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एमपी विधानसभा का बजट सत्र, कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित

MP Budget 2025 live updates :मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की आज से शुरुआत हो गई है। सबसे पहले सदन में राज्यपाल मंगुभाई पटेल का अभिभाषण हुआ। 12 मार्च का मध्य प्रदेश सरकार राज्य का बजट पेश करेगी। 24 मार्च तक चलने वाले विधानसभा के सत्र में कुल 9 बैठकें होंगी। वहीं, इस बार कांग्रेस सदन में जमकर हंगामा करने की तैयारी में है। इसकी शुरुआत आज विधानसभा के पहले दिन किसान कांग्रेस ने विधानसभा घेराव करके कर दी है। देखें सत्र के पहले दिन के पल-पल का अपडेट..। MP Budget 2025 live updates : कांग्रेस के विधानसभा घेराव के मुद्दें MP Budget 2025 live updates : राज्यपाल का अभिभाषण मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अभिभाषण दिया। उन्होंने कहा कि, राज्य सरकार किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों के कल्याण के लिए संकल्पित है। किसानों को सस्ती दरों पर बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए उन्हें मात्र 5 रुपए में स्थाई बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। इसके अलावा, युवाओं के समग्र सामाजिक विकास और महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक उन्नति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। MP Budget 2025 live updates : सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग हरदा से कांग्रेस विधायक रामकिशोर दोगने सिर पर काली टोपी लगाकर विधानसभा पहुंचे। उनके हाथ में एक तख्ती भी थी, जिसपर लिखा है ‘विधानसभा सत्र की अवधि बढ़ाई जाए’। पत्रिका से खास बातचीत के दौरान कांग्रेस विधायक ने कहा कि, सरकार जनता के मुद्दों पर जवाब देने से बचना चाहती है। इसलिए सदन की कार्यवाही इतनी कम अवधि की रखी गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष से लिखित मांग कर चुके हैं। इसपर उन्हें आश्वासन तो दिया गया, पर अबतक सदन की कार्यवाही की अवधि नहीं बढ़ाई गई। यही कारण है कि हमें कार्यवाही में शामिल होने के बजाए, बाहर विरोध करना पड़ रहा है।

महिला दिवस पर मंत्री का बड़ा ऐलान,डी-मार्ट की तर्ज पर प्रदेश में खुलेंगे ट्राइबल मार्ट, महिलाएं करेंगी संचालन

Minister’s big announcement on Women’s Day, Tribal Marts will open in the state on the lines of D-Mart, women will operate them MP News: मध्य प्रदेश में महिला दिवस के अवसर पर एक बड़ा ऐलान किया गया है. डी-मार्ट की तर्ज पर ट्राइबल मार्ट खोले जाएंगे, जिनका संचालन आदिवासी महिलाएं करेंगी. यह परियोजना आदिवासी महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें उद्यमिता के अवसर प्रदान करने के लिए शुरू की गई है. MP Tribal Mart: मध्य प्रदेश के खंडवा में महिला दिवस पर मंत्री विजय शाह ने बड़ी घोषणा  की है. उन्होंने कहा कि डी मार्ट की तरह आदिवासी ब्लॉकों में ट्राईबल मार्ट खोले जाएंगे. फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर खंडवा के आदिवासी ब्लॉक खालवा, मंडला और शहडोल में इसकी शुरुआत की जाएगी. करोड़ों की कीमत के खुलने वाले इस ट्राइबल मार्ट काआदिवासी महिलाएं ही  संचालन करेंगी.  खंडवा में महिला दिवस के मौके पर आज कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने कहा कि शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर खंडवा के आदिवासी ब्लॉक खालवा,मंडला और शहडोल में इसकी शुरुआत की जाएगी, जिसके के लिए एक एकड़ जमीन पर करीब एक करोड़ रुपए की लगत से ये ट्राईबल मार्ट बनाया जाएगा. इसमें दो करोड़ रुपए का लोन महिलाएं को दिया जाएगा जिससे वह अपना रोजगार चला सके. मंत्री विजय शाह ने कहा कि महिला दिवस के मौके पर इतनी बड़ी सौगात बहनों को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा दी जा रही है. मैं समझता हूं कि महिला दिवस के मौके पर इससे बड़ी सौगात हमारी बहनों के लिए हो ही नहीं सकती आदिवासी समाज की होगी तरक्की  अगर यह प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है तो, पूरे प्रदेश में इस तरह के ट्राइबल मार्ट खोले जाएंगे. इससे न सिर्फ महिला सशक्तिकरण बल्कि आदिवासी समाज को भी मुख्य धारा से जोड़कर तरक्की की राह पर अग्रसर किया जा सकेगा. बता दें कि प्रदेश की मोहन सरकार सहित केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार भी आदिवासी समाज के लिए नित नए कदम उठा रही है. डी मार्ट की तर्ज पर ट्राइबल मार्ट की घोषणा भी उन्हीं कदमों में से इसे एक कदम माना जा रहा है.अब देखना यह है कि मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री की इस घोषणा पर कितनी जल्दी और कितना अमल होता है

31 मार्च तक बनवाएं किसान आईडी, नहीं तो अटक जाएंगे फसल बीमा और सम्मान निधि के पैसे!

Get your farmer ID made by March 31, otherwise your crop insurance and Samman Nidhi money will get stuck! भोपाल। मध्यप्रदेश के किसानों के लिए जरूरी खबर! अगर आपने 31 मार्च 2025 तक किसान आईडी (Farmer ID) नहीं बनवाई, तो आप प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, कृषि ऋण और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं। एग्रीस्टैक योजना के तहत किसानों की डिजिटल पहचान के लिए 11 अंकों की यूनिक आईडी अनिवार्य की गई है। क्यों जरूरी है किसान आईडी? राज्य सरकार ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविरों के माध्यम से किसानों का पंजीकरण करा रही है। यह यूनिक आईडी किसानों की डिजिटल पहचान होगी, जिसके बिना न तो फसल बीमा का क्लेम मिलेगा, न ही किसान सम्मान निधि की राशि, और न ही बिना दस्तावेज़ों के कृषि ऋण उपलब्ध होगा। मध्यप्रदेश के कृषि विभाग के अनुसार, 31 मार्च के बाद यह पंजीकरण फ्री नहीं रहेगा, यानी इसके लिए किसानों को शुल्क देना होगा। जिन पंचायतों में पहले ही शिविर लग चुके हैं, वहां के किसान अपने पटवारी से संपर्क कर पंजीकरण करवा सकते हैं। बिना किसान आईडी नहीं मिलेगा इन योजनाओं का लाभ अगर आपने अभी तक अपनी किसान आईडी नहीं बनवाई, तो आप कई महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं से वंचित हो सकते हैं— ✔ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि – सालाना ₹6,000 की सहायता राशि नहीं मिलेगी। ✔ फसल बीमा योजना – केवल उन्हीं किसानों को लाभ मिलेगा, जिनकी पहचान सरकारी रिकॉर्ड में होगी। ✔ कृषि ऋण व किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) – किसान बिना ज्यादा दस्तावेज़ों के लोन नहीं ले पाएंगे। ✔ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) – अपनी फसल सरकारी मंडियों में बेचने के लिए भी यह आईडी अनिवार्य होगी। ✔ फसल सर्वे व स्वामित्व हस्तांतरण – सरकारी रिकॉर्ड में जमीन संबंधी कार्यों के लिए यह आईडी आवश्यक होगी। रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी दस्तावेज़ किसान आईडी बनवाने के लिए निम्नलिखित दस्तावेज़ अनिवार्य हैं— जल्दी करें, वरना देना होगा अतिरिक्त शुल्क! जो किसान 31 मार्च तक अपना पंजीकरण नहीं करवाते, उन्हें इसके बाद शुल्क देकर किसान आईडी बनवानी होगी। इसलिए समय रहते नजदीकी पंचायत या शिविर में जाकर पंजीकरण कराएं और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाएं।

930 रुपए किलो का गुग्गल 1700 रूपये में खरीदने के मामले की नहीं हो पा रही है जांच

The case of buying guggal worth 930 rupees per kg for 1700 rupees is not being investigated भोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक बिभास ठाकुर के निर्देश एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में बेअसर साबित हो रहें है। इसका सबसे बड़ा उदाहरणएमएफपी पार्क में हुई रॉ मटेरियल खरीदी में गड़बड़झाला की जांच एक साल से एमडी ठाकुर जांच नहीं करवा पा रहें हैं। इस बीच खबर है कि पार्क की सीईओ गीतांजलि गुग्गल खरीदी में विवादों की सुर्खियों में रहीं प्रभारी सुनीता अहिरवार को पुनः प्रबंधक बनने की प्रक्रिया तेज कर दी है। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक विभाष ठाकुर ने 31 जनवरी 25 को एमएफपी पार्क की सीईओ गीतांजलि को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि गुग्गल की खरीदी 930 रूपये की जगह 1700 रुपए की दर से खरीदने की जांच सात दिन में बिंदुवार प्रतिवेदन दें। 1 महीने से अधिक का समय बीत गया है पर पार्क की सीईओ ने एमडी के पत्र पर जांच शुरू नहीं की। दिलचस्प पहलु यह है कि गुग्गल खरीदी की जांच को लेकर फेडरेशन के एमडी ठाकुर ने पूर्व के सीईओ को भी दो से अधिक पत्र लिख चुके हैं पर एमएफपी पार्क में उनके पत्रों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि एमडी ने पिछले दिनों पर के दोनों डॉक्टरों को कारण बताओं नोटिस जारी किया था। इनमें से किसी ने भी अब तक नोटिस का जवाब नहीं दिया है। इसके पहले लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक ठाकुर ने भंडारण की जांच के लिए एसीएफ मणि शंकर मिश्र को 7 दिन में जांच का रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे किंतु अभी तक जांच शुरू नहीं हुई। चिंताजनक पहलू यह है कि एसीएफ मिश्रा जांच के भंडारण से संबंधित दस्तावेज मांगने के लिए एमडी ठाकुर से लगातार चिट्ठीयां लिखना शुरू किया तो उन्हें ही वहां से हटा दिया गया। क्या है मामलाएमएसपी पार्क की तत्कालीन प्रबंधक अहिरवार ने गूग्गल सहित प्रष्टपर्णी, काली मिर्च, हींग, पुनर्नवा आदि रॉ मैटेरियल की खरीदी के लिए टेंडर किया था। टेंडर में गुग्गल के लिए हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार का रेट 930 रूपये प्रति किलोग्राम था। एसपी पार्क के कर्ताधर्ता ने हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार से खरीदी न करके आर्यन फार्मेसी से ₹1700 की कीमत पर 4000 किलो खरीदी की। हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार फर्म से न तो वर्क आर्डर दिया गया और न किसी प्रकार का पत्राचार किया गया। आर्यन से खरीदी से संघ को 30 लाख 80000 रुपए का अधिक भुगतान करना पड़ा है। प्रभारी एसडीओ एवं उत्पादन प्रबंधक ⁠सुनीता अहीरवार के कार्यकाल में 6 करोड़ों की govt सप्लाई में 3 करोड़ से अधिक की रॉ -मटेरियल ख़रीदी के भुगतान किये गये है, जिसमें 2 करोड़ के बिल तो आर्यन फ़ार्मेसी के थे। इसके अलावा 30-35 लाख के मरम्मत के भुगतान किये जा चुके है।

ग्वालियर किला निजी हाथों में सौंपने शहरवासियों ने किया विरोध, बोले- दिल्ली तक जाएंगे

gwalior city residents protested against handing over gwalior fort to private hands Gwalior Fort Update: ग्वालियर के ऐतिहासिक किले को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी से शहरवासी आक्रोश में आ गए हैं। लोगों का कहना है कि ग्वालियर किला (Gwalior Fort) हमारी विरासत है, इससे छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। शहरवासियों का कहना है कि ग्वालियर किले पर बने ऐतिहासिक स्मारक हमारी पहचान हैं और किले के निजीकरण के बाद यहां मनमाने ढंग से वसूली प्रारंभ हो जाएगी। इसके विरोध में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा शुक्रवार को कलेक्टर और राज्य पुरातत्व विभाग को ज्ञापन देकर चेताएगी। बता दें, भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में पर्यटन-संस्कृति विभाग ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो एयरलाइंस) के साथ ग्वालियर किले के लिए एमओयू किया है। वहीं इंडिगो ग्रुप के 100 लोगों की टीम शुक्रवार 7 मार्च की शाम 4 बजे ग्वालियर फोर्ट पहुंच रही है। टिकट काफी महंगे हो जाएंगेग्वालियर किले पर जो स्मारक पूर्ण रूप से संरक्षित हैं और उनसे आमदनी भी हो रही है, ऐसे स्मारकों को निजी हाथ में देना ठीक नहीं रहेगा। क्योंकि उनके टिकट काफी बढ़ जाएंगे। ऐसे में आम आदमी स्मारकों को देखने से वंचित रह जाएगा और पुरातत्व महत्व भी समाप्त हो जाएगा।–लाल बहादुर सिंह, पूर्व क्यूरेटर (संग्रहाध्यक्ष) गूजरी महल संग्रहालयराष्ट्रपति भवन तक जाएंगे हम इस मुद्दे पर पूरी लड़ाई लड़ेंगे, किसी भी हालत में किले का निजीकरण नहीं होने देंगे। चाहे इसके लिए दिल्ली में राष्ट्रपति भवन तक क्यों ना जाना पड़े। हम हर स्तर पर इसका पुरजोर विरोध करेंगे। साथ ही दूसरे समाजों को भी इससे जोड़ेंगे। इससे पूर्व भी हमने यहां निजी होटल के निर्माण को नहीं होने दिया था।–पूरन सिंह राणा, एडवोकेट, सचिव, जाट समाज कल्याण परिषद ग्वालियरनिजीकरण बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे ग्वालियर का किला न सिर्फ शहर बल्कि प्रदेश-देश के लिए भी पुरातत्व धरोहर है। इसका निजीकरण किया जाना बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होगा। पता नहीं इस ऐतिहासिक विरासत को पूंजीपतियों के हवाले क्यों किया जा रहा है। जो लोग इस काम को करवा रहे हैं, उन्हें गरिमा का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं है। हम शुक्रवार को इसके लिए ज्ञापन भी देंगे।–सुनील शर्मा, कांग्रेस प्रदेश महासचिवकम हो जाएगी पर्यटकों की संख्या ग्वालियर किला हमारे ग्वालियर नहीं अपितु पूरे देश में प्रसिद्ध है, यहां हर कोई आना पसंद करता है। निजी हाथों में जाने के बाद यहां जाने के लिए अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा। वहीं राज्य पुरातत्व विभाग और केंद्रीय पुरातत्व विभाग इस किले का संरक्षण और देखभाल कर तो रहे हैं। निजीकरण से निश्चित तौर पर पर्यटकों की संख्या कम ही होगी।–ज्योति अग्रवाल, संस्थापक अध्यक्ष, अग्रकुल महिला समितिनिजीकरण बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए ग्वालियर किला हमारी ऐतिहासिक धरोहर है, इसका निजीकरण बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। इसे संरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि निजी कंपनियों को सौंपना। इससे आम जनता की पहुंच और सांस्कृतिक महत्व प्रभावित हो सकता है। किले का संरक्षण सरकार खुद करे, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान बनी रहे।–श्वेता बिंदल, चेयरपर्सन, जेसीआई ग्वालियरनिर्णय वापस लिया जाए ग्वालियर किला हमारे शहर की शान है। जो भी ऐतिहासिक धरोहर होती हैं उनकी देखभाल व संरक्षण करना सरकार का नैतिक कर्तव्य है। निजीकरण करना कोई विकल्प नहीं है, इसलिए अनुरोध है कि निजी कंपनी को किले को देने का निर्णय वापस लिया जाए। किले का जो पुराना इतिहास है उसको यथावत रखा जाए, क्योंकि यही हमारी पहचान भी है।-जुबैर रहमान, संस्थापक अध्यक्ष, लॉयंस क्लब दिशा

सीएम यादव बोले- प्रदेश में नक्सलियों का पूरी तरह खात्मा किया जाएगा, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

CM Yadav said- Naxalites will be completely eradicated from the state, gave necessary instructions to the officials मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को प्रदेश में नक्सल उन्मूलन अभियान पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए और नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिला स्तर, पुलिस मुख्यालय और राज्य शासन के स्तर पर निरंतर निगरानी रखी जाए। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 तक नक्सलियों का पूरी तरह खात्मा करने के संकल्प की पूर्ति के लिए मध्य प्रदेश की सक्रिय भूमिका की बात की। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण, दूरसंचार साधनों का विस्तार और आवश्यक जवानों की तैनाती से नक्सलियों पर नियंत्रण पाने में सफलता मिल रही है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विकास कार्य निरंतर जारी रखें और आधुनिक उपकरणों के उपयोग और क्षेत्र की निरंतर निगरानी से नक्सली तत्वों के खात्मे के लिए प्रयासों को तेज किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नक्सलवाद के पैर किसी भी कीमत पर जमने नहीं दिए जाएंगे। नक्सलवाद के समूल नाश के लिए कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पेशल डीजी पंकज श्रीवास्तव को हर 15 दिन में नक्सल उन्मूलन अभियान की समीक्षा के निर्देश दिए। चार नक्सलियों को मार गिराने पर दी बधाईमुख्यमंत्री ने बालाघाट और निकटवर्ती क्षेत्र में पुलिस और नक्सलियों की मुठभेड़ में चार नक्सलियों के मारे जाने की कार्रवाई की प्रशंसा की और पुलिस अधिकारियों को बधाई दी। बैठक में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों द्वारा संयुक्त अभियान के माध्यम से नक्सलवादियों के खात्मे के संकल्प पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के निर्देश

अब नेताओं की काले रंग की लग्जरी गाड़ियों पर नजर नहीं आएगा हूटर, जानिए क्या है इसका कारण

Now the hooter will not be seen on the black luxury cars of politicians, know the reason behind this सीहोर के जनप्रतिनिधियों की पहली पसंद बनी काले रंग की गाड़ियों पर अब हूटर नजर नहीं आएंगे। शासन के निर्देशों के बाद जनप्रतिनिधियों ने अपनी गाड़ियों से हूटर हटाने की शुरुआत कर दी है। सबसे पहले विधायक सुदेश राय ने अपनी लग्जरी गाड़ी से हूटर हटवाया, इसके बाद पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जसपाल सिंह अरोरा ने गाड़ी से हूटर निकलवा दिया। गौरतलब है कि शहर में करीब आधा दर्जन जनप्रतिनिधियों के पास काले रंग की गाड़ी, जिनमें वे सफर करते हैं। विधायक सुदेश राय, भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जसपाल सिंह अरोरा, नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर, युवा नेता शशांक सक्सेना सहित कुछ अन्य जनप्रतिनिधि भी काले रंग की गाड़ी में ही चलते हैं। अब इन जनप्रतिनिधियों ने शासन के नियमों का पालन करते हुए अपनी गाड़ियों से हूटर हटाने शुरू कर दिए हैं। उप पुलिस महानिरीक्षक ने दिए थे ये आदेशउप पुलिस महानिरीक्षक तुषारकांत विद्यार्थी ने आदेश जारी किए कि प्रदेश में मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के विरुद्ध निजी वाहनों में हूटर, फ्लेश लाइट (लाल, पीली, नीली बत्ती), वीआईपी स्टीकर चस्पा करना और गलत नंबर प्लेट के मामले विगत कुछ समय से लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे वाहनों पर कार्रवाई नहीं करने से ऐसा करने वालों को प्रोत्साहन मिल रहा है। इन अनाधिकृत वाहनों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने की आवश्यकता है। कुछ दिन पूर्व एक जिले में वीआईपी भ्रमण के दौरान ऐसा ही एक अनाधिकृत वाहन पकड़ा गया था, जिस पर बीनएएस एवं मोटर व्हीकल एक्ट की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। निजी वाहनों में हूटर, फ्लेश लाइट लाल, पीली, नीली बत्ती, वीआईपी के स्टीकर, गलत नंबर प्लेट का दुरुपयोग करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध 15 मार्च तक विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जाए। यातायात पुलिस ने की कार्रवाईयातायात प्रभारी सूबेदार ब्रजमोहन धाकड़ के नेतृत्व में यातायात पुलिस ने एक प्राइवेट स्कॉर्पियो वाहन जिस पर चालक द्वारा अवैध रूप से हूटर और सायरन लगाए हुए था, जिस पर मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत चालानी कार्रवाई की गई। पुलिस ने वाहन चालक से समन शुल्क तीन हजार रुपये वसूला गया। यातायात पुलिस द्वारा प्राइवेट वाहनों पर अवैध हूटर एवं सायरन लगाकर वाहन चलाने वाले चालकों के विरुद्ध कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

ग्वालियर किला अब निजी हाथों में, इंडिगो एयरलाइंस से 5 साल का करार

Gwalior Fort is now in private hands, 5 year agreement with Indigo Airlines Gwalior Fort: नरेंद्र कुइया. लियर के किले को अब निजी हाथों में देने की तैयारी है। इसके लिए भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में पर्यटन-संस्कृति विभाग ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो एयरलाइंस) के साथ एमओयू किया है। इसमें आगा खान कल्चरल सर्विसेज फोरम (एकेसीएसएफ) को शामिल किया है। अभी 5 साल के करार में किले के संरक्षण और सौंदर्यीकरण होगा। बाद में पांच साल और बढ़ेगा। इसकी फंडिंग इंडिगो एयरलाइंस करेगी, एकेसीएसएफ संरक्षण करेगी। इनके संरक्षण का कार्य भी वे ही करते हैं। ग्वालियर दुर्ग पर एमओयू (MOU) के बाद की प्रक्रिया शुरू करने से पहले मप्र टूरिज्म(MP Tourism), इंडिगो एयरलाइंस (Indigo Airlines) और एकेसीएसएफ की 100 लोगों की टीम 7 मार्च को शाम 4 बजे किले पर पहुंचेगी। संरक्षण कार्य तो पहले से हो रहाइस एमओयू में ग्वालियर किले के वि₹म महल, कर्ण महल, गूजरी महल, जहांगीर महल, शाहजहां महल, हुमायू महल और जौहर कुंड सहित कई ऐतिहासिक संरचनाओं के दस्तावेजीकरण और संरक्षण करने की बात कही गई है। जबकि राज्य पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का कार्य पूर्व में भी किया गया है और वर्तमान में भी किया जा रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग ने 2016-17 में करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर यहां संरक्षण कार्य किए थे। वहीं अब यहां लगभग 75 लाख रुपए से अधिक खर्च कर रिनोवेशन कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही यहां पाथवे का निर्माण कार्य भी जारी है। ऐसे में निजी कंपनी से संरक्षण कार्य कराने की क्या जरूरत आन पड़ी है। एमओयू में ऐसे तथ्य● ग्वालियर किला कंजर्वेशन और इल्यूमिनेशन परियोजना बहुआयामी प्रयास।● पर्यटकों के लिए सुविधाजनक पहुंच मार्ग, सुविधाओं का विस्तार।● मौजूदा स्थानों का उपयोग कर कैफे व प्रदर्शनी स्थलों का विकास। तब विरोध पर रुका था होटल निर्माणग्वालियर किले पर बनी भीमसिंह राणा की छत्री पर शासन ने 2022-23 में होटल की योजना बनाई थी। जाट समाज के विरोध के बाद योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी। श्योपुर का किला, बलदेवगढ़ का किला, दतिया का राजगढ़ पैलेस राज्य पुरातत्व विभाग से असंरक्षित कर पर्यटन निगम को दिए थे। 50 लाख रुपए मासिक आयग्वालियर किले पर 50 लाख रु. मासिक आय ग्वालियर दुर्ग पर बने केंद्र-राज्य पुरातत्व विभाग के स्मारकों को देखने विदेशों से सैलानी आते हैं। मासिक आय 50 लाख तक है। विशेष दिनों में यह बढ़ जाती है। संरक्षण कार्य तो पहले से हो रहाइस एमओयू में ग्वालियर किले के विक्रम महल, कर्ण महल, गूजरी महल, जहांगीर महल, शाहजहां महल, हुमायू महल और जौहर कुंड सहित कई ऐतिहासिक संरचनाओं के दस्तावेजीकरण और संरक्षण करने की बात कही गई है। जबकि राज्य पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का कार्य पूर्व में भी किया गया है और वर्तमान में भी किया जा रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग ने 2016-17 में करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर यहां संरक्षण कार्य किए थे। वहीं अब यहां लगभग 75 लाख रुपए से अधिक खर्च कर रिनोवेशन कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही यहां पाथवे का निर्माण कार्य भी जारी है। ऐसे में निजी कंपनी से संरक्षण कार्य कराने की क्या जरूरत आन पड़ी है। ऐसे काम पहले भी हो चुके हैंनिजी कंपनियों को पुरातत्व संरक्षित स्मारकों की जानकारी नहीं होती। वे धरोहरों का संरक्षण कार्य कैसे कर सकती हैं। ऐसे काम पहले भी हो चुके हैं। ये सब मिलीभगत से होते हैं।

ऐसे फल और सब्जियां जो खुद बताते हैं कि मैं किस चीज के लिए फायदेमंद हूं…

Fruits and vegetables that tell me what they are good for… हमारी प्रकृति हमें वो सब कुछ देती है जिसकी हमारे शरीर को जरूरत होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ फल और सब्जियां अपने आकार और बनावट से यह संकेत देती हैं कि वे हमारे शरीर के किस अंग के लिए फायदेमंद हो सकती हैं? प्रकृति ने हमें जो भी दिया है, वह किसी न किसी रूप में हमारे शरीर के लिए लाभकारी है। जरूरत है तो बस इसे सही तरीके से समझने और अपने आहार में शामिल करने की!

रतलाम: शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक और मामला उजागर, टीचर ने छात्रा से मांगे 50 हजार रुपये

Ratlam: Another case of corruption exposed in the education department, teacher demanded 50 thousand rupees from a student रतलाम! मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के आलोट क्षेत्र में स्थित न्यू आर्यवीर सीनियर सेकंडरी स्कूल के एक शिक्षक प्रदीप सिंह को 12वीं कक्षा की एक छात्रा से 50 हजार रुपये मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपी टीचर को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 6 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। प्रैक्टिकल का रिजल्ट बिगाड़ने की धमकी आरोप के अनुसार, शिक्षक प्रदीप सिंह ने छात्रा को धमकाया कि अगर उसने पैसे नहीं दिए, तो उसका प्रैक्टिकल परीक्षा का रिजल्ट खराब कर दिया जाएगा और उसका भविष्य बर्बाद हो जाएगा। इतना ही नहीं, आरोपी शिक्षक ने कथित रूप से छात्रा को उसके माता-पिता की जान से मारने की धमकी भी दी। छात्रा के परिजनों की शिकायत पर कार्रवाई पीड़िता की शिकायत के बाद परिजनों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, एक मार्च को छात्रा स्कूल की एक्सट्रा क्लास में गई थी, जहां टीचर प्रदीप सिंह ने उसे अलग बुलाकर पैसे लाने के लिए धमकाया। जब छात्रा ने घर आकर अपने माता-पिता से 50 हजार रुपये मांगे, तो उन्होंने कारण पूछा, जिस पर छात्रा ने पूरा मामला उजागर कर दिया। इसके बाद परिजनों ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। पुलिस जांच में जुटी शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया और उससे पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक जांच में आरोपी पर लगे आरोप सही पाए गए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी पहले भी इस तरह की हरकतों में शामिल रहा है। शिक्षा विभाग पर उठे सवाल इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक शिक्षक, जो बच्चों को सही दिशा देने के लिए जिम्मेदार होता है, अगर इस तरह के अपराध में लिप्त पाया जाता है, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक चिंता का विषय बन जाता है। इस मामले के उजागर होने के बाद अभिभावकों में भी भय और आक्रोश है। पुलिस जल्द ही पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी और आरोपी शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

एमपी गजब : बीईओ-क्लर्क ने मिल कर शिक्षा विभाग को लगाया 5 करोड़ का चुना: शिक्षकों का वेतन रिश्तेदारों के खातों में डाला, प्राचार्यों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा

MP Amazing: BEO-Clerk together defrauded the Education Department of Rs 5 crore: Teachers’ salaries were transferred to the accounts of relatives, fraud was committed in connivance with the principals भोपाल (कमलेश)। मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग के कर्मचारी भ्रष्टाचार करने के लिए पत्नियों और रिश्तेदारों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका खुलासा शिक्षा विभाग की ही जांच में हुआ है। पिछले महीने रायसेन के सिलवानी बीईओ दफ्तर में 1 करोड़ के गबन के मामले में 26 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इनमें शिक्षा विभाग के कर्मचारी, प्राचार्य और रिटायर्ड प्राचार्य शामिल हैं। इनके अलावा जिन 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, वो इन कर्मचारियों की पत्नियां और रिश्तेदार हैं। ये एकलौता मामला नहीं है। 5 अन्य जिलों में भी गबन के ऐसे ही मामले सामने आए हैं, जिनमें पत्नियों और रिश्तेदारों के अकाउंट में भ्रष्टाचार की करीब 5 करोड़ की रकम ट्रांसफर की गई। 10 मार्च से शुरू हो रहे विधानसभा के बजट सत्र में भी ये मामला उठ सकता है। आखिर किस तरह पत्नी और रिश्तेदारों के खातों से किया गया भ्रष्टाचार और इन मामलों में क्या एक्शन लिया गया, पढ़िए रिपोर्ट… अब जानिए, कैसे किया एक करोड़ का गबन रायसेन के जिला शिक्षा अधिकारी डीडी रजक के मुताबिक, ये पूरा हेरफेर साल 2018 से 2022 के बीच किया गया। सिलवानी विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ क्लर्क चंदन अहिरवार इस गबन का मास्टरमाइंड है। चंदन के पास विकासखंड के अंतर्गत आने वाले हर स्कूल के शिक्षक की बैंक अकाउंट डिटेल होती थी। रजक बताते हैं कि 2022 तक शिक्षक और अतिथि शिक्षकों की सैलरी का भुगतान वेंडर के जरिए होता था। तब ऑफलाइन ट्रांजेक्शन भी हो जाता था। इसी का फायदा आरोपियों ने उठाया है। चंदन शिक्षक और अतिथि शिक्षकों के नाम के आगे अपने रिश्तेदार या पत्नी का बैंक अकाउंट दर्ज कर वेतन और मानदेय की राशि ट्रांसफर करता था। उसने पत्नी सुमन अहिरवार के बैंक अकाउंट में 37 लाख रुपए जमा कराए। इसी तरह इस गबन में शामिल बाकी लोगों ने भी करीब 58 लाख रुपए की रकम पत्नियों और रिश्तेदारों के अकाउंट में जमा कराई। प्राचार्यों की भी मिलीभगत, 3 रिटायर हो चुकेजिला शिक्षा अधिकारी डीडी रजक बताते हैं कि सरकार ने पहले स्कूल के प्राचार्यों को ही डीडीओ (आहरण एवं संवितरण) के अधिकार दिए थे। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि शिक्षकों को सैलरी के लिए संकुल कार्यालय पहुंचना पड़ता था। मगर, शिक्षा विभाग के कर्मचारी और प्राचार्यों ने मिलीभगत कर इस व्यवस्था को पलीता लगाया। रजक के मुताबिक, इस दौरान पांच स्कूलों के प्राचार्यों को डीडीओ की जिम्मेदारी दी गई थी। इनके साइन से ही रिश्तेदारों के खातों में ये राशि पहुंचाई गई। इसमें इनकी बराबर की भागीदारी है। गड़बड़ी सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की गई तो इनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई गई है। अब जानिए, कैसे किया पूरा गबन पासवर्ड बांट दिया: नियमों के मुताबिक, डीडीओ अपना पासवर्ड किसी को साझा नहीं कर सकता। जांच में पाया गया कि डीडीओ ने अपना पासवर्ड कर्मचारियों को दे दिया। इसका इस्तेमाल कर कोषालय से पैसा निकाला गया। महीने की समीक्षा नहीं हुई: नियमानुसार हर महीने भुगतान की समीक्षा करना जरूरी है, ताकि गड़बड़ियों का पता लगाया जा सके। सिलवानी बीईओ दफ्तर में ये प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। इससे ये पता नहीं चला कि सही व्यक्ति के खाते में पैसा पहुंचा या नहीं। ई-भुगतान का सत्यापन नहीं: हर महीने ये जांच होना चाहिए कि जो भी ऑनलाइन भुगतान किए हैं, वो सही बैंक अकाउंट में पहुंचे या नहीं। यहां इस प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। असली दावेदारों का नाम गायब किया: जब किसी व्यक्ति को भुगतान किया जाता है, तो उसका नाम और बैंक खाता सरकारी डेटाबेस में दर्ज करना जरूरी होता है। जांच में पाया गया कि इस प्रक्रिया को भी नहीं अपनाया गया। बिल तैयार करने में लापरवाही: कोषालय संहिता 2020 के नियमों के अनुसार, बिल (देयक) बनाने की जिम्मेदारी क्रिएटर की होती है। उसे सॉफ्टवेयर में अपने पासवर्ड से लॉगिन कर भुगतान लेने वाले व्यक्ति का नाम, बैंक खाता नंबर दर्ज करना होता है। अप्रूवर इस बिल की जांच कर कोषालय में जमा करता है। जांच में पाया गया कि इस प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। स्वीकृति आदेश में अनियमितता: जब किसी भुगतान को स्वीकृत किया जाता है, तो उसके साथ स्वीकृति आदेश (Approval Order) संलग्न किया जाता है। लेकिन जांच में पाया गया कि कई मामलों में अलग-अलग भुगतान के लिए एक ही स्वीकृति आदेश का उपयोग किया गया। इसके अलावा, कई अधूरे स्वीकृति आदेश भी जारी किए गए और कुछ मामलों में आदेश अटैच ही नहीं किए गए। ऐसे पांच और मामलों की जांच की जा रही है रायसेन का ये अकेला मामला नहीं है। पिछले दो साल में गबन के ऐसे 5 और मामले हैं, जिनकी विभागीय जांच की जा रही है। इनमें भी विभागीय अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारियों की मिलीभगत पाई गई है। छिंदवाड़ा: रिश्तेदार-पत्नी और बहन के खातों में 1 करोड़ 32 लाख ट्रांसफर छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव शिक्षा अधिकारी कार्यालय में 1.32 करोड़ रुपए के गबन का खुलासा जुलाई 2024 में हुआ था। जबलपुर वित्त विभाग की टीम ने सात दिन की जांच के बाद यह फर्जीवाड़ा पकड़ा। इस मामले में पूर्व बीईओ एमआई खान और चौरई संकुल के बाबू तौसिफ खान की मिलीभगत पाई गई। आरोपियों ने कोरोना में मृत कर्मचारियों की सहायता राशि भी हड़प ली और सरकारी धन को अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया गया। वित्त विभाग की टीम को जुन्नारदेव में तकरीबन 1 करोड़ 44 लाख के घोटाले की आशंका थी। इसमें से 1 करोड़ 32 लाख की पुष्टि हो चुकी है। क्या हुआ: जिला शिक्षा अधिकारी गोपाल सिंह बघेल ने बताया कि आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। सभी को निलंबित कर दिया है। उनसे राशि वसूल करने की प्रक्रिया जारी है। ग्वालियर: अलग-अलग खातों में 47 लाख ट्रांसफर ग्वालियर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय डबरा में 2024 में 47 लाख रुपए के गबन का मामला सामने आया था। इस गड़बड़ी को भोपाल की ऑडिट टीम ने पकड़ा था। यह राशि सात अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई, जिनमें तत्कालीन … Read more

बजट सत्र से पहले कांग्रेस बना रही रणनीति, बेरोजगारी महंगाई जैसे मुद्दों पर घेरेंगे, 9 मार्च को बैठक

congress is making strategy before the budget session will surround on issues like unemployment मध्यप्रदेश में 10 मार्च से बजट सत्र शुरू होने जा रहा है। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मोबाइल नंबर जारी कर लोगों से अपील की है कि यदि अपराधों और भ्रष्टाचार के मामले में उनके पास कोई सबूत है तो वह भेजें, ताकि इसे विधानसभा के पटल पर उठाए जा सके। जानकारी के लिए बतादें कि यह सत्र 14 दिनों का होगा, जिसमे कुल 9 बैठकें होगी। तो वहीं कांग्रेस ने बजट सत्र से पहले 9 मार्च को बैठक बुलाई है। जिसमे पार्टी के सभी दिग्गज नेता शामिल होगें। यह बैठक भोपाल के अशोका होटल में होगी, जहां पर कांग्रेस के दिग्गज विधानसभा का घेराव करने की रणनीति तैयार करेंगे। साथी अलग-अलग रणनीति पर चर्चा की जाएगी। इन मुद्दों पर घेरने की तैयारीहोने वाली बैठक में एमपी कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी भी शमिल होंगे और विधानसभा में रखे जाने वाले मुद्दों को लेकर चर्चा करेंगे। बजट से पहले होने वाली यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 9 दिन तक होनी वाली इस बैठक में कांग्रेस किसानों , रोजगार, महंगाई, कर्ज, करप्शन, लाड़ली बहना सहित अन्य मुद्दों को उठाएगी। इसके साथ ही संभावना जताई जा रही है कि मध्य प्रदेश का बजट 11 से 13 मार्च के बीच पेश किया जा सकता है। नेता प्रतिपक्ष ने लोगों से की अपीलबजट सत्र को लेकर विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास भ्रष्टाचार के संबंध में कोई सबूत है तो वे मोबाइल नंबर 8269889419 पर संपर्क कर भेज सकते हैं। उमंग सिंघार ने कहा है कि मध्य प्रदेश में घोटाले, अपराध, दलितों पर अत्याचार, माफिया राज से जुड़े कोई भी सबूत लोगों के पास हो तो वे कांग्रेस को उपलब्ध कराए ताकि विधानसभा में इन मुद्दों को उठाए जा सके। कांग्रेस ने कहा है कि विधानसभा सत्र में सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाने के लिए लोग फोटो, वीडियो, कॉल रिकॉर्डिंग, दस्तावेज या अन्य कोई भी प्रमाण सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें उपलब्ध करा सकते हैं ताकि अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को विधानसभा में उठाए जा सके।

भाजपा नेता की गुंडागर्दी, ASI से धक्का-मुक्की कर नेम प्लेट तोड़ी, नपा उपाध्यक्ष को भी पीटा

bjp leader jinesh jain hooliganism pushed asi and broke his name plate also beatup nagar palika vice president MP News! मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में भाजपा नेता की गुंडागर्दी का मामला सामने आया है। जहां धार्मिक कार्यक्रम के नाम पर अश्लीलता परोसी जा रही थी, जिसे बंद कराने आए ASI के साथ भाजपा नेता धक्का-मुक्की की और वर्दी में लगे नेम प्लेट भी तोड़ दिया। इतनी ही नहीं उसने गनर और अन्य लोगों के साथ मिलकर नगर पालिका उपाध्यक्ष के साथ भी मारपीट की। बता दें कि, ये मामला अंबाह थाना इलाके में चल रहे जयेश्वर महादेव मेला का है। आरोप है कि, यहां जयेश्वर महादेव मेले में चल रहे धार्मिक कार्यक्रम के दौरान अश्लील डांस कराया जा रहा रहा था। फूहड़ गानों पर महिला डांसर के ठुमके लगवाए जा रहे थे। इस संबंध में जब एएसआई किशन सिंह को सूचना मिली तो वो उस फूहड़ डांस को बंद कराने मौके पर पहुंचे। इस दौरान भाजपा नेता जिनेश जैन ने सत्ता का रोब दिखाते हुए न सिर्फ एएसआई के धक्का-मुक्की की। साथ ही उनकी वर्दी पर लगी नेम प्लेट भी खींसकर निकाली और उसे तोड़ दिया। यही नहीं भाजपा नेता पुलिस जवान का मोबाइल भी छीनकर फेंक दिया। भाजपा नेता ने यहीं बस नहीं किया। मेले के बाहर चाय की दुकान पर बैठे नगर पालिका उपाध्यक्ष उमेश जैन के साथ भी जिनेश जैन अपने गनर और अन्य लोगों ने मारपीट की। भाजपा नेता जिनेश जैन नगर पालिका अध्यक्ष अंजली जैन के पति हैं। बताया जा रहा है कि उसी ने अश्लील डांस का कार्यक्रम आयोजित कराया था। फिलहाल, एएसआई और उपाध्यक्ष की शिकायत पर पुलिस ने भाजपा नेता जिनेश जैन गनर बबलू शर्मा, बुलंद सिंह परिहार सहित 10-15 अज्ञात लोगों पर शासकीय कार्य में बाधा डालने और एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।

जंगल से निकलकर गांवों के करीब रम रहा चीता अग्नि, पालतू जानवर का किया शिकार

Cheetah Agni has come out of the jungle and is roaming around villages, hunting domestic animals श्योपुर ! एमपी के श्योपुर जिले में कूनो नेशनल पार्क से चीता अग्नि बाहर निकल आया है। उसने राजस्थान की सीमा से लगे चंबल नदी से लगभग 15 किमी दूर एक गांव में मवेशियों का शिकार किया। मंगलवार को इस घटना का एक वीडियो सामने आया। वीडियो में अग्नि एक खेत में एक गाय का शिकार करते हुए दिखाई दे रहा है। अग्नि पार्क की सीमाओं के आसपास घूम रहा है और अक्सर अंदर-बाहर आता-जाता रहता है। वनरक्षकों की टीम कर रही निगरानी वहीं, चार-पांच वनरक्षकों की एक निगरानी टीम उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही है। हालांकि, पार्क प्रबंधन ने आधिकारिक तौर पर इस घटना की पुष्टि नहीं की है। चार दिसंबर को खुले जंगल में छोड़े गए 4 दिसंबर, अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर अग्नि और वायु, जंगल में छोड़े जाने वाले पहले दो चीते थे। अब कूनो के खुले जंगलों में एक दर्जन चीते घूम रहे हैं। इनमें से कई पार्क की सीमाओं को पार कर आस-पास के गांवों में प्रवेश कर चुके हैं। इससे स्थानीय ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। शहर के करीब पहुंच गया था अग्नि चीता अग्नि श्योपुर के इलाकों में अक्सर दिखाई देता है। दो महीने पहले, अग्नि ने अपने आवास पर लौटने से पहले श्योपुर शहर (कूनो की सीमा से लगभग 60-65 किमी दूर) में चार दिन बिताए थे। पिछले महीने में, अग्नि को सिरोनी, ओछापुरा और जहांगीर जैसे इलाकों में बार-बार देखा गया है। वन विभाग एहतियात बरत रहा है। ग्रामीणों को उन इलाकों में प्रवेश करने से रोका जा रहा है, जहां चीता अक्सर आता है। क्योंकि अग्नि उस क्षेत्र में शिकार करना जारी रखे हुए है। मालिकों को दिया जाएगा मुआवजा अधिकारियों का कहना है कि चीते द्वारा मारे गए मवेशियों के मालिक को मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि अब एहतियात ज्यादा बरतने की जरूरत है, चीते अब पार्क की सीमाओं से बाहर निकलकर मानव बस्तियों के पास आ रहे हैं। इससे मनुष्यों और चीतों के बीच संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है। वन विभाग चीतों की गतिविधियों पर नज़र रख रहा है। साथ ही, ग्रामीणों को जागरूक करने की कोशिश कर रहा है ताकि वे इन खूबसूरत जानवरों से सुरक्षित रह सकें। इस घटना के बाद, वन विभाग ने चीतों की निगरानी बढ़ा दी है। वे यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि चीते पार्क की सीमा के अंदर ही रहें। अगर कोई चीता पार्क से बाहर निकलता है, तो उसे वापस लाने के लिए तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

Mahakal Temple Ujjain: गर्मी में बदलेगी बाबा महाकाल की दिनचर्या, ठंडे जल से करेंगे स्नान

उज्जैन(Mahakal Temple Ujjain)। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से भगवान महाकाल की दिनचर्या बदलेगी। मंदिर की पूजन परंपरा में इस दिन से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है। गर्मी के दिनों में राजाधिराज महाकाल ठंडे जल से स्नान करेंगे। इस दौरान प्रतिदिन होने वाली पांच में से तीन आरती का समय भी बदल जाएगा। पं. महेश पुजारी ने बताया महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा में ठंड व गर्मी का प्रभाव रहता है। इन दिनों सर्दी के अनुसार भगवान की सेवा पूजा की जा रही है। तड़के 4 बजे भस्म आरती में भगवान को गुनगुने गर्म जल से स्नान कराया जा रहा है। फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन के बाद गर्मी की शुरुआत मानी जाती है और चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से भगवान की सेवा पूजा गर्मी के अनुसार की जाने लगती है। इसमें तीन आरती का समय भी बदलेगा। आरती का वर्तमान समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा 15 मार्च से यह रहेगा आरती का समय महाकाल मंदिर में फाल्गुन पूर्णिमा से शरद पूर्णिमा तक छह माह गर्मी के अनुसार भगवान की सेवा पूजा की जाती है। वहीं, शरद पूर्णिमा से फाल्गुन पूर्णिमा तक सर्दी के अनुसार पूजन की परंपरा है। चैत्र कृष्ण प्रतिपदा पर 15 मार्च से गर्मी के अनुसार शुरू होने वाली पूजा अर्चना 7 अक्टूबर शरद पूर्णिमा तक चलेगी।

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