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आईएफएस संगठन से नहीं मिले सीएम और सीएस

The government's order regarding IFS's APAR revision was challenged in the Supreme Court

CM and CS did not meet IFS organization भोपाल ! आईएफएस संगठन के पदाधिकारियों की मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुख्य सचिन वीरा राणा से मुलाकात नहीं हो सकी। ऐसे में एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री सचिवालय और सीएस कार्यालय को एपीएआर में किए गए बदलाव के विरोध पर प्रेजेंटेशन दिया। इसमें संगठन ने आग्रह किया एपीएआर लिखने में वर्ष 2004 से प्रचलित व्यवस्था में बदलाव न हो। संगठन का कहना है कि इस संबंध में 2016 में भी इसी तरह की आदेश शासन द्वारा जारी किए गए थे। संगठन ने अपने प्रेजेंटेशन में उल्लेख किया है कि अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों का एपीएआर अखिल भारतीय सेवा नियम 1970 के तहत जारी कार्यकारी निर्देशों द्वारा शासित होता है, जो अखिल भारतीय सेवा (प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट) नियम, 2007 के लिए प्रासंगिक हैं। संगठन का कहना है कि एपीसीसीएफ तक प्रदर्शन, मूल्यांकन रिपोर्ट सीनियर आईएफएस अधिकारियों द्वारा लिखा जाना चाहिए। पीसीसीएफ स्तर तक के आईएफएस अफसरों के एपीएआर एसीएस और मुख्य सचिव ही लिखे। संगठन ने यह भी कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह आदेश दिया गया था कि जिला कलेक्टर और मंडलायुक्त जिले में कार्यरत आईएफएस संवर्ग के डीएफओ और वन संरक्षक की एपीएआर नहीं लिख सकते आईएफएस संगठन डीओपीएंडटी के विचार से भी सहमत है कि यदि वन अधिकारी सचिवालय या अन्य विभागों में काम कर रहा है जहां उसका तत्काल पर्यवेक्षण अधिकारी गैर-वन अधिकारी है तो उसका सीआर. ऐसे अधिकारी द्वारा लिखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से स्मरण है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2004 में केंद्रीय कार्मिक विभाग ने यह व्यवस्था लागू की थी और सभी राज्यों के लिए अनिवार्य था। वैसे भी भारतीय वन सेवा, एक अखिल भारतीय सेवा, देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य वनों और वन्यजीवों का वैज्ञानिक प्रबंधन, सुरक्षा और संरक्षण करना है।संगठन ने माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए 1995 की रिट याचिका (सिविल) संख्या 202 (टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुल्कपाद बनाम भारत संघ और अन्य) का उल्लेख करते हुए अपने प्रेजेंटेशन में कहा है कि वन विभाग के अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्ट लिखने के लिए सक्षम प्राधिकारी के मुद्दे पर विचार किया था। पर्यावरण और वन मंत्रालय ने बाद में पत्र संख्या 22019/1/2001-IFS-1 दिनांक 8 नवंबर, 2001 के माध्यम से निर्देश जारी किए। सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिनांक 22 सितम्बर 2000 को एक विशेष संदर्भ में जारी किया गया था और इसे अन्य सेवाओं को कवर करने के लिए सामान्यीकृत नहीं किया जाना चाहिए। सीईसी का विचार है कि माननीय न्यायालय के दिनांक 22 सितम्बर 2000 के आदेश में किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है।

भाजपा नगर मंडल आमला ने कारगिल विजय दिवस पर किया शहीदो को नमन

BJP Nagar Mandal Amla paid tribute to the martyrs on Kargil Vijay Diwas.

BJP Nagar Mandal Amla paid tribute to the martyrs on Kargil Vijay Diwas. कारगिल विजय दिवस पर विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे ने किया शाहिद परिजनों का सम्मान । अमर शहीदो को श्रद्धांजलि अर्पित कर भाजपा आमला के कार्यकर्ताओं ने उत्साह के साथ मनाया कारगिल विजय दिवस । हरिप्रसाद गोहेआमला । कारगिल युद्ध के 25 वर्ष पूरा होने पर भाजपा नगर मंडल आमला के कार्यकर्ता पदाधिकारियों ने कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के पराक्रम के प्रतीक कारगिल विजय दिवस को उत्साह के साथ मनाया वही , शहीद स्मारक में युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त अमर शहीदों के बलिदान को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की। आमला सारणी विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे एव भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष रामकिशोर देशमुख के नेतृत्व में कारगिल विजय दिवस मनाया। भाजपा कार्यकर्ता पदाधिकारियों ने आमला स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर भारत माता की जय, अमर शहीदो के जय घोष लगाए। वही विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे ने ग्राम आंधरिया में शहीद स्मारक पर श्रद्धांजली अर्पित कर इस दौरान भाजपा जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र गढेकर के साथ शहीद परिजनों का सम्मान किया । इस अवसर पर भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष रामकिशोर देशमुख ने लेफ्टिनेंट कालिया और कैप्टन विक्रम बत्रा जैसे शहीदों के बलिदानों को याद किया तो भाजपा नेता चिरोजि पटेल एव अशोक नागले ने कारगिल युद्ध के दौरान दुर्गम भौगोलिक एवं विषम परिस्थितियों के बीच भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस एव शौर्य से भरी घटनाओं का उल्लेख भारत के इतिहास में कारगिल विजय दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला । मंडल महामंत्री प्रदीप ठाकुर राजेश पंडोले ने कारगिल विजय दिवस रजत जयंती परअपने विचार व्यक्त किए।इस दौरान भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष रामकिशोर देशमुख भाजपा जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र गढेकर वरिष्ठ भाजपा नेता चिरोंजी पटेल अशोक नागले हरी यादव प्रदीप ठाकुर राजेश पंडोले संजय जैन भोला वर्मा गोपेंद्र सिंह राजेंद्र ढोलेकर मुकेश राठौर नितिन देशमुख मयूर सुर्जेकर गणेश नरवरे नरेंद्र सोनी प्रदीप चौहान विनोद परदेसी अखिलेश गीतकर नितिन खातरकर एल डी साबले जयंत गोहे हरि मालवीय अशोक परिहार समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता पदाधिकारिगण उपस्थित रहे ।

कोल इंडिया को लाइसेंस, मंत्री चौहान बोले- आदिवासियों की एक इंच भी जमीन कंपनी नहीं ले सकती

License to Coal India, Minister Chauhan said - Company cannot take even an inch of tribal land

License to Coal India, Minister Chauhan said – Company cannot take even an inch of tribal land प्रदेश में जोबट के खट्टाली गांव में जमीन के भीतर ग्रेफाइड के भंडार की संभावना के चलतेे केंद्र सरकार ने कोल इंडिया कंपनी को खोज और खनन के लिए एक ब्लाॅक देने का फैसला लिया है। कंपनी ने इस ब्लाॅक की बोली लगाई थी। कंपनी को खनन के लिए लाइसेंस भी देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।इसे लेकर आदिवासी ग्रामीणों को लग रहा है कि कंपनी उनकी जमीन ले लेगी। इसे लेकर आदिम जाति मंत्री कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि ग्रामीणों को घबराने की जरुरत नहीं है।उनकी मुख्यमंत्री मोहन यादव से चर्चा हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जोबट के लोगों की एक इंच भी जमीन किसी कंपनी द्वारा नहीं ली जाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के 89 आदिवासी विकासखंडों मेें पेसा एक्ट कानून लागू किया है। जिसके तहत कोई भी कंपनी बगैर ग्राम सभा और स्थानीय लोगों की सहमति के बगैर कोई फेक्ट्री, कारखाना नहीं लगा सकती है, इसलिए ग्रामीणों को किसी के बहाकावे में आने की जरुरत नहीं है। आलीराजपुर, जोबट का भाजपा संगठन ग्रामीणों के साथ है। कोल इंडिया कंपनी ने लगाई थी बोली ग्रेफाइड को लेकर 9 जुलाई को नीलामी प्रक्रिया शुरू की थी। कोयले के क्षेत्र में काम करने वाली कोल इंडिया कंपनी ने पहली बार ग्रेफाइट की खोज और खनन में दिलचस्पी ली है और आलीराजपुर जिले के खट्टाली का छोटा ग्रेफाइड ब्लाॅक की पसंद किया और खनिज प्रेषण मूल्य का न्यूनतम 150 प्रतिशत प्रीमियम निर्धारित करते हुए बोली लगाई है। ग्रेफाइड का उपयोग लिथियम आयरन बैटरी के लिए होता है। अभी ईवी वाहनों के लिए इसकी डिमांड हैै। केंद्रीय खान मंत्रालय ने देश में 14 ब्लाॅकों की नीलामी की है।

राष्ट्रीय महिला एवं पुरुष क्लासिक पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप TL-AC ,रवि दुबे ने सिल्वर मेडल जीता

National Women and Men Classic Power Lifting Championship TL-AC, Ravi Dubey won silver medal

National Women and Men Classic Power Lifting Championship TL-AC, Ravi Dubey won silver medal भोपाल ! राष्ट्रीय महिला एवं पुरुष क्लासिक पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप ने इंदौर में पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसमें भोपाल से वेस्टर्न सेंट्रल रेलवे में कार्यरत श्री रवि दुबे ने भाग लिया और सिल्वर मेडल जीतकर रेलवे का गौरव बढ़ाया । रवि दुबे भोपाल डिपो TL-AC मे कार्यरत हैंअपनी मेहनत लगन प्रेक्टिस से सिल्वर मेडल जीता

भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रभात झा का निधन, दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस

Senior BJP leader Prabhat Jha passes away, breathed his last in Delhi hospital

Senior BJP leader Prabhat Jha passes away, breathed his last in Delhi hospital प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता प्रभात झा का दिल्ली में निधन हो गया। उन्होंने शुक्रवार सुबह को दिल्ली के मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली। उन्हें करीब 26 दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जानकारी के अनुसार दिमागी बुखार के बाद उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी। जिसके बाद उन्हें भोपाल के बंसल अस्पताल में भर्ती किया गया था। दो दिन बाद प्रभात झा को एयरलिफ्ट कर दिल्ली के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। जहां उनका इलाज चल रहा था। शुक्रवार सुबह झा लंबे संघर्ष के बाद अनंत यात्रा पर निकल गए। उनका अंतिम संस्कार बिहार में उनके पैतृक गांव में किया जाएगा। झा मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष, राज्यसभा सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव भी रह चुके हैं। उन्होंने पत्रकारिता से अपने करियर की शुरुआत की थी। सीएम और पूर्व सीएम पहुंचे थे मिलनेप्रभात झा का दिमागी बुखार के चलते न्यूरोलॉजिकल परेशानियां आ रही थी। जिसके चलते उनको कुछ दिन पहले भोपाल के बंसल अस्पताल में भर्ती किया गया था। जिसके बाद उनका हालचाल जानने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री पहुंचे थे। जिसके बाद उनको एयरलिफ्ट कर दिल्ली शिफ्ट किया गया था। जहां उनको रूटिन इलाज चल रहा था। बिहार के रहने वाले थे प्रभात झाप्रभात झा मूल रूप से बिहार के दरभंगा के हरिहरपुर गांव रहने वाले थे। उनका जन्म 4 जून 1957 को बिहार में हुआ था। वह बिहार से मध्य प्रदेश के ग्वालियर आ गए थे। यहां पर उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई। उन्होंने ग्वालियर के पीजीवी कॉलेज से बीएससी, माध्व कॉलेज से राजनीति शास्त्र में एमए और एमएलबी कॉलेज से एलएलबी की। प्रभात झा के परिवार में पत्नी रंजना झा और दो बेटे है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की। फिर वह राजनीति में आए और भाजपा के सदस्य बन गए। पूर्व राज्यसभा सांसद भी रहे हैं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने जताया दुखभाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने प्रभात झा के निधन पर दुख जताया। उन्होंने लिखा कि प्रझात झा के निधन का अत्यंत दुखद समाचार प्राप्त हुआ। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं शोकाकुल परिजनों को इस भीषण वज्रपात को सहने की शक्ति दें।

Kargil Vijay Diwas: रिमझिम फुहारों के बीच शौर्य स्‍मारक पहुंचे सीएम मोहन यादव

Kargil Vijay Diwas: CM Mohan Yadav reached Shaurya Memorial amid drizzle

Kargil Vijay Diwas: CM Mohan Yadav reached Shaurya Memorial amid drizzle भोपाल। देश में आज कारगिल विजय दिवस की 25वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। यह विशेष दिवस भारतीय सेना के उन जांबाजों को समर्पित है, जिन्‍होंने बेहद बिषम परिस्थितियों में तमाम चुनौतियों को पार करते हुए 26 जुलाई, 1999 को पाकिस्तानी सैनिकों को कारगिल से खदेड़कर दुर्गम चोटियों पर पुन: भारत का तिरंगा फहराया था। शुक्रवार को कारगिल विजय दिवस के इस खास मौके पर मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव राजधानी में रिमझिम फुहारों के बीच अरेरा हिल्‍स पर स्‍थित शौर्य स्‍मारक पहुंचे और पुष्‍पचक्र अर्पित कर बलिदानी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी एवं उनके पराक्रम को याद किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शौर्य स्मारक को भारतीय थल सेना के सौजन्य से वॉर ट्रॉफी के रूप में प्राप्त दो टी-55 टैंक का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम के दौरान राज्यमंत्री धर्मेंद्र लोधी एवं सेना की सुदर्शन चक्र कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग प्रीतपाल सिंह भी उपस्थित रहे।

खजरी खिरिया में भड़की आग, रखी थी ज्वलनशील सामग्री; दो माह पहले फटा था बम

Fire broke out in Khajri Khiriya, inflammable material was kept; The bomb exploded two months ago

Fire broke out in Khajri Khiriya, inflammable material was kept; The bomb exploded two months ago जबलपुर (Jabalpur News)। एमपी के जबलपुर में जहां एक ओर बारिश लगातार हो रही है वहीं दूसरी ओर अमखेरा खजरी-खिरिया बाइपास रोड पर स्थित एक बोरी के गाेदाम में आग गई। आग लगने से हड़कंप मचा रहा। गोदाम में खाली बोरियां और पालीथिन के बैग भी रखे थे जिससे आग तेजी से भड़क उठी। आग भड़कती देख आस-पास रहने वालों भी सकते में आ गए। सूचना मिलते ही दो दमकल वाहन, एक टैंकर भेजालोगों ने आनन-फानन में नगर निगम के दमकल विभाग काे सूचना दी। सूचना मिलते ही दो दमकल वाहन रवाना किए गए बाद में एक टैंकर भी भेजा गया। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। बोरियां, पालीथिन बैग व ज्वलनशील सामग्री रखी थीनगर निगम के दमकल शाखा के मुताबिक शुक्रवार की अपरान्ह 11:50 बजे अमखेरा खजरी खिरिया के पास गोदाम में आग लगने की सूचना मिली थी। तुरंत ही पहले दो दमकल वाहन और फिर एक टैंकर रवाना किया गया। गोदाम में बोरियां, पालीथिन बैग सहित अन्य ज्वलनशील सामग्री रखी थी जिससे आग तेजी से भड़क रही थी। धुंए का गुबार, रिमझिम बारिश के चलते आग फैली नहींआसमान पर धुंए का गुबार छाया रहा हालांकि रिमझिम बारिश के चलते आग फैली नहीं फिर भी करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग बुझा दी गई। आग लगने की वजह शार्ट सर्किट बताई जा रही है। बता दें कुछ दूरी पर शमीम कबाड़ी का गोदाम है, जहां करीब दो माह पहले बम ब्‍लास्‍ट हुआ था। हादसे में मजदूर जान गई थी।

यूपी सरकार का सुप्रीम कोर्ट को कांवड़ यात्रा पर सफाईनामा

UP government's clarification letter to Supreme Court on Kanwar Yatra

UP government’s clarification letter to Supreme Court on Kanwar Yatra उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कांवड़ यात्रा मार्गों पर दुकानों के बाहर नेमप्लेट लगाने को लेकर दिए गए अपने आदेश का बचाव किया है. नेमप्लेट लगाने के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं का विरोध करते हुए यूपी सरकार ने कहा कि उसका इरादा कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से पूरा करवाना है. सरकार ने कहा कि दुकानों के नामों की वजह से पैदा होने वाले भ्रम को दूर करने के लिए ये निर्देश जारी किया गया था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में तीन ऐसे सबूत भी पेश किए, जिनको आधार बनाकर नेमप्लेट लगवाने का फैसला किया गया. सरकार ने तस्वीरों के साथ कुछ ढाबों के उदाहरण दिए. जैसे ‘राजा राम भोज फैमिली टूरिस्ट ढाबा’ चलाने वाले दुकानदार का नाम वसीम है. ठीक ऐसे ही ‘राजस्थानी खालसा ढाबा’ का मालिक फुरकान है. इसी तरह से ‘पंडित जी वैष्णो ढाबे’ का मालिक सनव्वर है. इसकी वजह से भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है. क्यों दिया यूपी सरकार ने नेमप्लेट लगाने का आदेश? यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह चाहती है कि नंगे पैर पवित्र जल ले जा रहे कांवड़ियों की धार्मिक भावना गलती से भी आहत न हो. इसलिए, दुकान के बाहर नाम लिखने का निर्देश दिया गया था. उसने बताया कि कावंड़ मार्ग पर खाने-पीने को लेकर गलतफहमी पहले भी झगड़े और तनाव की वजह बनती रही है. जिस वक्त ये फैसला लागू किया गया था, उस वक्त भी यूपी सरकार ने यही बातें कही थीं. उसका कहना था कि दुकानों के नाम भ्रम पैदा करते हैं. नेमप्लेट विवाद पर विपक्ष ने क्या कहा? विपक्ष ने यूपी सरकार के फैसले को विभाजनकारी बताया था. उसने इसे मुस्लिम विरोधी भी करार दिया था और कहा था इसका मकसद समाज को बांटना है. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने फैसले को संविधान विरोधी बताया था. उन्होंने कहा था, “हमारा संविधान हर एक नागरिक को गारंटी देता है कि उसके साथ जाति, धर्म, भाषा या किसी अन्य आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा. उत्तर प्रदेश में ठेले, खोमचे और दुकानों के मालिकों के नाम का बोर्ड लगाने का विभाजनकारी आदेश हमारे संविधान, हमारे लोकतंत्र और हमारी साझा विरासत पर हमला है.” समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा था कि बीजेपी के लोग समाज में नफरत फैला रहे हैं. इसमें इन लोगों को कामयाबी नहीं मिलने वाली है. जनता ने इन्हें शून्य कर दिया है. कांवड़ यात्रा नेमप्लेट विवाद का मुद्दा संसद में भी गूंजा था, जहां विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया था कि इसके जरिए समाज को बांटा जा रहा है.

कोयम्बटूर में “इंटरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अर्पोच्यूनिटिज इन मध्यप्रदेश” की उपलब्धियां

Achievements of “Interactive Session on Investment Opportunities in Madhya Pradesh” in Coimbatore

Achievements of “Interactive Session on Investment Opportunities in Madhya Pradesh” in Coimbatore भोपाल ! सेशन में 20 से अधिक स्थानीय औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की, जिसमें त्रिपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TEA), द सदर्न इंडियन मिल्स एसोसिएशन (SIMA), द साउथ इंडिया स्पिनर्स एसोसिएशन (SISPA), इण्डियन कॉटन फेडरेशन, द सदर्न इंडिया इंजीनियरिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (SIEMA), अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन कौंसिल, इण्डियन टेक्सप्रेनर्स फेडरेशन प्रमुख हैं। सेशन में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन (DIPIP), पर्यटन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME), साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाओं पर प्रेजेन्टेशन दिए गए।सेशन में केपीआर ग्रुप, शक्ति ग्रुप, केजी डेनिम, लक्स इंडस्ट्रीज़, बॉश्च सॉफ्टवेर, वंडरला हॉलीडेज़, शंकरा आई हॉस्पिटल्स, त्रिवित्रोन सहित 30 से अधिक प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन चर्चा की गई।प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों के लिये कुल 2500 करोड़ रूपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए । एमओयू

पन्ना के किशनगढ़ बफर में मिश्रित वृक्षारोपण के पहले ही वर्ष गायब होने लगे पौधे

Plants started disappearing in the very first year of mixed plantation in Panna's Kishangarh buffer.

Plants started disappearing in the very first year of mixed plantation in Panna’s Kishangarh buffer. भोपाल। पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर जोन की किशनगढ़ रेंज के तहत 50 हैक्टेयर रकबा में 25 हजार पौधों का रोपण किया गया है। इस पौध रोपण पर प्रति एकड़ करीब 2 लाख रुपए खर्च किए जा रहा हैं। इसमें पहले साल के लिए स्वीकृत राशि खर्च कर दी गई है। इसके बावजूद रोपे गए ज्यादातर पौधे एक साल में ही गायब हो गए हैं।बफर जोन की किशनगढ़ रेंज के तहत राईपुरा बीट के कक्ष क्रमांक पी- 454 के तहत 50 हैक्टेयर में पौधरोपण किया जा रहा है। मि​श्रित वृ​क्षारोपण योजना के तहत वर्ष 2023-24 में गड्‌ढा करके 25 हजार पौधों का रोपण किया गया है। स्वीकृत परियोजना के तहत इन पौधों के रखरखाव के नाम पर 10 सालों तक राशि खर्च की जाना है, लेकिन इनमें से ज्यादातर पौधे पहले साल में ही खराब हो गए हैं। तार फेंसिंग निकालकर खकरी बनाने के नाम पर राशि का दुरुपयोग :जिस स्थान पर प्लांटेशन को मंजूर किया गया है। उस स्थान पर विभाग ने अन्य प्रोजेक्ट के तहत तार फेंसिंग करके राशि को खर्च किया। इसके बाद उसी स्थान पर अब पत्थरों की नई खकरी बना दी गई है। इस कारण तार फेंसिंग को निकालकर फेंक दिया गया है अब भी तार मौके पर पड़े हुए हैं। 600 मीटर लंबाई में खकरी बनाकर राशि को बर्बाद किया गया है। इनका कहना 25000 गड्‌ढों की गिनती करने के बाद पौधों का रोपण किया गया है। परियोजना में तार फेंसिंग और पत्थरों की खकरी दोनों स्वीकृत हैं। इसी कारण पुरानी तार फेंसिंग को हटाकर पत्थरों की खकरी को बनाया गया है।प्रतीक अग्रवाल, रेंजर बफर जोन किशनगढ़ रेंज राईपुरा बीट की परियोजना 10 साल के लिए स्वीकृत है। पहले साल में 20 फीसदी पौध सूख सकते हैं। इसके लिए दूसरे साल में बजट रखा गया है। पौधों की गिनती कराई जाएगी। इसमें बड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।अंजना सुचिता तिर्की, फील्ड डायरेक्टर, पन्ना टाइगर रिजर्व

धसान नदी उफान पर, छतरपुर और टीकमगढ़ से टूटा संपर्क, पुल पर 4 फीट ऊपर पानी

Dhasan river is in spate, contact with Chhatarpur and Tikamgarh lost

Dhasan river is in spate, contact with Chhatarpur and Tikamgarh lost, water 4 feet above the bridge. छतरपुर। छतरपुर-टीकमगढ़ मुख्य मार्ग पर धसान नदी उफान पर आ गई। जिससे पुल पर लगभग 4 फीट पानी आ गया। पहले तो थोड़ा बहन होने के कारण लोगों का आगमन अब आगमन जारी था लेकिन जैसे ही पानी का जलस्तर और बढ़ा तो मौके पर मौजूद सुरक्षा बल और पुलिसकर्मियों ने आवागमन बंद कर दिया है और बैरिकेड लगा दिए गए हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की टीम पहुंची। जहां पर बड़ामलहरा एसडीएम प्रशांत अग्रवाल ने बताया है कि मौके पर पुलिस बल मौजूद है। वहीं नदी के आसपास के बसे गांवों के लोगों को जानकारी दी गई है कि नदी के आसपास न जाएं। क्योंकि अचानक धसान नदी पुल पर पानी बढ़ सकता है। जानकारी के मुताबिक छतरपुर टीकमगढ़ जिले की सीमा धसान नदी पर बने बान सुजारा बांध से गेट खोलकर पानी छोडा गया है। जिसके चलते छतरपुर टीकमगढ़ खरीला पुल पर 4 फीट पानी आ गया है। बताया जाता है कि आवागमन अब चालू कर दिया गया है।

वकील को धमकी देते हुए SDM बोले- ‘जो उखाड़ना है, उखाड़ लेना’, आखिर क्या है ?

Threatening the lawyer, SDM said - 'Whatever has to be uprooted, uprooted', what is it?

Threatening the lawyer, SDM said – ‘Whatever has to be uprooted, uprooted’, what is it? रीवा ! एसडीएम और वकील के बीच सिविल केस के एक मामले को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि एसडीएम ने एडवोकेट को यह धमकी दे डाली, “यह मेरा न्यायालय है, आपको जो उखाड़ना है वह उखाड़ लेना”. इस पूरे विवाद को लेकर अभिभाषकों ने संभाग आयुक्त और कलेक्टर एसडीएम के खिलाफ ज्ञापन भी सौंपा है. यह पूरा घटनाक्रम वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. बताया जा रहा है कि पवन कुमार और जितेंद्र कुमार के बीच जमीन विवाद चल रहा है, जिसकी पेशी अनुविभागीय अधिकारी त्योंथर के यहां चल रही है. पेशी के दौरान जब वकील राजेंद्र गौतम दोपहर 2 बजे एसडीएम कार्यालय में पहुंचे तो विवाद शुरू हो गया. निर्धारित समय से लेट आने पर हुआ विवाददरअसल, एसडीएम संजय कुमार जैन का कहना था कि वे दोपहर 12:00 बजे से बैठे हुए हैं जबकि वकील का कहना था कि उनकी पेशी का समय 2.00 बजे निर्धारित किया गया था, इसलिए वे 2.00 बजे पहुंचे. इसी बात को लेकर विवाद धीरे-धीरे बढ़ता चला गया. इस दौरान एसडीएम की ओर से वीडियो भी बनाया गया, जबकि एसडीएम कोर्ट में मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस विवाद के दौरान अन्य एडवोकेट भी राजेंद्र गौतम के समर्थन में एसडीएम कोर्ट में आ गए, तब हंगामा और भी बढ़ गया. प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायतइस पूरे विवाद को लेकर वकीलों ने त्योंथर एसडीएम संजय कुमार जैन की शिकायत संभाग आयुक्त और कलेक्टर से की है. आरोप है कि एसडीएम वकीलों पर दबाव बनाने के लिए अभद्र भाषा का भी उपयोग कर देते हैं. एसडीएम के खिलाफ वकीलों ने कार्रवाई की मांग की है. तारीख बढ़ाने पर शुरू हुआ विवादएसडीएम और वकील के बीच विवाद की शुरुआत उसे समय हो गई. जब एसडीएम ने वकील को समय पर कोर्ट में मौजूद नहीं होने पर तारीख बढ़ा दी. दूसरी तरफ एडवोकेट राजेंद्र गौतम का कहना था कि उन्हें 2 बजे का वक्त दिया गया था, इसलिए 2 बजे कोर्ट में पहुंचे मगर एसडीएम पहले से ही तारीख आगे बढ़ा दी. एडवोकेट का कहना है कि न्याय में देरी भी अन्याय की श्रेणी में आता है इसलिए बार-बार तारीख बढ़ने से उनके क्लाइंट को परेशानी उठाना पड़ रही थी.

एसपी ऑफिस के सामने कार में डिप्टी कमिश्नर की लाश मिलने से हड़कंप

Panic after the dead body of Deputy Commissioner was found in the car in front of SP office

Panic after the dead body of Deputy Commissioner was found in the car in front of SP office ग्वालियर ! एसपी ऑफिस के सामने कार में लाश मिलने से सनसनी फैल गई। कार में जो लाश मिली है वो स्टेट जीएसटी डिप्टी कमिश्नर की है। जैसे ही कार में डिप्टी कमिश्नर की संदिग्ध परिस्थितियों में लाश मिली तो हड़कंप मच गया। तुरंत पुलिसकर्मियों ने सीपीआर दिया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच में जुट गई है। एसपी ऑफिस के सामने कार में मिली लाशग्वालियर में एसपी ऑफिस के ठीक सामने कार में स्टेट टैक्स जीएसटी डिप्टी कमिश्नर रोहित गिरवाल की लाश मिलने से हड़कंप मच गया। संदिग्ध परिस्थितियों में कार में जैसे ही पुलिसकर्मियों ने डिप्टी कमिश्नर को देखा तो तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। पुलिसकर्मियों ने सीपीआर देने की कोशिश भी की लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। डिप्टी कमिश्नर की लाश मिलने की सूचना मिलते ही परिजन व जीएसटी विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और उन्हें हॉस्पिटल ले गए जहां डॉक्टरों ने डिप्टी कमिश्नर रोहित गिरवाल को मृत घोषित कर दिया। आखिर कैसे हुई मौत ?जीएसटी डिप्टी कमिश्नर रोहित गिरवाल की मौत कैसे हुई है फिलहाल इसका पता नहीं चल पाया है। क्या उसकी हत्या हुई या फिर मौत की वजह कुछ और है इन सभी सवालों के जवाब पुलिस तलाश करने में जुट गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों का पता चल सकता है।

राजस्व मंडल में नहीं हुई अध्यक्ष व सदस्यों कि नियुक्तियां हजारों मामले लंबित

Appointments of Chairman and members not made in Revenue Board, thousands of cases pending

Appointments of Chairman and members not made in Revenue Board, thousands of cases pending मध्य प्रदेश के राजस्व मंडल (Revenue Board) में अजब गजब हाल है. दस्तावेज में भले ही नाम चले, लेकिन हकीकत में राजस्व मंडल ग्वालियर ठप पड़ा हुआ है. पिछले 2021 से यहां न कोई केस सुना गया, न ही निराकरण हुआ. यहां दूर-दूर से लोग अपनी जमीन के प्रकरण के निपटारे के लिए आ रहे हैं, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लग रही है. क्योंकि राजस्व मंडल में कोरम पूरा न होने के कारण सुनवाई नहीं हो रही है. भोपाल । मध्य प्रदेश का राजस्व मंडल बेकाम साबित हो रहा है। यहां पर बीते डेढ़ माह से सुनवाई के नाम पर लोगों को सिर्फ तारीख पर तारीख दी जा रही है। दरअसल विभाग में न अध्यक्ष है और न ही सदस्य, ऐसे में सुनवाई के लिए जरुरी कोरम ही पूरा नहीं हो पा रहा है। प्रदेश सुशासन ऐसा है कि शासन भी इस अपने संस्थान में नए अध्यक्ष व सदस्य की नियुक्ति में रुचि नहीं ले रहा है। ऐसे में लोगों का समय और पैसा दोनों ही बर्बाद हो रहे हैं। ऐसे में किसान परेशान होकर वापस लौटने का मजबूर बने हुए हैं। मंडल के अध्यक्ष आईएएस अश्विनी राय 31 मई को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी जगह किसी नए अफसर की पदस्थापना नहीं की गई है। इसकी वजह से तभी से सुनवाई का काम ठप पड़ा हुआ है। दरअसल नियमानुसार अध्यक्ष के अलावा कम से कम दो सदस्यों के रहते सुनवाई की जा सकती है। इसी तरह से एक सदस्य पूर्व एडीजे वीआर पाटिल का भी मंगलवार को कार्यकाल पूरा हो चुका है। इस वजह से अब मंडल में बतौर सदस्य आईएएस उमाकांत उमराव ही बचे हैं। मंडल में सचिव सपना निगम, अवर सचिव अंशु सोनी व रजिस्ट्रार प्रदीप शर्मा हैं। उनके अलावा अन्य कक्षों में ताले लटके रहते हैं। काम नहीं होने की वजह से स्टेनोग्राफर कक्ष में पीए और अन्य कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे आराम करते रहते हैं। सुनवाई नहीं होने की वजह से सदस्य उमाकांत उमराव एवं सचिव सपना निगम के कक्ष भी अधिकांश समय बंद ही रहते हैं। अभिभाषक भी परेशान राजस्व के प्रकरणों में अपने हितग्राहियों की तरफ से पक्ष रखने के लिए जरुर बड़ी संख्या अभिभाषकों का आना जाना लगा रहता है, लेकिन वे भी तारीख बढ़ने की वजह से अधिकांश समय खाली ही रहते हैं। यहां पर मौजूद एक वरिष्ठ अभिभाषक का कहना है कि अश्विनी राय की सेवानिवृत्ति के बाद से सुनवाई बंद है। इससे सबसे ज्यादा किसान परेशान हैं, क्योंकि वह न्यायालय जाने के लिए सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि वैसे भी सरकार ने वर्ष 2018 में नियमों में संशोधन कर राजस्व मंडल को अधिकार विहीन कर दिया है, क्योंकि अब यहां आयुक्त के खिलाफ पुनरीक्षण वर्जित किया जा चुका है। एसडीएम के बाद न्यायालय जाना पड़ता है। इसी तरह एक अन्य वकील भी नई व्यवस्था से खुश नजर नहीं आए। उन्होंने कहा कि सरकार की अनदेखी की वजह से बीते डेढ़ माह से सुनवाई बंद है। अश्विनी राय ने करीब 500 प्रकरणों में सुनवाई तो की, लेकिन वे इन मामलों में निर्णय नहीं द गए, जिसकी वजह से यह मामले भी अटके हुए हैं। मंडल का कोरम अधूरा तो नहीं होता कोई कार्य अध्यक्ष और सदस्यों का कोरम पूरा नहीं होने पर राजस्व मंडल कार्य नहीं करता है। पिछले डेढ़ माह से यही स्थिति है। यहां आने वाले मामलों में लिपिक तारीख बढ़ाने का काम कर रहे हैं। इसलिए न्याय के लिए उम्मीद लगाए बैठे मुवक्किल परेशान हैं। इस सिलसिले में विधानसभा में भी सवाल उठ चुके, लेकिन फिर भी कोरम पूरा करने के लिए नियुक्ति नहीं की गई है। अध्यक्ष का पद अतिरिक्त मुख्य सचिव और सदस्य प्रमुख सचिव स्तर का होता है। ऐसा नही है कि यहां पर पहली बार इस तरह की स्थिति बनी है, बल्कि पूर्व में भी ऐसा ही हाल कई बार रह चुका है। अश्विनी कुमार राय के समय मनु श्रीवास्तव सदस्य थे, लेकिन एक सदस्य की कमी के कारण कोरम अधूरा रहने पर सुनवाई नहीं हो सकी। इसी तरह से दिसंबर 2021 तक राजेश बहुगुणा सदस्य पद पर थे उनके बाद से यह पद खाली रहा। जिससे द्वितीय अपील में आने वाले बंटवारे नामांतरण के प्रकरणों पर सुनवाई नहीं हुई और तारीख आगे बढ़ती रही। गठन का उद्देश्य ही नहीं हो पा रहा पूरा मध्य भारत राजस्व मंडल अध्यादेश 1948 के अधीन राजस्व मंडल का गठन किया गया था। मंडल का गठन मप्र भू राजस्व संहिता 1959 के अन्तर्गत किया गया है। राजस्व मंडल प्रदेश में भू-राजस्व संहिता के अन्तर्गत राजस्व प्रकरणों की अपीलें-निगरानी सुनने की उच्चतम संस्था है। राज्य शासन द्वारा ग्वालियर को मंडल का प्रधान स्थान नियत किया गया है। राजस्व मंडल में द्वितीय अपील आती है। वर्ष 2018 में राज्य शासन ने राजस्व मंडल की समीक्षा करने की शक्ति को खत्म कर दिया था, इसलिए रिवीजन के पुराने मामले ही चल रहे हैं। अब राजस्व मंडल बंटवारे-नामांतरण की द्वितीय अपील सुनता है। सीमांकन तक के मामले यहां नहीं आते हैं, वे सीधे एसडीएम के बाद न्यायालय में ले जाना पड़ते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “अग्रदूत पोर्टल” लांच किया

Chief Minister Dr. Yadav launched “Agradoot Portal”

Chief Minister Dr. Yadav launched “Agradoot Portal” मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार पारदर्शिता के साथ नागरिकों तक पहुंच बनाने एवं लाभार्थियों को योजनाओं संबंधी जानकारी भेजने के लिए संचार क्रांति का बेहतर उपयोग कर रही है। आज मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार किए “अग्रदूत पोर्टल” को लाँच किया है। “सूचना ही शक्ति है” के मंत्र को सार्थक करने वाला अग्रदूत पोर्टल अपने आप में अद्भूत पहल है। किसी भी राज्य के जनसंपर्क विभाग द्वारा नागरिकों की सुविधा एवं त्वरित सूचनाओं के लिए इस तरह की अभिनव पहल पहली बार की गई है। लांचिग के अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पहला मैसेज लाडली बहनों को भेजा। यह मैसेज सावन में रक्षाबंधन के शगुन स्वरूप 1 अगस्त को लाडली बहनों के खातों में ₹250 अंतरित करने संबंधी है । क्या है अग्रदूत पोर्टल मध्यप्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार किया गया अग्रदूत पोर्टल सूचना ही शक्ति है की पहल पर काम करेगा। यह लक्षित समूह तक सिंगल क्लिक में सूचनाएं प्रसारित करने के लिए जनसंपर्क विभाग की अभिनव पहल है। अग्रदूत पोर्टल द्वारा सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रदेश के टारगेट ऑडियंस तक सूचनाएं पहुंचाई जा सकेंगी। पोर्टल के माध्यम से त्रि-स्तरीय रिव्यू के बाद संदेश लोकप्रिय मोबाइल मैसेजिंग एप – व्हाट्सअप पर शेयर किया जाएगा एवं इसके माध्यम से एक साथ मल्टी मीडिया मैसेज ( ग्राफिक्स, टैक्स्ट, लिंक, वीडियो) भी शेयर किए जा सकेंगे। इसके माध्यम से नागरिकों तक आसानी से सूचनाएं पहुंचाई जा सकेंगी। अग्रदूत पोर्टल की विशेषताएँ अग्रदूत पोर्टल सूचना क्रांति के क्षेत्र में अभिनव पहल है। इससे कम समय में लक्षित नागरिकों तक पहुँच बनाई जा सकेगी। सूचना प्रसार, व्यापक संचार, समग्र डेटाबेस का उपयोग, WhatsApp के माध्यम से सूचना का प्रसार, सिंगल क्लिक आधारित, यूजर फ्रेंडली, त्रि-स्तरीय अनुमोदन प्रक्रिया कम समय में संपन्न होगी। श्रेणी अनुसार कर सकेंगे जानकारियाँ अलग-अलग अग्रदूत पोर्टल से प्रदेश के नागरिकों द्वारा चाही गई जानकारियाँ फ़िल्टर की जा सकती हैं। उन्हें श्रेणी अनुसार विभाजित कर मैसेज या सूचनाएं भेजी जा सकेंगी, जैसे उम्र, लिंग, जाति, धर्म, व्यवसाय, विकलांगता, जिला/ स्थानीय निकाय/ क्षेत्र के अनुरूप चयनित कर जानकारी भेज सकेंगे।

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