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निवेशकों के लिए चौंकाने वाली खबर! सोना-चांदी में अचानक तेजी, चांदी ₹21,000 बढ़ी

 इंदौर / नई दिल्ली    सोना-चांदी की कीमतों में बीते कुछ दिनों से क्रैश होने का सिलसिला देखने को मिल रहा था, लेकिन मंगलवार को इसपर ब्रेक लग गया. एमसीएक्स पर वायदा कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही Gold-Silver की कीमतों में तूफानी तेजी के साथ ओपनिंग हुई. चांदी बीते सोमवार को गिरकर 2.25 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई थी, लेकिन पिछले बंद की तुलना में एक झटके में 21,000 रुपये से ज्यादा चढ़ गई. सोना भी कम नहीं दिखा और खुलने ही 5,000 रुपये से ज्यादा महंगा हो गया. चांदी की कीमतों में फिर उछाल  सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कारोबार शुरू होने पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी के वायदा भाव में तगड़ा उछाल देखने को मिला. 1 Kg Silver Price एक झटके में अपने पिछले बंद भाव से 21,000 रुपये से ज्यादा महंगी हो गई.सोमवार को MCX Silver Price 2,36,261 रुपये था और मंगलवार को ये खुलने के साथ ही 2,57,480 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई.  तेजी के बाद भी हाई से इतनी सस्ती Silver मंगलवार को आई तूफानी तेजी के बावजूद अभी चांदी का वायदा भाव अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से काफी सस्ता बना हुई है. बता दें कि 29 जनवरी को MCX Silver Price ने इतिहास रचते हुए पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का आंकड़ा पार किया था और 4,30,048 रुपये प्रति किलो के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी. इस स्तर से अभी भी चांदी का भाव 1,62,568 रुपये सस्ती (Silver Cheaper From High) मिल रही है.  Gold Rate में भी तगड़ी तेजी चांदी के अलावा सोने की कीमत में भी तेजी आई है और MCX Gold Rate सोमवार के अपने बंद 1,43,991 रुपये प्रति 10 ग्राम से उछलकर शुरुआती कारोबार में ही 1,49,485 रुपये पर पहुंच गया. इस हिसाब से 10 Gram 24 Karat Gold Rate 5,494 रुपये बढ़ गया.  सोने का लाइफ टाइम हाई लेवल से तुलना करें, तो ये भी उच्चतम स्तर के काफी सस्ता मिल रहा है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाले गोल्ड का हाई रेट 1,93,096 रुपये है, जो इसने चांदी के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए बीते 29 जनवरी को ही छुआ था और इसके बाद लगातार ये Silver Price की तरह ही क्रैश होता जा रहा था. वहीं अब मंगलवार को अचानक आई बड़ी तेजी के बाद भी ये अभी इस स्तर से 43,611 रुपये कम पर मिल रहा है.

MP Weather Alert: 25 जिलों में बारिश और ठंडी हवाएं, अगले 3 दिनों में बढ़ेगी ठिठुरन

भोपाल  मध्य प्रदेश में इन दिनों मौसम और ठंड में बदलाव देखने को मिल रहा है. अधिकतर जिलों में बादल छाए रहने से तापमान में गिरावट आई है. मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि, अगले 3 दिनों में मध्य प्रदेश के 25 जिलों में मावठा की बारिश हो सकती है. जिससे तापमान में और गिरावट आएगी. बारिश की आशंका ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. बीते दिनों कई जिलों में हुई बारिश और ओलावृष्टि से ठंड बढ़ गई थी. हालांकि कई जिलों में बारिश का दौर रुक गया है लेकिन ठंडक बनी हुई है. पूरे प्रदेश में सुबह के समय कोहरा छाया रहता है. मौसम में बदलाव के संकेत, मौसमी प्रणालियां सक्रिय मौसम वैज्ञानिक दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि, ”वर्तमान में एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में चक्रवातीय परिसंचरण के रूप में सक्रिय है. इसके साथ एक द्रोणिका भी जुड़ी हुई है, जो मौसम में बदलाव के संकेत दे रही है.” उन्होंने बताया कि, ”दक्षिणी हरियाणा और उससे लगे उत्तरी राजस्थान के क्षेत्र में एक प्रेरित चक्रवात बना हुआ है. इस चक्रवात से लेकर मध्य महाराष्ट्र तक एक लंबी द्रोणिका विकसित हुई है, जो गुजरात होते हुए आगे बढ़ रही है. इस मौसमी प्रणाली के कारण संबंधित क्षेत्रों में मौसम की गतिविधियों में वृद्धि देखी जा सकती है.” मध्य प्रदेश में बारिश का अनुमान मौसम वैज्ञानिक के अनुसार, ”पूर्वोत्तर भारत के ऊपर लगभग 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर पश्चिमी जेट स्ट्रीम की हवाएं सक्रिय हैं. जिनकी रफ्तार करीब 232 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई है. इन तेज हवाओं का प्रभाव आने वाले दिनों में मौसम के मिजाज को और प्रभावित कर सकता है.” दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि, ”5 फरवरी से एक नए पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने की संभावना है. इसके असर से कुछ इलाकों में बादल, हल्की से मध्यम वर्षा और तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है.” नीमच-मंदसौर में गिरे ओले  नीमच और मंदसौर जिले में तेज हवाएं चलीं, इस दौरान ओले भी गिरे. कई गांव सफेद बर्फ की चादर से ढंक गए. इसके अलावा ग्वालियर, उज्जैन, धार और मुरैना में भी हल्की बारिश हुई. बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. क्योंकि बीते दिनों हुई बारिश से किसानों की फसलें नष्ट हो गई हैं. गेहूं की फसल, जो अभी फूलने की स्टेज में है, खराब हो सकती है. बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता कुछ दिनों से मध्य प्रदेश में रुक-रुककर बारिश हो रही है. जिससे किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है. खंडवा सहित कई जिलों में खेतों में खड़ी लगभग 50 से 60 फीसदी तक फसल नष्ट हो गई है. जिसने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. रविवार को नीमच और मंदसौर जिलों में तेज आंधी और बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई. नीमच के जीरन क्षेत्र में नींबू के आकार के ओले गिरे, जिससे सड़कें बर्फ जैसी दिखाई दीं. इससे अफीम, गेहूं और अन्य फसलों को नुकसान हुआ है. किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल फूलों की अवस्था में है, इसलिए बारिश और ओलावृष्टि से पैदावार पर असर पड़ सकता है.

MP हाईवे पर 21 करोड़ खर्च, फिर भी हर दिन 33 दुर्घटनाएं और 10 जानें जाती हैं, हादसों का सिलसिला नहीं थम रहा

भोपाल. मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। बावजूद इसके नेशनल हाईवेज की जमीनी हकीकत आज भी डरावनी है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने एक चौंकाने वाला विरोधाभास उजागर किया है।  प्रदेश में जहां हाईवे के रखरखाव और विकास पर हर दिन औसतन 21 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आंकड़ों की मानें तो एमपी के हाईवे पर हर दिन औसतन 33 सड़क हादसे हो रहे हैं, जिनमें रोजाना 10 से 11 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। पांच साल में खर्च हुए 38 हजार 700 करोड़ सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, साल 2020-21 से लेकर 2024-25 तक MP में हाईवे के विकास और मरम्मत के लिए कुल 38 हजार 700 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसका मतलब है कि सरकार हर साल औसतन 7 हजार 740 करोड़ राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण, डवलपमेंट और सुरक्षा कार्यों पर खर्च कर रही है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद सड़कों पर सुरक्षित सफर की गारंटी नहीं मिल पा रही है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के लिखित उत्तर से सामने आया है कि मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन करीब ₹21 करोड़ हाईवे मेंटेनेंस और विकास पर खर्च हो रहे हैं , इसके बावजूद रोजाना औसतन 33 सड़क हादसे हुए और 10 से 11 लोग अपनी जान गवां रहे हैं। हर साल कितना खर्च हो रहा है? सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार 2020-21 से 2024-25 तक कुल हाइवे मेंटेनेंस व विकास बजट (MP): लगभग ₹38,700 करोड़ यानी औसतन ₹7,740 करोड़ हर साल है। सरकार के मुताबिक यह राशि राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव, चौड़ीकरण, उन्नयन और सड़क सुरक्षा पर खर्च की गई। 12 हजार से ज्यादा हादसे हर साल लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों को देखें तो एमपी में 2021 से लेकर 2025 तक पांच सालों में 61,176 दुर्घटनाएं हुई और इन हादसों में 19,416 मौतें हुईं। हर साल औसतन एमपी में 12,235 हादसे हो रहे हैं और 3,883 मौतें प्रति वर्ष हो रहीं हैं। हर दिन ₹21 करोड़ खर्च, फिर चूक कहां? केंद्र सरकार के अनुसार यह बजट सड़क चौड़ीकरण, मरम्मत व रखरखाव, सुरक्षा कार्य, और नई परियोजनाओं पर खर्च किया गया। बीते पांच साल में मध्य प्रदेश को 4,000 किमी से ज्यादा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं भी सौंपी गईं। इसके बावजूद हादसों की संख्या यह सवाल खड़ा करती है कि क्या मेंटेनेंस की गुणवत्ता, हाइवे डिजाइन और सुरक्षा इंतजाम जमीन पर उतने प्रभावी हैं? सरकार ने गिनाईं वजहें लोकसभा में दिए जवाब में मंत्रालय ने हादसों के लिए तेज रफ्तार, लापरवाही, ओवरलोडिंग, सड़क व वाहन की स्थिति को जिम्मेदार बताया। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लैक स्पॉट सुधार, साइनज, लाइटिंग, सर्विस रोड और निगरानी पर खर्च की वास्तविक असरदार मॉनिटरिंग भी जरूरी है। डेवलपमेंट और मेंटेनेंस पर खर्च हुई राशि(करोड़ रुपए) वर्ष खर्च 2020–21 8,250 2021–22 9,006 2022–23 6,210 2023–24 7,447 2024–25 7,799 पांच साल में 19 हजार से ज्यादा मौतें लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच मध्य प्रदेश के हाईवे पर कुल 61 हजार 176 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों ने प्रदेश को गहरे जख्म दिए हैं। इनमें 19 हजार 416 लोगों की मौत हो गई। अगर इसका सालाना औसत निकालें, तो प्रदेश में हर साल 12 हजार 235 हादसे हो रहे हैं। साथ ही 3 हजार 883 लोग काल के गाल में समा रहे हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि करोड़ों के निवेश के बाद भी हाईवे डेथ ट्रैप बने हुए हैं। मध्य प्रदेश: राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना रिपोर्ट (2021-2025) साल कुल हादसे (Total Accidents) कुल मौतें (Total Deaths) 2021 11,030 3,389 2022 13,860 4,025 2023 14,561 4,476 2024 13,937 4,644 2025 7,788 2,882 कुल (Total) 61,176 19,416 करोड़ों के खर्च के बाद चूक कहां? केंद्र सरकार का दावा है कि बीते पांच सालों में मध्य प्रदेश को चार हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं सौंपी गईं। बजट का बड़ा हिस्सा सुरक्षा इंतजामों और मरम्मत पर खर्च हुआ। लेकिन हादसों की बढ़ती संख्या ने मेंटेनेंस की गुणवत्ता और हाईवे डिजाइन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या साइन बोर्ड, लाइटिंग और सर्विस रोड जैसे सुरक्षा इंतजाम कागजों से उतरकर जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हो पा रहे हैं?  

Budget 2026 में एमपी के रेलवे नेटवर्क को 7500 करोड़ का समर्थन, इस मंडल को मिलेगा विशेष गिफ्ट

ग्वालियर देश के आम बजट के साथ रेलवे का बजट (Railway Budget 2026) भी पेश किया गया है। इसमें रेल मुसाफिरों की सुरक्षा पर फोकस रहा है। रेल हादसों को रोकने के लिए मुख्य रेल मार्गों पर कवच (ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) लगाने के काम को तेज किया जाएगा। रेल अधिकारियों का कहना है इससे रेल एक्सीडेंट की आशंका को काफी हद तक खत्म किया जाएगा। इसके अलावा रेल बजट में इस बार गेज कन्वर्जन की राशी को 4284 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 4600 करोड़ रुपए किया है और सिग्नलिंग और टेलीकॉम सिस्टम को पुख्ता करने के लिए 7500 रुपए खर्च होंगे। इसमें कवच सुरक्षा भी शामिल है। क्या है ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम रेल अधिकारियों का कहना है ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम एक आधुनिक कवच प्रणाली है। इस पर करीब 2012 से प्रयोग चल रहा है। इसे अनुसंधान, अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) ने तैयार किया है। इससे रेल दुर्घटनाओं की गिनती में कमी आएगी। पिंक बुक से सामने आएंगी सौगातें ग्वालियर, आगरा, झांसी, सहित दूसरे स्टेशन को रेल बजट में क्या सौगात मिली है इसका खुलासा पिंक बुक के जारी होने पर सामने आएगा। रेल अधिकारियों के मुताबिक पिंक बुक 2 फरवरी को जारी किए जाने की उम्मीद है। झांसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंहका कहना है पिंक बुक जारी होने पर पता चलेगा कि एनसीआर को कितना बजट मिला है इसमें ग्वालियर को क्या सहूलियतें मिलीं हैं। मिलेगा फायदा, यह भी उम्मीद     केंद्र सरकार ने बजट में 20 हजार से अधिक पशु डॉक्टरों की उपलब्धता की बात है। जिले में पशु चिक्तिसकों की काफी कमी है। स्थिति यह है कि प्रदेश की सबसे गोशाला में भी पशु नहीं है,ऐसे में जिले को भी डॉक्टर मिलने से काफी फायदा मिलेगा।     वीजीएफ/पुंजीगत सहायता के माध्यम से प्रत्येक जिले में एक महिला छात्रावास बनाया जाएगा। इससे जिले को महिला छात्रावास मिल सकेगा।     बजट में 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर प्रयोगशालाओं की स्थापना होगी। इसमें जिले में भी दो माध्यमिक विद्यालयों व एक महाविद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर प्रयोगशालाएं खोलने की उम्मीद है।     ग्वालियर जिले में भी उच्च शिक्षा एसटीईएम संस्थानों में महिला छात्रावास बनाया जाएगा। 

C+1 फॉर्मूला: भारत का बड़ा कदम, रेड कारपेट पर स्वागत, यही बनेगा सोने की चिड़ीया का भविष्य

नई दिल्ली ज‍ियोपॉल‍िट‍िक्‍स में अब खेल इकोनॉमी के जर‍िये खेला जा रहा है. आपको याद होगा, जब कोव‍िड आया तो पूरा का पूरा सप्‍लाई चेन ह‍िलने लगा. यूक्रेन संकट ने आग में घी का काम क‍िया.दुन‍िया को समझ नहीं आया क‍ि अब जाएं तो जाएं कहां.ज‍िन देशों के साथ वे कारोबार कर रहे थे,वे फंस चुके थे. रही सही कसर अमेर‍िकी टैर‍िफ ने पूरी कर दी. अब दुन‍िया को डर लग रहा क‍ि अगर चीन पर अमेर‍िकी सख्‍ती बढ़ी, ताइवान पर हमला हुआ तो मुश्क‍िल होगी. इसल‍िए ज्‍यादातर देश ‘चीन + 1’ (C+1) फार्मूला अपना रहे हैं. भारत यह भांप चुका है. इसील‍िए बजट में सरकार ने ऐसे देशों, ऐसी कंपन‍ियों के ल‍िए रेड कारपेट ब‍िछा द‍िए हैं. मोबाइल, लैपटॉप और सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों को टैक्स में छूट दी गई है. ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम को बजट से ताकत दी है ताकि विदेशी कंपनियां चीन छोड़कर भारत आएं. मैसेज साफ है क‍ि अगर ताइवान या चीन में संकट आता है, तो भारत दुनिया की बैकअप फैक्ट्री बनने के ल‍िए पूरी तरह तैयार है. और यहीं से फ‍िर सोने की च‍िड़‍िया बनने का रास्‍ता खुलेगा. 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का एक्सप्रेसवे दुनिया की 40% मैन्युफैक्चरिंग पर चीन का कब्जा है. यहीं से पूरी दुन‍िया में जरूरत की बहुत सारी चीजें जा रही हैं. लेकिन साल 2026 ‘टर्निंग पॉइंट’होने जा रहा है. शी जिनपिंग की विस्तारवादी नीतियों और ब्लैक बॉक्स जैसी अर्थव्यवस्था से तंग आकर ग्लोबल कंपनियां अब एक ऐसे देश की तलाश में हैं, जो न केवल लोकतांत्रिक हो बल्कि जिसके पास चीन को टक्कर देने वाला स्केल भी हो.भारत ने इसी ‘चीन प्लस वन’ (C+1) मौके को भुनाने के लिए अपना ‘रेड कारपेट’ बिछा दिया है. यह सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का वह एक्सप्रेसवे है जो भारत को फिर से ‘विश्व गुरु’ की गद्दी पर बैठाएगा. दुनिया को आखिर भारत की जरूरत क्यों है?     सप्लाई चेन का वेपनाइजेशन: कोरोना काल में चीन ने मेडिकल सप्लाई रोककर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई. दुनिया समझ गई कि एक ही सप्लायर पर निर्भर रहना आत्मघाती है. अब एपल (Apple) और सैमसंग (Samsung) जैसी कंपनियों को अपनी सुरक्षा के लिए भारत जैसा भरोसेमंद पार्टनर चाहिए.     बूढ़ा होता चीन: चीन की वर्किंग पॉपुलेशन तेजी से घट रही है. वहां मजदूरी महंगी हो गई है. दूसरी ओर, भारत के पास 65% युवा आबादी है, जो अगले 30 साल तक दुनिया को सबसे सस्ती और कुशल लेबर दे सकती है.     ताइवान का साया: दुनिया की 90% एडवांस चिप्स ताइवान में बनती हैं. चीन की ताइवान पर नजर ने वैश्विक टेक कंपनियों को डरा दिया है. उन्हें एक ऐसा ‘बैकअप’ चाहिए जो युद्ध की स्थिति में भी ग्लोबल सप्लाई चेन को चालू रख सके. चीन की राह रुकी, तो भारत को कैसे होगा बंपर फायदा?     इलेक्ट्रॉनिक्स का नया गढ़: बजट 2026 में मोबाइल और लैपटॉप कंपोनेंट्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाना एक सोची-समझी चाल है. भारत अब केवल असेंबली नहीं, बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग का हब बन रहा है. 2025 तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 120 बिलियन डॉलर पार करने का अनुमान है.     सेमीकंडक्टर: चीन की दुखती रग: चीन चिप वॉर में अमेरिका से पिछड़ रहा है. भारत ने इसका फायदा उठाते हुए 1.5 लाख करोड़ रुपये का ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ शुरू किया है. टाटा और माइक्रोन (Micron) जैसी कंपनियों के प्लांट भारत को उस लिस्ट में खड़ा कर देंगे, जहाँ आज केवल ताइवान और चीन हैं.     केमिकल सेक्टर में ‘प्रिवी’ जैसे खिलाड़ियों का दबदबा: चीन में पर्यावरण नियमों की सख्ती के कारण वहां के केमिकल प्लांट बंद हो रहे हैं. इसका सीधा फायदा प्रिवी स्पेशलिटी और आरती इंडस्ट्रीज जैसी भारतीय कंपनियों को मिल रहा है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन की जगह ले रही हैं. कंपनियों को क्या मिल रहा है? PLI स्कीम: जितना बनाओगे, उतना पैसा पाओगे. 14 से ज्यादा सेक्टरों में सरकार कंपनियों को कैश इंसेंटिव दे रही है. यह चीन की सब्सिडी का भारतीय जवाब है. नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम: पहले भारत में जमीन से लेकर बिजली तक के लिए 50 दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे. अब एक ही पोर्टल पर सारी क्लीयरेंस मिल रही है. ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ अब केवल कागजों पर नहीं, जमीन पर दिख रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश: बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 11.11 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. पीएम गतिशक्ति के तहत नए पोर्ट्स और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बन रहे हैं, ताकि भारत से माल भेजना चीन से भी सस्ता पड़े.

जबलपुर में 300 करोड़ का फ्लाईओवर बनेगा, MP बजट में जाम को कम करने की दिशा में बड़ा कदम

 जबलपुर   जबलपुर शहर के गढ़ा क्षेत्र में त्रिपुरी चौक, मेडिकल तिराहा और मेडिकल कॉलेज के सामने रोजाना लगने वाले भीषण जाम से राहत दिलाने के लिए लगभग ढाई से तीन किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के निर्माण की तैयारी की जा रही है। लोक निर्माण विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। राज्य सरकार के बजट (MP Budget 2026) में स्वीकृति मिलने की स्थिति में यह जबलपुर शहर का सातवां फ्लाईओवर होगा। इस फ्लाईओवर के बन जाने से गढ़ा, त्रिपुरी चौक और मेडिकल क्षेत्र के रहवासियों को रोजाना लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही ए्बुलेंस, फायर ब्रिगेड सहित अन्य इमरजेंसी सेवाओं को भी जाम में फंसना नहीं पड़ेगा। ऐसा हो सकता है फ्लाईओवर का स्वरूप करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस फ्लाईओवर (Flyover Construction) की एक रैंप आईसीएमआर के सामने उतारे जाने की संभावना है, जबकि दूसरा रैंप सूपाताल क्षेत्र में बनाया जा सकती है। इसके अतिरिक्त साइड रैंप संजीवनी नगर और धनवंतरी नगर चौराहा की ओर उतारे जाने की योजना है। इससे मेडिकल मार्ग पर यातायात का दबाव काफी हद तक कम होगा और मरीजों, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ व मेडिकल छात्रों को सुगम आवागमन मिलेगा। वर्तमान में त्रिपुरी चौक से पंडा की मढिय़ा होते हुए इमरती तालाब और गंगा नगर तिराहा तक प्रतिदिन जाम की स्थिति बनी रहती है। इस मार्ग से गुजरने वाली 40 से अधिक कॉलोनियों के रहवासी लंबे समय से यातायात अव्यवस्था से परेशान हैं। दो फ्लाईओवर चालू, एक निर्माणाधीन शहर में मदनमहल-दमोहनाका और कटंगा फ्लाईओवर पहले ही चालू हो चुके हैं, जबकि सगड़ा फ्लाईओवर निर्माणाधीन है। पेंटीनाका फ्लाईओवर का काम रक्षा विभाग से एनओसी मिलते ही शुरू होना है। बंदरिया तिराहासा ईं मंदिर फ्लाईओवर को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं विजयनगर-धनवंतरी नगर फ्लाईओवर को बजट की मंजूरी मिलना बाकी है। इसके अलावा रेलवे पुल नंबर-2 से रद्दी चौकी फ्लाईओवर का प्राकलन तैयार किया जा रहा है और आईएसबीटी से आईटीआई फ्लाईओवर परियोजना पाइपलाइन में है, जिसके लिए केन्द्रीय रिजर्व निधि से फंड मिलना प्रस्तावित है। इन सबके बीच गढ़ा क्षेत्र में प्रस्तावित फ्लाईओवर शहर का सातवां फ्लाईओवर होगा।

उज्जैन के सप्त सागरों की स्थिति पर एनजीटी का सख्त रुख, पर्यावरणीय संकट को लेकर उठाई आवाज

उज्जैन उज्जैन की धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यावरणीय पहचान माने जाने वाले ‘सप्त सागर’ लगातार उपेक्षा, अतिक्रमण और प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं। इस गंभीर स्थिति पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाते हुए मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को सीधे दखल देने को कहा है। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि आदेशों की अवहेलना और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सेंट्रल जोन बेंच के न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि स्थानीय प्रशासन न तो पूर्व आदेशों का समुचित पालन कर पाया और न ही समय पर संतोषजनक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक शिथिलता गंभीर परिणाम ला सकती है। अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई सुनवाई में सामने आया कि खसरा नंबर 1281 में दर्ज गोवर्धन सागर (कुल रकबा 36 बीघा) के 18.5 बीघा से अधिक हिस्से पर अवैध कब्जा हो चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस भूमि पर किसी भी न्यायालय का कोई स्टे नहीं है, इसके बावजूद अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए एनजीटी ने शासन-प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि सप्तसागर के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य मिशन मोड में किया जाए। ट्रिब्यूनल ने प्रमुख सचिव (पर्यावरण) को मासिक निगरानी कर रिपोर्ट पेश करने और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी सात सागरों के पानी की गुणवत्ता की जांच कर हेल्थ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। पवित्र सरोवर बने नालियां आवेदक प्रशांत मौर्य और बाकिर अली रंगवाला की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने माना कि उज्जैन के रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धन सागर, रत्नाकर सागर, विष्णु सागर और पुरुषोत्तम सागर, सभी की हालत दयनीय हो चुकी है। उज्जैन मास्टर प्लान-2021 के संदर्भ में ट्रिब्यूनल ने गंभीर टिप्पणियां करते हुए कहा कि तालाबों को कचरा डंपिंग यार्ड में तब्दील कर दिया गया है। शहर का अनुपचारित सीवेज सीधे इन जल निकायों में प्रवाहित हो रहा है। अवैध निर्माणों और गंदे पानी के कारण जल गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। जारी रहेगी सुनवाई एनजीटी ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को होगी, जिसमें कलेक्टर और नगर निगम को की गई कार्रवाई की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अगली सुनवाई में प्रशासन को यह बताना होगा कि जमीनी स्तर पर आखिर क्या बदला। संकेत साफ है कि महाकाल की नगरी में आस्था के साथ अब पर्यावरणीय जवाबदेही भी कसौटी पर है। एनजीटी ने गेंद पूरी तरह शासन-प्रशासन के पाले में डाल दी है। एनजीटी के मुख्य निर्देश ये     अतिक्रमण हटाना : खसरा नंबर 1281 (गोवर्धन सागर) सहित सभी सातों सागरों से तत्काल और पूर्ण अतिक्रमण हटाने के निर्देश।     सीवेज पर पूर्ण रोक : बिना उपचारित (अनट्रीटेड) गंदा पानी और सीवेज किसी भी जल निकाय में बहाने पर पूरी तरह रोक।     मुख्य सचिव की सीधी भूमिका : राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर कलेक्टर और नगर निगम से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराएं।     मासिक निगरानी तंत्र : प्रमुख सचिव (पर्यावरण) हर महीने प्रगति की निगरानी कर रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में पेश करेंगे।     जल गुणवत्ता की जांच : मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी सात सागरों के पानी के नमूने लेकर हेल्थ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश।     अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य : कलेक्टर और नगर निगम को 20 फरवरी 2026 की अगली सुनवाई से पहले की गई कार्रवाई की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।  

ऊर्जा बचत का संदेश, जिम्मेदारी का आह्वान — कृष्णा गौर ने किया सक्षम महोत्सव का उद्घाटन

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने सोमवार को ऑयल इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित संरक्षण क्षमता महोत्सव (सक्षम 2026) का शुभारंभ किया। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ईंधन संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तेल कंपनियों द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा सक्षम पखवाड़ा एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि ईंधन का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है। राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने बताया कि तेल कंपनियों का यह सामूहिक प्रयास न केवल अपने निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंचेगा, बल्कि इसके सकारात्मक परिणाम भी समाज में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे। कार्यक्रम में बच्चे भी बढ़-चढ़कर सहभागिता कर रहे हैं, इसका उल्लेख करते हुए उन्होंने खुशी जताई और कहा कि नई पीढ़ी में जागरूकता ही वास्तविक बदलाव की नींव है। इस अवसर पर उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे ईंधन की बचत को अपनी दैनिक जीवन शैली का हिस्सा बनाएं, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम में ऊर्जा संरक्षण से जुड़े विभिन्न उपायों और जागरूकता गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला गया। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के अभियान लोगों को जिम्मेदार उपभोक्ता बनने के लिए प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड मध्यप्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक एवं राज्य प्रमुख श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड सेंट्रल जोन के जोनल हेड श्री अश्विन योगेश सिन्हा, गेल इंडिया लिमिटेड से श्री रंजन कुमार, भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के राज्य प्रमुख श्री नीरज उपस्थित रहे।  

चीन का नाम लेकर ट्रंप ने फिर दी चेतावनी, कनाडा और कार्नी पर तीखा हमला

विदेश  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से अपने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को चेतावनी दी है। चीन के साथ व्यापारिक डील करने की मंशा रखने वाले कार्नी को चेतावनी देते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर वह ऐसे किसी समझौते पर आगे बढ़ते हैं, तो अमेरिका बहुत बड़ा कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि चीन कनाडा पर कब्जा कर ले। गौरतलब है कि कार्नी की चीन यात्रा के बाद जब इस तरह की संभावना जताई जा रही थी, तभी ट्रंप ने कार्नी को ऐसी किसी डील पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इतना ही नहीं अमेरिका की धमकी के बाद कनाडा ने भी नरम रुख अपनाते हुए कहा था कि वह ऐसी कोई डील नहीं करने जा रहे। रविवार को एयरफोर्स वन में सवार राष्ट्रपति ट्रंप से जब एक बार फिर से कनाडा द्वारा इस डील पर आगे बढ़ने की बात कही गई, तो उन्होंने इस पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “हम नहीं चाहते कि चीन कनाडा पर कब्जा कर ले। अगर कनाडा यह व्यापारिक सौदा करता है, जो शी जिनपिंग करना चाहते हैं, तो चीन कनाडा के ऊपर हावी हो जाएगा। ऐसा होने के बाद वह सबसे पहला काम आइस हॉकी को खत्म करने का करेंगे।” बड़ा कदम उठाएंगे: ट्रंप रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप से जब पूछा गया कि अगर कनाडा ऐसा कोई समझौता करता है, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया क्या होगी। ट्रंप ने इसका जवाब देते हुए कहा, “अगर वह चीन के साथ कोई समझौता करते हैं, तो हां, हम कोई बहुत बड़ा कदम उठाएंगे।” आपको बता दें अमेरिका के राष्ट्रपति कि कनाडा को लेकर यह तल्ख टिप्पणियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब वह ईरान के प्रति थोड़े नरम नजर आ रहे हैं। इस मुद्दे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तेहरान लगातार अमेरिकी सरकार से बात कर रहा है। हालांकि, इसके बीच मध्य-पूर्व और अरब क्षेत्र में लगातार अमेरिकी सेना की तैनाती बढ़ रही है। ट्रंप की धमकियों के बाद झुका कनाडा? अमेरिका में ट्रंप का शासन आने के यूरोपीय देश और तमाम नाटो सहयोगी देश अब अमेरिका का विकल्प खोजते हुए नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में पहले कनाडा और उसके बाद ब्रिटेन के नेताओं ने चीन की यात्रा की थी। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्को कार्नी की जनवरी में हुई चीन यात्रा के दौरान यह संभावना जताई जा रही थी कि दोनों देशों के बीच में एक व्यापारिक समझौता हो सकता है। हालांकि, बाद में ट्रंप ने 100 फीसदी टैरिफ की धमकी दे दी। इसके बाद कनाडा की तरफ से साफ किया गया कि वह चीन के साथ किसी तरह के व्यापारिक समझौते पर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। ओटावा में पत्रकारों से बात करते हुए कार्नी ने कहा, “चीन के साथ हमने पिछले कुछ वर्षों में पैदा हुई कुछ समस्याओं को ठीक करने के लिए कदम उठाए हैं।” उन्होंने चीन में बने इलेक्ट्रिक वाहनों, कृषि उत्पादों और मछली उत्पादों जैसे व्यापारिक मुद्दों का जिक्र किया। आपको बता दें, राष्ट्रपति ट्रंप के शासन में आने के बाद से ही लगातार अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में दरार आती जा रही है। ट्रंप के शुरुआती समय में वहां पर जस्टिन ट्रूडो का शासन था। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से उन्हें गवर्नर कहकर संबोधित किया था। ट्रंप लगातार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य कहते नजर आते हैं। दोनों देशों के बीच में लगातार तल्खी देखने को मिल रही है।

किसान समृद्ध होंगे तो प्रदेश होगा मजबूत : सीएम डॉ. यादव का बड़ा बयान

कृषि वर्ष आयोजन के लिए सरकार ने तय की रूपरेखा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की आय में हर तरीके से वृद्धि करना ही हमारा मूल लक्ष्य है और यह उनकी फसल का उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने से ही संभव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के एक करोड़ से अधिक किसानों के हित में ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ के समावेशी मॉडल/थीम पर हम वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष (कृषि वर्ष) के रूप में मना रहे हैं। इस दौरान कृषि उत्पादों का मजबूत विपणन तंत्र स्थापित किया जाएगा, साथ ही खाद्य प्रसंस्करण को भी बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उच्च उत्पादकता वाली फसल किस्मों/बीजों का वितरण, डिजिटलीकृत एवं नवीन कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा, प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहन, कृषि स्टार्टअप एवं एफपीओ जैसी कृषि आधारित रोजगार श्रृंखला को बढ़ावा, कृषि से संबद्ध सभी क्षेत्रों को एकीकृत करते हुए जिला-आधारित क्लस्टर्स का विकास तथा खेती-किसानी में फसल चक्र में बदलाव (विविधीकरण) को प्रोत्साहन देना कृषि वर्ष के प्रमुख लक्ष्य तय किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत दिवस किसान कल्याण वर्ष-2026 के आयोजन की रूपरेखा के संबंध में हुई बैठक में यह जानकारी दी। कृषि केबिनेट की जाएगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों का कल्याण हमारे लिए एक मिशन है। इनके समग्रहित में इसके लिए कृषि वर्ष के दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कृषि केबिनेट भी की जाएगी। कृषि केबिनेट की शुरूआत निमाड़ अंचल से की जाएगी। किसान हित के सभी जरूरी निर्णय फील्ड में होने वाली कृषि केबिनेट में ही लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि खेती-किसानी से पर्यावरण में भी व्यापक सुधार आता है। उन्होंने कहा कि निमाड़ क्षेत्र में खेती-किसानी से बढ़ते लाभ और दिनों-दिन सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से दूसरे किसान भी खेती की तरफ बढ़े हैं। इससे निमाड़ अंचल में चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है और इस हरियाली का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि पूरे निमाड़ अंचल का तापमान पहले से चार डिग्री कम हो गया है। यह उपलब्धि हमें किसानों की बेहतरी के लिए और अधिक प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करती है। कृषि में तकनीक के उपयोग पर रहेगा जोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि वर्ष के दौरान प्रदेश के किसानों के लिए कृषि तकनीक के उपयोग पर विशेष फोकस किया जाएगा। यह तय किया जाएगा कि किसानों को उनके सभी प्रकार के हितलाभ एग्री स्टैक के जरिए ही दिए जाएं। इसके लिए किसानों के बैंक खातों को समग्र आई.डी. के साथ जोड़ दिया जाएगा। साथ ही मोबाईल एवं क्यू.आर कोड आधारित तकनीक के उपयोग से कृषि आदानों की उपलब्धता (ट्रेसबिलिटी) भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्नत पशुपालन तकनीक सीखने के लिए ब्राजील जाएंगे मप्र के पशुपालक कृषि वर्ष के दौरान सरकार का एक लक्ष्य दुग्ध उत्पादन में वृद्धि कर इसे वर्तमान से दुगना करना भी है। इसके लिए प्रदेश के पशुपालकों को उन्नत पशुपालन की नई-नई तकनीकें सीखने के लिए ब्राजील भेजा जाएगा। राज्य के पशुपालक उन्नत तकनीक से पशुपालन करेंगे तथा नई विधियों और पद्धतियों से उन्नत नस्लों के पशुओं से दुग्ध उत्पादन के लिए तैयार करेंगे। नई तकनीक से पशुपालकों के दुग्ध उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होगी। पैक्स समितियों के जरिए किसानों को दिलाएंगे अधिकतम सुविधाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि वर्ष के दौरान किसानों को अधिकतम सेवाएं और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वर्ष के दौरान राजस्व विभाग द्वारा ऐसे किसान, जो किसी वजह से अबतक केसीसी धारक नहीं हैं, उनकी सूची निकटतम प्राथमिक सहकारी साख समितियों (पैक्स) को उपलब्ध कराई जाएगी। पैक्स समितियां किसानों से सम्पर्क कर पात्र किसानों से तय प्रारूप में आवेदन लेंगी और बैंक स्तर पर केसीसी मंजूर कराने की कार्यवाही भी करेंगी। मंजूरी वाले प्रकरणों को एकत्रित कर कैम्प लगाकर किसानों को केसीसी वितरित किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में प्रदेश में 4500 से अधिक पैक्स समितियां कार्यरत हैं और करीब 23 लाख से अधिक किसान इन पैक्स समितियों से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। भोपाल में होगा ‘आम महोत्सव’ किसान कल्याण वर्ष आयोजन की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के संबंध में हुई इस बैठक में बताया गया कि आगामी मई माह में भोपाल में आम महोत्सव आयोजित किया जाएगा। महोत्सव में आम उत्पादकों, व्यापारियों, निर्यातकों और विशेषज्ञों की सहभागिता होगी। महोत्सव के दौरान आम की खेती से संबंधित नई तकनीक पर मार्गदर्शन और प्रेजेन्टेशन दिया जाएगा। साथ ही आम की सभी किस्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। राज्यस्तरीय केन्द्रीय गुणवत्ता प्रयोगशाला का होगा लोकार्पण मध्यप्रदेश सहकारी दुग्ध महासंघ (एमपीसीडीएफ) द्वारा भोपाल में तैयार की जा रही राज्यस्तरीय केन्द्रीय गुणवत्ता प्रयोगशाला का लोकार्पण भी कृषि वर्ष के दौरान किया जाएगा। लगभग 12.65 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित हो रही इस बड़ी प्रयोगशाला की सुविधा मिल जाने से पेस्टीसाइड, रसायन, भारी खनिज, वेजीटेबल आइल, शर्करा तथा दुग्ध उत्पादों और दूध में मिलावट की गहन जांच अब स्थानीय स्तर पर ही संभव होगी। इससे दीर्घ अवधि में मिलावटी दूध एवं दूध से बने उत्पादों पर अंकुश लगेगा। गुणवत्तापूर्ण उत्पादन मिलने से उपभोक्ताओं में सांची ब्रांड से बने उत्पादों की साख भी बढ़ेगी। सितम्बर में बालाघाट में होगा ‘सिंघाड़ा एवं मखाना महोत्सव’ किसान कल्याण वर्ष में सितम्बर के संभवत: पहले सप्ताह में बालाघाट जिले में ‘सिंघाड़ा एवं मखाना महोत्सव’ आयोजित किया जाएगा। महोत्सव में सिंघाड़ा उत्पादकों, व्यापारियों, निर्यातकों एवं फसल विशेषज्ञों द्वारा सहभागिता की जाएगी। सिंघाड़ा और मखाना कैश क्राप की तरह हैं। इनका सेवन स्वाथ्यवर्धक होता है। यह महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।

‘हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं’—CJI ने जाति गणना पर रोक लगाने से किया इनकार

नई दिल्ली  देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने सोमवार को 2027 में होने वाली जनगणना से जुड़ी उस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें नागरिकों की जाति संबंधी आंकड़ों को दर्ज करने, वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह माना कि याचिकाकर्ता ने एक जरूरी मुद्दा उठाया है, लेकिन मामले पर न्यायिक रूप से विचार करने से इनकार कर दिया और कहा कि इसे जनगणना अधिनियम 1958 के आलोक में अधिकारियों द्वारा ही देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्र और भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय को निर्देश दिया कि जनहित याचिका दायर करने वाले शिक्षाविद् आकाश गोयल द्वारा इस मुद्दे पर दिए गए सुझावों पर विचार करें। गोयल का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने किया। गुप्ता ने कहा कि नागरिकों के जाति संबंधी विवरण को दर्ज करने, वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले एक पारदर्शी प्रश्नपत्र को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने कहा कि जाति संबंधी आंकड़ों की पहचान के लिए ‘पहले से तय कोई आंकड़ा’ नहीं है। इस पर पीठ ने कहा, ”जनगणना की प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1958 और उसके तहत बनाए गए 1990 के नियमों के अनुसार संचालित होती है जो प्रतिवादी प्राधिकारियों को जनगणना करने के विवरण और तौर-तरीके तय करने का अधिकार देते हैं।” बार एंड बेंच के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने कहा, ”हमारे पास इस बात पर संदेह या शक करने का कोई वैध कारण नहीं है।” उन्होंने कहा, “याचिकाकर्ता और ऐसे ही विचार रखने वाले कई अन्य लोगों द्वारा जताई गई आशंका के मद्देनजर, प्रतिवादी प्राधिकारी किसी भी प्रकार की गलती से बचने के लिए क्षेत्र के विशेषज्ञों की सहायता एवं सहयोग से एक मजबूत व्यवस्था विकसित कर चुके होंगे। हमें लगता है कि याचिकाकर्ता ने महापंजीयक को दिए गए प्रतिवेदन के जरिए कुछ प्रासंगिक मुद्दे भी उठाए हैं…।” यह जनहित याचिका आकाश गोयल ने दायर की थी, जिसमें आगामी जनगणना 2027 में प्रस्तावित जाति गणना पर चिंता जताई गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा था कि जाति गणना के दौरान स्व घोषणा के आधार पर जाति के आंकड़े दर्ज नहीं किए जाने चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि जाति डेटा प्रकृति में लंबे समय तक चलने वाला होगा और बिना सत्यापन के इसका संग्रह खतरनाक हो सकता है। इस पर पीठ ने कहा कि प्राधिकारी कानूनी नोटिस एवं याचिका में उठाए गए सुझावों पर विचार कर सकते हैं और इसी के साथ उसने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। वर्ष 2027 की जनगणना आधिकारिक तौर पर 16वीं राष्ट्रीय जनगणना है। यह 1931 के बाद पहली बार व्यापक जातिगत गणना को शामिल करने वाली और देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी।

प्रदेश के सभी जनपदों में चरणबद्ध रूप से विकसित होंगे एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में औद्योगिक विकास को रोजगार से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर घोषित ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ के लिए सभी जनपदों में उपयुक्त भूमि शीघ्र चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को इस संबंध में हुई महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीति का लक्ष्य ऐसा सक्षम वातावरण तैयार करना है, जहां युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता के अवसर एक ही परिसर में सुलभ हों। उन्होंने निर्देश दिए कि इस महत्वाकांक्षी योजना को स्थानीय आवश्यकताओं और क्षेत्रीय संभावनाओं के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जोन उद्योग, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार तथा उद्योग-सहायता से जुड़े विभागों और सुविधाओं को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने एमएसएमई, सेवा आधारित उद्योगों और नवाचार से जुड़े क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने के लिए प्लग-एंड-प्ले यूनिट और फ्लैटेड फैक्ट्री जैसी आधुनिक सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया, जिससे उद्यमियों को प्रारंभ से ही आवश्यक अवसंरचना उपलब्ध हो सके। बैठक में अवगत कराया गया कि इस योजना के अंतर्गत कॉमन फैसिलिटी सेंटर, टेस्टिंग फैसिलिटी, डिस्प्ले एवं डिजाइन सेंटर, टूल रूम, ईटीपी/सीईटीपी, प्लग-एंड-प्ले यूनिट तथा फ्लैटेड फैक्ट्री की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही युवाओं के कौशल उन्नयन हेतु उद्यमिता प्रशिक्षण, मेंटरिंग, विभिन्न ऋण योजनाओं की जानकारी तथा हैंडहोल्डिंग की व्यवस्था भी इसी परिसर से की जाएगी। बैठक में यह भी बताया गया कि योजना को चरणबद्ध रूप से प्रदेश के सभी जनपदों में लागू किए जाने का प्रस्ताव है। प्रत्येक जनपद में न्यूनतम 50 एकड़ क्षेत्रफल में एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन विकसित किए जाएंगे। प्रस्तावित जोन के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्र, फ्लैटेड फैक्ट्री, वाणिज्यिक क्षेत्र, सड़क, कॉमन फैसिलिटी, सर्विस सेक्टर, ग्रीन एरिया और कार्यालय स्पेस का संतुलित लेआउट तैयार किया गया है। इसके साथ ही ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड स्किल डेवलपमेंट सेंटर’ की स्थापना भी प्रस्तावित है, जिसमें प्रशिक्षण हॉल, कॉन्फ्रेंस रूम, एक्सटेंशन काउंटर और उद्योग-सहायता से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि ऑपरेशनल मॉडल के अंतर्गत स्वरोजगार एवं उद्यमिता प्रशिक्षण, कौशल विकास, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप तथा संबंधित उद्योगों में वेतन आधारित रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार, कौशल और उद्यमिता का एक सशक्त केंद्र बनेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि संभावित स्थलों की शीघ्र पहचान कर परियोजना के क्रियान्वयन को गति दी जाए, ताकि यह पहल प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का एक प्रभावी मॉडल बन सके।

‘सक्षम’ महोत्सव का आगाज़, राज्य मंत्री गौर रहे उपस्थित

भोपाल.  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)कृष्णा गौर ने सोमवार को ऑयल इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित संरक्षण क्षमता महोत्सव (सक्षम 2026) का शुभारंभ किया। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ईंधन संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तेल कंपनियों द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा सक्षम पखवाड़ा एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि ईंधन का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है। राज्यमंत्री  गौर ने बताया कि तेल कंपनियों का यह सामूहिक प्रयास न केवल अपने निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंचेगा, बल्कि इसके सकारात्मक परिणाम भी समाज में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे। कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर बच्चे भी सहभागिता कर रहे हैं, इसका उल्लेख करते हुए उन्होंने खुशी जताई और कहा कि नई पीढ़ी में जागरूकता ही वास्तविक बदलाव की नींव है। इस अवसर पर उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे ईंधन की बचत को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम में ऊर्जा संरक्षण से जुड़े विभिन्न उपायों और जागरूकता गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला गया। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के अभियान लोगों को जिम्मेदार उपभोक्ता बनने के लिए प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड मध्य प्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक एवं राज्य प्रमुख श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड सेंट्रल जोन के जोनल हेड श्री अश्विन योगेश सिन्हा, गेल इंडिया लिमिटेड से श्री रंजन कुमार, भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के राज्य प्रमुख श्री नीरज उपस्थित रहे।

मिलावट के खिलाफ अभियान तेज, कई जिलों में औचक जांच और कार्रवाई

रायपुर. खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने लगातार औचक जांच आमजन को स्वच्छ, सुरक्षित एवं पोषणयुक्त खाद्य सामग्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा प्रदेशभर में लगातार औचक निरीक्षण एवं वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।  धमतरी जिले में 73 परिसरों का निरीक्षण खाद्य एवं औषधि प्रशासन, जिला धमतरी द्वारा जनवरी 2026 में कुल 73 खाद्य परिसरों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान 14 परिसरों को आवश्यक सुधार हेतु निर्देशित किया गया। इस अवधि में 1 खाद्य नमूना संग्रहित किया गया तथा 2 प्रकरण एडीएम न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर रमन स्वीट्स, बस स्टैंड धमतरी से ‘ढोकना’ का नमूना संकलित कर प्रयोगशाला जांच हेतु भेजा गया। इसके अतिरिक्त खाद्य पदार्थ परोसने में अखबारी कागज के उपयोग को हतोत्साहित करने हेतु प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जनजागरूकता अभियान चलाया गया। सभी खाद्य कारोबारकर्ताओं को फॉसटैक प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रमाण-पत्र परिसर में प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। बलौदाबाजार-भाटापारा में पोहा मिलों पर कार्रवाई जिला बलौदाबाजार-भाटापारा में जनवरी 2026 के दौरान भाटापारा स्थित मातारानी इंडस्ट्रीज (सेमरिया रोड, खोखली), महासती उद्योग (सूरजपुरा रोड) एवं एन.एस. इंडस्ट्रीज (खोखली) का निरीक्षण किया गया। मातारानी इंडस्ट्रीज में खाद्य लेबल पर विनिर्माता के स्थान पर अन्य फर्म का नाम एवं पता अंकित पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की गई।महासती उद्योग से पोहा का विधिक नमूना लिया गया। एन.एस. इंडस्ट्रीज में नवीनीकरण के समय फोरेंकोस में अपलोड किए गए स्व-निरीक्षण प्रतिवेदन में असत्य जानकारी पाए जाने पर निरीक्षण कर पोहा एवं नायलॉन पोहा के विधिक नमूने लिए गए तथा नोटिस जारी किया गया। इस माह जिले में कुल 5 विधिक नमूने संकलित किए गए और 1 प्रकरण एडीएम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। महासमुंद में गुटखा जब्ती, 15.50 लाख का जुर्माना जिला महासमुंद में जनवरी 2026 के दौरान निरीक्षण के समय कुल 13 नमूने संकलित किए गए, जिनमें 8 विधिक, 4 सर्विलेंस नमूने तथा 1 सूचना सुधार प्रकरण शामिल है। कार्रवाई के दौरान 92,352 पाउच प्रतिबंधित गुटखा, 2 किलोग्राम बेसन एवं 500 ग्राम बारीक सेव (अवमानक तिथि पार) जब्त की गई। न्याय निर्णयन अधिकारी द्वारा संबंधित प्रकरणों में 15,50,000 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया। इसके अतिरिक्त बिना अनुज्ञप्ति/पंजीयन के 2 प्रकरणों में धारा 69 (कंपाउंडिंग) के अंतर्गत 20,100 रुपये का जुर्माना लगाया गया। साथ ही 51 नग अखाद्य रंग नष्ट किए गए। रायगढ़ में संदिग्ध वाहन से दुग्ध उत्पाद जब्त जिला रायगढ़ में संदिग्ध पिकअप वाहन द्वारा शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विक्रय हेतु परिवहन की जा रही लगभग 2 लाख रुपये मूल्य की दुग्ध उत्पाद सामग्री (कॉलेज एनालॉग एवं दही) जब्त की गई। नमूने गुणवत्ता जांच हेतु राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, रायपुर भेजे गए हैं। जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के पश्चात संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी। खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा प्रदेश के नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ, सुरक्षित एवं गुणवत्तायुक्त खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु निरंतर सघन निरीक्षण एवं कार्रवाई जारी रखी जाएगी।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा-परेड, अनुशासन और आपसी तालमेल का बेहतरीन नमूना होती है

लोकभवन में हुआ एन.सी.सी. एट होम समारोह भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि परेड, अनुशासन और आपसी तालमेल का बेहतरीन नमूना होती है। हर देशवासी को देशभक्ति और ऊर्जा से भर देती है। हम सभी को देश सेवा की प्रेरणा देती है। गणतंत्र दिवस 2026 की राष्ट्रीय परेड में शामिल प्रत्येक एन.सी.सी. कैडेट्स अनुशासन और प्रेरणा का प्रतीक है। राजधानी के कर्तव्य पथ पर आपकी अनुशासित, प्रभावी और गरिमामयी सहभागिता ने प्रदेशवासियों का मान बढ़ाया है। आप सभी हमारा गौरव हैं। राज्यपाल  पटेल सोमवार को लोकभवन के सांदीपनि सभागार में एन.सी.सी. एट होम समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने गणतंत्र दिवस 2026 की राष्ट्रीय परेड और विभिन्न प्रतियोगिताओं में पदक एवं उपलब्धियां प्राप्त करने वाले मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ निदेशालय के एन.सी.सी. कैडेट्स को सम्मानित किया। राज्यपाल  पटेल ने राष्ट्रीय स्तर पर ओवरऑल तीसरा स्थान प्राप्त करने पर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ एन.सी.सी. निदेशालय को बधाई दी। भविष्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने की शुभकामनाएं दी। समारोह में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि एन.सी.सी. कैडेट्स शिक्षित और अनुशासित होने के साथ संस्कारवान भी बने। आदर्श जीवन मूल्यों को धारण करें। माता-पिता, गुरुजनों, प्रशिक्षकों और वरिष्ठों का हमेशा सम्मान करें। उन्होंने कहा कि युवा संविधान के मूल्यों, न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व को जीवन में उतार कर  गरीब,  वंचित,  और  ज़रूरतमंदों के कल्याण में उपयोग करें। स्वच्छता, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण,  डिजिटल साक्षरता और स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्रों में ध्वज वाहक के रूप में समाज का नेतृत्व करें। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि हर युवा “हम दिन चार रहे न रहे, माँ तेरा वैभव सदा रहे” के भाव के साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय योगदान दें। संकल्प लें कि जीवन  का  प्रत्येक  क्षण  राष्ट्र  प्रेम  और  भक्ति  के  साथ  अपने  कर्तव्यों, अधिकारों, नियमों और सामाजिक दायित्वों का आदर्श रूप में पालन करेंगे। राज्यपाल  पटेल ने समारोह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि एन.सी.सी. कैडेट्स की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां जोश-जज्‍़बे और जुनून का उदाहरण है। यह भारत की विविधता में एकता को प्रस्तुत कर रही थी। राज्यपाल  पटेल के समक्ष एन.सी.सी. कैडेट्स ने “ऐ मेरे भारत की नारी, तू है महान” से नारी की महानता और “नव भारतम्-श्रेष्ठ भारतम्” पर आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से नए भारत को दिखाया। राज्यपाल  पटेल का मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ एन.सी.सी. निदेशालय के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल जे.पी. सिंह ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह-भेंट कर अभिनंदन किया। मेजर जनरल सिंह ने स्वागत उद्बोधन और रिपब्लिक डे कैम्प-2026 में प्रदेश की सहभागिता के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। सीनियर अंडर ऑफिसर सु प्रथा सिंह उमठ ने रिपब्लिक डे कैम्प- 2026 के अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर सचिव  उमाशंकर भार्गव, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ एन.सी.सी. निदेशालय के अधिकारी-कर्मचारी, एन.सी.सी. कैडेट्स और उनके परिजन मौजूद थे।  

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