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जनता से 8 साल की देरी का हिसाब कौन देगा? जीएसटी सुधार पर उठे सवाल

How can what was wrong yesterday be right today? What does the Modi government want to hide from the public on the GST controversy? Modi government a GST controversy आखिर 8 साल बाद भी मोदी सरकार माफी क्यों नहीं मांग रही? जनता से क्या छिपाना चाहती है? चिदंबरम ने पूछा – जो कल गलत था, आज सही कैसे?जीएसटी दरों में कमी के बाद भी मोदी सरकार ने जनता से माफी नहीं मांगी। आखिर सरकार क्या छिपाना चाहती है? जानिए 8 साल की देरी, विवाद और सुधार की अधूरी कहानी। यदि टूथपेस्ट, हेयर आयल, मक्खन, शिशु नैपकिन, पेंसिल, नोटबुक, ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर आदि पर पांच फीसद जीएसटी आज अच्छा है, तो पिछले आठ वर्षों में यह बुरा क्यों था? लोगों को आठ वर्षों तक अत्यधिक टैक्स क्यों चुकाना पड़ा? आखिरकार केंद्र सरकार को बात समझ में आ गई। तीन सितंबर, 2025 को सरकार ने कई वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों को तर्कसंगत बना कर कम किया। कर संरचना अब उस अच्छे और सरल कर के करीब है, जिसकी वकालत पिछले आठ वर्षों से कई राजनीतिक दल, व्यवसायी, संस्थान और व्यक्ति (जिनमें मैं भी शामिल हूं) करते रहे हैं। अगस्त, 2016 में जब संसद में संविधान (122वां संशोधन) विधेयक पर बहस हुई थी, तब मैंने राज्यसभा में भाषण दिया था। उसके कुछ अंश इस प्रकार हैं अडिग रुख Modi government a GST controversy‘मुझे खुशी है कि वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि यूपीए सरकार ने ही सबसे पहले आधिकारिक तौर पर जीएसटी लागू करने के अपने इरादे का एलान किया था। 28 फरवरी, 2005 को बजट भाषण के दौरान लोकसभा में इसकी घोषणा की गई थी। ‘महोदय, चार प्रमुख मुद्दे हैं… Modi government a GST controversy‘अब मैं विधेयक के सबसे महत्त्वपूर्ण भाग पर आता हूं… यह कर की दर के बारे में है। मैं अभी मुख्य आर्थिक सलाहकार की रपट के कुछ अंश पढूंगा… कृपया याद रखें कि हम एक अप्रत्यक्ष कर पर विचार कर रहे हैं। अप्रत्यक्ष कर की परिभाषा के अनुसार, यह एक प्रतिगामी कर है। कोई भी अप्रत्यक्ष कर अमीर और गरीब दोनों पर समान रूप से लागू होता है… मुख्य आर्थिक सलाहकार की रपट कहती है: ‘उच्च आय वाले देशों में औसत जीएसटी दर 16.8 फीसद है भारत जैसी उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में यह औसत 14.1 फीसद है।’ इस तरह दुनिया भर में 190 से अधिक देशों में किसी न किसी रूप में जीएसटी लागू है। यह 14.1 फीसद से 16.8 फीसद के बीच है।‘हमें करों को कम रखना होगा। साथ ही, हमें केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के मौजूदा राजस्व की रक्षा करनी होगी। …हम ‘राजस्व तटस्थ दर’ यानी आरएनआर के जरिए यह करते हैं। ‘मुख्य आर्थिक सलाहकार राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और अन्य विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद 15 फीसद से 15.5 फीसद के आरएनआर पर पहुंचे और फिर सुझाव दिया कि मानक दर 18 फीसद होनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने 18 फीसद कोई हवा से नहीं निकाला है। यह आपकी रपट से निकला है। ‘…किसी को तो जनता के लिए आवाज उठानी ही होगी। जनता की ओर से, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस दर को मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा अनुशंसित दर पर ही रखें, यानी मानक दर 18 फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए रपट के पैरा 29, 30, 52 और 53 पढ़ें। इसमें स्पष्ट रूप से तर्क दिया गया है… Modi government a GST controversy अठारह फीसद की मानक दर केंद्र और राज्यों के राजस्व की रक्षा करेगी, यह पर्याप्त होगी, मुद्रास्फीति-रोधी होगी, कर चोरी से बचाएगी और भारत के लोगों को स्वीकार्य होगी… यदि आप वस्तुओं और सेवाओं पर 24 फीसद या 26 फीसद कर लगाने जा रहे हैं, तो फिर जीएसटी विधेयक लाने की क्या आवश्यकता है? ‘अंतत: आपको कर विधेयक में एक दर रखनी ही होगी। मैं अपनी पार्टी की ओर से स्पष्ट रूप से मांग करता हूं कि जीएसटी की मानक दर, जो 70 फीसद से अधिक वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होती है, वह अठारह फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए और निम्न एवं अन्य दर अठारह फीसद के आधार पर तय की जा सकती है। आठ वर्ष की पीड़ा Modi government a GST controversyवर्ष 2016 में भी मैंने यही बात कही थी, जो आज कह रहा हूं। मुझे खुशी है कि सरकार इस विचार पर सहमत हो गई कि दरों को युक्तिसंगत और कम किया जाना चाहिए। हालांकि, शुरुआत में सरकार का तर्क था कि अठारह फीसद की सीमा से राजस्व का भारी नुकसान होगा, खासकर राज्य सरकारों को। यह चिंता का एक बड़ा कारण था। आज दो कर दरें पांच फीसद और अठारह फीसद हैं! केंद्र के पास कर राजस्व बढ़ाने के कई तरीके हैं; अगर राज्य सरकारों को राजस्व का नुकसान होता है, तो सही कदम यही होगा कि उन्हें मुआवजा दिया जाए पिछले आठ वर्षों में सरकार ने उपभोक्ताओं से ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूलने के लिए कई जीएसटी दरों का इस्तेमाल किया। पहले वर्ष (जुलाई 2017 से मार्च 2018) में सरकार ने लगभग 11 लाख करोड़ रुपए एकत्र किए। वर्ष 2024-25 में लगभग 22 लाख करोड़ रुपए संग्रहित किए गए। उपभोक्ताओं द्वारा अपनी मेहनत से कमाया गया पैसा सरकार ने जीएसटी के माध्यम से छीन लिया- इसे सही मायने में और उपहासपूर्वक गब्बर सिंह टैक्स कहा गया। उच्च जीएसटी दरें कम खपत और बढ़ते घरेलू कर्ज के कारणों में से एक थीं। यह बुनियादी अर्थशास्त्र है कि करों में कमी से खपत को बढ़ावा मिलेगा। यदि टूथपेस्ट, हेयर आयल, मक्खन, शिशु नैपकिन, पेंसिल, नोटबुक, ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर आदि पर पांच फीसद जीएसटी आज अच्छा है, तो पिछले आठ वर्षों में यह बुरा क्यों था? लोगों को आठ वर्षों तक अत्यधिक कर क्यों चुकाना पड़ा? अभी बहुत कुछ बाकीदरों में कमी तो बस शुरुआत है। अभी और भी बहुत कुछ करना बाकी है। सरकार को चाहिए कि- राज्यों, उत्पादकों और उपभोक्ताओं को एक ही जीएसटी दर (जरूरत पड़ने पर और छूट के साथ) के लिए तैयार करे; अधिनियमों और नियमों की धाराओं के लिए प्रचलित अस्पष्ट भाषा को खत्म करे; उन्हें सरल भाषा में फिर से लिखे; सरल फार्म और रिटर्न निर्धारित करे, फार्म भरने की आवृत्ति में तर्कसंगत कमी करे; कानून के अनुपालन को सरल बनाए: किसी छोटे व्यापारी या दुकानदार … Read more

जीएसटी ट्रिब्यूनल में राजभाषा हिंदी को अमान्य कर दिया, व्यापारी को न्यायिक प्रक्रिया से दूर करने की साजिश

 इंदौर  जीएसटी ट्रिब्यूनल में राजभाषा हिंदी को अमान्य कर दिया गया है। आदेश जारी किया गया है कि ट्रिब्यूनल में आने वाले प्रकरणों में दस्तावेज सिर्फ अंग्रेजी में ही स्वीकार होंगे। और तो और किसी प्रकरण को दाखिल करने और पैरवी करने के मामलों में संबंधित दस्तावेजों को भी अंग्रेजी में अनुवाद कर लगाना होगा। जीएसटी ट्रिब्यूनल के इस आदेश से असंतोष फूट पड़ा है। टैक्स पेशेवर साफ कह रहे हैं कि टैक्स विवादों में हिंदी और क्षेत्रीय भाषा को बाहर कर न्याय महंगा करने और आम व्यापारी को न्यायिक प्रक्रिया से दूर करने की साजिश हो रही है। दस्तावेज सिर्फ अंग्रेजी में पेश किए जा सकेंगे आयकर की तरह जीएसटी के कर विवादों के निराकरण के लिए जीएसटी ट्रिब्यूनल की व्यवस्था की गई है। 2017 में जीएसटी लागू हुआ लेकिन अब तक ट्रिब्यूनल नहीं बने, सिर्फ नोटिफिकेशन जारी हुआ। स्थापना के नोटिफिकेशन के बाद अब सरकार ने नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया कि ट्रिब्यूनल में जाने वाले मामलों में दस्तावेज सिर्फ अंग्रेजी में ही पेश किए जा सकेंगे। यदि कोई दस्तावेज अन्य भाषा में हुआ तो उसका अंग्रेजी अनुवाद कर लगाना होगा। अहिल्या चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल के अनुसार 20 मई को दिल्ली में होने वाली नेशनल ट्रेडर्स वेलफेयर बोर्ड की बैठक में इस मुद्दे को लाकर विरोध जताया जाएगा। तीन भाषाओं को हो मान्यता 2017 में जब जीएसटी प्रणाली लागू हुई थी तो उस समय सरकार ने इस प्रणाली को सुलभ बनाने के लिए तमाम घोषणाएं की थीं। कर सलाहकार आरएस गोयल के अनुसार ऐलान हुआ था कि जीएसटी पोर्टल 18 भाषाओं में काम करेगा। वो तो हुआ नहीं, अब ट्रिब्यूनल में तो हिंदी को भी बिसरा दिया गया है। चार्टर्ड अकाउंटेंट एसएन गोयल कहते हैं हिंदी के दस्तावेजों को तो आयकर अपीलेट ट्रिब्यूनल में भी मान्य किया जाता है। जीएसटी में भी कम से कम तीन भाषाओं को तो मान्यता होना चाहिए।

उपभोक्ता की जीत: सॉफ्ट ड्रिंक पर अतिरिक्त 1 रुपये जीएसटी वसूलने पर रेस्तरां को ₹6,000 भुगतान का आदेश

Consumers win: Restaurant ordered to pay ₹6,000 for charging extra Rs 1 GST on soft drinks भोपाल, संवाददाता। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अधिवक्ता अर्चित दीक्षित द्वारा अनिरुद्ध वाधवानी Vs हॉन्ग कॉन्ग चाइनीज केस में जीत हासिल की है। जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा में एक अहम निर्णय में रेस्तरां को आदेश दिया है कि वह सॉफ्ट ड्रिंक पर अतिरिक्त ₹1 जीएसटी वसूलने के चलते उपभोक्ता को ₹6,000 का भुगतान करे। मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने भोपाल में एम. पी. नगर जोन-2 स्थित हॉन्ग कॉन्ग चाइनीज रेस्तरां में भोजन करते समय एक सॉफ्ट ड्रिंक का ऑर्डर दिया था। बिल में उत्पाद के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के ऊपर अतिरिक्त ₹1 जीएसटी के रूप में वसूला गया। आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद, रेस्तरां प्रबंधन ने संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया, जिसके पश्चात द्वारा उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दायर की। सुनवाई के दौरान फोरम ने स्पष्ट किया कि किसी भी उत्पाद के MRP में कर सम्मिलित होते हैं और उपभोक्ता से MRP से अधिक राशि वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए रेस्तरां को आदेशित किया कि वह शिकायतकर्ता को मानसिक कष्ट और उत्पीड़न के मद में ₹5,000 तथा ₹1,000 मुकदमेबाजी व्यय के रूप में अदा करे।

नए महीने की शुरुआत के साथ ही देश के लिए अच्‍छी खबर आई है. अप्रैल महीने के दौरान GST Collection में शानदार बढ़ोतरी हुई

नई दिल्ली नए महीने की शुरुआत के साथ ही देश के लिए अच्‍छी खबर आई है. अप्रैल महीने के दौरान GST Collection में शानदार बढ़ोतरी हुई है. इस बढ़ोतरी के साथ जीएसटी कलेक्‍शन रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्‍शन साल-दर-साल 12.6 प्रतिशत बढ़कर 2.37 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया. इससे पहले सबसे ज्‍यादा जीएसटी कलेक्शन अप्रैल 2024 में हुआ था, जो 2.10 लाख करोड़ रुपये था. हालांकि अब ये रिकॉर्ड भी टूट चुका है. मार्च 2025 में यह कलेक्‍शन 1.96 लाख करोड़ रुपये था. घरेलू लेनदेन से जीएसटी राजस्व 10.7 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि आयातित वस्तुओं से राजस्व 20.8 प्रतिशत बढ़कर 46,913 करोड़ रुपये हो गया है. जनवरी से मार्च तक कितना रहा जीएसटी कलेक्‍शन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में यह कलेक्‍शन 1.96 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.9% की ग्रोथ है. फरवरी में जीएसटी कलेक्‍शन 1.83 लाख करोड़ रुपये रहा, जो साल-दर-साल 9.1% की ग्रोथ रही. वहीं जनवरी में भी 1.96 लाख करोड़ रुपये जीएसटी कलेक्‍शन रहा, जो 12.3% की ग्रोथ को दिखाता है. जीएसटी कलेक्‍शन में हर महीने बढ़ोतरी की बड़ी वजह देश में घरेलू मांग की बढ़ोतरी रही है. इन जगहों पर ज्‍यादा हुआ जीएसटी कलेक्‍शन लक्षद्वीप में जीएसटी कलेक्‍शन में 287% की ग्रोथ हुई है. राज्यों में, अरुणाचल प्रदेश ने 66% की ग्रोथ दर्ज की है, जबकि मेघालय और नागालैंड में क्रमशः 50% और 42% की वृद्धि हुई है. हरियाणा, बिहार और गुजरात जैसे बड़े राज्यों ने भी दोहरे अंकों की ग्रोथ दर्ज की है. इसके विपरीत, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा और मिजोरम में गिरावट देखी गई, जिसमें मिजोरम में 28% की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई. कब लागू हुआ था जीएसटी? बता दें, देश में  1 जुलाई 2017 को GST लागू हुआ था. वस्तु एवं सेवा कर (GST) भारत में वस्तुओं और सेवाओं के निर्माण, बिक्री और उपभोग पर अप्रत्यक्ष कर है. जीएसटी के 4 प्रकार हैं, जिसमें सीजीएसटी, एसजीएसटी, यूटीजीएसटी और आईजीएसटी शामिल हैं. कभी-कभी उपकर भी लगाया जाता है. भारत में विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के लिए GST की दरें 4 स्लैब में विभाजित किया गया है, 5% जीएसटी, 12% जीएसटी, 18% जीएसटी और 28% जीएसटी. देश में GST लागू होने के बाद जीएसटी परिषद ने कई बार विभिन्न उत्पादों के लिए जीएसटी दरों में संशोधन किया है.  

छत्तीसगढ़ राज्य ने जीएसटी संग्रह में हासिल किया ऐतिहासिक मुकाम, 16,390 करोड़ का किया जीएसटी संग्रह

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम की है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य ने कुल ₹16,390 करोड़ का जीएसटी राजस्व संग्रह कर देशभर में सबसे अधिक 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को जीएसटी राजस्व वृद्धि के मामले में पूरे देश में पहले स्थान पर स्थापित करती है। इस क्रम में महाराष्ट्र 16% और तमिलनाडु 15% की वृद्धि दर के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। मार्च 2025 में पहली बार ₹2000 करोड़ से अधिक का मासिक संग्रह मार्च 2025 में  छत्तीसगढ़ को SGST मद में ₹1,301.09 करोड़ की प्राप्ति हुई, जो कि मार्च 2024 की तुलना में 72 प्रतिशत अधिक है। यह पहली बार है जब राज्य ने SGST संग्रह में ₹1000 करोड़ का आंकड़ा पार किया है। मार्च 2025 में ही IGST मद में ₹756.73 करोड़ प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। इस प्रकार मार्च 2025 में कुल जीएसटी संग्रह ₹2,057.82 करोड़ रहा, जो मार्च 2024 के ₹1,443.66 करोड़ की तुलना में 43 प्रतिशत की प्रभावशाली मासिक वृद्धि दर्शाता है। जीएसटी आने के बाद छत्तीसगढ़ ने पहली बार एक माह में कुल जीएसटी राजस्व में 2000 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार किया है। बेहतर प्रशासन, तकनीक का समावेश और सतत निगरानी से मिली ऐतिहासिक सफलता यह उल्लेखनीय प्रगति राज्य में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन और वित्त मंत्री ओ पी चौधरी के दिशानिर्देश पर वाणिज्यिक कर विभाग में किए गए व्यापक सुधार, नवाचार और नई कार्यसंस्कृति का प्रत्यक्ष परिणाम है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वाणिज्यिक कर मंत्री ओ. पी. चौधरी के मार्गदर्शन में विभाग ने जीएसटी प्रशासन को अधिक सक्रिय, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने हेतु निर्णायक कदम उठाए हैं। नॉन-फाइलर्स पर नियंत्रण रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले व्यापारियों की निरंतर निगरानी एवं संवाद के माध्यम से अनुपालना दर में बड़ा सुधार हुआ है। नॉन-फाइलर्स की संख्या 15 प्रतिशत से घटकर मात्र 6 प्रतिशत रह गई है। फर्जी पंजीकरण की जांच 28,000 से अधिक व्यवसायों का भौतिक सत्यापन किया गया, जिनमें से 4, 252 फर्मों, जो कुल फर्मों का लगभग 15% है, को फर्जी पाया गया। इससे कर अपवंचन पर प्रभावी अंकुश लगा और कर अनुपालना में वृद्धि हुई। डेटा एनालिटिक्स आधारित कार्रवाई वर्षभर में डेटा  एनालिटिक्स के आधार पर 313 मामलों में लेखा पुस्तकों की जांच कर ₹45.13 करोड़ की वसूली की गई। वहीं, 77 प्रतिष्ठानों की तलाशी/निरीक्षण से ₹47.35 करोड़ की अतिरिक्त राशि प्राप्त हुई। सेक्टर विश्लेषण और इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय जीएसटी विभाग द्वारा सेक्टर आधारित विश्लेषण और इंटर डिपार्टमेंटल डेटा का उपयोग करते हुए 49 संभावित कर अपवंचन क्षेत्रों की पहचान की गई जिससे  ₹101 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया गया। सरकारी विभागों से बेहतर अनुपालन मार्च 2025 में किए गए विशेष प्रयासों के तहत शासकीय विभागों द्वारा जीएसटीआर-7 रिटर्न दाखिल करवाकर इनके सप्लायर्स से ₹37 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व एकत्रित किया गया। व्यापक व्यापारी संपर्क अभियान राज्य भर में ऐसे 36,847 व्यापारियों से संपर्क किया गया, जिन्होंने या तो शून्य रिटर्न दाखिल किया था या व्यवसाय में नकारात्मक वृद्धि दर्शाई थी, जिससे कर अनुपालन में बढ़ोतरी  सुनिश्चित हुई। इन सभी ठोस और तकनीक आधारित उपायों का प्रत्यक्ष परिणाम है कि छत्तीसगढ़ आज देश में जीएसटी वृद्धि में शीर्ष स्थान पर है। भविष्य के लिए डिजिटल और एआई-आधारित रणनीति तैयार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन और वित्त मंत्री ओ पी चौधरी के मार्गदर्शन में जीएसटी विभाग अब डिजिटल ट्रैकिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली और उन्नत अनुपालन तंत्र को लागू कर, आने वाले वर्षों में भी छत्तीसगढ़ को देश में अग्रणी स्थिति में बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। “छत्तीसगढ़ की यह ऐतिहासिक उपलब्धि केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि ईमानदारी, पारदर्शिता और जनभागीदारी पर आधारित सुशासन की पहचान है। हमारी सरकार ने टैक्स प्रशासन को जनकेंद्रित और टेक्नोलॉजी-संचालित बनाकर यह सिद्ध किया है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो राजस्व भी बढ़ता है और विश्वास भी। हम इसी गति को बनाए रखते हुए छत्तीसगढ़ को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और समावेशी विकास का मॉडल बनाएंगे।” – विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

GST में बड़ा बदलाव, कर चोरी करना पड़ेगा भारी, 1 अप्रैल से बदल रहा है नियम

नई दिल्ली भारत सरकार ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स के नियमों में काफी बदलाव किया है. इसके तहत 1 अप्रैल 2025 से इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर सिस्टम लागू होने जा रहा है. इस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य राज्यों के बीच टैक्स रेवेन्यू का सही डिस्ट्रीब्यूशन सुनिश्चित करना है. इसकी मदद से राज्य सरकारें एक ही जगह पर दी जा रही शेयर्ड सर्विसेज पर उचित मात्रा में टैक्स वसूल करेंगी. ISD मैकेनिज्म को लागू करने के लिए 2024 के फाइनेंस एक्ट के तहत सेंट्रल जीएसटी एक्ट में संशोधन किया गया है. यह मैकेनिज्म उन व्यवसायों को सुविधा देता है जो कई राज्यों में संचालित होते हैं. इसके तहत व्यवसाय अपनी एक हेडक्वार्टर में कॉमन इनपुट सर्विस के इनवॉइस को सेंट्रलाइज कर सकते हैं. इससे उन शाखाओं के बीच इनपुट टैक्स क्रेडिट का समान वितरण संभव होता है जो शेयर्ड सर्विसेज का इस्तेमाल करती हैं. इनपुट टैक्स क्रेडिट का प्रॉफिट इनपुट टैक्स क्रेडिट यह वो टैक्स होता जो व्यवसाय अपनी खरीद पर चुकाते हैं. इसे आउटपुट टैक्स से घटाया जा सकता है, जिससे व्यवसाय की कुल जीएसटी देनदारी कम हो जाती है. नए नियमो के तहत ISD सिस्टम का इस्तेमाल होना अनिवार्य होगा जिससे ITC सही वितरण हो सके. नए नियम क्या है पहले बिजनेस करने वालों के पास कॉमन ITC को अपने अन्य GST रजिस्ट्रेशन में आवंटित करने के लिए दो ऑप्शन थे. इसमें दो ऑप्शन यह थे कि ISD मैकेनिज्म या क्रॉस-चार्ज मेथड, लेकिन अब 1 अप्रैल 2025 से ISD का इस्तेमाल न करने पर रेसिपिएंट लोकेशन के लिए ITC नहीं दी जाएगी. अगर ITC का गलत वितरण होता है तो टैक्स अथॉरिटी ब्याज सहित राशि वसूल करती है. इसके साथ ही अनियमित वितरण के लिए जुर्माना भी लगेगा, जो ITC की राशि या 10 हजार रुपए से भी अधिक होगा. जीएसटी सिस्टम माना जा रहा है कि यह बदलाव जीएसटी सिस्टम को और अधिक व्यवस्थित करने की दिशी में एक और बड़ा कदम है. ISD सिस्टम से न केवल राज्यों के बीच टैक्स रेवेन्यू वितरण होगा, बल्कि व्यवसायों को भी अपनी टैक्स देनदारियों को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी. यह कदम टैक्स की चोरी रोकने और सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए काफी अच्छी साबित होगी.  

भोपाल में CGST की रेड मिली 12 करोड़ की 310 टन सुपारी, 4500 थैलों में भरी

भोपाल  मध्यप्रदेश  की राजधानी भोपाल (Bhopal) में सेंट्रल जीएसटी (Central GST) की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 310 टन सुपारी (310 tons of betel nut) जब्त की है. जब्त की गई सुपारी की कीमत करीब 12 करोड़ रुपए (12 crore rupees) है। दरअसल, सेंट्रल GST की भोपाल स्थित ब्रांच को सूचना मिली थी कि बैरसिया रोड के एक गोदाम में अवैध रूप से सुपारी का भण्डारण किया गया है. इस सूचना के आधार पर टीम ने बताई गयी जगह पर रेड मारी. इस दौरान टीम ने पाया कि गोदाम में हज़ारों बोरियों में सुपारी का भण्डारण किया गया है। जांच के दौरान जीएसटी टीम ने पाया कि गोदाम में करीब 4 हज़ार से ज्यादा बोरियों में 310 टन सुपारी रखी हुई है जिसकी कीमत करीब 12 करोड़ रुपए है. छापे के दौरान टीम को पता चला कि करोड़ों रुपए कीमत की सुपारी करने वाला यह गोदाम रजिस्टर्ड ही नहीं है। यही नहीं, जब सुपारी के भण्डारण से जुड़े दस्तावेज मांगे गए तो वो भी नहीं मिले. फ़िलहाल गोदाम को सील कर जांच शुरू कर दी गई है।

ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप से खाना ऑर्डर करना सस्ता होगा, आज जीएसटी काउंसिल की बैठक

नई दिल्ली  स्विगी और जोमैटो जैसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप से खाना ऑर्डर करना सस्ता हो सकता है। दरअसल, सरकारी ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप पर जीएसटी की दर कम कर सकती है। वहीं इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर जीएसटी दर बढ़ाई जा सकती है। इससे ये महंगी हो जाएंगी। जीएसटी की इन दरों के बारे में कल यानी शनिवार को निर्णय लिया जाएगा। शनिवार 21 दिसंबर को जीएसटी काउंसिल की 55वीं बैठक होगी। जीएसटी परिषद इस बैठक के दौरान लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स दरों को कम करने पर चर्चा कर सकती है। साथ ही यह कलाई में पहने जाने वाली लक्जरी घड़ियों, जूते और कपड़ों पर टैक्स बढ़ाने पर विचार कर सकती है। इसके अलावा तंबाकू जैसी हानिकारक चीजों पर 35% का एक अलग से जीएसटी स्लैब पेश किया जा सकता है। कितनी सस्ता होगा खाना ऑर्डर करना? इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार जीएसटी काउंसिल की यह बैठक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में और राज्य के समकक्षों की मौजूदगी में होगी। इसमें स्विगी और जोमैटो जैसे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के लिए जीएसटी दर को मौजूदा 18% (इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ) से घटाकर 5% (इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना) करने का प्रस्ताव है। 148 चीजों के टैक्स पर बदलाव संभव इस बैठक में करीब 148 वस्तुओं की जीएसटी दर में बदलाव हो सकता है। साथ ही विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) को भी जीएसटी के दायरे में लाने पर भी विचार-विमर्श होगा। फिटमेंट कमेटी (जिसमें केंद्र और राज्यों के टैक्स अधिकारी शामिल हैं) ने इस्तेमाल किए गए ईवी के साथ-साथ छोटे पेट्रोल और डीजल वाहनों की बिक्री पर मौजूदा 12 फीसदी से 18 फीसदी तक की दर बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इस बढ़ोतरी से इस्तेमाल की गई और पुरानी छोटी कारें और ईवी पुराने बड़े वाहनों के बराबर हो जाएंगे। सस्ता हो सकता है हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम परिषद के एजेंडे में प्रमुख रूप से हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर जीएसटी दर तय करना है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में परिषद की ओर से गठित एक मंत्री समूह ने नवंबर में अपनी बैठक में टर्म लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों के लिए भुगतान किए गए बीमा प्रीमियम को जीएसटी से छूट देने पर सहमति व्यक्त की थी। साथ ही सीनियर सिटीजन को हेल्थ इंश्योरेंस कवर के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम को भी टैक्स से छूट देने का प्रस्ताव किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों के अलावा अन्य व्यक्तियों के 5 लाख रुपये तक के कवरेज वाले हेल्थ इंश्योरेंस के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम पर जीएसटी से छूट देने का प्रस्ताव है।

गाला डेवलपर्स बिना जीएसटी रजिस्ट्रेशन के काम कर रही थी, पड़ा GST का छापा, 4 करोड़ से ज्यादा की जीएसटी चोरी का खुलासा

जबलपुर मध्य प्रदेश के जबलपुर में सेंट्रल GST ने छापामार कार्रवाई की है। गाला डेवलपर्स कंपनी में 4 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी का खुलासा हुआ है। जिसके बाद टीम ने फर्म के ठिकानों पर दबिश दी है। बताया जा रहा है कि गाला डेवलपर्स बिना जीएसटी रजिस्ट्रेशन के काम कर रही थी। कई सालों से टैक्स भी नहीं भरा जा रहा था। जिसके बाद दो दिनों तक जीएसटी की छापामार कार्रवाई चली। मामले में अब छानबीन जारी है। बता दें कि गाला डेवलपर्स का नाम जबलपुर की बड़ी फर्म में शामिल है। यह कंपनी  बिल्डर और कॉलोनाइजर्स के लिए जमीन डेवलप करने का काम करता है। इस कार्रवाई के बाद अन्य कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

प्रदेश में आईजीएसटी के रूप में प्री सेटलमेंट और पोस्ट सेटलमेंट के रूप में राजस्व में वृद्धि हुई

भोपाल दीपावली की रौनक थमने के बाद नवम्बर महीने में जीएसटी से राज्य सरकार को होने वाली ग्रोथ घटी है। दीपावली के कारण अक्टूबर में जहां राज्य सरकार को बाजार में खरीददारी बढ़ने से 554 करोड़ रुपए का अधिक राजस्व सितम्बर के मुकाबले मिला था। वहीं नवम्बर में यह घट गया और अक्टूबर के मुकाबले सिर्फ 166 करोड़ रुपए ही अधिक रेवेन्य राज्य शासन के खाते में जमा हो सकी है। हालांकि यह ओवरआल पांच प्रतिशत बढ़ी है। इसके अलावा प्रदेश में इंटर स्टेट जीएसटी (आईजीएसटी) के रूप में प्री सेटलमेंट और पोस्ट सेटलमेंट के रूप में राजस्व में वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार ने एक दिसम्बर को सभी राज्यों के हिस्से में आए और केंद्र को मिले जीएसटी का राज्यवार ब्यौरा जारी किया है। इसकी पड़ताल करने पर यह बात सामने आई है कि एमपी में अक्टूबर महीने में दीपावली और नवरात्र पर्व के कारण बढ़ी खरीददारी के चलते सरकार को जीएसटी से खासा मुनाफा हुआ था जो नवम्बर में कम हो गया है। एमपी सरकार को नवम्बर 2023 में जीएसटी से होने वाली आमदनी 3646 करोड़ रुपए थी जो नवम्बर 2024 में बढ़कर 3812 करोड़ हो गई है। इस तरह एक साल में ग्रोथ 5 प्रतिशत बढ़ी है। आईजीएसटी से ऐसे जुटता है राजस्व जीएसटी की आईजीएसटी कैटेगरी में सरकार को जो राजस्व मिला है, उसके अनुसार प्री-सेटलमेंट एसजीएसटी के रूप में साल 2023-24 में एमपी को 8496 करोड़ मिले थे। जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 9043 करोड़ रुपए हो गए हैं। इसमें ग्रोथ 6 प्रतिशत रही है। इसी तरह पोस्ट सेटलमेंट एसजीएसटी से मिलने वाला राजस्व वर्ष 2023-24 में 20673 करोड़ था। जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 23674 करोड़ हो गया है। इसमें ग्रोथ 15 प्रतिशत रही है। ऐसे लगती है आईजीएसटी इंटरस्टेट सप्लाई होने पर आईजीएसटी लगती है। आईजीएसटी बच जाती है उसे पोस्ट सेटलमेंट कहते हैं। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर पंजाब से एमपी के लिए कोई माल सप्लाई होता है तो वहां का व्यापारी 18 प्रतिशत जीएसटी वसूली करता है। इसे आईजीएसटी कैटेगरी में शामिल किया जाता है। ऐसी स्थिति में माल सप्लाई करने वाले पंजाब को जीएसटी की राशि अलग से नहीं दी जाती है। इसके बाद जब माल का कंजप्शन एमपी में हो जाता है तो एमपी की सरकार को एसजीएसटी मिलता है। इसमें केंद्र के हिस्से की राशि केंद्र सरकार को चली जाती है।

सितंबर में GST कलेक्शन में दिखा उछाल, 1.73 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल इसी महीने में के मुकाबले 6.5 फीसदी ज्यादा है

नई दिल्ली सितंबर महीने का जीएसटी कलेक्शन का डेटा सामने आ गया है। सितंबर में वस्तु एवं सेवा कर कलेक्शन 1.73 लाख करोड़ रुपये रहा है जो पिछले साल इसी महीने में 1.63 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 6.5 फीसदी ज्यादा है। अगस्त में जीएसटी कलेक्शन 1.74 लाख करोड़ रुपये रहा था। जीएसटी रिफंड्स जारी करने के बाद कुल कलेक्शन सितंबर महीने में 4 फीसदी बढ़कर 1.53 लाख करोड़ रुपये रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में घरेलू कर राजस्व 5.9 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं माल के आयात से प्राप्त राजस्व आठ प्रतिशत बढ़कर 45,390 करोड़ रुपये हो गया। आलोच्य अवधि में जीएसटी विभाग की तरफ से 20,458 करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए जो एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 31 प्रतिशत अधिक है। रिफंड राशि को समायोजित करने के बाद सितंबर में शुद्ध जीएसटी राजस्व 1.53 लाख करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 3.9 प्रतिशत अधिक है।  

GST को लेकर आई बड़ी खबर प्रदेश में जीएसटी में एक अक्टूबर से इनवाइस मैनेजमेंट सिस्टम लागू

भोपाल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में एक अक्टूबर से बिल समाधान प्रणाली (इनवाइस मैनेजमेंट सिस्टम) लागू हो जाएगी। इससे व्यापारियों का काम बढ़ने वाला है। सामान खरीदने वाले व्यवसायी को अपने खरीदी बिलों को जीएसटी पोर्टल पर या तो स्वीकार या फिर रद (रिजेक्ट) करना पड़ेगा। दोनों काम नहीं करने पर बिल लंबित हो जाएंगे। ऐसे में निर्धारित अवधि के बाद बिल अपने आप स्वीकार हो जाएंगे। इससे सामान खरीदने वाले व्यापारी को यह नुकसान हो सकता है कि जो सामान उसने खरीदा नहीं है उसका बिल भी स्वीकार हो जाए। ऐसा होने पर विभाग गड़बड़ी के आरोप में कार्रवाई कर देगा। अभी तक एक-एक बिल स्वीकार या रद नहीं करना पड़ता, जिससे काम का दबाव कम था। क्या है आज से लागू ‘विवाद से विश्वास’ स्कीम     आयकर में ‘विवाद से विश्वास’ स्कीम सहित कई नए प्रावधान मंगलवार से लागू होने जा रहे हैं। ‘विवाद से विश्वास’ पुराने बकाया के समाधान के लिए है।     इसके अंतर्गत टैक्स के लंबित मामलों का निपटारा हो सकेगा। करदाता पुरानी मांगों को खत्म करने के लिए इसका लाभ उठा सकेंगे। व्यापारियों के हित में     एक अक्टूबर से कई बदलाव हो रहे हैं। कई व्यापारियों के हित में हैं। हालांकि, कुछ बदलाव से काम का दबाव बहुत अधिक बढ़ जाएगा। – मृदुल आर्य, अध्यक्ष, टैक्स ला बार एसोसिएशन भोपाल यह बदलाव भी होंगे     आयकर के टीडीएस के नियमों में भी बदलाव हो जाएंगे। जीवन बीमा से प्राप्त राशि एवं एजेंटों को दिए जाने वाले कमीशन पर पांच प्रतिशत के स्थान पर केवल दो प्रतिशत टीडीएस की कटौती होगी ।     शेयरों की खरीदी बिक्री पर लगने वाले सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स को भी 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.2 प्रतिशत कर दिया गया है।     एक नवंबर से जीएसटी में वर्ष 2017-18 से वर्ष 2019-20 तक की पुरानी ब्याज एवं अर्थदंड की मांगों को खत्म करने की योजना लागू हो जाएगी, जिसका व्यापारियों को लाभ मिलेगा।  

देश में बड़ी संख्या में शीर्ष प्रबंधन अधिकारी माल एवं सेवा कर के बारे में सकारात्मक धारणा रखते हैं : सर्वे

नई दिल्ली  देश में बड़ी संख्या में शीर्ष प्रबंधन स्तर के अधिकारी (सी-सूट) माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के बारे में सकारात्मक धारणा रखते हैं। डेलॉयट के एक सर्वे में यह तथ्य सामने आया है। इनमें से कई अधिकारियों ने जीएसटी 2.0 के तहत कर दरों को तर्कसंगत बनाने और विवाद निपटान के लिए एक प्रभावी प्रणाली की वकालत की है।  डेलॉयट जीएसटी@7 सर्वेक्षण में ऑनलाइन माध्यम से सी-सूट और सी-1 स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया। ये अधिकारी विभिन्न उद्योग क्षेत्रों से जुड़े हैं। इसमें उन चीजों का उल्लेख किया गया है जो जीएसटी के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। सर्वेक्षण में शामिल 84 प्रतिशत अधिकारियों ने 2024 में जीएसटी को लेकर सकारात्मक राय जताई। 2023 में यह संख्या 72 प्रतिशत और 2022 में 59 प्रतिशत थी। ई-चालान सहित कर अनुपालन के स्वचालन को शीर्ष प्रदर्शन वाला क्षेत्र करार दिया गया है। सर्वेक्षण में हितधारकों के बीच लगातार परामर्श, स्पष्टीकरण परिपत्र/निर्देशों को नीति निर्माण के लिए सकारात्मक कदम माना गया। सर्वेक्षण में उन क्षेत्रों पर जिक्र है जहां अधिक सुधारों की जरूरत है। इनमें कर दरों को तर्कसंगत बनाना, एक प्रभावी विवाद समाधान प्रक्रिया लाना, क्रेडिट अंकुशों को हटाना, आमने-सामने हुए बिना (फेसलेस) कर आकलन की प्रक्रिया को अपनाना, निर्यात नियमों को उदार करना और अनुपालन रेटिंग प्रणाली लागू करना शामिल है। जीएसटी को एक जुलाई, 2017 को लागू किया गया था। इसमें 17 स्थानीय कर और शुल्क समाहित हुए थे। जीएसटी के सात साल पूरे होने के मौके पर डेलॉयट इंडिया ने यह सर्वेक्षण भारतीय कंपनियों की इसपर राय जानने के लिए किया है। सर्वेक्षण में शामिल 88 प्रतिशत सी-सूट अधिकारियों (शीर्ष प्रबंधन के अधिकारी) ने उन क्षेत्रों का जिक्र किया जो चुनौती बने हुए हैं। इनमें ऑडिट और आकलन शामिल है। इन अधिकारियों ने सरलीकरण, प्रौद्योगिकी एकीकरण और क्षमता निर्माण को जारी रखने की वकालत की है।      

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