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पूर्व CM उमा भारती ने फिर उठाया डॉग बाइट का मुद्दा, मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र

Former CM Uma Bharti again raised the issue of dog bite, wrote a letter to Chief Minister Mohan Yadav भोपाल । उमा भारती मृतक बच्चे के परिजनों से भी मिल चुकी हैं. इस दौरान उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और जिस जगह यह घटना हुई थी, उसके लिए कंस्ट्रक्शन कंपनी को इस घटना का जिम्मेदार ठहराया था. इसके साथ ही उमा भारती ने घटनास्थल का भी दौरा किया था. मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती (Uma Bharti) ने डॉग बाइट के बढ़ते मामलों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव (Mohan Yadav) को पत्र लिखा है. इस पत्र के माध्यम से उन्होंने आवारा कुत्तों के आतंक को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने (Action Against Dog Bites) की मांग की. इसके साथ ही उन्होंने राजधानी भोपाल (Bhopal) में हाल ही में कुत्तों के काटने से बच्चे की हुई मौत का जिक्र करते हुए पत्र में लिखा कि गरीबों के जिंदा बच्चों को कुत्ते खा जाएं, ये हमारे समाज के लिए कलंक है. उमा भारती ने कहा कि ये क्रिमिनल नेग्लिजेंस है. बनाए हुए नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए. जो लोग सरकार के बनाए नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, ये अपराध है. उन पर कार्रवाई होनी चाहिए.

प्रदेश के समस्त जिलो में साइबर तहसील लागू करने के आदेश जारी किए 

Orders issued to implement Cyber ​​Tehsil in all the districts of the state 2 फरवरी से मध्य प्रदेश के समस्त जिलो में साइबर तहसील लागू करने के समस्त कलेक्टरों को दिए गए निर्देश।

कैंपा फंड के फायर प्रोटेक्शन मद से उपकरणों की खरीदी में गड़बड़ झाला

Jhala: Irregularities in purchasing equipment from fire protection item of Campa Fund. उदित नारायण भोपाल। जंगल महकमे में कैंपा फंड से फायर प्रोटक्शन के लिए 11 करोड़ रूपए रिलीज किए गए हैं। 11 करोड़ रूपया रिलीज होते ही सप्लायरों का एक सिंडिकेट सक्रिय हो गया है। इस सिंडिकेट में वित्तीय सेवा के एक अधिकारी के शामिल होने की खबर विभाग में सुर्खियों में है। हालांकि शासन की ओर से अधिकारी की पदस्थापना अभी मंत्री स्टाफ में नहीं हो पाई है। बावजूद इसके, इनके द्वारा फील्ड में पदस्थ वन संरक्षक और डीएफओ पर दबाव बनाया जा रहा है। दिलचस्प पहलू यह है कि सिंडिकेट के संचालक कर्ता धार, अलीराजपुर और झाबुआ से जुड़े हैं। फायर प्रोटेक्शन के लिए कैंपा फंड से 11 करोड़ रूपया रिलीज किए गए हैं, क्योंकि 15 मार्च तक खर्च किया जाना है। 11 करोड़ रूपये से ब्रशयुक्त कटर, ब्लोअर, अग्निरोधी किट  और पानी की जैरीकेन की खरीदी होनी है। इन उपकरणों मार्केट रेट से दुगना और डेढ़ गुना दाम पर हो रही है। मसलन, ब्रशयुक्त कटर की बाजार दर 12000 से लेकर 14000 रुपए तक है किंतु विभाग 45000 रुपए में खरीद रहा है। इसी प्रकार ब्लोअर की बाजार दर अधिक से अधिक 14000 रुपए है। जबकि विभाग ₹60000 प्रति ब्लोअर की दर से भुगतान करने जा रहा है। 5000से ₹6000 में मिलने वाला अग्निरोधी किट वन विभाग ₹12000 में खरीद रहा है। सूत्रों का कहना है यह है कि यह डर इसलिए निर्धारित किए गए हैं क्योंकि अधिकारियों का सिंडिकेट संचालक कर्ता द्वारा सप्लायरों से 15% कमीशन की डिमांड किये जाने की खबर है। सूत्रों ने बताया कि वन मंत्री के नाम से सिंडिकेट में शामिल अनाधिकृत अफसर फील्ड के अफसरों (डीएफओ- सीएफ) को धमकाया जा रहा है कि वर्क ऑर्डर इन्हीं फर्मों को ही दिया जाय। यह फॉर्म में भी सिंडिकेट में शामिल सदस्यों की ही है। सूत्रों की माने तो  खंडवा सतना और दक्षिण शहडोल के अलावा किसी भी अधिकारी ने टेंडर नहीं बुलाए हैं।  एक सीनियर अधिकारी की सलाह है कि विभाग में जो भी खरीदी हो उसके टेंडर अथवा बिड विभाग की साइट पर अपलोड किए जाएं। इससे अधिक से अधिक फर्म पार्टिसिपेट कर सकेंगी और विभाग को वित्तीय फायदा भी होगा। फील्ड के अवसर दबाव में आकर बीट के द्वारा खरीदी की जाती है, जिसकी जानकारी सिर्फ सिंडिकेट के सदस्यों को ही रहती है। फायर प्रोटक्शन के लिए खरीदी होने वाली उपकरण  नाम                   संख्या            मद (करोड़)  ब्रशयुक्त कटर      4400            1.98  ब्लोअर                440             2.64  अग्निरोधी किट    4400           5.28 पानी जैरीकेन       4400           1.10

अब कुत्ते के काटने पर मालिक को हो सकती है जेल, पढ़िए क्या कहता है कानून

Now the owner can be jailed for dog bite, read what the law says Dog Bite श्वान के काटने से कई लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं तो कई बार व्यक्ति की मौत भी हो जाती है। सब ये जानते हैं कि श्वान जैसे पालतू जानवरों की रक्षा के लिए कई कानून कायदें है लेकिन अगर कोई पालतू श्वान किसी को काट लेता है तो उसके खिलाफ भी शिकायत करने का प्रावधान है।देश के हर हिस्से से आए दिन श्वान के काटने की खबरें सामने आती रहती हैं। श्वान के काटने से कई लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं तो कई बार व्यक्ति की मौत भी हो जाती है। सब ये जानते हैं कि श्वान जैसे पालतू जानवरों की रक्षा के लिए कई कानून कायदें है, लेकिन अगर कोई पालतू श्वान किसी को काट लेता है तो उसके खिलाफ भी शिकायत करने का प्रावधान है।इस कानूनी अधिकार को समझाते हुए अधिवक्ताओं का कहना हैं कि श्वान के काटने पर उसके मालिक के खिलाफ मामला दर्ज हो सकता है और अगर चोट गंभीर है तो मालिक को जेल भी जाना पड़ सकता है। आम तौर पर लोग ऐसे मामलों में कानून न जानने की स्थिति में शिकायत दर्ज नहीं करवाते हैं और कई बार आपसी विवाद भी हो जाते हैं । अधिवक्ताओं का कहना हैं कि अगर कोई पालतू श्वान किसी को काट लेता है तो वह श्वान के मालिक के खिलाफ पुलिस थाने जाकर एफआईआर दर्ज करा सकता है।कानून के मुताबिक, किसी भी पालतू जानवर से किसी को नुकसान पहुंचने पर उसके मालिक की ही जवाबदेही होती है। जैसे पालतू श्वान के काटने पर उसके मालिक के खिलाफ दर्ज एफआइआर हो सकती है। इसमें उसके खिलाफ आइपीसी की धारा 289 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। क्या है आईपीसी की धारा 289? आईपीसी की धारा 289 कहती है कि जो कोई व्यक्ति अपने पालतू जानवर से दूसरे व्यक्ति के जीवन को संकट में डालेगा या किसी भी तरह की क्षति पहुंचाएगा, तो ऐसे व्यक्ति के लापरवाह रवैये के लिए उसे 6 महीने की जेल हो सकती है, साथ ही जुर्माने का भी प्रावधान है।

भोपाल में सुबह 9.30 बजे से पहले नहीं लगेंगे स्कूल

Schools will not start in Bhopal before 9.30 am भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बदले मौसम को देखते हुए स्कूलों की टाइमिंग पूर्व के आदेश के अनुसार जारी रखने के आदेश दिए हैं। बुधवार को जारी आदेश में कक्षा 1 से 5वीं तक सुबह 9.30 बजे से पहले नहीं लगाने को कहा गया है। कक्षा छठीं से 12वीं तक पूर्व निर्धारित परीक्षाओं का संचालन निर्धारित समय सारणी अनुसार ही होगा। यह आदेश 10 फरवरी तक प्रभावी रहेगा।

मोहन कैबिनेट ने दी स्टार्टअप नीति में संशोधन को मंजूरी

Mohan cabinet approved amendment in startup policy मंत्रालय में हुई मोहन कैबिनेट की बैठक। स्टार्टअप नीति में संशोधन के बाद अब राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेने के लिए स्टार्टअप को सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि मिलेगी। भोपाल। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में स्टार्टअप नीति में संशोधन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, जिसे सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। इसमें अब यह प्रविधान किया गया है कि राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रदेश के स्टार्टअप को प्रतिपूर्ति राशि दी जाएगी। राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में भाग लेने पर 50 हजार और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने पर डेढ़ लाख रुपये तक की प्रतिपूर्ति होगी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग ने यह प्रस्तावित किया था कि राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेने के लिए स्टार्टअप को प्रोत्साहन राशि दी जाए। इसके अलावा बैठक में विभागीय जांच संबंधी कुछ अन्य निर्णय भी लिए गए। इसलिए किया संशोधन दरअसल स्टार्टअप से जुड़ी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेने के लिए पंजीयन कराना होता है। इसका शुल्क अधिक होता है, जिसके कारण स्टार्टअप इनमें सम्मिलित नहीं होते हैं। जबकि, ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने से अनुभव मिलता है और संपर्क भी बनते हैं, जो व्यापार को बढ़ाने में सहायक होते हैं।

मध्य प्रदेश खनिज नियम के तहत हुई कार्यवाही रेत के अवैध परिवहन पर वसूला गया 95 हजार रूपये का प्रशमन शुल्क

Action taken under Madhya Pradesh Mineral Rules, mitigation fee of Rs 95 thousand recovered on illegal transportation of sand विषेश संवादाता कटनी ! कलेक्टर अवि प्रसाद द्वारा खनिज के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के मामलों में गंभीरता से कार्यवाही करने के दिए गए निर्देश के बाद खनिज विभाग द्वारा तीन ट्रेक्टर ट्राली वाहनों से रेत का अवैध परिवहन करते पकडे पाये जानें पर 94 हजार 875 रूपये की प्रशमन शुल्क की राशि की वसूली की गई है। खनिज के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के मामलों पर जिला प्रशासन द्वारा नियमित निगरानी की जा रही है और कड़ी नजर रखी जा रही है साथ ही खनिज के अवैध परिवहन में लिप्त वाहनों से निर्धारित प्रशमन शुल्क की राशि भी जमा कराई जा रही है।

हायर सेकेंडरी स्कूल में आए पैसे को लेकर हुआ गड़बड़ झाला काम कराने के नाम पर 3 लाख से ज्यादा की हुई पैसे की लीपा पोती विभाग बना अंजान

There was a mess regarding the money received in the Higher Secondary School, in the name of getting the work done, more than Rs. 3 lakhs of money was covered up, the department became unknown. विशेष सवदाता कटनी । शासन के द्वारा जो स्कूलों में मरम्मत को लेकर पैसे दिए जाते हैं उसे पर भी भ्रष्टाचार का घुन लग जाता है जबकि यह पैसा विद्यालयों के रखरखाव के लिए दिया जाता है ताकि विद्यार्थियों को परेशानी ना हो लेकिन सरकारी पैसे के नाम पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है इस मामले को लेकर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है बताया गया है कि पूरे पैसे को मिलजुल कर बंदर बांट किया गया है और जिसने यह खेल रचा है आज तक उसके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं की गई है स्कूलों में मरम्मत के नाम पर जारी हुई राशि जमकर खुर्दबुदृ की गई है। थोड़ा-बहुत काम कराकर तीन लाख रुपए से अधिक आहरित कर लिए गए है। ऐसा ही एक मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पिपरौध में सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यहां पर मरम्मत के लिए तीन लाख रुपए शिक्षा विभाग से मिले हैं। स्कूल में ग्रीन बोर्ड का कार्य नहीं कराया गया। नियमानुसार एसएमडीसी समिति नहीं बनाई बाउंड्रीवॉल की पुताई नहीं कराई गई. दरवाजे आदि का भी रंगरोगन नहीं कराया गया। 20 से 25 हजार रुपए का एक टीन शेड बनवाया गया है। इस काम के लिए इंजीनियर ने इस्टीमेट भी नहीं बनाया और राशि जारी हो गई है। वर्क ऑर्डर भी नहीं हुआ। ग्रामीणों ने कहा कि अलग-अलग फर्म से कोटेशन नहीं मंगाए गए। ना ही आमसूचना हुई। विभिन्न फर्मो के टेंडर नहीं है सामग्री बिल वा लेबर वाउचर नहीं है भुगतान एक ही व्यक्ति को 299615 रुपए किया गया जिसमें साफ समझ में आ रहा है की राशि का गोलमाल किया गया है स्कूल समिति अभियान जिला स्तरीय कमेटी की बैठक में निर्देश सीनियरों को दरकिनार कर जूनियरों को शामिल किया गया है। खेल मैदान ठीक कराने के नाम पर भी मनमानी की गई है। मैदान को साफ कराया गया है, जिसके नाम पर 58 हजार रुपए निकाले ग्रामीणों ने कहा कि विद्यार्थियों की नामांकन फीस में भी मनमानी की गई है। ग्रामीणों ने कहा कि प्राचार्य संत बक्स तिवारी द्वारा मनमानी की जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारी से मामले की जांच कराए जाने मांग की गई है। इस मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि की जानकारी में नहीं है बताया गया है कि विभाग की तरफ से लीपापोती की जा रही है और मामले को दबाया जा रहा है शासन की राशि का खुलेआम भ्रष्टाचार की होली खेली गई है अब सवाल यह उठता है कि जांच करने वाले ही अनजान बन रहे हैं इस बात को लेकर कलेक्टर महोदय को संज्ञान में लेना चाहिए

राष्ट्रीय राजमार्ग से 500 मीटर परिधि में कैसे संचालित हो रही हैं शराब दुकानें “हाई कोर्ट “

How are liquor shops operating within 500 meters radius from the National Highway “High Court” जनहित याचिका में होना है सुनवाई। कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर नोटिस जारी कर मांगा था जवाब। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग से 500 मीटर की परिधि में शराब दुकानें किस नियम के तहत संचालित हो रही हैं।कोर्ट ने शासन से यह सवाल उस जनहित याचिका में मांगा है जिसमें इन शराब दुकानों के संचालन को चुनौती दी गई है।सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2017 में आदेश दिया था कि राष्ट्रीय राजमार्ग की 500 मीटर की परिधि में कोई शराब दुकान संचालित नहीं की जा सकती है। इंदौर। शासन को बुधवार को मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष बताना है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग से 500 मीटर की परिधि में शराब दुकानें किस नियम के तहत संचालित हो रही हैं। इनका संचालन रोकने के लिए शासन क्या कर रहा है। कोर्ट ने शासन से यह सवाल उस जनहित याचिका में मांगा है जिसमें इन शराब दुकानों के संचालन को चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका राजेंद्र गुप्ता ने दायर की है। वे स्वयं ही इसमें पैरवी भी कर रहे हैं। याचिका में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2017 में आदेश दिया था कि राष्ट्रीय राजमार्ग की 500 मीटर की परिधि में कोई शराब दुकान संचालित नहीं की जा सकती है। कोर्ट के निर्देश के बाद 500 मीटर की परिधि से बाहर संचालित होने वाली शराब दुकानों के लिए भी सख्त नियम बनाए गए थे। आबकारी विभाग में की थी शिकायत याचिका में कहा है कि इंदौर-देवास राष्ट्रीय राजमार्ग की 500 मीटर की परिधि में नौ शराब दुकानें संचालित हो रही हैं। याचिकाकर्ता ने आबकारी विभाग में इसकी शिकायत की थी लेकिन शासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। ये दुकानें आज भी संचालित हो रही हैं। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्क सुनने के बाद शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिकाकर्ता ने याचिका में यह भी कहा है कि उन्होंने दुकानों के संबंध में आबकारी विभाग में शिकायत की तो वहां से जवाब दिया गया कि ये शराब दुकानें परंपरागत हैं। याचिका के समर्थन में इन शराब दुकानों के फोटोग्राफ और अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं। बुधवार को शासन को जवाब देना है।

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