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डॉक्‍टर साहब की फितरत पर फिदा होते आमला के लोग 

People of Amla are impressed by the nature of Doctor Saheb हरिप्रसाद गोहे  आमला । आमतौर पर विधानसभा चुनाव के बाद वहां के रहवासियों को केवल विधायक और मंत्री मिल पाते है। लेकिन ये इत्‍तेफाक है कि आमला विधानसभा को आम लोगो की नब्‍ज भापनें वाला विधायक के साथ डॉक्‍टर भी मिला। सजह सरल स्‍वभाव के विधायक डॉ0 योगेश पंडागरे की फितरत जब लोगो के सामनें आती है तो लोग इस फितरत पर फिदा हो जाते। ऐसे कई वाक्‍ये आएदिन सामनें आते। जब विधायक डॉ0 पंडागरे क्षेत्र का दौरा या जनसंपंर्क करते हुए लोगो के बीच चहुचते तो लोग अपनी समस्‍याएं तो बताते जरूरत पड़नें पर अपना ईलाज और चिकित्‍सकीय परामर्श करानें से भी नही चूंकते। बड़ी बात ये है कि डॉक्‍टर भी ऐसे समय अपनी विधायकी को भूला कर मरीजो की सेवा मे तल्‍लीन नजर आते। केस 1–  अप्रैल माह मे 14 अप्रेल को आमला मे अंबेडकर अनुयायियों ने निशुल्‍क चिकित्‍सा शिविर आयोजित किया। जहां डॉ0 पंडागरे बतौर अतिथि उपस्थित थे। लेकिन एक गंभीर बीमार की हृदय रोग संबंधी सूचना मिली तो बिना किसी से कुछ कहे अतिथि की कुर्सी छोड़ मरीज संतोष पारधे के  की मोटरसाईकिल पर सवार होकर उसका ईलाज करनें एक स्‍थानीय नीजि क्‍लीनिक पहुचें और ईलाज शुरू कर दिया। गंभीर बीमार इलाज के पश्‍चात् अब स्‍वस्‍थ है। केस 2- 27 अप्रैल को विवाह समारोह मे शामिल होनें जा रहे डॉ0 पंडागरे को जब सरकारी अस्‍पताल मे एक महिला मरीज की गंभीर हालत की सूचना मिली तो वे पहले कार्यकर्ताओं के साथ अस्‍पताल पहुचे। मरीज की नब्‍ज भांपी। परिजनों और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्‍टर को और बेहतर ईलाज का परामर्श दिया। इसके पश्‍चात् ही वे समारोह मे शामिल होनें पहुचे।

जिला चिकित्सालय में उपलब्ध नहीं रहती पूरी दवाई , बाहर की दवा लेने को मजबूर नागरिक

Complete medicines are not available in the district hospital, citizens are forced to take medicines from outside. कटनी । शासन के द्वारा नागरिकों को मुहैया कराने के लिए जिला चिकित्सालय में दवाइयां उपयोग कराई जाती हैं एवं अच्छे स्वास्थ्य की अपेक्षा की जाती है लेकिन जिला चिकित्सालय में आए हुए मरीजों को पूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं डॉक्टर जो दवा लिखते हैं इसमें कई दवाइयां नागरिक बाहर से खरीदने को मजबूर होते हैं यह कोई नई बात नहीं है यह सिलसिला हमेशा चलता रहता है मिली जानकारी के मुताबिक जिला चिकित्सालय में लगभग 80 परसेंट दवाइयां उपलब्ध रहती हैं एवं कई प्रकार की दवाइयां जिला चिकित्सालय में आती हैं फिर भी डॉक्टर के द्वारा लिखी दवाइयां कुछ मरीजों को प्राप्त नहीं हो पाती हैं नागरिकों ने बताया कि कई बार ऐसा होता है कि बाहर से दवाई लेने को मजबूर होते हैं जिला चिकित्सालय में हर रोज कई मरीज आते हैं और बाहर से भी जिसको दवाइयां नहीं मिलती है वह परेशान होते हैं मरीज ने बताया कि पूर्ण रूप से दवाइयां नहीं मिल पाती हैं जिससे बाहर महंगे दामों में खरीदना पड़ता है इस विषय पर सिविल सर्जन डॉक्टर यशवंत वर्मा का कहना है कि हमारी कोशिश रहती है कि मरीज को दवाइयां उपलब्ध कराना कभी स्टॉक में कमी हो जाती है और लेट दवाइयां मिलने के कारण मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पाती हैं

झोलाछाप डॉक्टर पर अंकुश लगाने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम कई लोग की मौत के बाद जिला स्वास्थ्य एवं अंबाह क्षेत्र दोनों ही चुप्पी साधे हुए हैं

Health department failed to curb quack doctors, both district health and Ambah area are silent after the death of many people. मलखान सिंह परमारमुरैना ! अंबाह झोलाछाप डॉक्टर पर अंकुश लगाने में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है जिला स्वास्थ्य अधिकारी को कई साल से जानकारी होने के बावजूद भी एक भी कार्रवाई नहीं करते यहां तक की देखा गया है कि कई जिला स्वास्थ्य अधिकारी और बीएमओ को अवगत अवगत कराया गया और लिखित में भी कार्रवाई की मांग की गई पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई ऐसा लगता है कहीं ना कहीं स्वास्थ्य अधिकारी को इन झोलाछाप डॉक्टरों से मोटी रकम मिल रही है इसलिए कार्यवाही करने के नाम से पीछे हट जाते हैं जब भी इसे कोई जानकारी मांगी जाए तो उनका कहना होता है कि हमारी टीम कार्रवाई करेगी पर आज तक किसी भी झोलाछाप डॉक्टर पर कार्रवाई नहीं की गई और तो और सिविल अस्पताल के बगल से ही कई झोलाछाप डॉक्टर बैठती है कई मरीजों की जान भी गई है पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी कार्रवाई के नाम से मुंह ऐसे मोड़ लेते हैं जैसे की मारता है तो मरने दो हमारा थोड़ी मरता है अस्पताल सिविल अस्पताल प्रभारी प्रमोद शर्मा को भी बताया गया तो उनका कहना है हमारी टीम कार्रवाई करेगी पर ऐसा कभी नहीं होता है कार्रवाई के नाम से स्वास्थ्य अधिकारी अपना मुंह मोड़ लेते हैं इनका कहना हैप्रमोद शर्मा जी डॉक्टर कार्रवाई करेंगे

हमीदिया अस्पताल को रोबोटिक सर्जरी के लिए किया जा रहा तैयार

Hamidia Hospital is being prepared for robotic surgery भोपाल ! इस साल के अंत तक हमीदिया अस्पताल में रोबोटिक्स तकनीक से घुटने और कूल्हे के आपरेशन शुरू करने की तैयारी। राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में जल्द ही घुटने और कूल्हे (नी एंड हिप रिप्लेसमेंट) की रोबोटिक सर्जरी को शुरु करने की तैयारियों में जुट गया है। अब तक सिर्फ प्रदेश के निजी अस्पतालों में नी और हिप की सर्जरी होती है। प्रदेश के एम्स को छोड़ किसी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा पहली बार शुरू होने जा रही है। रिप्लेसमेंट के लिए इसकी शुरुआत दिसंबर 2024 तक की जाएगी, जिसकी कार्ययोजना काम किया जा रहा है। विभाग के अधिकारियों की मानें तो साल के अंत तक इसकी सुविधा सर्जरी वाले मरीजों को मिलना भी शुरू हो जाएगी। गांधी मेडिकल कालेज से मिली जानकारी के अनुसार इसके लिए बेंगलुरु की एक निजी कंपनी से अस्पताल के विशेषज्ञ संपर्क में भी हैं। क्या है रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट रोबोटिक सर्जरी कंप्यूटराइज्ड डिवाइस से की जाएगी, जो चिकित्सक के सहयोगी के रूप में काम करेगी। इसमें सर्जरी के दौरान चिकित्सक रोबोटिक सेटअप का रिमोट हाथ में पहनते हैं। इसमें लगे कैमरे और सेंसर रोबोट घुटने के सारे मूवमेंट और स्थिति को नोट कर उसकी थ्रीडी इमेज तैयार करते हैं। थ्रीडी इमेज के हिसाब से रोबोट सर्जरी का सटीक प्लान तैयार करता है। वह चिकित्सक को बताता है कि हड्डी कितनी खराब है, कितनी और किस जगह से काटने पर क्या परिणाम आ सकते हैं। आपरेशन एक विशेष कंसोल में बैठा सर्जन आपरेशन का काम संभालता है। सर्जन को आपरेशन करने वाली जगह का एक बड़ा 360 डिग्री दृश्य दिखता है। इसके अलावा साथ खड़ा चिकित्सक इस बात की जानकारी देता है कि उपकरण सही जगह पर जाकर अपना काम कर रहा है। रिप्लेसमेंट के तीन दिन बाद अस्पताल से मिलेगी छुट्टी अब तक यह सारे आकलन चिकित्सक अपने विवेक और अनुभव के आधार पर करते थे। अब चिकित्सक के पास सटीक आकलन और प्लान होगा। इससे सर्जरी काफी आसान हो जाएगी। यही नहीं, रोबोटिक सर्जरी में इंप्लांट की उम्र 10 साल तक बढ़ जाती है और सर्जरी फेल होने का खतरा न के बराबर होता है। यह सर्जरी इतनी सटीक होती है कि रिप्लेसमेंट के तीन दिन बाद ही मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाता है। इनका कहना हैरोबोटिक सर्जरी को लेकर काम काफी समय से चल रहा है। इसके पूर्व में भी इस सर्जरी के लिए डेमों विशेषज्ञों के सामने हो चुका है। वर्ष 2024 के अंत तक में इसकी शुरुआत करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा। इतना ही नहीं तकनीकी को बढ़ाने के लिए हम लगातार प्रयासरत हैं, बाहर के विशेषज्ञों से इसे लेकर लगातार संपर्क में हैं, जिससे इसकी सफलता की जानकारी दी जा सके।

बिल भुगतान न होने पर शवों को बंधक नहीं बना पाएंगे निजी अस्पताल

Private hospitals will not be able to hold dead bodies hostage if bills are not paid. भोपाल। निजी अस्पतालों में किसी मरीज की मौत होती है तो अस्पताल बिल भुगतान के नाम पर मरीज के शव को बंधक नहीं बना सकता। यही नहीं परिजनों द्वारा शव को प्राप्त न करने तक या लावारिस होने पर शव को गरिमा के साथ रखना होगा। इस दौरान शव के लिए फ्रीजर या कोल्ड स्टोरेज जैसी व्यवस्था भी करनी होगी। ऐसा करने पर अस्पताल पर कठोर अनुशासात्मक कार्रवाई की जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को निजी अस्पतालों में शवों के रखरखाव को लेकर दिशा निर्देश जारी किए। कोविड काल में शवों के संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेकर यह नियम जारी किए। आयोग द्वारा नियम जारी करने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी सभी निजी अस्पताल और नर्सिंग होम्स को इस संबंध में पत्र जारी किया। मालूम हो कि कई बार निजी अस्पतालों में बिल भगुतान ना होने के बाद शव को परिजनों को न सौंपने और विवाद के मामले सामने आते हैं। कई बार परिजन इसके विरोध में अस्पताल में तोड़फोड़ तक कर देते हैं। इन सब विवादों को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियम जारी किए गए। निजी अस्पतालों में नहीं होते फ्रीजरजारी नियमों में परिजनों को शव प्राप्त न होने तक शव को उचित तरीके से फ्रीजर में रखना होगा। हालांकि निजी अस्पतालों में कोल्ड स्टोरेज और फ्रीजर की व्यवस्था नहीं होती। यही नहीं नर्सिंग होम एक्ट में भी छोटे निजी अस्पतालों में कोल्ड स्टोरेज बनाने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में निजी अस्पतालों को शव को कोल्ड स्टोरेज तक पहुंचाने की व्यवस्था करनी होगी। शीतगृहों तक परिवहन की नि: शुल्क व्यवस्था भी निजी अस्पतालों को ही करना होगी। भोपाल नर्सिग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रणधीर सिंह ने कहा कि निजी अस्पतालों में फ्रीजर नहीं होते लेकिन अस्पताल इसकी व्यवस्था कर देते हैं। कोई अस्पताल पैसों के लिए शवों को बंधक नहीं बनाता। शवों को परिजनों को सौंपे जाने तक अस्पताल में पूरी गरिमा से रखा जाता है।

एंबुलेंस व कार की आमने-सामने टक्कर, चार घायल

Ambulance and car collide head-on, four injured भोपाल ! राजधानी के बिलखारिया थाना क्षेत्र में एक एंबुलेंस और कार की आमने-सामने टक्कर हो गई। घटना गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात की है। टक्कर की वजह से एंबुलेंस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसका चालक सीट पर ही फंसकर रह गया। कार को भी क्षति पहुंची। टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण दौड़कर आए और क्षतिग्रस्त वाहनों से लोगों को बाहर निकाला। एंबुलेस चालक को दरवाजा तोड़कर बाहर निकालना पड़ा। इस हादसे में चार लोगों के घायल होने की सूचना है, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है

भोपाल को नहीं मिला कैंसर अस्पताल, इकलौते एम्स में मरीजों की लंबी कतार

Bhopal did not get a cancer hospital, long queue of patients in the only AIIMS एम्स में एक साल पहले शुरू हुए कैंसर विभाग में पहुंच गए 41 हजार से अधिक रोगी। लंबी हुई प्रतीक्षा सूची। इलाज की आस में बेइंतहा दर्द भोग रहे हजारों पीड़ित। भोपाल। देश-दुनिया की तरह प्रदेश में भी कैंसर तेजी से पैर पसार रहा है। साल दर साल महिलाओं व पुरुषों में कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि भोपाल में आज तक अलग अस्पताल तैयार करना तो दूर मेडिकल कालेज में इसका विभाग ही पूरी सुविधाओं के साथ शुरू नहीं हो सका। इस बीच कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ते-बढ़ते हजारों में पहुंच चुकी है। इधर भोपाल एम्स में एक वर्ष पूर्व से कैंसर विभाग ने विधिवत काम करना शुरू कर दिया है लेकिन यहां पहले ही वर्ष में 41 हजार से अधिक रोगी पहुंचने से मौजूदा संसाधन कम पड़ रहे हैं। यहां प्रतीक्षा सूची इतनी लंबी हो चुकी है कि महीनों पहले उपचार मिलना मुश्किल है। राजधानी में एम्स सहित अन्य अस्पतालों में हर साल कैंसर के 44 से 45 हजार मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिविल अस्पताल के साथ एक कैंसर स्पेशलिटी अस्पताल भी बनाना जरूरी है। जिससे कैंसर मरीजों को इलाज के लिए भटकना ना पड़े। हमीदिया बन सकता था कैंसर अस्पतालएनएचएम के पूर्व संचालक डा. पंकज शुक्ला कहते हैं, प्रदेश की राजधानी में ही सरकार की ओर से कैंसर उपचार की व्यवस्था सबसे कमजोर है। हमीदिया में आसानी से कैंसर अस्पताल विकसित किया जा सकता था, लेकिन इसके लिए कभी पूरी ताकत से प्रयास नहीं किए गए। प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जिले में कीमोथैरेपी की व्यवस्था की। लेकिन राजधानी में एक सुविधाओं से सुसज्जित कैंसर अस्पताल की जरूरत है।दोनों विभाग के विशेषज्ञों का सही उपयोगशुक्ला बताते हैं, शासन ने चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग को एक विभाग बनाने का फैसला किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों विभागों के विशेषज्ञ, स्थान, सुविधाएं और बजट का सही उपयोग करना जरूरी है। यह एक समय है जिससे कैंसर जैसे गंभीर रोग से ग्रसित मरीजों को एक स्थान पर पूर्ण और सटीक इलाज उपलब्ध कराया जा सकता है। शहर के लिए कैंसर अस्पताल बनाना अच्छा विकल्प हो सकता है। शहर में कैंसर मरीज हमीदिया अस्पताल में साल 2021 में कैंसर के 5096 मरीज इलाज के लिए आए। वहीं साल 2022 में यह आंकड़ा 6533 दर्ज किया गया। साल 2023 में 7121 कैंसर के मरीज इलाज के लिए हमीदिया के आन्कोलाजी विभाग पहुंचे। यानी 20 से 25 मरीज रोजाना ओपीडी में आए। एम्स भोपाल में बीते साल प्रदेश भर से 41 हजार 323 कैंसर के मरीज इलाज के लिए पहुंचे। एम्स अस्पताल में रोजाना आनकोलाजी सर्जरी और रेडियोलाजी विभाग के मिलाकर रोजाना 200 से 250 मरीज पहुंच रहे हैं।कैंसर का उपचार शुरू करने के लिए 25 से 30 करोड़ की यूनिट लगाई जाती है। इसे सरकार तीन साल में वसूल कर सकती है। लेकिन आयुष्मान के पैसों को सरकार ऐसे भी बचा सकती है। सरकार के लिए कोई यह बड़ी रकम भी नहीं है। – डा.ओपी सिंह, कैंसर विशेषज्ञ ऐसे बढ़ रहे मरीज,(हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे कैंसर रोगियों की संख्या) वर्ष 2021 – 5096 रोगीवर्ष 2022 – 6533 रोगीवर्ष 2023- 7121 रोगी एम्स की स्थितिवर्ष 2023 – 41 हजार 323 रोगी

इंदौर संभाग के प्रथम प्रधानमंत्री जन औषधि विक्रय केंद्र का कलेक्टर श्री मिश्र ने ग्राम सिंघाना में किया शुभारम्भ

Collector Shri Mishra inaugurated the first Prime Minister Jan Aushadhi Sales Center of Indore division in village Singhana. धार ! कलेक्टर प्रियंक मिश्र ने आज बहुउददेशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था मर्या. ( बी पैक्स ) सिंघाना द्वारा संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि विक्रय केन्द्र का शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा की जेनेरिक औषधि से आम जन को होने वाले लाभ एवं उचित दरों पर गुणवत्ता पूर्ण औषधि प्रदान करने हेतु यह सहकारिता विभाग का बेहतर प्रयास है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सहकार से समृद्धि योजना अंतर्गत बी – पैक्स सिंघाना द्वारा जन औषधि केन्द्र का संचालन संस्था की आय में वृद्धि करने में सहायक होगी। इसके साथ ही यह केंद्र ग्रामिणजनों के लिए रोजगार के नये अवसर उपलब्ध कराएगा। इंदौर संभाग में सहकारिता के क्षेत्र में बी पैक्स सिघाना द्वारा संचालित यह पहला जन औषधि केन्द्र है। कलेक्टर ने ग्रामीणों से आग्रह किया कि ज्यादा से ज्यादा जेनेरिक औषधियों का उपयोग करे। उन्होंने मनावर एसडीएम को भी निर्देश दिए कि सुनिश्चित करायें की शासकीय चिकित्सक जेनेरिक औषधि मरीजों के उपचार हेतु लिखे। ज़िले में स्वास्थ विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इसकी लगातार मॉनिटरिंग करें। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य शिवराम कन्नौज , उपायुक्त सहकारिता वर्षा श्रीवास सहित अन्य जनप्रतिनिधि और महाप्रबंधक जिला सहकारी के. बैंक मर्या. धार, संस्था प्रशासक, प्रबंधक एवं संस्था के सदस्य / ग्रामीणजन उपस्थित रहे।इसके साथ ही कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने ग्राम सिंघाना के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने उपस्थित डॉक्टर्स से मरीजों के इलाज के संबंध में जानकारी ली। इसके पश्चात कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने मनावर के ग्राम सिंघाना में स्थित गौशाला का अवलोकन किया।

जिला चिकित्सालय के सामने ई-रिक्शा का साम्राज्य मौसम बदलते ही लगने लगी भीड़

Empire of e-rickshaw in front of the district hospital, crowd started gathering as the weather changed कटनी। जिला चिकित्सालय जो कि जिले का इकलौता अस्पताल है जहां पर लोग दूर-दराज से इलाज करवाने आते हैं जिससे लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है मौसम बदलते ही जिला चिकित्सालय में भीड़ देखने को मिल रही है जिला चिकित्सालय में आसपास के जिलों से लोग भी आते हैं जांच करवाने एवं इलाज करवाने जिला चिकित्सालय के सामने ई-रिक्शा की धमा चौकड़ी जिला चिकित्सालय सड़क जो की व्यस्ततम रहती है सड़क के दोनों तरफ गाड़ियों का जमावड़ा भी रहता है और ई रिक्शा वालों ने तो हद ही कर दी है नागरिक बताते हैं कि गेट के सामने ई रिक्शा वाले खड़ा कर देते हैं निकलने में आशुविधा का सामना करना पड़ता है नागरिकों को भी परेशानी हो रही है जिम्मेदारों के द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है जबकि वहीं पर अस्पताल पुलिस चौकी भी है लेकिन भीड़ को नजर अंदाज किया जाता है रेलवे स्टेशन भी इसी मार्ग पर रेलवे स्टेशन भी इसी मार्ग पर पड़ता है तो भीड़ होना लाजमी है अस्पताल प्रबंधन भी इस पर ध्यान नहीं दे पता है जिस वजह से भीड़ लगी रहती है एवं वाहनों को आने-जाने में परेशानी उठानी पड़ रही है अब ऐसे में चाहिए की जिम्मेदार इस पर ध्यान दें ताकि नागरिकों को और सुविधा का सामना न करना पड़े

नहीं मिल पा रहा है ग्रामीणों को इलाज, सामुदायिक स्वास्थ्य भवन का निर्माण होने के बावजूद भी 

Villagers are not able to get treatment, despite construction of community health building. विशेष संवाददाता  कटनी /स्लीमनाबाद । जिम्मेदारों के लापरवाही की वजह से ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है लाभ जानकारी के मुताबिक जनपद पंचायत बहोरीबंद अंतर्गत  ग्राम पंचायत में स्वच्छता परिसर का निर्माण होने के बाद से ही ताला लगा हुआ है। लगभग 2 वर्ष हो गए अब तक सामुदायिक स्वच्छता परिसर शुरू नही किया गया है। जिसकी वजह से गांव के ग्रामीण स्वच्छता परिसर का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जब से स्वच्छता परिसर का निर्माण हुआ है तभी से स्वच्छता परिसर में ताला लगा दिया गया है। जिसके कारण इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है और गांव में गंदगी फैल रही है। जिससे ग्रामीणों को बीमार होने का खतरा भी बना रहता है। स्वच्छता परिसर का ताला न खुलने के कारण यहां आसपास गंदगी पसरी रहती है। इस ओर जिम्मेदार लोगों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 4 लाख 50 हजार रुपये से हुआ है निर्मित- ग्राम पंचायत स्लीमनाबाद मैं सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण कार्य 4 लाख 50 हजार रुपये की राशि से हुआ है। इसमें 50 हजार रुपये विधायक निधि के भी सम्मिलित है तथा शेष मनरेगा व स्वच्छ भारत मिशन की राशि है। लेकिन जिला पंचायत के द्वारा जिस उद्देश्य को लेकर सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण कार्य कराया गया वह पूरा होते हुए नही दिख रहा है। इस संबंध मे स्वच्छ भारत मिशन के ब्लाक समन्वयक नवीन साहू ने बताया की कुछ स्थानों पर अब भी पानी की उपलब्धता बाकी है। साथ ही सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का संचालन कैसे हो इस पर निर्णय नही बन पा रहा है। स्लीमानाबाद का सामुदायिक स्वच्छता परिसर जल्द से जल्द चालू हो इसके लिए प्रयास जारी है। अब देखना यह होगा कि यह प्रयास कब तक सफल हो पता है

पॉलिटेक्निक चौराहे के टावर पर चढ़ी फीजियोथैरेपिस्ट, नगर निगम की टीम ने सकुशल उतारा

Physiotherapist climbed the tower of Polytechnic intersection, Municipal Corporation team brought her down safely भोपाल। श्यामला हिल्स स्थित पॉलिटेक्निक चौराहा पर शुक्रवार शाम एक फीजियोथैरेपिस्ट मोबाइल टावर पर चढ़ गई। वह टावर से कूदने की धमकी दे रही थी। सूचना पर पहुंची नगर निगम की टीम और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए महिला को टावर से नीचे उतार लिया। महिला को अयोध्या नगर थाने भेजा गया है। दरअसल, महिला ने अयोध्या नगर थाने में दो एफआईआर कराई थी और कोर्ट में मामला विचाराधीन है। विचाराधीन मामले में आरोपी पक्ष महिला पर दबाव बना रहा था। इसी से दुखी होकर वह टावर पर चढ़ गई थी। जानकारी के अनुसार 37 साल की महिला मूलत: सागर की रहने वाली है। उन्होंने मिनाल रेसीडेंसी में मकान खरीदा था। कुछ रुपए वह दे चुकी थी, जबकि कुछ रकम देनी बाकि थी। रुपए बाकि होने के कारण द्वारिका प्रसाद और ठेकेदार सुधीर शर्मा रुपए के लिए दबाव बना रहे थे। महिला ने अयोध्या नगर में दोनों के खिलाफ 2021 में छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई थी। कुछ दिन बाद आरोपियों ने उसके साथ घर में घुसकर मारपीट की थी। उसकी भी एफआईआर कराई थी। महिला का कहना है कि आरोपी उसे घर से बेदखल कर चुके है। अब वह पुराने केस में समझौता करने के लिए दबाव बना रहे हैं। वह आरोपियों की शिकायत लेकर थाने पहुंची तो पुलिस ने उसकी मदद नहीं की। इसी से दुखी होकर वह श्यामला हिल्स के पॉलिटेक्निक चौराहा पहुुंची और टावर पर चढ़ गई।

भगवान भरोसे चल रहा आरोग्यम प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र धमोखर

Arogyam Primary Health Center Dhamokhar is running with the trust of God. विशेष संवाददाता  उमरिया। प्रदेश सरकार मरीजो को बेहतर इलाज के लिए भले ही पानी की तरफ पैसा बहा रहे हो लेकिन हकीकत कुछ और ही है। जिला उमरिया से लगभग 13 किमी की दूरी पर बनी आरोग्यम स्वास्थ्य केंद्र धमोखर अस्तपाल में मरीज आये और ऑनलाइन पर्ची बनवाने के पश्चात ऑनलाइन ही मरीज अपनी दवा करवा के घर जाए इस अस्पताल का रबईया आज दिनों कुछ ऐसा ही चल रहा हकीकत यह है की इस अस्पताल मे जहा पर डॉक्टर मरीजो की जांच कर सही उपचार करें वही पर डॉक्टर की कुर्सी मे बैठ कर कंपाउंडर मरीजो की जाँच कर उनको दवा दे रहे है जिससे मरीजो की जिंदगी दाँव पर लगी बैठी है अगर इसी तरह का रबईया रहा तो मरीजो की समस्या का समाधान नहीं हो सकता

हमीदया अस्पताल में हफ्ता वसूली की जांच जारी

Investigation of week recovery continues in Hamiday Hospital भोपाल। मप्र मानव अधिकार आयोग ने भोपाल जिले के तीन मामलों मे संज्ञान लिया है। भोपाल जिले के हमीदिया अस्पताल में असामाजिक तत्वों द्वारा कर्मचारियों से हफ्ता वसूली करने का मामला सामने आया है। असामाजिक तत्व रात के समय अस्पताल में घुसकर कर्मचारियों से हफ्ता वसूली कर रहे है। इस संबंध में अस्पताल कर्मचारियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज की है। मामले में संज्ञान लेकर आयोग ने अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल और पुलिस कमिश्नर को जांच के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही की गई कार्यवाही के संबंध में तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।इन मामलों में भी लिया संज्ञानआयोग ने भोपाल के शाहपुरा इलाके की एक बस्ती में रहने वाली 47 वर्षीय महिला के साथ एक युवक द्वारा शारीरिक दुराचार करने और मिसरोद थानाक्षेत्र में पुलिस विभाग के एक आरक्षक द्वारा युवती के साथ दुराचार और दैहिक शोषण करने के मामले में संबंधित अधिकारियों के जांच के निर्देश देने के साथ ही मामले की रिपोर्ट तलब की है।

हमीदिया अस्पताल: एंबुलेंस चालकों का आरोप: शव ले जाने से पहले पार्किंग संचालक मांगता है कमीशन

Hamidia Hospital: Allegations of ambulance drivers: Parking operator demands commission before taking the dead body भोपाल। हमीदिया अस्पताल में पार्किंग व शव वाहन का संचालन विवाद की जड़ बन गया है। अकसर रात में यहां दो गुट एक दूसरे के लोगों को धमकाते व मारपीट करते हैं। हाल ही में इसका एक वीडियो भी वयरल हुआ था। वहीं अब करीब 11 एंबुलेंस चालकों द्वारा कोहफिजा थाने में लिखित शिकायत की गई है। जिसमें पार्किंग संचालक नरेंद्र गोस्वामी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लिखित आवेदन में कहा गया है कि पार्किंग संचालक शव ले जाने से पहले कमीशन मांगता है। उसकी बात ना मानने मारपीट व जान से मारने तक की धमकी देता है। इस मामले में पार्किंग संचालक नरेंद्र का कहना है कि यह वे लोग हैं जो प्रति माह 2 हजार रुपए का तय किराया नहीं दे रहे हैं। इनसे जब किराया मांगा गया तो, इन्होंने झूठा आरोप लगाना शुरू कर दिया। इनके पीछे सलमान और आरीफ नाम के लोगों का हाथ। जो अकसर हमीदिया परिसर में गुंडागर्दी करते हैं। परिजनों से वसूल रहे दो से ढाई गुना किरायापार्किंग को लेकर चल रहे इस विवाद से परेशान मरीजों व परिजनों को होना पड़ रहा है। परिजनों को हमीदिया से शव निवास तक ले जाने के लिए दो से ढाई गुना अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। यह स्थिति बीते डेढ़ से दो साल से बनी हुई। अस्पताल प्रबंधन से लेकर प्रसाशन तक ने अब तक इस पर कोई कठोर कदम नहीं उठाए हैं। जिसके चलते अस्पताल की व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है।

कोरोना के JN.1 वेरिएंट ने भारत में मचाया कोहराम, 24 घंटे में 5 लोगों की मौत, 529 नए मामले

The JN.1 variant of the coronavirus has caused havoc in India, with 5 deaths and 529 new cases reported in the last 24 hours. नई दिल्ली ! भारत में कोरोना के नए वेरिएंट JN.I ने कोहराम मचा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 24 घंटे के भीतर 529 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 5 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली में भी JN.1 का पहला मामला सामने आया है। भारत में कोरोना के नए वेरिएंट JN.I ने कोहराम मचा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 24 घंटे के भीतर कोविड के 529 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 5 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली में भी JN.1 का पहला मामला सामने आया है। दरअसल, JN.] वेरिएंट दिल्ली से लेकर भारत के 9 राज्यों में फैला हुआ है। वहीं महाराष्ट्र में तीन महीने में पहली बार कोविड-19 से मौत की खबर सामने आई है। वहीं 4,093 मरीज इलाज करा रहे है। रिपोर्ट के अनुसार JN.1 वेरिएंट गुजरात, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्यों में पाया गया है। एक्सपर्ट के अनुसार, JN.1 के लक्षण हल्के हैं। इसलिए मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत कम होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, JN.1 वेरिएंट में म्यूटेशन होता है। 24 घंटे में सामने आए 529 नए मामले स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में 24 घंटों में कोविड-19 के 529 मामले और 5 मौतें दर्ज की गईं हैं। वहीं कोविड का JN.] वेरिएंट का पहला केस 8 दिसंबर को केरल में पाया गया था। इसके बाद यह 9 राज्यों में फैल गया। इसके साथ ही नई दिल्ली में JN.1 वेरिएंट का पहला मामला मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आगे कहा कि भारत में बुधवार सुबह 8 बजे तक 24 घंटे में 529 नए मामले दर्ज किए गए। अब तक कोविड के कारण 5 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं बुधवार को 87 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, देश में अब तक JN.1 के कुल 110 मामलों की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में JN.1 के सबसे अधिक 36 मामले हैं। इसके बाद कर्नाटक में 34, गोवा में 14, महाराष्ट्र में 9, केरल में 6, राजस्थान में 4, तमिलनाडु में 4, तेलंगाना में 2 और दिल्ली में एक मामले सामने आए है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि मामले बढ़ रहे हैं लेकिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत कम पड़ रही है क्योंकि अधिकतर मामलों में हल्के लक्षण है।

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