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कटनी में मिले 23 पाकिस्तानी नागरिक, हिंदू शरणार्थी और एक मुस्लिम महिला शामिल, ह मंत्रालय के निर्देश पर कार्रवाई

कटनी एमपी के कटनी में पुलिस ने 23 पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान की है। ये सभी लोग लंबे समय से वीजा पर यहां रह रहे हैं। गृह मंत्रालय के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। इन लोगों में हिंदू शरणार्थी और एक मुस्लिम महिला शामिल हैं। पुलिस ने इनकी जानकारी गृह मंत्रालय को भेज दी है। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद गृह मंत्रालय ने पाकिस्तानियों के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। 24 घंटे के अंदर ही 23 पाकिस्तानियों की पहचान कर ली गई। 30-35 साल से यहां रह रहे पुलिस के अनुसार ये सभी 23 पाकिस्तानी नागरिक पिछले 30-35 सालों से कटनी में रह रहे हैं। ये सभी हिंदू शरणार्थी हैं। उन्होंने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन भी किया है। इन लोगों में एक मुस्लिम महिला भी शामिल है। वह पहले कैमोर में रहती थी। उसकी शादी पाकिस्तान में हुई थी। शादी के बाद वह कटनी आ गई। बाद में उसने अनूपपुर में दूसरी शादी कर ली। अब वह वहीं रह रही है। लॉन्ग टर्म वीजा पर रहने की छूट कटनी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार डेहरिया ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कटनी में मिले सभी पाकिस्तानियों को लॉन्ग टर्म वीजा पर रहने की छूट मिली हुई है। पुलिस विभाग ने गृह मंत्रालय से इस बारे में जानकारी मांगी थी। जानकारी के साथ सभी दस्तावेज उच्च अधिकारियों को भेज दिए गए हैं। इसके अलावा, एक मुस्लिम महिला की भी पहचान हुई है, जो फिलहाल अनूपपुर में रह रही है। कटनी पुलिस सभी पहलुओं पर ध्यान रख रही है।

न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज मैट हेनरी चोटों से जूझ रहे , पाकिस्तान के खिलाफ बाकी बचे दो टी20आई मैचों से बाहर हो गए

नई दिल्ली न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज मैट हेनरी चोटों से जूझ रहे हैं। वह पाकिस्तान के खिलाफ बाकी बचे दो टी20आई मैचों से बाहर हो गए हैं। उन्हें दाएं कंधे में चोट लगी है और पहले से ही बाएं घुटने की समस्या है। कंधे की चोट उन्हें आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका के खिलाफ लगी थी। न्यूजीलैंड को झटका न्यूजीलैंड 5 मैचों की टी20 सीरीज में 2-1 से आगे है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने शनिवार को बताया कि कैंटरबरी के 22 साल के तेज गेंदबाज जैक फाउल्क्स अंतिम दो मैचों के लिए टीम के साथ बने रहेंगे। वह पहले तीन मैचों के लिए कवर के तौर पर टीम में शामिल हुए थे। विल ओ’रूर्के, जिनका नाम पहले तीन मैचों के लिए था, अब काइल जैमीसन की जगह अंतिम दो मैचों के लिए टीम में शामिल हो गए हैं। सीरीज का चौथा मैच रविवार को बे ओवल, टौरंगा में खेला जाएगा। आखिरी मैच अगले बुधवार को वेलिंगटन में होगा। हेनरी लंबे समय के लिए बाहर मैट हेनरी अब पाकिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज में नहीं खेल पाएंगे। उनकी जगह जैक फाउल्क्स और विल ओ’रूर्के को टीम में शामिल किया गया है। मैट हेनरी को कंधे और घुटने में चोट है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैक फाउल्क्स टीम के साथ बने रहेंगे। फाउल्क्स पहले तीन मैचों के लिए कवर के तौर पर आए थे। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने शनिवार को कहा, ‘कैंटरबरी के 22 साल के तेज गेंदबाज जैक फाउल्क्स अंतिम दो मैचों के लिए टीम के साथ बने रहेंगे, वह पहले तीन मैचों के लिए कवर के तौर पर टीम में शामिल हुए थे।’ काइल जैमीसन की जगह विल ओ’रूर्के को टीम में शामिल किया गया है। विल ओ’रूर्के पहले तीन मैचों के लिए टीम में थे। न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के बीच चौथा टी20आई मैच रविवार को टौरंगा में होगा। सीरीज का आखिरी मैच वेलिंगटन में खेला जाएगा। न्यूजीलैंड अभी सीरीज में 2-1 से आगे है। न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम चाहेगी कि वह बाकी बचे मैच जीतकर सीरीज अपने नाम करे।

चैंपियंस ट्रॉफी में बिना एक भी मैच जीते पाकिस्तान को ICC से मिल गए इतने करोड़ रुपए

नई दिल्ली  मेजबान कोई भी बड़ा इवेंट करने के बाद खर्च और कमाई यानी आय और व्यय का लेखा-जोखा यानी हिसाब-किताब जरूर करता है। रिव्यू करता है कि कितना खर्च हुआ और कितनी कमाई हुई। पाकिस्तान के साथ भी कुछ ऐसा ही होगा। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का खिताब भारत जीत चुका है और अब समय है हिसाब-किताब का। सही आंकड़ा तो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ही बता पाएगा, लेकिन बाहर से जो भी चीजें दिखाई दे रही हैं वह ज्यादा बेहतर नहीं हैं। कुछ चीजों का बैकअप प्लान नहीं होने से पाकिस्तान को इतना बड़ा नुकसान हुआ कि उसका अंदाजा उसने सपने में भी नहीं लगाया रहा होगा। जी हां, उसने तीन स्टेडियम को खेलने लायक बनाने के लिए हजारों करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए। एक-एक स्टेडियम पर एक-एक हजार करोड़ से अधिक पैसे खर्च हुए, लेकिन क्या उसने इसकी भरपाई की? शायद नहीं। पाकिस्तान में 3 वेन्यू पर कुल 10 मैच हुए, जिसमें से 2 मैच बारिश की वजह से रद्द हो गए। ये दो मैच दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के घर यानी रावलपिंडी स्टेडियम के थे, 3 मैच खेले जाने थे। रावलपिंडी स्टेडियम में पहला मैच 24 फरवरी को बांग्लादेश और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया था। इस मैच में न्यूजीलैंड ने 5 विकेट से जीत दर्ज की। पिंडी में अगला मैच 25 फरवरी को शेड्यूल था। ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के बीच यह मुकाबला बारिश की वजह से रद्द रहा। स्टेडियम में पानी सुखाने के लिए ड्रेनेज सिस्टम बेहद घटिया था। सुपर सॉपर की जगह बाथरूम में इस्तेमाल होने वाले वाइपर और स्पंज से पानी सुखाते देखा गया। लेकिन कामयाबी नहीं मिली और 27 फरवरी को पाकिस्तान और बांग्लादेश का मैच भी इसी तरह से रद्द हो गया। इस तरह दोनों टीमों को बिना कोई मैच जीते टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा। अब आते हैं खास मुद्दे पर। दरअसल, रिपोर्ट्स की मानें तो रावलपिंडी स्टेडियम को बनाने के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने 1500 करोड़ रुपये एलॉट किए थे। इसमें फ्लड लाइट्स की जगह 350 एलईडी लाइट्स लगाने के लिए 393 मिलियन रुपए और मुख्य भवन, हॉस्पिटैलिटी बॉक्स और टॉयलेट के लिए 400 मिलियन रुपए शामिल हैं। इसके अतिरिक्त दो एलईडी डिजिटल स्क्रीन को बदलने के लिए 330 मिलियन रुपए आवंटित किए गए थे, जबकि नई सीटिंग इंस्टॉलेशन पर 272 मिलियन रुपए खर्च किए जाने थे। मान लिया जाए कि अलॉट किए गए रुपये ही खर्च किए गए तो भी एक स्टेडियम में सिर्फ एक मैच का कुल खर्च 1500 करोड़ रुपये से अधिक रहा। यही नहीं, पाकिस्तान ने हर स्टेडियम की ओपनिंग सेरिमनी के लिए ब्लॉकबस्टर शो किए थे और दुनिया को दिखाने के लिए सिंगर से लेकर डांसर तक पर मोटी रकम खर्च की थी। हालांकि, इन पैसों के बारे में कहीं भी जानकारी नहीं दी गई। एक ओर उसकी आर्थिक स्थिति कंगालों वाली है तो दूसरी ओर इस तरह से पैसे बहाना समझ से परे है। स्टेडियम किसी भी मैच के लिए भरे नहीं थे तो कम से कम पब्लिक से मिलने वाला पैसा उसके खर्च को कतई पूरा नहीं कर सकता है। हां, ब्रॉडकास्टर्स से जरूर उसे फायदा मिला होगा, लेकिन क्या उसे इतने पैसे मिले होंगे कि इतने बड़े खर्च की भरपाई की जा सकती है। बात यहीं खत्म नहीं होती। आने वाले समय में इस स्टेडियम पर पाकिस्तान सुपर लीग के मैच तो शेड्यूल हैं, लेकिन इंटरनेशनल टीमों का दौरा होगा या नहीं इसका पता नहीं। इस बीच बलूच लिबरेशन आर्मी का जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक करना उसकी पहले से गिरी हुई साख और भी रसातल में ले जाने का काम किया है। बलूच विद्रोही संगठन का दावा है कि उसने 30 पाकिस्तानी जवानों को मार गिराया है। इंटरनेशनल लेवल पर इस खबर के आने के बाद कोई भी टीम शायद ही पाकिस्तान का दौरा करने के लिए राजी होगी। संभव है कि पीएसएल में भी विदेशी खिलाड़ी खेलने से कतराएं।  चैंपियंस ट्रॉफी में बिना एक भी मैच जीते पाकिस्तान को  ICC से मिल गए इतने करोड़ रुपए चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की मेजबानी पाकिस्तान के पास थी, लेकिन BCCI ने भारतीय क्रिकेट टीम को पाकिस्तान भेजने से मना कर दिया था। इसके बाद इस अहम टूर्नामेंट को हाइब्रिड मॉडल पर खेला गया। जहां टीम इंडिया के सभी मैच दुबई में हुए थे। अब भारतीय टीम ने बिना एक भी मैच हारे चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का खिताब जीत लिया। इनाम के तौर पर भारतीय टीम को लगभग 20 करोड़ रुपए मिले। दूसरी तरफ पाकिस्तानी टीम के लिए चैंपियंस ट्रॉफी 2025 किसी बुरे सपने से कम नहीं रही और पाकिस्तान एक भी मैच में जीत दर्ज नहीं कर पाया। पाकिस्तान ने किया खराब प्रदर्शन चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में पाकिस्तानी टीम को अपने पहले मैच में 60 रनों से हार मिली थी। इसके बाद भारतीय टीम ने उसे 6 विकेट से धूल चटाई। जबकि बांग्लादेश के खिलाफ उसका मैच बारिश की भेंट चढ़ गया। इसी वजह से पाकिस्तानी टीम सेमीफाइनल में नहीं पहुंच पाई। इससे उसकी हर जगह किरकिरी हुई। पाकिस्तानी टीम चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में ओवर ऑल 7वें नंबर पर रही थी। पाकिस्तान को मिले इतने रुपए चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में 7वें या 8वें नंबर पर रहने वाली टीमों को $140k मिले, जो भारतीय रुपए में लगभग 1 करोड़ 22 लाख रुपए होते हैं। वहीं चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तानी टीम को $125K मिले, जो भारतीय रुपए में लगभग 1 करोड़ 9 लाख रुपए होते हैं। इस तरह से पाकिस्तान को मौजूदा चैंपियंस ट्रॉफी में बिना मैच जीते ही लगभग 2 करोड़ 31 लाख रुपए मिले। सरफराज अहमद की कप्तानी में जीता था खिताब चैंपियंस ट्रॉफी 2017 के फाइनल में पाकिस्तानी टीम ने जगह बनाई थी और तब सरफराज अहमद की कप्तानी में भारतीय टीम को 180 रनों से शिकस्त दी थी। लेकिन चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में पाकिस्तान का प्रदर्शन बिल्कुल ही उम्मीदों के उलट रहा। टीम के गेंदबाज और बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रहे। पाकिस्तान के लिए चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में एक भी बल्लेबाज शतक नहीं लगा पाया था।

UNHRC की बैठक में भारत ने पाकिस्तान की खोल दी पोल

जिनेवा भारत ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) की बैठक में पाकिस्तान को जमकर फटकार लगाई. पाकिस्तान की ओर से यूएन में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने आईना भी दिखाया. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 58वें सत्र की सातवीं बैठक में भारत के प्रतिनिधि क्षितिज त्यागी ने कहा कि भारत, पाकिस्तान की ओर से किए गए निराधार और दुर्भावनापूर्ण संदर्भों का जवाब देने के लिए अपने अधिकार का प्रयोग कर रहा है. यह देखना दुखद है कि पाकिस्तान के तथाकथित नेता और प्रतिनिधि कश्मीर को लेकर झूठ धड़ल्ले से फैला रहे हैं. पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय नियमों का मखौल उड़ा रहा है. जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख हमेशा भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग बना रहेगा. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जम्मू कश्मीर में हुई अभूतपूर्व राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रगति अपने आप में बहुत कुछ कहती है. ये सफलताएं सरकार की उस प्रतिबद्धता में लोगों के विश्वास का प्रमाण हैं जो दशकों से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्र में हालात सामान्य करने में जुटी है. उन्होंने कहा कि एक ऐसे देश (पाकिस्तान) के रूप में जहां मानवाधिकारों का हनन, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न और लोकतांत्रिक मूल्यों का पतन उसकी नीतियों का हिस्सा है और जो धड़ल्ले से संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों को पनाह देता है, ऐसे में वह किसी को भी उपदेश देने की स्थिति में नहीं है. इसकी बयानबाजी से पाखंड और शासन में अक्षमता की बू आती है. इन्हें भारत पर ध्यान देने के बजाए पाकिस्तान को अपने लोगों पर ध्यान देने की जरूरत है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस परिषद का समय एक असफल राष्ट्र द्वारा बर्बाद किया जा रहा है जो खुद अस्थिरता से जूझ रहा है. जबकि भारत का ध्यान लोकतंत्र, विकास और अपने लोगों का सम्मान सुनिश्चित करने पर है. ये ऐसे मूल्य हैं, जिनसे पाकिस्तान को कुछ सीखना चाहिए. बता दें कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान सरकार के प्रतिनिधि आजम नजीर तरार ने कहा था कि कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है जो संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है.  

गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल पाए जाने के बाद 12 देशों ने 131 से ज्यादा पाकिस्तानियों को अलविदा कहा

लाहौर गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल पाए जाने के बाद दुनियाभर के 12 देशों ने 100 से ज्यादा पाकिस्तानियों को अलविदा कह दिया है। इन देशों ने कम से कम 131 पाकिस्तानियों को डीपोर्ट कर दिया है। उनपर ड्रग्स तस्करी, अवैध घुसपैठ, और नौकरियों में कानून के उल्लंघन जैसे आरोप थे। गौर करने वाली बात यह है कि इस डिपोर्टेशन में सऊदी अरब और यूएई सबसे आगे थे। सऊदी अरब के इमिग्रेशन सूत्रों के मुताबिक यहां से करीब 74 पकिस्तानियों को उनके देश भेज दिया गया है। उनपर ड्रग ट्रैफिकिंग और नौकरी के नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं। सऊदी अरब से मिली जानकारी के मुताबिक उन्होंने नौकरी के लिए एग्रीमेंट का उल्लंघन किया था और बिना नोटिस के ही नौकरी छोड़ दी थी। वहीं यूएई ने भी कई पाकिस्तानियों को डिपोर्ट कर दिया है। उनपर अवैध घुसपैठ, चोरी और ड्रग्स ट्रैफिकिंग के आरोप थे। एक ऐसा भी मामला है जब एक पाकिस्तानी को पहुंचने के बाद एंट्री ही नहीं दी गई और उसे तुरंत डिपोर्ट कर दिया गया। आरोप था कि वह खुदकुशी करने की धमकी दे रहा था। इन दो देशों के अलावा, ओमान, कंबोडिया, बहरीन, अजरबैजान, इराक और मेक्सिको से पाकिस्तानियों को डिपोर्ट किया गया है। इसके अलावा मॉरिटानिया और सेनेगल से भी दो पाकिस्तानियों को डिपोर्ट किया गया। उनपर मानव तस्करी के आरोप थे। पाकिस्तान पहु्ंचने के बाद 16 लोगों को फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के हवाले कर दिया गया। वे ट्रैफिकिंग से जुड़े मामलों में आरोपी थे। वहीं 6 को लरकाना, कलात, गुजरांवाला, साहीवाल और रावलपिंडी की पुलिस को सौंप दिया गया। उनके खिलाफ भी जांच शुरू की जाएगी। कराची के एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों के मुताबिक 86 लोगों को देश छोड़ने से रोका गया है। इनमें 30 उमराह यात्री थे। उनके पास अडवांस होटल बुकिंग नहीं थी इसलिए एयरपोर्ट पर ही रोक लिया गया। इसकेअलावा उनके पास यात्रा के खर्च का ब्यौरा भी नहीं ता। सात ऐसे लोग भी थे जिनके पास साइप्रस, यूके अजरबैजान और किर्गिस्तान का स्टडी वीजा था। उन्हें भी एयरपोर्ट पर ही रोक लिया गया। सऊदी अरब, ओमान, अजरबैजान, मालावी, कॉन्गो, बहरीन, मलेशिया, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, थाइलैंड, तुर्की और जिम्बॉम्वे के टूरिस्ट वीजा वाले लोगों को भी रोक लिया गया। वहीं कुछ लोग जो कतर, तुर्की और सऊदी अरब में काम करने के लिए ब्लैकलिस्ट थे उन्हें भी बोर्डिंग की अनुमति नहीं दी गई।

2050 तक पाकिस्तान की जनसंख्या 38 करोड़ से अधिक हो जाएगी, प्रजनन दर 2.5 तक

इस्लामाबाद  कंगाली में डूबा पाकिस्तान तमाम सूचकांकों में पीछे है, लेकिन बच्चा पैदा करने के मामले में यह काफी आगे है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि साल 2050 तक पाकिस्तान जनसंख्या के मामले में अमेरिका को भी पीछे छोड़ देगा और दुनिया की तीसरा सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा। ऐसा तब हुआ है जब पिछले तीन दशक के दौरान पाकिस्तान में जन्म दर में बड़ी गिरावट देखी गई है। 3.6 है पाकिस्तान की प्रजनन दर संयुक्त राष्ट्र विश्व प्रजनन रिपोर्ट 2024 के अनुसार, पाकिस्तान की प्रजनन दर साल 2024 में 3.6 पर है, जो एशिया के तमाम देशों से बहुत ज्यादा है। हालांकि, 1994 में पाकिस्तान की अपनी ही प्रजनन दर की तुलना में यह काफी कम हुई है। साल 1994 में पाकिस्तान में प्रति महिला जीवित प्रजनन दर 6 थी। इसका मतलब है कि हर महिला औसतन छह बच्चों को जन्म देती थी। तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश बनेगा इस गिरावट के बावजूद, अनुमान है कि साल 2050 तक पाकिस्तान अमेरिका, इंडोनेशिया,ब्राजील और रूस को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। साल 1947 में पाकिस्तान बनने के समय देश की जनसंख्या 3.1 करोड़ थी, जो 2023 की जनगणना के अनुसार 24.1 करोड़ हो गई है। कितनी हो जाएगी पाकिस्तान की जनसंख्या? संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2050 तक पाकिस्तान की जनसंख्या 38 करोड़ से अधिक हो जाएगी। वहीं, 2054 तक प्रजनन दर में और गिरावट आने की उम्मीद है, जो घटकर 2.5 तक हो जाएगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान के साथ-साथ इथियोपिया, नाइजीरिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे मुस्लिम देशों में 2024 में वैश्विक जन्म का 43 प्रतिशत हिस्सा रहा। देश की बढ़ती आबादी ने पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ा दिया है। जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए देश परिवार नियोजन कार्यक्रमों,गर्भनिरोधक वितरण और ग्रामीण शिक्षा अभियानों समेत विभिन्न उपायों का सहारा ले रहा है। हालांकि, धार्मिक कट्टरता, सांस्कृतिक बाधाएं और शिक्षा तक सीमित पहुंच इसमें बाधा डाल रही है। धार्मिक कट्टरता के चलते परिवार नियोजन उपायों को देश में बुरी नजर से देखा जाता है।

आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने भारत को दी धमकी कहा ‘भारत के किसी भी दुस्साहस का पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा

इस्लामाबाद पाकिस्तान में खाने के लाले भले भी पड़े हों, लेकिन भारत के खिलाफ उसका जहर उगलना लगातार जारी है। इस बार पाकिस्तानी सेना के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने भारत को धमकी दी है। उन्होंने कहा है, कि ‘भारत के किसी भी दुस्साहस का पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा।’ जनरल असीम मुनीर ने मंगलवार को रावलपिंडी में जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में 267वें कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस (CCC) की बैठक के दौरान भारत को गीदड़भभकी दी है। उन्होंने भारतीय सैन्य अधिकारियों पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगाया और कहा, कि “पाकिस्तानी सेना देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।” असीम मुनीर ने कहा, कि “भारतीय सेना के ये खोखले बयान उनकी बढ़ती हताशा को दर्शाते हैं और वो ऐसा बयान इसलिए दे रहे हैं, कि वो अपने आंतरिक मुद्दों और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों से ध्यान भटका पाए।” उन्होंने कहा, कि “पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी दुस्साहस का, राज्य की पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा, इंशाअल्लाह।” पाकिस्तान की आर्मी चीफ की गीदड़भभकी इसके अलावा, सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान जनरल असीम मुनीर ने अफगानिस्तान के तालिबान शासकों को भी धमकाने की कोशिश की है। उन्होंने काबुल के शासकों से अफगानिस्तान की धरती से पाकिस्तान के खिलाफ चलाए जा रहे आतंकी अभियानों के खिलाफ ठोक कार्रवाई करने की अपील की है। इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है, कि इस सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान की सुरक्षा और स्थिरता पर बात की गई और उन सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई, जिनकी हालिया समय में आतंकी हमलों में मौत हुई है। आपको बता दें, कि पाकिस्तान में पिछले तीन सालों में आतंकी हमलों में बेतहाशा इजाफा हुआ है और सैकड़ों जवानों और आम नागरिकों की मौत हुई है। सबसे दिलचस्प ये है, कि जिस तरह से भारत के खिलाफ आतंकवादियों को भेजने के बाद पाकिस्तान ऐसे अभियान में अपना हाथ होने से इनकार करता रहा है, उसी तरह से तालिबान भी पाकिस्तान में होने वाले हमलों से पल्ला झाड़ लेता है। कश्मीर पर भी पाकिस्तान आर्मी चीफ के जहरीले बोल पाकिस्तान के आर्मी चीफ सिर्फ भारत को धमकाने तक ही सीमित नहीं रहे। बल्कि उन्होंने कश्मीर को लेकर भी इस बैठक में जमकर जहर उगला और भारत पर अनर्गल आरोप लगाए हैं। पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने आरोप लगाया, कि ‘भारतीय कश्मीर’ में मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जाता है। लेकिन, पाकिस्तान में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की नारकीय स्थिति पर उनके मुंह से एक बोल नहीं फूटे। बैठक के दौरान उन्होंने ‘कश्मीर के आत्मनिर्णय के संकल्प पर पाकिस्तान के अटूट समर्थन’ की बात दोहराई। उन्होंने कहा, कि “हम कश्मीरी लोगों के उनके अधिकारों के लिए वैध संघर्ष का समर्थन करने में दृढ़ हैं।” इसके अलावा, पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने बलूचिस्तान में अशांति पर भी बात की है। उन्होंने कहा, कि “बलूचिस्तान में शांति को भंग करने की किसी को भी इजाजत नहीं दी जाएगी।” हैरानी की बात ये थी, कि उन्होंने बलूचिस्तान के युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का आरोप विदेशी देशों पर लगाया। जबकि, जिहाद के नाम पर पाकिस्तान की सेना ने कैसे अपने ही देश को बर्बाद कर दिया है, ये हर कोई जानता है।

पडोसी देश पाकिस्तान से 400 हिंदुओं की अस्थियां भारत पहुंची, मृतकों को भारत में मिलेगा मोक्ष; हरिद्वार में होगा गंगा विसर्जन

अमृतसर  पाकिस्तान से लगभग 400 हिंदुओं की अस्थियां लेकर एक समूह भारत आया है। ये लोग इन अस्थियों को हरिद्वार में गंगा नदी में विसर्जित करना चाहते हैं। साथ ही महाकुंभ में प्रयागराज जाकर पवित्र स्नान करने की भी इच्छा रखते हैं। यह तीसरी बार है जब विभाजन के बाद पाकिस्तान से हिंदुओं की अस्थियां भारत लाई गई हैं। पहले 2011 और 2016 में भी अस्थियां लाई जा चुकी हैं। यह समूह सोमवार को अटारी बॉर्डर पहुंचा। दिल्ली के निगम बोध घाट पर 4 से 21 फरवरी तक अस्थियां रखी जाएंगी। 22 फरवरी को हरिद्वार के कनखल में सीता घाट पर विसर्जन होगा। इसके साथ 100 किलो दूध की आहुति भी दी जाएगी। वीजा एक्सटेंशन की उम्मीद पाकिस्तान से आए हिंदू समूह के पास लखनऊ और हरिद्वार जाने का वीजा है। वे प्रयागराज जाने के लिए वीजा एक्सटेंशन की उम्मीद कर रहे हैं ताकि महाकुंभ में पवित्र स्नान कर सकें। कराची के श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत राम नाथ मिश्र महाराज ने बताया कि पाकिस्तान में कई हिंदुओं की इच्छा होती है कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी अस्थियां गंगा में विसर्जित की जाएं। उनके परिजन उनकी यह अंतिम इच्छा पूरी करना चाहते हैं। ऐसे में अस्थियों को मंदिरों में कलश में सुरक्षित रखा जाता है। जब पर्याप्त संख्या में कलश इकट्ठे हो जाते हैं, तो भारत का वीजा लेने का प्रयास किया जाता है। इस तरह मृतक या उनके परिवार की अंतिम इच्छा पूरी होती है। राम नाथ मिश्र ने बताया कि वे लगभग 400 कलश लेकर आए हैं। ये अस्थियां पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से एकत्रित की गई हैं। 22 फरवरी को कनखल के सीता घाट पर विसर्जन दिल्ली की श्री देवोथान सेवा समिति के महासचिव विजय शर्मा और अन्य लोग अटारी बॉर्डर पर अस्थियां लेने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि 4 से 21 फरवरी तक अस्थियों को दिल्ली के सबसे पुराने और बड़े श्मशान घाट, निगम बोध घाट पर रखा जाएगा। लोग यहां आकर श्रद्धांजलि दे सकेंगे। 21 फरवरी को वैदिक रीति-रिवाजों के साथ अस्थियों को हरिद्वार ले जाया जाएगा। 22 फरवरी को कनखल के सीता घाट पर विसर्जन होगा। इसके साथ 100 किलो दूध की आहुति दी जाएगी। यह एक पारंपरिक हिंदू रस्म है। विजय शर्मा ने भारत सरकार से आग्रह किया कि वे उन हिंदुओं को वीजा जारी करें जो अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार हरिद्वार में करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे सभी मंचों के माध्यम से अपनी मांग उठाएंगे। यह सुनिश्चित करेगा कि पाकिस्तानी हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान हो।

‘देश के मित्र शत्रुओं को बख्शेंगे नहीं’, 18 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत के बाद बलूचिस्तान पहुंचे सेना प्रमुख

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल सैयद असीम मुनीर ने शनिवार को बलूचिस्तान का दौरा किया। आतंकियों के साथ संघर्ष के दौरान 18 सैनिकों की मौत के बाद उन्होंने कहा कि देश को निशाना बनाने वाले देश के मित्र शत्रुओं का हम पता लगाकर रहेंगे। हम उनको बख्शेंगे नहीं। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में पिछले 24 घंटों में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए 18 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो चुकी है, जबकि 23 आतंकवादी भी मारे गए हैं। इस बीच सेना प्रमुख जनरल सैयद असीम मुनीर ने बलूचिस्तान के क्वेटा का दौरा किया। सेना ने कहा कि अधिकारियों ने सेना प्रमुख मुनीर को बलूचिस्तान में मौजूदा सुरक्षा स्थिति के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर सेना प्रमुख जनरल सैयद असीम मुनीर ने कहा कि जो लोग अपने विदेशी आकाओं के आतंकी प्रतिनिधि के रूप में काम कर रहे हैं। जिन्होंने शिकारी कुत्ते के साथ शिकार करने और खरगोश के साथ दौड़ने के दोहरे मापदंड की कला हासिल कर ली है। हम उनके बारे में अच्छी तरह से जानते हैं। ये तथाकथित मित्र-शत्रु चाहे कुछ भी कर लें, वे हमारे गौरवशाली राष्ट्र और इसके सशस्त्र बलों से पराजित होंगे। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभूमि और उसके लोगों की रक्षा के लिए जब भी आवश्यकता होगी और वे जहां भी होंगे हम जवाबी कार्रवाई करेंगे और उनको ढूंढ निकालेंगे। चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (सीओएएस) मुनीर ने आतंकवाद से लड़ने के लिए सेना, फ्रंटियर कोर और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बहादुर अधिकारियों और सैनिकों के साहस व दृढ़ संकल्प की भी सराहना की। उन्होंने बलूचिस्तान के लोगों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए सेना के संकल्प को फिर से दोहराया। साथ ही क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने के प्रयासों में प्रांतीय सरकार को समर्थन देने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है बलूचिस्तान बता दें कि बलूचिस्तान में बलूच चरमपंथियों द्वारा नियमित रूप से सुरक्षा बलों पर हमले किए जा रहे हैं। बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन अन्य प्रांतों की तुलना में इसके पास अधिक संसाधन होने के बावजूद यह सबसे कम विकसित है।

एयरस्ट्राइक का बदला लेने के लिए तैयार अफगानिस्तान, 15000 तालिबान लड़ाके कर रहे कूच, पाकिस्तान की आएगी शामत!

 पेशावर  भारत के पड़ोस में खूनी जंग छिड़ती नजर आ रही है। पाकिस्तान और तालिबान की दोस्ती अब दुश्मनी में बदलने लगी है और दोनों देश एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए। पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद अब अफगानिस्तान ने भी बदला लेने की ठान ली है। 15 हजार तालिबानी लड़ाकों पाकिस्तान की ओर तेजी से बढ़ रहे है। पाकिस्तान ने मंगलवार (24 दिसंबर) को देर रात अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तानी तालिबान के संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाया था। एयरस्ट्राइक में कम से कम 46 लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान की ओर बढ़े तालिबानी लड़ाके पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार तालिबान के 15000 लड़ाके काबुल, कंधार और हेरात से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से लगती मीर अली सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। तालिबान के यह लड़ाके पाकिस्तान से एयरस्ट्राइक का बदला लेने के लिए तैयार हैं। तालिबान प्रवक्ता का कहना है कि पाकिस्तान को उसकी कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। ‘कायरतापूर्ण हमले का जवाब जरूर देंगे…’ वहीं, अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया। उसका आरोप है कि एयरस्ट्राइक में महिलाओं और बच्चों समेत आम लोगों को भी निशाना बनाया गया। रक्षा मंत्रालय ने इस पर कहा, ‘अपनी मातृभूमि की रक्षा करना हमारा अधिकार है। हम इस कायरतापूर्ण हमले का जवाब जरूर देंगे।’ क्यों बढ़ा तनाव? टीटीपी एक अलग आतंकवादी संगठन है, लेकिन इसे अफगान तालिबान का करीबी सहयोगी माना जाता है, जो अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ था। पाकिस्तान में पिछले दो दशक में बड़ी संख्या में आतंकवादी हमले हुए हैं, लेकिन हाल के महीनों में इनमें वृद्धि हुई है। TTP ने हाल ही में उत्तर-पश्चिम में एक जांच चौकी पर हमला किया था, जिसमें कम से कम 16 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तानी अधिकारियों ने तालिबान पर साझा सीमा पर आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया है। हालांकि, तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के आरोप खारिज करते हुए कहा है कि वह किसी भी संगठन को किसी भी देश के खिलाफ हमले करने की इजाजत नहीं देती है। क्या है तालिबान की रणनीति? अफगान तालिबान लंबे समय से यह दिखाता आया है कि वह किसी भी बड़े सैन्य शक्ति के सामने झुकने वाला नहीं है. अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों को उसने वर्षों तक चुनौती दी और आखिरकार उन्हें अफगानिस्तान से लौटने पर मजबूर कर दिया. पाकिस्तान के पास न तो वैसी सैन्य ताकत है और न ही आर्थिक क्षमता, जिससे वह तालिबान का सामना कर सके. मीर अली बॉर्डर पर बढ़ती गतिविधियों के चलते पाकिस्तान ने भी अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है. सीमाई इलाकों में सैनिकों की तैनाती तेज कर दी गई है. स्थानीय लोगों में डर का माहौल है और स्थिति किसी बड़े संघर्ष का संकेत दे रही है. तनाव बढ़ने के साथ ही यह देखना होगा कि पाकिस्तान और तालिबान के बीच यह टकराव किस ओर बढ़ता है. तालिबान का उभार अफगानिस्तान से रूसी सैनिकों की वापसी के बाद 1990 के दशक की शुरुआत में उत्तरी पाकिस्तान में हुआ था. पश्तो भाषा में तालिबान का मतलब होता है छात्र खासकर ऐसे छात्र जो कट्टर इस्लामी धार्मिक शिक्षा से प्रेरित हों. कहा जाता है कि कट्टर सुन्नी इस्लामी विद्वानों ने धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से पाकिस्तान में इनकी बुनियाद खड़ी की थी. तालिबान पर देववंदी विचारधारा का पूरा प्रभाव है. तालिबान को खड़ा करने के पीछे सऊदी अरब से आ रही आर्थिक मदद को जिम्मेदार माना गया. शुरुआती तौर पर तालिबान ने ऐलान किया कि इस्लामी इलाकों से विदेशी शासन खत्म करना, वहां शरिया कानून और इस्लामी राज्य स्थापित करना उनका मकसद है. शुरू-शुरू में सामंतों के अत्याचार, अधिकारियों के करप्शन से आजीज जनता ने तालिबान में मसीहा देखा और कई इलाकों में कबाइली लोगों ने इनका स्वागत किया लेकिन बाद में कट्टरता ने तालिबान की ये लोकप्रियता भी खत्म कर दी लेकिन तब तक तालिबान इतना पावरफुल हो चुका था कि उससे निजात पाने की लोगों की उम्मीद खत्म हो गई. अफगान और तालिबान की सैन्य ताकत कितनी? तालिबान की ताकत कितनी है कि वह अफगानिस्तान की सेना पर भारी पड़ रहा? अफगानिस्तान के फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट कहते हैं- ‘तालिबान का जल्द खात्मा होगा. उनके पास 80 हजार के करीब लड़ाके हैं और अफगानिस्तान की सेना के पास 5 से 6 लाख के बीच सैनिक. इसके अलावा अफगानिस्तान के पास वायु सेना है जो तालिबान पर भारी पड़ेगी.’ हालांकि, इस दावे के बावजूद कई ऐसे फैक्ट हैं जो जमीनी स्तर पर तालिबान को मजबूत साबित कर रहे हैं. तालिबान का मैनपावर सोर्स कबाइली इलाकों में बसे कबीले और उनके लड़ाके हैं. इसके अलावा कट्टर धार्मिक संस्थाएं, मदरसे भी उनके विचार को सपोर्ट कर रहे हैं. लेकिन इन सबसे ज्यादा पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की सीक्रेट मदद तालिबान के लिए मददगार साबित हो रही है. अमेरिकी खुफिया आकलन भी जमीनी हालात को साफ करते हैं जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के 6 महीने के भीतर अफगानिस्तान सरकार का प्रभुत्व खत्म हो जाएगा और तालिबान का शासन आ सकता है.  

सरकार के खिलाफ किया था विरोध प्रदर्शन, पाकिस्तान की आतंक-रोधी अदालत ने इमरान के 38 समर्थकों को किया रिहा

इस्लामाबाद. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थन में पिछले महीने विरोध प्रदर्शन करने पर गिरफ्तार किए गए 38 समर्थकों को पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत ने शनिवार को रिहा कर दिया। पुलिस ने 26 नवंबर को विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के सैकड़ों समर्थकों को गिरफ्तार किया था। यह लोग इस्लामाबाद तक मार्च निकालने जा रहे थे। पीटीआई के संस्थापक और पूर्व पीएम इमरान खान ने 13 नवंबर को लोगों से देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था कि लोग पार्टी के लिए चुनावी जनादेश की बहाली, हिरासत में लिए गए पार्टी सदस्यों की रिहाई और 26वें संविधान संशोधन को बदलने की मांग करें। इसके बाद पार्टी के समर्थक 26 नबंवर को सड़क पर उतरे थे। पुलिस ने रावलपिंडी में 1,400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। डॉन अखबार के मुताबिक न्यायाधीश अबुल हसनत मोहम्मद जुल्करनैन ने शनिवार को 56 संदिग्धों के मामलों की सुनवाई की। पुलिस ने संदिग्धों के लिए 20 दिन की रिमांड मांगी थी। इस पर बचाव पक्ष के वकील अंसार कयानी ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने विरोध प्रदर्शन से पहले संदिग्धों को उनके घरों से गिरफ्तार किया था। पुलिस संदिग्धों से कुछ भी बरामद नहीं करना चाहती। पुलिस ने केवल उनकी संख्या पूरी की है। इस पर न्यायाधीश ने 50 व्यक्तियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया और छह अन्य को रिहा कर दिया। पुलिस को उन्हें फिर से गिरफ्तार न करने का आदेश दिया। जियो न्यूज ने बताया कि न्यायाधीश जुल्करनैन ने देर रात गिरफ्तार किए गए 32 व्यक्तियों के मामलों सुनवाई की। पुलिस ने संदिग्धों के लिए 30 दिन की रिमांड का अनुरोध किया। जबकि बचाव पक्ष के वकील कियानी ने तर्क दिया कि पुलिस ने कोटा पूरा करने के लिए निर्दोष श्रमिकों को उनके घरों से गिरफ्तार किया था। न्यायाधीश जुल्कारनैन ने अदालत में संदिग्धों की हथकड़ी खोलने का आदेश दिया और उन्हें मामलों से मुक्त कर दिया। उन्होंने पुलिस को उन्हें फिर से गिरफ्तार न करने की सख्त चेतावनी दी। न्यायाधीश ने कहा कि अगर पुलिस ने फिर से ऐसा किया, तो मैं उन्हें हथकड़ी पहना दूंगा।

टी-20 मैच में जिम्बाब्वे को पाकिस्तान ने 57 रनों से हराया

बुलावायो. दमदार बल्लेबाजी के बाद पाकिस्तान ने अपनी घातक गेंदबाजी से जिम्बाब्वे को पहले टी20 मैच में 57 रन से हरा दिया। इस जीत के साथ ही पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने तीन टी20 मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। जिम्बाब्वे के खिलाफ इस टी20 सीरीज में पाकिस्तान ने अपने सीनियर खिलाड़ियों को आराम दिया है। बाबर आजम, मोहम्मद रिजवान, शाहीन अफरीदी और नसीम शाह जैसे खिलाड़ी टी20 सीरीज का हिस्सा नहीं हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 मैच में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवर के खेल में 4 विकेट के नुकसान पर 165 रन का स्कोर खड़ा किया था। पाकिस्तान के लिए बल्लेबाजी में उस्मान खान और तैयब ताहिर ने तूफानी अंदाज में 39-39 रनों का योगदान दिया। इसके अलावा सैम अयूब और इरफान खान ने भी दमदार बल्लेबाजी की। दमदार बल्लेबाजी के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम के गेंदबाजों ने भी अपना खूब कमाल दिखाया। पाकिस्तान के लिए गेंदबाजी में अबरार अहमद और सुफियान मुकीम ने सबसे ज्यादा तीन-तीन विकेट अपने नाम किए। इसके अलावा हारिस रऊफ ने भी बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए अपनी टीम के लिए दो विकेट हासिल किए। वहीं जहांदाद खान के नाम एक विकेट हरा। पाकिस्तानी गेंदबाजों के इस दमदार प्रदर्शन के कारण ही जिम्बाब्वे की टीम ने 166 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 15.3 ओवर में सिर्फ 108 रन बनाकर सिमट गए। जिम्बाब्वे के लिए बल्लेबाजी में सबसे ज्यादा कप्तान सिकंदर रजा ने 39 रनों की पारी खेली। अपनी इस पारी में सिकंदर 28 गेंद का सामना करते हुए 4 चौके भी लगाए। सिकंदर रजा के अलावा जिम्बाब्वे की तरफ विकेटकीपर बल्लेबाज तदिवानाशे मरुमणि ने जरूर 33 रनों की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों के अलावा जिम्बाब्वे का और कोई भी खिलाड़ी क्रीज पर पैर नहीं जमा सके।

पाकिस्तान में निकले फतवे से लोग नाराज, ‘वीपीएन के जरिए अवैध सामग्री देखना शरिया के खिलाफ’

इस्लामाबाद. पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। हालांकि, यहां सरकार, सेना और धार्मिक संगठनों की नजर इन परेशानियों को सुलझाने के बजाय लोगों की रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के खात्मे की ओर ज्यादा रही है। सरकार की तरफ से अलग अलग वक्त पर एक्स समेत कई वेबसाइटों और एप्स को बैन करने का फरमान सुनाया जाता रहा है। हालांकि, अब इन मसलों पर धार्मिक संगठन भी घुस गए हैं, जिसे लेकर पाकिस्तान की आवाम में जबरदस्त गुस्सा है। ताजा मामला पाकिस्तान के एक संवैधानिक धार्मिक संस्थान से जुड़ा है, जिसने इंटरनेट के लिए इस्तेमाल होने वाले वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) को ही इस्लाम विरोधी बता दिया और इसे लेकर फतवा जारी कर दिया। बता दें कि वीपीएन का इस्तेमाल किसी देश में प्रतिबंधित सामग्री, वेबसाइट या एप को चलाने में किया जाता है। इसे लेकर पाकिस्तान में काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी (इस्लामी विचारधारा परिषद), जो कि धर्म से जुड़े शिक्षण और अन्य मुद्दों पर सरकार को सलाह भी देता है, की तरफ से फतवा लोगों को पसंद नहीं आया है। यहां तक कि डिजिटल अधिकारों से जुड़े कार्यकर्ताओं और कुछ धार्मिक नेताओं ने भी इसका विरोध किया है। इस्लाम के विद्वानों ने घेरा पाकिस्तान के डॉन अखबार के मुताबिक, सीआईआई के प्रमुख रघी नईमी ने कहा कि वीपीएन के जरिए इंटरनेट पर अवैध सामग्री देखना शरिया के खिलाफ है। सोशल मीडिया पर एक बयान में पाकिस्तान के जाने-माने धार्मिक नेता मौलाना तारिक जमील ने कहा कि अगर वयस्क सामग्री या ईशनिंदा से जुड़ी सामग्री देखना ही मुद्दा है तो वीपीएन से पहले मोबाइल फोन को भी इस्लाम विरोधी घोषित कर देना चाहिए। दूसरी तरफ पाकिस्तान के एक सांसद और शिया संगठन मजलिस वहादत मुस्लिमीन के प्रमुख अल्लमा नसीर अब्बास ने कहा कि देश को अयोग्य और भ्रष्ट उच्च वर्ग चला रहा है, जो लोगों के असल प्रतिनिधि भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसे कानून बनाते हैं और फतवे का इस्तेमाल अपने मन से करते हैं।

हम सब मुसलमान जिन्ना के साथ नहीं गए, ये एहसान तो हमारा हुकूमत को मानना चाहिए. नहीं तो पाकिस्तान लाहौर तक नहीं लखनऊ तक बनता.” : मोहम्मद अदीब

नईदिल्ली वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक मीटिंग बुलाई गई थी. इस बैठक में राज्यसभा के पूर्व सांसद ने मोहम्मद अदीब (Mohammad Adeeb) भी शामिल हुए. इस दौरान मंच पर अपने संबोधन में उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया, जिससे विवाद हो गया है. मोहम्मद अदीब ने दावा किया, “ये मुसलमानों का एहसान है कि उन्होंने जिन्ना को मना किया, जिसके चलते पाकिस्तान का बॉर्डर लाहौर तक रह गया, नहीं तो ये लखनऊ तक होता.” उन्होंने आगे कहा कि मैं जिंदगी के तकरीबन अस्सी साल पूरे कर रहा हूं. पचास साल से ज्यादा सियासी गलियारों में घूमा हूं. आज हम अपने इलाके में एक गुनहगार की तरह बसर कर रहे हैं. अब तो देशद्रोही भी हो गए हैं, हमने ऐसे ऐसे लोगों को देखा, जो हमारे साथ थे और फिर अपनी सियासी जिंदगी बनाने के लिए हमको किस्मत के हवाले कर गए. जो लोग पाकिस्तान चले गए, उसका इल्जाम हमें दिया गया. ‘हमने गांधी-नेहरू को माना…’ मोहम्मद अदीब ने आगे कहा, “हम मानते हैं, जो पाकिस्तान गए वो महावीर हो गए, लेकिन हमने तो अपना खून बांटा था, हमने तो जिन्ना को मना किया था और ठुकराया था. हमने लियाकत अली खान को नहीं माना था, हमने नेहरू गांधी और आजाद को माना था. हम सब मुसलमान जिन्ना के साथ नहीं गए, ये एहसान तो हमारा हुकूमत को मानना चाहिए. नहीं तो पाकिस्तान लाहौर तक नहीं लखनऊ तक बनता.” उन्होंने आगे कहा कि हमने पाकिस्तान को मुक्तसर कर दिया और तुम हमें सजा देते हो, हम पर जुल्म करते हो. अब तक जितने भी हमारे ऊपर हमले हुए हैं, सबसे बड़ा हमला आपकी औकात का है. हम पर फसाद हुए, हमारे घरों पर बुलडोजर चले, हम इसलिए नहीं बोले कि मेरा घर तो महफूज है क्योंकि हम अपनी जिंदगी के लिए जीते हैं. मोहम्मद अदीब ने आगे कहा, “आज हमारे पास कुछ भी नहीं बचा. आप लोग हमारी कूवत है. हमने सबसे ज्यादा जो मुसीबत झेली है, वो ये है कि अब हमारी हैसियत नहीं रह गई. हम जब अलीगढ़ में पढ़ते थे, तो उस वक्त सियासी जमातें कहती थीं कि कहीं मियां नाराज न हो जाएं. मोहम्मद अदीब ने दिल्ली में आयोजित मुस्लिम कॉन्फ्रेंस में ये बाते कहीं. उनकी स्पीच के वक्त मंच पर  ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष खालिद सैफुल्लाह रहमानी और जनरल सेक्रेटरी फजलुर्रहीम मुजद्दिदी भी मौजूद थे. इसके अलावा कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, अमरैन महफूज रहमानी, समाजवादी पार्टी के नेता और रामपुर से सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी और कर्नाटक से राज्यसभा सांसद सैय्यद नसीर हुसैन भी मौजूद थे.

एडिलेड में सैम अय्यूब की 82 रनों की पारी, हारिस रऊफ के 5 विकेट के दम पर जीता पाकिस्तान.

 एडिलेड पाकिस्तान की टीम ने एडिलेड वनडे मे ऑस्ट्रेलिया को एकतरफा अंदाज में हरा दिया. मेलबर्न में हार का स्वाद चखने वाली पाकिस्तानी टीम ने एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया को कोई मौका नहीं दिया और दमदार जीत हासिल कर सीरीज को 1-1 से बराबर कर लिया. एडिलेड वनडे में ऑस्ट्रेलिया की टीम बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई. ना उसके बल्लेबाज चले और ना ही गेंदबाज अपना दम दिखा पाए. ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 35 ओवर में महज 163 रन बनाए, जवाब में पाकिस्तान की टीम ने ये लक्ष्य 26.3 ओवर में हासिल कर लिया. पाकिस्तान के लिए ये जीत बेहद खास है क्योंकि एडिलेड के मैदान पर उसने पूरे 28 साल बाद ऑस्ट्रेलिया को मात दी है. आखिरी बार पाकिस्तान ने एडिलेड में खेले वनडे में ऑस्ट्रेलिया को 1996 में हराया था. सैम अय्यूब-हारिस रऊफ ने तोड़ी कमर पाकिस्तान को सबसे ज्यादा चोट सैम अय्यूब और हारिस रऊफ ने पहुंचाई. सबसे पहले हारिस रऊफ ने अपनी तेज रफ्तार गेंदों से ऑस्ट्रेलिया के मिडिल ऑर्डर को ही तबाह कर दिया. दाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने जॉश इंग्लिस , मार्नस लाबुशेन, एरॉन हार्डी, ग्लेन मैक्सवेल और पैट कमिंस का शिकार किया. हारिस रऊफ ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना बेस्ट वनडे प्रदर्शन किया, साथ ही एडिलेड के मैदान पर ये किसी भी पाकिस्तानी तेज गेंदबाज का बेस्ट प्रदर्शन भी है. सैम अय्यूब ने बोला हमला हारिस रऊफ के कहर के बाद सैम अय्यूब ऑस्ट्रेलिया कहर बनकर टूटे. बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने ताबड़तोड़ अंदाज में खेलते हुए महज 71 गेंदों में 82 रन बनाए. सैम अय्यूब ने अपनी पारी में 6 छक्के, 5 चौके लगाए. इस खिलाड़ी ने स्टार्क, हेजलवुड, पैट कमिंस, जंपा जैसे गेंदबाजों को नहीं बख्शा. अय्यूब ने अब्दुल्लाह शफीक के साथ 122 गेंदों में 137 रनों की साझेदारी कर ऑस्ट्रेलिया को पूरी तरह मैच से बाहर कर दिया. सैम अय्यूब के बाद अब्दुल्लाह शफीक ने भी शानदार अर्धशतकीय पारी खेली. शफीक 64 रन बनाकर नाबाद रहे, बाबर आजम ने भी नाबाद 15 रनों की पारी खेली. आखिरी वनडे रविवार को पर्थ में खेला जाएगा, जो सीरीज का वर्चुअल फाइनल बन गया है.

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