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एसपी ऑफिस के सामने कार में डिप्टी कमिश्नर की लाश मिलने से हड़कंप

Panic after the dead body of Deputy Commissioner was found in the car in front of SP office

Panic after the dead body of Deputy Commissioner was found in the car in front of SP office ग्वालियर ! एसपी ऑफिस के सामने कार में लाश मिलने से सनसनी फैल गई। कार में जो लाश मिली है वो स्टेट जीएसटी डिप्टी कमिश्नर की है। जैसे ही कार में डिप्टी कमिश्नर की संदिग्ध परिस्थितियों में लाश मिली तो हड़कंप मच गया। तुरंत पुलिसकर्मियों ने सीपीआर दिया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच में जुट गई है। एसपी ऑफिस के सामने कार में मिली लाशग्वालियर में एसपी ऑफिस के ठीक सामने कार में स्टेट टैक्स जीएसटी डिप्टी कमिश्नर रोहित गिरवाल की लाश मिलने से हड़कंप मच गया। संदिग्ध परिस्थितियों में कार में जैसे ही पुलिसकर्मियों ने डिप्टी कमिश्नर को देखा तो तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। पुलिसकर्मियों ने सीपीआर देने की कोशिश भी की लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। डिप्टी कमिश्नर की लाश मिलने की सूचना मिलते ही परिजन व जीएसटी विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और उन्हें हॉस्पिटल ले गए जहां डॉक्टरों ने डिप्टी कमिश्नर रोहित गिरवाल को मृत घोषित कर दिया। आखिर कैसे हुई मौत ?जीएसटी डिप्टी कमिश्नर रोहित गिरवाल की मौत कैसे हुई है फिलहाल इसका पता नहीं चल पाया है। क्या उसकी हत्या हुई या फिर मौत की वजह कुछ और है इन सभी सवालों के जवाब पुलिस तलाश करने में जुट गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों का पता चल सकता है।

राजस्व मंडल में नहीं हुई अध्यक्ष व सदस्यों कि नियुक्तियां हजारों मामले लंबित

Appointments of Chairman and members not made in Revenue Board, thousands of cases pending

Appointments of Chairman and members not made in Revenue Board, thousands of cases pending मध्य प्रदेश के राजस्व मंडल (Revenue Board) में अजब गजब हाल है. दस्तावेज में भले ही नाम चले, लेकिन हकीकत में राजस्व मंडल ग्वालियर ठप पड़ा हुआ है. पिछले 2021 से यहां न कोई केस सुना गया, न ही निराकरण हुआ. यहां दूर-दूर से लोग अपनी जमीन के प्रकरण के निपटारे के लिए आ रहे हैं, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लग रही है. क्योंकि राजस्व मंडल में कोरम पूरा न होने के कारण सुनवाई नहीं हो रही है. भोपाल । मध्य प्रदेश का राजस्व मंडल बेकाम साबित हो रहा है। यहां पर बीते डेढ़ माह से सुनवाई के नाम पर लोगों को सिर्फ तारीख पर तारीख दी जा रही है। दरअसल विभाग में न अध्यक्ष है और न ही सदस्य, ऐसे में सुनवाई के लिए जरुरी कोरम ही पूरा नहीं हो पा रहा है। प्रदेश सुशासन ऐसा है कि शासन भी इस अपने संस्थान में नए अध्यक्ष व सदस्य की नियुक्ति में रुचि नहीं ले रहा है। ऐसे में लोगों का समय और पैसा दोनों ही बर्बाद हो रहे हैं। ऐसे में किसान परेशान होकर वापस लौटने का मजबूर बने हुए हैं। मंडल के अध्यक्ष आईएएस अश्विनी राय 31 मई को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी जगह किसी नए अफसर की पदस्थापना नहीं की गई है। इसकी वजह से तभी से सुनवाई का काम ठप पड़ा हुआ है। दरअसल नियमानुसार अध्यक्ष के अलावा कम से कम दो सदस्यों के रहते सुनवाई की जा सकती है। इसी तरह से एक सदस्य पूर्व एडीजे वीआर पाटिल का भी मंगलवार को कार्यकाल पूरा हो चुका है। इस वजह से अब मंडल में बतौर सदस्य आईएएस उमाकांत उमराव ही बचे हैं। मंडल में सचिव सपना निगम, अवर सचिव अंशु सोनी व रजिस्ट्रार प्रदीप शर्मा हैं। उनके अलावा अन्य कक्षों में ताले लटके रहते हैं। काम नहीं होने की वजह से स्टेनोग्राफर कक्ष में पीए और अन्य कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे आराम करते रहते हैं। सुनवाई नहीं होने की वजह से सदस्य उमाकांत उमराव एवं सचिव सपना निगम के कक्ष भी अधिकांश समय बंद ही रहते हैं। अभिभाषक भी परेशान राजस्व के प्रकरणों में अपने हितग्राहियों की तरफ से पक्ष रखने के लिए जरुर बड़ी संख्या अभिभाषकों का आना जाना लगा रहता है, लेकिन वे भी तारीख बढ़ने की वजह से अधिकांश समय खाली ही रहते हैं। यहां पर मौजूद एक वरिष्ठ अभिभाषक का कहना है कि अश्विनी राय की सेवानिवृत्ति के बाद से सुनवाई बंद है। इससे सबसे ज्यादा किसान परेशान हैं, क्योंकि वह न्यायालय जाने के लिए सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि वैसे भी सरकार ने वर्ष 2018 में नियमों में संशोधन कर राजस्व मंडल को अधिकार विहीन कर दिया है, क्योंकि अब यहां आयुक्त के खिलाफ पुनरीक्षण वर्जित किया जा चुका है। एसडीएम के बाद न्यायालय जाना पड़ता है। इसी तरह एक अन्य वकील भी नई व्यवस्था से खुश नजर नहीं आए। उन्होंने कहा कि सरकार की अनदेखी की वजह से बीते डेढ़ माह से सुनवाई बंद है। अश्विनी राय ने करीब 500 प्रकरणों में सुनवाई तो की, लेकिन वे इन मामलों में निर्णय नहीं द गए, जिसकी वजह से यह मामले भी अटके हुए हैं। मंडल का कोरम अधूरा तो नहीं होता कोई कार्य अध्यक्ष और सदस्यों का कोरम पूरा नहीं होने पर राजस्व मंडल कार्य नहीं करता है। पिछले डेढ़ माह से यही स्थिति है। यहां आने वाले मामलों में लिपिक तारीख बढ़ाने का काम कर रहे हैं। इसलिए न्याय के लिए उम्मीद लगाए बैठे मुवक्किल परेशान हैं। इस सिलसिले में विधानसभा में भी सवाल उठ चुके, लेकिन फिर भी कोरम पूरा करने के लिए नियुक्ति नहीं की गई है। अध्यक्ष का पद अतिरिक्त मुख्य सचिव और सदस्य प्रमुख सचिव स्तर का होता है। ऐसा नही है कि यहां पर पहली बार इस तरह की स्थिति बनी है, बल्कि पूर्व में भी ऐसा ही हाल कई बार रह चुका है। अश्विनी कुमार राय के समय मनु श्रीवास्तव सदस्य थे, लेकिन एक सदस्य की कमी के कारण कोरम अधूरा रहने पर सुनवाई नहीं हो सकी। इसी तरह से दिसंबर 2021 तक राजेश बहुगुणा सदस्य पद पर थे उनके बाद से यह पद खाली रहा। जिससे द्वितीय अपील में आने वाले बंटवारे नामांतरण के प्रकरणों पर सुनवाई नहीं हुई और तारीख आगे बढ़ती रही। गठन का उद्देश्य ही नहीं हो पा रहा पूरा मध्य भारत राजस्व मंडल अध्यादेश 1948 के अधीन राजस्व मंडल का गठन किया गया था। मंडल का गठन मप्र भू राजस्व संहिता 1959 के अन्तर्गत किया गया है। राजस्व मंडल प्रदेश में भू-राजस्व संहिता के अन्तर्गत राजस्व प्रकरणों की अपीलें-निगरानी सुनने की उच्चतम संस्था है। राज्य शासन द्वारा ग्वालियर को मंडल का प्रधान स्थान नियत किया गया है। राजस्व मंडल में द्वितीय अपील आती है। वर्ष 2018 में राज्य शासन ने राजस्व मंडल की समीक्षा करने की शक्ति को खत्म कर दिया था, इसलिए रिवीजन के पुराने मामले ही चल रहे हैं। अब राजस्व मंडल बंटवारे-नामांतरण की द्वितीय अपील सुनता है। सीमांकन तक के मामले यहां नहीं आते हैं, वे सीधे एसडीएम के बाद न्यायालय में ले जाना पड़ते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “अग्रदूत पोर्टल” लांच किया

Chief Minister Dr. Yadav launched “Agradoot Portal”

Chief Minister Dr. Yadav launched “Agradoot Portal” मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार पारदर्शिता के साथ नागरिकों तक पहुंच बनाने एवं लाभार्थियों को योजनाओं संबंधी जानकारी भेजने के लिए संचार क्रांति का बेहतर उपयोग कर रही है। आज मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार किए “अग्रदूत पोर्टल” को लाँच किया है। “सूचना ही शक्ति है” के मंत्र को सार्थक करने वाला अग्रदूत पोर्टल अपने आप में अद्भूत पहल है। किसी भी राज्य के जनसंपर्क विभाग द्वारा नागरिकों की सुविधा एवं त्वरित सूचनाओं के लिए इस तरह की अभिनव पहल पहली बार की गई है। लांचिग के अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पहला मैसेज लाडली बहनों को भेजा। यह मैसेज सावन में रक्षाबंधन के शगुन स्वरूप 1 अगस्त को लाडली बहनों के खातों में ₹250 अंतरित करने संबंधी है । क्या है अग्रदूत पोर्टल मध्यप्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार किया गया अग्रदूत पोर्टल सूचना ही शक्ति है की पहल पर काम करेगा। यह लक्षित समूह तक सिंगल क्लिक में सूचनाएं प्रसारित करने के लिए जनसंपर्क विभाग की अभिनव पहल है। अग्रदूत पोर्टल द्वारा सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रदेश के टारगेट ऑडियंस तक सूचनाएं पहुंचाई जा सकेंगी। पोर्टल के माध्यम से त्रि-स्तरीय रिव्यू के बाद संदेश लोकप्रिय मोबाइल मैसेजिंग एप – व्हाट्सअप पर शेयर किया जाएगा एवं इसके माध्यम से एक साथ मल्टी मीडिया मैसेज ( ग्राफिक्स, टैक्स्ट, लिंक, वीडियो) भी शेयर किए जा सकेंगे। इसके माध्यम से नागरिकों तक आसानी से सूचनाएं पहुंचाई जा सकेंगी। अग्रदूत पोर्टल की विशेषताएँ अग्रदूत पोर्टल सूचना क्रांति के क्षेत्र में अभिनव पहल है। इससे कम समय में लक्षित नागरिकों तक पहुँच बनाई जा सकेगी। सूचना प्रसार, व्यापक संचार, समग्र डेटाबेस का उपयोग, WhatsApp के माध्यम से सूचना का प्रसार, सिंगल क्लिक आधारित, यूजर फ्रेंडली, त्रि-स्तरीय अनुमोदन प्रक्रिया कम समय में संपन्न होगी। श्रेणी अनुसार कर सकेंगे जानकारियाँ अलग-अलग अग्रदूत पोर्टल से प्रदेश के नागरिकों द्वारा चाही गई जानकारियाँ फ़िल्टर की जा सकती हैं। उन्हें श्रेणी अनुसार विभाजित कर मैसेज या सूचनाएं भेजी जा सकेंगी, जैसे उम्र, लिंग, जाति, धर्म, व्यवसाय, विकलांगता, जिला/ स्थानीय निकाय/ क्षेत्र के अनुरूप चयनित कर जानकारी भेज सकेंगे।

अखिलेश यादव की सपा नेताओं को चेतावनी : बीजेपी नेताओं की नो एंट्री, न करें उनकी पैरवी

Akhilesh Yadav's warning to SP leaders: No entry of BJP leaders, do not advocate for them

Akhilesh Yadav’s warning to SP leaders: No entry of BJP leaders, do not advocate for them अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के नेताओं को बीजेपी नेताओं से दूर रहने की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि जो भी बीजेपी नेताओं को समाजवादी पार्टी में लेने की पैरवी करेगा, उसे वो बाहर कर देंगे. ऐसा कहकर अखिलेश अपना माहौल बनाए रखना चाहते हैं. वो ये बताना चाहते हैं कि बीजेपी में भगदड़ मची है. बीजेपी में सब अपने लिए बेहतर रास्ते तलाश रहे हैं. इस बीच उनके लिए चुनौती लोकसभा चुनाव वाले नतीजों को विधानसभा चुनाव में दोहराने की है. यूपी विधानसभा चुनाव साल 2027 की शुरुआत में होने हैं. तब तक समाजवादी पार्टी का माहौल टाइट कैसे रहे, इसीलिए अखिलेश ने चेतावनी वाला ये दांव चल दिया है. अखिलेश यादव दो साल के ब्रेक के बाद फिर से दिल्ली की राजनीति में हैं. सुबह जब वो संसद के लिए निकल रहे थे, पश्चिमी यूपी के एक नेता उनसे मिलने पहुंच गए. वो अखिलेश की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. अखिलेश से मिलाने के लिए वो अपने साथ बीजेपी के एक नेता को लेकर गए थे. न टिकट की गारंटी दी और न मिलने को तैयार हुए अखिलेश वो चाहते थे कि बीजेपी के नेता को अखिलेश टिकट देने की गारंटी दें. मगर, अखिलेश दूसरे मूड में थे. न उन्होंने टिकट की गारंटी दी और न ही बीजेपी के नेता से मिलने को तैयार हुए. बीजेपी नेता दिल्ली में अखिलेश के घर के बाहर अपनी गाड़ी में बैठे रहे. अखिलेश ने तो समाजवादी पार्टी के उस नेता को दोबारा ऐसा काम न करने की नसीहत भी दे डाली. ये सच है कि लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद से ही समाजवादी पार्टी कैंप का जोश हाई है. पार्टी ने अब तक का सबसे बढ़िया प्रदर्शन करते हुए 37 सीटें जीती हैं. जबकि यूपी बीजेपी में घमासान मचा है. आपसी गुटबाज़ी चरम पर है. बीजेपी में एक नेता दूसरे का काम लगाने में जुटा है. ऐसे में बीजेपी के कुछ नेता अभी से समाजवादी साइकिल की सवारी के जुगाड़ में हैं. अचानक अखिलेश से मिलने पहुंचे थे फैजाबाद सांसद फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद इन दिनों हमेशा अखिलेश यादव के आसपास ही नजर आते हैं. अचानक से पार्टी के अंदर और बाहर उनकी अहमियत बढ़ गई है. एक दिन अचानक वो लखनऊ में अखिलेश से मिलने पहुंचे. वो बीजेपी के एक नेता को समाजवादी पार्टी में लेने की जिद करने लगे. अखिलेश ने बहुत समझाया लेकिन अवधेश मानने को तैयार नहीं हुए. अखिलेश यादव दोनों तरह के मजे लेने के मूड में हैं. वो चाहते हैं कि यूपी के गांव-गलियों तक ये बात फैल जाए कि बीजेपी अब डूबती नैया है. वहां नेताओं में पार्टी छोड़ने की होड़ मची है लेकिन लोगों को लेकर वो अपनी पार्टी की सेहत खराब नहीं करना चाहते हैं. दलबदलू नेताओं के कारण उनकी पार्टी में बवाल न हो जाए, इसका वो विशेष ध्यान रख रहे हैं. यूपी के पिछले विधानसभा चुनाव में इस तरह के आरोप अखिलेश पर लगे थे. इसका नुकसान भी उन्हें चुनाव में हुआ. इसीलिए इस बार वो कोई गलती दोहराने के मूड में नहीं हैं.

MSP किया जा सकता है लागू! मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए ये है राहुल गांधी का मेगा प्लान

MSP can be implemented! This is Rahul Gandhi's mega plan to put pressure on Modi government

MSP can be implemented! This is Rahul Gandhi’s mega plan to put pressure on Modi government Rahul Gandhi on MSP: विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को विभिन्न राज्यों के किसान नेताओं के 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें अपने सामने आ रही विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया। संसद भवन परिसर में अपने कार्यालय में आयोजित बैठक के बाद, गांधी ने अपने घोषणापत्र में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी प्रदान करने की कांग्रेस पार्टी की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। MSP की कानूनी गारंटी की जा सकती है लागू उन्होंने कहा कि एक आकलन से पता चला है कि एमएसपी की कानूनी गारंटी लागू की जा सकती है। गांधी ने आगे कहा कि कांग्रेस देश भर के किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए इस महत्वपूर्ण उपाय के लिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं से समर्थन जुटाएगी।अपनी बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “हमने अपने घोषणापत्र में कानूनी गारंटी के साथ एमएसपी का उल्लेख किया है। हमने आकलन किया है और इसे लागू किया जा सकता है।” राहुल गांधी ने कहा, “हमने अभी एक बैठक की, जिसमें हमने तय किया कि हम INDIA गठबंधन के दूसरे नेताओं से बात करेंगे और सरकार पर दबाव डालेंगे कि देश के किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए।” किसानों ने की कांग्रेस नेताओं से मुलाकात बैठक में केसी वेणुगोपाल, राजा बराड़, सुखजिंदर सिंह रंधावा, गुरजीत सिंह औजला, धर्मवीर गांधी, डॉ. अमर सिंह, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और जय प्रकाश भी मौजूद थे। इससे पहले, कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि उनके द्वारा आमंत्रित किए गए किसान नेताओं को संसद परिसर के अंदर नहीं जाने दिया गया। बाद में, किसान नेताओं को संसद में आने की अनुमति तभी दी गई, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनसे मिलने के लिए बाहर जाने का फैसला किया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि क्योंकि वे किसान हैं, इसलिए उन्हें संसद परिसर में प्रवेश करने दिया जा रहा है।उन्होंने कहा, “हमने उन्हें (किसान नेताओं को) हमसे मिलने के लिए यहां बुलाया था। लेकिन वे उन्हें यहां (संसद में) नहीं आने दे रहे हैं। क्योंकि वे किसान हैं, शायद यही कारण है कि वे उन्हें अंदर नहीं आने दे रहे हैं।” इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के नेताओं ने सोमवार को घोषणा की कि वे पूरे देश में केंद्र सरकार के पुतले जलाएंगे और एमएसपी गारंटी को कानूनी बनाने की अपनी मांगों को पूरा करने के लिए एक नया विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। 31 अगस्त को ‘दिल्ली चलो’ इस विरोध के हिस्से के रूप में, वे विपक्ष द्वारा निजी विधेयकों का समर्थन करने के लिए एक “लंबा मार्च” भी निकालेंगे। इसके बाद, प्रदर्शनकारी किसान 15 अगस्त को देश भर में ट्रैक्टर रैली निकालेंगे, जब देश स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) के नेताओं ने कहा कि किसानों का ‘दिल्ली चलो’ मार्च 31 अगस्त को 200 दिन पूरा करेगा और लोगों से पंजाब और हरियाणा सीमा पर खनौरी, शंभू आदि पहुंचने की अपील की। हरियाणा के जींद जिले में 15 सितंबर को एक रैली आयोजित की जाएगी और 22 सितंबर को पिपली में एक और रैली आयोजित की जाएगी।इससे पहले फरवरी में, हरियाणा सरकार ने अंबाला-नई दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैरिकेड्स लगा दिए थे, जब किसान यूनियनों ने घोषणा की थी कि किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी सहित विभिन्न मांगों के समर्थन में दिल्ली तक मार्च करेंगे।

IIT की परीक्षा पास करने के बाद भी बकरी चराने को मजबूर छात्रा, तेलंगाना के CM रेड्डी ने बढ़ाया मदद का हाथ

Telangana CM Reddy extends helping hand

Student forced to graze goats even after passing IIT exam, Telangana CM Reddy extends helping hand तेलंगाना। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी एक आदिवासी लड़की को वित्तिय सहायता देने के लिए आगे आए हैं। आईआईटी, पटना में सीट हासिल करने के बावजूद वित्तीय समस्याओं के कारण राजन्ना सिरसिला जिले की बदावथ मधुलता बकरियां चराने पर मजबूर थी। सीएम रेड्डी करेंगे मददमधुलता ने इस साल के जेईई में अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी के तहत 824वीं रैंक हासिल की थी और आईआईटी, पटना में भी सीट हासिल की थी। हालांकि, वित्तीय बाधाओं के कारण, परिवार फीस और अन्य खर्चों के लिए 2.5 लाख रुपये का इंतजाम नहीं कर सका। मधुलता आगे इंजीनियरिंग भौतिकी में बी.टेक करना चाहती है। मजदूर की बेटी मधुलता पिछले महीने अपने एडमिशन के लिए केवल 17,500 रुपये ही दे पाई थी। हालांकि, गरीब परिवार के पास ट्यूशन फीस और अन्य खर्चों के लिए 2.51 लाख रुपये का इंतजाम नहीं कर सका। अपने पिता के बीमार होने के कारण मधुलता को परिवार का भरण-पोषण करने के लिए गांव में बकरियां चराने के लिए मजबूर होना पड़ा। फीस भरने की अंतिम तिथि 27 जुलाईआदिवासी कल्याण जूनियर कॉलेज, जहां से मधुलता ने 12वीं कक्षा पास की थी, के संकाय ने अधिकारियों से लड़की की मदद करने की अपील की थी, क्योंकि फीस भरने की अंतिम तिथि 27 जुलाई तक ही है। राज्य सरकार ने आदिवासी लड़की की दुर्दशा पर ध्यान दिया और उसकी शिक्षा जारी रखने में मदद के लिए वित्तीय सहायता के आदेश जारी किए। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने वित्तीय कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद प्रतिष्ठित संस्थान में सीट हासिल करने के लिए मधुलता को बधाई दी। 1 लाख रुपये की ट्यूशन फीस माफमुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बुधवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि आदिवासी कल्याण विभाग ने उसकी शिक्षा जारी रखने के लिए आवश्यक राशि जारी कर दी है। मुख्यमंत्री ने कामना की वह तेलंगाना का नाम रोशन करे। आदिवासी कल्याण आयुक्त द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, छात्रा ने 2,51,831 रुपये की वित्तीय सहायता मांगी। राज्य सरकार ने 1 लाख रुपये की ट्यूशन फीस माफ कर दी और शैक्षणिक शुल्क, छात्रावास शुल्क, जिमखाना, परिवहन, मेस शुल्क, लैपटॉप और अन्य शुल्क के लिए 1,51,831 रुपये जारी किए।

कांग्रेस विधायक के बंगले पर ईडी का छापा, 60 करोड़ के मामले की चल रही पूछताछ

ED raids Congress MLA's bungalow, investigation into Rs 60 crore case ongoing

ED raids Congress MLA’s bungalow, investigation into Rs 60 crore case ongoing टीकमगढ़ ! टीकमगढ़ विधानसभा से कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला के घर पर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने छापा मारा। ईडी की टीम लगातार कार्रवाई कर रही है। ये कार्रवाई ईडी ने विधायक और पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह बुंदेला के निवास लाल दरवाजा पर बुधवार तड़के 5 बजे शुरू की थी। अब तक मिल रही जानकारी के मुताबिक मामला करीब 60 करोड़ के फ्रॉड का बताया जा रहा है। बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले भी असम पुलिस ने ऐसी ही दबिश दी थी। इस समय यादवेंद्र सिंह बुंदेला से पूछताछ किए जाने की जानकारी मिल रही है। पुलिस और सुरक्षा बल तैनात टीकमगढ़ के पुलिस अधीक्षक रोहित का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसी जांच कर रही हैं। मकान के बाहर सीआरपीएफ और मध्य प्रदेश सशस्त्र पुलिस बल के जवान तैनात किए गए हैं, जो किसी को अंदर या बाहर नहीं जाने दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के बाद मामले की जानकारी दी जाएगी। जानें कौन हैं यादवेंद्र सिंह बुंदेला यादवेंद्र सिंह बुंदेला स्टूडेंट लाइफ से ही कांग्रेस में एक्टिव रहे हैं। 1983 के उपचुनाव में पहली बार विधायक चुने गए थे। इसके बाद 1985, 1993, 1998, 2008 और 2023 में विधानसभा का चुनाव जीते हैं। यादवेंद्र सिंह बुंदेला कांग्रेस के सीनियर नेता हैं। वे पांचवीं बार टीकमगढ़ विधानसभा सीट से विधानसभा का चुनाव जीते हैं। 1995 से 1998 तक दिग्विजय सिंह सरकार में मंत्री रह चुके हैं। उन्हें दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता है। उमा भारती को दे चुके हैं चुनावी मात यादवेंद्र सिंह बुंदेला 2008 के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा में आए थे। तब विधानसभा चुनाव में उमा भारती अपनी अलग पार्टी बनाकर चुनाव में उतरी थीं। जहां उन्होंने खुद अपने गृहनगर टीकमगढ़ से चुनाव लड़ा था। लेकिन यहां उन्हें यादवेंद्र सिंह बुंदेला से हार का सामना करना पड़ा था।

कटनी के झिन्ना की खदान का वन भूमि प्रकरण में कंसोटिया के आदेश को वर्णवाल ने बदला

Varnwal changed the order of Consotiya in the forest land issue of Jhinna mine of Katni.

Varnwal changed the order of Consotiya in the forest land issue of Jhinna mine of Katni. भोपाल। अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल ने पूर्व एसीएस वन जेएन कंसोटिया के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें कटनी जिले की तहसील ढीमरखेड़ा के ग्राम झिन्ना की खदान के मामले में सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी वापस लेने का आदेश दिया था। अपने आदेश को तत्काल अमल में लाने के लिए कंसोटिया ने बाकायदा डीएफओ कटनी को कारण बताओं नोटिस की तलब किया था। यहां यह भी तथ्य उल्लेखनीय है कि जब वर्णवाल प्रमुख सचिव वन थे तब उन्होंने भी एसएलपी वापस लेने का आदेश जारी किया था। अब वही बता सकते है कि वे तब सही थे या फिर अब..? गत दिवस वन विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने वन मुख्यालय को निर्देश दिये हैं कि यदि यह केस अब तक वापस नहीं लिया गया है तो केस वापस लेने की कार्रवाई आगामी आदेश तक रोक दी जाये। वर्णवाल के आदेश के बाद जंगल महकमे में लाख टके का सवाल उठ रहा है कि आखिर किस अदृश्य शक्ति के दबाव में आकर पूर्व एसीएस कंसोटिया ने एसएलपी वापस लेने का आदेश जारी किया था। एसएलपी वापस लेने संबंधित आदेश जारी करने के पूर्व 13 अक्टूबर 23 को अपर मुख्य सचिव वन कंसोटिया की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। बैठक में अतुल कुमार मिश्रा सचिव वन, अशोक कुमार पदेन सचिव, आरके गुप्ता तत्कालीन वन बल प्रमुख, अतुल कुमार श्रीवास्तव तत्कालीन पीसीसीएफ वर्किंग प्लान और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक भू अभिलेख डॉ वीएस अन्नागिरी भी उपस्थित थे। यह बैठक में ग्राम झिन्ना एवं हरैया तहसील ढीमरखेड़ा जिला कटनी में स्वीकृत खनिज पट्टे विवाह के निराकरण के लिए बुलाई गई थी। उल्लेखनीय है कि उक्त खदान के वन भूमि में आने के कारण इस पर रोक लगाई गई थी परन्तु खदान स्वामी हाईकोर्ट से जीत गया था जिस पर वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट में 2017 से लंबित है मामला क्या है मामला-शिकायती पत्र के मुताबिक, कटनी के खनन कारोबारी आनंद गोयनका मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका को मध्य प्रदेश की तत्कालीन दिग्विजय सरकार के कार्यकाल में 1994 से 2014 तक की अवधि के लिए 48.562 हेक्टेयर भूमि पर खनिज करने का पट्टा मिला था। खनिज पट्टा आवंटित होने की पीछे भी बहुत कुछ छिपा है। दरअसल मध्य प्रदेश शासन ने ग्राम झिन्ना तहसील ढीमरखेड़ा जिला कटनी के वन क्षेत्र की 48.562 हेक्टेयर भूमि पुराना खसरा नम्बर 310, 311, 313, 314/1, 314/2, 315, 316, 317, 318, 265, 320 में खनिज के लिए एक अप्रैल 1991 में 1994 से लेकर 2014 तक की अवधि के लिए निमेष बजाज के पक्ष में खनिज पट्टा स्वीकृत किया था। जिसे वर्ष 1999 में मध्य प्रदेश शासन के खनिज विभाग के आदेश से 13 जनवरी 1999 को उक्त खनिज पट्टा मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका प्रोप्राइटर आनंद गोयनका के पक्ष में हस्तांतरित किया गया। लेकिन साल 2000 में वन मंडल अधिकारी कटनी के पत्र के आधार पर कलेक्टर कटनी ने आदेश पारित कर लेटेराइट फायर क्ले और अन्य खनिज के खनन पर रोक लगा दी थी। वन भूमि का इतिहास-ग्राम झिन्ना की भूमि जमींदारी उन्मूलन के बाद वन विभाग को वर्ष 1955 में 774.05 एकड़ भूमि प्रबंधन में मिली थी। जो वर्ष 1908-09 से 1948-49 तक जमींदार रायबहादुर खजांची, बिहारी लाल व अन्य के नाम दर्ज थी जिसे 10 जुलाई 1958 की सूचना और एक अगस्त 1958 की प्रकाशन तिथि से संरक्षित वन घोषित किया गया। इसके बाद भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 4 की अधिसूचना क्रमांक डी-3390-3415-07-दस-3 दिनांक 24 सितम्बर 2007 प्रकाशन दिनांक 14 दिसम्बर 2007 से वनमंडल झिन्ना के अंतर्गत ग्राम झिन्ना के खसरा नम्बर 304, 333, 320 में कुल रकबा 153.60 एकड़ क्षेत्र अधिसूचित कर एसडीएम ढीमरखेड़ा को वन व्यवस्थापन अधिकारी नियुक्त किया गया जो कि वन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज है। वर्ष 2019-19 में एसडीएम ढीमरखेड़ा (वन व्यवस्थापन अधिकारी) द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक /01अ-19(4)/2018-19 में पारित आदेश दिनांक 18-9-2019 के अंतर्गत उल्लेख किया गया कि वादग्रस्त भूमि खसरा नम्बर 320 वर्ष 1906 से 1951 तक मालगुजारी की जमीन नहीं थी। एसडीएम ढीमरखेड़ा (वन व्यवस्थापन अधिकारी) द्वारा पारित आदेश दिनांक 18-07-2008, 18-10-2011 और 18-09-2019 को पारित प्रत्येक आदेश में उक्त भूमि को वन भूमि मानने से इंकार किया। जिसे कलेक्टर कटनी द्वारा अपने आदेश दिनांक 4-मार्च 2010, 19-मार्च -2013 और 19-दिसम्बर -2019 के माध्यम से एसडीएम ढीमरखेड़ा (वन व्यवस्थापन अधिकारी) द्वारा पारित आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगाई गई है।

आकाशीय बिजली गिरने से एक युवक की मौत, एक दर्जन मवेशियों ने भी तोड़ा दम

One young man died due to lightning, a dozen cattle also died

One young man died due to lightning, a dozen cattle also died शहडोल ! आकाशीय बिजली गिरने से खेत में काम कर रहे एक युवक की मौत हो गई। वहीं, जंगल में आकाशीय बिजली गिरने से चपेट में आए एक दर्जन से अधिक जानवरों ने भी दम तोड़ दिया। सीधी थाना क्षेत्र के बनसुकली गांव में खेत में धान की रोपाई करते समय आकाशीय बिजली गिरने से 23 वर्षीय युवक की मौके पर मौत हो गई है। पुलिस ने बताया कि गनपत अपने अन्य साथियों के साथ खेत में रोपाई का काम कर रहा था, इस दौरान उसके पास आकाशीय बिजली गिर गई। जिसकी चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के दौरान तेज गर्जना होने पर गनपत के अन्य साथी सुरक्षित स्थान में चले गए, जिससे वह इसकी चपेट में आने से बच गए। पुलिस ने घटना स्थल पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा। इधर, ब्यौहारी थाना क्षेत्र के साखी गांव के जंगल में एक दर्जन से अधिक मवेशी चर रहे थे, इस दौरान तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली जंगल में स्थित एक पेड़ में गिरी, जिसके नीचे पानी से बचने के लिए खड़े एक दर्जन से अधिक गाय और बकरी की मौत हो गई।सूचना पर पहुंची डायल हंड्रेड पुलिस की टीम मवेशियों के मालिक का पता लग रही है। पुलिस का कहना कि ग्रामीणों ने जंगल में मवेशी छोड़ दिए थे, इस दौरान तेज बारिश के साथ गिरी आकाशीय बिजली की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई।

बजट में भेदभाव का आरोप… संसद के अंदर और बाहर विपक्ष का हंगामा

Allegation of discrimination in the budget… Opposition ruckus inside and outside the Parliament

Allegation of discrimination in the budget… Opposition ruckus inside and outside the Parliament नई दिल्ली (Parliament Monsoon Session 2024)। देश का विपक्ष लोकसभा में पेश आम बजट 2024-24 (Union Budget 2024-25) से खुश नहीं है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार ने गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आरोपों से इनकार किया है। इस बीच, इस मुद्दे पर बुधवार को विपक्ष ने संसद के बाहर और अंदर प्रदर्शन किया। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्ष के नेताओं ने संसद के बाहर प्रदर्शन किया। इसमें सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव समेत तमाम बडे़ नेता शामिल हुए। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ‘कई राज्यों को बजट में न्याय नहीं मिला है। हम न्याय के लिए लड़ रहे हैं।’ वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा, ‘हम सभी मांग कर रहे थे कि किसानों को एमएसपी मिलना चाहिए, लेकिन समर्थन मूल्य किसानों के बजाय उन गठबंधन सहयोगियों को दिया जाता है जो अपनी सरकार बचा रहे हैं। सरकार महंगाई को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी है। उत्तर प्रदेश को कुछ नहीं मिला।’ लोकसभा में हंगामा, स्पीकर ने लगाई फटकारवहीं, लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। प्रश्नकाल नहीं चलने दिया। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने फटकार लगाई। इससे पहले बजट पेश होने के बाद मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर विपक्ष दलो के प्रमुख नेताओं की बैठक हुई थी। बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी, लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई, राकांपा प्रमुख शरद पवार, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत, तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक-ओ-ब्रायन और कल्याण बनर्जी, द्रमुक के टीआर बालू, जेएमएम की महुआ माझी, आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा और संजय सिंह समेत अन्य नेता शामिल हुए थे। बजट से खुश नहीं विपक्ष, बनाई विरोध की रणनीतिबैठक में तय हुआ है कि सरकार के भेदभाव के खिलाफ विरोध जताया जाएगा।सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी नेता संसद भवन का बाहर जुटेंगे।प्रमुख विपक्षी नेता संसद भवन की सीढ़ियों पर खड़े होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।कांग्रेस शासित राज्यों के CM 27 जुलाई को नीति आयोग की बैठक में नहीं जाएंगे।

चार पुलिसकर्मियों द्वारा दलित की बेरहमी से पिटाई : कसूर सिर्फ पुलिस वाहन को ओवरटेक करने पर

Dalit brutally beaten by four policemen: Guilty only for overtaking police vehicle

Dalit brutally beaten by four policemen: Guilty only for overtaking police vehicle छतरपुर में चार पुलिसकर्मियों द्वारा दलित की बेरहमी से पिटाई का मामला सामने आया है। बताया गया कि पीड़ित ने पुलिसकर्मियों के वाहन के आगे से अपनी बुलेट निकाली थी, जिसके बाद पुलिसकर्मी उसे थाने ले आए और यहां उसकी जमकर पिटाई की। एसपी ने मामले की जांच करवाई और पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया। छतरपुर। छतरपुर जिले के खजुराहो में एक दलित व्यक्ति को पुलिस के वाहन से आगे से अपनी बुलेट निकालना महंगा पड़ गया। पुलिस ने युवक को पकड़कर गाड़ी में बैठाया और थाने ले जाकर पीटा। बताया गया कि इस मामले को लेकर वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद एसपी ने मामले की जांच कराई और दोषी पाए जाने पर एक एएसआई सहित तीन पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया। छतरपुर एसपी आगम जैन ने बताया कि मामले को संज्ञान में आते ही कार्रवाई की गई। ये है मामलामामला खजुराहो के वार्ड क्रमांक सात का है। जहां पिछले सप्ताह नगर परिषद में सफाई का काम करने वाले रोहित ने पुलिसकर्मियों के वाहन के आगे से बुलेट निकाली थी। रोहित और उसके परिजनों के अनुसार, इस घटना के बाद पुलिस ने उसे जबरदस्ती अपनी गाड़ी में बैठाया जिसका वीडियो उसी के परिवार के लोगों ने बनाया था। रोहित के घर के लोग छोड़ने के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन पुलिस रोहित को पकड़कर थाने ले गई और यहां रोहित की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसके शरीर में जगह-जगह गंभीर चोट के निशान बन गए। यह बोले जांच अधिकारीइस मामले को लेकर खजुराहो एसडीओपी सलिल शर्मा ने जांच की उनकी जांच में पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया। इसके बाद एसपी ने तीनों पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया।

प्रदेश के टीकमगढ़ में कपड़ा दुकान में भीषण आग, अंदर फंसे दो लोग

Massive fire in textile shop in Tikamgarh of the state, two people trapped inside

Massive fire in textile shop in Tikamgarh of the state, two people trapped inside टीकमगढ़। शहर में एक कपड़ा दुकान में भीषण आग लग गई। बताया जाता है कि अंदर दो लोग फंसे हुए हैं। इन्‍हें निकालने का प्रयास किया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार शहर में अस्तोन एम्पोरियम (कपड़ा दुकान) की बिल्डिंग में यूनियन बैंक संचालित होती है। यहां आग लगी। आगजनी के बाद बैंक के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं, पर वह नुकसान के संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी अभी नहीं दे रहे हैं, हालांकि बैंक में काफी धुंआ भरने की बात जरूर कही गई। पता चला है कि अस्तोन एंपोरियम संचालक मनोज जैन, उनकी मां, पत्नी और दो बच्चे सकुशल हैं ,जबकि उनके चाचा व चाची अभी भी अंदर फंसे हुए हैं। इनकी कुशलता को लेकर परिजन आशंकित हैं। दोनों का रेस्क्यू जारी है। अग्नि शमन दल आग पर पूरी तरह काबू पाने का प्रयास कर रहा है। यह दुकान कोतवाली थाना क्षेत्र के नगर भवन के सामने स्थित है। बताया जाता है कि आग दुकान में अचानक भड़की। आसपास के मकानों में भी आग फैलने का खतरा है। आग कैसे लगी अभी यह पता नहीं चल सका है। टीकमगढ़ सहित आसपास के तहसील क्षेत्रों से फायर ब्रिगेड को आग पर काबू पाने के लिए बुलाया गया है।

महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में शिंदे सरकार ने लिए छह बड़े फैसले

Shinde government took six big decisions in Maharashtra cabinet meeting

Shinde government took six big decisions in Maharashtra cabinet meeting Maharashtra Cabinet Meeting Decisions: महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं. शिंदे-फडणवीस-पवार सरकार की इस बैठक में कुल छह अहम फैसले लिए गए. यह बैठक आज मंत्रालय में आयोजित की गई, जिसमें राज्य के कई मुद्दों पर चर्चा हुई. आशा स्वयंसेवकों के लिए खुशखबरीABP माझा के अनुसार, बैठक में आशा स्वयंसेवकों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है. ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में मृत्यु होने पर आशा स्वयंसेवकों को 10 लाख रुपये और स्थायी विकलांगता की स्थिति में 5 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी. यह योजना 5 अप्रैल 2024 से लागू की गई है. राज्य में कुल 75,568 आशा स्वयंसेवक कार्यरत हैं. चरवाहों के लिए बड़ा एलानइसके अलावा, चरवाहों के लिए राजे यशवंतराव होलकर महामेश योजना को जारी रखने का फैसला लिया गया है. इस योजना के तहत लाभार्थियों के खातों में सीधे राशि जमा की जाएगी. इस योजना को वर्ष 2017 में धनगर समुदाय के पिछड़ेपन को दूर करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था. अधिक लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए योजना में कुछ संशोधन किए गए हैं. इस वर्ष के लिए 29 करोड़ 55 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे और यह योजना हर साल बजट प्रावधानों के अनुसार जारी रखी जाएगी. पशुधन की खरीद के मामले में, सब्सिडी राशि का 75 प्रतिशत लाभार्थियों को 7 दिनों के भीतर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रक्रिया के माध्यम से वितरित किया जाएगा. चारा बीज और बारहमासी घास प्रजातियों की कलमों और बीजों पर सब्सिडी को छोड़कर, अन्य सभी लाभ डीबीटी के माध्यम से दिए जाएंगे. प्रमोशन में आरक्षणदिव्यांग कर्मचारियों के लिए प्रमोशन में आरक्षण 30 जून 2016 से लागू करने का निर्णय भी लिया गया. ग्रुप डी से ग्रुप ए पदों के बीच प्रमोशन में 4 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा. यह लाभ समूह ए के निचले स्तर तक विस्तारित होगा. 30 जून 2016 से, जिस तिथि से कोई विकलांग अधिकारी या कर्मचारी पदोन्नति के लिए पात्र हो जाएगा, उन्हें आरक्षण का लाभ मिलेगा. पदोन्नति का वास्तविक वित्तीय लाभ वास्तविक कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से लागू होगा. किसानों के लिए बड़ा एलानकृषि फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए जल्द से जल्द एक अद्यतन प्रणाली विकसित करने का निर्णय लिया गया, ताकि मुआवजे का भुगतान अधिक पारदर्शी और सटीक तरीके से किया जा सके. जब तक यह व्यवस्था लागू नहीं हो जाती, तब तक प्रचलित तरीके से ही मुआवजा दिया जाएगा. 1 जुलाई, 2024 को हुई कैबिनेट उप-समिति की बैठक में कृषि विभाग द्वारा सामान्यीकृत अंतर वनस्पति सूचकांक (एनडीवीआई) मानदंड के लिए पूरी तरह से अद्यतन प्रणाली तैयार होने तक प्रचलित नीतियों के अनुसार कृषि फसलों को मुआवजा देने का निर्णय लिया गया. ग्रेटर मुंबई में न्यायिक अधिकारियों के लिए किराये के आधार पर 51 फ्लैटों के प्रावधान को मंजूरी दी गई. एक फ्लैट का अधिकतम मासिक किराया 1 लाख 20 हजार रुपये होगा और इस तरह 51 फ्लैटों के लिए एक साल के लिए 51 करोड़ 34 लाख 40 हजार रुपये की मंजूरी दी गई. अंत में, नासिक जिले के एमओयू अंबाद में विस्तार के लिए एमआईडीसी को 16 हेक्टेयर सरकारी जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया. इस जमीन की कीमत 24 करोड़ 2 लाख 40 हजार रुपये है और इसे एमआईडीसी को मुफ्त में सौंपा जाएगा.

आज और कल के लिए बारिश का अलर्ट, अगले पांच दिनों तक कैसा रहेगा मौसम?

MP Weather: Rain alert in 21 districts of the state today

Rain alert for today and tomorrow, how will the weather be for the next five days? RAIN Latest News: मध्य प्रदेश मौसम विभाग ने बुधवार को लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है. एमपी मौसम केंद्र के अनुसार प्रदेश के कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना है. जबकि कुछ जिलों में आशिक बारिश होने का अनुमान है. मौसम विभाग ने लोगों इस दौरान सतर्क रहने को कहा है. मौसम विभाग के अनुसार जिन जिलों में बारिश की संभावना है उनमें सागर, रायसेन, दमोह, छतरपुर, जबलपुर, मंडला, बालाघाट और मुरैना शामिल हैं. इन जिलों में अभी तक सामान्य व उससे अधिक बारिश हो चुकी है. मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉक्टर वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में मध्यम और हल्की बारिश होगी. बुधवार को भी वर्षा का सिलसिला जारी रहेगा. मौसम विभाग के मुताबिक भोपाल, विदिशा, सीहोर, शाजापुर, आगर मालवा, राजगढ़, श्योपुर कला, उज्जैन, देवास, खंडवा, खरगोन, हरदा, नर्मदा पुरम, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुरना, बैतूल, टीकमगढ़, अशोकनगर, पन्ना, कटनी में हल्की से मध्यम बारिश होने की पूरी संभावना है. एमपी के कई जिले में ऐसे हैं जहां पर मध्यम और उससे अधिक वर्षा भी हो सकती है. पूर्वी मध्य प्रदेश में अधिकांश जिलों में सामान्य और उससे अधिक बारिश हो चुकी है जबकि पश्चिमी में मध्य प्रदेश बारिश के मामले में अभी भी पिछड़ा हुआ है. इन जिलों में हल्की बारिश की संभावना मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश होने की भी संभावना जताई है. इनमें डिंडोरी, उमरिया, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी, बुरहानपुर, ग्वालियर, शिवपुरी, बड़वानी, इंदौर, झाबुआ, रतलाम जिले शामिल है. लोगों से सतर्कता बरतने की अपील मध्य प्रदेश मौसम केंद्र का यह भी कहना है कि बुधवार के बाद गुरुवार को भी मध्य प्रदेश के इन जिलों में हल्की बारिश जारी रहेगी. इस बात को ध्यान में रखते हुए लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत है. लोगों को चाहिए कि वो अपनी गतिविधियां मौसम के पूर्वानुमान के मुताबिक ही तय करें. ताकि बारिश होने पर कोई परेशानी न हो.

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