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रंगपंचमी पर इंदौर गेर का इंतजार, छतों से मिलेगा रंगों का अद्भुत दृश्य, टिकट से होगी एंट्री

इंदौर इंदौर की रंगपंचमी पर निकलने वाली गेर शहर का एक अनोखा और खास त्योहार है। इस दिन पुराने शहर के इलाकों में रंगों के शौकीन बड़ी संख्या में गेर में शामिल होते हैं और रास्ते में खड़े लोगों पर रंग बरसाते हुए आगे बढ़ते हैं। गेर के दौरान आसमान में दूर-दूर तक रंगों के बादल छा जाते हैं। इन खूबसूरत नजारों का आनंद लेने के लिए इस बार भी शहर के लोग गेर वाले मार्गों पर स्थित मकानों की छतें बुक कर सकेंगे और अपने परिवार के साथ इस आयोजन का मजा ले पाएंगे। प्रशासन ने पिछले साल भी यह व्यवस्था की थी, जो काफी सफल रही थी। शीतला माता बाजार से लेकर गौराकुंड और खजूरी मार्केट तक की छतों से लोग गेर की रौनक देख सकेंगे। हर साल इस आयोजन को देखने के लिए दूसरे शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग इंदौर पहुंचते हैं। जिनके घर गेर के मार्ग पर पड़ते हैं, वहां अब छोटी-छोटी पार्टियों का भी आयोजन होने लगा है, जहां लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को बुलाकर रंगपंचमी का उत्सव मनाते हैं। इस साल गेर के मार्ग पर स्थित आठ छतों पर 200 से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। इनकी बुकिंग बुक माय शो के माध्यम से की जाएगी, जिसके लिए लोगों को टिकट खरीदना होगा। इस बार 8 मार्च को रविवार होने के कारण प्रशासन ने अलग से छुट्टी घोषित नहीं की है। रविवार होने की वजह से इस बार गेर में और अधिक भीड़ जुटने की संभावना जताई जा रही है। करीब चार किलोमीटर लंबे गेर मार्ग पर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बिजली के तार और केबल हटाए जा रहे हैं, साथ ही सड़कों की मरम्मत का काम भी किया जा रहा है। परंपरा के अनुसार इस बार भी चार गेर इस जुलूस का हिस्सा होंगी। लगभग 100 फीट तक रंग फेंकने वाली विशेष रंग मिसाइलें भी तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा डीजे और भजन मंडलियां भी गेर में शामिल होंगी। नगर निगम की गेर भी इस जुलूस का हिस्सा रहेगी, हालांकि शहर में हाल ही में हुई कुछ घटनाओं के कारण मेयर पुष्यमित्र भार्गव इस बार गेर में शामिल नहीं होंगे।

छात्रा के साथ दरिंदगी और ब्लैकमेल का मामला, मुंबई से आरोपी गिरफ्तार, इंदौर में सनसनी

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर के द्वारकापुरी थाना क्षेत्र में चार दिन से लापता एमबीए छात्रा की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। दुष्कर्म के बाद रस्सी से गला घोंटकर हत्या करने वाला फरार सहपाठी छात्र पीयूष धामनोदिया मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी की लोकेशन ट्रेस होने के बाद मुंबई पुलिस की मदद से उसे पकड़ा गया। वहीं आरोपी के परिजन मंदसौर से इंदौर पहुंच चुके हैं, जिनके बयान आज पुलिस दर्ज करेगी। द्वारकापुरी थाना पुलिस की टीम आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लेने मुंबई पहुंच गई है और देर शाम तक उसे इंदौर लाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के बाद हत्या की असली वजह और पूरी साजिश का खुलासा होगा। वहीं आज छात्रा का पोस्टमार्टम भी कराया जाएगा। पुलिस के अनुसार सांवेर रोड स्थित एक कॉलेज में एमबीए सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रही 24 साल की छात्रा 10 फरवरी की दोपहर घर से दस्तावेज अपडेट कराने का कहकर निकली थी। पिता उसे मोती तबेला फायर स्टेशन के पास छोड़कर लौट गए थे। शाम को छात्रा ने छोटी बहन को फोन कर बताया था कि वह द्वारकापुरी की अंकली गली में किराए से रहने वाले अपने सहपाठी पीयूष धामनोदिया के साथ एक दोस्त के जन्मदिन में जा रही है। रात में उसके मोबाइल से बहन को मैसेज आया कि वह घर नहीं आएगी। अगले दिन संपर्क नहीं होने पर 11 फरवरी को परिजनों ने पंढरीनाथ थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। जांच के दौरान पुलिस को छात्रा का नग्न शव उसके घर से करीब आधा किलोमीटर दूर अंकली गली स्थित आरोपी के किराए के कमरे से मिला। शव को कंबल से ढंका गया था और कमरे पर बाहर से ताला लगा हुआ था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि छात्रा की हत्या रस्सी से गला घोंटकर की गई। शव पर धारदार हथियार से हमले के निशान भी मिले हैं, जो दरिंदगी की कहानी बयान कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की सटीक परिस्थितियां स्पष्ट होंगी। लोकेशन मुंबई की मिलते ही भेजी फोटो, ऐसे पकड़ा गया आरोपी डीसीपी जोन-1 कृष्ण लालचंदानी ने बताया कि आरोपी की तलाश में पुलिस टीमें लगातार सक्रिय थीं। जांच में पता चला कि आरोपी मूल रूप से मंदसौर के कालाखेत रोड का निवासी है और उसके पिता की धानमंडी में किराना दुकान है। पूछताछ में छात्रा के परिजनों ने खुलासा किया कि कॉलेज के वाट्सएप ग्रुप पर छात्रा के मोबाइल से आपत्तिजनक वीडियो वायरल किए गए थे, जिनमें छात्रा का चेहरा स्पष्ट दिख रहा था जबकि युवक ने अपना चेहरा इमोजी से छिपा रखा था। परिजनों ने आरोप लगाया कि पीयूष वीडियो बनाकर छात्रा को ब्लैकमेल कर रहा था और उसके परिचितों को भी वीडियो भेज रहा था। मोबाइल टॉवर लोकेशन मुंबई मिलने पर तत्काल अंधेरी पुलिस स्टेशन को सूचना देकर आरोपी की फोटो भेजी गई, जिसके आधार पर मुंबई पुलिस ने उसे दबोच लिया। अब इंदौर पुलिस आरोपी को शहर लाकर गहन पूछताछ करेगी, जिससे पूरे घटनाक्रम की परतें खुलने की उम्मीद है।

सिंहस्थ मद से इंदौर को नहीं मिली नई सौगात, पहले सड़कों पर खर्च हो चुका धन

इंदौर  उज्जैन में ढाई साल बाद लगने वाले सिंहस्थ मेले की तैयारियां जोरों पर है। हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैठक लेकर अफसरों को तय सयमसीमा में काम करने के निर्देश दिए। 25 से ज्यादा विभागों को अलग-अलग निर्माणों की जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश के बजट में भी सिंहस्थ मद में राशि बढ़ाकर रखी जाएगी, लेकिन इस मद से इंदौर में अभी तक कोई बड़ा काम नही हुआ है, जबकि पिछले दो सिंहस्थ मेलों को दौरान इस मद में इंदौर में भी करोड़ों काम हुए,क्योकि इंदौर उज्जैन का निकटवर्ती शहर है और इंदौर से होकर ही ज्यादातर भक्त उज्जैन जाते है। सरकार का फोकस उज्जैन की कनेक्टिविटी और शिप्रा नदी के शुद्धिकरण पर है। अफसरों का अनुमान है कि सिंहस्थ मेले मेें पंद्रह करोड़ के करीब लोग सकते है, उसके हिसाब से ही घाटों के विस्तार, मेला क्षेत्र के दायरे के प्रोजेक्ट डिजाइन किए गए है। शाही स्नान के दौरान डेढ़ करोड़ से अधिक भक्तों के आने का अनुमान भी जताया जा रहा है। इंदौर-उज्जैन छह लेन का काम चल रहा है। इसके अलावा इंदौर-उज्जैन फोरलेन का काम भी अब जल्दी ही शुरू होगा, लेकिन इंदौर शहर के लिए अलग से कोई प्रोजेक्ट सिंहस्थ मद में मंजूर नहीं हुआ है।  पिछले सिंहस्थ में बनी थी एमआर-4 सड़क पिछले सिंहस्थ मेले के समय इंदौर विकास प्राधिकरण को 30 करोड़ रुपये सिंहस्थ मद में मिले थे। यह राशि एमआर-4 के निर्माण पर खर्च की गई थी। इसे लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन से जोड़ा गया था। वर्ष 2004 के सिंहस्थ के समय रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास के अतिक्रमण हटाकर रोड चौड़ी की गई थी,लेकिन इस साल एमआर-12 सड़क इंदौर विकास प्राधिकरण अपने खर्च पर बना रहा है। इसके अलावा कुर्मेडी में बस स्टैंड बनकर तैयार हो चुका है। इसका निर्माण भी प्राधिकरण ने किया है।    

इंदौर फिर तैयारी में: क्लीन सिटी का रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए नगर निगम का फोकस स्वच्छता पर

इंदौर पूरे देश में स्वच्छता के लिए पहचाने जाने वाले इंदौर में दूषित पानी से कई लोगों की मौत नगर निगम के लिए अब कोई मुद्दा नहीं है. यही वजह है कि नगर निगम ने भागीरथपुरा के हालातों से किनारा करते हुए अब स्वच्छता रैंकिंग पर फोकस कर दिया है. इस बीच फिर यहां दो लोगों की मौत हो गई है. इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण होने वाली मृत्यु का दौर जारी है. हालांकि 2 महीने बीतने के बाद भी न तो सरकार मृत्यु का कारण स्पष्ट कर पाई न ही मरने वालों की संख्या सार्वजनिक कर पाई. इस मामले में दायर जनहित याचिका के बाद हाईकोर्ट ने खुद एक सदस्य जांच आयोग गठित किया है. लेकिन इसके बावजूद सरकार भागीरथपुरा की स्थिति पर अब तक नियंत्रण नहीं कर पाई. भागीरथपुरा में दो लोगों की मौत नतीजेतन यहां बॉम्बे अस्पताल में बीते कुछ दिनों से भर्ती भागीरथपुरा निवासी 75 वर्षीय शालिग्राम ठाकुर और 2 साल की मासूम रिया जो सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल में भर्ती थी की मौत हो गई. हालांकि नगर निगम कमिश्नर ने विगत दिनों भागीरथपुरा को लेकर दावा किया था कि वहां पानी की लाइन बदलने का काम अंतिम दौर में है वही नर्मदा के पानी की सप्लाई भी शुरू करवा दी गई है. यह बात और है कि अभी भी लोग वहां नलों से आने वाले पानी को पीने से डर रहे हैं. नगर निगम का दावा इंदौर के हालात सामान्य हालांकि नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने अपनी ओर से यह मान लिया है कि अब वहां के हालात पूरी तरह सामान्य है. इसलिए निगम ने अब स्वच्छता रैंकिंग पर फोकस कर दिया है. इसे लेकर मंगलवार को आयोजित एक समारोह में इंदौर को नवमी बार स्वच्छता रैंकिंग में पहले नंबर पर लाने के लिए वार्ड बार स्वच्छता अभियान की प्लानिंग की गई है. इसके अलावा शहर को स्वच्छता अभियान को लेकर प्रेरित करने के लिए नए सिरे से स्वच्छता गान तैयार किया गया है. स्वच्छता की शपथ दिलाई गई नगर निगम की परिषद में स्वास्थ्य प्रभारी अश्विनी शुक्ल ने बताया कि, ”स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के अंतर्गत स्वच्छता गीत 2025-26 की लाॅचिंग, स्वच्छ वार्ड रैकिंग लाॅचिंग की शुरुआत की गई.” इसे लेकर आयोजित कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री व महापौर ने इंदौर के स्वच्छता अभियान में सहयोगी स्वच्छता चैम्पियन का सम्मान तथा 22 जोनल कार्यालय के उत्कृष्ठ सफाई मित्रों का सम्मान किया. इस अवसर पर समस्त उपस्थित जन को स्वच्छता की शपथ दिलाते हुए, आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण की नवीन टूल किट की भी प्रेजेटेंशन के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी गई. इस दौरान कार्यक्रम मेंं मौजूद केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया का कहना था, ”इंदौर स्वच्छता का महागुरु है, जिससे की अन्य शहर स्वच्छता का पाठ पढ़ते है. इंदौर स्वच्छता का चैम्पियन है, मुझे पुरी उम्मीद है कि इंदौर नवीं बार भी स्वच्छता में नंबर वन आएगा.” महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा, ”इंदौर की स्वच्छता टीम ने इंदौर को आठ बार नंबर वन स्वच्छ शहर बनाने का गौरव हासिल किया. इसके साथ ही इंदौर जैसा बड़ा शहर अपने साथ ही देपालपुर को भी स्वच्छता में नंबर वन बनाने के लिये सहयोग कर रहा है.”

दूषित पानी से इंदौर में मौतों का सिलसिला, बच्ची और बुजुर्ग की मौत के बाद संख्या 35

इंदौर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी है। मंगलवार को बस्ती में दो लोगों की मौत हो गई। इनमें दो साल की बच्ची रिया भी शामिल है। इसके अलावा 75 वर्षीय शालिग्राम ठाकुर की भी जान चली गई। उन्हें सात दिन पहले उल्टी दस्त की शिकायत के चलते निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था।   परिजनों का कहना है कि उन्हें लकवे की शिकायत थी, अन्य कोई बीमारी नहीं थी। उधर दो वर्षीय रिया प्रजापति को भी दिसंबर में उल्टी दस्त की शिकायत के चलते भर्ती किया गया था। बाद में उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। परिजनों का कहना है कि बीमार होने के कारण रिया काफी कमजोर हो गई थी और उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। 15 दिन पहले रिया को चाचा नेहरू अस्पताल में एडमिट कराया गया था। उसे लीवर की शिकायत थी।  बच्ची ने इलाज के दौरान तोड़ा दम परिजनों के मुताबिक, बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर चाचा नेहरू अस्पताल में दाखिल किया गया था। वहां इलाज में फायदा नहीं होने पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में दाखिल किया गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इधर, 75 वर्षीय शालिग्राम के परिजनों ने बताया कि दो जनवरी को उल्टी-दस्त के कारण शैल्बी अस्पताल में रेफर किया गया था। वहां से उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। इसके बाद वह वेंटिलेटर पर ही थे। करीब 12 दिन पहले उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था। फिलहाल दोनों मौतों को मौत की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने डायरिया की वजह से नहीं की है। डॉक्टरों का कहना है कि दोनों को दूसरी बीमारियां भी थीं। बता दें कि अब तक 35 मौतें दूषित पानी के कारण हो चुकी हैं। कोर्ट ने अफसरों ने 16 लोगों की मौत डायरिया की वजह मानी है। आयोग ने जांच शुरू की इंदौर भागीरथपुरा में दूषित जल से 35 मौतें और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के मामले में उच्च न्यायालय द्वारा गठित आयोग की जांच शुरू हो गई है। आयोग के समक्ष रहवासी या अन्य व्यक्ति शिकायत और आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। उच्च न्यायालय ने भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल प्रदूषण तथा उससे जनस्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों पर पड़े प्रभाव की जांच के लिए न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता पूर्व न्यायाधीश उच्च न्यायालय की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया है। आयोग द्वारा जल प्रदूषण के कारणों, प्रशासनिक लापरवाही, जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई, जनहानि, चिकित्सकीय प्रभाव तथा सुधारात्मक उपायों की जांच की जाएगी। आयोग ने इसे लेकर सार्वजनिक सूचना जारी की है। इसके तहत भागीरथपुरा एवं आसपास के क्षेत्रों के सभी प्रभावित नागरिक, परिजन, जनप्रतिनिधि, चिकित्सक, अस्पताल, सामाजिक संगठन, ठेकेदार, शासकीय अधिकारी अथवा कोई भी व्यक्ति, जिनके पास प्रकरण से संबंधित जानकारी, दस्तावेज या साक्ष्य उपलब्ध हों, वह आयोग के सामने पेश कर सकता है। साथ ही पेयजल प्रदूषण से संबंधित शिकायतें या आवेदन, चिकित्सकीय अभिलेख, अस्पताल में भर्ती होने की पर्चियां, डिस्चार्ज समरी, मृत्यु प्रमाण पत्र, जल पाइप लाइन में रिसाव, सीवरेज मिश्रण या क्षति से संबंधित फोटो/वीडियो, जल आपूर्ति से संबंधित टेंडर दस्तावेज, कार्य आदेश, निरीक्षण रिपोर्ट या कोई अन्य सामग्री भी आयोग के कार्यालय स्कीम नंबर 140 आरसीएम 10, प्रथम मंजिल आनंद वन स्थित आयोग के कार्यालय में 28 फरवरी तक प्रस्तुत कर सकते हैं। बच्ची के लिवर में तकलीफ बताई गई थी 15 दिन पहले रिया को चाचा नेहरू अस्पताल में एडमिट किया गया था। यहां उसके लिवर में तकलीफ बताई गई थी। इसके बाद उसे सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल में एडमिट किया गया, जहां करीब 5 दिन बाद उसकी मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि दूषित पानी के कारण ही तबीयत बिगड़ी। उसका असर लिवर तक हुआ। गुइलेन बैरे सिंड्रोम से जूझ रही महिला 57 वर्षीय एक महिला गंभीर जीबीएस (गुइलेन बैरे सिंड्रोम) से जूझ रही हैं। हालांकि इस मरीज को जीबीएस होने का स्वास्थ्य विभाग खंडन कर चुका है, लेकिन परिजन का कहना है कि इसी बीमारी के कारण उन्हें HDU (High Dependency Unit) में एडमिट किया गया है। दरअसल, दूषित पानी के कारण इस महिला की हालत 28 दिसंबर को बिगड़ी थी। पहले उसे एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। इसके बाद 2 जनवरी को दूसरे बड़े हॉस्पिटल में रेफर किया गया। इस तरह करीब डेढ़ माह से इलाज चल रहा है। इस बीच हालत गंभीर होने पर 20 दिन से ज्यादा समय तक वह आईसीयू, वेंटिलेटर पर भी एडमिट रही। परिजन के मुताबिक, अभी ठीक होने में समय लगेगा। जीबीएस गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी जीबीएस एक दुर्लभ और गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपनी ही स्वस्थ तंत्रिकाओं पर हमला करने लगती है। इसका एक कारण गंदे पानी में पनपने वाला कैम्पीलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया भी है। बीमारी के तहत हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन होता है। यह गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट का इंफेक्शन) देखने में आता है। इसमें मरीज को ठीक होने में समय लगता है। इसमें 70% मरीज स्वस्थ हो पाते हैं। इसमें मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। मरीज सांस तक नहीं ले पाता है और वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ता है। ये क्या…12 किमी दूर जाकर करें शिकायत जिस भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई मौतों व बीमारी के मामले में जांच होनी है, उसका ऑफिस भागीरथपुरा से करीब 12 किलोमीटर दूर खोला गया है। प्रशासन द्वारा ऑफिस के लिए जगह उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। पीडितों को शिकायत करने के लिए लंबी दूरी तय करनी होगी। भागीरथपुरा से स्कीम 140 तक का लंबा सफर चर्चा का विषय है। HC के आदेश पर बना आयोग कर रहा जांच मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच के लिए एक आयोग बनाया गया है। इस आयोग के अध्यक्ष एमपी हाईकोर्ट के रिटायर्ट जज सुशील कुमार गुप्ता हैं। आयोग किन पॉइंट्स पर जांच कर रहा?     पीने का पानी कैसे और क्यों प्रदूषित हुआ?     इसमें किस स्तर पर प्रशासन की लापरवाही हुई?     कौन-कौन लोग इसके जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है?     लोगों की सेहत पर इसका क्या असर पड़ा?     कितनी जनहानि हुई?     भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या सुधार जरूरी हैं? इस मामले को लेकर आयोग ने सार्वजनिक सूचना भी … Read more

इंदौर: दूषित पानी से 32वीं मौत, भागीरथपुरा की महिला पहले से थी दूसरी बीमारियों से पीड़ित

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इंदौर इंदौर की भागीरथपुरा बस्ती में दूषित पानी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक महीना बीत जाने के बाद भी यहां मौतों का सिलसिला जारी है। रविवार को बस्ती में 32वीं मौत दर्ज की गई, जिसने इलाके में दहशत और बढ़ा दी है। ताज़ा मामला 65 वर्षीय अनिता कुशवाह का है, जिन्होंने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इलाज के दौरान बिगड़ी हालत अनिता को कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया था। शुरुआत में इसे सामान्य संक्रमण माना जा रहा था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं। उनकी हालत इतनी नाजुक हो गई कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। इलाज के दौरान उन्हें दिल का दौरा भी पड़ा, जिसके बाद उनकी स्थिति और बिगड़ती चली गई और आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। बेटे नीलेश ने बताया कि उन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं थी। 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त के कारण भाग्यश्री हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। दो दिन बाद डिस्चार्ज होकर घर पर लाया गया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद फिर हालत बिगड़ी। उन्हें 1 जनवरी को अरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। अरबिंदो हॉस्पिटल से उन्हें 4 जनवरी को बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया था। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ती गई। हालत गंभीर होने पर किडनी फेल हो गई, जिसके चलते लगातार हेमोडायलिसिस किया जा रहा था। फिर वेंटिलेटर पर भी लिया गया। इलाज के दौरान उन्हें कार्डियक अरेस्ट भी आया। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि शासन की ओर से हायर सेंटर पर इलाज करवाया गया, लेकिन दुर्भाग्य से मरीज को बचाया नहीं जा सका। महिला के पति मिल से रिटायर्ड हैं। परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं। अनिता कुशवाह का अंतिम संस्कार आज होगा। भागीरथपुरा दूषित पानी हादसे में अब तक 32 मौतें हो चुकी हैं। इस मामले में 450 से ज्यादा मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं, लेकिन दूसरी ओर तीन मरीज अब भी एडमिट हैं। इनमें से 2 आईसीयू में हैं। उनकी हालत काफी क्रिटिकल बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि बस्ती में अब तक 32 लोग जान गंवा चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में सिर्फ 16 मौतें ही दर्ज हैं। विभाग इन मौतों की मुख्य वजह डायरिया (उल्टी-दस्त) मान रहा है। बाकी की अन्य मौतों का अभी तक कोई डेथ ऑडिट नहीं किया गया है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल बस्ती के दो और मरीज अस्पताल में भर्ती हैं जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। राहत की बात बस इतनी है कि अब नए मरीजों के मिलने की रफ्तार कम हुई है और मामूली लक्षण वाले लोगों का घर पर ही इलाज चल रहा है। बस्ती में पानी का संकट अभी भी गहराया हुआ है। नगर निगम अब तक केवल 30 प्रतिशत इलाके में ही नई नर्मदा लाइन बिछा पाया है। बाकी पूरी बस्ती अब भी टैंकरों के भरोसे है। दूषित पानी के खौफ की वजह से लोग नल या टैंकर का पानी पीने से डर रहे हैं। जो लोग सक्षम हैं, वे पीने के लिए बाहर से पानी खरीद रहे हैं। 24 घंटे चालू हैं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर अभी मरीज आ रहे हैं, लेकिन डायरिया के मरीजों की संख्या एकदम कम हो गई है। रोज एक-दो मरीज आते हैं, लेकिन उन्हें एडमिट करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। हालांकि यह केंद्र 24 घंटे खुला है और क्षेत्र में दो एम्बुलेंस भी तैनात हैं। 30 प्रतिशत हिस्से में की जा रही पानी की सप्लाई उधर, इलाके में एक दिन छोड़कर 30% हिस्से में पानी का सप्लाय जारी है। निगम का कहना है कि पानी अब साफ आ रहा है लेकिन रहवासी अभी भी आरओ और टैंकर का पानी ही उपयोग कर रहे हैं। दूसरी ओर बचे हुए 70% हिस्से की मेन पाइप लाइन का काम अंतिम दौर में है। इसके बाद यहां लीकेज टेस्ट करने के साथ सैंपल लिए जाएंगे।

पीथमपुर में बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों की होगी पहचान, पुलिस ने ठेकेदारों से मांगे आधार कार्ड और बायोडाटा

पीथमपुर पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में विदेशी मजदूरों की पहचान के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। इसके चलते रविवार शाम पीथमपुर थाना सेक्टर-1 में एसडीओपी धामनोद मोनिका और थाना प्रभारी ओमप्रकाश अहीर ने लेबर ठेकेदारों के साथ बैठक की। थाना प्रभारी ने सभी ठेकेदारों को निर्देश दिए कि वे अपने यहां काम करने वाले सभी कर्मचारियों का आधार कार्ड और पूरा बायोडाटा थाने में जमा करें। उन्होंने कहा कि पुलिस हर कर्मचारी का वेरिफिकेशन करेगी। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस को दी जाए। बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों की होगी पहचान विशेष रूप से बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों की पहचान पर ध्यान दिया जाएगा। ठेकेदारों को यह प्रमाण पत्र भी देना होगा कि उनके यहां कोई बाहरी व्यक्ति काम नहीं कर रहा है। क्षेत्र में 1000 से ज्यादा उद्योग पीथमपुर में 1000 से अधिक उद्योग हैं। यहां करीब 2000 से ज्यादा लेबर कांट्रेक्टर काम करते हैं। इन उद्योगों में लगभग 2 लाख मजदूर कार्यरत हैं। प्रशासन का यह कदम क्षेत्र में अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।    

Indore’s Raja Raghuvanshi Murder: राज कुशवाहा भी अरेस्ट, सोनम के जरिए पहुंची पुलिस

इंदौर। राजा रघुवंशी हत्याकांड में पत्नी सहित 3 लोगों की गिरफ्तारी के बाद पहली बार इंदौर पुलिस का बयान सामने आया है। इंदौर एसपी ने बताया कि इस केस में राज कुशवाहा भी गिरफ्तार हो गया है। राज वही शख्स है जिसका सोनम के साथ अफेयर चल रहा था। इंदौर पुलिस ने सोनम के बारे में कहा कि पूछताछ में सब पता चल जाएगा। राजा की मां ने क्या सजा मांगी? पुलिस का आरोप है कि सोनम ने इंदौर के तीन हमलावरों को पति की हत्या के लिए हायर किया था, हालांकि सोनम के पिता ने अपनी बेटी को निर्दोष बताया है। इस मामले में मृतक राजा की मां का बयान भी सामने आया है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए हत्यारों के लिए सजा की मांग की है। राजा रघुवंशी की मां उमा रघुवंशी ने कहा है कि इसके जिम्मेदार लोगों को मौत की सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमको जरा सी भी भनक नहीं है कि कौन था कौन नहीं था। राजा तक को भनक नहीं थी। अगर कुछ ऐसा होता तो राजा हमें बता देता। अगर राजा को सोनम ने मरवाया है तो मैं कड़ी से कड़ी सजा चाहती हूं। फांसी। इसके बाद राजा की मां ने कहा कि मैं कुछ बोलना नहीं… और फिर इतना कहते कहते रुक गईं। 23 मई को लापता हुए कपल में राजा रघुवंशी का शव सोमवार दो जून को पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा क्षेत्र में एक झरने के पास गहरी खाई में मिला था, जबकि उनकी पत्नी की तलाश जारी थी। सोनम समेत तीन अन्य लोगों की गिरफ्तारी पर मेघालय मुख्यमंत्री कोनराड के सांग्मा का बयान सामने आया है। उन्होंने अपने एक्स हेंडल पर लिखा- राजा हत्याकांड में 7 दिनों के भीतर मेघालय पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मध्य प्रदेश के रहने वाले 3 हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया गया है, महिला ने आत्मसमर्पण कर दिया है और 1 अन्य हमलावर को पकड़ने के लिए अभियान अभी भी जारी है। बहुत बढ़िया।

सोनम ने प्रेमी राज से शादी न होने पर राजा को उतरवाया मौत के घाट

इंदौर। इंदौर के कपल राजा रघुवंशी की मेघालय में हत्या के बाद चौंकाने वाली बात सामने आई है। मेघायल पुलिस ने यूपी के गाजीपुर से राजा की पत्नी सोनम को पकड़ लिया है। सोनम समेत 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मेघालय के डीजीपी आई नोंगरांग ने कहा है कि सोनम कथित तौर पर पति की हत्या में शामिल है और उसने इसके लिए मध्य प्रदेश के ही हमलावरों को सुपारी दी थी। पुलिस ने हत्या की वजह का खुलासा नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक इस हत्याकांड के पीछे ‘लव ट्राएंगल’है। पता चला है कि सोनम का अफेयर राज कुशवाहा नाम के एक शख्स से था, जबकि शादी राजा से हो गई थी। एक न्यूज चैनल के मुताबिक, अभी तक की जांच में सामने आया है कि सोनम का राज नाम के लड़के से अफेयर था और दोनों ने साथ मिलकर राजा की हत्या की साजिश रची थी। बताया जा रहा है कि मेघायल जाकर सोनम लगातार कुछ लोगों के साथ फोन पर संपर्क में थी और अपना लोकेशन शेयर कर रही थी। सोनम की शादी 11 मई को ही राजा के साथ हुई थी और 21 मई को दोनों हनीमून पर निकल गए थे। 2 जून को मेघायल में राजा की लाश खाई में बरामद हुई थी। मेघालय पुलिस का कहना है कि हमलावर मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं, जिन्हें सोनम ने हायर किया था। राजा की हत्या के समय सोनम मौके पर मौजूद रही होगी, इसका इशारा वहां मिले जैकेट से मिलता है। वारदात वाली जगह पर सोनम की एक जैकेट मिली थी जो वह एक सीसीटीवी फुटेज में पहने दिख रही है। सीसीटीवी में राज और सोनम स्कूटी पर घूमते नजर आए थे। इसके अलावा सोनम के आसपास तीन पुरुष दिखे थे। पिता ने कहा- सोनम का संबंध नहीं सोनम के पिता ने कहा कि राज नाम का लड़का उनके साथ काम करता है। उन्होंने कहा कि उसका सरनेम कुशवाहा है या नहीं यह उन्हें पता नहीं, लेकिन राज को वह जानते हैं। हालांकि, उन्होंने सोनम और राज के बीच अफेयर की बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि राज से सोनम का कोई संबंध नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि सोनम और राज की शादी दोनों की रजामंदी से हुई थी। उन्होंने राजा से शादी के लिए सोनम पर किसी तरह के दबाव की बात से इनकार किया।

इंदौर में चीन और बांग्लादेश का बॉयकॉट, इन देशों से आए कपड़े बेचने पर ‘BAN’

 इंदौर इंदौर में खुदरा वस्त्र संघ ने चीन और बांग्लादेश में बने कपड़े बेचने वाले दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है. संगठन ने फैसला किया है कि यदि कोई सदस्य दुकानदार इन देशों के कपड़े बेचता पाया गया, तो उस पर 1.11 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. इंदौर खुदरा वस्त्र संघ के अध्यक्ष अक्षय जैन ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारा संगठन मानता है कि चीन और बांग्लादेश में बने कपड़ों का कारोबार भारतीय हितों के खिलाफ है. इसलिए, हमने निर्णय लिया है कि हमारे किसी भी सदस्य दुकानदार को इन देशों के कपड़े बेचते हुए पकड़ा गया, तो उस पर 1.11 लाख रुपए का जुर्माना लगेगा.” जैन ने बताया कि जुर्माने की राशि भारतीय सेना के लिए केंद्र सरकार के कोष में जमा की जाएगी. उन्होंने दावा किया कि इंदौर के 600 व्यापारियों ने अब तक इस प्रस्ताव का समर्थन किया है और चीन व बांग्लादेश में बने कपड़े न बेचने की प्रतिबद्धता जताई है. बांग्लादेश और चीन से बड़े पैमाने पर आता है कपड़ा बताया गया है कि चीन और बांग्लादेश से बड़े पैमाने पर कपड़ा आता है, जिसका अब बहिष्कार (Boycott of China Bangladesh in MP) किया जाएगा। सुभाष चौक मंदिर में भगवान हनुमान को साक्षी मानकर 600 से अधिक व्यापारियों ने इस संकल्प पर सहमति दी है। इस दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन, राजेश जैन, पवन पंवार, पप्पी विल्सन, मिलन जैन, दीपक पंवार, चेतन डेमला, रूपेश गुप्ता, मोहन पोरवाल, सचिन सुराणा, शैलेंद्र दुबे, अंशुल मांडलिक सहित बड़ी संया में व्यापारी मौजूद थे। इस सामूहिक फैसले को लेकर सभी दुकानों पर पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें लिखा है कि हम चीन और बांग्लादेश के कपड़े नहीं बेचेंगे। पोस्टर के साथ व्यापारियों ने प्रदर्शन भी किया। डिस्ट्रीब्यूटर्स को लिखा पत्र एसोसिएशन अध्यक्ष अक्षय जैन ने बताया कि इंदौर के अलावा चीन और बांग्लादेशी कपड़ों के अन्य शहरों के डिस्ट्रीब्यूटर्स को पत्र लिखकर जानकारी दी है कि अब इन देशों का कपड़ा नहीं बेचेंगे। इस मुहिम से जुड़कर केवल स्वदेशी कपड़े का व्यापार होगा, ताकि भारत की आर्थिक व्यवस्था को हम मजबूत बना सकें। किसी भी व्यापारी के पास चीन व बांग्लादेश का कपड़ा बिक्री के लिए मिलेगा तो उस पर 1.11 लाख रुपए का दंड लगाया जाएगा, जो सेना को देंगे। सभी व्यापारी इस फैसले से सहमत हैं। कपड़ा और मटेरियल होगा नष्ट एसोसिएशन ने चीन की एसेसरीज, कपड़ा और अन्य मटेरियल को नष्ट करने का भी फैसला लिया है। इसमें निकला वेस्ट नगर निगम को सौंपा जाएगा।

वर्ल्ड बैंक की टीम अब इंदौर के भिक्षावृत्ति निर्मूलन मॉडल का अध्ययन कर इसको समझने में जुटी

इंदौर  देश भर में स्वच्छता के लिए चर्चित इंदौर अब भिक्षुक मुक्त शहर के रूप में भी चर्चा में है. यहां चलाए गए भिखारी मुक्त अभियान के चलते इंदौर ऐसा करने वाला पहला शहर बन चुका है. उसके इस मॉडल को जल्द ही देश के अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकता है. केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड और वर्ल्ड बैंक की टीम अब इंदौर के भिक्षावृत्ति निर्मूलन मॉडल का अध्ययन कर इसको समझने में जुटी है. मध्य प्रदेश के कई शहरों ने अपनाया इंदौर का मॉडल इंदौर के भिक्षुक मुक्त अभियान को अब प्रदेश के कई शहर अपना रहे हैं. उज्जैन में भिक्षुकों को धार्मिक स्थलों से हटाने के साथ उनके विस्थापन की कार्रवाई तेजी से की जा रही है. इसके अलावा भोपाल जिला प्रशासन ने भी भिक्षुक मुक्त अभियान की शुरुआत की है, जिसके तहत इंदौर जैसी ही कार्रवाई राजधानी भोपाल में हो रही है. देश के अन्य शहरों में भी इस मॉडल को अपनाया जा सके इसके लिए वर्ल्ड बैंक और केंद्रीय समाज कल्याण विभाग की टीम इंदौर के भिक्षावृत्ति निर्मूलन मॉडल का अध्ययन कर रही है. इसके अलावा टीम उन भिक्षुकों के पास भी पहुंच रही है जो पहले भिक्षावृत्ति करते थे लेकिन अब स्वावलंबन के साथ स्वरोजगार से जुड़े हुए हैं. समाज कल्याण विभाग और वर्ल्ड बैंक अन्य शहरों के लिए भी कर रहा इस मॉडल को प्रमोट वहीं उनके बच्चे अन्य बच्चों के साथ स्कूल जा रहे हैं बल्कि उनके भविष्य सुधार की उम्मीदें भी शिक्षकों को नजर आ रही है. दरअसल देश के विभिन्न शहरों में यह समस्या है. जिसके फलस्वरूप अब इंदौर के इस मॉडल को समाज कल्याण विभाग और वर्ल्ड बैंक अन्य शहरों के लिए भी प्रमोट कर रहा है. उम्मीद की जा रही है कि इंदौर के इस मॉडल को जल्द ही भारत सरकार के स्तर पर अन्य शहरों में भी अपने के लिए दिशा निर्देश दिए जा सकते हैं जिससे कि देश के अन्य शहरों में भी लोगों को भिखारियों के कारण होने वाली समस्याओं से मुक्ति मिल सके सड़कों पर भीख मांगने को ही अपनी किस्मत मान चुके भिखारी को अन्य लोगों की तरह सामान्य जीवन जीने का अवसर मिल सके. केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय मंत्रालय ने 2024 में शुरू की भिक्षावृत्ति निर्मूलन की SMILE योजना दरअसल देश के अन्य शहरों की तरह साल भर पहले तक इंदौर में भी हर सड़क और चौराहे पर भिखारी भीख मांगते नजर आते थे. जिसकी वजह से सड़कों पर दुर्घटना और अन्य परेशानियां देखने को मिलती थी. इस बीच भारत सरकार ने देश के 9 शहरों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत भिक्षावृत्ति निर्मूलन के लिए चुना था. जिसके तहत सबसे पहले प्रयास इंदौर में शुरू हुए. इसी दरमियान 2024 में इंदौर जिला प्रशासन ने सामाजिक संस्था ‘प्रवेश’ तथा सामाजिक न्याय विभाग और महिला एवं बाल विकास की टीम के साथ ऐसी योजना तैयार की जिसमें भिखारियों का विस्थापन किया जा सके. साथ ही उनके बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थाई व्यवस्था हो सके. इसके लिए इंदौर शहर में भिक्षुकों के लिए रेस्क्यू अभियान की शुरुआत हुई. जिसके तहत इंदौर के चौराहों और सड़कों पर भीख मांगने वाले लोगों को पकड़ कर विस्थापन केंद्र भेजा जाने लगा जहां उन्हें आवास के साथ भोजन आदि की सुविधाएं उपलब्ध थी. इस दौरान अन्य राज्यों से भीख मांगने आने वाले भिखारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई. ‘प्रवेश’ की प्रमुख रूपाली जैन बताती हैं “इस अभियान में करीब 8000 भिखारियों का रेस्क्यू किया गया. उन्हें समाज सुधार केन्द्रों में भेजा गया. भिखारियों के बच्चों का आंगनबाड़ी और स्कूलों में कराया गया एडमिशन इन भिखारियों के साथ उनके करीब 1200 बच्चे थे जो शिक्षा के मौलिक अधिकार से भी दूर थे. लिहाजा सभी बच्चों का आंगनबाड़ियों और स्कूलों में न केवल एडमिशन कराया गया बल्कि उन्हें शिक्षा सामग्री, स्कूल ड्रेस और आधार कार्ड समेत अन्य संसाधन उपलब्ध कराए गए. इसी प्रकार सीएसआर फंड से बुजुर्ग भिखारियों का विभिन्न अस्पतालों में लाखों रुपये खर्चे से इलाज शुरू किया गया. जिन 228 भिखारियों को मानसिक बीमारी और नशे की लत थी उन्हें मानसिक रोग चिकित्सालय एवं उज्जैन के सेवा धाम आश्रम में नशा मुक्ति के लिए भेजा गया. इन भिखारियों में दो माफिया भिखारियों को जेल भेजा गया जबकि अन्य दो अपने राज्यों में लौट गए. इसी प्रकार अन्य राज्यों से माइग्रेट होकर आने वाले करीब 2000 से ज्यादा भिखारियों को सख्ती की वजह से अपने मूल स्थान पर लौटना पड़ा. इंदौर में भिखारियों की सूचना देने वालों को प्रोत्साहन राशि देने का किया गया प्रावधान लगातार चल इस अभियान के परिणामस्वरूप फिलहाल स्थिति यह है कि इंदौर में अब किसी भी सड़क और चौराहे पर भिखारी नजर नहीं आते. इसके अलावा इंदौर जिला प्रशासन ने एक ऐसा नंबर भी जारी किया जिस पर व्हाट्सएप या अन्य माध्यम से सूचना देने पर तत्काल रेस्क्यू दल भिक्षुक को पकड़ कर उन्हें विस्थापन केंद्र भेजा जाने लगा. इसके लिए 1000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया. संबंधित नंबर पर जिन लोगों ने भिक्षकों की सूचना दी उन लोगों का न केवल इंदौर जिला प्रशासन ने सम्मान किया बल्कि उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी गई. इसके अलावा इंदौर में भिक्षावृत्ति को नागरिक संहिता 2023 की धारा 16312 के तहत नागरिक सुरक्षा अधिनियम में प्रतिबंधित किया गया. इसके बाद शहर में भीख मांगना न केवल अपराध घोषित किया गया बल्कि भीख देने वाले को भी धारा 144 के तहत गिरफ्तार करने का प्रावधान किया गया. इस प्रावधान के तहत कई लोगों के खिलाफ न केवल पुलिस प्रकरण दर्ज हुए बल्कि भिखारियों को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा. जिसके सकारात्मक परिणाम अब उजागर हो रहे हैं. फिलहाल इंदौर अब देश का पहला भिक्षुक मुक्त शहर है जो अपने आप में एक मिसाल है.

इंदौर की 56 दुकान चौपाटी पर लगाए पाकिस्तान के विरोध में पोस्टर

इंदौर  कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के प्रति लोगों का आक्रोश और बढ़ता जा रहा है। इंदौर शहर में राजवाड़ा सहित तीन मुख्य मार्गों पर लोगों ने पाकिस्तान का झंडा बनाया और इसके साथ लिखा- आतंकवादी पाकिस्तान मुर्दाबाद। सड़क पर बना पाकिस्तान का झंडा लोग रौंदते हुए निकल रहे हैं। पिग्स एंड पाकिस्तानी नाट अलाउड… इसके पहले इंदौर की 56 दुकान चौपाटी पर पाकिस्तान के विरोध में यहां के व्यापारियों ने एक पोस्टर लगाया था। यह पोस्टर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ, जिसमें लिखा था- ‘पिग्स एंड पाकिस्तानी सिटीजंस नाट अलाउड एट 56 दुकान।’ पोस्टर में पाकिस्तानी सेना के जनरल की वर्दी पहना एक पिग भी बना था। हमले में इंदौर के सुशील नथानियल की हुई थी मौत पहलगाम में हुए हमले में इंदौर के सुशील नथानियल की मौत हो गई थी। वे अपने परिवार के साथ कश्मीर घूमने गए थे। आतंकियों ने उन्हें पकड़कर कलमा पढ़ने को कहा, जब उन्होंने कहा कि मैं क्रिश्चियन हूं, तो सीने में गोली मार दी। घटना के दौरान उनकी पत्नी और बेटी वहीं मौजूद थी। आतंकियों द्वारा की गई फायरिंग में उनकी बेटी के पैर में गोली लगी।

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में कचरे के बाद अब पुराने अनुपयोगी कपड़ों की प्रोसेसिंग होगी, कपड़ों से सीमेंट सहित अन्य कई उत्पाद तैयार हो सकेंगे

इंदौर देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में कचरे के बाद अब पुराने अनुपयोगी कपड़ों की प्रोसेसिंग हो सकेगी. लिहाजा कचरे में पाए जाने वाले कपड़ों के टुकड़ों से सीमेंट सहित अन्य कई उत्पाद तैयार हो सकेंगे. अपनी तरह के इस प्लांट से प्रतिदिन 50 टन कपड़ों की प्रोसेसिंग हो सकेगी. इससे नगर निगम की आय में भी इजाफा होगा. पुराने कपड़ों से बनेंगे उत्पाद दरअसल, इंदौर शहर में प्रतिदिन जो कचरा निकलता है, उसकी प्रोसेसिंग नेप्रा नामक एजेंसी द्वारा की जाती है. फिलहाल इस एजेंसी के पास भी कपड़ों की प्रोसेसिंग सुविधा नहीं है. यही वजह है कि शहर भर से इकट्ठा होने वाले कपड़ों के टुकड़ों को प्रोसेसिंग के लिए अलग-अलग एजेंसी को भेजना पड़ता है. इसके अलावा कचरे के निष्पादन की एजेंसियों के स्तर पर भी कपड़े के उचित प्रबंधन करने की मांग नगर निगम प्रशासन से की जा रही थी. जिसके फल स्वरुप नगर निगम प्रशासन ने अब गीले और सूखे कचरे के निस्तारण की तरह ही कपड़े से सीमेंट और अन्य कई उत्पाद बनाने के लिए एक अलग से प्लांट बनाने की तैयारी कर ली है. इंदौर नगर निगम का नया प्लान नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा के मुताबिक, ”प्लांट बनाने के लिए टेंडर के जरिए एजेंसी तय करने के बाद कपड़े के निस्तारण की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी को दी जएगी. इस कार्य को लेकर 20 साल की समय अवधि भी दी जाएगी. कपड़े के निस्तारण से जो राशि प्राप्त होगी उसकी एक निश्चित हिस्सेदारी नगर निगम की होगी. इस प्लांट की क्षमता के मुताबिक 50 टन तक कपड़े को प्रोसेस किया जा सकेगा. मलवे से तैयार हो रहे हैं कई उत्पाद इंदौर नगर निगम द्वारा न सिर्फ गीले और सूखे कचरे से तरह-तरह के उत्पाद मीथेन और सीएनजी गैस के अलावा प्राकृतिक खाद बनाई जा रही है, बल्कि इससे नगर निगम को हर साल करोड़ों रुपए की आय भी होती है. अब नगर निगम की कोशिश है कि जो कपड़ा कचरे में पाया जाता है उसके निस्तारण के लिए भी प्लांट की स्थापना करके रॉयल्टी और आय का नया संसाधन स्थापित किया जा सके. महापौर इंदौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि, ”हमने तय किया है कि हम सफाई को नेक्स्ट लेवल पर लेकर जाएंगे. जो घरों से, फैक्ट्रियों या अन्य स्थानों से निकलने वाला कपड़ा है. उसे कलेक्ट करके रेवेन्यू जनरेट करने का प्रपोजल तैयार किया है.”

इंदौर की सड़कों पर चलता फिरता टेंट, बारातियों ने जमकर की मस्ती,सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा

इंदौर  भीषण गर्मी से परेशान लोगों के लिए इंदौर से एक राहत भरी और बेहद दिलचस्प खबर सामने आई है। खजराना क्षेत्र में आयोजित एक शादी समारोह में बारात को लेकर जो अनूठा इंतजाम किया गया, उसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। शादी में शामिल मेहमानों को गर्मी से बचाने के लिए पटेल परिवार ने एक ऐसा उपाय किया, जिससे देखकर आप भी तारीफ करेंगे। चलते-फिरते टैंट ने खींचा सबका ध्यान इस बारात की खास बात यह रही कि इसमें एक चलता-फिरता टेंट लगाया गया, जो बारात के साथ-साथ आगे बढ़ता रहा। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि तेज़ धूप में निकली बारात के ऊपर एक बड़ा तंबू लगाया गया है, जो बारातियों को चिलचिलाती धूप से राहत दे रहा है। इस टेंट के नीचे न केवल बाराती चल रहे हैं, बल्कि दूल्हा भी घोड़ी पर सवार होकर उसी के अंदर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर धड़ाधड़ शेयर हो रहा वीडियो यह दृश्य लोगों को इतना पसंद आ रहा है कि वे सोशल मीडिया पर इस वीडियो को शेयर कर तारीफों के पुल बांध रहे हैं। कई लोग तो कह रहे हैं। अब शादी में जाना है तो ऐसी ही बारात में। 40 पार कर गया तापमान बता दें कि इस समय देश के अनेक हिस्सों में लू और गर्म हवाओं के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। दिन में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। ऐसे में विवाह समारोहों में मेहमानों की उपस्थिति भी कम हो रही है। लेकिन इंदौर के पटेल परिवार ने अपने मेहमानों को इस तपती गर्मी से बचाने के लिए नायाब इंतज़ाम किया। इससे पहले वायरल हुए थे चलित कूलर इससे पहले भी इंदौर में एक होटल व्यवसायी ने अपनी शादी में चलित कूलरों का इंतज़ाम कर गर्मी से निपटने का अनोखा तरीका अपनाया था। अब इस चलित टेंट वाली बारात ने फिर साबित कर दिया कि इंदौर न केवल सफाई में नंबर वन है, बल्कि नवाचार और स्मार्ट सोच में भी अव्वल है।

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना के लिए 120 बीघा जमीन की सहमति मिल चुकी

इंदौर  एमपी में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के किसान जमीन देने पर सहमत होते जा रहे हैं। बीते दिन दो विधायकों और जमीन मालिकों के साथ एमपीआइडीसी की बैठक हुई। मौके पर ही कुछ जमीन मालिकों ने करीब 40 बीघा जमीन देने के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। अब तक 120 बीघा जमीन देने पर सहमति बन गई है।  एमपीआइडीसी के ऑफिस में हुई बैठक में विधायक उषा ठाकुर, मधु वर्मा और इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के 50 से अधिक जमीन मालिक व किसान मौजूद थे। प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन देकर कई लोगों की शंका का समाधान किया गया। सवाल किया गया कि यह कब पूरा होगा तो एमपीआइडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर राजेश राठौड़ ने बताया कि जमीन मिलने के बाद दो साल में प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। पहली बार सरकार 60 फीसदी विकसित भूखंड किसी योजना में दे रही है। कॉरिडोर के तैयार होने से क्षेत्र और इंदौर के विकास को नई उड़ान मिलेगी। बच्चों को रोजगार मिलेगा। समय पर पूरी होने की उम्मीद एमपीआईडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर राजेश राठौड़ ने बैठक में जमीन मालिकों के हर सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि यह परियोजना तय समय सीमा में पूरी होगी, जिससे किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही, उन्हें मिलने वाले विकसित भूखंडों का उपयोग वे तुरंत शुरू कर सकेंगे। जमीन मालिकों ने भी इस बात पर संतोष जताया कि परियोजना समय पर पूरी होने की उम्मीद है। मिलेंगे रोजगार के अवसर उनका कहना था कि इससे उन्हें न सिर्फ आर्थिक लाभ होगा, बल्कि उनके बच्चों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। किसानों का कहना है पहले डर था कि जमीन चली जाएगी और बदले में जो मिलेगा, वो पर्याप्त नहीं होगा, लेकिन अब स्थिति साफ हो गई है, और अब जब हमें 60त्न विकसित प्लॉट मिलने की गारंटी दी जा रही है, तो हम इस परियोजना का हिस्सा बनने को तैयार हैं। समय पर दर्ज कराएं सहमति राजेश राठौड़ ने कहा हमारा लक्ष्य किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए इस परियोजना को मूर्त रूप देना है। यह एक ऐसा मॉडल है, जिसमें किसान न केवल अपनी जमीन का उचित प्रतिफल प्राप्त करेंगे, बल्कि औद्योगिक विकास के साझेदार भी बनेंगे। इसलिए समय रहते अपनी सहमति दर्ज कराएं और इस ऐतिहासिक परिवर्तन का हिस्सा बनें।  जिला प्रशासन द्वारा भी इस परियोजना को सफल बनाने के लिए तेजी से कार्रवाई की जा रही है। ग्राम रिजलाय में एसडीएम राऊ गोपाल वर्मा ने एक अलग बैठक ली, जिसमें कई जमीन मालिक शामिल हुए। इस बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई और किसानों ने परियोजना के प्रति उत्साह दिखाया। प्रशासन का यह प्रयास है कि हर किसान की सहमति बिना किसी दबाव के, उनकी मर्जी से ली जाए। सरकार और प्रशासन का पूरा समर्थन बैठक में महू विधायक उषा ठाकुर ने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों की हर मांग को पूरा किया है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि जमीन देने वाले किसानों को 60 फीसदी विकसित प्लॉट मिलेगा। यह योजना स्वर्णिम भारत के निर्माण का एक कदम है। उद्योगीकरण आज की जरूरत है और इसके जरिए हमारे युवाओं को रोजगार मिलेगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसानों की छोटी-छोटी शंकाओं का समाधान करने के लिए प्रशासन और एमपीआईडीसी के अधिकारी हर कदम पर उनके साथ हैं। राऊ विधायक मधु वर्मा भी इस मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने परियोजना को क्षेत्र के लिए अतिमहत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह परियोजना न सिर्फ क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि किसानों के लिए भी आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगी। जिस गांव में जमीन वहीं मिलेंगे प्लॉट पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर 19.6 किलोमीटर लंबी और 75 मीटर चौड़ी सडक़ के दोनों ओर 300-300 मीटर के बफर जोन में विकसित की जाएगी। इसमें 17 गांवों- नैनोद, कोर्डियाबर्डी, रिजलाय, बिसनावदा, नावदापंथ, श्रीरामतलावली, सिन्दोड़ा, सिन्दोड़ी, शिवखेड़ा (रंगवासा), नरलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, धन्नड़ और टिही की कुल 1331 हेक्टेयर जमीन शामिल है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 2410 करोड़ रुपये है और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे विकास कार्य में कोई बाधा न आए। किसानों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि उन्हें अपनी जमीन के बदले 60त्न विकसित भूखंड मिलेंगे। ये भूखंड फ्री होल्ड होंगे, यानी किसान इनका पूरा मालिकाना हक रख सकेंगे। ये भूखंड यथासंभव उसी गांव में आवंटित किए जाएंगे, जहां उनकी मूल जमीन स्थित है। इससे किसानों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का मौका मिलेगा और वे इन भूखंडों का उपयोग आवास, व्यवसाय या बिक्री के लिए कर सकेंगे। सहमति देने की प्रक्रिया जमीन मालिक अपनी सहमति एमपीआईडीसी के क्षेत्रीय कार्यालय, इंदौर में जमा कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रारूप में दस्तावेज जमा करने होंगे, जिसकी पावती उन्हें दी जाएगी। सहमति मिलने के बाद एमपीआईडीसी और राजस्व विभाग की टीम जमीन का भौतिक निरीक्षण करेगी और इसके आधार पर रजिस्ट्री एमपीआईडीसी के पक्ष में होगी। रजिस्ट्री से पहले किसानों को यह शपथ-पत्र देना होगा कि उनकी जमीन पर कोई विवाद या ऋ ण नहीं है। यदि जमीन पर ऋण है, तो संबंधित बैंक से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट देना होगा। रजिस्ट्री के बाद किसानों को उनकी पात्रता के अनुसार भूखंड आरक्षित कर सूचित किया जाएगा और परियोजना पूरी होने पर इनका कब्जा और रजिस्ट्री उनके नाम होगी। समस्या आई तो हम रहेंगे साथ विधायक ठाकुर ने किसानों से कहा कि औद्योगीकरण आज की जरूरत है और इसके जरिए युवाओं को रोजगार मिलेगा। किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए हमेशा खड़ी हूं। वर्मा ने योजना को क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगी। दावे-आपत्तियों का अंतिम निराकरण कॉरिडोर को लेकर एमपीआइडीसी ने दावे-आपत्ति बुलाए थे, जिसमें 700 लोगों ने उपस्थिति दर्ज कराई थी। पहले चरण में सभी दावे-आपत्तियों को सुना गया था। अब सरकार 60 फीसदी विकसित भूखंड देकर जमीन ले रही है तो बड़ी संख्या में किसान जमीन देने को राजी हो गए हैं। मंगलवार को आपत्तिकर्ताओं की आखिरी सुनवाई होगी। बताया गया है कि कुछ कॉलोनाइजरों की भी जमीन है और वे अड़े हुए हैं।

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