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मध्य प्रदेश में गंभीर अपराधों की विवेचना कर शीघ्र निपटान के लिए जिलों को चार श्रेणियों में बांट दिया, दिए निर्देश

भोपाल मध्य प्रदेश में गंभीर अपराधों की सूची के साथ पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना ने गंभीर अपराधों की विवेचना कर शीघ्र निपटान के लिए जिलों को चार श्रेणियों में बांट दिया है। इसके साथ ही सभी जिलों को अपराधों के निराकरण के लिए वार्षिक लक्ष्य भी दिया गया है। पुलिस मुख्यालय की सीआइडी शाखा के माध्यम से डीजीपी ने सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों से गंभीर, सनसनीखेज और जघन्य अपराधों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। विभिन्न श्रेणियों में शामिल जिले और वार्षिक लक्ष्य ए-श्रेणी के जिलों में इंदौर शहर, भोपाल शहर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, देवास, धार, उज्जैन,रतलाम, रीवा है। इनके लिए 40 गंभीर अपराध का लक्ष्य रखा गया है। – बी- श्रेणी के जिलों में बैतूल, खरगोन, रायसेन, नरसिंहपुर, शिवपुरी, छतरपुर, सिंगरौली, सीहोर, झाबुआ, छिंदवाड़ा, विदिशा, मुरैना, खंडवा, बड़वानी, इंदौर देहात, राजगढ़, सतना, सीधी, भिंड, सिवनी, गुना, शहडोल, मंदसौर, अशोकनगर, पन्ना, बालाघाट, नर्मदापुरम, दतिया, टीकमगढ़, दमोह, शाजापुर, कटनी हैं। इनके लिए 20 गंभीर अपराध का लक्ष्य। – सी- श्रेणी के जिलों में आलीराजपुर, श्योपुर, हरदा, अनूपपुर, डिंडौरी, नीमच, मऊगंज, उमरिया, आगर-मालवा, मैहर, भोपाल देहात, बुरहानपुर हैं। इनके लिए 15 गंभीर अपराध। – डी-श्रेणी के जिलों में निवाड़ी, पांढुर्णा, रेल भोपाल, रेल जबलपुर, रेल इंदौर के लिए पांच गंभीर अपराध का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गंभीर एवं सनसनीखेज अपराधों में ये शामिल हत्या के वीभत्स प्रकरण जैसे जिंदा जला देना, दिनदहाड़े सार्वजनिक स्थल पर गोली, चाकू, तलवार या अन्य हथियार से निहत्थे व्यक्ति की हत्या कर देना, सामूहिक हत्याकांड। – संगठित अपराध एवं गंभीर श्रेणी के आर्थिक अपराध। – हत्या के साथ डकैती, बैंक, सराफा एवं सार्वजनिक स्थल पर दिनदहाड़े डकैती। – सामूहिक बलात्कार/नाबालिग के साथ दुष्कृत्य। – आतंकवादी कृत्य। – अपहरण के साथ हत्या। – पुरातात्विक महत्व की मूर्तियों की चोरी जिनसे जनसामान्य की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हों। – अन्य ऐसे आपराधिक प्रकरण जिनसे जनता में भय/दहशत या असुरक्षा की भावना पैदा होती हो। – तेजाब से हमलों के प्रकरण। – 12 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के साथ बलात्कार और नाबालिग बालिकाओं के साथ सामूहिक बलात्कार की हुई सभी आपराधिक घटनाएं। – नक्सलियों द्वारा घटित अपराध। – बड़े स्तर के सफेदपोश अपराध जैसे बड़े एवं महत्वपूर्ण बैंक धोखाधड़ी, मनी लांडरिंग, बड़े साइबर फ्राड आदि। – बड़े पैमाने पर मिलावटी खाद्य पदार्थ निर्माण करने वाली फैक्ट्री (जैसे नकली दूध, मावा, तेल, घी, मिठाई, नमकीन, मसाला आदि) के विरुद्ध पंजीबद्ध किए गए महत्वपूर्ण आपराधिक प्रकरण। – साइबर क्राइम एवं एनडीपीसी एक्ट के बड़े स्तर के महत्वपूर्ण प्रकरण जिसका समाज पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। – वन्यजीवों से संबंधित महत्वपूर्ण एवं गंभीर अपराध।  

पंजाब नेशनल बैंक ने ग्राहकों से RBI के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 10 अप्रैल तक KYC डिटेल अपडेट करने की अपील की है

मुंबई अगर आप पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के ग्राहक हैं तो आपके लिए काम की खबर है। पंजाब नेशनल बैंक ने ग्राहकों से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 10 अप्रैल, 2025 तक अपने नो योर कस्टमर (KYC) डिटेल अपडेट करने की अपील की है। बता दें कि यह 31 मार्च, 2025 तक KYC अपडेट होने वाले खातों पर लागू होता है। ऐसे में KYC अपडेट न करने पर खाता बंद भी हो सकता है। बैंक ने कहा कि ग्राहक सहायता के लिए निकटतम PNB ब्रांच में जा सकते हैं या फिर आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं। क्यों जरूरी है केवाईसी? बता दें कि केवाईसी एक अनिवार्य प्रोसेस है जो बैंकों को अपने ग्राहकों की पहचान वेरिफिकेशन करने में मदद करती है। इससे मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय घोटालों जैसी धोखाधड़ी गतिविधियों को रोका जा सकता है। RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बैंकों को खाते की सुरक्षा और विनियामक अनुपालन बनाए रखने के लिए समय-समय पर KYC डिटेल अपडेट करना चाहिए। केवाईसी को अपडेट करने की जरूरत किसे है? बता दें कि केवाईसी अपडेट की यह आवश्यकता केवल उन ग्राहकों पर लागू होती है जिनके खाते 31 मार्च, 2025 तक रिन्यूअल के लिए हैं। प्रभावित ग्राहकों को यह पुष्टि करने के लिए अपने एसएमएस, ईमेल या आधिकारिक पीएनबी अधिसूचनाओं की जांच करनी चाहिए कि उन्हें अपने विवरण अपडेट करने की आवश्यकता है या नहीं।   पंजाब नेशनल बैंक में KYC कैसे अपडेट करें? PNB ग्राहकों को अपने KYC डिटेल अपडेट करने के लिए कई सुविधाजनक तरीके प्रदान करता है- – किसी भी PNB शाखा में जाएं। जरूरी डॉक्यूमेंट पर्सनली जमा करें। – PNB ONE या इंटरनेट बैंकिंग सेवाओं (IBS) का उपयोग करें। पात्र ग्राहकों के लिए, KYC अपडेट ऑनलाइन किए जा सकते हैं। – रजिस्टर्ड ईमेल या पोस्ट के जरिए भेजें। ग्राहक अपने KYC डॉक्यूमेंट ईमेल या डाक सेवाओं के माध्यम से अपनी आधार ब्रांच में जमा कर सकते हैं।  

केंद्रीय कर्मचारियों का इंतजार खत्म, आगामी एक अप्रैल से सरकार की एकीकृत पेंशन योजना लागू होने वाली है

मुंबई केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नया फाइनेंशियल ईयर काफी खास होने वाला है। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आगामी एक अप्रैल से सरकार की एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) लागू होने वाली है। इस योजना के लागू होने के साथ केंद्रीय कर्मचारियों के पास पेंशन के लिए एक नया विकल्प होगा। आइए डिटेल जान लेते हैं। एकीकृत पेंशन योजना के बारे में इस योजना के तहत सेवानिवृत्ति से पहले के 12 महीनों में मिले औसत बेसिक सैलरी की 50 प्रतिशत राशि को सुनिश्चित पेंशन के तौर पर देने का प्रावधान है। बीते दिनों पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की थी। यह अधिसूचनो राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत आने वाले केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए सरकार द्वारा 24 जनवरी, 2025 को जारी यूपीएस अधिसूचना का अनुसरण करती है। पीएफआरडीए के मुताबिक यूपीएस से संबंधित नियम एक अप्रैल, 2025 से लागू हो जाएंगे। एक अप्रैल से लागू ये नियम एक अप्रैल, 2025 तक सेवा में मौजूदा केंद्र सरकार के एनपीएस में आने वाले कर्मचारी और केंद्र सरकार की सेवाओं में अप्रैल, 2025 को या उसके बाद भर्ती होने वाले कर्मचारियों समेत केंद्र सरकार के कर्मचारियों के नामांकन को सक्षम करते हैं। केंद्र सरकार के कर्मचारियों की इन सभी श्रेणियों के लिए नामांकन और दावा फॉर्म एक अप्रैल, 2025 से प्रोटीन सीआरए की वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। कर्मचारियों के पास फॉर्म को भौतिक रूप से जमा करने का विकल्प भी है। क्या है अधिसूचना में अधिसूचना के मुताबिक, कर्मचारी को सेवा से हटाए जाने या बर्खास्त किए जाने या इस्तीफे के मामले में यूपीएस या सुनिश्चित भुगतान विकल्प उपलब्ध नहीं होगा। अधिसूचना में कहा गया है कि पूर्ण सुनिश्चित भुगतान की दर 25 वर्षों की न्यूनतम योग्यता सेवा के अधीन और सेवानिवृत्ति से तुरंत पहले 12 मासिक औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत होगी। अधिसूचना से 23 लाख सरकारी कर्मचारियों को यूपीएस और एनपीएस के बीच चयन करने का विकल्प मिलेगा। एनपीएस एक जनवरी, 2004 को लागू हुआ था। पुरानी पेंशन योजना से कैसे अलग बता दें कि जनवरी, 2004 से पहले प्रभावी पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के तहत कर्मचारियों को उनके कार्यकाल के अंतिम मूल वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता था। ओपीएस के उलट यूपीएस अंशदायी प्रकृति की है। इसमें कर्मचारियों को अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत योगदान करना होगा, जबकि नियोक्ता (केंद्र सरकार) का योगदान 18.5 प्रतिशत होगा। हालांकि, अंतिम भुगतान उस कोष पर मिलने वाले बाजार रिटर्न पर निर्भर करता है, जिसे ज्यादातर सरकारी बॉन्ड में निवेश किया जाता है।  

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स के नए रिजीम को लेकर कई ऐलान किए थे, जो एक अप्रैल से लागू होने वाले हैं

नई दिल्ली आगामी एक अप्रैल से नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत होने वाली है। इस फाइनेंशियल ईयर में कई ऐसे बदलाव होने वाले हैं जिसका फायदा मिडिल क्लास को फायदा मिलेगा। इनमें से एक फैसला इनकम टैक्स से जुड़ा है। दरअसल, बीते एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स के नए रिजीम को लेकर कई ऐलान किए थे, जो एक अप्रैल से लागू होने वाले हैं। आइए सिलसिलेवार जान लेते हैं। 12 लाख रुपये तक की छूट निर्मला सीतारमण ने नौकरीपेशा और मिडिल क्लास को बड़ी राहत देते हुए 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय को पूरी तरह से इनकम टैक्स से छूट देने की घोषणा की। इनकम टैक्स छूट नई कर व्यवस्था का विकल्प चुनने वाले टैक्सपेयर्स को मिलेगी। वेतनभोगी करदाताओं के लिए 75,000 रुपये की स्टैंडर्ड कटौती के साथ अब 12.75 लाख रुपये तक कोई टैक्स नहीं लगेगा। उन्होंने टैक्स स्लैब में भी बदलाव किया है। इससे 25 लाख रुपये तक सालाना कमाने वालों को टैक्स में 1.1 लाख रुपये की बचत होगी। कितने लोगों को होगा फायदा इनकम टैक्स छूट लिमिट को सात लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने से एक करोड़ लोगों को कोई टैक्स नहीं देना होगा। टैक्स स्लैब में बदलाव से 6.3 करोड़ लोगों यानी 80 प्रतिशत से अधिक टैक्सपेयर्स को लाभ होगा। इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज पर कर छूट सीमा को मौजूदा 50,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है। नए इनकम टैक्स का स्लैब नई कर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये से अधिक सालाना आय होने पर चार लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री होगी। इसके बाद चार से आठ लाख रुपये की आय पर पांच प्रतिशत, आठ से 12 लाख रुपये तक की आय पर 10 प्रतिशत और 12 से 16 लाख रुपये तक की आय पर 15 प्रतिशत कर लगेगा। वहीं, 16 से 20 लाख रुपये के बीच की आय पर 20 प्रतिशत, 20-24 लाख रुपये की आय पर 25 प्रतिशत और 24 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत टैक्स लगेगा। – अपडेटेड इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने वाले व्यक्तियों के लिए समय सीमा को भी बढ़ाकर चार साल करने का प्रस्ताव रखा गया है। अपडेटेड आईटीआर को वे टैक्सपेयर दाखिल करते हैं जो निर्धारित समय पर अपनी सही आय की जानकारी नहीं दे पाए थे। फिलहाल ऐसे रिटर्न संबंधित कर आकलन वर्ष के दो साल के भीतर दाखिल किए जा सकते हैं। लगभग 90 लाख टैक्सपेयर्स ने अतिरिक्त टैक्स का भुगतान करके स्वेच्छा से अपने आय विवरण को अपडेटेड किया है।

भिंड के करीब 45 किलोमीटर लंबे पांच बायपास बनाए जाएंगे, नए बायपास से इन ग्रामीण क्षेत्रों को फायदा पहुंचेगा

 भिंड मध्य प्रदेश से गुजरने वाले बड़े ग्वालियर-इटावा नेशनल हाइवे पर लगातार सड़क दुर्घटनाओं बढ़ रही। इसी को देखते हुए भिंड के पास प्रशासन ने लगभग 45 किलोमीटर लंबे पांच बायपास बनाने का निर्णय लिया है। इसे अंतिम रूप देने के लिए भिंड कलेक्ट्रेट में जनप्रतिनिधियों के साथ अनुमोदन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह, हेमंत कटारे, केशव देशाई और कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव की उपस्थिति रही। जिला पंचायत अध्यक्ष कामना सिंह भदौरिया, अपर कलेक्टर एलके पांडेय, नपा अध्यक्ष वर्षा वाल्मीक और विधायक प्रतिनिधि अरविंद बघेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। बायपास के निर्माण का प्रारूप बायपास का निर्माण रेत, गिट्टी की खदानों, रेलवे लाइनों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। एलईडी स्क्रीन पर बायपास का पूरा नक्शा दिखाकर जनप्रतिनिधियों से अनुमोदन मांगा गया। हालांकि, अटेर विधायक हेमंत कटारे ने आपत्ति जताई कि उनके क्षेत्र की उपेक्षा की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रेत और गिट्टी की खदानें नेशनल हाइवे की बाईं ओर स्थित हैं और दूसरी तरफ रेलवे लाइनें हैं। ऐसे में अंडरपास और आरओबी बनाने से समय और लागत में बढ़ोतरी होती है। निर्माण के चरण और लागत सूत्रों के अनुसार, बायपास का निर्माण दो चरणों में किया जा सकता है। पहले चरण में 1500 करोड़ रुपये की लागत से हाईब्रिड एन्युटी मोड के तहत काम किया जाएगा। दूसरे चरण में 2500 करोड़ रुपये की लागत सामान्य प्रक्रिया के तहत होगी। कुल मिलाकर इस परियोजना पर चार हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। कहां बनेगा कितना लंबा बायपास     भिण्ड:18 किमी     मेहगांव: 10 किमी     गोहद: 5.5 किमी     मालनपुर: 8.0 किमी     फूप: 3.0 किमी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया इन बायपासों के निर्माण के लिए लगभग 400 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। परियोजना का प्रस्ताव पहले भोपाल, फिर दिल्ली भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। जनप्रतिनिधियों की उम्मीद जनप्रतिनिधियों का मानना है कि इन बायपासों के बनने से न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी बल्कि आवागमन भी सुगम होगा। क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

जबलपुर में अत्याधुनिक क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा

जबलपुर  नगर सरकार खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों को बड़ा तोहफा देने जा रही है। भेड़ाघाट मार्ग पर तेवर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम बनेगा। इसके लिए जगह चिन्हित कर ली गई है। महापौर जगत बहादुर सिंह ‘अन्नू’ ने तीसरी बार नगर निगम का बजट पेश करते हुए बताया कि अत्याधुनिक क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही 15 करोड़ की लागत से भंवरताल में अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्वीमिंग पूल का नए सिरे से निर्माण होगा। नगर सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए 17 अरब 97 करोड़ रुपए आय व 17 अरब 96 करोड़ रुपए व्यय और आठ लाख से ज्यादा की बचत का बजट पेश किया। बजट में एक हजार करोड़ से अमृत-2 योजना के तहत सीवर लाइन बिछाने और दो लाख घरों को इससे जोड़ने का प्रावधान रखा गया है। अमृत-2 के तहत हर घर नर्मदा जल पहुंचाने के लिए तीन सौ करोड़ से ज्यादा की लागत से नया जलापूर्ति नेटवर्क तैयार किया जाएगा। नगर सरकार ने लगातार तीसरे साल बजट में किसी प्रकार का कर नहीं बढ़ाया है। वर्ष 2024-25 में 1537 करोड़ का बजट पेश किया गया था। नगर निगम के बजट में कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों की घोषणा की गई है. श्रीनाथ की तलैय्या में नर्मदा प्रसादम चौपाटी का निर्माण होगा. शहर में 100 इलेक्ट्रिक एसी बसों का संचालन शुरू किया जाएगा. मध्यप्रदेश शासन ने इसके लिए एजेंसियों की नियुक्ति कर दी है. छात्र-छात्राओं, दिव्यांगों व वरिष्ठ नागरिकों को मेट्रो बस में रियायती दर पर यात्रा की सुविधा मिलेगी. नगर निगम सीमा में 8 बड़े तालाबों का जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण 12.50 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हो चुका है. 10 और प्रमुख तालाबों का विकास एनजीओ के माध्यम से कराया जाएगा. नगर में विगत अनेक वर्षों से खिलाडिय़ों और खेल प्रेमियों के द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम की मांग की जाती रही है. जिसके चलते इस संबंध में इस वर्ष रीडेंसिफिकेशन से अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम के अलावा 50 नवीन स्कूल भवनों का निर्माण, नवीन नगर निगम सदन एवं बिल्डिंग का निर्माण, अन्तर्राष्ट्रीय स्वीमिंगपूल का निर्माण लगभग 15 करोड़ की लागत से कराया जाएगा. इनकी डीपीआर कन्सल्टेंट के माध्यम से तैयार हो चुकी है. साथ ही नगर के 10 श्मशान घाटों-कब्रिस्तानों का भी जीर्णोद्धार कार्य लगभग 15 करोड़ की लागत से कराया जाएगा. वर्ष 2024-25 में 48 नए लघु उद्यानों का निर्माण होगा. अब तक 65 करोड़ 30 लाख की लागत से कुल 120 लघु उद्यान बनाए गए हैं. शहर के प्रवेश द्वारों के मार्गों को हरा-भरा बनाया जाएगा. एक लाख बीजारोपण का कार्य पूरा हो चुका है और इस वर्ष भी जारी रहेगा. जून से सितम्बर के बीच 11 लाख पौधों का होगा रोपण- पर्यावरण संरक्षण के लिए जून से सितंबर 2025 तक एक लाख व अक्टूबर 2025 में 11 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा. इस अभियान में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. आवारा कुत्तों की लैप्रोस्कोपिक पद्धति से नसबंदी की जाएगी. संविदा सफाई संरक्षकों का वेतन 100 प्रतिशत- निगम में कार्यरत संविदा सफाई संरक्षकों को 100 प्रतिशत वेतन भुगतान किए जाने का प्रावधान किया गया है. जिससे 425 परिवारों को 9250 रुपए से 21000 रुपए तक वेतन वृद्धि हुई है. यह कार्य करने वाला भी नगर निगम जबलपुर मध्यप्रदेश का प्रथम नगरीय निकाय है. ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़े कदम महापौर अन्नू ने बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि शहर ग्रीन एनर्जी की ओर कदम बढ़ा रहा है। शहर को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए सोलर एनर्जी प्लांट स्थापित करने के लिए कंसल्टेंट एजेंसी की नियुक्ति की जा चुकी है।  

दिल्ली जल बोर्ड में 11 लाख कंज्यूमर्स के 5700 करोड़ रुपये पानी का बिल लंबे समय से है बकाया

नई दिल्ली  जिस तरह से दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियां बिजली बिल बकाया होने पर ऑफिस में बैठे-बैठे ही किसी भी कंज्यूमर्स की बिजली मीटर से सप्लाई डिस्कनेक्ट कर देती हैं, जल बोर्ड भी बकाया बिलों की वसूली के लिए कुछ ऐसा ही तकनीकी मैनेजमेंट सिस्टम डिवेलप करने का प्लान बना रहा है। जल बोर्ड अफसरों का कहना है कि करीब 11 लाख ऐसे कंज्यूमर्स हैं, जिनका का करीब 5700 करोड़ रुपये पानी का बिल लंबे समय से बकाया है। मीटर न लगाने वालों की पहचान की जाएगी जल बोर्ड अफसरों के अनुसार जल बोर्ड को घाटे से उबारने के लिए रोजाना सीनियर अफसरों के साथ बैठकें चल रही हैं। इस दौरान यह बात सामने आई कि दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या तो 52 लाख से भी अधिक है, लेकिन पानी उपभोक्ताओं की संख्या बिजली उपभोक्ताओं की तुलना में करीब आधी है। अधिकारियों ने कहा कि बिजली कंपनियों ने जिन लोगों को कनेक्शन दिया है, उनसे डेटा लेकर प्रत्येक घरों का सर्वे किया जाए। ताकि यह पता चल सके कि पानी के उपभोक्ताओं की वास्तविक संख्या कितनी है। उसी के हिसाब से फिर बिलिंग प्रोसेस शुरु किया जाए। ऐसे में जल बोर्ड के रेवेन्यू काफी बढ़ सकता है। कनेक्शन काटने के लिए स्कॉडा सिस्टम जल बोर्ड अफसरों के अनुसार दिल्ली में पानी उपभोक्ताओं की कुल संख्या करीब 28.26 लाख है। इसमें से 11 लाख के आसपास ऐसे उपभोक्ता है, जिन्हें अपने पानी के बिलों पर आपत्ति हैं और लंबे समय से बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं और लगातार उनका पानी का बिल बढ़ता जा रहा है। ऐसे उपभोक्ताओं का एरियर के रूप में करीब 5700 करोड़ रुपये बकाया है। भविष्य में पानी के बकाया बिलों का समय पर भुगतान के लिए पाइप लाइनों के वॉल्व पर स्कॉडा सिस्टम लगाने की बात की जा रही है, ताकि किसी भी उपभोक्ता का पानी का बिल अधिक समय से बकाया है, तो उसका कनेक्शन जल बोर्ड अधिकारी ऑफिस में बैठे ही काट दे। सबसे पहले कमर्शल और बल्क वॉटर कंस्यूमर पर एक्शन स्काडा सिस्टम पूरी तरह से डिवेलप होने के बाद सबसे पहले इस कैटिगरी में कमर्शल कंस्यूमर्स और बल्क वॉटर कंस्यूमर्स को शामिल किया जाएगा। दिल्ली में कमर्शल कंस्यूमर्स की संख्या 82 हजार से अधिक है। बल्क कंस्यूमर्स 4300-4500 हैं। यह प्रयोग सफल होने के बाद दूसरे कैटिगरी के पानी उपभोक्ताओं को इस सिस्टम के तहत शामिल किया जाएगा।  

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जगन्नाथ मंदिर में किया दर्शन-पूजन, प्रदेश की खुशहाली की कामना की

पुरी दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शनिवार को अपने कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा और बीजेपी सांसद संबित पात्रा के साथ ओडिशा के पुरी पहुंचीं। उन्होंने पुरी धाम में भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और बलराम जी के दर्शन किए। दर्शन के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री का दायित्व संभालने के बाद पहली बार पुरी धाम आने और प्रभु के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने भगवान जगन्नाथ के चरणों में प्रार्थना की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और दिल्ली प्रगति के पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहें। मुख्यमंत्री ने दर्शन के बाद आभार व्यक्त करते हुए कहा, “भगवान के आशीर्वाद से दिल्ली सरकार को ‘विकसित दिल्ली’ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।” 1 अप्रैल को मनाए जाने वाले ओडिशा दिवस के संदर्भ में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “इस बार दिल्ली सरकार पहली बार ओडिशा दिवस को धूमधाम से मनाएगी। दिल्ली में भी एक अप्रैल को उत्कल दिवस का आयोजन होगा। दिल्ली में अलग-अलग प्रांतों से लोग अपने सपने लेकर आते हैं। ओडिशा से आए हजारों लोग दिल्ली को गति देने में योगदान दे रहे हैं। वे दिल्ली का अभिन्न हिस्सा हैं और उनके सुख-दुख में सरकार उनके साथ खड़ी है। उनकी समृद्धि और भविष्य के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।” इस मौके पर उन्होंने ओडिशा के सभी नागरिकों और दिल्ली में बसे ओडिशा के परिवारों को ‘उत्कल दिवस’ की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने घोषणा की कि दिल्ली सरकार पहली बार ‘उत्कल दिवस’ को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाएगी। इस आयोजन का उद्देश्य ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देना और दिल्ली की सांस्कृतिक विविधता को और मजबूत करना है। सीएम गुप्ता ने कहा, “मैं प्रत्येक ओडिशावासी और दिल्ली में रह रहे ओड़िया भाई-बहनों को उत्कल दिवस की बधाई देती हूं। भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद बना रहे और देश प्रगति की राह पर चलता रहे।” रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली, देश की राजधानी होने के नाते, विभिन्न राज्यों से आए लाखों लोगों के सपनों का केंद्र है। हजारों परिवार जो ओडिशा से आए हैं, वे दिल्ली की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दिल्ली सरकार ओडिशा के लोगों की समृद्धि, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।” इस यात्रा और घोषणा के साथ दिल्ली सरकार ने ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने और दोनों क्षेत्रों के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

भारत के तेजी से बढ़ते लग्जरी रियल एस्टेट मार्केट के प्रमाण के रूप में अल्ट्रा-लग्जरी आवासीय बिक्री में तेज उछाल आया

मुंबई भारत का अल्ट्रा-लग्जरी होम मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और पिछले तीन वर्षों में 100 करोड़ रुपये या इससे अधिक कीमत के 49 घर 7,500 करोड़ रुपये में बिके। यह जानकारी शनिवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई। भारत के तेजी से बढ़ते लग्जरी रियल एस्टेट मार्केट के प्रमाण के रूप में अल्ट्रा-लग्जरी आवासीय बिक्री में तेज उछाल आया है। अब बंगलों की तुलना में अपार्टमेंट अल्ट्रा-लग्जरी सेगमेंट पर हावी हो गए हैं। जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, इस गति में कमी आने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि 2025 के पहले दो महीनों में पहले ही चार अल्ट्रा-लग्जरी घरों की बिक्री हो चुकी है, जिनकी कुल कीमत 850 करोड़ रुपये है। जेएलएल के मुख्य अर्थशास्त्री और अनुसंधान प्रमुख तथा आरईआईएस भारत, डॉ. सामंतक दास ने कहा, “हमारे विश्लेषण के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में कुल सौदों में 100 करोड़ रुपये और उससे अधिक कीमत वाले अपार्टमेंट की 65 प्रतिशत और बंगलों की हिस्सेदारी शेष 35 प्रतिशत थी।” दास ने बताया कि हालांकि, इस मूल्य सीमा से ऊपर भी कुछ संपत्तियों का लेन-देन हुआ और उनकी कीमत 200-500 करोड़ रुपये के बीच थी। हालांकि, कई भारतीय शहरों में प्रीमियम आवासीय संपत्तियों की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन इन विशेष संपत्तियों के लिए उपयुक्त घर खरीदार प्रोफाइल की बात करें तो मुंबई और दिल्ली-एनसीआर सबसे आगे हैं। जेएलएल के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक (चेन्नई और कोयंबटूर) और भारत में आवासीय सेवाओं के प्रमुख शिव कृष्णन ने कहा, “100 करोड़ रुपये और उससे अधिक मूल्य वर्ग के घर खरीदारों में बड़े व्यापारिक समूह, अभिनेता और नए स्टार्टअप के संस्थापक शामिल हैं।” पिछले तीन वर्षों में बेचे गए इन 49 घरों में से मुंबई में 69 प्रतिशत हिस्सा था, जिसके बाद दिल्ली एनसीआर का स्थान था। मुंबई में, मालाबार हिल और वर्ली में इन लेन-देन का बड़ा हिस्सा हावी था। दिल्ली-एनसीआर में, ऐसे सौदे केवल लुटियंस बंगला जोन (एलबीजेड) तक ही सीमित नहीं थे। कृष्णन ने कहा कि गुरुग्राम में गोल्फ कोर्स रोड पर कई हाई-राइज अपार्टमेंट सौदे भी दर्ज किए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले तीन वर्षों में 100 करोड़ रुपये और उससे अधिक मूल्य वर्ग में बेचे गए सभी अपार्टमेंट में से अधिकांश 10,000-16,000 वर्ग फुट (सुपर बिल्ट-अप एरिया) के आकार की रेंज में थे।

भारत इस मुश्किल घड़ी में म्यांमार के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है, PM मोदी ने वरिष्ठ जनरल से की बात

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के वरिष्ठ जनरल महामहिम मिन आंग ह्लाइंग से बात की। उन्होंने कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में म्यांमार के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। एक्स पर एक पोस्ट में मोदी ने कहा, “म्यांमार के वरिष्ठ जनरल महामहिम मिन आंग ह्लाइंग से बात की। विनाशकारी भूकंप में हुई मौतों पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। एक करीबी दोस्त और पड़ोसी के रूप में, भारत इस मुश्किल घड़ी में म्यांमार के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत आपदा राहत सामग्री, मानवीय सहायता, खोज और बचाव दल को प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से भेजा जा रहा है।” म्यांमार और पड़ोसी थाईलैंड में शुक्रवार को उच्च तीव्रता वाला भूकंप आया, जिससे इमारतें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे नष्ट हो गए। म्यांमार में कम से कम 1,002 लोगों की मौत हुई। भारत ने शनिवार को म्यांमार को 15 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक पोस्ट में कहा कि ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के हिस्से के रूप में, भारत ने शुक्रवार के भीषण भूकंप से प्रभावित म्यांमार के लोगों की सहायता के लिए पहले प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में काम किया। टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, भोजन के पैकेट, स्वच्छता किट, जनरेटर और जरूरी दवाओं सहित 15 टन राहत सामग्री की हमारी पहली खेप यांगून पहुंच गई है।” इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विनाशकारी भूकंप पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने एक्स पर लिखा, “म्यांमार और थाईलैंड में भूकंप के बाद की स्थिति से चिंतित हूं। सभी की सुरक्षा और खुशहाली के लिए प्रार्थना करता हूं। भारत हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है। इस संबंध में, हमने अपने अधिकारियों से तैयार रहने को कहा है। साथ ही विदेश मंत्रालय से म्यांमार और थाईलैंड की सरकारों के साथ संपर्क में रहने को कहा है।” म्यांमार में शुक्रवार दोपहर को 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, सागाइंग के पास आए इस भूकंप के बाद 2.8 से 7.5 तीव्रता के 12 झटके महसूस किए गए, जिससे प्रभावित इलाकों में हालात और खराब हो गए। म्यांमार के राज्य प्रशासन परिषद की सूचना टीम ने जानकारी दी है कि भूकंप में 1,002 लोग मारे गए, 2,376 लोग घायल हुए और 30 लोग अब भी लापता हैं। म्यांमार के नेता वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय समुदायों से मानवीय सहायता की अपील की है।

1 साल में सोने की कीमत 50 बार ऑल टाइम हाई पर पहुंची, 12 साल में सोने की कीमत में तेजी का सबसे लंबा दौर

नई दिल्ली  सोने की कीमत नए रेकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई। पिछले 12 महीने में सोने की कीमत 50 बार ऑल टाइम हाई पर पहुंच चुकी है। पिछले 12 साल में यह इसमें तेजी का सबसे लंबा दौर है। साथ ही यह सोने के इतिहास में तेजी का तीसरा सबसे लंबा दौर है। इससे पहले 1970 के दशक में महंगाई, आर्थिक विकास में ठहराव और बेरोजगारी के कारण सोने की कीमत कई महीनों तक चढ़ी थी। उस दौरान सोने की कीमत में लगातार चार साल तक तेजी आई थी। इस बार सोने की कीमत पिछले एक साल में 39 फीसदी और इस साल 16 फीसदी चढ़ चुकी हैं। यह लगातार तीसरे साल पॉजिटिव परफॉरमेंस की तरफ बढ़ रहा है। सोने की कीमत में तेजी के कई कारण हैं। लोगों को डर है कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ लगाने से दुनिया में व्यापार युद्ध गहरा हो सकता है। यही वजह है कि निवेशक सोने को सुरक्षित मानकर इसमें पैसा लगा रहे हैं। सोने को हमेशा से ही आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ एक बचाव के रूप में देखा जाता है। जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो सोने की कीमत बढ़ने लगती है। जानकारों का कहना है कि लगातार अनिश्चितता लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण सोने की मांग बढ़ रही है। इसका मतलब है कि लोग सोने को इसलिए खरीद रहे हैं क्योंकि उन्हें लग रहा है कि दुनिया में कुछ गड़बड़ होने वाली है। कहां तक जा सकती है कीमत ICICI Bank Global Markets की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2025 की दूसरी तिमाही में सोने की कीमत 96,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकती हैं। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमत दिसंबर तक $3,200 से $3,400 प्रति औंस तक जा सकती है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में  सोने की कीमत 1,100 रुपये के उछाल के साथ 92,150 रुपये प्रति 10 ग्राम की नई ऊंचाई पर पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 91,050 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। चांदी की कीमतों में 1,300 रुपये की तेजी आई और यह बृहस्पतिवार के बंद स्तर 1,01,700 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले 1,03,000 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर के करीब पहुंच गई।

1 अप्रैल से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर में प्रॉपर्टी की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हो सकती है, 70% तक का इजाफा

नई दिल्ली अगर आप नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर में प्रॉपर्टी खरीदने का सोच रहे हैं, तो इस समय को एक अच्छा अवसर माना जा सकता है। बढ़ती कीमतों के साथ-साथ इन शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में भी लगातार सुधार हो रहा है। लेकिन इस बीच आपको यह जानकर हैरानी होगी कि  नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर में 1 अप्रैल से प्रॉपर्टी की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 में यहां की प्रॉपर्टी की कीमतें 20% से लेकर 70% तक बढ़ने की संभावना है, जो कि लगभग 9 सालों के बाद हो रही इस तरह की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। यह बढ़ोत्तरी मुख्यतः बढ़ती हुई डिमांड और जमीन के बाजार में निरंतर हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण हो सकती है। बता दें कि यह 9 साल बाद इतनी बड़ी बढ़ोतरी हो रही है।   नोएडा में हाई-राइज अपार्टमेंट की कीमतें लगभग 20% तक बढ़ने की संभावना है, जबकि ग्रेटर नोएडा में यह बढ़ोत्तरी 30% तक हो सकती है। इसके अलावा, नोएडा में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के खुलने से भी प्रॉपर्टी की कीमतों में 70% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। ANAROCK रिसर्च रिपोर्ट ANAROCK रिसर्च के अनुसार, 2019 से लेकर अब तक नोएडा की आवासीय प्रॉपर्टी की कीमतों में लगभग 92% की बढ़ोतरी देखी गई है। ग्रेटर नोएडा में यह बढ़ोतरी 97% तक पहुंच चुकी है। 2019 में प्रति वर्ग फीट ₹4,795 से शुरू होकर अब ये कीमतें ₹9,200 प्रति वर्ग फीट तक पहुंच गई हैं। ग्रेटर नोएडा में भी यही ट्रेंड देखा गया है, जहां कीमतें ₹3,340 से ₹6,600 प्रति वर्ग फीट तक बढ़ गई हैं।  

विश्वविद्यालय में कुलपति को कुलगुरु कहना प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति की पुनस्थापना की दिशा में एक कदम है: राज्यपाल

जयपुर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने  कहा कि परंपरा के साथ आधुनिक ज्ञान की दृष्टि से ही भारत विश्व गुरु बनेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में कुलपति को कुलगुरु कहना प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति की पुनस्थापना की दिशा में एक कदम है। प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति परिपूर्ण थी। उन्होंने नई शिक्षा पद्धति को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह विद्यार्थियों के विकास से जुड़ी है। राज्यपाल श्री बागडे शनिवार को महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में संबोधित कर रहे थे।  इसमें वर्ष 2023 एवं 2024 के स्वर्ण पदकों का वितरण किया गया। साथ ही विद्या वाचस्पति उपाधि धारकों को भी उपाधियां वितरित हुई। राज्यपाल ने कहा कि भारत की समृद्ध वैज्ञानिक परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि महर्षि भारद्वाज के द्वारा वर्णित विमान विज्ञान के आधार पर 1895 में श्री शिवकर बापूजी तलपे ने हमारे यहां विमान उड़ाया था। उन्होंने श्री चिरंजिलाल वर्मा से संस्कृत ग्रंथों की शिक्षा ग्रहण की थी। इसके बाद ही 1903 में राइट बंधुओं ने विमान बनाया। इसी प्रकार गुरुत्वाकर्षण के बारे में न्यूटन से बहुत ही पहले कॉपरनिकस और उससे भी पहले भास्कराचार्य ने गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत दिया था। उन्होंने कहा कि विनोबा भावे ने आजादी के तत्काल पश्चात् शिक्षा पद्धति में बदलाव की आवश्यकता बताई थी। लॉर्ड मैकाले ने भारत को गुलाम बनाने के लिए जो शिक्षा पद्धति चलाई वह अभी तक चल रही है। नई शिक्षा पद्धति भारत के समाज, नागरिक और संस्कृति के अनुसार है। नई शिक्षा नीति से निकले हुए विद्यार्थियों के माध्यम से समाज को आगामी कुछ समय में ही परिणाम मिलने लगेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में इस प्रकार के पाठ्यक्रम तैयार होने चाहिए जिससे समाज में रोजगार का सृजन हो सके। ज्ञान की विभिन्न शाखाओं का अध्ययन कर युवा उद्यमी बनने चाहिए। इससे देश के विकास में उनका योगदान सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा मनुष्य का निर्माण करने वाली हो। महर्षि दयानंद सरस्वती मानव मूल्यों के साक्षात उदाहरण रहे है। उन्होंने कहा कि देश के 400 कुलगुरुओं तथा 1000 से अधिक शिक्षाविदों ने दो वर्षों तक गहन चर्चा के उपरांत नई नीति को बनाया है। यह शिक्षा पद्धति विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करने में कारगर सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि अर्जित विद्या का व्यवहारिक उपयोग समाज हित में और राष्ट्रहित में किया जाना चाहिए। शिक्षा एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है। इसीलिए प्राध्यापकों और अध्यापकों को नई पुस्तकें पढ़ने के साथ ही नई विद्या भी प्राप्त करनी चाहिए। विद्यार्थी को भी पाठ्य पुस्तकों के अतिरिक्त अन्य पुस्तकें को भी पढ़ने में अपना समय देना चाहिए। इससे उनकी बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होगी। विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि दीक्षांत समारोह माता-पिता, परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति दायित्वों के स्मरण का दिन होता है। शिक्षा जीवन पर्यंत चलने वाली एक प्रक्रिया है। आज के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और डिजिटल युग में हमें विश्व के साथ-साथ चलना होगा। बढ़ती तकनीक में आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने समाज को बहुत प्रभावित किया है। सोशल मीडिया और सार्वजनिक जीवन पर इसके दुष्परिणाम देखे जा सकते हैं। नई पीढ़ी को इन दुष्प्रभावों से बचाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति ने चार आश्रमों और चार पुरुषार्थों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था दी है। नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला के शिक्षा केंद्रों, मैत्रेई, गार्गी, अपाला, घोषा, विश्ववारा जैसी विदुषियों और वराह मिहिर, आर्यभट्ट, चरक, सुश्रुत, आश्वघोष, चाणक्य एवं समर्थ गुरु रामदास जैसे शिक्षकों के कारण भारत विश्व गुरु रहा है। विद्यार्थियों को छत्रपति संभाजी महाराज और महाराणा सांगा जैसे पूर्वजों के पद चिह्नों का अनुकरण करना चाहिए। क्रूर आक्रांताओं को सम्मान देने वाले लोग इस भारत और भारत की संस्कृति के नहीं हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं में राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण और त्याग होना आवश्यक है। सबके मन में राष्ट्र प्रथम का स्थाई भाव होना चाहिए। स्वराज, स्वधर्म, स्वदेशी और स्वभाषा को साथ लेकर शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी समाज की विकृतियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। शिक्षा के क्षेत्र में भारत अपना प्राचीन गौरव पुनः प्राप्त करने के लिए प्रयास कर रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राजस्थान के विश्वविद्यालय के कुलपतियों को अब कुलगुरु के नाम से जाना जाएगा। यह उनके सम्मान में एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन होगा। नई शिक्षा नीति शिक्षा की सार्थकता और सदुपयोग के लिए महत्वपूर्ण होगी। अनुशासनात्मक, बहुविषयक और बहुआयामी दृष्टिकोण के द्वारा विद्यार्थियों में मूल्य, मान्यताएं और संवेदनाएं विकसित की जानी चाहिए। नई शिक्षा नीति में आधुनिक ज्ञान से जुड़े विषयों के महत्व को प्रतिपादित करने के साथ ही प्राचीन भारतीय संस्कृति, वैदिक ज्ञान और सनातन जीवन मूल्यों को भी महत्व दिया गया है। युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में पाश्चात्य नरेटिव से बचना होगा। महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मंजू बाघमार ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थी की जीवन यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। 

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा- फिटनेस केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारे जीवन की प्राथमिकता होनी चाहिए

जयपुर मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि फिटनेस केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारे जीवन की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने फिट राजस्थान अभियान शुरू करने का संकल्प लिया था, ‘रन फॉर फिट राजस्थान’ इसी संकल्प का प्रतीक है। श्री शर्मा ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि देश में युवा, महिला, किसान और मजदूर सशक्त होंगे तो देश-प्रदेश भी सशक्त होंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा राजस्थान दिवस महोत्सव के तहत महिला, किसान, अन्त्योदय, युवा एवं सुशासन को समर्पित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। श्री शर्मा ने राजस्थान दिवस समारोह के तहत कार्यक्रमों की श्रृंखला में शनिवार को अमर जवान ज्योति पर आयोजित रन फॉर फिट राजस्थान दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा स्वयं भी दौड़ में शामिल होकर प्रदेशवासियों को स्वस्थ रहने का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर खिलाड़ी को पर्याप्त अवसर उपलब्ध करवाने तथा उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए हमने वर्ष 2024-25 में 1614 खिलाड़ियों को 34 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को नकद पुरस्कार के साथ भूखंड आवंटन, सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता और रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। स्पोर्ट्स लाइफ इंश्योरेंस स्कीम से खिलाड़ियों को सुरक्षा कवच भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन ओलंपिक-2028 के तहत 50 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा और जयपुर में 20 करोड़ की लागत से “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्पोर्ट्स“ की स्थापना की जाएगी। हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर मनाया जाएगा राजस्थान दिवस श्री शर्मा ने कहा कि सात चरणों में हुए राजस्थान के एकीकरण की यात्रा में चौथे चरण में वृहद् राजस्थान की स्थापना एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, जिसकी यादों को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए हर साल राजस्थान दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि वृहद् राजस्थान की स्थापना संवत 2006 की चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रेवती नक्षत्र इंद्रयोग में हुई थी, जिसे राजस्थान के एकीकरण में अहम भूमिका निभाने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी ने विशेष महत्व दिया था। उनकी और समस्त प्रदेशवासियों की भावना को सम्मान देते हुए राज्य सरकार ने अब हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर ही राजस्थान दिवस मनाने का निर्णय लिया है। राजस्थान का खेलकूद के क्षेत्र में गौरवपूर्ण इतिहास मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान का खेलकूद के क्षेत्र में गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। कई खेलों में हमारे खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रदेश की पताका लहराई है। पेरिस ओलंपिक में अनंतजीत सिंह व महेश्वरी चौहान ने निशानेबाजी में हिस्सा लिया। पेरिस पैरालंपिक में अवनी लेखरा ने स्वर्ण, सुंदर सिंह गुर्जर और मोना अग्रवाल ने कांस्य पदक जीतकर प्रदेश को गर्व का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों में हमारे खिलाड़ियों ने 43 पदक हासिल किए। ये उपलब्धियां हमारे युवाओं की प्रतिभा का प्रमाण हैं। इस अवसर पर युवा मामले एवं खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि जीवन में फिटनेस का बहुत महत्व है। स्वस्थ नागरिक से ही स्वस्थ समाज का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपनी योजनाओं और निर्णयों के माध्यम से प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों को निरन्तर प्रोत्साहित कर रही है।   इस दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में संपन्न राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया तथा 9 खिलाड़ियों को जमीन आवंटन के पट्टे वितरित किए। कार्यक्रम में संसदीय कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल, प्रमुख शासन सचिव राजस्व श्री दिनेश कुमार, शासन सचिव खेल एवं युवा मामले श्री नीरज के. पवन, 61 सब एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल रोहित मेहरोत्रा सहित विभिन्न खिलाड़ी, स्कूली छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

विश्व प्रसिद्ध विंध्याचल नवरात्रि मेला कल से शुरू होने जा रहा, मेले की सुरक्षा ATS के हाथ, ड्रोन से की जाएगी निगरानी

मिर्जापुर विश्व प्रसिद्ध विंध्याचल नवरात्रि मेले की सुरक्षा व्यवस्था एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस )के हवाले की गई है। नवरात्रि मेला कल से शुरू होने जा रहा है। नौ दिन चलने वाले मेले के लिए सुरक्षा की मुकम्मल व्यवस्था की गई है। पूरा मेला सीसी कैमरे के जद में होगा। ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी। मेला सुरक्षा में अर्धसैनिक बल के जवानों के साथ तीन हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। होमगार्ड, पीआरडी, यातायात पुलिस एवं फायर ब्रिगेड जवानों को भी लगाया गया है। आधुनिक उपकरणों से युक्त बम डिस्पोजल दस्ता एवं जल पुलिस के जवान मुस्तैद रहेगे। सीएम योगी ने दिए निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद गुरुवार को अधिकारियों के साथ चैत्र नवरात्रि मेले की तैयारियों की समीक्षा बैठक कर आदेश निर्देश दिए हैं। मां विन्ध्यवासिनी देवी के गर्भगृह में चरण छूने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह प्रतिबंध वीआईपी व्यक्तियों पर भी लागू किया गया है। साथ ही साथ पंडों, नाईयो और सफाईकर्मी के लिए डेस कोड में रहने के आदेश दिए गए हैं। दुकानदारों और वाहन स्टैंडो पर रेट लिस्ट लगाने के निर्देश दिए गए हैं। नौ दिन तक चलने वाले मेले सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ‘जगह-जगह लगाये गए हैं बैरियर’ जिला प्रशासन ने मेला की मुकम्मल व्यवस्था कर लेने का दावा किया है। नगर मजिस्ट्र वी के उपाध्याय को मेला अधिकारी बनाया गया है जबकि अपर जिला मजिस्ट्रेट एस पी शुक्ल सुपर मजिस्ट्रेट होगे। व्यवस्था के सम्बन्ध में जिलाधिकारी प्रिंयका निरंजन बताया कि पूरे मेला क्षेत्र को 10 जोन और 21 सेक्टरों में बाटा गया है। सभी जोनो में जोनल मजिस्ट्रेट और सेक्टर मजिस्ट्रेटो को तैनात किया गया है। मेला क्षेत्र में आवश्यकता से अधिक भीड़ एकत्र न हो सके इसके लिए जगह-जगह बैरियर लगाये गए हैं। ‘अतिसंवेदनशील स्थानों पर अतिसतकर्ता बरती जा रही’ सुरक्षा व्यवस्था के सम्बन्ध में जिला पुलिस प्रमुख सोमेन वर्मा ने बताया कि मेले में सिविल पुलिस के अलावा जल पुलिस यातायात घुड़सवार पुलिस के अलावा खुफिया एजेंसी के जवान भी है। किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलग से व्यवस्था की गयी है। उन्होंने बताया कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था की द्दष्टि से एटीएस के जवान मोर्चा संभालेंगे। यह टीम पूरे नवरात्रि मेला सुरक्षा व्यवस्था संभालेगी। उन्होंने बताया कि अतिसंवेदनशील स्थानों पर अतिसतकर्ता बरती जा रही है।   सुरक्षा कर्मियों को दिए निर्देश व्यवस्था एवं तैयारियों की समीक्षा के लिए मंडलायुक्त बालकृष्ण त्रिपाठी और पुलिस उपमहानिरीक्षक आर पी सिह ने मेला की तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक आदेश निर्देश दिए। श्रद्धालुओं से सछ्वभावपूर्ण व्यवहार के लिए पुलिस कर्मियों ने ली शपथ। नवरात्र मेले में ड्यूटी पर तैनात किए गए सुरक्षा कर्मियों एवं कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। ड्यूटी के दौरान श्रद्धालु दर्शनार्थियों के साथ विनम्र व्यवहार करे। साथ ही साथ साफ सुथरी वर्दी में अनुशासित रह कर अपने कर्तव्य एवं दायित्व का निर्वहन करेंगे।

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