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ग्राम हर्रवाह में बांधवगढ़ विधायक ने विकास निर्माण कार्य का भूमि पूजन किये

बिलासपुर उमरिया जिले के बिलासपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत हर्रवाह में बांधवगढ़ विधायक शिवनारायण सिंह ने विकास कार्यों का भूमि पूजन किये। एवं भूमि पूजन करते हुए कार्यक्रम को संबोधित भी किया। विकास निर्माण कार्यक्रम में लाड़ली बहनों के ऊपर पुष्प वर्षा भी बांधवगढ़ विधायक शिव नारायण सिंह ने किये। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बांधवगढ़ विधायक श्री शिव नारायण सिंह ने कहे कि अब महात्मा गांधी रोजगार गारंटी जो चल रही थी।अब उसकी जगह में जी राम जी योजना के तहत  सभी लोगों को 100 दिन से बढ़ाकर के 125 दिन का काम आपके पंचायत में दिया जाएगा। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार की चलाई जाने वाली योजनाओं के बारे में सभी ग्रामीण जनों को जानकारी भी दिए। कार्यक्रम में बांधवगढ़ विधायक शिवनारायण सिंह ग्राम पंचायत हर्रवाह के सरपंच सोनू गुप्ता भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष कमलेश गुप्ता भाजपा मंडल बिलासपुर के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सोनी मंडल महामंत्री सोहन कोल मंडल उपाध्यक्ष राकेश तिवारी,रामपाल सिंह,सत्यनारायण गुप्ता,शिव प्रकाश द्विवेदी, द्वारिका द्विवेदी एवं ग्रामीण जन उपस्थित रहे

कूड़े से कमाई भी: ग्राम पंचायतों में घर-घर कूड़ा संग्रहण कर शुरू किया गया खाद उत्पादन, तीन करोड़ रुपये से अधिक की आय

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के गांव अब स्वच्छता और नवाचार की नई पहचान गढ़ रहे हैं। प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण, घर-घर कूड़ा संग्रहण कर उससे खाद निर्माण और आय सृजन के अभिनव प्रयोगों ने प्रदेश के ग्रामीण परिदृश्य को हाईटेक बना दिया है। राजधानी लखनऊ समेत रामपुर, अमेठी, ललितपुर और एटा में प्लास्टिक कचरे से अब तक 75 किलोमीटर लंबी सड़कें तैयार की जा चुकी हैं, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास का नया मॉडल पेश कर रही हैं।  ’वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल पर काम पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में वेस्ट मैनेजमेंट का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत ग्राम पंचायतों में घर-घर से कूड़ा संग्रहण शुरू कर वर्मी खाद का उत्पादन किया जा रहा है। इस पहल से अब तक 3 करोड़ रुपये से अधिक की आय सृजित हो चुकी है। वहीं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों से 29 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई की गई है। इस योजना के तहत पंचायतीराज विभाग प्रदेश में ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल पर काम कर रहा है। प्रदेश के हर गांव में किया जाएगा अभिनव प्रयोग पंचायती राज विभाग द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छ गांव महाभियान के तहत कूड़े को संसाधन में बदला जा रहा है। प्लास्टिक कचरे का सदुपयोग कर सड़क निर्माण, जैविक कचरे से खाद उत्पादन और पंचायतों की आय बढ़ाने के ये प्रयोग प्रदेश के हर गांव को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। इस योजना के जरिए प्रदेश के हर गांव में अभिनव प्रयोग किए जाएंगे। प्लास्टिक वेस्ट का यूटिलाइजेशन पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह के अनुसार, विभाग ग्राम पंचायतों को नवाचार के माध्यम से मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। गांव-गांव स्वच्छता अभियान के साथ प्लास्टिक वेस्ट के यूटिलाइजेशन से न केवल पर्यावरण सुरक्षित हो रहा है, बल्कि करोड़ों रुपये की आय भी सृजित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने बैंकों से की अन्नदाता किसानों के लिए ऋण शर्तों को सरल बनाने की अपील

किसानों को अब 5 मिनट में ई-केसीसी से ऋण: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया राज्य ऋण संगोष्ठी एवं राज्य फोकस पेपर 2026-27 का विमोचन डिजिटल गवर्नेंस से किसानों को राहत, एफपीओ, सहकारिता व एमएसएमई से मजबूत हुई उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था: सीएम योगी लघु-सीमांत किसानों को कम ब्याज पर ऋण से मिला संबल, सहकारिता के डिजिटलीकरण से बढ़ी पारदर्शिता व जवाबदेही मुख्यमंत्री ने बैंकों से की अन्नदाता किसानों के लिए ऋण शर्तों को सरल बनाने की अपील तकनीक, ट्रेनिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए उत्तर प्रदेश अपने अनलिमिटेड पोटेंशियल को कर रहा साकार लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस ने उत्तर प्रदेश में ऋण स्वीकृति की तस्वीर ही बदल दी है। अन्नदाता किसान जब पहले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से ऋण लेने जाता था, तो 25 दिन से लेकर एक महीने तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन आज वही किसान ई-केसीसी के माध्यम से मात्र पांच मिनट में ऋण सुविधा प्राप्त कर रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए जो हमारा कृषि ऋण 3 लाख करोड़ है, यह पहले की तुलना में 13 फीसदी बढ़ा है। यही सुशासन है और इसी दिशा में हमें और मजबूती से आगे बढ़ना होगा। मुख्यमंत्री गुरुवार को लोकभवन में आयोजित राज्य ऋण संगोष्ठी एवं राज्य फोकस पेपर 2026-27 के विमोचन के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज सरकार और अन्नदाता किसान मिलकर सोच रहे हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग खेती में कैसे किया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से केंद्रीय बजट में एआई एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म की घोषणा की गई है और उत्तर प्रदेश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कई एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन) को मंच पर सम्मानित भी किया। दिव्यांग और महिला नेतृत्व वाले एफपीओ बने प्रदेश के लिए रोल मॉडल मुख्यमंत्री ने कहा कि संगोष्ठी में जो मॉडल प्रस्तुत किए गए, वे पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा हैं। दिव्यांगजनों द्वारा संचालित कसया मिल्क प्रोड्यूसर एफपीओ, जिसमें 1,005 सदस्य हैं, इसका जीवंत उदाहरण है। पूर्वी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में, जिन्हें पहले कमजोर माना जाता था, दिव्यांगजनों ने अपनी मेहनत और क्षमता से नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह आंखें खोलने वाला काम है और इसके लिए वे सभी अभिनंदन के पात्र हैं। मुख्यमंत्री ने मथुरा की 750 महिलाओं वाली सरसों उत्पादन कंपनी का उल्लेख करते हुए कहा कि मैंने स्वयं उनकी प्रदर्शनी देखी है। किस तरह मस्टर्ड ऑयल को प्रोसेसिंग से जोड़कर महिलाओं ने बेहतर मुनाफा कमाया, यह पूरे प्रदेश के लिए सीख है। सरकार इस तरह के प्रयासों को हर स्तर पर सहयोग देगी। एमएसएमई को नई जान, ओडीओपी बना यूपी की पहचान सीएम योगी ने कहा कि आज सहकारिता क्षेत्र भी बदल रहा है। “सहकार से समृद्धि की ओर” के विजन के तहत डिजिटलीकरण, ई-गवर्नेंस और पारदर्शी नीतियों से सहकारी संस्थाओं में सुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जो विश्व बैंक के साथ एग्री-टेक के क्षेत्र में काम कर रहा है। कृषि, एमएसएमई, महिला, एग्री-टेक और युवा उद्यमिता आज सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की स्थिति को याद करते हुए कहा कि सहकारिता क्षेत्र में माफिया हावी था। रिजर्व बैंक ने 16 जिला सरकारी बैंकों को डिफाल्टर घोषित कर बंदी का आदेश कर दिया था। आज हमारी सरकार में इन्हीं 16 में से 15 बैंक प्रॉफिट में आ चुके हैं और 16वें को भी प्रॉफिट में लाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर में भी एक समय ऐसा था, जब उत्तर प्रदेश से बड़े पैमाने पर पलायन हो चुका था। हस्तशिल्प और निर्यात लगभग ठप थे और एमएसएमई सेक्टर बंदी की कगार पर खड़ा था। हमारी सरकार ने इसे एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) के रूप में आगे बढ़ाया। आज उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जो एमएसएमई सेक्टर को ₹5 लाख का सुरक्षा बीमा दे रहा है। आज प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिट्स कार्यरत हैं और लगभग 3 करोड़ परिवार इसी सेक्टर पर निर्भर हैं। टेक्नोलॉजी, मार्केट, पैकेजिंग और डिजाइनिंग से जोड़कर ओडीओपी को एक ब्रांड बनाया गया है। परिणाम यह है कि प्रदेश का निर्यात ₹84 हजार करोड़ से बढ़कर ₹1.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा है। प्रधानमंत्री जब विदेश जाते हैं, तो राष्ट्राध्यक्षों को ओडीओपी प्रोडक्ट्स उपहार में देते हैं। एफपीओ की मजबूती से बदली यूपी की कृषि अर्थव्यवस्था उत्तर प्रदेश के एफपीओज की ताकत को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ग्रेटर नोएडा में आयोजित इस ट्रेड शो में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन एफपीओ और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर का रहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश का क्रेडिट-डेबिट रेशियो (सीडी रेशियो) 9 वर्षों में 43 प्रतिशत से बढ़कर 61 प्रतिशत हो गया है। लक्ष्य है कि इसी साल 31 मार्च तक इसे 62 प्रतिशत और 2026-27 में 65 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लघु और सीमांत किसानों को सशक्त करने के लिए सहकारिता के माध्यम से ठोस कदम उठाए गए हैं। पहले किसानों को 11 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण मिलता था, जिससे किसानों पर बोझ पड़ता था और बैंक भी घाटे में थे, क्योंकि उनका पैसा डूब जाता था। हमारी सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि लघु र सीमांत किसानों को 5 से 6 प्रतिशत की ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाए, शेष सहयोग सरकार करेगी। जब किसानों को आसान ब्याज दर और सरल किस्तों पर ऋण मिलेगा तो वे खेती में निवेश करेंगे, तकनीक अपनाएंगे और उनकी आय में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होगी। अनलिमिटेड पोटेंशियल को साकार कर रहा यूपी मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी देश ही नहीं, दुनिया का पहला राज्य है, जहां 86 प्रतिशत भूमि सिंचित है। 16 लाख ट्यूबवेल को मुफ्त बिजली दी जा रही है, नहरों से सिंचाई मुफ्त है और एक लाख किसानों को सोलर पैनल दिए जा चुके हैं। एक समय उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य कहा जाता था, लेकिन आज वही उत्तर प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला राज्य बन चुका है। 10 वर्ष पहले देश की अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान मात्र 8 प्रतिशत था, जबकि आज यह बढ़कर … Read more

मुख्य सचिव जैन ने कहा, मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना राज्य सरकार की प्राथमिकता

मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में निरंतर कमी लाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्य सचिव  जैन राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति राज्य स्वास्थ्य समिति की गवर्निंग बॉडी की हुई बैठक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की उपलब्धियों और वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना की हुई समीक्षा भोपाल मुख्य सचिव  अनुराग जैन की अध्यक्षता में मंत्रालय में  राज्य स्वास्थ्य समिति की गवर्निंग बॉडी की बैठक आयोजित हुई। मुख्य सचिव  जैन ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में विभाग द्वारा की गई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं सुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं डिजिटल पहलों के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संक्रामक एवं गैर-संक्रामक रोगों की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं। अनमोल 2.0 से गर्भवती महिलाओं की सतत निगरानी से एमएमआर और आईएमआर में हुआ है सुधार मुख्य सचिव  जैन ने निर्देश दिए कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तिकरण के समन्वित प्रयास करें। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में निरंतर कमी लाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बताया गया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य के 51 जिलों में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए 228 बर्थ वेटिंग रूम क्रियाशील हैं। साथ ही गर्भवती महिलाओं की शंकाओं के समाधान हेतु सुमन सखी चैटबॉट को गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध कराया गया है। गर्भवती महिलाओं की सतत निगरानी अनमोल 2.0 के माध्यम से की जा रही है। इसके परिणामस्वरूप वित्तीय वर्ष 2025-26 में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) एवं शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में कमी दर्ज की गई है। बैठक में मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सलोनी सिडाना ने लोक स्वास्थ्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत प्राप्त उपलब्धियों और वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। आरबीएसके के अंतर्गत 33 हज़ार से अधिक निःशुल्क सर्जरी ई-शिशु मॉडल के अंतर्गत एमजीएम इंदौर में वन-हब एवं 16 स्पोक्स के माध्यम से अब तक 947 नवजात शिशुओं को टेली-कंसल्टेशन सेवाएँ प्रदान की गई हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत 33,075 नि:शुल्क शल्य क्रियाएँ की गईं, साथ ही 1,026 नि:शुल्क जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) सर्जरी भी की गई हैं। वर्ष 2025 में कुल 8,896 पंचायतें हुई टीबी-मुक्त टीबी (क्षय रोग) के नोटिफिकेशन एवं उपचार सफलता दर में सुधार के परिणामस्वरूप डीआर-टीबी मृत्यु दर 3.9 से घटकर 3.0 हुई है। वर्ष 2025 में कुल 8,896 पंचायतों को टीबी-मुक्त पंचायत घोषित किया गया। सिकल सेल प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत 28,541 मरीजों को नि:शुल्क उपचार प्रदान किया गया और एक करोड़ 13 लाख 59 हजार 76 नागरिकों को सिकल सेल कार्ड वितरित किए गए हैं। स्वस्थ यकृत मिशन में 1 करोड़ 42 लाख स्क्रीनिंग ‘स्वस्थ यकृत मिशन’ (एनएएफएलडी स्क्रीनिंग अभियान) के अंतर्गत एक करोड़ 42 लाख स्क्रीनिंग की गई हैं। फाइब्रोस्कैन सेवाएँ 13 जिलों में प्रारंभ की गई हैं, जिनमें अब तक 2,032 स्कैन पूर्ण किए जा चुके हैं। उच्च रक्तचाप के उपचार हेतु 1.77 करोड़ नागरिक की स्क्रीनिंग एवं 10.40 लाख नागरिक उपचाराधीन, इसी प्रकार मधुमेह के लिए 1.80 करोड़ स्क्रीनिंग एवं 7.21 लाख उपचाराधीन रोगी हैं। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए ‘मिशन मधुमेह’ के अंतर्गत 537 टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चे उपचाराधीन हैं। ट्रक ड्राइवरों की नियमित नेत्र जांच करने के निर्देश राज्य में 4,03,401 मोतियाबिंद शल्य क्रियाएँ की गईं। इसमें 48,816 स्कूली बच्चों एवं 1,03,944 वृद्धजनों को निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त 2,235 कॉर्निया नेत्रदान के माध्यम से एकत्र किए गए। होप (होम बेस्ड केयर प्रोग्राम फॉर एल्डर्ली) योजना के अंतर्गत 6 शहरी क्षेत्रों में 1,214 अशक्त वृद्धजनों को घर पर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की गई हैं। मुख्य सचिव  जैन ने ट्रक ड्राइवरों की नियमित नेत्र जांच कराने के निर्देश दिए। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विस्तार महाविद्यालयों में भी करें मुख्य सचिव  जैन ने उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विस्तार महाविद्यालयों में भी किए जाने के निर्देश दिए। बताया गया कि राज्य में 3,756 शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू-मुक्त प्रमाणित किया गया है। टेली-मानस सेवा (टोल-फ्री नंबर 14416 / 1800-891-4416) के माध्यम से 55,711 उपयोगकर्ताओं को नि:शुल्क मानसिक स्वास्थ्य परामर्श प्रदान किया गया। आत्महत्या रोकथाम के लिये गेट-कीपर कार्यक्रम के अंतर्गत 2,385 आत्म-हानि एवं 1,593 आत्मघाती विचारों से संबंधित मामलों में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (डीएमएचपी) के माध्यम से परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना निर्माण प्रक्रिया में बॉटम-अप दृष्टिकोण अपनाया गया है और शून्य-आधारित बजटिंग सिद्धांतों पर संसाधन आवंटन किया गया है, जिससे वर्तमान स्वास्थ्य आवश्यकताओं एवं जिला-स्तरीय जरूरतों के अनुरूप योजनाएँ तैयार की जा सकें। परिणाम-आधारित योजना एवं बजटिंग के अंतर्गत मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, टीकाकरण कवरेज में सुधार और संक्रामक एवं गैर-संक्रामक रोगों के नियंत्रण जैसे मापनीय स्वास्थ्य लक्ष्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए एसएनए-स्पर्श के माध्यम से निगरानी की जाएगी। जिला स्वास्थ्य कार्ययोजना की तैयारी, राज्य स्तरीय समीक्षा, कार्यकारी समिति की बैठक एवं राज्य स्वास्थ्य समिति की स्वीकृति की सुव्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई गई है, जो विकेंद्रीकरण, अभिसरण, लक्ष्य निर्धारण एवं प्राथमिकता निर्धारण के सिद्धांतों पर आधारित है। यह दृष्टिकोण “विकसित मध्यप्रदेश@2047” एवं सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप है। बैठक में लगभग 5 हज़ार करोड़ रुपए की वार्षिक कार्य योजना भारत सरकार को प्रेषित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य आयुक्त, मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय, आयुष, स्कूल शिक्षा, वित्त विभाग, आयुक्त महिला बाल विकास, मनरेगा विभाग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

28 को बोत्सवाना से भारत आ रहे चीते, एमपी में बढ़ेगा चीता कुनबा

भोपाल  40 महीने पहले देश में चीतों को बसाने का शुरू हुआ सिलसिला अब और बढऩे जा रहा है। 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीतों के साथ शुरू हुए प्रोजेक्ट में अब 28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 और चीते लाए जाएंगे। उन्हें कूनो नेशनल पार्क में रखा जाएगा। इससे पहले 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए थे। सीएम डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत में 28 फरवरी को 8 चीतों को लाने की बात कही। गांधी सागर है चीतों का दूसरा घर 40 माह पहले देश में चीतों का इकलौता घर एमपी का कूनो था। 20 अप्रेल 2025 को मंदसौर जिले के गांधीसागर में चीतों का दूसरा घर बनाया गया। यहां कूनो से शिफ्ट तीन चीते हैं, इनमें नर प्रभास, पावक तो मादा धीरा है।  असम का जंगली भैंसा भी आएगा मध्यप्रदेश सीएम डॉ मोहन यादव ने बताया कि असम से जंगली भैंसा को मध्यप्रदेश लाने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है. नई दिल्ली में हुई इस बैठक में दोनों राज्यों और केंद्र सरकार के बीच तंत्रगत प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जैव विविधता को सुरक्षित करते हुए वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा दी जा रही है. बोत्सवाना से 8 चीते लाए जाएंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसी महीने 28 फरवरी के आसपास बोत्सवाना से 8 चीते मध्यप्रदेश लाए जाएंगे। चीतों के पुनर्स्थापन के लिए केंद्रीय मंत्री यादव से आवश्यक सहयोग और व्यवस्थाओं पर भी विस्तृत रूप से बात की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में यह जानकारी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चीता प्रोजेक्ट , असम से गैंडे और जंगली भैंसे सहित अन्य वन्य प्राणियों को लाने के प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहे हैं। बोत्सवाना से 8 चीते लाने की प्रक्रिया पूरी कराने सहित प्रोजेक्ट की मंजूरी सहित अन्य कार्यों को लेकर वे दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से विभिन्न विषयों पर विस्तार से बातचीत की गई है। सीएम यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली में ने बताया कि कि मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र के विकास, रिजर्व फॉरेस्ट के विस्तार और वन्यजीव संरक्षण की अपार संभावनाएं हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। कूनो में 27 चीते, इनमें से 19 यहीं जन्मे – 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते लाए गए। – 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए।  अभी कूनो में 27 चीते हैं। – इनमें से विदेशों में जन्मे 8 चीते हैं। – भारत में जन्मे चीतों की संख्या 19 है। यह कूनो में ही हैं।

‘भारत टैक्सी’ ऐप ने दिल्ली में दी OLA-Uber को टक्कर, जानें कैसे करें बुकिंग

नई दिल्ली ओला, उबर और इनड्राइव जैसी मौजूदा कैब सेवाओं के बीच अब एक नई कैब सर्विस भारत टैक्सी की ऑफिशल एंट्री होने जा रही है. दरअसल, भारत की पहली को-ऑपरेटिव कैब सर्विस भारत टैक्सी को दिल्ली में ऑफिशियल तौर पर लॉन्च कर दिया गया है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में इस ऐप का शुभारंभ किया. लंबे समय से दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के तहत तौर पर चल रही इस सेवा को अब आम लोगों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है. लॉन्च के साथ ही कई यूजर्स ने ऐप डाउनलोड किया, लेकिन शुरुआती घंटों में कुछ लोगों को बुकिंग और ऐप एक्सेस से जुड़ी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा है. हालांकि सरकार और प्लेटफार्म से जुड़े लोगों का कहना है कि आने वाले दिनों में सिस्टम को और बेहतर किया जाएगा. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि भारत टैक्सी ऐप पर बुकिंग का पूरा तरीका क्या है. ड्राइवर नहीं अब कहलाएंगे सारथी भारत टैक्सी की सबसे बड़ी खासियत इसका ड्राइवर ओनरशिप मॉडल है. इस प्लेटफार्म से जुड़ने वाले ड्राइवरों को अब ड्राइवर नहीं बल्कि सारथी कहा जाएगा. सरकार के अनुसार, इस ऐप पर काम करने वाले सारथी ही इसके असली मालिक होंगे. वहीं हर राइड का पूरा किराया सीधे सारथी के बैंक अकाउंट में जाएगा और ओला, उबर की तरह कोई कमीशन नहीं काटा जाएगा. इसके अलावा भारत टैक्सी किसी प्राइवेट कंपनी की ओर से नहीं बल्कि को-ऑपरेटिव मॉडल पर शुरू की गई है. इसे सहकारिता मंत्रालय और नेशनल ई गवर्नेंस डिवीजन ने मिलकर तैयार किया है. इसका संचालन सहकार टैक्सी को-ऑपरेटिव लिमिटेड करेगा. इसके लिए एक विशेष काउंसलिंग बनाई गई है, जिसकी जिम्मेदारी पूरे सिस्टम की निगरानी करना है. यूजर्स कैसे कर सकते हैं भारत टैक्सी का इस्तेमाल? भारत टैक्सी का इस्तेमाल ओला या उबर की तरह ही किया जा सकता है. इसके लिए एंड्राइड यूजर गूगल प्ले स्टोर से और आईफोन यूजर एप्पल ऐप स्टोर से भारत टैक्सी ऐप डाउनलोड कर सकते हैं. यह ऐप हिंदी और अंग्रेजी के अलावा गुजराती और मराठी भाषा में भी उपलब्ध है. ऐप डाउनलोड करने के बाद मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा और ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद यूजर राइड बुक कर सकते हैं. ऐसे कर सकते हैं राइड बुक भारत टैक्सी ऐप से राइड बुक करने के लिए सबसे पहले ऐप ओपन करें. इसके बाद पिकअप और ड्रॉप लोकेशन डालें, फिर बाइक, ऑटो या कार में से ऑप्शन सेलेक्ट करें. अब दिखाई गई किराया राशि को कंफर्म करते ही राइड बुक हो जाएगी. वहीं राइट बुक होते ही लाइव ट्रैकिंग भी शुरू हो जाएगी. किराया और सर्ज प्राइसिंग से राहत भारत टैक्सी में यात्रियों को सर्ज प्राइसिंग की समस्या नहीं होगी. यानी पीक हावर्स, बारिश या ट्रैफिक के समय किराया नहीं बढ़ेगा. दावा किया जा रहा है कि इसका किराया बाजार में मौजूद दूसरी कैब सेवाओं से कम हो सकता है, जिससे आम यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा. वहीं यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐप में कई फीचर दिए गए हैं. सभी साथियों का पुलिस वेरिफिकेशन किया जाएगा. इसके अलावा लाइव लोकेशन शेयरिंग, इमरजेंसी, एसओएस बटन और ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट जोड़ने जैसे सुविधा भी दी गई है.

गौतमबुद्ध नगर के जेवर क्षेत्र में विकसित की जा रही इंटरनेशनल फिल्म सिटी

यूपी की पहली इंटरनेशनल फिल्म सिटी में होगी ‘मॉम-2’ की शूटिंग सेट के लिए शुरू हुई लैंड मैपिंग, 20 दिन में तैयार होगा शूटिंग सेट फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में शुरू होगी फिल्म की शूटिंग सीएम योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है इंटरनेशनल फिल्म सिटी गौतमबुद्ध नगर के जेवर क्षेत्र में विकसित की जा रही इंटरनेशनल फिल्म सिटी उत्तर प्रदेश को फिल्म, ओटीटी, वेब सीरीज समेत एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाना है सीएम योगी का विजन लखनऊ/ग्रेटर नोएडा  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘इंटरनेशनल फिल्म सिटी’ ने अब जमीनी रफ्तार पकड़ ली है। गौतमबुद्ध नगर के जेवर क्षेत्र में विकसित की जा रही उत्तर प्रदेश की इस पहली इंटरनेशनल फिल्म सिटी में पहली फिल्म शूटिंग के रूप में ‘मॉम-2’ का फिल्मांकन होने जा रहा है। फिल्म सिटी परिसर में शूटिंग को लेकर प्रारंभिक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। परियोजना का निर्माण कर रहे बोनी कपूर और भूटानी ग्रुप के ज्वाइंट वेंचर ‘बेव्यू भूटानी फिल्म सिटी प्राइवेट लिमिटेड’ ने जमीन की मैपिंग का कार्य शुरू कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, मैपिंग पूरी होने के बाद करीब 20 दिनों के भीतर शूटिंग सेट तैयार कर लिया जाएगा, जिसके बाद फिल्म की शूटिंग शुरू होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि इंटरनेशनल फिल्म सिटी प्रोजेक्ट का कार्य बॉलीवुड के प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक बोनी कपूर व भूटानी ग्रुप को संयुक्त रूप से मिला है। इस कंपनी ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के साथ एग्रीमेंट साइन किया है। यीडा द्वारा लेआउट प्लान को मंजूरी दिए जाने के बाद परियोजना के पहले चरण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। बेव्यू भूटानी फिल्म सिटी प्रोजेक्ट के जीएम राजीव अरोड़ा ने बताया कि शूटिंग की तैयारियों के साथ-साथ फिल्म सिटी के निर्माण कार्य की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। जमीन की मैपिंग पूरी होने के बाद करीब 20 दिनों के भीतर शूटिंग सेट तैयार कर लिया जाएगा, जिससे फिल्म निर्माण से जुड़ी गतिविधियां शुरू हो सकेंगी। इसके साथ ही फिल्म सिटी के निर्माण का कार्य भी शुरू हो जाएगा और जल्द ही सीएम योगी व पीएम मोदी के कर कमलों से इसका विधिवत शुभारंभ होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि बोनी कपूर की कंपनी ने ही 2017 में रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म ‘मॉम’ को प्रोड्यूस किया था और अब उन्होंने इसके दूसरे पार्ट की शूटिंग को यूपी में करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।  इंटरनेशनल फिल्म सिटी यमुना एक्सप्रेसवे के सेक्टर-21 में विकसित की जा रही है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को फिल्म, ओटीटी, वेब सीरीज़ समेत एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाना है। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट विकसित हो रही यह फिल्म सिटी आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी और वर्ल्ड-क्लास सुविधाओं के साथ प्रदेश को एक एंटरटेनमेंट और एवियेशन हब के रूप में स्थापित करेगी। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि फिल्म सिटी की औपचारिक शुरुआत से पहले ‘मॉम-2’ जैसी फिल्म की शूटिंग इस बात का संकेत है कि यूपी की फिल्म पॉलिसी और इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर फिल्म इंडस्ट्री का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है। यह परियोजना आने वाले समय में मुंबई समेत देश के अन्य फिल्म निर्माण केंद्रों का एक सशक्त विकल्प बन सकती है।

Anthropic AI का खौफ, US में दूसरे दिन भी हंगामा, बड़ी कंपनियों के बीच हलचल

नई दिल्ली Anthropic के नए AI टूल्स ने दुनिया को हिला दिया है. खासकर, अमेरिका पर सबसे तगड़ी आर्थिक चोट पहुंचाई है. क्योंकि मौजूदा समय अमेरिका टेक्नोलॉजी में सबसे आगे है, इसके साथ ही Anthropic AI टूल ने ये संकेत भी दे दिया है, कि जो अभी बाहशाह है, आगे भी वही रहेगा इसकी कोई गारंटी है. क्योंकि टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है और हर नई खोज के साथ कॉम्पिटिशन भी बढ़ता जा रहा है. दरअसल, अमेरिकी शेयर बाजार (Share Market) में टेक्नोलॉजी शेयरों का दबदबा रखने वाला Nasdaq लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट के साथ बंद हुआ. बुधवार को नैस्डैक 350 अंक गिरकर 22904 पर अंक पर बंद हुआ, यानी डेढ़ फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इससे पहले मंगलवार को भी करीब 1.50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. नैस्डैक में दूसरे दिन भी दबाव  भारतीय बाजार पर भी इसका असर देखने को मिला था, भारतीय बाजार कारोबार के अंत में हरे निशान के साथ बंद हुए थे. लेकिन आईटी शेयरों में भारी बिकवाली का माहौल था, हालांकि गुरुवार को आईटी स्टॉक्स रिकवरी के मोड में हैं. मंगलवार को आईटी शेयरों में गिरावट की बजट आईटी इंडेक्स के मार्केट कैप में करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी.  इन सबके बीच Anthropic AI की चोट से अमेरिकी शेयर बाजार उबर नहीं पा रहा है. बुधवार को भी NVIDIA, Alphabet, Amazon और Meta के शेयरों में अच्छी-खासी बिकवाली देखने को मिली. इस गिरावट की बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं. खासतौर पर Anthropic के नए AI टूल को लेकर. निवेशकों को डर है कि तेजी से बदलती AI तकनीक से मौजूदा बड़ी टेक कंपनियों का बिजनेस मॉडल प्रभावित हो सकता है.  बता दें, Anthropic एक AI स्टार्टअप है, जिसे OpenAI का बड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है. कंपनी ने हाल ही में अपने नए और ज्यादा ताकतवर AI टूल्स पेश किए हैं. इन टूल्स के बाद बाजार में यह चर्चा तेज हो गई कि आने वाले समय में AI सेक्टर में कॉम्पिटिशन और ज्यादा बढ़ेगा. इसका असर उन बड़ी टेक कंपनियों पर पड़ सकता है, जो अभी AI से मोटा मुनाफा कमा रही हैं. बड़ी कंपनियों की बढ़ी टेशन इसी चिंता के चलते निवेशकों ने टेक शेयरों में मुनाफावसूली शुरू कर दी. Nvidia, Microsoft, Alphabet, Meta और Amazon जैसे दिग्गज शेयरों में लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है. Nvidia जैसे शेयर, जो हाल के महीनों में AI बूम की वजह से तेजी से चढ़े थे, उनमें सबसे ज्यादा दबाव है.  एक्सपर्ट्स की मानें तो निवेशक यह सोचने लगे हैं कि क्या AI को लेकर उम्मीदें जरूरत से ज्यादा तो नहीं बढ़ा दी गई हैं. Anthropic जैसे नए खिलाड़ियों की एंट्री से AI सेक्टर में मुकाबला बढ़ेगा, जिससे कंपनियों के मुनाफे और वैल्यूएशन पर असर पड़ सकता है.   हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स ये भी कह रहे हैं कि ये गिरावट किसी बड़े क्रैश की शुरुआत नहीं है, बल्कि एक हेल्दी करेक्शन हो सकता है. AI सेक्टर में लंबे समय में ग्रोथ की संभावनाएं अब भी मजबूत हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.  Anthropic AI टूल क्या है? Anthropic AI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ऐसे टूल और मॉडल बनाता है, जो इंसानों की तरह सोच-समझकर जवाब दे सकें. इसका प्रमुख AI मॉडल Claude है, जो कंटेंट लिखने, डेटा एनालिसिस, कोडिंग, रिसर्च और बिजनेस फैसलों में मदद करता है. यह टूल कई कामों में इंसानी दखल को कम कर सकता है. हालांकि इस बीच Anthropic बड़े कॉपीराइट और डेटा-उपयोग विवादों का सामना भी कर रहा है.

उपलब्धता कैसे हो रही है चाइनीज मांझे की ? सीएम ने दिया पुलिस को सघन छापेमारी का निर्देश

लखनऊ.  प्रदेश में चाइनीज मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की चाइनीज मांझे की वजह से होने वाली मृत्यु हत्या की तरह है। इस तरह के मामलों में संबंधित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि चाइनीज मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके बावजूद इसकी उपलब्धता गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने पुलिस को प्रदेशव्यापी सघन छापेमारी अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान चाइनीज मांझे की बिक्री ही नहीं, बल्कि भंडारण व परिवहन पर भी कठोर नजर रखी जाएगी। जन-सुरक्षा से कोई समझौता नहीं: योगी सीएम योगी ने प्रदेश भर में विशेष अभियान चलाकर चाइनीज मांझे की आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह तोड़ने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस अभियान की प्रगति और कार्रवाई की उच्च स्तर पर नियमित समीक्षा करने का भी निर्देश दिया है, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जनता की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। चाइनीज मांझा न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह आमजन, बच्चों और पशु-पक्षियों के लिए जानलेवा खतरा भी है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश को इस खतरनाक मांझे से पूरी तरह मुक्त किया जाए।

प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र की तर्ज पर स्थापित होंगे केन्द्र

लखनऊ. प्रदेश में पशुपालकों को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण पशु औषधियां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पशु औषधि केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। यह केंद्र प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र की तर्ज पर स्थापित होंगे। जनपद के प्रत्येक विकास खण्ड में एक पशु औषधि केन्द्र खोला जाएगा, जिससे पशुओं के उपचार  के लिए सस्ती दरों पर दवाएं सुलभ हो सकें। यह प्रपत्र होगा अनिवार्य लखनऊ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि पशु औषधि केन्द्र खोलने के लिए आवेदक को फार्मासिस्ट का नाम एवं उसका वैध पंजीकरण विवरण, दुकान के लिए न्यूनतम 120 वर्ग फुट स्थान का प्रमाण पत्र तथा ड्रग सेल लाइसेंस का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। ऐसे करना होगा आवेदन  पशु औषधि केन्द्र स्थापित करने के इच्छुक आवेदकों को 5000 रुपये शुल्क अदा करना होगा। आवेदन की प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन होगी, इसके लिए इच्छुक अभ्यर्थी http://pashuaushadhi. dahd.gov.in पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। पशुपालकों को उपलब्ध होंगी सस्ती दवाएं डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि केन्द्र एवं सहकारी समितियों से जुड़े योग्य लाभार्थियों को प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। यह योजना भारत सरकार की पशुधन स्वास्थ्य एवं बीमारी नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) के अंतर्गत संचालित की जाएगी। पशु औषधि केन्द्रों की स्थापना से पशुपालकों को समय पर सस्ती दवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे पशुपालन को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकेगा।

होम-स्टे, रिसोर्ट, पाथवे, लैंडस्केपिंग सहित आधुनिक पर्यटक सुविधाओं का होगा विकास

रायपुर. ग्लोबल टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होगा मयाली – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 की उप-योजना सीबीडीडी के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना का मयाली नेचर कैंप में विधिवत भूमिपूजन किया। लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से क्रियान्वित इस परियोजना के तहत मयाली, विश्व प्रसिद्ध मधेश्वर पर्वत (विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग) तथा बगीचा स्थित कैलाश गुफा क्षेत्र में विभिन्न पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाएगा। यह परियोजना क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत के संरक्षण के साथ-साथ समुदाय आधारित पर्यटन को सशक्त बनाएगी। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और जशपुर जिले को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में नई पहचान मिलेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि मयाली-बगीचा विकास परियोजना जशपुर जिले के पर्यटन विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। आज मयाली के विकास की मजबूत नींव रखी गई है। मयाली अब पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है और आने वाले समय में यह एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा।     मुख्यमंत्री ने कहा कि मयाली की पहचान सदियों से मधेश्वर महादेव से जुड़ी रही है, जिसे विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग माना जाता है। इस विकास परियोजना के माध्यम से मधेश्वर पर्वत के धार्मिक एवं पर्यटन महत्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। परियोजना के अंतर्गत मयाली डेम के समीप पर्यटक रिसोर्ट एवं स्किल डेवलपमेंट सेंटर का निर्माण किया जाएगा।  उन्होंने कहा कि मयाली को एक समग्र इको-टूरिज्म और एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां के जंगल, झरने, पहाड़ और समृद्ध आदिवासी संस्कृति को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाया जाएगा। पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा।  साय ने कहा इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा होम-स्टे नीति लागू की गई है, जिससे ग्रामीण परिवार पर्यटन गतिविधियों से सीधे जुड़कर आय अर्जित कर सकेंगे और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति को नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा।   मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आई है। स्किल डेवलपमेंट सेंटर में टूर गाइड, होटल सेवा, एडवेंचर स्पोर्ट्स, हस्तशिल्प एवं डिजिटल बुकिंग से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे न केवल पर्यटन बल्कि जशपुर की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं को भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। विकास कार्यों से बदलेगी मयाली की तस्वीर, उभरेगा नया पर्यटन केंद्र मयाली क्षेत्र को प्राकृतिक, धार्मिक एवं ग्रामीण पर्यटन के समग्र गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत 5 पर्यटक कॉटेज, कॉन्फ्रेंस एवं कन्वेंशन हॉल, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, भव्य प्रवेश द्वार, बाउंड्री वॉल, आधुनिक टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग एवं पाथवे का निर्माण किया जाएगा। इन सुविधाओं से पर्यटकों के ठहराव एवं विभिन्न आयोजनों की बेहतर व्यवस्था होगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे। धार्मिक पर्यटन को सशक्त करने के लिए शिव मंदिर क्षेत्र में प्रवेश द्वार, टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग एवं पाथवे का विकास किया जाएगा। वहीं बगीचा स्थित कैलाश गुफा परिसर में प्रवेश द्वार, पिकनिक स्पॉट, रेस्टिंग शेड, घाट विकास, पाथवे तथा सीढ़ियों एवं रेलिंग का जीर्णाेद्धार किया जाएगा, जिससे पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक अनुभव मिलेगा।     यह समस्त कार्य भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा संचालित स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना के माध्यम से किए जाएंगे। परियोजना के पूर्ण होने से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक-प्राकृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय की धर्मपत्नी मती कौशल्या साय, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक मती गोमती साय, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष  नीलू शर्मा, विभिन्न बोर्ड-निगमों के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

स्पीकर ओम बिरला का बड़ा बयान, ‘मैंने पीएम मोदी से आग्रह किया था कि न आएं, कुछ भी हो सकता था’

नई दिल्ली  संसद के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है जब लोकसभा अध्यक्ष ने खुद यह स्वीकार किया है कि देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा और सम्मान को सदन के भीतर ही खतरा था. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने ही कल (बुधवार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आने से रोका था. बिरला ने आशंका जताई कि अगर पीएम मोदी कल सदन में आते, तो उनके साथ कोई “अप्रत्याशित और अप्रिय घटना” घट सकती थी. स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि उन्हें खुफिया जानकारी और सदन के भीतर के हालात से यह इनपुट मिला था कि कांग्रेस के सांसद प्रधानमंत्री के आसन (कुर्सी) तक जाकर हंगामा करने और किसी अनहोनी को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा, “मेरे पास जानकारी आई कि कांग्रेस के सांसद पीएम के आसन पर जाकर अप्रत्याशित घटना कर सकते थे. मुझे डर था कि प्रधानमंत्री के साथ कुछ भी हो सकता है. अगर वह घटना हो जाती, तो वह बेहद अप्रिय होती और लोकतंत्र के लिए काला दिन साबित होती.” ‘मैंने पीएम से आग्रह किया: आप मत आइए’ ओम बिरला ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया. उन्होंने कहा, “इस संभावित खतरे और टकराव को टालने के लिए मैंने खुद पीएम से आग्रह किया कि वो सदन में न आएं.” बता दें क‍ि बुधवार शाम को विपक्ष की महिला सांसदों ने पीएम मोदी की खाली कुर्सी को घेर लिया था, जिसके बाद बीजेपी ने आरोप लगाया था कि विपक्ष पीएम पर ‘हमला’ करना चाहता था. अब स्पीकर के इस बयान ने बीजेपी के उन आरोपों की पुष्टि कर दी है कि कल सदन के भीतर का माहौल प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिहाज से सामान्य नहीं था. बीजेपी ने पूछा- क्‍या पीएम पर हमला करने का इरादा था ? बीजेपी सांसद मनोज तिवारी और बृजमोहन अग्रवाल ने विपक्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में सेंध लगाने और उन पर ‘हमला’ करने की साजिश का बेहद गंभीर आरोप लगाया था. मनोज तिवारी ने तीखा सवाल किया कि विपक्षी सांसद हार की बौखलाहट में पीएम की कुर्सी तक क्यों आए? क्या इनका इरादा पीएम पर हमला करना था? वहीं, बृजमोहन अग्रवाल ने इसे कांग्रेस की ‘प्री-प्लान’ साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि महिला सांसदों को ढाल बनाकर पीएम को घेरना और भाषण से रोकना न केवल सुरक्षा से खिलवाड़ है, बल्कि पूरे सदन की अवमानना है, जिस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

पश्चिम बंगाल में महिलाओं को मिलेगा ₹500 का लाभ, गिग वर्कर्स के लिए भी ऐलान, ममता सरकार ने खोला खजाना

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4.06 लाख करोड़ रुपये का अंतरिम बजट पेश किया. इस बजट में सबसे बड़ा ऐलान ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को लेकर हुआ है. राज्य की 2.42 करोड़ महिलाओं के लिए मासिक सहायता राशि में 500 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. यह बढ़ी हुई राशि फरवरी 2026 से ही लागू हो जाएगी. इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. क्या है बंगाल बजट की अन्य बड़ी घोषणाएं? पश्चिम बंगाल बजट में केवल महिलाओं ही नहीं, बल्कि अन्य वर्गों पर भी फोकस किया गया है. गिग वर्कर्स यानी जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों को अब ‘स्वास्थ्य साथी’ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा. इसके अलावा आंगनवाड़ी वर्कर्स और सहायिकाओं के मानदेय में अप्रैल 2026 से 1000 रुपये की वृद्धि की जाएगी. बेरोजगारी दूर करने के लिए युवाओं को 1500 रुपये प्रति माह का भत्ता देने की नई योजना भी शुरू होगी. ‘लक्ष्मी भंडार’ के बदले समीकरण लक्ष्मी भंडार योजना ममता बनर्जी की सबसे सफल योजनाओं में से एक मानी जाती है. वर्तमान में इसमें सामान्य वर्ग को 1000 और एससी-एसटी वर्ग को 1200 रुपये मिलते हैं. अब 500 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी के बाद यह राशि और बढ़ जाएगी. जानकारों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं के भारी मतदान ने एनडीए की जीत तय की थी. इसी पैटर्न को देखते हुए बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. महिलाओं को लुभाने की मची होड़ आजकल राजनीति में महिलाएं नई ‘किंगमेकर’ बनकर उभरी हैं. पश्चिम बंगाल ही नहीं, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी यही ट्रेंड दिख रहा है. महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ के तहत 2.5 करोड़ महिलाओं को दिसंबर और जनवरी की किस्त एक साथ देने का फैसला किया है. तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने भी ‘कलैग्नार मगलिर उरीमई थिट्टम’ योजना का दायरा बढ़ा दिया है. सभी पार्टियां जानती हैं कि महिलाओं का वोट जीत की गारंटी है.

भोपाल से विदिशा, रायसेन और सीहोर तक मेट्रो, राजधानी के सैटेलाइट शहरों को मिलेगा फायदा

भोपाल  मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत अब भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी बीएमआर में भी रूट तय होगा। भोपाल से सीहोर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ की ओर मेट्रो की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। बीएमआर के लिए बन रही डीपीआर में इसके प्रावधान किए जा रहे हैं। भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन की योजना में मेट्रो को शामिल करने शासन ने बीडीए को निर्देशित किया है। रोड नेटवर्क के साथ मेट्रो नेटवर्क से पास के शहरों में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप को भोपाल से सीधे जोड़ा जाएगा। भोपाल शहर में 6 लाइनें तय अभी मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट में भोपाल शहर में ही छह लाइनें तय की हुई है। 103 किमी लंबी लाइन में से फिलहाल 6.22 किमी की लाइन पर मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू किया जा चुका है। पहले चरण की दो लाइनों के 32 किमी में मेट्रो को आमजन यात्रियों के साथ चलाने 2028 से 2030 तक की समय सीमा तय की है। मेट्रो रेल कारपोरेशन धीरेधीरे मेट्रो को चरणबद्ध तरीके से तैयार करने की योजना बना रहा है। अब वहभोपाल के भीतर के साथ मेट्रोपॉलिटन रीजन वाले क्षेत्रों तक भी रूट तय करेगा। उपनगरीय परिवहन में बदलेगी मेट्रो बीएमआर की डीपीआर तैयार करने वाले अफसरों के अनुसार भोपाल के लिए लोकल ट्रांसपोर्ट का हिस्सा बनने जा रही मेट्रो बीएमआर में उपनगरीय रेल की भूमिका में रहेगी। इससे मौजूदा व बीएमआर में प्रस्तावित उपनगरों को जोड़ा जाएगा। बीएमआर में भोपाल की बसाहट को सैटेलाइट टाउनशिप से पास के शहरों में शिफ्ट किया जाएगा। यहां आबादी का दबाव बढऩे से रोकने के लिए नई टाउनशिप विकसित होगी। इन्हीं को आवाजाही में मदद के लिए मेट्रो उपनगरीय सेवा विकसित होगी। सवाल: छह किमी में दस साल, बीएमआर कब बनेगी? बीएमआर में मेट्रो की प्लानिंग तो ठीक है, लेकिन मौजूदा 103 किमी के प्रस्तावित नेटवर्क में से महज सात फीसदी ही बन पाया है। शहरी नेटवर्क का 93 फीसदी बनना बाकी है। सात फीसदी निर्माण में यूरोपियन बैंक से लोन लिया हुआ है। बचे हुए हिस्से को बनाने और बीएमआर से जुड़े शहरों तक मेट्रो पहुंचाने कई गुना ज्यादा बजट और समय लगेगा। मेट्रो, रोड सबका विकल्प है बीएमआर के लिए शासन की मंशा के अनुसार योजना तय की जा रही है। संबंधित क्षेत्रों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट सभी माध्यमों से जोड़ा जाएगा। मेट्रो, रोड सबका विकल्प है। -संजीव सिंह, अध्यक्ष बीडीए- संभागायुक्त

चंबल में रेत माफियाओं पर भारी प्रहार, 2 दिनों में मुरैना में 4 करोड़ से ज्यादा की अवैध रेत की गई नष्ट

मुरैना  चंबल की रेत पर वर्षों से चल रहा माफिया का खेल अब प्रशासन के सीधे निशाने पर आ गया है. जिले के कलेक्टर ने रेत माफिया की कमर तोड़ने के लिए अधिकारियों को पूरी तरह फ्री हैंड दे दिया है. टास्क फोर्स की बैठक के बाद वन विभाग, पुलिस, राजस्व, परिवहन और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू की. चंबल में करोड़ों की रेत नष्ट की गई महज दो दिनों में 4 करोड़ रुपये से अधिक की चंबल में रेत नष्ट की जा चुकी है. बुधवार की सुबह से शाम तक 20 जेसीबी और 5 लोडरों की मदद से चंबल राजघाट स्थित पिपरई और भानपुर क्षेत्र में रेत को नष्ट किया गया. इस सख्त कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है, वहीं हाईवे पर लगने वाली रेत मंडी भी दो दिनों से बंद पड़ी है. प्रशासन का यह अभियान अगले 15 दिनों तक लगातार जारी रहेगा. बीते रोज जिला कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने टास्क फोर्स की बैठक में स्पष्ट निर्देश देते हुए अधिकारियों को रेत माफियाओं पर सख्ती से कार्रवाई करने के लिए फ्री हैंड दे दिया था. इसके बाद प्रशासनिक मशीनरी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर आई. कलेक्टर के निर्देश पर वन मंडलाधिकारी हरिश्चंद्र बघेल के नेतृत्व में वन विभाग, पुलिस, परिवहन, राजस्व और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने चंबल राजघाट पुल क्षेत्र के पिपरई और भानपुर में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की. चंबल नदी किनारे डंप कर रखी गई हजारों ट्राली रेत नष्ट मंगलवार और बुधवार को लगातार चली इस कार्रवाई में करीब 20 जेसीबी मशीनों और 5 लोडरों की मदद से 16,500 से अधिक ट्रॉली अवैध रेत को नष्ट किया गया. अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में चंबल नदी किनारे डंप कर रखी गई लगभग 1000 से अधिक ट्रॉली से अधिक रेत को नष्ट किया गया, जबकि बुधवार सुबह से शाम तक दोबारा अभियान चलाकर करीब 15,000 ट्रॉली अवैध रेत को मिट्टी में मिला दिया गया. यह रेत, माफियाओं द्वारा अवैध रूप से खनन कर नदी किनारे जमा की गई थी.  कार्रवाई के दौरान 150 पुलिस के जवान और 50 वन रक्षक तैनात दो दिनों में नष्ट की गई रेत का बाजार मूल्य करीब 4 करोड़ 10 लाख रुपये आंका गया है. प्रशासन इसे चंबल क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बता रहा है. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. मौके पर करीब 150 पुलिस जवान और 50 वन रक्षक तैनात रहे, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था या विरोध की स्थिति न बन सके. इस बड़ी कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है. हाईवे पर लगने वाली रेत मंडियां भी बीते दो दिनों से बंद पड़ी हैं. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि आने वाले दिनों में भी लगातार कार्रवाई जारी रहेगी. चंबल में अवैध रेत कारोबार पर अब आर-पार की लड़ाई के संकेत साफ नजर आ रहे हैं. ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता पूरी तरह बंद किया गया कलेक्टर के निर्देश पर चंबल नदी से आने-जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर जेसीबी मशीनों से गहरे गड्ढे खुदवाए गए हैं, जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है. रेत विनिष्टीकरण की इस बड़ी कार्रवाई में मंगलवार को 6 जेसीबी मशीनों का उपयोग किया गया, जबकि बुधवार को अभियान और तेज करते हुए 20 जेसीबी और 5 लोडरों की मदद ली गई. कार्रवाई के दौरान वनमंडलाधिकारी हरिशचंद्र बघेल के नेतृत्व में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र पाल सिंह डाबर, एसडीएम मुरैना बीएस कुशवाह, जिला खनिज अधिकारी सुखदेव निर्मल, पुलिस लाइन आरआई रविकांत शुक्ला, सूबेदार गजेंद्र सिंह परिहार, राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य के एसडीओ सहित संबंधित राजस्व अमला मौके पर मौजूद रहा. 

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