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जबलपुर: दमोह नाका स्थित चौकसे यात्री निवास होटल में पुलिस का छापा, देह शोषण और असामाजिक गतिविधियों का खुलासा

Jabalpur: Police raid at Chaukse Yatri Niwas Hotel located at Damoh Naka, जितेन्द्र श्रीवास्तव (विशेष संवाददाता) जबलपुर । दमोह नाका स्थित चौकसे यात्री निवास होटल में पुलिस ने एक बड़ा ऑपरेशन चलाया, जहां देह शोषण और असामाजिक गतिविधियों का अड्डा चल रहा था। इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने होटल से पांच युवक-युवतियों और कई दलालों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, होटल में देह शोषण के कई मामले चल रहे थे, और यह स्थान अवैध गतिविधियों के लिए जाना जाता था।  पुलिस ने होटल पर छापेमारी के बाद देह शोषण और अन्य अपराधों को लेकर एक मामला दर्ज किया और दंडात्मक कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपियों में कुछ दलाल भी शामिल हैं, जो युवाओं और युवतियों को इस अवैध गतिविधि में शामिल कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई इलाके में असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने और समाज में सुरक्षा का माहौल बनाने के लिए की गई है।  पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस छापेमारी के दौरान होटल के भीतर कई संदिग्ध गतिविधियाँ पाई गईं और वहां मौजूद लोगों से पूछताछ के बाद यह साफ हो गया कि यह स्थान देह व्यापार और अन्य अवैध कार्यों का केंद्र बन चुका था। पुलिस ने अब सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की योजना बनाई है।  इस मामले के बाद स्थानीय समुदाय में भी चिंता का माहौल है, और पुलिस प्रशासन से ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद की जा रही है।

शिक्षा माफिया पर बड़ा एक्शन: जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के मालिक और समिति सचिव गिरफ्तार

Big action on education mafia: Joy Senior Secondary School owner and committee secretary arrested जबलपुर: मध्यप्रदेश में शिक्षा माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने एक और बड़े निजी स्कूल पर शिकंजा कसा है। शहर के प्रतिष्ठित जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के मालिक और समिति सचिव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई को जबलपुर जिला प्रशासन और पुलिस ने मिलकर अंजाम दिया, जिसमें स्कूल द्वारा मनमानी फीस वृद्धि और अन्य अनियमितताओं का पर्दाफाश किया गया। प्रशासन की सख्त कार्रवाई जबलपुर के कलेक्टर दीपक सक्सेना ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि के खिलाफ यह बड़ा कदम उठाया है। जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के खिलाफ विजय नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई, जिसके आधार पर जॉय एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष अखिलेश मेबिन और सचिव अनुराग श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया है। फीस जांच समिति का बड़ा खुलासा स्कूल फीस जांच समिति द्वारा की गई जांच में पाया गया कि 2017-18 से अब तक स्कूल ने अभिभावकों से 25 करोड़ 21 लाख रुपये से अधिक की अतिरिक्त फीस वसूली की है। यह फीस स्कूल प्रबंधन द्वारा व्यक्तिगत भोग-विलास के लिए इस्तेमाल की गई। इस अतिरिक्त आय का उपयोग लक्जरी वाहनों की खरीद और दुबई ट्रिप जैसे महंगे शौक पूरा करने में किया गया। फर्जी जानकारी और दबाव बनाने का आरोप जांच में यह भी सामने आया कि स्कूल द्वारा ऑडिट रिपोर्ट में झूठी जानकारी दी गई थी। इसके अलावा, स्कूल प्रबंधन ने जानबूझकर विद्यार्थियों के स्कूल बैग का वजन बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पुस्तकों की खरीद का दबाव डाला। साथ ही, फर्जी ISBN नंबर वाली किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों पर भी दबाव बनाया गया। अभिभावकों को अतिरिक्त फीस लौटाने का निर्देश प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वह अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस करे। जबलपुर के जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी और एडिशनल एसपी आनंद कलादगी ने यह जानकारी दी। शिक्षा माफिया पर प्रशासन की मुहिम यह कार्रवाई प्रदेश में शिक्षा माफिया के खिलाफ प्रशासन की मुहिम का हिस्सा है। इससे पहले भी कई निजी स्कूलों पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है, जिससे शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जिम्मेदारी को बढ़ावा मिल सके। जबलपुर में जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल पर की गई इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि राज्य सरकार और प्रशासन शिक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कदम उठा रहे हैं। यह कदम न केवल शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए भी एक सशक्त संदेश है।

जबलपुर: गोहलपुर में आग ने लॉज को किया तबाह, लोग हुए परेशान

Jabalpur: Fire destroys lodge in Gohalpur, people get worried जीतेन्द्र श्रीवास्तवजबलपुर ! जबलपुर में देर रात एक लॉज में आग लगने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलने के पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग लगने के बाद आस-पास के घरों से लोग घबराकर बाहर निकल आए थे। दशहरा पर्व के उल्लास के बीच शनिवार-रविवार दरमियानी रात करीब 3:15 बजे गोहलपुर क्षेत्र में स्थित एक लॉज में आग लगने से क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई। आग की कुर्ती उठती लगता देख आसपास रहने वालों मे अफरा-तफरी मच गई और वह घरों से निकलकर बाहर आ गए। तत्काल ही लॉज में आग लगने की सूचना नगर निगम के दमकल भाग को दी गई। इसकी जानकारी लगते ही मौके पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंची। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने आग पर काबू पाया। आग से लॉज के पर्दे, फर्नीचर सहित अन्य सामान जलकर खाक हो गया। एक घंटे की मशक्कत के बाद बुझी आग दमकल कर्मियों के मुताबिक तकरीबन 3:15 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। तत्काल ही एक बड़ा दमकल वाहन रवाना किया गया। आग तेजी से फैल रही थी, धुआं उठ रहा था। लगभग लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। दमकल विभाग के मुताबिक फिलहाल आग लगने की वजह शार्ट सर्किट बताई जा रही है। लॉज अजय पटेल का बताया जा रहा हैं।

जिसका सीएम ने मंच से तबादला किया उसके हाथ जबलपुर का उपार्जन.

The one whose transfer was announced by the Chief Minister, has been assigned to Jabalpur. विशेष संवाददाता, सहारा समाचार, जबलपुर.  जबलपुर धान उपार्जन में मुख्यमंत्री के निर्देश पर फूड कंट्रोलर कमलेश टांडेकर की बर्खास्त्गी के बाद निलंबन का क्रम जारी है।इस सनसनीखेज मामले में लगातार भोपाल स्तर पर कठोर कार्यवाही से हड़कंप मचा हुआ है।इस बीच यह चर्चा भी गर्म है कि उपार्जन समिति के सदस्य होते है उपायुक्त सहकारिता। जब नियमानुसार सहकारी समितियों को केंद्र बनाया जाना था या एक समिति को दो केंद्र दिए जाने थे तो देरी सहकारिता विभाग से हुई है।उपार्जन और कमीशन से सहकारी समितियों के आर्थिक हित जुड़े होते है।अब फूड कंट्रोलर के सस्पेंड होने के बाद दो केंद्र बनाने की कार्यवाही हो रही जबकि सहकारिता विभाग को शुरू से ही सहकारी संस्थाओं को आगे बढ़ाना था।सहकारी संस्थाओं को केंद्र बनाने के प्रस्ताव तो सहकारिता विभाग की होती है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान उपायुक्त सहकारिता निगम उपार्जन में गड़बड़ी के चलते केवलारी विधायक के तत्कालीन मुखमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मंच से सिवनी से भोपाल ट्रांसफर किए गए थे।जबलपुर का घोटाला सहकारिता विभाग की शिथिलता का मामला है।ऐसी नव निर्मित संस्थाओं को उपार्जन दिया गया है जिनके कार्यालय और निर्वाचन की जानकारी भी नही मिलती।अखिलेश निगम की भूमिका की जांच होनी चाहिए।इस संबंध में कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ठ के शिव चौबे ने जिला कलेक्टर को संबोधित एक ज्ञापन बुधवार को संयुक्त आयुक्त सहकारिता को सौंपा।उन्होंने आयुक्त सहकारिता और प्रमुख सचिव से उचित कार्यवाही की मांग की है।

ग्वालियर, जबलपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारी

Preparation to implement police commissioner system in Gwalior, Jabalpur, decision may be taken in January भोपाल ! प्रदेश में भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने के बाद राज्य सरकार जल्द ही जबलपुर और ग्वालियर में भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करेगी। गृह विभाग ने इसके संकेत दिए हैं कि इस मामले में जनवरी में ही सरकार निर्णय ले सकती है। उधर दोनों ही जिलों के पुलिस अधीक्षक को भी मैसेज किया गया है कि सरकार इसको लेकर जल्द फैसला करेगी। साथ ही आवश्यक जानकारी लेने का काम भी जिलों से शुरू किया गया है। बीजेपी के संकल्प पत्र 2023 में ग्वालियर और जबलपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की बात कही गई है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों के साथ हुई पहली बैठक में साफ कहा है कि संकल्प पत्र का हर वादा पूरा करना है और इसके लिए सभी विभागों से सात दिन में आवश्यक कार्ययोजना तैयार कर सीएम सचिवालय में देने के लिए कहा गया था। सूत्रों का कहना है कि वैसे तो संकल्प पत्र में पुलिस कमिश्नर प्रणाली सरकार बनने के बाद दो साल में लागू करने के लिए कहा गया है लेकिन इसके लिए किसी तरह के अतिरिक्त बजट की जरूरत नहीं है। इसलिए संकल्प पत्र को लेकर सीएम यादव द्वारा दिए गए निर्देश के बाद माना जा रहा था कि इस पर शीघ्र फैसला होगा। अब गृह विभाग ने इसको लेकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर ट्वीट भी किया है। इसमें कहा गया है कि मोदी की गारंटी यानी गारंटी पूरी होने की गारंटी, हर नागरिक की सुरक्षा का संकल्प है। जल्द ही ग्वालियर और जबलपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होगी। इस ट्वीट के बाद यह माना जा रहा है कि मोहन यादव सरकार लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के पहले इन दोनों ही जिलों में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू कर सकती है।

धान उपार्जन में लापरवाही एक और अफसर पर पड़ी भारी: जबलपुर के प्रभारी फूड कंट्रोलर के बाद अब प्रबंधक व जिला विपणन अधिकारी भी सस्पेंड

Negligence in paddy procurement fell heavily on another officer: After the food controller in-charge of Jabalpur, now the manager and district marketing officer are also suspended. सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। उदित नारायण भोपाल ! राज्य शासन ने जिला विपणन अधिकारी और मंडल प्रबंधक जबलपुर रोहित सिंह बघेल को भी सस्पेंड कर दिया है। यह कार्यवाही मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक आलोक कुमार सिंह ने की है। प्रबंध संचालक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए जारी नीति के अनुसार धान उपार्जन का कार्य नहीं कराया गया है। अधिकारी की लापरवाही के चलते शासन के समक्ष संघ की छवि धूमिल हुई है। इसलिए बघेल को जिम्मेदार मानते हुए उन्हें सस्पेंड किया गया है। निलंबन अवधि में बघेल का मुख्यालय विपणन संघ भोपाल तय किया गया है। मंगलवार को प्रभारी फूड कंट्रोलर हुए थे सस्पेंड इससे पहले मंगलवार को खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया था। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है। आदेश में कहा था कि जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। राज्य शासन ने जबलपुर के फूड कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया है। मोहन यादव कैबिनेट के गठन के बाद शासकीय काम में लापरवाही के मामले में की गई यह पहली कार्रवाई है। खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया है। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है।विभाग के अनुसार खरीफ सीजन में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने के लिए जारी की गई नीति के मुताबिक ई-उपार्जन पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों से एक दिसंबर 2023 तक उपार्जन कार्य कराया जाना था। इसके लिए सहकारी समितियों के साथ एनआरएलएम में रजिस्टर्ड महिला स्व सहायता समूहों को भी उपार्जन केंद्र के संचालन का काम देने के निर्देश 29 नवंबर को जारी किए गए थे। इसमें जिला उपार्जन समिति के माध्यम से महिला स्व सहायता समूहों को उपार्जन केंद्र की अनुमति का प्रस्ताव खाद्य संचालनालय को भेजा जाना था। जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। इस संबंध में न तो प्रभारी फूड कंट्रोलर द्वारा संचालनालय को जानकारी दी गई और न ही स्थानीय स्तर पर जनहित का काम किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। आजीविका समिति की जाँच कराने की माँग कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शित्रकुमार चौबे ने जिले में कुछ आजीविका समितियों का फर्जी तरह से कार्य करने का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि पंजीयन के 6 माह के अंदर समितियों के निर्वाचन के प्रस्ताव चले जाने चाहिए मगर पिछले 2 साल से किसी भी एक समिति का चुनाव प्रस्ताव कार्यालय उपायुक्त सहकारिता से नहीं गया है। नियम तो यह भी है कि यदि निर्वाचन नहीं होता है तो तत्काल विभाग को किसी शासकीय कर्मचारी को प्रशासक बना देना चाहिए, मगर कार्यालय के स्तर पर इस तरह की भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इन्हें क्यों छोड़ा गया धान खरीदी की जाँच का जिम्मा तमाम एसडीएम को दिया गया था, खाद्य विभाग के अधिकारी भी इसमें शामिल थे, वहीं वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और मार्कफेड के अधिकारियों का कहीं जिक्र तक नहीं किया जा रहा है। डिप्टी कलेक्टर, अपर कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत भी खरीदी केन्द्र की जाँच के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन 1 दिसम्बर से अभी तक केवल लोकायुक्त ने ईमानदारी से कार्य किया और रिश्वत लेते कम्प्यूटर ऑपरेटर को पकड़ा, बाकी किसी ने भी किसी केन्द्र में कोई जाँच नहीं की। सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। रातों-रात गायब हुई धान जानकारों का कहना है कि जैसे ही वेयरहाउस संचालकों को यह पता चला कि जाँच दल आ रहा है तत्काल ही बिना अनुमति खरीदी करने वाले वेयरहाउसों से धान को गायब करवाया गया। यहाँ तक की कई वेयरहाउसों में जाँच दल पहुँच भी गया था लेकिन एप्रोच लगाकर जाँच दल को रोका गया और उनकी मौजूदगी में ही धान गायब करवाई गई। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि सरकारी बारदानों यानी बोरों में बिना अनुमति खरीदी हुई, यह कैसे हुआ कोई बताने तैयार नहीं। रातभर बाहर किया धान, फिर भी अंदर रखा मिला 30 हजार क्विंटल प्रमुख सचिव … Read more

सहकारी समिति प्रबंधक को रिश्वत लेते लोकायुक्त ने दबोचा

Lokayukta caught cooperative society manager taking bribe धान तुलाई के नाम पर किसान से रिश्वत ले रहे सहकारी समिति के प्रबंधक को लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने बुधवार को एक होटल से दबोचा। जबलपुर‌‌। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया कि डुमारी लाल यादव पिताश्री रतिराम यादव उम्र 54 वर्ष निवासी ग्राम छत्तरपुर ने लिखित शिकायत दी थी कि वह एवम् उनके पुत्र कृष्ण यादव की लगभग 300 क्विंटल धान सेवा सहकारी संस्था छतरपुर में तौल के लिए रखी गई। धान तुलाई मजदूरी शासन द्वारा देय होती है। उक्त धान की तौल की प्रति क्विंटल ₹35 के हिसाब से सेंटर एवं स्वयं के लिए 5 से ₹10 प्रति क्विंटल की दर से ₹15000 की रिश्वत समिति प्रबंधक पनागर नवल किशोर खंपरिया द्वारा मांग की जा रही है।जिसके शिकायत का सत्यापन कराया गया। मोल भाव पर ₹9000 लेना तय हुआ। जिसके बाद आज बुधवार को वेदांत होटल जबलपुर -कटनी राष्ट्रीय राजमार्ग पर समिति प्रबंधक पनागर नवल किशोर खंपरिया को ₹9000 रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।ट्रैप दल में उप पुलिस अधीक्षक सुरेखा परमार , निरीक्षक भूपेंद्र कुमार दीवान, निरीक्षक कमल सिंह उईके एवं 5 सदस्यीय दल शामिल था।

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