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भोपाल AIIMS ने कर दिया कमाल, 70 वर्षीय बुजुर्ग का डॉक्टरों ने बिना चीरा लगाए ही बदला वाल्व

भोपाल  राजधानी के AIIMS में एक 70 वर्षीय मरीज का सफल ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन (TAVI) किया गया। मरीज को ओपन हार्ट सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं माना जा रहा था। यह मध्य प्रदेश के किसी सरकारी अस्पताल में पहली बार हुआ है। इस प्रक्रिया में मरीज के खराब हो चुके एओर्टिक वाल्व को बदला गया। प्राइवेट अस्पतालों के मुकाबले यहां इलाज का खर्च लगभग 40% कम था। मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जो एओर्टिक वाल्व स्टेनोसिस के कारण थी। जोखिम भरा था ऑपरेशन मरीज का ऑपरेशन बुधवार को किया गया और उम्मीद है कि उन्हें गुरुवार को छुट्टी मिल जाएगी। AIIMS भोपाल के हृदय रोग विभाग के एचओडी (प्रभारी) डॉ. भूषण शाह ने बताया कि मरीज को क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव लंग डिजीज (COPD) भी थी, इसलिए ओपन-हार्ट सर्जरी करना जोखिम भरा था। प्राइवेट अस्पतालों में लाखों का होता है खर्चा AIIMS भोपाल के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने कहा कि यह संस्थान द्वारा किफायती कीमतों पर बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की एक और पहल है। उन्होंने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में इस प्रक्रिया का खर्च लगभग 19 लाख से 25 लाख रुपये है। AIIMS भोपाल ने CGHS दरों पर TAVI प्राप्त करके लागत कम की। सरकारी अस्पताल होने के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खर्च भी कम है। पैर की धमनी से हार्ट तक पहुंचता है वाल्व डॉ. योगेश निवरिया, जो AIIMS भोपाल में कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के प्रमुख हैं, ने बताया कि इस तकनीक में पैर की धमनी के माध्यम से एक विशेष डिलीवरी सिस्टम का उपयोग करके वाल्व हृदय तक पहुंचता है। इसे बिना चीरे, सामान्य एनेस्थीसिया या वेंटिलेटर के लगाया जाता है। सुरक्षा के लिए एनेस्थीसिया और अन्य विभागों के चिकित्सा कर्मी भी प्रक्रिया के दौरान मौजूद थे। क्या है TAVI TAVI एक कम चीर-फाड़ वाली प्रक्रिया है। इसका उपयोग ओपन-हार्ट सर्जरी की आवश्यकता के बिना खराब हो चुके एओर्टिक वाल्व को बदलने के लिए किया जाता है। यह बुजुर्ग मरीजों या कई स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, जो पारंपरिक सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते हैं। मरीज को पिछले 6 से 8 महीनों से सांस लेने में बहुत तकलीफ हो रही थी। इसका कारण एओर्टिक वाल्व का सिकुड़ना था, जिससे खून का प्रवाह ठीक से नहीं हो पा रहा था। डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की हालत और फेफड़ों की बीमारी को देखते हुए ओपन हार्ट सर्जरी करना खतरनाक हो सकता था।

संभल में नेजा मेले को लेकर विवाद छिड़ा है, पुलिस-प्रशासन ने मेले को अनुमति नहीं दी, नहीं लगेगा मेला

संभल उत्तर प्रदेश में संभल के बाद अब मुरादाबाद के बिलारी में भी इस साल नेजा मेला नहीं लगेगा। यहां सनातन जागरण मंडल ने इस मेले का विरोध किया है। एसडीएम ने बताया कि इस बार आयोजकों ने मेले की अनुमति ही नहीं मांगी। इसलिए इस बार मेला का आयोजन नहीं होगा। दरअसल, हिंदू संगठन के पदाधिकारियों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर थांवला गांव में लगने वाले नेजा मेला पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की थी। उधर, मेला के आयोजकों ने तय किया है कि एक महीने बाद उसी स्थल पर नुमाइश लगाई जाएगी। संभल में नेजा मेले को लेकर विवाद छिड़ा है। पुलिस-प्रशासन ने मेले को अनुमति नहीं दी है। वहीं, दूसरी ओर मुरादाबाद जिले की बिलारी तहसील क्षेत्र के थांवला गांव में लगने वाला नेजा मेला भी इस बार नहीं लगेगा। आयोजकों ने इस बार मेले के लिए अनुमति नहीं ली है। इसलिए आयोजन नहीं होगा। थांवला में परंपरा रही है कि ग्राम प्रधान के नेतृत्व में मेले का आयोजन होली के बाद पड़ने वाले दूसरे बुधवार को किया जाता रहा है। इस बार बिलारी के हिन्दू संगठन सनातन जागरण मंच ने मेला नहीं लगाए जाने को लेकर एसडीएम बिलारी को ज्ञापन दिया था। ग्राम प्रधान पति इकरार हुसैन इस मेले की नीलामी भी करवा चुके थे। विरोध के बाद नेजा मेले पर पेच फंस गया। उधर, एसडीएम बिलारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि इस बार आयोजकों ने नेजा मेले की अनुमति ही नहीं ली है। इस वजह से मेले का आयोजन नहीं होगा। अब आयोजकों की मंशा है कि जहां नेजा मेला लगता था वहां वह नुमाइश का आयोजन करेंगे।

आईआईएम रायपुर के निदेशक काकानी ने सीएम साय से की मुलाकात, पब्लिक लीडरशिप प्रोग्राम में भाग लेने के लिए किया आमंत्रित

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से भारतीय प्रबंध संस्थान रायपुर के निदेशक रामकुमार काकानी ने आज सौजन्य मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने सीएम साय को 22 एंव 23 मार्च 2025 को आयोजित दो दिवसीय पब्लिक लीडरशिप प्रोग्राम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया. मुख्यमंत्री साय ने इस निमंत्रण के लिए आभार व्यक्त किया और इस पहल की सराहना की. इस अवसर पर प्रोफेसर संजीव पाराशर भी उपस्थित थे. नेतृत्व और नीति निर्माण पर केंद्रित होगा कार्यक्रम काकानी ने बताया कि यह विशेष कार्यक्रम छत्तीसगढ़ के विधायकों के लिए डिजाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य समकालीन प्रबंधन और नीति निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श को बढ़ावा देना है. इस मंच पर प्रख्यात नीति निर्माता, शिक्षाविद और विचारक एकत्र होंगे ताकि विभिन्न विषयों पर सहयोगात्मक सोच और समस्याओं के व्यावहारिक समाधान की प्रक्रिया के संबंध में सारगर्भित विचार विमर्श किया जा सके. छत्तीसगढ़ में नेतृत्व कौशल को नया आयाम देने की पहल भारतीय प्रबंध संस्थान रायपुर के निदेशक काकानी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति और उनके अनुभवजन्य विचार न केवल कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाएंगे, बल्कि प्रतिभागियों के लिए प्रेरणादायक भी होंगे. काकानी ने यह भी उल्लेख किया कि यह कार्यक्रम विधायकों को प्रभावी नेतृत्व कौशल विकसित करने और नीति निर्माण में नवीन दृष्टिकोण अपनाने के लिए सहयोग करेगा. यह पहल छत्तीसगढ़ में सुशासन और जनहितैषी नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी.

गांधीसागर डूब क्षेत्र में रेत के अवैध खनन के खिलाफ पुलिस, राजस्व और खनिज विभाग ने संयुक्त कार्रवाई

नीमच नीमच जिले की मनासा तहसील के गांव खानखेड़ी और कुंडला गांधीसागर डूब क्षेत्र (बैक वाटर) में रेत के अवैध खनन के खिलाफ पुलिस, राजस्व और खनिज विभाग ने संयुक्त कार्रवाई की। खानखेड़ी के नदी घाट पर छापेमारी कर चार फाइटर मशीन, चार बड़ी नाव, एक छोटा जहाज और रेत से भरी दो ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की। चंबल नदी के बैंक वाटर में कई मशीनों से अवैध उत्खनन की सूचना पर कलेक्टर ने संज्ञान लिया। कुकड़ेश्वर थाना पुलिस, खनिज विभाग अधिकारी गजेंद्र डाबर, आरआई कुलदीप डाबर, तहसीलदार मुकेश निगम, पटवारी और चौकीदार की टीम मौके पर पहुंची। इसके साथ ही एक अन्य दल पानी के रास्ते होते हुए भी दबिश देने पहुंचा। टीमों ने खानखेड़ी के नदी घाट पर छापा मारा। वहां चार फाइटर मशीन, चार बड़ी नाव और एक छोटा जहाज अवैध उत्खनन में लगे मिले। पास में रेत से भरी दो ट्रैक्टर-ट्रॉली भी खड़ी थी। सभी नौ मशीनों और दो ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त किया। कार्रवाई से पहले ही अवैध उत्खनन करने वाले ट्रैक्टर और मशीनें छोड़कर भाग निकले। खनिज अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। जब्त ट्रैक्टर-ट्रॉली और मशीनों के मालिकों व चालकों की जानकारी जुटाई जा रही है। एसडीएम, खनिज विभाग तथा पुलिस की निगरानी में मौके पर ही जब्त की गई मशीनों को नष्ट कर पानी में डूबो दिया। गौरतलब है कि मंदसौर और नीमच जिले में गांधीसागर के बैक वाटर क्षेत्र में लंबे समय से खनन माफियाओं द्वारा नदी में सक्सर मशीन डाल कर रेती का अवैध खनन कर जिले में स्थित चंबल नदी, रेतम नदी के साथ ही मलेनी नदी को खोखला किया जा रहा था। मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद मंदसौर खनिज विभाग द्वारा कुछ दिन पूर्व कार्रवाई की गई थी। उसके बाद अब नीमच जिला प्रशासन और खनिज विभाग द्वारा संयुक्त रूप से कार्रवाई की गई है।  

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगी डिटेल, कपिल मिश्रा के उस X में क्या विवादित था? 8 अप्रैल को फैसला

नई दिल्ली दिल्ली सरकार के कानून मंत्री कपिल मिश्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। चुनाव आचार संहिता उल्लंघन मामले में दिल्ली की अदालत ने पुलिस से कपिल के उस विवादित एक्स पोस्ट की जानकारी मांगी है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इसी के साथ मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल तक के लिए टाल दी है। उस दिन कपिल मिश्रा पर आरोप भी तय हो सकता है। आचार संहिता के उल्लंघन वाले मामले पर आज सुनवाई करते हुए दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उत्तरी पश्चिमी जिले के डीसीपी से ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) से उस पोस्ट की जानकारी जुटाने के बारे में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है,जो कथित तौर पर दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने पोस्ट की थी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि डीसीपी अगली सुनवाई से पहले एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। कोर्ट ने आरोप तय करने पर बहस के लिए मामले को 8 अप्रैल को सूचीबद्ध किया है। इससे एक दिन पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने कपिल मिश्रा को कोई राहत न देते हुए निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कपिल मिश्रा के वकील ने निचली अदालत में चल रही सुनवाई को रोकने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि कपिल मिश्रा के खिलाफ FIR CrPc में दिए गए नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किए बिना दर्ज की गई थी। उनके वकील ने यह भी कहा कि ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर किया गया पोस्ट किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से नहीं किया गया था। सोशल मीडिया पोस्ट में किसी भी धर्म या धार्मिक समुदाय का जिक्र नहीं था। इसके अलावा, पोस्ट में CAA प्रदर्शन को लेकर भी कोई टिप्पणी नहीं की गई थी।

उज्जैन : महिला इंजीनियर को अश्लील मैसेज भेजने वाले कार्यपालन यंत्री के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली

उज्जैन उज्जैन नगर निगम की महिला सभी इंजीनियर को अश्लील मैसेज भेजने और रात में घर बुलाने के लिए दबाव बनाने वाले कार्यपालन यंत्री के खिलाफ कोतवाली थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. अभी कार्यपालन यंत्री फरार बताया जा रहा है. दरअसल, उज्जैन नगर निगम में सब इंजीनियर के पद पर पदस्थ 35 वर्षीय महिला अधिकारी ने अपने ही विभाग के कार्यपालन यंत्री पीयूष भार्गव के खिलाफ कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई है. महिला सब इंजीनियर का आरोप है कि कार्यपालन यंत्री भार्गव ने लंबे समय से प्रताड़ित कर रहे थे. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि वे रात के समय उन्हें घर बुलाते थे. इसके अलावा फोन पर अश्लील बातें भी करते थे. महिला अधिकारी ने व्हाट्सएप चैटिंग के अलावा पीयूष भार्गव की ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग भी सबूत के तौर पर पुलिस के समक्ष पेश की थी, जिसके बाद पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है. एसपी प्रदीप कुमार शर्मा के मुताबिक आरोपी पीयूष भार्गव को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा. अभी आरोपी फरार है. ‘नौकरी छोड़ने का बना लिया था मन’ महिला अधिकारी ने अपने शिकायत में यह भी लिखा है कि पीयूष भार्गव की वजह से उन्होंने नौकरी छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन फिर उन्हें एहसास हुआ कि भार्गव दूसरी महिला अधिकारियों के साथ भी इस तरीके से बर्ताव कर सकता है. इसके बाद उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों से शिकायत की नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक की सलाह पर उन्होंने पुलिस में भी शिकायत की है. 7 दिनों में होगी जांच पूरी नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक ने बताया कि पीयूष भार्गव के खिलाफ उनके पास महिला अधिकारी ने शिकायत की है. महिला अधिकारी की शिकायत पर जांच कमेटी बनाई गई है जो कि सात दिनों मे अपनी रिपोर्ट पेश करेगी. इसके बाद निगम की ओर से अलग से कार्रवाई की जाएगी. पहले भी हो चुका है विवाद कार्यपालन यंत्री पीयूष भार्गव पूर्व में रिटायर हो चुका है. उसे संविदा के आधार पर रखा गया है. पूर्व में भी वे कई बार विवादों में रह चुके हैं. उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण करने वाली जांच एजेंसी भी जांच कर चुकी है.

युजवेंद्र चहल और उनकी पत्नी धनश्री वर्मा को वकील ने कहा, तलाक हो गया है, शादी टूट गई

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और उनकी पत्नी धनश्री वर्मा का आज आधिकारिक रूप से तलाक हो गया है। कोर्ट में आज (20 मार्च) उनके तलाक पर अंतिम फैसला आया। दोनों मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुए और उन्हें तलाक दे दिया गया। वकील ने कहा, “तलाक हो गया है, शादी टूट गई है। बता दें कि यह मामला क्रिकेट और ग्लैमर की दुनिया में काफी चर्चा में रहा है, क्योंकि दोनों की जोड़ी सोशल मीडिया पर बेहद पॉपुलर थी। लेकिन अब यह रिश्ता टूट गया है। बांद्रा फैमिली कोर्ट में धनश्री अपने चेहरे को ढककर कोर्ट पहुंचीं। दोनों ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की।   युजवेंद्र चहल भी अपने वकील के साथ फैमिली कोर्ट पहुंचे, लेकिन उन्होंने मास्क और हुडी पहनकर अपने चेहरे को पूरी तरह ढक लिया, जिससे किसी को उनकी पहचान न हो। उनका कोर्ट परिसर में प्रवेश करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।   एलिमनी पर बनी सहमति बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों के बीच 4.75 करोड़ रुपये के एलिमनी सेटलमेंट पर सहमति बन चुकी है। चहल ने पहले ही 2.35 करोड़ रुपये धनश्री को दे दिए हैं। युजवेंद्र चहल और धनश्री वर्मा की शादी साल 2020 में बड़ी धूमधाम से हुई थी। हालांकि, पिछले एक साल से दोनों अलग रह रहे थे। हाल ही में धनश्री ने अपने इंस्टाग्राम से चहल के साथ तस्वीरें डिलीट कर दी थीं, लेकिन अब उन्हें दोबारा अनआर्काइव कर दिया है।  

घनी टाइगर आबादी वाला देश का टाइगर रिजर्व बना रणथंभौर रचा इतिहास

सवाई माधोपुर राजस्थान का रणथंभौर टाइगर रिजर्व, जो विश्व पटल पर अपनी बाघों की अठखेलियों के लिए प्रसिद्ध है ने एक और कीर्तिमान रच दिया है। यह देश का सबसे घनी टाइगर आबादी वाला टाइगर रिजर्व बन गया है। यहां कुल 66 बाघ, बाघिन और शावक हैं, जिनमें 23 बाघ, 25 बाघिन और 18 शावक शामिल हैं। खास बात यह है कि रणथंभौर में टाइगर शावकों की संख्या कुल आबादी का लगभग 27.27% है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व 1334 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें केवल 940 वर्ग किलोमीटर में ही बाघ विचरण करते हैं। इस सीमित क्षेत्र में बाघों की इतनी अधिक संख्या ने इसे देश का सबसे घनी टाइगर आबादी वाला टाइगर रिजर्व बना दिया है। एक बाघ के हिस्से में औसतन 14.25 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र आता है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व को दो डिवीजन में विभाजित किया गया है। पहला डिवीजन 940 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसमें 600 वर्ग किलोमीटर को कोर एरिया और शेष को बफर एरिया कहा जाता है। इसके अलावा 128 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र पालीघाट चंबल घड़ियाल सेंचुरी का हिस्सा है। आमतौर पर एक टाइगर अपनी टेरेटरी पेड़ों पर स्प्रे (पेशाब) और पंजों के निशान बनाकर निर्धारित करता है। रणथंभौर में एक विशेष स्थिति यह है कि यहां बाघ एक-दूसरे की टेरेटरी को ओवरलैप कर रहे हैं, जिससे बाघों के बीच टेरिटोरियल फाइट की घटनाएं भी होती हैं। कई बार ऐसे संघर्षों में बाघों की मौत भी हो चुकी है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व प्रथम के डीएफओ रामानंद भाकर ने बताया कि वन विभाग रणथंभौर के क्वालंजी वन क्षेत्र को टाइगर हैबिटाट के रूप में विकसित कर रहा है। इसके अतिरिक्त रणथंभौर से रामगढ़ विषधारी वन्यजीव अभयारण्य, बूंदी तक एक टाइगर कॉरिडोर भी विकसित किया जा रहा है। इस पहल से बाघों को पर्याप्त पर्यावास मिलेगा और संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी। साथ ही कैलादेवी अभयारण्य को भी विकसित किया जा रहा है। जब ये इलाके विकसित होंगे तो रणथंभौर के बाघों को पर्याप्त जगह मिल सकेगी।

मध्यप्रदेश के कूनो में चीतों को बसाने में विन्सेंट अब नहीं रहे, रियाद के अपार्टमेंट में मिला शव

 भोपाल दुनिया के प्रसिद्ध चीता विशेषज्ञ और ‘द मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव’ (TMI) के संस्थापक विन्सेंट वैन डेर मेरवे का शव सऊदी अरब की राजधानी रियाद के एक अपार्टमेंट में मिला है. उनके निधन की खबर से दुनियाभर के वन्यजीव संरक्षणवादियों में शोक की लहर दौड़ गई है. विन्सेंट वैन डेर मेरवे मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका के निवासी थे और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ एशिया में चीता संरक्षण एवं पुनर्वास के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाने जाते थे. उनकी संस्था ‘द मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव’ इन दिनों सऊदी अरब सरकार के साथ मिलकर वहां चीतों को बसाने की योजना पर काम कर रही थी. इसी सिलसिले में वह रियाद गए थे, जहां उनका शव बरामद हुआ. PM मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट से जुड़े थे विन्सेंट विन्सेंट वैन डेर मेरवे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ से भी गहरे तौर पर जुड़े थे. इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों को फिर से बसाने का प्रयास किया जा रहा है. नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भारत लाए गए चीतों को भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल ढालने में उनकी भूमिका बेहद अहम थी. वह उन चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में से एक थे, जिन्होंने इस परियोजना को दिशा-निर्देश प्रदान किए. यह परियोजना भारतीय घास के मैदानों में अफ्रीकी चीतों को बसाने की एक अनूठी पहल है. चुनौतियों के बावजूद, विन्सेंट ने इस प्रोजेक्ट में अपनी आस्था जताई थी और इसके शुरुआती चरणों की सफलता में उनका बड़ा योगदान रहा. चीता संरक्षण में वैश्विक योगदान विन्सेंट ने अफ्रीका और एशिया में चीतों के पुनर्वास से जुड़े कई परियोजनाओं में सक्रिय रूप से काम किया था. उनकी विशेषज्ञता और समर्पण ने चीता संरक्षण के क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ी. उनके असामयिक निधन से न केवल ‘प्रोजेक्ट चीता’, बल्कि वैश्विक संरक्षण समुदाय को भी गहरा आघात पहुंचा है. कैसे हुआ निधन? विन्सेंट वैन डेर मेरवे की संस्था TMI चीतों की आबादी को बढ़ाने और उनकी सुरक्षा के लिए काम करती है। उनकी संस्था ‘द मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव’ इन दिनों सऊदी अरब सरकार के साथ मिलकर चीतों को बसाने की योजना पर काम कर रही थी। इसी सिलसिले में विन्सेंट रियाद गए थे। रियाद में उनके अपार्टमेंट बिल्डिंग के हॉलवे में विन्सेंट का शव मिला। CCTV फुटेज से पता चला कि मेरवे अचानक गिरे और सिर पर चोट लग गई। गंभीर चोट लगने के कारण उनकी जान चली गई। कौन थे विन्सेंट वैन डेर मेरवे? विन्सेंट का जन्म 1983 में साउथ अफ्रीका में हुआ था। वन्यजीवों के प्रति उनके प्रेम ने उन्हें संरक्षण जीव विज्ञान में एक शानदार करियर की ओर अग्रसर किया। ‘द मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव’ (TMI) के संस्थापक थे।  चीतों की आबादी को बढ़ाने और उनकी सुरक्षा के लिए कई प्रयास किए। विन्सेंट ने चीतों को विभिन्न अभ्यारण्यों में सफलतापूर्वक फिर से बसाया।   217 चीतों के साथ हुई थी शुरुआत विन्सेंट के ‘चीता मेटापॉपुलेशन प्रोजेक्ट’ की शुरुआत साउथ अफ्रीका के 41 वन्यजीव अभ्यारण्यों में 217 चीतों के साथ हुई थी। आज यह प्रोजेक्ट साउथ अफ्रीका, मलावी, जाम्बिया, जिम्बाब्वे, मोजाम्बिक और भारत में 75 अभ्यारण्यों में 537 चीतों तक फैल चुका है। एमपी में चीते बसाने में अहम भूमिका भारत में पीएम नरेंद्र मोदी के ‘प्रोजेक्ट चीता’ की सफलता के पीछे विन्सेंट की अहम भूमिका रही। नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ से विन्सेंट गहरे तौर पर जुड़े थे। इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों को फिर से बसाया। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भारत लाए गए चीतों को भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल ढालने में उनकी भूमिका बेहद अहम थी।

कोस्मो आनंदा टाउनशिप में सनसनीखेज हत्याकांड, अपहरण किये बच्चे का शव टाउनशिप में ढाई फीट गहरे गड्ढे में मिला

ग्वालियर  ग्वायिलर के सिरोल स्थित कोस्मो आनंदा टाउनशिप से मंगलवार दोपहर जिस चार वर्षीय बालक का अपहरण हुआ था। 33 घंटे बाद उसकी लाश टाउनशिप के ही पिछले हिस्से में ढाई फीट गहरे गड्ढे में मिली।हत्या करने वाली 12 वर्षीय बालिका है, जो उसे अपने साथ बेर तोड़ने के बहाने ले गई थी। बालिका ने मंगलवार दोपहर में ही करीब एक बजे मासूम का पहले गला दबाया फिर मुंह के बल उसे गड्ढे में गिराया। इसके बाद भारी पत्थर पटक दिया। लाश को छिपाने के लिए ऊपर से और पत्थर पटक दिए। हत्या का कारण साफ नहीं हत्या क्यों की, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। प्रारंभिक पूछताछ में उसने कहा कि उसे उन बच्चों को देखकर गुस्सा आता है, जो उसकी बात नहीं मानते। पुलिस बाल अपचारी बालिका की काउंसलिंग भी कराएगी, जिससे हत्या की असल वजह सामने आ सके। बच्चे की लाश मिलने पर परिवार आक्रोशित हुआ यूनिवर्सिटी थाना पुलिस ने बालिका को हिरासत में लिया है। बालिका के माता-पिता से भी पूछताछ चल रही है। बच्चे की लाश मिलने के बाद परिवार आक्रोशित हो गया। इसके चलते चार थानों की फोर्स कास्मो आनंदा टाउनशिप में लगाई गई। एसएसपी धर्मवीर सिंह, एएसपी कृष्ण लालचंदानी, डीएसपी हिना खान सहित अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। मासूम बच्चे के पिता पत्नी व चार बच्चों के साथ दो माह पहले ही ग्वालियर आए थे। सिरोल क्षेत्र में फूटी बैरक में रहते थे। कास्मो आनंदा टाउनशिप में नगरीय प्रशासन विभाग की डिप्टी डायरेक्टर सविता प्रधान के भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। यहां रामकुमार और पत्नी काम करते हैं। मंगलवार को काम करने आए और बेटे को भी साथ ले आए थे। लौटकर आए तो बेटा गायब मिला बेटा यहां दूसरे मजदूरों के बच्चों के साथ खेल रहा था। जब वह लौटकर आए तो बेटा गायब मिला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई थी। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि हत्या 12 वर्षीय बालिका ने की है। बालिका ने यह कुबूल कर लिया है। हत्या क्यों की, इसे लेकर पड़ताल जारी है। 30 घंटे में 10 बार बालिका ने उलझाया, हमउम्र बालिका ने खोला राज तो मिला सुराग आरोपित बालिका से सबसे पहले पूछताछ मंगलवार दोपहर तीन बजे हुई, जब पुलिस को पता लगा कि वह बेर तोड़ने के लिए बच्चे को साथ ले गई थी। उस समय उसने कहा- वह बेर तोड़ने के बाद बच्चे को छोड़ गई थी। दोबारा पूछताछ हुई तो कहा- कुत्ते पीछे पड़ गए थे, कुत्तों ने उसे काट लिया होगा। यहां से उस पर संदेह हुआ। फिर उसने बेर तोड़ने जाने के रास्ते बदल-बदलकर बताए। पुलिस को पता लगा कि उस समय यहां तीन बच्चे और खेल रहे थे। इन्हीं में से हमउम्र किशोरी को आरोपित बालिका के सामने बैठाकर खाना खिलाया फिर बात की तो लौटने के रास्ते के बारे में सवाल किया। इस पर आरोपित बालिका ने दूसरा रास्ता बताया, दूसरी किशोरी ने हकीकत बताई और इसी बात पर अड़ गई। तब आरोपित बालिका से बात की गई, तो वह टूट गई और खुद ही लाश के पास लेकर पहुंच गई।

छात्राओं के यौन शोषण मामले में गिरफ्तार हुआ प्रोफेसर रजनीश कुमर, पूछताछ में कई सच्‍चाइयों का खुलासा

हाथरस यूपी के हाथरस के बागला कॉलेज में पिछले 20 साल से छात्राओं का यौन शोषण करने का आरोपी प्रोफेसर रजनीश कुमार गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रोफेसर के पास से पुलिस ने मोबाइल और लैपटॉप भी बरामद किया है। उससे पूछताछ में छात्राओं के यौन शोषण से जुड़ी कई सच्‍चाइयों का खुलासा होने की संभावना है। प्रोफेसर के घिनौने कृत्‍यों का खुलासा तब हुआ था जब छात्राओं के अश्‍लील हरकत करने के उसके कई वीडियो लीक हो गए। इस मामले को लेकर पिछले कई दिनों से हाथरस में हड़कंप मचा हुआ है। छात्र और अभिभावक गुस्‍से में हैं। वे सब लगातार प्रदर्शन कर प्रोफेसर की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। प्रोफेसर की तलाश में पुलिस की कई टीमें जुटी थीं। डीएम ने भी इस मामले में चार सदस्‍यीय जांच कमेटी बनाई है जो कॉलेज और अन्‍य स्‍थानों पर लोगों से पूछताछ कर अपनी जांच-पड़ताल में जुटी है। यौन शोषण मामले में गिरफ्तार किया गया प्रोफेसर रजनीश कुमर पीसी बागला कॉलेज में भूगोल विभाग का अध्‍यक्ष रहा है। उसके पास चीफ प्रॉक्‍टर का भी चार्ज था। प्रोफेसर के खिलाफ छात्राओं ने उत्‍तर प्रदेश राज्‍य महिला आयोग, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों को कई गुमनाम चिट्ठ‍ियां भेजकर शिकायत की थी। उन्‍होंने प्रोफेसर रजनीश कुमार की आपत्तिजनक स्थिति में कुछ तस्‍वीरें भी भेजी थीं। आरोप है कि प्रोफेसर रजनीश कुमार परीक्षा में अच्‍छे नंबर दिलवाने और सरकारी नौकरी दिलाने का लालच देकर छात्राओं का यौन शोषण करता था। वह छात्राओं को अपने जाल में फंसाकर उनके साथ अश्‍लील हरकतें करता था और इस दौरान खुद ही वीडियो भी रिकॉर्ड करता था। इन्‍हीं में से 59 वीडियो पिछले दिनों सोशल मीडिया में लीक हो गए थे। 13 मार्च को मुकदमा दर्ज होने के बाद से वह लगातार फरार चल रहा था। इस बीच प्रोफेसर को कॉलेज प्रबंधन ने सस्पेंड भी कर दिया था। प्रोफेसर की जांच के लिए हाथरस के डीएम ने चार सदस्‍यीय कमेटी गठित कर सात दिन में रिपोर्ट मांगी थी। इस कमेटी ने कल कॉलेज में जाकर कई लोगों से पूछताछ की थी। यूपी से राजस्‍थान तक हो रही थी प्रोफेसर की तलाश यूपी पुलिस की कई टीमें प्रो. रजनीश कुमार की तलाश में जुटी थीं। यूपी से लेकर राजस्‍थान तक उसकी तलाश की जा रही थी। प्रोफेसर का मोबाइल लगातार बंद था लेकिन पुलिस उसकी निगरानी में जुटी थी। पुलिस की टीमें मथुरा में उसके गांव समेत संभावित ठिकानों पर भेजी गईं थीं। लेकिन वह वहां नहीं मिला था। पुलिस की लगातार कोशिशों के परिणामस्‍वरूप गुरुवार की सुबह प्रो. रजनीश कुमार को पकड़ने में पुलिस को कामयाबी मिली।

जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के भारतीय छात्र की गिरफ्तारी, हमास से संबंध रखने का लगाया गया है आरोप

वॉशिंगटन  अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक भारतीय छात्र को गिरफ्तार किया गया है। बदर सूरी नाम के इस छात्र पर DHS (यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी) ने आरोप लगाया है कि उसका फिलिस्तीनी गुट हमास से संबंध हैं। उस पर सोशल मीडिया पर हमास का प्रचार और यहूदी विरोधी बातें फैलाने का भी इल्जाम है। अमेरिका गाजा को नियंत्रित करने वाले हमास को आतंकी गुट मानता है। बदर के वकील ने  बताया कि ट्रंप प्रशासन उसे अमेरिकी विदेश नीति के लिए खतरा बताकर भारत डिपोर्ट करने की योजना बना रहा है। फिलहाल उसका केस लुइसियाना के अलेक्जेंड्रिया की इमिग्रेशन कोर्ट में है। वाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने बताया है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि सूरी के काम उसके निर्वासन के लिए काफी हैं। बयान में कहा गया है कि सूरी एक छात्र वीजा पर अमेरिका में रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसने एक अमेरिकी लड़की से शादी की हुई है। बदर को सोमवार रात वर्जीनिया के रॉसलिन में उसके घर के बाहर से पुलिस ने गिरफ्तार किया। फिलहाल कोर्ट में है केस बदर सूरी वॉशिंगटन डीसी के जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फॉरेन सर्विस में अलवलीद बिन तलाल सेंटर फॉर मुस्लिम-क्रिश्चियन अंडरस्टैंडिंग में फेलो हैं। DHS ने फॉक्स न्यूज को बताया कि सूरी पर हमास से संबंध रखने का आरोप है। हालांकि DHS ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया है। इस पर सूरी के वकील ने भी सवाल किए हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी की भारतीय पीएचडी छात्रा रंजनी श्रीनिवासन को भी हाल ही में अमेरिका छोड़ना पड़ा है। उन्होंने भी फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन किया था। इसके चलते उनका वीजा 5 मार्च को रद्द कर दिया गया था। उन पर भी आतंकवाद का समर्थन करने और हमास से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया। इससे रंजनी श्रीनिवासन को सेल्फ डिपोर्टेशन के लिए मजबूर होना पड़ा। ट्रंप प्रशासन ने चला रखा है अभियान अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने फिलहाल कोलंबिया यूनिवर्सिटी को मिलने वाली करीब 400 मिलियन डॉलर की सरकारी मदद रोकी है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अगर कोई छात्र हिंसा और आतंकवाद का समर्थन करता है, तो उसे अमेरिका में रहने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। इस पर ट्रंप प्रशासन सख्त दिख रहा है।

यूपी में 20 और आईपीएस अफसरों का हुआ तबादला, बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

लखनऊ यूपी में इन दिनों आईपीएस अधिकारियों के तबादलों का दौर जारी है। गुरुवार की सुबह सात आईपीएस अधिकारियों के तबादले हुए। इसके पहले बुधवार को 20 आईपीएस अधिकारियों को नई तैनाती मिली थी। गुरुवार की सुबह हुए इन तबादलों में  उपेंद्र कुमार अग्रवाल को पुलिस महानिरीक्षक सुरक्षा लखनऊ बनाया गया है। पहले वह पुलिस महानिरीक्षक आर्थिक अपराध में थे। इसी तरह आईपीएस विनोद कुमार सिंह को अपर पुलिस आयुक्त अपराध कानपुर नगर बनाया है पहले वह पुलिस महानिरीक्षक सुरक्षा लखनऊ के पद पर आसीन थे। आईपीएस अमित वर्मा को संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध लखनऊ बनाया गया है इसके पहले वह संयुक्त पुलिस आयुक्त लखनऊ के पद पर कार्यरत थे। आईपीएस बबलू कुमार को संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था पुलिस कमिश्नरेट बनाया गया इसके पहले वह संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय पुलिस कमिश्नरेट थे। आईपीएस प्रदीप कुमार को पुलिस अधीक्षक आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन वाराणसी बनाया गया इसके पहले वह पुलिस अधीक्षक एएनटीएफ मुख्यालय पर तैनात थे। इसी तरह आईपीएस एसम कासिम को पुलिस उपायुक्त पुलिस कमिश्नरेट कानपुर नगर बनाया गया है इसके पहले वह पुलिस अधीक्षक सतर्कता अधिष्ठान उत्तर प्रदेश लखनऊ में कार्यरत थे। आईपीएस मनोज कुमार अवस्थी को पुलिस अधीक्षक कानून एवं व्यवस्था पुलिस महानिदेशक लखनऊ बनाया गया है। इसके पहले वह पुलिस अधीक्षक/अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण शाहजहांपुर थे। 

मेरठ जेल में करवटें बदलती रही मुस्कान, खाना नहीं खाया, बोली- मुझे अपने किए पर पछतावा

मेरठ मेरठ में पति सौरभ का कत्ल कर मुस्कान अपने प्रेमी साहिल के साथ हिमाचल, मनाली और शिमला में अय्याशी करने के लिए चली गई। वहीं, मासूम बेटी अपने पिता से बात करने के लिए बार-बार सौरभ और मुस्कान के मोबाइल पर कॉल करती रही। वह अपनी मां से हर बार एक ही बात कहती कि मां, जरा पापा से मेरी बात करा दो। लेकिन मुस्कान ने कभी सौरभ के व्यस्त होने और कभी सो जाने की बात कहकर हर बार उसे टाल दिया। मासूम को अब भी नहीं मालूम कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है। 18 मार्च को सुबह मासूम ने बार-बार अपने पापा से बात कराने की जिद की तो मुस्कान टूट गई। पहले परिजनों को बताया कि सौरभ को उसके ही परिवार ने मार दिया है और ड्रम में बंद कर दिया है। इस दौरान उसे अगवा कर बंधक बनाकर रखा और अब छोड़ा है। हालांकि जब मुस्कान के पिता प्रमोद रस्तोगी ने ज्यादा खोजबीन की तो मुस्कान ने साहिल के साथ मिलकर सौरभ की हत्या का खुलासा किया। मासूम को नहीं पता, पिता का साया सिर से उठ गया सौरभ और मुस्कान की बेटी अपने नाना प्रमोद रस्तोगी के पास है। मासूम बच्ची को नहीं पता कि मां ने ही पिता की हत्या कर दी और सिर से पिता का साया उठ चुका है। फिलहाल बच्ची को प्रमोद रस्तोगी ने अपने पास रखने की ही बात कही है। सीमेंट तोड़ निकाली लाश,दो घंटे चला पोस्टमार्टम सौरभ की लाश को जिस ड्रम में डालकर सीमेंट का घोल भरा गया था, उसे पुलिस ने मंगलवार रात को मोर्चरी भिजवाया। इसके बाद करीब डेढ़ घंटे मशक्कत करने के बाद इस ड्रम को काटकर और सीमेंट को तोड़कर लाश के टुकड़े बाहर निकाले गए। ड्रम में सौरभ का सिर और दोनों हाथ कटे हुए अलग मिले थे, जबकी बाकी शरीर अलग था। इसके बाद शव को मोर्चरी में रखवाया गया। बुधवार को करीब 2 घंटे पोस्टमार्टम चला। पोस्टमार्टम के अनुसार सौरभ की मौत दिल में चाकू लगने से हुई है। सीने पर चाकू के कुल मिलाकर पांच वार मिले हैं। पोस्टमार्टम हाउस के चिकित्सक और स्टाफ का कहना है कि उन्होंने अपनी नौकरी में सीमेंट के ड्रम में जमे शव का पहली बार पोस्टमार्टम किया है। खुलासा किया गया है कि किसी धारदार हथियार से सीने पर वार किए गए। इसके बाद उस्तरे से गर्दन काटने का प्रयास किया गया था, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद किसी बड़े चाकू या आरी से गर्दन काटी गई। इतना ही नहीं, दोनों हाथ भी काटकर अलग किए गए थे। पोस्टमार्टम में किसी नशीली दवा के इस्तेमाल की फिलहाल पुष्टि नहीं हुई है। डॉक्टर ने जांच के लिए बिसरा सुरक्षित रखा है। सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के कुछ बिंदुओं पर बातचीत करते हुए बताया कि शव पूरी तरह डी- कंपोज्ड हो गई थी। त्वचा पूरी तरह से हट गई थी। शरीर पर पपड़ी जमी थी। पोस्टमार्टम करने में चिकित्सक, पुलिस और स्टाफ को दो घंटे से ज्यादा का समय लगा।

बीकानेर के वल्लभ गार्डन इलाके में एक ही परिवार के तीन लोगों के शव मिले

बीकानेर राजस्थान के बीकानेर जिले से एक बुरी खबर सामने आई है। बीकानेर के वल्लभ गार्डन इलाके में एक ही परिवार के तीन लोगों के शव मिले हैं। परिवार में तीन ही सदस्य रहते थे। पड़ोसियों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से घर में कोई आवाजाही नजर नहीं आई थी। बुधवार देर रात को जब कॉलोनी में दुर्गंध फैली तो स्थानीय लोगों ने अनहोनी की आशंका जताते हुए पुलिस को सूचना दी। परिवार के रिश्तेदारों को भी कॉल करके बुलाया गया। रिश्तेदार और पुलिस मौके पर पहुंचे। घर में घुसकर देखा तो पति, पत्नी और जवान बेटी के शव पड़े हुए मिले। घटना की गंभीरता को देखते हुए बीकानेर एसपी कावेंद्र सागर भी मौके पर पहुंचे। दुर्गंध आने पर पड़ोसियों ने दी सूचना बिजली और पानी की फिटिंग का कार्य करने वाले 50 वर्षीय नितिन खत्री के परिवार में यह घटनाक्रम हुआ है। वल्लभ गार्डन में चिराग होटल के सामने वाली गली में नितिन अपनी पत्नी रजनी और 18 वर्षीय बेटी जेसिका के साथ रहते थे। वे बिजली और पानी फिटिंग के काम में आने वाले उपकरणों की दुकान के मालिक भी थे। उनकी पत्नी रजनी भी नितिन के साथ दुकान संभालती थी और बेटी जेसिका फिलहाल पढ़ाई कर रही थी। पिछले करीब 8-10 दिन से घर में कोई आवाजाही नहीं हुई। जब कॉलोनी में दुर्गंध फैली तो लोगों को अनहोनी की आशंका हुई। जिसके बाद यह पूरा घटनाक्रम सामने आया। एक शव फंदे से लटका हुआ मिला, दो फर्श पर पड़े थे बीकानेर एसपी कावेंद्र सागर ने बताया कि सूचना मिलने पर व्यास कॉलोनी थाना पुलिस की टीम वल्लभ गार्डन स्थित नितिन खत्री के घर पहुंची। पुलिस टीम ने जब घर में प्रवेश किया नितिन खत्री का शव एक कमरे की छत पर लगे हुक में फंदे से लटका हुआ मिला। 45 वर्षीय रजनी और 18 वर्षीय जेसिका के शव फर्श पर पड़े मिले थे। तीनों शवों को पीबीएम अस्पताल के मुर्दाघर में रखवाया गया है। पोस्टमार्टम के बाद परिवार के नजदीकी सदस्यों के सुपुर्द किए जाएंगे। पुलिस का मानना है कि करीब 7-8 दिन पहले ही तीनों की मौत हो चुकी थी। शव सड़ने के कारण आसपास के घरों तक दुर्गंध फैल गई थी। सामूहिक सुसाइड या हत्या के बाद आत्महत्या एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत कैसे हुई। इसकी जांच की जा रही है। एसपी सागर बताते हैं कि तीनों ने सामूहिक सुसाइड किया है या नितिन द्वारा पत्नी और बेटी की हत्या करने के बाद खुद फंदे पर झुला। इसका पता लगाया जा रहा है। एसपी का कहना है कि घर में तलाशी ली गई लेकिन कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नितिन की दुकान अच्छी चल रही थी। ऐसे में परिवार में कोई आर्थिक तंगी नहीं थी। इसके बावजूद भी ये घटनाक्रम क्यों हुआ, इसे लेकर लोग अचंभित हैं।  

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