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बीजेपी नेता का टूटा पैर तो अस्पताल को बना दिया पार्टी दफ्तर, बेड के पीछे पोस्टर लगाकर हुई मीटिंग

कानपुर पार्टी विद डिफरेंस के नेता गजब की स्टाइल में सियासत करते हैं और जब सत्ता हो तो अस्पताल का वार्ड भी पार्टी का कार्यालय बन जाता है। यह मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर से है, जहां कानपुर महानगर उत्तर में जिला अस्पताल के वार्ड में ही कार्यकर्ताओं की बैठक ले ली गई। कानपुर के भाजपा जिला अध्यक्ष कौन हैं? कानपुर भाजपा जिलाध्यक्ष अध्यक्ष अनिल दीक्षित ने अपने टूटे पैर के इलाज के दौरान अस्पताल में कार्यकर्ताओं की बैठक की। बैठक के दौरान अस्पताल के बेड के पीछे पार्टी का बैनर टांगा सामने और अगल-बगल वार्ड के कमरे की बेंच पर बेड पर कार्यकर्ताओं को बैठाया गया। 10 मिनट की इस बैठक में नेताजी बेड पर लेटे लेटे कार्यकर्ताओं में उत्साह भरते रहे। अब इसे आप समर्पण कहें या रुतबा या फिर राजनीतिक तमाशा जहां कैमरा भी बुलाया गया था। अस्पताल में क्यों हुई जिलाध्यक्ष की बैठक? कानपुर के आर्य नगर स्थित मेदांता अस्पताल के वार्ड में हुई इस बैठक में जिला अध्यक्ष अनिल दीक्षित ने सरकार के 8 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रमों की चर्चा की और वहीं कार्यकर्ताओं में जिम्मेदारी भी बांटी। जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने बताया कि पार्टी की तरफ से 14 अप्रैल तक होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की सूची आई थी। यह उसी के संबंध में बैठक बुलाई गई थी।   निजी अस्पताल के वार्ड में ही पार्टी का झंडा बैनर लगाकर हुई इस बैठक में समर्पण की नेताजी को तारिफ भी मिल सकती है। क्योंकि नेताजी को अपनी चोट से ज्यादा खुशी इस बात पर है कि कार्यकर्ताओं का प्रेम इनको पैर में पेन महसूस ही नहीं होने दे रहा है।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कर्मचारियों की निलंबन अवधि को माना जाएगा ड्यूटी का हिस्सा, एक अहम फैसला सुनाया

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करने वाला एक अहम फैसला सुनाया है। रायगढ़ वन मंडल में कार्यरत वनपाल दिनेश सिंह राजपूत की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने राज्य शासन के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें उसकी निलंबन अवधि को ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना गया था और शत-प्रतिशत वेतन रिकवरी का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति बीडी गुरु ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया कि निलंबन की अवधि को ड्यूटी के रूप में ही गिना जाएगा। उन्होंने निर्णय में यह भी उल्लेख किया कि इसी तरह की स्थिति वाले अन्य कर्मचारियों की निलंबन अवधि को ड्यूटी के रूप में मान्यता दी गई, लेकिन याचिकाकर्ता के मामले में भेदभाव किया गया। यह है मामला याचिकाकर्ता दिनेश सिंह 2 जनवरी 2015 से 2 जुलाई 2019 तक एतमानगर रेंज के पोंडी सब-रेंज के अंतर्गत कोंकणा बीट के अतिरिक्त प्रभार के साथ बीट गार्ड बरौदखर के पद पर कार्यरत थे। 2 जुलाई 2019 को उन्हें तथ्यों को छिपाने और गुमराह करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। बाद में 8 मई 2020 को मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर वन वृत्त ने उनका निलंबन निरस्त कर दिया। मगर, विभागीय जांच लंबित रहने के दौरान उन्हें कटघोरा रेंज कार्यालय में विशेष ड्यूटी पर नियुक्त कर दिया गया। याचिकाकर्ता को 312 दिनों यानी 10 माह 7 दिनों तक निलंबित रखा गया। विभागीय जांच में आंशिक दोषी पाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत उनके वेतन से 17,467 रुपये की वसूली और तीन वेतन वृद्धि रोकने का आदेश जारी किया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि अन्य कर्मचारियों पर भी समान आरोप लगे थे। मगर, उनके मामले में निलंबन अवधि को ड्यूटी का हिस्सा माना गया। हालांकि, याचकिकर्ता की निलंबन की अवधि को ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना गया था।   निर्णय और उसका प्रभाव हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने इस मामले में राज्य शासन के आदेश को खारिज करते हुए निलंबन अवधि को ड्यूटी का हिस्सा मानने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अन्य कर्मचारियों की निलंबन अवधि को ड्यूटी में जोड़ा गया है, तो याचिकाकर्ता के साथ भेदभाव क्यों किया गया। सुप्रीम कोर्ट के समानता के सिद्धांत का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि समान परिस्थितियों में सभी कर्मचारियों को समान अधिकार मिलना चाहिए। सरकारी सेवा में अनुशासन अनिवार्य: बर्खास्तगी सही वहीं, एक अन्य मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जनजातीय कल्याण विभाग के दैनिक वेतनभोगी चौकीदार की सेवा समाप्ति को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामला दुर्ग जिले के पोस्ट मैट्रिक आदिवासी छात्रावास में कार्यरत कार्य-भारित कर्मचारी (वर्क चार्ज कर्मचारी) दीपक जोशी से जुड़ा है। उसे अनुशासनहीनता और छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के गंभीर आरोपों के चलते साल 2017 में बर्खास्त कर दिया गया था। याचिकाकर्ता दीपक जोशी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी थी। उनका दावा था कि उन्हें विभागीय जांच प्रक्रिया में उचित अवसर नहीं दिया गया। इसके साथ ही उन्हें आरोपों का खंडन करने के लिए जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए। न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि पर्याप्त अवसर मिलने के बावजूद याचिकाकर्ता ने अपनी सफाई नहीं दी। फैसले का क्या होगा असर फैसले से स्पष्ट हो गया है कि सरकारी सेवाओं में अनुशासनहीनता और कर्तव्यहीनता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करें अन्यथा कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। फैसले ने सरकारी विभागों में अनुशासन और कार्य नैतिकता को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है।

राजनांदगांव में पारा 37° पार, 4 दिन बढ़ेगी गर्मी, अगले तीन-चार दिनों में तापमान में वृद्धि होने से गर्मी बढ़ेगी

रायपुर वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर कम होने के बाद छत्तीसगढ़ में तापमान बढ़ने लगा है। पिछले दो दिनों से दुर्ग संभाग सबसे गर्म बना हुआ है। राजनांदगांव में पारा 37 डिग्री के पार पहुंच गया है। 4 जिलों रायपुर, जगदलपुर, दुर्ग में पारा 35 डिग्री के पार है। आज (मंगलवार) से मौसम साफ होने लगेगा। अगले तीन-चार दिनों में तापमान में वृद्धि होने से गर्मी बढ़ेगी। प्रदेश में मौसम में आया बदलाव अब खत्म होने वाला है। छत्तीसगढ़ के आसपास बने सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर हो रहे हैं। पिछले 24 घंटे में जशपुर नगर में 53.6 मिमी बारिश हुई है। रायपुर में दिन का पारा 36 डिग्री सोमवार को आसमान में हल्के बादल रहे उसके बावजूद दिन का तापमान 36 डिग्री के करीब रहा। यह सामान्य से 1.2 डिग्री कम था। दो दिन पहले तक तापमान तीन डिग्री तक कम था। सोमवार को रात का तापमान 23.4 डिग्री रहा। ये जो सामान्य से 1.2 डिग्री अधिक था। मौसम विभाग का कहना है कि अगले तीन-चार दिन दिन का तापमान दो से तीन डिग्री तक बढ़ेगा। आज रायपुर में अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। बिलासपुर में पारा 35 डिग्री के करीब यहां दिन का तापमान 34.7 डिग्री के करीब रहा। यह सामान्य से 3.1 डिग्री कम था। न्यूनतम तापमान 21.7 डिग्री रहा, जो औसत से 1.3 डिग्री अधिक था। गौरेला पेंड्रा मरवाही में अधिकतम तापमान 33. 4 डिग्री रहा, जो सामान्य से करीब 1 डिग्री कम रहा। न्यूनतम तापमान 16 डिग्री रहा। जो नॉर्मल से करीब 3.2 डिग्री कम था। राजनांदगांव में सबसे ज्यादा गर्मी दुर्ग संभाग के जिलों में इन दोनों तापमान सामान्य से अधिक है। सोमवार को राजनांदगांव जिले में सबसे अधिक 37.5 डिग्री तापमान रहा। वहीं दुर्ग जिले में दिन का टेम्प्रेचर 35.6 डिग्री रहा। दोनों जिले में रात का तापमान 20 डिग्री रहा। सरगुजा में पारा सामान्य से कम यहां सोमवार को दिन का तापमान समान्य से कम रहा। अंबिकापुर में अधिकतम तापमान 31.7 डिग्री रहा जो सामान्य से 2.6 डिग्री कम था। वहीं रात का तापमान 15.5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया जो नॉर्मल से 2.4 डिग्री कम था। बस्तर में आज से बदलेगा मौसम बस्तर संभाग के जिलों में आज मौसम साफ रहेगा। सोमवार को जगदलपुर में अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री रहा। यह सामान्य से 1.3 डिग्री कम था। रात का तापमान 21.9 डिग्री दर्ज किया गया। जो सामान्य से 1.6 डिग्री अधिक रहा।

15 दिनों में 13 हजार राशन दुकानों की जांच मुश्किल, CG में चावल घोटाला छुपाने को कर रहे लेटलतीफी

रायपुर प्रदेश की 13 हजार राशन दुकानों में ऑनलाइन स्टॉक और गोदाम में रखे स्टॉक में अंतर की जांच अब तक शुरू नहीं हो पाई है। यह स्थिति तब है जब बचत स्टॉक के सत्यापन और डेटा एंट्री 10 अप्रैल, 2025 तक पूरा की जानी है। राशन दुकानों की जांच दल में खाद्य विभाग के साथ गृह विभाग और सहकारिता के सदस्यों को रखा जाएगा। इसके लिए 13 फरवरी को आदेश जारी किया गया था। यह सत्यापन एक मार्च 2025 की स्थिति में किया जाना है। इस तरह 13 हजार राशन दुकानों की जांच 15 दिनों में किया जाना मुश्किल है। लेटेस्ट और ट्रेंडिंग स्टोरीज जांच में देरी का फायदा गड़बड़ी करने वाले राशन दुकान संचालक उठा रहे हैं। बता दें कि राजधानी की अधिकांश राशन दुकानों में वास्तविक स्टॉक में गड़बड़ी है। इसलिए जांच को अटकाया जा रहा है। महिला समितियों ने कलेक्टर से की शिकायत सोमवार को कई महिला समितियों ने कलेक्टर से मिलकर फर्जी अध्यक्ष का वीडियो दिखाकर जांच की मांग की है। वीडियो में संघ का फर्जी अध्यक्ष महिलाओं को धमका कर खुद राशन दुकान चालने का दवाब बना रहा है। मामले में कलेक्टर ने खाद्य नियंत्रक को जांच करने के लिए कहा है। महिलाओं ने बताया कि फर्जी अध्यक्ष पूर्व विधायक के नाम से दुकानों पर कार्रवाई करवाने की धमकी देकर खुद दुकानें हथिया लेता था। इसके बाद दुकानों से लाखों की चावल की हेराफेरी करता था। इसके बाद खाद्य अधिकारियों से मिलकर दुकानें निलंबित करकर अपनी संस्था में जुड़वाता है।   फिर हुई करोड़ों के चावल घोटाले की शिकायत खमतराई राशन दुकान में एपीएल घोटला और बिना स्टॉक के वितरण दिखाने वाले राशन दुकान संचालक के खिलाफ दो साल पहले की गई शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। अब फिर से मामले की शिकायत ईओडब्लू में की गई है।  

माध्यमिक शिक्षा मंडल में भी अब CBSE मॉडल की तरह होंगी बोर्ड परीक्षाएं, अधिसूचना जारी

भोपाल मध्य प्रदेश में अब शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सीबीएसई (CBSE) की तरह, अब एमपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा साल में दो बार होगी। यह नई व्यवस्था 2024-25 सत्र से शुरू होगी। पहली परीक्षा फरवरी-मार्च में होगी और दूसरी परीक्षा जुलाई-अगस्त में होगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस बदलाव के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल 1965 में अमेंडमेंट कर नोटिफिकेशन जारी की है। राजपत्र के अनुसार ऐसे छात्रों को जो द्वितीय परीक्षा में बैठने वाले हों, द्वितीय परीक्षा का रिजल्ट आने तक अगली उच्चतर कक्षा में अस्थायी प्रवेश ले सकेंगे। ऐसे छात्र जो मंडल की प्रथम परीक्षा के परिणाम में एक या एक से अधिक विषयों में अनुपस्थित एवं अनुत्तीर्ण रहे है, वह द्वितीय परीक्षा में सम्मलित हो सकेंगे। किसी विषय में उत्तीर्ण भी अंक सुधार सकेंगे। एक से ज्यादा विषय में श्रेणी सुधार संभव ● प्रथम परीक्षा में उत्तीर्ण रहे छात्र एक या एक से अधिक विषयों की द्वितीय परीक्षा में सम्मलित होने के पात्र होंगे। ● प्रायोगिक विषयों में कोई छात्र प्रथम परीक्षा की प्रयोगिक व आंतरिक परीक्षा में केवल अनुत्तीर्ण भाग में सम्मलित होने के लिए पात्र होगा। ● द्वितीय परीक्षा में सम्मलित होने के लिए छात्र को निर्धारित शुल्क के साथ परीक्षा आवेदन पत्र भरना अनिवार्य होगा, पर द्वितीय परीक्षा के दौरान छात्र द्वारा प्रथम परीक्षा में लिए गए विषय में परिवर्तन की अनुमति नहीं दी जाएगी। विद्यार्थियों के लिए नई प्रक्रिया द्वितीय परीक्षा (Second Exam) में शामिल होने के लिए विद्यार्थियों को एप्लीकेशन लेटर भरना अनिवार्य होगा। लेकिन, परीक्षा के समय विषय में कोई बदलाव की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, जिन छात्रों ने पहले परीक्षा में एक या एक से अधिक विषयों में एब्सेंट या फेल्ड पाया हो, वे अब द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। कैसे तैयार होगा वार्षिक परिणाम? दोनों परीक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर छात्रों का वार्षिक परिणाम तय किया जाएगा। द्वितीय परीक्षा में केवल वही छात्र शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने पहली परीक्षा दी हो। छात्र अंक सुधार या फेल हुए विषयों में दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। अस्थायी प्रवेश और अन्य नियम द्वितीय परीक्षा देने वाले छात्र अगली कक्षा में अस्थायी प्रवेश ले सकेंगे, लेकिन अंतिम परिणाम आने तक उनकी उपस्थिति प्रोविजनल होगी। प्रायोगिक विषयों में केवल अनुत्तीर्ण भाग की ही दोबारा परीक्षा दी जा सकेगी। छात्र परीक्षा शुल्क भरकर ही द्वितीय परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे। पहली परीक्षा में चुने गए विषय बदलने की अनुमति नहीं होगी। CBSE की तर्ज पर MP बोर्ड का कदम इससे पहले, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल (CBSE) ने भी अगले सत्र से 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित करने का फैसला किया था। MP बोर्ड ने भी इसी मॉडल को अपनाया है। हर साल MP बोर्ड की परीक्षाओं में लगभग 18 लाख छात्र शामिल होते हैं। पूरक परीक्षा की जगह द्वितीय परीक्षा पहले बोर्ड की मुख्य परीक्षा के बाद जुलाई में पूरक परीक्षा होती थी, लेकिन अब इसकी जगह द्वितीय परीक्षा ली जाएगी। इससे छात्रों को अधिक मौका मिलेगा और रिजल्ट की प्रक्रिया भी पहले से बेहतर होगी। इस नई व्यवस्था पर 15 दिनों के भीतर सुझाव या आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। उसके बाद इसे अंतिम रूप देकर लागू कर दिया जाएगा। दोनों परीक्षाओं के आधार पर तैयार होगा रिजल्ट     द्वितीय परीक्षा में वही विद्यार्थी शामिल होंगे, जिन्होंने पहली परीक्षा दी है। इसके बाद बोर्ड की पहली परीक्षा और दूसरी परीक्षा में प्राप्त अंक के आधार पर वार्षिक परीक्षा का परिणाम तैयार किया जाएगा।     उल्लेखनीय है कि हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीबीएसई) ने भी अगले शैक्षणिक सत्र से दो बार 10वीं और 12वीं की परीक्षा कराने का निर्णय लिया था। इसी तर्ज पर मप्र बोर्ड भी आगे बढ़ा है।     मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं व 12वीं परीक्षा में हर साल करीब 18 लाख विद्यार्थी शामिल होते हैं। बोर्ड की अभी तक एक ही परीक्षा फरवरी या मार्च में होती थी। मुख्य परीक्षा के रिजल्ट के बाद जुलाई में पूरक परीक्षा आयोजित की जाती थी, जिसे अब नई व्यवस्था में नहीं कराने का निर्णय लिया गया है। अब ऐसी रहेगी व्यवस्था द्वितीय परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थी पूर्ण परीक्षा परिणाम घोषित होने तक माध्यमिक शिक्षा मंडल या महाविद्यालय द्वारा संबद्धता प्राप्त संस्था के प्रधानाचार्यों से अनुमति प्राप्त कर अगली कक्षा में अस्थायी प्रवेश ले सकेंगे। ऐसे विद्यार्थियों के लिए, जो मंडल की प्रथम परीक्षा के परीक्षा परिणाम में एक या एक से अधिक विषयों में अनुपस्थित अथवा अनुत्तीर्ण रहे हों, द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। ऐसे अभ्यर्थी, जो किसी विषय में उत्तीर्ण हो गए हों, वे भी अंक सुधार के लिए द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। प्रथम परीक्षा में उत्तीर्ण रहे विद्यार्थी भी एक या एक से अधिक विषयों में द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। प्रायोगिक विषयों में कोई विद्यार्थी प्रथम परीक्षा की प्रायोगिक/आंतरिक परीक्षा के केवल अनुत्तीर्ण भाग में शामिल होने के लिए पात्र होगा। द्वितीय परीक्षा में शामिल होने के लिए विद्यार्थी को आवेदन-पत्र भरना अनिवार्य होगा, लेकिन द्वितीय परीक्षा के दौरान विद्यार्थी द्वारा प्रथम परीक्षा में लिए गए विषय में परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी।

पति के प्रेम संबंध से परेशान थी डॉक्टर रिचा, पुलिस ने पति अभिजीत के खिलाफ दर्ज किया केस

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में डॉक्टर रिचा पांडे सुसाइड मामले में पति के प्रेम संबंध का खुलासा हुआ है। पति के प्रेम संबंध से डॉक्टर रिचा पांडे परेशान थी। पति अभिजीत पांडे का एक लड़की से प्रेम संबंध था। शादी के बाद भी अभिजीत पांडे लड़की के संपर्क में था। इसी बात को लेकर दोनों पति-पत्नी के बीच में अक्सर विवाद होता था। इसी से परेशान होकर रिचा पांडे ने एनीस्थीसिया के पांच इंजेक्शन लगाकर खुदकुशी कर ली थी। पुलिस ने आरोपी पति अभिजीत पांडे के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना का केस दर्ज किया है। आरोपी से पूछताछ और मोबाइल से मिले सबूत के आधार पर FIR दर्ज की गई है। बता दें कि मृतका मूलतः लखनऊ की निवासी थी। एमपी सतना निवासी अभिजीत पांडेय से 4 माह पूर्व शादी हुई थी। बीडीएस डॉक्टर पति की एम पी नगर में प्राइवेट क्लीनिक है। मौत के बाद मौके पर पहुंची एफएसएल (FSL) की टीम और मृतका के हाथ में इंजेक्शन के मिले निशान के बाद जांच आगे बढ़ी थी। मामले में पुलिस ने पति से पूछताछ की थी। वहीं मृतका के पिता ने भी दामाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस के हाथ रिचा पांडे की वॉट्सऐप चैट लगी, जांच में सामने आया कि डॉ. अभिजीत किसी और महिला के साथ रिश्ते में था, जिसकी भनक उसकी पत्नी को लग चुकी थी। रिचा ने कई बार पति को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। चैट में कई बार पति ने रिचा को आत्महत्या के लिए उकसाया था। वह बार-बार कहता था, “मर जाओ”, जिससे रिचा मानसिक रूप से बेहद परेशान रहने लगी थी। बेवफाई के साथ अत्याचार भी जांच में यह भी सामने आया कि डॉ. अभिजीत अपनी कथित प्रेमिका पर खूब पैसे खर्च करता था। जब रिचा को यह बात पता चली, तो उसने विरोध किया, लेकिन पति ने उसकी एक न सुनी। इसके चलते दोनों के बीच अक्सर झगड़े होने लगे। पति न केवल उसे धोखा दे रहा था, बल्कि मानसिक रूप से भी प्रताड़ित कर रहा था। पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार पुलिस ने डॉ. अभिजीत के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। इसके साथ ही, पुलिस अब आरोपी के मोबाइल डेटा और क्लिनिक के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपी के मोबाइल से और भी सच्चाइयां सामने आ सकती हैं। रिचा के परिवार वालों ने कड़े कदम उठाने की मांग की है, ताकि उनकी बेटी को न्याय मिल सके।    

VFJ को 600 करोड़ का मिला ऑर्डर, सेना ने मांगे 590 स्टेलियन और 800 LTPA; बीएसएफ को भी सप्लाई होंगे 400 वाहन

जबलपुर जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री (VFJ) को बड़ा ऑर्डर मिला है। भारतीय सेना ने 590 स्टेलियन और 800 एलटीपीए बनाने का काम दिया है। जिसकी कीमत करीब 600 करोड़ रुपए है। नया काम मिलने से फैक्ट्री में उत्पादन की रफ्तार बढ़ गई है। वीएफजे की शान है स्टेलियन-एलपीटीए जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री आजादी के बाद से सेना के लिए वाहन तैयार कर रही है। शक्तिमान, जोंगा जैसी शक्तिशाली गाड़ियों के बाद फैक्ट्री में स्टेलियन और एलपीटीए बनने की शुरुआत हुई थी। 2025-26 वित्तीय वर्ष में 1390 गाड़ियों का ऑर्डर मिला है। बीएसएफ ने फैक्ट्री में डाला डेरा बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की बटालियन भी अपने ऑर्डर के हिसाब से उत्पादन कराने के लिए निर्माणी में डेरा डाले हुए हैं। फैक्ट्री के पास 423 वाटर ब्राउजर के ऑर्डर पेंडिंग है। बीएसएफ को कुछ मॉडिफिकेशन भी चाहिए है। फोर्स के तीन कर्नल और सात जवानों को ऑफिसर्स मेस में ठहराया गया है। ये सभी काम के दौरान मौके पर मौजूद रहते हैं। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की बटालियन भी अपने ऑर्डर के हिसाब से उत्पादन कराने के लिए निर्माणी में डेरा डाले हुए हैं। फैक्ट्री के पास 423 वाटर ब्राउजर के ऑर्डर पेंडिंग है। बीएसएफ को कुछ मॉडिफिकेशन भी चाहिए है। फोर्स के तीन कर्नल और सात जवानों को ऑफिसर्स मेस में ठहराया गया है। ये सभी काम के दौरान मौके पर मौजूद रहते हैं।

हम अपने देश से बांग्लादेशियों को भगा नहीं सकते , उनका आर्थिक बहिष्कार होना चाहिए: रणजीत सावरकर

इंदौर इंदौर में वीर सावरकर की प्रतिमा का अनावरण हुआ। इस मौके पर मुख्यमंत्री मोहन यादव के अलावा सावरकर के पोते रणजीत सावरकर भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हम अपने देश से बांग्लादेशियों को भगा नहीं सकते , लेकिन उनका आर्थिक बहिष्कार होना चाहिए। अब तो वे पहचान छुपाकर रहने लगे है। उनका बहिष्कार होगा तो वे संकट में आएंगे औ देश से उन्हें जाना पड़ेगा।  रणजीत ने कहा कि  आजादी के समय देश में 8 प्रतिशत मुस्लिम थे, जो अब 22 प्रतिशत हो गए। वर्ष 1970 में बांग्लादेश से एक-डेढ़ करोड़ मुस्लिम देश में आए थे। अब उनकी संख्या भी काफी बढ़ गई है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कहा कि कई प्रदेशों मेें हिन्दूवादी सरकार है। कई सीटों पर कम अंतरों से जीत हुई है। वहां अब बांग्लादेशी मुस्लिम को बसाया जा रहा है, ताकि भविष्य में उनके उम्मीदवार जीत सके। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि वीर सावरकर ने अनेक कष्ट सहे। जेल में उन्हें यातनाएं दी गई। देश को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इतिहास को सही रुपों में समझने की जरुरत है। मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर के प्रगति नगर में जनसहयोग से वीर सावरकर की प्रतिमा लगाई गई है। विधायक मधु वर्मा ने प्रारंभ में स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे।   वीर सावरकर के पोते रणजीत सावरकर ने कहा कि आजादी के समय देश में 8 फीसदी मुस्लिम थे, जो अब 22 फीसदी हो गए हैं। 1970 में डेढ़-दो करोड़ बांग्लादेशी मुस्लिम आ गए। अब यह 10 करोड़ हो गए हैं। उन्होंने आगे कहा- देखने में लगता है कि आज अधिकांश जगह हिंदुत्व वादी सरकार है। लेकिन कम मार्जिन से जीत वाली सीटों की संख्या अधिक है। इन बांग्लादेशी मुस्लिमों को वहां बसाया जा रहा है, जहां कम मार्जिन था। ताकि आगे जाकर उनके उम्मीदवार जीत सकें। ऐसा हुआ तो जो हिंदुत्व वादी सरकार हम देख रहे हैं वह आने वाले समय में आखरी सरकार सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर भारत के महान क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी, चिन्तक, समाज सुधारक, इतिहासकार, कवि, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता थे। अपने कृतित्व से वे वीर सावरकर के नाम से लोकप्रिय हुए। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर सावरकर को याद करते ही आनंद एवं रोमांच की अनुभूति होती है। उन्होंने अनेक कष्ट एवं प्रताड़ना सह कर देश को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन आदर्श है। काला पानी जैसी सबसे कठिन सजा पाकर भी वे अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटे। वीर सावरकर के इतिहास को सही रूप में समझने की आवश्यकता है। हमारा लक्ष्य है कि उनके इतिहास को सही रूप में जन-जन तक पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस स्थान की स्थापना जिस महापुरुष के नाम से होती है वह स्थान उन्हीं के नाम से जाना और पहचाना जाए। इसके लिए सूचना पटल लगाने सहित शासकीय पत्राचार और अन्य कार्यों में भी उनके नाम का उपयोग किया जाए।

‘PoK खाली करना होगा नहीं तो…’, इंडिया ने UN में लगाई पाकिस्तान को लताड़, जानिए क्या-क्या कहा

नई दिल्ली भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को उसकी हरकतों के लिए घेर लिया है. ये मौका था संयुक्त राष्ट्र (UN) की सुरक्षा परिषद में शांति बनाए रखने के मुद्दे पर हो रही चर्चा का. यहां पाकिस्तान ने एक बार फिर से जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया. हालांकि इस बार भी भारत ने पड़ोसी देश को आईना दिखाते हुए जमकर लताड़ लगा दी. दरअसल भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पी ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ‘पाकिस्तान बार-बार हमारे जम्मू और कश्मीर पर बेबुनियाद और अनावश्यक बयान देता है. ऐसे बयान न तो पाकिस्तान के झूठे दावों को सही ठहरा सकते हैं, न ही आतंकवाद फैलाने की उसकी नीति को.’ भारत ने साफ शब्दों में ये भी कहा कि पाकिस्तान ने जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों पर अवैध रूप से कब्जा किया है और उसे वो इलाका छोड़ना ही होगा. हरिश ने पाकिस्तान को नसीहत दी कि वह अपनी छोटी सोच और देश को बांटने वाली नीतियों को छोड़कर शांति की दिशा में कदम बढ़ाए. ‘पाकिस्तान ने फिर लिया अनावश्यक टिप्पणियों का सहारा’ भारत ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने फिर से ‘अनावश्यक टिप्पणियों’ का सहारा लिया है, लेकिन इससे न तो उसके गैरकानूनी दावे वैध साबित होंगे, न ही उसकी स्टेट-स्पॉन्सर्ड आतंकवाद की नीति सही ठहराई जा सकती है. हरीश ने कहा कि भारत इस मंच का ध्यान पाकिस्तान के संकीर्ण और विभाजनकारी एजेंडे की ओर भटकने नहीं देगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस मामले में अधिक विस्तार से जवाब देने से परहेज करेगा. अनुच्छेद 370 हटने के बाद खराब हो गए रिश्ते गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था. इसके बाद से ही भारत और पाकिस्तान के संबंधों में और कड़वाहट आ गई और व्यापार बंद हो गया. भारत का रुख स्पष्ट है कि वह पाकिस्तान से आतंकवाद, हिंसा और दुश्मनी से मुक्त माहौल में सामान्य पड़ोसी संबंध चाहता है.

लंबे समय तक लखनऊ के डीएम रहे सीनियर आईएएस अभिषेक प्रकाश को सस्पेंड कर दिया गया

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शने के मूड में नहीं है। एक बार फिर सीएम योगी के सख्त तेवर देखने को मिले है। योगी सरकार ने आईएएस अभिषेक प्रकाश पर बहुत बड़ी कार्रवाई कर दी है। जबकि उन्हीं अभिषेक प्रकाश को एक समय पर सीएम योगी का करीबी अधिकारी माना जाने लगा था। आईएएस अभिषेक प्रकाश ने लखनऊ में जिलाधिकारी रहते हुए एलडीए वीसी का भी कार्यभार संभाला है। वो कई जिलों में डीएम रह चुके हैं। आइए जानते है आखिर कौन है अभिषेक प्रकाश, जिन पर गाज गिरी है। अभिषेक प्रकाश 2006 बैच के आईएएस अधिकारी है। उनका जन्म 21 दिसंबर 1982 में हुआ था। बिहार के रहने वाले अभिषेक प्रकाश ने आईआईटी रुड़की से बीटेक की पढ़ाई की है। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2005 पास करके आईएएस बने अभिषेक प्रकाश की ऑल इंडिया आठवीं रैंक थी। अभिषेक प्रकाश साल 2011-12 में लखीमपुर खीरी जिले में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट रह चुके हैं। वो लखनऊ, हमीरपुर, बरेली और अलीगढ़ जिले में डीएम और कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।   अभिषेक प्रकाश ने कमीशन निकांत जैन के जरिए बिजनेसमैन से डिमांड की थी। बिजनेसमैन विश्वजीत दत्ता ने इसकी शिकायत सीएम योगी से की। सीएम ने मामले की STF से जांच कराई थी। इसके बाद एक्शन लिया। सूत्रों के मुताबिक, IAS अभिषेक जहां भी तैनात रहे, वहां पर उन्होंने प्रॉपर्टी बनाई। लखीमपुर और बरेली में 700 बीघा जमीन खरीदी। लखनऊ में कई बंगले बनवाए। उन पर ब्रह्मोस मिसाइल फैक्ट्री के नाम पर 20 करोड़ के घोटाले का आरोप भी लगा है। अभिषेक औद्योगिक विकास विभाग के सचिव और इन्वेस्ट यूपी के CEO थे। एक्शन के बाद से अंडरग्राउंड हो गए हैं। उनके करीबी बाबू निकांत जैन को STF ने गिरफ्तार किया है। अभिषेक प्रकाश 31 अक्टूबर 2019 से 7 जून 2022 तक लखनऊ के जिलाधिकारी रहे। इसके अलावा, 23 अक्टूबर 2020 से 25 जुलाई 2021 तक उन्होंने LDA के वीसी की जिम्मेदारी भी संभाली। अभिषेक ने कहां-कहां भ्रष्टाचार किया, 6 पाइंट में जानिए.. 1. डिफेंस कॉरिडोर जमीन घोटाला: नियमों को ताक पर रखकर खेल लखनऊ के भटगांव में डिफेंस कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत जमीन के मामले में भी तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। भू-अधिग्रहण समिति के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने तहसील प्रशासन के साथ मिलकर जमीनों की दरें मनमाने तरीके से तय की। 1984 में एससी वर्ग के लिए आवंटित जमीन को गलत तरीके से विक्रय योग्य बनाया। भूमि खरीद-फरोख्त में दलालों और अधिकारियों की मिलीभगत से 20 करोड़ का मुआवजा उठाया गया। शासन को दी गई जांच रिपोर्ट में तत्कालीन डीएम को जिम्मेदार ठहराया गया है। 2- LDA वीसी रहते हुए धांधली लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष रहते हुए अभिषेक प्रकाश पर कई बिल्डरों को फायदा पहुंचाने और मनमाने तरीके से सीलिंग व लाइसेंस जारी करने के आरोप लगे। सूत्रों के मुताबिक, LDA वीसी रहते उन्होंने कई अवैध निर्माण गिरवाए, लेकिन अपने करीबी बिल्डरों को लाभ पहुंचाया। आशियाना समेत कई इलाकों में मनपसंद बिल्डर्स को लाइसेंस जारी किए। एलडीए अधिकारियों से मिलीभगत कर बिल्डरों की फाइलें लटकाने के भी आरोप हैं। 3.भ्रष्टाचार की कड़ी: अलीगढ़, लखीमपुर और हमीरपुर में भ्रष्टाचार के आरोप अभिषेक प्रकाश अलीगढ़, लखीमपुर खीरी और हमीरपुर में डीएम रहे चुके हैं। उनके खिलाफ अलीगढ़ में जमीन खरीद-बिक्री में धांधली की शिकायतें थीं। लखीमपुर में सरकारी टेंडरों में हेरफेर और हमीरपुर में खनन माफियाओं से साठगांठ के आरोप लगे थे। 4. STF जांच के बाद एक्शन, बचाने की भी हुई थी कोशिश सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ की रिपोर्ट कई दिनों तक शासन में घूमती रही। कुछ अधिकारियों ने अभिषेक प्रकाश को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसी तरह की रियायत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद तत्काल सस्पेंशन का आदेश जारी कर दिया गया। 5. आलीशान संपत्तियां और लाइजनिंग सिंडिकेट का नेटवर्क सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक प्रकाश ने लखनऊ में डीएम रहते हुए कई बेशकीमती संपत्तियां जुटाईं। अंसल में एक घर, आशियाना में कोठी और एक सोसाइटी में विला होने की बात सामने आई है। बिचौलिए निकांत जैन और लकी जाफरी से करीबी संबंध थे, जो IAS अधिकारियों के लिए लाइजनिंग करता था। निकांत और जाफरी ने कई बार महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की फाइलों को क्लियर कराने के लिए कमीशन डील कराई। 6- दो जिलों में डीएम रहते 700 बीघा जमीन खरीदने के आरोप अभिषेक प्रकाश पर लखीमपुर खीरी और बरेली में 700 बीघा जमीन अपने परिवार के नाम खरीदने के भी आरोप हैं। यह जमीन आईएएस अभिषेक ने अपने परिजन (माता, पिता व भाई के अलावा कुछ फर्जी कंपनियां बनाकर) के नाम खरीदी हैं। इसी तरह बरेली में 400 बीघा जमीन खरीदने का भी आरोप है। दोनों जगहों पर स्टांप ड्यूटी में चोरी के भी आरोप हैं। DOPT ने यूपी सरकार को इस पूरे मामले की जांच के लिए लिखा था।

कामरा को लेकर शिंदे पहली बार बोले- ‘सुपारी ली… तो क्रिया की प्रतिक्रिया होगी

मुंबई कॉमेडियन कुणाल कामरा की तरफ से किए गए जोक पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि बोलने की आजादी है, लेकिन हर चीज की एक सीमा होनी चाहिए। मुंबई में आयोजित एक शो के दौरान कामरा ने बगैर नाम लिए शिवसेना प्रमुख पर ‘गद्दार’ और ‘ठाणे का रिक्शा’ जैसे तंज कसे थे। खबर है कि कामरा को मुंबई पुलिस ने तलब किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिंदे ने कहा, ‘बोलने की आजादी हैं यहां। हम व्यंग भी समझते हैं, लेकिन एक सीमा भी होनी चाहिए।’ वहीं, शिवसेना के कई नेता पहले ही कामरा के जोक पर आपत्ति जता चुके हैं और धमकी दे चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘यह ऐसा लग रहा है कि किसी के खिलाफ बोलने के लिए सुपारी ली गई है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘दूसरे व्यक्ति को एक स्तर बनाए रखना चाहिए, नहीं तो एक्शन का रिएक्शन होता है।’ डिप्टी सीएम ने कहा, ‘यह वही व्यक्ति है, जिसने भारत के सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री और कुछ उद्योगपतियों पर टिप्पणी की है। यह बोलने की स्वतंत्रता नहीं है। यह किसी और के लिए काम कर रहे हैं।’ क्या था जोक शो के दौरान कामरा ने कहा, ‘जो इन्होंने महाराष्ट्र के इलेक्शन में किया है…। बोलना पड़ेगा पहले शिवसेना बीजेपी से बाहर आ गई फिर शिवसेना शिवसेना से बाहर आ गई…। एनसीपी एनसीपी से बाहर आ गई…। एक वोटर को 9 बटन दे दिए। सब कंफ्यूज हो गए।’ उन्होंने आगे कहा, ‘चालू एक जन ने किया था। वह मुंबई में एक बहुत बढ़िया एक डिस्ट्रिक्ट है ठाणे वहां से आते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘ठाणे की रिक्शा, चेहरे पर दाढ़ी, आंखों में चश्मा हाय। ठाणे की रिक्शा, चेहरे पर दाढ़ी, आंखों में चश्मा हाय। एक झलक दिखलाए कभी गुवाहाटी में छिप जाए। मेरी नजर से तुम देखो गद्दार नजर वो आए। मंत्री नहीं वो दल बदलू है और कहा क्या जाए। जिस थाली में खाए उसमें ही छेद कर जाए। मंत्रालय से ज्यादा फडणवीस की गोदी में मिल जाए। तीर कमान मिला है इसको बाप मेरा यह चाहे।’ कामरा ने किया माफी मांगने से इनकार कामरा ने कहा है कि वह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री शिंदे के बारे में अपनी विवादास्पद टिप्पणियों के लिए माफी नहीं मांगेंगे। इसके साथ ही उन्होंने मुंबई में उस स्थान पर तोड़फोड़ किए जाने की आलोचना की, जहां ‘कॉमेडी शो’ रिकॉर्ड किया गया था। कामरा ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए बयान में कहा कि जो लोग सोशल मीडिया पर उनका नंबर लीक करने में व्यस्त हैं या उन्हें लगातार फोन कर रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि सभी अज्ञात फोन कॉल उनके वॉयसमेल पर जा रही हैं और उन्हें ‘‘वही गाना’’ सुनाई देगा जिससे वे नफरत करते हैं। कामरा ने लिखा, ‘मैं माफी नहीं मांगूंगा… मैं इस भीड़ से नहीं डरता और मैं अपने बिस्तर के नीचे छिपकर इसके शांत होने का इंतजार नहीं करूंगा।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने जो कहा, वह बिलकुल वैसा ही है जैसा कि अजित पवार (उपमुख्यमंत्री) ने एकनाथ शिंदे (उपमुख्यमंत्री) के बारे में कहा था।’ ‘कॉमेडियन’ ने ‘‘उन्हें सबक सिखाने की धमकी देने वाले नेताओं’’ की निंदा करते हुए भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने अधिकार के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, ‘‘किसी शक्तिशाली सार्वजनिक व्यक्ति पर किया गया मजाक सहने में आपकी असमर्थता मेरे अधिकार की प्रकृति को नहीं बदलती। जहां तक मुझे पता है, हमारे नेताओं और हमारी राजनीतिक व्यवस्था के सर्कस का मज़ाक उड़ाना कानून के विरुद्ध नहीं है। हालांकि, मैं अपने खिलाफ किसी भी वैध कार्रवाई के लिए पुलिस और अदालतों के साथ सहयोग करने को तैयार हूं।’’ कामरा ने कहा, ‘‘लेकिन क्या कानून उन लोगों के खिलाफ भी निष्पक्ष और समान रूप से लागू किया जाएगा जिन्होंने यह तय किया है कि मजाक से आहत होने पर तोड़फोड़ करना उचित प्रतिक्रिया है?’’ शिवसैनिक भड़के शिवसेना कार्यकर्ताओं ने रविवार को मुंबई में खार क्षेत्र स्थित ‘हैबिटेट कॉमेडी क्लब’ में कथित रूप से तोड़फोड़ की थी, जहां कामरा का कार्यक्रम शूट किया गया था। इस कार्यक्रम में उन्होंने शिंदे पर ‘‘गद्दार’’ शब्द के जरिये कटाक्ष किया था। बड़ी संख्या में शिवसेना कार्यकर्ता रविवार रात ‘होटल यूनिकॉन्टिनेंटल’ के बाहर एकत्र हुए जहां संबंधित क्लब स्थित है। उन्होंने क्लब और होटल परिसर में तोड़फोड़ की। ‘हैबिटैट क्लब’ वही स्थान है जहां विवादास्पद ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ शो को शूट किया गया था।

भारतीय शेयर बाजार में लगातार तेजी जारी, सेंसेक्स 78,000 स्तर के ऊपर हरे निशान में खुला

मुंबई शेयर बाजार (Indian Stock Market) में तेजी का सिलसिला जारी है. बीते कारोबारी दिन सोमवार को आई तूफानी तेजी, मंगलवार को भी जारी है और खुलने के साथ ही सेंसेक्स-निफ्टी दौड़ लगाते हुए नजर आए हैं. एक ओर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex इंडेक्स खुलने के साथ ही 78000 के पार निकल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty-50 ने भी करीब 100 अंक की तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की. शुरुआती कारोबार में TCS, HCL से लेकर Infosys के शेयर उछाल मारते हुए नजर आए. सेंसेक्स-निफ्टी की तेज शुरुआत मंगलवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स (BSE Sensex) अपने पिछले बंद 77,984.38 के लेवल से छलांग लगाते हुए सीधे 78,000 के पार निकल गया और 78,296.28 पर ओपन हुआ. इसके बाद इसकी रफ्तार कुछ ही मिनटों में और बढ़ गई और ये इंडेक्स 78,402.92 के लेवल पर कारोबार करता नजर आया. बात NSE Nifty की करें, तो इस इंडेक्स ने अपने पिछले बंद 23,658.35 के लेवल से चढ़कर 23,751.50 पर कारोबार शुरू किया और फिर 23,766 तक उछला. हालांकि, जोरदार ओपनिंग के बाद शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स-निफ्टी की रफ्तार कुछ कम होती नजर जरूर आई और दोनों इंडेक्स अपने शुरुआती तेजी को गवांते हुए दिखे, लेकिन अचानक फिर Sensex-Nifty ने चाल तेज कर दी. 1845 शेयर ग्रीन जोन में ओपन शुरुआती कारोबार में शेयर मार्केट (Share Market) में मौजूद करीब 1845 कंपनियों के शेयरों ने तेजी के साथ ग्रीन जोन में कारोबार की शुरुआत की, तो वहीं 471 कंपनियों के शेयर ऐसे थे, जो गिरावट के साथ रेड जोन में खुले. इसके अलावा 123 शेयरों की स्थिति में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. एलएंडटी (L&T), टीसीएस (TCS), एक्सिस बैंक (Axis Bank), टाटा मोटर्स (Tata Motors), टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) और HCL Tech के शेयरों ने खुलते ही दौड़ लगा दी. वहीं गिरावट वाले शेयरों पर नजर डालें, तो Dr Reddy’s Labs, Britannia, Tata Steel, SBI Life Insurance के शेयर शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा टूटे. इन 10 शेयरों में सबसे ज्यादा उछाल मंगलवार को शेयर मार्केट में कारोबार शुरू होते ही जिन 10 शेयरों में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिला. उनमें लार्जकैप कंपनियों में शामिल Infosys Share (2.20%), HCL Tech Share (2.10%), TCS Share (1.90%) की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे. वहीं मिडकैप कंपनियों में शामिल PSB Share (7.36%), IREDA Share (3.18%), Tata Tech Share (2.74%) और Paytm Share (2.10%) की तेजी साथ ट्रेड कर रहे थे. स्मॉलकैप शेयरों को देखें, तो खबर लिखे जाने तक SG Fin Share (16.18%), BMW Share (7.26%) और Exicom Share (4.43%) चढ़कर कारोबार कर रहे थे.

Mhow Gang Rape Case: महू में सैन्य अफसरों के साथ लूट, मारपीट और महिला मित्र से गैंगरेप के पांच दोषियों को उम्रकैद

 महू इंदौर जिले के महू क्षेत्र स्थित जाम गेट के पास सितंबर 2024 में हुए बहुचर्चित जाम गेट कांड में अदालत ने 5 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इस मामले में सेना के ट्रेनी मेजर को बंधक बनाकर उनकी महिला मित्र के साथ लूटपाट, मारपीट और गैंगरेप की जघन्य घटना को अंजाम दिया गया था. फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली सुनवाई के बाद महज पांच महीने में आए इस फैसले ने पीड़ितों को न्याय दिलाया है और समाज में कड़ा संदेश दिया है कि ऐसे अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. यह घटना पिछले साल 11 सितंबर को सुबह 2 से 3 बजे के बीच महू-मंडलेश्वर रोड पर जाम गेट पर हुई थी और इसने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं. महू न्यायालय की विशेष लोक अभियोजक संध्या उइके ने पीटीआई को बताया कि चौथे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रविशंकर दोहरे ने अनिल बारोड़ (27), पवन वसुनिया (23), रितेश भाभर (25), रोहित गिरवाल (23) और सचिन मकवाना (25) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. आरोपियों को सामूहिक बलात्कार पीड़िता को 50,000 रुपये और अन्य तीन पीड़ितों को 10-10 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है. छठे आरोपी, जो नाबालिग है, पर किशोर न्यायालय में मुकदमा चल रहा है. मध्य प्रदेश के महू में सेना के दो प्रशिक्षु अधिकारियों और उनकी दो महिला मित्रों के साथ लूट, मारपीट और सामूहिक बलात्कार के मामले में पांच लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. घटना पिछले साल 11 सितंबर को महू-मंडलेश्वर रोड पर जाम गेट पर हुई थी.     11 सितंबर को क्या हुआ था? उइके ने कहा, “लूट, अपहरण और सामूहिक बलात्कार की घटना पिछले साल 11 सितंबर को 2 से 3 बजे के बीच महू-मंडलेश्वर रोड पर स्थित जाम गेट के पास हुई थी, जब इन्फैंट्री स्कूल, महू के दो प्रशिक्षु सेना अधिकारी अपनी दो महिला मित्रों के साथ वहां गए थे.” उइके ने कहा, “अचानक, छह लोगों ने पिस्तौल तान दी, उन पर हमला किया और लाठी से उनकी पिटाई की. उन्होंने 10 लाख रुपये मांगे और न देने पर जान से मारने की धमकी दी. उन्होंने उनके मोबाइल फोन और 800 रुपये लूट लिए.इसके बाद उन्होंने एक प्रशिक्षु अधिकारी और महिला मित्र को रकम का इंतजाम करने के लिए इन्फैंट्री स्कूल जाने को कहा.” 12 अक्टूबर को अदालत में पेश की गई अंतिम रिपोर्ट उइके ने कहा कि उन्होंने एक प्रशिक्षु अधिकारी और एक महिला मित्र को बंधक बना लिया, जिसके साथ रितेश भाभर और अनिल बारोड़ ने सामूहिक बलात्कार किया. अगले दिन बड़गोंडा थाने में मामला दर्ज किया गया और मामले की अंतिम रिपोर्ट 12 अक्टूबर को अदालत में पेश की गई. उइके ने बताया, “अभियोजन पक्ष की दलीलें 26 अक्टूबर को शुरू हुईं और बचाव पक्ष के गवाहों के बयान इस साल 20 मार्च को दर्ज किए गए. अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की अंतिम दलीलें 21 मार्च को समाप्त हुईं, जो मामला दर्ज होने की तारीख से ठीक पांच महीने और 12 दिन बाद था.”  अफसरों को बंधक बनाकर मांगे थे रुपये पिछले साल 10 सितंबर को दो प्रशिक्षु सैन्य अधिकारी अपनी दो महिला मित्रों के साथ रात को जाम गेट तक गए थे। वे कार रोककर बातें कर रहे थे, तभी आरोपी हथियार लेकर उनके पास आए और दोनों सैन्य अफसरों के साथ मारपीट की। एक ट्रेनी आर्मी अफसर और उसकी गर्लफ्रेंड को आरोपियों ने छोड़ दिया और 10 लाख रुपये लेकर आने के लिए कहा। इस दौरान दूसरे अफसर और उसकी महिला मित्र को बंधक बनाकर रखा गया। इसके बाद अनिल और रितेश बंधक युवती को झाड़ियों में ले गए और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। दूसरे अफसर ने अपने कमांडेंट को सूचना दी। इसके बाद मौके पर पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी भाग गए थे। बाद में पुलिस ने घटना में शामिल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने घटना के एक माह के भीतर ही चालान पेश कर दिया था। पुलिस ने दुष्कर्म में शामिल अनिल और रितेश के कपड़े, मौके पर मिले उनके सिर के बाल आदि डीएनए सेंपल के लिए भेजे थे। युवती के सैंपल भी भेजे गए थे। रिपोर्ट में आरोपियों द्वारा युवती से दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने आरोपियों के पास से हथियार भी जब्त किए थे। पुलिस की त्वरित कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वासल और एएसपी रूपेश द्विवेदी घटनास्थल पर पहुंचे. पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पांच अलग-अलग टीमें बनाकर आरोपियों की तलाश शुरू की. शुरुआत में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, और बाद में विशेष अभियान चलाकर बाकी आरोपियों को भी पकड़ लिया गया. पुलिस ने डकैती, मारपीट, फिरौती और सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया. इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वासल ने उस समय कहा था, “हमें सूचना मिली कि आर्मी अफसर और उनके साथियों के साथ मारपीट और लूट की घटना हुई है. हमने तुरंत अपनी टीम भेजी और पांच नई टीमें बनाकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया. आरोपियों ने महिला के साथ दुष्कर्म किया है.” फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, 5 महीने में फैसला मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया गया. चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश आर.एस. दोहरे की कोर्ट में करीब पांच महीने तक सुनवाई चली. अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजन अधिकारी संध्या उईके ने मजबूती से पैरवी की. पुलिस ने ठोस सबूत और दस्तावेज पेश किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने पांच आरोपियों—पवन, रोहित, अनिल, रितेश और सचिन (सभी मानपुर थाना क्षेत्र के निवासी)—को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. कोर्ट ने साफ कहा कि यह सजा मरते दम तक जेल में रहने की होगी. इसके अलावा, कोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया. गैंगरेप की शिकार युवती को 50 हजार रुपए और अन्य तीन पीड़ितों को 10-10 हजार रुपए की राशि दी जाएगी. मामले में एक नाबालिग आरोपी भी शामिल था, जिसका फैसला अभी लंबित है. विशेष लोक अभियोजन अधिकारी का बयान विशेष लोक अभियोजन अधिकारी संध्या उईके ने कहा, “यह एक जघन्य अपराध था, जिसमें सैन्य अधिकारियों और उनकी महिला मित्रों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया. कोर्ट ने सभी पांच आरोपियों को आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है. यह … Read more

देश में 14 टोल प्लाजा की सालाना कमाई 200 करोड़ रुपये, राजस्थान में सबसे ज्यादा 156 टोल, लेकिन कमाई में UP नंबर 1

नई दिल्ली हाईवे-एक्सप्रेसवे पर चलते हुए आपको टोल प्लाजा पर रुककर टोल टैक्स भरना पड़ता है. टोल टैक्स से आपकी जेब कटती है तो सरकार का खजाना भरना भरता है. इन टोल टैक्स से सरकारी खजाने में मोटा पैसा आता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का सबसे कमाऊ टोल प्लाजा कौन सा है? इसकी कमाई इतनी है कि सालभर में यह 400 करोड़ रुपये आपकी जेब से वसूल लेता है. देश का सबसे कमाऊ टोल प्लाजा   देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला टोल प्लाजा गुजरात के भरथाना गांव में बना है, राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 पर बना यह टोल प्लाजा कमाई के मामले में अव्वल है.  राजधानी दिल्ली को मुंबई से जोड़ने वाले इस हाईवे पर बने टोल प्लाजा की गिनती सबसे ज्यादा कमाई करने वाले टोल प्लाजा के तौर पर होती है.बता दें कि NH-48 देश के सबसे व्यस्त हाईवे में से एक है. क्या आप जानते हैं कि देश में सबसे ज्यादा कमाई किस टोल प्लाजा पर होती है? इसका जवाब है गुजरात के भरथाना गांव में बना टोल प्लाजा। यह टोल प्लाजा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 पर बना है जो राजधानी दिल्ली को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से जोड़ता है। यह देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला टोल प्लाजा है। यह टोल प्लाजा हर साल लगभग 400 करोड़ रुपये कमाता है। यह पिछले पांच साल का औसत है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 देश का सबसे व्यस्त रूट है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने लोकसभा में कुछ जानकारी दी। एनएच-48 के जरिए उत्तरी भारत के राज्यों से सामान पश्चिमी तट के पोर्ट्स तक जाता है। देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला दूसरा टोल प्लाजा भी इसी एनएच पर है। राजस्थान के शाहजहांपुर में NH-48 पर बना टोल प्लाजा हर साल 378 करोड़ रुपये कमाता है। सरकारी जानकारी के अनुसार भारत में 1,063 टोल प्लाजा हैं। इनमें से 14 टोल प्लाजा हर साल 200 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाते हैं। अभी देश में 1.5 लाख किलोमीटर के एनएच नेटवर्क में से लगभग 45,000 किलोमीटर पर टोल लगता है। इसमें नए बने एक्सप्रेसवे भी शामिल हैं। कैसे बढ़ी कमाई पिछले पांच साल में कई नए राजमार्ग बने हैं जिन पर टोल लगता है। FASTag के इस्तेमाल से टोल की चोरी भी कम हुई है। इसलिए टोल से होने वाली कमाई बहुत बढ़ गई है। साल 2019-20 में टोल से 27,504 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। पिछले साल यह कमाई बढ़कर 55,882 करोड़ रुपये हो गई। सरकार के आंकड़ों के अनुसार लोगों ने पिछले पांच साल में टोल के रूप में 1.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दिए हैं। लेकिन यह रकम राजमार्गों के विकास और रखरखाव के लिए खर्च होने वाले बजट का सिर्फ पांचवां हिस्सा है। सरकार केवल उन्हीं राजमार्गों पर टोल लगाती है जो कम से कम ढाई लेन के हों। सरकार ज्यादा से ज्यादा राजमार्गों पर टोल लगाना चाहती है ताकि उसकी कमाई बढ़ सके। किस राज्य में हैं सबसे ज्यादा टोल प्लाजा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में 97 टोल प्लाजा हैं। इन टोल प्लाजा ने पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा 22,914 करोड़ रुपये की कमाई की है। वहीं राजस्थान में सबसे ज्यादा 156 टोल प्लाजा हैं। इन टोल प्लाजा ने 20,308 करोड़ रुपये की कमाई की है। आमतौर पर, उन टोल प्लाजा पर ज्यादा कमाई होती है जो पोर्ट्स और इंडस्ट्रियल एरिया क्षेत्रों को जोड़ने वाले NH पर बने होते हैं।  एक रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने कहा, ‘इन टोल प्लाजा पर ज्यादातर कमर्शियल गाड़ियां आती हैं। ये गाड़ियां निजी वाहनों की तुलना में ज्यादा टोल देती हैं। इसलिए ये प्रोजेक्ट निजी कंपनियों के लिए फायदेमंद होती हैं।’ FASTag के आने से टोल संग्रह में पारदर्शिता आई है और टोल प्लाजा पर लगने वाला समय भी कम हुआ है। इससे यात्रियों को भी सुविधा हुई है और सरकार की कमाई भी बढ़ी है। बढ़ी टोल प्लाजा की कमाई   फास्टैग आने के बाद से टोल प्लाजा की कमाई बढ़ गई है. फास्टैग की मदद से टोल टैक्स की चोरी कम हुई है, जिसकी वजह से रेवेन्यू बढ़ा है.  सरकार ज्यादा से ज्यादा राजमार्गों पर टोल लगाना चाहती है ताकि उसकी कमाई बढ़ सके. वहीं एनएच-48 के जरिए उत्तरी भारत के राज्यों से सामान पश्चिमी तट के बंदरगाह तक पहुंचते हैं. ट्रकों और गाड़ियों को इस टोल प्लाजा से होकर गुजरना पड़ता है, जिसकी वजह से इस टोल प्लाजा की कमाई अधिक, वहीं निजी वाहनों के मुकाबले कॉर्मिशियल गाड़ियों का टोल भी अधिक है.   कमाई में ये भी अव्वल   इसी एचएच-48 पर बना राजस्थान के शाहजहांपुर टोल प्लाजा कमाई के मामले में दूसरे नंबर पर है. यहां हर साल 378 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन होता है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल का जलाधुलागोरी टोल प्लाजा कमाई में तीसरे नंबर पर है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में बाराजोर टोल प्लाजा चौथे नंबर पर है. बता दें कि  उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा टोल प्लाजा है. इस राज्य में करीब 97 टोल प्लाजा हैं.  

इंदौर में ग्रीन बेल्ट की जमीन की गाइडलाइन का अलग से निर्धारण होगा

इंदौर   इंदौर में कलेक्टर गाइडलाइन लगभग तैयार हो चुकी है। इस पर पंजीयन विभाग ने दावे-आपत्तियों को मंगाया था। डेढ़ सौ से अधिक आपत्तियां  आई है। जिसका निराकरण किया जा रहा है। इसके बाद गाइडलाइन का प्रारुप राज्य सरकार को भेजा जाएगा। 1 अप्रैल ले नई कलेक्टर गाइड लाइन तैयार हो जाएगी। इंदौर में 3200 लोकेशनों पर गाइडलाइन बढ़ाई जा रही है, जबकि 240 नई काॅलोनियों को गाइडलाइन के दायरे में लिया गया है। इस बदलाव से प्राॅपर्टी के कीमतों में भी वृद्धि होगी। सालभर हुए सौदों के आधार पर गाइडलाइन में बदलाव किया गया। इंदौर में सबसे ज्यादा तेजी खंडवा रोड़ और उज्जैन रोड़ पर देखने को मिली है। खंडवा रोड पर फोरलेन निर्माण हो रहा है, जबकि इंदौर उज्जैन रोड पर छह लेन बन रहा है। इंदौर में बड़े ग्रुप भी रियल इस्टेट सेक्टर में आ चुके है। 32 लोकेशनों के ज्यादातर इलाके शहरी सीमा से सटे है। इनमे बाइपास, सुपर काॅरिडोर, गांधी नगर जैसे क्षेत्र शामिल है। ग्रीन बेल्ट की जमीन की गाइडलाइन का अलग से निर्धारण पंजीयन विभाग के पास अलग-अलग तरह की आपत्तियां आई है। कुछ आपत्तियां ग्रीन बेल्ट को लेकर भी है। जिसमें कहा गया है कि ग्रीन बेल्ट की जमीनों के ज्यादा सौंदे नहीं होते है। इसकी गाइडलाइन का निर्धारण अलग से किया जाना चाहिए। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन की खरीदी बिक्री में छूट को बहाल करने की मांग भी की गई है। मास्टर प्लान में 89 गांवों को जोड़ा गया है। वहां भी प्राॅपर्टी गाइडलाइन में बदलाव हुए है। इंदौर में कुछ लोकेशनों पर 30 से लेकर 40 प्रतिशत तक गाइड लाइन बढ़ाई गई है। इंदौर एक में 531,इंदौर दो में 596, इंदौर तीन में 658, इंदौर चार में 425, महू में 429, सांवेर में 348,देपालपुर में 329 लोकेशनो पर गाइडलाइन बदली है। अब समिति के इस प्रस्ताव को प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही एक अप्रैल से नई गाइडलाइन के हिसाब से पंजीयन विभाग में रजिस्ट्रियां होगी।

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