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गुजरात के CM विजय रुपाणी ने चुनाव से एक साल पहले छोड़ा पद

अहमदाबाद। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने चुनाव से एक साल पहले अचानक इस्तीफा दे दिया है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी में समय के साथ दायित्व बदलते रहते हैं। भाजपा में यह स्वभाविक प्रक्रिया है। मुझे 5 साल के लिए मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली, जो मैंने पूरी की है। रुपाणी ने कहा कि जेपी नड्डा जी का भी मार्गदर्शन मेरे लिए अभूतपूर्व रहा है। अब मुझे जो भी जिम्मेदारी मिलेगी मैं उसका निर्वहन करूंगा। हम पद नहीं जिम्मेदारी कहते हैं। मुझे जो जिम्मेदारी मिली थी वह मैंने पूरी की है। हम प्रदेश के चुनाव नरेंद्र मोदी जी की अगुवाई में लड़ते हैं और 2022 का चुनाव भी उन्हीं की अगुवाई में लड़ा जाएगा। बता दें रुपाणी ने 26 दिसंबर 2017 को दूसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। भाजपा ने गुजरात में 182 सीटों में से 99 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। विधानमंडल दल की बैठक में रुपाणी को विधायक दल का नेता और नितिन पटेल को उपनेता चुना गया था। नए मुख्यमंत्री की रेस में 4 नाम शामिल रुपाणी के इस्तीफे के बाद ये अटकलें भी शुरू हो गई हैं कि अब अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। इनमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया, केंद्रीय मत्स्य एवं पशुपालन मंत्री पुरषोत्तम रुपाला, गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल और गुजरात भाजपा के अध्यक्ष सीआर पाटिल के नाम आगे हैं। बीते कुछ दिनों से चल रही थीं नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें बीते कुछ दिनों से गुजरात सरकार में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें लग रही थीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार रात करीब 8 बजे अचानक अहमदाबाद पहुंचे थे। उनके गुजरात आने का कोई तय शेड्यूल नहीं था। एयरपोर्ट पर अमित शाह का स्वागत करने राज्य गृहमंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा, मेयर किरीट परमार और स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन हितेश बारोट पहुंचे थे। हालांकि गुरुवात रात को अमित शाह अपनी बहन के घर पहुंचे थे तो लगा कि पारिवारिक काम से आए होंगे, लेकिन अब लग रहा है कि शायद सत्ता में बदलाव के सिलसिले में ही वे गुजरात पहुंचे होंगे। हार्दिक पटेल बोले- जनता को गुमराह कर रही भाजपा रूपाणी के इस्तीफे पर पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने कहा है कि भाजपा जनता को गुमराह कर रही है। कोरोना में अव्यवस्था और नाकामी की वजह से लोगों में नाराजगी थी। ऐसे में भाजपा सीएम बदलकर लोगों को गुमराह कर रही है। उसने उत्तराखंड में भी यही किया है।

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BBC खुलासा : मोदी सरकार ने विज्ञापनों में कुल 5,749 करोड़ रुपए ख़र्च किए

– BBC की रिपोर्ट – साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से सरकार ने जनवरी 2021 तक विज्ञापनों में कुल 5,749 करोड़ रुपए ख़र्च किए हैं  – इससे पहले की यूपीए सरकार ने अपने 10 साल के कार्यकाल में विज्ञापनों पर 3,582 करोड़ रुपए ख़र्च किए थे  नई दिल्ली। कोरोना महामारी के दौर में मोदी सरकार ने महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना (पीएमजेएवाई) के प्रचार पर जितना ख़र्च किया उससे कहीं अधिक ख़र्च नागरिकता संशोधन क़ानून, नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर और कृषि क़ानूनों जैसे विवादित क़ानूनों से जुड़े विज्ञापनों पर किया। भारत में बेहतर इलाज के लिए ग़रीबों को आर्थिक मदद देने के लिए आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरुआत हुई थी। साल 2020 में कोविड-19 महामारी का असर झेल रहे लोगों के लिए इसके दायरे को बढ़ाया गया था। बीबीसी ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) का इस्तेमाल करते हुए कोरोना महामारी के दौर में विज्ञापन के ख़र्च में मोदी सरकार की प्राथमिकताओं को समझने की कोशिश की। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक़ अप्रैल 2020 से लेकर जनवरी 2021 के बीच मोदी सरकार ने विज्ञापनों पर कुल 212 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इसमें से केवल 0.01 फ़ीसदी यानी 2 लाख 49 हज़ार रुपए सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य बीमा योजना के विज्ञापन पर खर्च किए गए हैं। इस डेटा में आउटडोर मीडिया विज्ञापनों (सड़कों और बाहर लगने वाले पोस्टर वगैरह) पर ख़र्च का हिसाब शामिल नहीं है। भारत सरकार के ताज़ा आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार देश में केवल 3.76 फ़ीसदी लोग की स्वास्थ्य बीमा लेते हैं जबकि वैश्विक स्तर पर क़रीब 7.23 फ़ीसदी लोग स्वास्थ्य बीमा का लाभ उठाते हैं। तो सरकार ने खर्च कहां किया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर अक्सर विज्ञापनों में ज़रूरत से अधिक ख़र्च करने के आरोप लगते रहे हैं। साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से सरकार ने जनवरी 2021 तक विज्ञापनों में कुल 5,749 करोड़ रुपए ख़र्च किए हैं। इससे पहले की यूपीए सरकार ने अपने 10 साल के कार्यकाल में विज्ञापनों पर 3,582 करोड़ रुपए ख़र्च किए थे। बीबीसी यह पड़ताल करना चाहती थी कि मौजूदा सरकार किस मद में अधिक ख़र्च कर रही है।  इसके लिए सूचना के अधिकार के तहत भारत सरकार के ‘ब्यूरो ऑफ़ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ को सूचना के अधिकार के तहत अर्ज़ी भेजी गई। यह विभाग सरकार के दिए जाने वाले विज्ञापनों का लेखा-जोखा रखता है। आरटीआई के जवाब में ब्यूरो ने 2,000 पन्नों के दस्तावेज़ भेजे जिनमें मई 2004 से लेकर जनवरी 2021 के बीच प्रिंट मीडिया, टेलीविज़न, डिजिटल और आउटडोर प्लेटफ़ॉर्म पर सरकारी विज्ञापनों पर किए ख़र्च का हिसाब था। इन आंकड़ों को समझने पर सामने आया कि जिस वक्त कोरोना महामारी देश में क़हर बरपा रही थी, उस वक्त सरकार अपने कार्यकाल में लाए कुछ विवादित क़ानूनों के बचाव और उनके बारे में अधिक जागरूकता फैलाने के लिए विज्ञापन दे रही थी। इन क़ानूनों में नागरिकता संशोधन क़ानून, नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर और कृषि क़ानूनों जैसे क़ानून शामिल थे जिन्हें लेकर हाल के महीनों में काफ़ी विवाद हुआ है। योजना के फ़ायदे के बारे में किसे कितनी जानकारी? साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 हज़ार रुपए से कम प्रति माह की आय वाले भारतीय परिवारों के लिए ये स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की थी। मोदी समर्थकों ने इस योजना को ‘मोदीकेयर’ कहा था और दावा किया कि ये योजना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा लांच की गई जानी मानी ‘ओबामाकेयर’ की तर्ज पर है। कोविड महामारी की पहली लहर के दौरान संक्रमण के मामले बढ़े तो इसका दवाब देश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ा जो मरीज़ों की बढ़ती संख्या के कारण चरमराने की अवस्था तक पहुंच गई। इस दौरान हज़ारों लोगों ने इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख़ किया और कई परिवारों के लिए ज़रूरी पैसों की व्यवस्था करना बड़ी समस्या बन गया। ऐसे में सरकार ने आयुष्मान भारत योजना का दायरा बढ़ाया और कइयों के लिए ये सरकारी बीमा योजना बेहद अहम साबित हुई। अप्रैल 2020 में सरकार ने कहा कि निजी और सरकार के साथ जुड़े सार्वजनिक अस्पतालों में कोरोना वायरस की टेस्टिंग और कोविड-19 के इलाज का ख़र्च इस बीमा योजना के तहत कवर होगा। इसी साल 18 अगस्त को घोषणा की गई थी कि आयुष्मान योजना के तहत 2 करोड़ लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गई हैं . इस योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने की सूरत में लाभार्थियों को कैशलेस इलाज मिलता है और साल में एक परिवार के सदस्यों के इलाज पर 5 लाख तक के ख़र्च को कवर किया जाता है। आरटीआई के ज़रिए हमें पता चला कि 2018 के आख़िर से लेकर 2020 की शुरुआत तक सरकार ने आयुष्मान योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 25 करोड़ रुपयों से अधिक के विज्ञापन दिए हैं। मगर कोरोना महामारी के दौरान ये ख़र्च काफ़ी हद तक कम कर दिया गया और सरकार की सकारात्मक छवि दिखाने वाले अभियानों पर अधिक ख़र्च किया गया। इनमें सरकार का ‘मुमकिन है’ अभियान शामिल है जिसके केंद्र में पीएम मोदी की छवि थी। बीबीसी ने स्वास्थ्य योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने वाले विज्ञापनों पर ख़र्च बनाम विवादित क़ानूनों के बारे में विज्ञापन के संबंध में बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नलिन कोहली से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। केंद्र सरकार के आयुष्मान योजना में पंजीकरण कराने के बावजूद राजस्थान के सीकर में रहने वाले राजेंद्र प्रसाद को अस्पताल का बिल देना पड़ा। राजेंद्र के भाई सुभाष चंद के पास प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना का कार्ड है। इस साल मई में कोरोना संक्रमण के बाद उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। राजेंद्र ने बीबीसी संवाददाता सरोज सिंह को बताया था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि इस सरकारी योजना के तहत कौन से अस्पताल सूचीबद्ध हैं। उन्होंने कहा, ‘अस्पताल के डॉक्टर ने आयुष्मान भारत येजना कार्ड को स्वीकार करने से मना कर दिया और मेरे भाई का इलाज करने से इनकार कर दिया। अब मुझे लगता है कि इस कार्ड के होने का हमारे लिए कोई फ़ायदा नहीं है।’ हालांकि राजस्थान राज्य स्वास्थ्य योजना की कार्यकारी अधिकारी अरुणा राजोरिया का कहना है कि आयुष्मान योजना के सभी लाभार्थियों को एसएमएस के ज़रिए एक … Read more

MP में कोरोना के बाद वायरल फीवर-डेंगू का कहर

एमपी में कोरोना के बाद अब डेंगू और वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. बीमारियों ने बच्चों को अपनी चपेट में ले लिया है. भोपाल/जबलपुर. कोरोना की तीसरी लहर (Corona Third Wave) की चेतावनी के बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में वायरल फीवर और डेंगू कहर बरपा रहे है. राजधानी भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर सहित कई जगहों पर सैकड़ों की संख्या में लोग अस्पतालों में भर्ती हैं. इन मरीजों में बच्चों की संख्या ज्यादा है. भोपाल में तो बीमारी होने वाले बच्चों की संख्या ही 355 से ज्यादा है. जबलपुर में मरीजों का आंकड़ा 500 के आसपास छू रहा है. ग्वालियर में मरीजों की संख्या 40 से ज्यादा हो गई है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल में वायरल फीवर बच्चों पर सीधा असर कर रहा है. राजधानी भोपाल के निजी व सरकारी अस्पतालों में 355 से ज्यादा बच्चे वायरल फीवर से पीड़ित है. यहां 50 से 60 बच्चे रोज वायरल फीवर का शिकार हो रहे हैं. इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. ओपीडी की संख्या भी सरकारी-निजी अस्पतालों में 60% बढ़ा दी गई है. अस्पतालों में एक- एक बेड पर से दो से तीन बच्चों को भर्ती किया गया है. करीब-करीब सभी अस्पताल बच्चों से भर चुके हैं. प्रदेश में डेंगू चिकनगुनिया और स्क्रब टायफस के मरीज भी तेजी से बढ़ रहे हैं. बुधवार को डेंगू के 11, तो चिकनगुनिया के 7 मरीज मिले. शहर में डेंगू के अब तक 151, चिकनगुनिया के 47 मरीज सामने आए हैं. 9068 घरों में डेंगू का लार्वा मिला है. मलेरिया विभाग और नगर निगम की टीमें घर घर-घर जाकर सर्वे कर लार्वा नष्ट कर रही हैं. जबलपुर में बच्चों की हालत नाजुक जबलपुर में डेंगू पीड़ित मरीजों की संख्या का आंकड़ा 500 के ऊपर है. हालांकि, सरकारी आंकड़ों में मात्र 333 मरीज ही हैं. शहर के बड़े अस्पतालों में से एक विक्टोरिया अस्पताल के चाइल्ड वार्ड में एक बेड पर 2 से 3 बच्चे तक भर्ती हैं. 24 बेड की व्यवस्था वाले चाइल्ड वार्ड में 55 से 60 बच्चे एडमिट हैं. इसके बावजूद जगह कम पड़ रही है. इस जिला अस्पताल के अलावा निजी और अन्य बड़े सरकारी अस्पतालों में भी हालात भयावह है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिले में अभी तक 18 साल तक उम्र के डेंगू के 124 मरीज मिले हैं. वहीं, संक्रामक बीमारियों से पीड़ित बच्चे रोजाना 100 की संख्या में सामने आ रहे हैं. औसत से कम बारिश बनी वजह इस मामले को लेकर डॉक्टरों का कहना है कि इस बार औसत से कम बारिश के चलते नमी बढ़ गई है. यही वजह है कि लार्वा और संक्रामक बीमारियां पैर पसार रही हैं. स्वास्थ्य महकमा नगर निगम के साथ मिलकर जन जागरूकता फैला रहा है. जिले में लार्वा नष्ट करने का काम भी किया जा रहा है. गौरतलब है कि, गरीब परिजन मासूम बच्चों के लिए ब्लड और प्लेटलेट की व्यवस्था में जूझ रहे हैं. वायरल फीवर के चलते उनकी हालत नाजुक बनी हुई है. दूसरी ओर, ग्वालियर में डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है. यहां पिछले 24 घंटे में डेंगू के 10 नए मरीज मिले. जिले में डेंगू मरीजों की संख्या 43 हो गई है. इनमें 15 बच्चे भी शामिल हैं. चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग का कहना है कि उत्तर प्रदेश या किसी अन्य राज्य की तरह मध्य प्रदेश में बच्चों में किसी भी तरह का कोई रहस्यमयी बुखार नहीं है. सिर्फ वायरल फीवर के लक्षण बच्चों में है. किसी भी तरह से वायरल को लेकर पैनिक फैलाने की जरूरत नहीं है. अस्पतालों की व्यवस्था का लगातार जायजा ले रहे हैं. वायरल की चपेट में आ रहे बच्चों की बढ़ती संख्या के बीच अस्पताल में बिस्तरों की संख्या और तमाम व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं.

सिंगल मदर बनीं भोपाल की संयुक्ता, स्पर्म डोनेशन के जरिए दिया बेटे को जन्म

महिला ने बताया कि, मैं मां बनना चाहती थी, इसलिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण से बच्चा गोद लेने के लिए दो बार रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन बच्चा गोद नहीं मिल पाया. MP : रुढ़िवादी सोच तोड़ सिंगल मदर बनीं भोपाल की संयुक्ता, स्पर्म डोनेशन के जरिए दिया बेटे को जन्म बिना पति के मां बना एक औरत के लिए आज के समय में भी बहुत बड़ा चैलेंज है. समाज ऐसी महिलाओं को स्वीकार नहीं करता है. इन जैसी और भी कई बातों और रुढ़िवादी सोच को तोड़कर भोपाल (Bhopal) की 37 साल की संयुक्ता बनर्जी ने अपने लिए कुछ अलग चुना है. हालांकि ये फैसला लेना इतना आसान नहीं था, लेकिन परिवार और दोस्तों से मिले सपोर्ट के बाद उसके लिए मुश्किले और आसान हो गई. संयुक्ता बनर्जी ने काफी सोचने के बाद बिना पार्टनर के ही मां (single mother) बनने का फैसला लिया और स्पर्म डोनेशन (sperm donation) के जरिए अगस्त में एक बेटे को जन्म दिया है संयुक्ता का आज अपने इस फैसले पर गर्व है. संयुक्ता का कहना है कि उनके परिवार और दोस्तों ने मानसिक और भावनात्मक बहुत सहयोग किया जिसकी वजह से उन्हें ये फैसला लेने में कोई मुश्किल नहीं आई. बच्चा गोद लेने का भी कोशिश की थी लेकिन गोद नहीं मिला उन्होंने बताया कि तीन बार बच्चा गोद लेने की कोशिश की थी, लेकिन बच्चा गोद नहीं मिल पाया. इसके बाद एक फैमिली डॉक्टर ने उन्हें आईसीआई तकनीक के बारे में बताया. जिसके बाद उनका मां बनने का सपना पूरा हो गया. सरोगेसी से मां बनना बहुत मंहगा प्रोसेस है संयुक्ता ने बताया कि उनकी शादी 20 अप्रैल 2008 में हुई थी. पति को बच्चा नहीं चाहिए था लेकिन मुझे मातृत्व का सुख लेना था. 2014 में दोनों की राहें अलग हो गईं और 2017 में तलाक हो गया. फिर मैंने नए सिरे से जिंदगी शुरू की. चूंकि मैं मां बनना चाहती थी, इसलिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण से बच्चा गोद लेने के लिए दो बार रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन बच्चा गोद नहीं मिल पाया. इसके बाद मेरे फैमिली डॉक्टर ने सेरोगेसी, आईवीएफ, आईसीआई और आईयूआई जैसी तकनीक के बारे में बताया. इसमें बिना पार्टनर के भी मां बना जा सकता है. 24 अगस्त को दिया बेटे को जन्म उन्होंने कहा कि, मैंने आईसीआई तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया. इसमें बिना किसी के संपर्क में आए केवल स्पर्म डोनेशन लेना होता है. इसमें डोनर की पहचान गोपनीय रहती है. फरवरी में मुझे पता चला मैंने कंसीव कर लिया है. डॉक्टर की देखरेख में मैंने 24 अगस्त को बेटे को जन्म दिया. पहले मैंने सरोगेसी से बच्चा पैदा करने के बारे में सोचा था लेकिन यह तकनीक बहुत महंगी है. इसमें काफी रुपया खर्च होने के बाद भी सक्सेस रेट बहुत कम है. इसके बाद टेस्ट ट्यूब बेबी पर भी विचार किया लेकिन उसमें भी बात नहीं बनी. तब मैंने आईसीआई तकनीक को अपनाया. ‘मैं पापी हो गई हूं. मेरा पाप सामने आ गया’ संयुक्ता कहती हैं, अगर आप शादी के बंधन में हैं तो मां बने बिना एक महिला अस्तित्व ही न पूरा कर पाए. लेकिन अगर शादीनुमा संस्थान से या तो निकल गए हो या शादी ही नहीं की है तो एक महिला का मां बनना पाप माना जाता है. इस तरह से अब इस समाज की नजरों में मेरा एक पाप सामने आ चुका है और मैं पापी हो गई हूं वह कहती हैं कि मेरी मां 70 साल की उम्र में साये की तरह मेरे साथ खड़ी रहीं. कुछ दोस्तों ने भी हर मोड़ पर मेरा साथ दिया जिससे राह आसान हो गई.

BJP नेता आत्माराम तोमर की संदिग्‍ध मौत, घर में मिला शव; हत्या की आशंका

बड़ौत . पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री और बीजेपी नेता (BJP Leader) डॉ आत्माराम तोमर (Atmaram Tomar Died) अपने आवास पर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए है. जानकारी के अनुसार वो अपने घर में अकेले रहते थे. डॉ आत्माराम तोमर की गला घोंट कर हत्या (Murder) किए जाने की आशंका जताई जा रही है. डॉ आत्माराम तोमर छपरौली से बीजेपी की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. तोमर जनता वैदिक इंटर कालिज बड़ौत के प्रधानाचार्य भी रह चुके थे. घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर घटना की छानबीन शुरू कर दी है. घटना के अंजाम देने के बाद बदमाश तोमर की स्कोर्पियो गाड़ी भी ले गए. डॉ आत्माराम तोमर के बिजरोल रोड स्थित आवास पर बीजेपी नेताओं का जमावड़ा हुआ है. देर रात वारदात को दिया गया अंजाम जानकारी के अनुसार देर रात घटना को अंजाम दिया गया. परिजनों का आरोप है कि गला दबाकर तोमर की हत्या की गई है. 1997 में डॉ आत्माराम तोमर गन्ना संस्थान के उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री स्तर) पर रहे थे. वारदात को बड़ौत थाना क्षेत्र के बिजरौल रोड़ इलाके में अंजाम दिया गया है. गले में लिपटा मिला तौलिया पुलिस को उनके गले में तौलिया भी लिपटा मिला. इससे उनकी हत्या की भी आंशका जताई जा रही है. देर रात एसपी नीरज जादौन, एएसपी मनीष मिश्र, सीओ आलोक कुमार भी मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली. इसके बाद डॉग स्क्वायड की टीम को घटनास्थल पर बुलाया गया. आसपास रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की गई. साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले गए. परिवार में मचा कोहराम उधर सूचना पर मृतक डॉ. आत्मराम तोमर के बेटा डॉ. प्रताप भी मौके पर पहुंचे. फिलहाल मौत या फिर हत्या का कारण पता नहीं चल सका है. घटना के बाद परिजनों में भी कोहराम मच हुआ है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी मामले की जांच हो रही है, उसके बाद ही स्तिथि स्पष्ट होगी.

MP : बीजेपी प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव ने बताया नेताओं को नालायक

मंत्री न बनाए जाने से नाराज नेताओं को प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव ने नसीहत दी भोपाल। मध्य प्रदेश बीजेपी (Madhya Pradesh Bjp) के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव (muralidhar rao) ने गुरुवारो को पार्टी से नाखुश विधायक-सांसदों को सख्त लहजे में नसीहत देते हुए कहा है कि जो लगातार तीन-तीन, चार-चार बार से विधायक-सांसद बन रहे हैं, पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. ऐसे नेताओं के पास कहने को कुछ और नहीं होना चाहिए, लेकिन अगर ऐसे नेता फिर भी ये कहते हैं कि उन्हें मौका नहीं मिला तो उनसे बड़ा नालायक कोई और नहीं है. उन्हें मौका मिलना भी नहीं चाहिए. दरअसल, बीजेपी के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव ने पार्टी के उन नेताओं पर निशाना साधा, जो लगातार पदों पर बन रहने की मांग करते हैं. मुरलीधर राव ने कहा कि लगातार 4 बार 5 बार से सांसद, विधायक बनना, लगातार प्रतिनिधित्व करना, यह जनता का दिया हुआ वरदाना होता है. ‘सब होने के बाद रोने वालों को नहीं मिलना चाहिए कुछ’ दरअसल मुरलीधर राव गुरूवार को भोपाल स्थित संत रविदास मंदिर में अनुसूचित जाति मोर्चा के संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उसी दौरान राव ने कहा कि लगातार 4 बार 5 बार से सांसद, विधायक बनना, लगातार प्रतिनिधित्व करना, यह जनता का दिया हुआ वरदाना होता है. इसके बाद रोने के लिए कुछ नहीं होना चाहिए, ऐसे नेता अगर कहे कि उन्हें मौका नहीं मिला तो उनसे बड़ा नालायक कोई नहीं, मुरलीधर राव ने कहा कि उन्हें मौका मिलना भी नहीं चाहिए. सीनियर नेताओं को बड़ी नसीहत दी है राव ने मुरलीधर राव की दो टूक लाइन के बाद‌ साफ है कि आने वाले दिनों में कई वरिष्ठ नेताओं का पत्ता कट सकता है और नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है. दरअसल इस बार मंत्रिमंडल में बीजेपी के कई सीनियर नेताओं को स्थान नहीं मिला था. ऐसे में ये नेता अपने तीखे बयानों के जरिए पद की मांग करते रहते हैं. इन्ही सब बातों को देखते हुए मंत्री न बनाए जाने की नाराजगी को लेकर ही प्रदेश प्रभारी ने सीनियर नेताओं को नसीहत दी है. इन नेताओं के लिए मुरलीधर राव का यह बयान बड़ा संदेश माना जा रहा है. राव अपने बयानों को लेकर मध्य प्रदेश में इन दिनों बहुत चर्चाओं में है. एक दिन पहले ही उन्होंने राजगढ़ में बीजेपी के प्रदेश पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए साफ तौर पर चेतावनी दी थी कि संगठन के नेता दौरे करें. जनता और कार्यकर्ताओं से संवाद करें वरना उनकी छुट्टी कर दी जाएगी.

MP : बीजेपी सांसद की बहन बताकर टोल नाके पर गाली-गलौज, निकली कांग्रेसी पार्षद

भोपाल. .मध्य प्रदेश कांग्रेस (madhya pradesh congress) के मीडिया सेल के इंचार्ज के गुरुवार को एक ट्वीट करने के बाद काफी हंगामा मच गया है. कांग्रेस के मीडिया सेल के इंचार्ज केके मिश्रा (kk mishra) ने ट्वीट करके एक महिला का वीडियो शेयर किया था. ये वीडियो झाबुआ रोड पर तितरी के पास टोल नाके का बताया जा रहा है. इस वीडियों में कार में सवार होकर आई महिला खुद को सांसद गुमानसिंह डामोर (MP Guman singh Damor) की बहन बता रही है साथ ही टोल देने के नाम पर विवाद किया और जमकर गाली गलौच भी करती नजर आ रही है. दरअसल कांग्रेस के इस ट्वीट को करने की वजह यह थी कि वो महिला खुद को बीजेपी सांसद की बहन बताते हुए रौब झाड़ रही थी. कांग्रेस के नेता ने वीडियो ट्वीट कर बीजेपी और सीएम शिवराज पर भी कई सवाल खड़े किए, लेकिन थोड़ी ही देर बाद पता चला कि वीडियो वाली महिला कांग्रेस पार्टी की ही झाबुआ वॉर्ड 17 से पार्षद मालू बेन डोडियार है. मालू बेन विधायक कांतिलाल भूरिया की टीम की सदस्य है. ‘प्रदेश कुछ ज्यादा ही आत्मनिर्भर बन गया है’ कांग्रेस मीडिया सेल के इंचार्ज केके मिश्रा ने ट्वीट कर कहा कि ‘रतलाम-झाबुआ सांसद श्री गुमानसिंह डामोर की VDO में दिख रही मोहतरमा बहन हैं या नहीं,खुदा जाने,पर टोल प्लाजा में उनकी अभद्र भाषाशैली महिला अस्मिता को जरूर झकझोर रही है!लगता है प्रदेश कुछ ज्यादा ही आत्मनिर्भर बन गया है,साथ ही शिवराजजी के अमेरिका की सड़कों की दास्तां भी बयां हो रही है.’ सांसद ने कहा वो महिला नहीं है घर की सदस्य सांसद गुमानसिंह डामोर ने बताया कि वो सभी महिला मातृशक्ति को अपनी बहन मानते हैं, लेकिन टोल गेट पर विवाद करने वाली महिला उनकी बहन या परिवार के किसी भी सदस्य के रूप में भी नहीं है.

यूपी में अपराधी प्रवृत्ति के 800 माफिया डान चिन्हित

पुलिस ने हर जिले से खोजे दर्जन भर शातिर, मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, बृजेश कुमार सिंह, बब्लू श्रीवास्तव व मुनीर नाम सबसे ऊपर, 668 माफिया गिरफ्तार, आठ हजार से ज्यादा दर्ज हुए मुकदमे, 12 की हुई कुर्की, 25 पर लगा एनएसए और 567 पर लगा गैंगेस्टर लखनऊ. यूपी पुलिस ने प्रदेश भर से अपराधी प्रवृत्ति वाले 800 माफिया को चिन्हित कर उन पर अपराधों के आधार पर आठ हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए है। पुलिस ने इनके खिलाफ कुर्की से लेकर संपत्ति जब्त तक की कार्रवाई की है। साथ ही इनमें से 25 माफिया पर एनएसए और 567 के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई है। सूक्ष्म स्तर पर की जा रही अपराधियों की मॉनीटरिंग पुलिस विभाग की तरफ से जारी निर्देश में कानून व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सूक्ष्म स्तर पर अपराधियों की मॉनीटरिंग करने को कहा गया है। इसीक्रम में कानून व्यवस्था में रोड़ा बन रहे आदतन 233 आपराधिक माफिया पर गुंडा एक्ट के तहत कार्यवाही की है और 11 शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए गए हैं। इसके अलावा ऐसे 382 आपराधिक माफिया की हिस्ट्रीशीट भी खोली गई है और 274 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। यह हैं प्रदेश के 25 बड़े माफिया गाजीपुर जिले के युसूफपुर मोहम्दाबाद निवासी मुख्तार अंसारी प्रयागराज जिले के खुल्दाबाद थाना क्षेत्र निवासी अतीक अहमद वाराणसी जिले के चौबेपुर निवासी बृजेश कुमार सिंह उर्फ अरुण कुमार सिंह लखनऊ जिले के हसनगंज निवासी ओमप्रकाश उर्फ बब्लू श्रीवास्तव बिजनौर जिले के स्योहारा थाना क्षेत्र निवासी मुनीर अंबेडकरनगर जिले के हंसवार थानाक्षेत्र निवासी खान मुबारक गाजियाबाद जिले के लोनी निवासी अमित कसाना शामली जिले के आदर्श मंडी निवासी आकाश जाट मेरठ जिले के सरूरपुर निवासी उधम सिंह मेरठ जिले के सरूरपुर निवासी योगेश भदौड़ा बागपत जिले के बड़ौत निवासी अजीत उर्फ हप्पू मुजफ्फरनगर जिले के रतनपुर निवासी सुशील उर्फ मूंछ मुजफ्फरनगर जिले के कोतवाली निवासी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा गौतमबुद्धनगर जिले के कासना निवासी सुन्दर भाटी उर्फ नेताजी गौतमबुद्धनगर जिले के कासना निवासी अनिल भाटी गौतमबुद्धनगर जिले के बादलपुर निवासी अनिल दुजाना उर्फ अनिल नागर गौतमबुद्धनगर जिले के दनकौर निवासी सिंघराज भाटी गौतमबुद्धनगर जिले के जारचा निवासी अंकित गुर्जर वाराणसी जिले के कोतवाली निवासी सुभाष सिंह ठाकुर आजमगढ़ जिले के जीयनपुर निवासी ध्रुव कुमार सिंह उर्फ कुंटू सिंह गाजीपुर जिले के मुहम्मदाबाद उमेश राय उर्फ गौरा राय गाजीपुर जिले के सैदपुर निवासी त्रिभुवन सिंह उर्फ पवन कुमार लखनऊ जिले के कैंट निवासी मो. सलीम लखनऊ जिले के कैंट निवासी मो. सोहराब लखनऊ जिले के कैंट निवासी मो. रुस्तम

MP : कोरोना पर CM शिवराज अलर्ट, आपात बैठक बुलाई

नागपुर, मुंबई में केस बढ़े हैं, मप्र में  दो हफ्ते से फिर केस मिलने लगे जबलपुर कलेक्टर का आदेश- कोई भी बिना मास्क न दिखे राजगढ़/जबलपुर.  कोरोना एक बार फिर से चिंता बढ़ा रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खुद प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेशवासियों को कोरोना से अलर्ट किया है। सीएम ने कहा- ‘केरल की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। हमारे पड़ोसी राज्यों में भी लगातार केस बढ़ रहे हैं। मप्र में भी पिछले दो सप्ताह में केस में उछाल देखा गया है। हमें सतर्क रहने की जरूरत है।’ मुख्यमंत्री ने गुरुवार को कोरोना के बढ़ते केस को लेकर आपात बैठक बुलाई है। यह बैठक एक घंटे चलेगी। इसमें कुछ पाबंदियों पर विचार किया जा सकता है। इधर, जबलपुर में लगातार मिले नए संक्रमितों ने चिंता बढ़ा दी है। कलेक्टर ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि कोई भी व्यक्ति बगैर मास्क के घूमता नजर नहीं आना चाहिए। इसका सख्ती से पालन किया जाए। राजगढ़ में सीएम शिवराज ने कहा- सरकार का टारगेट है कि सितंबर अंत तक वैक्सीन का पहला डोज सभी पात्रों को लग जाए। केंद्र सरकार हमें नि:शुल्क वैक्सीन उपलब्ध करवा रही है। पहले डोज के साथ हमें दूसरे डोज की भी चिंता करना पड़ेगी। इसलिए पहला डोज लगवा चुके, पात्र दूसरा डोज भी लगवा लें। प्रदेश के कई जिलों में कोविड केस की संख्या फिर से बढ़ने लगी है। हमारे पड़ोसी राज्यों में, खासकर दक्षिण के राज्यों में लगातार केसों की संख्या बढ़ रही हैै। केरल की स्थिति सब जानते हैं। महाराष्ट्र में नागपुर, मुंबई, पुणे में फिर से केस बढ़ने लगे हैं। हमारी कोशिश तीसरी लहर नहीं आए सीएम ने कहा- सरकार अभियान चला ही रही है। जनता के सहयोग से जिले, ब्लॉक और पंचायत की क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी को सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। पहली प्राथमिकता सबको वैक्सीन का डोज लगाना, जिन्हें पहला लगा, उन्हें दूसरा लगाना। दूसरा, कोविड नियम का पालन करना। संक्रमण फैले ऐसा कोई भी काम नहीं करें। तीसरा -तीसरी लहर आई तो उससे निपटने के लिए हमने सारी व्यवस्थाएं बना ली हैं। ऑक्सीजन बेड, आईसीयू बेड, बच्चा वार्ड, ऑक्सीजन प्लांट लगाना। हमारी कोशिश यह है कि तीसरी लहर प्रदेश में नहीं आए। मप्र में 7 सितंबर की स्थिति पिछले 24 घंटे में जबलपुर में 12, भोपाल में 2, इंदौर में 1, राजगढ़ में 1 केस सामने आए है। मप्र में अभी 137 एक्टिव केस हैं। बुधवार को इनमें से 6 लोग ठीक होकर घर लौट गए। अभी पॉजिटिविटी रेट 0.02 है। वहीं, मृत्युदर 00 फीसदी है।

MP : मौसी का पूरा परिवार ही खत्म कर दिया

ग्वालियर में एक दोस्त के साथ चोरी करने घुसा, जो जागता गया उसे मारते गए  मौसी, मौसा और उनकी बेटी को मार डाला, दो गिरफ्तार पकड़ा गया आरोपी घोड़ा हवालात में बोला, साहब 3 लाख मिला, तीन हत्या और सिर चढ़ गईं ग्वालियर.  आखिरकार पुलिस ने 72 घंटे में ट्रिपल मर्डर का खुलासा कर दिया है। हत्या करने वाला कोई और नहीं मृतक का साढू का बेटा ही निकला है। अपने एक दोस्त के साथ मिलकर पूरी वारदात को अंजाम दिया है। दोनों चोरी करने घर में घुसे थे। जिसकी नींद खुलती गई, उसे मारते गए। एक-एक करके मौसा, मौसी और मौसेरी बहन को मौत के घाट उतार दिया। मास्टर माइंड भतीजा सचिन पाल समेत दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। दूसरा आरोपी तरुण झा उर्फ घोड़ा का चोरी का भी रिकॉर्ड होना पता चला है। दोनों ने पुलिस को पूरी घटना बयां की है। पूरी प्लानिंग मृतक के भतीजे सचिन पाल ने बनाई थी। इसमें मोनू नाम के युवक का नाम भी आया था, लेकिन बाद में उसकी कोई भूमिका सामने नहीं आई है। पूरा खुलासा पुलिस को आए एक कॉल पर हुआ है। जिसमें कहा गया कि जिसे बाहर ढूंढ रहे हो वह हवालात में बैठा है। घोड़ा को उसी थाना पुलिस ने खुलासे से एक दिन पहले ही एक वारंट में पकड़ा था। तब पता भी नहीं था कि यह ट्रिपल मर्डर का खुलासा करेगा। ऐसे खुला मामला मुरार के अल्पना टॉकीज के पास रहने वाले जगदीश पाल (60), उसकी पत्नी सरोज और बेटी 11 वर्षीय कीर्ति पाल की हत्या कर दी गई थी। मास्टर माइंड जगदीश के साढू का बेटा सचिन पाल निकला है। हत्या के बाद पुलिस काफी हाथ पैर मार रही थी। तभी घटना स्थल के पास रहने वाले एक पड़ोसी ने पुलिस को आसान का क्लू दिया। उसने बताया कि मृतक के घर के सामने ही उसका साढू रहता है। साढू तो दिख रहा है, लेकिन उसका बेटा सचिन इतने बढ़े हत्याकांड के बाद भी नजर नहीं आ रहा। पुलिस ने सचिन और उसके दोस्त घोड़ा को गिरफ्तार किया। घोड़ा ने बताया कि शनिवार-रविवार दरमियानी रात लूट और चोरी के इरादे से ही घर में पीछे के रास्ते से दाखिल हुए थे। जब चोरी कर रहे थे तो सबसे पहले मौसी सरोज की नींद खुली। उस पर चाकू से हमला कर दिया। फिर उसका तकिया से मुंह दबाकर हत्या की। इसके बाद मौसा और बहन की नींद खुल गई। मौसा की गला घोंटकर हत्या की। रात 2 बजे से सुबह 4.30 बजे तक कीर्ति पर कट्‌टा अड़ाकर घर में रखे गहनों के बारे में पूछते रहे। उसे मारने का प्लान नहीं था। पर जाते समय अचानक सचिन के चेहरे से साफी हट गई। जिससे उसकी पहचान हो सकती थी। इसलिए कीर्ति को भी तकिया से मुंह दबाकर मार डाला। पहचान हो जाती, इसलिए हत्या करनी पड़ी रात करीब 2 बजे घर में पीछे के रास्ते से दोनों दाखिल हुए। जब वारदात को अंजाम दे रहे थे तभी सचिन की मौसी सरोज की नींद खुल गई। उसने एक आरोपी के बाल पकड़ लिए। इसके बाद सचिन ने ही मौसी की चाकू मारकर हत्या की। घटना के बाद मृतका के हाथ में कुछ बाल भी फोरेंसिक टीम को मिले हैं। जब सरोज को चाकू मारे तो उसी कमरे में सो रहे जगदीश पाल और कीर्ति की भी नींद खुल गई। उन्होंने सचिन को पहचान लिया। इसके बाद उन दोनों के गले घोंटकर हत्या कर दी गई। चेहरे से साफी नहीं हटती तो बच सकती थी जान – कीर्ति की जान बच सकती थी, लेकिन उसकी किस्मत ठीक नहीं थी। जब दोनों आरोपी जा रहे थे तभी कमरे से निकलते समय सचिन के चेहरे से साफी हट गई। इसके बाद 11 साल की कीर्ति ने उसे पहचान लिया। दोनों बदमाश वापस लौटे और फिर उसको भी मार दिया। बहन के घर छुपाया था माल – पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की तो पता लगा कि उसने लूट का माल अपनी एक बहन के घर मुरार में ही छुपा दिया था। जब पुलिस उससे पूछताछ कर रही थी तो उसे अपने पकड़े जाने का मलाला था, लेकिन हत्या पर पछतावा नहीं था। साहब, जिसे ढूंढ रहे हो वह तो हवालात में बैठा है – जब पुलिस ट्रिपल मर्डर के आरोपियों की तलाश कर रही थी। तभी ASP राजेश डंडौतिया को एक कॉल आया। मुखबिर ने बताया कि साहब, जिस ताले को खोलना चाह रहे हो उसकी चाबी पहले से ही थाने में रखी है। उसका इशारा घोड़ा पर था। जिसे पुलिस ने एक दिन पहले पुराने वारंट में पकड़ा था। उस समय पुलिस को पता भी नहीं था कि यही ट्रिपल मर्डर का सूत्रधार निकलेगा। इसके बाद पुलिस ने घोड़ा से कड़ी पूछताछ की तो वह टूट गया। इस पर आईजी ग्वालियर अविनाश शर्मा ने पूरी टीम को 30 हजार रुपए नकद पुरस्कार दिया है।

MP में बेरोजगारी बनी जान की दुश्मन

खरगोन में चयनित शिक्षक की कीटनाशक पीने से मौत  – बेटा अस्पताल में भर्ती, कांग्रेस बोली – सरकार जिम्मेदार खरगोन.  खरगोन में लंबे समय से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे चयनित शिक्षक ने खुदकुशी कर ली है। उसने पहले बेटे को कीटनाशक दिया। इसके बाद खुद भी गटक लिया। कीटनाशक पीने से जहां पिता की मौत हो गई। वहीं, उसके 8 साल के बेटे को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। जहां से उसे इंदौर रैफर कर दिया गया। कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने शिक्षक की मौत का जिम्मेदार शिवराज सरकार को बताया है। खरगोन के जिला अस्पताल पुलिस चौकी के अनुसार अकावल्या का रहने वाले 36 साल के राकेश पाटीदार की मौत हो गई है। वहीं, उसके 8 साल के बेटे आरव को गंभीर हालत में इंदौर रैफर किया गया है। मंगलवार रात 8.50 बजे वह बेटे के साथ बिस्टान रोड पर भोंगनाला के पास पड़ा था। लोगों ने देख पुलिस को सूचना दी। इसके बाद उसे जिला अस्पताल लाया गया। यहां इलाज के दौरान रात 9.30 बजे राकेश की मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

MP के 3 नेता-कारोबारी ने किया नाबालिग से रेप, गिरफ्तार

भोपाल के दो होटलों में BJP-JDU नेताओं और पेट्रोल पंप संचालक पकड़े गए भोपाल. हरियाणा के पलवल से भाग कर आई एक नाबालिग से भोपाल के दो होटल और एक फ्लैट में दुष्कर्म का मामला सामने आया है। एमपी नगर के होटल से गैंगरेप करने वाले 3 आरोपियों को पुलिस ने डिंडौरी जिले से पकड़ा है। गैंगरेप में शामिल एक भाजपा का पदाधिकारी है, जबकि दूसरा आरोपी जेडीयू डिंडौरी का जिला अध्यक्ष है। तीसरा आरोपी कारोबारी है। इस मामले में दो महिलाओं समेत तीन आरोपियों को पूर्व में पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। जानकारी के मुताबिक डिंडौरी भाजपा जिला कार्यालय मंत्री मनीष नायक, जेडीयू का जिलाध्यक्ष दिनेश अवधिया और पेट्रोल पंप संचालक अमित सोनी को हिरासत में लिया गया है। इन पर किशोरी से दुष्कर्म करने का आरोप है। बता दें, नाबालिग अशोका गार्डन निवासी पारूल को बस में मिली थी। अशोका गार्डन थाना प्रभारी आलोक श्रीवास्तव ने बताया आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। वह उसे काम दिलाने के लिए भोपाल लेकर आई थी। यहां अशोका गार्डन के अस्सी फीट रोड स्थित अमन होटल में रुकवाया था। पारूल के जानने वाले सैफ ने नाबालिग को पास के फ्लैट में ले जाकर दुष्कर्म किया। इसके अगले दिन पारुल उसे एमपी नगर स्थित एक होटल में ले गई, जहां दो लोगों ने दुष्कर्म किया। तीसरे दिन फिर उसके साथ एक अन्य होटल में दुष्कर्म किया। इस मामले में पीड़िता ने अशोका गार्डन थाने में सीमा, पारूल और सैफ समेत अन्य तीन लोगों के खिलाफ शिकायत की थी। दोनों होटलों में दुष्कर्म करने वाले डिंडौरी के नेता और व्यापारी को पुलिस ने बुधवार को हिरासत में लिया है। होटल से मिली तीनों आरोपियों की जानकारी पीड़िता इन तीनों आरोपियों के नाम नहीं जानती थी। पुलिस ने होटल से जानकारी निकाली गई, जिसमें पता चला कि डिंडौरी निवासी मनीष नायक, दिनेश अवधिया, अमित सोनी नाम के व्यक्ति होटल में 18 अगस्त की रात ठहरे हुए थे। सोमवार को पुलिस डिंडौरी पहुंची, जहां से तीनों आरोपियों को लेकर भोपाल पहुंची। देह व्यापार में धकेली गई पीड़िता का दर्द मेरी उम्र 17 साल 8 महीने है। मैं, जिला पलवल, हरियाणा के एक गांव की रहने वाली हूं। घर से 13 अगस्त को भागकर मुंबई जाने के लिए मथुरा आई थी। वहां से मुझे किसी ने बताया कि इंदौर होते हुए तुम्हें मुंबई के लिए बस मिल जाएगी। तो मैं इंदौर की बस में बैठकर आ रही थी। मुझे बस में एक लड़की मिली। जिसने अपना नाम पारुल राठौर बताया था। उसके बाद पारुल ने मुझे बताया कि वह भोपाल में अकेली रहती है। उसने कहा कि तुम मेरे साथ भोपाल चलो। मैं तुम्हें काम धंधा दिला दूंगी। उसकी बात मानकर मैं भोपाल आ गई। मुझे उसने अशोका गार्डन के अमन होटल में अपनी आईडी लगाकर रुकवाया। इसके बाद पारुल ने मुझे कहा कि तुम मेरे साथ गलत काम करने लगोगी तो तुम्हें कुछ पैसे कमा लोगी। उसके बाद पारुल ने मुझे कहा कि तुम मेरे साथ चला करो। 16 अगस्त को पारुल अमन होटल के पास ही एक फ्लैट पर लेकर मुझे गई। जहां, सैफ नाम के व्यक्ति ने मेरे साथ पहली बार दुष्कर्म किया। पारुल ने सैफ से 1500 रुपए लिए। अगले दिन पारुल ने सीमा नाम की अपनी सहेली को फोन किया। पारुल मुझे लेकर एमपी नगर स्थित एक होटल में ले गई। जहां दो लोगों ने गलत काम किया। पारुल ने दोनों लोगों से 6 हजार रुपए लिया था। इसके अगले दिन मुझे फिर एक होटल में ले जाया, जहां एक व्यक्ति ने मेरे साथ दुष्कर्म किया। अगले रोज पारुल मुझे फिर एक होटल में भेज रही थी। तब मैंने मना कर दिया। इसपर मुझे पारुल ने कहा कि तुम काम नहीं करोगी तो जान से हमारे लोग मार देंगे। होटल में उसके आदमी तैनात रहते थे, जो मुझपर हर पल नजर रखते थे। 19 अगस्त को मैं मौका पाकर होटल से भाग थाने पहुंची। जहां, अशोका गार्डन थाने में पुलिस को आप बीती बताई।

भारत बंद की तैयारियां तेज:संयुक्त किसान मोर्चा ने तय किया राज्यवार बैठकों का कार्यक्रम

गाजियाबाद. कृषि कानूनों के खिलाफ 27 सितंबर को प्रस्तावित भारत बंद के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्यवार बैठकों का कार्यक्रम तय कर दिया गया है। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य एवं भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ नेता युद्धवीर सिंह के अनुसार, किसान संगठन 11 सितंबर को पटना में एक सम्मेलन करेंगे। मध्यप्रदेश के सभी जिलों में तैयारी बैठकें 10 सितंबर तक पूरी कर ली जाएंगी। उत्तर प्रदेश में एसकेएम के “मिशन यूपी’ की अहम बैठक 9 सितंबर को लखनऊ में होगी। 15 सितंबर को राजस्थान के जयपुर में किसान संसद होगी। युद्धवीर सिंह ने कहा कि ये सभी बैठकें कहीं न कहीं 27 सितंबर के प्रस्तावित भारत बंद की तैयारियों से जुड़ी हैं। अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार बैठकें-पंचायत करके सभी किसान-मजदूर संगठनों का समर्थन लिया जा रहा है। इन बैठकों के बाद ये संगठन अपने-अपने राज्य में बंदी के लिए जनसंपर्क करके जनसमर्थन हासिल करेंगे। महापंचायत पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म तैयार पांच सितंबर को यूपी के मुजफ्फरनगर में हुई किसान महापंचायत पर किसान संगठनों ने एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनवाई है। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने ट्वीट करके बताया कि यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म 17 सितंबर को भारतीय किसान यूनियन के सभी अधिकारिक प्लेटफॉर्म पर लाइव स्ट्रीम की जाएगी। चुनाव नजदीक देख किसान आंदोलन ने पकड़ा जोर जैसे-जैसे यूपी-उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे यह किसान आंदोलन फिर से जोर पकड़ रहा है। पांच सितंबर की मुजफ्फरनगर महापचंायत और सात सितंबर की करनाल महापंचायत इसी का नतीजा है। करनाल में खुद राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढ़ूनी अपनी टीम को लेकर डटे हुए हैं। इधर, संयुक्त किसान मोर्चा ने कह दिया है कि सभी राज्यों में एसकेएम की समितियां बनाई जाएं। साफ है कि किसान संगठन अब इस आंदोलन को दिल्ली बॉर्डर के साथ-साथ गांव-गांव, जिले-जिले तक ले जाना चाहते हैं।

MP: सगाई के बाद युवती ने मंगेतर से बनाए शारीरिक संबंध, ज्यादा ब्लीडिंग होने से मौत

भोपाल. सगाई के बाद अपने मंगेतर के साथ शारीरिक संबंध बनाना एक युवती के लिए मौत का कारण बन गया. अधिक ब्लीडिंग होने से युवती की जान चली गई. मरने से पहले युवती ने अपने मंगेतर के खिलाफ बयान नहीं दिए, लेकिन मामला युवती की मौत (Death) का है. इसलिए पुलिस (Police) ने मंगेतर को अपनी कस्टडी में रखा है और कानूनी सलाह के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. यह घटना भोपाल (Bhopal) के कोलार इलाके की है. यहां रहने वाला एक युवक होटल में काम करता है. पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक युवक की सगाई मंडीदीप में रहने वाली एक 28 साल की युवती से हुई थी. कुछ महीनों बाद उनकी शादी भी होने वाली थी. बीते 5 सितंबर को युवती अपने मंगेतर से मिलने के लिए भोपाल पहुंची. शाम पांच बजे दोनों ने फिजिकल रिलेशन बनाए. इस दौरान ब्लीडिंग शुरू हो गई. मंगेतर पहले उसे पास के एक अस्पताल ले गया था. फिर वहां से दूसरे हॉस्पिटल में भर्ती कराया. डॉक्टरों ने पुलिस को बताया कि काफी कोशिशों के बाद भी ब्लीडिंग बंद नहीं हो सकी. इस कारण उसकी मौत हो गई. डॉक्टरी और कानूनी सलाह के बाद कार्रवाई भोपाल के एएसपी अंकित जयसवाल ने बताया कि इस मामले में कानूनी सलाह लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल युवती ने मरने से पहले युवक के खिलाफ किसी तरीके के बयान नहीं दिए. दोनों बालिग हैं. फिर भी पुलिस तमाम मामले से जुड़े बिंदुओं पर जांच कर रही है. कोई भी बिंदु इस जांच में नहीं छोड़ा जाएगा. मामला गंभीर है. इसलिए पुलिस की एक टीम सभी पहलुओं पर लगातार जांच कर रही है. इस जांच में डॉक्टरों और लीगल एडवाइस भी लिया जा रहा है. मरने से पहले युवती ने दिए थे बयान युवती ने मरने से पहले बयान दिए थे. उसने बताया था कि वह मंडीदीप की रहने वाली थी. उसकी सगाई हो चुकी है. वह अपने मंगेतार के पास भोपाल मिलने आई थी, लेकिन युवती ने मंगेतर के खिलाफ कोई बयान नहीं दिए हैं. इस मामले में अभी कोई सबूत युवक के खिलाफ नहीं मिले हैं. पुलिस ने डॉक्टर की सूचना पर मर्ग कायम कर मामले की जांच कर रही है. वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार भी किया जा रहा है. अभी मौत के स्पष्ट कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है.

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