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कुपोषण से मुक्ति की दिशा में कदम: C-MAM मॉडल और समुदाय सहभागिता के माध्यम से बाल पोषण जागरूकता कार्यक्रम

Step towards freedom from malnutrition

Step towards freedom from malnutrition: Child nutrition awareness programme through C-MAM model and community participation जितेन्द्र श्रीवास्तवजबलपुर ! एकीकृत बाल विकास परियोजना शहरी क्र.-04, सेक्टर-02 खेरमाई वार्ड के समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों में “C-MAM(समुदाय आधारित पोषण प्रबंधन मॉड्यूल)के माध्यम से कुपोषण का प्रबंधन तथा जीवन के प्रथम 1000 दिवस के महत्व” थीम पर आधारित विविध गतिविधियों का आयोजन आंगनबाड़ी केंद्र स्तर पर किया गया। समस्त आंगनबाड़ी केंद्र में आज तृतीय मंगल दिवस पर “अन्नप्राशन दिवस” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें 6 माह की आयु पूर्ण करने वाले बच्चों का सामूहिक अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों की माता, पिता,अभिभावकों से बच्चों के आहार की बारंबारता, उसकी प्रकृति के विषय में चर्चा की गई। उन्हें जानकारी दी गई की 6 माह के बाद बच्चों के वृद्धि तथा विकास तेजी से होता है।जिसके लिए मां का दूध ही केवल पर्याप्त नहीं होता है। यही वह समय है जबकि बच्चों को ऊपरी आहार की शुरूआत करने की आवश्यकता होती है। बच्चों का भोजन सादा होना चाहिए। इसमें मिर्च मसाले का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए तथा बच्चों के भोजन की प्रकृति अर्द्धठोस होनी चाहिए। बच्चों के आहार की मात्रा, बारंबारता, भोजन में खाद्य विविधता एवं स्वच्छता विषय पर परामर्श सत्र का आयोजन किया गया। आंगनबाड़ी केन्द्रों में शारीरिक माप दिवस का आयोजन किया गया।जिसमें निर्धारित बच्चों का वजन ऊंचाई लेकर उनका पोषण स्तर ज्ञात किया गया तथा बच्चों के पोषण स्तर के संबंध में माता-पिता से चर्चा की गई बच्चों के पोषण स्तर के आधार पर माता-पिता तथा देखभालकर्ता को आवश्यक समझाइश/परामर्श भी दिया गया। केंन्द्र क्रमांक-30 में ‘वीएचएसएनडी दिवस’ का आयोजन किया गया। जहां एएनएम की उपस्थिति में वार्ड अंतर्गत समस्त चिन्हांकित सेम बच्चों की भूख की जांच की गई तथा भूख की जांच में फेल बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र(NRC) रेफर किया गया। साथ ही नवीन चिन्हांकित सेम,मेंम बच्चों को एएनएम की उपस्थिति में दवाओं का वितरण किया गया एवं पूर्व में C-MAM कार्यक्रम में पंजीकृत बच्चो को प्रदाय दवाओ के अनुपूरन का फॉलो अप एवं निर्धारित साप्ताहिक फॉलो अप भी किया गया। वीएचएसएनडी दिवस पर चिन्हांकित 0 से 6 वर्ष तक के सभी सेम, मैंम तथा गंभीर कम वजन के बच्चों,के माता पिता तथा अभिभावको को कुपोषण के संकेतो,लक्षणों,दुष्प्रभाव तथा उससे बचाव के उपायो तथा उपचार के संबंध में आवश्यक परामर्श दिए गए।

जेडीए की मिलीभगत से भूमि अधिसूचित कर एनओसी जारी, सीएम-पीएस को शिकायत

NOC issued after notifying land with the connivance of JDA, complaint to CM-PS जितेंद्र श्रीवास्तव ( विशेष संवाददाता )जबलपुर ! जबलपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के सीईओ दीपक वैद्य और भू-अर्जन अधिकारी अमित धुर्वे पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे कुछ भूमि मालिकों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ग्रीन बेल्ट की भूमि को अधिसूचित कर रहे हैं और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण-पत्र) जारी कर रहे हैं। इस मामले की शिकायत जबलपुर निवासी जितेंद्र श्रीवास्तव ने संभागीय कमिश्नर अभय वर्मा, ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा), प्रमुख सचिव आवास एवं पर्यावरण नीरज मंडलोई, जबलपुर कलेक्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भेजी है। आरोपों का मूल शिकायत के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब पूर्व सीईओ प्रशांत श्रीवास्तव के कार्यकाल में ग्रीन बेल्ट की भूमि का खसरा अधिसूचित कर, स्कीम नम्बर 11 फेज 2 के तहत वर्ष 2020-21 में राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। इस अधिसूचना में खसरा नम्बर 86 और 97 को अधिसूचित भूमि के रूप में शामिल नहीं किया गया था। लेकिन वर्तमान सीईओ दीपक वैद्य पर आरोप है कि उन्होंने उक्त खसरा नम्बर 86 और 97 को अधिसूचित कर एनओसी जारी कर दी, वह भी बिना बोर्ड की स्वीकृति और अनुमोदन के। टीआईटी एक्ट के तहत अधिग्रहीत भूमि यह खसरा नम्बर 86 और 97 ग्राम लक्ष्मीपुर की भूमि जेडीए के टीआईटी एक्ट के तहत अधिग्रहीत है। अधिग्रहीत भूमि के लिए टीआईटी एक्ट के नियमों के अनुसार, भूमि मालिकों को 20 प्रतिशत मुआवजा दिया जाना चाहिए। लेकिन आरोप है कि वर्तमान सीईओ ने भूमि मालिकों से मिलीभगत कर एनओसी जारी की, जिससे प्राधिकरण को गंभीर वित्तीय नुकसान हो सकता है। अधिकारियों का विरोध इस मामले में जेडीए के अन्य अधिकारी, जैसे पटवारी, आरआई, सहायक भू-अर्जन अधिकारी, भू-अर्जन अधिकारी, इस अधिसूचना के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि बिना उचित प्रक्रिया के इस प्रकार की अधिसूचना जारी करना अनैतिक है। शिकायत में यह भी आरोप है कि सीईओ दीपक वैद्य ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर दबाव डालकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। हालांकि, भू-अर्जन अधिकारी और ज्वाइंट कलेक्टर पूजा तिवारी ने किसी भी प्रकार के दबाव में आकर नोटशीट या फाइल पर कोई टिप्पणी नहीं की है, जिससे उनका तटस्थता का संकेत मिलता है। क्या है मामला यह मामला प्रशासनिक भ्रष्टाचार और मिलीभगत के गंभीर आरोपों का प्रतीक है, जहां सरकारी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर निजी लाभ के लिए भूमि को अधिसूचित कर एनओसी जारी की जा रही है। इस प्रकरण की जांच और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। ऐसी क्या मजबूरी है सरकार की?? जबलपुर विकास प्राधिकरण के CEO दीपक वैध को इतने सारे भ्रष्टाचार के बाद भी पद से निलंबित नहीं किया जा रहा है.ऐसा लगता है इसमे कुछ बड़े अधिकारी और नेता भी शामिल है इसलिए कार्यवाही नहीं हो रही है अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री और अन्य उच्च अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।

साइबर ठगों के निशाने पर प्रदेश के IAS अफसर: जबलपुर कलेक्टर हुए साइबर फ्राड के शिकार

State's IAS officers on target of cyber thugs: Jabalpur Collector becomes victim of cyber fraud

State’s IAS officers on target of cyber thugs: Jabalpur Collector becomes victim of cyber fraud जबलपुर । मध्य प्रदेश के कलेक्टर (आईएएस अफसर) साइबर ठगों के निशाने पर हैं। ताजा मामला जबलपुर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने साइबर सेल से मामले की शिकायत की है। जबलपुर कलेक्टर ने लोगों से अपील की है कि ऐसे फर्जी संदेशों को नजरअंदाज करें और तत्काल ब्लॉक कर दें। जबलपुर कलेक्टर का पहले भी फैसबुक अकाउंट हैक हो चुका है। जालसाजों ने कलेक्टर दीपक सक्सेना के नाम से उनके रिश्तेदार से 25 हजार की ठगी की है। ठग ने साइबर फ्रॉड करते हुए वाट्सऐप पर कलेक्टर दीपक की फोटो लगाई। फिर कई रिश्तेदारों को मैसेज किया। झांसे में आकर एक रिश्तेदार ने 25 हजार ट्रांसफर भी कर दिए गए। दीपक सक्सेना को ठगी का पता चला तो हैरान हो गए। ठगी का पता चलते ही जबलपुर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने फर्जी फेसबुक आईडी ब्लॉक कर आरोपी की तलाश के निर्देश साइबर सेल को दिए हैं। कलेक्टर ने अपनी फेसबुक आईडी पर फेक लिखते हुए कहा है कि अज्ञात नंबर से उनकी प्रोफाइल फोटो लगाकर लोगों से संपर्क किया जा रहा है। जिससे लोगों को धोखा हो रहा है। उन्होंने कहा है कि इन नंबरों का कलेक्टर जबलपुर से कोई संबंध नहीं है। नंबर फर्जी हैं। ऐसी ठगी को दिया अंजाम

जबलपुर के खजरी खिरिया बायपास के गोदाम में धमाके, जनहानि की आशंका

Explosion in warehouse of Khajri Khiriya bypass of Jabalpur, fear of loss of life धमाके से भूकंप जैसा एहसास। आसपास के भवनों को भी पहुंची क्षतिगोदाम की शटर 100 मीटर दूर पाई गई। जबलपुर। जबलपुर के खजरी खिरिया बाईपास में एक गोदाम धमाके के साथ उड़ गया। यह गोदाम समीम कबाड़ी का बताया जा रहा है। गैस कटर वाले सिलेंडर में कई धमाके हुए जिससे पूरा गोदाम ढह गया। गोदाम में लगी लोहे की शटर कई टुकड़ों में 100 मीटर दूर पाई गई। जनहानि की आशंका।धर्म कांटा में धमाका हुआ है कोई बोल बम से ब्लास्ट कई लोगों के दबे होने की आशंका। मौके पर मनुष्यों के कटे अंग भी मिले हैं। 1 किलोमीटर तक के लोग घर से बाहर आ गएगैस सिलिंडर कटर के धमाके की आवाज से दहला। शमीम कबाड़ी का बताया जा रहा है। धमाके से भूकंप जैसा एहसास। आसपास के भवनों को भी पहुंची क्षतिगोदाम की शटर 100 मीटर दूर पाई गई। इससे धमाके का अंदाजा लगाया जा सकता है कबाड़ में हुआ धमाका इतना शक्तिशाली था कि लगभग 1 किलोमीटर तक के लोग घर से बाहर आ गए।

चुनाव का नामांकन पत्र खरीदने पहुंचा निर्दलीय उम्मीदवार, सिक्कों में चुकाए 25 हजार रुपये

Independent candidate came to buy election nomination papers, paid 25 thousand rupees in coins प्रदेश के जबलपुर से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए नामांकन करने पहुंचे एक इंडिपेंडेंट कैंडिडेट सेक्यरिटी डिपोजिट के लिए हजारों रुपयों के सिक्के लेकर पहुंचा. जबलपुर ! लोकसभा चुनाव 2024 का बिगुल बज चुका है और सभी सियासी दल तैयारियों में जुट गए हैं. मध्य प्रदेश के जबलपुर से चुनाव से संबंधित एक अजीब मामला सामने आया है लोकसभा चुनाव लड़ने की योजना बना रहे जबलपुर का एक उम्मीदवार बुधवार को नामांकन के वक्त सेक्योरिटी डिपोजिट के रूप में भुगतान के लिए 25 हजार रुपयए के सिक्के लेकर कलेक्टर ऑफिस पहुंचा.इंडिपेंडेंट कैंडिडेट विनय चक्रवर्ती, जबलपुर के सियासी मैदान में उतरना चाहते हैं. उन्होंने 10 रुपये, 5 रुपये और 2 रुपये के सिक्कों में सेक्योरिटी डिपोजिट के रूप में 25 हजार रुपये का भुगतान किया है. उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मैंने सिक्कों में 25 हजार रुपये का भुगतान किया है. सिक्कों में भुगतान की क्या वजह बताई? एजेंसी के मुताबिक विनय ने कहा कि कलेक्टर कार्यालय में डिजिटल या ऑनलाइन मोड के जरिए भुगतान करने की कोई सुविधा नहीं थी, इसलिए मैंने सिक्कों में अमाउंट का भुगतान किया, जिसकी सुविधा उपलब्ध थी. उन्होंने कहा कि मैं एक इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर लोकसभा चुनाव लड़ना चाहता हूं. जबलपुर जिले के रिटर्निंग ऑफिसर और कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने बताया कि संभावित उम्मीदवार द्वारा सिक्कों में किया गया भुगतान प्राप्त कर लिया गया और उसकी रसीद उन्हें दे दी गई. बता दें कि पहले चरण के लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया बुधवार से शुरू हो गई. मध्यप्रदेश में 29 सीटों के लिए 4 चरणों में चुनाव संपन होना है. प्रदेश में 19 अप्रैल को पहले चरण में 6 सीटों के लिए मतदान होगा. इसके बाद 26 अप्रैल को 7 सीटें, 7 मई को 8 सीट और फिर 13 मई को बची 8 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भी 4 चरणों में चुनाव हुआ था.

कलेक्ट्रेट में पटवारियों ने किया प्रदर्शन:

Patwaris demonstrated in the Collectorate: जबलपुर ! पंजीयन के सत्यापन में बरती गई लापरवाही को लेकर जबलपुर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने गुरुवार को तत्कालीन एसडीएम और मझौली के प्रभारी तहसीलदार सहित दो पटवारियों को निलंबित कर दिया। कलेक्टर की इस कार्रवाई को लेकर सैकड़ों पटवारियों ने आज कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और कलेक्टर से मिलकर पटवारियों पर हुई कार्रवाई को गलत बताया। करीब आधे घंटे तक कलेक्टर ने पटवारियों की बात सुनी और आश्वासन दिया कि इसकी जांच करवा ली जाएगी।धान फर्जीवाड़े को लेकर जबलपुर कलेक्टर ने तत्कालीन एसडीएम धीरेंद्र सिंह एवं मझौली के प्रभारी तहसीलदार आदित्य जंघेला को आरोप पत्र दिया है, साथ ही दो पटवारी राहुल पटेल और अभिषेक विश्वकर्मा को निलंबित कर दिया। कलेक्टर की कार्रवाई को लेकर पटवारियों का कहना है कि धान खरीदी मैं राजस्व विभाग के कर्मचारियों का सीधा कहीं कोई दखल नहीं होता किसान अपनी उपज का रजिस्ट्रेशन सहकारी समितियां में करवाता है, इन सहकारी समितियां के कंप्यूटर ऑपरेटर और पंजीयन किसान की फसल का रजिस्ट्रेशन करते हैं, और यहीं पर किसान जमीनों के सिकमी नामे को जमा करता है l किसानों के जो भी रजिस्ट्रेशन किए जाते हैं, उनके माध्यम से वेरीफाई कर दिया जाता है। इसमें केवल 10% केस ही भौतिक रूप से सत्यापन के लिए आते हैं, जिन्हें पटवारी को सत्यापित करना होता है lजबलपुर में धान खरीदी में जो घोटाला हुआ उसमें कुछ स्थानों पर 35% जमीन सिकमी नाम के माध्यम से रजिस्ट्रेशन में दर्शाई गई है, मतलब इस जमीन पर जमीन का मालिक खेती नहीं कर रहा है, बल्कि उसने किसी को किराए से दी है और इसी किराए की जमीन की उपज लेकर किसान खरीदी केंद्र में गया। लगभग 50 हजार क्विंटल धान उन खरीदी केंद्रों पर पहुंची है, जिन खरीदी केंद्र को सरकार ने खरीदी करने की अनुमति नहीं दी थी। यही धान अब खरीदी केंद्र के बाहर लावारिस ढंग से पड़ी हुई है इसमें कई किसान भी फंस गए हैंपटवारी संघ के अध्यक्ष जागेश्वर पीपरे का कहना है कि कलेक्टर से मुलाकात कर उन्होंने कहा कि ये गलती पटवारियों की नहीं बल्कि व्यवस्था की लापरवाही है। उन्होंने बताया कि जब तक सिकमीनामे की हार्ड कापी नहीं मिलेगी तब तक हम कैसे मालूम होगा। तहसील कार्यालय में सिकमी नामे की एक कॉपी होना चाहिए था, पर जब से सिकमी नामा अधिनियम बना है तब से लेकर आज तक एक कॉपी भी नहीं है। पटवारियों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में हम लगे हुए थे, इसके बाद भी हमने कार्रवाई गलत नहीं है। कलेक्टर ने मामले पर कहा जबलपुर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने मामले पर कहा कि पटवारियों ने मुझसे मुलाकात कर बताया कि चुनाव ड्यूटी के कारण कुछ काम छूट गया था, वहीं यह भी देखा गया है कि पटवारियों को जानकारी देने में भी कुछ गलती हुई है। पटवारियों ने अपनी कुछ मजबूरियां भी बताई है, जिसको देखा जा रहा है। निलंबन को लेकर कलेक्टर ने कहा कि पटवारियों की लापरवाही ये है कि उन्हें जिस सिकमी नामे का वेरिफिकेशन नहीं करना था, उसका भी करके पास कर दिया गया है।

सरकार ने दो जिलों के कलेक्टर और एक जिले के पुलिस अधीक्षक को बदला

दीपक सक्सेना जबलपुर, शीतला पटले नरसिंहपुर की कलेक्टर बनी।आईपीएस अखिल पटेल पुलिस अधीक्षक जिला डिंडोरी बनाए गए। संतोष सिंह तोमर भोपाल। मप्र की मोहन सरकार ने दो जिलों के कलेक्टर बदले हैं। जबकि एक जिले में नए पुलिस अधीक्षक की भी नियुक्ति की है। 2010 बैच के आईएएस दीपक सक्सेना को जबलपुर का कलेक्टर नियुक्त किया गया है। वहीं 2014 बैच की आईएएस शीतला पटले को नरसिंहपुर का नया कलेक्टर बनाया गया है। इसके अलावा 2011 बैच के आईएएस हैं सौरव कुमार सुमन जो कि वर्तमान में जबलपुर कलेक्टर थे। इनको अपर सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही मोहन यादव सरकार ने आईपीएस‌ अखिल पटेल को डिंडोरी का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया है। इससे पहले अखिल पटेल सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर कार्यरत थे। वे 2015 बैच के आईपीएस‌ हैं। यहां गौरतलब है कि तकरीबन सवा साल पहले अनूपपुर कलेक्टर से विवाद के चलते सरकार ने उन्हें एसपी पद से हटा दिया था। प्रदेश सरकार द्वारा गुरुवार को इनके तबादला आदेश जारी कर दिए गये हैं।

हिट एंड रन कानून के विरोध में ड्राइवरों द्वारा चक्का जाम हड़ताल

Chakka jam strike by drivers in protest against hit and run law केंद्र सरकार के तीन कृषि काले कानून के बाद हिट एंड रन कानून के विरोध में ड्राइवरों द्वारा चक्का जाम हड़ताल दिनेश राज शर्मा जबलपुर ! केंद्र सरकार ने तीन कृषि काले कानून के बाद हिट एंड रन कानून के विरोध में गाड़ी चलाको, ड्राइवरों ने चक्का जाम कर हड़ताल पर बाघ्य हुए सरकार ने बिना सोचे समझे मोटर कानून में बदलाव करके चालक से एक्सीडेंट होने पर 10 साल की सजा और 5 लाख का जुर्माना का प्रावधान किया जाना पूर्णतःगलत है कोई भी ड्राइवर या गाड़ी चालक जानबूझकर एक्सीडेंट नहीं करता जब गाड़ी का मालिक गाड़ी का इंश्योरेंस कराकर हर साल 25 से ₹30000 इसलिए चुकता है, कि रिस्क कवर हो गाड़ी का इंश्योरेंस है तो ड्राइवर से 5 लाख का जुर्माना लेने का प्रावधान क्यों किया गया?कांग्रेस पूर्व प्रदेश प्रवक्ता टीकाराम कोष्टा ने सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार ने जो इंश्योरेंस कंपनियों का प्राइवेटीकरण किया है उसको फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से एक तरफा कानून में बदलाव कर गाड़ी मालिक और ड्राइवर का गाड़ी का चक्का जाम के लिए मजबूर किया।कांग्रेस नेता टीकाराम कोष्टा ने कहा कि सोशल मीडिया पर ट्रक ड्राइवर एवं बस चालक सोशल मीडिया पर हड़ताल पर जाने की विगत कई दिनों से चेतावनी दे रहे थे उसके बावजूद शासन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। और आम जनता को पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस की कमी से जूझने के लिए मजबूर कर दिया। अभी तो शुरुआत है शासन प्रशासन से मांग है कि ड्राइवर की मांगों पर तत्काल ध्यान दें । और आम जनता को राहत पहुचाने आवश्यक कदम शीघ्र उठाये।

जबलपुर धान खरीदी घोटाला जिम्मेदार कौन

Who is responsible for Jabalpur paddy purchase scam धान खरीदी में फर्जीवाड़े से नाराज किसानों ने घंटों लगाया जाम उदित नारायणभोपाल ! आज जबलपुर में सैकड़ो किसान धान खरीदी के भुगतान के लिए सड़क पर चक्का जाम कर रहे हैं. जिला प्रशासन की नाक के नीचे हुए धन उपार्जन घोटाले के लिए जबलपुर से लेकर भोपाल तक हड़कंप मचा हुआ है. इस पूरी प्रक्रिया में जिला प्रशासन की लापरवाही सर्वाधिक है, परंतु जिला कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ जयंती सिंह ने सारा ठीकरा जिला फूड कंट्रोलर कमलेश ताडेकर, जिला विष्णन अधिकारी रोहित सिंह बघेल, एमपी वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन डी के हवलदार, सिहोरा ब्रांच मैनेजर बीके पाठक, पाटन ब्रांच मैनेजर आनंद पांडे, शाहपुर ब्रांच मैनेजर ऋतिक सिनाटिया, रिछाई ब्रांच मैनेजर एम.के उपाध्याय को निलंबित किया गया है. कल जिला प्रशासन द्वारा आनन फानन में 36 वेयरहाउस संचालकों को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया. वही प्रदेश शासन ने वेयरहाउसिंग के सहकारिता प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव को ट्रांसफर कर दिया है. हजारों किसानों की फसल की बंदरवाट करने के लिए दोषियों को जिस प्रकार संरक्षण दिया जा रहा है उससे यह स्पष्ट है कि इस पूरे घोटाले को सत्ता पक्ष का संरक्षण प्राप्त है. जमीनी हकीकत यह है कि जिले में धान के उपार्जन के लिए कमेटी के अध्यक्ष जिला कलेक्टर होते हैं. जिला प्रशासन द्वारा उपार्जन केन्द्रो की सूची खरीद के निर्धारित व घोषित तिथि 3 दिसंबर के पूर्व जारी क्यों नहीं की, धान खरीदी के लिए प्रभारी अधिकारी जिला पंचायत सीईओ उपार्जन तिथि से शिकायत की तिथि तक क्या कर रही थी, 36 केन्द्रो व तीन तहसीलों के क्षेत्र में जब उपार्जन का व्योरा तक अपलोड नहीं किया, तो प्रदेश शासन के जिम्मेदार अधिकारी की नींद क्यों नहीं खुली जिला कलेक्टर के द्वारा धान खरीदी जैसे कृषक हित के कार्यों में घनघोर लापरवाही किसके दबाव में की इन सभी सवालों के बीच किसान अपनी फसल के भुगतान के लिए सड़कों पर है. जिला कलेक्टर सारे घोटाले पर पर्दा डालने में सक्रिय है. वेयरहाउसिंग संचालकों को ब्लैक लिस्ट करने के जगह उनके विरुद्ध एफ.आई.आर की कार्यवाही कब तक की जाएगी. हजारों किसानों का यही सवाल है लगभग जबलपुर जिले की 75% उपज पर डाका डालने की साजिश पर खुद को किसान हितैषी बताने वाली भाजपा सरकार के लिए कठिन कार्य साबित होता जा रहा है. “अब देखना यह है कि जन हितैषी भाजपा सरकार दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करतीं हैं या फिर कर्मचारियों की ग़लती मानकर सारे मामले को रफा-दफा करतीं हैं ! साथ ही हितग्राही किसानों को भुगतान कैसे किया जाऐगा ?

जिसका सीएम ने मंच से तबादला किया उसके हाथ जबलपुर का उपार्जन.

The one whose transfer was announced by the Chief Minister, has been assigned to Jabalpur. विशेष संवाददाता, सहारा समाचार, जबलपुर.  जबलपुर धान उपार्जन में मुख्यमंत्री के निर्देश पर फूड कंट्रोलर कमलेश टांडेकर की बर्खास्त्गी के बाद निलंबन का क्रम जारी है।इस सनसनीखेज मामले में लगातार भोपाल स्तर पर कठोर कार्यवाही से हड़कंप मचा हुआ है।इस बीच यह चर्चा भी गर्म है कि उपार्जन समिति के सदस्य होते है उपायुक्त सहकारिता। जब नियमानुसार सहकारी समितियों को केंद्र बनाया जाना था या एक समिति को दो केंद्र दिए जाने थे तो देरी सहकारिता विभाग से हुई है।उपार्जन और कमीशन से सहकारी समितियों के आर्थिक हित जुड़े होते है।अब फूड कंट्रोलर के सस्पेंड होने के बाद दो केंद्र बनाने की कार्यवाही हो रही जबकि सहकारिता विभाग को शुरू से ही सहकारी संस्थाओं को आगे बढ़ाना था।सहकारी संस्थाओं को केंद्र बनाने के प्रस्ताव तो सहकारिता विभाग की होती है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान उपायुक्त सहकारिता निगम उपार्जन में गड़बड़ी के चलते केवलारी विधायक के तत्कालीन मुखमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मंच से सिवनी से भोपाल ट्रांसफर किए गए थे।जबलपुर का घोटाला सहकारिता विभाग की शिथिलता का मामला है।ऐसी नव निर्मित संस्थाओं को उपार्जन दिया गया है जिनके कार्यालय और निर्वाचन की जानकारी भी नही मिलती।अखिलेश निगम की भूमिका की जांच होनी चाहिए।इस संबंध में कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ठ के शिव चौबे ने जिला कलेक्टर को संबोधित एक ज्ञापन बुधवार को संयुक्त आयुक्त सहकारिता को सौंपा।उन्होंने आयुक्त सहकारिता और प्रमुख सचिव से उचित कार्यवाही की मांग की है।

ग्वालियर, जबलपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारी

Preparation to implement police commissioner system in Gwalior, Jabalpur, decision may be taken in January भोपाल ! प्रदेश में भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने के बाद राज्य सरकार जल्द ही जबलपुर और ग्वालियर में भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करेगी। गृह विभाग ने इसके संकेत दिए हैं कि इस मामले में जनवरी में ही सरकार निर्णय ले सकती है। उधर दोनों ही जिलों के पुलिस अधीक्षक को भी मैसेज किया गया है कि सरकार इसको लेकर जल्द फैसला करेगी। साथ ही आवश्यक जानकारी लेने का काम भी जिलों से शुरू किया गया है। बीजेपी के संकल्प पत्र 2023 में ग्वालियर और जबलपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की बात कही गई है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों के साथ हुई पहली बैठक में साफ कहा है कि संकल्प पत्र का हर वादा पूरा करना है और इसके लिए सभी विभागों से सात दिन में आवश्यक कार्ययोजना तैयार कर सीएम सचिवालय में देने के लिए कहा गया था। सूत्रों का कहना है कि वैसे तो संकल्प पत्र में पुलिस कमिश्नर प्रणाली सरकार बनने के बाद दो साल में लागू करने के लिए कहा गया है लेकिन इसके लिए किसी तरह के अतिरिक्त बजट की जरूरत नहीं है। इसलिए संकल्प पत्र को लेकर सीएम यादव द्वारा दिए गए निर्देश के बाद माना जा रहा था कि इस पर शीघ्र फैसला होगा। अब गृह विभाग ने इसको लेकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर ट्वीट भी किया है। इसमें कहा गया है कि मोदी की गारंटी यानी गारंटी पूरी होने की गारंटी, हर नागरिक की सुरक्षा का संकल्प है। जल्द ही ग्वालियर और जबलपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होगी। इस ट्वीट के बाद यह माना जा रहा है कि मोहन यादव सरकार लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के पहले इन दोनों ही जिलों में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू कर सकती है।

धान उपार्जन में लापरवाही एक और अफसर पर पड़ी भारी: जबलपुर के प्रभारी फूड कंट्रोलर के बाद अब प्रबंधक व जिला विपणन अधिकारी भी सस्पेंड

Negligence in paddy procurement fell heavily on another officer: After the food controller in-charge of Jabalpur, now the manager and district marketing officer are also suspended. सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। उदित नारायण भोपाल ! राज्य शासन ने जिला विपणन अधिकारी और मंडल प्रबंधक जबलपुर रोहित सिंह बघेल को भी सस्पेंड कर दिया है। यह कार्यवाही मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक आलोक कुमार सिंह ने की है। प्रबंध संचालक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए जारी नीति के अनुसार धान उपार्जन का कार्य नहीं कराया गया है। अधिकारी की लापरवाही के चलते शासन के समक्ष संघ की छवि धूमिल हुई है। इसलिए बघेल को जिम्मेदार मानते हुए उन्हें सस्पेंड किया गया है। निलंबन अवधि में बघेल का मुख्यालय विपणन संघ भोपाल तय किया गया है। मंगलवार को प्रभारी फूड कंट्रोलर हुए थे सस्पेंड इससे पहले मंगलवार को खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया था। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है। आदेश में कहा था कि जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। राज्य शासन ने जबलपुर के फूड कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया है। मोहन यादव कैबिनेट के गठन के बाद शासकीय काम में लापरवाही के मामले में की गई यह पहली कार्रवाई है। खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया है। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है।विभाग के अनुसार खरीफ सीजन में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने के लिए जारी की गई नीति के मुताबिक ई-उपार्जन पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों से एक दिसंबर 2023 तक उपार्जन कार्य कराया जाना था। इसके लिए सहकारी समितियों के साथ एनआरएलएम में रजिस्टर्ड महिला स्व सहायता समूहों को भी उपार्जन केंद्र के संचालन का काम देने के निर्देश 29 नवंबर को जारी किए गए थे। इसमें जिला उपार्जन समिति के माध्यम से महिला स्व सहायता समूहों को उपार्जन केंद्र की अनुमति का प्रस्ताव खाद्य संचालनालय को भेजा जाना था। जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। इस संबंध में न तो प्रभारी फूड कंट्रोलर द्वारा संचालनालय को जानकारी दी गई और न ही स्थानीय स्तर पर जनहित का काम किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। आजीविका समिति की जाँच कराने की माँग कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शित्रकुमार चौबे ने जिले में कुछ आजीविका समितियों का फर्जी तरह से कार्य करने का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि पंजीयन के 6 माह के अंदर समितियों के निर्वाचन के प्रस्ताव चले जाने चाहिए मगर पिछले 2 साल से किसी भी एक समिति का चुनाव प्रस्ताव कार्यालय उपायुक्त सहकारिता से नहीं गया है। नियम तो यह भी है कि यदि निर्वाचन नहीं होता है तो तत्काल विभाग को किसी शासकीय कर्मचारी को प्रशासक बना देना चाहिए, मगर कार्यालय के स्तर पर इस तरह की भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इन्हें क्यों छोड़ा गया धान खरीदी की जाँच का जिम्मा तमाम एसडीएम को दिया गया था, खाद्य विभाग के अधिकारी भी इसमें शामिल थे, वहीं वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और मार्कफेड के अधिकारियों का कहीं जिक्र तक नहीं किया जा रहा है। डिप्टी कलेक्टर, अपर कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत भी खरीदी केन्द्र की जाँच के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन 1 दिसम्बर से अभी तक केवल लोकायुक्त ने ईमानदारी से कार्य किया और रिश्वत लेते कम्प्यूटर ऑपरेटर को पकड़ा, बाकी किसी ने भी किसी केन्द्र में कोई जाँच नहीं की। सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। रातों-रात गायब हुई धान जानकारों का कहना है कि जैसे ही वेयरहाउस संचालकों को यह पता चला कि जाँच दल आ रहा है तत्काल ही बिना अनुमति खरीदी करने वाले वेयरहाउसों से धान को गायब करवाया गया। यहाँ तक की कई वेयरहाउसों में जाँच दल पहुँच भी गया था लेकिन एप्रोच लगाकर जाँच दल को रोका गया और उनकी मौजूदगी में ही धान गायब करवाई गई। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि सरकारी बारदानों यानी बोरों में बिना अनुमति खरीदी हुई, यह कैसे हुआ कोई बताने तैयार नहीं। रातभर बाहर किया धान, फिर भी अंदर रखा मिला 30 हजार क्विंटल प्रमुख सचिव … Read more

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