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FATF ने पाकिस्तान को फिर से ग्रे लिस्ट में नहीं डाला, भारत की कोशिश हुई नाकाम !

इस्लामाबाद  मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग पर नजर रखने वाली संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में नहीं डाला है। इस फैसले पर पाकिस्तान में जश्न का माहौल है। पाकिस्तान का दावा है कि एफएटीएफ ने उसे ग्रे लिस्ट में डालने के भारत के प्रयासों को नजरअंदाज किया है। ऐसे में पाकिस्तान इसे खुद की जीत के तौर पर प्रस्तुत कर रहा है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तो सार्वजनिक तौर पर इसे पाकिस्तान की जीत और भारत की हाल के रूप में प्रस्तुत किया है। पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान में तनाव बढ़ गया है। मई के शुरुआती हफ्तों में दोनों देशों के बीच सीमित संघर्ष भी देखने को मिला था। पाकिस्तान ने क्या दावा किया था पाकिस्तान ने दावा किया है कि भारत ने जून में हुए एफएटीएफ की बैठक के दौरान पाकिस्तान को फिर से अपनी ग्रे लिस्ट में डालने के लिए काफी दबाव डाला था। FATF की ग्रे लिस्ट में किसी देश को तब तक निगरानी में रखा जाता है, जब तक कि वह अपनी वित्तीय प्रणाली में पहचानी गई खामियों को ठीक नहीं कर लेता। पाकिस्तान को 2022 में FATF की ग्रे लिस्ट से हटा दिया गया था। हालांकि, इसके बावजूद पाकिस्तान ने कोई सुधार नहीं किया है और आतंकवादियों को न सिर्फ सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध करा रहा है,बल्कि टेरर फाइनेंसिंग जैसे आपराधिक कामों में भी शामिल है। रेडियो पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ उगला जहर पाकिस्तान के सरकारी प्रसारक रेडियो पाकिस्तान ने शनिवार को बताया, “वित्तीय कार्रवाई कार्य बल ने शनिवार को हुई अपनी बैठक में पाकिस्तान को ग्रे सूची में नहीं डालने का फैसला किया है।” उसने आगे यह भी कहा, “एफएटीएफ के फैसले के बाद, भारत अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में पूरी तरह विफल रहा है, क्योंकि भारतीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडल ने एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान को एक बार फिर ग्रे सूची में शामिल कराने के लिए पुरजोर प्रयास किया।” भारत और एफएटीएफ ने नहीं दी प्रतिक्रिया एफएटीएफ या भारत सरकार ने अभी तक इस घटनाक्रम पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यह निगरानी संस्था आमतौर पर प्रत्येक वर्ष अक्टूबर, फरवरी और जून में अपनी पूर्ण बैठकें आयोजित करती है। रेडियो पाकिस्तान ने बताया कि चीन ने एफएटीएफ की बैठक में इस्लामाबाद के पक्ष में “स्पष्ट रुख” अपनाया, जबकि तुर्की और जापान ने भी पाकिस्तान को ग्रे सूची में नहीं डालने के लिए “पूरी तरह से समर्थन” दिया। सरकारी प्रसारक ने इसे पाकिस्तान के राजनयिक मिशन की जीत बताते हुए कहा, “भारत इजरायल की मदद से पाकिस्तान के खिलाफ एफएटीएफ का इस्तेमाल करने की पूरी कोशिश कर रहा था।” ख्वाजा आसिफ ने बताया पाकिस्तान की जीत पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि भारत और इजरायल के ठोस प्रयासों के बावजूद वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) द्वारा पाकिस्तान को फिर से अपनी “ग्रे लिस्ट” में न डालने का फैसला एक बड़ी जीत है। रविवार को एक्स पर एक पोस्ट में, आसिफ ने कहा कि एफएटीएफ ने एक दिन पहले अपने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग समीक्षा समूह की बैठक के बाद पाकिस्तान को फिर से सूचीबद्ध न करने का फैसला किया है। उन्होंने लिखा, “यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी जीत है कि भारत और इजरायल की तमाम साजिशों के बावजूद पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है।” उन्होंने इस फैसले का श्रेय प्रमुख सहयोगियों के मजबूत समर्थन को दिया। आसिफ ने कहा, “चीन ने स्पष्ट रुख अपनाया और पाकिस्तान को राहत देने का समर्थन किया, जबकि तुर्की ने चीन के रुख का समर्थन किया।” “जापान ने भी पाकिस्तान का पूरा समर्थन किया क्योंकि वह एशिया प्रशांत समूह (एपीजी) का सह-अध्यक्ष है।”

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों स्टार पीसीबी के T20I प्लान में ही नहीं

कराची पाकिस्तानी क्रिकेट के तीन मौजूदा सुपर स्टार के टी-20 इंटरनेशनल करियर पर ग्रहण सा लगता दिख रहा है। बाबर आजम, मोहम्मद रिजवान और शाहीन शाह अफरीदी अब पीसीबी के T20I प्लान में ही नहीं हैं। एक पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से ये दावा किया गया है। अगर उनकी जगह लेने वाले नए खिलाड़ी खुद को स्थापित करने में कामयाब हुए तो पाकिस्तान के इन तीनों सुपर स्टार का टी-20I करियर खत्म भी हो सकता है। जंग अखबार ग्रुप के स्पोर्ट्स टीवी चैनल ‘जियो सुपर टीवी’ ने अपनी ऑनलाइन पब्लिश रिपोर्ट में बताया है कि आगामी श्रृंखलाओं के लिए इन तीनों खिलाड़ियों के नाम पर विचार नहीं किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने हालिया टी-20 स्क्वॉड के लिए जिन नामों पर चर्चा की उनमें मोहम्मद रिजवान, बाबर आजम और शाहीन अफरीदी के नाम नदारद थे। बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान तो पहले ही टी-20 इंटरनेशनल के लिए नजरअंदाज किए जा चुके हैं। दोनों ने अपना आखिरी T20I पिछले साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में खेला था। शाहीन शाह अफरीदी ने पाकिस्तान सुपर लीग में जबरदस्त प्रदर्शन किया था। इसलिए उन्हें पाकिस्तान के टी-20 इंटरनेशनल के सेटअप से बाहर रखना हैरान करता है। हालांकि, जियो सुपर टीवी ने पीसीबी सूत्रों के हवाले से बताया है कि समस्या अफरीदी के एटिट्यूड से है। उनके रवैये और व्यवहार की वजह से चयनकर्ता सख्त रुख के लिए मजबूर हुए हैं। जियो सुपर ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि चयनकर्ता पाकिस्तान के आगामी विदेश दौरों के लिए संभावित खिलाड़ियों को शॉर्टलिस्ट कर रहे हैं। जुलाई में पाकिस्तान बांग्लादेश के खिलाफ 3 टी-20 मैच की सीरीज खेल सकता है। इस बीच मोहम्मद रिजवान, शाहीन अफरीदी, हारिस रऊफ और शादाब खान ने बिग बैश लीग के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया है।

पाकिस्तान में आज बजट पेश होगा पाकिस्तान की सरकार अपने रक्षा बजट में 18 फीसदी का इजाफा कर सकती

कराची पाकिस्तान में आज बजट पेश होने वाला है। चर्चा है कि पाकिस्तान की सरकार अपने रक्षा बजट में 18 फीसदी का इजाफा कर सकती है। यह फैसला उसकी ओर से तब लिया जा रहा है, जबकि देश की हालत कर्ज के बोझ से पतली है। पाकिस्तान का रक्षा बजट 2,500 अरब रुपये का हो सकता है। यह इजाफा पाकिस्तान की जनता के लिए चिंताजनक है, जहां बड़ी आबादी मूल सुविधाओं की किल्लत से गुजर रही है। वहां देश की सेना पर खर्च में 18 पर्सेंट का इजाफा हो सकता है। इससे देश में सेना की ताकत में और इजाफा हो जाएगा। पाकिस्तान की आर्थिक सेहत चिंता का विषय रही है। पाकिस्तान में सोमवार को जो आर्थिक समीक्षा पेश की गई, उसके अनुसार देश पर कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ते हुए 76,007 अरब रुपये हो गया है। यह आंकड़ा बीते 4 सालों में ही बढ़ते हुए दोगुना हो गया है। 5 साल पहले ही पाकिस्तान का कुल कर्ज 39,860 अरब रुपये था। वहीं एक दशक पहले यह 17,380 अरब रुपये था। इस तरह बीते एक दशक में ही पाकिस्तान पर कर्ज का बोझ 5 गुना बढ़ गया है। पाकिस्तान पर कर्ज का बोझ बाहरी होने के साथ ही घरेलू भी है। पाकिस्तान पर घरेलू कर्ज कुल 51,518 अरब रुपये है, इसके अलावा बाहरी कर्ज 24,489 अरब रुपये है। आर्थिक सर्वे में साफ किया गया है कि कर्ज का तेजी से बढ़ता बोझ देश में आर्थिक संकट बढ़ा सकता है। देश पर कर्ज के ब्याज का भी बोझ बढ़ सकता है। इसके अलावा देश की आर्थिक स्थिरता पर भी खतरा होगा। सर्वे में स्पष्ट किया गया है कि यदि ऐसे ही हालात रहे तो फिर पाकिस्तान लंबे समय में आर्थिक अस्थिरता के दौर में जा सकता है। इससे सामाजिक कल्याण की योजनाओं से लेकर इन्फ्रास्ट्रक्चर तक पर असर होगा। फिर भी सेना पर खर्च में इजाफे से साफ है कि पाकिस्तान की प्राथमिकता जनता के कल्याण और विकास से ज्यादा युद्धोन्माद पर है। बता दें कि पाकिस्तान में करीब 45 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। वर्ल्ड बैंक के अनुसार पाकिस्तान में गरीबी रेखा से नीचे गुजर करने वाले लोगों की संख्या में कमी आने की बजाय इजाफा ही हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में कुल 790 पाकिस्तानी नागरिक विस्फोटों में मारे गए

कराची आतंकवाद का पर्याय बन चुका पाकिस्तान हाल के दिनों में खुद भी धमाकों से दहल रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में पाकिस्तान विस्फोटक हथियारों से नागरिकों को नुकसान पहुंचने के मामले में दुनिया का सातवां सबसे अधिक प्रभावित देश बन गया। ब्रिटेन स्थित एक गैर सरकारी संगठन एक्शन ऑन आर्म्ड वायलेंस (AOAV) द्वारा  जारी की गई रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में कुल 790 पाकिस्तानी नागरिक इन विस्फोटों में मारे गए। उस साल वहां 248 ऐसे वारदात हुए, जो कि 2023 की तुलना में 11% अधिक है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन घटनाओं में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) का प्रमुख हाथ है। बीएलए ने अकेले 119 नागरिकों को नुकसान पहुंचाया। रिपोर्ट के मुताबिक, BLA द्वारा की जाने वाली हिंसा में 440% की वृद्धि देखी गई। 2023 में 22 घटनाओं के मुकाबले 2024 में 119 नागरिक प्रभावित हुए। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में पाकिस्तान में हुए सभी आत्मघाती हमलों के पीछे BLA ने प्रमुख भूमिका निभाई। 2024 में पाकिस्तान में 2014 के बाद सबसे अधिक 248 घटनाएं दर्ज की गईं। 2018 के बाद दूसरा सबसे बड़ा साल रहा जिसमें नागरिकों की अधिक मौत हुई। 2015 के बाद दूसरे सबसे ज्यादा सशस्त्र बल के सदस्य मारे गए हुए। रिपोर्ट में गंभीर चिंता जताई गई है कि पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों और बीएलए की सक्रियता न केवल स्थानीय शांति के लिए खतरा है, बल्कि क्षेत्रीय अस्थिरता को भी बढ़ावा दे रही है। विशेष रूप से बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों में बढ़ती हिंसा और आत्मघाती हमलों ने सुरक्षा बलों और आम नागरिकों दोनों को निशाना बनाया है।

भारत ने WHO में पाकिस्तान को कड़ा जवाब देते हुए आतंकवाद को बढ़ावा देने में उसकी भूमिका को उजागर किया

नई दिल्ली आतंकवाद से पीड़ित होने का दावा कर रहे पाकिस्तान को भारत ने WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन में जमकर सुनाया। भारत ने पड़ोसी मुल्क को पाकिस्तान का ‘जन्म देने वाला’ बताया है। साथ ही कहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद से पीड़ित होने का दिखावा नहीं कर सकता। जवाब दे रहीं IFS यानी भारतीय विदेश सेवा अधिकारी अनुपमा सिंह का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। क्या बोला भारत भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने कहा, ‘हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद के प्रायोजक और आयोजक पाकिस्तान की धरती से काम करते हैं। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। जो सटीक था और पाकिस्तान के अंदर बने आतंकवादी ढांचे को निशाना बना रहा था।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘पाकिस्तान सिंधु जल समझौते को लेकर भी झूठी कहानियां गढ़ रहा है और मामले को उलझाने की कोशिश कर रहा है।’ सिंह ने कहा, ‘हमने यह सुनिश्चित करने के लिए भी उपाय किए हैं कि कोई आम नागरिक निशाना ना बने और ना ही घायल हो और सिर्फ पाकिस्तान से प्रशिक्षण हासिल किए आतंकवादी और उनके ठिकाने निशाना बनें।’ उन्होंने कहा, ‘एक देश जो आतंकवाद को जन्म देता है, वो पीड़ितों की तरह दिखावा नहीं कर सकता।’ अनुपमा सिंह ने आगे कहा, “हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद के प्रायोजक और आयोजक पाकिस्तानी धरती से काम करते हैं।” इसके जवाब में, भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया। यह ऑपरेशन सटीक था और पाकिस्तान के अंदर आतंकवाद के बुनियादी ढांचे पर केंद्रित था। भारत ने संयम बरतते हुए कहा, “हमने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए कि उनके नागरिकों को निशाना न बनाया जाए और उन्हें नुकसान न पहुंचे। हमने सिर्फ पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकवादियों और उनके ठिकानों को निशाना बनाया।” कौन हैं अनुपमा सिंह अनुपमा सिंह 9 सालों से IFS में हैं और इससे पहले वह साल 2012 से लेकर 2014 तक KPMG कंपनी में थीं। उन्होंने कंपनी ने कंसल्टेंट के तौर पर शुरुआत की थी और बाद में सीनियर कंसल्टेंट बनीं। उन्होंने साल 2014 में लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन से ट्रेनिंग पूरी की। वह साल 2008 से 2011 तक CFA प्रोग्राम में भी शामिल रहीं। सिंह ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से फाइनेंस में MBA किया है और कॉरपोरेट फाइनेंस, वेल्युएशन और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट में महारत हासिल है। खास बात है कि उन्होंने MANIT यानी मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से बीटेक की डिग्री भी हासिल की है।

पाकिस्तान खाद्य सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक हालात, खाद्य मुद्रास्फीति घटकर 0.3 % रह गई

कराची पाकिस्तान अपने मुल्क में आतंकियों को पनाह देता है और यह बात पूरी दुनिया जानती है. ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी अड्डों को तबाह कर दिया. इसस पहले पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को सस्पेंड कर दिया गया और पड़ोसी मुल्क के साथ कारोबार पूरी तरह से रोक दिया गया. ऐसे में पहले से ही खस्ताहाल मुल्क पाकिस्तान की हालत और भी बिगड़ गई है और वहां अकाल जैसे हालात बन गए हैं. भुखमरी जैसे हालात पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान खाद्य सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक हालात का सामना कर रहा है. दिसंबर 2024 तक खाद्य मुद्रास्फीति घटकर 0.3 प्रतिशत रह गई, जो वर्ष की शुरुआत में दोहरे अंकों से कम थी, लेकिन गरीबी और बेरोजगारी, भोजन तक सबकी पहुंच में सबसे बड़ी बाधा बन रही है. साल 2022 की बाढ़ ने पाकिस्तान पर गहरे निशान छोड़े हैं. साल 2023 और 2024 में बेमौसम की घटनाओं ने आजीविका को खत्म कर दिया, खासकर ग्रामीण बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में संकट ज्यादा गहरा है. इन क्षेत्रों में जलस्तर लगातार घटता जा रहा है, जिससे कृषि घाटा बढ़ रहा है और उसपर निर्भर किसान गहरे कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं. कुपोषण बना चिंता का विषय रिपोर्ट में  ताजा आकलन के मुताबिक बताया गया कि पाकिस्तान में 11 मिलियन लोग IPC फेस 3 संकट या उससे भी बदतर हालात में हैं, जबकि 2.2 मिलियन लोगों के सामने इमरजेंसी जैसी स्थिति है. सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में कुपोषण का लगातार बढ़ना चिंताजनक है, जहां कम वजन वाले बच्चों की बड़ी संख्या जन्म लेती है और डायरिया और फेफड़ों से संबंधित इंफेक्शन बढ़ा है. इंडीग्रेटिड फूट सिक्योरिटी फेस क्लासिफिकेशन फेस-3 का मतलब है कि आजीविका को बचाने, खाद्य संकट दूर करने और कुपोषण से लड़ने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है. इन चुनौतियों को ज्यादा जटिल बनाने वाली बात है मानवीय आधार पर मिलने वाले वैश्विक निवेश का घटना, जिसने खाद्य सहायता कार्यक्रमों को कम कर दिया है. वैश्विक संस्थाओं से पाकिस्तान को मानवीय आधार पर मिलने वाली आर्थिक मदद कम हुई है, जिससे वहां खाद्य सुरक्षा, कुपोषण जैसे चुनौतियों से निपटने के लिए चल रहे कार्यक्रम कमजोड़ पड़े हैं. आतंकियों का मददगार PAK डॉन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए तत्काल नीतियों में बदलाव की जरूरत है. केंद्र और प्रांतों को अपना सोशल सिक्योरिटी नेटवर्क मजबूत करने की जरूरत है. साथ ही माताओं और बच्चों के लिए पोषण सहायता सुनिश्चित करनी चाहिए और कृषि में ज्यादा निवेश करना चाहिए. निर्णायक कार्रवाई के बिना, पाकिस्तान पर भूख और गरीबी के पुराने चंगुल में फिर से फंसने का खतरा मंडरा रहा है. पाकिस्तान की सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा से ज्यादा खर्च आतंकियों पर कर रही है. हाल ही में शहबाज सरकार ने आतंकी मसूद अजहर को 14 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है. जब तक वहां की सरकार आतंकियों को पालेगी और उनकी मदद करेगी तब तक आम नागरिकों के हितों की रक्षा होना बहुत मुश्किल है.  

Pakistan पर आर्थिक चोट, FATF की ग्रे लिस्ट में फिर आएगा नाम, भारत ने कर ली पूरी तैयारी

नई दिल्ली  जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के करीब दो हफ्ते बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाली जम्मू-कश्मीर (POK) में कुल नौ आतंकी शिविरों को निशाना बनाते हुए उस पर एयर स्ट्राइक किया।भारत की यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के ठीक बाद हुई कई असैन्य और रणनीतिक कार्रवाई के बाद हुई, जिसमें सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने समेत कई अन्य फैसले लिए गए। इस दौरान भारत की तरफ से पाकिस्तान को एक बार फिर से फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट में डाले जाने की कूटनीतिक विवाद की व्यापक चर्चा हुई। भारत पाकिस्तान में एक्टिव आतंकवादी इंफ्रास्ट्रक्चर के संबंध में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) को नई खुफिया जानकारी सौंपने की प्लानिंग कर रहा है. FATF मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था है जिसने पाकिस्तान को कुछ सालों पहले तक आतंक के समर्थन के लिए ग्रे लिस्ट में रखा था. पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया और पूरी दुनिया को दिखाया कि कैसे पाकिस्तान आतंक के इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट कर रहा है. भारत पहले ही वैश्विक मुद्रा कोष, आईएमएफ सहित दुनिया की वित्तीय संस्थाओं से पाकिस्तान की आर्थिक मदद रोकने की अपील कर चुका है. भारत का कहना है कि पाकिस्तान इन पैसों को आतंकवाद के लिए इस्तेमाल कर रहा है. भारत इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की सोच रहा है. भारत नए सबूत दिखाने वाला है जिससे साफ होता है कि पाकिस्तान का सरकारी तंत्र आतंकी समूहों को लगातार संरक्षण दे रहा है. ऐसे में पाकिस्तान एक बार फिर FATF की ग्रे लिस्ट में जा सकता है. भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले में संलिप्तता के लिए पाकिस्तान के खिलाफ अपना कूटनीतिक अभियान तेज कर दिया है तथा एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से पाकिस्तान को धनराशि उपलब्ध न कराने को कहा है। इसके अलावा भारत ने पश्चिमी देशों से पाकिस्तान को वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की ग्रे सूची में डालने को कहा है। बताते चलें कि एफएटीएफ की अगली बैठक जून महीने में प्रस्तावित है। पाकिस्तान पिछले कई वर्षों तक ग्रे लिस्ट में शामिल रहा और 2022 में वह इस सूची से बाहर हुआ था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए  भारत ने कहा था कि एफएटीएफ की निगरानी की वजह से पाकिस्तान को 26/11 मुंबई हमले में शामिल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। बताते चलें कि 2021 में एफएटीएफ की अहम बैठक से पहले पाकिस्तान ने मुंबई हमलों के आरोपी और लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेशनल कमांडर जकी-उर-रहमान को टेरर फंड्स का इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। एफएटीएफ ने 27 प्वाइंट एक्शन प्लान को जारी करते हुए पाकिस्तान को 2018 में ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। यह एक्शन प्लान मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग पर रोक लगाने की कार्रवाई से संबंधित था। अब एक बार फिर से पाकिस्तान को इस सूची में शामिल किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। क्या है FATF? फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) वैश्विक तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग की निगरानी करने वाली संस्था है। पेरिस स्थित 40 सदस्यों वाली इस संस्था की स्थापना 1989 में हुई थी। एफएटीएफ अपने सभी निर्णय एफएटीएफ प्लेनरी के जरिए लेता है और साल में तीन बार इसकी बैठक होती है। इस बैठक में उन देशों की जवाबदेही तय की जाती है, जो इसके मानकों का पालन नहीं करते हैं। FATF की ग्रे लिस्ट से पाकिस्तान का पुराना नाता पाकिस्तान आतंकवाद के लिए कई बार FATF की ग्रेल लिस्ट में डाला जाता रहा है. आतंकवाद और टेरर फाइनेंसिंग पर नजर रखने वाली FATF ने पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे लिस्ट में डाला था. FATF का कहना था कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के नामित आतंकवादी समूहों को टार्गेट करने में कमी दिखाई है. FATF के मुताबिक, पाकिस्तान आतंकवादी समूहों की संपत्ति फ्रीज करने, उन्हें सजा देने और उनके खिलाफ प्रतिबंध लगाने में नाकाम रहा था. इसके बाद से पाकिस्तान के FATF की ब्लैक लिस्ट में डाले जाने का डर भी बना हुआ था. लेकिन अक्टूबर 2022 में FATF ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से हटा दिया. पाकिस्तान पहले भी कई बार FATF की ग्रे लिस्ट में डाला-निकाला जाता रहा है. पाकिस्तान को सबसे पहले 2008 में ग्रे लिस्ट में डाला गया था और 2009 में हटा लिया गया था. 2012 और 2015 के बीच भी पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में था. पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को बनाया निशाना 22 अप्रैल को पाकिस्तान स्पॉन्सर आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हमला किया था जिसमें 26 लोग मारे गए थे और 17 अन्य घायल हुए थे. इस हमले के लिए भारत ने पाकिस्तान को जिम्मेदार बताया और 6-7 अक्टूबर को पाकिस्तान और पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर एयरस्ट्राइक किए. भारत के हमले में कम से कम 100 आतंकी मारे गए जिन्हें पाकिस्तानी सरकार ने शह दे रखा था. भारत की कार्रवाई के जवाब में पाकिस्तान ने सैन्य और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की जिसे नाकाम कर दिया गया. दोनों देशों के बीच लड़ाई करीब 4 दिनों तक चली जिसके बाद दोनों संघर्षविराम पर राजी हुए. हालांकि, भारत ने साफ कहा है कि आगे से किसी भी आतंकी कृत्य को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा. क्या है ग्रे और ब्लैक लिस्ट? एफएटीएफ की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, यदि कोई देश एफएटीएफ के मानकों को लागू करने में विफल रहता है, तो उसे बढ़ी हुई निगरानी (इनक्रीज्ड मॉनिटरिंग) और अधिक जोखिम वाले क्षेत्राधिकार (हाई रिस्क ज्यूरिसडिक्शंस) में डाला जाता है और इसे ही सामान्य भाषा में ग्रे और ब्लैक लिस्ट कहा जाता है। ब्लैक लिस्ट में वे देश शामिल हैं, जहां मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग को रोकने के लिए गंभीर रणनीतिक क्षमता का अभाव होता है। इस सूची में फिलहाल तीन देश शामिल हैं: डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया, ईरान और म्यांमार। वहीं, बढ़ी हुई निगरानी वाले क्षेत्राधिकार, जिन्हें ग्रे लिस्ट कहा जाता है, में … Read more

इंदौर में मोहम्मद जावेद ने PM मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की और पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए, हुआ गिरफ्तार

इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में करणी सेना ने देशविरोधी नारेबाजी करने वाले एक युवक की जमकर धुनाई करने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया। मामला गांधी नगर क्षेत्र का है, जहां मेट्रो प्रोजेक्ट में कार्यरत एक कर्मचारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में युवक ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाते, भारत के खत्म होने और प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्द कहता नजर आ रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद श्री राजपूत करणी सेना ने तुरंत एक्शन लेते हुए युवक को पकड़कर थाने पहुंचाया। करणी सेना के प्रदेश संगठन मंत्री दिग्विजय सिंह सोलंकी के नेतृत्व में कार्यकर्ता गांधी नगर पहुंचे और मौके पर मौजूद मेट्रो प्रोजेक्ट कर्मचारी मोहम्मद जावेद पिता किताब अंसारी को पकड़ लिया। सेना ने पहले उसे जमकर धुनाई की और फिर पुलिस थाने ले जाकर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। करणी सेना का कहना है कि ऐसे तत्व जो खुलेआम देश के खिलाफ नारे लगाते हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए। संगठन मंत्री सोलंकी ने कहा, “देश का अपमान करने वालों को समाज में कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। हम किसी भी कीमत पर ऐसी हरकतों को सहन नहीं करेंगे।” करणी सेना ने प्रशासन से मांग की है कि जावेद अंसारी जैसे तत्वों को सार्वजनिक प्रोजेक्ट्स में कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाए और ऐसे लोगों के खिलाफ राष्ट्रद्रोह जैसी कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जब जावेद के घर की तलाशी ली, तो वहां से गांजे की पुड़िया भी बरामद हुई। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और वीडियो की जांच के साथ अन्य डिजिटल साक्ष्य भी एकत्रित किए जा रहे हैं। गांधी नगर टीआई अनिल यादव के मुताबिक, मामले में आरोपी जावेद के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वीडियो में दिख रहे और वीडियो बना रहे उसके अन्य साथियों की तलाश की जा रही है। जिन्हें जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पाकिस्तान के पास जितना विदेशी मुद्रा भंडार है, वह अपने कर्जों को चुकाने के लिए काफी नहीं: मूडीज

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर हो चुका है। दोनों देशों के बीच हुए इस संघर्ष में पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। बताया जा रहा है कि तीन दिन से कुछ ज्यादा समय तक चली इस लड़ाई में पाकिस्तान को करीब 4 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। यह रकम हाल ही में आईएमएफ से मिले 2.4 बिलियन डॉलर के लोन के मुकाबले कहीं ज्यादा है। ऐसे में पाकिस्तान एक बार फिर से आईएमएफ या किसी दूसरी संस्था से लोन लेने के लिए हाथ फैला सकता है। पिछले महीने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई की थी। भारतीय सेना ने पिछले हफ्ते मंगलवार रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। इस हमले से पाकिस्तान बौखला गया था और उसने भारतीय सेना और सीमा से सटे आम नागरिकों को निशाना बनाया। भारत ने भी पाकिस्तान के इस हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया और उसके एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया था। दोनों देशों के बीच तीन दिन तक संघर्ष चला। शनिवार को सीजफायर हो गया। पाकिस्तान को कितना नुकसान? तीन दिन से कुछ ज्यादा समय चले इस संघर्ष में पाकिस्तान को जबरदस्त नुकसान हुआ है। अमेरिका की एनालिस्ट सहर खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पाकिस्तान मीडिया की एक खबर को शेयर करते हुए एक पोस्ट की है। इस पोस्ट में उन्होंने बताया है कि इस संघर्ष में पाकिस्तान को करीब 4 अरब डॉलर की कीमत चुकानी पड़ी है। सहर खान ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए अपनी पोस्ट में बताया है कि पाकिस्तान को किस चीज में कितना नुकसान हुआ है: मिलिट्री ऑपरेशंस: 25 मिलियन डॉलर प्रतिदिन ड्रोन और मिसाइल ऑपरेशंस: 300 मिलियन डॉलर शेयर मार्केट में गिरावट: 2.5 बिलियन डॉलर पीएसएल सस्पेंड होने से: 10 मिलियन डॉलर एयरस्पेस बंद होने से: 20 मिलियन डॉलर कितना मंजूर हुआ लोन? भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने हाल ही में पाकिस्तान को 2.4 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज दिया है। इस बेलआउट पैकेज में एक मौजूदा कार्यक्रम से 1 अरब डॉलर और 1.4 अरब डॉलर का नया लोन शामिल है। भारत ने आईएमएफ में इस वोटिंग के दौरान भाग नहीं लिया, क्योंकि भारत इस बेलआउट पैकेज के खिलाफ था। पाकिस्तान को आईएमएफ से जितना लोन मिला है, उससे कहीं ज्यादा रकम वह खर्च कर चुका है। भरत नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने सहर खान की पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा है, ‘उन्होंने यानी पाकिस्तान ने IMF का लोन जारी होने से पहले ही इसे खर्च कर दिया।’ पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति काफी बुरी पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति अभी बहुत खराब है। मूडीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक अभी पाकिस्तान के पास जितना विदेशी मुद्रा भंडार है, वह अगले कुछ सालों में अपने कर्जों को चुकाने के लिए काफी नहीं है। पाकिस्तान के पास अभी करीब 15 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। वहीं, भारत के पास 688 अरब डॉलर से भी ज्यादा का भंडार है। पाकिस्तान कई देशों से लोन ले चुका है। साल 1948 से अकेले अमेरिका ने पाकिस्तान को 40 अरब डॉलर की आर्थिक और सैन्य मदद दी है। अगर कनाडा, ब्रिटेन और यूरोप को भी मिला लें, तो यह आंकड़ा 55 अरब डॉलर से ज़्यादा हो जाता है।

भारत सैन्य संघर्ष को तब तक खींचेगा जब तक पाकिस्तान खुद ब खुद न टूट जाए

नई दिल्ली पाकिस्तान के निर्माण में मुहम्मद अली जिन्ना की टू नेशन थ्‍योरी की महत्वपूर्ण भूमिका थी. इसी आधार पर 1947 में भारत के विभाजन और पाकिस्तान के निर्माण की मांग की गई थी. यह सिद्धांत मुख्य रूप से यह तर्क देता था कि भारतीय उपमहाद्वीप के हिंदू और मुस्लिम दो अलग-अलग राष्ट्र हैं, जिनके धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक पहचान इतने भिन्न हैं कि वे एक साथ एक राष्ट्र में नहीं रह सकते. इस सिद्धांत ने मुस्लिम बहुल क्षेत्रों के लिए एक अलग देश, पाकिस्तान, की स्थापना को औचित्य प्रदान किया. 1971 में ही इस सिद्धांत को तिलांजलि देते हुए पूर्वी पाकिस्तान ने पाकिस्तान से अलग होकर अलग देश बांग्लादेश बना लिया. कायदे से इस सिद्धांत का अंत उसी दिन हो गया था. पर पाकिस्तान के हुक्मरान आज भी अपनी गद्दी बचाने और पाकिस्तान को बिखरने से रोकने के लिए इस सिद्धांत की दुहाई देते हैं. पहलगाम अटैक से कुछ रोज पहले ही पाकिस्तानी सेना के प्रमुख असीम मुनीर ने प्रवासी पाकिस्तानियों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए टू नेशन थियरी को सही बताया था. मुनीर ने इस सम्मेलन में हिंदुओं पर अपनी श्रेष्ठता को सिद्ध करते हुए भारत के खिलाफ खूब जहर उगला था. यही कारण है कि पाकिस्तान में भी लोगों का मानना है कि मुनीर ने अपनी महत्वाकांक्षा के चलते पहलगाम अटैक को अंजाम दिया है. पर पहलगाम हमले का खामियाजा अब पूरा पाकिस्तान भुगत रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने जैसी हरकतें की हैं उससे यही लगता है कि पाकिस्तान का भविष्य अधर में है. आइये देखते हैं कि भविष्य में पाकिस्तान का क्या हाल हो सकता है? 1-पाकिस्तान में मुनीर को हटाकर कोई सैन्य तानाशाह आ जाए, आंशिक लोकतंत्र भी खत्म हो जाए पाकिस्तान में मार्शल ला का इतिहास रहा है. यहां सेना ने अतीत में कई बार सत्ता हथियाई है जैसे 1958, 1977, 1999 में. वर्तमान में भी सेना का राजनीतिक प्रभाव मजबूत है. जिस तरह वर्तमान सेना प्रमुख असीम मुनीर के खिलाफ पाकिस्तान में हवा चल रही है उससे उनके लिए खतरा बढ़ रहा है. हो सकता है कि भारत के हाथों पाकिस्तानी सेना के मुंह की खाने के बाद सेना का कोई दूसरा सैन्य अधिकारी मुनीर को कैदकर खुद तानाशाह बन जाए. पिछले दिनों पाक सेना में आंतरिक असंतोष की तमाम खबरें आईं थीं. मार्च 2025 में, पाकिस्तानी सेना के जूनियर अधिकारियों (कर्नल, मेजर, कैप्टन रैंक) और जवानों ने असीम मुनीर के खिलाफ एक खुला पत्र लिखा, जिसमें उनके इस्तीफे की मांग की गई. पत्र में उन पर सेना को राजनीतिक उत्पीड़न का हथियार बनाने, लोकतांत्रिक ताकतों को कुचलने और आर्थिक बर्बादी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया. पत्र में 1971 के युद्ध की तुलना की गई, जिसमें कहा गया कि मुनीर के नेतृत्व ने सेना की प्रतिष्ठा को गटर में डाल दिया और जनता के बीच सेना को बेगाना बना दिया. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और X पोस्ट्स में दावा किया गया कि 500 जवानों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया, हालांकि सेना मुख्यालय ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. जाहिर है कि पाक सेना में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. पाकिस्तान का इतिहास रहा है कि ऐसी स्थिति में नया नेतृत्व जन्म लेता है जो हमेशा तख्तापलट से ही आता है. आम जनता भी आर्थिक संकट, आतंकवाद, और राजनीतिक अस्थिरता के कारण सैन्य शासन को स्वीकर कर लेती है. 2-पाकिस्तान की स्थिति सीरिया जैसी हो सकती है पाकिस्तान के लिए युद्ध कितना मुश्किल है यह इससे समझा जा सकता है कि पाकिस्तान सरकार अभी से आर्थिक संकट में है. जाहिर है कि ऐसी दशा में कर्ज संकट ($73 बिलियन 2025 तक चुकाना) और बेरोजगारी बढ़नी तय है. अगर ऐसा होता है तो सामाजिक अशांति (प्रदर्शन, हड़ताल) सीरिया जैसे विरोध प्रदर्शनों को जन्म दे सकती है. बलूचिस्तान में BLA और KPK में PTM हिंसा को बढ़ा सकते हैं. सोशल मीडिया पर तमाम दावे हैं कि बलूचिस्तान स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहा है, और भारत का समर्थन इस समस्या को और बढ़ा सकता है. TTP और ISIS-खोरासान जैसे समूह सीरिया के ISIS की तरह अराजकता फैला सकते हैं, विशेष रूप से KPK और बलूचिस्तान में. जाहिर है कि पाक सेना का पूरा ध्यान भारतीय सेना से बचाव पर रहेगा. इसका प्रभाव और सरकार की अक्षमता को बढ़ाएगा जो जनता के असंतोष को और बढ़ा सकती है, जैसा सीरिया में असद के खिलाफ हुआ. 3-भारत सीमित सैन्य संघर्ष को तब तक खींचेगा जब तक पाकिस्तान खुद ब खुद न टूट जाए भारत की रणनीति हो सकती है कि पाकिस्तान के साथ तनाव को सीमित सैन्य संघर्ष में बदल दिया जाए. पाहलगाम हमले के बाद जिस तरह के कदम भारत ने उठाए हैं वो कुछ ऐसा ही संकेत देते हैं. सिंधु जल संधि को निलंबित करना  और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कदम कुछ ऐसा ही फैसला है जो बताता है कि भारत सीधे जंग में उतरने की बजाय सीमित सैन्य संघर्ष को लंबा खींचना चाहेगा. भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ से सीमा पर गोलीबारी, सर्जिकल स्ट्राइक, या हवाई हमले बढ़ सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, और ईरान ने संयम की अपील की है पर कोई भी खुलकर किसी भी पक्ष से सामने नहीं आना चाहता है. दरअसल सीमित संघर्ष से आर्थिक नुकसान विशेष रूप से पाकिस्तान को होगा. क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है. भारत की सैन्य श्रेष्ठता (S-400, राफेल) उसे बढ़त दे सकती है. भारत यही चाहेगा कि पाकिस्तान युद्ध में इस तरह फंस जाए कि उसकी आर्थिक रूप से कमर टूट जाए. सेना भारतीय सीमा पर फंसेगी जिसके चलते पाकिस्तान में बलूच और खैबर पख्तुनवा, सिंध आदि में स्थिति अनियंत्रित हो जाएगी. 4-पाकिस्तान कम से कम 3 टुकड़ों में बंट जाए भारत जिस तरह की आक्रामकता इस बार दिखा रहा है उससे यही लगता है कि 1971 जैसे युद्ध के लिए वो तैयार है. अगर भारत और पाकिस्तान में सीधा मुकाबला होता है तो बलूचिस्तान, सिंध, और खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्र अलग होने की उड़ान भर सकते हैं. कुछ लोगों का दावा है कि भारत, अफगानिस्तान और कुछ अन्य देश इन आंदोलनों को समर्थन दे सकते हैं. पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट में है. कर्ज का बोझ ($73 बिलियन 2025 तक चुकाना) और … Read more

भारत-पाकिस्तान युद्ध के बीच पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से तत्काल वित्तीय सहायता की अपील की

इस्लामाबाद  भारत-पाकिस्तान युद्ध के बीच पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से तत्काल वित्तीय सहायता की अपील की है। युद्ध में भारी नुकसान, स्टॉक मार्केट में गिरावट और विदेशी मुद्रा भंडार के तेजी से गिरने के चलते पाकिस्तान की आर्थिक हालत नाज़ुक हो गई है। पाकिस्तान की सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है है कि “पाकिस्तान सरकार ने दुश्मन द्वारा भारी नुकसान के बाद अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से ज्यादा ऋण की अपील की है। बढ़ते युद्ध और शेयरों में गिरावट के बीच, हम अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से तनाव कम करने में मदद करने का आग्रह करते हैं। राष्ट्र से मजबूत रहने का आग्रह किया गया है।” ये ट्वीट पाकिस्तान सरकार के इकोनॉमिक अफेयर्स डिवीजन की तरफ से किया गया है। लेकिन पाकिस्तानियों का कहना है कि ट्विटर अकाउंट को हैक कर लिया गया है और ऐसे पोस्ट किए जा रहे हैं। लेकिन ये पोस्ट उस वक्त किया गया है, जब IMF की आज बैठक होने वाली है, जिसमें तय किया जाएगा कि पाकिस्तान के लिए कर्ज की अगली किस्त जारी किया जाए या नहीं। पाकिस्तान सरकार का ये पोस्ट उस वक्त आया है, जब IMF की आज बैठक होने वाली है, जिसमें तय किया जाएगा कि पाकिस्तान के लिए कर्ज की अगली किस्त जारी किया जाए या नहीं। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति काफी खराब है और उसे डर है कि भारत, IMF के कर्ज की किस्त को रोक सकता है। पाकिस्तान को अगर किस्त नहीं मिलता है तो देश दिवालिया होने की तरफ बढ़ सकता है। वहीं जंग की वजह से उसे कई मिलियन डॉलर हर दिन खर्च करने पड़ रहे हैं। गहरे आर्थिक संकट में फंसा है पाकिस्तान भारत से तनाव बढ़ने के बाद कराची स्टॉक एक्सचेंज 1100 से ज्यादा अंक गिरकर नेपाल स्टॉक एक्सचेंज से भी नीचे जा चुका है। डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया ऐतिहासिक स्तर पर नीचे जा चुका है और विदेशी निवेशकों ने भारत से जंग की आशंका के डर से पाकिस्तानी बाजार से तेजी से अपने निवेश को निकालना शुरू कर दिया है, जिससे रुपया और ज्यादा गिरा है। पाकिस्तान को अब सिर्फ IMF से राहत की उम्मीद है। विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध लंबे समय तक खिंचा, तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था 1998 के बाद सबसे बड़े संकट में घिर सकती है। पाकिस्तानी रुपया 320 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है और पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में भी तेजी से गिरावट आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में ब्याज दरें 23 प्रतिशत और महंगाई दर 36 प्रतिशत को पार कर चुका है। पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय बार बार चेतावनी देती रहती है कि अगर राहत नहीं मिलती है तो सरकार वेतन, सब्सिडी और आयात के बिल चुकाने में असमर्थ हो जाएगी। दूसरी तरफ पाकिस्तान ने भारत के साथ जंग भी शुरू कर दी है। जंग लड़ना आसान नहीं होता है। सैनिकों को एक जगह से दूसरे जगह भेजने, फाइटर जेट्स के ऑपरेशन, मिसाइल चलाने और तमाम साजो सामान जुटाने में हर दिन का खर्च कई मिलियन डॉलर से ज्यादा का होता है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए ज्यादा दिनों तक भारत के खिलाफ जंग लड़ना आर्थिक मोर्चे पर भी विनाशक साबित होगा। मूडी इसको लेकर पिछले हफ्ते चेतावनी जारी कर चुका है।

PM मोदी से डरा पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव से तनाव कम करने की अपील की

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है. पाकिस्तान को भारत की संभावित जवाबी कार्रवाई का अंदेशा है और इस वजह से वह सहमा हुआ है. वह कभी पहलगाम आतंकी हमले की तीसरे पक्ष से निष्पक्ष जांच करवाने और इसमें सहयोग करने, तो कभी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे को उठा रहा है. पाकिस्तान ने शुक्रवार को कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत के साथ तनाव बढ़ने पर उसे उचित समय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने का अधिकार है. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह सबकुछ जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की पृष्ठभूमि में हो रहा है. अहमद इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या पाकिस्तान जम्मू एवं कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की योजना बना रहा है. इस हमले में 26 लोग मारे गए थे. पाकिस्तान वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का एक अस्थायी सदस्य है और जुलाई में 15 देशों वाली संयुक्त राष्ट्र संस्था की अध्यक्षता करेगा. PAK को सता रहा भारत की जवाबी कार्रवाई का डर उन्होंने कहा, ‘यह स्पष्ट है कि पहलगाम में एक घटना हुई है, लेकिन अब जो स्थिति उत्पन्न हुई है उससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए वास्तविक खतरा है. हमारा मानना ​​है कि सुरक्षा परिषद को वास्तव में ऐसा करने का अधिकार है. पाकिस्तान सहित परिषद के किसी भी सदस्य के लिए यह पूरी तरह उचित होगा कि वह सुरक्षा परिषद की बैठक और चर्चा का अनुरोध करे, ताकि इस गंभीर स्थिति पर विचार किया जा सके.’ अहमद ने कहा, ‘हमने परिषद के सदस्यों के साथ इस पर चर्चा की है. हमने पिछले महीने की अध्यक्षता और इस महीने की अध्यक्षता के साथ इस पर चर्चा की है. हम स्थिति पर बहुत बारीकी से नजर रख रहे हैं और हमें उचित लगने पर बैठक बुलाने का अधिकार है.’ पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने अपने रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की उस टिप्पणी के बारे में पीटीआई द्वारा पूछे गए सवाल का सीधे जवाब देने से परहेज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान तीन दशक से अमेरिका और पश्चिमि देशों के लिए ‘गंदा काम’ करता रहा है. पाकिस्तान तीन दशक से आतंकवाद को दे रहा पराश्रय दरअसल, पहलगाम हमले के परिप्रेक्ष्य में स्काई न्यूज के एंकर यल्दा हाकिम ने ख्वाजा आसिफ से सवाल किया था, ‘आप स्वीकार करते हैं कि पाकिस्तान का इन आतंकवादी संगठनों को समर्थन, प्रशिक्षण और वित्तपोषण देने का एक लंबा इतिहास रहा है?’ इसके जवाब में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री आसिफ ने कहा था, ‘आप जानते हैं कि हम संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए यह गंदा काम लगभग तीन दशकों से कर रहे हैं, और ब्रिटेन भी इसमें शामिल है.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले के दो दिन बाद 24 अप्रैल को बिहार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था, ‘आतंकवादियों और आकाओं और इस हमले के साजिशकर्ताओं को उनकी कल्पना से भी कड़ी सजा देंगे. देश के दुश्मनों ने न केवल निहत्थे पर्यटकों को निशाना बनाया, बल्कि भारत की आत्मा पर हमला करने का दुस्साहस किया है.’ गत 29 अप्रैल को एक उच्चस्तरीय बैठक में पीएम मोदी ने भारतीय सेना को खुली छूट दी थी और कहा था कि पहलगाम आतंकवादी हमले पर भारत की प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए इसका तरीका, लक्ष्य और समय सेना तय करे. भारत को रोको, हमें बचाओ; UNSC में रोया पाकिस्तान तो अब चर्चा की तैयारी भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कश्मीर मुद्दे पर हस्तक्षेप करने और तनाव को कम कराने की गुहार लगाई है। पाकिस्तान के अमेरिका में राजदूत रिजवान सईद शेख ने चेतावनी दी कि “कोई भी गलत कदम या गलत अनुमान परमाणु संघर्ष की ओर ले जा सकता है।” शेख ने कश्मीर को “विश्व का सबसे खतरनाक परमाणु फ्लैशपॉइंट” करार देते हुए ट्रंप से इस मुद्दे पर निर्णायक भूमिका निभाने का आग्रह किया है। Fox News Digital से बातचीत में शेख ने कश्मीर को “परमाणु फ्लैशपॉइंट” करार देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप इस मुद्दे को हल करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा, “यह राष्ट्रपति ट्रंप की विरासत का एक अहम हिस्सा बन सकता है, यदि वे इस मसले को सतही उपायों से नहीं बल्कि कश्मीर विवाद जैसे मूल कारणों को संबोधित करके हल करें।” राजदूत शेख ने भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया को “खतरनाक और भड़काऊ” बताया। उन्होंने कहा कि हमले के महज 10 मिनट बाद ही भारत की ओर से पाकिस्तान पर आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा, “भारत ने आरोप लगाने में एक मिनट भी नहीं गंवाया और बिना किसी जांच के ही पाकिस्तान को दोषी ठहराया। हमने सबूत शेयर करने की मांग की और निष्पक्ष व पारदर्शी जांच में भाग लेने की पेशकश की, लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला।” “परमाणु युद्ध की संभावना को नजरअंदाज न करें” पाकिस्तानी राजदूत को भारत की संभावित प्रतिक्रिया से डर लग रहा है। यही वजह है कि वे दूसरे देशों के आगे गुहार लगा रहे हैं कि भारत को रोका जाए। राजदूत ने कहा कि यह क्षेत्र 1.5 अरब से ज्यादा लोगों का घर है और इस तरह के युद्धोन्माद भरे बयानात क्षेत्र को एक बार फिर से “युद्ध की मानसिकता का बंधक” बना रहे हैं। पाकिस्तानी दूत ने गीदड भभकी देते हुए कहा कि “कोई भी गलतफहमी या गलत निर्णय, परमाणु युद्ध में बदल सकता है – जो इस घनी आबादी वाले क्षेत्र के लिए विनाशकारी होगा।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए बहने वाली नदियों के जल प्रवाह को एकतरफा रोकने की धमकी, अंतरराष्ट्रीय संधियों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने इंडस वॉटर ट्रीटी का हवाला देते हुए कहा, “यह संधि भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्धों के दौरान भी कायम रही, इसे तोड़ना अंतरराष्ट्रीय कानून की घोर अवहेलना है।” पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता निलंबित … Read more

कटनी में मिले 23 पाकिस्तानी नागरिक, हिंदू शरणार्थी और एक मुस्लिम महिला शामिल, ह मंत्रालय के निर्देश पर कार्रवाई

कटनी एमपी के कटनी में पुलिस ने 23 पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान की है। ये सभी लोग लंबे समय से वीजा पर यहां रह रहे हैं। गृह मंत्रालय के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। इन लोगों में हिंदू शरणार्थी और एक मुस्लिम महिला शामिल हैं। पुलिस ने इनकी जानकारी गृह मंत्रालय को भेज दी है। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद गृह मंत्रालय ने पाकिस्तानियों के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। 24 घंटे के अंदर ही 23 पाकिस्तानियों की पहचान कर ली गई। 30-35 साल से यहां रह रहे पुलिस के अनुसार ये सभी 23 पाकिस्तानी नागरिक पिछले 30-35 सालों से कटनी में रह रहे हैं। ये सभी हिंदू शरणार्थी हैं। उन्होंने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन भी किया है। इन लोगों में एक मुस्लिम महिला भी शामिल है। वह पहले कैमोर में रहती थी। उसकी शादी पाकिस्तान में हुई थी। शादी के बाद वह कटनी आ गई। बाद में उसने अनूपपुर में दूसरी शादी कर ली। अब वह वहीं रह रही है। लॉन्ग टर्म वीजा पर रहने की छूट कटनी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार डेहरिया ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कटनी में मिले सभी पाकिस्तानियों को लॉन्ग टर्म वीजा पर रहने की छूट मिली हुई है। पुलिस विभाग ने गृह मंत्रालय से इस बारे में जानकारी मांगी थी। जानकारी के साथ सभी दस्तावेज उच्च अधिकारियों को भेज दिए गए हैं। इसके अलावा, एक मुस्लिम महिला की भी पहचान हुई है, जो फिलहाल अनूपपुर में रह रही है। कटनी पुलिस सभी पहलुओं पर ध्यान रख रही है।

न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज मैट हेनरी चोटों से जूझ रहे , पाकिस्तान के खिलाफ बाकी बचे दो टी20आई मैचों से बाहर हो गए

नई दिल्ली न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज मैट हेनरी चोटों से जूझ रहे हैं। वह पाकिस्तान के खिलाफ बाकी बचे दो टी20आई मैचों से बाहर हो गए हैं। उन्हें दाएं कंधे में चोट लगी है और पहले से ही बाएं घुटने की समस्या है। कंधे की चोट उन्हें आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका के खिलाफ लगी थी। न्यूजीलैंड को झटका न्यूजीलैंड 5 मैचों की टी20 सीरीज में 2-1 से आगे है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने शनिवार को बताया कि कैंटरबरी के 22 साल के तेज गेंदबाज जैक फाउल्क्स अंतिम दो मैचों के लिए टीम के साथ बने रहेंगे। वह पहले तीन मैचों के लिए कवर के तौर पर टीम में शामिल हुए थे। विल ओ’रूर्के, जिनका नाम पहले तीन मैचों के लिए था, अब काइल जैमीसन की जगह अंतिम दो मैचों के लिए टीम में शामिल हो गए हैं। सीरीज का चौथा मैच रविवार को बे ओवल, टौरंगा में खेला जाएगा। आखिरी मैच अगले बुधवार को वेलिंगटन में होगा। हेनरी लंबे समय के लिए बाहर मैट हेनरी अब पाकिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज में नहीं खेल पाएंगे। उनकी जगह जैक फाउल्क्स और विल ओ’रूर्के को टीम में शामिल किया गया है। मैट हेनरी को कंधे और घुटने में चोट है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैक फाउल्क्स टीम के साथ बने रहेंगे। फाउल्क्स पहले तीन मैचों के लिए कवर के तौर पर आए थे। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने शनिवार को कहा, ‘कैंटरबरी के 22 साल के तेज गेंदबाज जैक फाउल्क्स अंतिम दो मैचों के लिए टीम के साथ बने रहेंगे, वह पहले तीन मैचों के लिए कवर के तौर पर टीम में शामिल हुए थे।’ काइल जैमीसन की जगह विल ओ’रूर्के को टीम में शामिल किया गया है। विल ओ’रूर्के पहले तीन मैचों के लिए टीम में थे। न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के बीच चौथा टी20आई मैच रविवार को टौरंगा में होगा। सीरीज का आखिरी मैच वेलिंगटन में खेला जाएगा। न्यूजीलैंड अभी सीरीज में 2-1 से आगे है। न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम चाहेगी कि वह बाकी बचे मैच जीतकर सीरीज अपने नाम करे।

चैंपियंस ट्रॉफी में बिना एक भी मैच जीते पाकिस्तान को ICC से मिल गए इतने करोड़ रुपए

नई दिल्ली  मेजबान कोई भी बड़ा इवेंट करने के बाद खर्च और कमाई यानी आय और व्यय का लेखा-जोखा यानी हिसाब-किताब जरूर करता है। रिव्यू करता है कि कितना खर्च हुआ और कितनी कमाई हुई। पाकिस्तान के साथ भी कुछ ऐसा ही होगा। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का खिताब भारत जीत चुका है और अब समय है हिसाब-किताब का। सही आंकड़ा तो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ही बता पाएगा, लेकिन बाहर से जो भी चीजें दिखाई दे रही हैं वह ज्यादा बेहतर नहीं हैं। कुछ चीजों का बैकअप प्लान नहीं होने से पाकिस्तान को इतना बड़ा नुकसान हुआ कि उसका अंदाजा उसने सपने में भी नहीं लगाया रहा होगा। जी हां, उसने तीन स्टेडियम को खेलने लायक बनाने के लिए हजारों करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए। एक-एक स्टेडियम पर एक-एक हजार करोड़ से अधिक पैसे खर्च हुए, लेकिन क्या उसने इसकी भरपाई की? शायद नहीं। पाकिस्तान में 3 वेन्यू पर कुल 10 मैच हुए, जिसमें से 2 मैच बारिश की वजह से रद्द हो गए। ये दो मैच दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के घर यानी रावलपिंडी स्टेडियम के थे, 3 मैच खेले जाने थे। रावलपिंडी स्टेडियम में पहला मैच 24 फरवरी को बांग्लादेश और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया था। इस मैच में न्यूजीलैंड ने 5 विकेट से जीत दर्ज की। पिंडी में अगला मैच 25 फरवरी को शेड्यूल था। ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के बीच यह मुकाबला बारिश की वजह से रद्द रहा। स्टेडियम में पानी सुखाने के लिए ड्रेनेज सिस्टम बेहद घटिया था। सुपर सॉपर की जगह बाथरूम में इस्तेमाल होने वाले वाइपर और स्पंज से पानी सुखाते देखा गया। लेकिन कामयाबी नहीं मिली और 27 फरवरी को पाकिस्तान और बांग्लादेश का मैच भी इसी तरह से रद्द हो गया। इस तरह दोनों टीमों को बिना कोई मैच जीते टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा। अब आते हैं खास मुद्दे पर। दरअसल, रिपोर्ट्स की मानें तो रावलपिंडी स्टेडियम को बनाने के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने 1500 करोड़ रुपये एलॉट किए थे। इसमें फ्लड लाइट्स की जगह 350 एलईडी लाइट्स लगाने के लिए 393 मिलियन रुपए और मुख्य भवन, हॉस्पिटैलिटी बॉक्स और टॉयलेट के लिए 400 मिलियन रुपए शामिल हैं। इसके अतिरिक्त दो एलईडी डिजिटल स्क्रीन को बदलने के लिए 330 मिलियन रुपए आवंटित किए गए थे, जबकि नई सीटिंग इंस्टॉलेशन पर 272 मिलियन रुपए खर्च किए जाने थे। मान लिया जाए कि अलॉट किए गए रुपये ही खर्च किए गए तो भी एक स्टेडियम में सिर्फ एक मैच का कुल खर्च 1500 करोड़ रुपये से अधिक रहा। यही नहीं, पाकिस्तान ने हर स्टेडियम की ओपनिंग सेरिमनी के लिए ब्लॉकबस्टर शो किए थे और दुनिया को दिखाने के लिए सिंगर से लेकर डांसर तक पर मोटी रकम खर्च की थी। हालांकि, इन पैसों के बारे में कहीं भी जानकारी नहीं दी गई। एक ओर उसकी आर्थिक स्थिति कंगालों वाली है तो दूसरी ओर इस तरह से पैसे बहाना समझ से परे है। स्टेडियम किसी भी मैच के लिए भरे नहीं थे तो कम से कम पब्लिक से मिलने वाला पैसा उसके खर्च को कतई पूरा नहीं कर सकता है। हां, ब्रॉडकास्टर्स से जरूर उसे फायदा मिला होगा, लेकिन क्या उसे इतने पैसे मिले होंगे कि इतने बड़े खर्च की भरपाई की जा सकती है। बात यहीं खत्म नहीं होती। आने वाले समय में इस स्टेडियम पर पाकिस्तान सुपर लीग के मैच तो शेड्यूल हैं, लेकिन इंटरनेशनल टीमों का दौरा होगा या नहीं इसका पता नहीं। इस बीच बलूच लिबरेशन आर्मी का जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक करना उसकी पहले से गिरी हुई साख और भी रसातल में ले जाने का काम किया है। बलूच विद्रोही संगठन का दावा है कि उसने 30 पाकिस्तानी जवानों को मार गिराया है। इंटरनेशनल लेवल पर इस खबर के आने के बाद कोई भी टीम शायद ही पाकिस्तान का दौरा करने के लिए राजी होगी। संभव है कि पीएसएल में भी विदेशी खिलाड़ी खेलने से कतराएं।  चैंपियंस ट्रॉफी में बिना एक भी मैच जीते पाकिस्तान को  ICC से मिल गए इतने करोड़ रुपए चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की मेजबानी पाकिस्तान के पास थी, लेकिन BCCI ने भारतीय क्रिकेट टीम को पाकिस्तान भेजने से मना कर दिया था। इसके बाद इस अहम टूर्नामेंट को हाइब्रिड मॉडल पर खेला गया। जहां टीम इंडिया के सभी मैच दुबई में हुए थे। अब भारतीय टीम ने बिना एक भी मैच हारे चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का खिताब जीत लिया। इनाम के तौर पर भारतीय टीम को लगभग 20 करोड़ रुपए मिले। दूसरी तरफ पाकिस्तानी टीम के लिए चैंपियंस ट्रॉफी 2025 किसी बुरे सपने से कम नहीं रही और पाकिस्तान एक भी मैच में जीत दर्ज नहीं कर पाया। पाकिस्तान ने किया खराब प्रदर्शन चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में पाकिस्तानी टीम को अपने पहले मैच में 60 रनों से हार मिली थी। इसके बाद भारतीय टीम ने उसे 6 विकेट से धूल चटाई। जबकि बांग्लादेश के खिलाफ उसका मैच बारिश की भेंट चढ़ गया। इसी वजह से पाकिस्तानी टीम सेमीफाइनल में नहीं पहुंच पाई। इससे उसकी हर जगह किरकिरी हुई। पाकिस्तानी टीम चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में ओवर ऑल 7वें नंबर पर रही थी। पाकिस्तान को मिले इतने रुपए चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में 7वें या 8वें नंबर पर रहने वाली टीमों को $140k मिले, जो भारतीय रुपए में लगभग 1 करोड़ 22 लाख रुपए होते हैं। वहीं चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तानी टीम को $125K मिले, जो भारतीय रुपए में लगभग 1 करोड़ 9 लाख रुपए होते हैं। इस तरह से पाकिस्तान को मौजूदा चैंपियंस ट्रॉफी में बिना मैच जीते ही लगभग 2 करोड़ 31 लाख रुपए मिले। सरफराज अहमद की कप्तानी में जीता था खिताब चैंपियंस ट्रॉफी 2017 के फाइनल में पाकिस्तानी टीम ने जगह बनाई थी और तब सरफराज अहमद की कप्तानी में भारतीय टीम को 180 रनों से शिकस्त दी थी। लेकिन चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में पाकिस्तान का प्रदर्शन बिल्कुल ही उम्मीदों के उलट रहा। टीम के गेंदबाज और बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रहे। पाकिस्तान के लिए चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में एक भी बल्लेबाज शतक नहीं लगा पाया था।

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