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कौन हैं कमाल फारूकी? कांग्रेस में पूरे 20 साल बाद फिर से वरिष्ठ नेता कमाल फारूकी हुए शामिल

मुंबई महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य रहे वरिष्ठ नेता कमाल फारूकी आज (सोमवार, 21 अक्तूबर को) दो दशक यानी पूरे 20 साल बाद फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। फारूकी अपने बेटे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के पूर्व प्रवक्ता उमर कमाल फारूकी के साथ कांग्रेस में लौटे हैं। वह 2013 तक समाजवादी पार्टी में भी रह चुके हैं। महाराष्ट्र चुनावों से पहले कमाल फारूकी ने कांग्रेस पार्टी में अपनी वापसी बारे में एक बयान जारी कर जानकारी दी है। अपने बयान में फारूकी ने कहा, “भाजपा और उसके जैसे दलों की सांप्रदायिक घृणास्पद दक्षिणपंथी विचारधारा को हराने के लिए कांग्रेस में वापसी करने का फैसला किया है। मौजूदा माहौल में कांग्रेस ही एकमात्र पार्टी है जो वास्तव में हमारे देश की सच्ची भावना का नेतृत्व कर सकती है और उसे पुनर्स्थापित कर सकती है।” फारूकी की घर वापसी को महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ी बढ़त के रूप में देखा जा रहा है। कौन हैं कमाल फारूकी कमाल फारूकी महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के वरिष्ठ नेता हैं। 2004 में कांग्रेस छोड़ने के बाद फारूकी ने बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के टिकट पर चुनाव लड़ाा था, लेकिन बाद में शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में शामिल हो गए थे। उनके बेटे उमर कमाल फारूकी एनसीपी के राज्य प्रवक्ता होने के साथ-साथ एनसीपी की छात्र शाखा के उपाध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुके हैं। कांग्रेस का क्या प्लान? दरअसल, महाराष्ट्र चुनावों से ऐन पहले कमाल फारूकी की घर वापसी से कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि इससे उन्हें महाराष्ट्र के करीब 11.5% मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में लामबंद करने में मदद मिलेगी। हाल के कुछ वर्षों में असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) जैसी पार्टियों ने कई क्षेत्रों में, खासकर औरंगाबाद जैसे जिलों में अपनी पैठ बना ली है, जो कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था, लेकिन हाल के वर्षों में यहां मुस्लिम मतदाताओं का कांग्रेस के प्रति समर्थन घटता जा रहा है।

हरियाणा में हुए मंत्रिमंडल के विभागों का आवंटन, मुख्यमंत्री नायब सिंह को कई महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने मंत्रिमंडल के विभागों के आवंटन की अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह को कई महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए हैं, जिनमें गृह, वित्त, योजना, नगर और ग्राम विकास, सूचना और जनसंपर्क, न्याय प्रशासन, और कई अन्य शामिल हैं। इनके अलावा, अन्य मंत्रियों को भी विभिन्न विभाग आवंटित किए गए हैं, जैसे अनिल विज को ऊर्जा, परिवहन और श्रम विभाग, कृष्ण लाल पंवार को विकास और पंचायत, खनन और भूविज्ञान विभाग आदि। सीएम नायब सिंह सैनी को गृह विभाग, वित्त विभाग, आबकारी एवं कराधान विभाग, योजना विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन और शहरी संपदा विभाग सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा-संस्कृति विभाग, अभियोजन विभाग, सामान्य प्रशासन हाउसिंग फॉर ऑल, सीआईडी, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, कानून एवं विधायी विभाग और वो सभी विभाग जो किसी को अलॉट नहीं हुए हैं, आवंटित किए गए हैं। कैबिनेट मंत्री अनिल विज को परिवहन विभाग, श्रम विभाग और ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार को पंचायत एवं विकास और खान एवं भूविज्ञान विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री राव नरबीर को उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, पर्यावरण एवं वन विभाग, विदेश सहयोग विभाग और सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री महिपाल ढांडा को बेसिक शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग, संसदीय कार्य, अभिलेखागार विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, शहरी स्थानीय निकाय विभाग और नागरिक उड्डयन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री अरविंद शर्मा को सहकारिता विभाग, जेल विभाग, चुनाव विभाग और विरासत एवं पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री श्याम सिंह राणा को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग और मछली पालन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण और अंत्योदय (सेवा) विभाग, आतिथ्य विभाग और वास्तुकला विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री श्रुति चौधरी को महिला एवं बाल विकास विभाग, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री आरती राव को स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान और आयुष विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राजेश नागर को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले (स्वतंत्र प्रभार) और मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग( स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी दी गई है। राज्यमंत्री गौरव गौतम को युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता (स्वतंत्र प्रभार), खेल विभाग (स्वतंत्र प्रभार) और कानून एवं विधायी विभाग ( सलंग्न मुख्यमंत्री) की जिम्मेदारी दी गई है।  

‘सोनमर्ग क्षेत्र के गगनगीर में गैर-स्थानीय मजदूरों पर नृशंस और कायरतापूर्ण हमले की बहुत दुखद खबर है: उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गांदरबल आतंकी हमले पर जो प्रतिक्रिया दी है, उसे लेकर इंटरनेट यूजर्स भड़के हुए हैं। अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करके कहा था, ‘सोनमर्ग क्षेत्र के गगनगीर में गैर-स्थानीय मजदूरों पर नृशंस और कायरतापूर्ण हमले की बहुत दुखद खबर है। ये लोग क्षेत्र में एक प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजना पर काम कर रहे थे। इस उग्रवादी हमले में 2 लोग मारे गए हैं और दो से तीन अन्य घायल हुए हैं। मैं निहत्थे निर्दोष लोगों पर इस हमले की कड़ी निंदा करता हूं और उनके प्रियजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं।’ उमर अब्दुल्ला ने इस हमले की निंदा की, जो इस केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उनके शपथ ग्रहण के महज 4 दिन बाद हुआ। उन्होंने घटना के कुछ वक्त बाद दूसरी पोस्ट में लिखा था, ‘गगनगीर हमले में मृतकों की संख्या अंतिम नहीं है क्योंकि स्थानीय और गैर-स्थानीय दोनों तरह के कई मजदूर घायल हुए हैं। मैं घायलों के पूरी तरह ठीक होने की प्रार्थना कर रहा हूं क्योंकि गंभीर रूप से घायलों को श्रीनगर के एसकेआईएमएस में रेफर किया जा रहा है।’ ‘आतंकवादी के बजाय उग्रवादी शब्द चुना’ गांदरबल हमले की उमर अब्दुल्ला ने निंदा जरूर की, मगर इंटरनेट यूजर्स को यह बात नागवार गुजरी कि सीएम ने इस घटना के लिए उग्रवादी हमले का इस्तेमाल किया। लोग इस बात को लेकर भड़के हुए हैं कि उन्होंने इसे आतंकवादी हमला क्यों नहीं बताया। उमर अब्दुल्ला की पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोगों की टिप्पणियां आईं, जिसमें बताया गया कि कैसे उन्होंने ‘आतंकवादी’ के बजाय ‘उग्रवादी’ शब्द चुना। एक यूजर ने लिखा, ‘ओह, उग्रवादी वापस आ गए हैं।’ इंटरनेट यूजर्स ने लगाई फटकार एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘याद रखिए कि आप केंद्रशासित प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। आपकी हरकतों पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे राज्य का दर्जा रद्द किए जाने की संभावना बन सकती है।’ बता दें कि जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरंग निर्माण स्थल पर आतंकवादी हमला हुआ। इसमें एक डॉक्टर और 6 श्रमिकों की मौत हो गई। आतंकवादियों ने मजदूरों के समूह पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें स्थानीय और बाहरी लोग दोनों शामिल थे। माना जाता है कि आंतकवादियों की संख्या कम से कम 2 थी। दो श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि 4 अन्य घायल श्रमिकों एवं एक डॉक्टर ने बाद में दम तोड़ दिया।

पीएम मोदी की डिग्री वाले केस में अरविंद केजरीवाल के राष्ट्रीय संयोजक की याचिका को सर्वोच्च अदालत ने खारिज किया

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर की गई टिप्पणी वाले मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका मिला है। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक की याचिका को सर्वोच्च अदालत ने खारिज कर दिया है। गुजरात यूनिवर्सिटी की ओर दर्ज मानहानि केस में केजरीवाल के खिलाफ ट्रायल कोर्ट ने समन जारी किया था। पूर्व सीएम ने इसे रद्द कराने के लिए पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जस्टिस ऋषिकेश रॉय और एसवीएन भाटी की बेंच ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि इसी तरह की याचिका आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी दायर की थी और इस अदालत ने खारिज कर दिया था। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दायर याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा, ‘हम हस्तक्षेप के इच्छुक नहीं हैं, एक याचिकाकर्ता हमारे पास आए थे और इसे खारिज कर दिया गया था।’ केजरीवाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि संजय सिंह की ओर से दिया गया बयान अलग था, लेकिन बेंच ने इसे नहीं माना। इससे पहले गुजरात हाई कोर्ट ने फरवरी में समन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट से निराशा हाथ लगने के बाद पूर्व सीएम ने देश की सबसे बड़ी अदालत का रुख किया था। अब यहां से भी राहत नहीं मिलने के बाद उन्हें गुजरात की अदालत में पेश होना पड़ेगा। केजरीवाल और संजय सिंह के खिलाफ दायर मानहानि केस में आरोप लगाया गया है कि दोनों नेताओं ने पीएम मोदी की डिग्री को लेकर गुजरात यूनिवर्सिटी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कीं। एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की ओर से दोनों के खिलाफ पिछले साल अप्रैल में समन जारी किया गया था। हाई कोर्ट में दोनों नेताओं ने दलील दी थी कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि उन्होंने यूनिवर्सिटी को लेकर बयान नहीं दिया था। वहीं गुजरात यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया कि उसकी छवि को नुकसान पहुंचाया गया और इसके लिए उन्हें ट्रायल का सामना करना चाहिए।

CM भजनलाल का एक और तोहफा, कम किया रोडवेज बसों का किराया

जयपुर  राजस्थान रोडवेज प्रशासन ने हाल ही में दिल्ली रूट पर संचालित होने वाली एसी बसों के किराए में कमी की है। इस आदेश से प्राइवेट बस ऑपरेटर्स में काफी हलचल हो रही है। इसको लेकर कई ऑपरेटर्स रोडवेज अधिकारियों के चक्कर काटते भी दिखाई दे रहे हैं। वहीं रोडवेज चेयरमैन शुभ्रा सिंह व एमडी पुरुषोत्तम शर्मा की ओर से की गई सख्ती से रोडवेज की इनकम 74 प्रतिशत से बढ़कर 102 प्रतिशत हो गई है। जानकारी के अनुसार पहले दिल्ली रूट पर हर तीन से चार घंटे में एसी बसें उपलब्ध थी लेकिन अब हर डेढ़ घंटे में वाया कोटपूतली व एक्सप्रेस-वे (दौसा होते हुए) बसों का संचालन किया जा रहा है। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल रही है। जयपुर से वाया कोटपूतली होते हुए प्रतिदिन सात बसें संचालित हो रही है। इनमें एसी बस का 540 रुपए और स्कैनिया (वोल्वो) का 750 रुपए प्रति यात्री किराया है। इसी प्रकार एक्सप्रेव-वे वाया दौसा होते हुए प्रतिदिन 9 बसें उपलब्ध है। स्कैनिया वोल्वो का 790 व एसी बस में 640 रुपए प्रति यात्री किराया है। सबसे फायदेमंद वाला था दिल्ली रूट राजस्थान रोडवेज के लिए दिल्ली रूट सबसे फायदेमंद वाला रूट था। यहां सबसे अधिक यात्रीभार के साथ राजस्व भी ठीक मिलता था लेकिन पिछले कुछ सालों में रोडवेज अधिकारियों की अनदेखी के कारण यह रूट घाटे का सौदा होने लगा। यदि रोडवेज प्रशासन यह सुविधा पिछले छह साल पहले ही कर देता तो आज ऐसी हालत नहीं होती। आखिर रोडवेज प्रबंधन को रोस्टर करने में कौन रोक रखा था। झालावाड़ रूट पर सख्ती से मिलने लगा फायदा रोडवेज का सबसे अधिक घाटा झालावाड़ व हाड़ौती रूट पर था। चेयरमैन व एमडी की ओर से मुख्य प्रबंधकों पर सख्ती करने व 4200 पे ग्रेड वाले अधिकारियों को बसों की चैकिंग करने के पॉवर देने और फ्लाइंग टीम को प्रतिदिन रूट पर चैकिंग करने के निर्देश के बाद अचानक यात्रीभार के साथ राजस्व बढ़ने लगा। इससे हाड़ौती क्षेत्र की प्रतिदिन की इनकम 74 प्रतिशत से बढ़कर 102 प्रतिशत हो गई है। रोडवेज प्रबंधन का कहना है कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा। इसके साथ ही काम नहीं करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी।  

इंदौर एयरपोर्ट पर छह दिन बाद विंटर शेड्यूल होगा लागू , आधा दर्जन उड़ानों का समय बदल जाएगा

इंदौर देशभर के एयरपोर्ट पर 27 अक्टूबर से विंटर शेड्यूल लागू होगा। इंदौर एयरपोर्ट पर भी छह दिन बाद विंटर शेड्यूल लागू होने के साथ ही आधा दर्जन उड़ानों का समय बदल जाएगा। शारजाह, पुणे, बेंगलुरु, मुंबई, जयपुर और जबलपुर उड़ानें बदले समय पर संचालित होंगी। नए शेड्यूल के बाद शारजाह उड़ान इंदौर से 15 मिनट पहले 11.55 बजे रवाना होगी, जबकि शारजाह वर्तमान समय 2.05 बजे ही पहुंचेगी। अभी यह उड़ान इंदौर से 12.10 बजे रवाना होती है। देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर छह दिन बाद विंटर शेड्यूल लागू होने वाला है। इसके साथ ही देर रात्रि संचालित होने वाली पुणे और बेंगलुरु की उड़ान का समय बदल जाएगा। इंडिगो की 6ई 284 उड़ान पुणे से रात्रि 1.40 बजे रवाना होकर रात्रि 2.50 बजे इंदौर आती है। यह छह दिन बाद सुबह संचालित होगी। पुणे से सुबह पांच बजे रवाना होकर 6.10 बजे इंदौर पहुंचेगी। वहीं 6ई 748 उड़ान बेंगलुरु से रात्रि 10.40 बजे रवाना होकर 12.25 बजे इंदौर आती थी। 27 अक्टूबर से यह एक घंटा पहले रात्रि 11.20 बजे इंदौर पहुंच जाएगी। जबलपुर उड़ान एक घंटा देरी से होगी रवाना इंदौर से अभी सुबह पांच बजे उड़ानों का सिलसिला शुरू हो जाता है। विंटर सीजन में सुबह 6.10 बजे जाने वाली इंदौर-जबलपुर उड़ान एक घंटा देरी से सुबह 7.10 बजे रवाना होगी। इसके अलावा इंदौर से बेंगलुरु जाने वाली सुबह पांच बजे वाली उड़ान विंटर सीजन में सुबह 6.10 बजे रवाना होगी। मुंबई उड़ान सुबह 5.30 बजे के स्थान पर 6.40 बजे और जयपुर उड़ान सुबह छह बजे के स्थान पर 6.20 बजे रवाना होगी।  

हरियाणा में पराली जलाने वाले किसानों पर ताबड़तोड़ ऐक्शन, 14 गिरफ्तार, 336 की मंडियों में एंट्री भी बैन

 चंडीगढ़ हरियाणा के कैथल जिले में पराली जलाने के मामले में 14 किसानों को अरेस्ट किया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में बीते कुछ दिनों में पलूशन बढ़ गया है। इस बीच यह ऐक्शन लिया गया है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि पराली जलाने पर रोक के बाद भी किसान नहीं माने तो यह कार्रवाई की गई है। हरियाणा के हिसार समेत कुछ और जिलों में भी ऐसा ऐक्शन हुआ है। दिल्ली में पलूशन बढ़ने के लिए हरियाणा और पंजाब में किसानों द्वारा फसल के अवशेष जलाने को जिम्मेदार ठहराया जाता है। कैथल में कुल 123 किसानों पर केस दर्ज हुए हैं। कहा जाता है कि हर साल धान की फसल काटे जाने के बाद किसान पराली जलाते हैं। उससे निकलने वाले धुएं के चलते ही वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। आमतौर पर हर साल अक्टूबर और नवंबर के महीने में दिल्ली में पलूशन बढ़ने की शिकायतें आने लगती हैं। इस बार भी सुप्रीम कोर्ट तक में यह मामला पहुंचा है और अदालत ने हरियाणा, पंजाब एवं दिल्ली सरकारों को पलूशन पर लगाम कसने का आदेश दिया है। कैथल के डीएसपी बीरभान ने कहा कि बीते कुछ दिनों में 14 किसानों को पराली जलाने पर अरेस्ट किया गया है। हालांकि इन लोगों को बेल पर रिहा कर दिया गया। लगातार बढ़ रही घटनाएं प्रदेश में पराली जलाने के कारण स्मॉग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राज्य में 15 सितंबर को पराली का सीजन शुरू होने से लेकर शनिवार की रात तक प्रदेश के 16 जिलों में पराली जलाने के 642 केस सामने आ चुके हैं। राज्य में कैथल ऐसा जिला है जहां पिछले छह दिनों से AQI में कोई सुधार नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस संबंध में हरियाणा सरकार को फटकार लगाए जाने के बाद दो दिन पहले कृषि निदेशक द्वारा पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए गए थे। जिसके बाद कृषि विभाग की टीमें और पुलिस बल पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। सभी जिलों से स्टेटस रिपोर्ट ली प्रदेश में पराली से फैल रहे प्रदूषण और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रविवार को मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद ने जिला उपायुक्तों की आपात बैठक बुलाकर सभी जिलों से स्टेटस रिपोर्ट ली। इस बैठक को लेकर आधिकारिक रूप से जानकारी तो जारी नहीं की गई लेकिन जिला स्तर पर कई उपायुक्तों ने इस बारे जानकारी जारी की। इस बैठक में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि अब तक प्रदेश में 336 किसानों की रिकार्ड पर रेड पेन एंट्री करके मंडियों में प्रवेश बैन कर दिया गया है। अब यह किसान अगले दो सीजन मंडी में अपनी फसल नहीं बेच पाएंगे। किस जिले में कितने मामले सामने आए जिला पराली जलाने के मामले कैथल 123 कुरुक्षेत्र 90 अंबाला 73 करनाल 68 जींद 49 सोनीपत 40 फतेहाबाद 36 फरीदाबाद 30 कैथल में 1.57 लाख का जुर्माना लगाया गया: डीसी कैथल के जिला उपायुक्त डॉ. विवेक भारती ने कहा कि अब तक जिले में धान की फसल के अवशेष जलाने के 123 मामले सामने आए हैं। इनमें 40 फायर लोकेशन नहीं मिली, जबकि 63 में धान की फसल के अवशेष जलाए जाने की बात सही निकली है और उन पर 1 लाख 57 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा 11 एफआईआर दर्ज हुई है। कैथल में पराली जलाने वाले 43 किसानों की मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रेड एंट्री कर दी गई है। चार सालों का 15 सितंबर से लेकर अब तक ब्योरा साल पराली जलाने के मामले 2021 1082 2022 586 2023 570 2024 642   इन लोगों के खिलाफ प्रदूषण रोकथाम अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ है। पानीपत और यमुनानगर जिलों में भी कई किसानों के खिलाफ केस फाइल हुए हैं। हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी टीवीएसएन ने रविवार को ही डिप्टी कमिश्नरों को आदेश दिया था कि पराली जलाने के मामलों को कंट्रोल किया जाए। बता दें कि बीते सप्ताह हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा एवं पंजाब की सरकारों को फटकार लगाते हुए कहा था कि आपको पराली जलाने से रोकना होगा। इसके अलावा यदि किसान नहीं मानते हैं तो फिर उनके खिलाफ ऐक्शन लिया जाए। अदालत ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को समन भी जारी किया था और 23 अक्टूबर को स्पष्टीकरण के लिए बुलाया है। जस्टिस अभय एस. ओका, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और ए. जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा था कि दोनों राज्य पूरी तरह असंवेदनशील हैं। पलूशन को लेकर उन्हें जो आदेश दिया है, उस पर काम नहीं कर रहे हैं। यह गलत है और उल्लंघन करने वालों पर उन्हें ऐक्शन लेना ही होगा। अदालत के इस सख्त आदेश के बाद ही कार्रवाई की गई है। वहीं किसानों का कहना है कि धान की फसल कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच बहुत कम अंतर रहता है। ऐसे में खेत को जल्दी खाली करने के लिए वे पराली को कई बार जला देते हैं। यह आसान और सस्ता पड़ता है।

ई-संजीवनी हेल्थ केयर सुविधाओं की डिजिटल रूप से पहुंच बढ़ाने में सहायक रही

इंडिया स्टैक लोकल पोर्टल: सुशासन में डिजिटल समाधानों के प्रयोग की महत्वपूर्ण पहल डिजिटल समाधानों के माध्यम से सुशासन और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता ई-संजीवनी हेल्थ केयर सुविधाओं की डिजिटल रूप से पहुंच बढ़ाने में सहायक रही भोपाल भारत को विश्व स्तर पर सॉफ्टवेयर और डिजिटल समाधान के क्षेत्र में अग्रणी देश के रूप में मान्यता प्राप्त है। डिजिटल इंडिया के अंतर्गत आधार, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI), डिजी-लॉकर, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM), एपीआई सेतु, और उमंग जैसे महत्वपूर्ण प्लेटफार्मों ने न केवल नागरिकों के जीवन को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, बल्कि व्यापार और शासन की प्रक्रियाओं को भी आसान किया है। ई-संजीवनी हेल्थ केयर सुविधाओं की डिजिटल रूप से पहुंच बढ़ाने में सहायक रही है। इन नवाचारों ने यह साबित किया है कि कैसे डिजिटल समाधानों के माध्यम से सुशासन और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। पोर्टल पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के डिजिटल समाधानों की विस्तृत जानकारी होगी उपलब्ध देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी कई अग्रणी डिजिटल समाधान अपनाए गए हैं, जो राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं। ये समाधान सुशासन और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ तकनीकी नवाचार में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इन प्रयासों को समेकित मंच पर लाने और देशभर में मौजूद डिजिटल समाधानों की जानकारी को व्यापक रूप से साझा करने के उद्देश्य से https://indiastacklocal.in पोर्टल का निर्माण किया गया है। इस पोर्टल पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के डिजिटल समाधानों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें प्रशासनिक, परियोजना, प्रौद्योगिकी, मॉड्यूल और उपयोगकर्ता के संदर्भ में विवरण शामिल होंगे। सफल डिजिटल योजनाओं को रेप्लीकेट करने में होगा सहयोगी इंडिया स्टैक लोकल पोर्टल का उद्देश्य इन नवाचारी समाधानों के उपयोग को बढ़ावा देना है, ताकि विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान हो सके और सफल डिजिटल योजनाओं को रेप्लीकेट किया जा सके। यह पोर्टल राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल समाधानों को बढ़ावा देकर सुशासन में एक नया मील का पत्थर साबित होगा। विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति का विस्तार होगा। यह पहल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बेहतर प्रशासन और नागरिक सेवाएं प्रदान करने के प्रयासों को गति देगी।  

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक होगी आज शाम को

कोलकाता कोलकाता के आर.जी.कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद गुस्साए जूनियर डॉक्टरों का आमरण अनशन सोमवार को 17वें दिन भी जारी रहा। बतान दें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक राज्य सचिवालय नबन्ना में आज शाम को होने वाली है। हालांकि राज्य सरकार ने पहले कहा था कि बैठक में भाग लेने के लिए भूख हड़ताल वापस लेनी होगी। मगर इस मुद्दे पर आंदोलन की अगुवाई करने वाले पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट (डब्ल्यूबीजेडीएफ) ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे इस शर्त को स्वीकार नहीं कर रहे हैं और उनका प्रतिनिधिमंडल भूख हड़ताल वापस लिए बिना ही बैठक में भाग लेगा। बैठक के लिए कुल 45 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। पहले दिन से भूख हड़ताल में भाग लेने वाले जूनियर डॉक्टरों में से एक सायंतनी घोष हाजरा ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल सकारात्मक सोच के साथ मुख्यमंत्री के साथ बैठक में भाग लेने जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि भूख हड़ताल पर बैठे लोगों को छोड़कर बाकी सभी अपनी चिकित्सा सेवा ड्यूटी पर वापस आ गए हैं। इसलिए कोई यह नहीं कह सकता कि चिकित्सा सेवाएं बाधित हो रही हैं। इसलिए हमें उम्मीद है कि इस मुद्दे पर हमारी मांगें आखिरकार पूरी होंगी।” फिलहाल कुल सात जूनियर डॉक्टर भूख हड़ताल पर हैं। इनमें से सात सेंट्रल कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित मंच पर हैं और एक दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी स्थित नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के परिसर में है। अब तक, 5 अक्टूबर की शाम से शुरू हुई भूख हड़ताल में हिस्सा ले रहे छह जूनियर डॉक्टरों की तबीयत बहुत खराब हो गई है, इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों की 10 सूत्री मांगों में सबसे विवादास्पद मांग राज्य के स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम को हटाना है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने जूनियर डॉक्टरों से फोन पर बातचीत के दौरान साफ कहा कि उनकी ओर से इस मांग को पूरा करना संभव नहीं होगा।  

लालकुआं से बांद्रा के लिए सुपरफास्ट ट्रेन को सीएम धामी ने दिखाई हरी झंडी

नैनीताल उत्तराखंड के लालकुआं से बांद्रा के लिए सुपरफास्ट रेलगाड़ी (ट्रेन) शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअली इस ट्रेन को सोमवार को हरी झण्डी दिखाई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बाबा कैंची धाम के आशीर्वाद से आज लालकुंआ से बांद्रा के मध्य ट्रेन संचालन का सपना पूरा हुआ है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस ट्रेन के संचालन से रामपुर, मुदादाबाद, गाजियाबाद, हजरत निजामुदीन, मथुरा, सवाई माधोपुर, कोटा, वडोदरा सूरत के साथ ही उत्तराखंड की जनता लाभान्वित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस रेल सेवा के शुरू होने से बाबा कैंची धाम, जागेश्वर के साथ ही अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा का एक बेहतर विकल्प मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम भारतीय रेल के स्वर्णिम युग की ओर आगे बढ़ रहे हैं। आत्मनिर्भरता और आधुनिकता के प्रतीक के रूप में वंदेभारत जैसी मेड इन इंडिया ट्रेन रेल नेटवर्क का हिस्सा बनी हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और केंद्र के सहयोग से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल सेवा का सपना भी जल्द पूर्ण हो जयेगा। टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन पर भी सर्वे का कार्य पूर्ण हो चुका है। जल्द ही इसमें भी कार्य शुरू हो जायेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड से काशी, अयोध्या और अन्य प्रमुख शहरों के लिए रेल सेवा के विस्तार के प्रयास किये जायेंगे। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और सांसद अजय भट्ट ने कहा कि यहां के लोगों की यह बहुत पुरानी मांग थी। इस सेवा से पूरे कुमाऊं में पर्यटन और तीर्थाटन बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अब सप्ताह में तीन रेल गाड़ियां रामनगर, हल्द्वानी और अब लालकुआं से मुम्बई के लिए जा रही हैं। यह रेल सेवा लालकुआं से सुबह 07:45 बजे प्रस्थान कर अगले दिन मंगलवार को प्रातः 08:30 बजे बान्द्रा टर्मिनल पहुंचेगी तथा उसी दिन (मंगलवार) को 11:00 बजे लालकुआं के लिए प्रस्थान कर अगले दिन बुधवार 13:15 बजे लालकुओं पहुंचेगी। इस अवसर पर विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट और रेलवे के डीआरएम श्रीमती रेखा यादव उपस्थित रहीं।  

उज्जैन : कुख्यात कैदी इंदौर के अस्पताल से फरार, वजह जानकर दंग रह जाएंगे आप

इंदौर / उज्जैन उज्जैन की भैरवगढ़ जेल में बंद एक कैदी को तबीयत खराब होने पर पिछले दिनों इंदौर के संयोगितागंज थाना क्षेत्र स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से मौका मिलते ही कैदी फरार हो गया। मामले में पुलिस आरोपी को तलाश कर रही है। संयोगितागंज थाना टीआई सतीश पटेल के मुताबिक इरफान लाला पिता सरवन खान (31) निवासी खुदीराम बोस मार्ग उज्जैन भादंवि की धारा 262 के तहत उज्जैन जेल में बंद है। अपहरण के आरोपी इरफान लाला को तबीयत खराब होने पर 4 अक्टूबर को सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब से वह अस्पताल में ही वार्ड 201 में भर्ती था। देर रात को मौका पाकर वह हथकड़ी निकालकर पुलिस अभिरक्षा से भाग निकला। मामले मे पुलिस दो टीमें लगाकर आरोपी की सरगर्मी से तलाश कर रही है। आरोपी को मुंह के कैंसर की बीमारी थी। इलाज के लिए उसे भर्ती किया गया था। इंदौरी बदमाश ने उज्जैन मे की रंगदारी खाराकुंआ थाना क्षेत्र स्थित बड़ा सराफा बाजार में इंदौर के एक बदामश ने दुकानदार के साथ रंगदारी की। बदमाश ने शराब पीने के लिए दुकानदार से रुपए मां,गे नहीं देने पर दुकान का सामान उठाकर ले जाने लगा। पुलिस ने बदमाश के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर मामला जांच में लिया है। पुलिस ने बताया अभिषेक पिता रणछोड़ दास गुप्ता उम्र 35 वर्ष की कॉस्मेटिक सामान विक्रय की दुकान बड़ा सराफा में स्थित है। सुबह उसकी दुकान पर इंदौर के बिजासन टेकरी के समीप का रहने वाला दिनेश पिता मुन्नालाल पहुंचा और शराब पीने के लिए रुपए की मांग की। अभिषेक ने रुपए देने से इंकार किया तो दिनेश सामान उठाकर जाने लगा। उसे पकड़ा तो जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने दिनेश के खिलाफ केस दर्ज कर मामला जांच में लिया है।

मदरसा विद्यार्थी के सरकारी स्कूलों में तबादले पर रोक, सरकार के फैसले पर SC की फिलहाल रोक

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने एनसीपीसीआर की सिफारिशों पर सोमवार को रोक लगा दी। मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने NCPCR की सिफारिश पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। ऐसे में आरटीई का पालन नहीं करने वाले मदरसों को भी राज्य से मिलने वाली फंडिंग नहीं रुकेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है और चार हफ्तों में जवाब देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में ट्रांसफर करने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर भी रोक लगाई है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि एनसीपीसीआर के पत्र और उत्तर प्रदेश व त्रिपुरा समेत कुछ राज्यों की कार्रवाइयों पर रोक लगाई जानी चाहिए। मुस्लिम संगठन ने उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा सरकारों के उस निर्देश को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया कि गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि इस वर्ष 7 जून और 25 जून को जारी एनसीपीसीआर के सिफारिश पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इसके चलते किए गए राज्यों के आदेश भी स्थगित रहेंगे। न्यायालय ने मुस्लिम संस्था को उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा के अलावा अन्य राज्यों को भी अपनी याचिका में पक्षकार बनाने की अनुमति दी। NCPCR का क्या है इस मामले पर तर्क एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने बीते दिनों कहा था कि उन्होंने मदरसों को बंद करने के लिए कभी नहीं कहा। बल्कि, उन्होंने इन संस्थानों को सरकार की ओर से दी जाने वाली धनराशि पर रोक लगाने की सिफारिश की क्योंकि ये संस्थान गरीब मुस्लिम बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रहे हैं। कानूनगो ने कहा कि गरीब पृष्ठभूमि के मुस्लिम बच्चों पर अक्सर धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के बजाय धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए दबाव डाला जाता है। उन्होंने कहा कि वह सभी बच्चों के लिए शिक्षा के समान अवसरों की वकालत करते हैं। दरअसल, एनसीपीसीआर ने एक हालिया रिपोर्ट में मदरसों की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई थी। इस आधार पर ऐक्शन लेने की मांग की गई। हालांकि, इस रिपोर्ट पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। सत्तारूढ़ भाजपा पर अल्पसंख्यक संस्थानों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने का आरोप लगाया गया। किसने दायर की थी याचिका उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा सरकार के आदेश के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद ने याचिका दाखिल की थी। यूपी सरकार का आदेश एनसीपीसीआर की रिपोर्ट के आधार पर लिया था। इसमें आरटीई 2009 का पालन नहीं करने वाले मदरसों की मान्यता रद्द करने और सभी मदरसों की जांच करने को कहा गया था। सीजेआई की बेंच ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर गौर किया और राज्यों की कार्रवाई पर रोक लगा दी। कभी भी मदरसों को बंद करने की मांग नहीं की- एनसीपीसीआर  इंटरव्यू में एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा था कि उन्होंने कभी भी ऐसे मदरसों को बंद करने की मांग नहीं की थी, बल्कि उन्होंने सिफारिश की थी कि इन संस्थानों को दी जाने वाली सरकारी फंडिंग बंद कर दी जानी चाहिए, क्योंकि ये गरीब मुस्लिम बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गरीब पृष्ठभूमि के मुस्लिम बच्चों पर अक्सर धर्मनिरपेक्ष शिक्षा की बजाय धार्मिक शिक्षा लेने के लिए दबाव डाला जाता है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि वह सभी बच्चों के लिए बराबरी की शिक्षा के अवसरों की वकालत करते हैं।

हिज्बुल्लाह का नेता लीडर नईम कासिम मौत के डर से फरार, ईरान में छिपा बैठा

बेरुत बीते एक साल से हमास और हिजबुल्लाह से लड़ रही जंग में इजरायल बीते कुछ दिनों से आक्रामक है। उसने एक तरफ हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर सैयद हसन नसरल्लाह को लेबनान के अंदर ही घुसकर मार गिराया तो वहीं हमास के पॉलिटिकल चीफ रहे इस्माइल हानियेह को तो तेहरान में मार डाला था। फिर बीते सप्ताह उसने हमास के नेता याह्य सिनवार को भी मार गिराया। इजरायल के इन हमलों का ऐसा खौफ है कि नसरल्लाह के बाद हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर कहे जा रहे नईम कासिम ने लेबनान ही छोड़ दिया है। वह अब तक लेबनान में ही रहता था, लेकिन इजरायली हमले में मारे जाने के डर से भाग निकला है। यूएई स्थित Erem News की रिपोर्ट के मुताबिक नईम कासिम ने ईरान में शरण ली है। उसके ठिकाने के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है और वह पूरी तरह से अंडरग्राउंड है। वह एकदम सेफ लोकेशन में छिप कर रहा रहा है ताकि इजरायल के हाथों न मारा जाए। फिलहाल वह हिजबुल्लाह का डिप्टी सेक्रेटरी जनरल है और उसके सेकेंड इन कमांड कहा जाता है। ऐसे में उसका भागना बताता है कि हिजबुल्लाह किस तरह से इजरायल के डर में है। पेजर विस्फोट और फिर वॉकी-टॉकी धमाकों के बाद से डरे हिजबुल्लाह को अब तक इजरायल बड़ा नुकसान पहुंचा चुका है। ईरानी विदेश मंत्री के एयरक्राफ्ट से ही भागा नईम कासिम उसकी कई सरगनाओं को उसने ठिकाने लगा दिया है तो वहीं लगातार लेबनान में हमले कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नईम कासिम 5 अक्टूबर को ही बेरूत से निकल गया था। उसने इसके लिए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के विमान का इस्तेमाल किया। इस विमान के जरिए वह लेबनान और सीरिया की यात्रा पर निकलते थे। इसी को उन्होंने हिजबुल्लाह कमांडर को मुहैया करा दिया। 27 सितंबर को नसरल्लाह के मारे जाने के बाद नईम कासिम ने तीन भाषण भी दिए थे। वह इजरायल पर खूब गरजा था, लेकिन अब उसके लगातार हमलों से खौफ में है। बता दें कि इजरायल हिजबुल्लाह के भी कई नेताओं को हमास की तरह ही मार चुका है। नसरल्लाह के मारे जाने के बाद कमान संभाली नईम कासिम को हिजबुल्लाह के संस्थापक सदस्यों में माना जाता है। नसरल्लाह के मारे जाने के उसे ही पब्लिक रोल में देखा जा रहा था। ऐसे में उसका डर से भागना इजरायल को बढ़त दिलाने वाला है। नईम कासिम बीते कई दशकों से इस्लामिक संगठनों का हिस्सा रहा है और फिर जब हिजबुल्लाह बना तो उसका संस्थापक सदस्य रहा। इजरायल उसके पीछे पड़ा है ताकि उसे मार गिराने के बाद हिजबुल्लाह की लीडरशिप को खत्म किया जा सके।

अगले महीने स्पेन में होने वाले बिली जीन किंग कप के फाइनल्स में चोट की वजह से हिस्सा नहीं लेंगी: नाओमी ओसाका

टोक्यो चार बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन नाओमी ओसाका ने कहा है कि वह अगले महीने स्पेन में होने वाले बिली जीन किंग कप के फाइनल्स में चोट की वजह से हिस्सा नहीं लेंगी। ओसाका ने क्योडो न्यूज से कहा, “मैंने इस साल बहुत से टूर्नामेंट खेले हैं, इसलिए यह मेरे लिए एक बहुत मुश्किल फैसला था कि मैं इस टूर्नामेंट और बिली जीन किंग कप में हिस्सा नहीं लूंगी।” उन्होंने कहा, “मुझे इस टूर्नामेंट में खेलकर बहुत मजा आया और इसने मुझे एक खिलाड़ी के रूप में बेहतर बनने में मदद की।” अक्टूबर में, 58वीं रैंक की ओसाका ने चीन ओपन के दौरान कोको गॉफ के खिलाफ मैच में अपनी पीठ में चोट लगा ली थी और मैच से रिटायर हो गईं। इसके बाद, उन्होंने जापान के दो टूर्नामेंट्स से नाम वापस ले लिया, जिनमें सोमवार से शुरू होने वाला पैन पैसिफिक ओपन भी शामिल है। रविवार को 27 वर्षीय ओसाका ने बताया कि उनके पेट की मांसपेशियों को भी नुकसान पहुंचा है। ओसाका ने कहा, “मैंने सोचा था कि मेरी पीठ में सिर्फ खिंचाव आया है, लेकिन बीजिंग में एमआरआई कराने के बाद पता चला कि मेरी पीठ की एक डिस्क खिसक गई है और पेट की मांसपेशियों में भी चोट आई है।” उन्होंने यह भी कहा, “मैं लॉस एंजेलिस में इस टूर्नामेंट के लिए तैयारी कर रही थी, लेकिन जब मैंने फिर से एमआरआई करवाया, तो पता चला कि चोट अभी भी ठीक नहीं हुई है।” बिली जीन किंग कप का फाइनल 13 से 20 नवंबर के बीच मलागा, स्पेन में होगा। ओसाका ने अप्रैल में कज़ाखस्तान को हराकर जापान को फाइनल्स में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। यह 2020 के बाद उनका पहला बिली जीन किंग कप था। अब ओसाका प्रतिष्ठित फ्रेंच कोच पैट्रिक मूरतोग्लू के साथ काम कर रही हैं और वह जनवरी में होने वाले ऑस्ट्रेलियन ओपन की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करेंगी।  

आरक्षण और निर्वाचन: आज भी देश में इंसान को इंसान की नज़र से देखने वाले कम है

आरक्षण और निर्वाचन: आज भी देश में इंसान को इंसान की नज़र से देखने वाले कम है भारत में आज आरक्षण और निर्वाचन दोनों विषयों पर निरंतर बहस जारी है साथ ही दोनों विषयों पर जनता संदेह करती ही रहती है। आज के समय में दोनों विषयों पर चर्चा और विश्वसनीयता बनाना सरकार का पहला कदम होना चाहिए। आरक्षण –देश में आरक्षण कमजोर और भेद भाव और पीढ़ी दर पीढ़ी अस्पर्शता का दंश झेल रहे अनु जाति जन जाति और पिछड़े वर्गों को सामाजिक,आर्थिक, राजनेतिक स्तर पर बराबरी पर लाने के लिए ये व्यवस्था भारतीय संविधान में अंकित किया गया जिससे देश में कमजोर अनु जाति, जन जाति वर्ग को सम्मानजनक जीवन मिल सकें। परंतु समय के साथ साथ इन वर्गों को समान अवसर जरुर मिले पर इसके साथ साथ उनके साथ अत्याचार, भेद भाव, और अन्याय भी बढ़ते गए। आज भी देश में इंसान को इंसान की नज़र से देखने वाले कम है।आज राजनीतिक रूप से भी उचित स्थान इन वर्गों को नहीं मिला। आरक्षण और वर्तमान भारत में 1950 मै जब आरक्षण विधेयक पारित हुआ तो उसके साथ ही अनु जाति जन जाति पिछड़ा वर्ग को शासकीय सेवाओं, राजनीतिक पार्टियों और निर्वाचन क्षेत्रों में ये व्यवस्था लागू हो गई। इसका मुख्य कारण ये रहा की इन वर्गों को देश में कभी समान अवसर नहीं मिले ना ही इन वर्गों का खान पान और रहवास अन्य वर्ग के समान सुखद नहीं रहा आज भी इन वर्गों की बस्तीया टोला, मढिया, हरिजन बस्ती हरिजन वार्ड, आदिवासी मुहल्ला, टीला, मलिन बस्तियों, और गरीब बस्तीयो, के विभिन्न नामों से पुकारी जाती है। इन वर्गों की आबादी में आज भी केवल चुनाव और मुख्य वजह पर ही सरकार की नज़र जाती हैं। परंतु समय के साथ इन वर्गों के अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता की कमी के कारण इसका दुरुपयोग प्रारम्भ हो गया।बड़े ही शर्म की बात है की किसी भी वर्ग का व्यक्ति अनु जाति जन जाति वर्ग का प्रमाण पत्र बनवा कर विधायक, मंत्री, सरपंच, आदि बन जाता है जब तक ये जानकारी लगती है या न्यायलाय द्धारा फर्जी सिद्ध होता है जब तक वो कार्यकाल पूरा कर लेता है। अनेक व्यक्ती सामान्य वर्ग के अनु जाति, जन जाति वर्ग से विवाह देखा कर पति पत्नी के रुप में रहकर इस आरक्षण का लाभ उठा लेते हैं। वास्तविक स्वरूप में बहुत कम पात्र जरुरतमंद लोगों को आरक्षण का लाभ मिल पाता है।आरक्षण के वर्तमान समय में आरक्षण मै महिला वर्ग, दिव्यांगजन भी आरक्षित वर्ग से आउटसोर्स, संविदा, निजीकरण, ठेकेदारी प्रथा ने इन वर्गों को समान अवसर समान अधिकारो का हनन किया है। भारतीय जनता पार्टी नित सरकार द्वारा 10% EWS आरक्षण देकर वर्ष 2019 मै अनु जाति जन जाति वर्ग को, कही ना कहीं रोका गया है। अनु जाति जन जाति वर्ग पर लागू हित साधन अनु जाति जन जाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के आदेश पर भी जो घटना 2अप्रैल 2018 को प्रदर्शन देश भर में हुआ वो भी एक इस वर्ग को चिंता मत मै किए हैं।आज वर्ष 2024 मै भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनु जाति जन जाति वर्ग में आरक्षण मै उपवर्गीकरण भी इस वर्ग को आरक्षण से दूर करने को असंकित करता है। आज देश में लेट्रिंग से लेकर कैटरिंग तक सभी जगह निजीकरण ठेकेदारी हावी है। देश में विशेष वर्ग आज भी संपन्न है और ये वर्ग पिछड़े है। आज अमीर और गरीब मै जमीन आसमान का अन्तर हो गया है। देश में एनजीओ, सहकारिता, निजीकरण, और पूंजीवाद हावी है। जिस से इन वर्गों के अधिकारों का निरंतर हनन हो रहा है। निर्वाचन -भारत में निर्वाचन को लोकतंत्र की प्रमुख हिस्सा माना गया है। जिस नागरिक ने भारत में जन्म लिया है वो 18 वर्ष पूर्ण करने पर देश का ज़िम्मेदार नागरिक के तौर पर मतदाता होता है। और 25 वर्ष में प्रत्याशी के रुप में देश में  लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को विशेष अधिकारो को दिए गए हैं जिसमें मतदान भी है। आज देश के लिए एक चिंतनीय विषय बहुत बड़ा है वो है निर्वाचन आयोग के कार्यों पर विश्वयनीयता । महंगे चुनाव, धन आधारित चुनाव मैदान, लोक सभा, विधान सभा में आपराधिक गतिविधियों में लिप्त और धनवान लोगों का जाना कहीं ना कहीं निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं। EVM जब देश में निर्वाचन के लिए उपयोग में लाई गई थी तब देश में तकनीकी ज्ञान और तकनीक का इतना विकास नहीं हुआ था। आज हर एक दल निर्वाचन आयोग को ईवीएम मशीनों को लेकर लागतार शिकायत दर्ज करता रहता है। इसी प्रकार से वीपीपीटी पर्ची के ईवीएम से मतदान के साथ 100% मिलान की मांग होती रही है। साथ ही पुनः ईवीएम मशीन के मतगणना में लगने वाली 47000 रु प्रति ईवीएम मशीन की राशि कम करने की मांग होती रही है। वैलेट पेपर से चुनावों को कराने की मांग आज के समय में सम्भव भी है क्योंकि आज हमारे पास परिवहन के संसाधन है पोलिंग बूथों पर सीसीटीवी कैमरों जिसे व्यवस्था है जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम है। पारदर्शिता के लिए सभी संसाधन मौजूद है। अब इन निर्वाचन मुद्दों के साथ एक देश एक चुनाव पर भी विचार हो रहा है।  एक देश एक चुनाव क्या ये सही है एक बार वोट दो और जनता 5 साल को फुर्सत। मतलब चुनाव के बाद आप सरकार से सवाल जवाब करे पर वोट रूपी वरदान को नजरंदाज कर। एक देश एक चुनाव के बाद कही एक चरण में मतदान भी लागू ना हो जाए। फिर क्या जब जनता को समझाने में वर्षो लग जाते है फिर एक दिन में चुनाव संपन्न करना कही ना कहीं संदेह के परे है। आज देश में ब्लू टुथ, AI , GPS, ड्रोन जिसे उपकरण चलने लगे हैं आज इलेक्ट्रोल बॉन्ड भी निर्वाचन मै एक रिश्वत भ्रष्टाचार का आधार बनता दिख रहा है। समय रहते हमें लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभों की रक्षा करना ज़रूरी है एवं आधुनिकता के साथ जनता में विश्वास बनाएं रखना सरकार का कर्तव्य है।      हेमन्त आजाद स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार        मध्य प्रदेश

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