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‘गढ़चिरौली जल्द होगा नक्सली प्रभाव से मुक्त’, 11 नक्सलियों ने किया सरेंडर, सीएम देवेंद्र फडणवीस के सामने डाले हथियार

गढ़चिरौली  महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष सीनियर कैडर विमला चंद्र सिदम उर्फ तारक्का समेत कुल 11 नक्सलियों ने  सरेंडर कर दिया. इन सभी नक्सलियों के सिर पर 1.03 करोड़ रुपये का सामूहिक इनाम रखा गया था. ये सभी सुरक्षा कर्मियों पर हमले करने में शामिल थे. सीएम के सामने सरेंडर करने वाले माओवादियों में सबसे प्रमुख दंडकारण्य जोनल कमेटी का सदस्य विमला चंद्र सिदम उर्फ तारक्का है. विमला पिछले 38 सालों से नक्सलवादी आंदोलन में शामिल था. सीएम फडणवीस ने नक्सल विरोधी अभियानों में बहादुरी के लिए C-60 कमांडो और अधिकारियों को सम्मानित भी किया. उन्होंने कहा कि हथियार डालने वाले माओवादियों की संख्या में वृद्धि और भर्ती करने में आंदोलन में विफलता को देखते हुए महाराष्ट्र जल्द ही नक्सल खतरे से मुक्त हो जाएगा. उन्होंने कहा, “गढ़चिरौली पुलिस ने जिले में नक्सली गतिविधियों को लगभग खत्म कर दिया है. उत्तरी गढ़चिरौली अब माओवादी गतिविधियों से मुक्त है और दक्षिणी गढ़चिरौली जल्द ही नक्सलियों से मुक्त हो जाएगा.” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले कुछ सालों में कई खूंखार नक्सलियों को या तो मार गिराया गया या गिरफ्तार किया गया. उन्होंने कहा कि, माओवादी कैडर आंदोलन से खुद को अलग कर रहे हैं क्योंकि उन्हें इसकी खोखली विचारधारा का एहसास हो गया है. मुख्यमंत्री ने कहा, “उन्हें यकीन है कि, उन्हें संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से ही न्याय मिलेगा.” उन्होंने कहा कि, भारत विकास में बड़ी छलांग लगा रहा है और माओवाद खत्म हो रहा है. इससे एक दिन पहले फडणवीस ने संवाददाताओं से कहा कि, गढ़चिरौली जिले के दूरदराज के इलाकों में नक्सलियों का प्रभुत्व कम हो रहा है और नक्सलवाद अपने अंत के करीब है. उन्होंने कहा कि सरकार ने माओवादियों के प्रभुत्व को खत्म करके गढ़चिरौली को “पहला जिला” बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सीएम देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा कि, गढ़चिरौली को अक्सर महाराष्ट्र का आखिरी जिला कहा जाता है क्योंकि यह राज्य की पूर्वी सीमा पर है. फडणवीस ने अपने दौरे के दौरान जिले में 32 किलोमीटर लंबी गट्टा-गरदेवाड़ा-वांगेतुरी सड़क और वांगेतुरी-गरदेवाड़ा-गट्टा-अहेरी मार्ग पर महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) की बस सेवा का उद्घाटन किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि गढ़चिरौली सरकार के लिए अंतिम नहीं, बल्कि ‘पहला जिला’ है. उन्होंने कहा कि, आज उद्घाटन किया गया सड़क संपर्क महाराष्ट्र को सीधे छत्तीसगढ़ से जोड़ेगा. फडणवीस ने नक्सलवाद के खिलाफ उनके काम के लिए गढ़चिरौली पुलिस की सराहना की. उन्होंने कहा कि, लोग अब नक्सलियों का समर्थन नहीं करते हैं. अब कोई भी व्यक्ति गैरकानूनी आंदोलन में शामिल होने को तैयार नहीं है जो “बहुत महत्वपूर्ण” है. इस दौरान मुख्यमंत्री ने गट्टा-गरदेवाड़ा-तोड़गट्टा-वांगेतुरी सड़क और ताड़गुडा पुल का हवाई निरीक्षण किया. फडणवीस ने कोंसारी में लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड के विभिन्न विभागों का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, “राज्य सरकार पिछले दस सालों से गढ़चिरौली को बदलने की कोशिश कर रही है ताकि आम आदमी को मुख्यधारा में लाया जा सके और इस जिले से नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंका जा सके.” उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व और गढ़चिरौली पुलिस और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों की बदौलत पिछले चार सालों में माओवादी गढ़चिरौली में एक भी कैडर की भर्ती करने में विफल रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि, खनन से जुड़े उपक्रमों में गढ़चिरौली जिले में 20 हजार रोजगार के अवसर पैदा होंगे. उन्होंने कहा कि, निकट भविष्य में गढ़चिरौली में एक हवाई अड्डा बनेगा और गढ़चिरौली बंदरगाहों को जोड़ने वाले जलमार्गों का भी सर्वेक्षण किया जाएगा.

नक्सल प्रभावित बस्तर में एक नई हवा चलना शुरू, गोलियों की आवाज के बीच बदलाव की शांति

बस्तर  छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर में एक नई हवा चलना शुरू हुई है। यहां के अबूझमाड़ के दूर-दराज इलाके में जहाँ कभी गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजती थी, अब सीमेंट मिक्सर की आवाज़ सुनाई दे रही है। रेकावया गांव में आज़ादी के बाद पहला स्कूल बन रहा है। यह बदलाव सुरक्षा बलों के आक्रामक अभियान का नतीजा है, जिसमें इस साल 222 माओवादियों को मार गिराया गया है। यहां विकास परियोजनाएं भी तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। जिससे बस्तर में बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के लिए पुनर्वास नीति में भी बदलाव कर रही है। हालांकि, इस सैन्य अभियान के कारण आम नागरिक भी हिंसा के शिकार हो रहे हैं। माओवादी भी आम लोगों पर हमले कर रहे हैं। शांति वार्ता की संभावना अभी धुंधली है। बस्तर के इस नए अध्याय का नेतृत्व एक आदिवासी मुख्यमंत्री कर रहे हैं, जिससे उम्मीद है कि वे इस क्षेत्र की समस्याओं को बेहतर समझेंगे। गोलियों की आवाज के बीच बदलाव की शांति यह गांव रायपुर से लगभग 300 किलोमीटर दूर अबूझमाड़ के घने जंगलों में स्थित है। गोलियों की आवाज के बीच बदलाव आसान नहीं था। इस साल की शुरुआत में रेकावया में आठ माओवादियों को मार गिराया गया था। इसके बाद ही यहां सुरक्षा शिविर स्थापित किए जा सके और स्कूल के निर्माण के लिए इंद्रावती नदी के रास्ते ईंट और सीमेंट पहुंचाना संभव हो पाया। यह वही स्कूल है, जिसे कभी माओवादी चलाते थे। बस्तर में खुले विकास के रास्ते बस्तर में माओवादियों के खिलाफ यह अभियान केवल रेकावया तक सीमित नहीं है। पूरे बस्तर में सुरक्षा बलों ने 222 माओवादियों को मार गिराया है। यह संख्या पिछले पांच सालों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। विष्णु देव साई के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के इस आक्रामक अभियान ने माओवादियों को उनके गढ़ अबूझमाड़ से भी खदेड़ दिया है। इससे बस्तर में विकास के रास्ते खुल गए हैं। बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएँ अब उन इलाकों तक पहुँच रही हैं, जो कभी माओवादियों के कब्जे में थे। दो दशक पहले बंद हुए 50 स्कूल फिर खुले माओवादी हिंसा के कारण दो दशक पहले बंद हुए लगभग 50 स्कूलों को फिर से खोला गया है। इनमें से कुछ स्कूलों का पुनर्निर्माण उन्हीं माओवादियों ने किया है, जिन्होंने कभी इन्हें तोड़ा था। ये माओवादी अब हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। इसके साथ ही नई ज़िंदगी शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। 222 माओवादियों का सफाया इस साल सुरक्षा बलों की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2023 में जहां 20 माओवादी मारे गए थे, वहीं इस साल अब तक 222 माओवादियों को मार गिराया गया है। नारायणपुर में एक ही अभियान में 31 माओवादी मारे गए थे। खूंखार नक्सली का गांव पर पुनरुत्थान का प्रतीक छत्तीसगढ़ सरकार सुरक्षा बलों की सफलता के बाद विकास परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ा रही है। खूंखार माओवादी कमांडर हिड़मा के पैतृक गांव पुवर्ती, बस्तर के पुनरुत्थान का प्रतीक बन गया है। इस साल नवंबर में पुवर्ती के आस-पास के कई गांवों में आज़ादी के बाद पहली बार बिजली पहुंची है। यहां सड़क का निर्माण भी चल रहा है। इस साल की शुरुआत में स्थापित एक सुरक्षा शिविर ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। इस शिविर की बदौलत इस गणतंत्र दिवस पर दशकों बाद पुवर्ती में तिरंगा फहराया गया। माओवादियों का भी दिल जीत रही सरकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक माओवादियों का सफाया करने का वादा किया है। सरकार न केवल बस्तर के लोगों का बल्कि माओवादी कार्यकर्ताओं का भी दिल जीतने में कामयाब होती दिख रही है। इस साल सात साल में सबसे ज़्यादा 802 माओवादी कार्यकर्ताओं ने आत्मसमर्पण किया है। इन पर कुल 8.2 करोड़ रुपये से ज़्यादा का इनाम था। इससे पहले 2016 में 1,210 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। सरकार ने हाल ही में अपनी पुनर्वास नीति में बदलाव किया है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों और नक्सली हिंसा के पीड़ितों के लिए 15,000 घरों को मंजूरी दी गई है। साथ ही, कौशल विकास के लिए 10,000 रुपये प्रति माह का वजीफा भी दिया जाएगा। बस्तर रेंज आईजी का कहना बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने हमारे सहयोगी टीओआई को बताया कि 2024 बस्तर रेंज के जवानों के लिए सभी मोर्चों पर महत्वपूर्ण रहा। हमने उन इलाकों में भी सेंध लगाई, जिन्हें माओवादियों का अभेद्य गढ़ माना जाता था। अबूझमाड़ और दक्षिण बस्तर में अभूतपूर्व सफलताओं ने न केवल सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि स्थानीय लोगों को भी उम्मीद दी है कि नक्सली खतरा जल्द ही खत्म हो जाएगा। यह न केवल मारे गए नक्सलियों की संख्या है, बल्कि राज्य समिति स्तर के कैडर जैसे उच्च पदस्थ कैडर का नक्सली पारिस्थितिकी तंत्र से हटना है, जिसने हमें इस सीज़न में बढ़त दिलाई है। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण बस्तर, पश्चिम बस्तर और माड़ क्षेत्र के वंचित इलाकों में हमारी परिचालन और विकास पहुंच बढ़ाने से स्थिति बदल गई है। गांवों में पीडीएस दुकानें, आंगनवाड़ी केंद्र और घरेलू विद्युतीकरण जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने से विकास की कमी दूर हुई है और स्थानीय आबादी और सरकार के बीच विश्वास बढ़ा है। हमें आगामी सीज़न में बेहतर परिणामों की उमीद है।

छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों को मिली बड़ी कामयाबी; 8 लाख रु की इनामी महिला नक्सली ढेर, 4 माओवादी गिरफ्तार

कांकेर छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर तैनात सुरक्षाबलों को  दोहरी सफलता मिली। एक तरफ उन्होंने 8 लाख रुपए की इनामी नक्सली को मार गिराया, तो वहीं दूसरी तरफ 4 नक्सलियों को गिरफ्तार भी कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में आठ लाख रुपए की इनामी महिला नक्सली को मार गिराया। कांकेर जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) इंदिरा कल्याण एलेसेला ने बताया कि छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिनागुंडा गांव के करीब जंगल में सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में महिला नक्सली रीता मड़ियाम (30) को मार गिराया। एलेसेला ने बताया कि छोटेबेठिया थाना क्षेत्र में जिला रिजर्व गार्ड (DRG), बस्तर फाइटर्स और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के संयुक्त दल को गश्त के लिए रवाना किया गया था तथा दल जब बीनागुंडा गांव के जंगल में था तब नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि इसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की और कुछ देर तक दोनों ओर से गोलीबारी के बाद नक्सली वहां से फरार हो गए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने जब घटनास्थल की तलाशी ली तब वहां एक महिला नक्सली का शव, एक .303 की राइफल, एक .315 बोर की राइफल और भारी मात्रा में हथियार तथा नक्सली सामान बरामद किया। एलेसेला ने बताया कि महिला नक्सली की पहचान PLGA मिलिट्री कंपनी नंबर पांच की सदस्य रीता मड़ियाम के रूप में हुई है और उसके सिर पर 8 लाख रुपए का इनाम घोषित था। उधर सुकमा जिले में पुलिस को मंगलवार को चार नक्सलियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी मिली। बताया जा रहा है कि DRG और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम एरिया डॉमिनेशन ऑपरेशन पर निकली थी। उसी समय इन नक्सलियों को पकड़ने में सफलता मिली हैं। गिरफ्तार सभी नक्सली चिंतलनार थाना क्षेत्र के निवासी हैं। बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि इस वर्ष अब तक नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों ने बस्तर क्षेत्र में 137 नक्सलियों को मार गिराया है तथा इस दौरान 498 चरमपंथी गिरफ्तार किए गए हैं और 461 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। नक्सलियों ने शुरू की थी गोलीबारी एलेसेला ने बताया कि छोटेबेठिया थाना क्षेत्र में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), बस्तर फाइटर्स और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के संयुक्त दल को गश्त के लिए रवाना किया गया था। दल जब बीनागुंडा गांव के जंगल में था तब नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी। सर्चिंग को दौरान मिली लाश उन्होंने बताया कि इसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की और कुछ देर तक दोनों ओर से गोलीबारी के बाद नक्सली वहां से फरार हो गए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने जब घटनास्थल की तलाशी ली तब वहां एक महिला नक्सली का शव बरामद हुआ। हथियार भी बरामद एलेसेला ने बताया कि महिला नक्सली की पहचान पीएलजीए मिलिट्री कंपनी नंबर पांच की सदस्य रीता मड़ियाम के रूप में हुई है और उसके सिर पर आठ लाख रुपये का इनाम था। महिला नक्सली के पास एक .303 की राइफल, एक .315 बोर की राइफल और भारी मात्रा में हथियार तथा नक्सली सामान बरामद किया। अब तक 137 का एनकाउंटर बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि इस वर्ष अब तक नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों ने बस्तर क्षेत्र में 137 नक्सलियों को मार गिराया है तथा इस दौरान 498 चरमपंथी गिरफ्तार किए गए हैं और 461 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

सुरक्षाबलों के लिए अब अबूझ पहेली नहीं बस्तर के जंगल, छत्तीसगढ़ में नक्सलियों पर ऐसे हुआ सबसे बड़ा प्रहार

 बस्तर वर्ष 2024 में छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार आने के बाद से ही बस्तर के कोर इलाके में अब तक 32 नए कैंप खोले गए हैं नक्सल मोर्चे पर सरकार की बदली रणनीति से नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन भी तेज हुए हैं। पुलिस अफसरों की मानें तो जनवरी से लेकर अब तक बस्तर के कोर इलाके में फोर्स की नक्सलियों से 72 मुठभेड़ हो चुकी हैं, जिसमें 137 नक्सली मारे गए हैं। इन दिनों फोर्स का पूरा फोकस इस वक्त अबूझमाड़ पर है। यह नक्सलियों की अघोषित राजधानी कही जाती है। इसलिए फोर्स यहां नक्सलियों का प्रभाव कम करने में जुटी हुई है। नक्सलियों के ठिकाने पर लगातार फोर्स हमले बोल रही है। हर हमले के बाद नक्सलियों को बड़ा नुकसान हो रहा है। बस्तर के नक्सल इतिहास में कभी इतनी बड़ी संख्या में नक्सली नहीं मारे गए थे जितने पिछले छह महीने के भीतर मारे गए हैं। इससे नक्सलियों और उनके कैडर में दहशत का माहौल है। यही कारण है कि अब तक 6 महीने में 400 से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया है। आमतौर पर एक साल में औसतन 500 समर्पण हुआ करते थे।   अबूझमाड़ इलाके में अब नहीं रहेगी नक्सलियों की दहशत नक्सलियों के खिलाफ किसी एक ऑपरेशन में सुरक्षा बलों की यह सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है। सुरक्षा बलों के लिए ये मुठभेड़ कई मायनों में अहम है। यह सफल ऑपरेशन जंगल के बीच अबूझमाड़ के अंदर सुरक्षा बलों के प्रवेश का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ इलाके को नक्सलियों का कोर इलाका माना जाता है। पिछले तीन दशकों से यह इलाका सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बना हुआ है। जंगलों और पहाड़ों के बीच का यह इलाका नक्सलियों के लिए अभेद्य गढ़ बन गया। इस मुठभेड़ ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि पिछले कई वारदातों में शामिल नक्सलियों का सफाया हो गया है। अपने पांच कोर इलाके में सिमटे नक्सली बस्तर में फोर्स की सक्रियता के चलते नक्सली अब अपने पांच कोर इलाके तक ही सिमटकर रह गए हैं, जिसमें प्रमुख अबूझमाड़, इंद्रावती नेशनल पार्क, बैलाडीला की पहाडिय़ों का तराई वाला इलाका, सुकमा जिले में बासागुड़ा-जगरगुंडा- भेज्जी ट्राएंगल व बीजापुर के पामेड़ इलाके में नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 का इलाका शामिल है। अन्य इलाकों में फोर्स की मौजूदगी व कैंप स्थापना के बाद नक्सलियों का प्रभाव कम हुआ है। अबूझमाड़ व नेशनल पार्क इलाके को अब फोर्स ने जब से टारगेट किया है तब से इस इलाके में नक्सलियों के नई भर्ती शिविर और ट्रेनिंग कैंप आयोजित नहीं हो पा रहे हैं। 2018 से 2023 तक घटनाओं और हताहतों की संख्या यहां पिछले कुछ वर्षों में बस्तर में नक्सली आतंकी घटनाओं और हताहतों की संख्या को दर्शाने वाला डेटा चार्ट है, जिसे हिंदी में लेबल किया गया है। यह चार्ट 2018 से 2023 तक घटनाओं और हताहतों की संख्या में गिरावट का रुझान दर्शाता है।  गांवों में फैले मिलिशिया कैडर भी हुए कमजोर नक्सलियों के पीएलजीए के सशस्त्र लड़ाके अब बस्तर के गांवों में फैले मिलिशिया सदस्यों तक अपनी पहुंच नहीं बना पा रहे हैं। गांवों में फोर्स के कैंप स्थापित होने के बाद मिलिशिया सदस्यों की मीटिंग तक लड़ाके नहीं ले पा रहे हैं। अब मिलिशिया कैडर नक्सलियों के प्रभाव से बाहर निकलते दिख रहे हैं। बस्तर में नक्सलियों के लिए यह बड़ा नुकसान है।  अबूझमाड़ से शिफ्ट हो रहे नक्सलियों के टॉप लीडर अबूझमाड़ की सीमा पांच जिलों में फैली हुई हैं जिसमें कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा और बस्तर जिला शामिल है। फोर्स का दबाव जिस तरह से अबूझमाड़ में बढ़ा है उसके बाद से नक्सलियों के टॉप लीडर वहां से लगातार शिफ्ट हो रहे हैं। जिनमें नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के सचिव बसव राजू, एम वेणुगोपाल उर्फ भूपति उर्फ सोनू, पक्का हनुमंतलु उर्फ गणेश उइके और दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव केआरसी रेड्डी उर्फ गुड़सा उसेंडी आदि शामिल हैं। कैंपों की स्थापना के चलते नक्सली हुए कमजोर नक्सल मोर्चे पर पुलिस की इस बड़ी सफलता के पीछे नक्सलियों के अभेद इलाकों में नए कैंपों की स्थापना को बड़ी वजह बताया जा रहा है. जिससे नक्सल संगठन की पकड़ अपने आधार इलाकों में कमजोर पड़ती जा रही है. बीजापुर का गंगालूर इलाका जिसे कभी नक्सलियों की अघोषित उपराजधानी भी कहा जाता था, अब यहां मुतवेण्डी, कावड़गांव, डुमरीपालनार के अलावा बीजापुर-सुकमा जिले के सरहदी इलाके टेकुलगुड़म, गुंडेम के साथ दुर्दांत नक्सली हिंड़मा के गढ़ उसके गांव पुवर्ती में फोर्स कैंप बना चुकी है. बताया जा रहा है कि अब वहां पीएलजीए लड़ाके ही अपना गढ़ बचाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। अधिकांश नक्सली एमएमसी, एओबी व टीटीके जोन में शिफ्ट होने की जानकारी मिल रही है। दुर्दांत नक्सली हिड़मा के गांव पूवर्ती में भी इसी साल कैंप स्थापित किया गया जो कि बस्तर में नक्सल मोर्चे पर मिली बड़ी कामयाबियों में से एक थी। हिड़मा अब अपना इलाका छोड़ बस्तर के अलग-अलग क्षेत्र में मूवमेंट कर रहा है। नक्सलियों की इन जंगलों में बसती है जान अबूझमाड़ की पहाड़ियां और जंगल दक्षिणी छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में लगभग 4,000 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैली हुई हैं, जो मुख्य रूप से कांकेर के ठीक दक्षिण में नारायणपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों को कवर करती हैं। पहाड़ी इलाका, जंगल, सड़क, बुनियादी सुविधाओं का न होना और सशस्त्र विद्रोहियों की उपस्थिति से इस इलाके का एक बड़ा हिस्सा अब तक सरकारी सर्वेक्षण के दायरे से बाहर रहा है। यदि इसके भूभाग की बात करें तो इस इलाके का क्षेत्रफल गोवा जैसे राज्य से बड़ा है। इन जंगलों का उपयोग नक्सलियों द्वारा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से ओडिशा (पूर्व में) आने- जाने के लिए एक गलियारे के रूप में किया जाता है। अब तक इतने नक्सली मारे गए 2018: 125 2019: 79 2020: 44 2021: 48 2022: 31 2023: 24 2024 में अब तक 137  नक्सल मुक्त बस्तर की ओर बढ़ रहे बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में हम तेजी से बढ़ रहे हैं। फोर्स को बीते छह महीने में कई बड़ी सफलताएं मिली हैं। नक्सलियों का प्रभाव क्षेत्र सिमटता जा रहा है। नक्सल प्रभाव वाले दो तिहाई क्षेत्र में अब नक्सलियों को जनता ने भी नकार दिया … Read more

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