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कैबिनेट से वक्फ बिल को मिली मंजूरी, Parliament में अगले महीने लाएगी सरकार

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट ने वक्फ (संशोधन) बिल में हाल ही में संसदीय समिति द्वारा सुझाए गए बदलावों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद यह बिल बजट सत्र के दूसरे भाग में चर्चा और पारित करने के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार ने अधिकांश बदलावों को शामिल किया है, जिसकी सिफारिश जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने की थी। कैबिनेट ने इसे पिछले सप्ताह भारतीय बंदरगाह विधेयक के साथ मंजूरी दी। इस बिल को सरकार ने अपने विधायी कार्यों की प्राथमिकता सूची में रखा है। विधेयक को अगस्त 2024 में लोकसभा में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू द्वारा पेश किए जाने के बाद संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया था। संसदीय पैनल ने बहुमत से अपनी रिपोर्ट को मंजूरी दी। हालांकि पैनल के सभी 11 विपक्षी दलों के सांसदों ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी और असहमति नोट भी पेश किए थे। 655 पन्नों की यह रिपोर्ट इस महीने दोनों सदनों में प्रस्तुत की गई थी। पैनल ने “वक्फ बाय यूजर” प्रावधान को समाप्त कर दिया है और अब केवल मौजूदा “रजिस्टर्ड वक्फ बाय यूजर” को वक्फ के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव है। इसका मतलब है कि उन मामलों को बाहर रखा जाएगा जिनमें संपत्ति विवादित हैं या सरकारी स्वामित्व में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पैनल ने वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का समर्थन किया है। इसकी संख्या चार तक हो सकती है। जिला कलेक्टरों से विवादों की जांच का अधिकार वरिष्ठ राज्य सरकार के नियुक्त अधिकारियों को सौंपने की सिफारिश की है। राज्य वक्फ बोर्डों में अब मुस्लिम ओबीसी समुदाय से एक सदस्य को शामिल किया जाएगा, जिससे अधिक व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। बता दें कि इससे पहले वक्फ बिल पर जेपीसी रिपोर्ट को फर्जी बताते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि ऐसी फर्जी रिपोर्ट को हम नहीं मानते, सदन इसे कभी नहीं मानेगा. JPC ने 29 जनवरी को दी थी मंजूरी संसदीय समिति ने वक्फ बिल में नए बदलावों पर अपनी रिपोर्ट को 29 जनवरी को मंजूरी दी थी. इस रिपोर्ट के पक्ष में 15 और विरोध में 14 वोट पड़े थे. रिपोर्ट में उन बदलावों को शामिल किया गया है, जो बीजेपी सांसदों ने दिए थे. विपक्षी सांसदों ने वक्फ बोर्डों को खत्म करने की कोशिश बताते हुए असहमति नोट जमा कराए थे. विपक्ष ने वक्फ बिल को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराई थीं. इसके अलावा ‘वक्फ बाय यूजर’ प्रावधान को हटाने के प्रस्ताव का विरोध भी किया था.

वित्त मंत्री सीतारमण ने पेश किया नया आयकर बिल, अब सेलेक्ट कमेटी करेगी समीक्षा, नियमों में क्या होंगे बड़े बदलाव

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने नया इनकम टैक्स बिल 2025 लोकसभा में पेश कर दिया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को इस बिल को पेश करते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से निवेदन किया कि वे इसे सेलेक्ट कमेटी को भेज दें. विपक्षी दलों ने नया इनकम टैक्स बिल पेश किए जाने का विरोध किया, लेकिन सदन ने बिल पेश करने के सरकार के प्रस्ताव को वॉयस वोट से पास कर दिया. नया इनकम टैक्स बिल पुराने इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 की जगह लेगा और इसके जरिये टैक्स से जुड़े पुराने नियमों और परिभाषाओं में कई अहम बदलाव भी किए जाएंगे. समीक्षा के लिए सेलेक्ट कमेटी में जाएगा बिल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा स्पीकर से आग्रह किया कि इस बिल (New Income Tax Bill 2025) को रिव्यू करने के लिए एक सेलेक्ट कमेटी बनाई जाए. यह सेलेक्ट कमेटी नए बिल के प्रावधानों को पढ़ने-समझने और उनकी समीक्षा के बाद अपनी तरफ से जरूरी सुझाव देगी. समिति का उद्देश्य नए बिल के तमाम पहलुओं पर विचार करके उसे और असरदार बनाना होगा और यह लोकसभा के अगले सत्र के पहले दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगी. टैक्स टर्मिनोलॉजी में बड़े बदलाव नए इनकम टैक्स बिल को पेश करने का मुख्य मकसद टैक्स कानूनों को आसान और आधुनिक बनाना है. इसमें कई पुराने शब्दों को बदलकर नए शब्द शामिल किए गए हैं, जिससे टैक्सपेयर्स के लिए नियमों को समझना आसान होगा. मिसाल के तौर पर आकलन वर्ष यानी “असेसमेंट इयर” (Assessment Year) और “पिछले वर्ष” (Previous Year) की जगह अब “टैक्स इयर” (Tax Year) शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे टैक्सपेयर्स को अपने वित्त वर्ष और आकलन वर्ष के बीच के अंतर को समझने में आसानी होगी. इसी तरह नए बिल में “वर्चुअल डिजिटल एसेट” और “इलेक्ट्रॉनिक मोड” जैसी नई शब्दावली (Terminology) जोड़ी गई हैं, जिससे डिजिटल ट्रांजैक्शन और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े प्रावधानों को बेहतर ढंह से समझा जा सकेगा. टोटल इनकम की परिभाषा में सुधार बिल में टोटल इनकम और टैक्सेबल इनकम की परिभाषा को ज्यादा स्पष्ट किया गया है. पुराने कानून में भारतीय निवासियों की ग्लोबल इनकम पर टैक्स लगता था, जबकि गैर-निवासियों पर केवल भारत में हुई कमाई पर ही टैक्स लगाया जाता था. नए बिल में भी यह नियम बरकरार रखा गया है लेकिन “डीम्ड इनकम” यानी संभावित आय की स्पष्ट परिभाषा दी गई है. इसमें कुछ खास व्यक्तियों को किए गए भुगतान को भी टैक्सेबल इनकम में शामिल किया गया है. इससे टैक्सपेयर्स और विदेशी कंपनियों के लिए नियम ज्यादा ट्रांसपेरेंट हो जाएंगे. डिडक्शन और छूट के नियमों में बदलाव नए बिल में टैक्स छूट और कटौतियों (deductions and exemptions) को बेहतर ढंग से पेश किया गया है. पहले इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 के सेक्शन 10 और 80C से 80U के तहत अलग-अलग तरह के टैक्स डिडक्शन और एग्जम्प्शन मौजूद थे. नए इनकम टैक्स बिल में इन सभी को सेक्शन 11 से 154 के तहत रखा गया है और कुछ नई प्रावधान जोड़े गए हैं. यह नए प्रावधान स्टार्टअप, डिजिटल बिजनेस और रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) से जुड़े निवेश को बढ़ावा देने के लिए लाए जा रहे हैं. कैपिटल गेन्स टैक्स में बदलाव कैपिटल गेन्स टैक्स के सेक्शन्स में भी कुछ बदलाव लाए गए हैं. पुराने कानून के तहत कैपिटल गेन्स टैक्स को सेक्शन 45 से सेक्शन 55A के तहत रखा गया था और यह टैक्स, निवेश की अलग-अलग अवधि के आधार पर शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म में बंटा था. साथ ही सिक्योरिटीज या इक्विटी के लिए टैक्स की खास दरें लागू थीं. नए बिल में भी क्लॉज 67 से 91 के तहत यह कैटेगराइजेशन बरकरार रखा गया है, लेकिन वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के लिए अलग से स्पष्ट नियम जोड़े गए हैं. माना जा रहा है कि इससे क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल एसेट्स पर टैक्स लगाने की प्रक्रिया ज्यादा ट्रांसपेरेंट हो जाएगी. नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन्स के लिए नए नियम नए बिल में नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन्स (non-profit organizations) के लिए भी टैक्स से जुड़े नियमों में कुछ बदलाव किए गए हैं. पुराने इनकम टैक्स एक्ट में सेक्शन 11 से 13 के तहत कुछ विशेष कामों के लिए टैक्स में छूट मिलती थी, लेकिन कंप्लायंस के नियम साफ नहीं थे. नए बिल में सेक्शन 332 से 355 के तहत इन संगठनों के लिए टैक्स छूट की परिभाषा को साफ किया गया है. साथ ही इसमें यह भी तय किया गया है कि नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन्स किन शर्तों के तहत बिजनेस एक्टिविटी में शामिल हो सकते हैं और उन्हें टैक्स में छूट कैसे मिलेगी. सरकार का मानना है कि नए टैक्स बिल के जरिये पेश किए जा रहे इन बदलावों से टैक्स से जुड़े नियम आसान होंगे और टैक्स सिस्टम को ज्यादा असरदार बनाया जा सकेगा. नए आयकर कानून में मूल्यांकन वर्ष की अवधारणा होगी समाप्त एक बार कानून बनने के बाद आयकर विधेयक 2025 छह दशक पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा। पहले का कानून समय के साथ और विभिन्न संशोधनों के बाद काफी जटिल हो गया है, इसलिए इसकी जगह नया आयकर विधेयक लाया जा रहा है। सरकार की ओर से प्रस्तावित नए कानून में, आयकर अधिनियम, 1961 में उल्लिखित ‘पिछले वर्ष’ (FY) शब्द को बदलकर ‘कर वर्ष’ कर दिया गया है। इसके साथ ही, मूल्यांकन वर्ष (AY) की अवधारणा को समाप्त कर दिया गया है। नए कानून में कर निर्धारण वर्ष की अवधारणा होगी समाप्त वर्तमान में, पिछले वर्ष (2023-24) में अर्जित आय के लिए, कर का भुगतान निर्धारण वर्ष (2024-25) में किया जाता है। इस नये विधेयक में पिछले वर्ष और निर्धारण वर्ष की अवधारणा को हटा दिया गया है और सरलीकृत विधेयक में केवल कर वर्ष की बात कही गई है। आयकर विधेयक, 2025 में 536 धाराएं शामिल हैं, जो वर्तमान आयकर अधिनियम, 1961 के 298 धाराओं से अधिक हैं। मौजूदा कानून में 14 अनुसूचियां हैं जो नए कानून में बढ़कर 16 हो जाएंगी। पिछले छह दशकों में पुराने आयकर कानून में हुए हैं कई बदलाव हालांकि, नए आयकर विधेयक में भी वर्तमान कानून की तरह ही अध्यायों की संख्या 23 ही रखी गई है। जबकि पृष्ठों की संख्या काफी कम होकर 622 हो गई है, जो वर्तमान के भारी-भरकम अधिनियम का लगभग आधा है। वर्तमान में जो कानून अमल में है, उसमें पिछले छह … Read more

आज पेश हो सकता है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल, लोकसभा की कार्यवाही शुरू

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत हुई। देशभर की निगाहें आज संसद पर टिकी हुई हैं, क्योंकि केंद्र सरकार आज ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पेश कर सकती है। यह बिल देशभर में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल को लेकर देश में चल रही सियासत के बीच भाजपा ने अपने लोकसभा सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। बता दें कि 20 दिसंबर तक संसद का शीतकालीन सत्र है। इससे पहले यह चर्चा चली थी कि सोमवार को लोकसभा में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पेश हो सकता है। हालांकि, सोमवार को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पेश नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि 12 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई थी। कैबिनेट ने दो ड्रॉफ्ट कानूनों को मंजूरी दी थी, इसमें से एक संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से संबंधित है, जबकि दूसरा विधेयक विधानसभाओं वाले तीन केंद्र शासित प्रदेशों के एक साथ चुनाव कराने के संबंध में हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बिल पर आम लोगों की राय भी लेने की योजना है। विचार-विमर्श के दौरान बिल के प्रमुख पहलुओं, इसके फायदे और पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए जरूरी कार्यप्रणाली और चुनावी प्रबंधन पर बातचीत की जाएगी। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से बातचीत की जिम्मेदारी के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अर्जुन राम मेघवाल और किरेन रिजिजू को नियुक्त किया गया है।

विपक्ष का बदस्तूर जारी है हंगामा, लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही स्थगित

नई दिल्ली. संसद के शीतकालीन सत्र का आज छठा दिन है। आज विदेश मंत्री एस जयशंकर लोकसभा को भारत-चीन संबंधों के प्रमुख घटनाक्रमों के बारे में जानकारी देंगे। लोकसभा में कोस्टल शिपिंग, बैंकिंग कानूनों और रेलवे अधिनियम, 1989 में संशोधन से संबंधित विधेयक भी पेश किए जाएंगे। वहीं, दूसरी ओर राज्यसभा में, तेल क्षेत्रों के रेगुलेशन और विकास और विमानों के डिजाइन, निर्माण, उपयोग और बिक्री से संबंधित विधेयक पेश किए जाएंगे। 25 नवंबर को शीतकालीन सत्र शुरू होने के बाद से, मणिपुर अशांति और संभल हिंसा सहित कई मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही ज़्यादातर रद्द ही रही है। 25 नवंबर से शुरू हुआ संसद का शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर को समाप्त होगा। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के लिए प्रस्ताव बांग्लादेश के हालात पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, मैंने अभी बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हो रहे हमलों के खिलाफ ध्यान आकर्षित करने के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव दिया है और मुझे उम्मीद है कि सरकार इसे सुनेगी क्योंकि इस्कॉन मंदिर के प्रमुख बांग्लादेश में गिरफ्तार किया गया है, इसके अलावा भी कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है और सबसे बड़ी बात यह है कि मुझे अभी पता चला है कि कानूनी वीजा होने के बावजूद भी इस्कॉन के पुजारियों को भारत में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है, मुझे लगता है कि वहां नहीं दिया जा सकता है इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण कुछ भी हो, हमें इसके बारे में बात करनी चाहिए।” इंडिया गठबंधन की मीटिंग दोनों सदनों की शुरुआत से पहले इंडिया गठबंधन के फ्लोर नेताओं की कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद भवन कार्यालय में आज बैठक होगी। सांसद राघव चड्ढा ने दिया स्थगन प्रस्ताव नोटिस AAP सांसद राघव चड्ढा ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और चिन्मय कृष्ण दास सहित 3 इस्कॉन पुजारियों की गिरफ्तारी पर चर्चा के लिए राज्यसभा में सस्पेंशन ऑफ बिजनेस नोटिस दायर किया। कांग्रेस सांसदों का स्थगन प्रस्ताव नोटिस कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने संभल हिंसा और अजमेर शरीफ दरगाह याचिका के मुद्दे पर राज्यसभा में सस्पेंशन ऑफ बिजनेस नोटिस दिया। कांग्रेस सांसद मनिकम टैगोर ने अडानी मुद्दे पर चर्चा के लिए लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। डीएमके सांसद ने दिया स्थगन प्रस्ताव नोटिस डीएमके सांसद टीआर बालू ने तमिलनाडु और पुडुचेरी के विल्लुपुरम, कुडालोर, चेंगलपट्टू जिलों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण खड़ी फसलों और संपत्तियों को हुए नुकसान पर चर्चा के लिए लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया। पक्ष द्वारा अडानी मुद्दे, संभल हिंसा और मणिपुर सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा करने की मांग करने और मोदी सरकार द्वारा ऐसा करने से इनकार करने के कारण, दोनों सदनों को पिछले चार सत्रों के लिए समय से पहले स्थगित कर दिया गया था। हालांकि, 29 नवंबर को कुछ छोटे-मोटे कामकाज हुए, जिसमें विभिन्न बोर्डों और संस्थानों के लिए सदस्यों को चुनने के प्रस्ताव पारित किए गए।

लोकसभा में 105 और राज्यसभा में 100 प्रतिशत हुआ काम, तीसरे कार्यकाल में बुलाए गए संसद के पहले सत्र का दिखा कामकाज

नई दिल्ली केंद्र की मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में बुलाए गए संसद के पहले सत्र के दौरान लोकसभा में 105 और राज्यसभा में 100 प्रतिशत से ज्यादा कामकाज हुआ है। संसदीय कार्य मंत्रालय के मुताबिक, 18वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव के पश्चात, लोकसभा का पहला सत्र 24 जून और राज्यसभा का 264 वां सत्र 27 जून से शुरू हुआ। मंगलवार को लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। जबकि, राज्यसभा को बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया। लोकसभा में पहले दो दिन विशेष रूप से 18वीं लोकसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों का शपथ ग्रहण हुआ। सत्र के दौरान कुल 542 में से 539 नवनिर्वाचित सांसदों ने संसद सदस्यता की शपथ ली। 26 जून को लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव हुआ, जिसमें ओम बिरला को ध्वनिमत से दूसरी बार अध्यक्ष चुना गया। उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने मंत्रिपरिषद का परिचय भी कराया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने परंपरा और संविधान के अनुच्छेद-87 के तहत 27 जून को संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने मोदी सरकार के 10 वर्षों की उपलब्धियों का जिक्र किया और साथ ही सरकार के भविष्य के एजेंडे को भी सामने रखा। पीएम मोदी ने 27 जून को राज्यसभा में अपने मंत्रिपरिषद का परिचय भी कराया। दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा 28 जून से शुरू होनी थी। लेकिन, लोकसभा में हंगामे के कारण इस पर चर्चा 1 जुलाई को शुरू हो पाई। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भाजपा की तरफ से लोकसभा में चर्चा की शुरुआत की। बांसुरी स्वराज ने लोकसभा में चर्चा का समर्थन किया। कुल 68 सांसदों ने लोकसभा की चर्चा में हिस्सा लिया। जबकि, 50 से अधिक सांसदों ने सदन के पटल पर अपने भाषण रखे। 2 जुलाई को 18 घंटे से अधिक की चर्चा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए तमाम सवालों का जवाब भी दिया और साथ ही राहुल गांधी और कांग्रेस पर जमकर निशाना भी साधा। लोकसभा में लगभग 34 घंटे की 7 बैठकें हुईं और एक दिन के हंगामे और व्यवधान के बावजूद लोकसभा में उत्पादकता की दर 105 प्रतिशत रही। वहीं, राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत 28 जून को भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने की, जिसका समर्थन सांसद कविता पाटीदार ने किया। कुल मिलाकर 76 सांसदों ने 21 घंटे से अधिक की चर्चा में भाग लिया, जिसका जवाब प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में दिया। राज्यसभा में कामकाज की कुल उत्पादकता दर 100 प्रतिशत से ज्यादा रही।

18वीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून से होगा शुरू

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के गठन के बाद संसद के पहले सत्र की भी तारीख आ गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी है कि 24 जून से 3 जुलाई तक लोकसभा का पहला सत्र होगा। जबकि, 27 जून से 3 जुलाई तक राज्यसभा का पहला सत्र बुलाया जाएगा। इस दौरान नए सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा। केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने बुधवार को कहा, ’18वीं लोकसभा का पहला सत्र नए चुने गए सदस्यों की शपथ ग्रहण, स्पीकर के चुनाव, राष्ट्रपति के भाषण और आगे की चर्चा के लिए 24-4-2024 से लेकर 3-7-2024 तक बुलाया गया है। राज्यसभा के 264वें सत्र को 27-6-2024 से बुलाया जाएगा और इसका समापन 3-7-2024 को होगा।’ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 27 जून को लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी और अगले पांच वर्ष के लिए नई सरकार के कामकाज की रूपरेखा पेश करेंगी। रीजीजू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ’18वीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून 2024 से तीन जुलाई 2024 तक नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ, अध्यक्ष के चुनाव, राष्ट्रपति के अभिभाषण और उस पर चर्चा के लिए बुलाया जा रहा है।’ उन्होंने कहा कि राज्यसभा का 264वां सत्र 27 जून को शुरू होगा और तीन जुलाई को संपन्न होगा। समझा जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी 27 जून को राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद संसद में अपनी मंत्रिपरिषद के सदस्यों का परिचय देंगे। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान आक्रामक विपक्ष द्वारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश की जा सकती है। प्रधानमंत्री संसद के दोनों सदनों में, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देंगे।

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