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खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर का करीबी अरश डल्ला कनाडा में गिरफ्तार

कनाडा कनाडा पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर अरशदीप सिंह गिल, जिसे अरश डल्ला के नाम से भी जाना जाता है, को गिरफ्तार किया है। अरश डल्ला को भारत की नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने आतंकवादी घोषित किया है, और वह मारे गए खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर का करीबी सहयोगी माना जाता है। अरश डल्ला की गिरफ्तारी से भारत और कनाडा के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों पर और असर पड़ने की संभावना है। डल्ला को कल कनाडा की एक स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा, जहां उसके खिलाफ लगे आरोपों पर सुनवाई होगी। अरश डल्ला पर 28 अक्टूबर को ओंटारियो में हुई गोलीबारी से जुड़े मामले में आरोप लगाए गए हैं। इस घटना में उसे “जानबूझकर गोली चलाने” का आरोप लगा है। 29 अक्टूबर को, हल्टन रीजनल पुलिस सेवा (HRPS) ने बताया कि उन्होंने इस मामले में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था, जो गोलीबारी की घटना के बाद एक अस्पताल पहुंचे थे। इनमें से एक व्यक्ति को गैर-जानलेवा गोली लगने के बाद इलाज के लिए भर्ती किया गया था और बाद में उसे गुएल्फ़ के अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। अरश डल्ला पर भारत में भी कई संगीन आरोप हैं। वह पंजाब में कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है, जिनमें हत्या, फिरौती, और अन्य हिंसक घटनाएँ शामिल हैं। NIA ने उसे आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने और खालिस्तान समर्थक नेटवर्क को बढ़ावा देने के आरोप में वांछित अपराधी घोषित किया था। भारत सरकार ने कनाडा से अरश डल्ला और अन्य खालिस्तान समर्थक अपराधियों को वापस सौंपने की मांग की है, ताकि उन पर भारत में कानूनी कार्रवाई की जा सके। अरश डल्ला की गिरफ्तारी से यह भी स्पष्ट होता है कि कनाडा में बसे भारतीय अपराधी और खालिस्तान समर्थक संगठन कानून के दायरे में आने लगे हैं।  

बीजेपी जिलाध्यक्ष के बेटे आकाश ने हरियाणा के पानीपत से हेलीकॉप्टर से दुल्हन लेकर पहुंचे, बना चर्चा का विषय

बागपत यूपी के बागपत जिले में बीजेपी जिलाध्यक्ष के बेटे की शादी क्षेत्र में चर्चा बन गईं। यह शादी अनोखी शादी नहीं, लेकिन इस  की खबर ने सबका ध्यान खींचा है। दरअसल बीजेपी जिलाध्यक्ष वेदपाल उपाध्याय के बेटे आकाश ने हरियाणा के पानीपत से हेलीकॉप्टर से दुल्हन लेकर पहुंचे हैं। चर्चा है कि हेलीकॉप्टर की व्यवस्था बीजेपी के एक स्थानीय नेता द्वारा की गईं। जिससे क्षेत्र में चर्चा बन गईं। दरअसल वेदपाल उपाध्याय बागपत से बीजेपी जिलाध्यक्ष हैं और उनके बेटे आकाश की शादी हरियाणा के पानीपत में हुई। शादी की रस्में पूरी धूमधाम से हुईं लेकिन विदाई के वक्त हेलीकॉप्टर के आने से सबकी निगाहें उस पर टिक गईं और बीजेपी जिलाध्यक्ष के बेटे  आकाश जब अपनी दुल्हन को हेलीकॉप्टर से लेकर पहुंचे और यह अनोखा पल सभी के लिए यादगार बन गया। लेकिन साथ ही क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो गया। चर्चा है कि बीजेपी के एक स्थानीय नेता द्वारा हेलीकॉप्टर का इंतजाम कराया गया था। आपको बता दें कि भाजपा के जिलाध्यक्ष वेदपाल उपाध्याय छपरौली क्षेत्र के ककोर गांव के रहने वाले हैं। उनके बेटे आकाश उपाध्याय की कुछ समय पहले ही शादी पक्की हुई थी। आकाश की शादी हरियाणा के पानीपत जिले के पसीना खुर्द गांव में तय हुई। शादी की तैयारियां दोनो ही परिवारों ने शुरू कर दीं। आकाश की दुल्हन खुशबू के परिवार में भी तैयारियां शुरु हुई हैं। वेदपाल उपाध्याय ने अपने परिचितों से बारात में चलने का आग्रह किया। तभी बागपत के बीजेपी नेता हरीश चौधरी ने उन्हें उपहार में हेलीकॉप्टर की सवारी गिफ्ट कर दी।  

स्कूली छात्राओं में मासिक धर्म के बारे में जागरूकता बढ़ाना है, पीरियड्स के दौरान मिलेगी राहत

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि “स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति” अब आधिकारिक तौर पर लागू हो चुकी है। इस नीति को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 2 नवंबर, 2024 को अनुमोदित किया गया था, जो 10 अप्रैल, 2023 को न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के अनुसरण में है। नीति का उद्देश्य और मुख्य बिंदु इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य स्कूली छात्राओं में मासिक धर्म के बारे में जागरूकता बढ़ाना है, जो अक्सर उनकी गतिशीलता और विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने की क्षमता को प्रभावित करता है। इस नीति के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में लड़कियों को मासिक धर्म से संबंधित स्वच्छता सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जिससे उन्हें सुरक्षित और स्वच्छ मासिक धर्म के साधनों तक पहुँच मिल सके। यह पहल मासिक धर्म अपशिष्ट के पर्यावरण के अनुकूल निपटान को भी प्रोत्साहित करेगी। कांग्रेस नेता की मुफ्त सैनिटरी पैड वितरण की मांग यह नीति उस जनहित याचिका (पीआईएल) के संदर्भ में भी है, जिसे कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने दाखिल किया था। इस याचिका में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड वितरित करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ इस मामले की सुनवाई 12 अक्टूबर को करेगी। केंद्र का विवरण: शौचालय और स्वच्छता किट वितरण केंद्र सरकार ने न्यायालय को बताया कि देश के 97.5% स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय उपलब्ध हैं, जिसमें दिल्ली, गोवा और पुडुचेरी जैसे राज्य 100% अनुपालन की स्थिति में हैं। इसके अतिरिक्त, सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर मासिक धर्म स्वच्छता किट के वितरण के लिए भी पहल शुरू की है, ताकि छात्राओं के बीच मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और व्यवहार को प्रोत्साहित किया जा सके।

उच्च न्यायालय ने यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे युवक को राहत दी, कहा, प्रेम में एक दूसरे को चूमना स्वभाविक है

मद्रास मद्रास हाईकोर्ट का कहना है कि प्रेम करने वाले युवक और युवती के बीच गले लगना और चूमना स्वभाविक सी बात है। हाल ही में एक याचिका पर सुनवाई कर रहे उच्च न्यायालय ने यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे युवक को राहत दी है। खबर है कि उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354ए के तहत जारी आपराधिक कार्यवाही को खत्म करने का निर्देश दिया है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, याचिका पर सुनवाई कर रहे जस्टिस आनंद वेंकटेश ने कहा, ‘IPC की धारा 354-A(1)(i) के तहत अपराध होने के लिए पुरुष की तरफ से शारीरिक संपर्क बनाना जरूरी है, जिसमें अस्वीकार्य और स्पष्ट यौन गतिविधियां शामिल है। किशोरावस्था में प्रेम प्रसंग में चल रहे दो लोगों के बीच गले लगना या चूमना स्वभाविक है। किसी भी तरह से यह IPC की धारा 354-A(1)(i) के तहत अपराध नहीं हो सकता।’ संथनगणेश की तरफ से एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें उन्होंने ऑल वुमन पुलिस स्टेशन की तरफ से उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की मांग की थी। यह FIR IPC की धारा 354-A(1)(i) के तहत दर्ज की गई थी। आरोप थे कि शिकायतकर्ता के साथ प्रेम संबंध में रहे याचिकाकर्ता ने उसे 13 नवंबर 2022 को एक जगह पर बुलाया था। आरोप लगाए गए कि जब दोनों बातचीत कर रहे थे, तब याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता को गले लगाया और चूम लिया। रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता ने अपने पैरेंट्स को इस बात की जानकारी दी और याचिकाकर्ता से शादी के लिए पूछा। जब याचिकाकर्ता ने शादी से इनकार कर दिया और दूरी बनाने लगा तो उसने शिकायत कर दी, जिसके चलते FIR दर्ज हो गई। कोर्ट ने कहा कि अगर FIR में दर्ज आरोपों को सच मान भी लिया जाए, तो याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। ऐसे में उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

महिला के प्रेमी ने गला दबाकर अपने कबाड़ गोदाम में उसकी हत्या

भोपाल  दानापानी रोड स्थित पीसी नगर मल्टी के पीछे मिला महिला का शव और उसी मल्टी में तीन बाद हुई खुदकुशी का राज एक चप्पल से खुल गया। महिला के प्रेमी ने गला दबाकर अपने कबाड़ गोदाम में उसकी हत्या की थी और फिर बोरे में बांधकर शव मल्टी परिसर के पीछे फेंक दिया था। इस पूरी वारदात के बीच महिला की चप्पल उसके प्रेमी के घर पर ही छूट गई थी। महिला के स्वजन उसे ढूंढते हुए जब प्रेमी के घर पहुंचे तो उन्होंने वहां पड़ी महिला की चप्पल पहचान ली। इससे स्वजनों को प्रेमी पर हत्या का शक हुआ। वहीं जब प्रेमी को पूरे प्रकरण के राजफाश होने की भनक लगी तो वह घबरा गया और उसने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। हत्या के करीब एक सप्ताह बाद महिला का शव मल्टी के पीछे मिला था। हबीबगंज थाना पुलिस ने महिला के स्वजनों के आरोपों के आधार पर जांच शुरू की और फिर सीसीटीवी खंगालकर पूरी वारदात का पर्दाफाश किया और मृतक प्रेमी के विरुद्ध हत्या का प्रकरण दर्ज किया। दो साल पहले हुआ था परिचय 26 वर्षीय प्रभा रावत अपने आठ वर्षीय बेटे के साथ पीसी नगर मल्टी के बी-5 ब्लॉक में रहती थी। वह भाजपा के एक बड़े नेता के घर साफ-सफाई का काम करती थी। इसी परिसर के एक अन्य ब्लॉक में 24 वर्षीय शंकर राजोड़े अपने परिवार के साथ रहता था। वह कबाड़ का काम करता था, घर के ठीक सामने उसका कबाड़ का गोदाम था। प्रभा ने नौ साल पहले पूरन रावत से प्रेम विवाह किया था, लेकिन अक्सर झगड़ा होने के चलते वह पति से अलग हो गई। 2022 में वह पीसी नगर मल्टी में बेटे के साथ रहने लगी थी। इसी दौरान वह शंकर के संपर्क में आई थी और दोनों के बीच प्रेम-प्रसंग शुरू हुआ था। शादी करना चाहते थे तीन नवंबर की शाम करीब छह बजे प्रभा और शंकर उसके कबाड़ के गोदाम में जाते हुए दिखाई दिए थे। करीब चार घंटे बाद शंकर अपने गोदाम से बाहर निकला। उसने शव को बोरे में बांधकर रखा था और फिर कुछ देर बाद मल्टी परिसर के पीछे एक खदान में फेंक दिया था। यह घटना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने शंकर के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया। साथ ही कॉल डिटेल और रिकार्डिंग खंगालने के बाद इस बात की पुष्टि हुई है कि दोनों शादी भी करना चाहते थे। वारदात से पहले झगड़े का शक एसआइ शिवेंद्र पाठक ने बताया कि गोदाम में जाने के चार घंटे बाद शंकर शव को बोरे में भरकर बाहर लाया था। ऐसे में संभावना है कि दोनों के बीच झगड़ा हुआ होगा। प्रभा ने नवरात्र के दौरान शंकर से पांच हजार रुपये उधार लिए थे। इस बात को लेकर दोनों के बीच एक नवंबर को विवाद हुआ था और उसने प्रभा का मोबाइल भी तोड़ दिया था। इसके अलावा प्रभा शंकर पर शादी का दबाव भी बना रही थी।

Bank Holidays: गुरुनानक जयंती शुक्रवार को बंद रहेंगे सभी बैंक, RBI ने क्यों दी है 15 नवंबर की छुट्टी

नई दिल्ली  शुक्रवार यानी 15 नवंबर को गुरुनानक जयंती है। भारत समेत दुनिया के कई देशों में इस पर्व को काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। बात अगर इस दिन छुट्टी की करें तो इस दिन कई जगह अवकाश होता है। रिजर्व बैंक के कैलेंडर के अनुसार इस दिन कई राज्यों में बैंकों की भी छुट्टी होती है। अगर आप 15 नवंबर को किसी काम से बैंक जा रहे हैं तो चेक कर लें कि आपके राज्य में बैंक की छुट्टी है या नहीं। कब रहती है बैंकों की छुट्टी? सभी बैंकों की छुट्टी महीने के हर दूसरे और चौथे शनिवार और हर रविवार को होती है। इसके अलावा राष्ट्रीय अवकाश पर भी बैंक बंद रहते हैं। कई बार चुनाव या किसी दूसरे विशेष कारण की वजह से भी छुट्टी हो जाती है। हालांकि इसके बारे में रिजर्व बैंक समय से पहले ही जानकारी दे देता है। गुरुनानक जयंती पर इन राज्यों में बंद रहेंगे बैंक 15 नवंबर को गुरुनानक जयंती के मौके पर देशभर के कई राज्यों में बैंकों की छुट्टी रहेगी। इसे लेकर रिजर्व बैंक ने छुट्टियों का कैलेंडर भी जारी कर दिया है। इस दिन इन राज्यों में बैंक बंद रहेंगे:     पंजाब     हरियाणा     महाराष्ट्र     मिजोरम     मध्य प्रदेश     ओडिशा     चंडीगढ़     तेलंगाना     उत्तराखंड     अरुणाचल प्रदेश     जम्मू     श्रीनगर     राजस्थान     उत्तर प्रदेश     पश्चिम बंगाल     नागालैंड     दिल्ली     झारखंड     छत्तीसगढ़     हिमाचल प्रदेश अगर आप इन राज्यों में रहते हैं तो बैंक के किसी भी काम से 15 नवंबर को घर से न निकलें। अपना काम या तो 14 नवंबर को निपटा में या अगले हफ्ते जाकर पूरा करवा लें। इन सेवाओं के जरिए जारी रखें सर्विस 15 नवंबर को बैंक बेशक बंद रहेंगे लेकिन बैंकिंग से जुड़ी कई सर्विस जारी रहेंगी। इनमें ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर एटीएम सर्विस आदि शामिल हैं। इन सर्विस का लाभ उठाने के लिए बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इन सर्विस का इस्तेमाल हफ्ते के सातों दिन 24 घंटे कर सकते हैं। ऑनलाइन बैंकिंग: बैलेंस चेक करने, पैसे ट्रांसफर करने और बिलों का पेमेंट करने के लिए अपने बैंक की वेबसाइट पर लॉग इन करके ऑनलाइन बैंकिंग की सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। UPI सर्विस: ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए इस समय यूपीआई काफी पॉपुलर है। आप पेटीएम, गूगल पे, फोनपे आदि प्लैटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। ATM सर्विस: अगर कैश की जरूरत पड़ जाए तो किसी भी नजदीकी एटीएम जाकर वहां से कैश निकाल सकते हैं।

झारखंड चुनाव में ड्यूटी पर लगाये IPS किशन सहाय मीणा को ड्यूटी छोड़कर राजस्थान लौटने पर चुनाव आयोग हुआ सख्त

जयपुर राजस्थान कैडर के आईपीएस किशन सहाय मीणा को चुनाव आयोग ने सस्पेंड कर दिया है। ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। चुनाव आयोग की ओर से आईपीएस किशन सहाय मीणा की ड्यूटी झारखंड विधानसभा चुनाव में लगाई थी। पिछले दिनों वे झारखंड पहुंच गए थे लेकिन बाद वे बिना किसी को सूचना दिए राजस्थान लौट आए। चुनाव आयोग को बिना सूचना दिए ड्यूटी छोड़कर राजस्थान लौटने पर आयोग ने उनके खिलाफ एक्शन लिया है। आयोग की ओर से अब उन्हें चार्जशीट भी थमाई जाएगी। प्रमोटी आईपीएस हैं किशन सहाय मीणा आईपीएस किशन सहाय मीणा राजस्थान के अलवर जिले के रहने वाले हैं। वे पहले राजस्थान पुलिस सेवा (आरपीएस) के रूप में भर्ती हुए थे। वर्ष 2013 में उनका प्रमोशन हुआ। वे आरपीएस से आईपीएस बन गए। उन्हें वर्ष 2004 का बैच अलॉट किया गया। पिछले दस साल में विभिन्न पदों पर उन्होंने सेवाएं दी। अब ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर उन्हें निलंबित किया गया है। दस साल में अमूमन नॉन फील्ड ही रहे वर्ष 2013 से लेकर अब तक अमूमन वे नॉन फील्ड ही रहे। आईपीएस बनने के बाद अगस्त 2013 में उन्हें टोंक जिले का एसपी लगाया गया। टोंक एसपी के पद पर वे करीब पांच महीने ही रहे। इसके बाद जनवरी 2014 में टोंक एसपी पद से हटाकर जीआरपी अजमेर लगाया दिया गया। इसके बाद करीब छह महीने तक वे एपीओ रहे। बाद में सीआईडी सीबी, जेल और आरएसी में पदस्थ रहे। वर्तमान में वे ह्युमन राईट सेल के आईजी पद पर कार्य कर रहे थे।  

नंदिनी ने दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का कीर्तिमान हासिल किया

 मुरैना  मध्य प्रदेश के छोटे से शहर मुरैना की नंदिनी अग्रवाल ने भारत का नाम रोशन करते हुए इतिहास रच डाला। नंदिनी ने दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का कीर्तिमान हासिल किया है, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने भी मान्यता दी है। और यही नहीं, उन्होंने CA फाइनल परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1 (AIR 1) हासिल कर अपने अद्भुत टैलेंट और मेहनत का सबूत भी दिया। 16 साल की उम्र में शुरू किया CA का सफर महज 16 साल की उम्र में नंदिनी ने CA बनने का सपना देखा। अपने यूनिक टैलेंट के बल पर, उन्होंने 13 साल की उम्र में 10वीं और 15 साल में 12वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने CA के लिए पढ़ाई शुरू की और असाधारण सफलता हासिल की। रचा नया रिकॉर्ड, हासिल किए 76.75% अंक 29 नवंबर 2021 को, नंदिनी ने CA फाइनल में 800 में से 614 अंक (76.75%) प्राप्त किए और AIR 1 हासिल की। यह उपलब्धि उन्होंने सिर्फ 19 साल, 8 महीने और 18 दिन की उम्र में पाई, जो किसी भी महिला के लिए सबसे कम उम्र का रिकॉर्ड है। प्रेरणा बनी बचपन की एक खास मुलाकात नंदिनी ने अपने स्कूल के दिनों में एक गिनीज रिकॉर्ड होल्डर से मुलाकात की थी। तभी से उन्होंने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाने का सपना देखा जो तोड़ पाना मुश्किल हो। इसी सपने ने उन्हें CA फाइनल जैसे जैलेंजेज एग्जाम के लिए प्रेरित किया। कम उम्र की चुनौतियां और मजबूत इरादे इतनी कम उम्र में इंटर्नशिप पाने में उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई कंपनियों ने उम्र को वजह बताते हुए मना किया, लेकिन नंदिनी ने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी में जुटी रहीं। भाई का मिला हौसला और परिवार का संबल उनके भाई सचिन ने भी CA परीक्षा में 2021 में ऑल इंडिया 18वीं रैंक हासिल की और दोनों ने मिलकर एक-दूसरे को प्रेरित किया। नंदिनी के पिता नरेश चंद्र गुप्ता, जो एक टैक्स प्रैक्टिशनर हैं और मां डिंपल गुप्ता ने हमेशा उनके सपनों को सपोर्ट किया। नंदिनी अग्रवाल की यह उपलब्धि हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है और युवाओं के लिए प्रेरणा कि सही मेहनत और हौसले से कोई भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है।

भगवान बिरसा मुंडा की 149वीं जयंती : एक ऐतिहासिक प्रेरणा

राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस पर विशेष डॉ. कुंवर विजय शाह भोपाल भारत के समृद्ध इतिहास में भगवान बिरसा मुंडा का नाम एक ऐसे वीर योद्धा और समाज-सुधारक के रूप में अंकित है, जिन्होंने अपने जीवन को जनजातीय समाज की उन्नति और उनके अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। देश में हर साल 15 नवम्बर को उनकी जयंती पर भारत में राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाता है। यह दिन न केवल उनकी शहादत और योगदान को याद करने का है, बल्कि यह जनजातीय समुदाय की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, अनवरत संघर्ष और स्वाभिमान का उत्सव भी है। भगवान बिरसा मुंडा का जीवन और उनका संघर्ष बिरसा मुंडा जी का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखंड के उलीहातू गांव में एक साधारण मुंडा परिवार में हुआ था। उनका जीवन बेहद कठिनाइयों से भरा था और उन्हें बाल्यावस्था से ही आर्थिक संघर्षों का सामना करना पड़ा। सामाजिक असमानता, अत्याचार और विदेशी शासकों द्वारा जनजातियों पर निरंतर हो रहे शोषण ने बिरसा मुंडा के अंतर्मन को विद्रोह की भावना से भर दिया। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा लागू जमींदारी प्रथा, धर्मांतरण और जनजातियों के पारम्परिक जीवन पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष किया। उलगुलान आंदोलन का नेतृत्व बिरसा मुंडा जी ने “उलगुलान” नामक जनजातीय विद्रोह का नेतृत्व किया, जो अंग्रेजी शासन और उनके द्वारा किए जा रहे अत्याचार के खिलाफ था। “उलगुलान” का अर्थ है ‘महान विद्रोह’। इस आंदोलन का उद्देश्य अंग्रेजों द्वारा लागू की गई भूमि नीतियों, जबरन धर्मांतरण और जनजातियों की पारम्परिक जीवनशैली में दखल देने वाले कानूनों के खिलाफ आवाज उठाना था। भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में इस आंदोलन ने पूरे क्षेत्र में जनक्रांति की लहर पैदा कर दी और उन्हें “धरती आबा” या “धरती पिता” या धरा पितृ के रूप में सम्मानित किया जाने लगा। भगवान बिरसा मुंडा का समाज सुधारक के रूप में योगदान भगवान बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक भी थे। उन्होंने तत्कालीन जनजातीय समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे अंध-विश्वास, जाति-भेद, नशाखोरी, जातीय संघर्ष और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाई। उन्होंने अपने अनुयायियों को शिक्षा का महत्व समझाया और उन्हें एकता में रहने का संदेश दिया। बिरसा मुंडा ने “बिरसाइत” नामक एक धार्मिक आंदोलन भी चलाया, जिसमें उन्होंने अपने अनुयायियों को आचार-विचार की शुचिता, सादगी और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस की स्थापना वर्ष 2021 में केन्द्र सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में घोषित किया। इसका उद्देश्य भगवान बिरसा मुंडा और अन्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का सम्मान करना है। इस दिन देशभर में जनजातीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर, उनकी परंपराओं और उनके गौरवशाली इतिहास को समझने और सम्मानित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह दिवस जनजातीय समाज के संघर्षों और उनके योगदान को याद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। बिरसा मुंडा का भारतीय स्वातंत्र्य आंदोलन में योगदान भारतीय स्वातंत्र्य आंदोलन में भगवान बिरसा मुंडा का योगदान अतुलनीय है। वे न केवल अपने क्षेत्र की जनजातियों के नेता थे, बल्कि उनके संघर्ष और बलिदान ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को भी एक नई दिशा दी। उनके “उलगुलान” आंदोलन ने अन्य जनजातीय समुदायों को भी संगठित किया और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी करने की प्रेरणा दी। भगवान बिरसा मुंडा मात्र 24 साल 7 महीने की अल्पायु में 9 जून 1900 को वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी विरासत आज भी जनजातीय समाज के दिलों में जीवित है और उन्हें एक महान क्रांतिकारी जननायक के रूप में याद किया जाता है। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस का महत्व राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस का महत्व केवल बिरसा मुंडा जी के योगदान को याद करने तक सीमित नहीं है। यह जनजातीय समाज की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का जश्न मनाने का भी दिन है। जनजातीय समाज ने भारत के इतिहास में अहम भूमिका निभाई है। यह गौरव दिवस उनकी सांस्कृतिक धरोहर, संघर्षों और उपलब्धियों का सम्मान करता है। यह अवसर सभी भारतीयों को यह याद दिलाने का भी है कि जनजातीय समाज भारत की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण व अभिन्न हिस्सा है और उनके योगदान को हमें सदैव संजोकर रखना चाहिए। भगवान बिरसा मुंडा का जीवन प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें साहस, संघर्ष और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का संदेश देता है। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस हमें उनकी शिक्षाओं, राष्ट्रप्रेम और उनके संघर्ष को याद करने और जनजातीय समाज के अधिकारों और सम्मान के प्रति संवेदनशील बने रहने के लिए प्रेरित करता है। जनजातीय समाज के स्वाभिमान और उनके अधिकारों की रक्षा में भगवान बिरसा मुंडा का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस उनके प्रति हमारी कृतज्ञता, आदर और श्रृद्धांजलि का प्रतीक है।  

हाईकोर्ट ने कहा केंद्र सरकार हमें लिखकर दें कि BMHRC और AIIMS विलय का प्लान नहीं

भोपाल  गैस त्रासदी पीड़ितों के लिए उचित चिकित्सा सुविधा की मांग वाली याचिका पर एमपी हाईकोर्ट ने सुनवाई की है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र से लिखित में जवाब मांगा है कि एम्स-भोपाल और बीएमएचआरसी का विलय नहीं किया जाएगा। यह मामला 1984 के भोपाल गैस पीड़ितों के इलाज से जुड़ा है। पीड़ितों के लिए काम करने वाला संगठन ने किया विरोध दरअसल, गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाले एक NGO ने BMHRC को AIIMS में मिलाने के प्रस्ताव का विरोध किया था। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने ICMR और केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए वकील विक्रम सिंह से यह लिखित जवाब मांगा है कि दोनों अस्पतालों का विलय नहीं होगा। ICMR के पास है प्रशासनिक नियंत्रण गौरतलब है कि BMHRC, ICMR के प्रशासनिक नियंत्रण में है। सुनवाई के दौरान, विक्रम सिंह ने कहा कि विलय के प्रस्ताव को पहले ही ठुकराया जा चुका है। अदालत को बताया गया कि एक NGO ने गैस पीड़ितों की बेहतर देखभाल के लिए दोनों अस्पतालों को मिलाने के लिए पत्र लिखा था। इस प्रस्ताव पर विचार करने के बाद, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी संसदीय समिति ने 2018 में स्वास्थ्य मंत्रालय को विलय का प्रस्ताव भेजा था लेकिन इसे ठुकरा दिया गया था। विलय का हो रहा था विरोध हालांकि, भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन (BGIA), जिसने विलय का विरोध करते हुए आवेदन दिया था। संगठन ने कहा कि AIIMS-भोपाल और BMHRC के विलय के लिए एक कैबिनेट नोट फिर से चलन में है। इसके बाद, अदालत ने केंद्र सरकार से लिखित जवाब मांगा कि विलय का कोई प्रस्ताव नहीं है। डिजिटलीकरण के लिए निकाला जाएगा टेंडर अदालत को केंद्र की ओर से यह भी बताया गया कि भोपाल गैस पीड़ितों के मेडिकल रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के लिए एक टेंडर निकाला गया था, लेकिन इसे रद्द कर दिया गया, क्योंकि केवल एक ही प्रस्ताव प्राप्त हुआ था। सरकारी वकील ने कहा कि एक और टेंडर निकाला जाएगा। रिपोर्ट पेश करने को कहा उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय पर्यावरण स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (NIREH), भोपाल को अगस्त 2012 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। दरअसल, BGIA ने आरोप लगाया था कि NIREH ने 2012 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सौंपे गए काम को छोड़ दिया था। BGIA का आरोप है कि NIREH, भोपाल गैस पीड़ितों के स्वास्थ्य पर MIC गैस के प्रभाव के बजाय दूसरे विषयों पर शोध कर रहा था। गौरतलब है कि अगस्त 2012 में, सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल गैस पीड़ितों की चिकित्सा देखभाल के लिए अदालत के हस्तक्षेप की मांग करने वाली जनहित याचिका को मप्र उच्च न्यायालय को स्थानांतरित कर दिया था। न्यायमूर्ति वीके अग्रवाल की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति का गठन भी किया गया था, ताकि गैस पीड़ितों को प्रदान की जा रही चिकित्सा सुविधाओं पर नजर रखी जा सके और अपनी सिफारिशों के साथ मप्र उच्च न्यायालय को त्रैमासिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके। बाद में, याचिकाकर्ताओं ने एक अवमानना याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि निगरानी समिति की सिफारिशों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन केंद्र और राज्य सरकारों और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के अधिकारियों द्वारा नहीं किया गया।

MP हाईकोर्ट ने कहा धार कार्ड में लिखी उम्र नहीं मानी जाएगी सही, आयु नहीं पहचान का दस्तावेज है कार्ड

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जीएस आहलूवालिया की एकलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि आधारकार्ड आयु नहीं बल्कि पहचान का दस्तावेज है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव को भेजने की व्यवस्था दे दी। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मुख्य सचिव सभी जिला कलेक्टरों को इस संबंध में अवगत करा दें। यह मामला नरसिंहपुर अंतर्गत सिंहपुर पंचायत निवासी सुनीता बाई साहू की याचिका से संबंधित था। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसके पति मोहनलाल साहू की करंट लगने से मृत्यु हो गई थी। लिहाजा, शासकीय योजना अंतर्गत आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया गया था। किंतु वह आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि दिवंगत पति की आयु 64 वर्ष से अधिक थी। जबकि आधार कार्ड में दर्ज आयु के अनुसार मृत्यु के समय पति की आयु 64 वर्ष से कम थी। राज्य शासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि जनपद पंचायत ने संबंधित दस्तावेजों के आधार पर पाया था कि मृतक की आयु 64 वर्ष से अधिक थी। इसके अलावा 2023 में जारी एक परिपत्र में भी यह साफ किया गया था कि आधार कार्ड का उपयोग पहचान के लिए किया जाना चाहिए न कि जन्मतिथि सत्यापन के लिए। ऐसा इसलिए क्योंकि वह जन्मतिथि का प्रमाण-पत्र नहीं है। मप्र हाई कोर्ट सहित देश के अन्य हाई कोर्ट भी अपने पूर्व आदेशों में यह रेखांकित कर चुके हैं कि आधार कार्ड पहचान पत्र है न कि जन्मतिथि का प्रमाण पत्र। चेक-कैंट बोर्ड वार्षिक वेतनवृद्धि के लाभ पर निर्णय ले : हाई कोर्ट हाई कोर्ट ने कैंट बोर्ड, जबलपुर को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता कर्मी को वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ प्रदान करने पर निर्णय लें। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को 10 दिन के भीतर कैंट सीईओ को फ्रेश अभ्यावेदन प्रस्तुत करने कहा। कोर्ट ने सीईओ को निर्देश दिए हैं कि अभ्यावेदन पर विचार कर 30 दिन के भीतर उचित निर्णय पारित करें। जबलपुर निवासी याचिकाकर्ता सुरेश कुमार डुमार की ओर से अधिवक्ता सौरभ तिवारी व मौसम पासी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता कैंट बोर्ड में सफाई कर्मचारी के रूप में पदस्थ है। याचिकाकर्ता 2001 से वार्षिक वेतनवृद्धि पाने का हकदार है। याचिकाकर्ता को उत्कृष्ट कर्मचारी का अवार्ड भी मिला है। इस संबंध में कैंट बोर्ड में अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया। जब कोई कार्रवाई नहीं की गई तो याचिका दायर की गई।  

हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन दोनों ने अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए वोट डाला

रांची आज यानी बुधवार को झारखंड की 43 सीटों पर मतदान जारी है। इसके चलते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ वोट करने पहुंचे। दोनों ने अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए वोट डाला। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड की जनता से अपील करते हुए कहा है कि आज लोकतंत्र का पर्व है। आज हम लोगों ने अपने-अपने मतदान केंद्र में जाकर के अपने मतों का प्रयोग किया और मैं राज्य के हर एक नागरिक से अपील करता हूं कि लोकतंत्र के इस महापर्व को, इस व्यवस्था को और मजबूत करें। वर्षों बरस से चलने वाली इस लोकतंत्र के पर्व को हमें मनाना चाहिए और मजबूत करना चाहिए। बता दें कि झारखंड विधानसभा चुनाव के 43 सीटों पर सुबह 7 बजे से ही मतदान जारी है। भारी संख्या में लोग मतदान केंद्र में जाकर मतदान कर रहे हैं। साथ ही अलग-अलग पार्टी के नेता भी सुबह से ही मतदान करने में जुटे हुए हैं।

CG में जनजातीय गौरव दिवस समारोह, भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में डॉ. मनसुख मांडविया करेंगे पदयात्रा

जशपुर केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ मनसुख मांडविया (Dr Mansukh Mandaviya) छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव (CM Vishnu Deo Sai) के साथ 13 नवंबर 2024 को छत्तीसगढ़ के जशपुर में जनजातीय गौरव दिवस (Janjatiya Gaurav Divas) के अवसर पर एक खास पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे. इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मंत्रीगण भी शामिल होंगे. इस पदयात्रा का आयोजन भगवान बिरसा मुंडा की जयंती (Birsa Munda Jayanti) के उपलक्ष्य में किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक धरोहर और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान का सम्मान करना है. 10 हजार से ज्यादा वॉलेंटियर लेंगे हिस्सा इस मौके पर 10 हजार से अधिक माई भारत यूथ वालंटियर्स भाग लेंगे, जो आदिवासी विरासत की रक्षा, समावेशिता को बढ़ावा देने और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित होंगे. इस पदयात्रा के दौरान एक प्रदर्शनी स्थल पर ऐतिहासिक आदिवासी आंदोलनों, आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि और भारत के आदिवासी समुदायों की अनूठी कलात्मकता और शिल्प कौशल का प्रदर्शन किया जाएगा. इस पदयात्रा के मार्ग के ठहराव स्थलों पर आदिवासी संस्कृति, सुंदर रंगोली कलाकृतियां, पेंटिंग और पारंपरिक आदिवासी कला का उत्सव मनाने वाले नाटकों का प्रदर्शन किया जाएगा. सीधी प्रसारित कार्यशालाएं उपस्थित लोगों को आदिवासी नृत्य, संगीत और साहित्य के साथ एक परस्पर अनुभव प्रदान करेंगी जबकि आदिवासी खाद्य पदार्थों का चयन उनके स्वास्थ्य लाभों के बारे में बताएगा. पदयात्रा के मुख्य आकर्षण     सांस्कृतिक कार्यक्रम – सांस्कृतिक समृद्धि का उत्सव मनाते आदिवासी नृत्य और संगीत. स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी नेताओं के योगदान को दर्शाते हुए आदिवासी नृत्य और सांस्कृतिक प्रदर्शन.     आदिवासी आंदोलनों पर प्रदर्शनी – ऐतिहासिक आदिवासी आंदोलनों, आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि और आदिवासी समुदायों की कला व शिल्प कौशल का प्रदर्शन.     जागरूकता कियोस्क – सरकारी योजनाओं और महिला लाभार्थियों के बारे में जानकारी.     कला कार्यशालाएं – रंगोली, पेंटिंग, और आदिवासी कला-संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाएं.     युवाओं के योगदान का उत्सव – माय भारत पोर्टल और एनवायकेएस उपलब्धियां दर्शाना.     आदिवासी नेताओं को श्रद्धांजलि – प्रतिभागी प्रमुख आदिवासी हस्तियों की वेशभूषा में होंगे.     आदिवासी उत्कृष्टता का सम्मान – पद्म पुरस्कार विजेताओं का अभिनंदन और पारंपरिक खेलों का प्रोत्साहन.     आदिवासी भोजन: स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार के आदिवासी खाद्य पदार्थ परोसना. इस आयोजन का उद्देश्य आदिवासी विरासत और संस्कृति की गहन समझ को बढ़ावा देना और सरकारी कल्याणकारी पहलों में आदिवासी समुदाय को सक्रिय रूप से शामिल करना है. युवाओं को भारत की समृद्ध आदिवासी विरासत से जुड़ने, समझने और उसका सम्मान करने का अवसर देने के लिए युवा कार्यक्रम विभाग माई भारत पोर्टल के माध्यम से देशभर के युवाओं को इस पदयात्रा में शामिल होने का आमंत्रण देता है.

बुधनी सीट पर उपचुनाव में वोटिंग जारी, केंद्रीय मंत्री शिवराज ने जैत में डाला वोट

सीहोर  सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा उपचुनाव के लिए आज सुबह सात बजे से वोटिंग शुरू हो गई है। मतदान से पहले सभी बूथों पर मॉक पोल हुआ। उप निर्वाचन के लिए बुधनी विधानसभा क्षेत्र में कुल 363 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिन पर मतदान हो रहा है। निर्वाचन कार्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक बुधनी विधानसभा सीट पर सुबह 9 बजे तक 16.90% मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके थे। 17 नवंबर 2023 में बुधनी विधानसभा क्षेत्र में हुए मतदान में सुबह 9 बजे तक 14.33 प्रतिशत मतदान हुआ था। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधनी विधानसभा में अपने गृहग्राम जैत में पहुंचकर मतदान किया। कलेक्टर, एसपी ने लिया जायजा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी प्रवीण सिंह एवं एसपी दीपक कुमार शुक्ला निरंतर मतदान केंद्रों का भ्रमण कर चल रहे मतदान की कार्रवाई का जायजा ले रहे हैं। साथ ही उन्होंने मतदान केन्द्रों पर आए मतदाताओं से चर्चा भी की। इस दौरान उन्होंने मतदान सम्पन्न कराने वाले अधिकारी कर्मचारियों को व्यवस्थित ढंग से कार्रवाई संपादित करने के निर्देश दिए। महिला मतदाता भी उत्साहित मतदाताओं में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने को लेकर खासा उत्साह नजर आ रहा है। मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की कतार नजर आ रही है। सुबह से बड़ी संख्या में महिलाएं भी वोट डालने पहुंच रही हैं। इसी बीच सुबह कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल ने बकतरा के बूथ क्रमांक 9 पर पत्नी के साथ पहुंचकर मतदान किया।वहीं भाजपा प्रत्याशी रमाकांत भार्गव ने मतदान केंद्र क्रमांक 54 पर पहुंचकर वोट डाला। भेरूंदा में मतदाताओं ने की शिकायत उधर, भेरूंदां के बूथ क्रमांक 260 जनपद पंचायत में मतदान की गोपनीयता भंग होने की शिकायत कुछ मतदाताओं द्वारा की गई। मतदाताओं ने कहा कि ईवीएम मशीन के पीछे कांच लगा है। इससे मतदान की गोपनीयता भंग हो रही है। बुधनी विधानसभा उप निर्वाचन के लिए 1597 मतदान कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके साथ ही 45 सेक्टर ऑफिसर-कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, 45 सेक्टर अधिकारी पुलिस तथा पांच फ्लाइंग स्क्वाड दल बनाए गए हैं। पैदल मतदान करने पहुंचीं बुजुर्ग कांताबाई 80 वर्ष की कांताबाई ने छिंदगांव काछी मतदान केंद्र क्रमांक 245 में मतदान किया। वह पैदल चलकर ही मतदान करने पहुंचीं। उनका कहना है कि सुबह पांच बजे ही उठकर मतदान करने के लिए तैयार हो गई थी। सबसे पहले मैं मतदान करने आई हूं। इधर युवा भी उत्साहित नजर आ रहे हैं। 38 शतायु मतदाता करेंगे मतदाता बुधनी विधानसभा में कुल दो लाख 76 हजार 397 मतदाता हैं, जिनमें एक लाख 43 हजार 111 पुरुष मतदाता, एक लाख 33 हजार 280 महिला मतदाता तथा छह अन्य मतदाता तथा 194 सर्विस मतदाता हैं। बुधनी विधानसभा क्षेत्र में 18-19 वर्ष आयु के 4048 मतदाता हैं। इसी प्रकार 20-29 वर्ष आयु के 67 हजार 562 मतदाता, 30-39 वर्ष आयु के 73 हजार 300 मतदाता, 40-49 वर्ष आयु के 55 हजार 64, 50-59 वर्ष आयु के 38 हजार 572 मतदाता, 60-69 वर्ष आयु के 23 हजार 76 मतदाता, 70-79 वर्ष आयु के 10 हजार 809 मतदाता, 80-89 वर्ष आयु के 3491 मतदाता, 90-99 वर्ष आयु के 644 मतदाता तथा 100-109 वर्ष आयु के 38 मतदाता हैं। जो अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। 12 वैकल्पिक फोटोयुक्त दस्तावेजों में से कोई एक भी दिखाकर मतदाता कर सकेंगे मतदान मतदाता का नाम मतदाता सूची में दर्ज है, परंतु उसके पास किसी वजह से मतदाता परिचय पत्र उपलब्ध नहीं है। तो भी वह मताधिकार का उपयोग कर सकेगा। मतदाता परिचय पत्र के अलावा 12 वैकल्पिक फोटो युक्त दस्तावेज दिखाकर मतदान कर सकेंगे। इसी प्रकार यदि किसी कारण से किसी नागरिक को मतदाता सूचना पर्ची प्राप्त नहीं होती है, लेकिन उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज है तो भी वह मतदान कर सकेगा। मतदाता 12 वैकल्पिक फोटोयुक्त पहचान दस्तावेजों में आधार कार्ड, मनरेगा जाब कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, भारतीय पासपोर्ट, फोटो सहित पेंशन दस्तावेज, केंद्र, राज्य सरकार, पीएसयू, सार्वजनिक लिमिटेड कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को जारी किए गए फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र, बैंक, डाकघर द्वारा जारी फोटोयुक्त पासबुक। स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड भी दिखा सकते हैं राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के तहत आरजीआई द्वारा जारी स्मार्ट कार्ड, श्रम मंत्रालय की योजना के तहत जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड, सांसदों, विधायकों, एमएलसी को जारी किए गए आधिकारिक पहचान पत्र और भारत सरकार के सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा दिव्यांगजनों को जारी यूनिक डिसेबिलिटी आईडी शामिल है। अप्रवासी भारतीय मतदाताओं को केवल पहचान के लिए अपना मूल पासपोर्ट दिखाना होगा। ईपिक में किसी मतदाता के फोटोग्राफ आदि का मिलान न हो पाने के कारण मतदाता की पहचान करना संभव नहीं है।

19 मार्च को रंगपंचमी 10वीं के विज्ञान और 12वीं के शारीरिक शिक्षा विषय की, परीक्षार्थी, अभिभावक और स्कूल परेशान परीक्षा

भोपाल  मध्य प्रदेश बोर्ड ने 10वीं-12वीं के परीक्षार्थियों का त्योहार फीका करने की तैयारी कर ली है। बोर्ड ने वार्षिक परीक्षा का जो कार्यक्रम जारी किया है, उसमें 13 मार्च को 10वीं के सामाजिक विज्ञान की परीक्षा है। वहीं 19 मार्च को 10वीं के विज्ञान और 12वीं के शारीरिक शिक्षा विषय की परीक्षा है। 13 मार्च को होलिका दहन होना है और 19 मार्च को रंगपंचमी है। मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से में होली रंग पंचमी के दिन खेली जाती है। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं की परीक्षा 25 फरवरी और 10वीं की 27 फरवरी से शुरू हो रही है। 10वीं की परीक्षा 19 मार्च को खत्म होनी है और 12वीं की परीक्षा 25 मार्च तक चलेगी। मंडल ने अगस्त महीने में परीक्षा कार्यक्रम जारी कर दिया था, लेकिन किसी ने स्थानीय त्यौहारों का ध्यान नहीं रखा। अब जाकर कुछ लोगों का ध्यान इस गलती की ओर गया है तो परीक्षार्थी, उनके अभिभावक और स्कूल सभी परेशान हैं। रंग पंचमी मालवा-निमाड़ अंचलों का प्रमुख त्यौहार है। यहां होली का रंग उसी दिन जमता है। इंदौर की प्रसिद्ध गेर रंग पंचमी पर ही निकाली जाती है। भोपाल संभाग के जिलों में भी रंग पंचमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। त्योहार वाले जिलों में रंग पंचमी पर स्थानीय अवकाश होता है। यानी सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और दूसरे प्रतिष्ठानों में छुट्टी होती है। सार्वजनिक परिवहन के साधन नहीं चलते। अभिभावकों की चिंता है कि त्यौहार का दिन होने की वजह से बच्चों को परीक्षा केंद्र पहुंचने में दिक्कत होगी। वहीं त्यौहार पर परीक्षा देने का उनका मन भी नहीं करेगा। हाइस्कूल के लाखों परीक्षार्थी होंगे 19 मार्च 2025 को 10वीं के विज्ञान विषय की परीक्षा है। वहीं 12वीं का शारीरिक शिक्षा और नेशनल स्किल्स कवालिफिकेशन फ्रेमवर्क का प्रश्नपत्र होना है। 10वीं में इस साल नौ लाख 43 हजार से अधिक परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। 12वीं के परीक्षार्थियों की संख्या सात लाख है, लेकिन शारीरिक शिक्षा की परीक्षा में कम ही लोग होंगे। महत्वपूर्ण विषयों के बीच कम अंतराल 10वीं की परीक्षा में कई महत्वपूर्ण विषयों में गैप कम दिया गया है। इसमें छह मार्च को संस्कृत का पेपर है तो तीन दिन बाद 10 मार्च को गणित विषय का पेपर है। इसके दो दिन बाद13 मार्च सामाजिक विज्ञान का पेपर है।

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