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प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को ईकेवायसी कराने पर ही मिलेगा योजनाओं का लाभ

भोपाल प्रदेश में ईकेवायसी कराने पर ही बिजली उपभोक्ताओं को शासकीय योजनाओं का लाभ मिलेगा।इसके लिए बिजली कंपनी द्वारा सतत प्रक्रिया के तहत ईकेवायसी करवाई जा रही है।जिसके तहत मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के राजधानी सहित 16 जिलों में कुल छह लाख 82 हजार 742 उपभोक्ताओं ने ईकेवायसी करवा ली है।   भोपाल में एक लाख से अधिक दर्ज हुईं ईकेवायसी राजधानी में एक लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने ईकेवायसी करवा ली है। इनमें ग्रामीण क्षेत्र में 38 हजार 800 और शहरी क्षेत्र में 63 हजार 781 उपभोक्ता शामिल हैं। जबकि नर्मदापुरम ग्रामीण में 72 हजार, बैतूल ग्रामीण में 91 हजार 434, राजगढ़ ग्रामीण में 53 हजार 236, गुना ग्रामीण में 32 हजार 389, विदिशा ग्रामीण में 50 हजार 725, सीहोर ग्रामीण में 24 हजार 254, ग्वालियर ग्रामीण में 21 हजार 115, शहर वृत्त ग्वालियर में 47 हजार 300 अशोकनगर ग्रामीण में 26 हजार 384, दतिया ग्रामीण में 25 हजार 390, रायसेन ग्रामीण में 44 हजार 105, शिवपुरी ग्रामीण में 26 हजार 048, हरदा ग्रामीण में 20 हजार 993 श्योपुर ग्रामीण में 09 हजार 695, मुरैना ग्रामीण में 24 हजार 119 और भिंड ग्रामीण में 10 हजार 973 बिजली उपभोक्ताओं की ईकेवायसी की गई है। नो योर कंज्यूमर (केवायसी) बिजली कंपनी द्वारा 16 जिलों के बिजली उपभोक्ताओं के बिजली संबंधी व्यक्तिगत विवरण को कंपनी के रिकार्ड में अपडेट करने के लिए नो योर कंज्यूमर (केवायसी) प्रक्रिया शुरू की है। कंपनी द्वारा इस प्रक्रिया के तहत बिजली उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी जैसे समग्र आइडी, मोबाइल नंबर, बैंक खाता आदि की जानकारी को अपडेट किया जा रहा है। बिजली उपभोक्ताओं को जहां राज्य शासन की योजनाओं का लाभ सीधे लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकेगा वहीं दूसरी ओर प्रणाली में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।  

आईपीएल 2025: इस टीम के सामने ‘कमजोर’ हो जाती है CSK, अब तक 20 बार चखना पड़ा है हार का स्वाद

नई दिल्ली आईपीएल 2025 की शुरुआत के साथ ही, हर टीम अपने फॉर्म को लेकर चिंतित है और अपनी तैयारी में जुटी हुई है। इस बीच चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण आंकड़े ने सभी को चौंका दिया है। आईपीएल इतिहास की सबसे सफल टीम मानी जाने वाली सीएसके के पास शानदार ट्रॉफी रिकॉर्ड है, लेकिन एक टीम के खिलाफ यह हमेशा संघर्ष करती है। आइये जानते हैं वो कौन सी टीम है जिसके सामने ‘कमजोर’ नजर आती है CSK और उस टीम के हाथों CSK को अब तक 20 बार हार का स्वाद चखना पड़ा है…. महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई सुपर किंग्स की टीम आईपीएल में कुल 15 सीजन खेल चुकी है, और लगभग हर टीम के खिलाफ उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। हालांकि, मुंबई इंडियंस के खिलाफ सीएसके को 20 बार हार का सामना करना पड़ा है, जबकि मुंबई ने सिर्फ 17 मैचों में ही सीएसके को हराया है। मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच अब तक 37 मैच खेले गए हैं, जिसमें मुंबई को 20 मैचों में जीत मिली है। यह आंकड़ा सीएसके के लिए सबसे खराब है, क्योंकि उनके पास आईपीएल के अधिकांश टीमों के खिलाफ बेहतरीन रिकॉर्ड है। अन्य टीमों के खिलाफ सीएसके का रिकॉर्ड मुंबई इंडियंस के अलावा, कुछ अन्य टीमें भी हैं जिनके खिलाफ सीएसके को संघर्ष करना पड़ा है। लखनऊ सुपरजायंट्स के खिलाफ भी चेन्नई का रिकॉर्ड खराब रहा है। दोनों टीमों के बीच 4 मैच खेले गए, जिनमें से सीएसके को सिर्फ एक मैच में ही जीत मिली है। इसके अलावा, गुजरात टाइटंस के खिलाफ भी सीएसके का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है। गुजरात के खिलाफ अब तक खेले गए 7 मैचों में से सीएसके ने 3 मैच जीते हैं, जबकि गुजरात को 4 मैचों में जीत मिली है। सीएसके के खिलाफ सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीम यदि मुंबई इंडियंस सीएसके के लिए ‘बड़ी चुनौती’ है, तो रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ चेन्नई का रिकॉर्ड शानदार रहा है। आरसीबी के खिलाफ सीएसके ने कुल 32 मैच खेले हैं, जिनमें से 21 मैचों में जीत हासिल की है, जबकि केवल 11 मैचों में आरसीबी ने उन्हें हराया है। इसके अलावा, केकेआर के खिलाफ भी सीएसके का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। इन दोनों टीमों के बीच कुल 29 मैच खेले गए हैं, जिसमें से 19 मैचों में सीएसके ने जीत दर्ज की है और 10 मैचों में हार का सामना करना पड़ा है।   आईपीएल 2025 के लिए सीएसके के फैंस को उम्मीदें अब जब आईपीएल 2025 का आगाज होने वाला है, सीएसके की टीम के लिए ये आंकड़े बहुत मायने रखते हैं। मुंबई इंडियंस के खिलाफ उनका संघर्ष एक बड़ा सवाल बन सकता है, लेकिन अन्य टीमों के खिलाफ उनकी रिकॉर्ड देखकर यह कहा जा सकता है कि चेन्नई सुपर किंग्स इस सीजन में काफी मजबूत नजर आ सकती है। धोनी की कप्तानी में टीम हमेशा कठिन परिस्थितियों में उभरकर सामने आई है और इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि सीएसके अपने पुराने रंग में लौटेगी। सीएसके का हेड-टू-हेड रिकॉर्ड सभी टीमों के खिलाफ यहां हम सीएसके का सभी टीमों के खिलाफ हेड-टू-हेड रिकॉर्ड देख सकते हैं: दिल्ली कैपिटल्स: 19 मैच में जीत – 11 मैच में हार मुंबई इंडियंस: 17 मैच में जीत – 20 मैच में हार कोलकाता नाइट राइडर्स: 19 मैच में जीत – 10 मैच में हार रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर: 21 मैच में जीत – 11 मैच में हार पंजाब किंग्स: 16 मैच में जीत – 14 मैच में हार गुजरात टाइटंस: 3 मैच में जीत – 4 मैच में हार लखनऊ सुपरजायंट्स: 1 मैच में जीत – 3 मैच में हार सनराइजर्स हैदराबाद: 15 मैच में जीत – 6 मैच में हार राजस्थान रॉयल्स: 16 मैच में जीत – 13 मैच में हार  

प्राइम लोकेशन की संपत्तियों पर बनी दुकानों को ग्वालियर नगर निगम 30 साल के लिए लीज पर देगा

 ग्वालियर  ग्वालियर शहर में प्राइम लोकेशन वाली शहर की पांच प्रमुख संपत्तियों में बनी 25 दुकानों को नगर निगम निजी हाथों में देने जा रहा है। इन संपत्तियों पर बनी दुकानों को निगम 30 साल के लिए लीज पर देगा। निगम अफसरों ने बताया कि इन संपत्तियों को लीज पर देकर करीब पांच करोड़ रुपए से अधिक के रेवेन्यू निगम के खाते में आने की उम्मीद है।  उपायुक्त राजस्व सुनील चौहान ने बताया कि नगर निगम स्वामित्व की इन दुकानों को लीज पर देने के लिए निगम की ओर से टेंडर डालने की अंतिम तिथि 24 मार्च 2025 निर्धारित की गई है। इसके लिए दुकान लेने इच्छुक व्यक्ति निगम की वेबसाइट अथवा नगर निगम मुयालय सिटी सेंटर स्थित राजस्व कक्ष क्रमांक 6 में प्राप्त कर सकते हैं। इन दुकानों को दिया जाएगा लीज पर -गजराराजा स्कूल के पास स्थित दुकानें प्रथम तल पर एक दुकान 13.78 वर्ग मीटर, द्वितीय तल पर 8 दुकानें 13.78 वर्ग मीटर से 17.94 वर्ग मीटर तक की है। -सागर ताल मछली मंडी मार्केट स्थित दुकानें भूतल पर 6 दुकान 9.29 वर्ग मीटर। -आवा महाराज की गली दाल बाजार स्थित मार्केट की दुकानें भूतल पर 8 दुकान 8.57 वर्ग मीटर से 10.8 वर्ग मीटर तक। -खुर्जेवाला मोहल्ला मार्ग स्थित दुकान भूतल पर एक दुकान 7.8 वर्ग मीटर। -नौगजा रोड विकलांग मार्केट स्थित दुकान भूतल पर एक दुकान 13.94 वर्ग मीटर है।

डीटीसी की उन सीएनजी एसी लो फ्लोर बसों में ये रेस्टोरेंट खोले जाएंगे, अब पुरानी बसों में खाने का लुत्फ

नई दिल्ली आपने कई जगहों पर ट्रेन और प्लेन थीम वाले रेस्टोरेंट देखे होंगे। अब दिल्ली में नई सरकार बनते ही दिल्ली की पुरानी बसों का इस्तेमाल करके रेस्टोरेंट बनाए जाने जा रहे हैं। इस अभियान को चलाने के पीछे दिल्ली सरकार का मुख्य उद्देश्य यमुना के किनारों को साफ रखना है। इसके साथ ही दिल्ली में यमुना किनारे जगह-जगह ‘बस रेस्टोरेंट’ खोले जाएंगे। इस महत्वपूर्ण योजना को मूर्त रूप देने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने काम भी शुरू कर दिया है। ‘एक पंथ दो काज’ डीडीए के उद्यान विभाग की यह योजना ‘एक पंथ दो काज’ से जुड़ी है। विभाग की ओर से जारी रिक्वेस्ट ऑफ इंफॉर्मेशन (आरएफआई) के मुताबिक, डीटीसी की उन सीएनजी एसी लो फ्लोर बसों में ये रेस्टोरेंट खोले जाएंगे, जो अपनी लाइफ पूरी कर चुकी हैं। मतलब एक तरफ ये रेस्टोरेंट अपने आप में आकर्षण का केंद्र होंगे तो दूसरी तरफ डीटीसी की पुरानी बसों का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहला रेस्टोरेंट कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास स्थित यमुना वाटिका में खोलने की तैयारी है। डीडीए इसके लिए एजेंसी फाइनल करने में जुटा है। बस के पावर सिस्टम में बदलाव किए जाएंगे शीर्ष अधिकारियों ने बताया कि बस के इंटीरियर को फिर से डिजाइन किया जाएगा, ताकि किचन के उपकरण, स्टोरेज और बैठने की जगह के लिए जगह बनाई जा सके। बस में कुछ संरचनात्मक बदलाव भी किए जाएंगे, जैसे फ्लोरिंग, दीवारें और छत, खिड़कियां और गेट बदले जाएंगे। बस के बाहरी लुक में भी बदलाव किए जाएंगे। बस के किचन में प्रोफेशनल किचन स्टोव, रेफ्रिजरेटर, स्टोरेज, सिंक, काउंटर टॉप शामिल होंगे। सभी बेहतर क्वालिटी के होंगे। बस के पावर सिस्टम में भी बदलाव किया जाएगा। टेंडर से पहले आरएफआई के जरिए हर पहलू पर चर्चा होगी डीडीए के मुताबिक टेंडर देने से पहले आरएफआई के जरिए यह भी जानने की कोशिश है कि डीटीसी की सीएनजी एसी लो फ्लोर बसों को किचन में बदलने की कितनी संभावनाएं हैं। इस काम में क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी, कितना खर्च आएगा, किस तरह के सामान की जरूरत होगी, कितने समय में एक बस को किचन में बदला जा सकता है और सीएनजी बसों में किचन शुरू करना किस हद तक सुरक्षित रहेगा? रेस्टोरेंट में टाटा मार्कोपोलो मॉडल का होगा इस्तेमाल डीडीए अधिकारियों के मुताबिक जिस बस को रेस्टोरेंट में बदलने की योजना बनाई जा रही है, वह टाटा मार्कोपोलो मॉडल की एसी सीएनजी लो फ्लोर बस है। यह 2010 का मॉडल है। बस में 36 पैसेंजर सीट, इंजन और सभी इंटीरियर हैं। इलेक्ट्रिक फिटिंग भी है। बस की लाइफ खत्म हो चुकी है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा- दिल्ली की जनता ने जो जिम्मेदारी हम सबको दी है, यह हम सबके लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी है

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा में सकारात्मक संवाद और विकास की प्रतिबद्धता देखने को मिली। पक्ष और विपक्ष, दोनों ने मिलकर दिल्ली की जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को स्वीकार किया और शहर के विकास को प्राथमिकता देने की बात कही। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की जनता ने जो जिम्मेदारी हम सबको दी है, दिल्ली की जनता का दिल जीतकर हम सब लोग इस सदन के अंदर पहुंचे हैं, यह हम सबके लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमें इस बात का एहसास है कि हमारा एक ही लक्ष्य है दिल्ली की प्रगति, दिल्ली का विकास, दिल्ली की समृद्धि। सीएम ने कहा कि हमारा पांच साल का पूरा सत्र इसी प्रकार से मुद्दों पर चर्चा करते हुए चले, ताकि दिल्ली के हित में काम हो सके। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इसमें हम सबका एक ही लक्ष्य है- दिल्ली के लिए काम करना।” दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि इस सदन में बैठना बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी को विजेंद्र गुप्ता ने याद दिलाया है। लाला लाजपत राय, मदन मोहन मालवीय, विठ्ठलभाई पटेल और पूर्व पीएम नेहरू सदन में बैठ चुके हैं। जब हमारे देश में महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला था, तो कई व‍िकस‍ित देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था। यह ताकत संविधान के कारण मिली, बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर ने वो ताकत दी। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी इस अवसर पर सदन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह भवन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी रहा है और आज यह लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने का मंच है। उन्होंने कहा, “दिल्ली को मिनी भारत कहा जाता है। हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम जनता की अपेक्षाओं को पूरा करें और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करें, ताकि देश में एक सकारात्मक संदेश जाए।” उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा की कार्रवाई केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करती है।

विपक्ष की हटाने की मांग, नागपुर हिंसा को लेकर निशाने पर आए फडणवीस के फायरब्रांड मंत्री

मुंबई नागपुर में भीषण हिंसा भड़क गई। शहर के इतिहास में 98 सालों के बाद ऐसा दंगा भड़का, जिसमें तीन डीसीपी लेवल के पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इसके अलावा कई नागरिक भी जख्मी हुए, जिनमें से एक आईसीयू में है। इस पूरे बवाल के बाद पुलिस ने 5 एफआईआर दर्ज की हैं और 50 लोगों को हिरासत में लिया है। इस बीच मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा में भी जमकर हंगामा हुआ। इसके अलावा सदन के बाहर भी विपक्षी दलों के विधायकों ने प्रदर्शन किया। इन लोगों की मांग है कि राज्य सरकार में मंत्री नितेश राणे को पद से हटाया जाए। नितेश राणे फायरब्रांड नेता हैं, जो लगातार बयान देते रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि उनके चलते ही शहर में सोमवार को हिंसा भड़की। शहर में उपद्रव के दौरान कल कम से कम 45 वाहनों में तोड़फोड़ की गई। सत्तापक्ष के विभिन्न नेताओं ने नागपुर की घटना की निंदा की है और कहा है कि हिंसा में शामिल लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इस बीच जिले के पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया और कहा कि अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट की निगरानी की जा रही है। फडणवीस सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने कहा, ‘नागपुर में हुई हिंसा के पीछे महा विकास अघाड़ी का हाथ है… विपक्ष के लोग यह दिखाने में लगे हैं कि वे ही मुसलमानों के साथ खड़े हैं, लेकिन उन्हें यह एहसास नहीं है कि मुसलमान ऐसा नहीं चाहते…।’ शिवसेना विधायक मनीषा कायंदे ने नागपुर हिंसा की निंदा की और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, ‘हम नागपुर हिंसा की निंदा करते हैं। अफवाह फैलाने वालों को सलाखों के पीछे डाला जाना चाहिए और उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। महाराष्ट्र में ऐसी चीज बर्दाश्त नहीं की जाएगी।’ नागपुर के राजघराने के सदस्य राजे मुधोजी भोसले ने कहा, ‘यह बहुत दुखद घटना है। नागपुर के इतिहास में ऐसी घटना कभी नहीं हुई। जिम्मेदार लोगों को दंडित किया जाना चाहिए और प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटना फिर कभी न हो।’ उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इसमें स्थानीय लोग शामिल थे। बाहरी लोगों के साथ कुछ असामाजिक तत्व भी इसमें शामिल रहे होंगे।

फिरोजाबाद के दिहुली हत्याकांड के 44 साल बाद कोर्ट ने तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई

दिहुली फिरोजाबाद के दिहुली हत्याकांड के 44 साल बाद फैसला आया। साल 1982 में डकैतों के गिरोह ने दलितों के गांव पर हमला बोल दिया था और अंधाधुंध गोलियां बरसाकर 24 लोगों की हत्या कर दी थी। जिसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं। दलित हत्याकांड मामले में अब कोर्ट ने 3 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। साथ ही 50-50 हजार का जुर्माना भी लगाया है। इससे पहले 11 मार्च को मैनपुरी कोर्ट में स्पेशल जज ने तीनों हत्यारोपियों को दोषी ठहराया था। अपर सत्र न्यायाधीश इंदिरा सिंह ने दोपहर साढ़े तीन बजे फांसी की सजा सुनाई। तीनों ही आरोपियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस हत्याकांड में 18 नवंबर 1981 को जसराना के ग्राम दिहुली में 24 लोगों की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। फैसला आने के बाद तीनों ही आरोपियों को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। त कोर्ट ने नरसंहार को बेहद जघन्य माना न्यायाधीश ने अपने आदेश में लिखा है कि हत्यारों को गर्दन में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जब तक कि इनकी मृत्यु न हो जाए। तीनों दोषियों की उम्र 75 से 80 साल है। इस हत्याकांड में कुल 20 हत्यारोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। जिसमें से 13 आरोपियों की मौत हो चुकी है और फरार चल रहे चार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कोर्ट ने स्थाई वारंट जारी कर रखे हैं। मामले की पैरवी एडीजीसी रोहित शुक्ला द्वारा की गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को आना पड़ा था दिहुली दिहुली में जब 44 साल पहले नरसंहार हुआ तब प्रदेश की सरकार हिल गई थी उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, ‌गृहमंत्री बीपी सिंह, मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी और विपक्षी नेता अटल बिहारी वाजपेई भी पीडितों का दर्द बांटने‌ देहुली पहुंचे थे। फिरोजाबाद जनपद क्षेत्र के थाना जसराना क्षेत्र का गांव दिहुली मे जव 18 नवंबर 1981 को संतोष सिंह उर्फ संतोषा और राधेश्याम उर्फ राधे के गिरोह के द्वारा दलित समाज के लोगों के ऊपर हमला कर सामूहिक नरसंहार के जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। उसे समय वह क्षेत्र मैनपुरी का हिस्सा हुआ करता था। चश्मदीदों ने बताया हत्याकांड मामले में मुख्य चश्मदीद गवाह बनवारी लाल ने बताया किउनके पिता ज्वाला प्रसाद की सबसे पहले खेत मे‌‌ आलू की खुदाई करते समय गोलियों से भून कर हत्या की गई थी। उसके साथ उनके बड़े भाई मनीष कुमार और भूरे सिंह और चचेरे भाई मुकेश की हत्या हुई थी। वह काफी दबाव के बाद भी अंतिम समय तक अपनी गवाही पर कायम रहे। ‌उन्हें इस बात का संतोष है कि देर से सही लेकिन उन्हें इंसाफ मिला है। आरोपियों को फांसी मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अधिकांश पीड़ित परिवार गांव से पलायन कर गए हैं केवल तीन परिवार ही गांव में रह रहे हैं। 90 वर्ष की जय देवी का कहना है कि अपने परिवार के लोगों के खोने का दर्द अभी भी नहीं भूल पाए हैं, न्याय मिलने में बहुत देरी हुई है। उन्होंने हमलावरो से छिपकर अपनी जान बचाई थी। दिहुली निवासी लायक सिंह ने सामूहिक नरसंहार की रिपोर्ट राधेश्याम उर्फ राधे संतोष सिंह उर्फ संतोषा समेत 17 लोगों के खिलाफ‌ दर्ज कराई गई थी। ‌दलित समाज के महिला पुरुष तथा बच्चो‌ं का शाम के समय पुलिस की वर्दी में पहुंचे डकैत के गिरोह के लोग जो हथियारों से लैस थे उनके द्वारा सामूहिक सत्याकांड को अंजाम दिया गया था। सामूहिक दलित समाज के हत्याकांड के पीछे बदमाशों के गिरोह की मुखबिरी और गवाही का मामला मुख्य रूप से सामने आया था। जिसको लेकर नाराज बदमाशों ने बदले की भावना से गांव में पहुंचकर हमला किया था। मामले की सुनवाई मैनपुरी जिला न्यायालय में चल रही थी जो बाद में हाई कोर्ट के निर्देश पर इलाहाबाद के सेशन कोर्ट में अक्टूबर 2024 तक ट्रायल चला था। जिला जज के आदेश पर अक्टूबर 2024 में संबंधित मामले को मैनपुरी की विशेष डकैती कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था।

सीएम योगी की फ्लीट के सामने आया सांड़, दो कर्मचारी निलंबित, 14 की सेवा समाप्त

वाराणसी वाराणसी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के दौरान फ्लीट के सामने सांड़ आने की घटना को गंभीरता से लिया है। पशु चिकित्सा एवं कल्याण विभाग के दो बेलदारों को निलंबित कर दिया गया है। आउटसोर्स पर तैनात 14 कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई। प्रशासन के सख्त रुख से खलबली मच गई है। सीएम योगी होली के ठीक पहले 12 मार्च को वाराणसी आए थे। इस दौरान विकास कार्यों का निरीक्षण करने के साथ ही समीक्षा बैठक की थी। काल भैरव और काशी विश्वनाथ मंदिर जाते समय कबीरचौरा में उनकी फ्लीट के सामने सांड़ आ गया था। तमाम सतर्कता और तैयारियों के बाद भी मुख्यमंत्री की फ्लीट के सामने सांड आने को बेहद गंभीर माना गया है। नगर आयुक्त अक्षत वर्मा ने बेलदार अमृतलाल और संजय प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। विभाग के प्रभारी अधिकारी डॉ. संतोष पाल को जांच अधिकारी नामित किया गया है। ये दोनों पशु चिकित्सा विभाग से सम्बद्ध किये गये हैं। इसी तरह आउटसोर्स के कर्मचारियों रजत, राकेश, रामबाबू, आशीष, अंकित, लालधारी, श्याम सुंदर, दीपक शर्मा, निशांत मौर्या, शुभम, राजेश कुमार, गंगाराम, अरविंद यादव, राघवेंद्र चौरसिया की सेवा समाप्त कर दी गई है। नगर आयुक्त ने आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती करने वाली कंपनी वॉरियर्स सिक्योरिटी ऐंड सर्विसेज के प्रबंधन को भी अंतिम चेतावनी दी है। इसमें कहा गया है कि अगली बार यदि उनके कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठे तो कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। साथ ही सभी 14 कर्मचारियों को नगर निगम के किसी अन्य विभाग में भी भविष्य में भर्ती के लिए न भेजने का निर्देश दिया गया है। छुट्टा पशुओं को लेकर लगातार राज्य के विपक्षी दल खासकर समाजवादी पार्टी योगी सरकार पर निशाना साधती रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव छुट्टा पशुओं से आम लोगों और किसानों को हो रहे नुकसान का मामला उठाते रहे हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने छुट्टा पशुओं के लिए गौशालाओं का निर्माण कराया है। अधिकारियों को भी छुट्टा पशुओं को लेकर खास हिदायते दी गई हैं। इसके बाद भी सीएम योगी की मौजूदगी में सांड़ का सड़क पर दिखना अधिकारियों पर सवाल खड़े कर गया।

मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा- नींव मजबूत होगी तो आने वाला भविष्य मजबूत होगा

भोपाल महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया मंगलवार को ‘पोषण भी-पढ़ाई भी’ पर एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि हमारी नींव मजबूत होगी तो आने वाला भविष्य मजबूत होगा। सक्षम आंगनवाड़ी मिशन 2.0 के तहत पोषण भी पढ़ाई भी कार्यक्रम केन्द्र सरकार का एक महत्वाकांक्षी प्रशिक्षण कार्यक्रम है। ये प्रशिक्षण राष्ट्रीय प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा तथा पोषण सेवा प्रदान करने की क्षमता विकसित करने के लिये एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि वर्ष 2023 में प्रारंभ की इस पहल का उद्देश्य बच्चों की देखभाल और शिक्षा पर आंगनवाड़ी प्रणाली पर ध्यान केन्द्रित किया जा सके और आंगनवाड़ी केन्द्र को उच्च गुणवत्ता वाली बुनियादी सुविधाओं, खेल के उपकरण और विधिवत प्रशिक्षित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ एक शिक्षण केन्द्र परिवर्तित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे 6 वर्ष के कम उम्र के बच्चों (विशेषकर दिव्यांग बच्चों) के रचनात्मक, सामाजिक, भावनात्मक और संज्ञानात्मक विकास को प्रोत्साहित किया जा सके। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नींव का पत्थर प्रमुख सचिव महिला बाल विकास श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने कहा कि आंगनवाड़ी एक आधारशिला है और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नींव का पत्थर है। उन्होंने कहा कि नींव के पत्थर किसी को नहीं दिखता लेकिन अगर वो मजबूत हो तो इमारत बुलंद होती है। बच्चों को खाना खिलाना, उनकी देखभाल करना अति आवश्यक है। आँगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और भौतिक संबल को बढ़ावा दे रही है। श्रीमती रश्मि शमी ने कहा कि यह 2 चरणों में होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम से आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका सशक्त बनेगी। उन्होंने कहा कि इसकी मॉनिटरिंग बेहतर तरीके से हो, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है। आँगनवाड़ी में होने वाली पढ़ाई के एसेसमेंट किये जाने पर भी ध्यान देना होगा। आयुक्त महिला बाल विकास श्रीमती सूफिया फारूकी वली ने बताया कि ‘पोषण भी-पढ़ाई भी’ के तहत आधारशिला और नवचेतना को आंगनवाड़ी केन्द्रों में क्रियान्वित करने के संबंध में कार्यकताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के द्वारा क्षमता संवर्द्धन के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं में पाठ्यक्रम और शैक्षणिक दृष्टिकोण की बुनियादी समझ विकसित एवं सक्षम बनाना है। भोपाल के होटल रेडिसन में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला में सभी संभागों के अधिकारी, सीडीपीओ, डीपीओ सहित अजीज प्रेमजी फाउन्डेशन और रॉकेट लर्निंग संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

ममता बनर्जी और लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहते हुए औसतन हर दिन एक या दो रेल दुर्घटनाएं होती थीं: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली रेल दुर्घटनाओं की हालिया घटनाओं के बाद विपक्ष की तरफ से किए गए हमलों के बीच राज्यसभा में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी और लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहते हुए औसतन हर दिन एक या दो रेल दुर्घटनाएं होती थीं जबकि अब सरकार की नीतियों के कारण यह संख्या कम होकर प्रति वर्ष केवल 30 दुर्घटनाओं तक रह गई है। पिछले कार्यकालों में कितनी दुर्घटनाएं हुईं? वैष्णव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे (2005-06) तो उस समय कुल 698 दुर्घटनाएं और पटरी से उतरने की घटनाएं हुई थीं। वहीं ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते हुए 395 दुर्घटनाएं और पटरी से उतरने की घटनाएं हुईं। कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे के रेल मंत्री बनने पर यह संख्या 38 तक सीमित हो गई थी। उन्होंने कहा, “पहले औसतन प्रतिदिन एक दुर्घटना होती थी लेकिन अब यह संख्या घटकर प्रति वर्ष सिर्फ 30 हो गई है। यदि हम 43 रेल दुर्घटनाओं को भी शामिल करें तो कुल दुर्घटनाएं 73 होती हैं यानी पहले जो आंकड़ा करीब 700 था वह अब 80 से भी कम हो गया है जोकि 90% की कमी को दर्शाता है।”   रेलवे क्षेत्र में सुधार की ओर कदम रेल मंत्री ने कहा कि बिहार के सारण जिले में स्थित मढ़ौरा फैक्ट्री से जल्द ही करीब 100 इंजन निर्यात किए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि यह फैक्ट्री पहले निष्क्रिय थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद इसे चालू किया गया। अब ‘मेड इन बिहार’ इंजन दुनिया भर के गंतव्यों तक पहुंचेंगे। रेलवे का वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य की योजना वैष्णव ने बताया कि भारतीय रेलवे ने कोविड महामारी के दौरान अपनी कार्यकुशलता को साबित किया है और अब यात्री और माल ढुलाई दोनों में वृद्धि देखी जा रही है। रेलवे की वित्तीय स्थिति अच्छी है और इसे लगातार सुधारने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि “अच्छे प्रदर्शन के कारण रेलवे अपने खर्चों को अपनी आय से पूरा कर रहा है।” उन्होंने यह भी बताया कि एक किलोमीटर यात्रा की लागत लगभग 1.4 रुपये है लेकिन यात्रियों से सिर्फ 73 पैसे लिए जाते हैं। इस साल भारतीय रेलवे ने 1,400 इंजनों का उत्पादन किया है जो अमेरिका और यूरोप के संयुक्त उत्पादन से अधिक है। नॉन-एसी कोच की संख्या बढ़ाने की योजना रेल मंत्री ने जनरल और नॉन-एसी कोच की संख्या घटाने के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जनरल कोचों की संख्या एसी कोचों की तुलना में 2.5 गुना बढ़ाई जा रही है। साथ ही मौजूदा उत्पादन योजना के तहत 17,000 नॉन-एसी कोचों का निर्माण किया जाएगा। वहीं अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में अपने बयान में रेलवे की सुधरी हुई स्थिति, दुर्घटनाओं में कमी और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे की वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है और इसे आगे और बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।  

प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को गर्भवती महिलाओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाए: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मध्यप्रदेश को स्वास्थ्य क्षेत्र में देश के शीर्ष राज्यों में लाने के लिए समर्पित प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश द्वारा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिये होटल पलाश भोपाल में दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान कर फॉलोअप करें सुनिश्चित उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिये कि गर्भवती महिलाओं में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान कर उन्हें समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा दी जाए और उनका फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए। इससे माताओं एवं नवजात शिशुओं को सुरक्षित रखा जा सकेगा। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि गर्भस्थ भ्रूण का लिंग परीक्षण एक दंडनीय अपराध है और इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। टीम-वर्क, समर्पित प्रयास से स्वास्थ्य मानकों में मध्यप्रदेश बनेगा अग्रणी उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि टीम वर्क, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी और एकजुट प्रयासों से मध्यप्रदेश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में शीर्ष स्थान पर पहुंचाने का लक्ष्य शीघ्र पूरा होगा। मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि दो दिवसीय कार्यशाला में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पीसीपीएनडीटी अधिनियम, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी प्रबंधन एवं स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार को लेकर गहन मंथन किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर और विधिवत प्रदाय, समयबद्ध चिन्हाकन, नियमित जाँच और फॉलोअप सेवा से मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में सुधार के सशक्त प्रयास किये जायेंगे।कार्यशाला में प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, पीसीपीएनडीटी नोडल अधिकारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, डीपीएम, विभागीय अधिकारी और सलाहकारों ने भाग लिया।  

अब दुबई या जॉर्जिया की यात्रा गोवा, मनाली या मुंबई जाने से सस्ती पड़ रही है, टूरिज्म इंडस्ट्री चौंकाने वाला दावा

गोवा सोचिए, आप किसी वीकेंड पर रिलैक्स करने का प्लान बना रहे है और आपके सामने दो ऑप्शन हैं – गोवा या दुबई। अब ज़रा चौंकने के लिए तैयार हो जाइए, क्योंकि दुबई की ट्रिप अब गोवा से सस्ती पड़ रही है! यह कोई मज़ाक नहीं, बल्कि एंजेल इन्वेस्टर उज्जवल सुतारिया का कहना है कि भारत में ट्रैवल अब इतना महंगा हो गया है कि लोग विदेश घूमने को बेहतर विकल्प मान रहे हैं। क्या भारत अपने ही टूरिज्म बूम को खत्म कर रहा है? आइए जानते हैं कि रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट्स के महंगे टैरिफ तक, कैसे भारत का ट्रैवल सेक्टर आम लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है।   एंजेल इन्वेस्टर उज्जवल सुतारिया ने एक अहम सवाल उठाया है – “क्या भारत अपने ही पर्यटन उद्योग को महंगा बनाकर खुद को बाहर कर रहा है?” उनका कहना है कि अब दुबई या जॉर्जिया की यात्रा गोवा, मनाली या मुंबई जाने से सस्ती पड़ रही है। जो कभी एक आम आदमी के लिए किफायती यात्रा विकल्प (affordable travel options) था, वह अब सिर्फ उन लोगों के लिए रह गया है जो ऊंची कीमत चुकाने को तैयार हैं। लेकिन इसकी वजह सिर्फ ₹400 वाली एयरपोर्ट चाय या महंगे होटल किराए नहीं हैं।   रियल एस्टेट की मार से महंगा हुआ टूरिज्म सुतारिया के अनुसार, बढ़ती रियल एस्टेट कीमतें भारत के पर्यटन सेक्टर को प्रभावित कर रही हैं। पिछले एक दशक में संपत्ति की कीमतें आसमान छू गई हैं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट्स को अपना निवेश निकालने के लिए दरें बढ़ानी पड़ रही हैं। सुतारिया ने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी दिए हैं जैसे कि: – पर्यटन केंद्रों में प्रॉपर्टी की कीमतें गैर-पर्यटक इलाकों से 150% ज्यादा हो गई हैं। -अयोध्या में जमीन के दाम कुछ ही सालों में 10 गुना बढ़ चुके हैं। – बेंगलुरु और हैदराबाद में 2019 से अब तक 90% वृद्धि हुई है। -भारत का रियल एस्टेट मार्केट 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, सुतारिया इसे सिर्फ संकट नहीं मानते, बल्कि स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए नए अवसर भी देखते हैं। उनका मानना है कि सस्ते ठहरने के विकल्प, ऑफबीट डेस्टिनेशन और बेहतर ट्रांसपोर्ट सुविधाएं इस स्थिति को बदल सकती हैं। उन्होंने आखिर में एक सवाल करते हुए लिखा- “क्या यह बदलाव भारतीय पर्यटन को बेहतर बनाएगा या इसे और महंगा कर देगा?”  

अपने विभागों से संबंधित विकास कार्यों के लिए 100 दिनों की योजना बनाई: मंत्री प्रवेश वर्मा

नई दिल्ली दिल्ली के पीडब्ल्यूडी और जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधायकों के साथ बैठक कर अपने विभागों से संबंधित विकास कार्यों के लिए 100 दिनों की योजना बनाई। दिल्ली की नई भाजपा सरकार के एजेंडे में सड़कों और नालों की मरम्मत, सीवर की सफाई और जल निकासी प्रबंधन, बाढ़ और जलभराव की समस्या, अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई और लंबित विकास परियोजनाओं में तेजी लाना शामिल है। वर्मा ने कहा, “सालों से दिल्ली में कोई काम नहीं हुआ क्योंकि कोई इरादा नहीं था। स्थिति अब इतनी खराब हो गई है कि हमें लोगों को राहत देने के लिए युद्धस्तर पर काम करने की जरूरत है। सड़कों की मरम्मत, सीवरों की सफाई और नालियों को साफ करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। हमारी प्राथमिकता विकास है और अगले 100 दिनों में दिल्ली के लोगों को बदलाव दिखेगा। हम अधिक से अधिक इलाकों की समस्याओं को दूर करने का हर संभव प्रयास करेंगे। भाजपा सरकार सिर्फ वादे नहीं करती, हम लोगों की सेवा के लिए काम करते हैं।” दिल्ली सचिवालय में आयोजित बैठक में शकूर बस्ती, त्रिलोकपुरी, पटपड़गंज, लक्ष्मी नगर, मुंडका, नांगलोई जाट, मोती नगर, मादीपुर (पश्चिम क्षेत्र), मंगलापुरी और किराड़ी के विधायक शामिल हुए। बैठक में पीडब्ल्यूडी, दिल्ली जल बोर्ड और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी मौजूद थे। प्रवेश वर्मा ने एचटी को बताया कि विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए विधायकों और संबंधित अधिकारियों के साथ आमने-सामने बैठक करने का फैसला लिया गया है। वर्मा ने कहा कि अब हर विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को सीधे अधिकारियों के सामने रख रहा है और संबंधित विभागों को समाधान के लिए तत्काल निर्देश दिए जा रहे हैं। भाजपा सरकार दिल्लीवासियों को राहत पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर काम करेगी। इस पहल का असर अगले 100 दिनों में जमीनी स्तर पर दिखाई देगा।

होली के बाद UP पुलिस में हुए तबादले, 32 IPS और 17 DSP को मिली नई जिम्मेदारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक बार फिर आईपीएस अफसरों के तबादलों का बड़ा कदम उठाया है। इस बार कुल 32 आईपीएस अफसरों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर तैनात किया गया है। इस फेरबदल में कई महत्वपूर्ण अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। महत्वपूर्ण तैनाती: – डॉ. प्रीतिंदर सिंह को डीआईजी पीएसी मध्य जोन बनाया गया है, वे पहले डीजीपी मुख्यालय से अटैच थे। – आलोक कुमार को संभल का सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) बनाया गया है। – अपर्णा कुमार को डीआईजी मानवाधिकार लखनऊ में तैनात किया गया है। – अशोक कुमार को एसपी क्षेत्रीय अभिसूचना गोरखपुर की जिम्मेदारी दी गई है। – एलवी एंटोनी देव कुमार को एडीजी रूल्स एंड मैनुअल लखनऊ का कार्यभार सौंपा गया है। – अतुल शर्मा को डीआईजी पीएसी कानपुर अनुभाग सौंपा गया है। – शैलेंद्र कुमार राय को एसपी लोक शिकायत डीजीपी मुख्यालय लखनऊ बनाया गया है। – देवेंद्र कुमार को अपर पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर की जिम्मेदारी दी गई है। – आयुष श्रीवास्तव को अपर पुलिस अधीक्षक जौनपुर बनाया गया है। – इसके अलावा आलोक कुमार को संभल का सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) बनाया गया है। अन्य महत्वपूर्ण तैनाती: – बजरंगबली को सेनानायक 37वीं वाहिनी पीएसी कानपुर, – कमलेश बहादुर को सेनानायक 25वीं वाहिनी पीएसी रायबरेली, – लाल भरत कुमार पाल को सेनानायक 49वीं वाहिनी पीएसी नोएडा, – दिनेश यादव को सेनानायक 41वीं वाहिनी PAC गाजियाबाद, – अजय प्रताप को सेनानायक 48वीं वाहिनी PAC सोनभद्र, – अनिल कुमार यादव को डीसीपी वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट, – रोहित मिश्रा को एसपी डीजीपी मुख्यालय लखनऊ PAC बाराबंकी, – नेपाल सिंह को सेनानायक 39वीं वाहिनी PAC मिर्जापुर, -शिवराम यादव को एसपी पीटीएस मेरठ, – दीपेंद्र नाथ चौधरी को डीसीपी कानपुर पुलिस कमिश्नरेट बनाया गया है। प्रमोशन के बाद DIG बने 12 अफसरों को मिली तैनाती: प्रमोशन के बाद 12 आईपीएस अफसरों को डीआईजी की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें से कुछ प्रमुख तैनाती इस प्रकार हैं: – हेमंत कुटियाल को डीआईजी एसएसएफ लखनऊ, – स्वप्निल ममगाई को डीआईजी पीएसी मेरठ – शालिनी को डीआईजी पीएसी मुरादाबाद, – अरुण कुमार श्रीवास्तव को डीआईजी पीएसी अयोध्या अनुभाग, – डी प्रदीप कुमार को पुलिस महानिरीक्षक/अतिरिक्त सचिव पुलिस भर्ती बोर्ड लखनऊ, – कमला प्रसाद यादव को डीआईजी एंटी करप्शन लखनऊ, – सूर्यकांत त्रिपाठी को डीआईजी फायर सर्विस मुख्यालय लखनऊ, – विकास कुमार वैद्य को डीआईजी स्थापना डीजीपी मुख्यालय लखनऊ, – तेज़ स्वरूप सिंह को डीआईजी कार्मिक डीजीपी मुख्यालय लखनऊ, – सुनीता सिंह को डीआईजी पीएसी मुख्यालय लखनऊ, – राजेश कुमार सक्सेना को डीआईजी पीटीएस सुल्तानपुर, – हृदयेश कुमार को डीआईजी ईओडब्ल्यू मुख्यालय लखनऊ बनाया गया है।  

BJP ने बताया मुस्लिमों को फायदा पहुंचाने वाला- बंगाल में OBC आरक्षण पर बवाल, SC पहुंची ममता सरकार

कोलकाता पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण को लेकर एक बार फिर से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग नए सिरे से जातिगत पिछड़ेपन की समीक्षा कर रहा है और यह प्रक्रिया तीन महीने में पूरी हो जाएगी। मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राज्य सरकार की दलील सुनते हुए मामले को जुलाई तक के लिए टाल दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए कोर्ट से अनुरोध किया कि इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई तीन महीने बाद की जाए, जिसके बाद पीठ ने उनकी बात मान ली। वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तरफ से ममता सरकार की इस पहल को मुस्लिमों को फायदा पहुंचाने वाला करार दिया है। हाई कोर्ट ने रद्द की थी कई जातियों की ओबीसी सूची यह मामला उस समय गरमाया जब 22 मई 2024 को कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 2010 से अब तक कई जातियों को दी गई ओबीसी आरक्षण की सूची को अवैध करार दे दिया। कोर्ट ने पाया कि इन जातियों को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने का आधार केवल धर्म था, जो संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि 77 मुस्लिम जातियों को ओबीसी सूची में शामिल करना पूरे मुस्लिम समाज का अपमान है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया था कि जिन लोगों को पहले ही आरक्षण का लाभ मिल चुका है या जो सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं, उनकी नौकरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बीजेपी ने लगाया ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ का आरोप वहीं पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा सियासी तूल पकड़ चुका है। बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर आरोप लगाया है कि राज्य सरकार एक जातिगत सर्वे करा रही है, जिसका मकसद मुस्लिम ओबीसी को फायदा पहुंचाना और हिंदू ओबीसी को पीछे करना है। बीते दिनों बीजेपी महासचिव जगन्नाथ चटर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “टीएमसी सरकार का यह सर्वे केवल राजनीतिक तुष्टिकरण के लिए है। वे मुस्लिम समुदाय की आर्थिक जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं ताकि सरकारी लाभ उन्हीं को दिया जा सके, जबकि हिंदू ओबीसी को इससे बाहर रखा जा रहा है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस सर्वे के सवालों को इस तरह से तैयार किया गया है जिससे समुदायों के बीच फूट डाली जा सके। चटर्जी के मुताबिक, “सवालों में यह पूछा गया है कि उनके इलाकों में पानी की सुविधा कैसी है और क्या वे अपने पड़ोसियों के साथ खाना साझा करते हैं। यह एक सोची-समझी साजिश है ताकि सांप्रदायिक तनाव पैदा किया जा सके।” नई जातियों से जुड़ी ठोस जानकारी दीजिए: सुप्रीम कोर्ट वहीं सुप्रीम कोर्ट पहले ही पश्चिम बंगाल सरकार से यह मांग कर चुका है कि वह ओबीसी सूची में शामिल नई जातियों की सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन से जुड़ी ठोस जानकारी पेश करे। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि इन जातियों को ओबीसी में शामिल करने से पहले किसी तरह की कानूनी सलाह ली गई थी या नहीं। अब जब राज्य सरकार ने तीन महीने में पूरी समीक्षा करने की बात कही है, तो जुलाई में सुप्रीम कोर्ट इस पर अंतिम फैसला ले सकता है। इस बीच, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक घमासान और तेज होने के आसार हैं।

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