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वक्फ बिल को संसद की मंजूरी मिलते ही मुस्लिम समुदाय के लोग भड़क उठे, सड़क पर उतरकर विरोध जताया

नई दिल्ली वक्फ बिल को संसद की मंजूरी मिलते ही पश्चिम बंगाल, गुजरात समेत कई राज्यों के मुसलमान भड़क उठे। उन्होंने सड़क पर उतरकर जमकर विरोध जताया। जुम्मे की नमाज के बाद कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद जैसे शहरों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने वक्फ बिल के खिलाफ नारेबाजी की और सरकार से इसे वापस लेने की अपील की। बंगाल की राजधानी में कई लोगों ने हाथों में बैनर ले रखे थे, जिसमें ‘हम वक्फ बिल को खारिज करते हैं’ जैसे नारे लिखे गए थे। वक्फ संशोधन विधेयक 2025 बुधवार को लोकसभा और फिर गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया, जहां लंबी बहस के बाद इसे पारित कर दिया गया। गुजरात के अहमदाबाद से सामने आए विजुअल्स में मुस्लिम संगठन वक्फ बिल के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए दिखाई दिए। लोगों ने ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ और ‘काला कानून वापस लो’ जैसे नारे भी लगाए। प्रदर्शन कर रहे शोएब रजा नामक युवक ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, ”यह सरकार मंदिरों की जमीन चोरी करती है। राम मंदिर की जमीन को चोरी किया और अब मस्जिदों की जमीन चोरी करने की फिराक में हैं।” इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कई लोगों को हिरासत में भी लिया। उधर, चेन्नई में भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। यहां एक्टर विजय की तमिलगा वेत्री कझगम ने भी राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की। चेन्नई और कोयंबटूर और तिरुचिरापल्ली जैसे शहरों में टीवीके कार्यकर्ताओं ने इकट्ठे होते हुए ‘वक्फ विधेयक को खारिज करो’ और ‘मुसलमानों के अधिकार मत छीनो’ जैसे नारे लगाए। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी शुक्रवार को मुस्लिम संगठन के लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उनके हाथों में भी वक्फ बिल के खिलाफ लिखे नारे वाली बैनर और पोस्टर थे। बिल के खिलाफ कोर्ट पहुंचे कांग्रेस सांसद कांग्रेस ने वक्फ बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने याचिका दायर करते हुए वक्फ बिल को मुस्लिम समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण वाला बताया है। बीजेपी ने कांग्रेस समेत विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष चाहे तो संसद में पारित वक्फ (संशोधन) विधेयक को अदालत में चुनौती दे सकता है, लेकिन उन्हें इस मुद्दे पर अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को भड़काने और तुष्टीकरण की तुच्छ राजनीति करने से बचना चाहिए। वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, “कांग्रेस के कुछ कानूनी विशेषज्ञ बार-बार कह रहे हैं कि यह (विधेयक) असंवैधानिक है और वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्हें अदालत जाने दें। उन्हें कोई नहीं रोक रहा है।”

अमेरिका द्वारा व्यापारिक साझेदारों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए जाने के बाद चीन ने WTO में मुकदमा किया दायर

बीजिंग चीन ने शुक्रवार को अमेरिका पर पलटवार करते हुए सभी आयातित अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर 34 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया। यह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीनी एक्सपोर्ट पर 34 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले के जवाब में किया गया है। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, 10 अप्रैल से अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ लगाए जाएंगे। अमेरिका द्वारा व्यापारिक साझेदारों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए जाने के बाद चीन ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में मुकदमा दायर किया है। बीजिंग के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि उसने सात दुर्लभ पृथ्वी तत्वों पर एक्सपोर्ट्स कंट्रोल भी लगाया है, जिसमें गैडोलीनियम – जिसका इस्तेमाल आम तौर पर एमआरआई में किया जाता है – और यिट्रियम, जिसका इस्तेमाल उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में किया जाता है- शामिल है। इसके अलावा, मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “चीन ने डब्ल्यूटीओ विवाद निपटान तंत्र के तहत मुकदमा दायर किया है।” इसके अलावा, चीन ने 11 अमेरिकी रक्षा कंपनियों को अविश्वसनीय यूनिट लिस्ट में जोड़ा है और 16 अमेरिकी फर्मों पर निर्यात नियंत्रण लगाने जा रहा है। जनवरी में ट्रंप के व्हाइट हाउस में लौटने के बाद से वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव और बढ़ गया है। टैरिफ को लेकर अमेरिका और दुनियाभर के कई देशों से विवाद चल रहा है। दो अप्रैल को डोनाल्ड ट्रंप ने चीन, भारत समेत कई देशों के खिलाफ बढ़े हुए टैरिफ का ऐलान किया था। इसके अलावा, ट्रंप चीन से फेंटेनाइल ड्रग्स को लेकर भी काफी नाराज हैं। पिछले साल चीन ने अमेरिका से लगभग 164 बिलियन डॉलर का सामान आयात किया था, जो चार साल में सबसे कम था। वित्त मंत्रालय ने 34% टैरिफ की घोषणा करते हुए एक बयान में कहा, “अमेरिका की कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों का पालन नहीं करती है, चीन के वैध और कानूनी अधिकारों और हितों को गंभीर रूप से कमजोर करती है, और यह एकतरफा है।” दोनों सरकारों के बीच आर्थिक संघर्ष दोनों देशों की निजी कंपनियों तक फैल गया है।

अब ट्रंप प्रशासन अमेरिकी सेना से भी छंटनी करने की योजना बना रहा, कहा-इतने सैनिकों की जरूरत नहीं: रिपोर्ट

वाशिंगटन अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से कई विभागों को बंद करने और फेडरल कर्मचारियों की छंटनी का सिलसिला जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सरकारी खर्चों को कम करने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी यानी DOGE का गठन भी किया था। USAID, शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग जैसे विभागों से हजारों कर्मचारियों को काम से निकाले जाने के बाद अब ट्रंप प्रशासन अमेरिकी सेना से भी छंटनी करने की योजना बना रहा है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा विभाग करीब 90 हजार सैनिकों को हटाकर सैन्य बल में कटौती करने जा रहा है। रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है। वेबसाइट ने मामले से परिचित तीन अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया है कि अमेरिकी रक्षा विभाग बढ़ते वित्तीय दबाव के कारण सेना से लगभग 90,000 सक्रिय सैनिकों की कटौती पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चर्चा के दौरान सैन्य बल की मौजूदा क्षमता को कम करने की बात की गई है। बता दें कि फिलहाल अमेरिकी सेना में 4,50,00 सैनिक सक्रिय रूप से जुड़े हैं। कटौती के बाद इसे 3,60,000 से 4,20,000 किए जाने की संभावना है। बजट में होगी कटौती इससे पहले DOGE के साथ कदम मिलाते हुए अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पेंटागन को फिजूलखर्ची को कम करने और बजट में 8% की कटौती करने की योजना तैयार करने का निर्देश दिया भी दिया था। अमेरिका के रक्षा बजट की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2025 के लिए लगभग 849.8 बिलियन डॉलर बजट रहने का अनुमान लगाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में अमेरिका की घटती उपस्थिति के बीच इस तरह की चर्चा की जा रही है। हालांकि चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका इंडो-पैसिफिक में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश भी कर रहा है। इस्तीफा देने का मौका दे रही सरकार जानकारी के मुताबिक कम से कम छह अमेरिकी संघीय सरकारी एजेंसियां अपने कर्मचारियों को इस्तीफा देने का अवसर दे रही हैं। एक संक्षिप्त ज्ञापन में हेगसेथ ने कर्मचारियों को स्वैच्छिक प्रारंभिक सेवानिवृत्ति की पेशकश की थी। एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने बताया है कि पेंटागन के बजट में 5% से 8% की कटौती के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लगभग 50,000 से 60,000 नौकरियों में कटौती की जाएगी।

अब प्रधानमंत्री मोदी को बांग्लादेश से मिला खास तोहफा, 10 साल पहले पीएम मोदी ने मोहम्मद यूनुस को दिया था गोल्ड मेडल

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के दौरे पर हैं। यहां पर पीएम मोदी ने बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस और पीएम मोदी के बीच मुलाकात भी हुई। इस खास मौके पर मोहम्मद यूनुस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खास उपहार दिया। दरअसल, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने पीएम नरेंद्र मोदी को एक तस्वीर उपहार के तौर पर दी। ये तस्वीर 03 जनवरी 2015 की है। इसी दिन पीएम मोदी ने 102वीं इंडियन साइंस कांग्रेस में प्रोफेसर यूनुस को गोल्ड मेडल दिया था। इस तस्वीर में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस नजर आ रहे हैं। मोहम्मद यूनुस के ऑफिस ने शेयर की पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रोफेसर यूनुस के कार्यालय ने एक पोस्ट साझा की है। इस पोस्ट दो फोटो शेयर की गई है। इस पोस्ट में लिखा गया है कि प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस शुक्रवार को बैंकॉक में अपनी द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक तस्वीर पेश कर रहे हैं। यह तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 3 जनवरी, 2015 को 102वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस में प्रोफेसर यूनुस को स्वर्ण पदक प्रदान करने के बारे में है। अंतरिम सरकार के गठन के बाद पहली बार मिले दोनों नेता  जानकारी दें कि बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद ये पहला मौका है जब पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस के बीच मुलाकात हुई है। दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा भी हुई। बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर चिंता जाहिर की। दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर हुई चर्चा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस के बीच किन मुद्दों पर चर्चा की गई, इसकी जानकारी विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने विस्तृत तौर पर दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने प्रो. यूनुस को बताया कि भारत बांग्लादेश के साथ सकारात्मक और रचनात्मक संबंध बनाने की इच्छा रखता है। विक्रम मिसरी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी आग्रह किया कि माहौल को खराब करने वाली किसी भी बयानबाजी से बचना चाहिए। सीमा पर कानून का सख्त पालन और अवैध सीमा पार करने की रोकथाम सीमा सुरक्षा और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

बजट सत्र को बेहद उत्पादक बताते हुए कहा कि संसद ने नए कीर्तिमान स्थापित किए, 17 घंटे से अधिक चली चर्चा

नई दिल्ली केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बजट सत्र 2025 के समापन की जानकारी दी। उन्होंने इस सत्र को बेहद उत्पादक बताते हुए कहा कि संसद ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। रिजिजू ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्यों, अध्यक्षों, स्पीकर और राजनीतिक दलों के नेताओं का आभार जताया, जिनके सहयोग से यह संभव हुआ। रिजिजू ने बताया कि इस सत्र में राज्यसभा ने 17 घंटे और 2 मिनट की लंबी चर्चा के साथ इतिहास रचा। संशोधन विधेयक पर यह चर्चा हुई, जिसने 1981 के 15 घंटे 51 मिनट के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया। यह बहस 3 अप्रैल को सुबह 11 बजे शुरू हुई और 4 अप्रैल को तड़के 4:02 बजे तक चली। खास बात यह रही कि इस दौरान एक भी व्यवधान नहीं हुआ। रिजिजू ने इसे एक बड़ी उपलब्धि करार देते हुए कहा कि इस रिकॉर्ड को तोड़ना मुश्किल होगा। लोकसभा में भी सत्र बेहद सफल रहा। यहां 13 घंटे से अधिक समय तक रेलवे, ऊर्जा, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय से जुड़े अनुदानों की मांगों पर चर्चा हुई। वहीं, राज्यसभा में शिक्षा, रेलवे, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और गृह मंत्रालय के कामकाज पर विचार-विमर्श हुआ। रिजिजू ने कहा कि दोनों सदनों में चर्चा के दौरान आलोचना, सुझाव और स्पष्टीकरण का स्वस्थ आदान-प्रदान हुआ, लेकिन कोई स्थगन या व्यवधान नहीं देखा गया। उन्होंने संसदीय टीम के सहयोगियों अर्जुन मेघवान और एल. मोहन, सचिव (संसदीय विभाग) और अन्य अधिकारियों को भी धन्यवाद दिया। रिजिजू ने कहा, “हमने नियमों, परंपराओं और प्रक्रियाओं का सम्मान करते हुए संसद का संचालन किया। सरकार की ओर से हम प्रधानमंत्री, सभी दलों के नेताओं और फ्लोर लीडर्स के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।” इस सत्र की उत्पादकता की लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति पहले ही सराहना कर चुके हैं। रिजिजू ने इसे दोहराते हुए कहा कि सदस्यों के धैर्य और योगदान से यह संभव हुआ। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के लिए भी समय दिया और कहा कि कोई स्पष्टीकरण चाहिए हो, तो पूछा जा सकता है। रिजिजू ने इसे लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बताया और कहा कि सरकार सभी आलोचनाओं को स्वीकार करती है, साथ ही बेहतर कामकाज के लिए सुझावों का भी सम्मान करती है। इस सत्र ने संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है।

बुद्ध का संदेश : विदेश यात्राओं में पीएम मोदी का बौद्ध धर्म पर जोर, विशेष महत्व देते नजर आते हैं

बैंकॉक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और थाई पीएम पैतोंगतार्न शिनावात्रा ने शुक्रवार को थाईलैंड के प्रसिद्ध ऐतिहासिक बौद्ध मंदिर ‘वाट फो’ का दौरा किया। थाइलैंड के बाद पीएम मोदी श्रीलंका का दौरा करेंगे जहां वह अनुराधापुरा में महाबोधि मंदिर जाएंगे। अपनी विदेश यात्राओं में खासतौर से पीएम मोदी बौद्ध धर्म को विशेष महत्व देते नजर आते हैं। 2024 में भारत-आसियान शिखर सम्मेलन में, प्रधानमंत्री मोदी ने लाओस के राष्ट्रपति थोंगलाउन सिसोउलिथ को एक पुरानी पीतल की बुद्ध प्रतिमा भेंट की। उसी वर्ष, भारत ने भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों के कई पवित्र अवशेष थाईलैंड भेजे। भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों, अरहंत सारिपुत्त और अरहंत महा मोग्गलाना के अवशेषों को एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा बैंकॉक ले जाया गया और थाईलैंड के चार शहरों में 25 दिनों तक प्रदर्शित किया गया। 2023 में, प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क में बाल बोधि वृक्ष का दौरा किया, जिससे भारत और जापान के बीच गहरे बौद्ध संबंधों को मजबूती मिली। भारत ने पहले वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन की भी मेजबानी की, जिसमें बौद्ध दर्शन के माध्यम से समकालीन चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए विद्वानों को एक साथ लाया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बुद्ध की शिक्षाएं वैश्विक मुद्दों का समाधान प्रदान करती हैं। 2022 में, पीएम मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा पर लुम्बिनी, नेपाल का दौरा किया, भारत अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्कृति और विरासत केंद्र की आधारशिला रखी। उसी वर्ष, भारत ने भगवान बुद्ध के चार पवित्र अवशेष, जिन्हें कपिलवस्तु अवशेष के नाम से जाना जाता है, मंगोलिया भेजे। वहां 11 दिनों तक मंगोलियाई बुद्ध पूर्णिमा समारोह के साथ उनका प्रदर्शन किया गया। 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल अवशेषों के साथ उलानबटार में गंडन मठ परिसर में बत्सागान मंदिर गया, जहां बौद्ध कूटनीति और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला गया। 2019 में, पीएम मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति महामहिम खल्टमागिन बटुल्गा ने संयुक्त रूप से उलानबटार में ऐतिहासिक गंदन तेगचेनलिंग मठ में स्थापित भगवान बुद्ध और उनके दो शिष्यों की एक प्रतिमा का अनावरण किया। 2018 में, पीएम मोदी ने सिंगापुर में बुद्ध टूथ रेलिक मंदिर का दौरा किया, जिससे सिंगापुर की बौद्ध विरासत के प्रति भारत का सम्मान प्रदर्शित हुआ और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती मिली।2017 में श्रीलंका की अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी कोलंबो में अंतरराष्ट्रीय वेसाक दिवस समारोह को संबोधित किया और गंगारामया बौद्ध मंदिर का दौरा किया, जिससे भारत-श्रीलंका के सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध और गहरे हुए। 2016 में, वियतनाम की अपनी यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने हनोई में क्वान सु पैगोडा का दौरा किया, बौद्ध भिक्षुओं के साथ बातचीत की और दक्षिण पूर्व एशिया में बौद्ध कूटनीति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के साथ भारत के बौद्ध संबंधों को मजबूत किया। उन्होंने चीन के शीआन में दा शिंगशान मंदिर और बिग वाइल्ड गूज पैगोडा का दौरा किया, जिससे भारत और चीन के बीच ऐतिहासिक बौद्ध आदान-प्रदान मजबूत हुआ। मंगोलिया में उन्होंने गंडन मठ का दौरा किया, जहां उन्होंने दोनों देशों की साझा आध्यात्मिक विरासत पर जोर दिया। श्रीलंका में उन्होंने अनुराधापुरा में श्री महाबोधि वृक्ष को श्रद्धांजलि अर्पित की, 2014 में, प्रधानमंत्री मोदी ने क्योटो, जापान का दौरा किया, जहाँ उन्होंने तोजी और किन्काकू-जी मंदिरों का भ्रमण किया, जिससे भारत-जापान बौद्ध संबंधों को मजबूती मिली। उन्होंने क्योटो बौद्ध संघ द्वारा आयोजित एक लंच में भी भाग लिया, जो वैश्विक स्तर पर बौद्ध नेताओं के साथ जुड़ने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। घरेलू स्तर पर, पीएम मोदी की सरकार ने बौद्ध विरासत को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनके नेतृत्व में विकसित बौद्ध सर्किट, भगवान बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को दर्शाता है। इन पवित्र स्थानों पर यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए, बौद्ध सर्किट पर्यटक ट्रेन (महापरिनिर्वाण एक्सप्रेस) शुरू की गई, जो भारत और नेपाल के सबसे प्रतिष्ठित बौद्ध स्थलों को कवर करते हुए एक विसर्जित तीर्थयात्रा अनुभव प्रदान करती है। इसके अलावा, कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने तीर्थ स्थलों तक पहुंच में काफी सुधार किया है। नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार ने भारत को बौद्ध शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में फिर से स्थापित किया। सरकार ने बौद्ध साहित्य के संरक्षण को सुनिश्चित करते हुए पाली को एक शास्त्रीय भाषा के रूप में भी मान्यता दी। पीएम मोदी का बौद्ध धर्म पर जोर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नेतृत्व के प्रति भारत के समर्पण को दर्शाता है। बौद्ध विरासत के साथ उनका गहरा जुड़ाव शांति, सद्भाव और साझा सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बौद्ध देशों के साथ संबंधों को गहरा करके और अपनी बौद्ध विरासत को पुनर्जीवित करके, भारत बौद्ध धर्म में बताए गए शांति और ज्ञान को बढ़ावा देने वाले वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करना जारी रखता है।

पीएम मोदी ने कहा- नांदेड़ में हुई दुर्घटना में लोगों की मृत्यु से दुःखी हूं, पीड़ित परिवारों को मदद का भी ऐलान

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुई दुर्घटना में लोगों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य होने की कामना की। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख और घायलों को 50,000 रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने पीएम मोदी की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए लिखा, ”महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुई दुर्घटना में लोगों की मृत्यु से दुःखी हूं। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति संवेदनाएं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता कर रहा है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी और घायलों को 50,000 रुपए दिए जाएंगे।” इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नांदेड़ हादसे पर दुख जताया और मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 5 लाख की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज सुबह नांदेड़ जिले के असेगांव में एक दुर्घटना में कुछ महिलाओं की मृत्यु हो गई, जब 11 महिला मजदूरों को ले जा रही एक ट्रैक्टर ट्रॉली एक कुएं में गिर गई। मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। ये महिलाएं हिंगोली जिले के गुंजगांव की रहने वाली थीं और कृषि कार्य के लिए जा रही थीं। महिलाओं को कुएं से निकालने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है और स्थानीय उप-कलेक्टर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित पूरी टीम मौके पर मौजूद है। तीन महिलाओं को सुरक्षित निकाल लिया गया है। हम हिंगोली और नांदेड़ प्रशासन दोनों के संपर्क में हैं। मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।” बताया जा रहा है कि खेती के काम के लिए जा रही महिला मजदूरों का ट्रैक्टर कुएं में गिर गया। इस हादसे मे सात महिला मजदूरों की मौत हो गई, जबकि तीन को बचा लिया गया।

दिल्ली सीएम ने कहा- वक्फ संशोधन विधेयक पर खुशी जताते हुए ‘न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत तय’

नई दिल्ली लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी वक्फ संशोधन विधेयक के पास होने पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुशी जताई। उन्होंने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि इस विधेयक को मंजूरी मिलने से अन्याय और भ्रष्टाचार को खत्म कर न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत होगी। उन्होंने कहा कि 2013 में तुष्टिकरण के लिए रातों-रात वक्फ कानून को अतिवादी बना दिया गया, जिसके कारण दिल्ली के लुटियंस जोन की 123 वीवीआईपी संपत्तियां वक्फ को दे दी गईं। इस विधेयक के पारित होने से देश के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है, जो न्याय और समानता को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक कई पोस्ट किए। सीएम रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज का दिन ऐतिहासिक है। संसद ने ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक – 2025’ को मंजूरी दे दी है, जो दशकों से चले आ रहे अन्याय और भ्रष्टाचार को खत्म कर न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत करेगा। 2013 में तुष्टिकरण के लिए रातों-रात वक्फ कानून को अतिवादी बना दिया गया, जिसके कारण दिल्ली के लुटियंस जोन की 123 वीवीआईपी संपत्तियां वक्फ को दे दी गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस ऐतिहासिक कदम से अब इसकी पारदर्शिता से निगरानी की जा सकेगी।” उन्होंने लिखा, “2013 में लाए गए संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों में कुल साढ़े 5 घंटे चर्चा हुई थी, जबकि इस विधेयक पर दोनों सदनों में 16 घंटे से ज्यादा की चर्चा हुई। मोदी सरकार ने संयुक्त समिति बनाई, जिसमें 38 बैठकें हुईं, 113 घंटे चर्चा हुई और 284 हितधारकों को शामिल किया गया। ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025’ को संसद के पटल पर लाने से पहले मोदी सरकार को देशभर से करीब एक करोड़ ऑनलाइन सुझाव मिले, जिनका विश्लेषण करने के बाद यह कानून बनाया गया, जो दर्शाता है कि जहां मोदी सरकार मुस्लिमों के साथ खड़ी है, वहीं विपक्ष केवल वोट बैंक की आड़ में गुमराह कर रहा है।” सीएम रेखा गुप्ता ने लिखा, “इस विधेयक के पारित होने से देश के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है, जो न्याय और समानता को सुनिश्चित करेगा। इसे समर्थन देने वाले सभी दलों और सांसदों का भी धन्यवाद। वक्फ बोर्ड को अधिक उत्तरदायी बनाना अनिवार्य था। यह विधेयक सुनिश्चित करेगा कि वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग न हो और इसका लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे। यह पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे करोड़ों लोगों को न्याय मिलेगा।”

कुछ आंतकवादी जंगलों में छिपे हुए हैं जो कि अपना‌ रूट भी बदल सकते हैं, सुरक्षा बलों की टीमें काम में जुटी

सांबा जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आतंकियों की हलचल देखी गई है जिसके बाद इलाके के लोगों में दहशत का माहौल बन गया है। आप को बता दें कि कठुआ और ऊधमपुर जिले के बीच के जंगलों में आतंकवादियों के छिपे होने के चलते अब हर जगह पर व्यापक सर्च अभियान चलाया जा रहा है। इसी बीच सुरक्षा बलों को यह सूचना मिली है कि यहां पर आतंकियों की गतिविधियां देखी गई है। जिला सांबा में आतंकवादियों के पुराने रूट बेई नाले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के एसओजी ने तलाशी अभियान चलाया है। इस दौरान एसओजी ने उन पुराने ठिकानों को खंगाला जो कि कुछ वर्ष पहले रूट रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ अभी भी कुछ आंतकवादी जंगलों में छिपे हुए हैं जो कि अपना‌ रूट भी बदल सकते हैं, जिससे पहले ही सतर्क होकर पुलिस टीमें तलाशी अभियान चला रही हैं।

तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष के अन्नामलाई ने किया साफ, वह किसी भी तरह की ‘रेस’ में शामिल नहीं हैं, सियासी हलचल तेज

कोयंबटूर तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष के अन्नामलाई ने शुक्रवार को साफ किया कि वह प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी में किसी तरह की प्रतिस्पर्धा की कोई गुंजाइश नहीं होती और यह पद सर्वसम्मति से तय किया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह किसी भी तरह की ‘रेस’ में शामिल नहीं हैं। इस बयान के बाद बीजेपी पद से उनके इस्तीफे के कयास लगाए जा रहे हैं। कोयंबटूर में मीडिया से बातचीत के दौरान जब अन्नामलाई से पूछा गया कि क्या वह तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार हैं, तो उन्होंने कहा, “मैं नए प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में नहीं हूं। मैं किसी भी प्रतिस्पर्धा में नहीं पड़ता।” अन्नामलाई से यह भी पूछा गया कि क्या एआईएडीएमके 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के साथ गठबंधन करने की शर्त के रूप में उन्हें पद से हटवाना चाहती है? इस पर उन्होंने कहा कि वह इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि बीजेपी आने वाले दिनों में अच्छा प्रदर्शन करेगी और नए अध्यक्ष के चुनाव के वक्त इस पर बात होगी। वक्फ विधेयक पर दिया बड़ा बयान अन्नामलाई ने वक्फ विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि इससे गरीब मुसलमानों को फायदा पहुंचेगा। उन्होंने दावा किया कि 1913 से 2013 तक देशभर में 18 लाख एकड़ जमीन वक्फ के अधीन थी, लेकिन 2013 से 2025 के बीच 21 लाख एकड़ और जुड़ गई है। यानी अब कुल 39 लाख एकड़ जमीन वक्फ के अधीन हो गई है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के तिरुचेंदुरई में पूरे शहर को वक्फ घोषित कर दिया गया था और मंदिरों की जमीन को भी वक्फ संपत्ति बताने की कोशिश की गई थी। लेकिन संशोधन विधेयक से अब इन सभी विवादित मामलों का समाधान निकल आया है। वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण का आरोप अन्नामलाई ने दावा किया कि कई जगहों पर वक्फ की संपत्तियों पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने कहा, “पिछले साल वक्फ की 126 करोड़ रुपए की आय हुई थी। लेकिन कई जगहों पर कब्जा होने के कारण आय में गिरावट आई है। अब चार साल इंतजार करिए और देखिए कि वक्फ कितना पैसा कमाएगा और यह गरीब मुसलमानों को मिलेगा।” टीवीके के विरोध पर तंज वक्फ विधेयक के खिलाफ अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए अन्नामलाई ने कहा कि क्या उन्होंने इस मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष कोई आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई थी? उन्होंने कहा, “टीवीके आखिर विरोध किस चीज़ का कर रही है? कानून में क्या गलत है? उन्हें खुद भी नहीं पता कि वे किस चीज़ का विरोध कर रहे हैं।” एनईईटी मुद्दे पर डीएमके को घेरा अन्नामलाई ने डीएमके सरकार पर एनईईटी परीक्षा को लेकर “नाटक” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अब यह मामला पूरी तरह से खत्म हो चुका है। राष्ट्रपति द्वारा राज्य के विधेयक को खारिज कर दिए जाने के बाद अब डीएमके सरकार के पास कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने डीएमके सरकार को चुनौती देते हुए कहा, “अगर आपमें हिम्मत है तो सुप्रीम कोर्ट जाइए। लेकिन डीएमके सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएगी, क्योंकि एनईईटी परीक्षा को लागू करने का फैसला भी सुप्रीम कोर्ट ने ही दिया था।” मुरुगन मंदिर के अभिषेक पर विवाद मरुदामलाई भगवान मुरुगन मंदिर में हुए अभिषेक समारोह पर अन्नामलाई ने कहा कि जिस तरह से यह आयोजन हुआ, उससे यह संदेह पैदा हुआ कि यह ‘कुंभाभिषेकम’ था या “डीएमके सम्मेलन”। उन्होंने आरोप लगाया कि जबकि आम भक्तों को अनुमति नहीं दी गई, डीएमके के 750 खास लोगों को विशेष दर्शन पास दिए गए।

भारत समेत इन देशों में बॉयकॉट USA मुहिम तेज, ट्रंप के लिए जी का जंजाल बना ‘टैरिफ दांव’

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को विभिन्न देशों के खिलाफ रेसिप्रोकल टैरिफ (जवाबी शुल्क) की घोषणा करते हुए एक चार्ट दिखाया था, जिसमें भारत, चीन, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे देशों पर लगाई जाने वालीं नई टैक्स दरों का उल्लेख था। इस चार्ट के मुताबिक, भारत पर 26 फीसदी तो चीन पर 34 फीसदी (कुल 54 फीसदी) कर लगाया गया है। यूरोपीय देशों पर भी भारी भरकम टैक्स लगाया गया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि नई दरें तब तक लागू रहेंगी जब तक कि अमेरिका पिछले साल दर्ज किए गए 1.2 ट्रिलियन डॉलर के व्यापार असंतुलन को कम नहीं कर लेता। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप के इस कदम से दुनियाभर में खलबली है। अमेरिकी स्टॉक मार्केट में हाहाकार मचा हुआ है। गुरुवार को ही अमेरिकी बाजार नैस्डैक करीब 6% टूट गया और Dow Jones इंडेक्स में 1600 अंकोंकी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका पर मंदी का खतरा मंडराने की भी आशंका जताई जा रही है। कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि नए टैरिफ का बोझ अमेरिकी कंपनियों पर ही पड़ेगा और अंतत: अमेरिकी उपभोक्ताओं पर ही वे बोझ डाले जाएंगे। दूसरी तरफ कई देश जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे रहे हैं। इस बीच, अब सोशल मीडिया पर अमेरिकी वस्तुओं और खुद संयुक्त राज्य अमेरिका के बहिष्कार का आह्वान किया जाने लगा है। ट्रंप की घोषणा के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर #BoycottUSA ट्रेंड करने लगा है। इतना ही नहीं गूगल सर्च में भी इसे दुनियाभर में सर्च किया जाने लगा है। Google सर्च डेटा के अनुसार, भारत समेत करीब एक दर्जन देशों में लोग BoycottUSA के बारे में सर्च कर रहे हैं। ऐसे देशों में भारत के अलावा कनाडा, यूके, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्विटजरलैंड, स्वीडन, डेनमार्क, बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। गूगल पर लोग क्या सर्च कर रहे? न्यूजवीक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत से लेकर यूरोप और आस्ट्रेलिया तक लोग गूगल पर “अमेरिकी उत्पादों का बहिष्कार करें (us products to boycott)”, “अमेरिकी उत्पादों की सूची का बहिष्कार करें (list of American products to boycott)”, “अमेरिकी ब्रांडों का बहिष्कार करें (American brands to boycott)” और “अमेरिकी उत्पादों का बहिष्कार कैसे करें (how to boycott American products)” जैसे सवाल खोज रहे हैं। इतना ही नहीं, कई लोग अपनी वैकेशन ट्रिप कैंसल कर रहे हैं और अमेरिका नहीं जाने की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। कनाडाई लेखक जेफरी लुस्कोम्ब ने एक्स पर #BoycottUSA के साथ पोस्ट किया, “हमने पिछले महीने के लिए बुक की गई फ्लोरिडा की होली डे ट्रिप रद्द कर दी है। कनाडा में ही रहने का फैसला किया। सुना है कि कुछ अन्य कनाडाई लोगों ने भी ऐसा ही किया है। इसी तरह एक अन्य यूजर ने एक्स पर लिखा, “मैं अब कभी अमेरिका नहीं जाऊँगा। जहाँ तक संभव होगा, मैं अमेरिकी वस्तुओं और कंपनियों का बहिष्कार करूँगा।” अमेरिका में पर्यटकों की संख्या में गिरावट का अंदेशा रिसर्च फर्म टूरिज्म इकोनॉमिक्स ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि 2025 में अमेरिका की यात्रा में 5.5 फीसदी तक की गिरावट आने का अनुमान है। हालांकि, #BoycottUSA का ट्रेंड पहली बार नहीं चला है। जब डोनाल्ड ट्रम्प मे इस साल जनवरी में शपथ ग्रहण किया था, तभी से #BoycottUSA शब्द ऑनलाइन ट्रेंड करने लगा था। मार्च में, कनाडा, मैक्सिको, भारत और चीन समेत करीब पांच दर्जन देशों पर ट्रंप के टैरिफ दांव के बाद यूरोपीय संघ और कनाडा में इस तरह के हैशटैग और सर्च में तेजी से उछाल आया है।

राज्यसभा में फिल्म एल2 एमपुरान को लेकर विवाद पर सुरेश गोपी का चढ़ गया पारा, रिजिजू ने बढ़कर किया शांत

नई दिल्ली राज्यसभा में उस वक्त माहौल गरमा गया जब केंद्रीय मंत्री और मशहूर एक्टर सुरेश गोपी ने फिल्म एल2 एमपुरान को लेकर उठे विवाद पर खुलकर जवाब दिया। जैसे ही सीपीआई सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि फिल्म पर 2002 के गुजरात दंगों की झलक दिखाने की वजह से राजनीतिक दबाव डाला गया, सुरेश गोपी भड़क उठे और अपनी कुर्सी से खड़े होकर सफाई पेश की। सुरेश गोपी को तमतमाया देख केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बीच में दखल देकर उन्हें शांत कराया। जॉन ब्रिटास को जवाब देते हुए सुरेश गोपी ने कहा, “ये सिर्फ एक सच्चाई है, जिसे मैं हर भारतीय को बताना चाहता हूं। फिल्म के निर्माताओं पर सेंसर बोर्ड या किसी अन्य संस्था की कोई दबाव नहीं था। सुरेश गोपी ने ये भी खुलासा किया कि फिल्म के थैंक यू कार्ड से उनका नाम हटाने का फैसला खुद उनका था। जॉन ब्रिटास के आरोपों का सुरेश गोपी ने दिया जवाब गोपी उन्होंने कहा, “मैंने खुद फोन करके निर्माताओं से कहा कि मेरा नाम हटा दें। ये मेरा फैसला था और अगर ये झूठ निकले तो मैं हर सजा भुगतने को तैयार हूं।” उन्होंने बताया कि फिल्म से 17 हिस्से हटाने का निर्णय निर्देशक और मुख्य अभिनेता की सहमति से निर्माताओं ने खुद लिया था। इससे पहले भी सुरेश गोपी इस मुद्दे पर मीडिया से मुखातिब हो चुके हैं। इससे पहले उन्होंने तंज कसते हुए कहा था, “तो विवाद है क्या? कौन विवाद खड़ा कर रहा है? ये सब बिजनेस है, लोगों की मानसिकता से खिलवाड़ कर पैसा कमाने का तरीका है।” क्यो मचा है मोहनलाल की फिल्म एल2 एमपुरान पर बलाल दरअसल, मोहनलाल स्टारर फिल्म एल2 एमपुरान में 2002 के गुजरात दंगों को एक काल्पनिक रूप में दिखाया गया है, जिसमें पृथ्वीराज का किरदार जायेद मसीद इन घटनाओं से प्रभावित दिखता है। इस पर सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में आपत्ति जताई गई, जिसके बाद निर्माताओं ने सेंसर बोर्ड से संपर्क कर स्वेच्छा से 24 कट लगाए। इनमें एक किरदार का नाम बदलना, महिलाओं के खिलाफ हिंसा के दृश्य और धार्मिक स्थलों से जुड़े सीन हटाना शामिल है।

वक्फ संशोधन विधेयक पर बहस और मतदान के वक्त तृणमूल कांग्रेस के तीन सांसद अनुपस्थित थे, अब एक्शन लेंगी ममता बनर्जी!

कोलकाता बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) शुरू से ही वक्फ संशोधन विधेयक का पुरजोर विरोध करते हुए इस मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ मुखर रही है। इस बीच लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन विधेयक पर बहस और मतदान के वक्त तृणमूल कांग्रेस के तीन सांसद अनुपस्थित थे। तृणमूल सूत्रों के अनुसार, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का एक वर्ग इसको लेकर नाराज है। पार्टी इनकी अनुपस्थिति पर तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी से चर्चा के बाद इन तीनों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। पार्टी सूत्रों ने इसके संकेत दिए हैं। टीएमसी के ये सांसद रहे अनुपस्थित अनुपस्थित रहने वाले सदस्यों में घाटल के सांसद व अभिनेता दीपक अधिकारी उर्फ देव, बीरभूम की सांसद और अभिनेत्री शताब्दी राय और कूचबिहार के सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया शामिल हैं। इनमें बसुनिया ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कूचबिहार से पहली बार जीत दर्ज की थी।लोकसभा में तृणमूल के मुख्य सचेतक कल्याण बनर्जी ने कहा कि ये तीनों सदस्य संसद में वक्फ पर बहस के दौरान मौजूद नहीं थे। तृणमूल सूत्रों के अनुसार, इनमें से केवल देव ने ही संसदीय दल के सदस्य को बताया था कि वह शूटिंग के लिए झारखंड में हैं। इसलिए वह संसद में उपस्थित नहीं हो सकेंगे। बाकी दोनों सांसदों ने अपनी अनुपस्थिति को लेकर पार्टी को जानकारी नहीं दी थी। इस संबंध में कूचबिहार के सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया ने कहा कि अचानक एक अप्रैल को मुझे पता चला कि अगले दिन वक्फ विधेयक पेश किया जाएगा। मैं एक पारिवारिक समस्या में फंस गया था, इसलिए मैं नहीं जा सका। अगर मुझे थोड़ा पहले पता होता तो मैं निश्चित रूप से उस दिन संसद की कार्यवाही में शामिल हो जाता। सासंदों के उपस्थित ना रहने से नाराज हैं सीएम ममता इधर, अब पार्टी इन सांसदों के लिए क्या रास्ता अपनाती है, इस बारे में फिलहाल आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। तृणमूल संसदीय दल के सूत्रों के अनुसार, तीनों सांसदों के संबंध में पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी से चर्चा के बाद ही आगे का कदम उठाया जाएगा। ममता लोकसभा और राज्यसभा में तृणमूल संसदीय दल की अध्यक्ष हैं।

मुंबई इंडियंस ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का किया फैसला

लखनऊ लखनऊ सुपर जायंट्स और मुंबई इंडियंस के बीच आईपीएल 2025 का 16वां मुकाबला शुक्रवार को भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेई इकाना क्रिकेट स्टेडियम में खेला जा रहा है। ऋषभ पंत के नेतृत्व वाली लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम ने जारी सीजन में तीन मुकाबले खेले हैं और दो में उसे हार का सामना करना पड़ा। लखनऊ को दिल्ली कैपिटल्स ने एक करीबी मुकाबले में हराया था। इसके बाद टीम ने सनराइजर्स हैदराबाद को 5 विकेट से हराया। लेकिन तीसरे मैच में पंजाब किंग्स से आठ विकेट से हार गए। वहीं पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस ने अपने शुरुआती दोनों मुकाबले गंवाए थे। हार्दिक पांड्या के नेतृत्व वाली टीम को पहले मैच में चेन्नई और दूसरे मैच में गुजरात ने हराया था। मुंबई ने कोलकाता के खिलाफ 8 विकेट से जीत दर्ज की थी। मुंबई ने जीता टॉस मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पांड्या ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। रोहित शर्मा हुए चोटिल मुंबई इंडियंस के अनुभवी बल्लेबाज रोहित शर्मा घुटने में लगी चोट के कारण लखनऊ के खिलाफ मैच से बाहर हो गए हैं। उन्हें शुक्रवार को प्रैक्टिस के दौरान चोट लगी। लखनऊ सुपर जायंट्स प्लेइंग इलेवन लखनऊ सुपर जाइंट्स (प्लेइंग इलेवन): एडेन मार्कराम, मिशेल मार्श, निकोलस पूरन, ऋषभ पंत (विकेटकीपर/कप्तान), आयुष बदोनी, डेविड मिलर, अब्दुल समद, शार्दुल ठाकुर, दिग्वेश सिंह राठी, आकाश दीप, अवेश खान मुंबई इंडियंस प्लेइंग इलेवन मुंबई इंडियंस (प्लेइंग इलेवन): विल जैक, रयान रिकेल्टन (विकेटकीपर), सूर्यकुमार यादव, हार्दिक पांड्या (कप्तान), नमन धीर, राज बावा, मिशेल सेंटनर, ट्रेंट बोल्ट, अश्विनी कुमार, दीपक चाहर, विग्नेश पुथुर  

हिंदू संगठनों राम नवमी पर रैली निकालने की इजाजत तो मिल गई है लेकिन शर्तें भी लगाई, हाई कोर्ट ने अब आदेश जारी किया

कोलकाता पश्चिम बंगाल में राम नवमी के दिन रैली निकालने को लेकर कोलकाता पुलिस द्वारा इजाजत न मिलने पर आक्रोश दिख रहा था। इस मामले में हाई कोर्ट ने अब आदेश जारी किया है, जिसमें हिंदू संगठनों राम नवमी पर रैली निकालने की इजाजत तो मिल गई है लेकिन शर्तें भी लगाई गई हैं, जिसके तहत रैली में हथियार इस्तेमाल नहीं किए जाएंगे। दरअसल, कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए जीटी रोड के रास्ते पिछले 15 वर्षों से चली आ रही पारंपरिक रामनवमी शोभायात्रा की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। दूसरी ओर इसके जवाब में अंजनी पुत्र सेना नामक संगठन ने इस पारंपरिक मार्ग पर रैली निकालने की अनुमति के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और इसी पर अब कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। हिंदू संगठनों ने मांगी थी परमिशन जिस रूट से यात्रा के लिए पुलिस ने परमिशन दी थी, वह अंजनी पुत्र सेना, वीएचपी और दुर्गा वाहिनी के लोगों को मंजूर नहीं था। हिंदू संगठन पुराने रूट पर ही यात्रा की मांग कर रहे थे। ऐसे में कोर्ट ने हिदू संगठनों की मांगों को कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा मान लिया है। उन्हें उसी पुराने रूट से यात्रा की अनुमति दी गई गई है। हाई कोर्ट ने इजाजत के साथ लगाई हैं शर्तें हालांकि, हाई कोर्ट ने कई तरह की शर्तें भी लगाई हैं। इसके तहत लोगों को कहा गया है कि किसी भी तरह की कोई बाइक रैली नहीं होगी। कोर्ट ने हथियार या गोला-बारूद नहीं होगा। रैली में डीजे या बाइक नहीं होगी। सभी रैलियां जीटी रोड के एक ही मार्ग पर होंगी। पुलिस को स्थिति का ध्यान रखने को कहा गया है। हिंदू संगठनों का कहना है कि यह लगातार दूसरा साल है, जब प्रशासन ने इस जुलूस पर रोक लगाई है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार को ‘जय श्री राम’ के नारे से परेशानी है। इन विवादों के बीच पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने रामनवमी के अवसर पर शांति की अपील करते हुए कहा कि सभी को पूजा करने का अधिकार है, लेकिन किसी को भी दंगा जैसी स्थिति पैदा नहीं करनी चाहिए।

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