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कांग्रेस नेता के परिजन को उपकृत करने एक दर्जन डीएफओ ने पहली बार जोड़ी नई शर्तें

To oblige Congress leader’s family, a dozen DFO added new conditions for the first time भोपाल। भाजपा सरकार में भी अफसर कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदारों की फर्म पर मेहरबान है। इसी कड़ी में जंगल महकमे में एक दर्जन डीएफओ ने चैन लिंक और वायरबेड खरीदी की निविदा में ऐसी शर्त जोड़ दी, जिसे केवल कांग्रेस नेता के रिश्तेदार की फर्म को ही वर्क आर्डर मिल सके। बैतूल और बालाघाट समेत एक दर्जन डीएफओ ने चैनलिंक और वायरबेड खरीदी के लिए निविदा आमंत्रित की थी। इस निविदा में यह शर्त भी जोड़ दी कि भारत मानक ब्यूरो से मान्यता प्राप्त फर्म ही निविदा में हिस्सा ले सकेंगी। यह शर्त पहली बार जोड़ी गई। इस शर्त के कारण तीन दर्जन से अधिक संस्थाएं प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गई। मप्र में भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस प्राप्त दो फर्म ही रजिस्टर्ड हैं। यह दोनों फर्म ही कांग्रेस नेता के रिश्तेदार की है। यानी कांग्रेस नेता के रिश्तेदार को उपकृत करने के लिए प्रदेश के एक दर्जन डीएफओ ने पहली बार यह शर्त निविदा में जोड़ दी है। यह बात अलग है कि प्रतिस्पर्धा से बाहर हुई संस्थाओं ने शिकवे-शिकायतें शुरू कर दी हैं। जानकारों का कहना है कि मंत्री के यहां अनाधिकृत रूप से सक्रिय अपर संचालक स्तर के एक अधिकारी के कहने पर फील्ड के अफसरों ने निविदा में भारतीय मानक ब्यूरो की शर्त जोड़ी है। बताया जाता है कि अफसर पर दबाव बनाने वाले अनाधिकृत काम देख रहे अधिकारी का कांग्रेस नेताओं से पुराने संबंध रहे हैं।

कमलनाथ ने कि एमपी के लोगों से बड़ी अपील, बीजेपी पर लगाए आरोप

Kamal Nath made a big appeal to the people of MP, accused BJP चुनाव आचार संहिता लगने की घोषणा किसी भी वक्त हो सकती है. ऐसे में कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक्स पर पोस्ट करके एमपी के लोगों से बड़ी अपील की है. लोकसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग किसी भी वक्त चुनाव आचार संहिता लगा सकता है. ऐसे में अब कांग्रेस और बीजेपी अपनी चुनावी रणनीतियों को जल्द अंजाम तक पहुंचा देना चाहती हैं. इसलिए कांग्रेस और बीजेपी के बड़े नेता जनता से कई तरह की अपील करते दिख रहे हैं. ताजा मामला कांग्रेस के दिग्ग्ज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एमपी की जनता के नाम एक भावुक अपील की है. कमलनाथ ने अपनी इस पोस्ट में लिखा है कि “मध्य प्रदेश के सम्मानित नागरिको, लोक सभा चुनाव में कुछ ही हफ़्ते बचे हैं. प्रदेश और देश के भविष्य का निर्माण करने के लिए आवश्यक है कि यह चुनाव जनता के मुद्दों पर लड़ा जाए, ना कि मुद्दों से भटकाने वाले जुमलों पर. एक तरफ़ कांग्रेस पार्टी है जिसने स्पष्ट वादा किया है कि किसानों को MSP की गारंटी दी जाएगी”. ‘ कमलनाथ लिखते हैं कि “नौजवानों के लिए केंद्र सरकार में 30 लाख सरकारी नौकरियां दी जाएंगी. ग़रीब महिलाओं को हर साल एक लाख रुपये आर्थिक सहायता दी जाएगी. अग्नि वीर योजना समाप्त कर सेना में नियमित नियुक्ति दी जाएगी. सामाजिक न्याय के लिए जातिगत जनगणना कराई जाएगी”. कमलनाथ ने लगाए बीजेपी पर ये आरोपकमलनाथ आगे लिखते हैं कि “दूसरी तरफ़ भारतीय जनता पार्टी है, जिसने एक भी वादा ऐसा नहीं किया है जो समाज और जनता के हालात बदलने का वादा करता हो. 10 साल की मोदी सरकार की नाकामी छुपाने के लिए भाजपा सिर्फ़ समाज को बाँटने की राजनीति कर रही है. हम सबको भाजपा की इस चालबाज़ी से सावधान रहना है और ख़ुशहाल भारत का निर्माण करने वाले मुद्दों को पहचानना है. जय कांग्रेस, विजय कांग्रेस”.

आमजन के लिए जल्द ही खोला जाएगा, द्रोणाचल स्थित वार मेमोरियल

War Memorial located in Dronachal will soon be opened for the general public. मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव से सेना के जनरल आफिसर कमांडिंग प्रीतपाल सिंह व ब्रिगेडियर एसएस छिल्लर ने की सौजन्य भेंट। भोपाल ! राजधानी में द्रोणाचल स्थित सेना का युद्ध स्मारक आमजन के लिए जल्द ही खोला जाएगा। भोपाल स्थित सेना के स्ट्राइक कोर के जनरल आफिसर कमांडिंग प्रीतपाल सिंह ने इस बात की जानकारी दी। वह आज सुबह मुख्यमंत्री आवास में सीएम डा. मोहन यादव से सौजन्य भेंट करने पहुंचे थे। इस दौरान उनके साथ ब्रिगेडियर एस.एस. छिल्लर भी उनके साथ थे। इस मुलाकात में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव को हेडक्वार्टर 21 कार्प की ओर से स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया। सीएम ने इस मौके पर हरदा सहित अन्य आपदाओं के दौरान सेना द्वारा दिए गए त्वरित सहयोग की सराहना की। कर्नल विशाल आहूजा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। देशभक्ति की मिलेगी प्रेरणाभोपाल में इंडियन आर्मी की 03 ईएमई कार्प्स ने द्रोणाचल के निकट स्थित योद्धा स्थल के पास ही वार मेमोरियल की स्थापना की है। यहां पर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के नाम अंकित हैं। उनकी स्मृति में ही वार मेमोरियल बनाया गया है। यहां आकर लोगों को देशभक्ति की प्रेरणा मिलेगी। यहां गैलेंट्री एरिया भी विकसित किया गया है। नागरिकों को इसी से जोड़ने एवं देशभक्ति की प्रेरणा देने के लिए वार मेमोरियल सभी के लिए खोलने का प्रस्ताव है।

धार्मिक पर्यटन होली सेवा का सीएम ने किया शुभारंभ कैलाश विजयवर्गीय ने उठाया सेवा का लुफ्त

CM inaugurated the religious tourism Holi service. Kailash Vijayvargiya enjoyed the service. शुरुआत में आठ सीटर वाले दो ट्विन इंजन एयरक्राफ्ट चलाए जाएंगे। प्रदेश के प्रमुख हवाई अड्डों के अलावा हवाई पट्टियों को भी इससे जोड़ा जाएगा। भोपाल । मुख्यमंत्री डां मोहन यादव ने गुरुवार को स्टेट हैंगर में अयोजित कार्यक्रम में पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा एवं पीएम श्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत विभिन्न शहरों के लिए हवाई सेवा शुरू की जाएगी। शुरुआत में आठ सीटर वाले दो ट्विन इंजन एयरक्राफ्ट चलाए जाएंगे। प्रदेश के प्रमुख हवाई अड्डों के अलावा हवाई पट्टियों को भी इससे जोड़ा जाएगा। प्रारंभिक चरण में भोपाल, जबलपुर, रीवा, खजुराहो, उज्जैन और पमचढ़ी को धार्मिक पर्यटन हवाई सेवा से जोड़ा जाएगा। इसका दायरा बढ़ा कर आने वाले समय में पर्यटकों की मांग के अनुसार अन्य शहरों को जोड़ा जाएगा। कार्यक्रम में ये रहे उपस्थितस्टेट हैंगर पर आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, नगरीय विकास व आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, मंत्री विश्वास सारंग, मंत्री कुंवर विजय शाह, मंत्री धर्मेंद्र लोधी, मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, राकेश सिंह, निर्मला भूरिया, नारायण सिंह कुशवाहा, एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। प्रारंभ में पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र लोधी ने स्वागत भाषण दिया।

खनिज पट्टा राजस्व में खनन हो रहा था वन भूमि पर, डीएफओ ने की निरस्त करने की अनुशंसा

Mining was being done on forest land to earn mineral lease revenue, DFO recommended its cancellation. भोपाल। विदिशा के 10 खनिज पट्टाधारकों ने वन भूमि पर खनन करने का नायाब तरीका अपनाया है। जंगल के आसपास के राजस्व भूमि पर खनिज पट्टा आवंटित कराते हैं और खनन वन भूमि पर कर अवैध परिवहन और विक्रय कर रहे हैं। मामला संज्ञान में आते ही डीएफओ ने कलेक्टर को पत्र लिखकर उसे निरस्त करने की अनुशंसा की है। दिलचस्प पहलू यह है कि मौजूदा डीएफओ के पहले यहां पदस्थ पूर्व के किसी भी डीएफओ की नजर वन भूमि पर हो रहे खनन के गोरखधंधों पर नहीं पड़ी। या यूं कहिए कि इस गोरख धंधे में पूर्ववर्ती डीएफओ भी रहे होंगे। विदिशा डीएफओ ओंकार सिंह मस्कोले ने विदिशा कलेक्टर को पत्र लिखा है कि 7 अक्टूबर 2002 को जारी वन मंत्रालय के निर्देश है कि वन सीमा के 250 मीटर के अंदर उत्खनन पट्टा स्वीकृत न किया जाय। डीएफओ ने कलेक्टर को लिखे पत्र में वन भूमि सीमा से ढाई सौ मीटर के अंदर पूर्व में दिए गए राजस्व भूमि पर पट्टे निरस्त किए जाएं। वन विभाग के मैदानी अमले के अनुसार पट्टाधारकों ने राजस्व सीमा पर आवंटित पट्टे की आड़ में वन भूमि पर बड़े पैमाने पर खनन कर रहे थे। इन्हीं सूत्रों का कहना है कि पिछले 7-8 वर्षों में खनन कारोबारियों ने करीब 6000 हेक्टेयर वन भूमि पर खनन कर डाले। खनन कारोबारी के साथ वन विभाग के मिली भगत के भी संकेत मिले हैं। सवाल यह उठता है कि पूर्ववर्ती डीएफओ ने वन भूमि सीमा के ढाई सौ मीटर के अंदर खनन के लिए कैसे अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिए? इनके पट्टे निरस्त करने की अनुशंसा बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर रहे हैं पट्टा धारक वन विभाग के मैदानी अमले के लिए वन अधिकार अधिनियम के तहत दिए गए पट्टा धारक भी सिरदर्द बनते जा रहे हैं। वनाधिकार के तहत पट्टे प्राप्त करने के बाद आदिवासी पट्टे की सीमावर्ती वन भूमि पर बेखौफ कब्जा करते चले जा रहे हैं। इस आशय की जानकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान एक छिंदवाड़ा सर्किल के डीएफओ ने एसीएस वन और वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव को दी है। मुख्यालय के अधिकारी भी मानते हैं कि यह समस्या अकेले छिंदवाड़ा सर्कल की नहीं है। पूरे प्रदेश से ऐसी खबरें मिल रही हैं। चूंकि चुनावी वर्ष है, इसलिए अधिकारी भी असमंजस में है कि उनके साथ कैसा सलूक किया जाए..?

बीजेपी विधायक ने जनता के 13 लाख रुपए किए गबन, कांग्रेस ने पेश किए सबूत

BJP MLA embezzled Rs 13 lakh from public money, Congress presented evidence विधायक निधि से मंजूर किए गए काम में बगैर काम किए ही हो गया 13 लाख रुपए का भुगतान इंदौर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने निगम में भाजपा की परिषद के कार्यकाल में हुए बड़े घोटाले का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में विधायक निधि के तहत पहले काम मंजूर करवाया गया फिर बिना कुछ काम किए ठेकेदार को 13 लाख रुपए का भुगतान कर दिया। उन्होंने विधायक रमेश मेंदोला पर सीधे इसके गबन का आरोप लगाया है। विधायक की तरफ से इस मामले में अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। चिंटू चौकसे में आज यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि विधानसभा क्षेत्र क्रमांक दो के विधायक रमेश मेंदोला ने नगर निगम के वार्ड क्रमांक 20 में खातीपुरा चौराहे के पास राम मंदिर के समीप स्थित सामुदायिक भवन का निर्माण करने के लिए अपनी विधायक निधि से 10 लाख रुपए की राशि मंजूर की थी। यह कार्य इंदौर नगर निगम को सौंपा गया था। निगम ने इस काम को करने के लिए निविदा आमंत्रित की गई एवं एसके कंस्ट्रक्शन कंपनी को इस कार्य का टेंडर दिया गया। इस कंपनी के द्वारा इस टैंडर के परिपेक्ष में आज तारीख तक उक्त स्थान पर कोई काम नहीं किया गया है। नगर निगम के अधिकारियों ने अपनी फाइल में इस काम को पूर्ण होना बताया। इसके बाद ठेकेदार से प्राप्त बिलों को मंजूरी देते हुए 13 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया गया। चौकसे ने बताया कि आज तक भी इस स्थान पर सामुदायिक भवन के निर्माण का कार्य शुरू भी नहीं हो सका है। यह मामला भ्रष्टाचार का नहीं बल्कि घोटाला और गबन का है। इस मामले में भाजपा के नेताओं, अधिकारियों और ठेकेदार के गठजोड़ ने मिलकर कागज पर फर्जी काम दर्शाते हुए शासन और निगम के खजाने को 13 लाख रुपए का चूना लगाया है । चौकसे ने कहा कि इस पूरे गबन के मामले में कार्य को मंजूरी देने वाले विधायक रमेश मेंदोला की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। उनके द्वारा बगैर काम के भी भुगतान होने दिया गया। विधायक के द्वारा जब काम मंजूर किया जाता है तो यह विधायक की नैतिक जिम्मेदारी होती है कि वह सुनिश्चित करे कि वह काम सही स्थान पर सही तरीके से हो रहा है अथवा नहीं। यदि वह काम बराबर नहीं हो रहा है तो विधायक की ही जिम्मेदारी है कि वह नोडल एजेंसी बनाई गई नगर निगम को इस बात की शिकायत करते। विधायक मेंदोला के द्वारा यह शिकायत नहीं किया जाना इस बात का पर्याय है कि इस गबन में वे भी शामिल हैं। चौकसे ने कहा कि मेरा आरोप है कि इस गबन के पूरे पैसे विधायक की जेब में गए हैं। किसी ठेकेदार और अधिकारी में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह विधानसभा क्षेत्र क्रमांक दो का फर्जी बिल बिना विधायक की सहमति के बना ले।उन्होंने कहा कि इस मामले में हमारे द्वारा निगम आयुक्त को शिकायत की जा रही है। हमारी मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाना चाहिए। इसके साथ ही इन अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदार के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की जाएगी।

वन नेशन-वन इलेक्शन पर कोविंद कमेटी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी रिपोर्ट

Kovind Committee submits report to President Draupadi Murmu on One Nation-One Election यह रिपोर्ट 2 सितंबर 2023 को पैनल के गठन के बाद से हितधारकों और एक्सपर्ट्स परामर्श और 191 दिन के रिसर्च का नतीजा है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अगुआई में 8 सदस्यों की कमेटी पिछले साल 2 सितंबर को बनी थी। इसमें रामनाथ कोविंद, गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व सांसद गुलाम नबी आजाद समेत आठ सदस्य हैं। वन नेशन-वन इलेक्शन यानी एक देश, एक चुनाव के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी है। कमेटी के सदस्यों ने राष्ट्रपति भवन जाकर रिपोर्ट सौंपी। वन नेशन वन इलेक्शन पर कमेटी ने 18 हजार 626 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में 2029 में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की गई है। कोविंद की अगुवाई में सितंबर 2023 में बनी थी कमेटीरिपोर्ट 2 सितंबर 2023 को पैनल के गठन के बाद से हितधारकों और एक्सपर्ट्स परामर्श और 191 दिन के रिसर्च का नतीजा है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अगुआई में 8 सदस्यों की कमेटी पिछले साल 2 सितंबर को बनी थी। 23 सितंबर 2023 को पहली बैठक दिल्ली के जोधपुर ऑफिसर्स हॉस्टल में वन नेशन वन इलेक्शन कमेटी की पहली बैठक हुई थी। इसमें पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व सांसद गुलाम नबी आजाद समेत 8 मेंबर हैं। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल कमेटी के स्पेशल मेंबर बनाए गए हैं। क्या है पैनल के सुझाव? 2029 में एकसाथ चुनाव कराने की सिफारिशरिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विधि आयोग के प्रस्ताव पर सभी दल सहमत हुए तो यह 2029 से ही लागू होगा। साथ ही इसके लिए दिसंबर 2026 तक 25 राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने होंगे। मध्यप्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और मिजोरम विधानसभाओं का कार्यकाल 6 महीने बढ़ाकर जून 2029 तक किया जाए। उसके बाद सभी राज्यों में एक साथ विधानसभा-लोकसभा चुनाव हो सकेंगे।

प्राइवेट स्कूल संचालक नहीं बेच सकते बस्ता और बैग, नियम तोड़ा तो…

Private school operators cannot sell backpacks and bags, if rules are broken… मध्य प्रदेश में निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने एक निर्देश जारी किया है. कलेक्टर के इस निर्देश को अभिभावक खूब सराह रहे हैं और काफी खुश हैं भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देशों से भोपाल के अभिभावकों में खुशी का माहौल है. भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने निजी संचालकों के लिए आदेश जारी किए हैं कि कोई भी स्कूल संचालक बस्ता और ड्रेस नहीं बेच सकेगा. नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी. भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने जिले में संचालित होने वाले सभी निजी स्कूलों के संचालकों के लिए एक आदेश जारी किया है. इस आदेश में स्पष्ट किया है कि विद्यालय की स्टेशनरी, यूनिफार्म पर स्कूल का नाम प्रिंट कराकर दुकानों से क्रय कराने या एक विशिष्ट दुकान से यूनिफार्म और पाठ्य पुस्तकें बेचना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा. निर्देश का पालन नहीं करने पर होगी कार्रवाई आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति, विद्यालय के प्राचार्य और प्रबंध के विरुद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 188 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही संबंधित एसडीएम और जिला शिक्षा अधिकारी को इस आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है. कलेक्टर ने निजी विद्यालयों को स्पष्ट किया है कि आगामी शिक्षण सत्र प्रारंभ होने से पहले ही लेखक और प्रकाशक के नाम और मूल्य के साथ कक्षावार पुस्तकों की सूची विद्यालय के सूचना पटल पर प्रदर्शित करें. कलेक्टर ने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसी सूची मांगने पर उपलब्ध कराई जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी और उनके अभिभावकगण इन पुस्तकों को अपनी सुविधानुसार खुले बाजार से खरीद सकें. अभिभावकों में खुशी की लहर भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि स्कूल संचालकों को सूचना पटल पर यह भी अंकित करना होगा कि किसी दुकान विशेष से सामग्री क्रय करने की बाध्यता नहीं है. कहीं से भी पुस्तकें, यूनिफार्म और अन्य आवश्यक सामग्री क्रय की जा सकती है. पुस्तकों के अतिरिक्त स्कूल प्रबंधकों की ओर से यूनिफार्म, टाई, जूते, कापियां आदि भी स्कूल से उपलब्ध या बेचने की कोशिश नहीं की जाएगी. भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की तरफ से जारी किए गए इस तरह के आदेश से भोपाल के अभिभावकों ने खुशी जाहिर कर जिला प्रशासन की सराहना की है. उनका कहना है कि इस आदेश के बाद निजी स्कूल संचालकों की मनमानी पर विराम लग सकेगा, साथ ही कमीशन खोरी नहीं होने की वजह से स्कूलों का कोर्स भी अधिक कीमत का नहीं रहेगा. यह अच्छा फैसला है. इसे पूरे प्रदेश में सख्ती के साथ लागू किया जाना चाहिए.

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