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आधे मध्यप्रदेश में आंधी और बारिश, हरदा-बैतूल में ओले गिरने का अलर्ट! आज इन जिलों में कहर बरपाने ​​वाला है मौसम

भोपाल  मध्यप्रदेश में गुरुवार को भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के चलते राज्य के कई हिस्सों में बारिश, आंधी और ओलावृष्टि हो सकती है। मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। किन जिलों में होगी बारिश और ओलावृष्टि? मौसम विभाग के अनुसार, खरगोन, खंडवा, हरदा और बैतूल में ओले गिरने की संभावना है। वहीं, ग्वालियर, जबलपुर, मुरैना, श्योपुर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सतना, रीवा, मैहर, पन्ना, कटनी, दमोह, सागर, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट, रायसेन, नर्मदापुरम, सीहोर जैसे जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। आंधी की गति 30 से 40 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मौसम में बदलाव की वजह क्या है? मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि प्रदेश में यह बदलाव ट्रफ, पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण हुआ है। यही वजह है कि कई जिलों में ओलावृष्टि और आंधी के साथ हल्की बारिश होने की संभावना बनी हुई है। इसलिए बदल रहा मौसम सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि ट्रफ, वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से प्रदेश में मौसम बदला है। गुरुवार को ओलावृष्टि, आंधी और हल्की बारिश हो सकती है। सिवनी में तापमान 28.2 डिग्री, नर्मदापुरम में 40.2 डिग्री सेल्सियस रहा इससे पहले बुधवार को प्रदेश के कई जिलों में मौसम बदला रहा। मंदसौर के गरोठ और शामगढ़ में शाम को ओले गिरे। वहीं, डिडौरी, छिंदवाड़ा, मंडला, सिवनी, उमरिया समेत कई शहरों में बारिश हुई। भोपाल में दोपहर तक बादल छाए रहे। बदले मौसम की वजह से दिन के तापमान में भी गिरावट हुई है। सिवनी में पारा 28.2 डिग्री, उमरिया में 29.3 डिग्री, सीधी में 30.8 डिग्री, पचमढ़ी में 31 डिग्री, रीवा में 32 डिग्री और छिंदवाड़ा में 32.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इधर, नर्मदापुरम, रतलाम, धार और शिवपुरी में पारा बढ़ा रहा। नर्मदापुरम में सबसे ज्यादा 40.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 36.4 डिग्री, इंदौर में 37 डिग्री, ग्वालियर में 36.7 डिग्री, उज्जैन में 38.5 डिग्री और जबलपुर में 30.3 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। अगले 2 दिन ऐसा मौसम     3 अप्रैल: खरगोन, खंडवा, हरदा, बैतूल में ओले गिर सकते हैं। ग्वालियर, जबलपुर, मुरैना, श्योपुर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सतना, रीवा, मैहर, पन्ना, कटनी, दमोह, सागर, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट, रायसेन, नर्मदापुरम, सीहोर में गरज-चमक और हल्की बारिश की स्थिति बनी रहेगी।     4 अप्रैल: इस दिन मौसम साफ हो जाएगा। हालांकि, भोपाल समेत कुछ जिलों में बादल छाए रह सकते हैं। अप्रैल में 7 से 10 दिन चल सकती है लू मध्यप्रदेश में अप्रैल महीने में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। पहले और दूसरे सप्ताह में हल्की बारिश हो सकती है। वहीं, दूसरे सप्ताह से लू भी चलेगी। सबसे गर्म आखिरी सप्ताह रहेगा। दिन का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पार हो सकता है। मौसम केंद्र भोपाल के वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वेदप्रकाश सिंह ने बताया- इस बार तापमान के सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। वहीं, प्रदेश में अप्रैल महीने में 7 से 10 दिन तक हीट वेव यानी लू का असर देखने को मिल सकता है।

आज पेश होगा भोपाल नगर निगम का बजट, फिर भी लगेगा जेब को झटका

 भोपाल भोपाल नगर निगम (बीएमसी) का गुरुवार, 3 अप्रैल को 2025-26 वित्तीय वर्ष के लिए बजट पेश करेगा। इस दौरान प्रस्तावित कर वृद्धि और बीएमसी आयुक्त के साथ असहमति को लेकर हंगामे की संभावना है। बजट परिषद की बैठक सुबह 11 बजे कुशाभाऊ ठाकरे आईएसबीटी में होगी, जिसकी अध्यक्षता निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी करेंगे। बजट के प्रमुख मुद्दों को लेकर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों ने बुधवार को ही बैठकें कर रणनीति तैयार कर ली हैं। कांग्रेस ने संपत्ति कर में 10% और जल एवं सीवेज करों में 15% की संभावित वृद्धि को लेकर महापौर और सत्तारूढ़ दल को चुनौती देने की तैयारी कर ली है। इस पर हंगामा होने की संभावना है। पिछले बार से बड़ा हो सकता है बजट बैठक में दो मुख्य एजेंडे पर चर्चा होगी, जिसमें बीएमसी का बजट और नए बीएमसी कार्यालय की अंतिम तैयारियां शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार 2025-26 के बजट में 3353 करोड़ रुपए के पिछले बजट से 200-500 करोड़ रुपये की वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके अलावा, भाजपा पार्षद ने बीएमसी कमिश्नर हरेंद्र नारायण के कथित अड़ियल रवैए के कारण उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश करने की भी तैयारी की है। शहर के विकास को ध्यान में रखकर बनाया बजट बैठक से पहले महापौर मालती राय ने बताया कि बजट शहर के विकास को ध्यान में रखकर बनाया गया है। उन्होंने कहा, बजट भोपाल के विकास पर केंद्रित होगा और शहर के लोगों की जरूरतों को पूरा करेगा। बैठक में राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों के नाम बदलने के प्रस्ताव भी शामिल होंगे, जिन पर आगे और बहस होने की संभावना है। विपक्ष ने इन मुद्दों में घेरने की बनाई है रणनीति बीएमसी की नेता प्रतिपक्ष शकिता जकि ने बताया कि बैठक में करों में अपेक्षित वृद्धि के खिलाफ एक बड़ा विरोध किया जाएगा और महापौर से उनके अपने घर के संपत्ति कर के अनुचित भुगतान के बारे में सवाल पूछे जाएंगे। जकि ने आगे कहा कि वे नाम बदलने के प्रस्ताव का विरोध करेंगे और यदि भाजपा पार्षद बीएमसी आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश करेंगे तो वे उनका समर्थन नहीं करेंगे।

शाहजहांपुर में दो वर्ष पहले जेंडर बदलवाने वाले शरद सिंह के घर बेटे का जन्म हुआ

शाहजहांपुर यूपी के शाहजहांपुर में दो वर्ष पहले जेंडर बदलवाने वाले शरद सिंह के घर बेटे का जन्म हुआ है. उनकी पत्नी ने निजी अस्पताल में ऑपरेशन से बेटे को जन्म दिया है. शरद सिंह का कहना है कि पिता बनने पर उन्हें बहुत खुशी हुई है. जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं. विषम परिस्थितियों से निकलकर आज जो खुशी मिली है वह शब्दों में बयां नहीं हो सकती. आपको बता दें कि काकोरी ट्रेन एक्शन के बलिदानी ठाकुर रोशन सिंह की प्रपौत्री सरिता सिंह ने वर्ष 2021-22 में जेंडर बदलवाने के लिए प्रक्रिया शुरू की थी. दरअसल, लड़की होने के बाद भी वह लड़कों की तरह थी. ऐसे में उन्होंने लखनऊ में हार्मोन थेरेपी करवाई, जिससे उनके चेहरे पर दाढ़ी उग आई थी. आवाज भी भारी हो गई थी. वर्ष 2023 की शुरुआत में उन्होंने मध्य प्रदेश के इंदौर में सर्जरी करा कर जेंडर बदलवा लिया था. वहीं, 27 जून 2023 को तत्कालीन डीएम उमेश प्रताप सिंह ने उन्हें जेंडर बदलवाने का प्रमाण पत्र शरद सिंह के नाम से दिया था. इसके बाद खुदागंज के नवादा दारोबस्त गांव के निवासी शरद सिंह ने 23 नवंबर 2023 को पीलीभीत के देवहा गांव निवासी महिला मित्र सविता सिंह से शादी कर ली थी. कल यानी बुधवार को सुबह प्रसव पीड़ा होने पर सविता सिंह को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शाम को ऑपरेशन से उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया. सरिता से शरद बनने का सफर सरिता, जो जन्म से महिला थीं, ने हमेशा खुद को पुरुष की तरह महसूस किया। लड़कों की तरह कपड़े पहनना और उनका हावभाव भी पुरुषों जैसा था। वर्ष 2022 में उन्होंने अपने इस आत्मबोध को अपनाने का निर्णय लिया और लखनऊ में हार्मोन थेरेपी कराई। धीरे-धीरे उनके चेहरे पर दाढ़ी उगने लगी और आवाज भारी हो गई। 2023 में उन्होंने मध्यप्रदेश के इंदौर में सर्जरी कराई और आधिकारिक रूप से पुरुष बन गए। 27 जून 2023 को तत्कालीन जिला अधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने उन्हें लिंग परिवर्तन का प्रमाण पत्र दिया और सरिता की नई पहचान शरद रोशन सिंह के रूप में स्थापित हुई। इसके बाद, 23 नवंबर 2023 को उन्होंने पीलीभीत निवासी अपनी महिला मित्र सविता से विवाह कर लिया। बेटे के जन्म से बढ़ी खुशियां बुधवार सुबह, सविता को प्रसव पीड़ा होने पर शाहजहांपुर के जैन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शाम 5 बजे उन्होंने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। पिता बनने की खुशी जाहिर करते हुए शरद ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे सुखद पल है। चिकित्सा विज्ञान की सफलता बरेली के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सुदीप सरन के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति में महिला और पुरुष दोनों के लक्षण हों तो मेडिकल साइंस की मदद से लिंग परिवर्तन संभव है। इसमें हार्मोनल थेरेपी और सर्जरी के जरिए व्यक्ति की शारीरिक विशेषताएं बदली जा सकती हैं, जिससे वे अपनी इच्छानुसार नया जीवन अपना सकते हैं। सरकारी स्कूल में सहायक अध्यापक हैं शरद शरद रोशन सिंह का घर शाहजहांपुर के नवादा दरोवस्त गांव में है और वे एक सरकारी स्कूल में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। उनके पिता बनने की खबर से परिवार और गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है। यह घटना समाज के लिए एक नई सोच और प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। सरिता सिंह से शरद सिंह तक का सफर शरद सिंह ने बताया कि मेरी पत्नी सविता सिंह ने 10 से 15 साल पहले खुली आंखों से जो सपना देखा था, आज वह सकार हुआ है. शरद के मुताबिक, उनके परिवार में 26 साल बाद पुत्र का जन्म हुआ है. हर इंसान का सपना होता है कि उसे संतान का सुख की प्राप्ति हो लेकिन जिन परिस्थितियों से निकलकर पिता बनने का सुख मिला है वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशी है. शरद फिलहाल विकासखंड ददरौल के प्राथमिक विद्यालय सतवा खुर्द में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं. शुरू से लड़का बनने की थी तमन्ना सरिता से शरद बने टीचर हमेशा से लड़के की वेशभूषा में रहते थे. जिसके चलते उनको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. लोगों के ताने भी सुनने पड़े. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने मध्य प्रदेश के इंदौर में सर्जरी कराकर अपना जेंडर चेंज करवा लिया. इसके बाद जिला अधिकारी के यहां आवेदन किया और लिंग परिवर्तन का प्रमाण पत्र और पहचान पत्र हासिल कर लिया.  

फडणवीस सरकार में उपमुख्यमंत्री शिंदे कद बढ़ा, हर फाइल भी शिंदे के पास जाएगी!

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तीन प्रमुख दलों के गठबंधन के बीच “शक्ति राजनीति” में संतुलन बनाए रखने के लिए अधिकारों का समान वितरण सुनिश्चित किया है. आजतक के जिस सरकारी आदेश की कॉपी है उसे 18 मार्च, 2025 को मुख्य सचिव सुजाता सौनिक ने जारी किया है. इस आदेश में कहा गया है कि वित्त और योजना विभाग, जो वर्तमान में अजित पवार के अधीन है, उसकी हर फाइल अब अंतिम मंजूरी के लिए सीएम देवेंद्र फडणवीस तक पहुंचने से पहले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से होकर गुजरेगी. इसे सियासी संतुलन बनाए रखने के लिए एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है. महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के दौरान जब उद्धव ठाकरे सीएम थे और अजित पवार के पास वित्त विभाग था. तब शिंदे के शिवसेना गुट ने पवार पर पक्षपात का आरोप लगाया था. उन्होंने दावा किया कि पहले एनसीपी, फिर कांग्रेस और अंत में शिवसेना को पैसा आवंटित किया गया, जो एमवीए के पतन का एक प्रमुख कारण बन गया. शिंदे के सीएम रहने के दौरान भी ऐसा ही था नियम राजनीतिक बदलाव के बाद एकनाथ शिंदे सीएम बने और फडणवीस डिप्टी सीएम बने और एक साल के भीतर ही शिंदे के नेतृत्व में अजित पवार भी डिप्टी सीएम बन गए. हालांकि पवार ने वित्त विभाग अपने पास रखा, लेकिन अंतिम फैसले का अधिकार शिंदे के पास ही रहा.तब भी 2023 में आदेश जारी किया गया था कि फाइलें तत्कालीन डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के माध्यम से अंतिम मंजूरी के लिए सीएम एकनाथ शिंदे के पास भेजी जाएंगी. हालांकि, अब वित्त विभाग को सत्ता संतुलन को बाधित होने से रोकने के लिए फडणवीस ने फाइल अनुमोदन प्रक्रिया को पहले ही बदल दिया और उनके पास फाइल पहुंचने से पहले दोनों उप मुख्यमंत्रियों के पास जाएगी. राजनीतिक हलकों में इसे सीएम फडणवीस का “मास्टरस्ट्रोक” बताया जा रहा है. महायुति में हुआ था विवाद तीनों महायुति दलों के नेता पहले भी लगातार कहते रहे हैं कि उनके बीच “कभी कोई विवाद नहीं था”. हालांकि, अजित पवार को अब अपनी फाइलों के लिए शिंदे की मंजूरी की जरूरत होगी. इससे शिंदे की शिवसेना को एनसीपी पर बढ़त मिल गई है, जो पहले टकराव का कारण बनी थी. इस निर्णय के माध्यम से एकनाथ शिंदे को सशक्त बनाकर, फडणवीस ने सुनिश्चित किया है कि शिंदे का गुट फंड आवंटन और निर्णय लेने से संतुष्ट रहे. वहीं इस कदम के जरिए अजित पवार को भी नियंत्रण में रखा जा सके. इस कदम को महायुति के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में देखा जा रहा है.  

गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि गेहूँ उपार्जन के लिये किसान अब 9 अप्रैल तक करा सकते हैं पंजीयन

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि किसानों के हित में रबी विपणन वर्ष 2025-26 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये पंजीयन की अवधि 9 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। पूर्व में पंजीयन की अवधि 31 मार्च 2025 तक निर्धारित की गई थी। मंत्री श्री राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि जिन किसानों ने अभी तक पंजीयन नहीं करवाया है, वे 9 अप्रैल तक गेहूँ उपार्जन के लिये पंजीयन जरूर करायें। गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये है और राज्य सरकार द्वारा 175 रूपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। इस तरह से गेहूँ की खरीदी 2600 रूपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। उल्लेखनीय है कि गेहूँ उपार्जन के लिये 31 मार्च तक 15 लाख 9 हजार 324 किसान पंजीयन करा चुके हैं। गेहूँ का उपार्जन भी जारी है।  

मध्य प्रदेश में अब तक कर्मचारियों को छठे वेतनमान के अनुसार ही भत्तों का भुगतान किया जा रहा था

भोपाल वर्ष 2016 में सातवां वेतनमान लागू करने के नौ वर्ष बाद मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को अब परिवहन, गृह भाड़ा (हाउस रेंट अलाउंस/ एचआरए) बढ़ी हुई दर से मिलेगा। राज्य सरकार ने सातवें वेतनमान के अनुरूप भत्तों में वृद्धि की है। बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए भले ही आठवें वेतनमान का गठन करने की घोषणा हो चुकी है लेकिन मध्य प्रदेश में अब तक कर्मचारियों को छठे वेतनमान के अनुसार ही भत्तों का भुगतान किया जा रहा था।

भोपाल नगर निगम का 2025-26 का बजट आज पेश होगा

भोपाल भोपाल नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट गुरुवार को पेश होगा। नगर निगम की परिषद का साधारण सम्मेलन सुबह 11 बजे से कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आइएसबीटी) स्थित परिषद सभागृह में आहूत किया गया है। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी की अध्यक्षता में आहूत सम्मेलन में कार्यसूची में सम्मिलित विषयों पर चर्चा की जाएगी। महापौर मालती राय द्वारा वर्ष 2025-26 के प्रस्तावित बजट और वर्ष 2024-25 का पुनरीक्षित बजट सदन के विचारार्थ और अनुमोदनार्थ प्रस्तुत किया जाएगा। इस बजट बैठक से पहले बुधवार शाम को भाजपा और कांग्रेस पार्षद दल बैठक हुई। दोनों ही राजनीतिक पार्टी के नेताओं ने बजट बैठक को लेकर रणनीति फाइनल की। बैठक में जहां निगमायुक्त हरेंद्र नारायन के खिलाफ निंदा प्रस्ताव आ सकता है। कांग्रेस टैक्स वृद्धि का करेगी विरोध कांग्रेस पार्षद टैक्स वृद्धि को लेकर महापौर को घेरने की तैयारी कर चुके हैं। जानकारी के अनुसार संपत्तिकर में 10 प्रतिशत और जलकर व सीवेज में 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी बजट बैठक में हंगामा का कारण बनेगी। अब देखना यह है कि क्या विपक्ष टैक्स में वृद्धि को रोक पाती है या नहीं। भाजपा और कांग्रेस पार्षद मिलकर निगमायुक्त के अड़ियल रवैया को लेकर खासे नाराज है। लिहाजा उनके खिलाफ भाजपा और कांग्रेस पार्षद निंदा प्रस्ताव लाने की मांग करेंगे।  

स्कूलों ने अभिभावकों से किताबों व यूनिफार्म के नाम पर मोटी रकम वसूलना शुरू किया, प्राइवेट स्कूलों की मनमानी

नई दिल्ली राजधानी के निजी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होते ही अभिभावकों की जेब पर तगड़ी मार पड़ने लगी है। स्कूलों ने अभिभावकों से किताबों व यूनिफार्म के नाम पर मोटी रकम वसूलना शुरू कर दिया है। शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को किसी खास विक्रेता से किताबें व यूनिफार्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं करने और स्कूल की वेबसाइट पर किताबें खरीदने के लिए स्कूल के नजदीक की कम से कम पांच दुकानों का पता और टेलीफोन नंबर भी प्रदर्शित करने को कहा था। ताकि अभिभावक अपनी सुविधानुसार उन दुकानों से किताबें व यूनिफार्म खरीद सकें। इसके बावजूद निजी स्कूल कैंपस के अंदर ही निजी प्रकाशकों की किताबें, स्टेशनरी और यूनिफार्म मंहगें दामों पर बेच रहे हैं। इतना ही नहीं स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों से मोटी रकम वसूलने के लिए अलग-अलग कक्षा के अनुसार यूनिफार्म भी अलग कर दी है। यूनिफार्म की डिजाइन के बारे में भी बाहर के किसी वेंडर को जानकारी नहीं दी ताकि अभिभावकों को मजबूरन कैंपस के अंदर से ही यूनिफार्म लेनी पड़े। कोई पांच तो कोई आठ हजार में स्कूल के अंदर से बेच रहा किताबें निजी स्कूलों हर बार की तरह इस बार भी शिक्षा निदेशालय के आदेश की अवहेलना करते हुए स्कूल कैंपस के अंदर से बढ़े हुए दामों पर निजी प्रकाशकों की किताबें, कापी और स्टेशनरी का समान दे रहे हैं। प्री-प्राइमरी, केजी में महज तीन किताबें, आर्ट क्राफ्ट का सामान, स्टेशनरी और नोट बुक पांच से छह हजार की पड़ रही है। अशोक विहार स्थित महाराजा अग्रसेन स्कूल में कैंपस के अंदर से प्री-स्कूल की कापी-किताब व स्टेशनरी का सेट 4940 रुपये, पहली कक्षा की किताब, कापी व स्टेशनरी का सेट 6345 रुपये, पांचवीं कक्षा का 8239 रुपये, सातवीं का 8311 रुपये, आठवीं का 8935 रुपये में बेचा जा रहा है। इसमें किताबों पर कवर चढ़ाने के रुपये अलग से लिए जा रहे हैं। वसंत कुंज स्थित मैसोनिक पब्लिक स्कूल में आठवीं की कापी-किताब और स्टेशनरी का सेट 5598 रुपये का पड़ रहा है। करीब हर निजी स्कूल का यही हाल जनकपुरी स्थित सुमेरमल जैन पब्लिक स्कूल में पांचवीं की कॉपी-किताब और स्टेशनरी का सेट 4931 रुपये का बेचा जा रहा है। श्रीजन स्कूल में आठवीं की कापी-किताब व स्टेशनरी का सेट आठ हजार में बेचा जा रहा है। लगभग हर निजी स्कूल का यही हाल है। राजधानी के ये निजी स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को धता बता एनसीईआरटी की किताबों से ज्यादा निजी प्रकाशकों की किताबों को स्कूल में पढ़वा रहे हैं। स्कूलों में बेचे जा रहे सेट में अधिकतर किताबें निजी प्रकाशकों की ही हैं। इक्का-दुक्का किताब ही एनसीईआरटी की ली गई हैं। उसमें भी कहा गय है कि सेट में लिखी एनसीईआरटी की किताबें अभिभावकों को स्वयं ही बाहर से खरदनी पड़ेगी। कुछ स्कूलों में पूरा सेट लेने पर छूट जैसे आफर देकर अभिभावकों को लुभाने की भी कोशिश हो रही है। एनसीईआरटी की जो किताबें 30 रुपये से लेकर 100 रुपये तक मिलती है, उसी विषय की निजी प्रकाश की किताब की कीमत 300 से 700 रुपये तक में बेची जा रही है। यूनिफॉर्म को बार-बार बदला जाता स्कूलों में सिर्फ लूट का ये काम कापी-किताब और स्टेशनरी तक ही सीमित नहीं रखा है। बहुत से स्कूलों ने अब यूनिफार्म के नाम पर लूटने के अलग-अलग तरीके ढूंढे़ हैं। कुछ स्कूलों ने अलग-अलग कक्षाओं के लिए यूनिफार्म ही अलग कर रखी है ताकि बच्चे को कक्षा बदलते ही यूनिफार्म भी बदलनी पड़े। यूनिफॉर्म के लिए भी निदेशालय ने स्कूलों को आदेश दिया है कि वो पांच वेंडरों की सूची चस्पा करें जहां से अभिभावक यूनिफॉर्म खरीद सकें। लेकिन स्कूलों ने कैंपस के अंदर ही विक्रेता बैठाए हुए हैं और यूनिफॉर्म का डिजाइन भी बदल दिया और बाहर के विक्रेताओं को डिजाइन के बारे में जानकारी ही नहीं दी। मजबूरन अभिभावकों को स्कूल के अंदर बैठे विक्रेता से महंगे दाम पर यूनिफार्म खरीदनी पड़ रही है।

मध्यप्रदेश में ईवी खरीदने पर मोहन सरकार खास फायदा दे रही, पार्किंग की समस्या से मिलेगी निजात

भोपाल मध्यप्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) खरीदने पर प्रदेश की मोहन सरकार खास फायदा देने जा रही है. दरअसल, ईवी मालिकों को सरकार कार पार्किंग की विशेष सुविधा मुहैया कराएगी. ऐसे में भीड़भाड़ वाले इलाके व शहर के मार्केट में आम कारों की तुलना में ईवी पार्किंग आसान होगी और कार मालिकों को परेशान नहीं होना पड़ेगा ईवी पॉलिसी के जल्द जारी होंगे निर्देश राज्य सरकार का प्लान है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बाजारों की सार्वजनिक पार्किंग और रहवासी सोसायटियों में पार्किंग की अलग से व्यवस्था की जाएगी. इसके लिए नगरीय विकास व आवास विभाग जल्द ही नई ईवी पॉलिसी के तहत निर्देश करने जा रहा है. ईवी के लिए दी जा रहीं विशेष सुविधाएं प्रदेश में सार्वजनिक पार्किंग में फिलहाल महिलाओं और दिव्यांगों के वाहनों की अलग से व्यवस्था होती है. वहीं अब नगरीय विकास व आवास विभाग ईवी यानी इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए भी अलग से पार्किंग की व्यवस्था करेगा. ईवी पॉलिसी 2025 के तहत विभाग इसके लिए निर्देश जारी करने जा रहा है. विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला के मुताबिक, ” ईवी पॉलिसी की अधिसूचना जारी हो चुकी है और अब जल्द ही नए निर्देश जारी किए जा रहे हैं. इसमें कई तरह के प्रावधान किए जाएंगे.” नई ईवी पॉलिसी में ये प्रावधान     सड़क किनारे सार्वजनिक पार्किंग में ईवी के लिए 25 फीसदी पार्किंग रिजर्व की जाएगी.     बाजार, मॉल, कमर्शियल कॉम्पलेक्स आदि में इलेक्ट्रिक वाहनों की पार्किंग के लिए अलग से रिजर्व पार्किंग व्यवस्था की जाएगी.     रिजर्व स्थानों पर ईवी वाहनों के स्थान पर अन्य कोई वाहन खड़े नहीं किए जा सकेंगे.     आवासीय कॉलोनियों में भी ईवी वाहनों के लिए अलग से वाहन पार्किंग व्यवस्था की जाएगी.     सभी सरकारी दफ्तरों में भी ईवी वाहनों के लिए अलग से पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी. मध्य प्रदेश में ईवी को बढ़ावा देना मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार फरवरी माह में नई ईवी पॉलिसी जारी कर चुकी है. इसमें प्रदेश में ईवी वाहनों को बढ़ावा देने के लिए हर 20 किलो मीटर पर चार्जिंग स्टेशन बनाने की तैयारी की जा रही है. वहीं ई व्हीकल खरीदने के लिए इलेक्ट्रिक कारों पर 25 हजार रुपए और दो पहिया ईवी वाहनों पर 5 हजार रुपए की छूट दिए जाने का ऐलान किया गया है.

बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष में अब और देरी नहीं होगी, अप्रैल महीने में चेहरे से सस्पेंस खत्म हो जाएगा

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघ मुख्यालय के दौरे के बाद अब बीजेपी के नए राष्ट्रीय के ऐलान को काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष में अब और देरी नहीं होगी। अप्रैल महीने में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चेहरे से सस्पेंस खत्म हो जाएगा। संसद के बजट सत्र के बाद बीजेपी के संगठन चुनावों में तेजी की उम्मीद है। संसद का बजट सत्र 4 अप्रैल को खत्म हो रहा है। संघ के सूत्रों की मानें तो नए अध्यक्ष के चयन में संघ, पीएम मोदी और अमित शाह के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की भूमिका अहम हो सकती है। 2009 से 2013 तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे नितिन गडकरी अभी भी संघ नेतृत्व की गुडबुक में बने हुए हैं। नागपुर दौरे में नितिन गडकरी पूरे दौरे में फडणवीस के साथ पीएम और संघ नेताओं के साथ मौजूद रहे थे। कब हो सकता है ऐलान? बीजेपी ने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऐलान की यूं तो कई डेडलाइन निकल चुकी हैं। अप्रैल महीने में 6 अप्रैल को बीजेपी का स्थापना दिवस है लेकिन 6 अप्रैल तक ऐलान हो पाएगा। इसकी संभावना बेहद कम है। इसके बाद बीजेपी ने 18 अप्रैल को राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद (BJP National Executive Council Meet) की बैठक रखी है। इस बैठक में नए अध्यक्ष का ऐलान हो सकता है। अगर कुछ देरी होती है तो भी अप्रैल में जेपी नड्‌डा के उत्तराधिकारी का ऐलान हो जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी में कहा गया है कि अगले कुछ दिनों में संगठन चुनाव पूरा हो जाएगा। 13 राज्यों में अध्यक्षों का ऐलान हो चुका है। 19 राज्यों में ऐलान बाकी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए 19 राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होना जरूरी है। कैसे नड्‌डा बने थे अध्यक्ष? 2019 में अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद जेपी नड्‌डा बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष बने थे। छह महीने बाद 30 जनवरी 2020 को उन्हें सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। नड्‌डा का कार्यकाल जनवरी 2023 में खत्म हो गया था, लेकिन लोकसभा चुनावों के लिए उन्हें जून, 2024 तक एक्सटेंशन दे दिया गया था। इसके बाद भी नड्‌डा एक्सटेंशन पर हैं। ऐसे में बतौर अध्यक्ष लंबी पारी खेल चुके हैं। नड्‌डा वर्तमान में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी हैं। नए अध्यक्ष की अगुवाई में 12 चुनाव सूत्रों का कहना है कि बीजेपी का जो भी नया अध्यक्ष होगा उसके सामने 2025 में बिहार, फिर 2026 में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के साथ असम और केरल में मोर्चा संभालना होगा। इसके बाद 2027 में पांच राज्यों के चुनाव के साथ राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव भी होंगे। ऐसे में अगले तीन साल के कार्यकाल में कुल 12 अहम चुनाव होंगे। सूत्रों की मानें तो बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद की बैठक में बेंगलुरु में 18 अप्रैल से 20 अप्रैल तक प्रस्तावित है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान इसमें हो सकता है। अगर ये बैठक की तारीखें थोड़ी आगे भी खिसकती हैं तो भी अप्रैल के अंत तक बीजेपी को राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने की पूरी संभावना है।

नक्सल गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश में एसआईए का गठन हुआ

भोपाल नक्सली गतिविधियों को रोकने, जांच व उनके विरुद्ध ऑपरेशन के लिए प्रदेश में स्टेट इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एसआईए) का गठन किया गया है। पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा के आईजी स्तर के अधिकारी को इसका प्रमुख बनाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि नक्सल प्रभावित अन्य राज्यों में भी इसी तरह की जांच एजेंसी बनाई गई है। यह केंद्र की नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) की तरह काम करेगी। एनआईए का गठन देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों पर कार्रवाई के लिए किया गया है। नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में आएगी तेजी केंद्र सरकार के निर्देश पर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में इसका गठन किया जा चुका है। नक्सलियों ने इन तीनों राज्यों को मिलाकर एक जोन (एमएमसी) बनाया हुआ है। एसआईए से इसमें नक्सलियों के विरुद्ध कार्रवाई में तेजी आएगी। बता दें, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च, 2026 तक देश से नक्सल समस्या पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। एसआईए का गठन इसी दिशा में एक प्रयास है। इसका मुख्य काम नक्सलियों के नेटवर्क का पता लगाना है। साथ ही, एजेंसी के अन्य कार्य नक्सलियों को आर्थिक सहायता कहां से मिल रही है, नक्सलियों द्वारा उपयोग किए जा रहे हथियार उन तक कैसे पहुंच रहे हैं, नए नक्सलियों की भर्ती का तरीका, ग्रामीणों से संपर्क की रणनीति, बड़ी नक्सली घटनाओं की जांच से संबंधित रहेगा। मध्य प्रदेश एसआईए नक्सल गतिविधियों की रोकथाम में एनआईए का भी सहयोग लेगी। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि एसआईए ने काम प्रारंभ कर दिया है। मध्य प्रदेश में सक्रिय हैं 65 से 70 नक्सली बता दें, मध्य प्रदेश में नक्सल प्रभावित बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में 65 से 70 नक्सली सक्रिय हैं। इनमें लगभग आधी महिलाएं हैं। ये नक्सली मूल रूप से छत्तीसगढ़ या महाराष्ट्र के हैं। मध्य प्रदेश के मात्र तीन ही हैं। पुलिस का प्रयास है कि ये नक्सली या तो आत्मसमर्पण कर दें या उन्हें मार दिया जाए। नक्सली संगठन में नई भर्ती नहीं होने पाए, यह भी पुलिस की कोशिश है। 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के संकल्प में मध्य प्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक नक्सलियों पर लगातार नजर रखी जाए और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए। सुरक्षा बलों को सीएम की बधाई मुख्यमंत्री ने हाल ही में बालाघाट में हुए पुलिस ऑपरेशन की सराहना की, जिसमें चार नक्सलियों को मार गिराया गया था और भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में नक्सलवाद को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा और इसके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। सीएम ने इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया बैठक का भी जिक्र किया, जिसमें देश को 2026 तक नक्सल मुक्त बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। अब मध्य प्रदेश में नक्सलियों के लिए बचने का कोई रास्ता नहीं! सरकार पूरी ताकत से विकास और सुरक्षा पर काम कर रही है।

भोपालवासियों को बड़ी राहत मिलने वाली, जिले में बनेंगी 12 नई सड़कें, जाम की समास्या से मिलेगी निजात

भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है। जानकारी के लिए बता दें कि पीडब्ल्यूडी ने अपने बजट में नगर निगम के वार्डों की अंदरूनी सड़क को भी शामिल किया है। करीब 12 सड़कों के लिए पीडब्ल्यूडी ने प्रस्ताव तैयार किए हैं। इनका काम इसी माह शुरू किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी ने करीब 50 करोड़ रुपए का बड़ा बजट इनके लिए तय किया है। शासन स्तर से ये राशि मंजूर कराई जाएगी। बजट में हैं नगर निगम की ये सड़कें शामिल 05 करोड़ रुपए बरखेड़ी फाटक से महामाई का बाग, शंकराचार्य नगर, पुष्पानगर, चांदबड़ की सड़कों के लिए 05 करोड़ रुपए अशोका गार्डन समेत वार्ड 69-70 के एप्रोच रोड के लिए 4.80 करोड़ रुपए वार्ड क्रमांक 26 बरखेड़ी खूर्द सीसी रोड 05 करोड़ रुपए चेतक ब्रिज से वार्ड 45 व 47 में गौतम नगर होते हुए रचना नगर अंडरब्रिज से सुभाष नगर विश्राम घाट तक रोड के लिए 14.75 करोड़ रुपए सलैया से बावडिया खुर्द तक वार्ड 52 की पर रोड 2.20 किमी लंबाई 3.79 करोड़ रुपए वार्ड 82-84 में दशहरा मैदान स्टेडियम से अमरनाथ कॉलोनी गेट तक सीसी रोड 1.20 किमी लंबाई 4.50 करोड़ रुपए में वार्ड 54-55 में आशिमा मॉल से कटारा रोड जाटखेड़ी से बाग मुगालिया क्षेत्र की सड़कें 3.18 करोड़ रुपए वार्ड 83 में गिरधर परिसर से श्यामाप्रसाद मुखर्जी कॉलेज निर्मलादेवी मार्ग कोलार रोड तक 1.80 करोड़ रुपए वार्ड 26 में रातीबड़ हनुमान मंदिर से जवाहर नवोदय विद्यालय

सिलक्यारा सुरंग की खुदाई का कार्य अंतिम चरण में, सब कुछ योजना के अनुसार चला तो मात्र पंद्रह दिनों में सुरंग आर-पार हो जाएगी

बड़कोट बहुचर्चित सिलक्यारा सुरंग की खुदाई का कार्य अंतिम चरण में है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार चला तो मात्र पंद्रह दिनों में सुरंग आर-पार हो जाएगी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बुधवार को लोहे की सरिया पोल गांव से सिल्क्यारा की दिशा में आर-पार हो चुकी है। इससे यह संभावना बढ़ गई है कि 15 अप्रैल तक सुरंग पूरी तरह से आरपार हो जाएगी। बता दें कि केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण चारधाम सड़क परियोजना में निर्माणाधीन 4.5 किमी लंबी सिल्क्यारा-पोलगांव सुरंग वर्ष 2023 में भूस्खलन के कारण सुर्खियों में रही थी। उस दौरान सुरंग के सिलक्यारा मुहाने के पास भूस्खलन से 41 श्रमिक सुरंग के फंस गए थे, जिन्हें 17 दिनों तक चले कठिन रेस्क्यू आपरेशन के बाद सुरक्षित निकाला गया था।   ढाई से तीन महीने तक ठप रहा था काम इस हादसे के बाद सुरंग निर्माण कार्य लगभग ढाई से तीन महीने तक पूरी तरह ठप रहा। गत वर्ष 23 जनवरी 2024 को केंद्र सरकार ने कार्यदायी संस्था एनएचआईडीसीएल (राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड) को सुरंग का निर्माण दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए। निर्माण एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बड़कोट छोर से बुधवार को सरिया पूरी तरह आर-पार हो चुकी है। अब 15 से 20 अप्रैल के बीच सुरंग पूरी तरह से आर-पार होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, सुरंग की फिनिशिंग और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करने में लगभग डेढ़ से दो वर्ष का समय लग सकता है।  इन कार्यों में सुरंग के अंदर मध्य में बनाई जा रही दीवार का निर्माण, सिल्क्यारा छोर पर पुल और दीवार निर्माण, तथा दोनों छोरों पर कंट्रोल रूम का निर्माण शामिल है। 150 करोड़ की लागत से होंगे इलेक्ट्रो मैकेनिकल कार्य सुरंग में लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कार्य किए जाएंगे। इनमें इटली से मंगवाया गया फायर सप्रेशन सिस्टम भी लगाया जाएगा। यह सिस्टम हजारों नोजल से लैस होगा, जो सेंसर के माध्यम से तापमान में वृद्धि या आग लगने की स्थिति में स्वतः सक्रिय होकर पानी की फुहारों से आग को फैलने से रोकेगा। साथ ही, सुरंग के दोनों किनारों पर बनाए जा रहे कंट्रोल रूम से ट्रैफिक, कैमरे, सेंसर और फायर सप्रेशन सिस्टम को स्काडा (पर्यवेक्षी नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण तकनीक) के माध्यम से नियंत्रित किया जाएगा।

देश धर्मशाला नहीं तो जेल भी नहीं है, बीते 10 साल से देश के लोगों को एक तरह से जेल में रखा गया है: संजय राउत

नई दिल्ली राज्यसभा में इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल (आप्रवास और विदेशियों विषयक विधेयक)-2025 को गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को सदन के समक्ष विचार के लिए रखा। विधेयक पर बोलते हुए शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत ने कहा कि देश को धर्मशाला बनाना किसी का मकसद नहीं है, लेकिन अगर यह देश धर्मशाला नहीं है तो यह देश जेल भी नहीं है। बीते 10 साल से देश के लोगों को एक तरह से जेल में रखा गया है। अब जो विदेश से लोग आएंगे, वह भी वैध वीजा और पासपोर्ट पर, यह कानून उन्हें भी शायद जेल में रखना चाहता है। संजय राउत ने कहा कि जिस तरह से इस विधेयक में बहुत से प्रावधान हैं, उससे धीरे-धीरे टूरिस्ट भी भारत में आना बंद करेंगे। हम नहीं चाहते कि कोई भी देश में अवैध तरीके से रहे, चाहे वह बांग्लादेशी हो, रोहिंग्या हो, या फिर अमेरिकन और यूरोपियन। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में अवैध तरीके से रह रहे भारतीयों को सेना के विमान में हाथों-पैरों में बेड़िया लगाकर वापस भेजा। यदि कोई अमेरिकी भारत में अवैध तरीके से रह रहा हो, तो उसे भी इसी तरह से बेड़िया लगाकर वापस भेजा जाए। पूरे देश में तीन करोड़ से ज्यादा बांग्लादेशी और रोहिंग्या हैं, उन्हें निकालना जरूरी है। यह मुहिम सबसे पहले मुंबई में हमने शुरू की थी। इस विधेयक का सेक्शन 7 यह कहता है कि जो विदेशी यहां आएगा, केंद्र सरकार यह तय करेगी कि वह किस होटल में ठहरेगा, कहां घूमेगा, कहां जाएगा। राउत ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया यह विधेयक ऐसा है, जिसके तहत यदि कोई विदेशी डेलिगेशन, जर्नलिस्ट या डिप्लोमेट भारत आता है और वह देश में किसी प्रमुख नेता से मिलना चाहता है, सोनिया गांधी से, राहुल गांधी से, उद्धव ठाकरे से मिलना चाहता है, तो सरकार से अनुमति लेनी पड़ेगी। यदि सरकार अनुमति देती है, तो मुलाकात कर सकेंगे और यदि अनुमति नहीं मिली, तो यह मुलाकात नहीं हो सकेगी। उन्होंने सदन में कहा कि देश में जो आतंकवादी आए हैं, वे किसी वैध पासपोर्ट पर नहीं आए हैं। कसाब किसी वैध पासपोर्ट पर नहीं आया था। कसाब और उसके साथ जो टेररिस्ट आए थे, वे समुद्र मार्ग से अवैध तरीके से आए और किसी को पता भी नहीं चला। कानून को यदि आप मजबूत करना चाहते हैं, तो कीजिए, लेकिन इस विधेयक को स्थाई समिति के पास वापस भेजकर इस पर चर्चा की जानी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा ने कहा कि पुराने आव्रजन कानूनों के तहत देश की सीमाओं की रक्षा करने में, देश में घुसपैठ को रोकने में काफी बाधाएं आती थीं। देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। नए विधेयक में प्रमुख रूप से भारत में प्रवेश, प्रवास के लिए यात्रा दस्तावेज, वैध वीजा की अनिवार्य आवश्यकता, प्रवेश से इनकार आदि विधेयक का एक हिस्सा हैं। भारत को चिकित्सा, शैक्षणिक और विनिर्माण गतिविधियों का केंद्र बनाने, सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों के अनुरूप विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु, सही उद्देश्य के लिए विदेशियों की भारत यात्रा को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है। इसका प्रावधान इस विधेयक में किया गया है। भारत ने 169 देशों के नागरिकों के लिए ई-वीजा की शुरुआत की है। इस संबंध में आवश्यक है कि अधिकारियों को विदेश से आ रहे लोगों के दस्तावेज की जांच करने का अधिकार दिया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा या संप्रभुता को खतरा होने पर अधिकारियों को अधिकार दिया गया है कि वे विदेशियों को देश में प्रवेश से वंचित कर सकें।

सर्वे में अधिकांश यूक्रेनवासियों की राय- ट्रंप शासन यूक्रेन के लिए नकारात्मक

कीव यूक्रेनवासियों का मानना ​​है कि डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति काल का यूक्रेन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। जारी एक सर्वेक्षण के अनुसार लगभग तीन चौथाई (73 प्रतिशत) यूक्रेनी नागरिकों ने यह जानकारी जारी की। कीव इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशियोलॉजी की ओर से यह सर्वे कराया गया। सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 19 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने ट्रंप के राष्ट्रपति बनने को यूक्रेन के लिए लाभकारी माना। बाकी बचे उत्तरदाता इस मुद्दे पर कोई राय नहीं रखते थे। जब पूछा गया कि क्या ट्रंप के शासनकाल की सहायता से यूक्रेन न्यायपूर्ण शांति प्राप्त कर सकता है, तो 55 फीसदी लोगों ने नकारात्मक उत्तर दिया, 18 ने सकारात्मक। 21 प्रतिशत ने कहा कि उनका मानना ​​है कि कोई भी शांति समझौता केवल आंशिक रूप से ही न्यायपूर्ण होगा। यह सर्वे 12 से 22 मार्च तक 1,326 वयस्कों के साथ टेलीफोन इंटरव्यू के माध्यम से आयोजित किया गया था। यह सर्वेक्षण दिसंबर 2024 में हुए इसी प्रकार के सर्वेक्षण की तुलना में जनता की राय में बदलाव को दर्शाता है। उसमें सामने आया था कि कि 54 प्रतिशत यूक्रेनवासी ट्रंप के आगामी राष्ट्रपति बनने के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण रखते थे, 21 प्रतिशत लोग इसे नकारात्मक रूप से देखते थे, जबकि 25 प्रतिशत लोग कोई राय नहीं रखते थे। 20 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप लगातार यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की बात कर रहे हैं। हालांकि उनका रुख कीव के प्रति कठोर जबकि मॉस्को के प्रति काफी नरम रहा है। उनके इस रुख ने कीव और यूरोपीय देशों को चिंतित कर दिया है। अमेरिका ने 25 मार्च को यूक्रेन और रूस के साथ समुद्र में और ऊर्जा लक्ष्यों पर हमले रोकने के लिए अलग-अलग समझौते किए। वाशिंगटन ने मॉस्को के खिलाफ कुछ प्रतिबंधों को हटाने के लिए दबाव बनाने पर सहमति व्यक्त की। वाशिंगटन ने कहा समझौतों की घोषणा करते हुए कहा कि सभी पक्ष, ‘स्थायी शांति’ की दिशा में काम करना जारी रखेंगे। व्हाइट हाउस ने कहा कि उन्होंने एक-दूसरे के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला करने पर पहले से सहमत प्रतिबंध को लागू करने के ‘तरीके विकसित करने’ की भी प्रतिबद्धता जताई।

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