मध्य प्रदेश के परिवहन एवं राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन के ममाले में सागर ज़िले के राहतगढ़ थाने में दर्ज़ हुई FIR.
FIR filed against Madhya Pradesh’s Transport and Revenue Minister Govind Singh Rajput
FIR filed against Madhya Pradesh’s Transport and Revenue Minister Govind Singh Rajput
The former president of Harda Municipal Council has resigned from the BJP’s state executive and primary membership of the BJP. हरदा, नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष और मप्र के कृषि मंत्री कमल पटेल के बचपन के मित्र सुरेंद्र जैन ने आज मप्र भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य व भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। कमल पटेल और सुरेन्द्र जैन ने साथ साथ राजनीति शुरु की। दोनों मित्र होने के साथ साथ एक दूसरे के गहरे राजदार भी हैं। कमल पटेल को विधायक व मंत्री बनाने सुरेन्द्र जैन ने दिन रात एक किया है। सुरेन्द्र जैन और उनकी पत्नि को अनेक बार नगर पालिका अध्यक्ष बनवाने में कमल पटेल ने हरसंभव मदद की है। हरदा की राजनीति में यह दोनों नेता दो शरीर एक जान माने जाते थे। दोनों सगे भाइयों से ज्यादा खास बनकर रहने वाले यह दोनों नेता अब एक दूसरे की शक्ल भी देखना पसंद नहीं कर रहे हैं। दरअसल इस झगड़े की शुरुआत कमल पटेल के बेटे की सोशल मीडिया पर की गई बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी है। सुरेन्द्र जैन ने हरदा से विधानसभा टिकट की दावेदारी की तो कमल पटेल के बेटे ने उन्हें गद्दार और उनके खून में गद्दारी जैसे शब्द लिख दिए। यह बात सुरेन्द्र जैन से ज्यादा उनके बेटे को चुभ गई। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई। मेरी जानकारी के अनुसार सुरेन्द्र जैन ने बड़ा दिल रखकर प्रयास किया कि टिकट मिलने के बाद कमल पटेल फोन करेंगे तो वे सभी शिकवे शिकायत भुलाकर हमेशा की तरह उन्हें जिताने में जुट जाएंगे। लेकिन कमल पटेल ने न तो फोन किया और न ही किसी माध्यम के जरिए संपर्क किया। बल्कि संदेश आते रहे कि सुरेन्द्र जैन के बिना चुनाव जीतकर दिखाऊंगा। सुरेन्द्र जैन ने अपने स्वाभिमान के खातिर आखिर भारी मन से भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। मुझे लगता है कि सुरेन्द्र जैन का भाजपा छोड़ना कमल पटेल को भारी पड़ सकता है।
Congress has started its public outreach campaign in the Bagli assembly constituency.
Congress can take U turn on 5 seats, Nisha from Amla
Former Chief Minister Digvijay Singh raised questions about the EVM (Electronic Voting Machine). वोट कहां गया यह जानना हमारा संवैधानिक अधिकार। निष्पक्षता से सॉफ्टवेयर के विषय में जानकारी दे ईसी। उदित नारायण भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस पार्टी से राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह नेएक बार फिर ईवीएम मशीन से वोटिंग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मैं ईवीएम से वोट कराने का विरोध नहीं करता, लेकिन चुनाव आयोग बताए कि जिस मशीन में चिप लगी हो तो वह टेंपर प्रूफ कैसे हो सकती है? ईवीएम में वोट कहां गया ये जानना हमारा संवैधानिक अधिकार है। ईवीएम, वीवीपैट और काउंटिंग यूनिट में जो सॉफ्टवेयर है, चुनाव आयोग को निष्पक्षता से उस सॉफ्टवेयर के विषय में जानकारी देनी चाहिए। इलेक्शन कमिशन हमसे मिलने को तैयार नहीं है। हमने एक सवालों की फेहरिस्त बनाई थी लेकिन आयोग उसका जवाब नहीं दे रहा है। बता दें कि कांग्रेस की ओर से ईवीएम मशीन को लेकर बनाई गई कमेटी को दिग्विजय सिंह लीड कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह ईवीएम के संबंध में विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें भी कर चुके हैं। दिग्विजय सिंह की अगुवाई में देश के प्रमुख विपक्षी दलों द्वारा निर्वाचन आयोग से मांग की जा रही है कि वीवीपैट की पर्ची से काउंटिंग की जाए। देश में लोकतंत्र को बचाए – सुप्रीम कोर्ट:- दिग्विजय सिंह सोमवार को पूर्व सीएम ने इस संबंध में ट्वीट करते हुए भी लिखा कि चुनाव आयोग से एक ही गुज़ारिश है कि वीवीपैट स्लिप हमें हाथ में दे दो जिसे हम अलग से मतपेटी में डाल दें। मतगणना के पहले किसी भी 10 मतपेटी के वोट गिन लो और काउंटिंग के नतीजों से मेल कर लो। यदि दोनों का नतीजा एक जैसा है तो काउंटिंग के नतीजों से रिजल्ट डिक्लेअर कर दो। इसमें चुनाव आयोग को क्या दिक़्क़त है? सुप्रीम कोर्ट से यही प्रार्थना है इसे गंभीरता से लें देश में लोकतंत्र को बचाइए।
Political strategist took charge to appease the disgruntled Congress members