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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर प्रबंधन का जीपीएस बघीरा एप्प बना खिलौना.

The GPS Bagheera app has become a tool for management within the Bandhavgarh Tiger Reserve. भारत सरकार के कई लाखो की राशियों से खरीदा गया घटिया मोबाईल जीपीएस, प्रतिबंधित संरक्षित क्षेत्र में नियम विरुद्ध तरीके से प्रवेश वाहनों पर वाहन चालकों पर व गाइडो पर जीपीएस बघीरा एप्प लोकेशन अनुशार प्रबंधन कार्यवाही करने में हों रहा है नाकाम.बांधवगढ़ जंगल सफ़ारी में निर्धारित गति के नियमों की उड़ रही धज्जिया पर्यटको हेतु प्रतिबंधित संरक्षित क्षेत्र में भी प्रवेश कर रही है खुले आम पर्यटक वाहन फुल डे सफारी वाहन चालक व गाइड पर्यटक मिलकर वन्य जीव के रहवासी स्थल में पैदा करते हैं खलल. विश्व विख्यात पर्यटक स्थल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अपनी छवि का मोहताज नही है किंतु कुछ वाहन चालक गाइड वह पर्यटक अपने निजीगत लाभ प्राप्त करने के लिए विश्व विख्यात पर्यटक स्थल बांधवगढ़ की छवि धूमिल करने में पीछे नहीं है उपरोक्त मामला जब प्रकाश में आया की स्थानीय कुछ वाहन चालक व गाइडों का कहना है की प्रबंधन द्वारा दिए जा रहे गाइड च्वाइस सुविधा जिसका आदेश किसी भी राज्य पत्र व कोई ऐसी टाइगर रिजर्व की पॉलिसी में नहीं है उपरोक्त मामला पूर्व के क्षेत्र संचालक व प्रबंधन की जानकारी में लाई गई थी जिस पर क्षेत्र संचालक द्वारा मनपसंद गाइड को ले जाने पर रोक भी लगाया गया था किंतु कुछ ऐसे फोटो ग्राफर्स है जो नार्मल सफारी के वापस पार्क से आने के बाद करप्शन के रूप में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों के पास काफी नजदीक लेकर ले जाकर फोटोग्राफी करना चाहते हैं व साथ में रोड में अथवा रोड के पास में सोए हुए बाघों को जगाने का प्रयास कर फोटो ग्राफी करते हैं उपरोक्त कार्य में हर गाइड सम्मिलित होने से मना कर देता है तो फीर पर्यटक ऐशे कार्य वाले गाइड वाहन चालक को तलाशता है और उपरोक् कार्यो को अंजाम देने के लिए ऊपर के रसूख दारो से पर्यटक द्वारा दवाब वनवाया गया जिसके कारण बड़े ऐसे फोटोग्राफरों के व् रसूखदार के दबाव में आकर प्रबंधन ने यह कहते हुए की उपरोक्त मामला राजपत्र या एल ए सी में पारित करवाया जाएगा तब तक के लिए वैकल्पिक गाइड व्यवस्था चालू किया जाए किन्तु आज दिनाक तक कोई ऐशा क़ानून पारित नही किया गया जिसका खुलेआम दुरुपयोग देखने को मिल रहा है औए यह भी देखा गया की कुछ वाहन चालक व गाइड चंद पैसों के लिए सभी नियम कानून को रौंदते हुए वन्य जीव व बाघ के राहवास में खलल पैदा करते है जिस पर वन्य प्राणियों के जीवन यापन पर असर पड़ रहा है जिस पर राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण विभाग ने भारत सरकार राजपत्र में नियम पारित करते हुए 20 की स्पीड नियंत्रण व् वाहन से से वाहन की दूरी 50 मी किसी भी जानवर के पास 15 से 20 मिनट से अधिक न रुकने का और किसी भी वन्य प्राणी से वाहन की दूरी 20 मी पर वाहन रोकने का निर्देश जारी किया है और बाघ के मेटिंग पीरियड के दौरान व शिकार पर खाने के दौरान पूर्णतः प्रतिबंध हुआ है लेकिन बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में देखा गया कि सबसे अधिक वाहन तेज गति में उपरोक्त स्थान पर ही पहुंचाते हैं और उपरोक्त स्थान पर ही काफी देरी तक काफी नजदीक पर खड़े रहते हैं और यह सब नजारा प्रबंधन की आंखों के सामने ही होता होता है निर्धारित गति के नियमों की उड़ रही धज्जियाजहा बाघों के गढ़ की सफारी में लगे वाहन जंगलों के अंदर तय गति सीमा की धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन प्रबन्धन उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं मध्य प्रदेश। बाघों के गढ़ की सफारी में लगे वाहन जंगलों के अंदर तय गति सीमा की धज्जियां उड़ा रहे हैं जिस पर की राज्य सरकार व भारत सरकार द्वारा पार्क में चल रहे पर्यटक वाहनों में स्पीड गति नियंत्रण हेतु जीपीएस बगीरा एप्प हेतु अभी हाल में ही कई लाख रु का बजट संचालन हेतु दिया है किंतु प्रबंधन द्वारा उपरोक्त राशि का वारा न्यारा कर दिया गया ,और प्रबन्धन उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं। बाघ क्षेत्रों में सफारी ने न सिर्फ तय नियम और कायदों की धज्जियां उड़ाने में जुटे है, बल्कि सरकार के राजपत्र की अवमानना भी कर रहे हैं, लेकिन बाघ सहित अन्य वन्य प्राणियों के सरोकारता का दम भरने वाला बांधवगढ़ प्रबन्धन चिर निंद्रा में लीन है। बाघ सफारी के लिए सफारी हेतु जिन जिप्सियों का उपयोग किया जाता है, उन जिप्सियों की गति सीमा एनटीसी निर्धारित की गई है, जिसमें अचानक वन्यप्राणियों या बाघ के आने पर वाहन नियंत्रित हो सके, तो वहीं बाघों के फ़ोटोग्राफी और विडियोग्राफी के लिए भी दूरियां तय की गई हैं फिर भी पार प्रबंधक के आंखों के सामने सभी नियम कानूनों को जिप्सी संचालको व गाइडों द्वारा रौंदते हुए फोटोग्राफी बाघों के पास वाहन लगा कर शोरगुल कराते हुए वन्य जीव के विचरण क्षेत्र में खलल पैदा किया जा रहा है। पहले हो चुकी है घटनाबावजूद इसके नियम बीटीआर में दम तोड़ रहे हैं, खबर है कि इन सबकी जानकारी बीटीआर फील्ड डायरेक्टर व प्रबंधन के अमला को भलीभांति है, लेकिन उनके द्वारा कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। विदित हो कि पूर्व में फोटोग्राफी व मोबाइल फोन के फेर में एक पर्यटक वाहन तेज गति में अपना नियंत्रण खो दिया था, जिसमें कई पर्यटक घायल हो गए थे। बावजूद इसके पार्क प्रबन्धन नियमों का पालन कराने और न ही सफारी वाहन संचालकों द्वारा नियमों का पालन कराने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, बल्कि उदासीन रवैया घटना की पुनरावृत्ति के ताक में बैठा है। फोटोग्राफी पर लगा प्रतिबंधपार्क क्षेत्र में हुई दुर्घटनाओं को देखते हुए 29 मई 2018 के राजपत्र में पर्यटक भ्रमण के दौरान वाहन चालकों के फोटोग्राफी पर प्रतिबंध लगा दिया गया, किंतु कुछ वाहन चालक सरेआम राजपत्र की धज्जियां उड़ाते हुए खुलेआम फोटोग्राफी कर रहे हैं और तो और वन्यप्राणियों के अधिकतम पास वाहनों को सटाकर फोटोग्राफी करते और कराते हैं, जो भारत राजपत्र व एनटीसीए के नियमों के विपरीत है। पार्क प्रबंधन ने बंद की आंखेंबांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफ़ारी के दौरान पर्यटक वाहनों के शोरगुल के दबाव में आकर संरक्षित क्षेत्र के बाघ अपना क्षेत्र छोड़ बफर क्षेत्रों में पलायन कर जाते हैं, जिसके बाद उनकी … Read more

किसानों के लिए महत्वपूर्ण खबर, अब इस महीने में आएगी PM Kisan की 16वीं किस्त! खाते में आएंगे फिर 2-2 हजार, जानें EKYC पर ताजा अपडेट.

Important news for farmers: The 16th installment of PM Kisan will be credited this month! Another 2,000 rupees will be deposited in the accounts. Get the latest update on EKYC. उदित नारायणप्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केन्द्र सरकार की किसानों के लिए चलाई जा रही कई योजनाओं में से एक बड़ी योजना है। इस योजना के तहत किसानों को सालाना 6,000 रुपये दिए जाते है। यह राशि हर 4 माह में 3 किस्तों में 2,000-2000 रुपये करके DBT के माध्यम से दी जाती है।अबतक योजना की 15वीं किस्त जारी हो चुकी है और अब 16वीं किस्त जारी की जानी है। कब आएगी पीएम किसान योजना की 16वीं किस्तपीएम किसान योजना के नियमानुसार, पहली किस्त अप्रैल-जुलाई के बीच , दूसरी किस्त अगस्त से नवंबर के बीच और तीसरी किस्त दिसंबर से मार्च के बीच जारी की जाती है, ऐसे में संभावना है कि फरवरी से मार्च के बीच कभी भी 16वीं किस्त जारी की जा सकती है। हालांकि अगली किस्त जारी करने की कोई निश्चित तिथि अभी सामने नहीं आई है।ध्यान रहे अगली किस्त का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिन्होंने eKYC, भू सत्यापन और आधार लिंक की प्रक्रिया को पूरा कर लिया है और जिन्होंने ये तीनों काम नहीं किए है, उन्हें लाभ से वंचित किया जा सकता है।

पानी की समस्या से जूझते ग्रामीण जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान.

Rural areas are not paying adequate attention to the issue of water scarcity. Special Correspondent. कटनी /उमरियापान। जिम्मेदारों एवं लोक स्वास्थ्य यात्रीकी विभाग की उदासीनता के चलते ग्रामीण पीड़ा झेल रहे हैं ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र के घुघरा ग्राम पंचायत के टोपी गांव में हैंडपंपों के बंद होने से ग्रामीण परेशान हैं। दर्जनों बाद लिखित, मौखिक शिकायत करने के बाद भी हैंडपंप नहीं सुधरे है। बीते कई वर्षों से टोपी गांव में रहने वाले लोग पीने के पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।दरअसल, यहां तीन -चार हैंडपंप है वह भी बंद हैं। इससे दिक्कत यह हो रही है लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है। यहां रहने वाले अरविंद पटेल, अभिषेक पटेल, सुरेंद्र यादव,सुमित पटेल समेत अन्य ने बताया कि एक हैंडपंप स्कूल के पास लगा है। जिसमें तनिक पानी निकलता है। दूसरा हैंडपंप वर्षों से बंद है जबकि तीसरे हैंडपंप से तो सामाग्री ही गायब हो गई है। हैंडपंप पोल के सहारे खड़ा है। समर्सियल भी नहीं पड़ा। सभी हैंडपंप शोपीस बनकर रह गए हैं।गांव के लोग खेतों में लगे बोरबोल से पानी लाते हैं।पानी को लेकर सबसे ज्यादा समस्या महिलाओं को होती है। गांव की महिलाओं ने बताया कि शिकायत तो अनेकों बार किया लेकिन फायदा नहीं मिला। यूं तो गांव में तीन से चार हैंडपंप हैं, लेकिन इनमें से तीन हैंडपंप खराब हैं। उन्होंने बताया कि एक हैंड पंप तो पिछले लंबे समय से खुला ही पड़ा है, लेकिन अभी तक ठीक नही हो सका है। जिसके चलते ग्रामीणों को दूर पानी लाकर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों सहित जनप्रतिनिधियों पर लापरवाही आरोप लगा रहे है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के लोग चंदा इकट्ठा करके पानी का पाइप खरीदकर लाये हैं। खेतों में बने बोरबोल से गांव तक पाइप बिछाया है। पाइप से गांव तक पानी पहुँचता है जिससे लोग पानी भरते हैं। अब देखना यह होगा की समस्या का निदान कब तक किया जाता है

सियासत किस करवट लेगी, इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म.

Political discussions are heating up over which direction politics will take. गगनचुंबी दावों के बीच किसके सिर सजेगा सत्ता का ताज, तीन दिसंबर को स्थिति होगी साफ, लगभग 150 घंटे का इंतजार बांकी. उदित नारायण उदित नारायणभोपाल। मध्यप्रदेश चुनाव 2023 के परिणाम को भले ही लगभग 150 घंटे शेष हों, लेकिन सियासत में कांग्रेस और भाजपा के परिणाम इस बार किस करवट बैठेंगे, इसको लेकर भारी चर्चा हो रही है। मध्यप्रदेश में बिना किसी लहर के नजर आए मतदाताओं के उत्साह और भारी मतदान के बाद राजनीतिक दल और राजनेता आंकड़ों के खेल में उलझ कर इस बात का अंदाजा लगा रहे हैं कि आखिर सता का ताज किसके सिर सजेगा। भाजपा को भरोसा है कि सत्ता का ताज उसके सर पर ही सजा रहेगा। वहीं कांग्रेस को भरोसा है कि कांग्रेस की ही सरकार बन रही है और कमल नाथ मुख्यमंत्री बनेंगे। लाडली बहना बनाम एंटी इनकमबेंसी को लेकर ही अनुमान लगाए जा रहे हैं। शिवराज सरकार की लाडली बहना योजना को भाजपा अपने पक्ष में मानकर चल रही है तो कांग्रेस एंटी इनकमबेंसी और महंगाई के कारण महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में मानकर अपनी जीतका गगनचुंबी दावा कर रही हैं। भाजपा नेता मध्यप्रदेश में 230 सीटों में से 150 से अधिक सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस नेता 125 से लेकर 150 सीट तक जीतने का दावा कर रहे हैं। अपने अंदरूनी सर्वे में दोनों ही दल यह मानकर चल रहे हैं कि लगभग 100 -100 सीटें तो जीत ही रहे हैं और बची हुई 30 सीटों में से जो भी आधे से अधिक जीत लेगा उसे ही मध्य प्रदेश में सत्ता साकेत में नौकायन का मौका मिल जाएगा। लाख टके के सवाल का जवाब 3 दिसंबर को मतगणना से ही मिलेगा 116 का जादुई आंकड़ा कौन पर करता है। वास्तव में भारी मतदान किसके पक्ष में हुआ है इसको लेकर राजनीतिक विश्लेषक भी अपने-अपने ढंग से इसका अर्थ निकाल रहे हैं लेकिन कोई भी निश्चित तौर पर यह नहीं कह रहा है कि चुनाव कौन जीत रहा है। मध्यप्रदेश के चुनाव नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि शिवराज की लाडली बहना ने कोई गुल खिलाया है या फिर एंटी इनकंबेंसी मतदाताओं के मानस पटल पर पूरी तरह छाई रही। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस बात का पक्का भरोसा है कि लाडली बहनों ने अपने भाई का साथ दिया है और भाजपा की ही सरकार बनने वाली है। वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का दावा है कि मतदाता मध्यप्रदेश का निर्माण करेगा और उनका एक-एक वोट प्रदेश में फैले कुशासन को समाप्त कर जनहित की सरकार की स्थापना करेगा। सूत्रों के अनुसार भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण में उसे 124 सीटें जीतने का पक्का भरोसा है जबकि उसका अनुमान है कि कांग्रेस को लगभग 100 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस 130 से अधिक सीटों के साथ अपनी सरकार बनाने का दावा कर रही है तो वहीं पर दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी 124 सीटों पर अपनी जीत पक्की मान वह लगभग 4 सीटों पर कड़े संघर्ष की स्थिति देख रही है। भाजपा के आंतरिक सर्वे में जहां तक विंध्याचल का सवाल है वहां पर पार्टी है यह मान रही है कि उसे यहां की 30 में 19 सीटें मिल ही जाएंगी तो वहीं दूसरी ओर 11 सीटें कांग्रेस को भी मिल सकती है। यहां की 25 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच ही सीधा मुकाबला बताया जा रहा है जबकि 5 सीटों में मुकाबला त्रिकोणात्मक माना जा रहा है। महाकौशल आंचल की कुल 38 सीटों में से भाजपा को 19 सीटों पर जीत का भरोसा है और इतनी सीटें वह कांग्रेस के लिए पक्की मानकर चल रही है। इस प्रकार भाजपा के आंतरिक सर्वे में भी इस अंचल में दोनों के बीच बराबरी का मुकाबला माना जा रहा है जबकि कांग्रेस इस अंचल में अपनी स्थिति काफी मजबूत मानकर चल रही है। यह तो मतगणना से ही पता चलेगा कि आखिर यहां के मतदाताओं ने किस पर अधिक और किस पर कम भरोसा जताया। भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण के अनुसार भोपाल- नर्मदापुरम संभाग की 36 सीटों में से भाजपा 20 पर अपनी जीत पक्की मानकर चल रही है और कांग्रेस को वह 15 सीटें दे रही है। राजधानी भोपाल की एक सीट भोपाल मध्य में वह कांग्रेस के साथ क कड़े संघर्ष की स्थिति देख रही है। इस संभाग में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुख्य चुनावी मुकाबला हो रहा है। ग्वालियर चंबल संभाग में 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को धीरे से जोर का झटका लगा था लेकिन यहां वह दल बदल के बाद भाजपा को अपनी स्थिति तुलनात्मक रूप से मजबूत नजर आ रही है क्योंकि इस बार उसे भरोसा है कि उसकी झोली में 15 सीटें तोआ ही रहीं हैं जबकि एक मुरैना सीट पर कड़े मुकाबले में बसपा को जीतते हुए देख रही है। इस सर्वे में माना जा रहा है कि इस अंचल में सबसे अधिक 17 सीटें कांग्रेस जीत सकती है। दतिया सीट पर भाजपा कांग्रेस के साथ कड़े मुकाबले की स्थिति देख रही है ।यहां पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर हो रही है। बुंदेलखंड अंचल की 26 सीटों में से भाजपा यह मानकर चल रही है कि कांग्रेस को 13 सीटों पर बढ़त है तो वहीं 12 सीटों को अपने लिए पक्की मान रही है जबकि एक सीट निवाड़ी में समाजवादी पार्टी को जीते हुए देख रही है। निमाड़ और मालवांचल की 66 सीटों में से वह अपने लिए 39 सीटें पक्की मान रही है जबकि क्षेत्र 25 सीटें कांग्रेस पार्टी को दे रही है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है उसे 130 से 140 सीटें जीतने का भरोसा है। कांग्रेस पार्टी का आंतरिक सर्वे भाजपा को मात्र 80 से 85 ही सीटें दे रहा है। वही आम आदमी पार्टी बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी आदि को लगभग दस तक सीटें मिल जाएगी ऐसा मानकर कांग्रेस चल रही है।कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी जीत का दावा पूरी शिद्दत के साथ कर रहे हैं।दोनों के अपने अपने तर्क हैं और अपने अपने विश्वास । सभी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपने-अपने … Read more

देवास,सतवास में NIA की रेड, पाकिस्‍तान समर्थित गजवा-ए-हिंद मॉड्यूल मामले में संदिग्‍ध से की पूछताछ.

Raids by the National Investigation Agency (NIA) in Devas and Satvas, in connection with the Pakistan-supported Gajwa-e-Hind module, have raised suspicions, leading to interrogations. पाकिस्‍तान समर्थित गजवा-ए-हिंद मॉड्यूल मामले में एनआईए ने मध्‍य प्रदेश समेत कई राज्‍यों में छापा मारा है। देवास जिले में रविवार सुबह एनआईए ने कार्रवाई कर एक संदिग्‍ध से पूछताछ की। सभी के मोबाइल और सिम जब्‍त किए हैं।नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने मध्‍य प्रदेश समेत कई राज्‍यों में छापेमारी की। टीम रविवार सुबह देवास जिले के सतवास पहुंची, जहां एक संदिग्‍ध से चार घंटे पूछताछ की। संधिग्‍ध का मोबाइल और सिम एनआईए ने जब्‍त कर लिया है। कुछ आपत्तिजनक पाया जाता है तो एनआईए कार्रवाई करेगी।जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान समर्थित गजवा-ए-हिंद मॉड्यूल मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने रविवार को कई राज्यों में छापेमारी की। इस दौरान एनआईए मध्य प्रदेश के देवास जिले के सतवास भी पहुंची। जहां टीम ने *सतवास* के मेवाती मोहल्ला निवासी लियाकत पिता इदु से पूछताछ की। एनआईए ने लियाकत का मोबाइल जब्‍त कर कागजी कार्रवाई की।बताया जा रहा है कि यदि मोबाइल जांच के दौरान कुछ आपत्तिजनक पाया जाता है तो एनआईए लियाकत को तलब करेगी।

महाकौशल के तीन दिग्गज नेताओं दाव पर लगी साख.

Mahakaushal three stalwart leaders of expertise face a challenge. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, केंद्रीय मंत्री प्रहलाद और फग्गन सिंह कुलस्ते मैदान में, तीनों के परिणामों पर पूरे प्रदेश की नजर, भाजपा और कांग्रेस बेचैन, परिणामों को लेकर सियासत में चर्चाओं का बाजार गर्म उदित नारायणभोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा 2023 के परिणामों को लेकर प्रदेश की सियासत में चर्चाओं का बाजार गर्म है। ग्वालियर-चंबल, निमाड़-मालवा, बुंदेलखंड, बिंध्य क्षेत्र और महाकौशल में यूं तो लोग अपने-अपने नेताओं की जीत को लेकर आश्वस्त हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के महाकौशल क्षेत्र की है। क्योंकि यह क्षेत्र उनका गढ़ कहा जाता है। इस क्षेत्र में इस बार कांग्रेस भारी रहेगी या भाजपा, इसको लेकर प्रदेश भर की नजर लगी हैं। कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में जहां पर जबरदस्त बढ़त ली थी। कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा की सभी 7 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। इस बार भाजपा ने अपने दो केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और फगन सिंह को भी इस क्षेत्र से विधानसभा के चुनाव मैदान में उतारा है। इस क्षेत्र में आने वाले आठ जिलों की 38 सीटों पर किसे कितनी सीटें मिलेंगी इस पर पूरे प्रदेश की नजर है। दरअसल, मध्य प्रदेश में सरकार बनाने के लिए इस क्षेत्र को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। कमलनाथ के परिणामों पर सबकी नजरमध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ छिंदवाड़ा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। साल 2018 में वह चुनाव नहीं लड़े थे, लेकिन उनका प्रभाव साफ तौर पर इस जिले में दिखाई दिया था। जिले की सभी सिम कांग्रेस ने जीत ली थी बाद में कमलनाथ के उपचुनाव छिंदवाड़ा सीट से लड़ा और चुनाव जीत गए। इस बार कमलनाथ कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री का चेहरा इसलिए ना सिर्फ उनकी सीट छिंदवाड़ा पर लोगों की नजर है, बल्कि उनके जिले की हर सीट पर प्रदेश भर की नजर गड़ी हुई है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते के चौकाने वाले होंगे परिणामकेंद्रीय मंत्री पहलाद सिंह पटेल नरसिंहपुर से चुनाव लड़ रहे हैं उनके भाई जालम सिंह पटेल इसी क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रदेश के दिग्गज नेताओं में शुमार प्रहलाद सिंह पटेल के चुनाव परिणामों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के साथ प्रदेश भर के सभी राजनेताओं की नजर उन पर है। केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते का भाजपा के दलित आदिवासियों नेताओं में बड़ा नाम है। इस बार उन्होंने निवास विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा है। साल 2018 में यह सीट कांग्रेस ने जीती थी। भाजपा ने आदिवासियों के सबसे बड़े नेता माने जाने वाले कुलस्ते को इस सीट से उतर कर मुकाबला रोचक बना दिया है। पूरे प्रदेश पर की नजर इस सीट पर है। महाकौशल में आने वाली आदिवासी बाहुल्य सीटों पर कुलस्ते के चुनावी मैदान में उतरने से कितना असर पड़ेगा। इस पर भी दोनों ही राजनीतिक दलों के लोगों की नज़रें टिकी हुई है।

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