LATEST NEWS

उज्जैन में महाकाल के दर्शन पर 9 भव्य द्वार, सनातन का गौरव होगा प्रदर्शित

उज्जैन  भगवान महाकाल की नगरी ‘उज्जैन’, अपने प्रवेश मार्गों पर भव्य और प्रतीकात्मक पहचान गढ़ने जा रही है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने शहर के नए प्रमुख मार्गों पर 92.25 करोड़ लाख रुपये से नौ प्रवेश द्वार बनाने जा रहा है। यह परियोजना केवल शहरी सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उज्जैन की हजारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा, खगोल–कालगणना, सिंहस्थ संस्कृति और राजकीय गौरव को मूर्त रूप देना है। जब कोई श्रद्धालु, पर्यटक या आगंतुक उज्जैन की सीमा में प्रवेश करेगा, तो ये द्वार उसे यह एहसास कराएंगे कि वह किसी साधारण नगर में नहीं, बल्कि काल, धर्म और मोक्ष की राजधानी में कदम रख रहा है। योजना के तहत इंदौर रोड, देवास रोड, आगर रोड, मक्सी रोड, बड़नगर रोड और सिंहस्थ से जुड़े प्रमुख मार्गों सहित विभिन्न दिशाओं से शहर में प्रवेश करने वाले मार्गों पर ये द्वार निर्मित किए जाएंगे। प्रवेश द्वारों के आसपास सड़क चौड़ीकरण, सर्विस रोड, मीडियन, हरित पट्टी और ट्रैफिक सुव्यवस्था का भी समग्र विकास किया जाएगा, ताकि शहर की पहली छवि भव्य, सुव्यवस्थित और गरिमामयी बने। स्थापत्य में दिखेगा काल और संस्कृति का संवाद नौ प्रवेश द्वारों का डिजाइन पारंपरिक भारतीय स्थापत्य और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का संतुलित समन्वय होगा। निर्माण में बंसी पहाड़पुर के गुलाबी–सफेद पत्थर और जैसलमेर के पीले पत्थर का उपयोग किया जाएगा। द्वारों पर 10 से 50 मिमी तक की गहरी 3-डी नक्काशी की जाएगी, जिसमें पौराणिक प्रसंग, धार्मिक प्रतीक, शेर, हाथी, मानव आकृतियां और सांस्कृतिक चिन्ह उकेरे जाएंगे। रात्रिकालीन दृश्य प्रभाव के लिए आरजीबीडब्ल्यू लाइटिंग, एलईडी डाउनलाइटर और डीएमएक्स कंट्रोलर आधारित प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सभी द्वारों पर सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे, जिससे ये द्वार रात में भी उज्जैन की भव्य पहचान बनेंगे। यूडीए के अनुसार सभी स्वीकृतियों के बाद 18 महीनों में नौ प्रवेश द्वारों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण पूर्ण होने के बाद संबंधित एजेंसी को पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। जानिये, किस द्वार के लिए कितना बजट     अमृत द्वार 9.68 करोड़     पांचजन्य द्वार 12.50 करोड़     गज द्वार 8.51 करोड़     कालगणना द्वार 11.07 करोड़     उज्जैनी द्वार 6.48 करोड़     सिंहस्थ द्वार 6.48 करोड़     त्रिशुल द्वार 10.65 करोड़     विक्रमादित्य द्वार 13.58 करोड़     डमरू द्वार 13.29 करोड़ सदियों पुरानी परंपरा को मिलेगा नया स्वरूप इतिहासकारों के अनुसार उज्जैन में प्रवेश द्वारों की परंपरा वर्षों पुरानी रही है। प्राचीन काल में नगर की सीमाओं पर बने द्वार न केवल सुरक्षा के लिए होते थे, बल्कि नगर की पहचान, सांस्कृतिक गौरव और शक्ति के प्रतीक भी माने जाते थे। यूडीए की यह योजना उसी परंपरा को आधुनिक शहरी जरूरतों के अनुरूप पुनर्जीवित करने का प्रयास है। नामों की साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रासंगिकता     अमृत द्वार : समुद्र मंथन से निकले अमृत का प्रतीक, उज्जैन को मोक्ष और अमरत्व की भूमि के रूप में दर्शाता है।     पंचजन्य द्वार : भगवान कृष्ण के शंख ‘पंचजन्य’ से प्रेरित, धर्म और विजय का प्रतीक।     गज द्वार : भारतीय परंपरा में हाथी ऐश्वर्य, शक्ति और मंगल का संकेतक।     कालगणना द्वार : उज्जैन की विश्वविख्यात कालगणना और खगोल परंपरा की पहचान।     उज्जैनी द्वार : नगर की सांस्कृतिक आत्मा और ऐतिहासिक अस्मिता का प्रतीक।     सिंहस्थ द्वार : विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ कुंभ के माध्यम से उज्जैन की वैश्विक धार्मिक पहचान को दर्शाता है।     त्रिशूल द्वार : भगवान महाकाल के त्रिशूल का प्रतीक, सृजन–संरक्षण–संहार का दर्शन।     विक्रमादित्य द्वार : सम्राट विक्रमादित्य के न्याय, शौर्य और उज्जैन की राजकीय परंपरा का प्रतीक।     डमरू द्वार : शिव के डमरू से उद्भूत नाद, सृष्टि और समय चक्र का संकेत। (नोट : इन नौ भव्य प्रवेश द्वारों के साथ उज्जैन न केवल भौतिक रूप से भव्य दिखेगा, बल्कि अपनी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को भी आधुनिक स्वरूप में सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा।) 

महाकाल में कोटेश्वर भगवान के पूजन से शुरू शिवनवरात्रि पर्व, 10 दिनी महोत्सव के पहले दिन भगवान का श्रृंगार

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवनवरात्रि का पर्व शुक्रवार से सुबह से शुरू हुआ। कोटेश्वर महादेव के पूजन के साथ विशेष अनुष्ठान की शुरुआत हुई। गर्भगृह में पुजारी घनश्याम शर्मा के नेतृत्व में 11 ब्राह्मणों ने भगवान महाकाल का पंचामृत पूजन और एकादश-एकादशनी रूद्राभिषेक होगा। इस बार दिन का महाशिवनवरात्रि पर्व महाकाल मंदिर में मनाया जाएगा, मान्यता है कि जिस तरह माता की आराधना के 9 दिनों तक नवरात्री पर्व मनाया जाता है ठीक उसी तरह देश भर में सिर्फ उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में ही महाशिवनवरात्रि पर्व मनाए जाने की परम्परा निभाई जाती है। सुबह कोटेश्वर भगवान का पूजन अर्चन होगा। शाम को भगवान को सर्वप्रथम चंदन का उबटन लगाकर स्नान कराया गया। जलधारी पर हल्दी अर्पित की गई। दोपहर एक बजे भोग आरती के बाद अपराह्न तीन बजे पंचामृत पूजन के पश्चात भगवान का भांग से विशेष श्रृंगार किया जाएगा। भगवान को लाल, गुलाबी और पीले रंग के नए वस्त्र अर्पित कर शृंगारित। मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंड-माला और छत्र से सजाया जाएगा। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में 10 दिन तक शिवनवरात्रि महा उत्सव मनाया जायेगा। यह विशेष श्रृंगार 6 फरवरी से 15 फरवरी तक शिवनवरात्रि के सभी नौ दिनों तक चलेगा। प्रतिदिन भक्तों को भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन होंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।भगवान महाकाल के मंदिर में उत्सव का प्रारंभ कोटेश्वर महादेव के पूजन से होगा। शिवनवरात्रि पर 9 दिन यह शृंगार     6 फरवरी : चंदन, भांग शृंगार।     7 फरवरी :नवीन वस्त्र।     8 फरवरी : शेषनाग शृंगार।     9 फरवरी : घटाटोप शृंगार।     10 फरवरी : छबीना शृंगार।     11 फरवरी: होलकर शृंगार।     12 फरवरी : मनमहेश शृंगार।     13 फरवरी : उमा महेश शृंगार।     14 फरवरी : शिव तांडव शृंगार।     15 फरवरी: सप्तधान का मुखौटा। महाशिवरात्रि पर्व के लिए दर्शन व्यवस्था तय,10 लाख भक्त आएंगे महाशिवरात्रि महापर्व 2026 (15 फरवरी) पर भगवान महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस अवसर पर सामान्य श्रद्धालुओं को लगभग डेढ़ किलोमीटर और 250 रुपए की शीघ्र दर्शन रसीद या पासधारी श्रद्धालुओं को करीब एक किलोमीटर पैदल चलने के बाद भगवान महाकाल के दर्शन होंगे।

महाकाल के दर्शन पर अलका लांबा, बोलीं—हमारी पहचान नाम से नहीं, काम से है

उज्जैन  अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचीं। उन्होंने श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। अलका लांबा ने महाकाल मंदिर में पहले नंदी हाल और फिर देहरी से भगवान महाकाल के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने नंदी मंडपम में बैठकर ध्यान लगाया। धार्मिक वातावरण के बीच उनका दौरा आध्यात्मिक दिखा, लेकिन बाहर निकलते ही सुर सियासी हो गए। मीडिया से चर्चा में लांबा ने नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और राज्य सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नाम में “भगवान” जोड़ लेना काफी नहीं, असली पहचान काम से होती है। उनके मुताबिक, आज प्रदेश में कुछ नेताओं के काम समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने वाले नजर आ रहे हैं। उन्होंने भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप का उदाहरण देते हुए कहा कि शिव ने सृष्टि बचाने के लिए विष पिया था, लेकिन आज के कुछ सत्ताधारी समाज में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। उनका आरोप था कि इस तरह की भाषा और राजनीति लोगों के बीच नफरत बढ़ा रही है। लांबा ने यात्रा के दौरान देखी एक घटना का जिक्र करते हुए और गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इंदौर से उज्जैन आते समय उन्होंने एक ऑटो पर ऐसा प्रचार देखा जिसमें एक ऐसे दोषी अपराधी का महिमामंडन किया गया था, जिसे नाबालिग बेटियों से जुड़े जघन्य अपराधों में सजा हो चुकी है। इसे उन्होंने बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि अपराधियों को हीरो बनाकर पेश करना महिलाओं की सुरक्षा के लिए खतरनाक सोच है। महिला कांग्रेस की नेता ने साफ कहा कि उनकी पार्टी ऐसी मानसिकता के खिलाफ लगातार आवाज उठाएगी और समाज में अपराधियों की छवि चमकाने की कोशिशों का विरोध करेगी। धार्मिक यात्रा के बहाने शुरू हुआ यह दौरा, आखिरकार प्रदेश की सियासत में तीखा संदेश छोड़ गया।  

महाकाल की नगरी उज्जैन में बन रहा महाकाल-संस्कृति वन, लगेंगे 30 हजार पौधे, योग-ध्यान केंद्र होगा तैयार

उज्जैन  PM मोदी की पहल पर गुजरात में स्थापित संस्कृति वन की तर्ज पर उज्जैन में भी एक भव्य महाकाल संस्कृति वन का निर्माण किया जा रहा है। यह वन 12 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा और इसे कोठी रोड पर बनाया जा रहा है। इस वन के निर्माण के साथ पर्यावरण और संस्कृति को एक साथ जोड़ा जाएगा, ताकि आने वाले लोग न केवल प्रकृति से जुड़ सकें, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी समृद्ध हो सकें। संस्कृति वन का निर्माण महाकाल संस्कृति वन को कुल 13 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है। इस वन में 30 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिनमें औषधीय पौधों का भी समावेश है। यहां नीम, करंज, बरगद, सिंदूर, बेल, पाम, चंदन, बादाम और कदम जैसे पौधे लगाए गए हैं। यह वन केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के भी प्रतीक बनेगा। इस वन में योग केंद्र भी बनाया जाएगा, जहां लोग ध्यान और योग का अभ्यास कर सकेंगे। इसके अलावा, अवंतिका नगरी का इतिहास दर्शाने के लिए राजा विक्रमादित्य की सिंहासन बत्तीसी का भी निर्माण किया जा रहा है। यह वन धार्मिक यात्रा के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन का एक अनूठा केंद्र बनेगा। महाकाल संस्कृति वन में कुल 8 ब्लॉक्स होंगे, जिनका नाम कालिदास वन, शांति वन, जैव विविधता वन, नवग्रह वाटिका, सिंदूर वाटिका, रुद्राक्ष वाटिका जैसे आकर्षक नामों से रखा जाएगा। विक्रम टीले और सिंहासन बत्तीसी उज्जैन के महाकाल संस्कृति वन में सम्राट विक्रमादित्य की भव्य सिंहासन बत्तीसी का दर्शन भी होगा। विक्रम टीला भी यहां विशेष रूप से सुसज्जित किया जा रहा है, जहां फूलों से सुसज्जित एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा। यह दृश्य न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अनूठा होगा। स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण उज्जैन सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले उज्जैन में एक स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण किया जाएगा। 5,000 करोड़ रुपए की लागत से इस सिटी का निर्माण किया जाएगा, जिसमें इंटरकनेक्टेड चौड़ी सड़के, अंडरग्राउंड लाइटिंग, हॉस्पिटल, स्कूल, खूबसूरत चौराहे और सड़कों के बीच डिवाइडर जैसी सुविधाएं होंगी। यह स्थायी कुंभ सिटी सिंहस्थ कुम्भ के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक समृद्ध अनुभव प्रदान करेगी। सिंहस्थ से पहले एलिवेटेड ब्रिज की सौगात सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन को दो एलिवेटेड ब्रिज भी मिलेंगे, जिनकी मंजूरी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दी है। ये ब्रिज नागपुर की तर्ज पर बनाए जाएंगे और इस सड़क मार्ग को चौड़ा करेंगे, जिससे तीर्थयात्रियों की यात्रा सुगम हो सकेगी। महाकाल संस्कृति वन के अन्य आकर्षण महाकाल संस्कृति वन में सप्त सागरों के आसपास 84 शिवलिंग स्थापित किए जाएंगे, जिनकी परिक्रमा की जा सकेगी। इसके अलावा, यहां फूल घाटी, विद्या वाटिका, कालिदास अरण्य, नक्षत्र वाटिका, और चरक वाटिका जैसे अनेक आकर्षक स्थान होंगे। इसके साथ ही, भगवान श्री कृष्ण की 64 कलाओं का भी यहां दर्शन किया जा सकेगा। भविष्य की योजनाएं और सुविधाएं महाकाल संस्कृति वन में कैफेटेरिया, पार्किंग, व्हीलचेयर और ग्रीन शेड जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इसके अलावा, वन में शुद्ध ऑक्सीजन की आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाएगी। वन विभाग जल्द ही अहमदाबाद जाकर वहां के संस्कृति वन की स्टडी करेगा, ताकि यहां भी उसी मॉडल पर काम किया जा सके। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा एक नया रूप  महाकाल संस्कृति वन उज्जैन का एक अद्भुत और अनूठा धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनेगा। यह वन न केवल पर्यटकों को धार्मिक अनुभव प्रदान करेगा, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य करेगा। इस वन के साथ उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को एक नया रूप मिलेगा और यह स्थान तीर्थ यात्रियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन जाएगा। उज्जैन का फिर से लौटेगा प्राचीन वैभव, मोहन यादव की इच्छानुसार महाकाल क्षेत्र के सभी गेटों का किया जाएगा जीर्णोद्धार. डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप 2600 साल पुरानी परंपरा का वैभव अब महाकाल की नगरी उज्जैन में लौटने जा रहा है. प्राचीनकाल में बाबा महाकाल की नगरी में प्रवेश द्वार की परंपरा रही है. जिसका जीर्णोद्धार अब मुख्यमंत्री के निर्देशन में प्रशासन कराने जा रहा है. उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि प्राचीन समय में उज्जैन में जिस तरह के प्रवेश द्वारा हुआ करते थे, उसी तरह के द्वार फिर से बनाए जाएंगे. जिससे नगर में आने वाले पर्यटक महाकाल नगरी की प्राचीन परंपरा को जान सकेंगे. आइए जानते हैं ये द्वारा कैसे थे और इसका इतिहास क्या था. क्या कहते हैं इतिहास के जानकार? विक्रम विश्वविद्यालय में पुराविद प्रोफेसर डॉ. रमण सोलंकी बताते हैं कि “प्राचीन भारत में गोपुरम की परंपरा रही है. यह एक प्रकार का विशाकाय द्वार होता है. इसका अर्थ होता है ‘मंदिर का द्वार’. दक्षिण भारत के मंदिरों में ये आज भी मौजूद है. 2600 साल पहले उज्जैन एक राजधानी के रूप में हुआ करता था. यह 16 महाजनपदों में से एक अवंती महाजनपद की राजधानी थी, जिसके पहले राजा चंद प्रद्योत थे. उन्होंने अपने शासन काल में उज्जैन क्षेत्र में परिखाये और गोपुरम निर्माण करवाए, बाद में अशोक मौर्य जब राज्यपाल बनकर आए तो उन्होंने उनका जीर्णोद्धार करवाया.” राजा भोज ने बनवाया था चौबीस खंबा प्रवेश द्वार डॉ रमण सोलंकी आगे बताते हैं कि “सम्राट विक्रमादित्य ने अपने कार्यकाल में इस परंपरा को आगे बढ़ाया. इसके अलावा परमारों के सम्राट राजा भोज ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कई द्वारों का निर्माण कराया. राजा भोज द्वारा बनवाया गया चौबीस खंबा प्रवेश द्वार आज भी मौजूद है. इस पर देवी महामाया और देवी महालया विराजमान हैं. महाकाल के द्वारा का कराया जाएगा जीर्णोद्धार  मुगल शासक अकबर ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दानी गेट, सती गेट, केडी गेट बनवाए. अब मोहन यादव इन द्वारों के जीर्णोद्धार और निर्माण कराने जा रहे हैं. इससे 2600 साल पुरानी परंपरा का वैभव फिर से लौटेगा. इससे यहां आने वाले श्रद्धालु महाकाल नगरी के इस सुनहरे इतिहास को जान सकेंगे और देख सकेंगे.” करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है महाकाल का दरबार दरअसल, विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल का धाम लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का खास केंद्र है. मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पूर्व का बताया जाता है. ज्योतिर्लिंग होना मतलब स्वयंभू … Read more

बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन मांगी देश में खुशहाली का आशीर्वाद

उज्जैन  केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह शुक्रवार को उज्जैन प्रवास के दौरान विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर भगवान के दर्शन करने पहुंचे। यहां उन्होंने चांदी द्वार से बाबा महाकाल का पूजन अर्चन किया और नंदी हॉल मे ध्यान भी लगाया। महाकालेश्वर मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह बाबा महाकाल के दर्शन के दौरान भक्ति में लीन नजर आए। उन्होंने चांदी द्वारा से बाबा महाकाल का पूजन अर्चन किया। नंदी हॉल में पहुंचकर ध्यान लगाया। फिर नंदी जी का पूजन अर्चन कर उनके कानों में अपनी मनोकामना भी कही। इस दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक प्रतीक द्विवेदी द्वारा उनका सम्मान किया गया। बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद राजीव रंजन सिंह ने मीडिया से कहा कि यहां की दर्शन व्यवस्था काफी अच्छी है। मुझे यहां पर आकर पॉजिटिव एनर्जी का अहसास हुआ और मेरा जीवन धन्य हो गया। ललन सिंह के नाम से पहचाने जाते हैं राजीव रंजन सिंह राजीव रंजन सिंह को ललन सिंह के नाम से जाना जाता है। वे एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो 2024 से पंचायती राज के 11वें मंत्री और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी के तीसरे मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। वे जनता दल (यूनाइटेड) से 17वीं लोकसभा में मुंगेर का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद भी हैं। वे 31 जुलाई 2021 से 29 दिसंबर 2023 तक जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) के राष्ट्रीय पार्टी अध्यक्ष थे। वे जेडी(यू) की बिहार इकाई के पूर्व अध्यक्ष भी थे। मई 2014 के लोकसभा चुनावों में हार के बाद जून 2014 में उन्हें बिहार विधान परिषद के सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया। वे भारत की 15वीं लोकसभा के सदस्य थे और बिहार के मुंगेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। उन्होंने भारत की 14वीं लोकसभा में बेगूसराय निर्वाचन क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व किया। ललन सिंह मुंगेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 2024 का लोकसभा चुनाव जीते। 

उज्जैन में प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई , जब आंख खुली तो बुलडोजर अपनी कार्रवाई में लग चुका था

उज्जैन  श्री महाकालेश्वर मंदिर से सटे इलााके में बुधवार को फिर बुलडोजर गरजा. थाना महाकाल क्षेत्र अंतर्गत आने वाली बेगमबाग कॉलोनी में अवैध निर्माण को हटाया गया. यहां पर 23 मई को भी बुलडोजर की कार्रवाई हुई थी. इस दौरान 3 प्रॉपर्टी ध्वस्त करने के बाद 4 और अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए. इस दौरान शांति बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल भी तैनात रहा. प्रशासन ने कुल 28 प्रॉपर्टी चिह्नित की गौरतलब है कि बेगमबाग कॉलोनी श्री महाकाल मंदिर से 500 मीटर के दायरे में आती है. महाकालेश्वर मंदिर जाने के लिए यहीं से मुख्य रास्ता भी है. यहां ब्रिज का निर्माण, सड़क चौड़ीकरण व अन्य कार्य किए जाने हैं. इस क्षेत्र में उज्जैन विकास प्राधिकरण ने कुल 28 मकान-दुकान चिह्नित किए हैं. इन प्रॉपर्टी के मालिकों ने नियम-शर्तों का उल्लंघन किया है, जिन्हें ध्वस्त किया जाना है. सभी 28 प्रॉपर्टी संचालकों ने न्यायालय से स्टे लिया है, जिसकी समय सीमा खत्म होती जा रही. अब तक कुल 7 प्रॉपर्टी ध्वस्त की जा चुकी हैं. प्रशासन का कहना है कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. महाकाल क्षेत्र में सुबह से गरजा बुलडोजर  उज्जैन विकास प्राधिकरण सीईओ संदीप सोनी ने बताया “श्री महाकाल मंदिर क्षेत्र में बेगमबाग मोहल्ला है, जहां 1998 में विकास प्राधिकरण ने जमीन दुकानें लीज पर दी थीं. सर्वे में पाया गया कि लीज रिन्यू नहीं करवाई गई. दुकानों के साथ ही इस एरिया को रहवासी भी बना लिया. नोटिस दिए पर जवाब नहीं मिला तो अब ध्वस्तीकरण के लिए 7 दिन में खाली करने के नोटिस जारी किए गए थे. अब कार्रवाई की जा रही है.” IPS राहुल देशमुख ने बताया “शांति बनाए रखने के लिए 250 से अधिक पुलिस बल तैनात है. कार्रवाई शांतिपूर्वक जारी है.” 

श्रावण मास में रूद्रसागर पर बनाया गया नया पुल भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट का मुख्य विकल्प होगा

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण मास में भक्तों को सम्राट अशोक सेतु के रास्ते मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। रूद्रसागर पर बनाया गया नया पुल भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट का मुख्य विकल्प होगा। मंदिर प्रशासन द्वारा बनाए जा रहे दर्शन प्लान में इस विषय पर प्रमुखता से विचार किया जा रहा है। महाकाल मंदिर के रूद्रसागर पर उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा 200 मीटर लंबा व 9 मीटर चौड़ा अत्याधुनिक पुल का निर्माण किया है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने पुल का उद्घाटन कर इसे सम्राट अशोक सेतु नाम दिया है। हालांकि वर्तमान दर्शन व्यवस्था पूर्व निर्धारित मार्गों से सुचारू रूप से संचालित होने के कारण फिलहाल इस पुल का उपयोग नहीं किया जा रहा है। श्रावण मास में भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट करने में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। चलित भस्म आरती व्यवस्था श्रावण मास में चलित भस्म आरती व्यवस्था में सम्राट अशोक सेतु मुख्य भूमिका निभा सकता है। क्योंकि श्रावण मास में सामान्य दिनों में रात 3 बजे तथा प्रत्येक रविवार को रात 2.30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे, पश्चात भस्म आरती होगी। रात्रि के समय श्रद्धालु चारधाम पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते इस पुल से सीधे मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। यह रास्ता वर्तमान मार्ग से करीब डेढ़ किलो मीटर छोटा भी है। इससे होकर दर्शनार्थी शीघ्र मंदिर में दर्शन कर बाहर निकल सकते हैं। अभी इस मार्ग से मिल रहा मंदिर में प्रवेश वर्तमान में सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते श्री महाकाल महालोक के नंदी द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। यहां से श्रद्धालु महालोक में भ्रमण करते हुए श्री मानसरोवर फैसिलिटी सेंटर से टनल के रास्ते मंदिर परिसर में होते हुए गणेश व कार्तिकेय मंडपम् से भगवान महाकाल के दर्शन कर पा रहे हैं। साढ़े 22 करोड़ की लागत से बना नया पुल सम्राट अशोक सेतु के निर्माण पर स्मार्ट सिटी कंपनी ने करीब साढ़े 22 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस पुल का मध्य भाग काफी चौड़ा है। यहां खड़े होकर श्रद्धालु रूद्रसागर का मनोरम दृश्य देख सकते हैं। पुल पर आकर्षक लाइट लगाई गई है। रात्रि के समय इस पुल से गुजरना एक अलग ही आनंददायक अनुभव रहेगा। डायवर्ट रूट के रूप में होगा उपयोग     सम्राट अशोक सेतु महाकाल मंदिर में प्रवेश का नया मार्ग है। यह वर्तमान मार्ग से छोटा रास्ता है, भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायर्वट में इसका उपयोग होगा। श्रावण के दर्शन प्लान में इस पर विचार चल रहा है। – एसएन सोनी, उप प्रशासक महाकाल मंदिर  

राजा चंद्र प्रद्योत ने उज्जैन में महाकाल मंदिर पहुंच मार्गों पर भव्य द्वार को पुनर्जीवित किया जा रहा

उज्जैन  भगवान महाकाल के दर्शन करने आने वाले भक्त अब भव्य द्वारों से होकर मंदिर पहुंचेंगे। प्रबंध समिति ने महाकाल मंदिर की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर विशाल द्वार बनवाने का निर्णय लिया है। मंदिर के आसपास भव्य द्वार बनाने की परंपरा 2600 साल पुरानी है। अलग-अलग कालखंड में राजा-महाराजा मंदिर के पहुंच मार्गों पर द्वार बनवाते रहे हैं। आज भी चौबीस खंभा व महाकाल द्वार इसके प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुसार मंदिर समिति इतिहास का पुनर्लेखन भी करा रही है। अशोक मौर्य ने कराया था द्वारों का जीर्णोद्धार धर्मधानी उज्जैन में दुर्ग व द्वार की परंपरा छठी शताब्दी ईसा पूर्व से चली आ रही है। पुराविद डॉ. रमण सोलंकी ने बताया कि राजा चंद्र प्रद्योत ने महाकाल मंदिर पहुंच मार्गों पर भव्य द्वार बनवाए थे। जब अशोक मौर्य उज्जैन आए तो उन्होंने द्वारों का जीर्णोद्धार कराया। इसके बाद सम्राट विक्रमादित्य ने इनका संरक्षण किया। राजा भोज के शासन में भी यह परंपरा जीवित रही और उन्होंने चौबीस खंभा द्वार बनवाया। पुराने समय में इसी द्वार से भक्त महाकाल दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश किया करते थे। आज भी यह द्वार नगरीय सभ्यता के गौरवशाली इतिहास की गाथा सुना रहा है। भव्य और मनोरम महाकाल द्वार महाकाल मंदिर के उत्तर में महाकाल द्वार स्थित है। रामघाट पर शिप्रा स्नान के बाद श्रद्धालु इसी द्वार से मंदिर में प्रवेश करते थे। इस द्वार का निर्माण मध्यकाल में हुआ है। द्वार के दोनों ओर भगवान गणेश की मूर्ति विराजित है। सुरक्षा के लिए देवी-देवताओं की प्रतिष्ठा राजा महाराजा नगर की सुरक्षा के लिए द्वारा का निर्माण कराते थे। यह द्वार आक्रांताओं के आक्रमण से नगर को सुरक्षित रखते थे। व्याधियों से रक्षा के लिए भी इन द्वारों का विशेष महत्व था। नगर प्रवेश द्वारों पर देवी-देवताओं की स्थापना की जाती थी। चौबीस खंभा, महाकाल द्वार, सती गेट सहित नगर में मौजूद द्वारों पर देवी-देवता विराजित हैं। अनादिकाल से समय-समय पर इनका पूजन किया जाता है। आज भी नगर की सुख-समृद्धि के लिए चौबीस खंबा स्थित माता महामाया व महालया की शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर नगर पूजा की जाती है। प्रबंध समिति की बैठक में निर्णय कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में आठ मई को आयोजित मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में महाकाल मंदिर पहुंच मार्गों पर द्वार बनाने का निर्णय लिया गया है। समिति उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से इन द्वारों का निर्माण कराएगी। योजना में यह खास     बड़ा गणेश, हरसिद्धि, शक्ति पथ पर होगा विशाल द्वारों का निर्माण।     नीलकंठ, नंदी, धनुष तथा शहनाई द्वार पर धातु के कलात्मक द्वार बनेंगे।  

महाकाल मंदिर में भस्मआरती में बैठने वालों की संख्या कम की जाएगी, चलित भस्मआरती के जरिए श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाएंगे

उज्जैन महाकाल मंदिर में भस्मआरती में बैठने वालों की संख्या कम की जाएगी। चलित भस्मआरती के जरिए श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाएंगे। गुरुवार को मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर और समिति अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह ने की। अभी भस्मआरती में 1700 श्रद्धालु शामिल होते हैं। मंदिर में दान किए गए सोने-चांदी के आभूषणों का मूल्यांकन अब मंदिर में ही होगा। इसके लिए मशीन और ऑपरेटर लगाए जाएंगे। दान में मिली ई-कार्ट के लिए चार्जिंग स्टेशन और पार्किंग स्थल बनाए जाएंगे। मंदिर की सभी सुविधाओं की जानकारी अब रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मंदिर गेटों पर मिलेगी। महाराजवाड़ा और महाकाल परिसर को जोड़ने के लिए रिटेनिंग वॉल बनेगी। हर प्रवेश द्वार पर सुरक्षा गेट लगाए जाएंगे। उज्जैन में गीता भवन की स्थापना को समिति ने मंजूरी दी।  

साउथ एक्टर यश आज महाकालेश्वर के मंदिर पहुंचे, बाबा महाकाल के न सिर्फ दर्शन-पूजन किए

उज्जैन  मध्य प्रदेश में स्थित महाकाल की नगरी उज्जैन में सोमवार तड़के बाबा के भक्तों में उस समय उत्साह और भी बढ़ गया, जब उनके बीच साउथ की सुपरहिट फिल्म केजीएफ फेम रॉकी भाई उर्फ अभिनेता यश भी बाबा के दर्शन-पूजन करते नजर आए। जी हां, साउथ एक्टर यश आज उज्जैन स्थित महाकालेश्वर के मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने बाबा महाकाल के न सिर्फ दर्शन-पूजन किए, बल्कि भस्म आरती में भी शामिल हुए। वहीं, मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने महाकाल के दरबार में आने का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा- यहां आना अविश्वसनीय रहा।  भस्म आरती में शामिल होने के बाद यश ने चांदी द्वार से बाबा महाकाल के दर्शन-पूजन किए, साथ ही माथा टेका। पूजन आकाश पुजारी ने संपन्न कराया। मंदिर के नंदी हॉल में बैठकर अभिनेता शिव साधना करते नजर आए। चांदी द्वार से उन्होंने माथा टेककर बाबा का आशीर्वाद लिया। दर्शन के बाद पुजारी ने अभिनेता को प्रसाद स्वरूप लाल रंग का महाकाल नाम का छपा पटका भेंट किया। बोले- दर्शन करने का अनुभव अविश्वसनीय रहा वहीं, मीडिया से चर्चा के दौरान सुपरस्टार यश ने कहा, महाकाल का दर्शन करके बहुत अच्छा लगा। यहां दर्शन करने का अनुभव अविश्वसनीय रहा। मैं यहां की व्यवस्थाएं देखकर बेहद खुश हूं। सभी श्रद्धालुओं को देखकर बहुत अच्छा लगा।

महाकाल मंदिर में नियुक्ति से पहले पुलिस वेरिफेक्शन आवश्यक

उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थापित महाकालेश्वर मंदिर देश ही नहीं विदेशों में भी फेमस है. महाकाल मंदिर में हर दिन बड़ी हस्तियों से लेकर आम श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. वहीं महाकाल मंदिर के दर्शन और प्रसाद को लेकर भी नए-नए नियम आते रहते हैं. इसी तरह खबर है कि ठगी से बचने के लिए महाकालेश्वर मंदिर में अब कोई भी नई नियुक्ति बिना पुलिस वेरिफिकेशन के नहीं हो सकेगी. नियुक्ति से पहले चेक होगा पुलिस रिकॉर्ड एसपी प्रदीप शर्मा ने इस संबंध में महाकाल मंदिर के प्रशासक को एक आधिकारिक पत्र भेजा है. पत्र में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति की नियुक्ति से पहले उसका पुलिस रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से जांचा जाएगा. यह कदम हाल ही में सामने आए ठगी और अवैध वसूली के मामलों के बाद उठाया गया है. एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि “ठगी को देखते हुए पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है.” मंदिर में ठगी के मामलों के बाद लिया फैसला कुछ समय पहले दर्शन और भस्म आरती के नाम पर श्रद्धालुओं से धोखाधड़ी के मामलों में 14 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई थी. इन आरोपियों में मंदिर के कर्मचारी भी शामिल थे. वहीं भस्म आरती बुकिंग और दर्शन के नाम पर भी फर्जीवाड़ा सामने आया था. जिसमें मंदिर की आउटसोर्स कंपनी के कर्मचारियों की संलिप्तता पाई गई. इन मामलों में शामिल कर्मचारियों को हाल ही में 90 दिनों बाद जमानत मिली है. मंदिर प्रशासन को सतर्क रहने की अपील इन घटनाओं को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने मंदिर समिति को सतर्क रहने की सलाह दी है. अब हर नई नियुक्ति से पहले पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया गया है, क्योंकि लगातार देखने में आ रहा था कि महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के साथ ठगी हो रही थी. इसी के साथ अब महाकालेश्वर मंदिर में नई भर्ती होने से पहले पुलिस सत्यापन करना जरूरी होगा. इसको लेकर उज्जैन एसपी ने पत्र लिखकर महाकाल प्रबंधन समिति को कहा है.

ज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के शीश पर कलशों की गलंतिका बांधी, ज्येष्ठ पूर्णिमा तक चलेगी परंपरा

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से भगवान महाकाल के शीश मिट्टी के कलशों से शीतल जलधारा प्रवाहित करने की शुरुआत हो गई है। सुबह 6 बजे पुजारियों ने पवित्र नदियों का आवाह्न कर भगवान के शीश 11 मिट्टी के कलशों की गलंतिका बांधी। प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में भी भगवान मंगलनाथ को वैशाख की भीषण गर्मी में ठंडक प्रदान करने के लिए गलंतिका बांधने की शुरुआत हो गई है। पं.महेश पुजारी ने बताया महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा में वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक पूरे दो माह तेज गर्मी रहने की मान्यता है। इन 60 दिनों में भगवान महाकाल को ठंडक प्रदान करने के लिए भगवान के शीश मिट्टी से बनी मटकियों से जलधारा प्रवाहित करने की परंपरा है। दो माह तक प्रतिदिन सुबह 6 से शाम 4 बजे तक गलंतिका बांधी जाती है। रविवार को इसकी शुरुआत हुई। पुजारियों ने गंगा, यमुना, कांवेरी, नर्मदा, शिप्रा आदि नदियों का आवाह्न कर उन्हीं के नाम से 11 कलश की गलंतिका बांधी। पंचामृत पूजन के बाद बांधी गलंतिका मंगल ग्रह की जन्म स्थली कहे जाने वाले प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में रविवार को गलंतिका बांधी गईं। सुबह गादीपति महंत जितेंद्र भारती द्वारा भगवान का पंचामृत अभिषेक पूजन कर भात अर्पण किया गया। इसके बाद भगवान के शीश गलंतिका बांधी गई। महंत भारती ने बताया भगवान मंगलनाथ अंगारकाय अर्थात अंगारे के समान कांति वाले देव हैं। इनकी प्रकृति उष्ण मानी जाती है। इसलिए जल, पंचामृत तथा भात अर्पण करने से वे प्रसन्न होते हैं। गर्मी में भगवान को शीतल सुगंधित द्रव्य, शीतल पुष्प आदि अर्पण करने का भी महत्व है।

महाकाल के शिखर पर अब लहराएगा ब्रह्मध्वज, मप्र के प्रमुख मंदिरों-संस्थानों पर भी लगाएंगे ध्वज, नीम जल से होगा बाबा का अभिषेक

उज्जैन  हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में एक विशेष धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। इस साल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर मंदिर के मुख्य शिखर पर सूर्य चिन्ह वाला केसरिया ब्रह्म ध्वज फहराया जाएगा। यह ध्वज प्रदेशभर के प्रमुख मंदिरों और संस्थाओं में भी लगाया जाएगा। साथ ही मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना, भोग आरती और पंचांग पूजन की प्रक्रिया भी होगी।  मंदिर के शिखर पर फहराया जाएगा ब्रह्म ध्वज हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा पर श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर ध्वज बदलने की परंपरा का पालन किया जाता है। इस बार मंदिर के शिखर पर ब्रह्म ध्वज को फहराया जाएगा, जो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से प्रदान किया गया है। पिछले दिनों भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व मंत्रिपरिषद ने ब्रह्म ध्वज व विक्रम संवत पुस्तिका का लोकार्पण किया है। इसके बाद से यह ध्वज श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। साथ ही सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ ने इस ध्वज को प्रदेश के प्रमुख मंदिरों और शासकीय व अशासकीय संस्थानों में भी लगाने की पहल की है। श्री महाकालेश्वर मंदिर के साथ-साथ इस ध्वज को प्रदेशभर के प्रमुख स्थानों पर फहराया जाएगा। 65 वर्षों तक ध्वज को पूजा स्थान पर रखा था सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्री राम तिवारी ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विक्रम संवत ज्ञान, संस्कृति, विज्ञान और अनुसंधान का महापर्व है। इस दिन ब्रह्म ध्वज का फहराया जाना एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कड़ी को जोड़ता है। उन्होंने बताया कि इस ध्वज को पं. सूर्यनारायण व्यास परिवार से प्रेरणा लेकर तैयार किया गया, जिन्होंने 65 वर्षों तक इस ध्वज को सुरक्षित पूजा स्थान पर रखा था। गुड़ी पड़वा पर विशेष पूजा और अभिषेक 30 मार्च को गुड़ी पड़वा के दिन श्री महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया जाएगा। महाराष्ट्रीयन पंचांग के अनुसार, भगवान महाकाल का नीम मिश्रित जल से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद, मंदिर में नई ध्वज का फहराया जाएगा। इस अवसर पर विशेष भोग आरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्री खंड और पूरणपोली का भोग भगवान को अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही, मंदिर के नैवेद्य कक्ष में गुड़ी आरोहण की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। गुड़ी पड़वा पर इस बार मंदिर में पंचांग पूजन भी किया जाएगा, जिससे यह दिन और भी विशेष हो जाएगा।

महाकाल की शरण में केएल राहुल, आईपीएल में सफलता के लिए आशीर्वाद लिया

उज्जैन  देश के प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास और इंडियन क्रिकेटर केएल राहुल सोमवार को उज्जैन पहुंचे. कुमार विश्वास व केएल राहुल ने यहां महाकालेश्वर मंदिर पुहंच बाबा महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया. वहीं डॉ. कुमार विश्वास ने नंदी हॉल में बैठक भगवान महाकाल का ध्यान लगाया. हमारी पीढ़ियों पर महाकाल की कृपा : कुमार विश्वास सोमवार को उज्जैन पहुंचे डॉ. कुमार विश्वास ने तकरीबन 15 मिनट तक महाकाल का ध्यान लगाया और पूजा अर्चना की. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद डॉ. विश्वास ने कहा, ” मैं उनसे क्या मांगू वो तो सबका मन जानते हैं. बाबा महाकाल की कृपा हमारे परिवार पर पीढ़ियों-शताब्दियों से बनी हुई है. जब भी अवसर मिलता है, मैं यहां आकर बाबा के चरणों में शीश नवाता हूं. बच्चे भी प्रवास पर हैं और जैसे ही वापस लौटेंगे वे भी बाबा की शरण में माथा टेकने आएंगे.” इंदौर में अपने-अपने राम गौरतलब है कि डॉ. कुमार विश्वास इन दिनों इंदौर प्रवास पर हैं. वे यहां इंदौर के गुजराती इनोवेटिव कॉलेज में ”अपने-अपने राम’ कार्यक्रम में राम कथा सुना रहे हैं. रविवार को कार्यक्रम के पहले दिन के समापन के बाद डॉ. विश्वास महाकाल के दर्शन करने के लिए रवाना हुए. परिवार के साथ पहुंचे थे केएल राहुल वहीं क्रिकेटर केएल राहुल ने भी परिवार के साथ भगवान महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया. बता दें कि क्रिकेटर केएल राहुल कई बार बड़ी क्रिकेट सीरीज से पहले और बाद में महाकाल के दर्शन करने पहुंचते हैं. चैंपियंस ट्रॉफी के बाद केएल राहुल फिर यहां पहुंचे.  बाबा महाकाल के दर्शन कर मांगी सफलता की कामना महाकालेश्वर मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि केएल राहुल विशेष रूप से बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आए थे। उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर अपने मस्तक पर तिलक लगाया और गले में आंकड़े की माला पहनी। पूजन के बाद वे नंदी हॉल पहुंचे और नंदी महाराज के कानों में अपनी मनोकामना कही। बाबा महाकाल के अनन्य भक्त हैं केएल राहुल बताया जाता है कि केएल राहुल बाबा महाकाल के अनन्य भक्त हैं और समय मिलने पर उज्जैन आकर महाकाल के दर्शन करते हैं। इससे पहले भी वे अपनी पत्नी, अभिनेत्री आथिया शेट्टी के साथ बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। आईपीएल में नई टीम से खेलेंगे केएल राहुल जल्द ही शुरू होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के लिए केएल राहुल पूरी तरह तैयार हैं। इस सीजन में वे दिल्ली कैपिटल्स टीम की ओर से खेलते नजर आएंगे। बाबा महाकाल के दर्शन के दौरान उन्होंने अपनी टीम की शानदार परफॉर्मेंस के लिए प्रार्थना की।  

महाकालेश्वर मंदिर में काम करने वाले सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारी हर महीने वेतन के लिए तरस रहे

उज्जैन मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर मंदिर में काम करने वाले सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारी हर महीने वेतन के लिए तरस रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि रक्षाबंधन, दशहरा, दीपावली और अब होली जैसे बड़े त्योहार भी उनके लिए मुश्किल भरे साबित हो रहे हैं। समय पर वेतन न मिलने से उनकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना कठिन हो गया है, लेकिन मंदिर प्रशासन इस पर ध्यान देने के बजाय चुप्पी साधे बैठा है। हर महीने देरी से मिल रहा वेतन मंदिर में सफाई, सुरक्षा, तकनीकी और अन्य सेवाओं में लगे करीब 1500 कर्मचारी क्रिस्टल और केएसएस जैसी आउटसोर्स कंपनियों के माध्यम से नियुक्त किए गए हैं। अनुबंध के अनुसार, उन्हें हर महीने की 5 तारीख तक वेतन मिल जाना चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि वेतन कभी 15 तारीख के बाद तो कभी 25 तारीख तक टल जाता है। त्योहारों पर अधूरी रह जाती हैं जरूरतें समय पर वेतन न मिलने की वजह से त्योहारों पर कर्मचारियों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। न तो वे घर की जरूरतें पूरी कर पाते हैं और न ही परिवार के साथ त्योहार मना पाते हैं। इस साल भी रक्षाबंधन से लेकर होली तक उनकी आर्थिक परेशानियां कम नहीं हुईं, जिससे उनकी खुशियां फीकी पड़ गईं। प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ी समस्या मंदिर प्रशासन इस पूरे मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। कर्मचारियों से ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की उम्मीद की जाती है, लेकिन उनके वेतन को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। वेतन में देरी की वजह से कई बार कर्मचारियों पर दर्शनार्थियों से अवैध वसूली के आरोप भी लगे हैं, जिन पर कार्रवाई भी हुई है। नियंत्रण की कमी, बढ़ता असंतोष मंदिर समिति के वरिष्ठ अधिकारियों को इस समस्या की पूरी जानकारी है, लेकिन आउटसोर्स कंपनियों पर उनका कोई प्रभाव नहीं दिख रहा। कर्मचारी भी मजबूरी में शोषण सहने को मजबूर हैं, क्योंकि नौकरी छोड़ने का जोखिम नहीं उठा सकते। अगर समय पर वेतन नहीं मिला, तो आने वाले दिनों में असंतोष और बढ़ सकता है, जिससे मंदिर की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो सकती है।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet