित अन्य जन-प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। उन्होंने भी स्व. दयानंद कुशवाह के प्रति श्रद्धा-सुमन अर्पित किये।  

जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने के लिए मध्यप्रदेश की हुई सराहना

जनगणना प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ भविष्य की दिशा तय करने का है अभियान प्रधानमंत्री मोदी ने लिया डिजिटल जनगणना कराने का ऐतिहासिक फैसला कलेक्टर-कमिश्नर्स समय-सीमा में पूर्ण करें जनगणना कार्य जनगणना में मजरों-टोलों का भी किया जाए आंकलन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। जनगणना के आधार पर सरकार की योजनाएं बनती हैं, संसाधनों का वितरण तय होता है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तैयार होती है। आज भारत विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला राष्ट्र है। यह जनगणना केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक महत्व की भी है। जनगणना का कार्य केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला सबसे व्यापक और निर्णायक अभियान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनगणना-2027 के प्रथम चरण के लिए आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन में जनगणना-2027 की प्रक्रिया पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सत्र में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, रजिस्ट्रॉर जनरल तथा जनगणना आयुक्त श्री मृत्युंजय कुमार नारायण, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह श्री शिवशेखर शुक्ला उपस्थित थे। सम्मेलन में प्रदेश के सभी संभागायुक्त, कलेक्टर्स, नगर निगम आयुक्त तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने डिजिटल जनगणना कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। देश में आखिरी बार वर्ष 1931 में सामाजिक स्तर की जनगणना की गई थी। उन्होंने जनगणना की प्रक्रिया में गांवों, मजरों-टोलों के साथ-साथ बेचिराग गांवों की स्थिति के आंकलन की व्यवस्था करने की भी आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल एवं अन्य कार्यों की योजनाएं जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनाई जाती हैं। जनगणना केवल संख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है, यह राज्य की संवेदनशीलता, प्रशासन की विश्वसनीयता, प्रतिबद्धता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की चुनौतियां भिन्न हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाते हुए समयबद्ध रूप से जनगणना की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया की सफलता का केन्द्र मैदानी प्रशासनिक अधिकारी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स और कमिश्नर्स से जनगणना कार्य को रणनीतिक नेतृत्व प्रदान करते हुए जनगणना के सभी उद्देश्यों की समय सीमा में पूर्ति करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन में उपस्थित प्रदेश के सभी कमिश्नर-कलेक्टरों से कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से प्रारंभ होकर 6 मार्च तक चलेगा। उन्होंने आगामी महाशिवरात्रि और होली जैसे त्यौहारों के दृष्टिगत शांति समितियों के साथ बैठक कर अन्य आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने में जन भावनाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। नागरिकों के स्वास्थ्य की दृष्टि से मिलावटी मिठाई, रंगों में मिलावट एवं अन्य खाद्य पदार्थों की जांच के लिए विशेष प्रबंध किए जाएं। होली के त्यौहार में सामाजिक समरसता सुनिश्चित हो। प्रदेश में जल संरचनाओं के निर्माण में मुआवजे के प्रकरणों का निराकरण संवेदनशीलता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि हमें विकास के साथ-साथ जनभावनाओं का ध्यान भी रखना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भावांतर योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सभी अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत जी-रामजी योजना के क्रियान्वयन के लिए बेहतर प्रबंध किए जाएं। राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में घोषित किया है। किसानों से जुड़ी सभी योजनाओं और कार्यों के लिए उचित प्रबंध किए जाएं। ग्रीष्मकालीन फसलों में राज्य सरकार उड़द और मूंगफली के उत्पादन को प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है। मक्का की फसलों से भी किसान लाभान्वित हो रहे हैं। नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने में विभिन्न जिले स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रखें। प्रदेश में दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए कार्य किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खनिज, पंजीयन, आबकारी के अंतर्गत राजस्व संग्रहण लक्ष्यों को प्राप्त करना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना को प्रशासनिक व्यवस्था का सबसे कठिन कार्य माना जाता है। देश में हर 10 साल में जनगणना होती है। प्रशासनिक अधिकारियों के लिए जनगणना, अपनी प्रबंधन दक्षता को सिद्ध करने और अपने अनुभवों का समृद्ध करने का श्रेष्ठ अवसर है। इस बार तकनीक के बेहतर उपयोग से जनगणना के आंकड़े डिजिटल व्यवस्था के परिणामस्वरूप जल्दी आएंगे। मध्यप्रदेश विविधता से समृद्ध राज्य है। यहां करीब 1 लाख 27 हजार मजरे-टोले हैं, अगर मकानों की गणना के पत्रक में एक कॉलम मजरे टोले का रखा जाए, तो इससे राज्य सरकार को भविष्य की योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। जीआईएस सिस्टम से महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। अगर आंकड़े सही तरीके से फीड किए जाएंगे तो जनगणना का परिणाम बेहतर मिलेगा। यह नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपनी सही जानकारियां फील्ड अधिकारियों को उपलब्ध कराएं। 

600 करोड़ रूपए की नई सिंचाई परियोजना से खेत होंगे सिंचित 33 गांवों को मिलेगा लाभ

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नोहलेश्वर महादेव की महिमा ऐसी है जो यहाँ एक बार आता है, उसका मन बार-बार यहां आने को करता है। कृपावंत, कृपाशंकर भगवान नोहलेश्वर महादेव के आशीर्वाद से हम प्रदेश के विकास और जनकल्याण के लिए पूरी ऊर्जा और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। नोहलेश्वर महोत्सव आस्था ही नहीं, स्थानीय संस्कृति, परम्परा और सामाजिक समरसता का भी उत्सव है। हमारी सरकार आस्था के स्थलों के संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को दमोह जिले के ग्राम नोहटा में नोहलेश्वर महोत्सव मेले के अवसर पर आयोजित किसान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेले का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। साथ ही नोहलेश्वर मंदिर परिसर और मेला परिसर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई विकास प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय जनता की मांग पर नोहटा को परीक्षण के उपरांत नगर परिषद बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह में 2 करोड़ रूपए की लागत से गीता भवन का निर्माण किया जाएगा। दमोह जिले में बांदकपुर-सेमरखो जलाशय की क्षमता में वृद्धि कर 600 करोड़ रूपए की नई सिंचाई परियोजना विकसित की जाएगी। इससे जिले के 33 गांवों के खेतों को सिंचाई के लिये भरपूर पानी मिलेगा। दमोह में 10 करोड़ रूपए की लागत से वॉटर स्पोर्ट्स, बोट क्लब सहित अन्य पर्यटन गतिविधियों का विकास किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तेंदूखेड़ा और हटा में खेल गतिविधियों के प्रोत्साहन के लिए नए स्टेडियम बनाए जाएंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुप्रसिद्ध भजन गायिका शहनाज अख्तर का अभिनंदन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार दमोह के साथ पूरे बुंदेलखंड के विकास के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। दमोह के तेंदूखेड़ा में 165 करोड़ की नई योजना को स्वीकृति दी गई है। दमोह के लिए नया फोर लेन भी मंजूर किया गया है। दमोह में पर्यटन के साथ उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि सहित सभी क्षेत्रों में समान रूप से प्रयास कर रही है। दमोह जिले में जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए जैविक हाट लगाए जा रहे हैं। अब तक जिले में 69 जैविक हाटों में 28 लाख रुपए के उत्पादों की बिक्री हुई है। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा किसानों को खाद वितरण के लिए की गई ई-टोकन की व्यवस्था की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान हमारे अन्नदाता हैं। उनकी खुशहाली और समृद्धि से ही देश खुशहाल बनेगा। उन्होंने कहा कि हम खेती के साथ पशुपालन को भी प्रोत्साहन दे रहे हैं। कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण बढ़ाना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पशुपालन से दूध उत्पादन बढ़ेगा। हमने प्रदेश का दूध उत्पादन 9 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा है। हमारी सरकार पशुपालन, गौपालन और गौ-संरक्षण की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किसी भी देश के साथ रिश्तों में किसानों के हितों से कभी समझौता नहीं किया। खेतों में किसान और सीमा पर जवान, दोनों हमारे लिए बराबर सम्मान रखते हैं। राज्य सरकार किसानों के स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रख रही है। विकास कार्यों को गति देने में हमारी सरकार सदैव जनता के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में माताओं-बहनों का स्थान सर्वोपरि है। हम अपने देश को भी माता का दर्जा देते हुए भारत माता कहकर सम्मान देते हैं। माताएं-बहनें हमारे परिवार की गरिमा हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार हमेशा लाड़ली बहनों के साथ है। लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपए की सहायता राशि दी जा रही है। वे अपनी मेहनत और निष्ठा से पूरे कुल, खानदान, परिवार का लालन-पालन करती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह में औद्योगिक प्रक्षेत्र के विकास के साथ क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। सूखे खेत को पानी मिल जाए, तो फसल सोने जैसी हो जाती है। दमोह जिले को देश की पहली नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना से सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पहली बार श्रीकृष्ण जन्माष्ठमी और गीता जयंती को भव्यता के साथ मनाने की शुरुआत की। मध्यप्रदेश, देश का एकमात्र राज्य है, जो विकास के साथ विरासत का भी संरक्षण कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नोहटा का नोहलेश्वर मंदिर 1100 साल से अधिक प्राचीन है, जिसे कलचुरी साम्राज्य में महारानी नोहला ने बनवाया था। नोहलेश्वर महोत्सव के आयोजन से इस क्षेत्र के पर्यटन को नई ऊर्जा मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर चीतों के पुनर्स्थापन से नया चमत्कार हुआ है। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में विदेश से 20 चीता लाए गए थे, अब 35 चीते प्रदेश की धरती पर दौड़ लगा रहे हैं, चीतों का परिवार बढ़ रहा है। कुछ दिन पहले मादा चीता आशा ने 5 शावकों को जन्म दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसी साल जून में नौंरादेही अभयारण्य में चीतों को छोड़ा जाएगा। मध्यप्रदेश टाइगर, चीता, गिद्ध और घड़ियाल के मामले में देश में शीर्ष स्थान पर है। उन्होंने कहा कि वन्य जीव पर्यटन को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने होम-स्टे योजना बनाई है। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा और वे पर्यटकों को अपने घरों में होम-स्टे बनाकर ठहरा सकेंगे। होम-स्टे तैयार करने वाले हितग्राहियों को शासकीय अनुदान भी दिया जा रहा है। उन्होंने होम-स्टे संचालनकर्ताओं से कहा कि जब पर्यटक आएं, तो उनकी अच्छी तरह मेहमाननवाज़ी करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन पर्यटन क्षेत्रों में होम-स्टे चल रहे हैं, वहाँ होम-स्टे से ग्रामीणों की आय तेजी से बढ़ रही है। संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। मध्यप्रदेश ने ऊर्जा के क्षेत्र में प्रगति करते हुए आज 26 हजार मेगावॉट से अधिक बिजली उपलब्धता सुनिश्चित की है। मध्यप्रदेश में किसानों को ब्याज रहित ऋण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ‘मैन ऑफ आइडियाज’ हैं। उन्होंने अनेक जनकल्याणकारी … Read more

8th Pay Commission Update: 60% DA जोड़कर तय होगी सैलरी? आसान भाषा में समझें गणित

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। दरअसल, वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में 18 से 20 महीने तक लग जाएंगे लेकिन इससे पहले केंद्रीय कर्मचारी सैलरी और महंगाई भत्ते का कैल्कुलेशन करने लगे हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि 8वां वेतन आयोग, 7वें वेतन आयोग की तरह ही फिटमेंट फैक्टर आधारित फॉर्मूले को अपनाएगा या नहीं। लेकिन अगर वही पैटर्न दोहराया जाता है तो महंगाई भत्ते (DA) की दर एक बार फिर फिटमेंट फैक्टर तय करने का आधार बन सकती है। आइए समझते हैं कि अब तक का क्या पैटर्न रहा है। क्या है पैटर्न? 7वें आयोग ने न्यूनतम वेतन को 18,000 रुपये तय किया, जो 6वें वेतन आयोग के समय 1 जनवरी 2006 को लागू न्यूनतम वेतन 7,000 रुपये (पे बैंड-1 और ग्रेड पे 1,800 रुपये सहित) से 2.57 गुना अधिक था। इस 2.57 के फिटमेंट फैक्टर में लगभग 2.25 का हिस्सा केवल डीए यानी महंगाई भत्ते के न्यूट्रलाइजेशन के लिए रखा गया था। बाकी हिस्सा वास्तविक वेतन वृद्धि और संरचनात्मक बदलावों से जुड़ा था। अब यदि यही तर्क 8वें वेतन आयोग में अपनाया जाता है, तो 1 जनवरी 2026 को संभावित 60 प्रतिशत DA को आधार बनाकर नया फिटमेंट फैक्टर तय किया जा सकता है। मौजूदा अनुमानों के अनुसार, जनवरी से जून की छमाही के लिए केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। हालांकि, सरकार ने इसका फैसला नहीं लिया है लेकिन AICPI-IW के 2025 के आंकड़ों के आधार पर काफी हद तक ऐसा ही होने की संभावना है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि फिटमेंट फैक्टर कितना होगा या न्यूनतम वेतन कितने रुपये तय किया जाएगा। लेकिन इतना तय है कि DA को आधार मानने की पुरानी परंपरा अगर जारी रहती है, तो 60 प्रतिशत डीए 8वें वेतन आयोग के वेतन निर्धारण में अहम भूमिका निभा सकता है। वेतन आयोग ने मांगे हैं सुझाव केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए वेतन आयोन ने एक वेबसाइट को लॉन्च किया है। इस वेबसाइट पर कर्मचारियों, पेंशनर्स तथा अन्य हितधारकों से सुझाव भी मांगे हैं। हालांकि, वेतन और पेंशन संशोधन से जुड़ी सिफारिशें आने में अभी समय लगेगा। बता दें कि सरकार ने पिछले साल जनवरी महीने में वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी। इस वेतन आयोग की टीम का गठन नवंबर महीने में किया गया। यह भी अहम है कि 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को ही खत्म हो चुका है।  

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने सरकार की उपलब्धियों एवं आगामी रणनीतियों को लेकर पत्रकारों से हुए रूबरू

रायपुर. बस्तर की शांति के लिए सरकार प्रतिबद्ध- उपमुख्यमंत्री  शर्मा उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री  विजय शर्मा ने आज गृह एवं जेल विभाग की उपलब्धियों के संबंध में नया रायपुर स्थित संवाद ऑडिटोरियम में पत्रकारों से चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार बनने के साथ ही हम एक नई सोच को लेकर कार्य कर रहे हैं। राज्य की क्षमता में विस्तार के लिए नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन अन्तर्गत आइसीजेएस के तहत पांचों स्तंभों पुलिस, अभियोजन, फारेंसिक, जेल एवं न्यायालय को एकीकृत करने की प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ राज्य अग्रणी है। दुर्ग एवं बिलासपुर जिले पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर पांचों पिलर्स को एकीकृत कर एक मॉडल जिले के रूप में उभर कर सामने आये हैं। पहले पुलिस को साक्ष्यों को लेकर कई बार समास्याओं का सामना करना पड़ता था अब ई- साक्ष्य के आने से तुरंत साक्ष्य उपलब्ध हो रहे हैं। जिससे पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ा है। 8 बैंकों के साथ एमओयू कर बिना किसी प्रीमियम के सैलरी अकाउंट पर बीमा सुविधा उपलब्ध कराई                  गृह मंत्री  शर्मा ने बताया कि पुलिस कार्यों के आधुनिकीकरण के लिए सीसीटीएनएस द्वारा मेडलीपार, ई- साक्ष्य, ई -सम्मन, ऑनलाइन एफआईआर, ई- साइन, ई- कोर्ट, ई- श्रुति के द्वारा कार्यों को त्वरित और आसान बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को न्याय प्राप्ति में आसानी होगी। पुलिस कर्मियों के लिए अब तक किसी प्रकार की बीमा की व्यवस्था नहीं थी, जिस पर ध्यान देते हुए सरकार द्वारा 08 बैंकों के साथ एमओयू कर बिना किसी प्रीमियम के सैलरी अकाउंट पर बीमा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, इसका लाभ छत्तीसगढ़ पुलिस के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारियों को प्राप्त हो रहा है। यह पुलिस कर्मियों के लिये कल्याणकारी योजनाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत अब तक 15 शहीद पुलिसकर्मियों के आश्रितों को 16 करोड़ रुपए से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। शिकायतों के निराकरण हेतु ऑनलाईन कम्पलेंट मैंनेजमेंट पोर्टल का निर्माण   गृह मंत्री ने बताया कि पहले अपराध समीक्षा हाथ से लिखकर उपलब्ध कराया जाता था जो पुलिस विवेचना में देरी होती थी, अब राज्य की अभिनव पहल के रूप में अपराध समीक्षा एप्लीकेशन से पूरे राज्य में दर्ज एफआईआर की निगरानी, समीक्षा एवं विश्लेषण की जा रही है। जहां समय-सीमा में अपराधों का विवेचना के साथ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित रूप इसका पर्यवेक्षण किया जा रहा है जिससे जवाबदेहिता सुनिश्चित हो रही है और हर स्तर पर उसकी निगरानी की जा रही है।  उन्होंने बताया कि पुलिस मुख्यालय में विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों के निराकरण हेतु ऑनलाईन कम्पलेंट मैंनेजमेंट पोर्टल का निर्माण किया गया है। पूर्व में  शिकायतों को संबंधित जिलों में डाक के माध्यम से प्रेषित किया जाता था और जिलों के द्वारा भी संबंधित शिकायतों का जांच प्रतिवेदन डाक के माध्यम से ही मुख्यालय को प्राप्त होता था। इस पोर्टल के निर्माण से इस प्रक्रिया को ऑनलाईन किया गया है, जिससे संसाधनों व समय की बचत के साथ-साथ शिकायतों का निराकरण किया जा रहा है। शिकायतों के त्वरित निराकरण से पुलिस की छवि में सुधार तथा पीड़ितों को राहत मिल रहा है। अवैध प्रवासियों की पहचान कर विशेष टास्क फोर्स का गठन गृह मंत्री  शर्मा ने बताया कि अवैध प्रवासियों पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में टोल फ्री नम्बर जारी कर अवैध प्रवासियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए अवैध प्रवासियों की पहचान कर विशेष टास्क फोर्स का गठन द्वारा उनकी गिरफ्तारी एवं विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत उन पर कार्रवाई करते हुए 34 लोगों को देश से निष्कासित करने का भी कार्य किया गया है। विचाराधीन लोगों के लिए होल्डिंग सेंटर भी बनाये गए हैं जहां उनकी जांच कर नियमानुसार प्रक्रिया की जा रही है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा एंटी टेरीरिस्ट स्क्वाड को भी क्रियाशील करने का कार्य किया है जहां बनने के बाद से अब तक इसमें कोई केस दर्ज नहीं हुआ था वर्ष 2025 में इसके द्वारा पहली बार कार्रवाई की गई थी। उन्होंने बताया कि धर्मांतरण के मामलों पर सरकार विशेष ध्यान देते हुए इन्हें रोकने के लिए संलग्न लोगों पर कार्रवाई कर रही है सरकार बनने के 23 वर्षों में जितने मामले दर्ज हुए थे उससे दोगुने मामले पिछले 2 वर्षों में दर्ज किए गए हैं। गौवंश वध, परिवहन एवं व्यापार की रोकथाम गृह मंत्री  शर्मा ने बताया कि प्रदेश में गौवंश वध, परिवहन एवं व्यापार की रोकथाम हेतु पुलिस द्वारा लगातार कार्यवाही की जा रही है, जिसमें गौवंश वध, परिवहन एवं व्यापार के प्रकरण दर्ज कर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। इनमें प्रयुक्त वाहनों को जप्त कर 142 वाहनों को राजसात कर 27 वाहनों की नीलामी भी की जा चुकी है। देश में पहली बार गौवंश वध, परिवहन एवं व्यापार के आदतन आरोपियों की सूची बनाई गई है और उनपर गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए 19 पर निगरानी भी खोलकर सतत् निगरानी की जा रही है। राज्य में नशे के व्यापार के विरूद्ध सख्त कार्रवाई  शर्मा ने बताया कि राज्य में नशे के व्यापार के विरूद्ध कार्रवाई करते हुए एनडीपीएस एक्ट के तहत लगातार कार्य किया जा रहा है। आदतन आरोपी के विरूद्ध निरोधक आदेश जारी कर एनडीपीएसए के वित्तीय जांच कर नशे के व्यापारियों की वित्तीय आधार खत्म करने के लिए उनकी सम्पत्ति जब्त कर उसे नीलाम करने का भी कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही गांजा, नशीली दवाइयों, एमडीएमए, हेरोईन, ब्राउन शुगर, डोडा को नष्टीकरण करने का कार्य किया गया है एवं संलग्न वाहनों की नीलामी भी की जा रही है। अनाधिकृत ऑनलाईन गैम्बलिंग को रोकने का भी कार्य         गृह मंत्री  शर्मा ने बताया कि साइबर अपराधियों के विरूद्ध तीव्र गति से कार्रवाई के करते हुए ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों के खातों को सीज करने के साथ फर्जी सिम जारी करने वाले पीओएस पर भी अपराध पंजीबद्ध कर 165 संचालको की गिरफ्तारी की कार्यवाही की गई है साथ ही म्यूल खातों पर कार्यवाही करते हुये अपराध पंजीबद्ध कर बैंक कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी की गई है। राज्य में संचालित अनाधिकृत ऑनलाईन गैम्बलिंग प्लेटफार्म पर पहली बार कार्रवाई करते हुए 255 ऑनलाइन लिंक्स और पोर्टल्स को रोकने का भी … Read more

सेवा तीर्थ वाले बयान पर सियासत तेज, AAP नेता का तीखा कटाक्ष

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ करने पर आप नेता संजय सिंह ने तंज कसा है। कहा कि नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 साल में कोई काम तो नहीं किया है, लेकिन अब अपने कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ रखकर बता दिया कि वह भगवान का अवतार हैं। लोग नारियल-अगरबत्ती लेकर आएं और उनकी पूजा करें। लोग नारियल-अगरबत्ती लेकर उनकी पूजा करें, PM ऑफिस का नाम सेवा तीर्थ करने पर AAP नेता का तंज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ करने पर आप नेता संजय सिंह ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 साल में कोई काम तो नहीं किया है, लेकिन अब अपने कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ रखकर उन्होंने बता दिया कि वह भगवान का अवतार हैं। लोग नारियल-अगरबत्ती लेकर आएं और उनकी पूजा करें। आप सांसद ने कहा कि पिछले 12 साल में देश की जनता को ना महंगाई से राहत मिली और ना ही युवाओं को रोजगार मिला है। मोदी जी सिर्फ इमारतें बनवा रहे हैं, लेकिन उन इमारतों में कोई काम नहीं हो रहा है। वो जहां बैठेंगे वहां लोग तीर्थ के रूप में जाएंगे आप नेता ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि सेवा तीर्थ का मतलब है कि वे भगवान का अवतार हैं, आम इंसान तो हैं नहीं। वो जहां बैठेंगे वहां लोग तीर्थ के रूप में जाएंगे। काम-धाम तो कुछ होना नहीं है। 12 साल हो गया ना 24 करोड़ रोजगार मिला नौजवानों को, ना काला धन आया, ना 15 लाख मिला और ना 15 अगस्त 2022 तक सबको पक्का मकान मिला। आप सांसद ने कहा कि मोदी जी किस प्रकार से देश की सेवा कर रहे हैं, यह एक बड़ा सवालिया निशान है। बाकी वो अपने आप को अवतार मानते हैं। नॉन बाइलॉजिकल हैं। जहां वो बैठेंगे वह तीर्थ स्थान ही माना जाएगा। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। मैं तो समझता हूं कि लोग नारियल लेकर जाएं उनके पास। 12 साल में तो हमें कुछ दिखता नहीं सारे मंत्रालयों के लिए एक ही कर्तव्य भवन बनाने के सवाल पर संजय सिंह ने कहा कि कर्तव्य क्या हो रहा है। कर्तव्य भवन बना लीजिए, सेवा तीर्थ बना लीजिए, लोगों से कहिए कि नारियल-अगरबत्ती लेकर आएं, लेकिन काम क्या हो रहा है। काम तो बताइए। आपने हर साल 2 करोड़ नौकरी देने को कहा था, किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात कही थी, काला धन आएगा और 15 लाख मिलेगा, आपने कहा था कि 15 अगस्त 2022 तक सबको पक्का मकान मिलेगा। आप नेता ने कहा कि काम क्या हो रहा है। सेवा क्या हो रहा है आपके माध्यम से। क्या कर रहे हैं आप। आप पूंजीपतियों की सेवा कर रहे हैं। बड़े-बड़े लोगों को, अंबानी और अडाणी को करोड़ों कमवा रहे हैं। इमारते बनवाने से थोड़े ही न काम होगा। 12 साल में तो हमें कुछ दिखता नहीं है कि काम हो रहा है। वंदे मातरम् से इनका कोई लेना-देना नहीं वंदे मातरम् पर उन्होंने कहा कि इससे उनका लेना-देना क्या है। क्या इनके पुरखों ने कभी वंदे मातरम् गाकर जेल काटी है। क्या अंग्रेजों ने कभी उन पर धारा लगाई है। मैंने आरएसएस के चार लोगों के नाम पूछे थे जो वंदे मातरम् गाकर जेल गए थे, आज तक वे नहीं बता सके। वंदे मातरम् से इनका कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल, एक नई चीज परोसी जा रही है, ताकि लोग पुरानी चीजें भूल जाएं। वंदे मातरम् आप दिनभर गाते रहिए, हमें कोई परेशानी नहीं है। आप नेता ने सवाल किया कि वंदे मातरम् देश के कितने लोगों को आती है। उन्होंने कहा कि इस देश के 99 प्रतिशत लोगों को पूरा वंदे मातरम् नहीं आती, तो क्या वे देशभक्त नहीं हैं। जो हमारा मजदूर है, रिक्शे वाला है, ऑटो वाला है, क्या वो देशभक्त नहीं है। ये सब सिर्फ बंगाल के चुनाव के लिए हो रहा संजय सिंह ने कहा कि भाजपा का एक काला इतिहास है जो देश के लोगों को जानना चाहिए। भाजपा ने नागपुर के मुख्यालय पर 52 साल तक तिरंगा झंडा नहीं फहराया, जो इनकी मातृ संस्था है आरएसएस। दूसरा इनका काला इतिहास है कि 28 दिसंबर 1949 में पांचजन्य में एक लेख छपा है जिसमें राष्ट्र गान जन-मन-गण को मनोरंजन का एक चीज बताया गया है। तो क्या भाजपा अपने पूर्वजों के इन गुनाहों के लिए देश से माफी मांगेगी। आप नेता ने कहा कि ये सब सिर्फ बंगाल के चुनाव के लिए हो रहा है, जिसे देश की जनता को समझ जाना चाहिए।

रेफरेंडम के बाद बांग्लादेश की राजनीति में नया अध्याय, ऊपरी सदन गठन से बदल सकती है ताकत की तस्वीर

ढाका  बांग्लादेश चुनाव और जनमत संग्रह के नतीजों के बाद इस मुल्क की राजनीति में आमूल-चूल बदलाव होने वाला है. बांग्लादेश को न सिर्फ नए नेता, नई पार्टी का नेतृत्व मिला है. बल्कि जनमत संग्रह की वजह से वहां की संसदीय राजनीति में बदलने वाली है. बांग्लादेश में अब राज्यसभा का गठन होगा, प्रधानमंत्री के अधिकार कम होंगे, राष्ट्रपति की शक्तियां बढ़ेंगी और सांसद अहम मुद्दों पर पार्टी लाइन से हटकर भी मतदान कर सकेंगे.  बांग्लादेश के हर नागरिक ने 12 फरवरी को दो वोट डाला था. एक वोट नई सरकार चुनने का था तो दूसरा जनमत संग्रह का था. ये जनमत संग्रह बांग्लादेश के संविधान में संशोधन को लेकर था. इसे ‘जुलाई चार्टर’ के नाम से जाना जाता है. बांग्लादेश के नागरिकों को ये वोट करना था कि क्या वे संविधान में संशोधन चाहते हैं या अथवा नहीं. इसके लिए उन्हें ‘यस वोट’ या ‘नो वोट’ देना था.  जनमत संग्रह के नतीजे बताते हैं कि लोगों ने भारी मतों से ‘यस वोट’ को चुना है. इसका मतलब यह है कि बांग्लादेश की जनता संविधान में संशोधन चाहती है.  बता दें कि मोहम्मद यूनुस ने जुलाई चार्टर को “नए बांग्लादेश का जन्म” कहा था. जुलाई चार्टर में कुल 84 सुधार प्रस्ताव हैं, जिनमें से कुछ के लिए संविधान संशोधन जरूरी है और कुछ कानून/आदेश से लागू हो सकते हैं. बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे तारिक रहमान के सामने अब चुनातियां होंगी कि वे इस चार्टर को लागू करें.  आइए समझते हैं कि इस जनमत संग्रह से बांग्लादेश में क्या क्या बदलेगा? ‘राज्यसभा’ का गठन शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश के मुख्य प्रशासक मोहम्मद यूनुस ने कहा था देश में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि सत्ता विकेंद्रित रहे, यानी कि ताकत एक व्यक्ति अथवा पद के पास केंद्रित नहीं रहे. इसी उद्देश्य से बांग्लादेश में राज्यसभा का गठन किया जाएगा. बांग्लादेश की वर्तमान संसद यूनिकैमरल है. यानी कि यहां सिर्फ एक सदन है, लेकिन जुलाई चार्टर में वादा किया गया है कि संसद को bicameral बनाया जाएगा.  यानी यहां दो सदनों वाली संसद बनेगी. इसका मतलब है कि बांग्लादेश में ऊपरी सदन का गठन किया जाएगा. भारत में ऊपरी सदन को ही राज्यसभा कहते हैं.प्रस्तावित उपरी सदन में 100 सदस्य होंगे. इस आम चुनाव में जिस पार्टी को जितनी सीटें आएंगी, उसी अनुपात में उन्हें सीटें आवंटित की जाएगी. इससे संसद की शक्ति बढ़ेगी, क्योंकि संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों की सहमति जरूरी होगी. कोई एक पार्टी अकेले संविधान नहीं बदल सकेगी. संविधान में बदलाव के लिए ऊपरी सदन की होगी जरूरत अब संविधान में बदलाव के लिए निचले सदन में दो-तिहाई बहुमत और ऊपरी सदन में बहुमत वोट की जरूरत होगी. राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होगी.  जुलाई चार्टर में यह भी कहा गया है कि निचले सदन का डिप्टी स्पीकर विपक्षी पार्टी से होना चाहिए, जिससे पार्लियामेंट्री लीडरशिप में विपक्षी रिप्रेजेंटेशन को औपचारिक रूप दिया जा सके.  एक व्यक्ति 10 साल ही PM रह सकेगा जुलाई चार्टर के सुधारों के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में ज़्यादा से ज़्यादा 10 साल तक प्रधानमंत्री रह सकता है. यह भी प्रस्ताव है कि प्रधानमंत्री पद पर बैठा व्यक्ति एक ही समय में पार्टी नेता का पद नहीं संभाल सकता.  राष्ट्रपति की शक्तियों में इजाफा बांग्लादेश में अभी प्रेसिडेंट को प्राइम मिनिस्टर की सलाह पर काम करना होता है. लेकिन अगर जुलाई चार्टर के प्रपोज़ल लागू होते हैं, तो राष्ट्रपति ह्यूमन राइट्स कमीशन, इन्फॉर्मेशन कमीशन, प्रेस काउंसिल, लॉ कमीशन, बांग्लादेश बैंक के गवर्नर और एनर्जी रेगुलेटरी कमीशन में अधिकारियों को बिना किसी सलाह या रिकमेंडेशन के अपनी अथॉरिटी से नियुक्ति कर पाएंगे.  पार्टी लाइन से इतर वोट कर सकेंगे सांसद बांग्लादेश के मौजूदा संविधान का आर्टिकल 70 सांसदों को अपनी पार्टी लाइन के खिलाफ वोट करने से रोकता है. दरअसल ये फ्लोर क्रॉसिंग पर रोक लगाता है. जुलाई चार्टर के तहत इसे खत्म कर दिया जाएगा. अब सांसद पार्टी की राय से अलग भी वोटकर सकेंगे.  आपातकाल की घोषणा के लिए नेता प्रतिपक्ष की सहमति जरूरी आपातकाल से जुड़ी शक्तियों में बदलाव भी इस चार्टर का मुख्य हिस्सा हैं. इमरजेंसी की घोषणा अब सिर्फ़ प्रधानमंत्री की मर्ज़ी पर नहीं होगी. इसके बजाय, इसके लिए कैबिनेट सदस्यों और विपक्ष के नेता और उप-नेता की मंजूरी की जरूरत होगी. इसके अलावा इमरजेंसी के दौरान बुनियादी अधिकारों को सस्पेंड नहीं किया जाएगा.  महिलाओं के लिए आरक्षण चुनाव आयोग को स्वायत्त बनाया जाएगा और कैरटेकर सरकार की व्यवस्था बहाल होगी. महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए संसद में अधिक आरक्षण होगा. ये बदलाव 2024 के विद्रोह की मांगों से निकले हैं, जहां युवाओं ने भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई थी.  कैसे होंगे ये सभी काम चुनाव नतीजों के बाद संविधान संशोधन के लिए एक परिषद का गठन होगा. इसमें संसदीय चुनाव में जीते सदस्य शामिल होंगे. सांसद एक ही समय में कॉन्स्टिट्यूशनल रिफॉर्म काउंसिल के मेंबर के तौर पर भी काम करेंगे. ये परिषद नेशनल चार्टर और रेफरेंडम के नतीजों के आधार पर अपने पहले सेशन की तारीख से 180 दिनों के अंदर रिफॉर्म पूरे करेगी. 

उज्जैन बाइपास को मंजूरी, मध्य प्रदेश के रेल नेटवर्क को मिलेगा नया विस्तार

भोपाल मध्य प्रदेश में रेल नेटवर्क को मजबूत करने और यात्रियों को बेहतर सुविधा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय रेलवे ने राज्य में कई महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इन योजनाओं से न केवल ट्रेनों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि माल ढुलाई, क्षेत्रीय संपर्क और धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। उज्जैन बाइपास रेलवे लाइन को मंजूरी भारतीय रेलवे के अंतर्गत पश्चिमी रेलवे ने नईखेरी-चिंतामन गणेश को जोड़ने वाली 8.60 किलोमीटर लंबी उज्जैन बाईपास रेलवे लाइन को 189.04 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति दी है। यह परियोजना विशेष रूप से उज्जैन जंक्शन पर ट्रेनों के रिवर्सल की समस्या को समाप्त करेगी। अभी कई ट्रेनों को दिशा बदलने के लिए उज्जैन स्टेशन पर रुककर रिवर्सल करना पड़ता है, जिससे समय और परिचालन क्षमता दोनों प्रभावित होते हैं। बाईपास लाइन बनने से यह प्रक्रिया खत्म होगी और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी। सिंहस्थ 2028 और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा यह परियोजना वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन के दौरान बेहतर रेल प्रबंधन और निर्बाध संचालन सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होता है। बायपास लाइन बनने से तीर्थयात्रियों को सीधे और तेज रेल संपर्क मिलेगा। साथ ही महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच और सुगम होगी। पितृ पर्वत से उज्जैन बायपास तक नया फोरलेन, सिंहस्थ से पहले तैयार होगी इंदौर-उज्जैन की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बल रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं से मालगाड़ियों की आवाजाही भी अधिक व्यवस्थित होगी, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। यात्रा समय में कमी, समयपालन में सुधार और भीड़भाड़ में कमी जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।  इन स्वीकृतियों को मध्य प्रदेश के रेल ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है  बेहतर संपर्क और विश्वसनीय सेवा से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी।  

जनगणना से विकास की योजना बनती है, सीएम ने इस प्रक्रिया की अहमियत पर जोर दिया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में जनगणना – 2027 के प्रथम चरण के लिए आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा किआदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐतिहासिक जनगणना होने जा रही है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इसके क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश, देश के लिए आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा और भारत सरकार की अपेक्षाओं एवं उद्देश्यों की सफल पूर्ति करेगा।राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनगणना-2027 की प्रक्रिया पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। इसके आधार पर सरकार की योजनाएं बनती हैं, संसाधनों का वितरण तय होता है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तैयार होती है। आज जब भारत विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला राष्ट्र है, तब यह जनगणना केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक महत्व की भी है। जनगणना का कार्य केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला सबसे व्यापक और निर्णायक अभियान है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल जनगणना कराने का ऐतिहासिल फैसला लिया है। देश में आखिरी बार 1931 में सामाजिक स्तर की जनगणना की गई थी। उन्होंने जनगणना की प्रक्रिया में गांवों, मंजरों-टोलों के साथ-साथ बेचिराग गांवों की स्थिति के आंकलन की व्यवस्था करने की भी आवश्यकता बताई।  जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही विकसित होते हैं। इसलिए जनगणना केवल संख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है, यह राज्य की संवेदनशीलता, प्रशासन की विश्वसनीयता, प्रतिबद्धता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की चुनौतियां भिन्न हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाते हुए समयबद्ध रूप से जनगणना की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया की सफलता का केन्द्र मैदानी प्रशासनिक अधिकारी हैं। मुख्यमंत्री ने कलेक्टर और कमिश्नर्स से जनगणना कार्य को रणनीतिक नेतृत्व प्रदान करते हुए जनगणना के सभी उद्देश्यों की समयसीमा में पूर्ति करने का आव्हान किया। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में उपस्थित प्रदेश के सभी कमिश्नर-कलेक्टरों से कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से प्रारंभ होकर 6 मार्च तक चलेगा। उन्होंने आगामी महाशिवरात्रि और होली जैसे त्योहारों के दृष्टिगत शांति समितियों के साथ बैठक कर अन्य आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  भावांतर योजना के बेहतर क्रियान्वयन की अधिकारियों को दी बधाई  मुख्यमंत्री ने भावांतर योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सभी अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जी-रामजी की योजना क्रियान्वयन के लिए बेहतर प्रबंध किए जाएं। राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में घोषित किया है। किसानों से जुड़ी सभी योजनाओं और कार्यों के लिए उचित प्रबंध किए जाएं। ग्रीष्मकालीन फसलों में राज्य सरकार उड़द और मूंगफली को प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है। मक्का की फसलों से भी किसान लाभान्वित हो रहे हैं। नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने में विभिन्न जिले स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रखें। प्रदेश में दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए कार्य किए जाएं। मुख्यमंत्री ने  खनिज, पंजीयन, आबकारी के अंतर्गत राजस्व संग्रहण लक्ष्यों को प्राप्त करना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। पहला चरण 1 मई से शुरू होगा  बता दें देश की जनगणना 2027 का पहला चरण, जिसे हाउसलिस्टिंग (मकान सूचीकरण) और आवास जनगणना कहा जाता है, 1 मई 2026 से शुरू होगी। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा। इस चरण में 30 दिनों की अवधि में घरों की स्थिति और सुविधाओं की गणना की जाएगी। इसके बाद जगणना का दूसरा चरण 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा।  

सिविलियन ड्रोन क्षेत्र में भारत पिछड़ा, MP में क्रांति के बावजूद रुचि नहीं, ग्लोबल रैंक 13वीं

भोपाल  मध्यप्रदेश को ‘ड्रोन हब’ बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने ‘एमपी ड्रोन संवर्धन एवं उपयोग नीति-2025’ लागू कर भारी-भरकम सब्सिडी के द्वार तो खोल दिए हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। केन्द्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार देश के शीर्ष राज्यों के मुकाबले मध्यप्रदेश में ड्रोन रजिस्ट्रेशन की रफ्तार बेहद सुस्त है। जहां महाराष्ट्र 8,210 ड्रोन के साथ देश में टॉप पर है, वहीं मध्यप्रदेश में यह संख्या महज 480 पर सिमटी हुई है। नीति में ‘बम्पर ऑफर’, पर रुझान कम राज्य सरकार ने अपनी नई पॉलिसी में निवेशकों के लिए रेड कार्पेट बिछाया है। नीति के तहत ड्रोन निर्माण के लिए 40% तक की कैपिटल सब्सिडी (अधिकतम 30 करोड़ रुपए तक) और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए 2 करोड़ रुपए तक के अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद, पंजीकरण के मामले में मध्यप्रदेश देशभर में 13वें स्थान पर पिछड़ गया है। यहां तक कि हरियाणा (2,179) और आंध्र प्रदेश (1,876) जैसे राज्य भी हमसे कहीं आगे निकल चुके हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु से कोसों पीछे हम सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल 38,475 ड्रोन रजिस्टर्ड हैं। इसमें मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 2% भी नहीं है। महाराष्ट्र: 8,210 (नंबर 1) तमिलनाडु: 5,878 (नंबर 2) तेलंगाना: 3,657 (नंबर 3) मध्य प्रदेश: 480 (नंबर 13) किसानों और युवाओं के लिए बड़े वादे, पर रजिस्ट्रेशन का ‘पेच’ सरकार का दावा है कि ड्रोन नीति से कृषि क्षेत्र में क्रांति आएगी और 8,000 नए रोजगार पैदा होंगे। ‘नमो ड्रोन दीदी’ और ‘सीखो-कमाओ योजना’ के जरिए ट्रेनिंग भी दी जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और रिमोट पायलट लाइसेंस को लेकर जागरूकता की कमी के कारण लोग आधिकारिक पंजीकरण (UIN) कराने से कतरा रहे हैं। ड्रोन पॉलिसी 2025 की 3 बड़ी बातें: भारी सब्सिडी: नए निवेश पर 40% सब्सिडी और लीज रेंट पर 25% की छूट। पेटेंट में मदद: घरेलू पेटेंट के लिए 5 लाख और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता। ट्रेनिंग इंसेंटिव: ड्रोन ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं को 8,000 रुपए प्रति माह का स्टाइपेंड। वजन के आधार पर होता है ड्रोन का रजिस्ट्रेशन ‘ड्रोन नियम 2021’ के तहत भारत में ड्रोन का वर्गीकरण और पंजीकरण उनके वजन (Weight) के आधार पर किया जाता है। क्या अन्य प्रकार के ड्रोन भी रजिस्टर्ड होते हैं? इसके संबंध में जानकारी नीचे दी गई है: सैन्य ड्रोन (Military Drones): ड्रोन नियम 2021 स्पष्ट रूप से उन ड्रोन पर लागू नहीं होते जो भारत की नौसेना, थल सेना या वायु सेना के स्वामित्व में हैं या उनके द्वारा उपयोग किए जाते हैं। इनके लिए सैन्य प्रोटोकॉल के तहत अलग व्यवस्था होती है। शोध और विकास (R&D): अनुसंधान, विकास और परीक्षण के उद्देश्य से उपयोग किए जाने वाले ड्रोन को ‘टाइप सर्टिफिकेट’, ‘विशिष्ट पहचान संख्या’ (UIN) और ‘रिमोट पायलट लाइसेंस’ की आवश्यकता से छूट दी गई है, बशर्ते वे निर्धारित ग्रीन जोन में संचालित हों। प्रतिबंधित वस्तुएं: ड्रोन नियमों के तहत हथियारों, गोला-बारूद या किसी भी प्रकार के खतरनाक सामान की ढुलाई पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

मुख्यमंत्री विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल

रायपुर. मुख्यमंत्री विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वंदे मातरम के नए गायन संस्करण का पेन ड्राइव लॉन्च किया।         मुख्यमंत्री  साय ने सभी को विश्व रेडियो दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए आकाशवाणी रायपुर और यूनेस्को को इस खास आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का विषय ‘रेडियो और एआई’ अत्यंत सामयिक और उपयोगी है। सूचना क्रांति के इस युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग सभी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में एआई के माध्यम से रेडियो को और अधिक जनोपयोगी बनाने पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सही समय पर सही जानकारी नागरिकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसमें रेडियो की भूमिका शुरू से ही अत्यंत प्रभावी रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आकाशवाणी देश का सबसे भरोसेमंद समाचार प्रसारक है। निजी चैनलों के बीच तेज़ी से खबरें देने की प्रतिस्पर्धा के बावजूद आकाशवाणी ने अपनी विश्वसनीय, संतुलित और जनहितकारी सूचना परंपरा को बनाए रखा है।              मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में यह सूचना, शिक्षा और स्वस्थ मनोरंजन का सशक्त माध्यम है। उन्होंने रेडियो से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि जब दूरस्थ गांवों तक किसी अन्य माध्यम की पहुंच नहीं थी, तब रेडियो ही देश-दुनिया से जुड़ने का एकमात्र माध्यम था। किसानों और ग्रामीण अंचलों के लिए आकाशवाणी आज भी विशेष भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ जैसे लोकप्रिय कार्यक्रम के लिए रेडियो का चयन इसकी व्यापक पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आकाशवाणी के छह स्टेशन संचालित हैं तथा रायपुर से विविध भारती सेवा प्रसारित हो रही है।    मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘रेडियो और एआई’ संचार के क्षेत्र में नई क्रांति ला सकता है। एआई की मदद से कंटेंट को अधिक प्रभावी, सटीक और त्वरित बनाया जा सकता है। आपातकालीन सूचनाएं, मौसम पूर्वानुमान, कृषि सलाह और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी अधिक तेजी और सटीकता से प्रसारित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ डिजिटल भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। नवा रायपुर में देश का पहला एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और तकनीकी सुरक्षा के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे। नई औद्योगिक नीति के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है और डिजिटल तकनीक के जरिए अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आकाशवाणी के माध्यम से छत्तीसगढ़ी, गोंडी और हल्बी भाषाओं में प्रसारण से स्थानीय जुड़ाव मजबूत हुआ है और श्रोताओं की रुचि में वृद्धि हुई है।  अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि रेडियो की विश्वसनीयता और एआई की गति मिलकर जनसेवा को और अधिक सशक्त बनाएंगी और विकसित भारत के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प सभी के सहयोग से अवश्य साकार होगा।            कार्यक्रम में यूनेस्को के रीजनल एडवाइजर ऑफ कम्युनिकेशन एंड इनफॉर्मेशन सु हज़्ज़ाज़ मा’अली ने सभी को विश्व रेडियो दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि रेडियो पूरी दुनिया में सबसे अधिक पहुंच रखता है और सबसे अधिक भरोसे वाला माध्यम है। रेडियो ने कठिन समय में भी अपनी विश्वसनीयता बनाए रखते हुए दुनिया को सही सूचनाएं प्रदान की। सु अली ने कहा कि एआई के माध्यम से रेडियो को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और इस दिशा में ठोस प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आकाशवाणी रायपुर छत्तीसगढ़ी और हिंदी भाषा में पूरे प्रदेश विशेषकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों तक अपनी सेवाएं दे रहा है। सु अली ने कहा कि यूनेस्को रेडियो के विस्तार के लिए आकाशवाणी के साथ मिलकर नवाचार और तकनीकी पहलुओं पर लगातार सहयोग करेगा।              इस अवसर पर छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष  शशांक शर्मा, आकाशवाणी के महानिदेशक  राजीव कुमार जैन, उप महानिदेशक  व्ही. राजेश्वर, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक संपन्न

रायपुर. मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक संपन्न मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की 16वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में बोर्ड की 15वीं बैठक के पालन प्रतिवेदन तथा नवीन एजेंडों पर चर्चा उपरांत प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के निर्णय हेतु प्रेषित करने पर सहमति बनी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वन्यजीव हमारी प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं और उनके संरक्षण–संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सतत निगरानी, अवैध गतिविधियों पर रोक तथा उनकी सुरक्षा के लिए जनभागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही, वनों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाने और युवाओं की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री ने न्यूनतम हस्तक्षेप के सिद्धांत को अपनाते हुए अत्यावश्यक कार्यों को ही वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में बिना किसी छेड़छाड़ के पूर्ण करने पर बल दिया। उन्होंने सह-अस्तित्व के सिद्धांतों के अनुरूप सभी गतिविधियों के संचालन की बात कही।          बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (Standing Committee of State Board for Wildlife) के गठन को मंजूरी दी गई। स्थायी समिति का गठन वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री की अध्यक्षता में किया जाएगा, जिसमें 11 अन्य सदस्य शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि वन्य प्राणियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होने वाले कार्यों के प्रस्तावों पर राज्य वन्यजीव बोर्ड का अभिमत अनिवार्य होता है। बोर्ड की बैठकों के बीच अधिक अंतराल के कारण प्रस्तावों की स्वीकृति में विलंब की स्थिति बनती है। स्थायी समिति के गठन से वैधानिक मंजूरियों के त्वरित निपटान तथा वन्यजीव प्रबंधन से संबंधित मुद्दों के शीघ्र निराकरण में सहायता मिलेगी।     बैठक में उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व अंतर्गत बरबांधा जलाशय में बांध एवं नहरों के जीर्णोद्धार एवं नवीन कार्य, पीएम जनमन योजना के अंतर्गत कबीरधाम जिले के कवर्धा वनमंडल में पंडरीपानी मेन रोड से सौरु तक मार्ग मजबूतीकरण, गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने से संबंधित 6 प्रस्ताव, सेमरसोत अभ्यारण्य में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने, उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में सीआरपीएफ कैंप की स्थापना तथा उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के प्रस्तावों का अनुमोदन कर उन्हें राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्वीकृति हेतु प्रेषित करने पर सहमति दी गई।               कार्यक्रम में वन मंत्री  केदार कश्यप, विधायक  धर्मजीत सिंह, मुख्य सचिव  विकास शील, अपर मुख्य सचिव मती ऋचा शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  व्ही. निवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव)  अरुण कुमार पाण्डेय सहित बोर्ड के अन्य सदस्य एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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