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हेमंत कैबिनेट बैठक : 6 सितंबर को अहम फैसलों की उम्मीद

Hemant Cabinet meeting on September 6: Important decisions expected

Hemant Cabinet meeting on September 6: Important decisions expected रमेश अग्रवालरांची: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार की कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक 6 सितंबर 2024 को आयोजित की जाएगी। यह बैठक झारखंड मंत्रालय के प्रोजेक्ट भवन स्थित मंत्रिपरिषद कक्ष में शाम 4:00 बजे से शुरू होगी। मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (समन्वय) की ओर से इस बैठक की जानकारी दी गई है। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे। संभावित अहम फैसले इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर चर्चा और मंजूरी की संभावना है। पिछली कैबिनेट बैठक, जो 29 अगस्त 2024 को आयोजित की गई थी, उसमें 44 प्रस्तावों पर मुहर लगी थी। इनमें से कुछ प्रमुख फैसले इस प्रकार थे: आगामी बैठक से उम्मीदें 6 सितंबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में भी कई अहम फैसले लिए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में राज्य की विकास योजनाओं, आर्थिक सुधारों, और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। इसके साथ ही, आगामी त्योहारों को ध्यान में रखते हुए, सरकारी कर्मचारियों और आम जनता के लिए कुछ विशेष घोषणाएं भी की जा सकती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकार द्वारा लिए गए ये निर्णय राज्य की जनता के हित में होंगे और आने वाले समय में इनका प्रभाव राज्य की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को देखते हुए, इस बैठक से राज्य के विकास को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर आवेदन 30 सितम्बर तक

Application on National Scholarship Portal till 30th September

Application on National Scholarship Portal till 30th September भोपाल ! भारत सरकार, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय श्रम कल्याण संगठन जबलपुर द्वारा बीड़ी एवं खदान श्रमिकों के अध्ययनरत बच्चों के लिये वित्तीय सहायता योजना के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में ‘नेशनल स्कॉलरशिपा पोर्टल’ (एनएसपी) पर प्री-मेट्रिक श्रेणी में शिक्षण के लिये आवेदन तिथि 31 अगस्त से बढ़ाकर 30 सितम्बर 2024 तक कर दी गई है। पोस्ट मेट्रिक के लिये आवेदन करने की अंतिम 31 अक्टूबर निर्धारित है। शैक्षणिक सत्र वर्ष 2024-25 के लिये शिक्षा वित्तीय सहायता योजना में मध्यप्रदेश राज्य के बीड़ी, चूना पत्थर, डोलोमाईट, लौ-मैंग्नीज-क्रोम अयस्क खदान श्रमिकों के मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में कक्षा एक से उच्च शिक्षा गृहण करने पर एक हजार रूपये से 25 हजार रूपये तक छात्रवृत्ति स्वीकृत की जाती है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिये पात्र विद्यार्थियों के लिये नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल https://scholarships.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 30 जून से प्रारंभ हो चुकी है, जो कि 30 सितम्बर तक जारी रहेगी। ऑनलाइन आवेदन संबंधी या अन्य किसी प्रकार की जानकारी के लिये जबलपुर मुख्यालय के दूरभाष क्रमांक- 0761-4039-510, 403-9511 एवं 403-9513 और ई-मेल आईडी- wc.jabalpur@rediffmail.com, wcjab.commp.gov.in तथा कल्याण प्रशासक कार्यालय के दूरभाषा क्रमांक- 0731-270-3530 ई-मेल आईडी- waind@mp.gov.in पर संपर्क स्थापित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश परिक्षेत्र में संचालित अपने नजदीकी औषधालय एवं केन्द्रीय चिकित्सालय सागर से जानकारी प्राप्त की जा सकती है। संस्थान द्वारा सत्यापित नहीं किये गये आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

राहुल गांधी ने वायनाड में भूस्खलन पीड़ितों के लिए किया एक माह का वेतन दान, लोगों से भी मदद करने को कहा

Rahul Gandhi donated one month's salary for landslide victims in Wayanad, asked people to help too

Rahul Gandhi donated one month’s salary for landslide victims in Wayanad, asked people to help too पिछले 30 जुलाई को केरल के वायनाड में बड़ी प्राकृतिक आपदा आई थी. यहां आए भूस्खलन में 200 लोगों की मौत हो गई. कई गांव तबाह हो गए. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आज यहां के पीड़ितों की मदद के लिए अपना एक माह का वेतन दान दे दिया है. वायनाड के भूस्खलन पीड़ितों के लिए कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बड़ा कदम उठाया है. राहुल गांधी ने दरियादिली दिखाते हुए अपने एक महीने का वेतन पीड़ितों की मदद के लिए दान दे दिया है. राहुल गांधी ने एक महीने की सैलरी यानी 2.3 लाख की मदद राशि केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के खाते में दान दी है. इस बाबत राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर की. उन्होंने लिखा- वायनाड में हमारे प्रिय भाइयों और बहनों को विनाशकारी त्रासदी का सामना कर रहा है. राहुल गांधी ने आगे लिखा- इस संकट की घड़ी में उन्होंने भारी नुकसान झेला है. उनको हमारे जैसे लोगों की मदद की सख्त दरकार है. वायनाड के पीड़ितों को नुकसान से उबरने के लिए हमारे समर्थन की जरूरत है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि मैंने प्रभावित लोगों की राहत और पुनर्वास के प्रयासों में मदद के लिए अपने पूरे महीने का वेतन दान कर दिया है. देश के जिम्मेदार नागरिकों से अपीलराहुल गांधी ने इसी के साथ देशवासियों से भी मदद की अपील की. उन्होंने कहा कि मैं देश के ईमानदार और संवेदनशील भाइयों से आग्रह करता हूं कि वे जो कुछ भी कर सकते हैं, इस संकट में जरूर योगदान दें. राहुल गांधी ने कहा कि हर छोटे से बदलाव से फर्क पड़ता है. वायनाड हमारे देश का एक खूबसूरत हिस्सा है और हम मिलकर यहां के उन लोगों के जीवन को फिर से पटरी पर लाने में मदद कर सकते हैं. यहां आई आपदा में लोगों ने बहुत कुछ खो दिया है. राहुल गांधी ने इसी के साथ कहा कि मददगार हमारी पार्टी के ऐप के जरिए सुरक्षित तरीके से अपना योगदान दे सकते हैं. उन्होंने लिखा- स्टैंड विद वायनाड. केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मदद राशि जमा करने के लिए नौ सदस्यों की समिति का गठन किया और एक ऐप भी बनाया है. केरल कांग्रेस ने कहा कि इच्छुक लोग सीधे डोनेशन भेज सकते हैं. 30 जुलाई को वायनाड में आई त्रासदीकेरल के वायनाड में पिछले 30 जुलाई को एक बड़ा भूस्खलन आया था. जिससे भारी तबाही मची थी. इस हादसे में 200 लोगों की मौत हो गई थी. कई लोग लापता भी हो गए थे. भूस्खलन के बाद यहां के कुछ गांव बुरी तरह से प्रभावित हुए थे. जिसके बाद राहुल गांधी ने त्रासदी में बेघर हुए लोगों के लिए 100 घर बनवाने का वादा किया था.

जंगल महकमे में पोस्टिंग में हो रही महिला आईएफएस अफसरों की अनदेखी

Women IFS officers are being ignored for posting in the forest department.

Women IFS officers are being ignored for posting in the forest department. गणेश पाण्डेयभोपाल। जंगल महकमे में पॉवर और मैनेजमेंट के चलते महिला आईएफएस अफसरों की पोस्टिंग में अनदेखी की जा रही है। जबकि कुछ महिला अधिकारी तो विषय-विशेषज्ञ भी है फिर भी मुख्यधारा के हाशिये पर हैं। मसलन, इंदौर सर्किल से रिटायर्ड हुए वन संरक्षक नरेन्द्र सनोडिया के रिक्त पद का प्रभार वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने 54 किलोमीटर दूर स्थित उज्जैन सर्किल के वन संरक्षक मस्तराम बघेल को सौंप दिया। जबकि इंदौर सर्किल में ही बघेल से सीनियर 2001 बैच की महिला आईएफएस अधिकारी एवं मुख्य वन संरक्षक पदमाप्रिया बालकृष्णन क्षेत्रीय वर्किंग प्लान ऑफिसर है। वैसे तो इंदौर सर्किल का प्रभार तो पदमाप्रिया को मिलना था पर वह मैनेजमेंट के खेल में पिछड़ गई और प्रमोटी आईएफएस बघेल को दे दिया गया। पूर्व में जब एपीसीसीएफ मनोज अग्रवाल उज्जैन सर्कल में पदस्थ थे तब उन्हें भी इंदौर सर्किल का प्रभार दिया गया था किन्तु तत्कालीन वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने प्रभार सौंपने वाले निर्णय में संशोधन करते हुए इंदौर सर्किल में ही पदस्थ वन संरक्षक आदर्श श्रीवास्तव को प्रभार दे दिया था।इंदौर सर्किल पाने के लिए जो जोर-अजमाइशइंदौर सर्किल में पदस्थ होने के लिए कई आईएफएस अधिकारी पीपी मैनेजमेंट फार्मूले के अंतर्गत प्रयासरत है। जबकि शासन और विभाग प्रमुख को पीपी मैनेजमेंट फार्मूले को दरकिनार कर सीनियर-कम-मेरिट के सिद्धांत पर पोस्टिंग करना चाहिए। यानि पुरानी परंपरा के अनुसार 2001 बैच की महिला आईएफएस मुख्य वन संरक्षक पदमा प्रिया बालकृष्णन इंदौर सर्किल में पदस्थ होने की हकदार हैं। वैसे भी कैडर में इंदौर सर्किल का पद मुख्य वन संरक्षक का ही है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यदि उनकी पोस्टिंग अभी इंदौर सर्किल के मुख्य वन संरक्षक के पद पर नहीं होती है तो वे अगले साल एपीपीसीएफ के पद पर प्रमोट हो जाएंगी। यदि ऐसा हुआ तो वह इकलौती ऐसी अफसर होंगी, जो सर्किल सीसीएफ के पद पर कार्य किए बिना ही एपीसीसीएफ पद पर प्रमोट हो जाएंगी।वाइल्डलाइफ डिप्लोमा धारी करा रही है वीआइपी को दर्शनमहकमे में एक और महिला आईएफएस डॉ किरण बिसेन की योग्यता की अनदेखी की जा रही है। डॉ बिसेन पशु चिकित्सा के साथ-साथ वन्य प्राणी मैनेजमेंट की डिप्लोमा धारी भी है। यही नहीं, वह चीता मैनेजमेंट पर दक्षिण अफ्रीका में ट्रेनिंग भी ले चुकी हैं। इसके पहले बिसेन पेंच नेशनल पार्क में तीन साल से अधिक समय तक उप संचालक के पद पर पदस्थ रह चुकीं है। बावजूद इसके, विभाग ने उन्हें अघोषित तौर पर उज्जैन डीएफओ के पद पर पदस्थ कर वीआईपी और वीवीआईपी को साढ़े तीन साल से दर्शन कराने की जिम्मेदारी दी है। जबकि पेंच नेशनल पार्क में फील्ड डारेक्टर का पद खाली है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में सदस्थ फील्ड डायरेक्टर एवं एपीसीसीएफ एल कृष्णमूर्ति की वन्यप्राणी मुख्यालय में वापसी होने जा रही है। ऐसी स्थिति में यहां भी एक वन्य प्राणी विशेषज्ञ आईएफएस की आवश्यकता है। विभाग में वन्य प्राणी विशेषज्ञ आईएफएस की कमी है।इनकी भी हो रही है अनदेखी1995 बैच की महिला आईएफएस अर्चना शुक्ला की भी वन विभाग ने अनदेखी की है। वे लंबे समय से विभाग की मुख्य धारा के हासिए पर है। वर्तमान में भी वे डेपुटेशन पर एपीसीसीएफ वन विकास निगम में पदस्थ है। इसके पहले भी वे प्रतिनियुक्ति पर लघुवनोपज संघ में पदस्थ रह चुकीं है। वर्तमान में फेडरेसन के प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी में सबसे जूनियर प्रमोटी डीएफओ अर्चना पटेल को पदस्थ किया गया है। पटेल की अनुभवहीनता के कारण फेडरेशन के एमएफपी पार्क के उत्पादन और उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। इसके पहले एमएफपी पार्क के सीइओ के पद पर एपीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों की पोस्टिंग होती रही है। वर्तमान में इस पद के लिए दो महिला अधिकारी हकदार है। पहली एपीसीसीएफ अर्चना शुक्ला और दूसरी 2007 बैच की राखी नंदा, जिन्हें सामाजिक वानिकी में पदस्थ किया गया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि सामाजिक वानिकी का कार्य वन मंडल में पदस्थ सीनियर आईएफएस अधिकारी भी संभाल सकता है। इसके अलावा 2011 बैच की आईएफएस संध्या को तो सबसे अधिक उपेक्षित रही है। वह किसी भी वन मंडल में 5-6 महीने से अधिक टेरिटोरियल डीएफओ नहीं रहीं है। जबकि उनकी कार्य शैली फॉरेस्ट प्रोटक्शन की रही है।

बेखौफ हुए शिकारी जंगल में बिछा रहे करंट, तेंदुए के साथ युवक की मौत जांच जारी

Fearless hunters are spreading current in the forest, investigation into death of young man with leopard

Fearless hunters are spreading current in the forest, investigation into death of young man with leopard शहडोल ! जिले में करंट लगाकर जंगली जानवरों का शिकार करने का मामला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जंगल में करंट लगाकर जंगली जानवर का शिकार करने के दौरान एक युवक के साथ तेंदुए की मौत का मामला प्रकाश में आने के बाद वन विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। घटना गोहपारू वन परिक्षेत्र अंतर्गत चुहिरी सर्किल के कोडार बीट की है। बुधवार की सुबह तेंदूऐ के शव से 100 मीटर की दूरी में एक युवक का शव मिला है। बताया गया कि युवक कमलेश बैगा पिता बिरजू बैगा उम्र 38 वर्ष निवासी ग्राम कुदरी का रहने वाला था, जिसका कोडार बीट के जंगल में तेंदुए के शव के पास ही युवक का शव मिला है। सुबह जंगल की ओर गए ग्रामीणों ने तेंदुए के पास पड़े युवक के शव को देखकर मामले की जानकारी पुलिस के साथ वन विभाग के अधिकारियों को दी। जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी एवं पुलिस मौके पर पहुंच मामले की पड़ताल में जुटी हुई है। जहां यह दोनों शव मिले हैं, वहां 11 हज़ार केवी की लाइन से जंगल में करंट बिछाया गया था। करंट की चपेट में आने से ही दोनों की मौत होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस मामले पर वन विभाग के साथ पुलिस जांच कर रही है। ग्रामीणों ने बताया कि मृतक कमलेश बैगा जंगल में शिकार करने अपने अन्य साथियों के साथ गया था। तभी 11 हज़ार केवी की लाइन से जीआई तार के माध्यम से जंगली जानवरों के शिकार के लिए बिछाए गए करंट की चपेट में युवक खुद आ गया और उसकी मौत हुई है। युवक को करंट लगता देख उसके अन्य साथी वहां से फरार हो गए, कुछ देर उसी रास्ते जा रहा तेंदुआ भी इसकी चपेट में आ गया, जिससे दोनों की ही मौत हो गई। वन विभाग अधिकारी अपनी टीम के साथ घटना स्थल बुधवार की सुबह पहुंचे और जांच कर रहे हैं, रेंजर ने अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा है। आए दिन जंगल में लगाए जाते हैं करंटबीते दिनों केशवाही वन परिक्षेत्र के जंगल में जंगली जानवरों के शिकार के लिए लगाए गए करंट में पिता पुत्री चपेट में आ गए थे, जिससे दोनों बुरी तरीके से झुलस गए थे। ग्रामीणों का यह भी आरोप था कि वन विभाग के अधिकारियों के साठ गाठ से शिकारी यहां शिकार करते हैं। गोपाहरू वन परिक्षेत्र में कई तेंदुए जंगल में विचरण कर रहे हैं। लेकिन वन विभाग की गश्ती पर यह घटना ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अधिकारी तो कागजों में कई बार निर्देश जारी करते रहते हैं। लेकिन मैदानी अमला गस्ती नहीं करता, जिसकी वजह से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। बता दें, जिस बीट में यह घटना घटी है वहां के डिप्टी रेंजर स्वयं मुख्यालय में नहीं रहते। ऐसा विभागीय सूत्रों का कहना है। रेंजर की लापरवाही की वजह से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। लोगों का कहना है कि रेंजर ने जब से वन परिक्षेत्र गोहपारु की कमान संभाली है, तब से जंगल में गश्ती कम हो गई है और मैदानी अमला भी गश्ती नहीं करता, जिसकी वजह से शिकारी बेखौफ हो गए हैं और करंट लगाकर जंगली जानवरों का शिकार कर रहे हैं। गोहपारू रेंजर हेमंत कुमार प्रजापति का कहना है कि लगातार गश्ती की जाती है, जो कर्मचारी मुख्यालय में नहीं रहते उन पर कई बार कार्रवाई की जा चुकी है। तेंदुए के समीप ही युवक का शव मिला है। जंगल में शिकार करने युवक गया था या नहीं, अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।मामले की जांच चल रही है। डॉग एस्कॉर्ट को मौके पर बुलवाया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पिताजी के अवसान पर राजनेताओं ने व्यक्त की शोक संवेदनाएं

Politicians expressed condolences on the demise of Chief Minister Dr. Yadav's father. ujjain mp

Politicians expressed condolences on the demise of Chief Minister Dr. Yadav’s father. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पिताजी सेठ श्री पूनमचंद यादव के अवसान से राजनैतिक, प्रशासनिक और आमजन में शोक व्याप्त है। कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा, मुख्यमंत्री महाराष्ट्र श्री एकनाथ शिंदे, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री संचार तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ, सांसद श्री वी.डी. शर्मा, विभिन्न राजनैतिक दलों के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने सोशल मीडिया पर तथा मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट कर शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। सोशल मीडिया पर शोक संवेदनाओं का क्रम जारी है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में बाबा महाकाल से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की है। राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा तथा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने संदेश में गहरी संदेवनाएं व्यक्त करते हुए प्रभु से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और परिजनों को इस दु:ख की घड़ी में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की है। केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर जारी संदेश में लिखा है कि सिर से पिता का साया उठ जाना जीवन की अपूरणीय क्षति है। दुःख की इस विकट घड़ी में मेरी संवेदना शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। पूज्य पिताजी भले ही भौतिक रूप से साथ नहीं हैं, किंतु उनके आशीर्वाद की छांव सदैव रहेगी। बाबा महाकाल दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह तथा पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ ने भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पिताजी सेठ पूनमचंद यादव के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचऱणों में स्थान देने की ईश्वर से प्रार्थना की है। उप मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ श्री अरुण साव, पूर्व मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ श्री रमन सिंह, लोकसभा सदस्य श्री जगदम्बिका पाल ने भी सोशल मीडिया शोक संवेदना व्यक्त की। केन्द्रीय मंत्री श्री चौहान, केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, सांसद श्री वी.डी. शर्मा, नगरीय विकास एवं आवास, संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं उज्जैन के प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, मंत्री श्री राव उदयप्रताप सिंह, कृषि मंत्री श्री ऐदल सिंह कंषाना, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव श्री एस.एन. मिश्रा, प्रमुख सचिव श्री संजय शुक्ला, प्रमुख सचिव श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह, आयुक्त जनसंपर्क श्री सुदाम खाड़े, डी.जी पुलिस श्री सुधीर कुमार सक्सेना सहित अनेक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, अधिकारियों तथा उज्जैनवासियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के उज्जैन स्थित निवास पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की तथा अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

एमपी गजब: जजमान को कथा सुनाने के लिए आपस में भिड़े कथा वाचक

MP Ghazab: Storytellers clash with each other to narrate the story to Jajman.

MP Ghazab: Storytellers clash with each other to narrate the story to Jajman. रीवा ! प्रसिद्ध चिरहुला हनुमान मंदिर परिसर में दो कथावाचक आपस में भिड़ गए. उनमें जमकर लात-घूंसे चले. बीच सड़क पर लड़ने वाले दोनों कथावाचकों में लड़ाई की वजह जजमान को कथा सुनाने को लेकर हुई. कथावाचकों में हुई लड़ाई को राहगीरों ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया. यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. वायरल विडियो में हनुमान मंदिर के ही दो कथावाचक आपस में भिड़ते नजर आ रहे है. इस दौरान दोनों के बीच मारपीट हुई. दोनों ने एक दूसरे पर जमकर मुक्के बरसाए. बताया जा रहा है कि जजमान को कथा सुनाने के लिए दोनों कथावाचकों के बीच विवाद हो गया था. कथावाचको के बीच हो रही मारपीट की घटना को देखकर आस पास मौजूद लोग दौड़े और दोनों पुजारियों को अलग कराया जिसके बाद विवाद शांत हुआ. चिरहुला हनुमान मंदिर में भिड़े दो कथावाचकमंगलवार को बडी संख्या में श्रद्धालु बजरंग बली के दर्शन करने प्रसिद्ध चिरहुला हनुमान मंदिर जाते हैं. इस दिन बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने के साथ ही कथावाचकों से कथा सुनते हैं. मंगलवार को कुछ श्रद्धालु कथा सुनने हनुमान मंदिर गए थे. उस दौरान मंदिर परिसर में ही उपस्थित एक कथावाचक जजमान से कथा सुनाने के लिए बातचीत कर रहे थे. तभी वहां पर खड़े दूसरे कथा वाचक ने उसी जजमान से बात करनी शुरु कर दी और कम दाम में कथा सुनाने की बात कह दी. कथावाचकों का वीडियो हुआ वायरलइस दौरान जजमान से कथा सुनाने के लिए बातचीत कर रहा पहला कथावाचक आगबबूला हो गया. इसी बात को लेकर दोनों कथावाचको के बीच बहस हो गई. देखते ही देखते दोनों कथावाचक आपस में भिड़ गए और एक दूसरे पर मुक्के बरसाने शुरु कर दिए घटना की बाद मौके पर उपस्थिति लोगो ने बीच बचाव करके मामले को शांत करवाया. उनकी लड़ाई तो समाप्त हो गई लेकिन लड़ाई की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. इस वीडियो को देखकर लोग चर्चाएं कर रहे हैं.

फिल्म इमरजेंसी पर जबलपुर हाई कोर्ट ने लगाई रोक, सेंसर बोर्ड ने कहा- अभी सर्टिफिकेट नहीं दिया

Jabalpur High Court put a stay on the film Emergency, Censor Board said - certificate has not been given yet

Jabalpur High Court put a stay on the film Emergency, Censor Board said – certificate has not been given yet जीतेंद्र श्रीवास्तवभोपाल ! फिल्म ‘इमरजेंसी’ 6 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक नहीं देगी. क्योंकि फिल्म की रिलीज पर एक बार फिर रोक लग गई है. कंगना रनौत की फिल्म पर जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. जहां इस रोक लगा दी गई. दरअसल अभी फिल्म के लिए सिर्फ ऑनलाइन सर्टिफिकेट सीरियल नम्बर ही जारी किया गया है लेकिन अभी इसे सेंसर बोर्ड की ओर से सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है. यही नहीं कंगना की ‘इमरजेंसी’ के ट्रेलर पर भी रोक लगा दी गई है. दरअसल फिल्म के खिलाफ सिख समुदाय के कुछ लोगों ने और प्रतिनिधियों ने फिल्म के कुछ सीन को लेकर आपत्ति जताई है. उन्होंने फिल्म के खिलाफ याचिका दायर की और इसकी स्क्रीनिंग पर रोक लगाने की बात कही, जिस पर हाईकोर्ट ने विचार करने के निर्देश दिए. इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर फिल्म रिलीज होने के बाद भी कोई आपत्ति होती है, तो याचिकाकर्ता कोर्ट आ सकते हैं. बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई‘इमरजेंसी’ को रिलीज कराने और सेंसर सर्टिफिकेट की मांग को लेकर फिल्म की को-प्रोड्यूस कंपनी जी इंटरटेनमेंट इंटरप्राइजेज ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ली है. दायर याचिका में दावा किया कि सेंसर बोर्ड ने मनमाने तरीके और अवैध रूप से फिल्म का सेंसर सर्टिफिकेट रोका है. याचिका को तुरंत सुनवाई के लिए जस्टिस बी पी कोलाबावाला और फिरदौस पूनावाला की खंडपीठ के सामने रखा गया, जिस पर आज सुनवाई होगी. पंजाब में विरोध प्रदर्शनकंगना की इमरजेंसी को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. उनकी फिल्म के खिलाफ पंजाब में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हो रहा है. सिख समुदाय के लोगों का कहना है कि फिल्म में उनकी गलत छवि दिखाई गई है और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है. ‘इमरजेंसी’ में कंगना रनौत पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के किरदार में नजर आएंगी. इस फिल्म की स्टोरी की बात करें तो यह 1975 में लगी ‘इमरजेंसी’ पर आधारित है. कंगना के अलावा फिल्म में अनुपम खेर, श्रेयस तलपड़े, महिमा चौधरी भी अहम रोल निभाते दिखाई देंगे.

DNA का फुल फॉर्म तो जान लेते… योगी के आरोप पर अखिलेश यादव ने कसा तंज?

Had you known the full form of DNA… Akhilesh Yadav took a jibe at Yogi's allegation?

Had you known the full form of DNA… Akhilesh Yadav took a jibe at Yogi’s allegation? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मैनपुरी में दिए ‘डीएनए’ वाले बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा है कि आरोप लगाने से पहले फुल फॉर्म तो जान लेते और अगर जानते भी होते तो बोल नहीं पाते. दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को सपा के गढ़ करहल विधानसभा क्षेत्र में बरनाहल स्थित इंटर कॉलेज में आयोजित जनसभा में बोले थे कि गुंडई और अत्याचार सपा के डीएनए में है. कन्नौज का नवाब सिंह यादव इनका चेहरा है. भाजपा की सरकार में प्रदेश निवेश का हब बन रहा है. हम युवाओं को रोजगार दे रहे हैं, 2017 से पहले ऐसा नहीं होता था. सपा प्रमुख ने किया पलटवारइसी बयान पर पलटवार करते हुए सपा प्रमुख ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि आरोप लगाने से पहले फुल फॉर्म तो जान लेते. इसके बाद उन्होंने डीएनए का फुल फॉर्म लिखा. इस पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा है कि अगर मुख्यमंत्री फुल फॉर्म जानते भी होते तो बोल नहीं पाते. इस पोस्ट में सपा प्रमुख ये आरोप भी लगा रहे हैं कि अरबों-करोड़ों में सांसद-विधायक की भर्ती करवाने वाले लोग जितना कम बोलें, उतना ही उनके सम्मान के लिए अच्छा है. समाजवादी पार्टी के मुखिया का यह पलटवार प्रदेश में होने वाले उपचुनाव से भी जोड़ के देखा जा रहा है. ज्ञात हो कि प्रदेश में 10 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव भाजपा और सपा के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव बन गए हैं. अक्सर होती है तीखी बहसअखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ के बीच अक्सर ऐसी तीखी बहस होती रहती है, जिसमें दोनों एक-दूसरे पर व्यक्तिगत हमला करने से भी नहीं चूकते हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा में एक बार ऐसी ही बहस में योगी ने अखिलेश पर आरोप लगाया था कि अखिलेश ने सत्ता के लिए अपने पिता का अपमान किया है.

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