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राज्यपाल द्वारा 10 विधेयकों को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित रखना अवैध है, रद्द किया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि द्वारा 2023 में 10 विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए आरक्षित रखने के कदम को अवैध और गलत करार दिया। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने फैसला सुनाया कि विधानसभा द्वारा दोबारा पारित क‍िसी व‍िधेयक को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखने का अध‍िकार राज्यपाल के पास नहीं है। फैसले में कहा गया क‍ि राज्यपाल द्वारा 10 विधेयकों को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित रखना अवैध है, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल ने सद्भावनापूर्वक कार्य नहीं किया। विधेयकों को उसी दिन राज्यपाल द्वारा स्वीकृत मान लिया गया था, जिस दिन उन्हें पुनः उनके समक्ष प्रस्तुत किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल के पास विधेयक को रोकने की कोई गुंजाइश नहीं है, साथ ही कहा कि संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल के पास कोई विवेकाधिकार नहीं है। उन्हें अनिवार्य रूप से मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर काम करना होता है। इस वर्ष फरवरी में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के शीर्ष विधि अधिकारी अटॉर्नी जनरल (एजी) आर. वेंकटरमणी और तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी की दलीलें सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी, जिसमें दावा किया गया था कि राज्यपाल ने खुद को वैध रूप से निर्वाचित राज्य सरकार के “राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी” के रूप में पेश किया है। तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद राज्यपाल ने अपने पास लंबित 12 में से 10 विधेयकों को उनकी सहमति के लिए वापस कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था, “यदि राज्यपाल को प्रथम दृष्टया लगता है कि विधेयक में कुछ खामियां हैं, तो क्या उन्हें इसे राज्य सरकार के संज्ञान में नहीं लाना चाहिए? सरकार से यह कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वह राज्यपाल के मन में क्या है, यह जान सके? यदि राज्यपाल को व‍िधेयक में कुछ खामियां परेशान कर रही थीं, तो राज्यपाल को इसे तुरंत सरकार के संज्ञान में लाना चाहिए था और विधानसभा को विधेयक पर पुनर्विचार करना चाहिए था।” पिछले साल नवंबर में, शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि द्वारा राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने में देरी पर सवाल उठाए थे।

पीएम मोदी ने कहा- दुबई ने भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

नई दिल्ली दुबई के क्राउन प्रिंस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के डिप्टी पीएम और रक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की। वह भारत की दो दिवसीय यात्रा पर मंगलवार को नई दिल्ली पहुंचे हैं। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, “दुबई के क्राउन प्रिंस महामहिम शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम से मिलकर खुशी हुई। दुबई ने भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह विशेष यात्रा हमारी गहरी दोस्ती की पुष्टि करती है और भविष्य में और भी मजबूत सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी।” वहीं क्राउन प्रिंस ने एक्स पर लिखा, “आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करके खुशी हुई। हमारी बातचीत ने यूएई-भारत संबंधों की मजबूती की पुष्टि की, जो विश्वास पर आधारित है, इतिहास द्वारा आकारित है, तथा अवसरों, इनोवेशन और स्थायी समृद्धि से भरा भविष्य बनाने के साझा दृष्टिकोण से प्रेरित है।” दुबई के क्राउन प्रिंस के रूप में शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है और उनके साथ कई मंत्री, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और एक उच्च स्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है। प्रधानमंत्री मोदी ने गणमान्य अतिथि के सम्मान में दोपहर के भोज का आयोजन किया और क्राउन प्रिंस ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ भी बैठकें कीं। इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्राउन प्रिंस का स्वागत किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “दुबई के क्राउन प्रिंस और यूएई के डिप्टी पीएम और रक्षा मंत्री महामहिम शेख हमदान मोहम्मद का भारत की पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान स्वागत करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है। हमारे व्यापक सहयोग और जीवंत संबंधों के लिए उनकी सकारात्मक भावनाओं की सराहना करता हूं।” दिल्ली के बाद, क्राउन प्रिंस मुंबई का दौरा करेंगे और दोनों पक्षों के प्रमुख व्यापारिक नेताओं के साथ एक व्यापार गोलमेज सम्मेलन में भाग लेंगे। इस बातचीत से भारत-यूएई आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग मजबूत होगा।

मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की मौजूदगी में केदार जाधव ने पार्टी की सदस्यता ली

मुंबई भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सदस्‍य केदार जाधव ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। केदार जाधव को पार्टी का पटका पहनाकर भाजपा में शामिल कराया गया। इस अवसर पर चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, “केदार जाधव ने आज भारतीय जनता पार्टी जॉइन की है। उनका भारतीय खेल जगत में एक महत्वपूर्ण प्रभाव है और हम भाजपा परिवार में उनका स्वागत करते हैं।” केदार जाधव का जन्म 26 मार्च 1985 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ। दाएं हाथ के बल्लेबाज और ऑफ-स्पिन गेंदबाज के रूप में उन्होंने हरफनमौला खिलाड़ी की भूमिका निभाई। जाधव ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत महाराष्ट्र के लिए घरेलू क्रिकेट से की और धीरे-धीरे अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे। उनका वनडे डेब्यू 16 नवंबर 2014 को श्रीलंका के खिलाफ हुआ, जबकि टी20 अंतरराष्ट्रीय में पदार्पण 17 जुलाई 2015 को जिम्बाब्वे के खिलाफ हुआ। जाधव ने 73 वनडे मैचों में 1389 रन बनाए, जिसमें दो शतक और छह अर्धशतक शामिल हैं, साथ ही 27 विकेट भी लिए। उनकी औसत 42.09 रही, जो उनकी निरंतरता को दर्शाती है। टी-20 में उन्होंने 9 मैच खेले और 122 रन बनाए। आईपीएल में जाधव ने चेन्नई सुपर किंग्स, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, सनराइजर्स हैदराबाद जैसी टीमों के लिए खेलते हुए 93 मैचों में 1196 रन बनाए। उनकी अनोखी गेंदबाजी शैली और मध्यक्रम में फिनिशर की भूमिका ने उन्हें खास पहचान दी। खासतौर पर 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ पुणे वनडे में 120 रनों की शानदार पारी और गेंदबाजी में योगदान उनकी यादगार पारियों में से एक है। हालांकि, चोट और फॉर्म में उतार-चढ़ाव के कारण 2020 के बाद वह भारतीय टीम से बाहर हो गए। 3 जून 2024 को 39 साल की उम्र में जाधव ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया। निजी जीवन में, उन्होंने 2011 में स्नेहल से शादी की और उनकी एक बेटी है।

हज और उमराह मंत्रालय ने कहा- 29 अप्रैल विदेशी उमराह तीर्थयात्रियों के लिए मुल्क से विदा लेने का अंतिम दिन होगा

रियाद अभी हाल ही में सऊदी अरब ने भारत और पाकिस्तान समेत 14 देशों पर अस्थायी तौर पर वीजा बैन लगा दिया था ताकि उमराह करने वालों और हज तीर्थयात्रा करने वालों की अवैध भीड़ मक्का या देशभर में जमा नहीं हो। अब सऊदी अरब के हज और उमराह मंत्रालय ने घोषणा की है कि जिन लोगों को उमराह के लिए वीजा मिल चुका है, वे उमराह पूरी कर 29 अप्रैल तक अपने-अपने देश वापस चले जाएं। मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा है कि 29 अप्रैल विदेशी उमराह तीर्थयात्रियों के लिए मुल्क से विदा लेने का अंतिम दिन होगा। मीडिया रिपोर्ट में आधिकारिक बयान के हवाले से कहा गया है कि मंत्रालय ने कहा, “इस वर्ष उमराह करने वालों के लिए सऊदी अरब में प्रवेश के लिए 13 अप्रैल आखिरी दिन निर्धारित किया गया है, जबकि 29 अप्रैल को तीर्थयात्रा की मियाद खत्म हो जाएगी। इस समय सीमा के बाद सऊदी अरब में रहने वाले तीर्थयात्रियों को देश के वीजा और तीर्थयात्रा नियमों का उल्लंघन करने वाला माना जाएगा।” उल्लंघन करने पर कितना जुर्माना मंत्रालय ने अपने बयान में जोर देकर कहा है कि अनुमत तिथियों के बाद यानी 29 अप्रैल के बाद अधिक समय तक सऊदी अरब में रुकना कानूनी उल्लंघन माना जाएगा और दोषी पाए जाने वाले विदेशियों पर सख्त दंड लागू किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, कंपनियों और उमराह सेवा प्रदाताओं पर 100,000 सऊदी रियाल यानी 22.94 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। हज यात्रा से पहले की तैयारी सऊदी अरब ने यह कदम ऐसे वक्त उठाया है, जब वह वार्षिक हज यात्रा को आरामदायक बनाने की तैयारियों में जुटा है। सऊदी अरब का मकसद अवैध तीर्थयात्रियों को मक्का जाने से रोकना है। पिछले साल भारी भीड़ के कारण मक्का में भगदड़ मच गई थी, जिसमें 1200 लोगों की जान चली गई थी। इससे सऊदी अरब की प्रतिष्ठा दुनियाभर में धुमिल हुई थी। इसी को मद्देनजर रखते हुए सऊदी अरब ताबड़तोड़ फैसले ले रहा है। 18000 विदेशी गिरफ्तार एक दिन पहले ही सऊदी अरब ने करीब 18,407 ऐसे विदेशियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जो अवैध तरीके से वहां रह रहे थे। यानी वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी वहां रह रहे थे। इन लोगों पर प्रवासन, श्रम और सीमा सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। इन लोगों को 15 साल की जेल की सजा हो सकती है या करीब 2.30 करोड़ रुपये का जुर्माना हो सकता है या दोनों हो सकता है। कब से शुरू हो रही हज यात्रा सऊदी अधिकारियों ने सभी सर्विस प्रोवाइडर और हज यात्रा आयोजित कराने वाले संस्थानों को विदेशी तीर्थयात्रियों के प्रस्थान समयसीमा और रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करने का निर्देश दिया है। बयान में कहा गया है कि अधिक समय तक रुकने वाले तीर्थयात्रियों की रिपोर्ट न करने पर इन संस्थानों पर भी अधिकतम दंड लगाया जाएगा। इस तरह के सारे कदम 4 जून से शुरू हो रहे हज यात्रा से ठीक पहले उठाए गए हैं।

सांसद बर्क ने भड़काऊ बयान दिया था, इस मामले में थाने बुलाकर तीन घंटे से ज्यादा समय तक एसआईटी ने दागे दर्जनों सवाल

संभल संभल हिंसा में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क से मंगलवार को एसआईटी ने थाने बुलाकर तीन घंटे तकत पूछताछ की। इस दौरान उनसे दर्जनों सवाल दागे गए। नवंबर में शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इसमें चार लोगों की जान चली गई थी। पुलिस ने सांसद जियार्रहमान बर्क के खिलाफ भी इसी मामले में एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने आरोप था कि बर्क ने भड़काऊ बयान दिया था। हालांकि हिंसा वाले दिन बर्क शहर में नहीं थे। पिछलो दिनों बर्क के घर पूछताछ के लिए पुलिस टीम पहुंची थी। सांसद के मौजूद नहीं होने पर नोटिस घर पर मौजूद लोगों को रिसीव कराई थी। नोटिस के बाद ही मंगलवार सुबह 11 बजे सांसद बर्क नखासा कोतवाली पहुंचे। उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सुलेमान खान भी मौजूद रहे। दिल्ली से मंगलवार सुबह संभल पहुंचे सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने नखासा कोतवाली पहुंचने से पहले अपने आवास पर पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि मेरी तबियत ठीक नहीं है, लेकिन मैं देश का जिम्मेदार नागरिक और जन प्रतिनिधि हूं। कानून का सम्मान करता हूं और जांच में पूरा सहयोग करूंगा। वह 11 बजे नखासा कोतवाली पहुंचे। थाने के बाहर उनके समर्थन में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की मौजूदगी से यह साफ झलका कि सांसद को स्थानीय बार और कानूनी बिरादरी का भी समर्थन है। संभल हिंसा में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क से मंगलवार को एसआईटी ने थाने बुलाकर तीन घंटे तकत पूछताछ की। इस दौरान उनसे दर्जनों सवाल दागे गए। नवंबर में शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इसमें चार लोगों की जान चली गई थी। पुलिस ने सांसद जियार्रहमान बर्क के खिलाफ भी इसी मामले में एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने आरोप था कि बर्क ने भड़काऊ बयान दिया था। हालांकि हिंसा वाले दिन बर्क शहर में नहीं थे। पिछलो दिनों बर्क के घर पूछताछ के लिए पुलिस टीम पहुंची थी। सांसद के मौजूद नहीं होने पर नोटिस घर पर मौजूद लोगों को रिसीव कराई थी। नोटिस के बाद ही मंगलवार सुबह 11 बजे सांसद बर्क नखासा कोतवाली पहुंचे। उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सुलेमान खान भी मौजूद रहे। दिल्ली से मंगलवार सुबह संभल पहुंचे सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने नखासा कोतवाली पहुंचने से पहले अपने आवास पर पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि मेरी तबियत ठीक नहीं है, लेकिन मैं देश का जिम्मेदार नागरिक और जन प्रतिनिधि हूं। कानून का सम्मान करता हूं और जांच में पूरा सहयोग करूंगा। वह 11 बजे नखासा कोतवाली पहुंचे। थाने के बाहर उनके समर्थन में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की मौजूदगी से यह साफ झलका कि सांसद को स्थानीय बार और कानूनी बिरादरी का भी समर्थन है।|#+| थाने के अंदर बर्क से तीन घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ चली। करीब ढाई बजे थाने से बाहर आए बर्क ने कहा कि जांच अभी जारी है। मुझसे जो सवाल पूछे गए, सभी का जवाब दिया है। हालांकि उन्होंने सवालों के बारे में बताने से इनकार कर दिया। इतना कहा कि जांच की प्रक्रिया चल रही है हम पूरा सहयोग कर रहे हैं। बर्क से ठीक पहले जामा मस्जिद के सदर जफर अली से पूछताछ हुई थी और उन्हें गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने भी बर्क को लेकर कुछ आरोप लगाए हैं। उन आरोपों की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है, ताकि निष्पक्ष व पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जा सके।

भावी पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए सहकारिता की गतिविधियां संचालित की जाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्ष 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश में सहकारिता की पहुंच बढ़ाने और सतत विकास में सहकारिता के योगदान के लिए ग्राम और वार्ड स्तर पर गतिविधियों का संचालन किया जाए। सहकारी सोसायटियों के सुदृढ़ीकरण के लिए नवाचार और सूचना प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देते हुए सहकारिता के सेट-अप में कार्पोरेट संस्कृति को विकसित करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “ज्ञान पर ध्यान” के मंत्र को साकार करने और विकसित भारत के लिए भावी पीढ़ी की सहकारिता का आधार तैयार करने के उद्देश्य से गतिविधियां संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय शीर्ष समिति की मंत्रालय में हुई बैठक को संबोधित कर रहे थे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रह्लाद सिंह पटेल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा से छूटे किसानों को चिन्हित कर उन्हें सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राजस्व, किसान कल्याण तथा एवं विकास, पशुपालन एवं डेयरी और मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग समन्वित रूप से गतिविधियां संचालित करें। पैक्स के सशक्तिकरण और उन्हें अधिक समर्थ और सक्षम बनाने के लिए अन्तर्विभागीय समन्वय से कार्य किया जाए। शासकीय योजनाओं के कन्वर्जेंस में पैक्स के सदस्यों को प्राथमिकता दी जाए। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा भारत सरकार की पहल पर वर्ष-2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया गया है। “सहकारिताएं एक बेहतर दुनिया का निर्माण करती हैं” इसकी थीम है, जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सहकारी मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाती है। साथ ही यह वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को लागू करने के प्रयासों में सहकारिता के योगदान पर भी प्रकाश डालती है।  

यूएस में एक नया बिल पेश किया गया है जिसमें छात्रों के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग ऑप्शन को खत्म करने का प्रस्ताव

वाशिंगटन अमेरिका से ऐसी खबर सामने आई है जिसने करीब 3 लाख भारतीय छात्रों को चिंता में डाल दिया है। दरअसल, यूएस में एक नया बिल पेश किया गया है जिसमें अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) ऑप्शन को खत्म करने का प्रस्ताव है। यह सुविधा वर्तमान में STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स) के छात्रों को मिलती है, जिससे वे अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद अमेरिका में 3 साल तक रहकर काम कर सकते हैं। अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो छात्रों को पढ़ाई खत्म करने के तुरंत बाद देश छोड़ना होगा, जब तक कि वे H-1B वीजा हासिल नहीं कर लेते। यह फैसला ऐसे समय लिया जा रहा है जब ट्रंप सरकार की टैरिफ नीतियों के चलते कई देशों को तगड़ा झटका लगा है। इंडियन स्टूडेंट्स अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सबसे बड़ी आबादी का हिस्सा हैं। ओपन डोर्स रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में यूएस में 11 लाख अंतरराष्ट्रीय छात्रों में से 3.31 लाख भारतीय थे। ये छात्र मुख्य रूप से STEM कोर्सेस में पढ़ाई करते हैं और OPT के जरिए प्रोफेशनल अनुभव हासिल करते हैं। इससे H-1B वीजा पाने के लिए उनकी दावेदारी मजबूत हो जाती है। अब नए बदलाव से उनके करियर प्लान पर गहरा असर पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि यह कदम डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीतियों का हिस्सा है। उन्होंने चुनाव अभियान में मास डिपोर्टेशन और वीजा नियमों को कड़ा करने का वादा किया था। अमेरिका के बाद क्या होगा छात्रों का विकल्प नए प्रस्ताव से न केवल भारतीय छात्रों, बल्कि अन्य देशों के छात्रों पर भी असर पड़ेगा। जानकारों का कहना है कि इससे कई छात्र अब कनाडा और यूरोप जैसे वैकल्पिक देशों की ओर रुख कर सकते हैं, जहां 2025-26 के लिए भारतीय आवेदनों में 20% की बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस खबर से छात्रों में घबराहट फैल गई है। कई छात्र अब जल्दी से H-1B वीजा के लिए आवेदन करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसकी लॉटरी प्रक्रिया और सीमित कोटा इसे मुश्किल बनाते हैं। अगर OPT खत्म होता है, तो भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ाई और करियर का सपना अधूरा रह सकता है। यह स्थिति भारत-अमेरिका के शैक्षिक और आर्थिक रिश्तों पर भी सवाल उठाती है।

साबरमती आश्रम में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम बेहोश, उनको आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया

गुजरात कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम साबरमती आश्रम में बेहोश हो गए हैं। उनको आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया है। बता दें कि अहमदाबाद में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हो रही है, जिसमें भाग लेने के लिए पार्टी के बड़े नेता पहुंचे हैं। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम साबरमती आश्रम में अचानक बेहोश हो गए। उनको आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी हालत भीषण गर्मी के कारण खराब हुई। वह खुद को संभाल नहीं सके और वह गिर गए। घटना के वक्त वह साबरमती आश्रम में पार्टी नेताओं के साथ मौजूद थे। बता दें कि अहमदाबाद में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हो रही है। इस बैठक में भाग लेने के लिए कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमदाबाद पहुंचे हैं। मंगलवार को भी बैठक में पार्टी के 158 वरिष्ठ नेता मौजूद थे। हालांकि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी सहित 33 सदस्य गैर मौजूद रहे। गौरतलब है कि कांग्रेस के 140 साल के इतिहास में छठी बार गुजरात में कांग्रेस अधिवेशन हो रहा है। कार्य समिति की बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सरदार पटेल स्मारक परिसर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इसमें उन्होंने कहा कि सरदार पटेल स्मारक में विस्तारित सीडब्ल्यूसी की बैठक कराना ही महत्वपूर्ण है। ऐसा कर पार्टी ने सरदार पटेल के प्रति अपने फर्ज का निर्वहन कर के राजनीतिक संदेश देने का काम किया है। केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश ने आगे कहा कि पार्टी ने भ्रम फैलाने वालों को बता दिया है कि पटेल कांग्रेस के हैं और कांग्रेस की विरासत हैं। पार्टी उसी बुनियाद पर आगे बढ़ेगी। मौजूदा वक्त में सरदार वल्लभभाई पटेल और पंडित जवाहरलाल नेहरू के बीच संबंधों को लेकर भ्रम फैलाकर उन्हीं सरदार पटेल को अपना बनाने की कोशिश हो रही है। यह वही सरदार पटेल हैं जिन्होंने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था।

अदालत का काम यह नहीं है कि वह कैबिनेट की ओर से लिए गए फैसलों की जांच कराएं, ममता सरकार को SC से राहत

कोलकाता अदालत का काम यह नहीं है कि वह कैबिनेट की ओर से लिए गए फैसलों की जांच कराएं। शीर्ष अदालत ने कोलकाता हाई कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए यह अहम टिप्पणी की है। अदालत ने ममता सरकार को राहत देते हुए यह फैसला दिया और कहा कि शिक्षकों एवं अन्य स्टाफ की 25 हजार भर्तियां कराने के फैसले की सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है। उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि अतिरिक्त भर्तियों के लिए पद सृजित किया जाना गलत था और कैबिनेट के फैसले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। इसी पर शीर्ष अदालत ने कहा कि इस केस में सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही बेंच ने कहा कि अदालतों को कैबिनेट के फैसलों की जांच नहीं करानी चाहिए। यह उनका काम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने ही बीते सप्ताह पश्चिम बंगाल में 25 हजार शिक्षक एवं अन्य स्टाफ की भर्ती को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि इसकी प्रक्रिया दागी थी और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। हालांकि अब बेंच ने ममता बनर्जी सरकार को थोड़ी राहत भी दी है। अदालत ने उच्च न्यायालय के उस फैसले को पलट दिया है, जिसके चलते ममता सरकार निशाने पर थी। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने कहा कि अदालत की भी अपनी सीमाएं हैं। वह ऐसे मामलों में जांच का आदेश नहीं दे सकती, जिसमें फैसला कैबिनेट की मीटिंग में हुआ हो। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर ममता बनर्जी ने कहा था कि मैं अदालत का सम्मान करती हूं, लेकिन फैसला स्वीकार्य नहीं है। यही नहीं ममता बनर्जी का कहना था कि भाजपा शासित मध्य प्रदेश में व्यापम जैसा घोटाला हुआ था, लेकिन किसी को कोई सजा नहीं हुई। हमने तो पूर्व शिक्षा मंत्री को हटाया और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। आखिर व्यापम केस में कौन जेल गया था। यही नहीं ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा में भी धांधली हुई थी। इसके अलावा उनका आरोप था कि भाजपा और सीपीएम ने मिलकर साजिश रची है ताकि बंगाल की शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया जाए। दरअसल मामला यह है कि पश्चिम बंगाल में 23 लाख अभ्यर्थियों ने शिक्षक भर्ती के लिए परीक्षा दी थी। 2016 में यह भर्ती निकली थी और 24,640 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी हुआ था।

वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हालात बेकाबू, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प

कोलकाता पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर क्षेत्र में मंगलवार को वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हालात बेकाबू हो गए और पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हो गई। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर कानून के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे, जब उन्होंने सड़क जाम करने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिससे टकराव शुरू हो गया। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की, उन्हें आग के हवाले कर दिया और पथराव भी किया। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। इस झड़प में कई लोग घायल हो गए, जिनमें कुछ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने वक्फ संशोधन कानून को वापस लेने की मांग करते हुए जंगीपुर पीडब्ल्यूडी मैदान से विरोध मार्च निकाला था। जब यह भीड़ उमरपुर की ओर बढ़ी, तभी पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में भीड़ उग्र हो गई और देखते ही देखते माहौल हिंसक हो गया। हिंसा यहीं नहीं रुकी। प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ पुलिस पर हमला किया, बल्कि बनियापुर और उमरपुर इलाकों में कई घरों और दुकानों में भी तोड़फोड़ की। हिंसा इतनी ज्यादा बढ़ गई कि पुलिस को तकरीबन आधे घंटे तक इलाके से पीछे हटना पड़ा। हालात पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है और इलाके में तनाव बरकरार है।  

सरकार की पालना योजना महिलाओं के लिए बनी सहारा, अब बेफिक्र होकर नौकरी पर जा सकती हैं माताएं

नई दिल्ली पालना योजना का उद्देश्य न केवल बच्चों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना है बल्कि यह योजना माताओं को भी अपनी नौकरी पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर प्रदान करती है खासकर उन कामकाजी महिलाओं को जिनके लिए बच्चों की देखभाल एक बड़ी चुनौती होती है। यह योजना महिलाओं के लिए एक सहारा बनकर सामने आई है जो अपने बच्चों की सही देखभाल और पोषण के साथ-साथ उनके लिए एक सुरक्षित वातावरण भी सुनिश्चित करती है। पालना योजना क्या है? पालना योजना मुख्य रूप से 6 महीने से 6 साल तक के बच्चों के लिए है। इस योजना के तहत बच्चों को सुरक्षित और संरक्षित वातावरण प्रदान किया जाता है जिसमें उनकी देखभाल, पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जाती हैं। खासतौर पर एकल परिवारों के लिए यह योजना काफी सहायक साबित हो रही है क्योंकि ऐसे परिवारों में बच्चों की देखभाल के लिए कोई अतिरिक्त मदद नहीं होती है और इस कारण महिलाओं को अपनी नौकरी छोड़ने की नौबत आती है। पालना योजना का उद्देश्य पालना योजना का मुख्य उद्देश्य 6 महीने से 6 साल तक के बच्चों के लिए एक सुरक्षित, संरक्षित और पोषक वातावरण प्रदान करना है। इसके तहत बच्चों को क्रेच सेवाएं, पोषण सहायता, स्वास्थ्य जांच, संज्ञानात्मक विकास और टीकाकरण की सेवाएं मिलती हैं। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य उन माताओं की मदद करना है जिनके पास बच्चों के लिए उपयुक्त देखभाल की व्यवस्था नहीं होती। इससे वे बिना किसी चिंता के अपनी नौकरी पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं। क्या सुविधाएं मिलती हैं? पालना योजना के तहत बच्चों के लिए क्रेच सुविधा प्रदान की जाती है जहां उन्हें एक सुरक्षित और संरक्षित वातावरण मिलता है। साथ ही 3 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए विभिन्न शैक्षिक गतिविधियाँ और खेलों का आयोजन किया जाता है ताकि उनका मानसिक और शारीरिक विकास हो सके। वहीं 3 से 6 साल के बच्चों के लिए प्री-स्कूल शिक्षा, पोषण, विकास निगरानी, स्वास्थ्य जांच और नियमित टीकाकरण की सुविधाएं दी जाती हैं। पालना योजना का महत्व पालना योजना केवल बच्चों की देखभाल के लिए ही नहीं बल्कि महिलाओं के लिए भी एक बड़ा सहारा बन गई है। कामकाजी महिलाएं अपनी नौकरी के साथ-साथ अपने बच्चों की देखभाल को लेकर चिंतित रहती हैं और यह योजना उन्हें इस चिंता से मुक्ति देती है। इस योजना के जरिए सरकार कामकाजी महिलाओं को बच्चों की देखभाल में मदद देकर समाज में समावेशिता और समानता की नींव रखने की कोशिश कर रही है। इसके अंतर्गत महिलाओं को डे-केयर सेवाएं प्रदान की जाती हैं जो उन्हें अपने करियर और बच्चों की देखभाल के बीच संतुलन बनाने में मदद करती हैं। वहीं कहा जा सकता है कि पालना योजना न केवल बच्चों के लिए बल्कि महिलाओं और समग्र समाज के लिए एक बड़ा कदम साबित हो रही है।  

बांग्लादेश में गाजा समर्थकों ने ढाका में मचाया तांडव, पुलिस ने हिंसा के मामलों में 49 लोगों को गिरफ्तार किया

नई दिल्ली बांग्लादेश की राजधानी ढाका समेत विभिन्न शहरों में  गाजा के समर्थन में विरोध प्रदर्शन हुए थे। इस दौरान कई जगहों पर हिंसा हुई थी। पुलिस ने हिंसा के मामलों में 49 लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना के संबंध में अब तक 49 लोग गिरफ्तार अंतरिम सरकार के प्रेस विभाग ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ‘इन घटनाओं के संबंध में अब तक 49 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और दो मामले दर्ज किए गए हैं। आगे की जांच चल रही है और इन निंदनीय कृत्यों के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाया जाएगा।’ बांग्लादेश के विभिन्न शहरों में सोमवार को ये प्रदर्शन गाजा में फलस्तीनियों पर हो रहे क्रूर हमलों का विरोध करने के लिए एक वैश्विक अभियान के तहत किए गए थे। छात्रों ने कक्षाओं और परीक्षाओं का बहिष्कार कर प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। प्रदर्शनों के आयोजकों ने लोगों से इजरायली सामान का बहिष्कार करने का आह्वान किया था।

मध्य प्रदेश के सभी हिस्सों में चिलचिलाती धूप ने लोगों को परेशान, इंदौर में पिछले 10 सालों का टूटा रिकॉर्ड

इंदौर  गर्मी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है. मध्य प्रदेश के सभी हिस्सों में चिलचिलाती धूप ने लोगों को परेशान कर दिया है. प्रदेश के कई जिलों में तापमान 44 डिग्री के पार पहुंच गया है. इंदौर में भी इस समय पारा 40 डिग्री तक पहुंच रहा है. इस साल की गर्मी ने इंदौर के पिछले 10 साल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. जबकि अभी अप्रैल का पहला पखवाड़ा ही चल रहा है. तापमान बढ़ने से आगजनी की भी घटनाएं सामने आ रही हैं. कई जगह तो गेहूं की खड़ी फसल में आग लग जा रही है. वहीं, बिजली के ट्रांसफार्मर भी इस भीषण गर्मी का शिकार हो रहे हैं. इंदौर में पिछले 10 सालों का टूटा रिकॉर्ड मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार यानी 7 अप्रैल को दिन का तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 3 डिग्री ज्यादा था. इस साल का यह सबसे अधिक तापमान था. वहीं 7 अप्रैल के तापमान ने तारीखों के लिहाज से इंदौर में पिछले 10 सालों के 2 रिकॉर्ड को तोड़ दिया. इनमें 2020 में 16 अप्रैल को 39.7 डिग्री सेल्सियस और 2023 में 17 अप्रैल को 39.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया था. हालांकि, 2019 में अप्रैल का सबसे अधिक तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस था, जो पिछले 10 सालों का रिकॉर्ड था. इस तरह, इस साल के तापमान ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. कई शहरों में 40 डिग्री के पार पहुंचा तापमान मौसम विभाग के अनुसार, इंदौर के अलावा नर्मदापुरम और रतलाम जैसे शहरों में सोमवार को सीजन का सबसे ऊंचा तापमान देखा गया, जबकि प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी तापमान 40 डिग्री से ऊपर दर्ज हुआ. मौसम विभाग की माने तो, मंगलवार को भी अत्यधिक गर्मी बनी रहेगी. साथ ही, 9-10 अप्रैल को प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी तापमान में और वृद्धि हो सकती है, जिससे गर्मी का असर और भी बढ़ने की संभावना है. तापमान बढ़ने के कारण सोमवार को इंदौर के परदेसीपुरा में एक ट्रांसफार्मर में अचानक आग लग गई. इससे पूरा ट्रांसफार्मर जलकर खाक हो गया. जिस वजह से इस भीषण गर्मी में स्थानीय लोगों की परेशानियां और बढ़ गई. कई शहरों में हीट वेव की जताई जा रही आशंका मौसम विभाग ने प्रदेश के श्योपुर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी, गुना, नीमच, मंदसौर और रतलाम जिलों में लू का अलर्ट जारी किया है, जबकि इंदौर, उज्जैन और धार में रातों में भी तापमान काफी ऊंचा रहेगा. इन इलाकों में विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है. इसके अलावा 9 और 10 अप्रैल को भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में हीट वेव चलने की संभावना जताई जा रही है. इस भीषण गर्मी से राहत की उम्मीद 11 अप्रैल से जताई जा रही है, जब पश्चिमी विक्षोभ के चलते हल्की बारिश की संभावना बन रही है, लेकिन तब तक तेज गर्मी का असर बना रहेगा. सीजन का सबसे गर्म दिन रहा सोमवार सोमवार को मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों में सीजन का सबसे गर्म दिन रहा. मौसम विभाग के अनुसार, नर्मदापुरम में तापमान 44.3 डिग्री और रतलाम में 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में भी तापमान 40 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया. भोपाल में 41.6, इंदौर 40.6, ग्वालियर 41.7, जबलपुर 40.7 और उज्जैन 42.0 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया.

राजनांदगांव की खेल प्रतिभाओं को मिला डॉ. रमन सिंह का उपहार

केंद्र से मिली 6 करोड़ 36 लाख का 4-लेन सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक की स्वीकृति विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की पहल पर ‘खेलो इंडिया’ योजना के तहत राजनांदगांव में बनेगा 6 करोड़ 36 लाख की लागत से अंतरराष्ट्रीय स्तर का एथलेटिक ट्रैक राजनांदगांव छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष एवं राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. रमन सिंह के सतत प्रयासों से केंद्र सरकार ने राजनांदगांव में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक निर्माण के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी है। राजनांदगांव की खेल प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने ‘खेलो इंडिया योजना’ के अंतर्गत राजनांदगांव में 4-लेन 800 मीटर के सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक के निर्माण को मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना के लिए लगभग 6 करोड़ 36 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। यह स्वीकृति भारत सरकार के युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के खेल विभाग द्वारा जारी की गई है, जिसे डॉ. रमन सिंह के आग्रह पर माननीय केंद्रीय खेल मंत्री श्री मनसुख मंडविया जी ने स्वीकृत किया है, पूर्व में विस अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने पत्र लिखकर और व्यक्तिगत मुलाकात में केंद्रीय खेल मंत्री से इस विषय पर आग्रह किया था। यह सिंथेटिक ट्रैक न केवल जिले के युवाओं को आधुनिक खेल अधोसंरचना उपलब्ध कराएगा बल्कि ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए उन्हें सशक्त बनाएगी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इस अवसर पर कहा, “यह एथलेटिक ट्रैक राजनांदगांव के युवाओं के सपनों को पंख देने वाला कदम है। मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय खेल मंत्री श्री मनसुख मंडविया जी का आभार प्रकट करता हूँ, जिन्होंने हमारी मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए यह स्वीकृति प्रदान की।

दतिया :चर्चा का विषय बनी राज्याभिषेक की घोषणा, राहुलदेव और परिणीति राजे को क्षत्रिय समाज से किया बहिष्कृत

दतिया  अब देश में लोकतंत्र का राज है, फिर भी पुरानी मान्यताओं के आधार राजशाही की परंपरा दतिया में है। यहां के राजपरिवार में विवाद गहरा गया है।परिवार के दामाद राहुल देव सिंह ने रामनवमी के दिन समारोह आयोजित कर राज्याभिषेक कर खुद को 14वां राजा घोषित कर दिया था। अपना नया नामकरण दतिया रियासतकाल के आखिरी राजा गोविंद सिंह जूदेव के नाम पर गोविंद सिंह जूदेव कर लिया है, वहीं दतिया राजपरिवार और क्षत्रिय समाज ने समारोह को पूरी तरह फर्जी करार देते हुए विरोध किया। समाज ने क्यों किया राहुल देव सिंह का विरोध     दतिया राजपरिवार के महाराजा गोविंद सिंह जूदेव दतिया के अंतिम शासक थे, जिनका निधन 1951 में हुआ। उनके दो पुत्र बलभद्र सिंह और जसवंत सिंह हुए। बलभद्र सिंह के बाद महाराजा किशन सिंह बने।     उनके निधन के बाद महाराज की पदवी राजेंद्र सिंह को मिली। उनकी मृत्यु के बाद 30 अप्रैल 2020 को उनके ज्येष्ठ पुत्र अरुणादित्य देव को 14वां राजा घोषित किया गया था।     ऐसे में वर्तमान राजा के होते हुए परिवार के दामाद के राज्याभिषेक को क्षत्रिय समाज ने परंपरा के विपरीत बताया है, क्योंकि वह जसवंत सिंह के परिवार के दामाद है। राजतिलक समारोह में जुटे दो दर्जन से अधिक राजघराने कार्यक्रम को भव्य रूप देने के लिए देशभर के लगभग दो दर्जन राजघरानों के राजा-महाराजा, सांसद, रेसलर और कंप्यूटर बाबा समेत कई विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। अयोध्या और वाराणसी से आए ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार और विधिविधान से रस्में अदा कीं। राहुल देव सिंह को पारंपरिक पोशाक पहनाकर पकड़ी पहनाई गई और उन्हें दतिया के 14वें राजा के रूप में स्वयंभू घोषित किया गया। ठाकुर समाज और राजपरिवार ने जताया विरोध दतिया राजघराने और ठाकुर समाज ने इस आयोजन को पूरी तरह अवैध बताते हुए राहुल देव सिंह और उनके परिवार को समाज से बेदखल कर दिया है। समाज की ओर से दतिया एसपी वीरेंद्र मिश्रा को ज्ञापन सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। घनश्याम सिंह ने यह भी कहा कि राहुल देव सिंह का शुरुआती जीवन बहुत संघर्षपूर्ण था। वे पहले डांसर बनना चाहते थे, फिर फिल्म इंडस्ट्री में किस्मत आजमाई, लेकिन जब इसमें सफलता नहीं मिली, तो वे राजनीति में आए और अपनी पत्नी को चुनाव में उतारा, जहां भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बाद में धर्म की ओर रुझान हुआ और वे महामंडलेश्वर बन गए। अब उन्हें महाराजा बनने की लालसा हो गई है। दतिया रियासत का ऐतिहासिक क्रम महाराजा गोविंद सिंह दतिया के अंतिम शासक थे, जिनका निधन 1951 में हुआ। उनके दो पुत्र – बलभद्र सिंह और जसवंत सिंह थे। बलभद्र सिंह के बाद महाराजा किशन सिंह, फिर महाराजा राजेंद्र सिंह और अंतत 30 अप्रैल 2020 को अरुणादित्य देव को 14वां राजा घोषित किया गया। इस लिहाज से समाज का दावा है कि राहुल देव सिंह का राजतिलक पूर्णत अवैध और परंपरा के विपरीत है। दतिया किले में हुई समाज की बैठक रविवार को दतिया किले में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें ठाकुर समाज और राजघराने के वरिष्ठ सदस्य शामिल हुए। बैठक में राहुल देव सिंह और उनके परिवार को समाज से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया। राहुल देव सिंह ने भी रखा अपना पक्ष विरोध को लेकर राहुल देव सिंह का कहना है कि जिसको उनका यह कदम बुरा लग रहा है, उसकी अपनी राय हो सकती है, लेकिन उन्होंने अपनी वंश परंपरा को निभाया है। कुछ लोग उनके समाज से बहिष्कृत करने की बात कह रहे हैं तो कहने दो। वसीयत को बताया था वजह राज्याभिषेक के आमंत्रण बांटे जाने के बाद से ही विवाद गहरा गया। इसके बाद राजपरिवार के संरक्षक पूर्व विधायक घनश्याम सिंह और वर्तमान महाराज अरुणादित्य देव ने आयोजन को गलत बताया था। उन्होंने राहुल देव सिंह की इस बात को भी गलत बताया कि उनकी दादी सास पद्माकुमारी की वसीयत में दामाद के राज्याभिषेक की बात है, जबकि पूर्व में भी राजघराने में जमीन को लेकर विवाद के दौरान ही उनकी वसीयत सामने आ चुकी है। उसमें ऐसा कोई उल्लेख नहीं था। घनश्याम सिंह ने वसीयत के ही कूटरचित होने का दावा किया था।

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