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पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका, जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जेडीएस सांसद प्रज्वल रेवन्ना को रेप और यौन उत्पीड़न मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रज्वल काफी प्रभावी व्यक्ति हैं। रेवन्ना की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि चार्जशीट के मुताबिक शुरुआती शियाकत में आईपीसी की धारा 376 नहीं लगाई गई थी। बेंच ने कहा कि कर्नाटक हाई कोर्ट के 21 अक्टूबर के आदेश में दखल नहीं दिया जाएगा। रोहतगी ने कहा छह महीने बाद वह कोर्ट जाने की उन्हें छूट दी जानी चाहिए। बेंच ने कहा कि इसपर वे कुछ नहीं कह सकते और फिर याचिका खारिज कर दी। बता दें कि अगस्त में एसआईटी ने प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ 2144 पेज की चार्जशीट फाइल की थी। चार्जशीट में प्रज्वल रेवन्ना के घर में काम करने वाली महिला के यौन शोषण की बात भी कही गई थी। इसके अलावा उनके खिलाफ दो और यौन उत्पीड़न के मामलों का जिक्र इसमें था। इससे पहले प्रज्वल रेवन्ना ने जमानत के लिए हाई कोर्ट में अर्जी दी थी। हाई कोर्ट ने हासन के पूर्व सांसद की दो अग्रिम जमानत याचिकाओं को भी खारिज कर दिया था। प्रज्वल होलेनरसिपुरा से जद (एस) विधायक एच डी रेवन्ना के पुत्र और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के पोते हैं। प्रज्वल रेवन्ना पर आरोप हैं कि उन्होंने कई महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया और उनका वीडियो भी बनवाया। लोकसभा चुनाव से पहले वीडियो लीक हो गए थे। इसके बाद वह काफी दिनों तक गायब रहे और फिर एक वीडियो मेसेज भेजने के बाद उन्होंने सरेंडर कर दिया था।

दिवाली में पटाखे जलने पर बोला सुप्रीम कोर्ट, टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी धर्म प्रदूषण को बढ़ावा नहीं देता

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पटाखों की बिक्री और फोड़ने पर रोक लगाने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मौजूदा समय में पटाखों के प्रतिबंध का खुला उल्लंघन करते हुए एक वार्षिक गतिविधि है। यहां तक ​​कि दिवाली के कई दिनों बाद भी, न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी धर्म प्रदूषण को बढ़ावा नहीं देता। पटाखे फोड़ने से हो रहा मौलिक अधिकारों का हनन दिल्ली के वार्षिक वायु गुणवत्ता संकट पर एक मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति अगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि कोई भी धर्म ऐसी किसी भी गतिविधि को प्रोत्साहित नहीं करता है जो प्रदूषण पैदा करती है। अगर इस तरह से पटाखे फोड़ें जाते हैं तो यह नागरिकों के स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार को भी प्रभावित करता है। पटाखों पर प्रतिबंध के लिए बनाए स्पेशल सेल अदालत ने पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर दिल्ली पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने जो किया वह महज दिखावा है। आपने केवल कच्चा माल जब्त किया है। अदालत ने कहा कि जितनी सख्ती से पटाखों पर प्रतिबंध होना चाहिए था, उतनी गंभीरता से नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को पटाखों पर प्रतिबंध को अमल में लाने के लिए स्पेशल सेल बनाने का निर्देश दिया है। 25 नवंबर तक पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की रखी मांग अदालत ने दिल्ली सरकार से 25 नवंबर तक पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की है। पटाखे फोड़ने के बाद उनसे निकले जहरीले कैमिकल के कण बादलों की चादर पर बिखर जाते हैं। इससे लोगों को सांस लेने में समस्याएं होती हैं और भी अन्य तरह के स्वास्थ्य संबंधी गंभीर प्रभाव पड़ते हैं। राजधानी दिल्ली में बीते सात दिनों से कई इलाकों में एक्यूआई का लेवल 400 के आस-पास बना हुआ है। इससे लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के होने का खतरा बना हुआ है।

मंत्री अनिल विज के जनता दरबार में सुनवाई के दौरान कड़े तेवर दिखाई दिए और तमाम अधिकारी भी मौजूद रहे

अंबाला हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज एक बार फिर जनता दरबार में एक्शन मोड़ में दिखाई दिए। उन्होंने हर सोमवार अंबाला कैंट विधानसभा क्षेत्र के लिए जनता दरबार लगाना शुरू कर दिया है। जिसमें अंबाला कैंट विधानसभा क्षेत्र की जनता अपनी शिकायत लेकर अंबाला छावनी की पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस पहुंची। विज के जनता दरबार में सुनवाई के दौरान कड़े तेवर दिखाई दिए और तमाम अधिकारी भी मौजूद रहे। इस बार अंबाला कैंट के ही लोगों की शिकायतें सुनेंगे विज बता दें कि इस बार फर्क सिर्फ इतना है कि अनिल विज पूरे प्रदेश की नहीं सिर्फ अंबाला कैंट के ही लोगों की शिकायतें सुनेंगे। आज के जनता दरबार के दौरान ज्यादातर समस्याएं बिजली, पानी, साफ-सफाई, नाले नालियों की ज्यादातर समस्याएं जनता दरबार में देखने को मिली है। कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कई समस्याओं पर तुरंत एक्शन लेने के भी निर्देश दिए। विज ने कहा कि वे कैंट क्षेत्र से विधायक है तो सिर्फ कैंट की शिकायतें सुनेंगे। पूरे प्रदेश की शिकायतें मुख्यमंत्री देखेंगे। अनिल विज ने अधिकारियों को स्पष्ट तौर पर कहा कि जनता की समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई हो दोबारा से शिकायतें रिपीट न हो। कांग्रेस पार्टी नहीं कई धड़ों का समूह है- अनिल विज विधानसभा सत्र 3 दिन के लिए लगने जा रहा है लेकिन कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष नहीं चुन पाई। जिस पर अनिल विज ने कहा नेता पार्टी या धड़े का होता है, लेकिन सामुहिक नहीं होते। कांग्रेस पार्टी नहीं कई धड़ों का समूह है। ये आपस में मिलकर कर नहीं सकते। इसलिए नेता प्रतिपक्ष का चुनाव नहीं हो पा रहा। जनता दरबार में आए फरियादी ने अंबाला छावनी में बिजली चोरी की शिकायत दी है। बिजली डिपार्टमेंट को हजारों बार कम्पलेंट की‌। परंतु हमारी नहीं सुनी। अब हम कैबिनेट मंत्री अनिल विज के पास पहुंचे हैं और हमें विश्वास है कि हमारी यहां सुनवाई होगी। वहीं नगर निगम को लेकर भी शिकायत आज जनता दरबार में सुनने को मिली है, उस पर कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने एक्शन लिया और सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए।

CJI संजीव खन्ना आज भी अमृतसर में अपने पैतृक घर की तलाश कर रहे हैं, अमृतसर जाने पर हर बार खोजते हैं

नई दिल्ली जस्टिस संजीव खन्ना ने सोमवार को देश के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ले ली है। इस बीच उनके पैतृक घर को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है। CJI संजीव खन्ना आज भी अमृतसर में अपने पैतृक घर की तलाश कर रहे हैं। इस घर को आजादी से पहले उनके दादा सरव दयाल ने बनवाया था। CJI खन्ना के करीबी सूत्रों ने बताया है कि जब भी वह अमृतसर जाते हैं तो वह कटरा शेर सिंह जरूर जाते हैं। उनके लिए यह पड़ाव एक तरह की तीर्थयात्रा है। समय के साथ यह इलाका बदल गया है लेकिन जस्टिस खन्ना अभी भी अपने दादा के को खोजने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि जस्टिस खन्ना के दादा और दिग्गज एचआर खन्ना के पिता सरव दयाल अपने समय के मशहूर वकील थे। वे 1919 के जलियांवाला बाग कांड के लिए गठित कांग्रेस कमेटी में शामिल थे। उस समय के आसपास उन्होंने दो घर खरीदे थे। उनका एक घर जलियांवाला बाग के पास कटरा शेर सिंह में और दूसरा हिमाचल प्रदेश के डलहौजी में था। जस्टिस खन्ना कटरा शेर सिंह के घर को खोजने की कोशिश कर रहे हैं। 1947 में आजादी के समय कटरा शेर सिंह के घर को उजाड़ कर उसमें आग लगा दी गई थी। हालांकि बाद में उनके दादा ने इसकी मरम्मत करवाई थी। ‘बाउजी’ का घर एनडीटीवी ने करीबी सूत्रों के हवाले से बताया कि जब चीफ जस्टिस खन्ना पांच साल के थे तो वे एक बार अपने पिता के साथ उस घर में गए थे। घर पर एक बोर्ड लगा था जिस पर ‘बाउजी’ लिखा था। यह बोर्ड आज भी डलहौजी के घर में रखा हुआ है। मुख्य न्यायाधीश खन्ना हमेशा याद करते हैं कि कैसे उनके दादाजी उनसे कहा करते थे कि छुट्टियों में स्कूल की किताबें न लाएं क्योंकि जो शिक्षा वे देंगे वह किताबों में भी नहीं मिलेगी। जानकारी के मुताबिक सरव दयाल की मौत के बाद 1970 में अमृतसर वाला घर बेच दिया गया था। चीफ जस्टिस खन्ना को वह घर आज भी याद है। इसलिए जब भी वे अमृतसर जाते हैं तो कटरा शेर सिंह जाते हैं और उस घर को खोजने की कोशिश करते हैं।

देहरादून में महिलाओं को मिलेगी आर्थिक मजबूती, महिला नीति के ड्राफ्ट में विशेष बजट प्रावधान

देहरादून उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए आपदा प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक तौर पर सशक्त बनाया जाएगा। उनके लिए महिला नीति के तहत अलग से बजट देने का प्रावधान रहेगा। राज्य महिला आयोग ने सुझाव दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं को तो नहीं रोका जा सकता लेकिन उनके प्रभाव को कम करने के लिए पहाड़ की महिलाओं को आर्थिक मजबूती दी जा सकती है। आयोग ने देखा है कि आपदा आने पर सबसे ज्यादा उन क्षेत्रों की महिलाएं हिम्मत दिखाती हैं वह अपने बच्चों और परिवार की खातिर पहाड़ जैसा हौसले रखती हैं। दुर्गम परिस्थितियों में भी चूल्हा-चौका जोड़ने से लेकर बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी संभालती हैं इसलिए महिला नीति में आपदा प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं के लिए विशेष बजट रखने का सुझाव दिया गया, जिसे राज्य में जल्द लागू होने जा रही महिला नीति के ड्राफ्ट में शामिल कर लिया गया है। महिलाओं से बातचीत के आधार पर सर्वे जारी इस सिलसिले में महिला सशक्तिकरण विभाग की टीम धरातल पर काम कर रही है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष खुद अपनी टीम के साथ 13 अक्तूबर को गोपेश्वर और चमोली के दौरे पर हैं, जहां आपदा प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं से बातचीत के आधार पर सर्वे जारी है। राज्य की ओर से महिला नीति तैयार की जा रही है, जिसमें राज्य महिला आयोग के कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल किए गए हैं। आयोग ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक तौर पर अधिक सशक्त बनाने का सुझाव दिया है, ताकि वह प्राकृतिक आपदा की स्थिति में परिवार के भरण-पोषण के लिए किसी की मोहताज न हो। -कुसुम कंडवाल, अध्यक्ष, राज्य महिला आयोग

आज देहरादून की सड़कों पर जिलाधिकारी और कप्तान एक साथ निकले बाइक पर, शहर में बढ़ी हलचल

देहरादून राजधानी देहरादून की सड़कों पर सोमवार को जिलाधिकारी और कप्तान एक साथ एक ही बाइक पर निकले। पुलिस की लंबी कतार भी दोनों के पीछे चली। यह देख शहर में हलचल भी बढ़ गई। दरअसल, दोनों  महिला सुरक्षा के दृष्टिगत पिंक बूथ, पिंक टॉयलेट की संभावना, अतिक्रमण, पार्किंग, चौराहा का निर्माण एवं सौन्दर्यीकरण, यातायात व्यवस्था, सड़क,  ड्रेनेज,  आदि समुचित व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के लिए जिलाधिकारी सविन बंसल और एसएसपी अजय सिंह साथ में निकले। राजधानी में पहला पिंक बूथ पलटन बाजार में स्थापित कर नारी सुरक्षा को समर्पित किया गया था। यह सामान्य पुलिस बूथ नहीं है, महिला सुरक्षा के लिए इसके बड़े मायने हैं। इसे डीएम सविन बंसल ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू कराया है।पलटन बाजार में प्रयोग सफल होने पर शहर के विभिन्न हिस्सों में पिंक बूूथ बनाए जाएंगे। इन बूथों पर महिला अपराध से जुड़ी हर शिकायत का निस्तारण किया जाएगा। थानाक्षेत्र में खुलने वाले पिंक बूथ की मानीटरिंग थाना प्रभारी करेंगे।   डीएम सविन बंसल ने बताया कि अन्य स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां महिला सुरक्षा के लिहाज से ऐसे बूथ खोलने की जरूरत है। खासकर बाजार, मॉल, स्कूल-कॉलेज के आसपास ऐसे बूथ खोले जाएंगे। इसमें जरूरत के अनुसार महिला आरक्षी की तैनाती की जाएगी। देहरादून में गुलाबी रंंग के यह पुलिस बूथ महिला सुरक्षा के लिए मुस्तैद नजर आएंगे। दरअसल, पिंक बूथ एक हेल्प डेस्क है, जो महिलाओं की सुरक्षा व अन्य मुद्दों में सहायता करेगा। बूथ पर सिर्फ महिला पुलिस की तैनाती रहेगी।I

अगर कोई महिला किसी पुरुष के साथ कमरे में जाती है, तो मतलब यह नहीं कि महिला सेक्स के लिए तैयार है: बॉम्बे हाईकोर्ट

मुंबई बलात्कार से जुड़े एक केस में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत का कहना है कि अगर कोई महिला किसी पुरुष के साथ होटल के कमरे में जाती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसने यौन संबंध बनाने के लिए सहमति दे दी है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें आरोपी के खिलाफ रेप केस को बंद कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने क्या कहा जस्टिस भरत पी देशपांडे की बेंच ने कहा, ‘इस बात में कोई शक नहीं है कि यह दिखाने के लिए सामग्री है कि आरोपी और शिकायतकर्ता ने होटल रूम बुक किया था। हालांकि, इसे यौन संबंध बनाने के लिए पीड़िता की तरफ से सहमति देना नहीं माना जा सकता…। अगर यह मान भी लिया जाए कि पीड़िता आरोपी के साथ रूम में गई थी, लेकिन इसे किसी भी तरह से यौन संबंध के लिए उसकी सहमति नहीं माना जा सकता है।’ क्या था मामला मार्च 2020 में आरोपी गुलशेर अहमद ने कथित तौर पर विदेश में नौकरी की पेशकश की थी। कथित तौर पर उसने मीटिंग के बहाने से महिला को होटल के कमरे में बुला लिया। खास बात है कि महिला और पुरुष दोनों ने मिलकर रूम बुक किया था। बाद में पीड़िता ने आरोप लगाए कि कमरे में जाते ही आरोपी ने उसे मारने की धमकी दी और फिर रेप कर दिया। बार एंड बेंच के अनुसार, पीड़िता का कहना है कि आरोपी के बाथरूम जाने पर वह रूम से भाग गई और पुलिस को खबर कर दी। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। मामला जब ट्रायल कोर्ट पहुंचा, तो अदालत ने यह कहकर आरोपी को जाने दिया कि चूंकि महिला इच्छा से कमरे में गई थी, तो उसने सेक्स के लिए सहमति दे दी थी। अब हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल जज ने गलती की है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल जज ने पीड़िता के बगैर किसी विरोध के कमरे में जाने और रूम में जो हुआ, उसकी सहमति देने के दो अलग अलग पहलुओं को मिला दिया। कोर्ट ने यह भी पाया कि होटल के कर्मचारियों ने भी पूरी बात बताई है, जो पीड़िता के बयान से मिलती है। कोर्ट ने आरोपी के उस दावे को भी खारिज कर दिया कि दोनों ने साथ लंच किया और महिला को रूम में जाने में भी कोई परेशानी नहीं थी तो इसका मतलब है कि वह सेक्स के लिए सहमत थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और आरोपी के खिलाफ केस जारी रखा है।

नगर निगम चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त, इतनी देर में करवाने होंगे इलेक्शन

जालंधर कुछ सप्ताह पहले पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश जारी किए थे कि 15 दिन के भीतर निगम चुनाव का शेड्यूल जारी किया जाए। राज्य सरकार ने यह आदेश नहीं माने और सरकार सुप्रीम कोर्ट की शरण में चली गई जहां आज इस याचिका पर सुनवाई हुई। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को निरस्त करते हुए आदेश जारी किए हैं कि पंजाब सरकार 2 सप्ताह के भीतर निगम चुनाव संबंधी शेड्यूल जारी करे और अगले 8 सप्ताह के भीतर यह निगम चुनाव करवाए जाएं। एक प्रकार से पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से झटका लगा है क्योंकि ‘आप’ सरकार फरवरी में होने जा रहे दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद निगम चुनाव करवाने का इरादा किए बैठी थी। अब भी पंजाब में निगम चुनाव जनवरी में होते हैं या दिल्ली विधानसभा के चुनाव के बाद, यह देखने वाली बात होगी।

चयनित खिलाड़ी राष्ट्रीय सिविल सेवा शतरंज प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश का करेंगे प्रतिनिधित्व

भोपाल खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित मध्यप्रदेश राज्य सिविल सेवा शतरंज चैम्पियनशिप 2024 का समापन इंदौर पब्लिक स्कूल में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में राज्य के विभिन्न जिलों से आए सिविल सेवा अधिकारियों ने भाग लेकर अपनी बौद्धिक क्षमता का परिचय दिया। महिला वर्ग में शीर्ष स्थान पर निशाद मोनिका ने शानदार प्रदर्शन कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनके बाद पद्मजा नायडू ने दूसरा स्थान और स्नेहलता नागेश ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। इनके अतिरिक्त छाया हरदिया, वैशाली रामटेके और मंजू डोंगरे ने भी प्रतियोगिता में बेहतरीन खेल प्रदर्शन करते हुए क्रमशः चौथा, पाँचवाँ, और छठवाँ स्थान हासिल किया। छह राउंड के बाद शेखर वर्मा 5.5 अंकों के साथ प्रथम, सिद्धार्थ जैन और दीपक चिवांडे ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 अंकों के साथ क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया। इस चैम्पियनशिप में बी.के.चौधरी, विवेकानंद यादव और अशोक तुरकिया ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया और शीर्ष छह स्थानों में जगह बनाई। यह सभी चयनित खिलाड़ी राष्ट्रीय सिविल सेवा शतरंज प्रतियोगिता 2024 में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस आयोजन में टूर्नामेंट डायरेक्टर के रूप में सुनील सोमानी तथा मुख्य निर्णायक के रूप में सौरभ सोनी ने अपनी अहम भूमिका निभाई। इस प्रतियोगिता ने राज्य में शतरंज के प्रति रुचि को बढ़ावा दिया और खेल संस्कृति को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। प्रतियोगिता के समापन अवसर पर देवास कलेक्टर ऋषभ गुप्ता, अपर कलेक्टर भोपाल सिद्धार्थ जैन, मध्यप्रदेश अड हॉक कमिटी के संयोजक अंतरराष्ट्रीय मास्टर अक्षत खमरिया, ओरिएंटल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर सुनील सोमानी, इंदौर शतरंज संघ के अनिल फतेहचंदानी एवं मंदसौर के नंदकिशोर जोशी उपस्थित रहे|  

हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी अगामी विधानसभा सत्र में कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे सकते हैं

हरियाणा हरियाणा के 1.20 लाख कच्चे कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर आई है। हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी अगामी विधानसभा सत्र में कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे सकते हैं। सीएम सैनी 1.20 लाख कर्मचारियों के जॉब सिक्योरिटी वाले विधेयक के पारित होने के समय ही बड़ा ऐलान कर सकते हैं। अभी तक सरकार ने अध्यादेश जारी कर रखा था। हरियाणा में पांच साल से अनुबंध पर काम कर रहे एक लाख 20 हजार कच्चे कर्मचारियों की सेवाएं 58 साल की आयु तक करने के निर्णय पर विधानसभा में मुहर लगेगी। प्रदेश सरकार ने विधानसभा में पारित कराए जाने वाले बिल का ड्राफ्ट सार्वजनिक कर दिया है। सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों और स्वायत्त निकायों में कौशल रोजगार निगम, आउटसोर्सिंग पालिसी पार्ट-1 और आउटसोर्सिंग पालिसी पार्ट-2 तथा तदर्थ आधार पर लगे 50 हजार रुपये तक मासिक वेतन वाले सभी कच्चे कर्मचारियों की सेवाएं सेवानिवृत्ति आयु तक सुनिश्चित की जाएंगी। इस अध्यादेश की अवधि 6 माह की होती है। लेकिन इससे पहले अगर विधानसभा में विधेयक पारित हो जाए तो राज्यपाल की मंजूरी के बाद वह स्थायी कानून बन जाता है। सीएम नायब सैनी ने विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल की बैठक में 1.20 लाख अस्थायी कर्मचारियों की नौकरी 58 साल तक सुरक्षित करने के लिए जॉब सिक्योरिटी अध्यादेश मंजूर कराया था। अब 13 नवंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरु होने जा रहा है। जिसमें विधेयक पेश किए जाएंगे। इनमें वे विधेयक भी शामिल होते हैं जिनके अध्यादेश पहले जारी हो चुके हैं। लेकिन इन अध्यादेशों को ऐसे के ऐसे ही विधेयक के रूप में पेश करना होता है। जॉब सिक्योरिटी का अध्यादेश भी ज्यों का त्यों ही पेश किया जाएगा। लेकिन जब इसपर चर्चा होगी तो सीएम सैनी बड़ा ऐलान कर सकते हैं।   पक्के कर्मचारियों के समान बेसिक वेतन मिलेगा सरकारी स्कूलों में तैनात अतिथि अध्यापकों को भी नए नियमों का लाभ मिलेगा। विगत 14 अगस्त से ही कानून लागू होगा, जब इसे अध्यादेश के रूप में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने मंजूरी दी थी।  15 अगस्त तक पांच साल की नौकरी पूरी कर चुके सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्के कर्मचारियों के समान बेसिक वेतन दिया जाएगा। ऐसे कर्मचारियों को न्यूनतम पे स्केल से पांच प्रतिशत अधिक वेतन मिलेगा। न्यूनतम पे स्केल से 10 प्रतिशत अधिक वेतन मिलेगा इसी तरह आठ साल पुराने कर्मचारियों को न्यूनतम पे-स्केल से 10 प्रतिशत अधिक वेतन मिलेगा। 10 साल से अधिक पुराने अनुबंधित कर्मचारियों को न्यूनतम पे-स्केल से 15 प्रतिशत अधिक वेतन दिया जाएगा। हर साल एक जनवरी और एक जुलाई को मानदेय में वृद्धि भी की जाएगी। साथ ही सालाना वेतन वृद्धि, डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और मेटरनिटी एक्ट के तहत मिलने वाले सभी लाभ मिलेंगे।   पीएम-जन आरोग्य योजना-चिरायु एक्सटेंशन योजना के तहत अनुबंधित कर्मचारियों के परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ भी दिया जाएगा।  

वन अधिकार अधिनियम के तहत दावों का समुचित विधिक प्रक्रिया से निराकरण किया जा रहा

भोपाल वन अधिकार अधिनियम 2006 का जनवरी 2008 से मध्यप्रदेश में सुचारू तरीके से क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 2 लाख 75 हजार 352 से अधिक व्यक्तिगत वन अधिकार दावे मान्य किये गये हैं। इसके अतिरिक्त 29 हजार 996 सामुदायिक वन अधिकार दावों को भी मान्यता प्रदान की गई है। वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त वन अधिकार दावों का निर्धारित पात्रता अनुसार समुचित विधिक प्रक्रिया से निराकरण किया जा रहा है। 792 वन ग्राम बने राजस्व ग्राम वन अधिकार अधिनियम में प्रदेश में अब तक 792 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में सम्परिवर्तन कर दिया गया है। इसके लिये संबंधित जिला कलेक्टर्स द्वारा विधिवत अधिसूचनाएं भी जारी कर दी गई हैं। सभी जिलों का एफआरए एटलस भी तैयार केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली के निर्देशानुसार वन अधिकार अधिनियम के पोटेंशियल एरिया की मैपिंग के लिए प्रदेश के सभी जिलों का एफआरए एटलस भी तैयार कर लिया गया है। एफआरए एटलस की सहायता से सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रबंधन के सामुदायिक अधिकारों सहित अन्य जरूरी अधिकारों को भी कानूनी मान्यता देने की कार्यवाही की जा रही है। शासकीय योजनाओं का लाभ प्रदाय मध्यप्रदेश में सभी वन अधिकार पत्र धारकों को विभिन्न प्रकार की शासकीय योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। अब तक 55 हजार 357 वन अधिकार पत्र धारकों को कपिलधारा कूप, 58 हजार 796 को भूमि सुधार/मेंढ़-बंधान, 61 हजार 54 को पक्का आवास/प्रधानमंत्री आवास, 1 लाख 86 हजार 131 को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ देकर 21 हजार 514 वन अधिकार पत्र धारकों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना से भी जोड़ा गया है। क्या है वन अधिकार अधिनियम उल्लेखनीय है कि वन अधिकार अधिनियम केन्द्र सरकार द्वारा 2006 में लागू किया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इसका उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों और अन्य पारंपरिक वनवासियों के अधिकारों की रक्षा करना है। इसे अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों के अधिकारों को मान्यता देने के लिए लागू किया गया था। इसमें वन क्षेत्रों में रह रहे आदिवासी और अन्य परंपरागत वन निवासी अपने पुश्तैनी निवास और कृषि भूमि पर मालिकाना हक हासिल कर सकते हैं। इन्हें जंगलों के संसाधनों अर्थात वनोपज पर अधिकार दिया गया है। जैसे लकड़ी, फल, शहद, जड़ी-बूटी आदि का संग्रहण। सामुदायिक स्तर पर वे जंगल की भूमि और अन्य संसाधनों का संरक्षण और प्रबंधन कर सकते है। यह अधिनियम वनवासियों को व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों तरह के अधिकार प्रदान करता है। ग्राम सभा दावों की पुष्टि करती है और उन्हें मंजूरी देती है। इसके तहत सरकार की अनुमति के बिना वन क्षेत्रों से विस्थापन नहीं किया जा सकता है। स्थानीय समुदायों को वन क्षेत्रों के संरक्षण में भागीदारी का अधिकार मिलता है। इस अधिनियम ने वनवासियों को उनके पूर्वजों की भूमि पर अधिकार दिया है, जिससे उनके जीवन-यापन के साधनों को मजबूती मिली है। वन अधिकार अधिनियम से वनवासियों की आजीविका में सुधार आया है और इससे इन्हें अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने का अधिकार मिला है। यह अधिनियम जनजातीय और वन समुदायों के अधिकारों को मान्यता देने के साथ ही उनके पारम्परिक जीवन और संस्कृति की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है।  

दिल्ली में 347 दर्ज किया गया औसत एक्यूआई, कम नहीं हो रहा वायु प्रदूषण

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार खराब बनी हुई है। सोमवार को यहां का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 347 दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण एवं नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार राजधानी दिल्ली में सोमवार सुबह 7:30 बजे तक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 347 दर्ज किया गया है। जबकि दिल्ली एनसीआर के शहर फरीदाबाद में एक्यूआई 165, गुरुग्राम में 302, गाजियाबाद में 242, ग्रेटर नोएडा में 271 और नोएडा में 237 बना हुआ है। वहीं, दिल्ली के जहांगीरपुरी में एक्यूआई सबसे अधिक 409 दर्ज किया गया। राजधानी दिल्ली के अधिकांश इलाकों में एक्यूआई का स्तर 300 से 400 के बीच में बना हुआ है, जिसमें आनंद विहार में 378, अलीपुर में 397, अशोक विहार में 389, बवाना में 400, बुराड़ी क्रॉसिंग में 352, मथुरा रोड में 316, द्वारका सेक्टर 8 में 356, डॉ करणी सिंह शूटिंग रेंज में 344, डीटीयू में 311 और आईजीआई एयरपोर्ट में 336 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा आईटीओ में 338, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 216, लोधी रोड में 308, मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में 369, मुंडका में 389, मंदिर मार्ग में 344, नरेला में 352, नेहरू नगर में 368, नॉर्थ कैंपस डीयू में 363, नजफगढ़ में 356, पटपड़गंज में 366, ओखला फेस 2 में 339, एनएसआईटी द्वारका में 369, आरके पुरम में 368, रोहिणी में 384, शादीपुर में 383, सिरी फोर्ट में 337, विवेक विहार में 372 और वजीरपुर में 391 एक्यूआई दर्ज किया गया। पूर्वी जिले की गीता कॉलोनी के आसपास एक्यूआई 325 मापा गया। यहां पर सड़कों पर पानी द्वारा छिड़काव किया जा रहा है, जिससे सड़कों पर उड़ने वाली धूल वहीं पर जम जाए और हवा में ना फैले। धूल के कण हवा में फैलने से लोगों को खासकर बच्चों और बूढ़ों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।  

नशा मुक्ति के क्षेत्र में एक लाख तक पुरुस्कार

नशा मुक्ति के क्षेत्र में एक लाख तक पुरुस्कार 18 दिसम्बर तक आवेदन आमंत्रित भोपाल मध्यप्रदेश शासन द्वारा राज्य में नशा मुक्ति के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाजसेवियों और स्वैच्छिक संगठनों को प्रोत्साहित करने हेतु राज्य स्तरीय एवं जिला स्तरीय विवेकानंद नशा मुक्ति पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इसमें राज्य स्तरीय पुरस्कार के रूप में 1 लाख रुपये के दो पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिए जाएंगे, जबकि प्रत्येक जिले में तीन पुरस्कार 10 हजार रुपये के होंगे। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण संचालनालय ने इसके लिए योग्य संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 18 दिसंबर 2024 है। इसे संचालनालय के पते या ई-मेल पर जमा कराया जा सकता है। जिला स्तरीय पुरस्कार के लिए आवेदन जिला कार्यालय में जमा किए जाएंगे। अधिक जानकारी कार्यालयीन समय में संबंधित कार्यालयों या विभागीय वेबसाइट socialjustice.mp.gov.in से प्राप्त की जा सकती है।  

दो विधानसभा क्षेत्रों पर मतदान के आज शाम पांच बजे चुनाव प्रचार का शोर थम जाएगा

भोपाल मध्यप्रदेश के दो विधानसभा क्षेत्रों बुधनी और विजयपुर में 13 नवंबर को होने वाले मतदान के 48 घंटे पहले आज शाम पांच बजे चुनाव प्रचार का शोर थम जाएगा। दोनों विधानसभा क्षेत्रों सीहोर जिले के बुधनी और श्योपुर जिले के विजयपुर में 13 नवंबर को मतदान होना है। दोनों स्थानों पर परिणामों की घोषणा 23 नवंबर को होगी। आज चुनाव प्रचार थमने के साथ ही प्रत्याशी सिर्फ घर-घर जाकर संपर्क कर सकेंगे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार निर्वाचन आयोग ने दो दिन बाद होने वाले मतदान के लिए अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मतदान के 48 घंटे पूर्व से मतदान समाप्ति तक शराब दुकानें बंद रहेंगी। दोनाें ही स्थानों पर जिला कलेक्टर की ओर से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिए गए हैं। धर्मशाला, होटल पर पुलिस की नजर रहेगी और साथ ही सीमाएं भी सील रहेंगी। बाहरी लोगों काे क्षेत्र छोड़ना होगा। सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के रमाकांत भार्गव और कांग्रेस के राजकुमार पटेल के बीच है। इस विधानसभा क्षेत्र में कुल 20 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं, जिनमें दो महिलाएं भी हैं। वहीं श्योपुर जिले के विजयपुर में मुख्य तौर पर भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत और कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा चुनावी मैदान में हैं। इन दोनों समेत यहां से कुल 11 प्रत्याशी चुनावी समर में उतरे हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में विजयपुर सीट से कांग्रेस के रामनिवास रावत जीते थे। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। उन्हें इसके बाद राज्य में वन मंत्री बनाया गया। कुछ समय बाद उन्होंने विधानसभा से भी त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद विजयपुर विधानसभा सीट खाली हो गई और यहां उपचुनाव कराना पड़ा। वहीं बुधनी से 2023 का विधानसभा चुनाव राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जीते थे। बाद में लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने उन्हें सांसद पद का टिकट दिया, जिस पर जीत हासिल करने के बाद उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया गया। इसके चलते उन्होंने बुधनी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया।  

उपचुनाव के रिजल्ट के बाद कांग्रेस संगठन में बड़ा फेरबदल, बदले जाएंगे कई जिलाध्यक्ष

भोपाल  मध्य प्रदेश में दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव कांग्रेस के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. कांग्रेस की ओर से इस उपचुनाव के रिजल्ट के बाद संगठन में बड़ा फेरबदल करने की बात कही जा रही है. चर्चा है कि मध्य प्रदेश के कई जिला अध्यक्षों को बदल दिया जाएगा. इसके अलावा संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे कांग्रेस नेताओं की जिम्मेदारी में भी बदल सकती है. मध्य प्रदेश में बुधनी और विजयपुर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव पर पूरे प्रदेश के लोगों की नजर है. खास तौर पर विजयपुर सीट पर सभी राजनेताओं की निगाह है. यहां पर कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी से रामनिवास रावत अपना भाग्य आजमा रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने उपचुनाव के पहले ही बड़ा ऐलान कर दिया है. मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मुकेश नायक के मुताबिक, उपचुनाव के बाद संगठन में बड़े फेरबदल की संभावना है. उन्होंने कहा, “मध्य प्रदेश में जिन जिला अध्यक्षों को तीन साल से अधिक का वक्त हो गया है, उन्हें हटाकर नए लोगों को मौका दिया जाएगा. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी चाहते हैं कि सभी कांग्रेस नेताओं को काम करने का मौका मिले. इसी को देखते हुए प्रदेश स्तर पर भी कई और नियुक्तियां हो सकती है.” उपचुनाव के पहले मच सकता था घमासान राजनीति के जानकार मानते हैं कि उपचुनाव के पहले संगठन में फिर फेरबदल से घमासान मच सकता था, इसी वजह से उपचुनाव के बाद ही संगठन में फेरबदल किया जाएगा. वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा के मुताबिक, “मध्य प्रदेश में कई कैसे पदाधिकारी हैं जो पूर्व अध्यक्ष की ओर से बनाए गए थे. जीतू पटवारी अपनी नई टीम तैयार करना चाहते हैं शायद इसी वजह से फेर बदल की संभावना है.”

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