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मुंबई-दिल्ली कॉरिडोर से जुड़ेगा उज्जैन-जावरा फोरलेन: मंत्री जगदीश देवड़ा

भोपाल मध्यप्रदेश की मोहन सरकार के द्वारा दूसरा बजट (MP Budget 2025) पेश कर दिया गया है। इस दौरान वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने मेट्रो और फोरलेन को लेकर कहा कि इंदौर-भोपाल में मेट्रो का काम जल्द शुरु किया जाएगा। साथ ही उज्जैन-जावरा फोरलेन निर्माण से इंदौर को बड़ा फायदा होगा। मुंबई-दिल्ली कॉरिडोर से जुड़ेगा उज्जैन-जावरा फोरलेन उज्जैन-जावरा 4-लेन के बनने से उज्जैन, इन्दौर और उसके आसपास के क्षेत्र मुम्बई-दिल्ली 8-लेन कॉरिडोर से जुड़ जाएंगे। उज्जैन-इन्दौर सिक्स लेन का 1 हजार 692 करोड़ की अनुमानित लागत से भूमि पूजन हो चुका है। भोपाल, देवास, ग्वालियर, जबलपुर, सतना और इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण प्रगति पर है। नगरीय विकास के लिए 18 हजार 715 करोड़ प्रस्तावित सिंहस्थ क्षेत्र में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। सिंहस्थ का आयोजन साल 2028 में किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 2 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान प्रस्तावित है। नगरीय विकास के लिए साल 2025-26 के लिए 18 हजार 715 करोड़ रुपए का प्रावधान प्रस्तावित है। जो साल 2024-25 से 2 हजार करोड़ रुपए ज्यादा है। एमपी में इन जिलों से गुजरता है दिल्ली-मुबंई आठ लेन दिल्ली-मुबंई 8 लेन कॉरिडोर झाबुआ के तलावड़ा से महूड़ी का माल से एक्सप्रेस-वे रतलाम में प्रवेश कर रावटी, सैलाना, पिपलौदा, व जावरा के कुम्हारी होकर मंदसौर के लसुड़िया से मंदसौर जिले में जाता है। रतलाम जिले के 87 गांवों से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे होकर गुजरता है। एक्सप्रेस-वे के जरिए गरोठ में शामगढ़ रोड और भानपुरा में नीमथुर से एंट्री कर सकेंगे। मंदसौर जिले से एक एंट्री सीतामऊ से भी मिलेगी। गरोठ और जावरा में लॉजिस्टिक हब बनाया जाएगा। साथ ही बसई के पास की जमीन पर उद्योग लगाए जाएंगे।

मध्यप्रदेश में सड़कों का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा, बजट में लोक निर्माण कार्य के लिए 2500 करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान

भोपाल  मध्यप्रदेश में सड़कों का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है। बड़े स्तर पर चल रही सड़क परियोजनाओं का उद्देश्य केवल सड़कों और राजमार्गों का निर्माण ही नहीं, बल्कि राज्य के हर नागरिक के जीवन को सरल और समृद्ध बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे है। केन्द्र द्वारा लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में स्थायी आधारभूत संरचना विकसित होगी।  आज मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने अपना दूसरा पूर्ण बजट पेश किया है। विधानसभा में उप मुख्यमंत्री और प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा बजट पेश किया गया। इस बजट में लोक निर्माण कार्य के लिए 2500 करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान मिला है। जिसके तहत एमपी के गांव-शहर और तहसीलों में सड़कों का निर्माण किया जाएगा। कितना मिला बजट -ग्रामीण सड़कों एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण/उन्नयन के अंतर्गत 2500 करोड़ रुपए का प्रावधान -म.प्र. सड़क विकास निगम (एन.डी.बी.) के अंतर्गत 1450 करोड़ रुपए का प्रावधान -मध्यप्रदेश सड़क विकास कार्यक्रम (ए.डी.बी.) के अंतर्गत 1315 करोड़ रुपए का प्रावधान -केन्द्रीय सड़क निधि के अंतर्गत 1150 करोड़ रुपए का प्रावधान -वृहद पुलों का निर्माण के अंतर्गत 1000 करोड़ रुपए का प्रावधान -सड़कों का सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत 1000 करोड़ रुपए का प्रावधान -अनुरक्षण और मरम्मत – साधारण मरम्मत के अंतर्गत 836 करोड़ रुपए का प्रावधान -एन्यूटी के अंतर्गत 825 करोड़ रुपए का प्रावधान -सड़क एवं सेतु हेतु संधारण कार्य के अंतर्गत 525 करोड़ रुपए का प्रावधान -मुख्य जिला मार्गो तथा अन्य का नवीनीकरण, उन्नतीकरण एवं डामरीकरण के अंतर्गत 500 करोड़ रुपए का प्रावधान संभागीय कार्यालय स्थापना के अंतर्गत 350 करोड़ रुपए का प्रावधान -नवीन ग्रामीण एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण/उन्नयन के अंतर्गत 350 करोड़ रुपए का प्रावधान -म.प्र. सड़क विकास निगम के माध्यम से सड़कों का निर्माण के अंतर्गत 200 करोड़ रुपए का प्रावधान -एफ टाईप एवं उससे नीचे की श्रेणी के शासकीय आवासों का अनुरक्षण के अंतर्गत 200 करोड़ रुपए का प्रावधान -मुख्य जिला मार्गों का निर्माण/उन्नयन के अंतर्गत 200 करोड़ रुपए का प्रावधान -एन.डी.बी. से वित्त पोषण (पुल निर्माण) के अंतर्गत 150 करोड़ का प्रावधान

MP को जल्द मिलेगा पहला फ्लोटिंग रोड, सफर बनेगा सुहाना ! रायसेन-सागर के बीच 9 किमी लंबा सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर अंतिम चरण में

रायसेन मध्यप्रदेश के रायसेन में पहले फ्लोटिंग रोड के निर्माण को जल्द पूरा होने वाला है। ये बेगमगंज (रायसेन) से राहतगढ़ (सागर) को जोड़ने वाला मार्ग जल्द ही प्रदेश के प्रमुख मार्गों में गिना जाएगा, जहां 9 किमी लंबा सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर बन रहा है। यह कॉरिडोर केवल सफर को आसान नहीं बनाएगा, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक रोमांचक अनुभव लेकर आएगा। जंगलों और पहाड़ियों से घिरे इस क्षेत्र में अब सड़क यात्रा किसी टूरिस्ट डेस्टिनेशन से कम नहीं होगी।  डूब क्षेत्र में तकनीक का कमाल, 120 करोड़ की लागत से बन रहा फ्लोटिंग रोड मढ़िया बांध के कारण रायसेन-सागर रोड का एक हिस्सा डूब में आ रहा था। इसी समस्या को हल करने के लिए MPRDC (मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम) ने 120 करोड़ रुपए की लागत से फ्लोटिंग रोड और चार बड़े फ्लाईओवर का निर्माण शुरू किया। यह सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर बांध के पानी के ऊपर से गुजरेगा, जिससे यात्रियों को एक अनोखा सफर मिलेगा और इलाके की कनेक्टिविटी भी बरकरार रहेगी। टूरिज्म को मिलेगा बड़ा बूस्ट, बनेगा नया सेल्फी प्वाइंट! राहतगढ़ पहले से ही अपने खूबसूरत झरने और प्राकृतिक नजारों के लिए प्रसिद्ध है। अब जब यह नई सड़क जंगल, पहाड़ियों और डैम के बीच से गुजरेगी, तो यह इलाका पर्यटन का नया केंद्र बन सकता है।  सेल्फी प्वाइंट और व्यूइंग डेक बनाने की योजना  पर्यटकों के लिए फूड कोर्ट और रेस्ट एरिया विकसित किए जाएंगे  स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे परियोजना से प्रभावित गांवों की स्थिति इस प्रोजेक्ट के चलते रायसेन जिले के 14 गांव पूरी तरह और 42 गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आएंगे। प्रशासन ने प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास और मुआवजे के लिए योजना बनाई है, जिससे किसी को नुकसान न हो। पर्यटन को मिलेगा नया जीवन राहतगढ़ का वॉटरफॉल पहले से ही इस क्षेत्र का बड़ा आकर्षण रहा है, जहां मानसून के दौरान हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। अब जब यह नया कॉरिडोर जंगल, पहाड़ियों और डैम के पानी के बीच से होकर गुजरेगा, तो यह जगह और भी शानदार दिखेगी। यहां पर्यटकों के लिए सेल्फी प्वाइंट और अन्य सुविधाएं विकसित करने की भी योजना बनाई जा रही है। परियोजना के कारण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। कॉरिडोर के आसपास पर्यटन केंद्र और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है, जिससे स्थानीय लोगों को फायदा होगा। डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों की स्थिति इस परियोजना के कारण रायसेन जिले के 14 गांव पूरी तरह और 42 गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आएंगे। इनमें चंदामाऊ और ककरुआ बरामद गढ़ी पूरी तरह से जलमग्न होंगे। हालांकि, प्रशासन ने प्रभावित किसानों और ग्रामीणों के लिए मुआवजा योजना तैयार की है, जिसका वितरण जल्द शुरू किया जाएगा। जल्द पूरा होगा निर्माण कार्य कॉरिडोर और लाई ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है। एमपीआरडीसी के जीएम सोनल सिन्हा के अनुसार, ठेकेदार को मई तक कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं और इसकी सतत समीक्षा हो रही है। प्रयास यही है कि बारिश से पहले कार्य पूरा हो जाए, जिससे आगामी मानसून में यह क्षेत्र पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार हो सके। बारिश से पहले पूरा होगा निर्माण, जल्द खुलेगा ट्रैफिक के लिए MPRDC के जीएम सोनल सिन्हा के अनुसार, ठेकेदार को मई 2025 तक निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कोशिश यह है कि मानसून से पहले यह शानदार सड़क चालू हो जाए, ताकि पर्यटक और स्थानीय लोग इसका पूरा लाभ उठा सकें। फ्लोटिंग रोड: सफर नहीं, एक अनोखा अनुभव! मध्यप्रदेश में यह अपनी तरह की पहली सड़क होगी, जहां सफर करते हुए लोग महसूस करेंगे कि वे पानी के ऊपर चल रहे हैं। यह सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि प्रदेश के पर्यटन और विकास की नई पहचान बनने जा रहा है। अब सफर सिर्फ मंजिल तक पहुंचने के लिए नहीं, बल्कि उसे जीने के लिए होगा!

इंदौर की तरफ से छह लेन सड़क का काम शुरू, सिंहस्थ के समय मिलेगी ट्रैफिक मेें राहत

इंदौर इंदौर से उज्जैन के बीच 50 किलोमीटर लंबाई में छह लेन सड़क का काम शुरू हो चुका है। अब इंदौर शहर की सीमा में भी छह लेन के हिसाब से सड़क के बेस के लिए काम चल रहा है। सांवेर के समीप पुरानी पुलिया को भी चौड़ा करने के लिए शेड लगा दिए गए है। ज्यादातर काम सड़क निर्माण कंपनी रात के समय कर रही है,क्योकि तब ट्रैफिक कम रहता हैै। इंदौर मेें अरविंदो अस्प्ताल से सड़क बनेगी,क्योकि यहां तक छह लेन ब्रिज की भुजा उतरेगी। छह लेन सड़क बनने के बाद 50 किलोमीटर की दूरी 40 से 50 मिनट में तय हो जाएगी। फोरलेन को छह लेन करने में सरकार को ज्यादा परेशानी नहीं आएगी,क्योकि दस साल पहले जब सड़क फोरलेन की गई थी। तब छह लेन के हिसाब से जमीन का अधिगृहण कर लिया था। चार गांवों में बाधक निर्माणों को तोड़ा जाएगा। यह सड़क उज्जैन में महाकाल गेट तक बनेगी। फिलहाल सांवेेर,रिंगनोद, निनौरा मेें काम तेजी से चल रहा है। उज्जैन की सीमा पर भी फोरलेन के दोनो तरफ एक-एक लेन के लिए खुदाई कर जमीन को समतल किया जा रहा है। यहां र्मुरम भी बिछाई जा रही है। ढाई साल मेें काम पूरा होगा   इस सड़क के निर्माण पर डेढ़ हजार करोड़ रुपये सरकार खर्च कर रही है। इस मार्ग पर तीन बड़े ब्रिज और छह अंडरपास बनाए जाएंगे। चार माह पहले राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने इस प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया था। इस प्रोजेक्ट का निर्माण वर्ष 2028 में होगा। उसके बाद उज्जैन में सिंहस्थ मेला लगेगा। तब इंदौर से उज्जैन के लिए एक लाख से अधिक वाहनों की आवाजाही होगी। उस ट्रैफिक के लिए छह लेन सड़क मददगार साबित होगी। अभी इंदौर से उज्जैन के बीच 25 हजार वाहनों की आवाजाही होती है। इस सड़क के अलावा पीडब्लूडी हातोद, चंद्रवतीगंज से उज्जैन तक फोरलेन सड़क बनाएगा। यह सड़क चिंतामण गणेश मंदिर तक बनेगी। उसके निर्माण से उज्जैन के लिए एक और रुट मिल जाएगा। देवास से भी उज्जैन के बीच भी सड़क को फोरलेन किया जा रहा है।    

रीवा राजमार्ग पर महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से प्रयागराज जाने वाले यात्रियों का दबाव

 रीवा सड़क मार्ग से प्रयागराज जाने के लिए सबसे ज्यादा ट्रैफिक रीवा की तरफ के राष्ट्रीय राजमार्ग पर मिल रहा है। रीवा से प्रयागराज की दूरी 133 किलोमीटर है,लेकिन उसे तय करने में पांच से सात घंटे लग रहे है। वाहनों की एंट्री तो शुरू हो गई, लेकिन वाहनों को स्पीड ज्यादा नहीं मिल रही है। रीवा वाले रुट पर महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से प्रयागराज जाने वाले यात्रियों का दबाव है। प्रयाग राज जाने वाले कई यात्री ट्रेन से रीवा आ रहे, फिर यहां से टैक्सी किराए पर लेकर प्रयागराज जा रहे है। कैब टैक्सी छह से आठ हजार रुपये में प्रयागराज की ट्रीप करा रही है, लेकिन ट्रैफिक जाम होने पर यात्रियों को ज्यादा कीमत भी चुकाना पड़ रही है। ट्रेवल एजेंसी संचालक फरीद खान का कहना है कि शाम से ट्रैफिक तो बहाल हो गया, लेकिन बीच-बीच में ट्रैफिक जाम मिल रहा है। 130 किलोमीटर की दूरी पांच घंटे में तय हो रही है। इतना ही समय प्रयागराज से आने में लग रहा है। प्रयागराज बाइपास से यदि वाहन भीतर ले जाते है तो समय और ज्यादा लगता है। इस कारण यात्रियों को हम बाइपास पर उतार कर इंतजार करते है। कई लोग ट्रैफिक से बचने के लिए चित्रकूट के घने जंगल वाले सिंगल रोड को भी अपना रहे है। सतना, मणिकपुर से मिल रही मेला स्पेशल ट्रेन प्रयागराज तक जाने के लिए रेल विभाग ने 300 से ज्यादा मेला स्पेशल ट्रेन चलाई है। मध्य प्रदेश के यात्रियों को सतना, झांसी, कटनी से प्रयागराज तक के लिए रेल गाड़ी मिल रही है, हालांकि ट्रेनों में भीड़ भी मिल रही है, लेकिन कोशिशों के बाद ट्रेनों में यात्रियों को जगह भी मिल रही है।  

उज्जैन शहर की सड़कें चौड़ी करने में 50 से ज्यादा धर्मस्थल प्रभावित होंगे

उज्जैन एमपी में सड़कें चौड़ी करने का काम किया जा रहा है। उज्जैन में तो इसके लिए बाकायदा अभियान चलाया जा रहा है। सड़क चौड़ी करने के लिए यहां पहली बड़ी कार्रवाई जब रास्ते में आ रहे एक स्कूल को मार्ग से हटाया गया। अब धर्मस्थल को शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। शहर भर की सड़कें चौड़ी की जानी है जिसमें 50 से ज्यादा धर्मस्थल प्रभावित होंगे। सड़कें चौड़ी करने के लिए ऐसे धर्मस्थलों को भी पीछे हटाया जाएगा। उज्जैन में 2028 में आयोजित सिंहस्थ यानि कुंभ मेले के लिए ये कवायद की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार धर्मस्थलों के बढ़े हिस्से को हटाया जाएगा या फिर कहीं ओर शिफ्ट भी किया जा सकता है।  उज्जैन में हो रहे रोड निर्माण और चौड़ीकरण के काम में पहली बड़ी कार्रवाई हुई है। कोठी रोड रोड से उद्योगपुरी की ओर मार्ग में आ रहे एक सरकारी स्कूल को शिफ्ट किया गया है। इसी के साथ स्कूल को तोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। वहीं रास्ते में आने वाले एक धर्मस्थल को भी पीछे किए जाने की कार्रवाई होगी। नगर निगम द्वारा प्रशासनिक संकुल भवन के पास से सड़क को 18 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। निगम ने यह काम भी शुरू कर दिया है। रास्ते में शासकीय प्राथमिक विद्यालय कोठी रोड का भवन और इसी के आगे एक धर्मस्थल भी आ रहा है। दोनों को हटाए बिना रोड चौड़ी करना संभव नहीं है। लिहाजा पहली कार्रवाई करते हुए शासकीय स्कूल को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई है। कलेक्टर नीरजकुमार सिंह ने सरकारी स्कूल को हटाते हुए शासकीय प्राथमिक विद्यालय गांधीनगर में शिफ्ट करने के आदेश जारी किए हैं। कलेक्टर के आदेश के बाद निगम की ओर से स्कूल भवन तोडऩे की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। अगले दिनों में मार्ग में आ रहे धर्मस्थल को भी पीछे करने की कार्रवाई भी होगी। एक-दो दिन में होगा फैसला बताते हैं कि मार्ग में आने वाले धर्मस्थल को लेकर एक-दो दिन में निर्णय लिया जाएगा। निगम व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा धर्मस्थल से जुड़े स्टेक होल्डर से चर्चा भी कर ली गई है। अधिकारी बता रहे हैं कि जितना धर्मस्थल है, उससे ज्यादा निर्माण कर लिया गया है। ऐसे में धर्मस्थल के बढ़े हिस्से को हटाया जाएगा या फिर कहीं ओर शिफ्ट भी किया जा सकता है। 52 धर्मस्थल होंगे प्रभावित शहर की सड़क चौड़ी करने के काम में मार्ग में बने करीब 52 धर्मस्थल प्रभावित होंगे। इसमें गाड़ी अड्डा से निकास चौराहा व केडी गेट होते हुए बड़ी पुलिया तक 19 धर्मस्थल, खजूरवाली मस्जिद से जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक 10, वीडी क्लॉथ मार्केट से दानीगेट होते हुए छोटी पुलिया तक 11, कोयलाफाटक से सतीगेट होते हुए गोपाल मंदिर तक 11, निकास चौराहे से कंठाल चौराहे तक 02 तथा गदा पुलिया से रविशंकर नगर होते हुए लालपुल तक 5 धर्मस्थल शामिल हैं। अगले दिनों में प्रशासनिक अधिकारी स्टेक होल्डर से चर्चा कर उचित निर्णय लेंगे। नगर निगम के कार्यपालन यंत्री पीयूष भार्गव बताते हैं कि कोठी रोड पर चौड़े किए जा रहे मार्ग में आ रहे सरकारी स्कूल को तोड़ा जा रहा है। इसे शिफ्ट करने के आदेश कलेक्टर ने जारी कर दिए है। धर्मस्थल को लेकर भी चर्चा की जा रही है।

इंदौर में मास्टर प्लान की 23 सड़कें बनेगी, 8 पर पहले फोकस

इंदौर  मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में निगमायुक्त शिवम वर्मा ने स्मार्ट सिटी कार्यालय में मास्टर प्लान के पहले चरण में बनने वाली 8 सड़कों के निर्माण कार्य की समीक्षा की। इस दौरान अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर, अधीक्षण यंत्री डीआर लोधी मौजूद रहे। वर्मा ने बताया कि मास्टर प्लान के तहत 23 सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है।  बिचौली हप्सी से भूरी टेकरी होते हुए नायता मुंडला तक का कार्य जारी है। प्रथम चरण में 8 सड़कों के लिए सेंट्रल लाइन डालने, नोटिस जारी करने संबंधी कार्य इस सप्ताह से शुरू कर दिए जाएंगे। इसके अलावा देवगुराडिया स्थित 500 टीडीपी बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 800 टीडीपी करने, प्लांट के लिए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने, इस प्लांट के अत्याधुनिकरण करने, मुख्य मार्गों की सफाई के लिए रोड स्वीपिंग मशीनें खरीदने को लेकर चर्चा हुई। 450 करोड़ रुपये खर्च होंगे महापौर ने बताया कि इन सड़कों के निर्माण पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह पैसा केंद्र सरकार ने पहले ही इंदौर नगर निगम के खाते में ट्रांसफर कर दिया है। हमने केंद्र सरकार से 14 अन्य सड़कों के लिए भी 400 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की है। हम इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजेंगे। इन 8 सड़कों का होगा काम -सुभाष मार्ग (गोल मंदिर से रामबाग पुल तक): लंबाई 1300 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -लिंक रोड (एमआर-10 से एमआर-12 तक): लंबाई 1800 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -एमआर-5 (बड़ा बांगड़दा से पीएमएवाय मल्टी तक): लंबाई 1700 मीटर, चौड़ाई 24 मीटर। -भमोरी चौराहे से एमआर-10 व राजशाही गार्डन से होटल वॉच तक: लंबाई 1100 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -वीर सावरकर प्रतिमा से अटल गेट तक: लंबाई 1310 मीटर, चौड़ाई 18 मीटर। एडवांस एकेडमी से रिंग रोड तक: लंबाई 3650 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। जमजम चौराहे से स्टार चौराहा तक: लंबाई 1920 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। खजराना मंदिर द्वार से जमजम चौराहा तक: लंबाई 1120 मीटर, चौड़ाई 18 मीटर। बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ेगी, अतिरिक्त जमीन भी देंगे बैठक में एशिया के सबसे बड़े 500 टीडीपी क्षमता वाले बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 800 टीडीपी करने और इस प्लांट को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने, प्लांट के लिए अतिरिक्त जमीन देने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। 24 मीटर या इससे चौड़ी सड़क पर बेच सकेंगे टीडीआर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि बैठक में टीडीआर सर्टिफिकेट पोर्टल के माध्यम से जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। मास्टर प्लान की 23 सड़कों सहित अन्य सड़कें जहां नगर निगम ने चौड़ीकरण के लिए निजी जमीन ली है, वहां जमीन मालिकों को ट्रांसफरेबल डेवलमेंट राइट्स (टीडीआर) सर्टिफिटेक जारी किए जाएंगे।

निमाड़ के विकास में आएगी बहार, एनएचएआई ने जारी किया गजट नोटिफिकेशन

 खंडवा महाराष्ट्र और गुजरात को जोड़ने के लिए एनएच 347 प्रस्तावित किया गया है। जिसके निर्माण की शुरुआत मध्यप्रदेश के खंडवा जिले से हो चुकी है। एनएचआई के द्वारा गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। जिसके चलते अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत खंडवा से खरगोन के लिए फोरलेन प्रस्तावित है। इसके बाद वहां से गुजरात सीधा जुड़ जाएगा। एनएचएआई ने जारी किया गजट नोटिफिकेशन एनएचएआई (NHAI) की परियोजना क्रियान्वयन ईकाई, खंडवा से जारी पत्र के अनुसार, भूमि अधिग्रहण से संबंधित धारा 3-ए की अधिसूचना को भारत सरकार के राजपत्र में 23 जनवरी 2025 को प्रकाशित कर दिया है। इसी के तहत प्रभावित क्षेत्रों की जमीन को अधिग्रहण के लिए चिन्हित कर लिया गया है। इससे प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों को 21 दिन के अंदर आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया गया है। निमाड़ के विकास में आएगी बहार नेशनल हाईवे 347 के चौड़ीकरण से यातायात आर्थिक और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। इस कार्य के पूरे होने पर खंडवा, भीकनगांव से लेकर खरगोन के ग्रामीण इलाकों तक बेहतर रोड कनेक्टिविटी हो जाएगी। जिससे परिवहन की सुविधाओं के साथ-साथ औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। प्रक्रिया के पूरा होते ही नेशनल हाईवे का निर्माण शुरु हो जाएगा। इसके लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग को निर्देश दे दिए गए हैं कि जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में किसी प्रकार की कोई बाधा न आए। साथ ही किसानों का ध्यान रखते हुए उचित मुआवजे की व्यवस्था की जाए।

प्रदेश में बिछेगा सड़कों का जाल, NH के लिए नितिन गड़करी ने दी 414 करोड़ रुपए की सौगात

भोपाल  मध्यप्रदेश के विकास को गति प्रदान करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 414 करोड़ 84 लाख रुपए मंजूर किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और उन्नयन के लिए दी गई स्वीकृति के लिए आभार माना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माना आभार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस स्वीकृति से सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन के महत्वपूर्ण कार्य होंगे। निश्चित ही शिवपुरी और अशोक नगर के साथ अन्य जिलों को भी इसका लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश के विकास को गति मिलेगी और नागरिकों को सुगम यातायात सुविधा मिल जाएगी। 414 करोड़ 84 लाख रुपए की दी स्वीकृति उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश के शिवपुरी और अशोक नगर जिलों में चंदेरी, बामोर कलां, अचरोनी और चंदेरी लिंक बायपास सहित राष्ट्रीय राजमार्ग-346 के खंड (कुल लंबाई 55.80 किमी) चंदेरी-पिछोर रोड के पेव्ड शोल्डर के साथ 2-लेन के उन्नयन और निर्माण के लिए 414 करोड़ 84 लाख रुपए की स्वीकृति दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग-346 (कुल लंबाई 334.55 किलोमीटर) झारखेड़ा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-46 आगरा के साथ अपने जंक्शन से शुरू होता है मुंबई रोजड जो बैरसिया (SH-23), विदिशा (NH-86 एक्सटेंशन), कुरवाई (SH-14), मुंगावली, चंदेरी, पिछोर को जोड़ता है और राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर दिनारा में समाप्त होता है। MP-UP Inter-State Connectivity होगी प्रस्तावित परियोजना का विस्तार प्रदेश के शिवपुरी और अशोक नगर जिलों से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में ऐतिहासिक चंदेरी किला और स्थानीय वस्त्र शिल्प कला केंद्र अशोक नगर जिले में स्थित हैं। यह खंड चंदेरी, गोधन, बुढ़ानपुर, बिजरावां, नया गांव, पिपरा अछरौनी, शिवपुरी, हीरापुर, नायगांव और सुजवाहा गांवों से होकर गुजरता है और उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश से अंतर्राज्यीय-कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करता है। पहले भी साढ़े 3 हजार करोड़ रुपए हुए है मंजूर परियोजना के क्रियान्वयन से इस खंड पर यातायात सघनता कम होगी और सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा। उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के निर्माण और सुदृढ़ीकरण के लिए साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई और एक महत्वपूर्ण स्वीकृति भोपाल-कानपुर इकोनामिक कॉरीडोर को फोरलेन में अपग्रेड करने के लिए भी प्रदान की जा चुकी है।

जून 2025 तक पूरा हो जायेगा सड़क निर्माण का पहला चरण, बनेंगी 1284.29 किमी लम्बी 1035 सड़कें

भोपाल गांव-गांव तक पहुंच सड़क प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) में केन्द्र सरकार प्रदेश के 24 जिलों में निवासरत 3 विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की सभी बसाहटों तक एप्रोच रोड तैयार कर रही हैं। केन्द्र सरकार द्वारा पीएम जन-मन में प्रदेश की चिन्हित कुल 1295 पीवीटीजी बसाहटों में कुल 1284.29 किलोमीटर लम्बाई वाली 1035 सड़कें मंजूर की गई है। गांव-गांव तक कुल 1050 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाली इन सम्पर्क सड़कों का निर्माण कार्य 5 चरणों में पूरा किया जायेगा। पहला चरण जून 2025 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य तय किया गया है। पहले चरण में 235 करोड़ रूपये की लागत से 295 किमी लम्बी 125 सड़कें बनाई जा रही है। इन पर काम तेजी से जारी है। पहले चरण के ही दूसरे भाग में 150.72 करोड़ रूपये की लागत से 180.29 किमी लम्बी 40 सड़कें बनाई जानीं है। इनके लिये निर्माण एजेंसी तय कर दी गई हैं। दूसरे चरण में 112.69 करोड़ रूपये लागत से 152 किमी लम्बी 60 सड़कें बनाई जायेंगी। तीसरे चरण 162 करोड़ रूपये की लागत से 216 किमी लम्बी 86 सड़कें निर्मित की जायेंगी। चौथे चरण में 187.74 करोड़ रूपये से 254 किमी लम्बी 97 सड़कें तथा 5वें चरण में 801 करोड़ रूपये लागत से 1187 किमी लम्बाई वाली 627 सड़कें तैयार की जायेंगी। पीएम जन-मन अभियान में सभी गांव-गांव पहुंच सड़़कें प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ाभागके अधीन निर्माण एजेंसी मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (एमपी आरआरडीए) द्वारा बनाई जायेंगी। निर्माण एजेंसी एमपी आरआरडीए द्वारा पहले चरण में मंजूर हुईं। सभी सड़कें जून 2025 तक निर्मित कर लेने के लिये तेजी से कार्य किया जा रहा है। दूसरे, तीसरे, चौथे एवं 5वें चरण में स्वीकृत सड़कों का निर्माण कार्य भी हर हाल में वर्ष 2025 के अंत तक पूरा कर लेने के लिये निर्माण एजेंसी ने ठोस तैयारी कर ली है।

एमपी में व्हाइट टॉपिंग तकनीक बनेगी, बढ़ेगी सड़कों की उम्र, चार महीनों के अंदर काम खत्म करने का रखा टारगेट

भोपाल  मध्य प्रदेश में जल्द ही सड़कें और मजबूत बनेंगी। पीडब्ल्यूडी खराब सड़कों की समस्या से निपटने के लिए व्हाइट टॉपिंग तकनीक अपना रहा है। इस तकनीक से बनी सड़कें ज़्यादा टिकाऊ होती हैं और लंबे समय तक चलती हैं। शुरुआत में 21 जिलों की 41 सड़कों पर इस तकनीक का इस्तेमाल होगा। काम इसी महीने शुरू हो जाएगा और चार महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे बारिश में सड़कों के उखड़ने की समस्या से निजात मिलेगी। लोक निर्माण विभाग ने खराब सड़कों की बढ़ती शिकायतों के बाद यह कदम उठाया है। बारिश में सड़कें टूटने से लोगों को काफी परेशानी होती है। व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनी सड़कें इस समस्या का समाधान करेंगी। इस तकनीक से करीब 108 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जाएंगी। प्रोजेक्ट नवंबर अंत तक शुरू होकर अगले चार महीनों में पूरा हो जाएगा। सड़क निर्माण में नई क्रांति व्हाइट टॉपिंग तकनीक सड़क निर्माण में एक नया मोड़ है। यह तकनीक सड़कों को मजबूत और टिकाऊ बनाती है। इससे सड़कों का रखरखाव भी आसान हो जाता है। यह तकनीक लंबे समय में पैसा भी बचाती है। सरकार का यह कदम प्रदेश की सड़कों की दशा सुधारने में मददगार साबित होगा। इससे लोगों को आवागमन में सुविधा होगी और राज्य के विकास को गति मिलेगी। यह तकनीक भविष्य में सड़क निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है। यह सड़कों को गर्मी से बचाती है. इससे शहरों का तापमान भी कम रहता है। व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बेहतर सड़कें और बेहतर भविष्य की उम्मीद है। लोगों को मिलेगा बेहतर यात्रा का अनुभव भोपाल में वल्लभ भवन मार्ग और सीएम हाउस मार्ग समेत 14 सड़कों को चिह्नित किया गया है। PWD ने 15 अन्य जिलों में भी एक-एक सड़क पर इस तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इन जिलों में इंदौर, नर्मदापुरम, नीमच, बैतूल से लेकर मुरैना, रतलाम, रायसेन, रीवा, सतना,आगर मालवा, उमरिया, खंडवा, गुना, छतरपुर, देवास और हरदा शामिल हैं। इससे इन जिलों की सड़कों की हालत में सुधार होगा। लोगों को बेहतर यात्रा का अनुभव मिलेगा। जानें क्या है व्हाइट टॉपिंग तकनीक व्हाइट टॉपिंग तकनीक में पुरानी सड़क की ऊपरी परत हटाकर कंक्रीट की मोटी परत बिछाई जाती है। इसमें M-40 ग्रेड सीमेंट और फाइबर बुरादा का इस्तेमाल होता है। 6 से 8 इंच मोटी यह परत सड़क को मजबूत बनाती है। भारी ट्रैफ़िक और खराब मौसम का भी इस पर कम असर होता है। इससे सड़क की उम्र 20 से 25 साल तक बढ़ जाती है। यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल भी है। कंक्रीट की सतह डामर से ज़्यादा ठंडी रहती है। इससे रखरखाव का खर्च भी कम आता है।

पायलट प्रोजेक्ट के तहत 21 जिलों में 41 सड़कें और नई तकनीक से बनेंगी

 भोपाल मध्य प्रदेश में सड़कों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसके तहत राज्य के 21 जिलों में 41 मार्गों का निर्माण नई तकनीक से होगा। इन मार्गों की कुल लंबाई 109.31 किलोमीटर है और इन्हें चार महीने में पूरा किया जाएगा। मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने अब सड़क निर्माण की नई तकनीक व्हाइट टॉपिंग को अपनाने का निर्णय लिया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस दिशा में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 21 जिलों में चयनित 41 सड़कों पर इस तकनीक को लागू किया जाएगा। इन मार्गों की कुल लंबाई 109.31 किलोमीटर है। योजना को नवंबर के अंत तक शुरू करने की तैयारी है और इसे अगले 4 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना के तहत सबसे अधिक 14 सड़कों पर कार्य भोपाल में किया जाएगा। अन्य जिलों में इंदौर और ग्वालियर में तीन-तीन सड़कें, बुरहानपुर, मंदसौर और सागर में दो-दो सड़कें, आगर मालवा, उमरिया, खंडवा, गुना, छतरपुर, देवास, नर्मदापुरम, नीमच, बैतूल, मुरैना, रतलाम, रायसेन, रीवा, सतना और हरदा में एक-एक सड़क पर वाइट टॉपिंग तकनीक लागू की जाएगी। क्या है वाइट टॉपिंग तकनीक वाइट टॉपिंग सड़क निर्माण की एक आधुनिक तकनीक है। इसमें पुरानी सड़कों पर कंक्रीट की मोटी परत चढ़ाई जाती है। यह प्रक्रिया सड़कों को न केवल मजबूत और टिकाऊ बनाती है, बल्कि उनकी आयु भी 20 से 25 साल तक बढ़ा देती है। इस तकनीक में सबसे पहले पुरानी सड़क की सतह को साफ किया जाता है। उसके बाद 6 से 8 इंच मोटी कंक्रीट की परत डाली जाती है, जो भारी यातायात और खराब मौसम का सामना करने में सक्षम होती है।

भारतीय सड़क कांग्रेस और लोक निर्माण विभाग के सहयोग से शिविर का आयोजन

भोपाल सड़क और पुल निर्माण के क्षेत्र में उभरती नवीनतम प्रवृत्तियों और तकनीकों पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन रवीन्द्र भवन भोपाल में 19 और 20 अक्टूबर को किया जा रहा है। इसमें सड़क और पुल निर्माण की नवीनतम तकनीकों, सामग्रियों और अनुबंध निष्पादन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) और मध्यप्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सहयोग से होगा। सेमिनार के पहले दिन 19 अक्टूबर को उद्घाटन-सत्र में केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गड़करी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, लोकनिर्माण मंत्री राकेश सिंह सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन सत्र के बाद विभिन्न तकनीकी-सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देशभर से आए हुए विशेषज्ञ नई तकनीकों, निर्माण सामग्रियों और ईपीसी(EPC इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन)) अनुबंध निष्पादन की चुनौतियों पर अपने विचार साझा करेंगे। पहले दिन की प्रमुख चर्चाओं में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नई तकनीकों का कार्यान्वयन, पुल निर्माण में नई मशीनरी का उपयोग, और सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली नई सामग्रियों पर फोकस रहेगा। सड़क सुरक्षा, परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए आईटी तकनीकों का उपयोग, और सीमांत सामग्रियों के उपयोग पर भी गहन मंथन किया जाएगा। दूसरे दिन 20 अक्टूबर को ईपीसी (EPC इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन)) अनुबंधों की संरचना शेड्यूलिंग, अनुबंध निष्पादन में ठेकेदारों की भूमिका और सहायक अभियंताओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा होगी। इसमें अनुबंधों से जुड़े विवादों और चुनौतियों के समाधान पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। समापन सत्र में विभिन्न विशेषज्ञ और प्रतिनिधि पैनल चर्चा के माध्यम से सड़क और पुल निर्माण में नई तकनीकों के उपयोग पर अपने विचार रखेंगे। सेमिनार का उद्देश्य प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता को सुधारने और नवीनतम तकनीकों के माध्यम से समयबद्ध और टिकाऊ अवसंरचना का विकास सुनिश्चित करना है। सरकारी और निजी क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर अनुभवों और नवाचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा, जिससे प्रदेश की अवसंरचना परियोजनाओं को नई दिशा और मजबूती मिल सके। इस दो दिवसीय आयोजन से मध्यप्रदेश के अवसंरचना विकास को नई ऊर्जा मिलेगी और यह आयोजन राज्य की निर्माण परियोजनाओं में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में सहायक साबित होगा।  

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