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विदेश मंत्रालय ने कहा- भारत कनाडा संबंधों को जो नुकसान हुआ है, उसकी जिम्मेदारी सिर्फ श्री ट्रूडो पर

नई दिल्ली भारत ने कनाडा में एक जांच आयोग में कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के बयान का खंडन करते हुए दोहराया है कि उनकी सरकार ने भारतीय राजनयिकों के खिलाफ कोई भी सबूत नहीं दिए हैं और इस मामले की वजह से भारत कनाडा संबंधों को जो नुकसान हुआ है, उसकी जिम्मेदारी सिर्फ श्री ट्रूडो पर है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जांच आयोग में श्री ट्रूडो के बयान को लेकर मीडिया के सवालों के जवाब में कहा, “आज हमने जो सुना है, वह केवल उस बात की पुष्टि करता है, जो हम लगातार कहते आ रहे हैं। कनाडा ने भारत और भारतीय राजनयिकों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों के समर्थन में हमें कोई भी सबूत पेश नहीं किया है।” श्री जायसवाल ने कहा, “इस नुकसान की जिम्मेदारी इस तरह के गैर जिम्मेदाराना एवं अभिमानी व्यवहार की है। भारत-कनाडा संबंधों में जिस तरह का व्यवहार खराब हुआ है, उसका सारा दोष अकेले प्रधानमंत्री ट्रूडो पर है।”  

संवैधानिक है नागरिकता अधिनियम, देश की सर्वोच्च अदालत ने 4-1 की बहुमत से फैसला सुनाया

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने असम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए 1985 में संशोधन के माध्यम से नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा। देश की सर्वोच्च अदालत ने 4-1 की बहुमत से फैसला सुनाया। संविधान पीठ ने नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए की वैधता की पुष्टि की है। इसके तहत 1 जनवरी, 1966 और 25 मार्च, 1971 के बीच असम में प्रवेश करने वाले अवैध अप्रवासियों को नागरिकता का लाभ दिया गया था। आपको बता दें कि इनमें से अधिकतर बांग्लादेश से थे। सीजेआई धनंजय वाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत, एमएम सुद्रेश और मनोज मिश्रा की पीठ ने इसके पक्ष में फैसला सुनाया। वहीं, जस्टिस जेबी पारदीवाला ने इस प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए इसे भविष्य में प्रभावी माना। जस्टिस जेबी पारदीवाला ने सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत, एमएम सुद्रेश और मनोज मिश्रा की बहुमत की राय से असहमति जताई। यह आदेश उस याचिका पर आया जिसमें कहा गया था कि बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) से शरणार्थियों के आने से असम के जनसांख्यिकीय संतुलन पर असर पड़ा है। इसमें कहा गया था कि नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए राज्य के मूल निवासियों के राजनीतिक और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। बहुमत का फैसला पढ़ते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि धारा 6ए का अधिनियमन असम के समक्ष उपस्थित एक अनूठी समस्या का राजनीतिक समाधान है। बांग्लादेश के निर्माण के बाद राज्य में अवैध प्रवासियों के बड़े पैमाने पर प्रवेश ने इसकी संस्कृति और जनसांख्यिकी को गंभीर रूप से खतरे में डाल दिया था। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “केंद्र सरकार इस अधिनियम को अन्य क्षेत्रों में भी लागू कर सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। यह असम के लिए खास बना था। असम में आने वाले प्रवासियों की संख्या और संस्कृति आदि पर उनका प्रभाव असम में अधिक है। असम में 40 लाख प्रवासियों का प्रभाव पश्चिम बंगाल के 57 लाख से अधिक है, क्योंकि असम का क्षेत्रफल पश्चिम बंगाल से कम है।”

मोटिवेशनल स्पीकर मुंबई के लोकप्रिय इंफ्लूएंसर मुनव्वर जमा और दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया

सिकंदराबाद सिकंदराबाद के कुम्मारिगुडा में मुथ्यालम्मा मंदिर में हुई तोड़फोड़ की घटना के बाद हैदराबाद पुलिस ने मुंबई के लोकप्रिय इंफ्लूएंसर मुनव्वर जमा और दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इन लोगों पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और नफरत फैलाने का आरोप लगा है। दो अन्य लोगों में अब्दुल रशीद बशीर अहमद और रहमान का नाम शामिल है। ये दोनों रेजिमेंटल बाजार में मेट्रोपोलिस होटल के मालिक और प्रबंधक हैं। पुलिस ने कहा कि वे एक महीने तक चलने वाले इस कार्यशाला के आयोजन की आड़ में हिंदुओं के प्रति नफरत भड़काया गया। पुलिस के अनुसार भारत के विभिन्न हिस्सों से 151 लोग आए थे। उनमें सलमान सलीम ठाकुर उर्फ ​​सलमान भी शामिल था, जिसने 14 अक्टूबर को मंदिर में घुसकर एक स्थानीय देवता की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया। उसे स्थानीय लोगों ने ऐसा करते हुए पकड़ लिया और पुलिस को सौंपने से पहले उसकी पिटाई कर दी। उसका वर्तमान में एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस अब इसमें शामिल होने वाले अन्य व्यक्तियों और जमा के पिछले रिकॉर्ड की जांच कर रही है। मुनव्वर ज़मा ने न केवल धार्मिक आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा दिया, बल्कि उन्होंने प्रतिभागियों को दंगे भड़काने के लिए उकसाया। गोपालपुरम पुलिस स्टेशन के सब इंस्पेक्टर एल सुरेश ने कहा, “उन्होंने सलमान को मुथ्यालम्मा मंदिर में देवी की मूर्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए भी उकसाया।” जमा ने कार्यशाला आयोजित करने की अनुमति नहीं ली थी। बशीर और रहमान ने आयोजित करने में उनकी मदद की। पुलिस ने इसकी जानकारी दी है। तीनों के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए पुलिस ने उन पर धारा 299 (जानबूझकर धार्मिक भावनाओं का अपमान या अपमान), 192 (दंगा भड़काने के इरादे से दुर्भावनापूर्ण या बेवजह उकसावा), 196 (विभिन्न आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी और घृणा को बढ़ावा देना), 223 (लोक सेवकों के आदेशों की अवहेलना करना जिससे बाधा या खतरा हो सकता है) और बीएनएस की धारा 49 (अपराध करने के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम सम्मेलन की रिकॉर्डिंग, प्रतिभागियों को वितरित की गई सामग्री और कई अन्य विवरणों की भी जांच कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि सभी प्रतिभागियों को होटल के 49 कमरों में ठहराया गया था। पुलिस ने अब तक पाया है कि ज़ामा इंग्लिश हाउस अकादमी का संस्थापक है और खुद को एक प्रेरक वक्ता और व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षक के रूप में पहचानता है।

नायब सिंह सैनी और उनकी कैबिनेट ने शपथ ली तो अरविंद शर्मा को भी मंत्री बनाया गया, यहां की जलेबी हुई थी मशहूर

गोहाना गोहाना की विशाल जलेबी और हरियाणा चुनावों के बीच एक मीठा संबंध बन गया था। पूरे चुनाव के दौरान इसकी खूब चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनावी भाषणों में इसका जिक्र किया था। हलांकि जिस दिन नतीजे सामने आए उस दिन यह सीट भाजपा की झोली में गई। अरविंद शर्मा यहां से विधायक बने। आज जब नायब सिंह सैनी और उनकी कैबिनेट ने शपथ ली तो अरविंद शर्मा को भी मंत्री बनाया गया। डॉ. अरविंद शर्मा 1996 में सोनीपत लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव जीतकर सियासी दिग्गजों को चौंका दिया था। इसके बाद वे कांग्रेस में शामिल हो गए और करनाल से 2004 और 2009 में फिर सांसद बने। 2014 में कांग्रेस छोड़कर बसपा में चले गए। हालांकि वह विधानसभा चुनाव भी हार गए। 2019 में वह भाजपा में शामिल हुए। भाजपा ने रोहतक लोकसभा सीट से उन्हें उम्मीदवार बनाया। उन्होंने कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा को 7503 मतों से हराया। 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें गोहाना से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने तीन बार के कांग्रेस विधायक जगबीर मलिक को चुनाव हराया। गोहाना की मशहूर जलेबी को 1958 में मातू राम गोहाना में लेकर आए थे। अब इसे मातू राम की तीसरी पीढ़ी चला रही है। जलेबी शुद्ध देसी घी से बनाई जाती है। ये कुरकुरी और रसभरी होती है और हर का वजन लगभग 250 ग्राम होता है। यह मिठाई एक हफ्ते से अधिक समय तक रखी जा सकती है। चुनावों के दौरान नेताओं की ओर से भारी ऑर्डर आते हैं, जबकि उनमें से कुछ लोग मिठाई खाने के लिए गोहाना की दुकान पर जाना पसंद करते हैं। राहुल ने किया था जिक्र गोहाना में एक चुनावी रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रसिद्ध जलेबी निर्माता मातू राम हलवाई का डिब्बा दिखाते हुए इस बात पर जोर दिया कि उनकी जलेबी पूरे देश में बेची जानी चाहिए और निर्यात की जानी चाहिए। इससे अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। लोकसभा चुनाव में PM ने साधा था निशाना इससे पहले, मई में गोहाना में लोकसभा चुनाव के लिए एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधने के लिए मातू राम की जलेबी का जिक्र किया था। विपक्षी इंडिया गठबंधन पर हमला करते हुए मोदी ने तब कहा था कि अगर वे सत्ता में आते हैं तो उनके पास पांच साल में पांच प्रधानमंत्री बनाने का फॉर्मूला है। उन्होंने कहा, उनसे पूछो क्या प्रधानमंत्री का पद हमारी मातू राम की जलेबी है? चौधरी देवीलाल भी जलेबियों के शौकीन रहे पूर्व उप प्रधानमंत्री चौधरी देवी लाल भी मातू राम की जलेबियों के शौकीन थे। हरियाणा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री नायब सैनी और कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा कुछ देर के लिए इस दुकान पर रुके थे।

SGPC ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह का इस्तीफा किया रद्द

अमृतसर SGPC  ने तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार पद से ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा दिया इस्तीफा रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा कि हरप्रीत सिंह की सेवाओं की बहुत जरूरत है। वह ज्ञानी हरप्रीत सिंह का इस्तीफा रद्द करते है। उन्होंने हरप्रीत सिंह से अनुरोध किया गया कि वह उनका नेतृत्व करते रहें।         एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि कई वर्षों से एस.जी.पी.सी. सिख मुद्दों का प्रतिनिधित्व करती आ रही है। वहीं एस.जी.पी.सी. सभी तख्त साहिबानों के जत्थेदारों का दिल से सम्मान करती है। उनका कहना है कि सिखों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और सभी को मिल कर एस.जी.पी.सी. को बचाना होगा।   एसजीपीसी ने की प्रेस कांफ्रेंस एसजीपीसी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने आज प्रेस कान्फ्रेंस की और उसमें कहा कि ज्ञानी हरप्रीत सिंह की सेवाओं की अभी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को बहुत जरुरत है। वह अलग अलग पदों के लिए सलाह भी करते हैं और उनकी अगुवाई भी करते हैं। इसीलिए वह उनके अपील करते हैं कि जैसे पांच सिंह साहिबान अगुवाई करते हैं वैसे आपको भी करनी है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में जो भी श्री अकाल तख्त साहिब आता है तो एक चिट्ठी पकड़ा जाता है और फिर खुद ही इसका अपने तरीके से व्याख्यान कर जाते हैं। खुद ही कंप्लेंटेंट और खुद ही जज बन जाते हैं। लोग पंथ के पास आकर सियासी रोटियां सेक रहे हैं। इसीलिए पंथ के ओहदेदारों से अपील है कि वह सार्थक रोल अदा करें। हरजिंदर सिंह ने बताया कि कल रात को भी फोन कर ज्ञानी हरप्रीत सिंह को बता दिया गया था कि उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया जाना है। उनकी सेवाएं बहुमूल्य हैं। उन्होंने कहा कि बतौर पोलिटिशन बोलते रहो, लेकिन तख्त श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सत्कार योग्य हैं, तो कोई भी बात करनी है तो फिर पब्लिकली ना की जाए। उन्होंने कहा कि सिंह साहिब के आदेशों के अनुसार, अंदर रहकर बात की जाए और पब्लिकी ना की जाए। क्योंकि पब्लिक तक बात जाती है तो वह भयंकर रुप धारण कर लेती है। । उन्होंने कहा कि जत्थेदार कौम की अगुवाई करते हैं। बड़ी सेवाओं को मुख्य रखते हुए अगुवाई करने वाले सारे सम्मानीय है और इनकी मर्यादा भी है। उन्होंने अंत में कहा कि ववह सीधे तौर पर कहना चाहते हैं कि वह विश्वास दिलवाते हैं कि वह ज्ञानी हरप्रीत सिंह के साथ हैं और उन्हें अगुवाई करते रहने के लिए अपील करते हैं। भावुक हो गए थे हरप्रीत सिंह आपको बता दें कि, ज्ञानी हरप्रीत सिंह बेहद भावुक होकर कहा था कि कि बीते दिन विरसा सिंह वल्टोहा के खिलाफ श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से आदेश दिए गए थे। लेकिन उसके बाद भी लगातार हर घंटे उन्हें धमकियां दी जा रही हैं और उसके परिवार को नंगा करने के बारे में कहा जा रहा है और उनकी बेटियों के बारे में भी बोला जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह विरसा सिंह वल्टोहा से डरने वाले नहीं है लेकिन विरसा सिंह वल्टोहा का साथ शिरोमणि अकाली दल का सोशल मीडिया विंग कर रहा है और अकाली दल के नए लीडर कर रहे हैं जिनका पंथक परम्पराओं से कोई लेना देना नहीं हो वह उनका साथ दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि विरसा वल्टोहा से वो डरने वाले नहीं है लेकिन अकाली दल के थर्ड क्लास नेताओं का उसका साथ देना उन्हें बेहद दुखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि वह बेटियों के पिता भी हैं, इसीलिए वह इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह एसजीपीसी का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने उनका साथ दिया, वह सोच भी नहीं सकते थे कि विरसा सिंह वल्टोहा इतना ज्यादा गिर जाएंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी और आरएसएस के एजेंट होने का आरोप लगाने की जो कोशिश उनकी असफल रही उसके बाद अब वह घटिया हरकतों पर उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि वह पंथ के लोगों को जानकारी देना चाहते थे और अपनी संस्था का हमेशा सम्मान करते रहे हैं और करते रहेंगे। अकाल तख्त ने दिए थे इस्तीफा नामंजूर करने के आदेश इसके बाद कल देर शाम ही श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने एसजीपीसी को आदेश दिए थे कि ज्ञानी हरप्रीत सिंह का इस्तीफा नामंजूर कर दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर उनका इस्तीफा मंजूर किया गया तो पांचों सिंह साहिबान इस्तीफा देने के लिए मजबूर होंगे। गौरतलब है कि तख्त श्री दमदमा साहिब से ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने जत्थेदार के पद से अपना इस्तीफा दे दिया था। ज्ञानी हरप्रीत सिंह पर लगातार विरसा सिंह वल्टोहा द्वारा सवार उठाए जा रहे थे। इसके बाद ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने भावुक होते हुए बयान दिया और वीडियो जारी कर अपना इस्तीफा देने की पुष्टि की। उन्होंने विरसा सिंह वल्टोहा द्वारा निचले स्तर की बयानबाजी को अपने इस्तीफे का कारण बताया। इसके साथ ही कहा कि वल्टोहा द्वारा उनके खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं। यहां तक की उनके परिवार को धमकियां मिल रही हैं।      

धान की खरीद न होने के विरोध में भाकियू उगराहां ने फ्री करवाया दप्पर टोल प्लाजा

सिद्धपुर  भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने पूरे पंजाब में धान की उचित खरीद व भुगतान न होने पर गुरुवार को सभी टोल फ्री करवा दिए। लालड़ू में  ब्लाक प्रधान लखविंदर सिंह हैप्पी मलकपुर के नेतृत्व में किसानों ने दप्पर टोल प्लाजा पर धरना लगा दिया। इस दौरान किसानों ने टोल के सभी लेन मुक्त कर दिए। यूनियन के किसान नेता लखविंदर सिंह के नेतृत्व में दर्जनों किसान सुबह करीब दस बजे दप्पर टोल प्लाजा पर पहुंचे। किसानों ने केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दरियां बिछाकर बैठ गए। किसानों ने पंचकूला में शपथ ग्रहण समारोह में जा रहे बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं के सामने भी नारेबाजी कर रोष प्रकट किया। वाहन चालक इस दौरान बिना टोल दिए निकलते रहे। किसानों ने बताया कि धान की उचित खरीद व भुगतान न होने के कारण किसान मंडियों मे बेहद परेशान हैं। किसानों ने लालडू मार्केट कमेटी के गेट को लगाया ताला भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धपुर ब्लॉक डेराबस्सी के किसानों ने धान की खरीद, उठाने और भुगतान न होने को लेकर मार्केट कमेटी लालडू को ताला लगा दिया है। इस मौके पर किसानों ने पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसान नेता जसविंदर सिंह टिवाणा ने बताया कि पिछले कई दिनों से स्थानीय अनाज मंडियों में धान की खरीद, उठान और भुगतान न होने को लेकर किसान बहुत परेशान हैं। जिसके चलते उन्होंने आज मार्केट कमेटी लालडू दफ्तर को ताला लगाकर पूरी तरह से बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी समस्या का हल नहीं होता वे अपना रोष प्रदर्शन जारी रखेंगे। इस मौके पर काफी संख्या में किसान मौजूद थे।  

फाजिल्का में भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में ड्रोन के जरिए भेजा गया आईईडी बम बरामद हुआ

फाजिल्का फाजिल्का में भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में ड्रोन के जरिए भेजा गया आईईडी बम बरामद हुआ है। आरडीएक्स से भरी इस खेप में बम के साथ बैटरियां और टाइमर भी हैं। बम जब बीएसएफ को मिला तो उसे बरामद करने के बाद स्टेट स्पेशल सेल को सौंप दिया गया है। इसके बाद वे मामले की जांच कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार फाजिल्का के अबोहर सेक्टर के भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र बहादुर के पास ड्रोन की मूवमेंट देखी गई। इसकी जानकारी बीएसएफ को मिली तो बीएसएफ ने इलाके की तलाशी ली। तलाशी के दौरान इलाके से एक आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बम बरामद हुआ है। टिन के डिब्बे में मिला एक किलो आरडीएक्स दरअसल एक टिन का डिब्बा मिला है जिसमें करीब एक किलो आरडीएक्स भरा हुआ है। जिसके साथ बैटरियां और टाइमर भी हैं। बीएसएफ द्वारा इसकी बरामदगी के बाद इसे फाजिल्का के स्टेट स्पेशल सेल थाने को सौंप दिया गया है। वे मामले की आगे की जांच कर रहे हैं कि आखिर यह बम पाकिस्तान से भारत क्यों भेजा गया था। पहले भी बरामद हो चुके हैं टिफिन बम उल्लेखनीय है कि इससे पहले फिरोजपुर के गांव चांदीवाला से टिफिन बम और जलालाबाद के सीमावर्ती गांव से टिफिन बम पकड़े जा चुके हैं।  जलालाबाद में टिफिन बम से सब्जी मंडी में विस्फोट भी किया गया था लेकिन वह विस्फोट सफल न हो सका और बम रखने वाला ही जान गंवा बैठा था। फिरोजपुर के गोबर मंडी में भी टिफिन बम से विस्फोट किया गया था लेकिन इसमें कोई जान माल का नुकसान नहीं हुआ था

आज मथुरा में दर्दनांक सड़क हादसा, चार मजदूरों की मौत, पांच लोग घायल, सीएम योगी ने तुरंत लिया संज्ञान

लखनऊ यूपी के मथुरा में गुरुवार को एक भीषण सड़क हादसा हुआ। हादसे में चार लोगों की मौत हो गई और पांच लोग घायल हो गए। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर जिला प्रशासन के अधिकारियों को उनके समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की है। सीएम योगी ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। बता दें कि मथुरा में गुरुवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में चार मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई और 5 लोग घायल हुए। मृतकों में दो महिला और दो बच्चे भी शामिल हैं। सभी मृतक और घायल बिहार के गया जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार ये मजदूर अलीगढ़ से कोसी होकर मजदूरी करने पिकअप में सवार होकर हरियाणा को जा रहे थे। बताया जा रहा है कि सुबह करीब पांच बजे वाहन चालक को नींद की झपकी लगी और पिकअप बिजली के खंभे से जा टकराई और यह हादसा हुआ। खंभे में टकराते ही गाड़ी में करंट दौड़ गया, इसके बाद लोग डरकर लोग इधर-उधर कूदने लगे। इसी बीच, करंट से बचने के लिए पिकअप चालक ने गाड़ी बैक किया और सड़क पर गिरे लोगों को कुचल दिया। हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। वहीं, घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।  

राष्ट्रगान के दौरान खड़े ना होने पर NC विधायक के खिलाफ जांच के आदेश

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायक हिलाल अकबर लोन (Hilal Akbar Lone) पर राष्ट्रगान के दौरान खड़े नहीं होने का आरोप लगा है। इस मामले की वीडियो सामने आने के बाद कश्मीर प्रशासन ने उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। लोन पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रगान के दौरान खड़े ना होने का आरोप लगा है। शीर्ष खुफिया सूत्रों ने न्यूज 18को बताया कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सोनावारी से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक हिलाल अकबर लोन के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। लोन बुधवार (16 अक्टूबर) को राष्ट्रगान के दौरान खड़े नहीं हुए थे। बताया जा रहा है कि श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में उमर अब्दुल्ला के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कुछ लोग राष्ट्रगान बजने के दौरान खड़े नहीं हुए थे। लोन उनमें से एक थे। रिपोर्ट की सत्यता का पता लगाने के लिए घटना के सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला गया। पूछताछ करने पर लोन ने बताया कि वह मेडिकल कंडीशन की वजह से नहीं उठा। हालांकि, न्यूज18 को सूत्रों ने बताया कि घटना से कुछ घंटे पहले ही वह मीडिया को इंटरव्यू देते हुए खड़ा होकर बात कर रहे थे। सूत्रों ने यह भी कहा कि कार्यक्रम की पूरी फुटेज खंगाली जाएगी ताकि पता लगाया जा सके कि राष्ट्रगान के दौरान कौन-कौन लोग खड़े नहीं हुए। CNN-न्यूज18 ने SKICC में औपचारिक सपथ ग्रहण समारोह से ठीक 30 मिनट पहले टेलीविजन इंटरव्यू को एक्सेस किया है। इसमें लोन कह रहे थे कि यह एक शानदार शुरुआत है और उन्हें जम्मू-कश्मीर के विकास, आर्टिकल 370 और पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 2019 में आर्टिकल 370 को निरस्त किए जाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में यह पहली चुनी हुई सरकार है। 54 वर्षीय अब्दुल्ला ने पांच अन्य मंत्रियों के साथ शपथ ली जिनमें से तीन मंत्री जम्मू क्षेत्र के और दो कश्मीर घाटी के हैं। उपमुख्यमंत्री के रूप में सुरेंद्र चौधरी का चयन हुआ है। NC के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन के सहयोगी दल कांग्रेस ने फिलहाल नई सरकार में कोई मंत्री पद नहीं लेने का फैसला किया है। छह साल के प्रत्यक्ष केंद्रीय शासन को समाप्त करने वाली नई जम्मू-कश्मीर सरकार में अधिकतम नौ मंत्री हो सकते हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने डल झील के किनारे शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में अब्दुल्ला और उनके मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। दूसरी बार मुख्यमंत्री बने उमर अपने दादा शेख अब्दुल्ला और पिता फारूक अब्दुल्ला के बाद इस पद पर आसीन होने वाले अब्दुल्ला परिवार की तीसरी पीढ़ी के नेता हैं। वह इससे पहले 2009 से 2014 के बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री थे, जब यह पूर्ण राज्य हुआ करता था।

शिक्षकों को दिवाली से पहले सौगात, उच्च माध्यमिक विद्यालियों को मिलेंगे 3198 शिक्षक, जल्द जॉइनिंग

जबलपुर जबलपुर हाईकोर्ट ने वर्ग 1 के शिक्षकों के लिए जॉइनिंग लेटर जारी करने का अंतरिम आदेश दिया है। चीफ जस्टिस की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और डीपीआई के पक्ष में अंतरिम राहत प्रदान की। हालांकि, यह प्रक्रिया अंतिम आदेश के अधीन रहेगी, जिसका मतलब है कि आगे कोई भी निर्णय उस आदेश के आधार पर लिया जाएगा।  इस मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी, और डीपीआई एक-दो दिन में 3198 शिक्षकों को जॉइनिंग लेटर जारी कर सकता है। सभी औपचारिकताओं का पालन किया जा रहा है, और अब केवल औपचारिक आदेश का इंतजार है। यह शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उनकी भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। ये है मामला यह केस 2018 में हुई भर्ती परीक्षा से संबंधित है, जिसमें 848 ईडब्ल्यूएस पद शामिल थे। प्रारंभ में, जब परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी हुआ, तब इन पदों का उल्लेख नहीं था, लेकिन बाद में इन्हें जोड़ा गया। मामला कोर्ट में गया, और 23 फरवरी 2024 को न्यायालय ने निर्देश दिया कि पात्रता परीक्षा में 75 अंक लाने वालों की मेरिट बनाने की प्रक्रिया की जाए और तब तक भर्ती पर रोक लगा दी जाए। हाईकोर्ट में लगाई गई थी चार याचिका इस मामले में जबलपुर हाईकोर्ट में चार याचिकाएं चल रही हैं, जिसमें DPI द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ अपील की गई है। मौखिक निर्देश दिए गए हैं कि सिंगल बेंच के आदेश पर यथास्थिति बनाए रखी जाए। हालांकि, शासन ने 2023 की भर्ती परीक्षा में पास हुए उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यापन कर लिया है, लेकिन ज्वाइनिंग लेटर देने पर रोक लगा दी है, जिससे ज्वाइनिंग प्रक्रिया रुक गई है। डीपीआई का तर्क डीपीआई ने कोर्ट में तर्क दिया है कि 2018 की भर्ती के पदों के कारण 2023 की भर्ती को नहीं रोका जाना चाहिए, और ज्वाइनिंग देने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का पक्ष इस केस में चयनित शिक्षकों ने अपनी ओर से 2023 भर्ती पर लगी रोक को हटाने के लिए अदालत में याचिका दायर की। जहां उन्होंने अपनी नियुक्ति को सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट का फैसला हाल ही में 15 अक्टूबर को हुई सुनवाई में शासन की ओर से जॉइनिंग की मांग को सशर्त मंजूर किया गया। यह निर्णय याचिकाकर्ताओं के वकीलों द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्कों के बाद आया। अब उम्मीद है कि जल्द ही स्कूलों को आवश्यक शिक्षकों की नियुक्ति मिल सकेगी, जिससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सकता है।

ना किराये पर नहीं दे सकेंगे पीएम आवास, ना बिना अनुमति किसी को बेच सकेंगे

भोपाल  राजधानी में हाउसिंग फॉर ऑल (HFA) योजना के तहत बने EWS फ्लैट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम ने इन फ्लैट को बेचने या किराये पर देने पर रोक लगा दी है। यह नियम सिर्फ़ उन फ्लैट पर लागू होगा जो झुग्गी पुनर्वास योजना का हिस्सा नहीं हैं। हितग्राहियों का कहना है कि जब उन्हें 11 लाख रुपये में बिना किसी सब्सिडी के ये फ्लैट दिए गए हैं, तो उन पर यह पाबंदी क्यों? झुग्गीवासियों के फ्लैट बेचने पर रोक भोपाल में रिवेरा टाउन प्रोजेक्ट समेत कई जगहों पर HFA के तहत EWS फ्लैट का निर्माण किया गया है। इनमें से कुछ फ्लैट झुग्गीवासियों के लिए थे, जबकि कुछ गैर-झुग्गी निवासियों के लिए। नगर निगम ने अब नियमों में बदलाव करते हुए गैर-झुग्गी निवासियों को आवंटित EWS फ्लैट को बेचने या किराये पर देने पर रोक लगा दी है। फैसले से नाराज हैं हितग्राही हितग्राही इस फैसले से नाराज़ हैं। उनका कहना है कि जब उन्हें 430 वर्ग फीट के फ्लैट 11 लाख रुपये में बिना किसी सरकारी मदद के खरीदे हैं, तो उन पर यह पाबंदी क्यों? हितग्राहियों ने यह भी बताया कि योजना के विज्ञापन या 2021 के स्थायी आवंटन पत्र में ऐसी कोई शर्त नहीं थी। यह शर्त अब रजिस्ट्री के समय जोड़ी जा रही है। नए आवंटन आदेश में भी इस शर्त का उल्लेख है। इसलिए लगाई पाबंदी दिलचस्प बात यह है कि झुग्गीवासियों को दिए गए 8-10 लाख रुपये के फ्लैट पर यह रोक पहले से ही लागू है। उन्हें ये फ्लैट मात्र 2 लाख रुपये में दिए गए थे। उन पर यह पाबंदी इसलिए लगाई गई थी ताकि वे फ्लैट बेचकर या किराये पर देकर वापस झुग्गियों में न चले जाएं। हितग्राही जता रहे नाराजगी हितग्राहियों का तर्क है कि जब उन्हें बिना किसी छूट के फ्लैट खरीदे हैं, तो उनके साथ भेदभाव क्यों? उनका कहना है कि अगर उन्हें फ्लैट बेचने या किराये पर देने की अनुमति नहीं है, तो उन्हें बाकी लोगों की तरह सरकारी सहायता क्यों नहीं दी जाती? बीडीए के फ्लैट बेचने पर भी है रोक भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) ने भी अपने EWS और LIG फ्लैट की बिक्री पर 15 साल की रोक लगा रखी है। BDA ने शहर में कई प्रोजेक्ट के तहत EWS और LIG फ्लैट बनाए हैं। 15 साल बाद ही हितग्राही इन फ्लैट को बेच सकते हैं। क्या बोलीं नगर निगम की अपर आयुक्त नगर निगम की अपर आयुक्त निधि सिंह ने इस मामले में कहा है कि गैर-झुग्गी EWS फ्लैट की बिक्री और किरायेदारी पर रोक है। पहले यह शर्त नहीं थी, लेकिन अब इसे जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह इस बारे में कमिश्नर से बात करेंगी और उचित कदम उठाएंगी।

2 लाख लोगों ने सिंगाजी की समाधि के किए दर्शन, चढ़ाया 1000 किलो घी, 20 ट्रॉली नारियल और एक हजार निशान

खंडवा मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र के निर्गुणी संत सिंगाजी महाराज की समाधि स्थल पर शरद पूर्णिमा पर लगने वाला दस दिवसीय मेला शुरू हुआ है। इस मेले के पहले ही दिन शरद पूर्णिमा होने के चलते, देश-प्रदेश से देर रात तक यहां करीब दो लाख से अधिक सिंगाजी भक्त पहुंचे और समाधि पर मत्था टेका। वहीं इसके एक दिन पहले से ही यहां करीब 60 हजार भक्त पहुंच चुके थे। पूर्णिमा पर दिन भर यहां निशान चढ़ाने का सिलसिला जारी रहा। दो दिन में ही यहां करीब एक हजार से अधिक निशान चढाए गए। वहीं झाबुआ के महाराजा परिवार का भी मुख्य निशान मंदिर परिसर में पहुंचा। सिंगाजी महाराज की समाधि पर शाम के समय दीप स्तंभ पर दीपों को प्रज्वलित कर महाआरती भी की गई। यहां चढ़ाया जाता है शुद्ध देशी घी सिंगाजी महाराज की समाधी पर दो दिन में दो लाख से अधिक श्रद्धालओं ने अपने गुरु के चरणों में शीष नवाकर गुरु दीक्षिणा में शुद्ध घी चढ़ाया है। यहां दो दिन में करीब पांच बैरल घी इकट्ठा हुए हैं। एक बैरल में 200 लीटर लगभग घी आता है। यह बाजार से खरीदा गया नहीं, बल्कि भक्तों द्वारा पाले गए दुधारू जानवरों के दूध से बनाया गया होता है। इस दौरान 20 ट्रॉली के लगभग नारियल प्रसादी चढ़ाया गया। घूनी माई नहीं होने से रैलिंग किनारे भक्तों ने नारियल फोड़, पूजन कर मां नर्मदा को अर्पित किया। झाबुआ राजपरिवार क्यों हैं मुरीद? चार सौ साल से ज्यादा समय से सिंगाजी धाम में झाबुआ के महाराजा के परिवार के यहां से तीन निशान निकलते हैं, जो गुरु पूर्णिमा को चलकर तेरस को संत सिंगाजी गांव पहुंचते हैं। लाल बड़ा वाला निशान संत सिंगाजी का होता है। पीला निशान दल्लुदास महाराज का होता है, जो संत सिंगाजी के नाती हैं। जिनके धागे बांधने से महारानी को पुत्र रत्न की प्राप्ती हुई थी। तीसरा छोटा वाला लाल निशान केवट का है। इसकी नौका नर्मदाजी में राज परिवार को लेकर डूब रही थी। संत सिंगाजी को पुकारने पर संत वहां पहुंचे और नाव को डूबने से बचाया था। विजय शाह थे मुख्य अतिथि मेला ग्राउंड में दुकानों पर खरीदी के लिए भीड़ लगी रही। खोया-पाया विभाग ने बच्चों को परिवार से भी मिलाया। जनपद द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विजय शाह, कैबिनेट मंत्री, मांधाता विधायक नारायण पटेल की अध्यक्षता में हुआ। इस दौरान समाधि स्थल पर खंडवा विधायक कंचन तनवे, हरसूद जनपद के सीईओ अरविंद पाटीदार सहित कई लोग पहुंचे थे।  

मैट हेनरी और विलियम ओ’रुर्के ने नौ विकेट चटकाए, भारत का सबसे कम टेस्ट स्कोर

बेंगलुरु मैट हेनरी और विलियम ओ’रुर्के ने गुरुवार को एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में पहले टेस्ट के दूसरे दिन गुरूवार को सामूहिक रूप से नौ विकेट चटकाए और भारत को सिर्फ 46 रन पर आउट कर दिया। इसके साथ ही भारत ने घरेलू मैदान पर अपना सबसे कम स्कोर और कुल मिलाकर तीसरा सबसे कम टेस्ट स्कोर दर्ज किया है। बादल छाए रहने की स्थिति में, हेनरी ने लाइन और लेंथ पर बेहतरीन नियंत्रण दिखाया और 5-15 विकेट चटकाए और 100 टेस्ट विकेट लेने का कीर्तिमान भी हासिल किया। भारत में अपना पहला टेस्ट खेल रहे ओ’रुर्के ने अपनी अजीबोगरीब उछाल और लेंथ के मिश्रण से शानदार प्रदर्शन किया और 4-22 विकेट चटकाए, जबकि अनुभवी तेज गेंदबाज टिम साउदी ने एक विकेट लिया। इससे पहले भारत का घरेलू मैदान पर सबसे कम टेस्ट स्कोर दिल्ली में वेस्टइंडीज के खिलाफ 75 रन था। भारत का घरेलू टेस्ट में सबसे कम स्कोर 46 है, वहीं विदेशी टेस्ट में भारत का सबसे कम स्कोर और भी कम है। 2020 में एडिलेड में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पहले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत 36 रन पर ढेर हो गया था, जो न केवल विदेशी टेस्ट में उनका सबसे कम स्कोर है, बल्कि ओवरऑल टेस्ट क्रिकेट में भी उनका सबसे कम स्कोर है। भारत की बल्लेबाजी का आलम यह रहा कि उसके पांच बल्लेबाज अपना खाता भी नहीं खोल पाए। भारत की तरफ से सर्वाधिक स्कोर 20 रन ऋषभ पंत का रहा। भारत की ओर से ऋषभ पंत (20) और यशस्वी जायसवाल (13) ही ऐसे दो बल्लेबाज थे जिन्होंने दोहरे अंकों में स्कोर बनाया। पांच भारतीय बल्लेबाज शून्य पर आउट हुए, जिससे टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए एक अनचाही उपलब्धि दर्ज हुई। कुल मिलाकर, यह टेस्ट में भारत का तीसरा सबसे कम स्कोर था, इससे पहले 2020 में एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 36 और 1974 में लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ 42 रन का स्कोर था। यह भारत में टेस्ट मैच में किसी भी टीम द्वारा बनाया गया सबसे कम स्कोर भी था।  

7 महीने के बाद खुलेगी भोपाल DRM तिराहे की सड़क,टाई बैरिकेडिंग, लोगों को मिली राहत

भोपाल  हबीबगंज नाके पर डीआरएम तिराहे की सड़क जो पिछले सात महीनों से बंद थी, बुधवार को उसे एक तरफ से खोल दिया गया। इस सड़क के खुलते ही हजारों लोगों को राहत मिली है, जो इस सड़क से रोजाना आवाजाही करते हैं। ज्ञात हो कि मार्च में मेट्रो स्टील ब्रिज के निर्माण के कारण यह सड़क बंद कर दी गई थी, जिससे कई क्षेत्रों के निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस सड़क के बंद होने से अवधपुरी, बीडीए, एम्स, अलकापुरी, साकेतनगर, और अमरावतखुर्द समेत सैकड़ों कालोनियों के निवासी प्रभावित हो रहे थे। लोगों को वैकल्पिक मार्ग से होकर पांच-सात किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ता था। इसके साथ ही मार्ग बंद होने के कारण वीर सावरकर सेतु से लेकर बोर्ड ऑफिस चौराहे तक ट्रैफिक का दबाव काफी बढ़ गया था। वहीं इस इलाके से सटे साकेत नगर और शक्ति नगर की अंदरूनी सड़कों पर भी यातायात का भार अधिक हो गया था। इस बीच, डायवर्सन के कारण एक दर्दनाक हादसे में विश्वकर्मा नगर में 10 साल के बच्चे दीपक सिंह की सड़क दुर्घटना में मौत हुई थी, जिससे स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश था। बुधवार को मेट्रो कॉर्पोरेशन ने अपनी बैरिकेडिंग और सामान हटा लिया और पुलिस को रास्ता खोलने का पत्र सौंप दिया। हालांकि रेलवे ट्रैक के पास गड्ढों को भरने का काम अभी जारी है, जिससे पूरी तरह से यातायात गुरुवार या शुक्रवार को बहाल होने की उम्मीद है। इस सड़क के खुलने से लाखों लोगों को आने-जाने में बड़ी राहत मिलेगी और ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा। एक माह बंद रहेगा अल्पना तिराहा से भोपाल टाकीज तक मार्ग उधर, लोक निर्माण विभाग द्वारा अल्पना टाकीज तिराहा से भोपाल टाकीज चौराहे तक (हमीदिया रोड) पर सड़क का पुन: निर्माण कराया जा रहा है। विभाग एवं सड़क निर्माता कंपनी ने कार्य के दौरान इस मार्ग के यातायात के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाने की जरूरत बताई है। इस आशय की सूचना मिलने पर ट्रैफिक पुलिस ने गुरुवार से 16 नवंबर तक इस सड़क के यातायात को परिवर्तित मार्ग से गुजारने की व्यवस्था की है। जो इस तरह रहेगी।     अल्पना तिराहे से भोपाल टाकीज चौराहे की ओर जाने के लिए अल्पना तिराहे से एकांगी मार्ग का उपयोग कर नादरा बस स्टैंड चौराहा एवं नादरा बस स्टैंड से भोपाल टाकिज की ओर जा सकेंगे।     भोपाल टाकीज चौराहे से अल्पना तिराहे की ओर जाने के लिए भोपाल टाकिज चौराहा से सिंधी कालोनी चौराहा होकर अग्रवाल धर्मशाला, सपना लाज तिराहा, समानांतर मार्ग होकर अल्पना तिराहे की ओर आ सकेंगे।     इसी प्रकार भोपाल टाकीज चौराहे से नादरा बस स्टैंड की ओर जाने के लिए सिंधी कालोनी चौराहा होकर अग्रवाल धर्मशाला, सपना लाज तिराहे से नादरा बस स्टैंड जा सकेंगे।  

हिंगोरानी से मिले 70 लाख के जेवरात, कैश, संपत्ति के दस्तावेज और अवैध हथियार…

भोपाल भोपाल में लोकायुक्त (Bhopal Lokayukta) की टीम ने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत छापेमारी की. इस दौरान लाखों रुपये के आभूषण, नकदी और एक अवैध पिस्तौल बरामद की गई. इसके बाद गांधी नगर थाने में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. यह कार्रवाई देर रात तक चली. इस छापेमारी के दौरान जेवरात व नकदी के अलावा संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं. दरअसल, लोकायुक्त टीम ने आय से अधिक संपत्ति के मामले की शिकायत पर तकनीकी शिक्षा विभाग के जूनियर ऑडिटर रमेश हिंगोरानी के घर समेत 6 अलग-अलग जगहों पर छापा मारा. रमेश हिंगोरानी के घर सहित स्कूलों और बेटों के दफ्तर पर एक साथ छापा मारा गया. बैरागढ़ में 2 जगहों पर, गांधी नगर में 3 जगहों पर और श्यामला हिल्स के पास एक दफ्तर में कार्रवाई की गई. छापेमारी के दौरान रमेश हिंगोरानी के पास आय से अधिक संपत्ति मिली. इस मौके पर कैश, डायमंड और सोने चांदी के कीमती आभूषण, कई संपत्तियों के दस्तावेज, निवेश के कागजात, 4 कार और 5 दो-पहिया वाहन मिले. लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई के दौरान 1014 ग्राम सोने के जेवरात बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 70 लाख रुपये है. इसके अलावा 1021 ग्राम चांदी के आभूषण भी मिले, जिनकी कीमत लगभग 55,500 रुपये आंकी गई है. इस छापेमारी में कुल 12 लाख 17 हजार 950 रुपये की नकदी भी जब्त की गई. इसके अलावा गांधीनगर के प्रेरणा किरण स्कूल एयरोसिटी में तलाशी के दौरान एक देशी पिस्तौल भी बरामद की गई. इस मामले की सूचना तत्काल गांधी नगर थाने को दी गई. इस मामले में नीलेश हिंगरोनी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. तलाशी के दौरान कई संपत्ति से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं. इन दस्तावेजों की जांच की जा रही है, ताकि उनके सही मूल्यांकन और वैधता की जांच की जा सके. छापेमारी की कार्रवाई अभी भी जारी है और उम्मीद है कि इस जांच से और भी खुलासे हो सकते हैं. लोकायुक्त की टीम ने कड़ी निगरानी के साथ इस मामले की जांच को अंजाम दिया. अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और संपत्तियों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. यह छापेमारी भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई का हिस्सा है.    

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