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दिल्ली में सरकार द्वारा महिला समृद्धि योजना का पैसा मिलने में क्यों हो रही देर, समझ लीजिए पूरी बात

नई दिल्ली दिल्ली की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने के लिए भाजपा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला समृद्धि योजना को मंजूरी दे दी। सचिवालय में शनिवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में गरीब महिलाओं को आर्थिक मदद के लिए 5100 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया। ऐसे में आपके मन में सवाल होगा कि योजना को मंजूरी मिल गई और पैसों का भी इंतजाम हो गया तो फिर खातों में क्यों नहीं डाले गए हैं? दरअसल, यह स्कीम दिल्ली की सभी महिलाओं के लिए नहीं है। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में ही साफ कर दिया था कि यह योजना गरीब परिवारों की महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए है। दिल्ली में करीब 72 लाख महिला वोटर्स हैं। सरकार को यह तय करना है कि इनमें से किनको आर्थिक सहायता की आवश्यकता है और किनको नहीं। यानी पहले पहले सरकार को यह तय करना है कि कितनी आमदनी तक वाले परिवारों को इस योजना में शामिल किया जाएगा। नियम और शर्तों को तय करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में चार मंत्रियों की एक कमिटी बनाई गई है। सूत्रों की माने तो महिला एवं बाल विकास विभाग ने योजना के तहत जो पात्रता और शर्ते तय की थीं, उन्हें लेकर सरकार सहमत नहीं थी। नियम और शर्तों को तय करने के अलावा सरकार एक पोर्टल भी बनाएगी जिस पर महिलाओं को रजिस्ट्रेशन कराना है। रजिस्ट्रेशन के बाद जिन आवेदनों को स्वीकार कर लिया जाएगा उनके खाते में पैसे डाले जाएंगे। नियम और शर्तों को तय करने और रजिस्ट्रेशन में 15-20 दिन का समय लग सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगले महीने से महिलाओं को महिला समृद्धि योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने बीपीएल कार्डधारक महिलाओं को ही आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। यदि बीपीएल को आधार बनाया जाता है तो करीब 17-18 लाख महिलाओं को इसका लाभ मिल सकता है। क्या बोलीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य दिल्ली की गरीब महिलाओं को हर महीने वित्तीय सहायता देकर उनके सशक्तीकरण को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना में पारदर्शिता लाने के लिए तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए एक पोर्टल भी बनाया जाएगा। लाभार्थियों को प्रमाणित करने के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी सत्यापन का इस्तेमाल किया जाएगा। सही महिलाओं तक मदद पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक के प्रयोग से यह सुनिश्चित होगा कि वित्तीय सहायता केवल उन लोगों तक पहुंचे, जो पात्र हैं। उन्होंने कहा कि किसी तरह का दुरुपयोग रोकने के लिए मजबूत डिजिटल भुगतान तंत्र लागू किया जाएगा। इससे प्रक्रिया सुरक्षित, परेशानी मुक्त और सभी लाभार्थियों के लिए आसानी से सुलभ होगी।

बेंगलुरु एयरपोर्ट पर आंखों से ब्लाइंड, दुबई से 4 किलो सोना टपाया, किया गिरफ्तार

बेंगलुरु बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक दृष्टिहीन व्यक्ति को 3.4 करोड़ रुपये मूल्य का सोना तस्करी करते हुए गिरफ्तार किया गया है। कस्टम अधिकारियों ने जानकारी दी है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी की पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। उसे 4 मार्च को पकड़ा गया था। आपको बता दें कि यह गिरफ्तारी कर्नाटक की अभिनेत्री रान्या राव की गिरफ्तारी के एक दिन बाद हुई है। राव से 12.56 करोड़ रुपये मूल्य का 14.2 किलोग्राम सोना बरामद किया गया था। कस्टम अधिकारियों ने बताया कि विशिष्ट सूचना के आधार पर बेंगलुरु एयर कस्टम अधिकारियों ने इस दृष्टिहीन यात्री को दुबई से आने पर रोका। उन्होंने कहा, “जांच के दौरान उसके शर्ट के नीचे छिपाकर रखा गया 3,995.22 ग्राम सोना पकड़ा गया। भारतीय बाजार में इसकी कीमत 3,44,38,796 रुपये है। उसके खिलाफ तस्करी का मामला दर्ज किया गया।” आपको बता दें कि इससे पहले सैंडलवुड अभिनेत्री रान्या राव को केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (KIA) पर राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की टीम ने सोने की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया। रान्या दुबई से बेंगलुरु पहुंची थीं और उनके पास 14 किलोग्राम सोने की छड़ें मिलीं जो एक बेल्ट में छुपाई गई थीं। ये बेल्ट उनके शरीर से बंधी थी। इसके अलावा, उनके पास 800 ग्राम के सोने के आभूषण भी मिले। बाद में उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच अधिकारियों को संदेह है कि वह बेंगलुरु हवाईअड्डे के जरिए सक्रिय रूप से संचालित एक सोने की तस्करी गिरोह का हिस्सा हैं। बार-बार विदेश यात्रा रान्या की बार-बार की गई अंतरराष्ट्रीय यात्राओं ने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। इस साल की शुरुआत से उन्होंने 10 से अधिक बार विदेश यात्राएं की थीं। एक अधिकारी ने बताया, “DRI को संदेह हुआ जब उन्होंने देखा कि रान्या लगातार छोटे-छोटे अंतराल में गल्फ देशों की यात्राएं कर रही हैं। इसी कारण उन्हें ट्रैक किया जाने लगा। जब वह सोमवार को दुबई से एमिरेट्स की उड़ान से बेंगलुरु पहुंचीं, तो DRI टीम ने उन्हें रोकने की योजना बनाई।” जांच में पाया गया कि पिछले 15 दिनों में वह चार बार इसी तरह से यात्रा कर चुकी थीं और हर बार एक जैसी वेशभूषा में थीं, जिसमें उनकी बेल्ट छिपी रहती थी।

कॉलेज की तीसरी मंजिल से कूद गया बीएससी का छात्र, की आत्महत्या, इंस्टाग्राम स्टोरी पर सुसाइड नोट लिखा

इंदौर वैष्णव इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट कॉलेज में बीएससी के छात्र मयूर राजपूत ने तीसरी मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। इसके पूर्व मयूर ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर सुसाइड नोट लिखा है। उसने लिखा कि वह अच्छा इंसान नहीं बन पाया, न अच्छा बेटा बन सका। द्वारकापुरी पुलिस ने मर्ग कायम किया है। एसीपी शिवेंदु जोशी के मुताबिक घटना गुमाश्ता नगर की है। प्रजापत नगर निवासी 21 वर्षीय मयूर राजपूत ने आत्महत्या की है। दोपहर करीब तीन बजे मयूर कालेज की तीसरी मंजिल से कूद गया। छात्रों ने शव देखकर कालेज प्रबंधन और पुलिस को खबर की। घटना का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है। जिसमें मयूर कॉलेज की तीसरी मंजिल पर खड़ा है और वहां से कूदते हुए दिख रहा है। इस दौरान वहां मौजूद उसका दोस्त बचाने भी दौड़ा। दोनों के बीच चंद सेकंड का फासला होने के बाद भी मयूर कूद गया। इंस्टाग्राम स्टोरी पर सुसाइड नोट एसीपी के मुताबिक मयूर ने आत्महत्या के पूर्व इंस्टाग्राम पर सुसाइड नोट के रूप में स्टोरी लिखी है। उसने लिखा कि मैं न अच्छा बेटा बन सका, न अच्छा इंसान बन सका। इसलिए मैं यह कदम उठा रहा हूं। टीआई राहुल राजपूत के मुताबिक शनिवार को कॉलेज में कार्यक्रम भी चल रहा था। कॉलेज प्रबंधन घटना से हैरान मयूर कार्यक्रम में शामिल भी हुआ था। इसके बाद इमारत पर चढ़ा और कूद गया। पुलिस ने साथी छात्रों से भी बात की है। उन्होंने आत्महत्या के कारणों के बारे में पता होने से इन्कार किया है। कॉलेज प्रबंधन और स्वजन भी घटना से हैरान हैं। युवक ने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं इसलिए ऐसा कर रहा हूं कि मेरे जैसा इंसान किसी को नहीं चाहिए। अब लगता है कि मेरे जैसा इंसान किसी का नहीं हो सकता।

शिप्रा एक्सप्रेस के एसी कोच में महिला के साथ अटेंडर ने की बदसलूकी, यात्रियों ने अटेंडर को पकड़कर जमकर पीटा

उज्जैन शिप्रा एक्सप्रेस से पति व बच्ची के साथ एक महिला धनबाद से उज्जैन की यात्रा कर रही थी। थर्ड एसी कोच के अटेंडर ने महिला के साथ छेड़छाड़ की। महिला ने विरोध किया तो उसने मारपीट की। महिला के शोर मचाने पर यात्रियों ने अटेंडर को पकड़कर जमकर पीटा। उज्जैन स्टेशन पर आरोपित को जीआरपी को सौंपा गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच के लिए मामला पंड़ित दीनदयाल उपाध्याय नगर, रेलवे स्टेशन उत्तर प्रदेश को सौंपा है। पुलिस ने बताया कि रांची निवासी महिला अपने पति व बच्ची के साथ शिप्रा एक्सप्रेस में धनबाद से उज्जैन की यात्रा कर रही थी। महिला व उसके पति के पास कंफर्म टिकट नहीं था। इस कारण वह टाॅयलेट के पास बैठकर यात्रा करने लगे। ट्रेन में कोच अटेंडर सादिक पठान निवासी बेरसिया भोपाल ने महिला व उसके पति को टीटीई से बात कर सीट दिलाने का झांसा दिया था। सीट नहीं मिलने पर सादिक ने महिला व उसके पति को अटेंडर सीट दे दी थी।    महिला का पति ऊपरी सीट पर सो गया था। वहीं महिला नीचे की सीट पर बच्ची के साथ सो रही थी। उसी दौरान सादिक ने महिला से अश्लील हरकत की। विरोध करने पर उसके साथ अभद्रता करने लगा। उस दौरान ट्रेन पंड़ित दीनदयाल उपाध्याय नगर रेलवे स्टेशन उत्तर प्रदेश के पास थी। जहां से करीब 17 घंटे बाद ट्रेन उज्जैन पहुंची। यहां महिला के उज्जैन निवासी परिचित हिंदूवादी संगठन के लोगों के साथ स्टेशन पहुंच गए थे। सुरक्षा के लिए नीलगंगा पुलिस भी जीआरपी थाने पहुंची थी।  

वैकल्पिक पशु चिकित्सा से कम खर्च पर आसानी से पशुओं की बिना किसी दुष्प्रभाव के चिकित्सा की जा सकती

भोपाल पशुओं की वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धति पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होटल पलाश रेसीडेंसी में 11 एवं 12 मार्च को पूर्वाह्न 10 बजे से होगा। प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग एवं मध्य प्रदेश राज्य पशु चिकित्सा परिषद के समन्वय से आयोजित इस कार्यशाला में दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के विषय विशेषज्ञ अभय महाजन, प्रमुख सचिव, पशुपालन एवं डेयरी उमाकांत उमराव, अध्यक्ष, वेटरनरी काउंसिल ऑफ इंडिया उमेश चंद्र शर्मा शामिल होंगे। कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रदेश के पशु चिकित्सकों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसमें लगभग 110 प्रतिभागी सम्मिलित हो रहे हैं। कार्यशाला में वैकल्पिक पद्धति से पशुओं की चिकित्सा किए जाने संबंधी एक पॉलिसी बनाने का भी कार्य किया जाना है। इससे शासन द्वारा वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धति को पशुओं की चिकित्सा के लिए प्रदेश में लागू किया जा सके । देश में आदिकाल से पारंपरिक एवं वैकल्पिक पशु चिकित्सा पद्धति का उपयोग किया जाता था। इसे पुनः पशुओं की चिकित्सा में बढ़ावा देने एवं जन-जन तक पहुंचाने के लिए यह कार्य शाला आयोजित की जा रही है। वर्तमान में आधुनिक चिकित्सा पद्धति के कारण मनुष्यों एवं पशुओं में जीवाणु रोधी दवाइयाँ के प्रति प्रतिरोधकता का बढ़ना महामारी का रूप ले रहा है, जो एक भयानक वैश्विक खतरा बनता जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति से एवं एंटीबायोटिक के दुरुपयोग से इसका दुष्प्रभाव मनुष्य एवं पशुओं में देखा जा रहा है। इसके कारण एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस की वैश्विक समस्या उत्पन्न हो गई है। इससे निपटने के लिये अल्टरनेट वेटरनरी प्रैक्टिस जैसे आयुर्वेद, होम्योपैथी, पारंपरिक चिकित्सा, यूनानी चिकित्सा इत्यादि का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है, जिससे कम खर्च पर आसानी से पशुओं की बिना किसी दुष्प्रभाव के चिकित्सा की जा सकती है।  

भगोरिया पर्व का अंचल में उल्लास,मादलों की थाप पर झूमे आदिवासी, गुलाल से सराबोर हुआ माहौल

आलीराजपुर/झाबुआ आदिवासी अंचल में प्रमुख सांस्कृतिक पर्व भगोरियों मेलों की शुरुआत शुक्रवार से हो गई। अब 13 मार्च तक अंचल सांस्कृतिक उत्सव के उल्लास में डूबा रहेगा। पहले दिन झाबुआ-आलीराजपुर जिले के वालपुर, कट्ठीवाड़ा, उदयगढ़, बड़ी, भगोर, बेकल्दा, मांडली व कालीदेवी में मेले लगे। हजारों की संख्या में लोग इनमें मांदल की थाप और बांसुरी की धुन पर पारंपरिक नृत्य करते हुए निकले। युवतियां भी पारंपरिक गेर भगोरिया का सबसे बड़ा आकर्षण रही। बड़ी संख्या में बाहर से भी लोग भगोरिया उत्सव में शामिल होने के लिए आए। शनिवार को झाबुआ-आलीराजपुर जिले में नानपुर, उमराली, राणापुर, मेघनगर, बामनिया, झकनावदा व बलेड़ी में भगोरिया मेला लगेगा। इसके अलावा धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा में भी मेलों की धूम रहेगी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के एक दिन पूर्व शुरू हुए मेलों में आधुनिकता भी दिखी। भगोरिया को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। वरिष्ठ लेखक आरएस त्रिवेदी ने बताया कि भगोर नामक गांव माताजी के श्राप से उजड़ गया था जो बाद में वापस बसा। इस खुशी में वहां वार्षिक मेला आयोजित किया गया। बाद में इस तरह के मेले अन्य कस्बों में भी लगने लगे, चूंकि यह परंपरा भगोर की तर्ज पर शुरू हुई थी, इसलिए इसका नाम भगोरिया पड़ गया। एक अन्य प्रथा के अनुसार होली के सात दिन पहले आने वाले हाट प्राचीनकाल में गुलालिया हाट कहे जाते थे। भगोरिया हाट कहने लगे गुलालिया हाट ही बाद में भगोरिया हाट कहे जाने लगे। सभी ग्रामीण हाट बाजार स्थल पर ही एकत्रित हो जाते। गुलाल उड़ती और उल्लास भरा वातावरण छा जाता। रियासत काल में राजा व जागीरदार भी इसमें शामिल होते थे। वे होली की गोट यानी पुरस्कार स्वरूप कुछ नगदी व वस्तु अपनी प्रजा के बीच बांटते थे। अब यह भूमिका जन प्रतिनिधियों के हिस्से में आ गई है। भगोरिया हाटों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था पुलिस का कहना है कि भगोरिया हाटों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। भगोरिया में हथियारों के प्रदर्शन को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। साथ ही सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक संदेश अथवा ऑडियो-वीडियो वायरल करने पर भी सख्त कार्रवाई होगी। भगोरिया उत्सव में निकलती है गेर बता दें कि आदिवासी अंचल में होली से एक सप्ताह पूर्व से नगर, कस्बे व ग्राम में हाट बाजार के दिन भगोरिया हाट की परंपरा रही है। यह लोक पर्व देश-विदेश में मशहूर है। भगोरिया हाट में आदिवासी समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होते हैं तथा ढोल-मांदल की थाप व बांसुरी की तान के साथ नृत्य करते हुए गेर निकाली जाती है। यह गेर भगोरिया का सबसे बड़ा आकर्षण है। इसमें आदिवासी समाज की पुरातन पारंपरिक संस्कृति के रंग बिखरते हैं। यही कारण है कि देश के साथ ही विदेश से भी लोग भगोरिया उत्सव देखने के लिए आते हैं। कब-कहां पर भगोरिया हाट     07 मार्च– वालपुर, कट्ठीवाड़ा, उदयगढ़, भगोर, बेकल्दा, मांडली व कालीदेवी।     08 मार्च- नानपुर, उमराली, राणापुर, मेघनगर, बामनिया, झकनावदा व बलेड़ी।     09 मार्च– छकतला, कुलवट, सोरवा, आमखुट, झाबुआ, झिरण, ढोल्यावाड़, रायपुरिया, काकनवानी व कनवाड़ा।     10 मार्च– आलीराजपुर, आजादनगर, पेटलावद, रंभापुर, मोहनकोट, कुंदनपुर, रजला, बड़ा गुड़ा व मेड़वा।     11 मार्च– बखतगढ़, आंबुआ, अंधारवाड़, पिटोल, खरडू, थांदला, तारखेड़ी व बरवेट।     12 मार्च– बरझर, खट्टाली, चांदपुर, बोरी, उमरकोट, माछलिया, करवड़, बोड़ायता, कल्याणपुरा, मदरानी व ढेकल।     13 मार्च– फुलमाल, सोंडवा, जोबट, पारा, हरिनगर, सारंगी, समोई व चौनपुरा। आदिवासी समाज के लिए खास है भगोरिया पर्व, लड़के-लड़कियां चुनते हैं मनपसंद हमसफर आदिवासी संस्कृति का पर्व भगोरिया की शुरुआत होने जा रही है. सात दिनों तक चलने वाला यह पर्व मुख्य रुप से आदिवासी क्षेत्र धार, झाबुआ, खरगोन, अलीराजपुर, करड़ावद जैसे क्षेत्र में विशेष रूप से मनाया जाता है. जिन अंचलों में आदिवासी समाज बड़ी संख्या में रह रहे हैं, वहां पर यह विशेष रुप से पूरे धूम धाम से मनाया जाता है. इसी कड़ी में राजधानी भोपाल से सटे सीहोर जिले के कई गांवों में भगोरिया पर्व की धूम देखने को मिल रही है. सीहोर जिले के बिलकिसगंज, लाडकुई, ब्रिजिशनगर, सिद्दीकगंज, कोलारडेम क्षेत्र में हाट के दिन भगोरिया पर्व आयोजित होगा.  प्रदेश भर के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में आज 18 मार्च से भगोरिया लोकपर्व की शुरुआत होगी. 24 मार्च को होली दहन के साथ पर्व का समापन होगा. क्यों पड़ा भगोरिया नाम? भगोरिया महोत्सव आदिवासी समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है. भगोरिया में आदिवासी समुदाय की संस्कृति की झलक देखने को मिलती है. ऐसी मान्यता है कि भगोरिया की शुरुआत राजा भोज के समय से हुई थी. उस समय दो भील राजाओं कासूमार और बालून ने अपनी राजधानी भगोर में मेले का आयोजन करना शुरू किया. धीरे-धीरे आसपास के भील राजाओं ने भी इन्हीं का अनुसरण करना शुरू किया, जिससे हाट और मेले को भगोरिया कहने का चलन बन गया. सभी को रहता है बेसब्री से इंतजार भगोरिया हाट में जाने के लिए बड़े, बूढ़े, बच्चे, युवा, युवतियां, महिलाएं हर कोई लालायित रहता है. एक महीने पहले से ही आदिवासी समाज भगोरिया पर्व की तैयारियों में जुट जाता है. आदिवासी युवतियां नए पारम्परिक परिधान पहनकर इस मेले में आती हैं. श्रृंगार करती हैं, तो युवा भी सजधज कर बंसी की धुन छेड़ने लगते हैं. आदिवासी जन ढोल मांदल कसने लग जाते हैं. चारों तरफ उत्साह और उमंग का वातावरण रहता है. खेतों में गेहूं और चने की फसल के साथ वातावरण में टेसू, महुआ, ताड़ी की मादकता अपना रस घोलती है. तैयार किया जात विशेष ढोल हाट में जगह-जगह भगोरिया नृत्य में ढोल की थाप, बांसुरी, घुंघरुओं की ध्वनियां सुनाई देती हैं, यह दृश्य बहुत ही मनमोहक होता है. इस पर्व के लिए बड़ा ढोल (मांदल) विशेष रूप से तैयार किया जाता है, जिसमें एक तरफ आटा लगाया जाता है. ढोल वजन में काफी भारी और बड़ा होता है. पर्व में ऐसे तय होते हैं रिश्ते भगोरिया मेले में युवक युवतियां एक ही रंग के वेश-भूषा में नजर आते हैं. इस दौरान कई युवक युवतियों का रिश्ता भी तय हो जाता है. भगोरिया में आने वाले युवक-युवतियां अपने लिए जीवन साथी की तलाश भी करते हैं. इनमें आपसी रजामंदी जाहिर करने का तरीका भी बेहद निराला होता है. सबसे पहले लड़का लड़की को पान खाने के लिए देता है. अगर लड़की पान खा लेती है, तो रिश्ता हां समझा जाता है. इसके बाद … Read more

मध्य प्रदेश के लाखों श्रमिकों के महंगाई भत्ते की नई दरें 1 अक्टूबर 2024 से लागू की गई

भोपाल मध्य प्रदेश के लाखों श्रमिकों के लिए खुशखबरी है। राज्य की मोहन यादव सरकार ने वेतन के साथ दिए जाने वाले परिवर्तनशील महंगाई भत्ते में वृद्धि की है।नई दरें 1 अक्टूबर 2024 से लागू की गई है, ऐसे में एरियर का भी भुगतान होगा।इस संबंध में श्रम विभाग ने आदेश जारी कर दिए है। यह वृद्धि जनवरी से जून 2024 के औसत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में हुई 2 पाइंट की वृद्धि के आधार पर की गई है। इससे पहले श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में वृद्धि की गई थी, जिसका लाभ 1 मार्च 2025 से मिलेगा। बता दे कि हाल ही में इंदौर हाईकोर्ट ने श्रमिकों के न्यूनतम वेतन को चुनौती देने वाली याचिका पर अहम फैसला सुनाया है। इसके बाद ही श्रम विभाग ने न्यूनतम वेतन वृद्धि के बाद अब महंगाई भत्ता बढ़ाने का निर्णय लिया है। जानें किसे कितनी मिलेगी राशि?     श्रम विभाग के आदेश के तहत, 1 अक्टूबर 2024 से 31 मार्च 2025 तक इन श्रमिकों को 2225+50=2275 रुपए प्रति माह महंगाई भत्ता दिया जाएगा। यानी प्रतिदिन उन्हें 87 रुपए 50 पैसे डीए मिलेगा।     इसमें अकुशल कर्मचारियों को 9575 रुपए मानदेय और 2275 रुपए महंगाई भत्ता मिलेगा।     अर्द्धकुशल श्रमिकों को मानदेय 10571 रुपए, कुशल श्रमिकों को 12294 रुपए और उच्च कुशल श्रमिकों को 13919 रुपए और महंगाई भत्ता सभी को 2275 रुपए ही मिलेगा। दैनिक वेतनभोगी कर्मियों का न्यूनतम वेतन बढ़ा     दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों एवं श्रमिकों के लिए भी खुशखबरी है। श्रम आयुक्त इंदौर ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और श्रमिकों के लिए 1 अप्रैल से 30 दिसंबर 2024 तक के लिए न्यूनतम वेतन भुगतान के आदेश जारी कर दिए।     इससे प्रदेश के 10 लाख दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों एवं श्रमिक लाभान्वित होंगे। इस फैसले से दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के वेतन में अप्रैल 2024 से प्रतिमाह 2225 रुपये की वृद्धि होगी।     इसके तहत अकुशल मासिक वेतन 11800, अर्ध कुशल श्रमिक को 12796, कुशल श्रमिक को 14519, उच्च कुशल को 16144 मासिक वेतन प्राप्त होगा।     माह के चार रविवार के अवकाश का अतिरिक्त वेतन प्राप्त होगा।दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों और श्रमिकों के वेतन में एक अक्टूबर 2024 से 2275 रुपये प्रतिमाह या 87.50 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि के आदेश जारी किए

आज 9 मार्च इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत, होगा जबरदस्त धन लाभ, जानिए अपना आज का राशिफल

मेष राशि- आत्मविश्वास से परिपूर्ण रहेंगे। आत्मसंयत रहें। बेकार के क्रोध व वाद-विवाद से बचें। नौकरी में कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी मिल सकती है। वृषभ राशि- मन अशांत हो सकता है। धैर्यशीलता में कमी रहेगी। संयत रहें। नौकरी में अफसरों से सद्भाव बनाकर रखें। तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। आय मे वृद्धि होगी। मिथुन राशि- आत्मविश्वास में कमी रहेगी। पर नौकरी में तरक्की के मौके मिल सकते हैं। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। बौद्धिक कार्यों में मान-सम्मान बढ़ेगा। कर्क राशि- वाणी में सौम्यता रहेगी। माता-पिता से कारोबार के लिए धन की प्राप्ति हो सकती है। कारोबार के लिए यात्रा से लाभ के अवसर मिलेंगे। परिश्रम अधिक रहेगा। सिंह राशि- मन प्रसन्न रहेगा। संयत रहें। क्रोध से बचें। बातचीत में संतुलित रहें। शैक्षिक व बौद्धिक कार्यों में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। आय के साधन बढ़ेंगे। कन्या राशि- मन प्रसन्न रहेगा। पर, धैर्यशीलता बनाए रखें। बातचीत में संतुलित रहें। नौकरी में कार्यक्षेत्र में बदलाव की संभावना बन रही है। वस्त्र उपहार में मिल सकते हैं। तुला राशि- मन परेशान हो सकता है। आत्मसंयत रहें। क्रोध से बचें। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान पर जा सकते हैं। परिवार की सेहत का ध्यान भी रखें। वृश्चिक राशि- आत्मसंयत रहें। बेकार के क्रोध से बचें। अपनी भावनाओं को वश में रखें। परिवार का साथ मिलेगा। रुके धन की प्राप्ति हो सकती है। सेहत का ध्यान रखें। धनु राशि- मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। आत्मसंयत रहें। अपनी भावनओं को वश में रखें। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा। आय में वृद्धि होगी। मकर राशि- मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। नौकरी में बदलाव के अवसर मिल सकते हैं। कार्यक्षेत्र में बदलाव भी हो सकता है। आय बढ़ेगी। कुंभ राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। तरक्की के मौके मिलेंगे। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। मीन राशि- आशा-निराशा के मनोभाव हो सकते हैं। परिवार का साथ मिलेगा। सेहत के प्रति सचेत रहें। नौकरी में तरक्की के साथ विदेश जा सकते हैं। सम्मान की प्राप्ति होगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- मैं पाकिस्तान से यह अपेक्षा नहीं करता कि वह हमें पीओके वापस कर देगा

नई दिल्ली पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि वह पाकिस्तान से यह उम्मीद नहीं करते कि वह पीओके को भारत के हवाले कर देगा। राजनाथ सिंह का मानना है कि पीओके के लोग खुद ही यह मांग करेंगे कि उन्हें भारत के साथ जोड़ दिया जाए और जम्मू-कश्मीर के साथ एकीकृत कर लिया जाए। रक्षा मंत्री ने बातचीत करते हुए कहा कि मैं पाकिस्तान से यह अपेक्षा नहीं करता कि वह हमें पीओके वापस कर देगा। मेरा तो यह मानना है कि पीओके के लोग ही यह मांग उठाएंगे कि हमें भारत में शामिल कर दिया जाए, उन्हें जम्मू-कश्मीर के साथ जोड़ दिया जाए। क्योंकि जिस तरह से भारत का आर्थिक विकास लगातार आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा तेजी से बढ़ी है, उसे देखते हुए पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों को भी यह महसूस होने लगा है कि यदि हम अपना विकास चाहते हैं, तो भारत जैसे देश के साथ जुड़कर ही अब अपने क्षेत्र का विकास कर सकते हैं। राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि पीओके को मैं देश नहीं कहता, उसे क्षेत्र कहता हूं। मुझे लगता है कि पीओके के लोग भारत में शामिल होने की मांग करेंगे तो पाकिस्तान मजबूर हो जाएगा। मुझे यह भी लगता है कि पीओके को पाकिस्तान की सहमति की जरूरत भी क्यों पड़ेगी? मैं ऐसा मानता हूं। वहीं, बांग्लादेश की स्थिति को लेकर सवाल किए जाने पर रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत हमेशा अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है, बांग्लादेश भी हमारा पड़ोसी देश है। हम अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश करते हैं, क्योंकि हमारे पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी कहते थे कि हम दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं बदल सकते। यही वजह है कि हम अपने पड़ोसी बांग्लादेश के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहेंगे।

भजनलाल शर्मा ने सितारों, प्रोड्यूसर्स और फिल्ममेकर्स को राजस्थान में फिल्मों की शूटिंग के लिए खुला न्योता दिया

जयपुर राजस्थान की धरती पर एक ऐतिहासिक लम्हा! आईफा अवॉर्ड्स 2025 की भव्यता गुलाबी नगरी जयपुर में बिखरने को तैयार है। इस शानदार मौके पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बॉलीवुड के सितारों, प्रोड्यूसर्स और फिल्ममेकर्स को राजस्थान में फिल्मों की शूटिंग के लिए खुला न्योता दिया। यहां आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में तमाम सितारों के बीच सीएम शर्मा ने कहा, “यह सिर्फ एक अवॉर्ड शो नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा और संस्कृति के वैश्विक विस्तार का प्रतीक है। राजस्थान को इंटरनेशनल फिल्म और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक नई पहचान मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को ग्लोबल एंटरटेनमेंट हब बनाने की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, और आईफा का यह आयोजन उसी का प्रतिबिंब है।” राजस्थान : बॉलीवुड का परफेक्ट शूटिंग डेस्टिनेशन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा-बॉलीवुड और राजस्थान का रिश्ता दशकों पुराना है। ‘पद्मावत’, ‘बजरंगी भाईजान’, ‘जोधा अकबर’, ‘कच्चे धागे’, और ‘रेस 3’ जैसी दर्जनों फिल्में यहां की ऐतिहासिक लोकेशंस पर शूट हुई हैं। सीएम शर्मा ने इस मौके पर जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, जैसलमेर और शेखावाटी को प्रमुख फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन बताया। उन्होंने कहा, “यहां के भव्य महल, सुनहरी रेत के टीले, विशाल किले और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर किसी भी फिल्म के लिए परफेक्ट बैकड्रॉप देते हैं।” उन्होंने एक दिलचस्प किस्सा भी शेयर किया कि कैसे कोरिया के बड़े उद्योगपति राजस्थान में शादी करना चाहते थे, लेकिन बुकिंग दो साल तक फुल थी। यह दिखाता है कि राजस्थान डेस्टिनेशन वेडिंग और मेगा इवेंट्स के लिए कितनी बड़ी पसंद बन चुका है। बॉलीवुड स्टार्स के लिए ‘सपनों की भूमि’ राजस्थान राजस्थान की खूबसूरती सिर्फ ऐतिहासिक स्थलों तक सीमित नहीं, बल्कि यहां का वाइल्डलाइफ, पहाड़, झीलें और ग्रामीण जीवन भी अनोखा आकर्षण रखते हैं। रणथंभौर और सरिस्का में शूट होने वाली वाइल्डलाइफ डॉक्यूमेंट्रीज़ इंटरनेशनल लेवल पर सराही गई हैं। केवलादेव नेशनल पार्क और चंबल घाटी नेचर लवर्स के लिए परफेक्ट हैं। बॉलीवुड सितारे यहां के ब्रांड एंबेसडर हैं! जब वे राजस्थान में कदम रखते हैं, तो ‘पधारो म्हारे देश’ की गूंज ग्लोबल लेवल तक सुनाई देती है। फिल्ममेकर्स के लिए आसान प्रक्रिया राजस्थान सरकार फिल्म इंडस्ट्री को हर संभव सुविधा देने के लिए तैयार है। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत 15 दिनों के अंदर फिल्म शूटिंग की परमिशन दी जाती है। हवाई, सड़क और रेल कनेक्टिविटी भी शानदार है। जयपुर बना ग्लोबल एंटरटेनमेंट हब डिप्टी सीएम दीया कुमारी और सीएम शर्मा ने इस अवसर पर कहा, “आईफा सिर्फ अवॉर्ड शो नहीं, बल्कि राजस्थान के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह प्रदेश को ग्लोबल इवेंट्स, डेस्टिनेशन वेडिंग और फिल्म शूटिंग के सबसे बड़े हब के रूप में स्थापित करेगा।”

कठुआ में जलाशय में मिले 3 शव, दो दिन से थे लापता, घटना आतंकवाद प्रभावित इलाके की बताई जा रही है, मचा हड़कंप

कठुआ जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में तीन लोगों के शव जलाशय में मिलने से हड़कंप मच गया। ये दो दिन पहले लापता हुए थे। मृतकों में 14 वर्षीय बच्चा भी शामिल है। यह घटना आतंकवाद प्रभावित इलाके की बताई जा रही है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि योगेश सिंह, दर्शन सिंह और नाबालिग लड़का वरुण सिंह बुधवार शाम को बिल्लावर इलाके में शादी समारोह में शामिल होने निकले थे। इसके बाद से ही उनका कुछ पता नहीं चल रहा था। तीनों के लापता होने की सूचना मिलने पर सुरक्षा बलों की ओर से बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसके बाद लोहाई मल्हार इलाके के पास एक जलाशय में तीनों लोगों के शव मिले। सूत्रों ने बताया कि इस इलाके में आतंकवादियों की भारी मौजूदगी है। पिछले 2 साल में यहां कई आतंकी हमले हो चुके हैं। पिछले महीने भी इसी इलाके से दो नागरिकों के शव बरामद किए गए थे। आतंकवादियों के 2 मददगार हिरासत में दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर के कठुआ और रामबन जिलों में कड़े सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत आतंकवादियों के 2 मददगारों को हिरासत में लिया गया है। PSA एक प्रशासनिक कानून है जो कुछ मामलों में बिना आरोप या सुनवाई के दो साल तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि कठुआ की बिलावर तहसील के धनोपरोले निवासी भुट्टू को जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया और उधमपुर जिला जेल में बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि आरोपी एक कट्टर ओजीडब्ल्यू था जो पिछले कुछ वर्षों से अवैध गतिविधियों में शामिल था। रामबन के दलवाह-गुल निवासी मंजूर अहमद उर्फ ​​फुरकान को भी राष्ट्र विरोधी और असामाजिक गतिविधियों में संलिप्तता के लिए पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया है। पिछले वर्ष अगस्त में पीएसए के तहत हिरासत में लेने के लिए आवश्यक मंजूरी प्राप्त होने के बाद से अहमद गिरफ्तारी से बच रहा था।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा- 75 साल के इतिहास में महिलाओं की उपलब्धियां सराहनीय

नई दिल्ली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर संसद भवन परिसर में संविधान सभा की महिला सदस्यों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत के 75 साल के इतिहास में महिलाओं ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वह सराहनीय हैं। भारत एक ऐसा देश है जहां महिलाओं की पूजा होती है और उन्हें सम्मान दिया जाता है। यहां कन्या पूजन से लेकर विभिन्न रूपों में महिलाओं को सम्मानित किया जाता है। ओम बिरला ने आगे कहा कि जब हम संविधान निर्माता महिलाओं को याद करते हैं, तो हमें यह भी याद रखना चाहिए कि एक समय था जब दूसरे देशों में महिलाओं को सम्मान नहीं दिया जाता था। लेकिन भारत में महिलाओं को सदैव सम्मानित किया गया है। अब वह समय आ गया है जब देश की आधी आबादी, यानी महिलाएं, देश की सुरक्षा से लेकर हर क्षेत्र में अपना अहम रोल निभा रही हैं।” लोकसभा अध्यक्ष ने महिला शिक्षा को लेकर तय किए लक्ष्य की बात की। आगे कहा कि वह दिन दूर नहीं जब महिलाएं पुरुषों से भी आगे निकल जाएंगी। महिला शिक्षा को 100% करना हमारा लक्ष्य है ताकि हर महिला शिक्षित हो सके। साथ ही, महिलाओं को चिकित्सा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में भी आगे आना चाहिए, ताकि समाज को और मजबूत किया जा सके। वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश की प्रगति में महिलाओं का योगदान अहम रहा है। आज के दिन हमें उन महिलाओं को याद करना जरूरी है, जिन्होंने देश के लिए एक नया समाज बनाने में अहम भूमिका निभाई है। ये महिलाएं संविधान शिल्पी थी। इन महिलाओं की याद में आज संसद भवन में एक प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसका विमोचन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया।  

इटावा में राशन पाने वाले 3 लाख कार्ड धारकों को झटका, इन लोगों को नहीं मिल सकेगा फ्री में गेहूं-चावल

इटावा यूपी के इटावा में ईकेवाईसी के अभाव में करीब तीन लाख उपभोक्ताओं के मुफ्त के राशन पर संकट के बादल छा गए है। सरकार की ओर से पात्र गृहस्थी राशन कार्ड धारकों को प्रति यूनिट प्रतिमाह 5 किलो की दर से मुफ्त अनाज दिया जा रहा है। अब इस योजना के तहत जो लोग राशन प्राप्त कर रहे हैं उनमें से जिले में 3 लाख 1 हजार 673 उपभोक्ता ऐसे है जिनके राशन पर संकट के बादल छाए हैं, क्योंकि इन्होंने अभी तक ईकेवाईसी नहीं कराई है। इटावा की जिला पूर्ति अधिकारी सीमा त्रिपाठी ने शुक्रवार को बताया कि यह प्रक्रिया अनवरत रूप से जारी है और जैसे ही कोई अपात्र मिलता है उसका राशन कार्ड निरस्त कर दिया जाता है। शासन की ओर से संबंध में 6 महीने पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए थे कि राशन कार्ड पर जितने भी उपभोक्ताओं के नाम दर्ज हैं उन सभी को ईकेवाईसी करानी पड़ेगी। यह भी कहा गया था कि राशन उन्हीं को मिलेगा जिनकी ईकेवाईसी हो जाएगी, हालांकि अभी इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया है लेकिन जैसे ही बिना ईकेवाईसी वालों को राशन मिलना बंद होगा तो इन तीन लाख उपभोक्ताओं का राशन खतरे में आ जाएगा। इटावा जिले में 11 लाख 76 हजार 714 उपभोक्ता है जो पात्र गृहस्थी राशन कार्डों पर दर्ज हैं इन्हें हर महीने 5 किलो राशन मिलता है। इन उपभोक्ताओं के कुल मिलाकर 2 लाख 90 हजार 558 राशन कार्ड हैं, जिनमें इन उपभोक्ताओं के नाम दर्ज हैं और उन्हें राशन मिलता है लेकिन ईकेवाईसी न कराई जाने पर उनके सामने राशन का संकट उत्पन्न हो सकता है। पूर्ति विभाग की ओर से भी बार बार उपभोक्ताओं से ईकेवाईसी कराने के लिए कहा जा रहा है इसके बाद भी बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने अभी तक ईकेवाईसी नहीं कराई है। यह लापरवाही उन्ही को भारी पड़ सकती है। ईकेवाईसी के लिए राशन कार्ड पर जितने भी उपभोक्ताओं के नाम दर्ज हैं उन्हें संबंधित राशन वितरण की दुकान पर जाकर अपना अंगूठा लगाकर ईकेवाईसी करनी होगी। आधार कार्ड भी अपने राशन कार्ड के साथ दर्ज कराना होगा। राशन की दुकान पर जाए बिना यह काम नहीं होगा। यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है लेकिन अभी तक लगभग 26 फीसदी लोगों ने ईकेवाईसी नहीं कराई है। अभी तक 74 फीसदी से कम उपभोक्तों ने ईकेवाईसी कराई है। पूर्ति विभाग की ओर से राशन कार्डों की चेकिंग का सिलसिला भी जारी है। इस बीच जो लोग पात्र गृहस्थी योजना से राशन ले रहे हैं लेकिन वे अपात्र हैं तो उनके राशन कार्डों को निरस्त भी किया जा रहा है। जीएसटी देने वाले या फिर निर्धारित आय से अधिक आय वाले उपभोक्ताओं के राशन कार्ड निरस्त किए जा रहे हैं।

गुजरात में कांग्रेस के कुछ नेता भाजपा से मिले हुए हैं, 30-40 को निकालना पड़ेगा: राहुल गांधी

अहमदाबाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को गुजरात में वर्कर्स डायलॉग कार्यक्रेम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि गुजरात में कांग्रेस के कुछ नेता भाजपा से मिले हुए हैं। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि इन लोगों को निकालना पड़ेगा। उन्होंने कहा, गुजरात कांग्रेस में दो तरह के लोग हैं। एक जो जनता के साथ खड़े हैं, जनता के लिए लड़ते हैं और जिसके दिल में कांग्रेस की विचारधारा है। दूसरे वे हैं जो जनता से कटे हुए हैं, जनता से दूर बैठता है, जनता की इज्जत नहीं करता और उसमें से आधे बीजेपी से मिले हुए हैं। राहुल गांधी ने कहा, जब तक हम इन दोनों को अलग नहीं करेंगे तब तक गुजरात की जनता हम पर विश्वास नहीं करेगी। उन्होंने कहा, गुजरात के व्यापारी से लेकर छात्र तक विकल्प चाहते हैं, बी टीम नहीं चाहते। मेरी जिम्मेदारी इन दोनों समुहों को छानने की है। कांग्रेस पार्टी में नेताओं की कमी नहीं है। पार्टी में बब्बरशेर हैं लेकिन पीछे से चेन लगी हुई है। राहुल गांधी ने आगे कहा, गुजरात की जनता देख रही है कि कांग्रेस ने रेस में बारात का घोड़ा डाल दिया। अगर में जनता से रिश्ता बनाना है तो दो काम करने हैं। पहला काम यह कि दो ग्रुप को अलग करना है। अगर हमें सख्त कार्रवाई करनीपड़ी, 10, 20, 30 , 30 लोगों को निकालना पड़ा तो निकाल दीजिए। बीजेपी के लिए अंदर से काम कर रहे हो, चलो जाकर देखते हैं बाहर से करो। राहुल गांधी ने कहा, कांग्रेस के जितने भी नेता है उनके दिल में कांग्रेस होनी चाहिए। जीतने हारने की बात छोड़ दीजिए। अगर हाथ भी कटे तो उसमें से कांग्रेस का खून निकलना चाहिए।

सभी महिला कर्मचारियों को चुनौतियों से निपटने के लिए देंगे मिर्च स्प्रे, रेलवे सुरक्षा बल की कर्मियों के लिए रेलवे की नई कवायद

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने सुरक्षा में लगी रेलवे सुरक्षा बल की कर्मियों के लिए एक नया फैसला किया है। सरकारी प्रेस नोट के मुताबिक इन सभी महिला कर्मचारियों को मिर्च स्प्रे के डिब्बे उपलब्ध कराए जाएंगे। रेलवे के मुताबिक यह गैर घातक लेकिन प्रभावी हथियार महिला कर्मियों को अकेले या बच्चों के साथ यात्रा कर रही महिला यात्रियों की सुरक्षा करने में मदद करेगा। चुनौतीपूर्ण स्थितियों से निपटने में मदद करेगा। रेलवे द्वारा जारी प्रेस में कहा गया कि यह नया कदम भारतीय रेलवे की लैंगिक समावेशिता और महिला शक्तिकरण और अपने नेटवर्क में बढ़ी हुई सुरक्षा के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यहीं नहीं मिर्च स्प्रे उपलब्ध कराने से महिला आरपीएफ कर्मियों को सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत मिलेगी, जिससे वे खतरों को रोक सकेंगी और आपात स्थितियों को प्रभावी ढंग से संभाव सकेंगी। आरपीएफ के डीजी मनोज यादव ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के महिलाओं को सशक्त बनाने और सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है। भारतीय रेलवे ने महिला यात्रियों के लिए यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए लगातार कई उपाय किए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी महिला आरपीएफ कर्मी ताकत, देखभाल और लचीलेपन का प्रतीक हैं। उन्हें मिर्च स्प्रे के डिब्बे से लैस करके, हम उनका आत्मविश्वास और परिचालन क्षमता बढ़ा रहे हैं, साथ ही यह स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि यात्रियों की सुरक्षा – विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस फैसले को लेकर मंत्रालय ने कहा कि रेलवे सुरक्षा बल में अधिक महिलाओं को शामिल करना एक प्रभावशाली नीति रही है। इस नीति की वजह से आरपीएफ में करीब 9 फीसदी महिला कर्मी हैं। इनमें से कई महिला आरपीएफ कर्मी मेरी सहेली टीमों का हिस्सा हैं, जिनकी मुख्य जिम्मेदारी महिला यात्रियों की सुरक्षित यात्राओं को सुनिश्चित करना है।

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