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सुप्रीम कोर्ट ने मांगा ED से जवाब : चुनाव से पहले ही केजरीवाल को गिरफ्तार क्यों किया

Supreme Court seeks answer from ED: Why was Kejriwal arrested even before the elections? सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाया है। आम चुनाव से पहले केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को होने की संभावना है। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय के सवाल पर जवाब मांगा है। नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका पर लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाया है। आम चुनाव से पहले केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को होने की संभावना है। बता दें कि शराब नीति घोटाला मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी द्वारा हुई अपनी गिरफ्तारी को लेकर केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। ‘आप इससे इनकार नहीं कर सकते’न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय के सवाल पर जवाब मांगा है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि ‘जीवन और स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण हैं। आप इससे इनकार नहीं कर सकते।’ पीठ ने राजू से कई अन्य सवाल पूछे। जांच एजेंसी से केजरीवाल की इस याचिका पर भी मांगा जवाबबता दें कि 21 मार्च को गिरफ्तारी के बाद केजरीवाल फिलहाल न्यायिक हिरासत के तहत यहां तिहाड़ जेल में बंद हैं। शीर्ष अदालत ने 15 अप्रैल को ईडी को नोटिस जारी किया और केजरीवाल की याचिका पर उससे जवाब मांगा है। केजरीवाल की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी अपना पक्ष रख रहे है।

एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने संभाला 26वें नेवी चीफ का प्रभार, पैर छू लिया मां का आशीर्वाद

Admiral Dinesh Kumar Tripathi took charge as the 26th Navy Chief, touched the feet and got the blessings of his mother; एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विशेषज्ञ हैं. वह नौसेना के 26वें नौसेना प्रमुख हैं और इससे पहले वह नेवी में उप-प्रमुख के रूप में काम कर रहे थे. वॉर एक्सपर्ट एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने मंगलवार (30 अप्रैल, 2024) को देश के 26वें नेवी चीफ का प्रभार संभाला. वह आर हरि कुमार के रिटायर (चार दशकों के शानदार करियर के बाद) होने पर नए नौसेना प्रमुख बने हैं. एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी इससे पहले भारतीय नौसेना के उप-प्रमुख का पद संभाल रहे थे. पदभार संभालने से पहले नौसेना प्रमुख पीवीएसएम, एवीएसएम, एनएम एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की. उन्हें दिल्ली के साउथ ब्लॉक में गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया. एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का जन्म 15 मई 1964 को हुआ था. वह मध्य प्रदेश में रीवा के सैनिक स्कूल से पढ़े हैं. राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खडकवासला के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने गोवा के नेवल वॉर कॉलेज और अमेरिका के नेवल वॉर कॉलेज में भी कोर्स किया है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, एक जुलाई 1985 में वह भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे. कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉर एक्सपर्ट वाइस एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का करीब 30 साल का लंबा और विशिष्ट करियर रहा है. उन्होंने भारतीय नौसेना के जहाज विनाश, किर्च और त्रिशूल की कमान भी संभाली है. नौसेना के उप प्रमुख का पद संभालने से पहले वह पश्चिमी नौसैन्य कमान के फ्लैट ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके हैं. रियर एडमिरल के तौर पर वह ईस्टर्न फ्लीट के फ्लैट ऑफिसर कमांडिंग रह चुके हैं. वह भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला के कमांडेंट भी रह चुके हैं. उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) और नौसेना पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है. दिनेश कुमार त्रिपाठी ने मां से यूं लिया आशीर्वाद

टी20 विश्व कप के लिए टीम इंडिया का ऐलान

Team India announced for T20 World Cup बीसीसीआई ने टी20 वर्ल्ड कप 2024 के लिए भारतीय टीम की घोषणा कर दी है. रोहित शर्मा टीम की कप्तानी करेंगे. भारत ने टी20 विश्व कप 2024 के लिए टीम घोषित कर दी है. टीम इंडिया रोहित शर्मा की कप्तानी में खेलेगी. रोहित के साथ-साथ यशस्वी जायसवाल, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत और संजू सैमसन को टीम में जगह मिली है. शुभमन गिल को रिजर्व प्लेयर्स की लिस्ट में रखा है. बोर्ड ने शिवम दुबे पर भी भरोसा जताया है. हार्दिक पांड्या को उपकप्तान बनाया गया है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की सिलेक्शन कमेटी ने मंगलवार को ही बैठक की है. टीम इंडिया ने विकेटकीपर बैटर ऋषभ पंत और संजू सैमसन को टीम में जगह दी है. सैमसन और पंत आईपीएल 2024 में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. ऋषभ की लंबे वक्त के बाद टीम इंडिया में वापसी हुई है. वे कार एक्सीडेंट के बाद से ही मैदान से दूर थे. लेकिन आईपीएल के जरिए मैदान पर वापसी की और अपनी फॉर्म को भी साबित किया. उन्हें इसका फायदा मिला. सैमसन की बात करें तो उन्होंने आईपीएल 2024 में 9 मैच खेले हैं और 385 रन बनाए हैं. इस दौरान 4 अर्धशतक लगाए हैं. शिवम-अक्षर पर बोर्ड ने जताया भरोसा – बीसीसीआई ने शिवम दुबे और अक्षर पटेल पर भी भरोसा जताया है. शिवम आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेल रहे हैं. वे विस्फोटक बैटिंग करने में माहिर हैं. इसके साथ-साथ फिनिशर की भूमिका भी निभा लेते हैं. शिवम दुबे ने इस सीजन के 9 मैचों में 350 रन बनाए हैं. इस दौरान 3 अर्धशतक लगाए हैं. अक्षर की बात करें तो उन्होंने बॉलिंग के साथ-साथ बैटिंग में भी कमाल दिखाया है. शुभमन को रिजर्व प्लेयर्स की लिस्ट में मिली जगह – शुभमन गिल की जगह को लेकर काफी संशय चल रहा था. हालांकि बोर्ड ने नजरअंदाज नहीं किया. शुभमन को रिजर्व प्लेयर्स की लिस्ट में जगह मिली है. उनके साथ-साथ रिंकू सिंह, खलील अहमद और आवेश खान को भी इस लिस्ट में जगह मिली है. टी20 विश्व कप 2024 के लिए भारतीय क्रिकेट टीम – रोहित शर्मा (कप्तान), हार्दिक पांड्या (उप कप्तान), यशस्वी जयसवाल, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), संजू सैमसन (विकेटकीपर), शिवम दुबे, रवींद्र जडेजा, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल , अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज रिजर्व प्लेयर्स – शुभमन गिल, रिंकू सिंह, खलील अहमद और अवेश खान

भाजपा ने षड्यंत्र कर बम को मजबूर किया नामांकन वापस लेने पर

BJP conspired and forced Bam to withdraw his nomination. यह तीन दबाव पड़ गए बम पर भारी 1- सबसे बड़ा दबाव बम पर महिला संबंधी मामले का था। इसमें एक पुरानी शिकायत को हवा दी जा रही थी और इसमें एक गंभीर मामले में केस दर्ज कराने की तैयारी हो गई थी। इस दबाव को बम सहन नहीं कर पाए। यह सबसे बड़ी वजह बनी। 2- खजराना थाने में 17 साल पुराने मामले में हाल ही में गवाह के बयान बाद उन पर मारपीट, जान से मारने की धमकी के बाद गंभीर धारा हत्या के प्रयास 307 को बढ़ाने की प्रक्रिया शुरु हो गई थी। यह भी एक दूसरी वजह बनी। 3- एक तीसरा कारण बीजेपी ने उनके नाम घोषित होने के बाद ही कॉलेज की गड़बड़ियों में घेरना शुरु कर दिया था। यहां पर फैकल्टी की अनियमतिता है, मरे हुए प्रोफेसर को फैकल्टी बताया है। कई फैकल्टी है ही नहीं और उनके नाम कॉलेज में बताए गए हैं। इस तरह कॉलेज की मंजूरी ही खटाई में पड़ जाती।

विधायक जी ने अपनी फॉर्च्यूनर से दुल्हा-दुल्हन को पहूंचाया घर,घर वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

The MLA took the bride and groom to their home in his Fortuner, the happiness of the family members knew no bounds. राघोगढ़ ! दूल्हा-दुल्हन को महंगे फॉर्च्यूनर वाहन में आता देखकर परिजन भी हैरान रह गए. कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने खुद ही गाड़ी का दरवाजा खोलकर नवदंपती को घर पर उतारा. जयवर्द्धन ने दुल्हन को अपनी बहन बताया. गुना जिले के राघोगढ़ में शादी सम्मेलन के बाद दूल्हा-दुल्हन बाइक पर सवार होकर घर जा रहे थे. इसी दौरान क्षेत्र में जनसंपर्क कर रहे .कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने जब नवदंपती को देखा तो उन्होंने अपने वाहन को रोका और दूल्हा-दुल्हन को फॉर्च्यूनर कार में बैठाकर उनके घर तक पहुंचाया , अब इस पूरे वाकए का वीडियो अब वायरल हो रहा है. नवल धाकड़ नवविवाहिता पत्नी को साथ लेकर पूजा-पाठ करने गया था. भीषण गर्मी में बाइक सवार नवल धाकड़ और उसकी पत्नी को जब क्षेत्रीय विधायक ने देखा तो अपने फॉर्च्यूनर वाहन को रोककर  बैठने को कहा. जयवर्द्धन के साथ विधायक पंकज उपाध्याय भी मौजूद थे. दूल्हा-दुल्हन को महंगे फॉर्च्यूनर वाहन में आता देखकर नवल के परिजन भी हैरान रह गए.  जयवर्द्धन सिंह ने खुद ही गाड़ी का दरवाजा खोलकर नवदंपती को घर पर उतारा. जयवर्द्धन ने दुल्हन को अपनी बहन बताया. दूल्हा बने नवल धाकड़ ने बताया कि जयवर्द्धन सिंह शादी सम्मेलन में भी पहुंचे थे. नवल के परिजन साफा बांधकर सम्मान करने के लिए आगे बढ़े तो जयवर्द्धन ने कहा, “मैं तो आपके परिवार का हूं. पंकज उपाध्याय का सम्मान कीजिए.” जयवर्द्धन सिंह का ये वीडियो वायरल हो रहा है. महंगे वाहन में बैठकर घर तक पहुंचे नवदंपती की खुशी का ठिकाना नहीं है.

महात्मा गांधी पर, कैलाश विजयवर्गीय ने कसा तंज

Kailash Vijayvargiya took a dig at Mahatma Gandhi इंदौर में आयोजित पत्रकारवार्ता में विजयवर्गीय ने कहा कि आज कांग्रेस एसटी, एससी और ओबीसी का आरक्षण छीनकर मुस्लिमों को दे रही है। कर्नाटक में यह ऐसा कर चुकी है। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह महात्मा गांधी की कांग्रेस नहीं है। यह नक्सलियों वामपंथियों और मुस्लिम लीग के लोगों से घिरी हुई है। कांग्रेस के लोग आरोप लगाते हैं कि हमने आरक्षण छीना है जबकि यह काम खुद कांग्रेस ने किया है। जिस कांग्रेस ने कश्मीर में दलितों से आरक्षण छीना और धारा 370 लगाई वह ऐसी बात करती है। यह महात्मा गांधी की कांग्रेस नहीं है। यह नक्सलियों, वामपंथियों और मुस्लिम लीग के लोगों से घिरी हुई है। कांग्रेस के लोग आरोप लगाते हैं कि हमने आरक्षण छीना है, जबकि यह काम खुद कांग्रेस ने किया है। जिस कांग्रेस ने कश्मीर में दलितों से आरक्षण छीना और धारा 370 लगाई वह ऐसी बात करती है। यह बात कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सोमवार को इंदौर में कही।

कांग्रेस नेता मोती सिंह पहुंचे हाईकोर्ट, कहा- मुझे पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया जाए

Congress leader Moti Singh reached High Court, said- I should be declared the authorized candidate of the party कांग्रेस नेता मोती सिंह पटेल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर खुद को कांग्रेस का अधिकृत प्रत्याशी घोषित करने की मांग की है। इंदौर । इंदौर में कांग्रेस पर फूटे बम से घायल होने के बाद अब कांग्रेस के नेताओं ने मोती सिंह पर दाव लगाने पर जोर तो शुरू कर दिए है। मोती सिंह ने हाईकोर्ट में मंगलवार को याचिका लगाई है और अपील की है कि उन्हें कांग्रेस का चुनाव चिन्ह आवंटित कर उम्मीदवार माना जाए। याचिका पर आज दोपहर बाद सुनवाई होने की उम्मीद है । इस मुद्दे पर गए पटेल पटेल के अधिवक्ता विवरंडेलवाल ने बताया कि मोती सिंह ने कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर में अपना नामांकन भरा था, लेकिन अक्षय बम के होने के बाद उनका फॉर्म रिजेक्ट कर दिया गया था। नियम अनुसार यदि फार्म वाले प्रत्याशी का नामांकन वापस हो जाता है तो वह फॉर्म भी दूसरे प्रत्याशी को मिलना चाहिए इसलिए उनका अधिकार बनता है कि वह कांग्रेस के औपचारिक प्रत्याशी माना जाए। इसी आधार पर हमने याचिका लगाई थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है और यह दोपहर बाद बेंच में लिस्टेड होगी। 13 मई को होना है मतदान इंदौर संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए 26 प्रत्याशियों ने नामांकन फार्म जमा किए थे। जांच के बाद कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकाटी आशीष सिंह ने तीन उम्मीदवारों सुनील तिवारी (निर्दलीय), रविंद्र लोखंडे (निर्दलीय) तथा मोती सिंह (इंडियन नेशनल कांग्रेस) के नामांकन निरस्त कर दिए थे। इसके बाद 23 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। आपको बता दें कि इंदौर में 13 मई को वोटिंग होना है। भाजपा ने षड्यंत्र कर बम को मजबूर किया नामांकन वापस लेने पर, यह तीन दबाव पड़ गए बम पर भारी 1- सबसे बड़ा दबाव बम पर महिला संबंधी मामले का था। इसमें एक पुरानी शिकायत को हवा दी जा रही थी और इसमें एक गंभीर मामले में केस दर्ज कराने की तैयारी हो गई थी। इस दबाव को बम सहन नहीं कर पाए। यह सबसे बड़ी वजह बनी। 2- खजराना थाने में 17 साल पुराने मामले में हाल ही में गवाह के बयान बाद उन पर मारपीट, जान से मारने की धमकी के बाद गंभीर धारा हत्या के प्रयास 307 को बढ़ाने की प्रक्रिया शुरु हो गई थी। यह भी एक दूसरी वजह बनी। 3- एक तीसरा कारण बीजेपी ने उनके नाम घोषित होने के बाद ही कॉलेज की गड़बड़ियों में घेरना शुरु कर दिया था। यहां पर फैकल्टी की अनियमतिता है, मरे हुए प्रोफेसर को फैकल्टी बताया है। कई फैकल्टी है ही नहीं और उनके नाम कॉलेज में बताए गए हैं। इस तरह कॉलेज की मंजूरी ही खटाई में पड़ जाती।

दलबदलू देवाशीष ने बिगाड़ा फूल सिंह का गणित, कड़े मुकाबले में फंसी संध्या

Defector Devashish spoils Phool Singh’s mathematics, Sandhya trapped in tough competition मुरैना। चंबल-ग्वालियर अंचल की मुरैना सीट की तरह भिंड में भी कांग्रेस के बागी ने चुनावी समीकरण प्रभावित कर दिए हैं। मुरैना में कांग्रेस के रमेश गर्ग बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं तो भिंड से कांग्रेस के टिकट पर पिछला लोकसभा चुनाव लड़ चुके देवाशीष जरारिया ने बागी होकर बसपा के हाथी की सवारी की है। दलबदलू देवाशीष के बसपा का प्रत्याशी घोषित हाेने से पहले तक भिंड का चुनाव कांग्रेस के पक्ष में जाता दिख रहा था। पहली वजह भाजपा सांसद संध्या राय की निष्क्रियता से लोग नाराज थे और दूसरा वे पड़ोस के जिले मुरैना से हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस प्रत्याशी फूल सिंह बरैया भिंड जिले से हैं। 4 माह पहले भांडेर से विधानसभा चुनाव बड़े अंतर से जीते हैं और उनकी छवि बड़े दलित नेता की है। अचानक देवाशीष की बगावत और बसपा के टिकट पर मैदान में उतरने से कांग्रेस का गणित गड़बड़ाया है। माना जा रहा है कि देवाशीष कांग्रेस का ज्यादा नुकसान करेंगे। बसपा ने प्रचार तेज भी किया है हालांकि तब भी मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही माना जा रहा है। भाजपा की संख्या कड़े मुकाबले में फंसी दिख रही हैं। हार के बाद भी सक्रिय रहे थे बागी देवाशीषकांग्रेस छोड़कर बसपा से चुनाव लड़ रहे देवाशीष लोकसभा का पिछला चुनाव बड़े अंतर लगभग दो लाख वोटों से हारे थे। लेकिर हार कर वे घर नहीं बैठे थे। क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे। वे पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह के नजदीक हैं। लेकिन इस बार पार्टी ने उनका टिकट काट दिया तो उन्होंने बगावत कर दी। गोविंद सिंह ने भी अपनी पहली प्रतिक्रिया में टिकट वितरण पर नाराजगी व्यक्त की थी। कांग्रेस में लगातार काम करने के कारण वे चुनाव में इस पार्टी को ही नुकसान पहुंचाएंगे। लोगों से बातचीत में भी वे वोट काटने वाले बताए जा रहे हैं। वे मुकाबले में नहीं रहेंगे लेकिन नुकसान कांग्रेस का करेंगे। इसलिए भी क्योंकि वे भी भिंड जिले से हैं, जहां से कांग्रेस प्रत्याशी बरैया हैं। विधानसभा क्षेत्रों में अलग-अलग स्थितिदो जिलों भिंड और दतिया की विधानसभा सीटों को मिला कर बने इस लोकसभा क्षेत्र में कहीं भाजपा मजबूत दिखती है तो कहीं कांग्रेस। दतिया जिले की तीन सीटों में भांडेर से फूल सिंह खुद विधायक हैं इसलिए यहां कांग्रेस बढ़त में दिखती है। दतिया में कांग्रेस ने नरोत्तम मिश्रा जैसे दिग्गज को हराया था, इसलिए यहां भी पार्टी कमजोर नहीं है। सेवढ़ा में मुकाबला बराबरी का बताया जाता है। भिंड जिले की पांच विधानसभा सीटों में से तीन भाजपा और दो कांग्रेस के पास हैं। लेकिन कांग्रेस के फूल सिंह और बसपा के देवाशीष यहां के रहने वाले हैं। भाजपा के अपने तीन विधायक हैं ही। ऐसी स्थिति में तीनों दलों को इस जिले में अच्छे वोट मिल सकते हैं पर मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के बीच ही होना तय है। क्षत्रिय भाजपा से नाराज, ब्राह्मण-वैश्य का समर्थनभिंड क्षेत्र के जातीय समीकरणों पर नजर डालने से पता चलता है कि यहां दलित, पिछड़े, क्षत्रिय, ब्राह्मण और वैश्य वर्ग के मतदाताओं का बोलबाला है। दलित मतदाताओं का ज्यादा हिस्सा कांग्रेस और बसपा के साथ दिखाई पड़ता है। क्षत्रिय भाजपा से नाराज हैं। भिंड जिले में इनकी तादाद ज्यादा है। इनका झुकाव कांग्रेस की ओर है। ब्राह्मण और वैश्य के साथ पिछड़े वर्ग की ज्यादा जातियां भाजपा के साथ दिखाई पड़ती हैं। कांग्रेस के फूल सिंह बरैया पहले बसपा के प्रदेश प्रमुख हुआ करते थे। उन्होंने अपना अलग दल बनाकर भी दलितों के बीच ज्यादा काम किया है। हालांकि उनके कई बयान विवादास्पद रहे हैं। इसकी वजह से ब्राह्मण समाज बरैया को पसंद नहीं करता। चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी और हेमंत कटारे समाज का कितना वोट बरैया को दिला पाते हैं। यह देखने लायक होगा। कई नेता सक्रिय, कई का रुख साफ नहीभिंड लोकसभा सीट में कड़ी टक्कर के बीच कांग्रेस- भाजपा नेताओं की सक्रियता को लेकर भी चर्चा चलने लगी है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह पहले प्रत्याशी चयन को लेकर नाराज थे लेकिन अब सक्रिय नजर आ रहे हैं। फूल सिंह बरैया की नैया पार लगाने की जवाबदारी उनके कंधों पर ही है। उन्होंने ऐलान कर दिया है कि विधानसभा में हार का बदला इस चुनाव में लेंगे। चौधरी राकेश सिंह भी प्रचार में जुटे दिखते हैं। अटेर में अच्छे अंतर से जीते हेमंत कटारे भिंड की बजाय बाहर ज्यादा दिखाई पड़ते हैं। दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव मे भाजपा से बसपा मे गए डॉ रामलखन सिंह वापस भाजपा मे आ गए हैं। भाजपा से बागी होकर बसपा से विधानसभा चुनाव लड़े रसाल सिंह ने भी बसपा छोड़ दी है। हालाकि रसाल सिंह और एक अन्य बागी मुन्ना सिंह भदौरिया का रुख अब तक साफ नही है। ये किसी का प्रचार करते नजर नहीं आ रहे हैं।

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