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नशीली सिरप की तस्करी करने वाले आरोपियों को न्यायालय ने कड़ी सजा सुनाई, 10 -10 साल सश्रम कारावास

रीवा रीवा शहर में नशीली सिरप की तस्करी करने वाले आरोपियों को न्यायालय ने कड़ी सजा सुनाई है। आरोपी शहर में नशीली प्रतिबंधित सिरप की सप्लाई करते थे। नशे की खेप लाने के लिए कार का इस्तेमाल करते थे।  फिर शहर के कबाड़ी मोहल्ले स्थित अपने गोदाम से नशे का नेटवर्क संचालित करते थे। मामले में आरोपियों को सजा विशेष सत्र न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट केशव सिंह की अदालत से सुनाई गई है। लोक अभियोजन ने बताया कि नशा तस्कर इरशाद खान और अनुराग त्रिपाठी को 10-10 साल की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। इरशाद लंबे समय से नशा तस्करी में जुड़ा हुआ था, पुलिस ने इसके घर में भी एक बार छापा मारा था। जहां से भारी मात्रा में नशीली कफ सिरप तहखाने से बरामद हुई थी। पुलिस को सूचना मिली थी 25 मई 2023 को कुछ लोग नशे की खेप लेकर रीवा के करहिया मार्ग से होकर लाडली लक्ष्मी मार्ग के रास्ते रीवा शहर में प्रवेश करेंगे। पुलिस ने लाड़ली लक्ष्मी मार्ग पर चेकिंग अभियान शुरू किया। वहां पुलिस को एक अल्टो कार आती हुई नजर आई। पुलिस ने कार की चेकिंग की कार के दौरान अंदर से 2160 सीसी नशीली कफ सिरप बरामद की। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले को कोर्ट में पेश किया। जहां सुनवाई के बाद दोनों आरोपी अनुराग त्रिपाठी और इरशाद को 10 साल की सजा सुनाई। एक लाख रुपए का जुर्माना ना अदा करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वर्तमान में जिस तरीके से पूरा रीवा शहर में नशा छाया हुआ है। उसको देखकर माना जा रहा है यह नशे के खिलाफ एक बड़ा प्रहार है।

माइनिंग विभाग का बड़ा एक्शन, अवैध तरीके से जम्मू कश्मीर से पंजाब में रेत-बजरी लेकर आ रहे ट्रकों को विभाग द्वारा पकड़ा

बमियाल/दीनानगर सरहदी क्षेत्र में अवैध माइनिंग के खिलाफ पंजाब पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी के तहत बीती रात अवैध तरीके से जम्मू कश्मीर से पंजाब में रेत-बजरी लेकर आ रहे ट्रकों को विभाग द्वारा पकड़ लिया गया और उन पर जुर्माना लगाया गया। दरअसल, माइनिंग विभाग और तारागढ़ पुलिस को सूचना मिली थी कि जम्मू कश्मीर से अवैध तरीके से रेत-बजरी पंजाब में लाई जा रही है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने नाकेबंदी की और तारागढ़ थाना के तहत कथलोर पुल पर दो ट्रकों को पकड़ा, जो जम्मू कश्मीर से अवैध तरीके से रेत-बजरी लेकर पंजाब आ रहे थे। अधिकारियों द्वारा जब ट्रक चालकों से सामग्री के दस्तावेज मांगे गए, तो वे कुछ भी नहीं दिखा सके। इसके बाद माइनिंग विभाग के एसडीओ संदीप सम्याल ने मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की और उन्हें जुर्माना किया। इस संबंध में माइनिंग विभाग के एसडीओ संदीप सम्याल ने जानकारी देते हुए बताया कि ये ट्रक जम्मू कश्मीर से अवैध तरीके से रेत-बजरी लेकर पंजाब आ रहे थे और उनके पास कोई भी दस्तावेज नहीं थे। इस कारण उन पर कार्रवाई कर जुर्माना लगाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में लगातार चेकिंग अभियान जारी रहेगा।

अनुच्छेद 370 कभी पुनर्स्थापित नहीं होगा, भारत को विभाजित करने का उनका प्रयास कामयाब नहीं होगा : स्मृति ईरानी

नई दिल्ली  जम्मू-कश्मीर विधानसभा में अनुच्छेद 370 को लेकर मचे बवाल पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीकों से चुनी गई सरकार विकास के मुद्दों पर काम करने की बजाय भारत को जोड़ने की बजाय तोड़ने का प्रमाण दे रही है। मैं कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं से कहना चाहती हूं कि अनुच्छेद 370 कभी पुनर्स्थापित नहीं होगा, भारत को विभाजित करने का उनका प्रयास कामयाब नहीं होगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को भी चुनौती दी। उन्होंने कहा, ” जहां तक अनुच्छेद 370 की बहाली के मुद्दे का सवाल है, मुझे नहीं पता कि उमर अब्दुल्ला ने क्या बयान दिया है। लेकिन, अगर उनमें हिम्मत है, तो मैं उन्हें चुनौती देती हूं कि वह झारखंड और महाराष्ट्र में जाकर किसी भी मंच से यह बात बोल दें।” भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, “  इंडी गठबंधन ने जो प्रस्ताव पारित किया है, उसके तहत वह जम्मू-कश्मीर में भारत के संविधान के खिलाफ एक नई जंग लड़ते दिख रहे हैं। आज मैं इंडी गठबंधन के नेताओं से पूछना चाहती हूं कि भारत की संसद और सुप्रीम कोर्ट के फैसले जो सबको स्वीकार्य हैं, उसके निर्णय का अपमान और अवहेलना करने का अधिकार कांग्रेस और एनसी को देश में किसने दिया? मैं कांग्रेस, एनसी और इंडी गठबंधन के सभी नेताओं से पूछना चाहती हूं कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद आदिवासी समाज को जो अधिकार मिले हैं, क्या कांग्रेस-एनसी सरकार उसके खिलाफ खड़ी होगी? दलितों और पिछड़े समाज को जो अधिकार मिले हैं, क्या उसके खिलाफ कांग्रेस-एनसी सरकार खड़ी होगी? कल का प्रस्ताव उग्रवाद और आतंकवाद के समर्थन में कांग्रेस और इंडी गठबंधन के नेताओं के रणनीतिक समर्थन को दर्शाता है।” उन्होंने आगे कहा कि भारत में हर नागरिक को ज्ञात है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद नागरिकों की मृत्यु में 80 प्रतिशत की कमी आई है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं में 70 प्रतिशत की कमी हुई है। लोकतांत्रिक तरीकों से चुनी गई सरकार विकास के मुद्दों पर काम करने की बजाय भारत को जोड़ने की बजाय तोड़ने का प्रमाण दे रही है। मैं कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं से कहना चाहती हूं कि अनुच्छेद 370 कभी पुनर्स्थापित नहीं होगा, भारत को विभाजित करने का उनका प्रयास कामयाब नहीं होगा। दरअसल जम्मू-कश्मीर विधानसभा में इंजीनियर राशिद के भाई और लेंगेट से विधायक खुर्शीद अहमद शेख द्वारा अनुच्छेद 370 पर बैनर दिखाए जाने के बाद हंगामा हुआ था। जिसके बाद भाजपा नेताओं और उनके बीच नोकझोंक हो गई। इतना ही नहीं नौबत हाथापाई तक आ गई। जिसके चलते मार्शलों को बीच-बचाव करने के लिए आना पड़ा। जिस वक्त सदन में हंगामा हो रहा था उस दौरान खुद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला वहां मौजूद थे।    

चतुर्थ श्रेणी कर्मी को महिला अधिकारी और उसकी सहयोगी ने जड़े थप्पड़, पूरे सिविल अस्पताल में हड़कंप का माहौल

सोनीपत सोनीपत सिविल अस्पताल के एक्स रे रूम में कार्यरत दीपक नाम के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को महिला अधिकारी आशा सहरावत ने अपनी सहयोगी स्टाफ नर्स राजेश के साथ थप्पड़ जड़ दिए। उसके बाद पूरे सिविल अस्पताल में हड़कंप का माहौल देखने को मिला और एक के बाद एक सभी चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों ने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर इक्कठा हो गए और दोनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ जयंत आहुजा ने सभी को उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया तो दीपक की तरफ से शिकायत सिविल अस्पताल प्रबंधन को दी गई है। मिली जानकारी के अनुसार सोनीपत के खरखौदा में कई माह पहले तत्कालीन एसएमओ आशा सहरावत और स्टाफ नर्स राजेश के खिलाफ कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया था, जिसके बाद दोनों का वहां से तबादला भी कर दिया गया था लेकिन आज आशा सहरावत और स्टाफ नर्स ने सोनीपत सिविल अस्पताल के एक्स रे रूम में कार्यरत दीपक नाम के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को पहले रूम से बाहर बुलाया और फिर वहां उस पर कई थप्पड़ जड़ दिए। इस दौरान रेडियोलॉजिस्ट राजेश दहिया भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि आशा सहरावत और स्टाफ नर्स राजेश ने दीपक को थप्पड़ मारे है, तो दीपक ने बताया कि बिना बेवजह डॉक्टर आशा सहरावत और स्टाफ नर्स ने उसके साथ मारपीट की है। इस थप्पड़ कांड की गूंज पूरे अस्पताल में सुनने को मिली और अधिकारियों और डॉक्टरों के बीच में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। वहीं इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डॉ जयंत आहुजा ने बताया कि ये मामला मेरे संज्ञान में आया है। दोनों पक्षों की बात को सुना गया है और मामले में जांच की जा रही है। जल्द ही मामले जांच की जाएगी। ये मामला मनमुटाव का है और खरखौदा से मामला चला आ रहा है। जांच में ही स्पष्ट हो पाएगा कि आखिरकार मामला क्या है।

पेसा मित्रों की पहल से ग्राम पंचायतों में सकारात्मक बदलाव दिख रहा

भोपाल मध्यप्रदेश में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम-2022 लागू हैं। यह नियम प्रदेश में निवासरत जनजातीय समुदायों के प्राकृतिक रहन-सहन को केन्द्र में रखकर उनकी स्व-शासन की भावना को मान्यता प्रदान करते हैं। प्रदेश की सभी पेसा ग्राम पंचायतों में इन दिनों एक नई सकारात्मक लहर देखने को मिल रही है। पेसा मित्रों या कहें पेसा मोबलाईजर्स का योगदान ग्रामीणों को केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। राज्य की 5 हजार 133 पेसा ग्राम पंचायतों में 4 हजार 665 पेसा मित्र कार्यरत हैं, जो अपनी भूमिका को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभा रहे हैं। ये पेसा मित्र न केवल ग्रामीणों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं, बल्कि उन्हें इन योजनाओं का लाभ उठाने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित भी कर रहे हैं। इस दिशा में शहडोल जिले का काम विशेष रूप से सराहनीय रहा है। यहां पेसा मित्रों ने ग्राम पंचायतों में जाकर जागरूकता अभियान चलाया, जिससे ग्रामीणों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, कृषि और रोजगार जैसी योजनाओं के प्रति रूचि बढ़ी है। पेसा मित्रों ने ग्रामीण (विशेषकर जनजातीय) समुदायों को सरकार की योजनाओं से जोड़ने के साथ-साथ ग्राम पंचायतों में एक सशक्त सोशल नेटवर्क तैयार किया है, जो ग्राम स्तर पर सबके स्वावलंबन को बढ़ावा दे रहा है। पेसा मित्रों की इस पहल से ग्राम पंचायतों में सकारात्मक बदलाव दिख रहा है। ग्रामीण, जो पहले सरकारी योजनाओं से अनजान थे, अब न केवल इनसे परिचित हो रहे हैं बल्कि योजनाओं का लाभ भी उठा रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और वे स्वयं के जीवन को बेहतर बना पा रहे हैं। प्रदेश में पेसा मित्रों का यह कार्य न केवल ग्रामीण विकास की दिशा में एक सराहनीय कदम है बल्कि समाज में सामूहिक जागरूकता और सहभागिता की भावना भी विकसित कर रहा है।  पेसा मित्र बन रहे सच्चे मददगार शहडोल जिले की पेसा ग्राम पंचायतों में नियुक्त पेसा मित्र (मोबलाईजर) महती भूमिका निभा रहे हैं। पेसा मित्रों द्वारा पेसा एक्ट में उल्लेखित हितग्राहीमूलक विकास कार्यों, समग्र ई-केवाईसी, जनजातीय समुदायों को मछली पालन के लिए प्रोत्साहित करना, खनिज समिति व मादक पदार्थ नियंत्रण समिति के तहत आर्थिक दंड वसूल करना जैसे अन्य विभिन्न कार्य प्राथमिकता के साथ किये जा रहे हैं। जिले के जयसिंहनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत ठेंगरहा के पेसा मित्र (मोबलाईजर) अजय सिंह परस्ते द्वारा इस ग्राम पंचायत क्षेत्र में जल समिति द्वारा मछली पालन, मादक पदार्थ समिति द्वारा लोगों को मादक पदार्थ का सेवन न करने के बारे में जागरूक किया गया। साथ ही बाजार समिति के जरिये ग्राम पंचायत द्वारा बाजार कर लेने का प्रस्ताव पारित करने में भी महती भूमिका का निर्वहन किया गया। साथ ही समग्र आई-डी, ई-केवाईसी, समग्र सत्यापन, समग्र में नाम जोड़ना, समग्र परिवार विभाजन, आवास रजिस्ट्रेशन, राशन पोर्टल में पात्र परिवारों की फीडिंग, पीएम जन-मन पक्का आवास रजिस्ट्रेशन, मनरेगा सबन्धित कार्यों का मस्टर रोल जारी करने, शांति एवं विवाद निवारण समिति के अंतर्गत समन्वय कार्य, पीएम जन-मन पक्का आवास का जियो-टैग जैसे कार्य किये गये। इसी प्रकार जयसिंहनगर ब्लॉक की पेसा मित्र (मोबलाईजर) सुमुस्कान गुप्ता, सुवेदकली पटेल, सुकल्पना तिवारी,  कुलदीप सिंह व अन्य पेसा मित्रों द्वारा केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित हितग्राहीमूल एवं समुदायमूलक योजनाओं का संबंधितों को लाभ दिलाने के लिए स्व-प्रेरणा से सेवा कार्य किये गये। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के 20 जिलों के 88 विकासखंडों की 5 हजार 133 ग्राम पंचायतों के अधीन 11 हजार 596 ग्राम पेसा क्षेत्र में आते हैं। अलीराजपुर, झाबुआ, मंडला, बड़वानी, अनूपपुर एवं डिंडोरी पूर्ण पेसा जिलों में रूप में चिन्हित हैं। जबकि बालाघाट, बैतूल, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, धार, खंडवा, नर्मदापुरम, खरगोन, सिवनी, शहडोल, श्योपुर, सीधी उमरिया एवं रतलाम आंशिक पेसा जिले हैं। प्रदेश में ग्राम स्तर, पंचायत स्तर, विकासखंड, जिला एवं राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिये पेसा एक्ट के क्रियान्वयन में तेजी से प्रगति आई है। पेसा मित्र इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।  

जंगल में नर्स से रेप करने वाला आरोपी गिरफ्तार

चित्रकूट उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में एक निजी अस्पताल की 22 वर्षीय नर्स से दुष्कर्म के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में पीड़िता ने गैंगरेप का आरोप लगाया था लेकिन पुलिस जांच में रेप की पुष्टि हुई, जिसके बाद आरोपी को पुलिस ने धर दबोचा। आरोपी से पुलिस हिरासत में पूछताछ की जा रही है। बता दें कि घटना के 12 दिन बाद आरोपी को गिरफ्तार किया है, अभी हालांकि एक ही आरोपी पकड़ा गया है। जंगल में नर्स से रेप करने वाला आरोपी गिरफ्तार मिली जानकारी के मुताबिक, चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में शंकरगढ़ के रहने वाले शुभम मिश्रा को पुलिस ने सुबह 5.30 बजे अरवारी मोड़ से गिरफ्तार किया गया। ये घटना 26 अक्टूबर को बरगढ़ थाना क्षेत्र में हुई थी। पीड़िता के पिता ने तीन-चार अज्ञात युवकों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। घटना के 12 दिन बाद आरोपी गिरफ्तार पीड़िता के पिता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद जांच शुरू की थी। इस दौरान पुलिस को पता चला कि इस मामले में केवल एक आरोपी शामिल है। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया, जो कि आदतन अपराधी है।

प्रदेश भर में डेंगू अपने पंख पसार रहा है, अस्पतालों में भी डेंगू के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं

अंबाला प्रदेश भर में डेंगू अपने पंख पसार रहा है। अस्पतालों में भी डेंगू के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस बीच अंबाला छावनी के कई इलाकों का रियलटी चेक किया तो पाया कि कॉलोनियों में ना तो सफाई व्यवस्था दरुस्त है और ना ही खाली पड़े प्लॉटों से अब तक बरसाती पानी की निकासी हो पाई है। जिन प्लाटों में पानी खड़ा है उनमें काई जमी है। मच्छर और अन्य कीटाणु इन प्लॉटों पर मंडरा रहे हैं जिससे कभी भी डेंगू जैसी घातक बीमारी फैलने का खतरा स्थानीय निवासियों के सिर पर मंडरा रहा है। स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। लिहाजा गणेश विहार एक्सटेंशन और आजाद नगर के लोगों को हमेशा बीमारी फैलने का खतरा सताता रहता है, क्यूंकि इन इलाकों में मक्खियों और मच्छरों की भरमार है। डेंगू से निपटने को लेकर स्वास्थ्य विभाग का साफ कहना है कि उनकी तैयारियां पूरी है। किसी भी तरीके की कोई दिक्कत उनकी तरफ से नहीं है। जिले में 82 केस डेंगू के रिपोर्ट हो चुके हैं। संबंधित विभाग को फॉगिंग के लिए पत्र लिखे गए हैं। अभी तक 8500 से ज्यादा लोगों को नोटिस भी दिए जा चुके हैं। करनाल में अब तक डेंगू के 327 मामले आए, सामने स्वास्थ्य विभाग की टीम अलर्ट हरियाणा में बदलते मौसम की वजह से डेंगू के केस बढ़ते जा रहे हैं। करनाल जिले में भी 1 जनवरी से अब तक 327 मामले सामने आए हैं। जो कि पिछले साल के मुकाबले कम हैं। बावजूद इसके जिले में रोजाना डेंगू से जुड़े मामले सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में आते रहते हैं। करनाल में आए दिन मामले सामने आ रहे हैं। सिविल सर्जन डॉक्टर रेनू चावला ने कहा है कि अलग-अलग जगह टीमें जाकर फॉगिंग कर रही हैं। लार्वा को काला तेल या दवाई डालकर खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। कोई व्यक्ति ज्यादा लापरवाही बरत रहा है तो उसे नोटिस भेजा जा रहा है। ताकि डेंगू से बचाव किया जा सके। प्राइवेट अस्पतालों को भी सख्त निर्देश दिए गऐ हैं कि किसी भी प्रकार की कोई लापरवाही न की जाऐ। मच्छरों का लार्वा न पनपे इसलिए एहतियाद बरते जा रहे हैं।

Amazon-Flipkart पर ED की बड़ी कार्रवाई, 16 ठिकानों पर मारी रेड

नई दिल्ली  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को कथित मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों को लेकर अमेज़न और फ्लिपकार्ट सहित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े देश भर के कई विक्रेताओं के यहां छापे मारे। केंद्रीय एजेंसी ने इन विक्रेताओं से संबंधित कम से कम 15 से 16 ठिकानों पर छापेमारी की है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) जांच के तहत अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स दिग्गज कंपनियों पर कारोबार करने वाले कुछ विक्रेताओं के खिलाफ छापेमारी की। सूत्रों ने बताया कि यह कार्रवाई कुछ पसंदीदा विक्रेताओं के वित्तीय लेन-देन से संबंधित है, जो अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापार करते हैं। फेमा के तहत की जा रही इस जांच के संबंध में दिल्ली, गुरुग्राम (हरियाणा), हैदराबाद (तेलंगाना) और बेंगलुरु (कर्नाटक) में कई स्थानों पर तलाशी ली गई। दरअसल, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की एंटीट्रस्ट जांच में पाया गया है कि अमेजन और फ्लिपकार्ट ने चुनिंदा विक्रेताओं को तरजीह देकर, कुछ लिस्टिंग को प्राथमिकता देकर और उत्पादों पर भारी छूट देकर स्थानीय प्रतिस्पर्धा कानूनों का उल्लंघन किया, जिससे अन्य कंपनियों को नुकसान हुआ। ईडी अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के संभावित दुरुपयोग की जांच कर रहा है, जो अवैध वित्तीय प्रथाओं में शामिल हो सकते हैं। अवैध वित्तीय गतिविधियों मं  भी लिप्त होने की सबसे अधिक संभावना है।  

औचक छापेमारी कर देह व्यापार के धंधे का पर्दाफाश करते हुए 10 लड़के-लड़कियों को आपत्तिजनक हालत में किया गिरफ्तार

रूपनगर रूपनगर में देह व्यापार के धंधे पर्दाफाश हुआ है। सदर पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर औचक छापेमारी कर देह व्यापार के धंधे का पर्दाफाश करते हुए 2 होटलों से 10 लड़के-लड़कियों को आपत्तिजनक हालत में गिरफ्तार किया है। सदर पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया गया है और बाकी के खिलाफ जांच जारी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रूपनगर के ख्यासपुरा गांव के पास हाईवे पर सदर पुलिस ने एक गुप्त सूचना मिलने पर 2 होटलों में औचक छापेमारी की, जहां से 10 लड़के-लड़कियों को आपत्तिजनक हालत में बरामद किया गया। SHO थाना सदर सिमरनजीत सिंह ने बताया कि पुलिस ने अब तक 3 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, जबकि लड़कियों को मेडिकल जांच के लिए सिविल अस्पताल रूपनगर भेज दिया गया है और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि पुलिस को लंबे समय से रूपनगर-नंगल हाईवे पर चल रहे कुछ होटलों में देह व्यापार के धंधे की शिकायत मिल रही थी, लेकिन कल पुख्ता सूचना के बाद पुलिस टीमों ने मौके पर जाकर छापेमारी की और सफलता हासिल की है।

यासीन मलिक की पत्नी का राहुल गांधी को पत्र – ‘उसे जेल से निकालिए, वो जम्‍मू में शांति..

नई दिल्ली  जेल में बंद जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक की पत्नी मुशाल हुसैन मुलिक ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक चिट्टी लिखी है। उन्होंने पत्र लिखकर कांग्रेस नेता से संसद में उनके पति के लिए बहस शुरू कराने की अपील की। मुशैल हुसैन के मुताबिक केवल उनके पति ही जम्मू एवं कश्मीर में शांति ला सकते हैं। मुशैल हुसैन का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में चल रही शांति प्रक्रिया में यासीन मलिक की भूमिका महत्वपूर्ण है और उसकी दुर्दशा का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए। मानवाधिकार और महिला सशक्तिकरण पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के पूर्व सहायक मुशैल ने लिखा, “राहुल जी, यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर में शांति के लिए एक ताकत बन सकते हैं, बशर्ते उन्हें उचित मौका दिया जाए।” मुशैल ने पत्र में कहा, “मेरे पति के साथ चल रहा व्यवहार किसी यातना से कम नहीं है और मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि उन्हें न्याय दिलाने में हमारी मदद करें।” राहुल गांधी को लिखे पत्र में मुशैल ने अपने पति के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई का जिक्र किया, विशेष रूप से दशकों पुराने राजद्रोह के मामले का, जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अब मृत्युदंड की मांग की है। कश्मीर के अलगाववादी नेता यासिन मलिक ने टेटर फंडिंग के एक केस में मृत्युदंड की एनआईए की अपील को चुनौती दी है। एनआईए के आरोप 2017 में टेरर फाइनेंसिंग इन्वेस्टिगेशन से जुड़े हैं, जिसमें मलिक के साथ कई अन्य लोग शामिल थे। 2022 में मलिक को दोषी पाए जाने के बाद ट्रायल कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, मुशैल के अनुसार, मलिक की नजरबंदी और उसकी मौत की सजा की मांग ‘एक व्यापक राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।’ मुशैल ने दावा किया कि 2019 से भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार मलिक के साथ ‘अमानवीय’ व्यवहार कर रही है और उनके खिलाफ मुकदमे ‘राजनीति से प्रेरित’ हैं। मुशैल ने पत्र में आरोप लगाया कि ‘मलिक पर 35 साल पुराने मामले में भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का मुकदमा चल रहा है और अब, उन्हें फांसी की सजा देने के लिए मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं।’ मुशैल ने आगे कहा कि उनके पति, जो कभी सशस्त्र संघर्ष की वकालत करते थे, ने सालों पहले हिंसा का त्याग कर दिया था फिर अहिंसा और शांति का मार्ग अपनाया। उन्होंने कहा, ‘यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर में वास्तविक शांति का साधन बन सकते हैं, न कि दिखावटी शांति जिसका वादा किया गया है।’ मुशैल ने यह भी बताया कि 2 नवंबर से मलिक जेल में अपने साथ हुए कठोर व्यवहार के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। मुशैल ने मलिक के स्वास्थ्य के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि लंबे समय तक भूख हड़ताल करने से उनकी जान को खतरा हो सकता है। कांग्रेस क्यों निशाने पर आ सकती है? ताज्जुब होता है न कि मिशाल मलिक ने अपने पति के लिए रहन की भीख भी किससे मांग रही है, कांग्रेस से। कांग्रेस पहले ही उसके पति की मनमोहन सिंह से 2006 वाली मुलाकात के बाद से बैकफुट पर रहती है, ऊपर से यह पत्र उसके लिए और मुसीबात बढ़ाने का काम करेगा। हालांकि न तो कांग्रेस और न ही राहुल गांधी ने इसका जवाब दिया है,लेकिन यह लेटर पार्टी का बीपी हाई करने वाला है। यासीन मलिक को किस मामले में सजा हुई है? यासीन मलिक इस समय दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद है। कश्मीरी अलगाववादी नेता और पूर्व उग्रवादी यासीन मलिक कश्मीर को भारत से काटने की बात करता था। 1990 के कश्मीर नरसंहार में उसका भी बड़ा हाथ है। यासीन मलिक को 25 मई 2022 को एनआईए कोर्ट ने टेरर फंडिंग के केस में उम्रकैद की सजा सनाई थी। एनआईए ने 2017 के आतंकवाद के वित्तपोषण के मामले में कई व्यक्तियों के खिलाफ आरोप दायर किए थे, जिनमें मलिक भी शामिल था। जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अध्यक्ष रहे यासीन मलिक पर 25 जनवरी 1990 को श्रीनगर के रावलपोरा में भारतीय वायु सेना के 40 कर्मियों पर हमले का बी आरोप है। उस हमले में 4 वायुसेना कर्मियों की जान चली गई थी। यासीन मलिक पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती की बहन रुबैया सईद के अपहरण और उसके बाद पांच आतंकवादियों को छोड़ने की घटना में भी आरोपी है। इसके अलावा तीन दशक पुराने राजद्रोह मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उसके लिए मौत की सजा की मांग की है।   2006 की वो फोटो जो नहीं छोड़ती पीछा अब बात उस तस्वीर की जो 18 साल बाद भी कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रही है। यह मुलाकात पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और आतंकी यासीन मलिक के बीच हुई थी। यासीन की पत्नी मिशाल ने अपने पत्र में इस मुलाकात का भी जिक्र किया है। मिशाल मलिक ने लिखा कि यासीन मलिक विविधता में एकता के सच्चे शिष्य हैं, कश्मीरियत की आत्मा हैं। यह उनकी निर्मल अहिंसक विचारधारा थी, जिसने तत्कालीन भारत के प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी को 17 फरवरी, 2006 को भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर के लोगों के बीच संवाद शुरू करने के लिए आमंत्रित किया था। यासीन ने शांति प्रक्रिया में अपना पूर्ण समर्थन देने का वादा किया था। 17 फरवरी 2006 को तब के पीएम मनमोहन सिंह ने यासीन मलिक को आमंत्रित किया था। दोनों की मुलाकात नई दिल्‍ली स्थित प्रधानमंत्री आवास में हुई थी। यह मुलाकात जम्‍मू-कश्‍मीर के नेताओं, अलगाववादियों और अन्‍य संगठनों के साथ जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत हुई थी। इस मुलाकात के दौरान कहीं से भी यासीन मलिक के चेहरे पर अपराधबोध नहीं था। उसने बड़ी गर्मजोशी से मनमोहन सिंह से मुसाकात की थी। हाथ मिलाया और फोटो भी खिंचवाई थी। जिस ठाठ बाट के साथ उसने यह मुलाकात की, उसी तरह वह मुलाकात के बाद भी था, बिल्कुल नवाबों की तरह अपनी कार में बैठा और चला गया। तब का दिन था और आज का दिन है, बीजेपी सहित कई पार्टियां इस फोटो को लेकर हमेशा कांग्रेस पर सवाल खड़ी करती आई हैं।    

संरक्षण गृहों का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना है, जहां वे अच्छे नागरिक के रूप में विकसित हो सकें- CM योगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिला कल्याण विभाग ने बच्चों के सर्वांगीण विकास और सुरक्षा के लिए एक नई और महत्वपूर्ण पहल की है। इस पहल के तहत राज्य के विभिन्न जनपदों में 10 नए बाल संरक्षण गृहों का निर्माण और संचालन किया जाएगा। इन संरक्षण गृहों का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना है, जहां वे अच्छे नागरिक के रूप में विकसित हो सकें। महिला कल्याण विभाग द्वारा प्रस्तावित इस योजना के अनुसार, प्रदेश के मथुरा, प्रयागराज, कानपुर नगर, आजमगढ़, झांसी, अमेठी, फैजाबाद, देवरिया, सुल्तानपुर तथा ललितपुर में इन संरक्षण गृहों की स्थापना की जाएगी। हर संरक्षण गृह में 100-100 बच्चों को रखने की क्षमता होगी, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को लाभान्वित किया जा सके। इनमें 1 राजकीय बाल गृह (बालिका), 1 राजकीय बाल गृह (बालक), 7 राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर), किशोर न्याय बोर्ड सहित 1 प्लेस ऑफ सेफ्टी गृह शामिल है। इन संरक्षण गृहों में बच्चों को न केवल रहने की सुविधाएं दी जाएगी, बल्कि उनके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास का भी ध्यान रखा जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच के अनुसार महिला एवं बाल विकास विभाग इन संरक्षण गृहों की स्थापना से असहाय और संवेदनशील बच्चों को एक नया जीवन देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। इन गृहों में बच्चों को एक संरक्षित वातावरण में शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और जीवन कौशल जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इस योजना के तहत राज्य सरकार ने बाल संरक्षण गृहों के निर्माण के लिए आवश्यक फंड भी निर्धारित किए हैं। सभी गृहों का निर्माण योगी सरकार अपने बजट से करेगी। वहीं इन गृहों के संचालन में केंद्र सरकार द्वारा मिशन वात्सल्य योजना के प्रावधानों के केंद्रांश-60 प्रतिशत और राज्यांश-40 प्रतिशत के अनुसार राज्य सरकार पर 7.96 करोड़ रुपये का व्ययभार आएगा। इसके साथ ही ‘मुख्यमंत्री बाल आश्रय योजना’ के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। योजना के सफल संचालन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन गृहों का निर्माण और प्रबंधन गुणवत्ता मानकों के अनुसार किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से कंसल्टेंट्स का चयन भी किया है, ताकि इन बाल संरक्षण गृहों में दी जाने वाली सेवाओं का उच्चतम स्तर सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उद्देश्य है कि राज्य का कोई भी बच्चा असुरक्षित या उपेक्षित महसूस न करे। सीएम योगी ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि वे समाज के भविष्य हैं। इस योजना के तहत बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी, जो उनकी सुरक्षा और कल्याण के प्रति संजीदा होंगे। इन बाल संरक्षण गृहों में बच्चों को उनकी उम्र और जरूरतों के हिसाब से सेवाएं दी जाएंगी, ताकि वे मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकें।  

महाकाल की नगरी में 9 नवंबर से स्काईडाइविंग फेस्ट शुरू होने जा रहा, चलेगा- 9 फरवरी 2025 तक

 उज्जैन मध्य प्रदेश टूरिज्म लगातार चौथे स्काईडाइविंग फेस्ट को होस्ट कर रहा है। इस फेस्ट का उद्देश्य पूरे राज्य में एडवेंचरस टूरिज्म को बढ़ावा देना और पर्यटन गतिविधियों का विस्तार करना है। इसमें शामिल होने वालों को महाकाल की नगरी उज्जैन के ऊपर 10,000 फीट से छलांग लगाने का अनुभव करने का अवसर मिलेगा। तीन महीने चलेगा आयोजन सीएम मोहन यादव की इच्छानुसार ही इस फेस्ट का आयोजन किया गया है। यह आयोजन 9 नवंबर से 9 फरवरी तक चलेगा। मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि राज्य को प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने के लिए सीएम मोहन यादव के मार्गदर्शन में कई गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। सेफ्टी का रखा गया है विशेष ध्यान एमपी पर्यटन बोर्ड के प्रबंध निदेशक शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि पिछले संस्करणों की सफलता और पर्यटकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद, चौथा स्काईडाइविंग महोत्सव तीन महीने तक उज्जैन में होगा। रोमांच चाहने वाले लोग सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे के बीच उज्जैन में दताना हवाई पट्टी पर हवाई रोमांच का अनुभव कर सकते हैं। महोत्सव में सभी प्रतिभागियों के लिए उनकी डाइविंग से पहले सेफ्टी ब्रीफिंग और ट्रेनिंग सेशन होंगे। प्रत्येक प्रतिभागी को अत्याधुनिक सुरक्षा गियर से लैस किया जाएगा, जिसमें स्वचालित तैनाती प्रणाली और बैकअप पैराशूट शामिल हैं। स्काई डाइव करते हुए होंगे महाकाल मंदिर के दर्शन इंटरनेशनल और व्यापक अनुभव वाले प्रशिक्षक हर उड़ान से पहले उपकरणों की गहन जांच करेंगे। स्काईडाइविंग का अनुभव करते हुए आसमान से प्राचीन महाकालेश्वर मंदिर और पवित्र शिप्रा नदी के हवाई दृश्य दिखाई देंगे। फेस्टिवल आयोजकों ने दताना हवाई पट्टी पर एक समर्पित लैंडिंग ज़ोन बनाया है, जिसमें ग्राउंड सपोर्ट स्टाफ और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं। इस विमान का होगा यूज यही नहीं पूरे दिन मौसम की निगरानी भी की जाएगी। आयोजक एक रीवाइज्ड सेसना 182P विमान का उपयोग करेंगे, जिसमें छह व्यक्ति बैठ सकते हैं। एक बार में 02 प्रतिभागी, 02 ट्रेनर के साथ स्‍काई डाइविंग कर सकेंगे। स्काई डाइविंग में उपयोग किए जाने वाला एयरक्राफ्ट नागरिक विमानन निदेशालय से पंजीकृत है। तीन माह में 1000 से अधिक प्रतिभागियों के सम्मिलित होने की संभावना है।

वह ऋषभ पंत जैसे विस्फोटक बल्लेबाज के लिए खास प्लान तैयार कर रही है: पैट कमिंस

नई दिल्ली इंडिया वर्सेस ऑस्ट्रेलिया 5 मैच की बॉर्डर गावस्कर टेस्ट सीरीज का आगाज 22 नवंबर से होने जा रहा है। इस सीरीज से पहले टीम इंडिया का आत्मविश्वास पूरी तरह से डगमगाया हुआ है। घर पर भारत न्यूजीलैंड से 0-3 से सीरीज हार चुका है और इस सीरीज में रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे सीनियर खिलाड़ियों की फॉर्म ने भी चिंता बढ़ाई है। ऐसे में सवाल यह है कि भारत इस बार ऑस्ट्रेलिया में जीत की हैट्रिक लगाकर बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी रिटेन करने में कामयाब रहेगा या नहीं। वहीं दूसरी ओर वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया भारत की मेजबानी के लिए पूरी तरह से तैयार है। पैट कमिंस ने खुलासा किया है कि वह ऋषभ पंत जैसे विस्फोटक बल्लेबाज के लिए खास प्लान तैयार कर रही है। वहीं इसके अलावा उन्होंने रोहित शर्मा और विराट कोहली की फॉर्म पर भी बड़ी बात कही है। हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में पैट कमिंस ने ऋषभ पंत को लेकर कहा, “हाँ, वह हमेशा खेल को बहुत तेजr से आगे बढ़ाता है, इसलिए कुछ खिलाड़ियों के लिए, आपके पास कुछ ठोस योजनाएं भी होनी चाहिए। उसने अच्छा खेला है, उसने पिछली बार ऑस्ट्रेलिया में एक अच्छी सीरीज खेली थी। तो हां, हम जानते हैं कि जब वह आगे बढ़ता है तो वह खतरनाक हो सकता है, इसलिए [हम] कोशिश करेंगे और कुछ अच्छी योजनाएं बनाएंगे और उम्मीद करेंगे कि वे सफल हों।” विराट कोहली और रोहित शर्मा की फॉर्म भारत के लिए चिंता का विषय है, पिछली 10 पारियों में दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर 350 रन तक नहीं बनाए हैं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उनका प्रदर्शन कैसा रहता है ये देखने वाली बात होगी। कमिंस ने कोहली और रोहित की फॉर्म को लेकर कहा, “वास्तव में यह जानना मुश्किल है। हर खिलाड़ी अच्छे और बुरे फॉर्म से गुजरता है। अगर आपका टेस्ट करियर लंबा है, तो आपको कुछ छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे। हमारा काम स्पष्ट रूप से भारतीय बल्लेबाजों को जितना हो सके उतना शांत रखना है, इसलिए हम इंतजार करेंगे और देखेंगे। वे दोनों निश्चित रूप से भारत के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में से हैं, इसलिए हम देखेंगे कि क्या होता है।”

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की रहस्मयी मौत? जल्द आएगी फॉरेंसिक रिपोर्ट

 उमरिया मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मरे दस हाथियों के नमूनों की फोरेंसिक लैब रिपोर्ट जल्द ही आएगी. इससे मौत के कारणों की साफ वजह सामने आ जाएगी. अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एल कृष्णमूर्ति ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि नमूने सागर स्थित राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और जबलपुर व नागपुर की प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं. एपीसीसीएफ ने कहा, “हमें भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली की रिपोर्ट पहले ही मिल चुकी है. एफएसएल सागर, जबलपुर और नागपुर की रिपोर्ट भी जल्द ही आ जाएगी और इससे मौत के कारणों के बारे में और जानकारी मिलेगी.” कृष्णमूर्ति हाथियों की मौत की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित पैनल के प्रमुख हैं. बता दें कि 29 अक्टूबर को उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में चार हाथी मृत पाए गए थे. बाद में मरने वालों की संख्या बढ़कर दस हो गई थी. आईवीआरआई की रिपोर्ट के अनुसार, विसरा में न्यूरोटॉक्सिन साइक्लोपियाज़ोनिक एसिड पाया गया था, लेकिन कोई कीटनाशक या कीटनाशक नहीं था. इससे साफ पता चलता है कि कोई जहर नहीं था, बल्कि जहर बड़ी मात्रा में खराब हो चुके कोदो बाजरे के पौधों के खाने से हुआ था. रिजर्व में बचे हुए तीन हाथियों के बारे में पूछे जाने पर कृष्णमूर्ति ने कहा कि वन विभाग की टीमें उनकी गतिविधियों पर नज़र रख रही हैं. एक बच्चा हाथी कटनी की ओर बढ़ गया था और उस पर नज़र रखी जा रही थी.  

मध्य प्रदेश के गांव-गांव से निकालेंगे खिलाड़ी, 13 दिसंबर से खेलो इंडिया की तर्ज पर एमपी स्टेट गेम्स

भोपाल  मध्य प्रदेश में अगले महीने से ‘खेलो एमपी’ कार्यक्रम की शुरुआत होने जा रही है, जिसका उद्देश्य प्रदेश के हर गांव से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करना और उन्हें राज्य स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर प्रदान करना है। इस पहल के तहत 25 खेलों के लिए गांव-गांव में खोज अभियान चलाया जाएगा, ताकि युवा खिलाड़ियों को मंच मिल सके और वे अपने खेल में कौशल को और निखार सकें। ‘खेलो MP’ की शुरुआत 13 दिसंबर से 13 दिसंबर 2024 से मध्य प्रदेश सरकार ‘खेलो एमपी’ की शुरुआत करने जा रही है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश भर में खेलों को बढ़ावा देना और युवा खिलाड़ियों को एक संरचित मंच प्रदान करना है। कार्यक्रम चार चरणों में आयोजित होगा, जिसमें प्रत्येक चरण के दौरान प्रतियोगिताएं विभिन्न स्तरों पर होंगी। राज्य स्तर पर 313 विकासखंडों में होगी प्रतियोगिता खेलो एमपी के तहत राज्य के सभी 313 विकासखंडों में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें 19 वर्ष से कम आयु के खिलाड़ी भाग लेंगे। इसके बाद, 55 जिलों में भी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले खिलाड़ी विभिन्न खेलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।  प्रतियोगिता में शामिल होंगे 25 खेलों के इवेंट इस बार खेलो एमपी में 25 खेलों के प्रतियोगिताएं शामिल की गई हैं। इसमें एथलेटिक्स, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, फुटबॉल, हॉकी, जूडो, कबड्डी, खो-खो, मलखंब, तैराकी, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, टेबल टेनिस, योगासन, वॉलीबॉल, टेनिस, शतरंज और क्रिकेट जैसे प्रमुख खेल शामिल हैं। खास बात यह है कि इस बार क्रिकेट को भी ‘खेलो एमपी’ कार्यक्रम में जगह दी गई है, जो युवाओं में क्रिकेट के प्रति बढ़ते हुए रुचि को ध्यान में रखते हुए लिया गया कदम है।  खेलों के प्रचार-प्रसार के लिए टॉर्च रिले अभियान ‘खेलो एमपी’ के प्रचार-प्रसार के लिए टॉर्च रिले निकाली जाएगी, ताकि इस कार्यक्रम की जानकारी राज्य के कोने-कोने में पहुंचे और ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित हों। यह रिले प्रदेशभर में खेलों के प्रति जागरूकता फैलाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। युवाओं को मिलेगा नया अवसर खेलो एमपी का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उनके खेल के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने का मौका देना है। इस पहल के तहत न केवल बड़े शहरों से बल्कि गांव-गांव से खिलाड़ियों को अवसर मिलेंगे, जो राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। यह राज्य में खेलों की संस्कृति को बढ़ावा देने और नई प्रतिभाओं को सामने लाने में मदद करेगा। ‘खेलो एमपी’ की शुरुआत से राज्य में खेलों को एक नई दिशा मिलेगी और यह युवाओं के लिए करियर बनाने का एक बेहतरीन अवसर साबित होगा। फैक्ट फाइल     अब तक सिर्फ ओलिंपिक गेम्स के जुड़े खेल ही होते रहे हैं     इस बार कुल 25 खेलों को इसमें शामिल किया गया है।     गांव-गांव से लेकर शहर के खिलाड़ी करेंगे भागीदारी।     31 हजार, 21 हजार और 13-13 हजार रुपए की होगी इनामी राशि। स्टेट लेवल ग्वालियर सहित 9 शहरों में होंगे 2022 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स प्रदेश के 8 शहरों में हुए थे। इसी तर्ज पर खेलो एमपी यूथ गेम्स मप्र के 9 शहरों में होंगे। ग्वालियर: हॉकी और बैडमिंटन शिवपुरी: जूडो और क्रिकेट भोपाल: बॉक्सिंग, फेंसिंग, शूटिंग, ताइक्वांडो, रोइंग, तैराकी और कयाकिंग-केनोइंग रीवा: फुटबॉल, टेबल-टेनिस। सागर: वालीबॉल, उज्जैन: कबड्‌डी, मलखंभ, कुश्ती, योगासन। इंदौर: बास्केटबॉल, वेटलिफ्टिंग, टेनिस। जबलपुर में खो-खो, एथलेटिक्स, आर्चरी। कटनी: शतरंज टॉर्च रिले भी निकालेगी इन खेलों के प्रचार-प्रसार की दृष्टि से सभी 55 जिलों में एक टार्च रिले निकाली जाएगी। यह यूथ गेम्स है, इसलिए इसमें 19 वर्ष से कम आयु के खिलाड़ी ही भागीदारी कर सकेंगे। इसके लिए खिलाड़ियों को अपना जन्म प्रमाण पत्र देना होगा।

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