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अंदर जनप्रतिनिधियों से मिल रहे थे साहब, बाहर जनता करती रहीं इंतजार, अनदेखी दिखी तो लोगों ने जमीन पर बैठकर किया प्रदर्शन।

Inside, the sir was meeting the public representatives, outside the public kept waiting, when they saw neglect, the people sat on the ground and protested. हरिप्रसाद गोहे आमला। बुधवार मध्य रेल महाप्रबंधक आमला जक्शन वार्षिक निरीक्षण करने पहुंचे थे। जिनसे मिलने क्षेत्र के गणमान्य जनप्रतिनिधि भी पहुंचे थे। इसके अलावा आमला नगर के गणमान्य नागरिक, विभिन्न संगठनों के संगठन प्रमुखों के अलावा क्षेत्र कि जनता भी बड़ी संख्या में आमला रेल्वे स्टेशन में व्याप्त समस्याओं को जी एम के समक्ष रखने रेल्वे स्टेशन पहुंचे थे। बताया गया जी एम से मिलने के लिए बाकायदा लोगों द्वारा समय भी मांगा गया था। बावजूद जीएम से मुलाकात करने रेल्वे स्टेशन पर अव्यवस्थाओं का आलम दिखाई दिया। इतना ही नहीं क्या आम क्या खास लोगों के अलावा मीडिया कर्मी भी सुरक्षा में तैनात पुलीस कर्मियों के हस्ते धक्का मुक्की के शिकार होते दिखाई दिए। जिस बात से न खुश लोगों ने यात्री प्रतीक्षालय के गेट के समाने बैठकर जी एम से मिलने अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया था। बाद रेल अधिकारियों की समझाइश के बाद लोगों ने महाप्रबंधक से मुलाकात कर ज्ञापन प्रेषित कर रेल समस्या रखी। इस दौरान खास बात यह देखी गई स्टेशन सलाहकार समिति सदस्य, आमला व्यापारी संघ अध्यक्ष, विभिन्न संगठन प्रमुखों सहित अन्य लोग साहब से मिलने खासे परेशान दिखाई दिए। उम्र दराज लोग भी हाथों में गुलदस्ता लेकर मिलने का इंतजार करते दिखाई दिए। जिस बात लोगों में खासी नाराजगी दिखाई दी।जिस बात की दिन भर शहर चर्चा रही। इन्होंने क्या कहा  मंडल स्तर के अधिकारियों को जी एम से मिलने का व्यवस्थित समय निर्धारण करना चाहिए जिसकी कमी देखी गई। पंडित राजेंद्र उपाध्याय वरिष्ठ अधिवक्ता,स्टेशन सलाहकार समिति सदस्य मध्य रेल आमला।। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि जी को चाहिए था कि वे व्यापारियों एवं हम लोगों को साथ ले जाकर महाप्रबंधक से मिलते उन्होंने मीडिया ओर हमसे मिलना  उचित नहीं समझा।  यशवंत चढ़ोकार स्टेशन सलाहकार समिति आमला।। हम जनता की समस्या बताने गए थे अ व्यवस्थाओं से एवं मिलने से रोके जाने से आत्म सम्मान को ठेस पहुंचती है। जिन अधिकारियों ने हमें मिलने के लिए बुलाया था वे प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर पाए। अनिल सोनी अध्यक्ष प्रगतिशील व्यापारी कल्याण संघ आमला।।

103 स्टेशनों का रीडेवलपमेंट, PM मोदी आज करेंगे शुभारंभ, MP के ये रेलवे स्टेशन शामिल

नर्मदापुरम भारतीय रेल (Indian Railways) को देश की जीवन रेखा माना जाता है और रेलवे स्टेशन किसी भी शहर की पहचान का केंद्र होते हैं. अधिकतर स्टेशन शहर के बीचोंबीच स्थित होते हैं, जहां आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां दिखती रहती हैं. इसलिए स्टेशनों का विकास केवल यात्री सुविधाओं तक सीमित नहीं रहकर, उन्हें स्थानीय विरासत और पहचान से जोड़ना ज़रूरी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के नेतृत्व में भारत ने ‘अमृत काल’ में तेज़ विकास की दिशा पकड़ी है. उनकी प्रेरणा से भारतीय रेलवे ने 1300 से अधिक स्टेशनों के कायाकल्प की शुरुआत की, और अब 103 स्टेशनों का उद्घाटन अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत होने जा रहा है. यह विकास की नई संस्कृति है, जिसमें शिलान्यास से उद्घाटन तक का सफर रिकॉर्ड समय में पूरा हो रहा है और इसके लिए भारतीय रेलवे सराहना की पात्र है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 मई को देशभर के 103 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे इसमें एमपी के दो स्टेशन शामिल हैं. अमृत भारत स्टेशन योजना से हो रहे ये काम अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकसित किए जा रहे 1300 से अधिक स्टेशनों में जो 103 स्टेशन अभी बनकर तैयार हुए हैं, उनमें मध्य प्रदेश राज्य के छह स्टेशन – कटनी साउथ, श्रीधाम, नर्मदापुरम, शाजापुर, सिवनी और ओरछा शामिल हैं. 86 करोड़ से अधिक की लागत से विकसित इन स्टेशनों में सौंदर्य, सुविधा और संस्कृति तीनों का समन्वय है. इन स्टेशनों पर भव्य प्रवेश द्वार, आकर्षक फसाड, हाई मास्ट लाइटिंग, आधुनिक प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर, मॉर्डन टॉयलेट और दिव्यांगजन के लिए सुगम रैंप जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं. प्लेटफॉर्म पर शेल्टर, कोच इंडिकेशन सिस्टम और सूचना के लिए डिजिटल डिस्प्ले लगाए गए हैं. सभी सुविधाओं को  दिव्यांगजन अनुकूल बनाया गया है. वहीं, हर स्टेशन पर मध्य प्रदेश की लोक कला, संस्कृति और परंपराओं की झलक भी देखने को मिल रही है. नर्मदापुरम रेलवे स्टेशन नर्मदापुरम रेलवे स्टेशन, जिसे अब आधुनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक पहचान के साथ नया स्वरूप प्रदान किया गया है, ₹26 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पुनर्विकसित किया गया है. यह स्टेशन नर्मदा संस्कृति और स्थानीय लोककला पर आधारित थीम के तहत डिज़ाइन किया गया है, जिससे यह केवल एक यात्री ठहराव का स्थान नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक अनुभव बन गया है. पुनर्विकास कार्यों में स्टेशन भवन का नवनिर्माण, भव्य प्रवेश द्वार, विकसित प्रतीक्षालय, पर्याप्त टिकटिंग काउंटर, दिव्यांगजन अनुकूल शौचालय एवं रैम्प, 12 मीटर चौड़ा नया फुट ओवर ब्रिज और दोनों ओर के हाई लेवल प्लेटफॉर्म पर कवर शेड्स शामिल हैं. यात्रियों की सुविधा के लिए 3100 वर्गमीटर क्षेत्र में सर्कुलेटिंग एरिया का सौंदर्यीकरण किया गया है और 1000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में आधुनिक LED लाइटिंग की व्यवस्था की गई है. नर्मदापुरम स्टेशन अब सिर्फ एक रेलवे हब नहीं, बल्कि माँ नर्मदा की आध्यात्मिक धरा पर आधुनिक भारत की झलक प्रस्तुत करता है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस विकास से स्थानीय यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र में पर्यटन, आर्थिक गतिविधियों और सांस्कृतिक समृद्धि को भी गति मिलेगी. शाजापुर रेलवे स्टेशन शाजापुर रेलवे स्टेशन अब आधुनिकता और परंपरा का संगम बन चुका है. 13 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पुनर्विकसित इस स्टेशन में यात्रियों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं. प्लेटफॉर्मों का उच्चीकरण, नया फुट ओवर ब्रिज, विस्तारित छायादार क्षेत्र, सौंदर्यीकृत सर्कुलेटिंग एरिया, नव निर्मित प्रवेश द्वार, सुव्यवस्थित टिकट काउंटर और आधुनिक प्रतीक्षालय अब इस स्टेशन की पहचान बन चुके हैं. स्टेशन भवन के फासाद को भी आकर्षक और सांस्कृतिक रूप में नया डिजाइन दिया गया है. यात्रियों की सुविधा के लिए पुरुष एवं महिला शौचालयों के साथ-साथ दिव्यांगजन अनुकूल विशेष सुविधाएं, VIP प्रतीक्षालय, द्वितीय श्रेणी वेटिंग हॉल और पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था की गई है. इससे न केवल यात्रा अनुभव बेहतर होगा, बल्कि लोगों को स्टेशन पर समय बिताना भी सुखद अनुभव प्रदान करेगा. यात्रियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना है 140 वर्ग मीटर में फैला ‘आर्ट एंड कल्चर ज़ोन’, जो स्थानीय संस्कृति की झलक को जीवंत करता है. यह न केवल एक रेलवे स्टेशन का विकास है, बल्कि शाजापुर जिले की सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक पहचान को नया आयाम देने वाला कदम भी है.

भारतीय रेलवे की कमाई बढ़ी, खर्चे में कमी आई, ऑपरेटिंग रेश्यो बेहतर हुआ, माल ढुलाई में बनाया रेकॉर्ड

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने अपनी वित्तीय स्थिति को बेहतर किया है। रेलवे ने वित्त वर्ष 2024-25 में अपना ऑपरेटिंग रेश्यो (OR) सुधारा है। OR एक महत्वपूर्ण पैमाना है जिससे पता चलता है कि रेलवे का वित्तीय प्रदर्शन कैसा है। यह 98.32% रहा, जो कि 2023-24 में 98.43% था। इसका मतलब है कि 31 मार्च 2025 को समाप्त हुए साल में रेलवे बोर्ड ने 100 रुपये कमाने के लिए 98.32 रुपये खर्च किए। भारतीय रेलवे का कुल खर्च वित्त वर्ष 2024-25 में 2.63 लाख करोड़ रुपये रहा। यह 2023-24 में 2.52 लाख करोड़ रुपये था। कुल कमाई वित्त वर्ष 2024-25 में 2.65 लाख करोड़ रुपये रही। यह पिछले साल 2.56 लाख करोड़ रुपये थी। रेलवे की बिना किराये वाली कमाई भी 11,000 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गई है। यह कमाई टिकटों से नहीं, बल्कि दूसरी चीजों से हुई है, जैसे विज्ञापन और पार्सल सेवा। कई तरह से हुआ फायदा रेलवे को यात्री, माल आदि से फायदा हुआ है। यात्रियों से होने वाली कमाई पिछले साल से 6.4% ज्यादा रही, जो 75,239 करोड़ रुपये है। माल से होने वाली आय 1.7% बढ़कर 2024-25 में 1.71 लाख करोड़ रुपये हो गई। यह 2023-24 में 1.68 लाख करोड़ रुपये थी। अन्य राजस्व में सबसे ज्यादा सुधार हुआ है। यह 19.8% बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 11,562 करोड़ रुपये हो गया। यह कमाई बिना किराए के स्रोतों से होती है। माल ढुलाई में बनाया रेकॉर्ड रेलवे ने लगातार चौथे साल 2024-25 में माल ढुलाई और राजस्व के रेकॉर्ड तोड़े हैं। इस साल माल ढुलाई 1.61 अरब टन से ज्यादा हो गई। इससे भारत का रेलवे नेटवर्क सालाना माल ढुलाई के मामले में दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क बन गया है। इसने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। अभी चीन ही एकमात्र ऐसा देश है जो रेलवे द्वारा माल ढुलाई के मामले में भारत से आगे है। कैसे होगा लक्ष्य पूरा? भारतीय रेलवे का अस्थायी शुद्ध राजस्व वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 2,342 करोड़ रुपये रहा। यह 2023-24 में 3,259.68 करोड़ रुपये था। बजट 2025-26 में आने वाले वित्त वर्ष के लिए 3,041.31 करोड़ रुपये के शुद्ध राजस्व का अनुमान है। यह यात्रियों से 92,800 करोड़ रुपये और माल ढुलाई से 1,88,000 करोड़ रुपये की कमाई से होगा। काम के तरीके में आया सुधार रेलवे का कहना है कि उन्होंने काम करने के तरीके में सुधार किया है। इससे खर्च कम हुआ है और कमाई बढ़ी है। रेलवे ने बताया, ‘हमने लागत को कम करने और आय को बढ़ाने पर ध्यान दिया।’ रेलवे अब और भी बेहतर करने की कोशिश कर रहा है ताकि लोगों को अच्छी सुविधा मिल सके और रेलवे का फायदा भी हो।

भारतीय रेलवे का बड़ा प्‍लान, ट्रेनों में बढ़ेंगे 1000 कोच, यात्र‍ियों की होगी बल्‍ले-बल्‍ले

नईदिल्ली सरकार ने कहा है कि रेल सुविधा को सबके लिए उपलब्ध कराने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है, जिसके लिए जनरल बोगियों को बढ़ाया जा रहा है और इसके तहत इस साल के अंत तक 1000 अतिरिक्त कोच रेलों में लगाये जाएंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक पूरक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी देते हुए बताया कि कि देश के हर क्षेत्र में लोगों को बेहतर रेल सुविधा मिले, इसलिए सरकार जनरल डिब्बों को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है और इसका मकसद ऐसा कर हर नागरिक तक बेहतर रेल सुविधा उपलब्ध कराना है। वैष्णव ने कहा कि केरल में रेल नेटवर्क को विकसित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और इसके लिए निधि आवंटित की गई है। उन्होंने स्थानीय सांसदों से राज्य सरकार को भूमि उपलब्ध कराने में मदद करने का भी आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सरकार पैसेंजर ट्रेन में यात्रा के लिए बड़ी सब्सिडी दे रही है और इस क्रम में 56993 करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी पैसेंजर ट्रेन में दी गयी है। सरकार का फोकस जनरल कोच बढ़ाने पर है और दिसंबर के आखिर तक 1000 अतिरिक्त जनरल कोच बढ़ाने की योजना है। 100 रुपये के टिकट पर खुद कितने वसूलता है रेलवे, सरकार ने दिया पूरा हिसाब पत्रकारों को पहले मिलने वाली सब्सिडी की बहाली की संभावना के बारे में पूछे जाने पर वैष्णव ने कहा, ‘भारत सरकार की ओर से यात्रियों को कुल सब्सिडी 56,993 करोड़ रुपये की दी जाती है। हर 100 रुपये की यात्रा सेवा की कीमत 54 रुपये ली जाती है। सभी श्रेणियों के यात्रियों को 46 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है।’ वैष्णव ने एक पूरक प्रश्न के उत्तर में यह भी कहा कि जिस तरह से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में सड़कों से पूरे देश को जोड़ा गया था, उसी तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के छोटे और मझोले रेलवे स्टेशनों का विकास किया जा रहा है। जोन के अंदर और बाहर आने-जाने में सुव‍िधा होगी रेलवे की तरफ से उठाए गए कदम से जनरल कोच में सफर करने वाले करीब एक लाख यात्र‍ियों को राहत म‍िलेगी. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) की तरफ से इसमें अहम भूमिका निभाई जा रही है. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के CPRO कपिनजल किशोर शर्मा ने बताया क‍ि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) ने पहले ही 36 ट्रेनों / 69 रैक को 276 जनरल कोच के साथ बढ़ा दिया है. इससे यात्री अपने जोन के अंदर और बाहर ज्‍यादा सुव‍िधाजनक तरीके से जा सकेंगे. करीब 370 ट्रेनों में 600 जनरल कोच जोड़े गए उन्होंने यह भी बताया क‍ि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे दिसंबर 2024 के अंत तक 16 जनरल कोच के साथ तीन अतिरिक्त ट्रेनों को बढ़ाने का प्‍लान कर रही है. ये प्रयास NFR की यात्री सेवाओं में सुधार और सभी वर्गों के लिए ट्रेन सफर को ज्‍यादा आरामदायक बनाने के मकसद से क‍िया जा रहा है. उन्‍होंने बताया क‍ि रेल यात्रा में लोगों की बढ़ती रुच‍ि को देखते हुए रेलवे अपने बेड़े का विस्तार करने के साथ ही मौजूदा ट्रेनों में भी जनरल कोच को जोड़ने पर काम कर रहा है. कपिनजल किशोर शर्मा ने बताया क‍ि जुलाई से अक्टूबर के बीच करीब 370 ट्रेनों में 600 जनरल कोच जोड़े गए. 10,000 से ज्‍यादा नॉन-एसी कोच शाम‍िल करने का प्‍लान इसके अलावा अगले दो साल में 10,000 से ज्‍यादा नॉन-एसी कोच शाम‍िल क‍िये जाने का प्‍लान है. इसमें 6,000 से ज्‍यादा जनरल कोच और स्लीपर-क्लास कोच शामिल हैं. रेलवे की तरफ से उठाए जाने वाले कदम से रोजाना करीब 8 लाख यात्रियों को सहूल‍ियत म‍िलेगी. रेलवे की तरफ से तैयार क‍िये जा रहे एलएचबी कोच (LHB) काफी आरामदायक और सुरक्ष‍ित हैं. उन्होंने बताया क‍ि LHB कोच हल्के और मजबूत होते हैं. दुर्घटना होने पर भी इनमें कम नुकसान होता है.

एक दिन में 3 करोड़ यात्रियों ने किया ट्रेन से सफर, देश के परिवहन इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि

नई दिल्ली भारत में रोजाना लाखों यात्री ट्रेन से सफर करते हैं। लाखों की यह संख्या कई बार एक करोड़ का आंकड़ा भी पार कर गई है। इसी कड़ी में भारतीय रेलवे ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। रेल मंत्रालय द्वारा एक हालिया बयान के अनुसार, 4 नवंबर 2024 को ट्रेन से 3 करोड़ से अधिक यात्रियों ने सफर किया। यात्रियों की यह संख्या भारतीय रेल के लिए एक नए रिकॉर्ड बनाने को लेकर अहम है। मंत्रालय ने इसे देश के परिवहन इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। जानकारी के अनुसार, 4 नवंबर को, भारतीय रेल से 120.72 लाख नॉन-सबअर्बन यात्रियों ने यात्रा की, जिसमें 19.43 लाख आरक्षित यात्री और 101.29 लाख अनारक्षित यात्री शामिल थे। इसके अलावा, रेल मंत्रालय ने रिकॉर्ड 180 लाख सबअर्बन यात्रियों को सफर कराया। सभी यात्रियों की संख्या जोड़ने के बाद देश की रेल प्रणाली के लिए एक नया मानदंड स्थापित हो गया है। बयान में यह भी कहा गया कि भारतीय रेल ने यह उपलब्धि साल के सबसे व्यस्त महीने के दौरान हासिल की है, जो भारतीय रेल की परिचालन कुशलता को दर्शाता है। साल के इस व्यस्त समय में दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ पूजा के अवसर पर लाखों-करोड़ों लोग एक राज्य से दूसरे राज्य की यात्रा करते हैं। एक राज्य से दूसरे राज्य की इस यात्रा के लिए अधिकतर लोग ट्रेन का सफर ही चुनते हैं। यही वजह है कि त्योहारी सीजन में ट्रेन में लोगों की भीड़ देखी जाती है। यात्रियों की इस भीड़ को संभालने और व्यवस्थित करने के लिए भारतीय रेल की ओर से अतिरिक्त स्पेशल ट्रेन की भी व्यवस्था की जाती है। इस बार रेलवे बोर्ड ने त्योहारी सीजन की भीड़ को देखते हुए 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक 7,663 स्पेशल ट्रेन सर्विस शुरू की है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 73 फीसदी अधिक है।

RPF and GRP संयुक्त रूप से सतर्कता बरत रही, यात्रियों के टिकट और आईडी की चेकिंग भी जारी

भोपाल दीपावली के साथ-साथ अन्य त्योहारों को लेकर रेलवे स्टेशन परिसर व ट्रेनों में बढ़ी यात्रियों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए आरपीएफ व जीआरपी संयुक्त रूप से सतर्कता बरत रही है। स्टेशन परिसर में आने-जाने वाले व ट्रेनों में यात्रा कर रहे यात्रियों के सामान, टिकट, नाम-पता व आईडी प्रूफ की जांच की जा रही है। इस दौरान स्टेशन पर ज्वलनशील वस्तुओं को लेकर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें ईंधन, तेल, पेंट, आतिशबाजी, विस्फोटक पदार्थ, ज्वलनशील तरल पदार्थ जैसे केरोसिन या रसायन, संपीड़ित गैस सिलेंडर और अन्य खतरनाक वस्तुएं शामिल हैं। भोपाल रेल मंडल में रेलवे सुरक्षा बल द्वारा सख्त निगरानी की जा रही है। यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए किया गया है। सीसीटीवी कैमरों से नजर रख रहे रेल सुरक्षा बल द्वारा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। यात्रियों के सामान की नियमित जांच की जा रही है। सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। प्रतिबंधित वस्तुओं का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों का भी उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही यात्रियों को इन नियमों के बारे में जागरूक करने के लिए स्टेशन और ट्रेनों में घोषणाएं भी की जा रही हैं। संदिग्ध गतिविधि की सूचना आरपीएफ का दें     यात्री, यात्रा से पहले निषिद्ध वस्तुओं की सूची की जांच करें और यदि उनके पास कोई खतरनाक वस्तु है, तो उसकी घोषणा करें। सुरक्षा जांच में पूरा सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति की सूचना रेल सुरक्षा बल कर्मियों को दें। – सौरभ कटारिया, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक रेल यात्रियों की 12,858 शिकायतों का समाधान भोपाल मंडल में वार रूम माध्यम से 24 घंटे यात्रियों की शिकायतों को सुना जा रहा है। साथ ही रेल मदद पोर्टल एप से उनका निराकरण भी किया जा रहा है। इसके अलावा शिकायतों का निपटारा आधे घंटे में किया जाता हैं, समाधान के बाद उनसे फीडबैक लिया जाता है, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके। अभी तक 17 जून से अक्टूबर तक 12,858 शिकायतों को समाधान किया गया है। 24 को वार रूम की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य यात्रियों की शिकायतों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करना था। इस वार रूम में समाधान हो रहा है। यात्रियों से फीडबैक भी लिया गया 17 जून से 11 अक्टूबर तक कुल 12,858 शिकायतों का निपटारा किया और यात्रियों से फीडबैक भी लिया। मालूम हो कि यात्रियों की सहायता के लिए हेल्पलाइन 139 को रेल मदद से जोड़ा गया है। इसके साथ ही इस नंबर को सभी शिकायत पोर्टलों को एकीकृत कर रेल मदद प्लेटफार्म पर लाया है, ताकि शिकायतें समय पर मिल सकें।

इस ट्रेन में थाली-कटोरी लेकर जाएं, मिलेगा भरपेट भोजन, नहीं लगते पैसे, 29 सालों से लगातार जारी …..

अमृतसर भारतीय रेलवे दुनिया की बेहतरीन सुविधाओं वाली रेल सेवा बनती जा रही है। रेलवे के सफर के दौरान लोगों को बहुत सारी सहूलियतें मिलती हैं। ट्रेन में बैठे-बैठे यात्रियों को भोजन मिलता है। रेलवे की इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन IRCTC ने अलग से साइट बनाई है। उस पर जाकर ट्रेन में बैठे-बैठे ऑनलाइन खाना मंगाया जा सकता है। हालांकि इसके लिए पैसे देना होता है। लेकिन एक ट्रेन ऐसी, जिसमें फ्री में भरपेट भोजन मिलता है। बताया जा रहा है कि इस ट्रेन में यात्रियों को लंगर सुविधा मुहैया कराई जाती है। अमृतसर-नांदेड़ सचखंड एक्सप्रेस में 29 साल से यात्रियों को फ्री खाना खिलाया जा रहा है। इस ट्रेन में भोजन ले जाने की जरूरत नहीं रहती है। 2081 किमी के सफर में यात्रियों को लंगर दिया जाता है। सचखंड एक्सप्रेस में पैंट्री भी है। लेकिन यहां पर खाना नहीं बनता है। इसकी वजह ये है कि जिस समय नाश्ता मिलता है। उस समय स्टेशन पर लंगर लगता है। जिससे खाना बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ती है। सचखंड एक्सप्रेस में 6 जगह मिलता है लंगर सचखंड एक्सप्रेस में सफर करने वाले यात्रियों को खाने की टेंशन नहीं रहती है। उन्हें फ्री में खाना मिलता है। बीते कई सालों से इस ट्रेन में यात्रियों को स्पेशल लंगर परोसी जाता है। सचखंड एक्सप्रेस 39 स्टेशनों पर रुकती है। इस दौरान 6 स्टेशनों पर यात्रियों के लिए लंगर लगता है। ट्रेन भी उसी हिसाब से उन स्टेशनों पर रुकती है कि लोग आराम से लंगर लेकर खा सकें। नई दिल्ली और डबरा स्टेशन पर दोनों तरफ से सचखंड एक्सप्रेस में लंगर लगता है। जिसके लिए यात्री पहले ही तैयारी करके आते हैं। इस दौरान सभी यात्रियों के हाथ में अपने बर्तन होते हैं। कोई अमीर गरीब नहीं होता है। हर किसी को लंगर का इंतजार रहता है। जनरल से लेकर एसी कोच तक के यात्री अपने बर्तन लेकर स्टेशन पर आ जाते हैं। 29 साल से चल रहा है लंगर लंगर का मेनू रोज बदला जाता है। इसका खर्च गुरुद्वारों को मिलने वाले दान से निकलता है। आमतौर पर कढ़ी-चावल, छोले, दाल, खिचड़ी,की सब्जी, आलू-गोभी की सब्जी, साग-भाजी मिलती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 29 सालों में एक भी दिन ऐसा नहीं हुआ जब यहां पर खाना ना खिलाया गया हो। ये ट्रेन अगर लेट भी होती है तो सेवादार इंतजार में खड़े रहते हैं। रोज करीब 2000 लोगों के लिए लंगर तैयार किया जाता है। क्या है इस ट्रेन का इतिहास? ट्रेन को नांदेड़ और अमृतसर के बीच चलाया जाता है। 1995 में ये ट्रेन हफ्ते में एक बार चलती थी। इसके बाद इसमें थोड़ा बदलाव करके हफ्ते में दो बार चलाया गया। 1997-1998 के दौरान ये हफ्ते में 5 दिन चलने लगी। 2007 से ये ट्रेन रोजाना चलाई जा रही है। इस ट्रेन में लंगर सभी को दिया जाता है। जानकारी के मुताबिक, इस लंगर की शुरुआत सिख कारोबारियों ने की थी। जिसे बाद में गुरुद्वारे ने जारी रखा है। साथ बर्तन लेकर चलते हैं यात्री  ट्रेन के जनरल से लेकर एसी कोच तक में यात्री अपने साथ बर्तन लेकर चलते हैं. स्टेशनों पर बस बर्तन आगे किया, लंगर का प्रसाद मिल जाता है. दरअसल सचखंड एक्सप्रेस सिखों के दो सबसे बड़े धर्मस्थल अमृतसर के श्री हरमंदर साहिब और नांदेड़ (महाराष्ट्र) के श्री हजूर साहिब सचखंड को जोड़ती है. जिसकी वजह से सफर के रूट में पड़ने वाले छह स्टेशनों पर लंगर का प्रसाद सालों से परोसा जाता रहा है. कढ़ी-चावल, छोले, दाल, खिचड़ी,की सब्जी, आलू-गोभी की सब्जी, साग-भाजी मिलती हैं.   रोजाना 2000 लोगों के लिए बनता है लंगर  साल 1995 शुरू हुई इस ट्रेन को पहले हफ्ते में एक बार चलाया जाता था.बार में इसे बढ़ाकर हफ्ते में दो बार चलाया गया. साल 1997 में इसे हफ्ते में 5 बर और फिर इसे बढ़ाकर रोजाना कर दिया गया. इस लंगर की शुरुआत एक व्यापारी ने की थी, अब रोजाना 2000 लोगों के लिए लंगर बनता है. ट्रेन से सफर करने वाले लोग पहले से ही तैयारी करके रखते हैं. स्टेशन आने पर कुछ सेवादार ट्रेन में और कुछ स्टेशनों पर यात्रियों को लंगर का प्रसाद परोसते हैं. सालों से चली आ रही ये परंपरा आज भी जारी है. 

Indian Railways ने 14 समर स्पेशल ट्रेनों के फेरे बढ़ाए, सप्ताह में अलग-अलग दिन चलती है ये सभी ट्रेनें

A mega awareness campaign will be organized on World Suicide Day.

 रतलाम  ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए यात्रियों को सुविधा देने के उद्देश्य से रेल मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर ठहराव के साथ गुजरने वाली 14 ग्रीष्मकालीन स्पेशल ट्रेनों के फेरे पुन: विस्तारित की गई है। सभी 14 ट्रेनें पूर्वानुसार ही चलेंगी यानी इन स्पेशल ट्रेनों के मार्ग, आगमन/प्रस्थान समय, दिन, कोच कंपोजिशन आदि में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। ट्रेन नंबर 09622, 09654, 04712 व 09724 के बढ़े फेरों के लिए टिकटों की बुकिंग आज से पीआरएस काउंटरों और आईआरसीटीसी वेबसाइट पर शुरू हो गई है। रेलवे ने इन समर स्पेशल ट्रेनों के बढ़ाए फेरे     09621 अजमेर-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल अजमेर से सात से 28 जुलाई तक प्रति रविवार चलेगी।     09622 बांद्रा टर्मिनस-अजमेर स्पेशल बांद्रा टर्मिनस से आठ से 29 जुलाई तक प्रति सोमवार चलेगी।     09653 अजमेर -बांद्रा टर्मिनस स्पेशल अजमेर से छह जुलाई से 28 सितंबर तक प्रति शनिवार चलेगी।     09654 बांद्रा टर्मिनस-अजमेर स्पेशल बांद्रा टर्मिनस से सात जुलाई से 29 सितंबर तक प्रति रविवार चलेगी।     04711 बीकानेर-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल बीकानेर से तीन से 31 जुलाई तक प्रति बुधवार चलेगी।     04712 बांद्रा टर्मिनस-बीकानेर स्पेशल बांद्रा टर्मिनस से चार जुलाई से एक अगस्त तक प्रति गुरुवार चलेगी।     09723 जयपुर-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल जयपुर से तीन जुलाई से 25 सितंबर तक प्रति बुधवार चलेगी।     09724 बांद्रा टर्मिनस-जयपुर स्पेशल बांद्रा टर्मिनस से चार जुलाई से 26 सितंबर तक प्रति गुरुवार चलेगी।     09627 अजमेर-सोलापुर स्पेशल अजमेर से तीन जुलाई से 25 सितंबर तक प्रति बुधवार चलेगी।     09628 सोलापुर -अजमेर स्पेशल सोलापुर से चार जुलाई से 26 सितंबर तक प्रति गुरुवार चलेगी।     04715 बीकानेर-साईं नगर शिर्डी स्पेशल बीकानेर से छह से 27 जुलाई तक प्रति शनिवार चलेगी।     04716 साईं नगर शिर्डी -बीकानेर स्पेशल साईंनगर शिर्डी से सात से 28 जुलाई तक प्रति रविवार को चलेगी।     09625 अजमेर-दौंड स्पेशल अजमेर से चार से 25 जुलाई तक प्रति गुरुवार चलेगी।     09626 दौंड-अजमेर स्पेशल दौंड से पांच से 26 जुलाई तक प्रति शुक्रवार चलेगी। ट्रेनों की नई समय सारणी एक जनवरी से रतलाम रेल मंडल से संचालित की जा रही ट्रेनों की समय सारणी में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। वर्तमान समय सारणी 31 दिसंबर 2024 तक लागू रहेगी। एक जनवरी 2025 से नई समय सारणी लागू होगी। इसके साथ ही भारतीय रेलवे द्वारा जारी ट्रेन एट ए ग्लांस जो वर्तमान में चल रहा है, उसे 31 दिसंबर तक बढ़ाया गया है। एक जनवरी से नया एट ए ग्लांस जारी किया जाएगा।

खाटू श्याम, वैष्णोदेवी सहित इन धार्मिक स्थलों का दर्शन, IRCTC लाया किफायती टूर पैकेज

Visit these religious places including Khatu Shyam, Vaishnodevi, IRCTC brings affordable tour package, know the cost भोपाल ! मध्यप्रदेश के तीर्थयात्रियों के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन लिमिटेड (आईआरसीटीसी) द्वारा भारत गौरव पर्यटक ट्रेन का संचालन किया जा रहा है. इस ट्रेन की मदद से एमपी के पर्यटक उत्तर दर्शन यात्रा के साथ खाटूश्याम जी के दर्शन भी आसानी से कर सकेंगे. ये ट्रेन 05 जून 2024 से शुरू होने वाली है, जो की भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से शुरू होगी. यह ट्रेन मध्यप्रदेश के रानी कमलापति, सीहोर, शुजालपुर, देवास, इंदौर, रतलाम, नागदा, श्यामगढ़, कोटा स्टेशनों से होते हुए जाएगी. इन स्टेशन से यात्री ट्रेन में यात्रा कर सकेंगे. ट्रेन की यात्रा कुल 10 रातों और 11 दिन की होगी. जिसमें ट्रेन जयपुर, खाटूश्याम जी, मथुरा, हरिद्वार, अमृतसर एवं वैष्णोदेवी के दर्शनीय स्थलों का भ्रमण कराएगी. मात्र इतने रुपए में कर सकते हैं यात्राइस ट्रेन में यात्रा करने के लिए यात्रियों को स्लीपर श्रेणी की टिकट 18,110 रुपए प्रति व्यक्ति मिलेगी. 3AC स्टैण्डर्ड श्रेणी की टिकट 28,650 रुपए प्रति व्यक्ति एवं 2AC कम्फर्ट श्रेणी की टिकट 37,500 रुपए प्रति व्यक्ति की होगी. जिसमें यात्रियों को पूरे 11 दिन और 10 रातों में प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के दर्शन करवाए जायेंगे. मिलेंगी ये सारी सुविधाएंआईआरसीटीसी द्वारा शुरू की गई इस गौरव ट्रेन में यात्रियों को कई सेवाएं दी जाएंगी. जिसमें खाना, विशेष एलएचबी रैक, ऑन-बोर्ड और ऑफ-बोर्ड भोजन, सड़क परिवहन और गुणवत्तायुक्‍त बसों में दर्शनीय स्थलों की यात्रा, यात्रा कार्यक्रम के अनुसार आवास की व्यवस्था, यात्रा में टूर एस्कॉर्ट्स, यात्रा बीमा, ऑन-बोर्ड सुरक्षा और हाउसकीपिंग की सेवा प्रदान की जाएंगी. इस प्रकार करें टिकट की बुकिंगअगर आप इस ट्रेन में अपनी बुकिंग करना चाहते हैं तो आईआरसीटीसी की वेबसाइट www.irctctourism.com पर ऑनलाइन या फिर अधिकृत एजेंट से भी करवा सकते हैं.

एयरपोर्ट की तरह दिखेगा दमोह का रेलवे स्टेशन, यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

Damoh’s railway station will look like an airport, passengers will get modern facilities दमोह रेलवे स्टेशन को विकसित किया जा रहा है। अमृत भारत योजना के तहत दमोह के रेलवे स्टेशन का नवीनीकरण किया जा रहा है। छह महीने में दमोह रेलवे स्टेशन पर भी अत्याधुनिक सुविधाएं यात्रियों को मिलने लगेंगी। यह स्टेशन भी अब एयरपोर्ट की तरह दिखाई देने लगेगा। दमोह ! रेलवे स्टेशन पर 25 करोड़ रुपये की लागत से तीन चरणों में काम होना है। पहले एवं दूसरे चरण का काम चल रहा है। इसमें स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया को तोड़कर नया आकार दिया जा रहा है। स्टेशन के बाहर दो मुख्य गेट बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा बाहरी आवरण को तोड़कर एयरपोर्ट की तर्ज पर नया लुक दिया जा रहा है। स्टेशन के बाहर नया पार्किंग स्थल बनाया जा रहा है। चारों ओर से सीसी का कार्य पूरा हो चुका है। पूरे क्षेत्र में लैम्प लगाए जा रहे हैं। यहां दोपहिया एवं चार पहिया वाहनों को एक साथ पार्क किया जा सकेगा। इधर प्लेटफॉर्म नंबर एक की ऊंचाई बढ़ाने का काम पूरा हो चुका है। अब इसमें लगाए गए मार्बल स्टोन की फिनिशिंग का काम चल रहा है। इसी तरह प्लेटफॉर्म नंबर एक एवं दो पर भी पुराने फर्श पर लगे मार्बल को उखाड़कर नए मार्बल स्टोन लगाे जा रहे हैं। टीनशेड की लंबाई बढ़ाने के लिए गड्ढे भी खोदे जा चुके हैं। नए भवनों का निर्माण किया जा रहा हैआरक्षण केंद्र एवं बिजली ऑफिस के लिए विश्राम गृह के बाजू से पुराने भवन को तोड़कर नए भवन बनाए जा रहे हैं। भवन बनने के बाद ही आरक्षण केंद्र व बिजली ऑफिस को शिफ्ट किया जाएगा। इसके बाद बिजली ऑफिस को तोड़कर वहां पर दो नंबर गेट बनेगा। आरक्षण केंद्र की जगह मिनी गार्डन बनाया जाएगा। तीसरे चरण में बनेगा फुटब्रिज व एस्केलेटरदमोह स्टेशन पर एक नया फुटब्रिज भी स्वीकृत है। यह प्लेटफॉर्म नंबर एक के माल गोदाम के आगे से प्लेटफॉर्म नंबर दो के टीनशेड एरिया के सामने तक बनेगा। इसी नए फुटब्रिज पर एस्केलेटर भी लगाया जाएगा। उसके बाजू से सीढ़ियां भी लगेंगी। यह काम तीसरे चरण में होगा। बदल जाएगा स्टेशन का स्वरूपस्टेशन प्रबंधक मुकेश कुमार जैन ने बताया कि अमृत भारत योजना के तहत स्टेशन के जीणोद्धार का काम जोरों पर चल रहा है। आगामी दिनों में स्टेशन का पूरा स्वरूप बदल जाएगा और यह किसी एयरपोर्ट की तरह नजर आएगा। पूरे काम होने में करीब छह से आठ माह का समय लग सकता है।

50 बार निरीक्षण, फिर भी ठीक नहीं हुआ भोपाल स्टेशन का ड्रेनेज सिस्टम

Inspection done 50 times, still drainage system of Bhopal station not fixed भोपाल। मेंटेनेंस के लिए करोड़ों रुपए का बजट और दो साल में 50 से ज्यादा निरीक्षण के बाद भी अधिकारी भोपाल रेलवे स्टेशन का चोक अंडर ग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम ठीक नहीं करा सके। यह सिस्टम बीते छह महीने से चोक है। नालियों से गंदे पानी की निकासी नहीं होती, मच्छर पनपते हैं। गंदगी के कारण चूहे, कॉकरोच पनप रहे हैं। आम यात्रियों को इनका शिकार होना पड़ रहा है। जबकि पूर्व में तत्कालीन जीएम सुधीर गुप्ता, तत्कालीन डीआरएम सौरभ बंदोपाध्याय व अन्य अधिकारियों ने निरीक्षण कर समस्या का समाधान करने के दिशा-निर्देश दे चुके है। लेकिन समस्यां जस के तस बनी हुई है। बता दें कि भोपाल रेलवे स्टेशन का अंडर ग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम चोक है। इसके कारण प्लेटफार्म-2 व 6 के बीना छोर और प्लेटफार्म-1 के इटारसी छोर के चैंबर पिछले माह से बंद पड़े हैं। ब्रांच प्रमुखों में समन्वय की कमी भोपाल स्टेशन के कायाकल्प के लिए कुछ ब्रांच प्रमुख गंभीर नहीं हैं। इसका नालियों का स्लोप ठीक नहीं होना। तो वहीं वेटिंग रूम के शौचालयों के पाइप टूटे है। जिससे कई बार यूज करने पर यात्रियों को गंदगी का सामना करना पड़ रहा है।

भोपाल स्टेशन पर हेल्प काउंटर खाली, सुबह से शाम तक कुर्सी के हवाले जिम्मेदारी

Help counter empty at Bhopal station, responsibility handed over to chair from morning till evening भोपाल। उत्तर भारत सहित देश के अलग अलग राज्यो में इन दिनो कोहरा जम कर पड़ रहा है जिसके कारण ट्रेनो की रफ्तार में ब्रेक सा लग गया है और भोपाल पहुचने वाली कई ट्रेने एक से 20 घंटे की देरी से आ रही है । यात्रियों की सुविधा के लिए भोपाल रेल मंडल ने भोपाल स्टेशन पर एक सहायता केंद्र बनाया था जिसमें कोहरे से प्रभावित ट्रेनो के बारे में यात्रियों को जानकारी देनी थी लेकिन आलम यह है कि जिम्मेवारो द्वारा सुबह भोपाल स्टेशन पर हेल्प कांउटर के पास एक खाली कुर्सी रख दी जाती है और उस कुर्सी के हवाले ही यात्रियों को जानकारी देने का जिम्मा होता है। यात्री निराश होकर लौटते है हेल्प काउंटरकोहरे के कारण जिन यात्रियों की ट्रेन लेट होती है वह अक्सर जानकारी लेने के लिए हेल्प काउंटर पर जाते है। लेकिन कई घंटो के इंतजार के बाद भी वहां कोई नहीं आता । और बिना जानकारी के ही वापस लौटना पड़ता है।139 और इंटरनेट के भरोसे यात्रीहेल्प काउंटर से जानकारी न मिलने के बाद जिन यात्रियों के पास एन्ड्रायड मोबाइल होते है वह इंटरनेट पर जानकारी लेते है वहीं रेलवे के इंक्वारी डायल139 पर भी जानकारी मिल जाती है। भोपाल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया का कहना है कि कोहरे से प्रभावित ट्रेनो के यात्रियों को जानकारी देने के लिए भोपाल स्टेशन पर हेल्प काउंटर चल रहा है हो सकता है है कर्मचारी किसी काम से इधर उधर चला गया है। मैं एक बार इसे देखवा लेता हूं। और रेलवे यात्रियों को पूरी सुविधा देने के लिए कटिबद्ध है।

कड़ाके की ठंड में विगत 4 दिन से युवा रेल कर्मी भूख हड़ताल पर एनपीएस के विरोध में

Young railway workers on hunger strike for last 4 days in extreme cold in protest against NPS कटनी ! एनपीएस न्यू.पेंशन.स्कीम के खात्मे की आग अब धीरे धीरे तेज होने लगी है युवा रेल कर्मियों के सामने कड़के की ठंड भी कोई मायने नहीं रख रही दरासल अब पुरे भारत में एनपीएस के विरोध की आवाज उठने लगी है। आपको बतादे की जीवनभर पूरी नौकरी करने के बाद सरकारी कर्मचारी अपने बुढ़ापा का सहारा तलाशने को मजबूर है।जिसके लिए युवा कर्मी एक जुट होने कोई कसर नहीं छोड़ रहे और ओ.पी.एस   ओल्ड.पेंशन की मांग निरंतर करते आ रहे है। जिससे उनका आगे आने वाला बुढ़ापा आराम से निकले लगातार घने कोहरे के बीच कड़के की ठंड में अपने हक के लिए भूख हड़ताल पर बैठे युवा कर्मियो का केंद्र सरकार के खिलाफ एक ही नारा है। एनपीएस भगाव ओपीएस लाओकटनी के पांच नबर रेलवे स्टेसन के पीछे बैठे रेल कर्मीयो द्वारा लगातार न्यू पेंशन स्कीम का विरोध किया जा रहा है। विगत तीन दिवस से भूख हड़ताल पर बैठे इन कर्मियो का कहना है पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा भोपाल जबलपुर के सभी मंडल शाखाओं में और मुख्यालय में चार दिन से भूख हड़ताल की जा रही है एन के जे हम्प गेट के बाद डीजल सेड सीएनडब्ल्यू, एन.के.जे टीआरएस मैं अलग-अलग दिन हड़ताल जारी रखी गई। बहरहाल एन.पी.एस के विरोध में भारत सरकार के खिलाफ रेलवे के अधिकांश मंडलों में युवा रेल कर्मी भूख हड़ताल का सहारा लेने पर अतुर है भूख हड़ताल का गुरुवार को चौथा दिन है वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्प्लाइज यूनियन के तत्वाधान में NFIR/JFR OPS के आवाहन पर एन.पी एस को समाप्त कर ओल्ड पेंसन बहाली के लिए युवा कर्मीयो ने भूख हड़ताल का आगाज किया एनपीएस को लेकर कहा अभी नहीं तो कभी नहीं, युवा कर्मियो की यह आग पूरे भारत में देखने मिल रही है जिससे केंद्र सरकार OPS देने पर विवस हो जाए।

शासकीय डॉक्टरो ने रेलवे स्टेशन पर किया जीआरपी आरपीएफ एवं यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण

Government doctors conducted health checkup of GRP, RPF and passengers at the railway station. कटनी ! रेल यात्री सुरक्षा सप्ताह अभियान के अंतर्गत कटनी रेलवे स्टेशन परिसर में जीआरपी पुलिस के तत्वाधान में निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया जिसमें शासकीय चिकित्सालय कटनी के डॉ. परितोष सोनी एवं डॉ पीसी ताम्रकार, ने स्टेशन परिसर पर ट्रेन से आने जाने वाले यात्रियों आरपीएफ, जीआरपी पुलिस के जवानों एवम रेल रक्षा समिति के सदस्यों का निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया गया इस दौरान सभी ने अपना अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया। थाना प्रभारी अरुणा वाहन ने बताया आगे भी इस तरह के शिविर का आयोजन कर लोगों का निशुल्क स्वस्थ परीक्षण कराया जाएगा।

स्टेशन को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन सेवा के लिए “ईट राइट स्टेशन” के रूप में प्रतिष्ठित प्रमाणन प्राप्त हुआ.

The station has been accredited as an ‘Eat Right Station’ for providing safe and nutritious food services. हरिप्रसाद गोहे आमला । बैतूल स्टेशन, जिला बैतूल के खाद्य सुरक्षा प्रशासन की सतर्क निगरानी में, गर्व से “ईट राइट स्टेशन (सही भोजन बेहतर जीवन)” के रूप में अपने प्रमाणीकरण की घोषणा करता है ! यह उल्लेखनीय उपलब्धि बैतूल स्टेशन और ऑडिटिंग पार्टनर, वाईक्यू बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड के बीच सहयोगात्मक प्रयास का परिणाम है तथा प्रशिक्षण भागीदार, यारी क्वालिटेक के अमूल्य समर्थन रहा है ! “ईट राइट स्टेशन” प्रमाणन अपने संरक्षकों के लिए खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के प्रति बैतूल स्टेशन के समर्पण का एक प्रमाण है। इस पहल के कार्यान्वयन की निगरानी जिला बैतूल के खाद्य सुरक्षा प्रशासन द्वारा सावधानीपूर्वक की गई है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। इस प्रतिष्ठित स्थिति को प्राप्त करने के लिए, बैतूल स्टेशन ने आवश्यकताओं के कड़े सेट का पालन किया, जिसमें शामिल थे: खाद्य लाइसेंस अनुपालन: बैतूल स्टेशन के सभी स्टालों ने अपेक्षित खाद्य लाइसेंस प्राप्त कर लिया है, यह गारंटी देते हुए कि विक्रेता खाद्य सुरक्षा के उच्चतम मानकों को पूरा करते हैं। विक्रेता स्वास्थ्य आश्वासन: प्रत्येक विक्रेता को भोजन संभालने के लिए अपनी फिटनेस को सत्यापित करने के लिए एक व्यापक चिकित्सा परीक्षण से गुजरना पड़ा। एफएसएसएआई फोस्टैक प्रशिक्षण: सभी विक्रेताओं को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मार्गदर्शन में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता में व्यापक प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। जल शुद्धता सत्यापन: भोजन तैयार करने में उपयोग किए जाने वाले पानी की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए कठोर जल विश्लेषण रिपोर्टें आयोजित की गईं। स्वच्छता अनुपालन: स्वच्छता के उच्चतम स्तर को बनाए रखने के लिए विक्रेताओं को सिर की टोपी और दस्ताने सहित उचित वर्दी पहनना आवश्यक है। कुशल अपशिष्ट प्रबंधन: बैतूल स्टेशन ने जिम्मेदार अपशिष्ट निपटान को बढ़ावा देने के लिए सूखे और गीले कचरे के लिए अलग-अलग कूड़ेदान पेश किए हैं। बेदाग परिसर: यात्रियों के लिए स्वच्छता और सुखद वातावरण सुनिश्चित करने के लिए स्टेशन और स्टॉल परिसर का सावधानीपूर्वक रखरखाव किया जाता है। कीट नियंत्रण उपाय: कीट-मुक्त वातावरण की गारंटी के लिए कड़े कीट नियंत्रण उपाय किए गए हैं। मजबूत बिलिंग प्रणाली: लेनदेन में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए एक उचित बिलिंग प्रणाली लागू की गई है। “ईट राइट स्टेशन” पहल न केवल खाद्य सुरक्षा के प्रति बैतूल स्टेशन की अटूट प्रतिबद्धता का उदाहरण है, बल्कि यात्रियों को उनकी यात्रा के दौरान सुरक्षित, पौष्टिक और पौष्टिक भोजन प्रदान करने के प्रति इसके समर्पण को भी रेखांकित करती है। यात्री अब इस आश्वासन के साथ अपनी यात्रा शुरू कर सकते हैं कि बैतूल स्टेशन उच्चतम गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की भोजन सेवाएं प्रदान करके उनकी भलाई को प्राथमिकता देता है।

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