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धार्मिक आस्था और आधुनिक अधोसंरचना का अद्भुत संगम — भैरव मंदिर, गूढ़ (रीवा) का भव्य लोकार्पण

A wonderful confluence of religious faith and modern infrastructure – Grand inauguration of Bhairav Temple, Gudh (Rewa) जितेन्द्र श्रीवास्तव विशेष संवाददाता  जबलपुर। धार्मिक श्रद्धा, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक वास्तुकला के सुंदर समन्वय का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए आज गूढ़ स्थित भैरव मंदिर परिसर का भव्य लोकार्पण माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। यह अवसर न केवल क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण रहा, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था के नए केंद्र की स्थापना का ऐतिहासिक दिन भी बना। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह मंदिर परिसर केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने इसे प्रदेश की धार्मिक पर्यटन संभावनाओं को सशक्त बनाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। परंपरा और आधुनिकता का संतुलित स्वरूप मंदिर परिसर की संपूर्ण वास्तु संकल्पना प्रसिद्ध आर्किटेक्ट आशीष श्रीवास्तव द्वारा तैयार की गई है। उनके डिज़ाइन में पारंपरिक मंदिर वास्तुकला की गरिमा और आधुनिक सुविधाओं का उत्कृष्ट संतुलन देखने को मिलता है। भव्य शिल्पकला, विस्तृत प्रांगण, सुव्यवस्थित मार्ग, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक व्यवस्था और सौंदर्यपूर्ण प्रकाश व्यवस्था इस परिसर को विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। आर्किटेक्ट श्रीवास्तव ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि एक ऐसा आध्यात्मिक एवं सामाजिक केंद्र विकसित करना था जहाँ लोग शांति, संस्कृति और सामुदायिक जुड़ाव का अनुभव कर सकें। आस्था से सामाजिक समरसता तक भैरव मंदिर परिसर आने वाले समय में धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक आयोजनों, आध्यात्मिक प्रवचनों तथा सामुदायिक कार्यक्रमों का प्रमुख स्थल बनने की दिशा में अग्रसर है। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के विकास और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला कदम बताया। आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्थल यह नव-निर्मित परिसर केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता का प्रेरक प्रतीक सिद्ध होगा। भव्यता, आध्यात्मिकता और आधुनिक दृष्टिकोण का यह संगम रीवा जिले को धार्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान देने जा रहा है।

सहकारिता विभाग में स्थापना कक्ष में संजीव गुप्ता के नेतृत्व में कार्य कर रहा सिंडिकेट

Work is going on in the Establishment Room in the Establishment Department under the leadership of Sanjeev Gupta. विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव सहकारिता विभाग में विभागीय कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी जिसके माध्यम से क्लर्क पद पर कार्यरत कर्मचारी सहकारी निरीक्षक बनाए गए थे।इस परीक्षा को कराने से लेकर मूल्यांकन परिणाम और कर्मचारियों के चयन को लेकर विभागीय कमेटी भी बनी थी।किंतु मुख्य रूप से यह कार्य स्थापना कक्ष का था ।स्थापना अधीक्षक संजीव गुप्ता के चहेते क्लर्क सौरभ राजपूत को इस परीक्षा में निर्धारित 100 में से 90 अंक मिल जाते है।परीक्षा का स्तर भी बेहद साधारण था सरल प्रश्न पूछे गए थे।मूल्यांकन करने वालों ने चिन्हित लोगों को उदारता पूर्वक नंबर दिए।नतीजतन सौरभ राजपूत जैसे लोग सहकारी निरीक्षक बन गए।सौरभ राजपूत को पूर्व पंजीयक मनोज सरेयाम द्वारा संदिग्ध कार्य प्रणाली के कारण कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जा चुका है।स्थापना कक्ष में संजीव गुप्ता के सिंडिकेट के मुख्य गुर्गे के रूप में काम करने वाले सौरभ राजपूत की फाइल कारण बताओ के बाद दबा दी गई।फाइलों को दबा देने की शैली सहकारिता विभाग में बहुत पुरानी है।वर्षों से जमे संजीव गुप्ता का लेन देन करने वाले सौरभ राजपूत एक अकेला उदाहरण नहीं है गिरोह बनाकर संजीव गुप्ता स्थापना कक्ष में कार्य कर रहा है।स्वयं संजीव गुप्ता के संबंध में पूर्व पंजीयक आलोक सिंह साहब ने एस बी आई हाउसिंग समिति में इसके विरुद्ध अंकित किया था सस्पेंड किया जाय ।मगर उसकी फाइल भी दबा दी जा चुकी है।स्थापना उपायुक्त और संयुक्त आयुक्त आखिर क्यों पूर्व पंजीयक सहकारिता के आदेशों की अवहेलना कर रहे है यह चर्चा का विषय बना हुआ है।प्रदेश के जिलों में कार्यरत कर्मचारियों की वेतन वृद्धि रोकने पदोन्नति रोकने लेन देन के उपरांत लोगों को उपकृत करने का यह खेल दस सालों से चल रहा है।सूत्रों के अनुसार वर्तमान पंजीयक एवं आयुक्त सहकारिता मनोज पुष्प को इसकी भनक लग चुकी है और वे जल्दी ही बड़ी कार्यवाही करने वाले है।सहकारिता विभाग में प्रशासनिक लापरवाही और आदेशों की अवहेलना का गंभीर मामला सामने आया है। सहकारी निरीक्षक मुख्यालय श्री सौरभ राजपूत (दस्तावेज़ानुसार नाम) के विरुद्ध संयुक्त आयुक्त सहकारिता (प्रशासन) मुख्यालय द्वारा औपचारिक आरोप पत्र एवं आरोप विवरण पत्र जारी कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आरोप पत्र के अनुसार 3 मई 2024 को कार्यालयीन आदेश के तहत श्री राजपूत का प्रशासन शाखा से अंकेक्षण शाखा में स्थानांतरण किया गया था। इसके बावजूद उन्हें निर्देशित किया गया था कि वे समस्त निस्तारित प्रकरणों का चार्ज एवं अभिलेख तत्काल संबंधित अधिकारियों को सौंपें, लेकिन बार-बार निर्देशों के बावजूद उन्होंने न तो अभिलेख सौंपे और न ही चार्ज ट्रांसफर किया। सूत्रों के मुताबिक 25 सितंबर 2024 को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया, फिर भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पुनः निर्देश दिए गए कि श्रीमती राखी राठौर (सहायक ग्रेड-03) तथा बाद में श्री अजय सिंह को समस्त अभिलेख और प्रकरण सौंपे जाएं, लेकिन यह प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई। दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि इस लापरवाही के कारण प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए और डिजिटल अभिलेखों व शासकीय निस्तारण कार्यों में हेर-फेर व छेड़छाड़ की आशंका भी सामने आई है। इससे कार्यालयीन व्यवस्था और कार्य संचालन पर प्रतिकूल असर पड़ा। विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि संबंधित अधिकारी द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही, उदासीनता एवं स्वेच्छाचारिता बरती गई, जो कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-03 का स्पष्ट उल्लंघन है। इस आधार पर प्रकरण को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत दंडनीय माना गया है। अब संबंधित अधिकारी को निर्धारित समय सीमा में अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो उनके विरुद्ध आगे की कड़ी विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है। यह मामला सहकारिता विभाग में प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

फाइलें नहीं सौंपी, आदेशों की अवहेलना: सहकारी निरीक्षक मुख्यालय पर अनुशासनात्मक कार्रवाई, आरोप पत्र जारी

Files not handed over, orders disobeyed: Disciplinary action against Cooperative Inspector Headquarters, charge sheet issued विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव सहकारिता विभाग में विभागीय कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी जिसके माध्यम से क्लर्क पद पर कार्यरत कर्मचारी सहकारी निरीक्षक बनाए गए थे।इस परीक्षा को कराने से लेकर मूल्यांकन परिणाम और कर्मचारियों के चयन को लेकर विभागीय कमेटी भी बनी थी।किंतु मुख्य रूप से यह कार्य स्थापना कक्ष का था ।स्थापना अधीक्षक संजीव गुप्ता के चहेते क्लर्क सौरभ राजपूत को इस परीक्षा में निर्धारित 100 में से 90 अंक मिल जाते है।परीक्षा का स्तर भी बेहद साधारण था सरल प्रश्न पूछे गए थे।मूल्यांकन करने वालों ने चिन्हित लोगों को उदारता पूर्वक नंबर दिए।नतीजतन सौरभ राजपूत जैसे लोग सहकारी निरीक्षक बन गए।सौरभ राजपूत को पूर्व पंजीयक मनोज सरेयाम द्वारा संदिग्ध कार्य प्रणाली के कारण कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जा चुका है।स्थापना कक्ष में संजीव गुप्ता के सिंडिकेट के मुख्य गुर्गे के रूप में काम करने वाले सौरभ राजपूत की फाइल कारण बताओ के बाद दबा दी गई।फाइलों को दबा देने की शैली सहकारिता विभाग में बहुत पुरानी है।वर्षों से जमे संजीव गुप्ता का लेन देन करने वाले सौरभ राजपूत एक अकेला उदाहरण नहीं है गिरोह बनाकर संजीव गुप्ता स्थापना कक्ष में कार्य कर रहा है।स्वयं संजीव गुप्ता के संबंध में पूर्व पंजीयक आलोक सिंह साहब ने एस बी आई हाउसिंग समिति में इसके विरुद्ध अंकित किया था सस्पेंड किया जाय ।मगर उसकी फाइल भी दबा दी जा चुकी है।स्थापना उपायुक्त और संयुक्त आयुक्त आखिर क्यों पूर्व पंजीयक सहकारिता के आदेशों की अवहेलना कर रहे है यह चर्चा का विषय बना हुआ है।प्रदेश के जिलों में कार्यरत कर्मचारियों की वेतन वृद्धि रोकने पदोन्नति रोकने लेन देन के उपरांत लोगों को उपकृत करने का यह खेल दस सालों से चल रहा है।सूत्रों के अनुसार वर्तमान पंजीयक एवं आयुक्त सहकारिता मनोज पुष्प को इसकी भनक लग चुकी है और वे जल्दी ही बड़ी कार्यवाही करने वाले है। सहकारिता विभाग में प्रशासनिक लापरवाही और आदेशों की अवहेलना का गंभीर मामला सामने आया है। सहकारी निरीक्षक मुख्यालय श्री सौरभ राजपूत (दस्तावेज़ानुसार नाम) के विरुद्ध संयुक्त आयुक्त सहकारिता (प्रशासन) मुख्यालय द्वारा औपचारिक आरोप पत्र एवं आरोप विवरण पत्र जारी कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आरोप पत्र के अनुसार 3 मई 2024 को कार्यालयीन आदेश के तहत श्री राजपूत का प्रशासन शाखा से अंकेक्षण शाखा में स्थानांतरण किया गया था। इसके बावजूद उन्हें निर्देशित किया गया था कि वे समस्त निस्तारित प्रकरणों का चार्ज एवं अभिलेख तत्काल संबंधित अधिकारियों को सौंपें, लेकिन बार-बार निर्देशों के बावजूद उन्होंने न तो अभिलेख सौंपे और न ही चार्ज ट्रांसफर किया। सूत्रों के मुताबिक 25 सितंबर 2024 को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया, फिर भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पुनः निर्देश दिए गए कि श्रीमती राखी राठौर (सहायक ग्रेड-03) तथा बाद में श्री अजय सिंह को समस्त अभिलेख और प्रकरण सौंपे जाएं, लेकिन यह प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई। दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि इस लापरवाही के कारण प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए और डिजिटल अभिलेखों व शासकीय निस्तारण कार्यों में हेर-फेर व छेड़छाड़ की आशंका भी सामने आई है। इससे कार्यालयीन व्यवस्था और कार्य संचालन पर प्रतिकूल असर पड़ा। विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि संबंधित अधिकारी द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही, उदासीनता एवं स्वेच्छाचारिता बरती गई, जो कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-03 का स्पष्ट उल्लंघन है। इस आधार पर प्रकरण को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत दंडनीय माना गया है। अब संबंधित अधिकारी को निर्धारित समय सीमा में अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो उनके विरुद्ध आगे की कड़ी विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है। यह मामला सहकारिता विभाग में प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

इंडो इंटरनेशनल इंटेलेक्चुअल कॉन्क्लेव 2026 में वरिष्ठ आर्किटेक्ट आशीष श्रीवास्तव को मानद डॉक्टरेट से सम्मान

Senior Architect Ashish Srivastava Conferred Honorary Doctorate at Indo International Intellectual Conclave 2026 जितेन्द्र श्रीवास्तव विशेष संवाददाता  जबलपुर। इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में 11 जनवरी 2026 को आयोजित इंडो इंटरनेशनल इंटेलेक्चुअल कॉन्क्लेव 2026 के अंतर्गत हुए फेलोशिप एवं फैलीसिटेशन कॉन्क्लेव में वरिष्ठ आर्किटेक्ट आशीष श्रीवास्तव को वास्तुकला (आर्किटेक्चर) के क्षेत्र में उनके विशिष्ट, नवोन्मेषी एवं दीर्घकालीन योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें सतत एवं हरित वास्तुकला भूकंपरोधी भवन डिज़ाइन, तथा सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया। समारोह में वक्ताओं ने कहा कि आशीष श्रीवास्तव का कार्य न केवल भारतीय वास्तुकला को नई दिशा देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के वास्तुविदों के लिए प्रेरणास्रोत भी है। यह मानद उपाधि उनके पेशेवर कौशल, सामाजिक दायित्वबोध और राष्ट्र निर्माण में योगदान का प्रतीक है। कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते हुए मुख्य अतिथि महामहिम श्रीमती शीला बप्पू (भारत में मॉरिशस की उच्चायुक्त) तथा डॉ. ट्रांजियर वशिष्ठ (पीस एंड स्पोर्ट्स काउंसलर, अफगानिस्तान – इंडिया) उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता माननीय न्यायमूर्ति राजेश टंडन (पूर्व न्यायाधीश, उच्च न्यायालय, उत्तराखंड) ने की। विशिष्ट अतिथियों में राधेश्याम मिश्रा (IAS, पूर्व राजस्व सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार) महामहिम श्रीमती हरीशोआ लालतियाना अंकुश (माननीय उच्चायुक्त, सेशेल्स उच्चायोग, भारत), माननीय मुखेश्वर छोनी (पूर्व उच्चायुक्त, मॉरिशस), सुश्री स्वाति मालीवाल (सांसद, राज्यसभा) तथा डॉ. अभिषेक वर्मा (NDA) शामिल रहे। समारोह में देश-विदेश से आए बुद्धिजीवियों, विशेषज्ञों और गणमान्य अतिथियों ने आशीष श्रीवास्तव के योगदान की सराहना करते हुए इसे भारतीय वास्तुकला के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।

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