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T20 वर्ल्ड कप विवाद: PCB को UAE ने दिया कड़ा संदेश, ‘एहसान ना भूले पाकिस्तान’

  दुबई आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले हाईवोल्टेज मुकाबले पर अनिश्चितता लगातार बढ़ती जा रही है. श्रीलंका क्रिकेट (SLC) के बाद अब एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने भी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को पत्र लिखकर 15 फरवरी को प्रस्तावित भारत-PAK मैच से दूरी बनाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है. इस बीच आईसीसी भी लगातार बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकालने की कोशिश में जुटी है, ताकि टूर्नामेंट का सबसे बड़ा मुकाबला संकट में ना पड़े. RevSportz की रिपोर्ट के अनुसार एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड ने अपने पत्र में पाकिस्तान को ‘क्रिकेट परिवार का अहम सदस्य’ बताते हुए कहा कि उसने मुश्किल समय में पाकिस्तान को अपने मैदान उपलब्ध कराए और कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबले आयोजित करने में मदद की. बोर्ड ने याद दिलाया कि पाकिस्तान क्रिकेट को वैश्विक मंच पर बनाए रखने में यूएई की भूमिका अहम रही है. ऐसे में भारत के खिलाफ मैच का बायकॉट ना केवल क्रिकेट के लिए नुकसानदेह होगा, बल्कि एसोसिएट देशों की वित्तीय स्थिति पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है. एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड ने अपने संदेश में कहा कि टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में किसी भी बड़े मुकाबले का रद्द होना प्रसारण अधिकार, स्पॉन्सरशिप और वैश्विक दर्शकों पर सीधा असर डालता है, जिससे पूरे क्रिकेट इकोसिस्टम को नुकसान हो सकता है. इसलिए सभी पक्षों को मिलकर व्यावहारिक और स्वीकार्य समाधान निकालना चाहिए. श्रीलंका ने भी दी थी कड़ी चेतावनी इससे पहले श्रीलंका क्रिकेट ने भी पीसीबी से अपना रुख बदलने की अपील की थी और संभावित आर्थिक नुकसान का हवाला दिया था. अब यूएई के सामने आने से यह साफ है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समुदाय पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है कि वह टूर्नामेंट की गरिमा बनाए रखे और विवाद का समाधान बातचीत से निकाले. आईसीसी इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है. आईसीसी के अधिकारियों ने PCB साथ कई दौर की बातचीत की है, ताकि किसी भी तरह से टूर्नामेंट के शेड्यूल और व्यावसायिक संरचना पर असर न पड़े. आईसीसी के लिए भारत-पाकिस्तान मैच बेहद अहम है, क्योंकि यह मुकाबला प्रसारण राजस्व, विज्ञापन और वैश्विक दर्शकों के लिहाज से सबसे बड़ा आकर्षण माना जाता है. उधर क्रिकबज की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच खेलने के लिए आईसीसी के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी है. पहली मांग यह है कि आईसीसी से मिलने वाली वार्षिक फंडिंग में बढ़ोतरी. वहीं भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज की बहाली के लिए आईसीसी प्रयास करे. साथ ही मैच के बाद हैंडशेक जैसी खेल भावना से जुड़ी परंपराओं का पालन किया जाए. रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान सरकार से परामर्श के बाद ही पीसीबी कोई अंतिम निर्णय लेगा. यही कारण है कि अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पाकिस्तान अपने रुख में नरमी दिखाएगा या फिर वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा मुकाबला विवादों में ही घिरा रहेगा. भारत-पाकिस्तान मैच को दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट मुकाबला माना जाता है.  ऐसे में अगर यह मैच नहीं होता है तो इसका असर सिर्फ टूर्नामेंट ही नहीं, बल्कि पूरे क्रिकेट कैलेंडर और वैश्विक क्रिकेट अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्रिकेट की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता मैदान पर दिखेगी या इतिहास में एक बड़ी अनुपस्थिति के रूप में दर्ज होगी.

Census 2027: 33 सवालों में घर की छत, रसोई, इंटरनेट और अन्य सुविधाओं की होगी गिनती

रायपुर देश की अगली जनगणना सिर्फ जनसंख्या गिनने का अभियान नहीं रह जाएगी, बल्कि यह लोगों के रहन-सहन, सुविधाओं और जीवन स्तर का पूरा सामाजिक एक्स-रे साबित होने जा रही है। जनगणना-2027 के मकान सूचीकरण चरण में हर घर से 33 बिंदुओं पर जानकारी ली जाएगी। इन सवालों से यह साफ होगा कि देश में कौन पक्के घर में रह रहा है, किसके पास शौचालय है, कौन गैस पर खाना बना रहा है और किस घर तक इंटरनेट पहुंच चुका है। सरकारी तैयारियों के मुताबिक इस बार जनगणना कर्मी टैबलेट आधारित डिजिटल सिस्टम से डाटा दर्ज करेंगे, ताकि योजनाएं कागजी नहीं, जमीनी हकीकत पर बन सकें। सबसे पहले घर की पहचान और बनावट जनगणना टीम घर पहुंचते ही भवन नंबर और जनगणना मकान नंबर दर्ज करेगी। इसके बाद मकान की बुनियादी संरचना पर सवाल होंगे। फर्श किस सामग्री की है, दीवारें कच्ची हैं या पक्की, छत टीन, कंक्रीट या अन्य किस्म की है। मकान रिहायशी है, दुकान है या किसी और उपयोग में यह भी दर्ज होगा। मकान की हालत (अच्छी, रहने लायक या जर्जर) भी लिखी जाएगी। परिवार मुख्य रूप से कौन-सा अनाज खाता है गेहूं, चावल, मक्का या अन्य, यह भी जनगणना में शामिल रहेगा। अंत में एक मोबाइल नंबर लिया जाएगा, जिसका उपयोग केवल जनगणना से जुड़ी आधिकारिक सूचना पहुंचने के लिए किया जाएगा। यही जानकारी भविष्य की आवास योजनाओं की दिशा तय करेगी। परिवार की पूरी प्रोफाइल बनेगी घर के बाद बारी परिवार की होगी। परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले लोगों की कुल संख्या, परिवार क्रमांक और परिवार के मुखिया का नाम दर्ज किया जाएगा। मुखिया का लिंग और यह भी कि वह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य वर्ग से है, यह पूछा जाएगा। घर में रहने वाले विवाहित दंपत्तियों की संख्या भी दर्ज होगी, जिससे पारिवारिक संरचना का सामाजिक विश्लेषण हो सके। कमरे कितने, घर किसका मकान का स्वामित्व किसके पास है खुद का, किराये का या अन्य, यह महत्वपूर्ण सवाल रहेगा। परिवार के पास रहने के लिए कुल कितने कमरे हैं, यह भी पूछा जाएगा। यह डाटा भीड़भाड़ और आवासीय घनत्व की वास्तविक स्थिति बताएगा। पानी, बिजली, शौचालय की असली तस्वीर पीने का पानी किस स्रोत से आता है, पानी घर में उपलब्ध है या बाहर से लाना पड़ता है। रोशनी का मुख्य साधन क्या है जैसे बिजली, सोलर या अन्य। शौचालय है या नहीं, है तो किस प्रकार का। गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था, साथ ही यह भी दर्ज होगा कि घर में स्नानगृह है या नहीं। रसोई का धुआं या गैस की लौ जनगणना कर्मी यह भी पूछेंगे कि घर में अलग रसोई घर है या नहीं। एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन है या नहीं और खाना पकाने में किस ईंधन का उपयोग होता है, लकड़ी, गोबर, कोयला या गैस। यह जानकारी उज्ज्वला जैसी योजनाओं के असर का वास्तविक मूल्यांकन करेगी। इलेक्ट्रानिक और डिजिटल पहुंच भी होगी दर्ज अब जनगणना में यह भी गिना जाएगा कि घर सूचना और तकनीक से कितना जुड़ा है। घर में रेडियो या ट्रांजिस्टर, टेलीविजन, इंटरनेट सुविधा, कंप्यूटर या लैपटाप है या नहीं, यह पूछा जाएगा। टेलीफोन, मोबाइल या स्मार्ट फोन की उपलब्धता भी दर्ज होगी। यह डाटा बताएगा कि डिजिटल इंडिया की योजनाएं गांव और शहर तक कितनी पहुंची हैं। साइकिल से कार तक की गिनती परिवार के पास साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, मोपेड है या नहीं। कार, जीप या वैन जैसी चार पहिया गाड़ियों की जानकारी भी दर्ज होगी। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति का एक बड़ा संकेत मिलेगा। अहम हैं ये 33 सवाल विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ डाटा संग्रह नहीं, बल्कि आने वाले दशक की नीतियों की नींव है। आवास, पेयजल, स्वच्छता, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और सामाजिक कल्याण की योजनाएं इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तय होंगी। इस बार जनगणना का मकसद सिर्फ कितने लोग है यह जानना नहीं, बल्कि यह समझना है कि लोग कैसे जी रहे हैं। जानकारी अनुसार जनगणना-2027 का आयोजन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी। यह प्रक्रिया अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चयनित 30 दिनों में पूरी की जाएगी। पहले चरण के पूरा होने के बाद इससे संबंधित अधिसूचना राज्य राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी। सीमा स्थिरीकरण लागू सरकार की सीमा स्थिरीकरण अधिसूचना के तहत 31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक राज्य में किसी भी ग्रामीण या शहरी प्रशासनिक इकाई की सीमा या क्षेत्राधिकार में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। डिजिटल जनगणना की पूरी तैयारी जनगणना 2027 इस बार पूरी तरह डिजिटल और तकनीक आधारित होगी। पहले चरण में कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, जो मकानों की स्थिति, उनके उपयोग, उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं, घरेलू परिसंपत्तियों और परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज से जुड़े होंगे। केंद्र सरकार ने इन प्रश्नों को 23 जनवरी 2026 को विधिवत जारी कर दिया है। इस चरण की नोडल जिम्मेदारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को सौंपी गई है। जनगणना में इस बार शुरुआत से ही जियो-स्पैशियल डेटा और एनालिटिक्स के उपयोग को अनिवार्य किया गया है, जिससे हर मकान का डिजिटल मैपिंग आधारित रिकॉर्ड तैयार होगा। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार प्रक्रिया दो चरणों में होगी। प्रथम चरण (अप्रैल–सितंबर 2026) में मकान सूचीकरण और आवास संबंधी जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि द्वितीय चरण (फरवरी 2027) में जनसंख्या की वास्तविक गणना होगी। देशभर के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि तय की गई है।

बोले, पिछले नौ वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में हुई ऐतिहासिक वृद्धि, वर्ष 2017 के 36 से बढ़कर 2025 में 81 हुए मेडिकल कॉलेज

प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेजों से बढ़े डॉक्टर्स, चिकित्सा शिक्षा को मिला विस्तार वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में रखी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, प्रस्तुत किया मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का खाका  बोले, पिछले नौ वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में हुई ऐतिहासिक वृद्धि, वर्ष 2017 के 36 से बढ़कर 2025 में 81 हुए मेडिकल कॉलेज ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच हुई मजबूत, 54 जनपदों में 170 मोबाइल मेडिकल यूनिट से 2.05 करोड़ मरीजों का हुआ उपचार लखनऊ वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर सभी का ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, गुणवत्ता और क्षमता बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध ढंग से किए गए प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। राजकीय और निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या में हुई ऐतिहासिक वृद्धि, ग्रामीण क्षेत्रों तक चिकित्सा सेवाओं की पहुंच और आधुनिक तकनीक आधारित टेली मेडिसिन सेवाएं इसकी प्रमुख मिसाल हैं। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज की संख्या में बढ़ोत्तरी से स्वास्थ्य सेवाएं हुईं बेहतर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2017 तक कुल 36 मेडिकल कॉलेज संचालित थे, जिनमें 15 राजकीय और 21 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल थे। पिछले कई वर्षों में प्रदेश सरकार ने मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को प्राथमिकता देते हुए कई नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की। वर्ष 2025 के अंत तक प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या बढ़कर 81 हो गई है। इनमें 45 राजकीय और 36 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या में इस निरंतर वृद्धि से न केवल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बेहतर हुई है, बल्कि हर वर्ष बड़ी संख्या में नए डॉक्टरों को चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर भी मिल रहा है। इससे भविष्य में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है। 22 लाख से अधिक लोगों ने ई संजीवनी टेली परामर्श सेवा का उठाया लाभ वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश में मेडिकल और डेंटल शिक्षा के पाठ्यक्रमों तथा परीक्षाओं के स्तर में एकरूपता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अटल बिहारी वाजपेयी राज्य चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। प्रदेश के ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं उनके द्वार तक पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार ने मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा की शुरुआत की है। वर्तमान में प्रदेश के 54 जनपदों में कुल 170 मोबाइल मेडिकल यूनिट का संचालन किया जा रहा है। इन मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के जरिए अब तक कुल 2.05 करोड़ रोगियों का उपचार किया जा चुका है। यह सेवा उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है, जिन्हें दूर-दराज के क्षेत्रों से अस्पतालों तक पहुंचने में कठिनाई होती है। प्रदेश में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए प्रदेश में टेली मेडिसिन सेवाओं का भी विस्तार किया गया है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 11 मई 2021 से ई-संजीवनी टेली परामर्श सेवाएं प्रारंभ की गईं। वर्तमान में प्रदेश के 26 मेडिकल कॉलेजों में यह सेवा संचालित हैं, जिसके माध्यम से अब तक 22,53,320 ओपीडी परामर्श प्रदान किए जा चुके हैं। इससे मरीजों को घर बैठे विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेने की सुविधा मिली है।

कुल बजट का 6.1 प्रतिशत स्वास्थ्य क्षेत्र को हुआ आवंटित, राष्ट्रीय औसत से अधिक निवेश का दावा

आर्थिक सर्वे 2025-26:  प्रदेश में मजबूत हो रहा मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, आमजन पर कम हुआ स्वास्थ्य खर्च का बोझ – वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में रखी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, प्रस्तुत किया स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों का ब्यौरा – स्वास्थ्य बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, 46,728.48 करोड़ रुपये का अब तक का सर्वाधिक आवंटन – कुल बजट का 6.1 प्रतिशत स्वास्थ्य क्षेत्र को हुआ आवंटित, राष्ट्रीय औसत से अधिक निवेश का दावा – सरकारी निवेश बढ़ने से आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर में आई कमी, सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में  हुआ सुधार लखनऊ वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी। पटल पर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में किए गए प्रयासों और उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। आर्थिक सर्वे के आंकड़े के अनुसार, प्रदेश सरकार चिकित्सा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के विस्तार और आमजन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वर्ष 2025-26 में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के लिए आवंटित किया गया 46,728.48 करोड़ का बजट वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 46,728.48 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया। यह अब तक का सर्वाधिक आवंटन है, जिससे यह साफ है कि प्रदेश सरकार ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। बजट में अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, चिकित्सा शिक्षा संस्थानों, स्वास्थ्य अवसंरचना और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित की गई। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की “स्टेट फाइनेंस: ए स्टडी ऑफ बजट ऑफ 2025-26” रिपोर्ट का हवाला देते हुए आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य बजट कुल बजट का 6.1 प्रतिशत रहा है, जो राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। यह तथ्य दर्शाता है कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अन्य राज्यों की तुलना में अधिक निवेश कर रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर प्रकाशित राष्ट्रीय लेखा अनुमानों और अद्यतन रिपोर्टों के अनुसार, प्रदेश के कुल स्वास्थ्य व्यय में सरकार द्वारा वहन किए जा रहे खर्च में निरंतर वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही आम लोगों के आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर में कमी दर्ज की गई है। आर्थिक सर्वे के अनुसार यह बदलाव इस बात का संकेत है कि सरकारी निवेश बढ़ने से नागरिकों पर स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक बोझ कम हो रहा है। अस्पताल, क्लीनिक, टीकाकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों और स्वास्थ्य अवसंरचना में सुधार के लिए अधिक बजट आवंटन किया गया है, जिससे सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है। वर्ष 2024-25 में गैर-संस्थागत प्रसव की संख्या घटकर 1.66 लाख पहुंची आर्थिक सर्वे में यह भी बताया गया है कि प्रदेश में राज्य सरकार के सुधारात्मक प्रयासों और जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी योजनाओं के प्रभाव से संस्थागत प्रसव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम की सक्रिय भूमिका से गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा। वर्ष 2021-22 में प्रदेश में कुल 34.74 लाख संस्थागत प्रसव हुए थे, जो वर्ष 2024-25 में 18.02 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 41 लाख तक पहुंच गए। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में कुल प्रसव का 96.12 प्रतिशत संस्थागत प्रसव रहा। इसके विपरीत गैर-संस्थागत प्रसव की संख्या वर्ष 2021-22 में 3.35 लाख थी, जो वर्ष 2024-25 में 50.44 प्रतिशत की कमी के साथ घटकर 1.66 लाख रह गई। यह उपलब्धि सरकार के सकारात्मक प्रयासों और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच का प्रत्यक्ष परिणाम मानी जा रही है। वर्ष 2024-25 में 100 प्रतिशत बच्चों को टीकाकरण किया गया प्रदेश में टीकाकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। आर्थिक सर्वे के अनुसार, प्रदेश के सभी जनपदों में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों पोलियो, टीबी, गलाघोंटू, टिटनेस, काली खांसी, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप-बी (हिब), हेपेटाइटिस-बी, निमोनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस (जे.ई.), खसरा, रूबेला और डायरिया से बचाव के लिए नियमित रूप से निःशुल्क टीकाकरण किया जा रहा है। साथ ही गर्भवती महिलाओं को टिटनेस से बचाव के लिए टीके लगाए जा रहे हैं। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत एचएमआईएस (HMIS)डाटा के अनुसार वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 100 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण किया गया। वहीं वर्ष 2025-26 में सितंबर 2025 तक 28.62 लाख बच्चे (98 प्रतिशत) पूर्ण रूप से प्रतिरक्षित किए जा चुके हैं। आर्थिक सर्वे में इसे जन-जागरूकता अभियानों, सेवा प्रदायगी में सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण का सकारात्मक परिणाम बताया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में नवजात, शिशु और बाल मृत्यु दर को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश में सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट (SNCU),न्यूट्रीशन रिहैबिलिटेशन सेंटर (पोषण पुनर्वास केंद्र), गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल कार्यक्रम (HBNC)और कंगारू मदर केयर (KMC)जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कमजोर और कुपोषित बच्चों को विशेष देखभाल प्रदान की जा रही है, जिससे बाल स्वास्थ्य संकेतकों में निरंतर सुधार हो रहा है।

67.50 लाख वृद्धजनों तथा 22.89 लाख दिव्यागजनों को पेंशन, 17.48 लाख छात्रों को मिली छात्रवृत्ति

सामाजिक सुरक्षा और कल्याण पर विशेष फोकस, वर्ष 2025-26 के लिए 34,504 करोड़ रुपये प्रस्तावित ‘सबका साथ- सबका विकास- सबका विश्वास, सबका प्रयास’ अभियान को मिली गति, वंचित और पिछड़ों को मिला संबल 67.50 लाख वृद्धजनों तथा 22.89 लाख दिव्यागजनों को पेंशन, 17.48 लाख छात्रों को मिली छात्रवृत्ति लखनऊ  उत्तर प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा तथा कल्याण के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 34,504 करोड़ रुपये व्यय प्रस्तावित है। वित्त वर्ष 2024-25 में इसके लिए 30,530 करोड़ रुपये का खर्च किए गए थे। वहीं 2017-18 में सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के लिए केवल 18,674 करोड़ व्यय किए गए थे। पिछले 9 वर्षों में ये वृद्धि दिखाती है कि वर्तमान सरकार ‘सबका साथ- सबका विकास- सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। विधानमंडल में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को बजट सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार का वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करते हुए ये जानकारी दी।  वृद्धजनों और दिव्यांगों को आर्थिक संबल प्रदेश सरकार का वृद्धजनों और दिव्यांगों के आर्थिक उन्नयन पर विशेष फोकस रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि वर्ष 2025-26 में दिसंबर, 2025 तक 67.50 लाख वृद्धजनों तथा जनवरी, 2026 तक 22.89 लाख दिव्यांगजनों को पेंशन से लाभान्वित किया गया है। वर्ष 2024-25 में 7363.55 करोड़ रुपये से 60.99 लाख वृद्धजनों को लाभान्वित किया गया जो 2017-18 के मुकाबले 62.79 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।  छात्रवृत्ति योजना बनी 17.48 लाख निर्धन छात्रों का सहारा  छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से वर्तमान सरकार गरीब और पिछड़े छात्रों की शिक्षा के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध करा रही है। वर्ष 2025-26 में दिसंबर, 2025 तक पूर्वदशम एव दशमोत्तर छात्रवृत्ति से अनु. जा.वर्ग के 3.42 लाख, पिछड़ावर्ग के 12.76 लाख तथा सामान्य वर्ग के 1.30 लाख छात्र-छात्राओं को लाभान्वित किया गया है। वर्ष 2024-25 में पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति से अनु. जा. वर्ग के 14.98 लाख विद्यार्थियों को रु.636.34 करोड़, पिछडावर्ग के 29.94 लाख विद्यार्थियों को रु. 2454.32 करोड़ एवं सामान्य वर्ग के 8.78 लाख विद्यार्थियों को रु. 909.99 करोड़ व्यय कर लाभान्वित किया गया।  मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से 23,801 अभ्यर्थी प्रशिक्षित समीक्षा में कहा गया है कि वर्ष 2021-22 से आरम्भ मुख्यमंत्री अभ्युदय योजनान्तर्गत वर्ष 2024-25 में रु. 34.92 करोड़ व्यय कर 23,017 अभ्यर्थियों को लाभान्वित किया गया। वर्ष 2025-26 में (दिसंबर, 2025 की स्थिति) रु. 10.57 करोड़ व्यय कर 23,801 अभ्यर्थियों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से 26.81 लाख बेटियां लाभान्वित आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2024-25 में सामूहिक विवाह योजनान्तर्गत 95,466 कन्याओं के विवाह सम्पन्न हुए। 2017-18 के मुकाबले विवाहों की संख्या लगभग 5 गुना और व्यय 7 गुना बढ़ा है। जनवरी, 2026 तक कन्या सुमंगला से 26.81 लाख बालिकाएं लाभान्वित हुईं। 53,607 आश्रितों को 162.50 करोड़ की मदद बी.पी.एल. परिवार के कमाऊ मुखिया की मृत्यु होने पर राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत सरकार द्वारा 2017-18 में 86.26 हजार आश्रितों को आर्थिक सहायता प्रदान की गयी थी, वर्ष 2024-25 में लाभार्थियों की संख्या में 31.35% की वृद्धि हुई। साथ ही लाभार्थियों को वितरित धनराशि वर्ष 2017-18 में रु. 258.77 करोड़ थी, जो वर्ष 2024-25 में 14.53% बढ़कर रु. 296.36 करोड़ हो गयी। वर्ष 2025-26 में दिसंबर, 2025 तक 53,607 आश्रित व्यक्तियों को 162.50 करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की गयी।

पांच साल में विकसित बनेगा बस्तर

रायपुर. बस्तर पंडुम के विजेताओं को किया गया सम्मानित केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह ने कहा कि बस्तर भारत की संस्कृति का आभूषण है। बस्तर पण्डुम के माध्यम से यहां की संस्कृति और गौरवशाली परंपरा को छत्तीसगढ़ सरकार ने नए प्राण देने का काम किया। बस्तर पंडुम 2026 के सभी विजेताओं को केंद्रीय गृहमंत्री  शाह और मुख्यमंत्री  साय ने  सम्मानित किया। केंद्रीय गृहमंत्री ने बताया कि इसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले लोक कलाकारों को राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया जाएगा, जहां उन्हें अपनी कला का प्रदर्शन करने और सहभोज करने का अवसर भी मिलेगा। केंद्रीय गृहमंत्री  शाह ने जनजातीय कला एवं संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन तथा जनजातीय प्रकृति व परंपरा का उत्सव बस्तर पण्डुम के तीन दिवसीय संभाग स्तरीय आयोजन के समापन अवसर पर आज जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर संभाग के 07 जिले के 32 जनपद पंचायतों और 1885 ग्राम पंचायतों के 53 हजार से अधिक लोक कलाकारों ने 12 विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इन्हीं लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने का कार्य बस्तर पण्डुम 2026 के माध्यम से राज्य की सरकार द्वारा किया जा रहा है।   आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को पुनर्जीवित करने धरती आबा योजना        शाह ने कहा कि बस्तर जैसी संस्कृति विश्व के किसी देश में नहीं है और इसे प्रभु  राम के समय से संजोकर यहां के लोगों ने अक्षुण्ण बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने देश के 700 से अधिक जनजातियों की आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को पुनर्जीवित करने धरती आबा योजना और पीएम जनमन योजना जैसी अनेक योजनाएं लागू की।  शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारी लड़ाई किसी से नहीं बल्कि यहां की भोली-भाली आदिवासी जनता को सुरक्षा देना है। माओवाद उन्मूलन की समय सीमा अभी भी वही है। जवानों के अदम्य साहस और बहादुरी से 31 मार्च 2026 तक हो माओवाद को घुटने टेकने पड़ेंगे। उन्होंने प्रदेश में संचालित की जा रही नक्सल पुनर्वास नीति की सराहना करते हुए कहा कि पुनर्वास केंद्रों में उन्हें रोजगारमूलक और सृजनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है।  40 गांवों के स्कूलों में गोलियों की आवाज की जगह स्कूल की घंटियां सुनाई देती है केन्द्रीय गृहमंत्री ने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के तहत प्रदेश सरकार लगातार माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में रोडमैप तैयार कर सड़क, पुल पुलिया, मोबाईल टॉवर स्थापित करने के साथ-साथ राशन वितरण, शुद्ध पेयजल, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड बना रही है। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर संभाग के माओवाद प्रभावित गांवों में लाल आतंक के चलते विकास से कोसों दूर थे, वहां के 40 गांवों में स्कूल फिर से खोले गए। अब वहां गोलियों की आवाज की जगह स्कूल की घंटियां सुनाई देती हैं।   दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले में 02 लाख 75 हजार एकड़ जिले में सिंचाई के लिए 220 मेगावॉट बिजली उत्पादन का कार्य शीघ्र प्रारंभ    शाह ने मंच से जानकारी दी कि बस्तर जिले में 118 एकड़ में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किया जाएगा तथा पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले में 02 लाख 75 हजार एकड़ में सिंचाई के लिए 220 मेगावॉट बिजली उत्पादन का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। वहीं दूरस्थ अंचलों को मुख्यालयों से जोड़ने के लिए रेल परियोजनाओं और नदी जोड़ो परियोजना को विस्तार दिया जाएगा। बस्तर पंडुम एक आयोजन बस नहीं है, यह बस्तर की पहचान का उत्सव- मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने बस्तर पंडुम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि माता दंतेश्वरी से ही बस्तर की पहचान है। बस्तर पंडुम एक आयोजन बस नहीं है, बल्कि यह बस्तर की पहचान का उत्सव है। उन्होंने छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के प्रति गृह मंत्री  अमित शाह के स्नेह और लगाव के लिए आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली बार भी  शाह की मौजूदगी ने बस्तरवासियों का हौसला बढ़ाया था और आज फिर उनकी उपस्थिति ने कलाकारों और यहां के लोगों में नई ऊर्जा भर रही है। समृद्ध संस्कृति को देश- दुनिया के सामने लाने बस्तर पंडुम का आयोजन        साय ने कहा कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश- दुनिया के सामने लाने बस्तर पंडुम में भाग लेने वाले सभी कलाकारों, प्रतिभागियों को बधाईयां। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष 47 हजार कलाकारों ने बस्तर पंडुम में भाग लिया और इस वर्ष 54 हजार से अधिक कलाकारों ने इसमें हिस्सा लिया है और बस्तर की संस्कृति, खान-पान, वेशभूषा, स्थानीय साहित्य, लोकनृत्य, गीत, शिल्प, बस्तरिया पेय, औषधि चित्रकला, वाद्ययंत्र, नाटक की विद्या सहित 12 विद्याओं का प्रदर्शन कलाकारों के द्वारा किया गया। बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश-दुनिया के समक्ष प्रदर्शित करने और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का काम किया गया। बस्तर के विकास की चर्चा देश भर में मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बस्तर अब संभावनाओं की भूमि बन चुकी है। यह नए भारत का नया बस्तर है। प्रधानमंत्री जी के प्रयासों से बस्तर के विकास की चर्चा देश भर में हो रही है। उन्होंने कहा कि पहले बस्तर की चर्चा देश भर में माओवादी के नाम से होती थी, किन्तु अब बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और समृद्ध विरासत की चर्चा होने लगी है। बस्तर तरक्की की एक नई सुबह देखने को मिल रही है मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर की सुंदर धरती लंबे समय तक नक्सलवाद की पीड़ा से गुजरी है। गौर, माड़िया, मुरिया, भतरा, धुरवा, गोंड जैसे विभिन्न नृत्य की लय धीमी पड़ गई थी, मांदर की थाप खामोश हो गई थी, लेकिन आज बस्तर बदल रहा है। यहां तरक्की की एक नई सुबह देखने को मिल रही है।   साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है और मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करेंगे।  आत्म समर्पण नीति के तहत सम्मान के साथ पुनर्वास मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों ने घने जंगलों में, विपरीत परिस्थितियों में, अपनी जान की परवाह किए बिना नक्सलवाद पर कड़ा प्रहार कर रहे हैं। नियद नेल्ला … Read more

उत्तर प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र शुरू, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पहले दिन किया संबोधन

राज्यपाल अभिभाषण-Copy 2 उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है उत्तर प्रदेश: राज्यपाल लखनऊ विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने अभिभाषण में उत्तर प्रदेश के विकास की व्यापक और तथ्यपरक तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति से लेकर कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, गन्ना किसानों के भुगतान, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण, खनन सुधार, सार्वजनिक परिवहन, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, शहरी आवास और श्रमिक कल्याण तक सरकार की नीतियों और उनके ठोस परिणामों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया।  रोशनी, भरोसा और राहत राज्यपाल ने ऊर्जा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन दर्ज किया गया है। वर्तमान में नगरीय मुख्यालयों को 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 19 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ‘इंटेंसिव डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम’ के अंतर्गत अब तक 59.83 लाख स्मार्ट/इलेक्ट्रिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 37.45 लाख पुराने मीटरों का प्री-पेड में प्रतिस्थापन किया गया है। राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले नौ वर्षों में बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे उपभोक्ताओं को स्थायी राहत मिली है और ऊर्जा क्षेत्र में भरोसे का वातावरण मजबूत हुआ है। अन्नदाता की ताकत, प्रदेश की प्रगति राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2016–17 में 557.46 लाख मीट्रिक टन रहा खाद्यान्न उत्पादन 2023–24 में बढ़कर 670.80 लाख मीट्रिक टन हो गया, और 2024–25 में यह 737.40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा। कृषि क्षेत्र के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है, जो 2016–17 में ₹2.96 लाख करोड़ से बढ़कर वर्तमान में ₹6.95 लाख करोड़ हो गया है। यह 135 प्रतिशत वृद्धि के साथ लगभग 18 प्रतिशत वार्षिक विकास दर को दर्शाता है। बागवानी बना ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बागवानी क्षेत्र में भी प्रदेश ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। खेती का क्षेत्रफल 21.40 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 26 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि उत्पादन 3.80 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़कर 6 करोड़ मीट्रिक टन हो गया है। बागवानी उत्पादों के निर्यात में ₹400 करोड़ से बढ़कर ₹1,700 करोड़ तक की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इन उपलब्धियों का सीधा लाभ किसानों को मिला है, जिससे फलों और सब्जियों से किसानों की आय ₹41,000 करोड़ से बढ़कर ₹1,25,000 करोड़ तक पहुंच गई है। गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान, चीनी उद्योग को नई मजबूती राज्यपाल ने चीनी उद्योग और गन्ना किसानों को लेकर सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने गन्ना मूल्य भुगतान के क्षेत्र में अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक किसानों को ₹3,04,321 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है, जो 1995 से 2017 के बीच हुए कुल भुगतान ₹2,13,519 करोड़ से ₹90,802 करोड़ अधिक है। राज्यपाल ने बताया कि 2017 के बाद पिपराइच, मुंडेरवा और रामाला में तीन नई चीनी मिलों की स्थापना से प्रदेश की पेराई क्षमता में प्रतिदिन 1.25 लाख क्विंटल की वृद्धि हुई है। किसानों के हित में गन्ना मूल्य में ₹30 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, वहीं गन्ना उत्पादकता 72.38 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 84 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 59.75 करोड़ पौध किसानों तक पहुंचाई गईं तथा ₹76.88 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इन समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि चीनी उद्योग और गन्ना क्षेत्र से जुड़े 10 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। गो-कल्याण ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दी नई मजबूती राज्यपाल ने पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में गो-कल्याण को केवल संरक्षण नहीं, बल्कि स्थायी आजीविका के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश के 7,497 गो-आश्रय स्थलों में 12,38,547 निराश्रित गोवंश की देखभाल की जा रही है। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के अंतर्गत 1,81,418 गोवंश गो-पालकों को सुपुर्द किए गए हैं, जिससे 1,13,631 परिवारों को स्थायी आजीविका प्राप्त हुई है। गो-पालन को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रति पशु प्रतिदिन ₹50 की दर से सहायता राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जा रही है, जिसके अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक ₹1,484 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है। इन समन्वित प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ठोस आधार मिला है और पशुपालन आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी साधन बनकर उभरा है। जनभागीदारी से मजबूत हुआ पर्यावरण संरक्षण राज्यपाल ने वनों और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश की उल्लेखनीय उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक 242.13 करोड़ पौधों का रोपण किया जा चुका है, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश का वनावरण बढ़कर 9.96 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी अभियान न मानकर सामाजिक जनभागीदारी से जोड़ने की रणनीति ने उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित किया है। पौधरोपण, संरक्षण और संवर्धन के समन्वित प्रयासों से प्रदेश ने सतत विकास और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में ठोस प्रगति की है। पारदर्शी खनन से बढ़ा राजस्व राज्यपाल ने खनन क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक प्रदेश को ₹28,920 करोड़ का खनन राजस्व प्राप्त हुआ है, जबकि 2012–17 की अवधि में यह मात्र ₹7,712 करोड़ था। तकनीक-सक्षम निगरानी, ई-टेंडरिंग और पारदर्शी नीलामी व्यवस्था के चलते न केवल राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित हुआ है। -सार्वजनिक परिवहन को नई गति* उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने बताया कि निगम की 13,621 बसों ने 103.37 करोड़ किलोमीटर का संचालन किया, जिससे 37.10 करोड़ यात्रियों को सुरक्षित और सुलभ परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इस कुशल प्रबंधन के परिणामस्वरूप निगम ने ₹3,810.63 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो … Read more

भारत के अमेरिकी तेल आयात पर पीयूष गोयल का बयान:

 नई दिल्ली    भारत और अमेरिका में लंबे समय से अटकी ट्रेड डील (India-US Trade Deal) पर बात बन चुकी है और इसे लेकर फ्रेमवर्क भी जारी कर दिया गया है. इसके तहत भारत अमेरिका से तेल का आयात भी करेगा. इसके बाद ये सवाल उठने लगे थे कि क्या ट्रेड डील में ऐसी बाध्यता शामिल की गई है, जिसके चलते देश को US Crude Oil खरीदना होगा. इसे लेकर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal On US Oil Import) ने बड़ा बयान दिया है और ऐसी किसी भी बात से साफ इनकार करते हुए अमेरिकी तेल की खरीदारी को पूरी तरह से रणनीतिक फैसला करार दिया है. US Oil खरीद पर पर बड़ा बयान भारत-US के बीच व्यापार समझौते को लेकर Piyush Goyal ने कहा कि अमेरिका से ऊर्जा खरीदने से भारत को तेल के सीमित सप्लायर्स पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही उन्होंने दोहराया कि इसकी वास्तविक खरीदारी बायर्स और सप्लायर्स कंपनियों द्वारा स्वतंत्र रूप से ही की जाती है. गोयल ने जोर देते हुए कहा कि ये निर्णय वाणिज्यिक विचारों से प्रेरित हैं और भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) द्वारा निर्धारित नहीं हैं यानी इस समझौते में ऐसी कोई बाध्यता नहीं रखी गई है. गोयल बोले- ‘ये भारत के हित में…’ एएनआई को दिए एक इंटरव्यू के दौरान केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील का ढांचा यह अनिवार्य नहीं करता कि कौन क्या और कहां से खरीदेगा?, बल्कि यह सिर्फ व्यापार और अच्छी पहुंच के लिए एक आसान रास्ता मुहैया कराता है. Piyush Goyal  के मुताबिक, अमेरिका से कच्चा तेल (Crude Oil), एलएनजी (LNG) और एलपीजी (LPG) खरीदना भारत के अपने रणनीतिक हित में है, क्योंकि देश अपने ऊर्जा स्रोतों में लगातार विविधता ला रहा है.    US के साथ ट्रेड डील के ये फायदे इंटरव्यू के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि Trade Deal के तहक आज जब हमें हाई टैरिफ से काफी कम 18% Tariff मिला है, तो हमें अन्य विकासशील देशों पर वरीयता भी मिली है, जो आमतौर पर हमारे प्रतिस्पर्धी हैं. उन्होंने कहा कि ये डील तमाम सेक्टर्स को व्यापक मौके मुहैया कराएगा. इसके साथ ही हमारे युवाओं, बहनों, महिलाओं के लिए भी अपार अवसर मिलेंगे और साथ ही हमारे किसानों और मछुआरों के लिए भी ये अच्छा है.  वाणिज्य मंत्री ने कहा कि हमारे MSMEs तेज रफ्तार से बढ़ेंगे और वे अमेरिका को आवश्यक कई सामग्रियों के आपूर्तिकर्ता बनेंगे. ये समझौता हमारे कपड़ा क्षेत्र, हमारा जूता और चमड़ा क्षेत्र, हमारा खिलौना क्षेत्र, हैंडक्राफ्ट सेक्टर, ऑटो कंपोनेंट्स, फर्नीचर समेत अन्य के लिए असीमित संभावनाओं से भरा हुआ है, जैसा कि अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने भी कहा है.  दवाओं से डायमंड तक पर हटेगा टैरिफ! गौरतलब है कि अंतरिम व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह आने वाले समय में चुनिंदा भारतीय निर्यातों पर Reciprocal Tariff हटा देगा, जिसमें जेनेरिक दवाएं, जेम्स एंड ज्वेलरी, डायमंड और विमान के पुर्जे शामिल हैं. इसके साथ ही भारत से कुछ विमानों और विमान के पुर्जों पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े शुल्क भी हटाए जाएंगे. इस डील के तहत भारत भी अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर वैल्यू के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, आईटी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोयला खरीदेगा. 

SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: ममता बनर्जी को झटका, चीफ जस्टिस बोले—हर राज्य जिम्मेदारी निभाए

नई दिल्ली देश के कई राज्यों में चल रहे SIR के खिलाफ देश की शीर्ष अदालत में वकील बनकर पहुंचीं ममता बनर्जी को करारा झटका लगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने साफ कर दिया है कि SIR की प्रक्रिया में किसी तरह की रोक लगाने की मंजूरी नहीं दी जा सकती। इसमें कोई बाधा भी पैदा करने की परमिशन अदालत नहीं देगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि सभी राज्यों को इस बात को समझ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जो कुछ भी स्पष्टता चाहिए, वह सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी जाएगी।

किसानों के पक्ष में शिवराज का बयान, भारतीय मसालों के लिए नया व्यापारिक अवसर होगा तैयार

भोपाल  भारत-अमरीका ट्रेड डील पर डेयरी और कृषि उत्पादों को लेकर कई दिन से तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं। इसी बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में प्रेसवार्ता कर खेती-किसानी से जुड़े मामले पर बात रखी। कहा कि यह समझौता किसानों को पूरी तरह से सुरक्षित रखता है। भारतीय किसानों के कई कृषि उत्पादों को अमरीका में शून्य शुल्क पर निर्यात किया जाएगा, लेकिन अमरीकी किसानों के कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में यह छूट नहीं मिली है। भारत के कृषि और डेयरी के हित पूरी तरह से सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, अमरीका ने कृषि क्षेत्र के कई उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी कटौती की है। जो टैरिफ पहले 50 प्रतिशत तक था, उसे घटाकर शून्य कर दिया है। विदेशी कृषि उत्पादों को देना होगा टैरिफ शिवराज ने कहा कि हमारे मसालों को अमरीका में भी नया और बड़ा बाजार मिलेगा। भारत पहले से ही मसालों के वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति रखता है। दुनिया के करीब 200 स्थानों पर भारत मसाले और मसालों के उत्पाद निर्यात करता है। इस समझौते से मसालों और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात में तेजी आएगी।  अगर विदेशी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में आते हैं तो उन्हें टैरिफ देना होगा। हमारे किसानों को पूरी छूट प्राप्त है। यही इस डील की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा, मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल तेल, सुपारी, काजू, वनस्पति वैक्स, एवोकाडो, केला, अमरूद, आम, कीवी, पपीता, अनानास, मशरूम और कुछ अनाज में टैरिफ शून्य रहेगा। अमरीका के लिए नहीं खोले द्वार शिवराज ने कहा कि ऐसा कोई भी उत्पाद समझौते में शामिल नहीं है, जिससे हमारे किसानों को नुकसान हो। सभी संवेदनशील वस्तुओं को समझौते से बाहर रखा गया है। सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, पोल्ट्री, डेयरी, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, इथेनॉल और तंबाकू जैसे उत्पादों पर किसी भी तरह की टैरिफ छूट नहीं दी गई है। प्रमुख अनाज, प्रमुख फल और डेयरी उत्पादों के लिए अमरीका के लिए द्वार नहीं खोला गया है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी, विपक्ष ने बताए कारण

नई दिल्ली संसद का बजट सत्र 2026 अब तक काफी हंगामेदार रहा है. हर दिन सदन की कार्यवाही विपक्षी सांसदों के चलते स्थगित करनी पड़ रही है. आज सोमवार को भी लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई. वहीं, सूत्रों से जानकारी मिली है कि विपक्षी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है. सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष इसे बजट सेशन 2026 के दूसरे फेज में पेश करेगा, क्योंकि इसके लिए उसे 20 दिन का नोटिस देना होता है. वहीं, इस फैसले के लिए जो वजहें बताई गई हैं, उनमें सबसे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की इजाजत नहीं देना; दूसरा चेयर पर बैठे पीठासीन अधिकारी द्वारा महिला सांसदों का नाम लिया जाना; तीसरा कुछ ट्रेजरी बेंच सांसदों को हमेशा सदन में प्रिविलेज दिया जाना; और आखिरी जिस तरह से 8 विपक्षी सांसदों को पूरे सेशन के लिए सस्पेंड किया गया शामिल है. लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला तब हुआ जब विपक्ष ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में बोलने नहीं दिया गया. बता दें, पिछले हफ्ते, संसद के निचले सदन में उस समय नारेबाजी और हंगामा हुआ जब राहुल गांधी ने चीन के साथ 2020 के गतिरोध पर चर्चा करने के लिए पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की ‘अनपब्लिश्ड’ यादों का जिक्र किया. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने एक आदेश पारित किया था, जिसमें राहुल गांधी से ‘अनपब्लिश्ड’ लिटरेचर का हवाला न देने को कहा गया था और पढ़ने की अनुमति देने से मना कर दिया था. वहीं, 5 फरवरी को स्पीकर बिरला ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का आग्रह किया था, ताकि कोई भी अप्रिय घटना न हो, क्योंकि उन्हें जानकारी मिली थी कि कुछ कांग्रेसी सांसद सदन में पीएम मोदी की सीट तक आ सकते हैं और ‘ऐसी घटना कर सकते हैं जो पहले कभी नहीं हुई.’ आज सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही में कोई कानूनी काम नहीं हुआ, क्योंकि स्पीकर बिरला ने विपक्ष के भारत-US अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क पर चर्चा की मांग को लेकर नारेबाजी के बीच सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया, जिससे प्रश्नकाल में रुकावट आई. आज सदन की कार्यवाही शुरू होने के करीब सात मिनट बाद ही स्थगित कर दी गई. जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी बेंचों से नारेबाज़ी जारी रही, सांसदों ने मांग की कि उनके मुद्दों पर ध्यान दिया जाए. हालांकि, स्पीकर बिरला ने सांसदों से अपील की कि वे मर्यादा बनाए रखें, क्योंकि किसी भी सांसद को सदन में बोलने पर कोई रोक नहीं होगी. सदन में रुकावट डालने के लिए विपक्षी सांसदों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि क्या आप सदन को स्थगित करना चाहते हैं? क्या आप काम नहीं करना चाहते? सदन बहस और चर्चा के लिए है, कृपया मुद्दों पर बात करें और उन्हें उठाएं. सभी को बोलने का मौका मिलेगा; किसी को भी बोलने से नहीं रोका जाएगा. लगातार नारेबाजी जारी रहने से स्पीकर बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी. संसद के दोनों सदनों में सोमवार को यूनियन बजट 2026-27 पर चर्चा जारी रहने वाली थी, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश किया था. सीतारमण ने लगातार नौवीं बार लोकसभा में यूनियन बजट 2026-27 पेश किया.

MP में सर्दी का आलम: अगले 2 दिन रहेगा ठंडा, कटनी-शहडोल में तापमान में गिरावट, भोपाल-इंदौर में पारा लुढ़का

भोपाल  मौसम विभाग (Indian Meteorological Department) ने मध्य प्रदेश में अगले दो दिनों तक तेज सर्दी का अलर्ट जारी किया है. इसका सबसे ज्यादा असर ग्वालियर, चंबल, रीवा, शहडोल, सागर और जबलपुर संभागों में देखने को मिल रहा है. राज्य का पूर्वी हिस्सा सबसे ज्यादा ठंडा बना हुआ है. लोगों को धुंध और कोहरे से निजात मिली है, हालांकि उज्जैन, जबलपुर, भोपाल समेत कई शहरों में सुबह के समय हल्का देखने को मिल रहा है. पिछले 24 घंटे में मौसम कैसा रहा? एमपी में पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो सभी संभागों के जिलों में मौसम शुष्क रहा. अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं देखा गया. इसके साथ ही तापमान सामान्य ही बना रहा. उज्जैन में हल्का कोहरा देखा गया. कटनी, एमपी का सबसे ठंडा शहर पिछले कुछ दिनों से कटनी जिले का करौंदी एमपी का सबसे ठंडा स्थान बना हुआ है. यहां रविवार (8 फरवरी) को मिनिमम टेम्प्रेचर 5.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं, शहडोल जिले के कल्याणपुर में 6.1 डिग्री, उमरिया, छतरपुर जिले के खजुराहो और नर्मदापुरम के पचमढ़ी में 8.4 डिग्री, राजगढ़ में 8.5 डिग्री और शाजापुर जिले के गिरवर में न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रहा. प्रदेश के पांच बड़े शहरों की बात करें तो राजधानी भोपाल सबसे ठंडा शहर रहा. जहां न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री सेल्सियस रहा. इंदौर में 10.6 डिग्री, ग्वालियर में 11.2 डिग्री, जबलपुर में 11.9 डिग्री और उज्जैन में मिनिमम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. खंडवा में रविवार को अधिकतम तापमान 31.1 डिग्री सेल्सियस मापा गया. अगले 2 दिन ऐसा रहेगा मौसम     10 फरवरी- हल्का कोहरा रहेगा। बारिश का अलर्ट नहीं है, लेकिन ठंड का असर बढ़ा हुआ रहेगा।     11 फरवरी- कई जिलों में हल्के से मध्यम कोहरा रहेगा। इस दिन बारिश का अलर्ट नहीं है। नए सिस्टम का असर देखने को मिलेगा पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 9 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव हो रहा है। जिसका असर फिर से प्रदेश में देखने को मिलेगा। 12 फरवरी से मावठा गिरने का अनुमान है। यानी, अगले 5 दिन तक तो प्रदेश में बारिश या ओले गिरने का अनुमान नहीं है। एमपी में आने वाले दिनों में मौसम कैसा रहेगा?     मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिन मौसम ऐसा ही रहेगा, यानी तेज सर्दी का दौर जारी रहेगा.     इसके बाद अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी.     मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए किसी तरह की चेतावनी जारी नहीं की है.     मध्य प्रदेश के सभी जिलों में मौसम शुष्क बना रहेगा. भोपाल में रातें ठंडी रहती हैं, दिन गर्म भोपाल में रातें ठंडी रहती हैं, जबकि दिन गर्म। वर्ष 2014 से 2024 के बीच 4 साल दिन का अधिकतम तापमान 35 डिग्री के पार पहुंच गया था। रात में 7 साल पारा 10 डिग्री से कम दर्ज किया गया। इस बार फरवरी में दिन का तापमान 25 डिग्री के पार है।  

हमारी सरकार का यह 10वां बजट, 20 फरवरी तक चलेगा सदनः सीएम योगी

संवाद से समस्या के समाधान में विश्वास करती है सरकारः मुख्यमंत्री बजट सत्र प्रारंभ होने से पहले मीडियाकर्मियों से बात की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमारी सरकार का यह 10वां बजट, 20 फरवरी तक चलेगा सदनः सीएम योगी  उत्तर प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण पहली बार किसी राज्य सरकार द्वारा उठाया गया कदमः मुख्यमंत्री   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट सत्र प्रारंभ होने से पहले सोमवार को मीडियाकर्मियों से बातचीत की। सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानमंडल आज से बजट सत्र प्रारंभ कर रहा है। यह हमारी सरकार का 10वां बजट है। सीएम ने सभी सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि विधानमंडल लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। किसी भी सदस्य को कोई मुद्दा उठाना है तो कार्यवाही बाधित करने के बजाय संवाद करे, क्योंकि सरकार संवाद से समस्या के समाधान में विश्वास करती है। राज्यपाल के अभिभाषण से होगी शुरुआत  सीएम योगी ने कहा कि संसदीय परंपराओं के अनुरूप इसकी शुरुआत राज्यपाल जी के अभिभाषण से होगी। बजट सत्र में दो महत्वपूर्ण एजेंडे होते हैं। पहला- माननीय राज्यपाल का अभिभाषण और दूसरा- सामान्य बजट। राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की उपलब्धियों व भारी कार्ययोजना का दस्तावेज होता है, जिसे उनके द्वारा सदन के माध्यम से जनता जनार्दन को समर्पित किया जाता है। सभी सदस्य इस पर चर्चा करते हैं। आज राज्यपाल द्वारा समवेत सदन को संबोधन के माध्यम से अपना अभिभाषण दिया जाएगा।  20 फरवरी तक चलेगा बजट सत्र  सीएम योगी ने कहा कि 2026-27 का सामान्य बजट 11 फरवरी को प्रस्तुत होगा। इसके उपरांत इस पर चर्चा होगी। बजट सत्र 9 फरवरी से 20 फरवरी तक चलेगा।  उत्तर प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण भी प्रस्तुत होगा  सीएम योगी ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद सदन के पटल पर उत्तर प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण भी प्रस्तुत होगा। पहली बार कोई राज्य सरकार अपनी आर्थिक उपलब्धियों को लेकर यह कदम उठाएगी। हमने यूपी को बीमारूपन से उबारकर भारत की इकॉनमी के ब्रेकथ्रू के रूप में स्थापित किया है। इन सभी कारकों और यूपी के आर्थिक उन्नयन की इस यात्रा को जानने का अधिकार जनप्रतिनिधियों व जनता जनार्दन को भी होना चाहिए। हमने कितना आर्थिक उन्नयन किया है, यूपी में प्रति व्यक्ति आय में क्या वृद्धि हुई है, रोजगार सृजन की स्थिति क्या है, वित्तीय प्रबंधन में कैसे हमने विषम परिस्थितियों से उबार कर पिछले पांच वर्षों से लगातार यूपी को रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में स्थापित किया है। इन सभी बिंदुओं को लेकर आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट भी सदन में प्रस्तुत होगी। सदस्यों के लिए डेटा प्रस्तुत करने और चर्चा के लिए यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण दस्तावेज होगी। हर सदस्य के बहुमूल्य सुझावों को स्वीकार करेगी सरकार  सीएम योगी ने कहा कि विधानमंडल लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। यह कार्यवाही को बाधित करके नहीं, बल्कि संवाद से चलता है। किसी भी सदस्य को कोई मुद्दा उठाना है तो संवाद करे, क्योंकि सरकार संवाद से समस्या के समाधान में विश्वास करती है। हर सदस्य के बहुमूल्य सुझावों को स्वीकार करने के साथ ही सरकार हर मुद्दे पर चर्चा करते हुए राज्य के हित में आवश्यक कदम उठाने को सदैव तत्पर है। सीएम ने विपक्षी सदस्यों से अपील की कि कार्यवाही को बाधित न किया जाए, अनावश्यक शोरगुल से बचा जाए।  यूपी के विकास की गति को और तेज करने में बड़ी भूमिका का निर्वहन करेगा बजट सत्र  सीएम योगी ने कहा कि पिछले 9 वर्षों के दौरान विधानमंडल में कार्यवाही के नए कीर्तिमान स्थापित हुए हैं। बजट सत्र पर प्रदेश-देश की निगाहें होंगी। माननीय सदस्यों द्वारा यह अपने महत्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाने का मंच बनेगा। बजट सत्र उत्तर प्रदेश के विकास की इस स्पीड को और तेज करने में बड़ी भूमिका का निर्वहन करेगा। सीएम ने सभी पक्षों के सदस्यों से अपील की कि विधायिका के सर्वोच्च मंच पर जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा को आगे बढ़ाएं। इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, स्वतंत्र देव सिंह व राकेश सचान, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख आदि मौजूद रहे।

सीएम ने बच्चों को दी सीख- मन लगाकर पढ़ाई करो, मोबाइल से दूर रहो

जनता दर्शन  हर नागरिक की सेवा, सुरक्षा को प्रतिबद्ध है सरकारः मुख्यमंत्री शासकीय दायित्वों की व्यस्तताओं के बीच भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया ‘जनता दर्शन’  हापुड़ से आए सैनिक ने जमीन कब्जे की शिकायत की, मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन को तत्काल मामले की जांच कर कार्रवाई का दिया निर्देश  सीएम ने बच्चों को दी सीख- मन लगाकर पढ़ाई करो, मोबाइल से दूर रहो  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासकीय दायित्वों की व्यस्तताओं के बीच भी सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। उन्होंने यहां आए प्रत्येक नागरिक से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। हापुड़ से आए दो सैनिकों ने मुख्यमंत्री से जमीन पर कब्जे की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन को तत्काल मामले की जांच कर उचित निस्तारण का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 25 करोड़ प्रदेशवासियों की सेवा व सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम ने बच्चों को सीख दी कि खूब मन लगाकर पढ़ाई करो और मोबाइल से दूर रहो। सैनिकों ने की जमीन पर कब्जे की शिकायत  हापुड़ से आए दो सैनिक भी ‘जनता दर्शन’ में पहुंचे। एक सैनिक ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त की। बताया कि वह और उनके भाई सेना में रहकर देश की सेवा कर रहे हैं। उनके पिता नेत्रहीन हैं। उनकी जमीन ताऊ के लड़कों ने कब्जा कर ली है, जिनकी आपराधिक छवि है। ताऊ के लड़के हथियार के बल पर धमकी भी देते हैं। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका प्रार्थना पत्र लेते हुए हापुड़ प्रशासन को निर्देश दिया कि पूरे मामले की तत्काल जांच कराएं और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें।  आप एस्टिमेट दीजिए, सरकार इलाज कराएगी  मुख्यमंत्री के समक्ष कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग लेकर भी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि आप हॉस्पिटल से एस्टिमेट बनवाकर दें, सरकार इलाज में हरसंभव मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि आप मरीज के स्वास्थ्य की चिंता कीजिए, इलाज की चिंता सरकार की जिम्मेदारी है। इसके अतिरिक्त बिजली, नगर निगम, राजस्व आदि से जुड़े मामले भी आए, जिस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उचित निस्तारण का निर्देश दिया।  सीएम ने बच्चों को दुलारा और सीख भी दी  ‘जनता दर्शन’ में अभिभावकों के साथ कुछ बच्चे भी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से समस्याएं जानीं तो बच्चों का हालचाल पूछा। उनकी पढ़ाई के बारे में भी जाना। फिर कहा कि खूब मन लगाकर पढ़ाई करना और मोबाइल से दूर रहना। सीएम ने इन बच्चों पर स्नेह बरसाने के साथ उन्हें चॉकलेट भी दी।

RSS प्रमुख बनने के लिए हिंदू होना है अनिवार्य, मोहन भागवत ने साझा की चुनाव प्रक्रिया की जानकारी

मुंबई  राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ या RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने रिटायरमेंट को लेकर जारी अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि 75 वर्ष का होने के बाद भी संघ ने उनसे काम जारी रखने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि संघ के कहने पर वह काम छोड़ सकते हैं पर काम से रिटायर नहीं होंगे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संघ प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया और उम्मीदवारी पर भी बात की। कैसे होता है चुनाव भागवत ने यह भी कहा कि संघ का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति हमेशा एक हिंदू ही होगा, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो और शीर्ष पद सबसे योग्य उम्मीदवार को ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘RSS प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए।’ RSS में कैसे होता है प्रमोशन भागवत ने कहा कि RSS में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व नहीं है और स्वयंसेवक अपने काम के आधार पर प्रमोशन पाते हैं। उन्होंने बताया कि जब RSS की स्थापना हुई थी, तब इसका काम ब्राह्मण-बहुल समुदाय में शुरू हुआ था और इसलिए इसके अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण थे, जिसके कारण उस समय संगठन को ब्राह्मण संगठन के रूप में जाना जाता था। उन्होंने कहा कि लोग हमेशा ऐसे संगठन की तलाश करते हैं जिसमें उनके समुदाय के प्रतिनिधि हों। SC-ST से होगा प्रमुख? भागवत ने कहा कि वह इस बारे में कोई निश्चित जवाब नहीं दे सकते कि संघ प्रमुख अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति पृष्ठभूमि से होगा या नहीं क्योंकि यह निर्णय संघ प्रमुख की नियुक्ति करने वालों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होना अयोग्यता नहीं है, और न ही ब्राह्मण होना संघ प्रमुख बनने की योग्यता है। मोहन भागवत ने बताई अपनी नियुक्ति की कहानी उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे किसी प्रमुख का चयन करना होता, तो मैं ‘सबसे योग्य उम्मीदवार’ के मानदंड को अपनाता। जब मुझे RSS प्रमुख नियुक्त किया गया था, तब कई योग्य उम्मीदवार थे लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। मैं ही वह व्यक्ति था जिसे कार्यभार से मुक्त किया जा सकता था और नियुक्त किया जा सकता था।’ भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन ‘अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है’। उन्होंने दावा किया कि RSS के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो।

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