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दुकानों पर बिक रही पैक्ड खाद्य सामग्री पर न पैकिंग की तारीख न एक्सपायरी डेट, अफसर भी नहीं करते कार्रवाई.

The officers also do not take action on packed food items being sold in shops without packaging and without a manufacturing or expiration date. मलखान सिंह परमार मुरैना ! अम्बाह शहर सहित ग्रामीण अंचल में अमानक और मिस ब्रांडेड खाद्य सामाग्री बेची जा रही है। पैक बंद कई ऐसे उत्पाद हैं जिस पर न तो कंपनी का नाम है और न ही एक्सपायरी डेट लिखी हुई है। बिना नियम कानून के गली गूंचों से लेकर हाइवे तक पर बेची जा रही खाद्य सामाग्री जानलेवा साबित हो सकती है। जबकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के मैदानी अमले द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से यह सामग्री धड़ल्ले से बिक रही है। शहर से लेकर नगर में कई छोटे-बड़े दुकानदार विभिन्न प्रकार के खाद्य सामाग्री बेच रहे हैं। इन पैकिंग खाद्य सामग्रियों पर न तो पैकिंग डेट है और न ही इन पर एक्सपायरी अंकित है। खास बात यह है कि स्नैक्स व टोस्ट पपड़ी बनाने वाले व्यापारी जो पैक बंद सामान बच्चों के लिए तैयार करते हैं। जगह-जगह होटलों एवं किराना दुकानों पर साधारण पॉलीथिन में नमकीन के पैकेट बिक रहे है। पैकेट पर न मेन्यूफेक्चरिंग ओर न ही एक्सपायरी डेट अंकित है। जब विक्रेताओं से उक्त सामग्री बनाने वाली कंपनी और उसकी निर्माण की डेट पूछी जाती है तो दुकानदार का कहना था कि फेरी वालों से लेते है। लंबे समय से ग्रामीण अंचल में पपड़ी लड्डू डिब्बे में बंद ऐसे कई उत्पाद बेचे जा रहे हैं जो कि जानलेवा साबित हो सकते हैं। शहर की एक दुकान पर रखी खाद्य सामाग्री, जिनमें अधिकांश पर पैकिंग और एक्सपायरी डेट अंकित नहीं

केंद्र सरकार की आठवां वेतन आयोग गठित करने की कोई योजना नहीं – वित्तसचिव टी.वी. सोमनाथन.

There is no plan to constitute the Eighth Pay Commission by the Central Government,” said Finance Secretary T.V. Somanathan. Manish Trivedi, Sahara Samachaar नई दिल्ली: केंद्र सरकार की 48.67 लाख केंद्रीय कर्मचारियों तथा 67.95 लाख पेंशनभोगियों के लिए आठवां वेतन आयोग गठित करने की कोई योजना नहीं है. यह बयान वित्तसचिव टी.वी. सोमनाथन ने दिया है. भारतीय जनता पार्टी ने आठवां वेतन आयोग की जगह नई पेंशन योजना की समीक्षा पर फोकस किया है… वित्तसचिव ने गुरुवार को कहा, “आठवां वेतन आयोग गठित करने के संबंध में कोई योजना नहीं है… फिलहाल ऐसा कुछ लंबित नहीं है…” वर्तमान पेंशन योजना के अंतर्गत कर्मचारी अपने मूल वेतन का 10 फ़ीसदी योगदान दिया करते हैं, जबकि सरकार उसी खाते में कर्मचारी के मूल वेतन का 14 फ़ीसदी जमा किया करती है. यह योजना राजनीतिक रूप से विवादों को जन्म दे चुकी है, और विपक्ष-शासित कई राज्य सरकारें पुरानी पेंशन योजना की तरफ़ जा रही हैं, जिनके अंतर्गत पेंशनभोगी को उसके अंतिम मासिक वेतन के 50 फ़ीसदी की गारंटी मिलती है, और वह भी कर्मचारी की ओऱ से किसी भी योगदान के बिना. माना जा रहा है कि सरकार कुछ बदलाव कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर सकती है कि प्रत्येक कर्मचारी को उनके अंतिम वेतन का कम से कम 40 से 45 फ़ीसदी हिस्सा पेंशन के तौर पर हासिल हो.

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