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जिला शिक्षा अधिकारी विदिशा, जी पी राठी ने की अशासकीय विधालयों की समीक्षा बैठक.

District Education Officer Vidisha, Mr. G.P. Rathi, conducted a review meeting of Non Government schools. सीताराम कुशवाहा विदिशा ! विदिशा जिला अन्तर्गत अशासकीय विधालयों (म.प्र.बोर्ड) की समीक्षा बैठक यू-डाइस/ छात्रवृति / परीक्षा सम्बंधी समीक्षा हेतु जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के सभा कक्ष में (डाइट) बैठक आयोजित की गई है। जिसमें विदिशा जिले के समस्त अशासकीय विघालयों के संचालक / सचिव/प्राचार्य उपस्थित हुये । उक्त बैठक को जिला शिक्षा अधिकारी श्री जी.पी.राठी जी के द्वारा निर्देश दिये गये. कि यू-डाइस, छात्रवृति की प्रोफइल 07 दिवस में शीघ्र तैयार की जावे एवं छा.वृति सबंधी कोई भी प्रकरण लंवित न रहे तथा परीक्षा सवधी निर्देश दिये गये । कोई भी विघालय की यू-डाइस सबंधी प्रोफाइल लंवित नही रहना चाहिये यदि लंवित रहती है तो वरिष्ठ कार्यालय को कार्यवाही हेतु लिखा जावेगा ।

नये वन भवन के बेचे गये तीन फ्लोर की रजिस्ट्री फिर रोकी.

Registration of the three floors sold in the new government building has been halted again. उदित नारायणभोपाल। राजधानी के तुलसी नगर में बने नये वन भवन के तीन फ्लोर को बेचे जाने के बाद इसकी रजिस्ट्री एक बार फिर रुक गई है। दरअसल इस भवन के तीन फ्लोर कर्मकार कल्याण मंडल, इलेक्ट्रानिक विकास निगम एवं स्टेट माईनिंग कारपोरेशन को करीब 60 करोड़ रुपये में बेचे गये थे ताकि वन भवन को बनाने में लगी भारी भरकम लागत 182 करोड़ रुपये की कुछ भरपाई हो सके। लेकिन 8 अगस्त 2023 को जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उक्त नये भवन का लोकार्पण किया था तब उन्होंने घोषणा कर दी थी कि अगर नवीन वन भवन में जगह की कमी पड़ती है तो पूरा परिसर वन भवन को दे दिया जायेगा। दरअसल सीएम को बताया गया था कि जगह की कमी होने से वन विभाग का जैव विविधता बोर्ड, राज्य बांस मिशन एवं इको पर्यटन बोर्ड नये वन भवन में स्थानांतरित नहीं किया जा सका है। इसी कारण से सीएम ने उक्त घोषणा कर दी थी। लेकिन सीएम की यह घोषणा तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह ने सीएम घोषणा पोर्टल पर दर्ज नहीं होने दी। इस पर लोक परिसम्पत्ति विभाग जिसने उक्त तीनों फ्लोर की नीलामी कराई थी, ने वन विभाग को पत्र लिख कर कहा है कि वह वन भवन के बेचे गये तीन फ्लोर की रजिस्ट्री करा दे। वन विभाग ने भी वन बल प्रमुख को रजिस्ट्री कराने के लिये पत्र भेज दिया। लेकिन वन बल प्रमुख रमेश गुप्ता ने इनकी रजिस्ट्री यह कहकर रुकवा दी है कि वे उच्च स्तर पर बातचीत कर इन बेचे गये तीन फ्लोर को वापस वन मुख्यालय को दिलवायेंगे। नई सरकार के गठन होने पर यह उच्च स्तरीय बातचीत हो सकेगी।

झारखंड : कांग्रेस सांसद धीरज साहू व बौध डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों से नोट, देखकर इनकम टैक्स अधिकारियों की आंखें भी चौंधिया गईं.

In Jharkhand, Congress MP Dhiraj Sahu and addresses of Baudh Distilleries Private Limited left Income Tax officials astonished upon inspection of notes. कांग्रेस सांसद के आवास के अलावा उनसे जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई हो रही है. इसमें सबसे बड़ी सफलता बौध स्थित बौध डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों से मिली है. झारखंड से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के ठिकानों पर तीसरे दिन भी इनकम टैक्स की छापेमारी जारी है. रांची के रेडियम रोड स्थित सुशीला निकेतन में तीसरे दिन भी आयकर विभाग की टीम रेड डालने में लगी है. बता दें कि इस छापेमारी में जितनी बड़ी मात्रा में नोटों के बंडल बरामद हुए हैं उसके बारे में जानकर सभी आश्चर्यचकित हो गए हैं. यहां नोटों की गिनती करने में मशीन भी खराब हो गए. जानकारी के अनुसार रांची के अलावा लोहरदगा और उड़ीसा के संबलपुर राउरकेला बोलांगीर और बौद्ध समेत आधा दर्जन ठिकानों को आयकर विभाग खंगाल रही है. कांग्रेस सांसद के आवास के अलावा उनसे जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई हो रही है. इसमें सबसे बड़ी सफलता बौध स्थित बौध डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों से मिली है. ओडिशा और झारखंड में कंपनी के कई ठिकानों पर आईटी की रेड हुई. जहां 150 करोड़ से भी अधिक कैश बरामद हुआ है. यह कंपनी बलदेव साहू के नाम पर रजिस्टर्ड है. तमाम खबरों के बीच छानबीन जारी है. आयकर विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है. तीसरी बार के सांसद हैं धीरज साहू झारखंड के लोहरदगा के रहने वाले धीरज साहू कांग्रेस के पुराने नेता हैं. 1977 में छात्र नेता के रूप में राजनीति की शुरुआत करने वाले धीरज साहू तीसरी बार के राज्यसभा सांसद हैं. इससे पहले वह 2010-2016 तक भी कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रहे. 2018 में उन्होंने झारखंड में विपक्ष के साझा उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी. साहू 2003-05 तक प्रदेश कांग्रेस कमिटी के सदस्य भी रहे हैं.

नवाब मलिक पर राजनीति गरमाई, शिंदे-फड़णवीस के रुख से दुविधा में अजित पवार.

Political heat rises over Nawab Malik, Ajit Pawar caught in dilemma between Shinde and Fadnavis. महाराष्ट्र ! महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से तल्खी आ गई है. नवाब मलिक को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़णवीस ने नाराजगी जाहिर की है. देवेंद्र फड़णवीस ने उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को एक पत्र भी लिखा है. वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी फड़णवीस के सुर में सुर मिलाया है, ऐसे में अजित पवार के सामने नया संकट खड़ा हो गया है. महाराष्ट्र में एनसीपी के सीनियर नेता नवाब मलिक के मुद्दे पर बीजेपी एक बार फिर से आक्रामक हो गई है. प्रदेश के डिप्टी सीएम देवेन्द्र फड़णवीस ने कहा है कि हम नवाब मलिक के साथ नहीं बैठ सकते. उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि जिस नवाब मलिक पर देशद्रोह का आरोप है, उनके साथ नहीं बैठा जा सकता है. देवेंद्र फड़णवीस ने इसी बाबत राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को भी एक चिट्ठी लिखी है. देवेंद्र फड़णवीस की इस चिट्ठी से प्रदेश की सियासत में नई हलचल मच गई है. सबसे खास बात ये कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी फड़णवीस के सुर में सुर मिला चुके हैं. एकनाथ शिंदे ने कहा है कि नवाब मलिक को लेकर हम अपने पिछले रुख पर कायम हैं. नवाब मलिक पर गंभीर आरोप हैं. उन्हें अभी कोर्ट ने बरी नहीं किया है. वो फिलहाल स्वास्थ्य कारणों से जेल से बाहर हैं. उन्होंने कहा कि नवाब मलिक का सत्तारूढ़ दलों की बेंच पर बैठना ठीक नहीं है. शिंदे ने फड़णवीस का किया समर्थनमुख्यमंत्री और सहयोगी उप मुख्यमंत्री के मिलते जुलते बयान के सामने आने के बाद अजित पवार के सामने नई दुविधा आ गई है. मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा है कि घटक दल अपनी-अपनी पार्टी कैसे चलाते हैं, ये उनका अपना मामला हो सकता है लेकिन राष्ट्रहित और जनहित का लक्ष्य हमारा एक समान होना चाहिए. इस मुद्दे पर हम एकजुट हैं. इसके साथ ही उन्होंने अजित पवार से अपील की है कि वे उचित रुख अपनाएंगे. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पूरे मसले पर विपक्ष की भी कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा है विपक्ष को नवाब मलिक के मसले पर कुछ भी बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है. नवाब मलिक जब जेल में थे तब महाविकास अघाड़ी की सरकार थी. नवाब मलिक ने किया पलटवारपूरे मामले में नबाव मलिक ने भी प्रतिक्रिया जाहिर की है. उन्होंने कहा कि जिस देवेंद्र फड़णवीस ने ऐसी चिट्ठी लिखी है, उनकी भूमिका दोहरी है. नवाब मलिक ने सवाल उठाया कि जम्मू-कश्मीर में बीजेपी सरकार बनाने के लिए पीडीपी और महबूबा मुफ्ती से कैसे गठबंधन कर लेती है. उन्होंने कहा कि बीजेपी अपनी सुविधा के हिसाब से नैरेटिव बनाती है. आज ही सदन में कई ऐसे नेता हैं जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, तो उनके साथ वो कैसे सरकार चला रहे हैं.

इस्तीफा देने वाले BJP सांसदों को खाली करना होगा घर, 30 दिन की मोहलत!

BJP MPs resigning will have to vacate their homes within 30 days. दिल्ली ! विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद लोकसभा सांसदों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया है. अब खबर है कि दिल्ली में आवास समिति की ओर से इस्तीफा देने वाले सांसदों को बंगला खाली करने को कहा है. पिछले दिनों 5 राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से 4 केंद्रीय मंत्रियों समेत 21 सांसद चुनाव मैदान में उतरे थे, जिसमें से 12 सांसदों को जीत मिली थी और इनमें से 11 सांसदों ने जीत के बाद सांसदी से इस्तीफा दे दिया था. अब सूत्रों के हवाले से खबर है कि लोकसभा आवास समिति ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद संसद सदस्यता से इस्तीफा देने वाले उन सभी बीजेपी सांसदों को 30 दिन में सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया है. इनमें से 8 सांसदों को लोकसभा आवास समिति पूल से आवास आवंटित किया गया था. जबकि 3 सांसद केंद्रीय मंत्री हैं, इसलिए उन्हें शहरी विकास मंत्रालय से आवंटन मिलता है. सूत्रों का कहना है कि नियम सिर्फ विपक्षी सांसदों के लिए ही नहीं, सभी के लिए सामान हैं. जिन लोकसभा सांसदों को 30 दिन में घर खाली करने का नोटिस दिया गया हैं उनमें राकेश सिंह, गोमती साय, अरुण साव, रिति पाठक, बाबा बालकनाथ, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, दिया कुमारी और उदयप्रताप सिंह शामिल हैं. राष्ट्रपति ने स्वीकार किए इस्तीफेइससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कल गुरुवार देर रात केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और रेणुका सिंह का इस्तीफा स्वीकार कर लिया. इन तीनों मंत्रियों ने हाल में विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की थी. इस्तीफा स्वीकार किए जाने के साथ ही राष्ट्रपति मुर्मू ने जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा को कृषि मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया. पीएम मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति मुर्मू ने अर्जुन मुंडा को कृषि मंत्रालय और किसान कल्याण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर को राज्य मंत्री के तौर पर जल शक्ति मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है. इसी तरह केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. जीत के बाद सांसदों ने दिया इस्तीफाइससे पहले बीजेपी ने फैसला किया था कि हाल में चुने गए उसके सभी 12 सांसद अपने पद से इस्तीफा दे देंगे. इसके बाद केंद्रीय मंत्रियों नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद पटेल और रेणुका सिंह ने इस्तीफा दे दिया. इन इस्तीफों के बाद माना जा रहा है कि वे राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में नई सरकारों में शामिल हो सकते हैं. छत्तीसगढ़ से लोकसभा सांसद रेणुका सिंह ने भरतपुर-सोनहत सीट से जीत दर्ज की थी. अन्य सांसदों में मध्य प्रदेश से उदय प्रताप सिंह, रीति पाठक और राकेश सिंह के अलावा राजस्थान से राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और दिया कुमारी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ से गोमती साई और अरुण साव शामिल हैं. मीणा के अलावा सभी सांसद लोकसभा सांसद थे.

युवाओं में अब इस बीमारी का खतरा, लगातार हो रहे शिकार.

The danger of this illness is now looming over the youth, becoming a continuous threat. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एकाकीपन को गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य खतरा घोषित किया है। जिसकी मृत्यु दर प्रतिदिन 15 सिगरेट पीने के बराबर है। आंकड़ों के अनुसार विश्व में 5 से 15 प्रतिशत किशोर अकेले हैं। बुजुर्गों में होने वाली एकाकीपन की समस्या ने अब युवाओं को भी अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। कोविड के बाद इन आंकड़ों में वृद्धि हुई है। बुजुर्गों में होने वाली एकाकीपन की समस्या ने अब युवाओं को भी अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। कोविड के बाद इन आंकड़ों में वृद्धि हुई है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार मनोचिकित्सक केंद्र में रोजाना टेलीमानस पर 20 से 40 युवाओं के कॉल आ रहे हैं, जो एकाकीपन का शिकार है। इसमें ज्यादातर आईआईटी, नीट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले व घर से दूर रहने वाले युवा शामिल है। वहीं बुजुर्गों की ओपीडी में हर सप्ताह 30 मरीज आ रहे हैं। जिनमें 8 से 10 केस एकाकीपन से जुड़े हैं। एंग्जाइटी, डिप्रेशन और तनावमनोचिकित्सक डॉ. ललित बत्रा बताते हैं कि इंसान भावनाओं को शब्दों के जरिए अभिव्यक्त करता है। परिवार में उसकी यह जरूरतें पूरी हो जाती है। अकेलेपन से एंग्जाइटी, डिप्रेशन, तनाव जैसी समस्याएं पनपने लगती है। स्कूल-कॉलेज में बच्चों के बीच एक समूह बने, जिसमें वे अपने मन की बात साझा कर सकें। ये हैं दूर करने के उपायदिनचर्या को ठीक रखने का प्रयास करें।सोने और उठने का समय निर्धारित करें।मेडिटेशन और योगा करें।स्वयं को सामाजिक संवाद में शामिल करें।दोस्तों और परिजनों के साथ समय बिताए और मन की बात साझा करें।

विधानसभा की हार पर कांग्रेस का चिंतन, समीक्षा बैठक मे होगा कारणों पर मंथन.

Congress party is contemplating its defeat in the legislative assembly, and a review meeting will be held to analyze the reasons.  उदित नारायण  नई दिल्ली। हाल मे सम्पन हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों मे तेलंगाना को छोड़ 4 राज्यों मे करारी हार के बाद कांग्रेस के मिशन 2024 को करारा झटका लगा है, कांग्रेस नेता राहुल गाँधी, महासचिव प्रियंका गाँधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ पार्टी नेता आज से 2 दिन हार की समीक्षा करेंगे लेकिन वर्ष 2014 से लगातार चुनाव दर चुनाव हारने पर समीक्षा बैठक करने के बावजूद भी कांग्रेस अपने संगठन मे कोई मूलभूत परिवर्तन नहीं कर पाई है पार्टी मे दूसरी श्रेणी के नेताओं की भारी कमी है ऐसा नही है कि पार्टी मे अच्छे नेताओं की कमी है लेकिन पार्टी मे उनकी कोई सुनवाई नहीं होती कारण कांग्रेस नेतृत्व के आस पास मौजूद मण्डली प्रभावशाली और योग्य लोगो को नेतृत्व के पास फटकने नहीं देते ना ही उनके सुझाव पार्टी नेतृत्व तक पहुंच पाते है एक तरफ जहाँ भाजपा मे जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ अनेक सामाजिक और आर्थिक मामलो के जानकारों को सलाहकार नियुक्त किया जाता है वही कांग्रेस मे यह योग्यता विदेश मे पढ़ा होना और कुछ खास लोगों का कृपापात्र होना मात्र है, वर्ष 2004 मे इंडिया शाइनिंग नारे के बावजूद बाजपेई सरकार से सत्ता छीनने वाली कांग्रेस कांग्रेस को लगता है कि वह आज भी मोदी सरकार से ऊबकर सत्ता उनको सौप देगी लेकिन अब वक्त बदल चुका है डिजिटल युग मे आम जनमानस तक सरकारी योजनाओं और एक प्रान्त से दूसरे प्रान्त और विश्व पटल तक की जानकारी प्राप्त कर रहा है, बिगत 10 सालों मे कांग्रेस ने चुनाव कि अपनी पिच तैयार करने मे नाकायाब रही है वह वैसे खेल रही है जैसे भाजपा उन्हें खिलाना चाह रही है, कांग्रेस को हार के मंथन मे कुछ बातों पर आत्म चिंतन कि आवश्यकता है जैसे – *बाहर से आने वालों पर मूल कैडर से ज्यादा भरोसा* दशकों से कांग्रेस पार्टी मे बाहर व दूसरी पार्टियों से आने वालों को संगठन मे बड़े पदों पर जिम्मेदारी दे दी जाती रही है जबकि मूल कैडर के कार्यकर्त्ता जस के तस रह जाते हैँ. *सालाहकारों के चयन, कार्यप्रणाली और अति निर्भरता* एक तरफ जहाँ और पार्टियों मे पार्टी के छोटे तथा जमीनी कार्यकर्त्ताओं की बातों को सुना व समझा जाता है वहीँ आज भी कांग्रेस मे विदेश से मैनेजमेंट पास आउट जमीनी हकीकत से दूर और स्वार्थी सालाहकारों की भरमार है वह नहीं चाहते कि नेतृत्व कोई ऐसा व्यक्ति पहुंचे जिससे उनकी कोई बात आलाकमान तक पहुंचे वो पार्टी से ज्यादा अपनी कुर्सी बचाने की जुगत मे लगे रहते हैँ राहुल गाँधी की अमेठी मे हार उनके प्रतिनिधियों और क्वार्डिनेटरों की कार्यशैली का ही परिणाम था. *हिंदी भाषी नेताओं की कमी* कांग्रेस मे ज्यादातर निर्णय दक्षिण भारत के नेताओं और सालाहकारों की सलाह से लिए जाते है जबकि हिंदी भाषी क्षेत्रो की राजनैतिक भूमि, परिस्थिति दक्षिण से बिलकुल अलग है दक्षिण मे जहाँ स्थानीय मुद्दे हावी रहते है मध्य, उत्तर और पूर्वी भारत मे स्थानीय के साथ साथ राष्ट्रीय मुद्दे ज्यादा प्रभावी रहते हैँ. *कमजोर संगठन* हिंदी भाषी क्षेत्रों मे कांग्रेस का संगठन बेहद कमजोर है राज्य से लेकर जिला और बूथ लेबल तक समर्पित कार्यकर्त्ता नहीं हैँ जहाँ भाजपा और स्वयंसेवक के कार्यकर्त्ता और सिमितियाँ बूथ तक मौजूद और सक्रिय है वही कांग्रेस मे पार्टी पदाधिकारी के अलावा कार्यकर्त्ता ही नहीं है कार्यकर्ताओ का सम्मान ना मिलना उनको हतोत्साहित करता रहा है. *दोहरी राजनैतिक शैली* इस दौर मे जहाँ भाजपा अपनी स्पष्ट नीति पर काम कर रही है वही कांग्रेस जनमानस तक अपनी कोई नीति पहुंचाने मे नाकायाब रहती है वजह है एजेंडा क्लियर ना होना पार्टी किसके साथ है और किसके खिलाफ जनता को यह स्थिति साफ नहीं हो पाती कांग्रेस को जरुरत है बेहतर रणनीतिकार की जो नेतृत्व और पार्टी को बिना अपना स्वार्थ देखे बेहतर रणनीति पर अग्रसर कर सके *संघर्षो मे कमी* विपक्ष मे बैठी कांग्रेस मे संघर्ष की कमी साफ झलकती है जनहित के मुद्दों पर पार्टी के कुछ नेता टेलीविज़न और संसद मे अवश्य बोलते देखे जाते है लेकिन सडक पर और जनता के बीच संघर्षो मे पीछे रहते है कारण पार्टी मे संघर्ष शील कार्यकर्त्ता कम चरणवन्दन और कुर्ताधारी नेताओं की बहुतायत होना है, *एक ही मुद्दे पर अटके रहना और स्थिति का अध्यन ना होना* कांग्रेस के ज्यादातर नेता निजी और संवेदनशील बयान और एक ही मुद्दे पर अटके रहते हैँ जमीनी स्तर पर कार्य ना करने के कारण जन भावना और जमीनी मुद्दों तथा जनता के मन की बात की बात विरोध और सहयोग की जानकारी ही नहीं रहती *संचार माध्यमो के उपयोग की कमी और ओवर कॉन्फिडेंस तथा आत्मनिर्भरता की कमी* संचार युग का आरम्भ करने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी जी के विचारों की पार्टी आज संचार माध्यम और डिजिटल मीडिया मे फिसड्डी साबित हो रही है जहाँ भाजपा मे बूथ लेबल तक के कार्यकर्त्ता डिजिटल माध्यमो से जुड़े और सक्रिय हैँ वही कांग्रेस के ज्यादातर ज़िलों मण्डलों और उनके सहयोगी संगठन के सोशल मीडिया अकाउंट तक नहीं हैँ कांग्रेस के नेता सिर्फ फेसबुक और ट्विटर पर पोस्ट डालने को डिजिटल मार्केट समझते है एक ओर जहाँ अन्य पार्टियों मे डिजिटल के प्रति आकर्षित होकर जनता से जुड़ रही है वही कांग्रेस आज भी पुराने कार्यशैली पर लगी है जहाँ भाजपा व अन्य ज्यादातर प्रचार डिजिटल एजेंसी और संचार माध्यम से कर रही हैँ वही कांग्रेस नेता हाथ पर हाथ धरे या अपने खास को काम दिला मौज मे रहते हैँ *चुनावी तैयारियों मे देरी* विना बेहतर प्रवंधन कोई लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता कठोर निर्णय लेने मे नेतृत्व सक्षम प्रतीत नहीं होता जहाँ भाजपा एक चुनाव के बाद तुरंत दूसरे चुनाव की तैयारी मे लग जाती है वही कांग्रेस नेता टिकट बितरण का इंतज़ार करते हैँ जहाँ जहाँ अन्य पार्टियों इलेक्शन मोड पर सक्रिय रहती हैँ वही कांग्रेस नेता और पार्टी रेस्ट मोड पर, ऐसे ही युवा और जुझारू नेताओं की कमी और नेतृत्व द्वारा उन्हें आगे ना बढ़ा कर पुराने और दरबारी नेताओ पर भरोसा तथा कमजोर आत्म विश्वास पार्टी को नीचे की तरफ ले जा रहा हैँ राहुल गाँधी जैसे सारीखे नेता को वयनाड जैसी … Read more

कटनी में शासकीय मेडिकल कॉलेज बनने का मार्ग प्रशस्त शासकीय मेडिकल कॉलेज हेतु कछगवॉं में भूमि आवंटित.

Path to establishing a government medical college in Katni has been paved, with land allocated in Kachgawan for the purpose of setting up the government medical college. आयुक्त चिकित्सा शिक्षा को पत्र लिखकर दी जानकारी कटनी। शासकीय मेडिकल कॉलेज के भवन बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। कलेक्टर अवि प्रसाद ने कटनी जिले में शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिये कछगवॉं में 12.45 हेक्टेयर भूमि चिन्हित कर राज्य शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग को भूमि भी हस्तांतरित कर दिया है। मुड़वारा विधायक संदीप जायसवाल के सार्थक प्रयासों से जिले के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते 6 अक्टूबर को कटनी में शासकीय मेडिकल कॉलेज खोलने की स्वीकृति प्रदान कर जिले को बड़ी सौगात दी थी। इस संबंध में कलेक्टर श्री प्रसाद ने आयुक्त चिकित्सा शिक्षा को बुधवार को एक पत्र लिखकर जिले में सौ एम.बी.बी.एस. सीट की प्रवेश क्षमता के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना हेतु नेशनल मेडिकल कौंसिल के नियमानुसार वांछित भूमि हस्तांतरित किये जाने की जानकारी भेज दी है। नेशनल मेडिकल कौंसिल के नियमानुसार चिकित्सा महाविद्यालय हेतु 25 एकड़ से अधिक भूमि होनी चाहिए। साथ ही यह भूमि जिला चिकित्सालय के 10 किलोमीटर की परिधि के भीतर होनी आवश्यक है। कलेक्टर ने प्रेषित पत्र में ग्राम कछगवां स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 36/1 रकवा 6.01 हेक्टयेर, खसरा नंबर 36/2 रकवा 5.56 हेक्टेयर में 4.25 हेक्टेयर, खसरा नंबर 37 रकवा 0.07 हेक्टेयर, खसरा नंबर 91 रकवा 1.99 हेक्टेयर तथा खसरा नंबर 93 रकवा 0.13 हेक्टेयर को मिलाकर कुल 12.45 हेक्टेयर भूमि को भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत व्यपवर्तित कर मेडिकल कॉलेज निर्माण हेतु निःशुल्क हस्तांतरित होने की जानकारी दी है। प्रेषित पत्र के साथ जिला चिकित्सालय कटनी मेे 350 बिस्तर का जिला चिकित्सालय स्वीकृति एवं क्रियाशील होकर सुचारू रूप से संचालित होने सहित भूमि हस्तांतरण का नजरी नक्शा, खसरा -खतौनी आदि भी भेजी गई है। इसके बाद अब मेडिकल कॉलेज स्थापना से संबंधित डी.पी.आर तैयार करने की कार्यवाही निर्माण एजेंसी द्वारा की जा सकेगी।

रीवा लोकायुक्त टीम ने केंद्रीय विद्यालय के रिश्वतखोर प्राचार्य को 19000/ कि रिश्वत लेते हुए आज धर दबोचा.

Lokayukta team in Rewa today caught the corrupt principal of a central school accepting a bribe of Rs. 19,000. रीवा। रीवा लोकायुक्त पुलिस टीम ने केंद्रीय विद्यालय रीवा के रिश्वतखोर प्राचार्य को रिश्वत कि रकम लेते हुए आज धर दबोचा है, जहाँ लोकायुक्त टीम ने आवेदक सत्य प्रकाश पिता सत्येंद्र कुमार प्रभाकर निवासी पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2 कर्मचारी आवास टाइप रीवा उच्च श्रेणी लिपिक (एस एस )केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2 रीवा कि शिकायत पर कार्यवाई करते हुए विद्यालय के आरोपी प्राचार्य सतपाल सिंह पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2 रीवा को रिश्वत कि राशि ₹. 19000 लेते हुए प्राचार्य को उसी के कक्ष में पकड़ लिया गया है, लोकायुक्त ने बताया कि..आरोपी प्राचार्य जो अपने ही कार्यालय में पदस्थ एस एस लिपिक से 200000 रुपए के इंटरएक्टिव पैनल क्रय करने के बाद बिल के भुगतान के लिए बिल का 12% कमिशन के रूप में रिश्वत कि मांग कि थी, जिसे आज दिनांक 07.12.2023 को ₹19000 की रिश्वत लेते हुए प्राचार्य को उसी के कक्ष में रंगे हाथ पकड़ा गया है, *ट्रेपकर्ता अधिकारी* प्रवीण सिंह परिहार उप पुलिस अधीक्षक, ट्रेप दल के सदस्य प्रवीण सिंह परिहार के साथ निरीक्षक प्रमेंद्र कुमार सिंह सहित 15 सदस्यीय टीम शामिल रही।

बागियों का कमाल: भाजपा- कांग्रेस को गंवाना पड़ गईं कई विधानसभा सीटें.

Several assembly seats were lost by both the BJP and Congress. – पार्टी में बगावत के बावजूद कई सीटें जीती भाजपा – कांग्रेस को दोनों दलों के बागियों से हुआ नुकसान -अरविंद, गोविंद, लक्ष्मण, एनपी, चौधरी जैसे दिग्गज हारे   *उदित नारायण*  भोपाल। हर बार की तरह विधानसभा के इस चुनाव में भी भाजपा-कांग्रेस को बागियों के कारण कई सीटें गंवाना पड़ गईं। खास बात यह कि भाजपा के पक्ष में ऐसी आंधी चली कि वह वे सीटें भी जीत गई, जहां उसके मजबूत बागी मैदान में थे। इसके विपरीत कांग्रेस को अपनी पार्टी के साथ भाजपा के बागियों से भी नुकसान हुआ। चार सीटें ही ऐसी थीं जहां भाजपा को पार्टी के से बगावत कर मैदान में उतरे प्रत्याशियों के कारण पराजय का सामना करना पड़ा। बगावत की वजह से अरविंद भदौरिया, डॉ गोविंद सिंह, लक्ष्मण िसंह, एनपी प्रजापति और चौधरी राकेश सिंह जैसे दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा।अटेर सहित चार जगह हुआ भाजपा को नुकसानभाजपा को जहां पार्टी के बागियों के कारण पराजय का सामना करना पड़ा, उनमें अटेर, टीकमगढ़, मुरैना और महिदपुर शामिल हैं। अटेर में पार्टी के बागी मुन्ना सिंह भदौरिया के मैदान में होने के कारण प्रदेश के सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया हार गए। टीकमगढ़ में केके श्रीवास्तव ने निर्दलीय लड़कर भाजपा के राकेश गिरि को हरवा दिया। अटेर में कांग्रेस के हेमंत कटारे और टीकमगढ़ में यादवेंद्र सिंह चुनाव जीत गए। इसी प्रकार मुरैना में पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह ने अपने बेटे राकेश को चुनाव लड़ा दिया। उन्होंने 37 हजार से ज्यादा वोट लेकर भाजपा को हरा दिया और कांग्रेस के दिनेश गुर्जर चुनाव जीत गए।  महिदपुर में भाजपा के प्रताप सिंह बगावत कर चुनाव लड़ रहे थे। वे 20 हजार से ज्यादा वोट ले गए और भाजपा के बहादुर सिंह 290 वोट के अंतर से चुनाव हार गए।बगावत के बावजूद यहां जीत गई भाजपाप्रदेश की आधा दर्जन से ज्यादा सीटें ऐसी हैं, जहां भाजपा में बगावत हुई। मजबूत नेता मैदान में उतर गए, फिर भी भाजपा ने सीट में कब्जा किया। इनमें सुमावली, भिंड, लहार, चाचौड़ा और होशंगाबाद जैसी सीटें शामिल हैं। सुमावली में भाजपा के बागी कुलदीप सिंह सिकरवार के मैदान में होने के बावजूद भाजपा जीत गई और कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई। भिंड में संजीव सिंह की बगावत के बावजूद भाजपा जीती और कांग्रेस के चौधरी राकेश सिंह चुनाव हार गए। लहार में भाजपा के बागी रसाल सिंह ने बगावत की फिर भी भाजपा जीती और नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह को हार का सामना करना पड़ा।  चाचौड़ा में भाजपा की पूर्व विधायक ममता मीणा आप से चुनाव लड़ गईं फिर भी भाजपा जीती और कांग्रेस के लक्ष्मण सिंह हार गए। होशंगाबाद में भगवती चौरे भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ गए लेकिन यहां भाजपा ही जीती और कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई।कांग्रेस के बागियों के कारण पार्टी की हुई हार कांग्रेस में भी बागियों ने कई जगह कमाल दिखाए। भाजपा से फर्क यह है कि बागियों के होने के कारण कांग्रेस सिर्फ हारी, उसे एक भी सीट में जीत नसीब नहीं हुई। गोटेगांव में कांग्रेस ने शेखर चौधरी काे टिकट देकर काट दिया था। वे नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ गए। उन्हें 47 हजार से ज्यादा वोट मिले और कांग्रेस के एनपी प्रजापति बुरी तरह हारे।  देपालपुर में कांग्रेस के बागी राजेंद्र चौधरी लगभग 38 हजार वोट ले गए और कांग्रेस विधायक विशाल पटेल 13 हजार से ज्यादा वोटों से हार गए। बड़नगर में भी कांग्रेस ने राजेंद्र सोलंकी को टिकट देकर काट दिया था। वे निर्दलीय चुनाव लड़कर 31 हजार से ज्यादा वोट ले गए और कांग्रेस विधायक मुरली मोरवाल को बड़ी पराजय का सामना करना पड़ा। आलोट में प्रेमचंद गुड्डू बगावत कर मैदान में थे। उन्हें 37 हजार से ज्यादा वोट मिले और विधायक मनोज चावला को पराजय का सामना करना पड़ा। इसी प्रकार महू में अंतर सिंह दरबार बगावत कर निर्दलीय लड़े तो कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे नंबर पर पहुंच गए और भाजपा की ऊषा ठाकुर बड़े अंतर से चुनाव जीत गईं।

पुराने वाहनों पर 15 दिसंबर तक ही लग सकेगी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट.

High-security number plates can only be affixed on old vehicles until December 15th. भोपाल । एक अप्रैल 2019 से पहले के पुराने वाहनों में हाई सिक्युरिटी नंबर प्लेट(एचएसआरपी)लगवाने के लिए परिवहन विभाग ने अंतिम तिथि 15 दिसंबर रखी है। लोग एसआइएएम पोर्टल पर एचएसआरपी लगवाने के लिए आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसमें संबंधित वाहन मालिक, इंजन नंबर, पता व अन्य जानकारी देकर आवेदन कर सकते हैं। वहीं वाहन-चार पोर्टल पर भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। पोर्टल पर आनलाइन आवेदन करने के बाद निर्धारित शुल्क जमा करके संबंधित वाहन कंपनी के नजदीकी शोरूम पर जाकर कागजात दिखा कर एचएसआरपी लगवा सकते हैं। बता दें कि पुराने वाहनों में एचएसआरपी लगवाने को लेकर वाहन मालिकों में असमंसज है। लोगों जानकारी नहीं होने से परेशान हो रहे हैं। वाहन डीलरों का भी कहना है कि उनके पास पुराने वाहन मालिक कम ही संख्या में एचएसआरपी लगवाने के लिए शोरूमों पर पहुंच रहे हैं।

केंद्र की योजना के लिए मुख्य सचिव राणा ने दिए निर्देश

Chief Secretary Rana has issued directives for the implementation of the central government’s plan. – भारत संकल्प यात्रा में जनता से लेंगे फीडबैक, 13 हजार इलाकों में पहुंचने का टारगेट फिक्स विधानसभा के बाद अब लोकसभा की तैयारी तेज, योजनाओं से वंचित हितग्राहियों को दिलाया जाएगा लाभ- आज से शुरू होगी यात्रा, जिला स्तर पर बनी समितियां और नियुक्त हुए नोडल अधिकारी उदित नारायण भोपाल – केन्द्रीय योजनाओं के सभी पात्र हितग्राहियों को लाभ दिलाने और योजनाओं से देश हुए विकास से आम लोगों को जानकारी देने के लिए भारत संकल्प यात्रा की शुरुआत की जा रही है। इस यात्रा की शुरुआत शुक्रवार से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों गुजरेगी। केन्द्री य योजनाओं से वंचित हितग्राहियों को लाभ दिलाया जाएगा। खास बात है कि विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रदेश भर में दौरा किया था। ठीक विधानसभा चुनाव की तर्ज पर लोकसभा चुनाव में भी जनता के बीच केंद्रीय योजनायों की सौगात लेकर प्रदेश भर में यात्रा के जरिए पहुंचने की कवायद शुरू हो गई है। मध्य्प्रदेश में कृषि और ग्रामीण विकास विभाग की यात्रा में अहम भूमिका रहेगी। मुख्य सचिव वीरा राणा ने विकसित भारत संकल्प यात्रा के संबंध में गुरुवार को संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए कलेक्टरों के साथ बैठक की है। ग्राम स्वराज अभियान, विस्तारित ग्राम स्वराज अभियान, प्रमुख योजनाओं का शत प्रतिशत कवरेज सुनिश्चिभत करने संकल्प यात्रा निकाली जा रही है। जिलों से भी गुजरेगी जहाँ जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया। ग्राम पंचायतों स्तर पर भी जन-जागरूकता की गतिविधियां संचालित की जाएगी। जिसमें जागरूकता, सामुदायिक, सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं। इसके अलावा सूचना-शिक्षा-संचार वेन, आईटी प्लेटफार्म, और मोबाइल एप्लीकेशन भी उपयोग में लाई जाएगी। राज्य सरकार, जिला, ग्राम पांचायत और स्थानीय शासन की समिति और केन्द्र सरकार के संगठन और संस्थाओं से प्लानिंग, समन्वय और निगरानी की जाएगी। प्रदेश के 13 हजार के अधिक इलाकों में यात्रा को पहुंचाने का टारगेट फिक्स किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में यात्रा गरीब कल्याण का मिलेगा लाभ- ग्रामीण इलाकों के लिये प्रमुख योजनाओं में आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, दीनदयाल अत्योदय योजना, प्रधानमंत्री उज्वन ला योजना, प्रधानमंत्री विश्व कर्मा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री पोषण अभियान, हर घर जल, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री स्वामत्वि , जन धन योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री प्रणाम, नैनो फर्टिकलाइजर शामिल हैं। साथ ही जनजातीय परिवारों के कल्याण से संबंधित योजनाओं में सिकल सेल एनीमिया निवारण मिशन, एकलव्य मॉडल आवासीय विदयालयों में प्रवेश, स्कॉलरशिप, वन अधिकार, वन-धन विकास केन्द्र शामिल हैं। शहरी क्षेत्रों में यात्रा में इन योजनाओं का होगा प्रचार- शहरी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान शहरी योजनाओं में प्रधानमंत्री स्वनिधि, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा लोन, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री ई-बस सेवा, अटल मिशन फॉर रिजूवनेशन एंड अर्बन ट्रांसपोर्टेशन-अमृत योजना, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना, सौभाग्य योजना, डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, खेलो इंडिया, उड़ान, वंदे भारत ट्रेन, अमृत भारत स्टेशन योजना शामिल हैं। इन योजनाओं में पात्र हितग्राहियों को चिंहित कर लाभान्वित किया जायेगा।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का अहम आदेश, रिश्तेदार होने के कारण गवाह का प्रभाव नहीं होता कम.

Important directive from the Madhya Pradesh High Court: The relationship with the witness does not diminish the impact. जबलपुर। रिश्तेदार के गवाही के आधार पर सजा से दंडित किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस हृदयेश ने अपील को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा कि न्यायालय ने कानूनी बिंदू तथा तथ्यों के आधार पर सजा से दंडित किया है। गवाहों के रिश्तेदार होने के कारण उनका प्रभाव कम नहीं होता है। बता दें कि अपीलकर्ता सुकलू की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि सोमती बाई (40) पर कुल्हाड़ी से प्राणघातक हमला करने के आरोप में न्यायालय ने उसे पांच साल के कारावास की सजा से दंडित किया है। न्यायालय ने सजा सुनाने में स्वतंत्र गवाह के बयान को नजर अंदाज किया है। घटना का चश्मदीद गवाह नहीं होने के बावजूद रिश्तेदारों के गवाह के आधार पर सजा से दंडित किया गया। अपीलकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि रिश्तेदारों ने अभियोजन की कहानी के अनुसार अपने बयान दिए हैं। एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि गवाहों ने घटना नहीं देखी है, परंतु पीड़िता के शरीर में कुल्हाड़ी से आई चोटों के निशान अवश्य देखे हैं। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि आरोपी ने पर कुल्हाड़ी से हमला किया है। रिश्तेदार होने के कारण गवाह का प्रभाव कम नहीं होता है। एकलपीठ ने अपील को खारिज करते हुए कहा कि न्यायालय ने कानूनी बिंदू के अनुसार उचित दंड से अपीलकर्ता को दंडित किया है।

थाने के अंदर दलित महिला के कपड़े उतार कर पिटाई.

Stripping and beating of a Dalit woman inside the police station. पुलिस अधीक्षक की 2 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज बंशकार समाज ने पुलिस थाने के सामने जमकर किया विरोध प्रदर्शन  जबलपुर । मध्य प्रदेश की जबलपुर पुलिस का एक बार फिर अमानवीय चेहरा सामने आया है. एक प्राइवेट होटल में हुई जेवरात की चोरी के शक में पुलिस ने बिना एफआईआर दर्ज किए, महिला के कपड़े उतरवाए और बर्बरता से जमकर मारपीट की। दलित महिला के साथ की गई मारपीट के बाद बंशकार समाज ने पुलिस थाने के सामने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक ने दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच करते हुए पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके बाद मामला शांत हुआ। महिला का जबलपुर के नेताजी सुभाषचन्द्र बोस मेडिकल अस्पताल में इलाज चल रहा है। दरअसल, यह पूरा मामला ओमती थाना क्षेत्र के एक प्राइवेट होटल में ब्रेसलेट चोरी से जुड़ा हुआ है। होटल के कमरा नंबर 103 में रुके यात्री ने ओमती थाने पहुंच कर पुलिस को सूचना दी कि वह होटल में रुकने के लिए पहुंचा था। उसी दौरान होटल से उसकी ब्रेसलेट चोरी हो गई। यात्री के साथ पुलिस होटल पहुंची और शक के आधार पर होटल में काम करने वाली महिला मंजू वंशकार और एक अन्य युवक को लेकर पुलिस थाने आई। पुलिस ने पार की सारी मर्यादाएं जहां पूछताछ के दौरान पुलिस ने सारी मर्यादाएं पार कर दी। महिला पुलिसकर्मी ने बेहरहमी से मारपीट करते हुए महिला के कपड़े उतरवाए। हद तो तब हो गई जब मारपीट के दौरान महिला बेहोश हो गई तो और पुलिसकर्मियों ने इलाज कराने की बजाए महिला को पुलिस थाने के बाहर छोड़ दिया। बंशकर समाज के लोगों ने थाने का किया घेराव महिला के साथ की गई बर्बरता से मारपीट के विरोध में बंशकार समाज के लोग महिला को घायल अवस्था में लेकर पुलिस थाने पहुंचे और महिला को थाने की दहलीज पर ही लिटा दिया। पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही की मांग करने लगे। प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप था कि जब महिला को थाने लाया गया था तो बिना एफआईआर दर्ज किए इतनी बेरहमी से मारपीट क्यों कि गई। दो पुलिसकर्मी हुए लाइन अटैच हंगामें की जानकारी लगते ही जबलपुर पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह खुद ओमती थाने पंहुचे। दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद यह पूरा मामला शांत हुआ। इस मामले में विभागीय जांच पूरी होने तक पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह ने दो पुलिसकर्मी को लाइन अटैच कर दिया है। पूरे मामले की जांच नगर पुलिस अधीक्षक पंकज मिश्रा को दी गई है, जो पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।

दिल्ली मे सरकार बनाने की गहमागहमी के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी डी शर्मा के साथ रात भोपाल पहुंचे प्रहलाद पटेल.

Amidst intense efforts to form a government in Delhi, Pralhad Patel arrived in Bhopal with BJP State President B.D. Sharma late at night. *उदित नारायण* नई दिल्ली।तीन राज्यों मे मिली बम्पर जीत के बाद से ही भाजपा मे नई सरकार के गठन को लेकर बैठकों एवं मंथनों का दौर जारी हैँ मध्यप्रदेश राजस्थान और छत्तीसगढ़ मे मुख्यमंत्री पद के कई नाम चर्चा मे हैँ, एक तरफ जहाँ शिवराज भोपाल मे बैठकर सियासी गुणागणित लगा रहे हैँ वही देर रात प्रहलाद पटेल राज्य इकाई के प्रमुख बी डी शर्मा के साथ भोपाल पहुचे, दरअसल, मध्‍य प्रदेश की नरसिंहपुर विधानसभा सीट से निर्वाचित विधायक प्रहलाद सिंह पटेल चुनाव परिणाम आने के बाद पहली बार भोपाल पहुंचे। पटेल के साथ बीजेपी प्रदेश अध्‍यक्ष वी‍डी शर्मा भी थे, दोनों एक साथ दिल्‍ली से भोपाल आए। इसके बाद से अटकलें तेज हो गई हैं कि क्‍या प्रहलाद सिंह पटेल ही प्रदेश के अगले मुख्‍यमंत्री होंगे। प्रहलाद पटेल का नाम मुख्‍यमंत्री चहरे में सबसे आगे चल रहा है। पटले ने दिल्‍ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की है। वहीं, भोपाल आने के पहले प्रहलाद पटेल वरिष्‍ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का आशीर्वाद लेने भी पहुंचे थे। वही इंदौर-1 विधानसभा से नवनिर्वाचित विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने गुरुवार को प्रदेश के अगले मुख्‍यमंत्री को लेकर कहा कि सीएम के नाम की घोषणा रविवार तक हो जाएगी, साथ ही प्रदेश में बीजेपी की बड़ी जीत के लिए श्रेय शिवराज सिंह चौहान की योजनाओं को देने से इंकार कर दिया ,*ग्‍वालियर में तोमर के समर्थन के ग्‍वालियर में तोमर के पोस्‍टर लगे *वहीं, प्रदेश के मुख्‍यमंत्री को लेकर कई तरह की अटकलें चल रही हैं। ग्‍वालियर में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बड़े-बड़े पोस्टर लग गए हैं, जिन पर उन्हें ‘बॉस‘ लिखा गया है।पोस्‍टर लगे* वहीं, प्रदेश के मुख्‍यमंत्री को लेकर कई तरह की अटकलें चल रही हैं। ग्‍वालियर में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बड़े-बड़े पोस्टर लग गए हैं, जिन पर उन्हें ‘बॉस‘ लिखा गया है।

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