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इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग के लिए दिल्ली से आई टीम ने आमद दी, क्या आठवीं बार रहेगा ताज बरकरार ?

इंदौर स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए आई टीम ने सर्वेक्षण की शुरुआत खजराना मंदिर से की है। इस मंदिर में फूलों से खाद बनाने का काम बीते सात वर्षों से चल रहा है और सफाई भी काफी रहती है।  टीम खजराना क्षेत्र की बस्तियों में भी पहुंची और सफाई व्यवस्था को देखा। इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग के लिए दिल्ली से आई टीम ने आमद दे दी है। नगर निगम भी स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए पूरी तरह तैयार है। सवाल यह उठता है कि क्या आठवीं बार भी इंदौर के सिर पर स्वच्छता का ताज बरकरार रहेगा या कोई दूसरा शहर इसे पहनेगा। शुक्रवार से शहर में सर्वेक्षण शुरू होगा। नगर निगम मेयर और अफसरों को दावा है कि इस बार भी रैंकिंग में पहले पायदान पर इंदौर नंबर वन रहेगा। बीते दो-तीन वर्षों में जो शहर हमसे कमतर रहे है, वे भी इस बार पहले स्थान पर आने के लिए खूब मेहनत कर रहे है। शहरवासी मानते है कि पहले की तुलना में इंदौर में सफाई थोड़ी कमजोर हुई है। स्वच्छता सर्वेक्षण में देशभर के चार हजार से ज्यादा शहरों में शुरू हो चुका है। सर्वे की तैयारी इंदौर नगर निगम ने चार माह पहले से की थी, लेकिन सर्वे देरी से होने के कारण बार-बार वाॅल पेटिंग, बेकलेन सफाई करना पड़ी। इस बार इंदौर को प्रिमियर लीग में रखा है। इस लीग में सूरत और नवी मुंबई से इंदौर को कड़ी टक्कर मिल रही है। पिछली बार सूरत ने इंदौर के साथ पहला पुरस्कार संयुक्त रुप से साझा किया था। इस बार मुकाबला और कड़ा है। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए आई टीम सुबह खजराना मंदिर से की है। इस मंदिर में फूलों से खाद बनाने का काम बीते सात वर्षों से चल रहा है और सफाई भी काफी रहती है, हालांकि इंदौर का स्वच्छता सर्वेक्षण विधिवत रुप से शुक्रवार से शुरू होगा। टीम बस्ती व काॅलोनियों में जाकर सफाई व्यवस्था का आंकलन करेगी। इस बार सर्वे में यह होंगे सफाई के मापदंड – ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन व्यवस्थित करना और उसके फिर से उपयोग का तरीका -कचरा कैसे अलग-अलग किया जा रहा है और उसका संग्रहण कैसे होता है। -शहर की जल निकासी व्यवस्था कैसी है। जल के पुन: उपयोग के लिए शहर क्या कर रहे है। – शहरवासी सफाई से कितने संतुष्ठ है। उनका फीडबैक भी सर्वे में शामिल रहेगा। -सफाईकर्मियों के लिए नगरीय निकाय क्या सुरक्षा उपाय अपनाते है और उनके लिए क्या सुविधाएं है।  

विंध्याचल भवन की दूसरी मंजिल पर बड़ी संख्या में गत्ते रखे हुए थे, लगी आग, समय रहते आग पर पाया काबू

भोपाल राजधानी भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित विंध्याचल भवन की दूसरी मंजिल पर गुरुवार दोपहर बाद करीब पौने चार बजे आग लग गई। आग दूसरी मंजिल पर उस स्थान पर लगी, जहां भवन का रिनोवेशन किया जा रहा था। गनमीत रही कि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया और बड़ी हानि होने से बच गई। यह पहली बार नहीं है, जब प्रदेश स्तरीय कार्यालय में आग लगी है। इसके पहले विंध्याचल भवन और सतपुड़ा भवन में आग की लपटें उठती रही हैं। जानकारी के अनुसार, विंध्याचल भवन की दूसरी मंजिल पर बड़ी संख्या में गत्ते रखे हुए थे। उसी गत्तों से आग का धुआं उठना शुरू हुआ। सूचना के बाद मौके पर चार दमकलों को भेजा गया, जिससे आग समय पर काबू में आ गई। हादसा घुमक्कड़ विभाग के विकास आयुक्त कार्यालय में हुआ है। इसी मंजिल पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का विकास आयुक्त कार्यालय भी है, जहां कुछ वर्षों पहले देर रात भीषण आग लगी थी। वह आग इतनी भीषण थी कि सुबह तक बुझ नहीं सकी थी। कुछ साल पहले इसी इमारत की पांचवीं मंजिल में बीज एवं फार्म विकास कार्यालय में आग लग गई थी। इस आगजनी में अमानक बीज से जांच और विभाग के कर्मचारियों की विभागीय जांच संबंधी फाइलें जलकर खाक हो गई थीं। सहायक पुलिस आयुक्त सुरक्षा अविनाश शर्मा ने बताया कि आग लगने से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। जांच कर पता लगाया जा रहा है कि कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज तो नहीं जले हैं। सतपुड़ा भवन में जून 2023 में लगी थी भीषण आग मध्यप्रदेश के दूसरे सबसे बड़े प्रदेश स्तरीय कार्यालय सतपुड़ा भवन के पश्चिमी ब्लॉक में 12 जून 2023 को दोपहर में भीषण आग लग गई थी। आग इतनी भीषण भी कि चौथी मंजिल से छठवीं मंजिल तक पहुंच गई थी और तीनों मंजिल पर स्थित संचालक आदिम जाति कल्याण विभाग, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग का अधिकांश रिकॉर्ड जलकर खाक हो गया था। आग से इमारत इतनी कमजोर हो गई, उसकी मरम्मत का प्रस्ताव तैयार हो चुका है। इस बीच सतपुड़ा भवन को ही तोड़कर नया कार्यालय बनाए जाने पर भी प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है। बड़ी मशक्कत से 20 घंटे बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका था।   मंत्रालय की पुरानी इमारत में भी लगी भीषण आग मध्यप्रदेश के प्रशासनिक मुख्यालय वल्लभ भवन (मंत्रालय) की पुरानी इमारत के पांचवीं मंजिल पर 9 मार्च 2024 को भीषण आग लग गई थी। आग लगने से मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन आने वाले सीएम स्वेच्छानुदान, आर्थिक सहायता सहित पांचवीं और छठवीं मंजिल में रखा महत्वपूर्ण दस्तावेज और कबाड़ जलकर खाक हो गया था।

राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई टली, कोर्ट ने इस मामले में अगली तारीख 3 अप्रैल नियत की

नई दिल्ली कांग्रेस नेता और रायबरेली सांसद राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में गुरुवार को सुल्तानपुर की एमपीएमएलए विशेष कोर्ट में सुनवाई टल गई। दीवानी न्यायालय में होली मिलन कार्यक्रम के आयोजन के कारण अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे जिसके चलते सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने इस मामले में अगली तारीख 3 अप्रैल 2025 नियत की है। इस दिन राहुल गांधी के अधिवक्ता अगले गवाह से जिरह करेंगे। यह मामला भारतीय जनता पार्टी नेता विजय मिश्रा द्वारा 2018 में दायर किया गया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने कर्नाटक चुनाव के दौरान अभद्र टिप्पणी की थी, जिससे उनकी भावनाएं आहत हुईं। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद राहुल गांधी ने फरवरी 2024 में कोर्ट में सरेंडर किया था और उन्हें जमानत मिल गई थी। 26 जुलाई 2024 को राहुल ने कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया, जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया था।   इसके बाद कोर्ट ने परिवादी को साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। हालांकि, अधिवक्ताओं की हड़ताल और अन्य कारणों से कई बार सुनवाई टल चुकी है। 11 फरवरी को राहुल के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने परिवादी से जिरह की थी और अब अगले गवाह से जिरह के लिए 3 अप्रैल की तारीख तय की गई है। कोर्ट की कार्यवाही व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ रही है और सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जा रहा है फिलहाल, यह मामला सुचारु रूप से चल रहा है, और अगली सुनवाई में आगे की प्रगति की उम्मीद है।  

31 मार्च तक एक लाख युवाओं को बिना गारंटी मिलेगा 5 लाख का लोन: सीएम योगी

गोंडा 31 मार्च तक एक लाख युवाओं को बिना गारंटी के पांच लाख रुपये का ऋण का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। प्रत्येक जनपद में 25 से 27 मार्च तक मेला लगाकर ऋण वितरित किए जाएंगे। ये आश्वासन गुरुवार को स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय गोंडा में आयोजित ऋण व टूलकिट वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत तीन लाख से अधिक युवाओं ने आवेदन किए हैं। 30 हजार से अधिक युवाओं के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। 17 हजार से अधिक युवाओं को ऋण मिल चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए प्रत्येक वर्ष एक लाख युवाओं को ऋण दिलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य की ताकत, वहां के युवाओं की प्रतिभा, ऊर्जा से मापा जा सकता है। जहां युवा ऊर्जा के लिए अवसर होंगे, वहां कोई ताकत बाल बांका नहीं कर सकती। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानवता के समागम को प्रयागराज में पूरी दुनिया ने देखा है। आस्था के सम्मान समृद्धि का साधन बना। महाकुंभ के आयोजन ने एक भारत, श्रेष्ठ भारत की आधारशिला को आगे बढ़ाया है। उप्र में होली का त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन महाकुंभ पर सवाल उठाने वाले (पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) अपने राज्य में हिंसा को नहीं रोक सके। यूपी में आज पांच कारीडोर हैं। होली से ठीक पहले सरकार ने पुलिस भर्ती परीक्षा के तहत 60244 युवाओं को नौकर दी है, इनमें 12 हजार बेटियां शामिल हैं। 2017 के पहले पुलिस में सिर्फ दस हजार बेटियों को नौकरी मिली थी। 1.56 लाख की पुलिस भर्ती में भी उप्र सरकार ने 25 हजार बेटियों को नौकरी दी थी। हमने तय किया है प्रत्येक भर्ती में 20 प्रतिशत नौकरी बेटियों को देंगे। उप्र की डबल इंजन सरकार 7.50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दे चुकी है। युवाओं को स्वरोजगार से जोडने के लिए ओडीओपी, विश्वकर्मा श्रम् सम्मान व मुख्यमंत्र युवा उद्यमी विकास अभियान शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोंडा व बहराइच में बाईपास निर्माण की स्वीकृति दे दी गई है। रोजगार के लिए ठोकरें खाने वाला युवा उद्यमी बनेगी। युवा अपने उद्यम से उप्र को दे की नंबर वन अर्थव्यवस्था बना सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोन दिलाने के लिए पैसा मांगने वालों की शिकायत करें। जांच कराकर ऐसी कार्रवाई करेंगे कि नजीर बन जाएगी। मुख्यमंत्री ने देवीपाटन मंडल के 1423 युवाओं को 55.39 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया। ओडीओपी के तहत 200 शिल्पकारों को टूलकिट वितरित किया। मुख्यमंत्री ने जिला पंचायत सभागार में विकास कार्यक्रम, कानून व्यवस्था व राजस्व वाद निस्तारण की समीक्षा की।

उज्जैन में जीआई टैग के लिए प्रेजेंटेशन बैठक हुई, बुरहानुपर के केले में मिनरल्‍स का भंडार, बताईं खूबियां

बुरहानपुर करीब दो साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद गुरुवार को उज्जैन में जीआई टैग के लिए प्रेजेंटेशन बैठक हुई। इस बैठक में प्रदेश के सोलह से ज्यादा जिलों के अधिकारियों को बुलाया गया था, लेकिन दस जिलों के अधिकारी ही शामिल हुए। साथ ही केंद्र सरकार की टीम और जीआई टैग मप्र के डायरेक्टर लक्ष्मीकांत दीक्षित मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार बैठक में शामिल बुरहानपुर जिले के विज्ञानी और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने केले की विशेषता बताई। इसके साथ ही देवास जिले से पहुंचे अधिकारियों ने वहां के खुरचन (मलाई से बना मिष्ठान) और गुलाब जामुन की विशेषता बताई। इसके अलावा जीआई टैग के लिए नरसिंहपुर के बैगन व इमली और इंदौर के आलू को भी शामिल किया गया है। सभी जिलों के अधिकारियों ने अपने उत्पादों की विशेषता, गुणवत्ता और उनमें मौजूद तत्वों के संबंध में जानकारी दी। केंद्र से आई टीम प्रेजेंटेशन के दौरान सामने आए तथ्य व जानकारी लेकर दिल्ली रवाना हो गई है। इस बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। वहां मीडिया का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित था। बताया जा रहा है कि जल्द ही इस प्रेजेंटेशन का परिणाम आ सकता है। यदि बुरहानपुर के केले को जीआई टैग मिला तो इसके एक्सपोर्ट में कई गुना की वृद्धि संभव है। वर्ष 1960 से शुरू केले का उत्पादन जिले में केेले का उत्पादन वर्ष 1960 से शुरू हुआ था। पहली बार जलगांव से बैलगाड़ी में टिश्यू कल्चर लाकर पांच एकड़ खेत में फसल लगाई गई थी। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य किसानों ने फसल लगाना शुरू किया। इससे पहले तक जिले में मोसम्बी और संतरे की खेती की जाती थी। यह जिला चारों ओर से पहाड़ों से घिरा है। केला उत्पादन के लिए जलवायु पूरी तरह उपयुक्त है। छब्बीस हजार हेक्टेयर में होता है केला जिले में करीब 26 हजार हेक्टेयर में केले का उत्पादन होता है। इस काम में 16 हजार से ज्यादा किसान सक्रिय हैं। चार प्रमुख बिंदुओं पर प्रजेंटेशन तैयार किया था। इनमें जिले में केले का इतिहास, मिट्टी की गुणवत्ता, जलवायु और पोषक तत्व शामिल थे। केले को जीआई टैग प्रदान करने के लिए वर्ष 2023 में आवेदन किया गया था। अब जाकर जीआई टैगिंग के लिए बैठक बुलाई गई। उल्लेखनीय है कि बुरहानपुर का केला स्वाद और गुणवत्ता में हमेशा से बेहतर रहा है। यही वजह है कि इसकी मांग देश के कई राज्यों के साथ खाड़ी देशों तक है।  

सचिन तेंदुलकर को बीसीसीआई द्वारा हर महीने 70,000 रुपये की पेंशन दी जाती है

नई दिल्ली क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट जगत में कोई भी पहचान देने की जरूरत नहीं है। उनके योगदान को शब्दों में व्यक्त करना बेहद मुश्किल है। हालांकि, क्रिकेट की दुनिया से रिटायरमेंट लेने के बाद भी उनका संबंध खेल से बना हुआ है। क्या आप जानते हैं कि बीसीसीआई (BCCI) सचिन तेंदुलकर को हर महीने कितनी पेंशन देती है? अगर नहीं, तो इस लेख में हम आपको यही जानकारी देंगे, साथ ही यह भी बताएंगे कि अन्य क्रिकेटरों को क्या पेंशन मिलती है भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने 2004 में एक पेंशन योजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य रिटायर होने के बाद क्रिकेटरों को वित्तीय सहायता प्रदान करना था। इस योजना के तहत पेंशन राशि खिलाड़ी के टेस्ट मैचों की संख्या पर आधारित थी। यानी, जितने ज्यादा टेस्ट मैच खेले होंगे, उतनी अधिक पेंशन मिलती है। यह योजना क्रिकेटरों की लंबी सेवा और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए बनाई गई थी। सचिन तेंदुलकर को कितनी पेंशन मिलती है? सचिन तेंदुलकर के बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट को अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर दी। सचिन तेंदुलकर को बीसीसीआई द्वारा हर महीने 70,000 रुपये की पेंशन दी जाती है। यह पेंशन उनकी लंबी क्रिकेट यात्रा और योगदान के आधार पर तय की गई है। बीसीसीआई का यह कदम सचिन जैसे महान खिलाड़ी के सम्मान के रूप में देखा जाता है। अन्य क्रिकेटर्स को क्या मिलती है पेंशन? सचिन तेंदुलकर के अलावा बीसीसीआई कई अन्य महान क्रिकेटरों को भी पेंशन देती है। उदाहरण के तौर पर: युवराज सिंह को हर महीने 60,000 रुपये की पेंशन मिलती है। विनोद कांबली को 6,30,000 रुपये की सालाना पेंशन मिलती है। यह पेंशन क्रिकेटरों को उनके योगदान के आधार पर दी जाती है, और यह उन खिलाड़ियों के लिए एक तरह का सम्मान और उनके क्रिकेट करियर के प्रति सम्मान व्यक्त करने का तरीका है।

पुलिस की बात मानते हुए वे बुलेटप्रूफ गाड़ी का ही इस्तेमाल करें, भाजपा के फायरब्रांड नेता को पुलिस की सलाह

हैदराबाद भाजपा के फायरब्रांड नेता और तेलंगाना के विधायक टी राजा सिंह से हैदराबाद पुलिस ने कहा है कि उन्हें जान का खतरा है, इसलिए पुलिस की बात मानते हुए वे बुलेटप्रूफ गाड़ी का ही इस्तेमाल करें। गोशामहल विधान सभा का प्रतिनिधित्व करने वाले राजा सिंह को हैदराबाद पुलिस ने बुधवार (19 मार्च) को एक नोटिस भेजा है, जिसमें ये कहा गया है। पुलिस ने नोटिस में कहा है कि वे सरकार द्वारा आवंटित बुलेटप्रूफ का ही इस्तेमाल करें और साथ में सुरक्षाकर्मियों को भी रखें। उन्हें अक्सर बुलेट पर भी देखा गया है। एक पुलिस अधिकारी ने ये जानकारी दी है। अधिकारी ने बताया कि विधायक राजा सिंह को नोटिस भेजकर उन्हें बुलेटप्रूफ वाहन का उपयोग करने और आवंटित सुरक्षा कर्मियों का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी या अप्रिय घटना से बचा जा सके। दरअसल, हैदराबाद पुलिस ने भाजपा विधायक को यह नोटिस इसलिए जारी किया है क्योंकि विधायक कई बार बिना सुरक्षाकर्मियों के भी घूमते देखे गए हैं। एहतियातन दी गई है चेतावनी: पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह ऐहतियाती सुरक्षा उपायों के तौर पर एक नियमित चेतावनी है। सिंह को भेजे गए नोटिस में कहा गया है, “आपको लगातार धमकी भरे कॉल आ रहे हैं और यह देखा गया है कि आप अक्सर बिना किसी सुरक्षाकर्मी के आवास और कार्यालय से बाहर निकल जा रहे हैं और जनता के बीच घूम रहे हैं, जो आपके जीवन और सुरक्षा के प्रति लापरवाही दर्शाता है।” औरंगजेब विवाद के बाद चिंता बढ़ी बता दें कि हाल ही में औंरगजेब की कब्र विवाद के बीच नागपुर में हुई हिंसा के बाद हिन्दूवादी नेता टी राजा सिंह ने भी कब्र हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा, “मैं विहिप और बजरंग दल की मांग का समर्थन करता हूं।” माना जा रहा है कि उनके इस बयान से कुछ लोगों में नाराजगी है। इसलिए उन पर हमले हो सकते हैं। इससे पहले भी राजा सिंह ऐसे कई बयान दे चुके हैं, जिस पर किसी खास समुदाय ने नाराजगी जाहिर की है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तिल भांडेश्वर महादेव मंदिर में की पूजा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तराना स्थित प्राचीन तिल भांडेश्वर महादेव मंदिर में पूजा कर प्रदेश की जनता की सुख समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को तराना स्थित तिल भांडेश्वर मंदिर में पूजा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देव दर्शन के बाद कार्यक्रमों में साधु संतों का सम्मान किया और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद भी लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बृह्मलीन महंत श्री प्रकाशनंद जी भारती की समाधि पर पुष्पांजलि और चादर अर्पित की। उन्होंने श्री महारूद्र सहस्त्र चंडी महायज्ञ में आहुति दी और ईश्वर से कामना की कि प्रदेश में सुख समृद्धि बनी रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मन्दिर परिसर मे पीपल का पौधा रोपा। उन्होंने मंदिर परिसर में सत्संग भवन निर्माण के लिए भूमि-पूजन किया। इस अवसर पर अखाड़ा परिषद के महामंत्री स्वामी श्री हरि गिरि महाराज और महंत श्री मोहन भारती जी महाराज, सांसद श्री अनिल फिरोजिया, प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, स्थानीय विधायक, साधु संत और जन-प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

दूध बेचने वाले की बेटी ने लड़कों के बीच किया अभ्यास, अब भारतीय महिला हॉकी टीम के प्रशिक्षण शिविर में चयन

वाराणसी काशी की बेटी ने संघर्षों के बीच बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दूध बेचने वाले की बेटी पूजा यादव का भारतीय महिला हॉकी टीम के प्रशिक्षण शिविर में चयन हुआ। गांव में लड़कियों की टीम नहीं बनी तो पूजा ने लड़कों की टीम में अभ्यास किया। ऐसे में इस उपलब्धि से पूरा परिवार खुश है। गंगापुर एकेडमी से हॉकी का ककहरा सीखने वाली पूजा यादव का कर देश के सीनियर भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए लगने वाले प्रशिक्षण शिविर में चयन हुआ है। भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षण केंद्र बंगलूरू में 23 से 30 मार्च तक शिविर लगेगा। गंगापुर की रहने वाली पूजा के पिता महेंद्र यादव दूध का व्यवसाय कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। माता कलावती देवी गृहणी हैं। पूजा छह बहनों में पांचवें नंबर पर है। शिविर में चयनित होने के लिए कम संसाधनों में लड़कों के साथ हॉकी का अभ्यास किया। प्रारंभिक शिक्षा गंगापुर इंटर कॉलेज से पूरी की। पूजा, जूनियर नेशनल और खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। इसके अलावा, सीनियर नेशनल में कांस्य पदक विजेता टीम की सदस्य रही हैं। वह सीनियर नेशनल में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। अकादमी के अध्यक्ष मोहम्मद हुसैन अंसारी ने बताया कि पूजा का भारतीय हॉकी टीम के शिविर में चयन होना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है। इससे खिलाड़ियों में काफी उत्साह है।

मंदिरों पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने का इनकार, याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने को कहा

नई दिल्ली मयूर विहार फेज 2 में स्थित तीन मंदिरों पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने रोक लगाने वाली अर्जी को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को दिल्ली हाईकोर्ट जाने को कहा है। मयूर विहार फेज-2 में स्थित तीन मंदिरों पर डीडीए कार्रवाई करने पहुंचा था। दिल्ली प्रशासन का पंजा(बुलडोजर) देख वहां रहने वाले स्थानीय लोगों ने हंगामा और विरोध करना शुरू कर दिया था, जिसके बाद कार्रवाई को रोकना पड़ा था। मयूर विहार फेज 2 में तीन मंदिर हैं। पूर्वी दिल्ली काली बाड़ी समिति,श्री अमरनाथ मंदिर संस्था और श्री बद्रीनाथ मंदिर। इन तीनों मंदिरों की समितियों ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के 19 मार्च 2025 को जारी विध्वंस नोटिस को चुनौती दी है। वकील विष्णु शंकर जैन के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि अधिकारियों ने बुधवार रात 9 बजे सार्वजनिक नोटिस लगाया और बताया कि मंदिरों को 20 मार्च 2025 को सुबह 4 बजे ध्वस्त कर दिया जाएगा। वकील विष्णु शंकर जैन ने याचिका में कहा कि डीडीए या किसी धार्मिक समिति के किसी भी प्राधिकरण द्वारा मंदिरों को सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया। याचिका में बताया गया है कि मंदिर 35 साल पुराने हैं और डीडीए ने खुद काली बाड़ी समिति मंदिर को मंदिर के सामने मैदान में दुर्गा पूजा करने की अनुमति दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिरों की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय जाने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आगे कहा गया कि डीडीए ने अपनी मनमानी से, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के प्रावधानों का पूरी तरह उल्लंघन करते हुए,मंदिर को गिराने का फैसला किया है। डीडीए या किसी धार्मिक समिति के किसी भी अधिकारी ने याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया। मयूर विहार फेज-2 पहुंची डीडीए की टीम को स्थानीय लोगों का विरोध झेलना पड़ा। पटपड़गंज विधायक रविंदर सिंह नेगी ने लोगों को आश्वासन दिया कि सीएम रेखा गुप्ता ने अनिश्चतकाल के लिए कार्रवाई पर रोक लगा दी है। दिल्ली विकास प्राधिकरण की टीम भी बाद में लौट गई। इसके बाद मामला देश की सर्वोच्च अदालत पहुंचा।

धमतरी जिले में एक महिला ने एक साथ चार स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया। इनमें तीन लड़की और 1 लड़का

धमतरी छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के गांव कौहाबाहरा में रहने वाली एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया है। यह जिले में ऐसा पहला केस है, जहां एक साथ चार बच्चों का जन्म हुआ है। धमतरी जिले के निजी अस्पताल उपाध्याय नर्सिंग होम में 15 मार्च को नगरी ब्लॉक के 30 वर्षीय एक महिला प्रसूता ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया है। चार बच्चों में एक लड़का तो वही तीन लड़कियों को महिला ने जन्म दिया है। जच्चा बच्चा दोनों ही स्वस्थ बताये जा रहे हैं। वही निजी अस्पताल की गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर रश्मि उपाध्याय का कहना है कि जब महिला अस्पताल में आई थी। तभी उसके सोनोग्राफी रिपोर्ट को देखकर चार बच्चों का उन्हें पता चल गया था। वही प्रसूता महिला की निर्धारित समय से पहले 7 महीने में ही डिलीवरी हो गई। वहीं जब महिला अस्पताल आई तब उसकी स्थिति सही नहीं थी जिसे अस्पताल में एडमिट किया गया और चारों बच्चों का जन्म ऑपरेशन के जरिए हुआ। चारों बच्चों में से एक बच्चे का वजन 1 किलो 500 ग्राम, दूसरे बच्चे का वजन 1 किलो 300 ग्राम, इसके साथ ही तीसरे बच्चे का वजन 1 किलो 100 ग्राम तो वहीं चौथे बच्चे के वजन की बात की जाए तो 900 ग्राम बताया जा रहा है। फिलहाल डॉक्टर ने अभी चारों शिशुओं के इलाज के लिए अस्पताल के स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट में सी मैप पर रखा है। वही बच्चों के डॉक्टर और वहां मौजूद नर्स के द्वारा अच्छे से उनकी देखभाल की जा रही है। वही प्रसूता महिला की बात की जाए तो वह अभी भी ऑब्जर्वेशन में है। क्योंकि समय से पहले महिला का डिलीवरी हुई जिससे महिला काफी कमजोर थी और थोड़ी-थोड़ी देर में महिला का बीपी डाउन हो रहा है। शरीर में सूजन की स्थिति भी बनी हुई है जिसे सामान्य करने के लिए अभी इलाज जारी है। डॉक्टर ने बताया कि मां और बच्चे दोनों ही स्वस्थ हैं। उन्हें कुछ दिन अस्पताल में ही रखा जाएगा और स्थिति सामान्य होने के बाद डिस्चार्ज किया जाएगा। वही इस मामले में चार बच्चों के पिता और बुआ नानी, दादी ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए। बताया कि 5 साल से बच्चे को लेकर प्रयास किया जा रहा था। लेकिन बच्चे नहीं हो रहे थे। वही एक साथ उन्हें इतनी बड़ी खुशी मिल गई कि उनके पास बोलने के लिए शब्द ही नहीं बचे। वही यह भी कहा कि परिवार में ऐसा पहली बार हुआ है। सभी आश्चर्य में है और बच्चों को और उनकी माता को देखने के लिए पहुंच रहे हैं। वही बच्चों के पिता ने कहा कि वह मजदूरी का कार्य करते हैं और इसके अलावा घर में आय का कोई साधन नहीं है। वही शासन प्रशासन से आर्थिक मदद को लेकर भी गुहार परिजन लगा रहे हैं। बच्चों के पिता का कहना है कि अगर एक बच्चा होता तो जैसे तैसे उसका पालन पोषण हो जाता लेकिन यहां चार बच्चे एक साथ हो गए हैं तो उन्हें पालन पोषण में तकलीफ होगी जिसे लेकर शासन प्रशासन से मदद की उम्मीद परिजन कर रहे हैं और वही डॉक्टर और नर्स का भी परिजनों ने धन्यवाद दिया कि उनके वजह से आज मां और बच्चे सभी स्वस्थ हैं। 4 साल पहले हुई थी शादी बच्चों के पिता नंदेश्वर नेताम (30) ने बताया कि वह कौहाबाहरा गांव के रहने वाले हैं। 4 साल पहले यानी 2020 में उनकी शादी लक्ष्मी नेताम (30) से हुई थी। दोनों की पढ़ाई भी साथ में हुई है। वह मजदूरी और कृषि कार्य करते हैं। उनकी पत्नी लक्ष्मी नेताम घर में सिलाई कार्य करती है। 4 बच्चे की डिलीवरी होना रेयर मामला डॉक्टर रोशन उपाध्याय ने बताया कि निजी नर्सिंग होम अस्पताल में महिला ने 4 बच्चों को जन्म दिया है। चारों बच्चों को आईसीयू में रखा गया है। मामला ज्यादा गंभीर होने के कारण परिवार की सहमति से बच्चों को ऑपरेशन कर बाहर निकाला गया। 4 से 5 बच्चे एक साथ पैदा होना दुर्लभ – डॉक्टर डॉक्टर रोशन उपाध्याय ने कहा कि, आईवीएफ इलाज के बाद 2 से 3 बच्चे एक साथ होते हैं, लेकिन बिना IVF के इस तरह का मामला रेयर होता है। महिला सरकारी अस्पताल से इलाज करवा रही थी। डॉक्टर ने कहा कि 2 से 3 बच्चे तो सामान्य देखे जाते हैं, लेकिन 4 से 5 बच्चे एक साथ पैदा होने का मामला दुर्लभ है। अब जानिए कहां-कहां कितने सबसे ज्यादा बच्चे पैदा हुए ? इंडियाना में महिला ने 11 बच्चों को दिया जन्म 2018 में संयुक्त राज्य अमेरिका के इंडियाना की एक महिला ने एक साथ 11 बच्चों को जन्म दिया था। 42 साल की उम्र में 11 बच्चों को एक साथ जन्म हुआ था। महिला का नाम मारिया हर्नानडेस है। जब मारिया को डिलीवरी के लिए हॉस्पिटल लाया गया। इस दौरान सभी लोग इनको देख कर हैरान थे। सभी की हैरानी उस समय और बढ़ गई जब मारिया ने महज 17 मिनट में 11 बच्चियों को जन्म दिया। दक्षिण अफ्रीका में महिला ने 10 बच्चों को दिया जन्म 2021 में दक्षिण अफ्रीका के गोटेंग प्रांत की महिला ने एक साथ 10 बच्चों को जन्म दिया था। महिला का नाम गोसेम थमारा सिथोले है। गोसेम ने 7 जून को 7 लड़कों और 3 लड़कियों को जन्म दिया था। गोसेम के पहले ही 6 साल के जुड़वा बच्चे थे। प्रेग्नेंसी की शुरुआत में डॉक्टर्स ने 6 बच्चों की पुष्टि की थी। कुछ समय बाद हुईं जांचों में सामने आया कि गर्भ में 8 बच्चे हैं, लेकिन डिलीवरी के दौरान 10 बच्चों का जन्म हुआ। गोसेम कहती हैं, 2 बच्चे ट्यूब के गलत हिस्से में थे, इसलिए शुरुआती जांच के दौरान दिखाई नहीं दिए थे। पश्चिम अफ्रीका में 26 साल की महिला ने 9 बच्चों को दिया जन्म 2021 में पश्चिमी अफ्रीकी देश माली की रहने वाली 26 साल की हेलीमा सिसे ने 9 बच्चों को दिया था। डॉक्टर्स ने 50 फीसदी बच्चों के ही जिंदा रह पाने की आशंका जाहिर की थी, लेकिन सभी बच्चे स्वस्थ थे। इनमें 5 लड़कियां और 4 लड़के हैं। हेलीमा और उनके 35 वर्षीय पति कादेर आर्बे 9 बच्चों को पाकर काफी खुश … Read more

टैरिफ में बड़ी कटौती करने जा रहा भारत, लेकिन 2 अप्रैल से, हम उन पर वही टैरिफ लगाएंगे जो वे हम पर लगाते हैं

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत जल्द ही अमेरिकी वस्तुओं पर लगाए गए टैरिफ में बड़ी कटौती करेगा। इसके साथ ही ट्रंप ने फिर दोहराया कि अमेरिका 2 अप्रैल से भारत के खिलाफ जवाबी कदम उठाएगा। ट्रंप ने भारत पर अमेरिकी वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश करना लगभग असंभव हो गया। ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि भारत संभवतः इन टैरिफों को काफी हद तक कम करने जा रहा है। लेकिन 2 अप्रैल से, हम उन पर वही टैरिफ लगाएंगे जो वे हम पर लगाते हैं।” ट्रंप ने पहले घोषणा की थी कि 2 अप्रैल से उन देशों के खिलाफ जवाबी टैरिफ लागू होंगे, जो अमेरिकी उत्पादों पर ऊंचे शुल्क लगा रहे हैं। इससे कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने दावा किया था कि भारत टैरिफ कम करने को तैयार हो गया है। उन्होंने कहा, “किसी ने आखिरकार उन्हें बेनकाब कर दिया है कि वे क्या कर रहे थे।” “किसी ने आखिरकार उन्हें बेनकाब कर दिया” ट्रंप ने कहा, “भारत हम पर बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाता है। बहुत बड़े पैमाने पर। आप वहां कुछ भी नहीं बेच सकते… लेकिन अब वे सहमत हो गए हैं; वे अब अपने टैरिफ को बहुत नीचे लाना चाहते हैं क्योंकि किसी ने आखिरकार उन्हें बेनकाब कर दिया है।” ट्रंप ने पहले भी भारत को “टैरिफ किंग” और “बड़ा दुरुपयोगकर्ता” कहकर संबोधित किया था। पिछले दिनों व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने भारत के साथ व्यापारिक बाधाओं पर चर्चा की और अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में आ रही कठिनाइयों का जिक्र किया था। ट्रंप ने भारत के साथ करीब 100 अरब डॉलर के व्यापार घाटे की ओर भी इशारा किया और कहा कि इस असंतुलन को दूर करने के लिए बातचीत जारी है। भारत में अमेरिकी शराब पर 150 प्रतिशत टैरिफ व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने भी भारत की व्यापार नीति की आलोचना करते हुए कहा कि भारत अमेरिकी शराब पर 150 प्रतिशत और कृषि उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाता है। उन्होंने कहा, “मेरे पास एक चार्ट है, जिसमें दिखाया गया है कि न केवल कनाडा, बल्कि अन्य देशों में भी अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगता है। अगर आप कनाडा को देखें, तो अमेरिकी चीज और मक्खन पर लगभग 300 प्रतिशत टैरिफ है। भारत में अमेरिकी शराब पर 150 प्रतिशत टैरिफ है। क्या आपको लगता है कि इससे केंटकी बॉर्बन को भारत में निर्यात करने में मदद मिलेगी? मुझे नहीं लगता। भारत के कृषि उत्पादों पर भी 100 प्रतिशत टैरिफ है।” ट्रंप प्रशासन की इस घोषणा से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नए मोड़ आने की संभावना है। अब देखना होगा कि भारत अपने टैरिफ में कितनी कटौती करता है और इस पर भारत सरकार की क्या प्रतिक्रिया होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कटौती होती है, तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन भारतीय घरेलू उद्योगों पर इसका असर भी देखने को मिलेगा।

दिल्ली में हत्याकांड का खुलासा- आसिफ ने कोमल को मारकर उसे पत्थर से बांधा गया और फिर लाश नहर में फेंक दी

नई दिल्ली दिल्ली में एक लड़की की हत्या के बाद सनसनीखेज खुलासा हुआ है। सीमापुरी के सुंदरी नगर में रहने वाली कोमल नाम की एक लड़की को मारकर उसे पत्थर से बांधा गया और फिर लाश नहर में फेंक दी गई। पुलिस आसिफ नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो उसे लंबे समय से उसे जानता था। हत्याकांड को 12 मार्च को अंजाम दिया गया था, जबकि लाश 17 मार्च को बरामद की गई थी। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में टैक्सी चलाने वाले आसिफ की कोमल से लंबे समय से जान पहचान थी। 12 मार्च को आसिफ ने कोमल को सीमापुरी इलाके से अपनी कार में बिठाया। इस दौरान दोनों में किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ। झगड़े के दौरान आसिफ ने गला दबाकर कोमल की हत्या कर दी। कोमल की हत्या के बाद आसिफ ने लाश को ठिकाने के लिए हैरान करने वाली तरकीब निकाली। उसने शव को एक भारी पत्थर से बांध छावला इलाके में मौजूद नहर में फेंक दिया। कई दिनों तक पानी में रहने के बाद जब शव काफी फूल गया तो यह पानी की सतह पर आ गया। लोगों ने नहर में लाश देखकर पुलिस को खबर दी। इससे पहले कोमल के परिवारवालों ने पुलिस को उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। लाश मिलने के बाद पुलिस ने हत्या का मुकदमा छावला पुलिस स्टेशन में दर्ज किया और जांच शुरू की। पुलिस ने जल्द ही कड़ियों को जोड़ते हुए आसिफ को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आसिफ के साथ और भी कोई इस अपराध में शामिल थी।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने आईपीएल के आगामी चरण में गेंद पर लार के इस्तेमाल से प्रतिबंध हटाया

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने बृहस्पतिवार को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के ज्यादातर कप्तानों की सहमति के बाद आगामी चरण में गेंद पर लार के इस्तेमाल से प्रतिबंध हटा दिया है। मुंबई में कप्तानों की बैठक में यह फैसला लिया गया। बीसीसीआई के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, ‘लार पर प्रतिबंध हटा दिया गया है। अधिकांश कप्तान इस कदम के पक्ष में थे।’ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने कोविड-19 महामारी के दौरान एहतियात के तौर पर गेंद को चमकाने के लिए लार लगाने की सदियों पुरानी प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया था और बाद में 2022 में विश्व संस्था ने इस प्रतिबंध को स्थायी कर दिया था। आईपीएल ने भी कोविड-19 महामारी के बाद लीग में खेल की शर्तों में आईसीसी प्रतिबंध को शामिल किया, लेकिन इसके दिशानिर्देश खेल की संचालन संस्था के दायरे से बाहर हैं। इस तरह बृहस्पतिवार को लिए गए इस फैसले से आईपीएल कोविड-19 महामारी के बाद लार के उपयोग को फिर से शुरू करने वाला पहला बड़ा क्रिकेट टूर्नामेंट बन गया है। क्या होगा इसका असर क्रिकेट में गेंद पर स्लाइवा (थूक) लगाने से गेंद की स्विंग और रिवर्स स्विंग को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। नई गेंद पर एक तरफ चमक बनाए रखने से हवा की गति प्रभावित होती है। जिससे गेंदबाज उसे स्विंग करा सकते हैं। पुरानी गेंद के एक तरफ चमक बनाए रखने और दूसरी तरफ उसे अधिक खुरदरा छोड़ने से गेंद उल्टी दिशा में स्विंग करने लगती है जिससे बल्लेबाज को खेलना मुश्किल हो जाता है।

एचपी भारत में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए एक दो-आयामी रणनीति अपना रहा, भारत में बढ़ेगा निवेश

नई दिल्ली एचपी (ह्यूलट-पैकार्ड) के सीईओ एनरिक लोरेस ने भारत में कंपनी की बढ़ती उपस्थिति और विस्तार की योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एचपी भारत में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए एक दो-आयामी रणनीति अपना रहा है। कंपनी न सिर्फ स्थानीय विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करेगी बल्कि सॉफ्टवेयर विकास में काम कर रहे भारतीय इंजीनियरों को भी शामिल करेगी ताकि वह अपने उत्पादों में उन्नत सॉफ़्टवेयर सुविधाएं प्रदान कर सकें। भारत में HP की बढ़ती उपस्थिति एनरिक लोरेस ने कहा, “भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश है जहां हमारे सबसे अधिक कर्मचारी हैं और इनमें से बड़ी संख्या में इंजीनियर हैं जो सॉफ़्टवेयर विकास में काम कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि इन इंजीनियरों के योगदान से हमारे बाकी उत्पादों में नई तकनीकी सुविधाओं का समावेश होगा।” पीसी बाजार में एचपी की स्थिति भारत पहले ही एचपी के लिए एक महत्वपूर्ण पीसी बाजार बन चुका है। इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (आईडीसी) के अनुसार भारत में एचपी सबसे बड़ी पीसी निर्माता कंपनी है। लोरेस ने बताया कि एचपी की वैश्विक बाजार हिस्सेदारी विभिन्न श्रेणियों में सबसे अधिक है और कंपनी भारत में आंतरिक विकास और शोध कर रही है जिसका लाभ कंपनी के अन्य वैश्विक उत्पादों में भी देखने को मिलेगा। भारत में विनिर्माण और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना एचपी ने पिछले साल के अंत में भारतीय अनुबंध निर्माता डिक्सन टेक्नोलॉजीज को “मेक इन इंडिया” योजना के तहत लैपटॉप और डेस्कटॉप बनाने का ऑर्डर दिया था। इसके माध्यम से एचपी अपने उत्पादों की कीमत को कम करने में सक्षम होगी जिससे उसकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। लोरेस ने बताया, “भारत में उत्पादों का निर्माण स्थानीय स्तर पर किया जाना चाहिए और इस दिशा में हम अप्रैल महीने से भारत में नोटबुक उत्पादन शुरू करने जा रहे हैं।” चीन पर निर्भरता कम करना एचपी और अन्य तकनीकी कंपनियां भारत में अपने ध्यान केंद्रित कर रही हैं ताकि चीन पर उनकी निर्भरता कम हो सके। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई कंपनियां चीन से अपनी उत्पादन सुविधाएं बाहर स्थानांतरित करने पर विचार कर रही हैं। एचपी को भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीनी उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ का सामना करना पड़ा है जिससे कंपनी ने भारत में अधिक उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई है। भारत में PC की बढ़ती मांग और AI सुविधाएं स्मार्टफोन की तुलना में भारत में पीसी की पहुंच अभी भी कम है जिससे एचपी जैसी कंपनियों को इस बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का अच्छा अवसर मिल रहा है। इसके अलावा एचपी अब अपने पीसी में बिल्ट-इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सुविधाएं जोड़ने पर ध्यान केंद्रित कर रही है जिससे यह कंपनियां और छोटे व्यवसायों के लिए आदर्श बन सकें। एचपी का मानना है कि भारत में एआई आधारित पीसी की मांग बढ़ेगी। स्थानीय AI मॉडल के साथ नई योजनाएं लोरेस ने यह भी साझा किया कि एचपी स्थानीय रूप से विकसित AI मॉडल को अपने उत्पादों में लागू करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कंपनी स्पेन और सऊदी अरब में स्थानीय विश्वविद्यालयों और सरकारों के साथ मिलकर स्पेनिश और अरबी भाषाओं के लिए AI मॉडल विकसित कर रही है और इसी तरह के मॉडल भारत में भी विकसित किए जा सकते हैं। अंत में कहा जा सकता है कि एचपी भारत में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रही है। कंपनी का उद्देश्य न सिर्फ स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना है बल्कि भारतीय इंजीनियरों को अपनी सॉफ़्टवेयर टीम में शामिल कर अपने उत्पादों को और अधिक उन्नत बनाना है। साथ ही एचपी चीन पर अपनी निर्भरता कम करते हुए भारत में अपने उत्पादन को बढ़ा रही है जिससे उसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में लाभ मिलेगा।  

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