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वन बल प्रमुख को अपने गृह नगर बालाघाट के डीएफओ के खिलाफ मिली गड़बड़ियों की गंभीर शिकायतें

Forest Force Chief received serious complaints of irregularities against the DFO of his home town Balaghat. भोपाल । वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव अपने गृह नगर बालाघाट दौरे पर गए थे। वहां से लौटे तो उत्तर बालाघाट डीएफओ अभिनव पल्लव के खिलाफ कई गंभीर शिकायतों का पुलिंदा उनके हाथों में था। यह शिकायत बालाघाट वन मंडल में सामग्री सप्लाई से लेकर कंस्ट्रक्शन तक के कार्य एक ही ठेकेदार को दिए जाने से संबंधित है। डीएफओ अभिनव पल्लव पिछले तीन सालों में आधे-अधूरे निर्माण कार्य और गुणवत्ता विहीन सामग्री लेकर करोड़ के भुगतान कर दिए गए। इस उम्मीद के साथ यह शिकायत वन सुरक्षा समिति लामटा के अध्यक्ष शत्रुघ्न असाटी ने वन बल प्रमुख से की कि जांच तो अवश्य और निष्पक्ष होगी।विभाग के मुखिया श्रीवास्तव को दिए गए शिकायत में वन सुरक्षा समिति लामटा के अध्यक्ष शत्रुघ्न असाटी ने आरोप लगाया है कि वित्तीय वर्ष-2024 में मियाद वृध्दिकर फहीम खान की फर्म एवन कंस्ट्रक्शन को दिया गया है। वित्तीय वर्ष-2023 में जीईएम में बिड टेण्डर 31 लाख का मटेरियल रखकर वर्क आर्डर 25 से अधिक न देते हुए चार गुना दिया गया। वित्तीय वर्ष-2021-22 में मियाद वृध्दि कर उत्तर उत्पादन वनमण्डल में वर्कआर्डर कर डिपो में रोड वनरक्षक नाका लेबरहार्ट का मटेरियल सप्लाई दिया गया। Read more : https://saharasamachaar.com/removal-of-cf-in-bhopal-forest-division-against-the-cadre-and-posting-of-junior-dfo-tainted/ नियम विरुद्ध दिए हैंड पंप खनन के आरोप वित्तीय वर्ष-2023-24 में उत्तर एवं दक्षिण सामान्य लघु वनोपज संघ तेंदुपत्ता डीएफओ अभिनव पल्लव ने नलकूप खनन का कार्य बिना निविदा कराये सीधे फहीम खान की फर्म एवन कन्सट्रक्शन को दिया गया। इससे वन विभाग को करोंड़ों भ्रष्टाचार हुआ। वित्तीय वर्ष 2023-24 में लघुवनोपज तेन्दूपत्ता संघ में अधोसंरचना के कार्य, सामुदायिक भवन, सभा मंच, सी.सी. रोड, स्टाप डेम, रपटा, पुलिया पाईप पुलिया वन रकक्षक नाका में आधे से अपूर्ण की स्थिति में है। जिनका भुगतान 90 प्रतिशन पूर्ण हो चूका है। कैंपा कार्य में भी गड़बड़ झाला वित्तीय वर्ष-2021-22, 2022-23 और 2023-24, में कैम्पा से भवन निर्माण सभी कार्यो में रेन्जर द्वारा फहीम खान के साथ मिलकर लेबर मिस्त्री, बाउचर में बालाघाट, भरवेली, मटेरा के एकाउण्ट लगाकर फर्जी पेमेंट निकालकर ठेकेदार के साथ बंदरबांट गई।गुणवत्ताहीन मटेरियल का उपयोग से सीलन, दरारे, छत टपक रही है। मटेरियल टेस्टिंग मध्यप्रदेश के बाहर लेब से कराई जाये। बिना निविदा बुलाए वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 में वनपरिक्षेत्र अधिकारी, उप वन मण्डलाधिकारी और वन मण्डलाधिकारी के ऑफिस मरम्मत एवं रेवोवेशन के कार्य में लाखों रूपयें के कार्य कराए गए।-कार्य आवंटन के नाम पर तबादलेउत्तर वन मंडल बालाघाट में पदस्थ डीएफओ अभिनव पल्लव के खिलाफ अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के नियम 10 के अंतर्गत कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है। इन पर आरोप है कि जब वे 2019-20 में ग्वालियर में पदस्थ थे तब इन्होंने 83 कर्मचारियों की कार्य आवंटन के नाम पर तबादले किए थे। इनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था। स्पष्टीकरण का जवाब संतोषजनक नहीं होने के बाद अभिनव पल्लव के खिलाफ कार्यवाही का निर्णय लिया गया। दिलचस्प पहलू यह भी है कि ग्वालियर में ही पदस्थ बृजेश श्रीवास्तव के खिलाफ भी कार्य विभाजन के नाम पर स्थानांतरण किए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

कैडर के विरुद्ध भोपाल वन मंडल में सीएफ को हटाकर दागी और जूनियर डीएफओ की पोस्टिंग

Removal of CF in Bhopal Forest Division against the cadre and posting of junior DFO tainted उदित नारायणभोपाल। लंबे अरसे बाद पिछले दिनों जंगल महकमे में 38 आईएफएस अफसर के स्थानांतरण के आदेश जारी हुए। इसमें कई विसंगतियां उजागर हुई। मसलन, भारतीय वन सेवा के कैडर में भोपाल वन मंडल में वन संरक्षक स्तर के अधिकारी की पदस्थापना का प्रावधान है किंतु विभाग ने वन संरक्षक आलोक पाठक को हटाकर 2018 बैच के आईएफएस लोकप्रिय भारती की पदस्थापना कर दी गई। https://saharasamachaar.com/mp-news-transfer-of-29-assistant-forest-conservators-and-forest-rangers/ जबकि भारती पर अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने की वजह वेतन – भत्तों के फर्जी भुगतान होने का आरोप है। वहीं मैनेजमेंट के खेल में योग्य आईएफएस नहीं मिलने के कारण इंदौर सीसीएफ के पद को रिक्त रखा गया है। जबकि सीसीएफ पदम प्रिया इंदौर में ही कार्यरत है उनकी पोस्टिंग की जा सकती है। यहां तक कि उन्हें वनवृत्त का प्रभार तक नहीं दिया गया। इसी वजह से तबादला बोर्ड के औचित्य पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।सूत्रों का कहना है कि स्थानांतरण सूची जारी करने से पहले मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली तबादला बोर्ड में विस्तृत चर्चा नहीं हुई। बोर्डमें चर्चा के नाम पर केवल रस्म अदायगी की गई। वर्ना कैडर विरुद्ध भोपाल वन मंडल में पदस्थापना कैसे संभव हो पाता। भोपाल वन मंडल में कैडर के विरुद्ध पोस्टिंग कर दी गई और तबादला बोर्ड की अध्यक्ष खामोश रहीं, यह शोध का विषय है। प्राय: यह होता रहा कि भोपाल वन मंडल में पोस्टिंग वन संरक्षक अथवा सीनियर डीएफओ की होती रही है। गौरतलब तथ्य यह भी है कि भारती जब सहायक वन संरक्षक सामाजिक वानिकी में पदस्थ रहे तब उनकी लापरवाही के कारण वेतन-भत्ते भुगतान में गड़बड़ी हुई है। यानि वेतन-भत्ते मद से 12. 50 लाख रुपए का संदिग्ध भुगतान कर दिया गया। इस प्रकरण में संजय महाजन कंप्यूटर ऑपरेटर और रामकुमार ठाकुर वनरक्षक को कई माह जेल में रहना पड़ा है और अब भारती की प्राइम पोस्टिंग के तहत भोपाल का डीएफओ बना दिया गया। एसीएस और विभाग प्रमुख को गड़बड़झाले की जानकारी होते हुए चुप रहे। अब भारती की भोपाल में हुई पोस्टिंग पर कई सवाल उठने लगे हैं। यही नहीं, भारती को भोपाल वन मंडल के साथ-साथ रायसेन उत्पादन, पर्यावरण वानिकी वन मंडल और विदिशा वन मंडल का भी प्रभार दिए जाने की चर्चा है। इंदौर वन वृत में सीसीएफ क्यों नहीं? इंदौर में पदस्थ प्रभारी एपीसीसीएफ क्षेत्रीय वर्किंग प्लान एवं मुख्य वन संरक्षक पदम प्रिया जनवरी में एपीसीसीएफ के पद पर प्रमोट हो जाएंगी। ऐसे में इंदौर वन वृत्त में सीसीएफ के पद पर उनकी पोस्टिंग होना, हक और नैतिकता का तकाजा है। चर्चा है कि इंदौर सर्किल में सीसीएफ पद पर पदम प्रिया की पोस्टिंग इसलिए नहीं हो रही कि क्योंकि वह न तो पोस्टिंग कराने का मैनेजमेंट जानती है और न ही उन्हें मंत्री, नेता और शीर्ष अफसर की गणेश परिक्रमा करनी आती है। अलबत्ता, वे एपीसीसीएफ के पद पर पदोन्नति होने से पहले सर्किल में सीसीएफ पदस्थ किए जाने के लिए एसीएस और हॉफ से आग्रह कर चुकीं है। दीक्षित का तबादला हो सकता है संशोधन पिछले दिनों जारी तबादला आदेश में स्वरूप रविंद्र दीक्षित का स्थानांतरण मुरैना से डीसीएफ ईको पर्यटन विकास बोर्ड भोपाल किया गया। जबकि वे दमोह जाना चाहते थे। स्थानांतरण सूची में हुए कई बदलाव के चलते एसीएस ने दीक्षित की जगह जरान्डे ईश्वर रामहरि का नाम डीएफओ दमोह के लिए जोड़ दिया। एक शिकायत के चलते डीएफओ अभिनव पल्लव का स्थानांतरण उत्तर बालाघाट से बालाघाट उत्पादन कर दिया गया। जबकि वह दक्षिण बालाघाट के लिए मंत्री तक अपनी अर्जी लगा दी थी। दक्षिण बालाघाट में ऐसे डीएफओ की पोस्टिंग की गई है, जिसके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। कम समय की सेवा में इनका ट्रेक रिकॉर्ड खराब है। इसी प्रकार विभागीय जांच के चलते ही नवीन गर्ग की पदस्थापना डीसीएफ ईको पर्यटन बोर्ड से डीएफओ उत्तर बैतूल कर दी गई।

एसटीआर के फील्ड डायरेक्टर कृष्णमूर्ति की मुख्यालय वापसी, भारती भोपाल के नए डीएफओ

STR field director Krishnamurthy returns to headquarters, Bharti is new DFO of Bhopal

STR field director Krishnamurthy returns to headquarters, Bharti is new DFO of Bhopal  उदित नारायण भोपाल। वन विभाग ने आईएफएस अफसरों की पोस्टिंग में बड़ा फेर-बदल किया है। पीसीसीएफ ओपी चौधरी को रिटायर होने के दो दिन पहले उन्हें भू अभिलेख शाखा में पदस्य किया है। वहीं सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एल कृष्णमूर्ति को एपीसीसीएफ वन्य प्राणी शाखा में पोस्टिंग की गई। इसी प्रकार लघु वनोपज संघ से एपीसीसीएफ मनोज अग्रवाल और वन संरक्षक भोपाल आलोक पाठक को भी स्थानांतरित किया है। विदिशा के प्रभारी डीएफओ लोकप्रिय भारती को भोपाल का नया डीएफओ बनाया गया है।  3 माह से लंबित आईएफएस अधिकारियों की तबादला सूची शुक्रवार को जारी कर दी है। इस सूची का आईएफएसस अधिकारी  बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। आईएफएस अफसर की  तबादला सूची अभी भी अधूरी है, क्योंकि इंदौर और छतरपुर सर्किल में पोस्टिंग नहीं की गई है। इसके अलावा बड़वाह, रीवा, राजगढ़, शाजापुर सहित आधा दर्जन वन मंडलों में भी डीएफओ की पोस्टिंग नहीं हुई है। इससे अधिकारियों को उम्मीद है कि आईएफएस अफसरों को पदस्थ करने संबंधित एक और सूची जारी हो सकती है। जारी सूची के अनुसार एपीसीसीएफ मनोजकुमार अग्रवाल की सेवाएं लघु वनोपज संघ से वापस लेते हुए वर्किंग प्लान एवं लैंड रिकॉर्ड शाखा में पदस्थ किया गया। इसी प्रकार एल कृष्णमूर्ति को एसटीआर के फील्ड डायरेक्टर पद से स्थानांतरित वन्य प्राणी मुख्यालय में, मुख्य वन संरक्षक लखन लाल उईके को शहडोल से स्थानांतरित कर सीसीएफ सामाजिक वानिकी वृत भोपाल, अशोक कुमार ओएसडी वन विभाग से सीसीएफ होशंगाबाद वृत, राखी नंदा सामाजिक वानिकी भोपाल से फील्ड डायरेक्टर एसटीआर नर्मदापुरम, संजीव झा छतरपुर वन वृत्त से प्रतिनियुक्ति पर लघु वनोपज संघ भोपाल, अजय कुमार पांडेय वन संरक्षक वर्किंग प्लान छतरपुर से वन संरक्षक शहडोल वन वृत और अनिल शुक्ला वन संरक्षक होशंगाबाद वन वृत से वन विकास निगम भोपाल, आलोक पाठक वन संरक्षक एवं पदेन डीएफओ भोपाल से वन संरक्षक राज्य वन विकास निगम और बासु कनौजिया की पदस्थापना वन संरक्षक एवं पदेन डीएफओ उत्तर सिवनी से वन संरक्षक बैतूल वन वृत में की गई है।   क्षितिज कुमार नए ओएसडी वन विभाग  क्षितिज कुमार को सीधी डीएफओ से हटाकर ओएसडी भोपाल, प्रियांशी सिंह को डीएफओ अशोक नगर से  डिप्टी डायरेक्टर माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी, अभिनव पल्लव डीएफओ वन मंडल उत्तर बालाघाट से उत्तर बालाघाट उत्पादन, पीडी ग्रेबीयाल डीसीएफ वन मुख्यालय से डीएफओ उज्जैन, महेंद्र सिंह उईके डीएफओ दमोह से उत्तर सिवनी, नवीन गर्ग डीएफओ एक पर्यटन बोर्ड भोपाल से उत्तर बैतूल,  मयंक चांदीवाल डीएफओ शाजापुर से डीएफओ सतना, जरान्डे ईश्वर रामहरि डीएफओ पश्चिम छिंदवाड़ा से दमोह वन मंडल, साहिल गर्ग डीएफओ  डिंडोरी से पश्चिम छिंदवाड़ा वन मंडल, अधर गुप्ता डीसीएफ रेंजर कॉलेज बालाघाट से डीएफओ दक्षिण बालाघाट, रमेश राठौड़ डीसीएफ वन मुख्यालय भोपाल से डीएफओ खरगोन, पुनीत सोनकर डीएफओ दक्षिण पन्ना से डीएफओ डिंडोरी, प्रतिभा अहिरवार उपसंचालक माधव नेशनल पार्क शिवपुरी से डीएफओ अशोक नगर, मोहम्मद माज डीएफओ भिंड से डीएफओ दतिया, स्वरूप रविंद्र दीक्षित   डीसीएफ इको पर्यटन बोर्ड भोपाल, अनुपम शर्मा डीएफओ रीवा से डीएफओ दक्षिण पन्ना, लोकप्रिय भारती डीएफओ रायसेन उत्पादन से  डीएफओ भोपाल, गीतांजलि जे प्रशिक्षु एसडीओ से एसडीओ लघु वनोपज संघ,  सुजीत जे पाटिल प्रशिक्षु एसडीओ नौरादेही वन मंडल से डीएफओ मुरैना और एस दीपिका प्रशिक्षु आईएफएस को पश्चिम छिंदवाड़ा से डीसीएफ वन विकास निगम भोपाल के पद पर स्थानांतरित किया गया है।   छः आईएफएस की वर्किंग प्लान में पदस्थ  आखिरकार वन विभाग को वर्किंग प्लान बनाने के लिए 2009 और 2011 बैच के आईएफएससी अधिकारियों की पोस्टिंग करना पड़ी। सारी आदेश के अनुसार प्रशांत कुमार सिंह को   डीएफओ खरगोन से डीएफओ वर्किंग प्लान खंडवा, डॉ किरण बिसेन को डीएफओ उज्जैन से वर्किंग प्लान उज्जैन, मीना कुमारी मिश्रा डीएफओ दक्षिण बालाघाट से वर्किंग प्लान शिवपुरी, अनुराग कुमार ओएसडी वन विभाग भोपाल से वर्किंग प्लान रीवा, देवांशु शेखर डीएफओ उत्तर बैतूल से वर्किंग प्लान सागर और सुश्री संध्या डीएफओ को सिवनी उत्पादन से डीएफओ वर्किंग प्लान बालाघाट के पद पर पदस्थ किया गया है।

हॉफ के मौखिक फरमान और सीसीएफ ने लिखे तीन पत्र फिर भी नहीं दिया चार्ज

Hoff's verbal order and CCF's three letters, still no charge was given

Hoff’s verbal order and CCF’s three letters, still no charge was given उदित नारायण  भोपाल। 2010 बैच के आईएफएस गौरव चौधरी का पद वन संरक्षक, पोस्टिंग डायरेक्टर बांधवगढ़ पर डीएफओ के पद का चार्ज नहीं देने पर आमादा है। फील्ड डायरेक्टर बांधवगढ़ टाइगर गौरव चौधरी को डीएफओ शहडोल उत्तर वन मण्डल का चार्ज देने के सीसीएफ शहडोल तीन पत्र लिख चुके हैं और गत बुधवार को वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने भी निर्देश दिए किन्तु वे चार्ज नहीं देने पर बालहठ करके बैठे हैं।   केंद्र सरकार की मंशा थी कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पूर्णकालिक फील्ड डायरेक्टर हो। यही वजह रही कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के सख्त निर्देश पर राज्य शासन ने एक सितम्बर दिन रविवार को सिंगल आदेश जारी कर गौरव चौधरी को डीएफओ शहडोल उत्तर वनमंडल से फील्ड डायरेक्टर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पद पर कर दिया गया। राज्य शासन के आदेश के बाद गौरव चौधरी ने फील्ड डायरेक्टर का पदभार तो संभाल लिया किंतु शहडोल उत्तर वनमंडल के डीएफओ का चार्ज आज तक नहीं दिया। जबकि सीसीएफ  शहडोल एलएस उईके ने फील्ड डारेक्टर गौरव चौधरी को उत्तर शहडोल वनमंडल का चार्ज  उमरिया के डीएफओ विवेक सिंह को देने के लिए  अब तक तीन पत्र लिखे और उसकी कॉपी वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव और पीसीसीएफ विवेक जैन को भी भेजी। श्रीवास्तव ने गत बुधवार को सीसीएफ को निर्देश दिए कि गौरव चौधरी से चार्ज लेकर विवेक सिंह को दें।  इनका कहना चार्ज नहीं देने की कुछ तो वजह होगी। जहां तक सीसीएफ के चार्ज देने संबंधित पत्र की कॉपी हमें नहीं मिला है। कई बार डाक आने में देरी हो जाती है।   विवेक जैन,  पीसीसीएफ प्रशासन-एक बांधवगढ़ में रेंजर सब पर भारी बांधवगढ़ में पदस्थ रेंजर पुष्पा सिंह राजनीतिक रसूख के चलते सीनियर अधिकारियों के आदेशों के नाफरमानी कर रही है। इसी बात को लेकर डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा ने उन्हें नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि  आपके द्वारा आज दिनांक तक वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश का पालन नहीं किया गया है। यही नहीं आपके द्वारा राजनैतिक दबाव अधिकारियों पर डलवाना अनुशासनिक नियमों के विपरीत है। क्यों न आपके विरूद्ध म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम (3) (1) के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जाये? अतः आपको निर्देशित किया जाता है, कि पत्र प्राप्ति के 3 दिवस के अन्दर सन्दर्भित आदेश का पालन करते हुए प्रभार सूची से इस कार्यालय को अवगत कराया जायेगा। अन्यथा आदेश का पालन नहीं करने पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का अवहेलना करने के संबंध में क्यों न आपके विरूद्ध विरूद्ध म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 16 (1) (क) के आपके विरूद्ध के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जायेगा। जिसके लिए आप स्वयं जिम्मेवार होंगें। नोटिस का रेंजर पुष्पा सिंह ने आज दिनांक तक जवाब नहीं दिया।

साल भर से शासकीय आवास पर अवैध रूप से  काबिज रेंजर को एसडीएम ने दिया बेदखली का नोटिस

SDM issued eviction notice to the ranger who was illegally occupying government accommodation for a year

SDM issued eviction notice to the ranger who was illegally occupying government accommodation for a year  उदित नारायण भोपाल। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में पदस्थ महिला रेंजर पुष्पा सिंह नियम विरुद्ध दो-दो शासकीय आवास पर कब्जा कर रखा। बांधवगढ़ के अलावा साल भर से वह डिंडोरी वन मंडल के करंजिया स्थित रेंजर शासकीय आवास में काबिज है। डीएफओ डिंडोरी ने आवास खाली करने के लिए दर्जनों नोटिस दिए पर कोई असर नहीं नहीं पड़ा। अब एसडीएम बजाग ने मप्र लोक परिषर (बेदखली) 1974 की धारा 4 (1) के अंतर्गत शासकीय आवास खाली करने का नोटिस दिया है।  रेंजर पुष्पा सिंह का तबादला  25 सितंबर 2023 को डिंडोरी वन मंडल की करंजिया रेंज से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हो गया था। तब से आज तक करंजिया रेंज में स्थित शासकीय आवास पर बलात कब्जा किया हुआ है। करंजिया स्थित शासकीय आवास में कोई भी नहीं रहता है। मकान खाली करने के लिए डीएफओ ने कई नोटिस दिए पर नोटिस को गंभीरता सेवा लेते हुए डस्टबिन में डाल दिया। डीएफओ के नोटिस पर जब मकान खाली नहीं हुआ तब एपीसीसीएफ प्रदीप वासुदेवा की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित हुई। कमेटी की पिछले महीने बैठक हुई परंतु पुष्पा सिंह के कब्जे वाले मकान पर कोई निर्णय नहीं हो पाया। वन संरक्षण जबलपुर कमल अरोरा का कहना है कि बैठक में वह उपस्थित नहीं हुई इसलिए उस पर निर्णय नहीं हो पाया। यानी बैठक में न आकर उसने अघोषित तौर पर सीनियर अधिकारियों को चुनौती दे दी है कि खाली करवा कर दिखाओ। शासकीय आवास खाली करने में आईएफएस अफसरों के असहाय रहने के बाद डिंडोरी जिले के बजाग एसडीएम शासकीय आवास से बेदखली का नोटिस दिया है।  हमेशा विवादों की सुर्खियों में रहीं  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पदस्थ रेंजर पुष्पा सिंह अक्सर विवादों की सुर्खियों में रही हैं। डिंडोरी वन मंडल के  करंजिया रेंज में पदस्ती के दौरान आर्थिक गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे थे। कारंजा रेंज में उन पर आरोप था कि उन्होंने वन सुरक्षा समिति खारीडीह में रोड निर्माण हेतु आठ लाख अड्टालीस हजार की सड़क मात्रा डेढ़ लाख में बनाया गया जिसमे डिप्टी रेंजर को सस्पेंड किया गया। जबकि किंतु पुष्पा सिंह पर विभागीय जांच वर्तमान में चल रही है। रोचक तथ्य है कि वह एक भी पेशी में आज तक उपस्थित नहीं हुई। इसके पहले वह जब वह शहडोल में पदस्थ थीं तब  इनका रेत माफियों से लेन-देन संबंधित एक ऑडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। इस मामले में उन्हें निलंबित भी किया गया था।  करंजिया रेंज में वापसी का प्रयास   सूत्रों का कहना है कि रेंजर पुष्पा सिंह अपने राजनीतिक रसूक का इस्तेमाल करते हुए बांधवगढ़ से डिंडोरी वन मंडल के करंजिया रेंज में वापसी का प्रयास कर रही है। इसी कारण उन्होंने शासकीय आवास खाली नहीं किया है। बताया जाता है कि मंत्रालय में पदस्थ अफसर भी उनकी मदद कर रहे हैं।

छतरपुर में वन-राजस्व सीमा विवाद की आड़ में हो रही है वन भूमि पर खेती-बाड़ी

Farming is being done on forest land in Chhatarpur under the cover of forest revenue border dispute.

Farming is being done on forest land in Chhatarpur under the cover of forest revenue border dispute. छतरपुर। छतरपुर वन मंडल में वन-राजस्व सीमा विवाद की आड़ में वन भूमि पर खेती-बाड़ी का कारोबार बढ़ रहा है। गंभीरजनक यह है कि खेती करने की जानकारी फील्ड के कर्मचारियों ने डीएफओ और सीएफ को दी पर वे कार्रवाई करने की बजाय उन्हें तब तक खेती वन व्यवस्थापन की कार्यवाही पूर्ण नहीं हो जाती है।छतरपुर वनमंडल के गहरवार वनखंड स्थित ग्राम पिपौराखुर्द के शिम्भु रजक, ब्रजलाल रजक, घनश्याम रजक और रामबाई वन भूमि की 1. 70 हेक्टेयर में खेती कर रहें है। इस मामले में एसडीओ राजस्व को पत्र क्रमांक / मा.चि./2023/2743 दिनांक 1सितम्बर 2023 के तारतम्य में सीएफ छतरपुर कार्यालय ने लेख किया है कि भूमि खसरा नं0 740, 741, 757, 758 एवं 759 एकत्र रकबा 2 हेक्टेयर ग्राम पिपौराखुर्द वनखण्ड गहरवार के अंदर स्थित है। वन व्यवस्थापन अधिकारी द्वारा वन व्यवस्थापन की प्रक्रिया के दौरान कुछ खसरों को निजी भूमि माना जाकर वन सीमा से बाहर करने के आदेश प्रसारित किये गये है। जब तक वन व्यवस्थापन अधिकारी अथवा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा कार्यवाही पूर्ण नहीं की जाती तब तक तत्कालीन वन व्यवस्थापन अधिकारी द्वारा जारी आदेशों के अनुसार शिम्भु रजक, बृजलाल रजक, घनश्याम रजक और रामबाई रजक की भूमि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा-4 (1) के अंतर्गत संरक्षित वन में शामिल निजी स्वामित्व की है। अतः तत्कालीन वन व्यवस्थापन अधिकारी द्वारा जारी आदेश में उल्लेखित व्यक्तियों की बाहर की गई भूमियों को वन सीमा से बाहर मानते हुए खसरा नं0 741, 757, 758 एवं 759 कुल रकबा 1.70 हेक्टेयर में वन व्यवस्थापन होने तक कृषि कार्य की अनुमति सीएफ के हस्ताक्षर से जारी आदेश में दी गई है।डीएफओ की भूमिका की संदेहास्पदवन भूमि पर खेती-बाड़ी के कारोबार में डीएफओ की भूमिका भी संदेहास्पद है। छतरपुर सीएफ कार्यालय में प्रस्तुत दस्तावेजों और अभिलेखों के परीक्षणोपरांत पर सीएफ के द्वारा डीएफओ को बार-बार लेख करने के उपरांत भी प्रकरण का निराकरण नहीं किया जा रहा है। यही नहीं, डीएफओ कार्यालय द्वारा चाहे गये मानचित्र एवं 1974 में निर्वनीकृत वन भूमि के मानचित्र प्रदाय न किये जाने की स्थिति में सीएफ छतरपुर ने आवेदकों 1.70 हे. में कृषि कार्य की अनुमति प्रदान कर दी है । जारी आदेश में यह कहा गया है कि यह अनुमति वन व्यवस्थापन की कार्यवाही पूर्ण होने तक प्रभावी होगी।अदालत के फैसले के भरोसे हैं अफसरवन विभाग की छतरपुर रेंज कार्यालय के पास हो हमा बीट के कक्ष क्रमांक पी-619 वन्य प्राणी विचरण क्षेत्र है। इसी जंगल से सागर-कानपुर हाईवे निकला है। यहां वन विभाग विभाग की करीब 20 एकड़ जमीन पर इम्तियाज अली द्वारा अतिक्रमण किया गया है। इस अतिक्रमण के खिलाफ वन विभाग ने जुलाई 2023 में पीओआर क्रमांक 526 दर्ज किया गया है। साथ ही वन विभाग भोपाल के द्वारा की गई जांच में भी अतिक्रमण पाया गया था। सीसीएफ उड़नदस्ता भी जांच कर चुका है, लेकिन वन विभाग के अधिकारी अतिक्रमण नहीं हटा रहे हैं। वन विभाग ने अतिक्रमणकारी इम्तियाज अली के खिलाफ अदालत में चालान प्रस्तुत कर दिया है और अब हुए इंतजार कर रहे हैं की अदालत फैसला करेगा कि काबिज भूमि वन भूमि है अथवा नहीं। चर्चा है कि पूर्व में छतरपुर में डीएफओ रहे आईएफएस अधिकारी से इम्तियाज अली से अच्छे संबंध रहे हैं और उन्हीं के कार्यकाल में उसने वन भूमि पर कब्जा कर खेती कर रहा था।

पीसीसीएफ वन्य प्राणी के लिए ‘रॉबिंसन 44’ हेलीकॉप्टर की दरकार वन विहार संचालक ने निविदा बुलाई

Van Vihar operator called for tender for 'Robinson 44' helicopter for PCCF wildlife.

Van Vihar operator called for tender for ‘Robinson 44’ helicopter for PCCF wildlife. भोपाल। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान संचालक ने पीसीसीएफ वन्य प्राणी के लिए हेलीकॉप्टर ‘रॉबिंसन 44’ को किराये पर लेने के लिए एक निविदा आमंत्रित की है। निविदा में कहा गया है कि यह हेलीकॉप्टर सितंबर 24 से मार्च 25 तक उपयोग किया जाना है। यह निविदा दूसरी बार निकल गई है।वन विभाग में ऐसा पहली बार हो रहा है कि पीसीसीएफ वन्य प्राणी के नाम से हेलीकॉप्टर किराए पर लेने की निविदा आमंत्रित की गई है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि शाजापुर में किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे 400 ब्लैक बक यानी कृष्णमृग एवं 100 नीलगायों को हेलिकाप्टर से अन्यत्र शिफ्ट करने की योजना है। उसके लिए टेंडर आमंत्रित किया है। इसके लिए दक्षिण अफ्रीका के एक्सपर्ट टीम मध्य प्रदेश आएगी। शाजापुर जिले में काले हिरण और नीलगाय की संख्या बढ़ती जा रही है। शुजालपुर रेंज में इनकी संख्या ज्यादा है। खेतों में उछलकूद करने के कारण किसानों की फसलों को नुकसान हो रहा हैं। इस समस्या के निदान के लिए वन विभाग द्वारा पिछले साल भी इन जानवरों की शिफ्टिंग की योजना बनाई गई थी, इसके तहत यहां से काले हिरण और नीलगाय को पकड़कर गांधीसागर अभयारण्य में नामीबिया से चीते लाए जा रहे। इसके लिए साउथ अफ्रीका की टीम द्वारा बोमा तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वन विभाग की टीम के द्वारा अभी सर्वे कर पता लगाया जा रहा है कि कहां पर हिरण और नीलगाय की संख्या ज्यादा है

जंगल महकमे में पोस्टिंग में हो रही महिला आईएफएस अफसरों की अनदेखी

Women IFS officers are being ignored for posting in the forest department.

Women IFS officers are being ignored for posting in the forest department. गणेश पाण्डेयभोपाल। जंगल महकमे में पॉवर और मैनेजमेंट के चलते महिला आईएफएस अफसरों की पोस्टिंग में अनदेखी की जा रही है। जबकि कुछ महिला अधिकारी तो विषय-विशेषज्ञ भी है फिर भी मुख्यधारा के हाशिये पर हैं। मसलन, इंदौर सर्किल से रिटायर्ड हुए वन संरक्षक नरेन्द्र सनोडिया के रिक्त पद का प्रभार वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने 54 किलोमीटर दूर स्थित उज्जैन सर्किल के वन संरक्षक मस्तराम बघेल को सौंप दिया। जबकि इंदौर सर्किल में ही बघेल से सीनियर 2001 बैच की महिला आईएफएस अधिकारी एवं मुख्य वन संरक्षक पदमाप्रिया बालकृष्णन क्षेत्रीय वर्किंग प्लान ऑफिसर है। वैसे तो इंदौर सर्किल का प्रभार तो पदमाप्रिया को मिलना था पर वह मैनेजमेंट के खेल में पिछड़ गई और प्रमोटी आईएफएस बघेल को दे दिया गया। पूर्व में जब एपीसीसीएफ मनोज अग्रवाल उज्जैन सर्कल में पदस्थ थे तब उन्हें भी इंदौर सर्किल का प्रभार दिया गया था किन्तु तत्कालीन वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने प्रभार सौंपने वाले निर्णय में संशोधन करते हुए इंदौर सर्किल में ही पदस्थ वन संरक्षक आदर्श श्रीवास्तव को प्रभार दे दिया था।इंदौर सर्किल पाने के लिए जो जोर-अजमाइशइंदौर सर्किल में पदस्थ होने के लिए कई आईएफएस अधिकारी पीपी मैनेजमेंट फार्मूले के अंतर्गत प्रयासरत है। जबकि शासन और विभाग प्रमुख को पीपी मैनेजमेंट फार्मूले को दरकिनार कर सीनियर-कम-मेरिट के सिद्धांत पर पोस्टिंग करना चाहिए। यानि पुरानी परंपरा के अनुसार 2001 बैच की महिला आईएफएस मुख्य वन संरक्षक पदमा प्रिया बालकृष्णन इंदौर सर्किल में पदस्थ होने की हकदार हैं। वैसे भी कैडर में इंदौर सर्किल का पद मुख्य वन संरक्षक का ही है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यदि उनकी पोस्टिंग अभी इंदौर सर्किल के मुख्य वन संरक्षक के पद पर नहीं होती है तो वे अगले साल एपीपीसीएफ के पद पर प्रमोट हो जाएंगी। यदि ऐसा हुआ तो वह इकलौती ऐसी अफसर होंगी, जो सर्किल सीसीएफ के पद पर कार्य किए बिना ही एपीसीसीएफ पद पर प्रमोट हो जाएंगी।वाइल्डलाइफ डिप्लोमा धारी करा रही है वीआइपी को दर्शनमहकमे में एक और महिला आईएफएस डॉ किरण बिसेन की योग्यता की अनदेखी की जा रही है। डॉ बिसेन पशु चिकित्सा के साथ-साथ वन्य प्राणी मैनेजमेंट की डिप्लोमा धारी भी है। यही नहीं, वह चीता मैनेजमेंट पर दक्षिण अफ्रीका में ट्रेनिंग भी ले चुकी हैं। इसके पहले बिसेन पेंच नेशनल पार्क में तीन साल से अधिक समय तक उप संचालक के पद पर पदस्थ रह चुकीं है। बावजूद इसके, विभाग ने उन्हें अघोषित तौर पर उज्जैन डीएफओ के पद पर पदस्थ कर वीआईपी और वीवीआईपी को साढ़े तीन साल से दर्शन कराने की जिम्मेदारी दी है। जबकि पेंच नेशनल पार्क में फील्ड डारेक्टर का पद खाली है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में सदस्थ फील्ड डायरेक्टर एवं एपीसीसीएफ एल कृष्णमूर्ति की वन्यप्राणी मुख्यालय में वापसी होने जा रही है। ऐसी स्थिति में यहां भी एक वन्य प्राणी विशेषज्ञ आईएफएस की आवश्यकता है। विभाग में वन्य प्राणी विशेषज्ञ आईएफएस की कमी है।इनकी भी हो रही है अनदेखी1995 बैच की महिला आईएफएस अर्चना शुक्ला की भी वन विभाग ने अनदेखी की है। वे लंबे समय से विभाग की मुख्य धारा के हासिए पर है। वर्तमान में भी वे डेपुटेशन पर एपीसीसीएफ वन विकास निगम में पदस्थ है। इसके पहले भी वे प्रतिनियुक्ति पर लघुवनोपज संघ में पदस्थ रह चुकीं है। वर्तमान में फेडरेसन के प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी में सबसे जूनियर प्रमोटी डीएफओ अर्चना पटेल को पदस्थ किया गया है। पटेल की अनुभवहीनता के कारण फेडरेशन के एमएफपी पार्क के उत्पादन और उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। इसके पहले एमएफपी पार्क के सीइओ के पद पर एपीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों की पोस्टिंग होती रही है। वर्तमान में इस पद के लिए दो महिला अधिकारी हकदार है। पहली एपीसीसीएफ अर्चना शुक्ला और दूसरी 2007 बैच की राखी नंदा, जिन्हें सामाजिक वानिकी में पदस्थ किया गया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि सामाजिक वानिकी का कार्य वन मंडल में पदस्थ सीनियर आईएफएस अधिकारी भी संभाल सकता है। इसके अलावा 2011 बैच की आईएफएस संध्या को तो सबसे अधिक उपेक्षित रही है। वह किसी भी वन मंडल में 5-6 महीने से अधिक टेरिटोरियल डीएफओ नहीं रहीं है। जबकि उनकी कार्य शैली फॉरेस्ट प्रोटक्शन की रही है।

बेखौफ हुए शिकारी जंगल में बिछा रहे करंट, तेंदुए के साथ युवक की मौत जांच जारी

Fearless hunters are spreading current in the forest, investigation into death of young man with leopard

Fearless hunters are spreading current in the forest, investigation into death of young man with leopard शहडोल ! जिले में करंट लगाकर जंगली जानवरों का शिकार करने का मामला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जंगल में करंट लगाकर जंगली जानवर का शिकार करने के दौरान एक युवक के साथ तेंदुए की मौत का मामला प्रकाश में आने के बाद वन विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। घटना गोहपारू वन परिक्षेत्र अंतर्गत चुहिरी सर्किल के कोडार बीट की है। बुधवार की सुबह तेंदूऐ के शव से 100 मीटर की दूरी में एक युवक का शव मिला है। बताया गया कि युवक कमलेश बैगा पिता बिरजू बैगा उम्र 38 वर्ष निवासी ग्राम कुदरी का रहने वाला था, जिसका कोडार बीट के जंगल में तेंदुए के शव के पास ही युवक का शव मिला है। सुबह जंगल की ओर गए ग्रामीणों ने तेंदुए के पास पड़े युवक के शव को देखकर मामले की जानकारी पुलिस के साथ वन विभाग के अधिकारियों को दी। जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी एवं पुलिस मौके पर पहुंच मामले की पड़ताल में जुटी हुई है। जहां यह दोनों शव मिले हैं, वहां 11 हज़ार केवी की लाइन से जंगल में करंट बिछाया गया था। करंट की चपेट में आने से ही दोनों की मौत होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस मामले पर वन विभाग के साथ पुलिस जांच कर रही है। ग्रामीणों ने बताया कि मृतक कमलेश बैगा जंगल में शिकार करने अपने अन्य साथियों के साथ गया था। तभी 11 हज़ार केवी की लाइन से जीआई तार के माध्यम से जंगली जानवरों के शिकार के लिए बिछाए गए करंट की चपेट में युवक खुद आ गया और उसकी मौत हुई है। युवक को करंट लगता देख उसके अन्य साथी वहां से फरार हो गए, कुछ देर उसी रास्ते जा रहा तेंदुआ भी इसकी चपेट में आ गया, जिससे दोनों की ही मौत हो गई। वन विभाग अधिकारी अपनी टीम के साथ घटना स्थल बुधवार की सुबह पहुंचे और जांच कर रहे हैं, रेंजर ने अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा है। आए दिन जंगल में लगाए जाते हैं करंटबीते दिनों केशवाही वन परिक्षेत्र के जंगल में जंगली जानवरों के शिकार के लिए लगाए गए करंट में पिता पुत्री चपेट में आ गए थे, जिससे दोनों बुरी तरीके से झुलस गए थे। ग्रामीणों का यह भी आरोप था कि वन विभाग के अधिकारियों के साठ गाठ से शिकारी यहां शिकार करते हैं। गोपाहरू वन परिक्षेत्र में कई तेंदुए जंगल में विचरण कर रहे हैं। लेकिन वन विभाग की गश्ती पर यह घटना ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अधिकारी तो कागजों में कई बार निर्देश जारी करते रहते हैं। लेकिन मैदानी अमला गस्ती नहीं करता, जिसकी वजह से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। बता दें, जिस बीट में यह घटना घटी है वहां के डिप्टी रेंजर स्वयं मुख्यालय में नहीं रहते। ऐसा विभागीय सूत्रों का कहना है। रेंजर की लापरवाही की वजह से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। लोगों का कहना है कि रेंजर ने जब से वन परिक्षेत्र गोहपारु की कमान संभाली है, तब से जंगल में गश्ती कम हो गई है और मैदानी अमला भी गश्ती नहीं करता, जिसकी वजह से शिकारी बेखौफ हो गए हैं और करंट लगाकर जंगली जानवरों का शिकार कर रहे हैं। गोहपारू रेंजर हेमंत कुमार प्रजापति का कहना है कि लगातार गश्ती की जाती है, जो कर्मचारी मुख्यालय में नहीं रहते उन पर कई बार कार्रवाई की जा चुकी है। तेंदुए के समीप ही युवक का शव मिला है। जंगल में शिकार करने युवक गया था या नहीं, अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।मामले की जांच चल रही है। डॉग एस्कॉर्ट को मौके पर बुलवाया गया है।

गौरव चौधरी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर बने, पेंच में पूर्णकालिक का इंतजार

Gaurav Chaudhary becomes the field director of Bandhavgarh Tiger Reserve, waiting for full time appointment

Gaurav Chaudhary becomes the field director of Bandhavgarh Tiger Reserve, waiting for full time appointment भोपाल। केंद्रीय एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के सख्त निर्देश पर अंततः साल भर बाद राज्य शासन ने उत्तर शहडोल वन मंडल में पदस्थ वन संरक्षक गौरव चौधरी को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर बनाया गया। साल भर से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्ट का पद रिक्त था। इसी प्रकार पेंच नेशनल पार्क के संचालक का पद 2 साल से रिक्त है। अतिरिक्त प्रभार में प्रबंधन का कार्य चल रहा है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हुई बाघों की मौत पर राष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश के बाघ प्रबंधन पर सवाल उठने लगे। नेशनल अखबारों में भी टाइगर मौत की खबरें सुर्खियों में रही। इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में भी मामला उठा। इन सब कारणों के केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्यमंत्री मोहन सिंह यादव को कई बार बांधवगढ़ में पूर्णकालीन डायरेक्टर पदस्थ करने की हिदायत देते हुए पत्र भी लिखे। हालांकि उनके निर्देश पर मुख्यमंत्री यादव यही बहाना बनाते रहे कि वन मंत्री नए बने हैं इसलिए आईएफएस के पदस्थापनाओं के संबंध में विचार- मंथन चल रहा है। लंबे समय से निर्णय नहीं हो पाने के कारण केंद्रीय मंत्री यादव ने सख्त लहजे में मुख्यमंत्री को निर्देश दिए कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में तत्काल फील्ड डायरेक्टर को पदस्थ करें। केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर रविवार को गौरव चौधरी पोस्टिंग के आदेश जारी करने पर जबकि पेंच नेशनल पार्क में 2 साल से फील्ड डायरेक्टर का पद रिक्त हैं। सिंगल आदेश और अफसरों में हड़कंपवन विभाग में लंबे समय से आईएफएस अधिकारियों के कई पद खाली पड़े है। इन पदों को भरने के लिए मुख्यालय से प्रस्ताव भेजे गए है पर उस पर प्राइम पोस्टिंग के लिए हो रही जोर-अजमाईस के चलते निर्णय नहीं हो पा रहे हैं। अचानक रविवार को गौरव चौधरी के सिंगल आदेश को लेकर वन विभाग के अधिकारी हतप्रभ रह गए। जबकि वन संरक्षक के अधिकारियों की सूची में और भी नाम थे। हालांकि गौरव चौधरी के साथ-साथ जो अधिकारियों के नाम सूची में शामिल थे। इन नाम पर सहमति नहीं बन पा रही थी इसलिए मामला अधर में लटका था। जैसे दक्षिण सिवनी में पदस्थ वन संरक्षक वासु कनौजिया को बैतूल सर्किल, मंत्रालय में पदस्थ अशोक कुमार को होशंगाबाद सर्किल में, सीएफ समाजिक वानिकी राखी नंदा को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और होशंगाबाद वन संरक्षक अनिल शुक्ला की सेवाएं डेपुटेशन पर वन विकास निगम को सौंपने का प्रस्ताव शामिल था। इसके अलावा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एवं पीसीसीएफ एल कृष्णमूर्ति को एपीसीसीएफ वन्य प्राणी मुख्यालय में पोस्ट करने का प्रस्ताव है।

चीता पवन की मौत, मध्य प्रदेश में इस साल 13 का हुआ जन्म, चार की गई

Cheetah Pawan died, 13 were born this year in Madhya Pradesh, four died

Cheetah Pawan died, 13 were born this year in Madhya Pradesh, four died चीतों के लिहाज से 2024 का समय अब तक ठीक-ठाक रहा है. 2024 के इन आठ महीनों के दौरान 13 शावकों ने जन्म लिया जबकि इस दौरान दो व्यस्क चीते सहित दो शावकों की मौत भी हुई है. अब कूनो नेशनल पार्क में चीता पवन की मौत के बाद संख्या 24 रह गई है, जिनमें 12 वयस्क और 12 शावक शामिल हैं. चीतों के लिए मध्य प्रदेश उपयुक्त माना गया और साल 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते लाए गए. इन चीतों को बाड़े में रिलीज करने के लिए प्रधानमंत्री खुद आए और चीतों को बाड़े में रिलीज किया. इसके बाद 18 सितंबर 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए थे. अब तक चीतों की दो खेप ही आई है. शुरुआती दौर में चीता प्रोजेक्ट काफी मुश्किल भरा था. नई जगह और नई आबो हवा की वजह से चीतों की मौत हो रही थी, लेकिन अब धीरे-धीरे चीते यहां के वातावरण में ढलने लगे हैं. 2024 का अब तक समय भी अच्छासाल 2023 में ज्यादा चीतों की मौत हुई थी, लेकिन साल 2024 का अब तक का समय बहुत अच्छा निकला है. इस दौरान 4 दुखभरी तो 3 खुशियों भरी खबर आई. खुशखबरी में साल 2024 में 13 शावकों ने जन्म लिया, जबकि दुख भरी खबर ये है कि इसी साल दो व्यस्क चीतों सहित दो शावकों की मौत हुई है. एक चीता पवन बीते मंगलवार (27 अगस्त) को ही मृत अवस्था में पाया गया. चीता प्रोजेक्ट पर एक नजर

करोड़ों की रॉयल्टी नुकसान पर वन -राजस्व सीमा विवाद में ढाई दशक से अटका है कटनी की झिन्ना खदान

Katni's Jhinna mine is stuck for two and a half decades in forest revenue border dispute over royalty loss worth crores.

Katni’s Jhinna mine is stuck for two and a half decades in forest revenue border dispute over royalty loss worth crores. भोपाल। वन-राजस्व सीमा विवाद के चलते 30 में कटनी के झिन्ना की खदान का प्रकरण का निराकरण नहीं हो पाया है। इस मसले पर राज्य शासन और वन विभाग असमंजस में है। फरवरी 2020 में मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं कि इस प्रकरण में न्यायालयीन प्रक्रिया से प्रदेश के राजस्व में सतत हानि हो रही है। बावजूद इसके, 2017 से सुप्रीम कोर्ट में कटनी का झिन्ना खदान विवाद लंबित है। इससे जहां सरकार को करोड़ों की रेती का नुकसान हो रहा है वही 20 गांव के 2000 से अधिक लोग रोजगार से मेहरूम है। दिलचस्प पहलू यह है कि समय-समय पर अधिकारियों के सुर आदेश बदलते रहे।शिकायती पत्र के मुताबिक, कटनी के खनन कारोबारी आनंद गोयनका मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका को मध्य प्रदेश की तत्कालीन दिग्विजय सरकार के कार्यकाल में 1994 से 2014 तक की अवधि के लिए 48.562 हेक्टेयर भूमि पर खनिज करने का पट्टा मिला था। खनिज पट्टा आवंटित होने की पीछे भी बहुत कुछ छिपा है। दरअसल मध्य प्रदेश शासन ने ग्राम झिन्ना तहसील ढीमरखेड़ा जिला कटनी के वन क्षेत्र की 48.562 हेक्टेयर भूमि पुराना खसरा नम्बर 310, 311, 313, 314/1, 314/2, 315, 316, 317, 318, 265, 320 में खनिज के लिए एक अप्रैल 1991 में 1994 से लेकर 2014 तक की अवधि के लिए निमेष बजाज के पक्ष में खनिज पट्टा स्वीकृत किया था। जिसे वर्ष 1999 में मध्य प्रदेश शासन के खनिज विभाग के आदेश से 13 जनवरी 1999 को उक्त खनिज पट्टा मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका प्रोप्राइटर आनंद गोयनका के पक्ष में हस्तांतरित किया गया। लेकिन साल 2000 में वन मंडल अधिकारी कटनी के पत्र के आधार पर कलेक्टर कटनी ने आदेश पारित कर लेटेराइट फायर क्ले और अन्य खनिज के खनन पर रोक लगा दी थी।खदान से संबंधित फैक्ट फाइल नौकरशाह और आईएफएस अफसर के सुर बदलते रहेइस मामले में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि आईएएस अफसर हो या फिर आईएफएस समय-समय पर सभी के सुर बदलते रहे। मसलन जब अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल दूसरी बार वन मंत्रालय संभाला तो एक आदेश जारी कर पूर्व एसीएस वन जेएन कंसोटिया के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें कटनी जिले की तहसील ढीमरखेड़ा के ग्राम झिन्ना की खदान के मामले में सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी वापस लेने का आदेश दिया था। अपने आदेश को तत्काल अमल में लाने के लिए कंसोटिया ने बाकायदा डीएफओ कटनी को कारण बताओं नोटिस की तलब किया था। यहां यह भी तथ्य भी गौरतलब है कि जब वर्णवाल प्रमुख सचिव वन थे तब उन्होंने भी एसएलपी वापस लेने का आदेश जारी किया था। अब वही बता सकते है कि वे तब सही थे या फिर अब..? फिलहाल पिछले महीने वन विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने वन मुख्यालय को निर्देश दिये हैं कि यदि यह केस अब तक वापस नहीं लिया गया है तो केस वापस लेने की कार्रवाई आगामी आदेश तक रोक दी जाये। वर्णवाल के आदेश के बाद जंगल महकमे में लाख टके का सवाल उठ रहा है कि आखिर किस अदृश्य शक्ति के दबाव में आकर पूर्व एसीएस कंसोटिया ने एसएलपी वापस लेने का आदेश जारी किया था। इसी प्रकार रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी जेपी शर्मा जब भू-अभिलेख शाखा में एपीसीसीएफ थे तब उन्हें विवादित खदान भूमि वन भूमि का हिस्सा दिखा करती थी पर जब रिटायर हो गए तो उन्हें भी विवादित भूमि राजस्व भूमि नजर आने लगी है। अफसरों की कमेटी ने लिया था एसएलपी वापस लेने का निर्णयएसएलपी वापस लेने संबंधित आदेश जारी करने के पूर्व 13 अक्टूबर 23 को अपर मुख्य सचिव वन कंसोटिया की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। बैठक में अतुल कुमार मिश्रा सचिव वन, अशोक कुमार पदेन सचिव, आरके गुप्ता तत्कालीन वन बल प्रमुख, अतुल कुमार श्रीवास्तव तत्कालीन पीसीसीएफ वर्किंग प्लान और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक भू अभिलेख डॉ वीएस अन्नागिरी भी उपस्थित थे। यह बैठक में ग्राम झिन्ना एवं हरैया तहसील ढीमरखेड़ा जिला कटनी में स्वीकृत खनिज पट्टे विवाद के निराकरण के लिए बुलाई गई थी। इस कमेटी के निर्णय के बाद ही तत्कालीन एसीएस कंसोटिया ने एसएलपी वापस आदेश जारी किया। यह बात अलग है कि इसी आदेश के चलते ही उनसे वन मंत्रालय से हटा दिया गया।

जिसे ब्लैकलिस्ट किया उसकी शिकायत पर ही डीएफओ के खिलाफ जांच शुरू

Investigation started against DFO only on the complaint of the person who was blacklisted

Investigation started against DFO only on the complaint of the person who was blacklisted उदित नारायणभोपाल। जंगल महकमे के एक डीएफओ के खिलाफ जांच इसलिए शुरू हो गई, क्योंकि उसके फर्म को डीएफओ ने ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इस प्रकरण से विजिलेंस शाखा की कर शैली पर सवाल उठने लगे है कि शिकायत की तब्शीश किए बिना ही जांच का फरमान जारी कर दिया।प्रभारी डीएफओ अनूपपुर श्रद्धा पेंद्रे ने मे० रॉयल टेक इन्डस्ट्रियल कॉर्पोरेशन चचाई एम.पी.ई.व्ही. चचाई जिला अनुपपूर को वर्ष 2023-24 द्वारा समयावधि में सामग्री प्रदाय नही करने एवं निर्देशों का पालन नही करने के कारण मे० रॉयल टेक इन्डस्ट्रियल कॉर्पोरेशन चचाई अनूपपुर फर्म को 5 वर्ष (वर्ष 2024-25 से 28-29) की अवधि के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया और उनके द्वारा जमा की गई प्रतिभूति राशि ढाई लाख रुपए भी राजसात कर लिए है। डीएफओ की कार्यवाही से बौखलाए मे० रॉयल टेक इन्डस्ट्रियल कॉर्पोरेशन चचाई फर्म के संचालक ने डीएफओ श्रद्धा पेंद्रे के खिलाफ विभागीय विजिलेंस से लेकर सीसीएफ से शिकायत की। शिकायत में टेंडर की औचित्यहीन शर्तों का उल्लेख किया है। शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि का परीक्षण किए बिना ही वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों ने डीएफओ के खिलाफ जांच प्रारंभ करवा दी है। वर्किंग प्लान ऑफिसर शैलेंद्र गुप्ता को जांच दी गई है।फर्म को इन सामग्री का मिला था ठेकावनमण्डल दक्षिण शहडोल अंतर्गत विभिन्न परिक्षेत्रों में वित्तीय वर्ष 2023-24 में वानिकी कार्यों एवं निर्माण कार्यों में उपयोग हेतु सामग्री क्रय करने हेतु गोबरखाद, रेत सोन नदी का साफ और सीमेन्ट आदि सामग्री प्रदाय करने हेतु मे० रॉयल टेक इन्डस्ट्रियल कॉर्पोरेशन चचाई को वर्क ऑडर दिया गया था। फर्म ने सामग्री समय पर प्रदाय नहीं किया। सामग्री प्रदाय न करने बाबत् स्पष्टीकरण देने हेतु निर्देशित किया गया। साथ ही उप वनमण्डलाधिकारी सोहागपुर के पत्र क्रमांक/4348, वन परिक्षेत्राधिकारी मोहपास के पत्र पत्र क्रमांक/2391, पत्र क्रमाक/2393, पत्र क्रमांक / 2345, पत्र क्रमाक/2397, के अलावा वन परिक्षेत्राधिकारी खन्नीधी, जैतपुर, बुढ़ार और परिक्षाधिकारी शहडोल सामग्री प्रदाय करने हेतु बार-बार निर्देशित किया गया किन्तु मे० रॉयल टेक इन्डस्ट्रियल कॉर्पोरेशन चचाई एम.पी.ई.व्ही. चचाई जिला अनुषपूर (म०प्र०) द्वारा सामग्री ही आज दिनांक तक प्रदाय नहीं किया। इसके कारण वानिकी कार्य एवं निर्माण कार्य आज दिनांक तक पूर्ण नही हो पाया है। वर्तमान में क्षेत्र तैयारी अन्तर्गत भू-जल संरक्षण कार्य, गड्‌या खुदाई, विकृत पौधा कटाई आदि कार्य प्रगति पर है जिससे क्षेत्र तैयारी आदि कार्य में काफी विलंब हो रहा है। सामग्री तत्काल प्रदाय करने हेतु फर्म को लेख किया गया किन्तु कार्यालय से जारी पत्रों के किसी भी पत्र का प्रति उत्तर/बचाव उत्त्तर प्रस्तुत नहीं किया गया।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश एपीएआर संबंधित आदेश सरकार वापस लें नहीं तो अवमानना कार्यवाही शुरू करेंगे

Supreme Court's order: Government should withdraw APAR related order or else we will initiate contempt proceedings

Supreme Court’s order: Government should withdraw APAR related order or else we will initiate contempt proceedings भोपाल। उच्चतम न्यायालय न्यायमूर्ति बी दवाई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य को चेतावनी दी यदि 29 जून को जारी आईएफएस अधिकारियों की प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट संबंधित आदेश वापस लें नहीं तो  प्रदेश सरकार के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जहां आईएफएस अधिकारियों की जीत हुई है वहीं नौकरशाही की फजीहत हुई है। एक अधिकारी ने कोर्ट के फैसले के बाद अपनी प्रक्रिया में कहा कि सत्यमेव जयते।   यह आदेश न्यायमूर्ति बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने गौरव कुमार बंसल, वकील द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया । न्यायमूर्ति बीआर गवई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मध्य प्रदेश राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता को इस मुद्दे को गंभीरता से देखने का निर्देश दिया और आगे कहा कि यदि दिनांक 29 जून 24 का आदेश वापस नहीं लिया गया तो न्यायालय उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू कर सकता है। सनद रहे कि 29 जून 2024 के अपने आदेश के तहत, मध्य प्रदेश राज्य ने डीएफओ से लेकर पीसीसीएफ तक के भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए एपीएआर चैनल के संबंध में एक नई व्यवस्था शुरू की। बंसल ने न्यायमूर्ति गवई की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ को यह भी अवगत कराया कि 29 जून 2024 के आक्षेपित आदेश ने न केवल डीएफओ से लेकर पीसीसीएफ तक सभी आईएफएस अधिकारियों के एपीएआर जमा करने के चैनल को बदल दिया है, बल्कि यह भी निर्देश दिया है कि संयुक्त से संबंधित कार्य वन प्रबंधन, वन अधिकार अधिनियम से संबंधित मामले, भूमि अधिग्रहण, इकोटूरिज्म, वन क्षेत्रों में खनन गतिविधियाँ, और डीएफओ , वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक द्वारा किए गए अन्य महत्वपूर्ण कार्यों का मूल्यांकन संबंधित जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्त द्वारा किया जाएगा। एपीएआर में उनकी टिप्पणी के साथ दस में से नंबर देकर, जो उनकी भूमिका के बिल्कुल विपरीत है। बंसल ने तर्क दिया कि मध्य प्रदेश राज्य द्वारा जारी दिनांक 29 जून 24 का आदेश टी.एन. के फैसले में इस माननीय न्यायालय द्वारा निर्धारित स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन करता है। बंसल ने  न्यायमूर्ति गवई की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ को यह भी सूचित किया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में गैर-वन विभाग के अधिकारियों को शामिल करने से न केवल भारतीय वन सेवाओं के प्राथमिक जनादेश यानी वैज्ञानिक प्रबंधन, संरक्षण और वनों का संरक्षण कमजोर होगा। वन्यजीवन के संरक्षण और सुरक्षा पर भी प्रभाव डालेगा, इसलिए वर्तमान आदेश मध्य प्रदेश सरकार वापस ले।

विरूद्व वन अपराध प्रकरण क्रमांक 31/12 दिनांक 24 फरवरी 24 के माध्यम से पंजीबद्ध किया गया,अनुमति के विरुद्ध 27.9 हेक्टेयर पर निर्माण किया

construction was done on 27.9 hectares against the permission.

Forest offence case number 31/12 dated 24 February 24 was registered against him, construction was done on 27.9 hectares against the permission. (विशेष संवाददाता ) भोपाल। कंपनी द्वारा स्थल पर कक्ष कमांक पी-546 में 182.00 हेक्टेयर में निर्माण कार्य किया गया है, जिसमें सीमेन्ट फैक्ट्री प्लांट, रिहायसी कॉलोनी, स्कूल, रेस्टहाउस आदि सम्मिलित हैं। कक्ष कमांक पी-546 में 182 हेक्टेयर में निर्माण कार्य के अतिरिक्त कंपनी द्वारा कक्ष कमांक पी-555 में 27.9 हेक्टेयर में बैंक, लेबर कॉलोनी, कॉलेज, हॉस्पिटल, बाजार आदि का निर्माण किया गया है। अतएव फैक्ट्री प्रबंधन को कुल आवंटित 188.23 हेक्टेयर वनभूमि में से कन्वेयर बेल्ट हेतु आवंटित 5.855 हेक्टेयर वनभूमि को हटाकर कुल 182.375 हेक्टेयर में निर्माण कार्य करने की अनुमति प्राप्त थी किंतु कंपनी द्वारा आवंटित 182.375 हेक्टेयर वन भूमि के विरुद्ध बीट सगमनिया के कक्ष क्रमांक पी-546 में 182 हेक्टेयर तथा बीट बम्हनी के कक्ष क्रमांक पी-555 मैं 27.9 हेक्टेयर में निर्माण कार्य किया गया। इस प्रकार कंपनी को निर्माण कार्य हेतु कुल आवंटित वन भूमि 182.375 हेक्टेयर के विरुद्ध कुल 209.9 हेक्टेयर वन भूमि में फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा निर्माण कार्य किया गया। अतएव कंपनी द्वारा 27.9 हेक्टेयर वन भूमि अतिरिक्त अवैध निर्माण कार्य किया गया है।  वर्किंग प्लान में भी अतिक्रमण का था उल्लेख  वनमण्डल सतना की कार्य आयोजना में वर्ष 2008-09 से 2017-18 में 30 हेक्टेयर तथा वर्तमान कार्य आयोजना वर्ष 2019-20 से 2028-29 भाग-3 आलेख में 24.94 हेक्टेयर अतिक्रमण कक्ष कमांक पी-555 में लेख किया गया है। जो 2005 के पूर्व का है। कार्य आयोजना (वर्ष 2008-09 से 2017-18) एवं वर्तमान कार्य आयोजना (वर्ष 2019-20 से 2028-29) के अनुसार भी कक्ष कमांक पी-555 में कंपनी प्रबंधन द्वारा किये गये 27.9 हेक्टेयर में निर्माण कार्य अतिक्रमण के रूप में अंकित है एवं यह अतिक्रमण वर्ष 2005 से पूर्व का है।  गूगल इमेजरी में भी अतिक्रमण उजागर  गूगल अर्थ इमेजरी वर्ष 2002 तक ही उपलब्ध है एवं वर्ष 2002 के पूर्व की गूगल इमेजरी उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2002 की गूगल इमेजरी में यह अतिक्रमण देखा जा सकता है। अतएव यह अतिक्रमण वर्ष 2002 के पूर्व का है। फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा इनके निर्माण वर्ष के सम्बन्ध में कोई भी दस्तावेज तथा कथन प्रदाय नहीं किये गये हैं। जांच के समय स्थानीय बुजुर्गों से पूछतांछ की गई, जिसमें उनके द्वारा बताया गया कि अस्पताल, कॉलोनी एवं ग्राउन्ड वर्ष 1981 से 1984 के मध्य में बना है तथा कॉलेज एवं बाजार 2000 से 2002 के मध्य प्रारंभ किया गया है तथा कॉलेज को वर्ष 2005 में मान्यता प्राप्त हुई है।  किसी राजस्व अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं  अल्ट्राटेक सीमेण्ट फैक्ट्री द्वारा उक्त भूमि के संबंध में आज दिनांक तक केवल कलेक्टर, सतना द्वारा वर्ष 1993 में (1977 से 2078, 99 वर्ष की अवधि के लिए) दी गई लीज डीड की छायाप्रति प्रदाय की गई है। साथ ही फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा वर्ष 1990 के एक नक्शे की छायाप्रति प्रदाय की गई है, जिसमें किसी भी राजस्व के अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं, इसमें केवल एसएन नाचने तत्कालीन डीएफओ सतना के हस्ताक्षर है। यह कोई मानचित्र नहीं है, बल्कि कंपनी द्वारा स्थल पर किये गये निर्माण कार्य का लेआउट प्लान है, जो कि उन्होंने अतिक्रमण पश्चात् बनाया है, जिसकी कोई वैधता नहीं है। साथ ही लेख है कि इस क्षेत्र के राजस्व मानचित्र भू-अभिलेख कार्यालय जिला सतना एवं मैहर में उपलब्ध नहीं है। साथ ही कलेक्टर जिला सतना द्वारा वर्ष 1993 में प्रदाय की गई लीज डीज की मूल फाइल तथा संबंधित अन्य अभिलेख भी अद्यतन स्थिति में प्राप्त नहीं हुए है।

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