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विवादों में घिरीं डॉ. अरुणा कुमार बनी डीएमई, जूडा ने सीएम यादव को पत्र लिखकर नियुक्ति आदेश निरस्त करने की मांग

 भोपाल  डॉ. अरुणा कुमार को डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन (DME) बनाए जाने के फैसले ने एक बार फिर नया विवाद खड़ा कर दिया है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमटीए) ने इस नियुक्ति का विरोध करते हुए सरकार को 24 घंटे में आदेश निरस्त करने की चेतावनी दी है। दोनों संगठनों ने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं होने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी है। साथ ही सीएम डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर उनकी नियुक्ति आदेश निरस्त करने की मांग की है। डॉ. अरुणा पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने औऱ गाली गलौज करने आरोप लगे हैं। डॉ अरुणा कुमार का विवादों से पुराना नाता रहा है , दो बार उन्हें गांधी मेडिकल कॉलेज के गायनी डिपार्टमेंट के HOD पद से हटना भी पड़ा था। वहीं एक बार उन्हें डीन पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था। डॉ अरुणा कुमार को हटवाने के लिए मेडिकल टीचर्स डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला से भी मुलाकात कर चुके हैं। बीते सालों डॉ. अरुणा कुमार के कार्यकाल में एक महिला जूनियर डॉक्टर ने आत्महत्या की थी और आरोप लगाया था कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। आज डॉ अरुणा कुमार को पदस्थ करने के विरोध में गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के सभी चिकित्सक, जूनियर डॉक्टर्स आज दोपहर हमीदिया अस्पताल मर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस वजह से हटी थी डॉ अरुणा 31 जुलाई 2023 को गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की थर्ड ईयर पीजी स्टूडेंट बाला सरस्वती ने आत्महत्या कर ली थी। 27 वर्षीय मेडिकल स्टूडेंट ने एनेस्थीसिया इंजेक्शन का ओवरडोज लेकर जान दी थी। घटना के बाद जीएमसी परिसर में हड़कंप मच गया था। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जूडा) ने इस आत्महत्या के लिए डॉ. अरुणा कुमार को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया और उनके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हड़ताल पर चले गए थे। संगठन ने आरोप लगाया था कि छात्रा को थीसिस सबमिशन को लेकर लगातार मानसिक दबाव और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। जिसके बाद डॉ. अरुणा कुमार को जीएमसी से हटाकर डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) में स्थानांतरित कर दिया था, जहां से वे अब तक कार्यरत थीं। अब उसी डायरेक्टोरेट में उन्हें डायरेक्टर पद पर पदोन्नत किया गया है, जिससे एक बार फिर विरोध हो रहा है।

पिपरिया के 15 किसानों ने खेतों में नरवाई जलाई, प्रशासन ने सख्त,लगाया जुर्माना, दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू

उमरिया जिले के मानपुर जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिपरिया के 15 किसानों द्वारा खेतों में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जुर्माना लगाने के साथ ही अब दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस प्रकरण में जिला कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन को पहले ही आर्थिक दंड अधिरोपित किया गया था, जिसके बाद अब प्रशासन एफआईआर की कार्रवाई की ओर बढ़ गया है। शुक्रवार को तहसीलदार बरबसपुर सर्किल ने कोतवाली थाना उमरिया को पत्र सौंपते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 2023 की 223 के अंतर्गत दोषी किसानों पर दंडात्मक कार्रवाई करने का आवेदन प्रस्तुत किया। जारी पत्र में सभी 15 किसानों के नाम स्पष्ट रूप से उल्लिखित हैं, जिनके विरुद्ध यह कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। बताया जा रहा है कि यह कदम किसानों को भविष्य में इस प्रकार के पर्यावरण विरोधी कृत्य से रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। उल्लेखनीय है कि खेतों में नरवाई जलाने से वातावरण में अत्यधिक प्रदूषण फैलता है, जिससे न केवल हवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। इसके साथ ही भूमि की उर्वरता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। शासन द्वारा लगातार नरवाई न जलाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, बावजूद इसके कई क्षेत्रों में किसान इस निर्देश की अनदेखी कर रहे हैं। इस बीच, बांधवगढ़ तहसील के ग्राम महरोई में भी नरवाई जलाने की शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए तीन किसानों पर कुल साढ़े सात हजार रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया है। कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन द्वारा शुक्रवार की शाम जारी आदेश के अनुसार इन किसानों में केशरी पिता जग्गू लोहार, टीकाराम पिता कामता विश्वकर्मा और पुरुषोत्तम पिता उदयभान राठौर शामिल हैं। सभी पर ₹2500-₹2500 का आर्थिक दंड लगाया गया है। प्रशासन की इस सख्ती से क्षेत्र के अन्य किसानों में भी हड़कंप की स्थिति है। विभागीय सूत्रों का मानना है कि यह कार्रवाई आगे चलकर एक उदाहरण प्रस्तुत करेगी, जिससे अन्य किसान पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित होंगे। जिला प्रशासन ने एक बार फिर अपील की है कि किसान नरवाई जलाने से बचें और वैकल्पिक उपायों को अपनाएं, जिससे खेत की उपजाऊ क्षमता बनी रहे और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे।  

गोवा : लइराई देवी मंदिर में मची भगदड़, 7 की मौत, 40 से ज्यादा घायल, CM प्रमोद सावंत ने लिया हालात का जायजा

पणजी  गोवा के प्रसिद्ध लइराई देवी मंदिर में शनिवार को उस समय अफरातफरी मच गई जब पारंपरिक ‘शिरगांव जात्रा’ के दौरान भीड़ बेकाबू हो गई। भगदड़ में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। इस घटना में 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। नॉर्थ गोवा के पुलिस अधीक्षक अक्षत कौशल ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि भगदड़ के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है। बताया जा रहा है कि हर साल की तरह इस बार भी भारी संख्या में श्रद्धालु ‘शिरगांव जात्रा’ में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति बन गई।घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत खुद मौके पर पहुंचे और घायलों से मुलाकात की। बता दें कि गोवा के श्रीगांव को लेकर कई कहनियां प्रचलित हैं। लइराई देवी का मंदिर होने की वजह से यहां पर शराब और अंडा तक प्रतिबंधित है। कोई किसी जानवर की हत्या नहीं कर सकता। इस गांव में घोड़े भी प्रवेश नहीं कर सकते। बड़ी संख्या में लोग लइराई देवी के दर्शन करने पहुंचते हैं। लइराई देवी की पूजा मुख्य रूप से गोवा में की जाती है। यहां हर साल आयोजित होने वाले जात्रा को को शिरगांव जात्रा के नाम से भी जाना जाता है। यह जात्रा चैत्र मास में कई दिनों तक चलती है। इसमें लोग दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं। भक्त एक पवित्र झील में स्नान करते हैं। इससे पहले लोग व्रत और पूजा करते हैं। मंदिर से देवी की भव्य शोभा यात्रा निकाली जाती है। शिरगांव और लइराई देवी की मान्यता – लइराई देवी का मंदिर गोवा के श्रीगांव में स्थित है, जो अपनी पवित्रता और धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां शराब, अंडा और किसी भी जानवर की हत्या पर सख्त प्रतिबंध है। यहां तक कि घोड़ों का प्रवेश भी निषिद्ध है। ‘शिरगांव जात्रा’ चैत्र मास में आयोजित होती है और यह कई दिनों तक चलती है। इस आयोजन में श्रद्धालु दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं और एक पवित्र झील में स्नान करते हैं। इस दौरान व्रत, पूजा और देवी की भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाती है।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों से वर्चुअली जुड़े हितग्राहियों से बात भी की, आवास निर्माण के लिए पहली किस्त मिलने पर दी बधाई

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से पीड़ितों को जारी की प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त छत्तीसगढ़ के विशेष आग्रह पर केंद्र सरकार ने ऐसे परिवारों के लिए स्वीकृत किए हैं 15 हजार आवास कुल दस करोड़ रुपए आज हितग्राहियों के खातों में अंतरित, प्रथम किस्त के रूप में 2500 परिवारों को जारी किए गए 40-40 हजार रुपए मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों से वर्चुअली जुड़े हितग्राहियों से बात भी की, आवास निर्माण के लिए पहली किस्त मिलने पर दी बधाई रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित 2500 परिवारों के बैंक खातों में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की पहली किस्त की राशि अंतरित की। उन्होंने मंत्रालय में वर्चुअली आयोजित कार्यक्रम में आवास निर्माण की पहली किस्त प्रति परिवार 40-40 हजार रुपए के मान से कुल दस करोड़ रुपए हितग्राहियों के खातों में अंतरित किए। छत्तीसगढ़ के विशेष आग्रह पर केंद्र सरकार द्वारा राज्य के आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा भी कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न जिलों से मंत्रालय से वर्चुअली बड़ी संख्या में जुड़े हितग्राहियों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य शासन ने केंद्र सरकार से विशेष आग्रह कर आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए जो प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता की शर्तों में नहीं आ पा रहे थे, उनके लिए 15 हजार आवास स्वीकृत कराया है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने संवेदनशीलता और गंभीरता से हमारे निवेदन को मंजूरी दी और वंचित परिवारों के लिए भी आवास की व्यवस्था की। साय ने नक्सल प्रभावित दूरस्थ वनांचलों के लिए स्वीकृत इस विशेष परियोजना के हितग्राहियों की हौसला अफजाई करते हुए अच्छा मकान बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इसमें सरकार हर तरह की मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने नक्सली हिंसा के शिकार परिवारों से आत्मीयता से बातकर उनका हाल-चाल पूछा। उन्होंने घर-परिवार और उनके व्यवसाय की जानकारी ली। बातचीत के दौरान विभिन्न जिला मुख्यालयों से जुड़े हितग्राहियों ने पक्का आवास मिलने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया।    उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने भी हितग्राहियों को ऑनलाइन संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। आज 2500 ऐसे परिवारों को जो नक्सलवाद छोड़कर मुख्य धारा में लौट आए हैं या नक्सल हिंसा से पीड़ित हैं, उनके पक्के आवासों के निर्माण के लिए 40-40 हजार रुपए की पहली किस्त जारी की गई है। ये ऐसे परिवार हैं जो प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता में नहीं आ पा रहे थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में विभाग ने विशेष प्रयास कर भारत सरकार से ये आवास मंजूर कराए हैं। शर्मा ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद को समाप्त करने का अभियान अब अंतिम चरण में है। बस्तर के लोगों के मन से अब आतंक का डर हट जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मुख्य धारा में आएं। बस्तर की शांति और विकास के लिए यह जरूरी है। उन्होंने विशेष परियोजना के तहत हितग्राहियों के चिन्हांकन और इसे अमलीजामा पहनाने के लिए विभागीय अधिकारियों की पीठ थपथपाई और उन्हें धन्यवाद दिया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह ने कार्यक्रम में राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आवास निर्माण के लक्ष्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। योजना के अगले चरण के लिए हितग्राहियों के सर्वेक्षण का काम भी तेजी से चल रहा है। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सचिव पी. दयानंद, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक तारन प्रकाश सिन्हा सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारी भी राशि अंतरण कार्यक्रम में मौजूद थे। सुकमा के सर्वाधिक 809 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को मिली आवास की पहली किस्त, बीजापुर के 594 और नारायणपुर के 316 परिवार शामिल प्रधानमंत्री आवास योजना में विशेष परियोजना के तहत आज जिन 2500 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों के खातों में आवास निर्माण के लिए राशि अंतरित की गई, उनमें सर्वाधिक 809 परिवार सुकमा जिले के हैं। बीजापुर जिले के ऐसे 594, नारायणपुर के 316, बस्तर के 202, दंतेवाड़ा के 180, कोंडागांव के 166 और कांकेर के 138 परिवारों को आवास निर्माण के लिए राशि जारी की गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि उद्योग समागम का 3 मई को मंदसौर में करेंगे शुभारंभ

भोपाल कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी उन्नयन और कृषक कल्याण को समर्पित ‘कृषि उद्योग समागम-2025’ का 3 मई को मंदसौर में भव्य आयोजन होगा। एक दिवसीय समागम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, कृषि मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह, क्षेत्रीय सांसद, विधायकगण तथा प्रदेश भर से आए कृषक, उद्यमी, निर्यातक और एफपीओ प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। प्रमुख गतिविधियाँ कृषक सम्मेलन एवं विशेषज्ञ मार्गदर्शन: समागम में कृषि एवं उद्यानिकी के विशेषज्ञों द्वारा नवीनतम तकनीकों पर विस्तृत मार्गदर्शन किसानों और उद्यमियों को प्रदान किया जायेगा, जिसका लाभ वह अपने कृषि और खाद्य प्र-संस्करण इकाइयों को बेहतर बनाने में कर सकेंगे। नवीन कृषि तकनीकों का प्रदर्शन समागम स्थल पर देश के कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में आधुनिक यंत्रों, उपकरणों का उत्पादन करने वाली इकाइयों द्वारा स्टॉल लगाये जायेंगे। इनमें आधुनिक कृषि यंत्र ट्रैक्टर, हैप्पी सीडर, प्याज-लहसुन बुआई यंत्र, ड्रोन, एआई आधारित उपकरण, पॉवर स्प्रेयर, सूक्ष्म सिंचाई संयंत्र ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर, सेंसर-आधारित उर्वरक संयंत्र, कृषि एवं उद्यानिकी की नवीनतम एवं उन्नत किस्में, पॉली/नेट हाउस, मल्चिंग, पौंड लाइनिंग आदि, जैविक व नैनो फर्टिलाइज़र, कस्टमाइज्ड माइक्रो न्यूट्रिएंट्स, गौशाला उत्पाद, दुग्ध एवं हर्बल उत्पाद, पशु आहार, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, बायो-फ्लॉक्स, टैंक व केज कल्चर मॉडल, एक्वेरियम डिस्प्ले शामिल हैं। प्राकृतिक एवं जैविक खेती के मॉडल समागम में भाग लेने वाले किसानों और एफपीओ प्रतिनिधियों के लिये प्राकृतिक और जैविक खेती का लाइव प्रदर्शन किया जायेगा, जिसके माध्यम से किसान भाई जैविक खेती की आधुनिक और उन्नत तकनीक से अवगत हो सकेंगे। उद्योग व निर्यात पर संगोष्ठी समागम में कृषि, औषधीय फसलों पर आधारित उद्योगों, एफपीओ, निर्यातकों व क्रेता-विक्रेताओं के लिए संवाद व नेटवर्किंग सत्र का आयोजन भी किया गया है, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा उत्पादन के साथ निर्यात, तकनीकों और प्रक्रियाओं के विषय में बताया जायेगा। एग्री-हॉर्टी एक्सपो-2025 में विभागीय सहभागिता कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, कृषि अभियांत्रिकी एमएसएमई, मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन, एमपी एग्रो सहित राज्य सरकार के कई अन्य विभाग एवं संस्थान सम्मिलित होंगे। ऑन-द-स्पॉट पंजीयन समागम में कृषकों को विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी जाएगी व ऑन-द-स्पॉट पंजीयन की सुविधा मुहैया करायी जायेगी। स्थानीय नवाचारों की प्रस्तुति समागम के दौरान मंदसौर जिले में कृषकों द्वारा किए गए नवाचारों पर केंद्रित वीडियो फिल्म का प्रदर्शन मुख्य आकर्षण होगा। कृषक हितलाभ वितरण व निवेश संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा कृषि-उद्यानिकी विभाग से संबंधित योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरण और निवेशकों से सीधी चर्चा की जायेगी। मंदसौर उद्यानिकी उत्पादों में अग्रणी जिला 1.15 लाख हेक्टेयर में फल, सब्जी, मसालों, औषधीय फसलों का मुख्य केन्द्र है। इन फसलों से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया जायेगा। साथ ही नये निवेशकों को इन फसलों से संबंधी व्यवसायों के लिये जागरूक कर प्रोत्साहित भी किया जायेगा। 33 करोड़ से निर्मित महर्षि सांदीपनि विद्यालय भवन चंदवासा का होगा लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव सीतामऊ में 33 करोड़ 14 लाख से निर्मित (सीएम राइज स्कूल) महर्षि सांदीपनी विद्यालय भवन चंदवासा का लोकार्पण करेंगे। साथ ही दुधाखेड़ी में 400 करोड़ के निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन करेंगे। 15 विषय-विशेषज्ञों के होंगे व्याख्यान एवं हितलाभ वितरण कृषि उद्योग समागम में 15 विषय-विशेषज्ञ व्याख्यान के रूप में अनुभव साझा करेंगे। किसानों को खेती किसानी से जुड़ी तकनीकी सलाह प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि उद्योग समागम में विभिन्न योजनाओं में अलग-अलग हितग्राहियों को हितलाभ प्रदान करेंगे। लगाये जायेंगे 80 राज्य स्तरीय स्टॉल मुख्यमंत्री डॉ. यादव सीतामऊ कृषि उद्योग समागम में 8 विभागों द्वारा किसानों से जुड़े विविध तरह के लगाये गये 80 राज्य स्तरीय स्टॉलों का अवलोकन करेंगे। इन स्टॉल के माध्यम से कृषकों को उन्नत तकनीकी, खेती किसानी की जानकारी, नवाचार, उन्नत किसान के संबंध बारे में बताया जाएगा।  

भोपाल में हुआ लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली पर पहला क्षेत्रीय सम्मेलन

पीएफएमएस एक सुदृढ़ नेटवर्क प्रणाली, 3.48 लाख करोड़ की हुई बचत : सीजीए दुबे एसएनए-स्पर्श प्रणाली के बेहतर क्रियान्वयन में पीएफएमएस की भूमिका महत्वपूर्ण : मुख्य सचिव जैन भोपाल में हुआ लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली पर पहला क्षेत्रीय सम्मेलन भोपाल नियंत्रक महालेखा परीक्षक श्याम सुन्दर दुबे ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए पीएफएमएस की पारदर्शिता और दक्षता के साथ निधियों के वितरण में इसकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पीएफएमएस एक सुदृढ़ नेटवर्क प्रणाली है, जो विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, बैंकों, भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया जैसी संस्थाओं से जुड़ी हुई है। दुबे ने कहा कि पीएफएमएस जैसी सशक्त प्रणाली से लाभार्थियों के दोहराव की और फर्जी लाभार्थियों को समाप्त कर अब तक लगभग 3.48 लाख करोड़ रुपये की बचत की है। लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली (PFMS) पर पहला क्षेत्रीय सम्मेलन दिनांक 2 मई 2025 को भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में आयोजित किया गया। भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीजीए) दुबे ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव जैन आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सम्मेलन में मध्यप्रदेश, बिहार, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने पीएफएमएस का स्वागत करते हुए केन्द्र सरकार में अपनी प्रतिनियुक्ति के दौरान हुए इससे संबंधित अनुभव साझा किए। उन्होंने SNA-SPARSH प्रणाली के माध्यम से पीएफएमएस की उस भूमिका की सराहना की, जिसके अंतर्गत सरकार को निधियों के निष्क्रिय रूप से रखे जाने के लिए ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि पीएफएमएस आधुनिक सार्वजनिक वित्त प्रबंधन का आधार बन चुका है, जिससे राज्य सरकारें जन-कल्याणकारी योजनाओं को तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सक्षम हुई हैं। उन्होंने PFMS, RBI और राज्य सरकारों के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए इसे डिजिटल इंडिया के विजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। सम्मेलन में पीएफएमएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसके विभिन्न मॉड्यूल्स पर प्रस्तुतियाँ दीं। सम्मेलन में राज्य वित्त विभाग, कोषालय लेखा निदेशालय और विभिन्न राज्य सरकारों के विभागों एवं मंत्रालयों के अधिकारी सम्मिलित हुए। प्रतिभागियों को SNA-SPARSH, DBT और DBT-SPARSH जैसे मॉड्यूल्स की नवीनतम कार्यप्रणालियों की विस्तृत जानकारी दी गई। यह सम्मेलन कार्यान्वयन एजेंसियों, सरकारी विभागों तथा प्रत्यक्ष लाभार्थियों से सुझाव प्राप्त कर पीएफएमएस प्रणाली में सुधार की दिशा में मार्ग प्रशस्त करने का एक मंच सिद्ध हुआ। सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों को SNA-SPARSH से संबंधित तकनीकी प्रश्नों के समाधान भी प्रदान किए गए। निकट भविष्य में इस प्रकार की क्षेत्रीय सम्मेलन विभिन्न राज्यों में आयोजित किये जाएंगे।  

2000 रुपये के नोट वापस लेने के 2 साल बाद भी 6,266 करोड़ रुपये मूल्य के नोट चलन में: RBI डेटा

नई दिल्ली भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा दो साल पहले नोटबंदी के बाद, 6,266 करोड़ रुपये मूल्य के 2,000 रुपये के उच्च मूल्य के नोट अभी भी चलन में हैं, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार। 2,000 के नोट कानूनी रूप से मान्य हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 19 मई को घोषणा की थी कि वह 2,000 रुपये के नोट को वापस लेगा। RBI ने कहा कि कंपनी का कुल मूल्य 19 मई, 2023 को कारोबार की समाप्ति पर 3.56 लाख करोड़ रुपये से घटकर 30 अप्रैल, 2025 को कारोबार की समाप्ति पर 6,266 करोड़ रुपये रह गया। केंद्रीय बैंक ने कहा, “इस प्रकार, 19 मई, 2023 तक चलन में 2000 रुपये के बैंकनोटों का 98.24 प्रतिशत वापस आ गया है।” ऐसे नोट जमा करने और/या बदलने की सुविधा 7 अक्टूबर, 2023 तक बैंक की सभी शाखाओं में उपलब्ध है। हालाँकि, यह सुविधा अभी भी रिज़र्व बैंक के 19 निर्गम कार्यालयों में उपलब्ध है। 9 अक्टूबर, 2023 से, RBI द्वारा जारी किए गए कार्यालय व्यक्तियों और संस्थानों से उनके बैंक खातों में जमा करने के लिए 2,000 रुपये के नोट भी स्वीकार कर रहे हैं। इसके अलावा, लोग देश के किसी भी डाकघर से भारतीय डाक के माध्यम से 2,000 रुपये के नोट RBI द्वारा जारी किसी भी कार्यालय को अपने बैंक खातों में जमा करने के लिए भेज सकते हैं। (PTI से इनपुट्स के साथ)  

हजारों वर्ष पुराने मुड़िया बौद्ध मठ के रास्ते से अतिक्रमण हटाने के HC ने कलेक्टर को दिए निर्देश

जबलपुर जबलपुर के गोपालपुर के पास स्थित मौर्यकालीन प्राचीन बौद्ध मठ के पहुंच मार्ग से अतिक्रमण हटाने के लिए हाईकोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर को अंतरिम आदेश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने यह आदेश उस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए, जिसमें मठ से जुड़े रास्ते पर अतिक्रमण कर आवाजाही बंद करने की शिकायत की गई थी। याचिका बौद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया के रीजनल हेड सुखलाल वर्मा और अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष दादा बैजनाथ कुशवाहा की ओर से दायर की गई थी। इसमें कहा गया है कि लम्हेटा घाट स्थित मुड़िया बौद्ध मठ हजारों वर्ष पुराना मौर्यकालीन बौद्ध स्थल है। इसके पास की 32 एकड़ शासकीय भूमि पर कथित रूप से भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया है और मठ तक पहुंचने का मार्ग अवरुद्ध कर दिया है। याचिका में उल्लेख किया गया कि 27 जनवरी 2021 को तत्कालीन कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने मप्र टूरिज्म बोर्ड को पत्र भेजकर मठ के विकास के लिए बजट स्वीकृति का अनुरोध किया था। इससे पहले 15 जून 2012 को म.प्र. शासन के पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय विभाग ने इस स्थल को प्राचीन स्मारक घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी। 1 अप्रैल 2015 को इस स्थल को अंतिम रूप से संरक्षित स्मारक घोषित करने का अनुरोध भी संस्कृति विभाग को भेजा गया, लेकिन अब तक शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अतिक्रमण के खिलाफ स्थानीय स्तर पर पत्राचार और धरना-प्रदर्शन भी हुए, लेकिन जब कार्रवाई नहीं हुई, तो यह याचिका दाखिल की गई। याचिका में मप्र शासन के प्रमुख सचिव (राजस्व), प्रमुख सचिव (पुरातत्व), प्रमुख सचिव (धार्मिक न्यास), सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति विभाग), कलेक्टर जबलपुर, एसडीओ (राजस्व), तहसीलदार, नगर निगम अधिकारी भेड़ाघाट और निजी पक्षों रीता सेंगर, गुंजन नंदा, सोनिया नारंग व आरडीएम केयर इंडिया प्रा. लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर अंगददीप सिंह नारंग को अनावेदक बनाया गया है।  

अचलपुरा में एक प्रेमी जोड़े ने की आत्महत्या, गाँव में मचा हड़कंप

राजगढ़ भोजपुर थाना के अंतर्गत अचलपुरा में एक प्रेमी जोड़े ने आत्महत्या कर ली। दोनों के शव साड़ी के फंदे पर मोहवा पेड़ लटके मिले। जानकारी के मुताबिक अचलपुरा गांव के मोहन लाल जब सुबह शौच के लिए खेत पर गया तो देखा कि एक प्रेमी जोड़े ने आत्महत्या कर ली। दोनों के शव मोहवा के पेड़ पर लटक देख वह गांव की ओर भागा और गांव वालो को सूचना दी। इसके बाद गांव के सैकड़ो लोग एकत्रित हो गए और पुलिस को सूचना दी। भोजपुर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनो के शव को पेड़ से उतार कर खिलचीपुर शासकीय अस्पताल लेकर आए। जहां पर डाॅक्टर द्वारा पीएम कर शव परिजनों को सौप दिया। दोपहर को परिजनों द्वारा अंतिम संस्कार किया। लड़के की पहचान राधेश्याम पिता देवीलाल तंवर 21 व लड़की की पहचान मंजूबाई पिता भंवरलाल तंवर 19 के रूप में की गई है। जानकारी के अनुसार राधेश्याम तवर उम्र 21 वर्ष और लड़की 19 वर्ष दोनों ने सुबह के समय मोहवाँ के पेड़ पर लटककर आत्महत्या कर ली। लड़की तीन दिन पहले ससुराल से मायके आई थी। लड़के के पिताजी द्वारा बताया की लड़के की शादी डोडिया खेड़ी सीताराम की लड़की से को गई थी, लेकिन 2 साल से लड़की के पिताजी द्वारा कोर्ड केस कर रखा था और लड़की भेजने को मना किया गया था। लड़के को गांव की लड़की के साथ कोई प्रेम हुआ इसकी जानकारी मुझे नहीं थी। लेकिन लड़का उसके ससुराल वालों से परेशान था, जिसके कारण उसने यह कदम उठाया होगा। लड़की के पिताजी भंवरलाल तंवर ने बताया की लड़की की शादी दुर्जन पूरा के हरिओम से 3 साल पहले कर दी गई थी। वह ससुराल में ही 1 साल से रहती थी. हाल ही में 3 दिन पूर्व अपने मायके गांव आई थी. आज सुबह लड़की घर से पांच बजे निकली और 9 बजे हमे गांव से सूचना मिली की एक लड़का लड़की ने आत्महत्या कर ली. हम मौके पर पहुंचे तो मेरी लड़की गांव के लड़के के साथ आत्महत्या कर ली । कैलाश चंद्र दांगी, एसआई भोजपुर थाना ने बताया- गांव से सुबह के समय सूचना मिली थी की अचलपुरा गांव के एक प्रेमी जोड़े में आत्महत्या कर ली. हम मौके पर पहुंचकर कर दोनो के शव खिलचीपुर अस्पताल में आए जहा पर दोनो के शव का पीएम करवाकर परिजनों को सौप दिया और जांच की जा रही है।  

बलूचिस्तान में न्यायेतर हत्याएं पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड का सबसे काला अध्याय : हिमंत बिस्वा सरमा

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि बलूचिस्तान में वर्षों से हो रही न्यायेतर हत्याएं पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड का सबसे काला अध्याय बनी हुई हैं। सीएम सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “बलूचिस्तान में व्यवस्थित न्यायेतर हत्याएं, जिन्हें आमतौर पर ‘मारो और फेंको नीति’ के रूप में जाना जाता है, पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड में सबसे काले अध्यायों में से एक है। वर्षों से, बलूचों ने जबरन गायब किए जाने के क्रूर अभियान को झेला है, जहां छात्रों, कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों का राज्य एजेंसियां अपहरण कर लेती हैं, उन्हें यातना दी जाती है और बाद में वे दूरदराज के खड्डों में मृत पाए जाते हैं या उन्हें सुनसान सड़कों पर फेंक दिया जाता है।” मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बलूचिस्तान के लोगों का समर्थन करते हैं और उन्होंने याद दिलाया कि भारत उनके लिए खड़ा रहेगा। उन्होंने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री मोदी की आवाज ने दुनिया का ध्यान बलूचिस्तान के संकट की ओर खींचा, जिसे पाकिस्तान ने लंबे समय तक दबाए रखा था। सीएम सरमा ने पोस्ट में उल्लेख किया, “यह अमानवीय प्रथा बलूचिस्तान में राज्य प्रायोजित आतंक का चेहरा बन गई है, जहां परिवारों को उम्मीद की जगह अपने प्रियजनों के क्षत-विक्षत शव मिलते हैं। इसी गंभीर पृष्ठभूमि में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 2016 के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान, वैश्विक समुदाय के लंबे समय से धारण मौन को तोड़ा। बलूचिस्तान से बहने वाली ‘लाल नदियों’ का जिक्र करते हुए, उन्होंने न्याय और सम्मान से वंचित लोगों को आवाज़ दी, यह इस बात की पुष्टि थी कि भारत उत्पीड़ित और चुप कराए गए लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। उनके शब्दों में न केवल नैतिक स्पष्टता थी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वजन भी था, जिससे एक ऐसे संकट की तरफ ध्यान गया जिससे पाकिस्तान ने लंबे समय तक छुपाने की कोशिश की।” सीएम सरमा ने आगे कहा, “वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स (वीबीएमपी) जैसे संगठनों का अनुमान है कि 20,000 से अधिक बलूच व्यक्ति गायब हो गए हैं, सैकड़ों शव संदिग्ध और क्रूर परिस्थितियों में बरामद किए गए हैं। कई लोगों पर गंभीर यातना के निशान हैं, जो भय और हिंसा के माध्यम से असहमति को दबाने की एक व्यवस्थित नीति की ओर इशारा करते हैं। यह अब कोई क्षेत्रीय या राजनीतिक मुद्दा नहीं है – यह एक मानवीय आपातकाल है।”

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- कांग्रेस, सपा और राजद मचा रहे जाति जनगणना का श्रेय लेने का झूठमूठ का हल्ला

लखनऊ उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता केशव प्रसाद मौर्य ने जाति जनगणना का झूठा श्रेय लेने के लिए कांग्रेस, सपा और राजद की आलोचना की। केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए लिखा, “परिवादी तिकड़ी में जकड़ी कांग्रेस, सपा और राजद तीनों जाति जनगणना का श्रेय लेने का झूठमूठ का हल्ला मचा रहे हैं। दस साल पहले यूपीए शासनकाल में राजद नेता लालू प्रसाद यादव और सपा नेता मुलायम सिंह यादव यानी दो यादव परिवार कांग्रेस के शाही परिवार की मजबूत बैसाखी बनकर केंद्र की सत्ता में अपना हिसाब-किताब साफ कर रहे थे। कांग्रेस दोनों को जांच एजेंसियों का ख़ौफ़ दिखा रही थी। आय से अधिक संपत्ति के संगीन मामले थे। अमेरिका से परमाणु समझौता कराने में भी सपा की कथित भूमिका थी। जाति जनगणना की पैरोकारी तब केवल छलावा भर थी। अब जाति जनगणना का झूठा श्रेय लेकर ख़ुशी में पटाखा फोड़कर अपनी जग हंसाई करा रहे हैं। उन्होंने आगे लिखा कि इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश की कमान संभालने के बाद दबी-कुचली जातियों को एक नई चेतना मिली है। जाति जनगणना से उनको सबको हर स्तर पर अपना हक मिलेगा और देश भी मजबूत बनेगा। पिछले कुछ सालों से जाति जनगणना भारतीय राजनीति के प्रमुख मुद्दों में एक रही है। कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी ने जाति जनगणना को लोकसभा के चुनाव में भी प्रमुख मुद्दे की तरह पेश किया था। अब केंद्र सरकार ने भी जातिगत जनगणना कराने की घोषणा कर दी है। बुधवार को राजनीतिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने इस बारे में घोषणा दी है। इसके साथ ही यह पहली बार होगा जब आजाद भारत में जातिगत जनगणना कराई जाएगी। इससे पहले जाति सर्वेक्षण कराए गए हैं। बिहार समेत कुछ राज्यों ने भी जाति सर्वेक्षण कराए हैं। केंद्र सरकार द्वारा जाति जनगणना कराने के फैसले के लिए भारतीय राजनीति में यह मामला एक बार फिर सतह पर आ गया है और कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों इसका श्रेय लेने में जुट गए हैं।

रचनात्मक सृजनशीलता और कला-कौशल गतिविधियों में भाग ले रहे हैं विद्यार्थी

भोपाल मध्यप्रदेश के शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थी इन दिनों कला एवं अभिव्यक्ति, नाट्य अभिनय, फोटोग्राफी, प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग, पारंपरिक नृत्य, क्षेत्रीय संगीत, हस्तकला एवं लोक कलाएँ, पारंपरिक खेलों, वित्तीय साक्षरता, व्यवसाय, मॉडल, डिज़ाइन, थिंकिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी के साथ ही कविता और कहानियों की रचना जैसी अपनी अभिरूचियों के विकास में व्यस्त हैं। दरअसल प्रदेश के विभिन्न शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए समर कैम्प का आयोजन किया जा रहा है। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालक श्री राजीव तोमर ने बताया कि एक मई से प्रारंभ हुए ये समर कैम्प 20 मई 2025 तक संचालित होंगे। शासकीय विद्यालयों में अकादमिक गतिविधियों के साथ विद्यार्थियों में रचनात्मक-सृजनशीलता, कला-कौशल के विकास के लिए इन समर कैम्प्स का आयोजन प्रदेश के समस्त सांदीपनी विद्यालयों, पीएमश्री विद्यालयों, उत्कृष्ट विद्यालयों और मॉडल विद्यालयों के साथ 500 से अधिक नामांकन वाले एकीकृत हायर सेकेंडरी विद्यालयों में किया जा रहा है। समर कैम्प का उद्देश्य विद्यार्थियों में 21वीं सदी के विभिन्न कौशलों जैसे आपसी सहयोग, टीमवर्क, समस्या समाधान, आपसी सामंजस्य, तार्किकता और नेतृत्व जैसे जीवन कौशल विकसित करने के लिए अवसर प्रदान करने के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक जागरूकता, डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना तथा विद्यार्थियों में अंग्रेजी भाषा बोलने की क्षमता का विकास आदि हैं। समर कैम्प के आयोजन की अवधि सांदीपनी विद्यालयों में समर कैम्प का आयोजन सामान्यतः एक मई से 20 मई 2025 की अवधि में प्रातः 8 से 11 बजे तक किया जा रहा है। वहीं पीएमश्री उत्कृष्ट एवं मॉडल विद्यालयों में विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा बोलने की क्षमता विकसित करने के लिये कक्षा-3 से 8 और कक्षा-9 से 12 के विद्यार्थियों के लिये समर कैम्प आयोजित किये जा रहे हैं। कैम्प के संबंध में विस्तृत जानकारी संबंधित विद्यालयों के प्राचार्यों को भेजी गयी है। प्रदेश में 20 मई से अधिक अवधि तक समर कैम्प संचालन के संबंध में विद्यालय अपने स्तर पर निर्णय ले सकेंगे।  

रामबन में अचानक हुए भूस्खलन के चलते एनएच-44 पर दोनों ओर से यातायात बाधित

ऊधमपुर रामबन जिले के सेरी चंबा क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर बादल फटने से भारी तबाही हुई है। अचानक हुए भूस्खलन के चलते जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-44) पर दोनों ओर से यातायात को पूरी तरह रोक दिया गया। मूसलधार वर्षा के बाद हुए इस भूस्खलन से राजमार्ग पर भारी मलबा आ गया, जिससे वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। सैकड़ों की संख्या में वाहन हाईवे पर दोनों तरफ फंसे हैं। टीसीयू रामबन के अनुसार, शुक्रवार दोपहर को अचानक हुई तेज वर्षा के कारण सेरी चंबा में भारी भूस्खलन होने से काफी मलबा और कीचड़ हाईवे पर आ गया। जिस वजह से दोनों ओर का यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। हाईवे बंद होने के कुछ ही देर के बाद एनएचएआई के लिए काम करने वाली सीपीपीएल कंस्ट्रक्शन कंपनी की आधा दर्जन मशीनें मौके पर पहुंच कर मलबा हटाने में जुट गई। नहीं हुआ रास्ता साफ, हाईवे अभी भी बंद दोपहर बाद से ही मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। समाचार लिखे जाने तक रास्ता साफ नहीं हो पाया था और हाईवे पूरी तरह बंद था। पीसीआर रामबन के अनुसार अभी हाईवे खुलने में दो से तीन घंटों या इसके भी कुछ अधिक समय लग सकता है। वहीं यातायात पुलिस और जिला पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे राजमार्ग पर यात्रा न करें और जब तक मार्ग पूरी तरह साफ न होने तक हाईवे पर सफर से बचने को कहा है। अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी है कि वह सफर शुरू करने से पूर्व ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक ट्विटर और फेसबुक से अपडेट या टीसीयू से संपर्क कर हाईवे की स्थिति की जानकारी प्राप्त जरूर करें।

भारतीय हमलो का पीओके में 1000 से अधिक मदरसों पर दिखा खौफ, किया बंद

नई दिल्ली पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 1000 से अधिक मदरसे कम से कम 10 दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं। स्थानीय अधिकारियों ने शुक्रवार को यह घोषणा की। विश्वसनीय सूत्रों ने मीडिया को बताया कि भारत की तरफ से हमले के डर की वजह से पीओके में स्थित मदरसों को बंद कर दिया गया। भारत यह दावा करता रहा है कि इन संस्थानों का इस्तेमाल आतंकवादियों के छिपने के ठिकाने के रूप में किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि भारत पाकिस्तान के साथ पूर्ण पैमाने पर युद्ध शुरू नहीं करेगा, लेकिन नियंत्रण रेखा (एलओसी) के साथ पीओके क्षेत्रों में कुछ हमले जरूर करेगा। 29 सितंबर 2016 को, भारतीय सेना के कमांडो की टीमों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में प्रवेश कर आतंकी ठिकानों में छिपे बैठे आतंकवादियों को खत्म किया था। यह कार्रवाई 18 सितंबर 2016 को जम्मू और कश्मीर के उरी में एक भारतीय सेना की चौकी पर हमला करने के दस दिन बाद हुई थी। हमले में 19 सैनिकों की मौत हो गई थी। एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “सरकार के निर्देशानुसार 1000 से अधिक मदरसे बंद कर दिए गए हैं। उन्हें कम से कम 10 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है और छात्रों के लिए छुट्टियों की घोषणा कर दी गई है।” इससे पहले पाकिस्तान ने बुधवार को गिलगित और स्कार्दू के लिए सभी घरेलू उड़ानें रद्द करने की घोषणा की। विदेशी उड़ानों की भी कड़ी निगरानी शुरू की गई। जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (सीएए) को सभी आने वाले विदेशी विमानों की जांच करने का निर्देश दिया गया। इस बीच पाकिस्तान ने भारत से लौटने वाले अपने नागरिकों के लिए वाघा सीमा को खुला रखने की घोषणा की। पहलगामा आतंकी हमले के बाद नई दिल्ली ने पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए थे। पाकिस्तान विदेश कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, “हालांकि भारत से पाकिस्तानी नागरिकों की वापसी की अंतिम तिथि 30 अप्रैल थी, लेकिन यदि भारतीय अधिकारी उन्हें अपनी ओर से सीमा पार करने की अनुमति देते हैं तो लाहौर में वाघा बॉर्डर हमारे नागरिकों के लिए खुला रहेगा।” बयान में कहा गया, “वाघा सीमा भविष्य में भी पाकिस्तानी नागरिकों के लिए खुली रहेगी।” बता दें आतंकियों ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल – पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में लोगों (ज्यादातर पर्यटक) पर अंधाधुंध गोलियां चला दी थीं। हमले में कम से कम 26 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। प्रतिबंधित आतंकवादी समूह ‘लश्कर-ए-तैयबा’ से जुड़े ‘टीआरएफ’ ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। नई दिल्ली ने इस्लामबाद के खिलाफ कई सख्त कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए हैं। इनमें 1960 के सिंधु जल समझौते को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने, अटारी इंटिग्रेटेड चेक पोस्ट को बंद करने, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने, शामिल हैं। भारत के इन फैसलों के बाद पाकिस्तान ने शिमला समझौते को स्थगित करने और भारतीय उड़ानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने, भारतीय नागरिकों के वीजा रद्दे करने जैसे कदम उठाए।

याचिकाकर्ता का दावा है कि वे भारतीय हैं, सुप्रीम कोर्ट ने छह कथित पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजने पर रोक लगा दी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को छह कथित पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजने पर रोक लगा दी है। याचिकाकर्ता का दावा है कि वे भारतीय हैं। उनके पास भारतीय नागरिकता को प्रमाणित करने वाले कई दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड शामिल है। याचिकाकर्ता के वकील नंदकिशोर इस प्रकरण के बारे में जानकारी देते हुए बताते हैं कि यह बहुत ही हैरान करने वाली बात है। एक व्यक्ति मूल रूप से हिंदुस्तानी है, उसके पास खुद को हिंदुस्तानी साबित करने के लिए अनेकों दस्तावेज हैं। इसके बावजूद, उसे पाकिस्तान जाने के लिए कह दिया जाता है। नोटिस भेज दिया गया। याचिकाकर्ता ने अपने वकील के माध्यम से बताया कि हमारे परिवार में कुल छह सदस्य हैं। इनमें से दो बेटे बेंगलुरु में काम करते हैं। इसके अलावा, परिवार में माता, पिता, भाई और बहन हैं। याचिकाकर्ता ने बताया कि जब हमें पाकिस्तान के लिए नोटिस आया, तो हम हतप्रभ हो गए। यही नहीं, हमें गाड़ी में बैठाकर अटारी बॉर्डर तक ले जाया गया और कहा गया कि हम देश छोड़ दें, जबकि हम हिंदुस्तानी हैं। वकील और याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने सरकारी अधिकारियों को भारतीय नागरिकता की वैधता के बारे में दस्तावेजों की जांच करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा है कि जब तक सरकारी अधिकारी उचित निर्णय नहीं लेते, तब तक परिवार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही याचिकाकर्ता को न्यायालय ने निर्देश दिया कि जब तक सरकारी अधिकारी उचित निर्णय नहीं करते, तब तक परिवार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए। इसमें सिंधु जल समझौते को निलंबित करना, पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश देना और राजनयिक संबंधों में कटौती करना शामिल है।

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