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म्यूचुअल फंड SIP में लगातार बढ़ती निवेश रुचि का संकेत, पहली बार 25,000 करोड़ का आंकड़ा पार

नई दिल्ली अक्टूबर 2024 में म्यूचुअल फंड की मासिक SIP में पहली बार 25,000 करोड़ रुपये का योगदान दर्ज किया गया, जो सितंबर में 24,509 करोड़ रुपये था। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि में 16,928 करोड़ रुपये था, जिससे SIP में लगातार बढ़ती निवेश रुचि का संकेत मिलता है। अक्टूबर में म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या 21,65,02,804 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। खुदरा म्यूचुअल फंड फोलियो, जिसमें इक्विटी, हाइब्रिड और सॉल्यूशन-ओरिएंटेड योजनाएं शामिल हैं, भी 17,23,52,296 के साथ सर्वकालिक उच्च स्तर पर रहे, जो सितंबर में 16,81,61,366 थे। खुदरा AUM अक्टूबर में 39,18,611 करोड़ रुपये पर रहा, जबकि सितंबर में यह 40,44,098 करोड़ रुपये था। अक्टूबर में ग्रोथ/इक्विटी-ओरिएंटेड योजनाओं में 41,886.69 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज हुआ। अक्टूबर में 63,69,919 नई SIPs रजिस्टर्ड हुईं, और SIP AUM 13,30,429.83 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। SIP खातों की कुल संख्या अक्टूबर में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर 10,12,34,212 पहुंच गई, जो सितंबर में 9,87,44,171 थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की गहरी पकड़ और निवेशकों की परिपक्वता को दर्शाती है। इंडस्ट्री ने अक्टूबर में रिकॉर्ड AUM 67.26 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया।

औ‌द्योगिक क्षेत्र मोहासा- बाबई में 214.42 एकड़ भूमि को शामिल किये जाने की स्वीकृति

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा विद्युत एवं नवीकरणीय उर्जा उपकरणों के विनिर्माण क्षेत्र (औ‌द्योगिक क्षेत्र मोहासा- बाबई जिला नर्मदापुरम) के क्षेत्रफल विस्तार किये जाने का निर्णय लिया गया। निर्णय अनुसार विद्युत एवं नवीकरणीय उर्जा उपकरणों के विनिर्माण क्षेत्र के लिए आरक्षित 227.54 एकड़ क्षेत्रफल में औ‌द्योगिक क्षेत्र मोहासा बाबई की 214.42 एकड़ भूमि को शामिल किया गया है। इसके बाद पार्क का कुल क्षेत्रफल 441.96 एकड़ हो जायेगा। मंत्रि-परिषद ने सौर सह अन्य नवीकरणीय/अक्षय ऊर्जा अनुसंधान केन्द्र की स्थापना के लिए भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल को ग्राम भौरी जिला भोपाल स्थित 21.494 हेक्टयर भूमि आवंटित करने की स्वीकृति दी। निर्णय अनुसार ग्राम भौरी की खसरा क्रमांक 66/1 रकबा 8.438 हेक्टेयर, खसरा क्रमांक 66/2 रकबा 2.005 हेक्टेयर, खसरा क्रमांक 66/3 रकबा 2.005 हेक्टेयर, खसरा क्रमांक 69/1 रकबा 1.597 हेक्टेयर, खसरा क्रमांक 70/1 रकबा 1.946 हेक्टेयर, खसरा क्रमांक 73/1 रकबा 2.231 हेक्टेयर एवं खसरा क्रमांक 75 रकबा 4.772 हेक्टेयर में से 2.772 हेक्टेयर कुल रकबा 22.994 हेक्टेयर में से 20.994 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है। संस्थान विशुद्ध एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान में अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व स्तरीय एवं उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। प्रस्तावित अनुसंधान केन्द्र का प्रमुख उद्देश्य सोलर सेल की दक्षता में वृद्धि करना, ऊर्जा के नुकसान को कम करने के साथ पवन ऊर्जा सहित नवकरणीय ऊर्जा के अन्य स्त्रोतों में विश्वस्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा देगा होगा। मंत्रि-परिषद द्वारा 30 जून अथवा 31 दिसम्बर को सेवानिवृत शासकीय सेवकों को पेंशन निर्धारण के लिये काल्पनिक रूप से वार्षिक वेतन वृद्धि देने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत 30 जून को सेवानिवृत हुए या होने वाले शासकीय सेवकों को 1 जुलाई को निर्धारित काल्पनिक वार्षिक वेतन वृद्धि देय होगी। इसी तरह 31 दिसम्बर को सेवानिवृत हुए अथवा होने वाले शासकीय सेवकों को 1 जनवरी की स्थिति में काल्पनिक वार्षिक वेतन वृद्धि दी जायेगी। काल्पनिक वेतन वृद्धि के फलस्वरूप बड़ी हुई पेंशन का लाभ 1 मई 2023 या इसके बाद देय होगा। दिनांक 30 अप्रैल 2023 की अवधि के लिये बड़ी हुई पेंशन का भुगतान नहीं किया जायेगा। जिन शासकीय सेवकों द्वारा न्यायालय में रिट याचिकाएँ दायर की है तथा सफल हुए है। उनके संबंध में शासकीय निर्णय के दृष्टिगत ही कार्यवाही करने का निर्णय भी लिया गया। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश वित्त निगम द्वारा वाणिज्यिक कर विभाग को 150 करोड़ के हस्तांतरण मूल्य पर इंदौर स्थित नवनिर्मित भवन हस्तांतरण किये जाने का निर्णय लिया। वाणिज्यिक कर विभाग भवन का आधिपत्य प्राप्त कर विद्युत समयोजन, सामान्य मरम्मत आदि पूर्णकर नगर निगम इंदौर से भवन पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त कर भवन का उपयोग प्रारंभ कर सकेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव देवउठनी ग्यारस पर मालवीय नगर युवा सदन में तुलसी शालिग्राम विवाह में शामिल हुए

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव देवउठनी ग्यारस पर मालवीय नगर युवा सदन में तुलसी शालिग्राम विवाह में शामिल हुए। उन्होंने हरि और माँ तुलसी से प्रदेशवासियों के जीवन को सुख, समृद्धि और खुशहाली से परिपूर्ण बनाए रखने की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माता तुलसी की मंत्रोच्चार के साथ पूजा कर धूप, सिंदूर, चंदन, पुष्प अर्पित कर नैवैद्य का भोग लगाया। इस अवसर पर विधायक रामेश्वर शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि देवउठनी ग्यारस भगवान विष्णु के 4 महीने की निद्रा से जागरण का प्रतीक है। यह त्यौहार कार्तिक शुक्ल ग्यारस तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता तुलसी की पूजा की जाती है और उनके विवाह का आयोजन किया जाता है। देवउठनी ग्यारस के दिन विशेष मंत्रों का जाप कर भगवान विष्णु और माता तुलसी की आराधना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।  

राज्य सरकार ने वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत पीवीटीजी की बसाहटों का भी संरक्षण किया

भोपाल जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत पीवीटीजी की बसाहटों का भी संरक्षण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा डिण्डोरी जिले की 7 एवं मंडला जिले की 14, कुल 21 बैगा जनजाति बहुल बसाहटों के हेबिटेट राइट को मान्यता दे दी गई है। इसी प्रकार छिंदवाड़ा जिले में 12 भारिया जनजाति बहुल बसाहटों के हेबिटेट राइट को भी मान्यता प्रदान कर दी गई है। पर्यावास अधिकार (हेबिटेट राइट) मिलने से आशय यह है कि इस विशेष अधिकार से पिछड़ी जनजातियों को उनकी पारम्परिक आजीविका स्त्रोत और पारिस्थितिकीय ज्ञान को सुरक्षित रखने में भरपूर मदद मिलेगी। ये अधिकार इन पीवीटीजी समुदायों को खुद के विकास के लिए शासकीय योजनाओं और विकास नीतियों/कार्यक्रमों तक पहुंचने के लिए सशक्त बनाते हैं। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि हैबिटेट राइट्स की मान्यता मिलने के बाद ये पिछड़ी जनजातियां अपने जीवन में एक सकारात्मक बदलाव ला रही है। अब वे अपने परम्परागत जंगलों में अपनी आजीविका को बेहतर तरीके से चला रही हैं और अपनी आने वाली पीढ़ियों को यह धरोहर के रूप में भी सौंप सकते हैं। हेबिटेट राइट मिलने से ये जनजातियां अब न केवल अपने जल, जंगल, जमीन, जानवर का संरक्षण करने के लिए सक्षम हुए हैं, बल्कि अपनी पारम्परिक कृषि, औषधीय पौधों, जड़ी-बूटियों के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के यथा आवश्यकतानुसार उपयोग को लेकर भी स्वायत्त धारणाधिकारी (स्वतंत्र) हो गई हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के सुदूर वन क्षेत्रों में बसीं बैगा और भारिया जनजातियां लंबे समय से जंगलों और पहाड़ियों में अपनी परम्परागत जीवन शैली जीने की आदी हैं। पहले इन जनजातियों के पास न तो अपनी जमीन का अधिकार था, न ही जंगल पर अपना नियंत्रण। यही उनकी संस्कृति और अस्तित्व के लिए एक बड़ा अवरोध था। बैगा और भारिया जनजातियां मध्यप्रदेश की विशेष रूप से पिछड़े एवं कमजोर जनजातियों (पीवीटीजी) में आती हैं। इनकी जीवन शैली पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर करती है। इनके लिए जंगल केवल जीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह उनकी परंपराओं, रीति-रिवाजों, और पहचान का अभिन्न हिस्सा है। ये समुदाय सरकार से अपने जंगल और जीवन पर अधिकार की सुरक्षा और अपनी देशज पुरा संस्कृति की सुरक्षा की मांग कर रहे थे। सरकार ने इनकी इस मांग को गंभीरता से लिया और 21 बैगा बसाहटों तथा 12 भारिया बसाहटों के पर्यावास अधिकार (हैबिटेट राइट्स) को मान्यता प्रदान कर दी। हैबिटेट राइट केवल एक कानूनी अधिकार ही नहीं है, बल्कि इन पीवीटीजी की मूल पहचान और प्राकृतिक संस्कृति को बचाने की दिशा में सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।  

राकेश ने अपने खेत में 4 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में लगाया पॉली-हाउस, हुआ मालामाल

भोपाल प्रदेश में किसानों के लिये खेती लाभ का व्यवसाय बन सके, इसके लिये केन्द्र और राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं से किसानों को मदद कर रही हे। ऐसे ही खरगौन के एक किसान को उद्यानिकी विभाग की मदद मिली और वे अब सफलतापूर्वक खेती कर लाभ अर्जित कर रहे। खरगौन जिले के कसरावद के ग्राम सावदा के किसान राकेश पाटीदार के परिवार में अब तक पारम्परिक तरीके से खेती हुआ करती थी, लेकिन उनके परिवार को मेहनत के अनुरूप खेती से फायदा नहीं मिल पा रहा था। जब युवा किसान राकेश ने खेती करना शुरू किया, तो उन्होंने बहेतर लाभ और उन्नत तरीकों से खेती को अपनाने के लिये पॉली हाउस का लाभ लेने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया। पात्रता की आवश्यक शर्ते पूरी करने पर उन्हें उद्यानिकी विभाग से पॉली-हाउस निर्माण के लिये आर्थिक मदद मिली। किसान राकेश ने अपने खेत में 4 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में पॉली-हाउस लगवाया। इसके लिये उन्हें 16 लाख 88 हजार रुपये का अनुदान भी मिला। अब राकेश पॉली-हाउस में मिर्च और टमाटर को रोपकर उद्यानिकी फसल ले रहे हैं। उद्यानिकी फसल से उन्हें एक साल में 14 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हो रहा है। उनकी सफलता से अन्य किसान भी प्रभावित हुए हैं और उन्होंने भी उद्यानिकी फसलों के बारे में विभाग से सम्पर्क किया है। किसान राकेश बताते हैं कि खेती में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाये और शासकीय योजना का फायदा लिया जाये, तो खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है।  

विधानसभा चुनाव में सबसे रोचक लड़ाई बारामती सीट पर, अजित पवार के लिए इस चुनाव में बहुत कुछ दांव पर

महाराष्ट्र महाराष्ट्र में इस बार विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प हो गए हैं। कई सीटों पर रिश्तेदार आमने-सामने हैं। इसमें भी सबसे रोचक लड़ाई बारामती सीट पर है, जहां डिप्टी सीएम अजित पवार का मुकाबला अपने भतीजे युगेंद्र से है। छह बार के विधायक और पिछले चुनाव में 1 लाख 69 हजार वोटों से जीते अजित के लिए यह चुनाव काफी आसाना होना चाहिए था। लेकिन युगेंद्र पवार के सामने आ जाने से बारामती में फाइट बिल्कुल टाइट है और अजित पवार के लिए करो या मरो के हालात बन गए हैं। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में अजित यहां मुंह की खा चुके हैं। तब उन्होंने सुप्रिया सुले के खिलाफ अपनी पत्नी को मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। दांव पर बहुत कुछ अजित पवार के लिए इस चुनाव में बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है। पहले ही झटके खा चुके अजित अगर यहां हार जाते हैं उनकी सियासत ढलान की तरफ जाने लगेगी। इसकी झलक लोकसभा चुनाव में भी दिख चुकी है, जहां सुप्रिया सुले ने अजीत पवार की विधानसभा में भी अच्छी-खासी बढ़त बनाई थी। लोकसभा चुनाव में पत्नी की हार से अजित काफी दुखी थे। उन्होंने फैसला कर लिया था कि अब वह बारामती से कभी चुनाव नहीं लड़ेंगे, क्योंकि लोगों ने उनका काम पसंद नहीं किया। इसके बाद अजित के छोटे बेटे जय पवार को युगेंद्र के सामने उतारने की योजना बनी थी। लेकिन पार्टी द्वारा हुए दो सर्वे में इस बात के संकेत मिले थे कि जय पवार के सामने युगेंद्र बड़ी आसानी से जीत जाएंगे। बदली है रणनीति इस चुनाव में अजित पवार ने अपनी रणनीति भी बदली है। अब वह लोगों के बीच अधिक मुस्कुराते हैं। इतना ही नहीं, अजित ने अपना पहनावा भी बदला है। अब अजित पवार गुलाबी कपड़े पहनने पर अधिक जोर दे रहे हैं। हालांकि इसके बावजूद उनके लिए यह चुनाव आसान नहीं होने जा रहा है। वैसे तो अजित पवार की फैन फॉलोविंग बारामती में काफी है, लेकिन यह शहरी क्षेत्र में ज्यादा है। बारामती शहर के तमाम युवा और व्यवसायी अजित को ही वोट देने की बात कहते हैं। वहीं, तमाम लोगों का यह भी मानना है कि अजित पवार ने बारामती के लिए बहुत कुछ किया है। युगेंद्र पर शरद पवार का वरदहस्त दूसरी तरफ युगेंद्र के पक्ष में सबसे बड़ी बात उनके ऊपर शरद पवार का वरदहस्त होना है। इसके चलते लोग युगेंद्र को अधिक गंभीरता से ले रहे हैं। शरद पवार ने भी यह स्पष्ट संकेत दिया है कि यह चुनाव युगेंद्र बनाम अजित पवार नहीं, बल्कि शरद पवार बनाम अजित पवार है। युगेंद्र के नामांकन के दिन भी यह स्पष्ट नजर आया था। शरद पवार नामांकन के वक्त युगेंद्र के साथ मौजूद थे। जबकि लोकसभा चुनाव में जब उनकी बेटी सुप्रिया नामांकन करने गई थीं तब शरद पवार नहीं थे। शहरी वोटर बनाम ग्रामीण वोटर यह बात स्पष्ट है कि इस चुनाव में परिणाम शहरी वोटर बनाम ग्रामीण वोटर से तय होगा। वोटरों को लुभाने के लिए अजित का परिवार भी मैदान में हैं। जहां पत्नी सुनेत्रा गांव के लोगों से बात कर रही हैं, वहीं बेटा जय भी मैदान में पूरी तरह से सक्रिय है। इसके अलावा अजित खुद बारामती के 59 गांवों की यात्रा पर निकले हुए हैं। अजित पवार लोगों से यह भी कह रहे हैं कि लोकसभा में ताई यानी सुले को जिताया तो अब विधानसभा में दादा यानी मुझे जिताएं। उन्हें यह भी उम्मीद है कि महायुति सरकार की लड़की बहिन योजना उनके पक्ष में काम करेगी। ऐसा होने पर इस विधानसभा क्षेत्र की 1.87 लाख महिला वोटर उनके लिए वोट कर सकती हैं।

हरियाणा कमाई में दूसरे नंबर पर, इसके बाद भी 70 फीसदी लोग बीपीएल धारी

नई दिल्ली हरियाणा को देश के चंद समृद्ध राज्यों में गिना जाता है। प्रति व्यक्ति आय के मामले में वह काफी आगे है और कई ग्रामीण जिले में देश के तमाम शहरी क्षेत्रों को मात देते हैं। इसके बाद भी एक आंकड़ा सभी को चौंका रहा है कि हरियाणा में 70 फीसदी लोग बीपीएल के अंतर्गत आते हैं। राज्य के उपभोक्ता एवं आपूर्ति मामले मंत्रालय के डेटा से यह बात पता चली है। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार आधार संचालित राज्य की जन वितरण प्रणाली में कुल 1.98 करोड़ लोग शामिल हैं, जबकि सूबे की कुल आबादी ही 2.8 करोड़ मानी जाती है। इस तरह हरियाणा के 70 फीसदी लोग फ्री का राशन जैसी सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। यह हैरानी की बात है क्योंकि बीते साल ही जारी प्रति व्यक्ति आय के आंकड़े में हरियाणा दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर कर्नाटक है, जहां प्रति व्यक्ति आय 3 लाख के पार है। वहीं दूसरे नंबर पर हरियाणा है, जहां प्रति व्यक्ति सालाना आय 2,96,685 है। यहां तक कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात जैसे औद्योगिक राज्य भी उससे पीछे हैं। फिर भी बीपीएल कार्ड धारकों की संख्या इतनी अधिक होना चौंकाने वाला है। यह आंकड़ा बीते कुछ समय में तेजी से बढ़ा है। इसी साल अप्रैल का डेटा था कि 63 फीसदी लोग बीपीएल के दायरे में आते हैं और अब यह आंकड़ा बढ़कर 70 पर्सेंट हो गया है। माना जा रहा है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने के मकसद से अभियान चलाया गया होगा और उसके चलते ही यह आंकड़ा बढ़ गया है। दिलचस्प है कि दिसंबर 2022 में यह संख्या 1.24 करोड़ ही थी, जो अब अब बढ़कर लगभग दो करोड़ होने जा रही है। इस तरह बीते लगभग दो साल के अंदर ही 75 लाख लोगों को बीपीएल में ऐड किया गया है। बीपीएल को राज्य में मिलते हैं क्या फायदे, प्लॉट का भी ऐलान बीपीएल कार्ड धारको को प्रति व्यक्ति के हिसाब से हर महीने 5 किलो राशन मिलता है, जबकि दो लीटर तेल 40 रुपये के रेट से मिलता है। इसके अलावा 13.5 रुपये प्रति किलो के भाव से चीनी दी जाती है। यह हैरानी की बात है कि समृद्ध कहे जाने वाले हरियाणा में बीपीएल की संख्या कैसे लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में नायब सिंह सैनी सरकार ने कहा था कि 100 वर्ग गज का प्लॉट भी ग्रामीण इलाकों में बीपीएल परिवारों को दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इसके चलते भी संख्या में इजाफा हो रहा है। राज्य में हर महीने लगभग 10 लाख क्विंटल राशन वितरित होता है। मनोहर लाल खट्टर सरकार के दौर में भी उठा था सवाल एक सवाल यह भी है कि यदि हरियाणा में इतने बीपीएल हैं तो फिर राज्य सरकार के विकास के दावों का क्या हुआ। यदि उसके दावे सही हैं तो फिर बीपीएल का आंकड़ा लगातार घटने की बजाय बढ़ क्यों रहा है। यह मसला मनोहर लाल खट्टर सरकार के समय में भी उठा था। तब कहा गया था कि लोगों ने अपनी कमाई का जो आंकड़ा दिया है, उसके आधार पर ही कार्ड बने हैं। ऐसे में सवाल यह है कि कोई प्रामाणिक तरीका होना चाहिए या नहीं कि जो भी डेटा लोग दे रहे हैं, उसे चेक किया जा सके।

भोपाल में सीएम राइज स्कूल में एक अनोखा टॉयलेट देखने को मिला, गर्ल्स टॉयलेट को बॉयज टॉयलेट में कन्वर्ड कर दिया

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित सीएम राइज स्कूल में एक अनोखा टॉयलेट देखने को मिला है. यहां के स्कूल प्रबंधन ने गर्ल्स टॉयलेट को बॉयज टॉयलेट में कन्वर्ड कर दिया है. स्कूल प्रबंधन द्वारा किया गया यह कारनामा इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देख हर कोई हैरान है. भोपाल के जहांगीराबाद स्थित सीएम राइज कांसेप्ट स्कूल, बरखेड़ी को शासकीय कन्या आवासीय संस्कृत विद्यालय और हॉस्टल के भवन में फिर से कब्जा मिल गया है. इन दिनों यहां शिफ्टिंग का काम चल रहा है, लेकिन इस बीच यह स्कूल सुर्खियों में आ गया है. दरअसल, इस स्कूल की दूसरी मंजिल पर लड़कियों के लिए टॉयलेट बना हुआ था, लेकिन अब इस टॉयलेट को बगैर तोड़े इसी के ऊपर बॉयज टॉयलेट बिना दिए गए हैं.

पीएम मोदी और धीरेंद्र शास्त्री के बीच मुलाकात हुई. इस दौरान दोनों नेताओं ने हाथ जोड़कर एक-दूसरे का अभिवादन किया

नई दिल्ली बीजेपी सांसद अनिल बलूनी के दिल्ली स्थित आवास पर उत्तराखंड का इगास पर्व रात को मनाया गया. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई वीवीआईपी लोग शामिल हुए. बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे. पीएम मोदी और धीरेंद्र शास्त्री के बीच मुलाकात भी हुई. इस दौरान दोनों नेताओं ने हाथ जोड़कर मुस्कराते हुए एक-दूसरे का अभिवादन किया. अनिल बलूनी के आवास पर मनाए गए इस पर्व में बाबा रामदेव, जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर अवधेशानंद जी महाराज, बागेश्वर बाबा पंडित धीरेंद्र शास्त्री समेत अन्य संत भी पहुंचे थे. इसके अलावा देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे. PM मोदी ने उत्तराखंडवासियों को दी बधाई   प्रधानमंत्री मोदी ने भी इगास पर्व के लिए उत्तराखंड के लोगों को बधाई दी. उन्होंने कहा, “दिल्ली में आज मुझे भी उत्तराखंड से लोकसभा सांसद अनिल बलूनी जी के यहां इस त्योहार में शामिल होने का सौभाग्य मिला. मेरी कामना है कि यह पर्व हर किसी के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाए.”   अनिल बलूनी ने PM मोदी को कहा शुक्रिया उत्तराखंड के इस पर्व में शामिल होने के लिए गढ़वाल से बीजेपी सांसद अनिल बलूनी ने प्रधानमंत्री मोदी समेत सभी दिग्गजों का आभार जताया. उन्होंने पीएम का आभार जताते हुए कहा कि हम उत्तराखंडवासियों के लिए आज का दिन बहुत विशेष है. मेरे दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित इगास के कार्यक्रम को आपकी उपस्थिति ने विराट भव्यता ही नहीं दी, बल्कि लगभग लुप्त हो चुके हमारे इस लोकपर्व के आयोजन को नई पहचान भी दी. दीपावली के बाद उत्तराखंड में मनाया जाता है इगास बग्वाल उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र में दीपावली के ठीक 11 दिन बाद एक पर्व मनाया जाता है, जिसे इगास बग्वाल कहा जाता है. इगास बग्वाल न सिर्फ उत्तराखंड का पारंपरिक पर्व है, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति का प्रतीक भी है. उत्तराखंड में इगास बग्वाल को मनाने की पीछे एक कहानी काफी प्रचलित है. ऐसा कहा जाता है कि गढ़वाल में भगवान श्रीराम के वनवास के बाद अयोध्या लौटने का समाचार देरी से पहुंचा था और पहाड़ में लोगों ने तभी दीपावली मनाई थी. ये त्योहार देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर माना जाता है. इसकी दूसरी पहचान बूढ़ी दीपावली के नाम से भी है. इगास पर्व में मुख्य आकर्षण का केंद्र मशाल होती है. इसमें चीड़ की लकड़ी से बनी मशाल जलाई जाती है. जिसे भैलो कहा जाता है. इस दौरान लोग गीतों और नृत्य का आनंद लेते हैं.

जनसंख्या के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश 5वें स्थान पर है, जीडीपी में 8.40 फीसदी की हिस्सेदारी

नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल की शुरुआत में कहा था कि 2027-28 तक भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। उन्होंने कहा था कि 5 ट्रिलियन डॉलर GDP यानी सकल घरेलू उत्पाद का लक्ष्य पाते करते ही देश यह उपलब्धि हासिल कर लेगा। अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की बढ़ती रफ्तार से इसकी संभावनाएं और बढ़ गई हैं। साथ ही अनुमान भी लगाया जाने लगा है कि 6 सालों में भारत का नॉमिनल जीडीपी दोगुने के करीब हो जाएगा। सबसे अमीर टॉप 5 राज्य इस लिस्ट में टॉप पर महाराष्ट्र है, जो देश की जीडीपी में 13.30 फीसदी का योगदान दे रहा है। इसके बाद 8.90 प्रतिशत का योगदान देने वाला तमिलनाडु है। तीसरे और चौथे स्थान पर कर्नाटक और गुजरात है, जो क्रमश: 8.20 फीसदी और 8.10 फीसदी का योगदान देते हैं। जनसंख्या के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश 5वें स्थान पर है, जिसकी देश की जीडीपी में 8.40 फीसदी की हिस्सेदारी है। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली इस लिस्ट में 13वें स्थान पर है। यहां वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए GSDP का अनुमान 11.07 लाख करोड़ रुपये का है। वहीं, दिल्ली देश की अर्थव्यवस्था में 3.6 प्रतिशत का योगदान देता है। एसएंडपी ग्लोबल के अनुमानों के हवाले से बताया जा रहा है कि वित्तीय वर्ष 2030-31 तक भारत की नॉमिनल जीडीपी दोगुने के करीब होकर 7 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर लेगी। तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने की दौड़ में कई राज्य ऐसे उभर कर आए हैं, जो प्रति व्यक्ति GDSP यानी सकल राज्य घरेलू उत्पाद और जीडीपी के लिहाज से योगदान में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

रिपोर्ट आई सामने, चैंपियंस ट्रॉफी के लिए अगर पाकिस्तान नहीं हुआ राजी तो फिर इस देश में खेली जा सकती है

नई दिल्ली आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की मेजबानी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी पीसीबी के पास है। पीसीबी की मुश्किलें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने बढ़ा रखी हैं। बीसीसीआई ने आईसीसी के जरिए पाकिस्तान पर दबाव बनाया है कि फरवरी-मार्च में खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट को हाइब्रिड मॉडल पर आयोजित किया जाए। भारतीय टीम अपने मैच दुबई में खेले और बाकी के मैच पाकिस्तान में आयोजित किए जाएं। हालांकि, पाकिस्तान इसके लिए फिलहाल राजी नहीं है। यहां तक कि रिपोर्ट्स आ रही हैं कि भारतीय टीम के पाकिस्तान नहीं आने पर पाकिस्तान टूर्नामेंट की मेजबानी करने से पीछे हट सकता है। अगर ऐसा होता है तो फिर एक नए देश को टूर्नामेंट की मेजबानी करने का मौका मिल सकता है। दरअसल, क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीसीआई ने ईमेल के जरिए आईसीसी को सूचित किया है कि भारतीय टीम चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पाकिस्तान नहीं जाएगी। सुरक्षा कारणों से भारत सरकार भी इसके पक्ष में नहीं होगी। ऐसे में टूर्नामेंट हाइब्रिड मॉडल पर आयोजित किया जाए। आईसीसी ने ये ईमेल पीसीबी को भेज दिया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इसके लिए तैयार नहीं है। उधर, पाकिस्तान सरकार ने पीसीबी पर दबाव डाला है। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पाकिस्तान सरकार ने बोर्ड से कहा है कि अगर भारतीय टीम पाकिस्तान नहीं आती है तो वे टूर्नामेंट की मेजबानी को छोड़ सकते हैं। सरकार की ओर से ये भी संकेत मिला है कि पाकिस्तान को हाइब्रिड मॉडल पर भी टूर्नामेंट को आयोजित करने के लिए राजी नहीं होना चाहिए। ऐसे में अगर पाकिस्तान टूर्नामेंट की मेजबानी करने से पीछे हटता है तो फिर पूरा टूर्नामेंट साउथ अफ्रीका में आयोजित हो सकता है। क्यों बन सकता है साउथ अफ्रीका मेजबान? अगर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी से पीछे हटा तो फिर साउथ अफ्रीका में इस टूर्नामेंट का आयोजन इसलिए भी हो सकता है, क्योंकि वही सभी के लिए एक अच्छा विकल्प होगा। फरवरी के पहले सप्ताह में वहां एसए20 लीग खत्म हो जाएगी और उसके बाद चैंपियंस ट्रॉफी वाली विंडो खाली होगी। इसके अलावा साउथ अफ्रीका में लंबे समय से कोई आईसीसी इवेंट आयोजित नहीं हुआ तो ये एक अच्छा विकल्प आईसीसी के लिए भी हो सकता है। हालांकि, 2027 के वनडे विश्व कप की संयुक्त मेजबानी साउथ अफ्रीका को जिम्बाब्वे के साथ मिलकर करनी है।

ऑनलाइन फूड डिलीवरी में बड़ी लापरवाही,डिलीवरी में धारदार ब्लेड निकली

बड़वानी  ऑनलाइन फूड डिलीवरी के मामलों में अब तक आपने कीड़े-मकोड़े निकलने की घटनाएं ही सुनी होंगी, लेकिन तब क्या हो जब आपके खाने के पार्सल में धारदार ब्लेड निकल आए। जी हां! मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा में एक होटल के पार्सल में शेविंग ब्लेड निकलने से हड़कंप मच गया है। अस्पताल में मंगाया था पार्सल दरअसल, कृषि उपज मंडी सेंधवा में कार्यरत कर्मचारी कल्पना गोयल ने पत्रकारों को बताया कि आज उन्होंने राजकमल होटल से दो पार्सल बुलवाए थे। उन्होंने बताया कि उनकी मां बीमार है और उन्हें देखने परिवार के अन्य सदस्य भी आए थे। इसलिए अस्पताल में ही दो पार्सल बुलवाए गए थे। एक पार्सल का खाना खाकर दूसरा खोला तो… उन्होंने आरोप लगाया कि एक पार्सल का भोजन समाप्त करने के बाद जब दूसरा पार्सल खोला गया तो चावल के डब्बे में शेविंग ब्लेड निकली। यह देखकर सभी घबरा गए और उन्होंने आगे का भोजन नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि होटलों में सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता और इतनी खतरनाक चीज जानलेवा हो सकती थी। उन्होंने कहा कि अभी तक तो कीड़े मकोड़े ही निकल रहे थे। अब ये सब चीजें निकलने लगी हैं। होटल संचालक ने पेश की सफाई उधर इस पूरे मामले में होटल संचालक ने अपनी सफाई पेश की है। भोजनालय के संचालक योगेश जोशी ने बताया कि उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि यह घटना कैसे हुई है। उन्होंने कहा कि चावल रखने का कंटेनर काफी छोटा था और चावल हाथ से ही भरे जाते थे। यदि ब्लेड होता तो यह रखने वाले के हाथ में भी लग जाता। फिर भी उन्होंने घटना पर खेद प्रकट किया है। फिलहाल मंडी कर्मचारी ने प्रशासन से मामले में कार्रवाई की मांग की है। हालांकि उन्होंने कहीं शिकायत नहीं की है।

मुस्लिम कानून के तहत, ससुर को अपने मृत बेटे की विधवा को गुजारा भत्ता देने की जरूरत नहीं – हाईकोर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ससुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है और बड़ी टिप्पणी की है. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने दोहराया है कि मुस्लिम कानून के तहत, ससुर को अपने मृत बेटे की विधवा को वित्तीय सहायता करने की जरूरत नहीं है. ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और सत्र अदालतों के आदेशों को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता ससुर को उसकी मृत्यु के बाद अपनी बहू को मासिक गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था. शिवपुरी की अदालत ने ससुर के खिलाफ दिया था फैसला दरअसल, शिवपुरी की एक अदालत ने आदेश दिया था कि ससुर अपनी विधवा बहू को हर महीने 3000 रुपये का गुजारा भत्ता देंगे. पूरा मामला शरीफ बनाम इशरत बानो का है. इशरत की शादी साल 2011 में 14 जून को हुई थी. साल 2015 में 30 जून को शरीफ की मौत हो गई. इसके बाद इशरत ने अपने ससुर बशीर खान के खिलाफ शिवपुरी की मजिस्ट्रेट कोर्ट में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया. बहू ने मांगे थे 40 हजार रुपए प्रतिमाह इशरत ने अपने ससुर से 40 हजार रुपये हर महीने गुजारा भत्ता देने की मांग की थी. साल 2021 में 9 फरवरी को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अपने फैसले में बशीर खान को अपनी विधवा बहू को 3,000 रुपये हर महीने देने को कहा. इसके बाद बशीर खान ने एडीजे कोर्ट में अपील की, जहां 2022 में 21 जनवरी को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया. इसके बशीर खान हाईकोर्ट पहुंचे. बशीर के वकील अक्षत जैन ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक एक पिता को अपने बेटे की विधवा को भरण-पोषण देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है. क्या कहता है हिंदू मैरिज एक्ट हालांकि हिंदू मैरिज एक्ट में यह कानून ठीक उलटा है. एक्ट के तहत विधवा बहू अपने ससुर से भरण-पोषण का दावा कर सकती है. लेकिन इसके लिए कुछ शर्त भी हैं. जैसे कि विधवा बहू अपनी कमाई या संपत्ति से अपना भरण-पोषण ना कर पाती हो. विधवा बहू के पास कोई संपत्ति ना हो. विधवा बहू के पति, पिता या माता की संपत्ति हो. विधवा बहू का कोई बेटा या बेटी हो. हिंदू महिला को दूसरी शादी के बाद भी संपत्ति का हक इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुताबिक अगर विधवा बहू अपने ससुराल में नहीं रहती है तो भी वह ससुर से भरण-पोषण का दावा कर सकती है. इसके अलावा आपको बता दें कि हिंदू विधवा महिला यदि दूसरी शादी भी कर लेती है तो उसका अपने पहले पति की संपत्ति का पूरा अधिकार होगा. कर्नाटक हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया था. कोर्ट का कहना था कि अगर कोई विधवा महिला दोबारा शादी करती है तो अपने मृत पति के संपत्ति से उसका हक खत्म नहीं होगा.

कोहली के पर्थ पहुंचने पर ऑस्ट्रेल‍ियाई मीडिया के कई अखबारों में पहले पन्ने पर उनकी छपी तस्वीर, हिंदी-पंजाबी में छपे आर्ट‍िकल

नई दिल्ली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का पहला मुकाबला 22 नवंबर से शुरू होना है. लेकिन इस पहले टेस्ट से 10 दिन पहले विराट कोहली का खुमार ऑस्ट्रेल‍ियाई मीडिया पर स‍िर चढ़कर बोल रहा है. किंग कोहली के पर्थ पहुंचने के बाद ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में कोहली का बुखार छा गया है. विराट कोहली के पर्थ पहुंचने पर ऑस्ट्रेल‍ियाई मीडिया के कई अखबारों में पहले पन्ने पर उनकी तस्वीर छपी. खास बात यह रही कि फैन्स को खुश करने के लिए स्थानीय मीडिया ने हिंदी और पंजाबी में छपी हेडलाइंस में उनकी तस्वीर को दिखाया गया, जो कोहली की अपार लोकप्रियता और आगामी सीरीज में उनके महत्व को साफ तौर पर दर्शाता है. न्यूजपेपर्स में विराट कोहली का पोस्टर था और इस पर कॉलम था कि बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी नई एशेज क्यों है और पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में किन मैचों का इंतजार करना चाहिए. इन आर्ट‍िकल्स में  यशस्वी जायसवाल और ऋषभ पंत के बारे में बताया गया है. पहले पन्ने पर हिंदी में एक बोल्ड हेडलाइन थी, “युगों की लड़ाई” दिखाया गया. जबकि एक अलग लेख में युवा भारतीय सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल को पंजाबी हेडलाइन ‘नवम राजा’ या ‘नया राजा’ के साथ दिखाया गया. ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में कोहली को लेकर हो रही इस तरह की रिपोर्ट‍िंग ने ऑस्ट्रेलियाई खेल पत्रकारों को भी सरप्राइज कर दिया है. कोहली रविवार शाम को पर्थ पहुंचे. वह 22 से 26 नवंबर तक ऑप्टस स्टेडियम में भारत की सीरीज के पहले मैच से दो सप्ताह पहले अपने टेस्ट टीम के ख‍िलाड़‍ियों संग शामिल हुए. 36 साल की उम्र में कोहली के सामने सबसे बड़ा चैलेंज ऑस्ट्रेल‍िया की सरजमीं पर खुद को साबित करना है. न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत की घरेलू सीरीज 0-3 के व्हाइटवॉश के साथ समाप्त हुई. वहीं इस दौरान विराट कोहली की खूब आलोचना हुई, ज‍िन्होंने 15.50 के एवरेज से सिर्फ 93 रन बनाए. जिससे उन पर बॉर्डर-गावस्कर सीरीज से पहले प्रेशर बढ़ गया. ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए भारतीय टीम: रोहित शर्मा (कप्तान), जसप्रीत बुमराह (उप-कप्तान), यशस्वी जायसवाल, अभिमन्यु ईश्वरन, शुभमन गिल, विराट कोहली, केएल राहुल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), सरफराज खान, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), आर अश्विन, रवींद्र जडेजा, मोहम्मद सिराज, आकाश दीप, प्रसिद्ध कृष्णा, हर्षित राणा, नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर. पहले टेस्ट के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम: पैट कमिंस (कप्तान), स्कॉट बोलैंड, एलेक्स कैरी, जोश हेजलवुड, ट्रेविस हेड, जोश इंग्लिस, उस्मान ख्वाजा, मार्नस लाबुशेन, नाथन लायन, मिचेल मार्श, नाथन मैकस्वीनी, स्टीव स्मिथ, मिचेल स्टार्क. भारतीय टीम का ऑस्ट्रेलिया दौरा (नवंबर 2024 – जनवरी 2025) 22-26 नवंबर: पहला टेस्ट, पर्थ 6-10 दिसंबर: दूसरा टेस्ट, एडिलेड 14-18 दिसंबर: तीसरा टेस्ट, ब्रिस्बेन 26-30 दिसंबर: चौथा टेस्ट, मेलबर्न 03-07 जनवरी: पांचवा टेस्ट, सिडनी

मनमानी फीस वसूली और फर्जी पुस्तकों के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का दिया आदेश

जबलपुर प्रशासन द्वारा मनमानी फीस वसूली और फर्जी पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की जांच में सख्त कार्रवाई न किए जाने के मामले में आधा दर्जन निजी स्कूल प्रबंधनों ने जबलपुर हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष शासन की ओर से स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई। युगलपीठ ने रिपोर्ट को संतोषजनक नहीं पाया और एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता रॉयल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, लिटिल किंगडम, स्मॉल वंडर्स, नचिकेता हायर सेकेंडरी स्कूल, स्टेम फील्ड इंटरनेशनल सहित अन्य निजी स्कूल प्रबंधनों की ओर से दायर अपील में कहा गया है कि मनमानी फीस वृद्धि और फर्जी पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की जांच जबलपुर जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। पूर्व में कई स्कूल प्रबंधनों के खिलाफ मामले दर्ज कर प्राधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था। स्कूल प्रबंधन जांच में सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें आशंका है कि दीवाली अवकाश के दौरान प्रशासन उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकता है। युगलपीठ ने याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान आरोपी स्कूल संचालकों और स्टाफ के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई न करने के आदेश दिए थे। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता स्कूल प्रबंधन को निर्देशित किया है कि वे जिला समिति की जांच में पूरा सहयोग करें और अपेक्षित दस्तावेज प्रस्तुत करें। साथ ही युगलपीठ ने जिला प्रशासन से कार्रवाई के संबंध में जवाब मांगा था। प्रशासन की रिपोर्ट को संतोषजनक न पाते हुए युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिका पर अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।

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