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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से कर्नाटक से पहुंचा मृतक संजय का शव

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से कर्नाटक से पहुंचा मृतक संजय का शव सीएम कैंप कार्यालय ने की त्वरित कार्यवाही, मुख्यमंत्री का जताया आभार रायपुर कर्नाटक के मंगलुरु में बोट से गिरने के कारण से हुई दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में तपकरा के ग्राम सूंडरु निवासी संजय की मृत्यु हो गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने त्वरित पहल करते हुए जिला प्रशासन को निर्देशित किया। मृतक संजय के परिजनों ने दुर्घटना के बाद मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया से मदद मांगी थी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाई और शव को उनके गृह स्थान सूंडरु पहुंचाया गया। इस कठिन समय में मुख्यमंत्री साय की मदद से परिजनों को संबल मिला। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन पर जिला प्रशासन की तत्परता की सराहना करते हुए परिजनों ने आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस पहल से साबित होता है कि वे हर नागरिक के दुख-दर्द में सहभागी बन रहे हैं और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए तत्पर हैं। मंगलुरु थाना साउथ पुलिस स्टेशन, जिला दक्षिण कन्नड़ में संजय की मृत्यु के बाद उनका शव को हवाई जहाज के माध्यम से कल शाम रांची लाया गया। इसके बाद ’1099 मुक्तांजलि’ शव वाहन की मदद से मृतक संजय का शव उनके गृह ग्राम आज सुबह 5 बजे सूंडरु पहुंचाया गया।

मुख्यमंत्री साय ने रतन टाटा के निधन पर शोक व्यक्त किया

 रायपुर मुख्यमंत्री   विष्णु  देव  साय ने  सुप्रसिद्ध उद्योगपति, पद्म भूषण व पद्म विभूषण से सम्मानित रतन टाटा जी के निधन को अत्यंत दुःखद बताते हुए गहरा  शोक व्यक्त किया है।   साय ने  कहा  कि  रतन  टाटा ने भारतीय उद्योग जगत को सर्वोच्च स्थान पर स्थापित किया। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, मानव कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में उनके योगदान को भारतवासी सदैव याद रखेंगे। उनका सादगी पूर्ण जीवन, नैतिक नेतृत्व और परोपकार की भावना एक मिसाल थी। वह सदैव हमारी यादों में जीवित रहेंगे। उनका निधन भारत और उद्योग जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। देश और समाज में बेहतर बदलाव के लिए उनके द्वारा किए गए अभूतपूर्व कार्य हम सबके लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे। ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों, उनके शुभचिंतकों को संबल प्रदान करने की विनम्र प्रार्थना करता हूं।

भारत ने 82 रन से दर्ज की जीत, सेमीफाइनल की उम्मीदों है बाकी

दुबई भारत और श्रीलंका के बीच महिला टी20 वर्ल्ड कप 2024 का 12वां मैच बुधवार (9 अक्टूबर) को खेला गया. मैच में भारतीय टीम ने 82 रनों से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद बरकरार रखी है. मैच में भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 173 रनों का टारगेट सेट किया. जवाब में श्रीलंकाई टीम 90 रनों पर ही सिमट गई. हरमन और मंधाना ने खेली अर्धशतकीय पारी भारतीय टीम ने पहले बैटिंग करते हुए 3 विकेट पर 172 रन बनाए. टीम के लिए कप्तान हरमनप्रीत कौर और उपकप्तान स्मृति मंधाना ने फिफ्टी जमाई. हरमन ने 27 गेंदों पर नाबाद 52 रनों की आतिशी पारी खेली. जबकि मंधाना ने 38 गेंदों पर 50 रन जड़े. इनके अलावा ओपनर शेफाली वर्मा ने 40 गेंदों पर 43 रन जड़े. मैच में हरमन और मंधाना ने 1-1 छक्का जमाया. जेमिमा रोड्रिग्ज ने 16 और ऋचा घोष ने 6 रन बनाए. श्रीलंका के लिए कप्तान चमारी अट्टापट्टू और अमा कंचना ने 1-1 विकेट लिया. टी20 वर्ल्ड कप में तेज फिफ्टी लगाने वाली भारतीय बैटर 27 – हरमनप्रीत कौर Vs श्रीलंका, दुबई, 2024 31 – स्मृति मंधाना vs ऑस्ट्रेलिया, गुयाना, 2018 32 – हरमनप्रीत कौर vs ऑस्ट्रेलिया, केपटाउन, 2023 33 – हरमनप्रीत कौर vs न्यूजीलैंड, गुयाना, 2018 36 – मिताली राज vs श्रीलंका, बासेतेर, 2010 पॉइंट्स टेबल में भारतीय टीम ने किया सुधार ग्रुप ए में भारत और श्रीलंका दोनों के लिए ही यह टूर्नामेंट का तीसरा मैच था. भारतीय टीम ने अब तक 2 मैच जीते और एक गंवाया है. भारत ने पिछले मैच में पाकिस्तान को 6 विकेट से धूल चटाई थी. श्रीलंका पांचवें पायदान पर है. उसने टूर्नामेंट में एक भी जीत दर्ज नहीं की है. यह मैच जीतने के साथ ही भारतीय टीम पॉइंट्स टेबल में दूसरे नंबर पर पहुंच गई है. साथ ही टीम का नेट रनरेट प्लस में 0.576 पर पहुंच गया है. जबकि मैच से पहले यह माइन में -1.217 था. पॉइंट्स टेबल में फिलहाल ऑस्ट्रेलिया 2 जीत के साथ टॉप पर है. उसका नेट रनरेट 2.524 है. मैच में भारत और श्रीलंका की प्लेइंग-11 भारतीय टीम: शेफाली वर्मा, स्मृति मांधना, जेमिमा रोड्रिग्स, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), ऋचा घोष (विकेटकीपर), दीप्ति शर्मा, सजीवन सजना, अरुंधति रेड्डी, श्रेयंका पाटिल, आशा सोभना और रेणुका ठाकुर सिंह. श्रीलंकाई टीम: विशमी गुणरत्ने, चमारी अट्टापट्टू (कप्तान), हर्षिता समरविक्रमा, कविशा दिलहारी, नीलाक्षी डी सिल्वा, अनुष्का संजीवनी (विकेटकीपर), अमा कंचना, सुगंधिका कुमारी, इनोशी प्रियदर्शनी, उदेशिका प्रबोधनी और इनोका राणावीरा.  

BPSC 70th CCE प्रारंभिक परीक्षा स्थगित, अब इस दिन होगा एग्जाम

पटना बीपीएससी 70वीं CCE परीक्षा अब 17 नवंबर 2024 को नहीं होगा. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने बीपीएससी 70वीं इंटीग्रेटेड संयुक्त प्रतियोगिता प्रारंभिक परीक्षा (BPSC 70th CCE Prelims) आगे टालने का फैसला लिया है. यह परीक्षा अब दिसंबर में आयोजित की जाएगी. बीपीएससी 70वीं सीसीई प्रीलिम्स एग्जाम पहले 17 नवंबर 2024 को आयोजित किया जाना था, जिसे अब दिसंबर तक के लिए टाल दिया गया है. यह परीक्षा अब 13 और 14 दिसंबर 2024 को आयोजित की जाएगी. हालांकि इस परीक्षा के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अभी जारी है, जो 18 अक्टूबर तक चलेगी. इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bih.nic.in पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं. क्यों स्थगित हुई बीपीएससी की परीक्षा? आयोग ने एक पत्र के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों को सूचित किया कि परीक्षा ‘अपरिहार्य कारणों’ से स्थगित कर दी गई है. पत्र में, उन्होंने 7 से 8 लाख बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के परीक्षा में बैठने की संभवना है. उम्मीदवारों की अतनी बड़ी संख्या को समायोजित करने के लिए जिला स्तर पर पर्याप्त संख्या में परीक्षा केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया. वैकेंसी डिटेल्स इस परीक्षा के माध्यम से कुल 1957 रिक्तियों को भरा जाएगा, इनमें 70वीं सीसीई के लिए 1954 रिक्तियां और बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) पदों के लिए 4 रिक्तियां शामिल हैं. इससे पहले कुल 1929 रिक्तियां निकाली गई थीं, जिन्हें बाद में बढ़ा दिया गया है. कैसे करें अप्लाई? स्टेप 1: आधिकारिक वेबसाइट onlinebpsc.bihar.gov.in पर जाएं. स्टेप 2: यदि यह पहली बार आवेदन कर रहे हैं, तो उम्मीदवारों को एक बार पंजीकरण करना होगा. अगर पहले से रजिस्टर्ड हैं, तो वे क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके सीधे लॉग इन कर सकते हैं. स्टेप 3: एप्लीकेशन फॉर्म भरें, फीस जमा करें और जरूरी दिशानिर्देशों के अनुसार सभी वेलिड डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें. स्टेप 4: एक बार डॉक्यूमेंट्स अपलोड हो जाने के बाद, सबमिट बटन पर क्लिक करें. स्टेप 5: आपका फॉर्म जमा हो जाएगा. आगे के लिए कंफर्मेशन पेज डाउनलोड करें और उसका प्रिंटआउट ले लें. एग्जाम पैटर्न 2024 में बीपीएससी 70वीं सीसीई परीक्षा के दो चरण होंगे- एक प्रारंभिक परीक्षा और उसके बाद मुख्य परीक्षा. प्रारंभिक परीक्षा दो घंटे लंबी होगी और इसमें कुल 150 अंकों के ऑब्जेक्टिव टाइप सवाल शामिल होंगे. गलत आंसर के लिए नेगेटिव मार्किंग लागू होगी. प्रारंभिक परीक्षा में क्वालीफाई होने वाले उम्मीदवार मुख्य परीक्षा दे सकेंगे. आवेदन शुल्क सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में 600 रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि अन्य सभी आवेदकों के लिए शुल्क 150 रुपये है. जो लोग पहचान के लिए अपने आधार कार्ड का उपयोग करते हैं उन्हें 200 रुपये का अतिरिक्त बायोमेट्रिक शुल्क भी देना होगा.

सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनाएगा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे पर फैसला

नई दिल्ली अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के अल्पसंख्यक दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट जल्द फैसला सुना सकता है। इसकी संभावना इसलिए है क्योंकि मामले की सुनवाई करने वाली सात सदस्यीय संविधान पीठ की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने की थी जो 10 नवंबर को सेवानिवृत हो रहे हैं। फैसले का अल्पसंख्यक राजनीति पर भी होगा असर 10 नवंबर तक सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ 15 कार्य दिवस बचे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक फरवरी को फैसला सुरक्षित रखा था। अभी तक आठ महीने से ज्यादा बीत चुके हैं। इस मामले में जो फैसला आएगा वह एएमयू का भविष्य तय करने वाला होगा। इससे तय होगा कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान माना जाएगा या नहीं। सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा उसका अल्पसंख्यक राजनीति पर भी असर होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती इस मामले में एएमयू ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पांच जनवरी 2006 के फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने उस फैसले में एएमयू में पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम में मुसलमानों को 50 फीसद आरक्षण रद्द करते हुए कहा था कि एएमयू कभी भी अल्पसंख्यक संस्थान नहीं था, इसलिए पीजी पाठ्यक्रम में मुस्लिम छात्रों को आरक्षण नहीं दिया जा सकता। हाई कोर्ट ने मुस्लिम छात्रों को दिये जाने वाले आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के अजीज बाशा मामले में 1968 में दिए फैसले को आधार बनाया था, जिसमें कहा गया था कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। हाईकोर्ट ने अजीज बाशा फैसले के बाद एएमयू कानून में 1981 में संशोधन कर इसे अल्पसंख्यक दर्जा देने के प्रविधानों को भी रद्द कर करते हुए संशोधन को इसलिए गलत ठहराया था कि इससे सुप्रीम कोर्ट का फैसला निष्प्रभावी किया गया है।   बड़ी पीठ के पास विचार के लिए भेजा गया 12 फरवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने मामले को सात न्यायाधीशों की पीठ को विचार के लिए भेज दिया था। इसके अलावा, 1981 में भी अल्पसंख्यक दर्जे का एक मामला सात न्यायाधीशों को भेजा गया था, उसमें अजीज बाशा फैसले का मुद्दा भी शामिल था। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, संजीव खन्ना, सूर्यकांत, जेबी पार्डीवाला, दीपांकर दत्ता, मनोज मिश्रा और सतीश चंद्र शर्मा की सात सदस्यीय पीठ ने आठ दिनों तक दोनों पक्षों की बहस सुनी। क्या है एएमयू की दलील? एएमयू ने अल्पसंख्यक दर्जे का दावा करते हुए दलील दी थी कि एएमयू की स्थापना मुसलमानों ने की थी। एएमयू ने 1968 के अजीज बाशा फैसले पर भी पुनर्विचार का अनुरोध किया जबकि केंद्र सरकार ने एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे की मांग का विरोध करते हुए कहा था कि न तो एएमयू की स्थापना मुसलमानों द्वारा की गई है और न ही उसका प्रशासन अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित होता है। केंद्र की दलील थी कि एएमयू की स्थापना 1920 में ब्रिटिश कालीन कानून के जरिए हुई थी और उस समय एएमयू ने अपनी मर्जी से अल्पसंख्यक दर्जा छोड़ कर इंपीरियल कानून के जरिए विश्वविद्यालय बनना स्वीकार किया था।

अपनी ही कंपनी में कर्मचारी बनकर रतन टाटा ने की थी शुरुआत

भारत के जाने-माने बिजनेसमैन और टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा का बुधवार देर शाम निधन (Ratan Tata Dies) हो गया. 86 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली. उन्हें उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं होने के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. 28 दिसंबर 1937 को पारसी फैमिली में जन्मे रतन टाटा का जीवन लोगों के प्रेरणादायक रहा है और ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं. उन्होंने अपनी ही कंपनी में कर्मचारी बनकर काम किया, तो दूसरी ओर अपने कारोबार से होने वाली आमदनी का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा दान करके देश के सबसे बड़े दानवीरों में शुमार रहे. यही नहीं उन्होंने अपनी काबिलियत की दम पर जिसे छुआ सोना बना दिया और कई लोगों की किस्मत भी बदली. आइए 10 तस्वीरों में जानते हैं उनके जीवन की झलक…   बचपन में माता-पिता हुए अलग, दादी ने पाला दिवंगत रतन टाटा (Ratan Tata) का जन्म 28 दिसंबर 1937 को हुआ था और लेकिन उनका बचपन बहुच अच्छा नहीं बीता, दरअसल बचपन में ही 1948 उनके माता-पिता अलग हो गए थे और इसके बाद रतन टाटा का पालन-पोषण उनकी दादी नवाजबाई टाटा ने किया था.      अमेरिका से ली आर्किटेक्चर की डिग्री शुरुआती शिक्षा के बाद Ratan Tata हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी गए और वहां से बी.आर्क की डिग्री प्राप्त की थी. पढ़ाई पूरी कर भारत लौटने से पहले उन्होंने करीब 2 साल तक लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ कुछ समय के लिए नौकरी भी की थी. साल 1962 के अंत में दादी नवाजबाई टाटा की तबीयत खराब होने चलते वह नौकरी छोड़कर भारत वापस लौट आए थे. विदेश में प्यार, लेकिन नहीं हो सकी शादी रतन टाटा ने कभी शादी नहीं की, लेकिन ऐसा नहीं है कि उन्हें कभी किसी से प्यार नहीं हुआ. एक इंटरव्यू के दौरान खुद रतन टाटा ने अपनी लव लाइफ के बारे में विस्तार से बताया था. उन्होंने कहा था कि उनकी जिंदगी में प्यार ने एक नहीं बल्कि चार बार दस्तक दी थी, लेकिन मुश्किल दौर के आगे उनके रिश्ते शादी के मुकाम तक पहुंच नहीं सके. दादी की तबीयत खराब होने के चलते वे अमेरिका से भारत आ गए थे, लेकिन उनकी प्रेमिका भारत नहीं आना चाहती थीं. उसी वक्त भारत-चीन का युद्ध भी छिड़ा हुआ था. आखिर में उनकी प्रेमिका ने अमेरिका में ही किसी और से शादी कर ली. इसके बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान टाटा ग्रुप पर लगाया और समूह की कंपनियों को आगे बढ़ाने पर काम किया. टाटा स्टील से ऐसे की शुरुआत अमेरिका से भारत लौटने के बाद अपने पारिवारिक बिजनेस ग्रुप Tata के साथ करियर शुरू किया. लेकिन आपको बता दें कि जिस कंपनी ने Tata Family के सदस्य मालिक की पोजीशन पर थे, उस कंपनी में रतन टाटा ने एक सामान्य कर्मचारी के तौर पर काम शुरू किया. इस दौरान उन्होंने टाटा स्टील के प्लांट में चूना पत्थर को भट्ठियों में डालने जैसे काम भी किए और बिजनेस की बारीकियों को सीखीं थी.     Tata Steel में काम करने के बाद साल 1991 में उन्होंने टाटा ग्रुप की कमान थामी और फिर शुरू हो गया टाटा की कंपनियों के बुलंदियों पर पहुंचने का सिलसिला. उन्होंने कारोबार विस्तार पर फोकस करना शुरू कर दिया. कारोबार के विस्तार पर किया फोकस टाटा समूह की बागडोर संभालने के बाद, उन्होंने वैश्विक विस्तार किया और टाटा टी (Tata Tea), टाटा मोटर्स (Tata Motors), टाटा स्टील (Tata Steel) जैसी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया. आज इन कंपनियों का कोराबार बहुत बड़ा हो चुका है और ये कंपनियां लाखों लोगों को रोजगार मुहैया करा रही हैं. JRD Tata के बाद सबसे योग्य उत्तराधिकारी जब Tata Group में जेआरडी का उत्तराधिकारी चुनने की बारी आई, तो उस समय रतन टाटा सबसे योग्य व्यक्ति थे, जो उनकी जगह ले सकते थे और समूह की कमान संभालने के बाद उन्होंने इसे साबित भी किया. हर बड़े फैसले में JRD की राय   JRD Tata के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए उन्होंने टाटा ग्रुप के कारोबार के विस्तार से जुड़े कई अहम फैसले लिए. हालांकि, कमान हाथ में लेने के बाद भी वो जेआरडी टाटा से हर बड़े कदम पर पर राय मशविरा जरूर करते थे. साल 1993 की ये तस्वीर कुछ यही बयां कर रही है.          ऑटो दिग्गज फोर्ड को झुकाया 90 के दशक में ऑटोमोबाइल सेक्टर में फोर्ड (Ford) का बड़ा नाम था, लेकिन टाटा ग्रुप की कंपनी Tata Motors के हाल ठीक नहीं थे और रतन टाटा ने इसकी पैसेंजर कार डिविजन को बेचने का मन बनाते हुए फोर्ड के साथ डील की थी. लेकिन अमेरिकन कार निर्माता फोर्ड मोटर्स के चेयरमैन बिल फोर्ड ने डील के दौरान मजाक उड़ाते रतन टाटा का अपमान किया था. इसके बाद उन्होंने बिक्री का प्लान कैंसिल किया और टाटा मोटर्स को आगे बढ़ाने पर फोकस किया, महज 9 साल में बाजी पलटी और फोर्ड के दो लोकप्रिय ब्रांड जैगुआर और लैंड रोवर को खरीदकर Bill Ford को झुकने पर मजबूर कर दिया. सरकार से मिला बड़ा सम्मान रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा ग्रुप का कारोबार (Tata Group Business) तेजी से आगे बढ़ा और देश ही नहीं दुनियाभर में TATA का डंका बजा. अपने मेहनत और काबिलियत की दम पर विशान साम्राज्य खड़ा करने वाले रतन टाटा को भारत सरकार की ओर से बड़े सम्मान मिले. साल 2000 में जहां रतन टाटा को पद्म भूषण दिया गया, तो साल 2008 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्‍मानित किया गया था. देश को दी लखटकिया कार रतन टाटा ने एक ऐसा सपना देखा था, जिसे पूरा करना शायद हर किसी के बस में नहीं होता, लेकिन Ratan Tata ने ये कर दिखाया. हम बात कर रहे हैं देश की पहली लखटकिया कार Tata Nano के बारे में, भारत के आम आदमी को एक लाख में कार खरीदने का मौका रतन टाटा ने ही दिया था. उन्होंने बाजार में 2008 में टाटा नैनो उतारी, हालांकि यह कार उनकी उम्मीदों के अनुसार बाजार में धमाल नहीं दिखा पाई. रतन टाटा थे बड़े डॉग लवर दिवंगत Ratan Tata को बड़ा बिजनेसमैन, दरियादिल इंसान के … Read more

श्री रतन टाटा का निधन उद्योग जगत की बड़ी क्षति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

श्री रतन टाटा का निधन उद्योग जगत की बड़ी क्षति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने किया शोक व्यक्त भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जाने माने उद्योगपति श्री रतन टाटा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्री रतन टाटा का निधन उद्योग जगत की बड़ी क्षति है। देश की अर्थव्यवस्था और वाणिज्य-उद्योग क्षेत्र में श्री रतन टाटा के योगदान को सदैव रेखांकित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. रतन टाटा की आत्मा की शांति और उनके मित्रजन एवं परिजन को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना भगवान महाकाल से की है।  

स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए प्राइवेट सेक्टर की भी भागीदारी जरूरी – उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिये अत्याधुनिक निजी अस्पताल भी जरूरी – मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर में किया 100 बिस्तरीय देवराज मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल का उदघाटन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिये अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित निजी अस्पताल भी जरूरी हैं। खुशी की बात है ग्वालियर की धरती पर आज ऐसे ही एक बड़े अस्पताल की शुरूआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार की शाम ग्वालियर में 100 बिस्तरीय देवराज अस्पताल (देवराज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) के उदघाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अस्पतालों को आरोग्य मंदिर का नाम दिया है। प्रसन्नता का विषय है कि एक किसान परिवार ने ग्वालियर में अपने बेटे की स्मृति में एक अस्पताल अर्थात आरोग्य मंदिर की स्थापना की है। उन्होंने इसके लिये देवराज अस्पताल के संस्थापक करन सिंह किरार एवं उनके परिवार को बधाई और शुभकामनायें दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार भी इस पुनीत पहल के लिये करन सिंह के परिवार का सम्मान और आदर करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब पूरी दुनिया में कोरोना का हाहाकार मचा हुआ था, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के संसाधनों और बौद्धिक क्षमताओं का उपयोग कर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के समस्त नागरिकों को कोरोना से बचाव के नि:शुल्क टीके लगवाए। साथ ही दुनिया भर में कोरोना वैक्सीन भेजकर “जियो और जीने दो” के सिद्धांत को चरितार्थ करके दिखाया। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि ऋषि गालव की तपोभूमि, तानसेन की साधना स्थली, वीरांगना लक्ष्मीबाई की बलिदान स्थली एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया की कर्म भूमि ग्वालियर में यह अस्पताल गरीब मरीजों के इलाज में अहम योगदान देगा। परिवार में आई रिक्तता को सेवा से भरने का काम सराहनीय – विधानसभा अध्यक्ष तोमर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि नवरात्रि के पावन पर्व पर ग्वालियर में स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ा अस्पताल जुड़ रहा है। उन्होंने कहा परिवार में किसी भी व्यक्ति के असमय चले जाने से परिवार में बड़ी रिक्तता आती है। बिरले ही लोग होते हैं जो इस रिक्तता को सेवा से भरने के प्रयासों को मूर्तरूप दे पाते हैं। ग्वालियर में स्व. शीतला सहाय जी ने अपने पुत्र की कैंसर से मृत्यु होने पर देश का प्रतिष्ठित कैंसर हॉस्पिटल स्थापित कर यह काम करके दिखाया था। उसी श्रृंखला में आज करन सिंह किरार ने अपने दिवंगत पुत्र स्व. देवराज सिंह किरार की याद को चिरस्थायी बनाने के लिये बड़े अस्पताल की स्थापना की है। उन्होंने ईश्वर से कामना की है कि यह अस्पताल उत्तरोत्तर प्रगति करे, जिससे ग्वालियर क्षेत्र के निवासियों को बेहतर से बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके। विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए समर्पित भाव से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में मध्यप्रदेश में केवल ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर व रीवा में मेडिकल कॉलेज थे। अब प्रदेश में 14 सरकारी मेडीकल कॉलेज हो गए हैं। इसके अलावा निजी मेडिकल कॉलेज की भी स्थापना हुई है। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए प्राइवेट सेक्टर की भी भागीदारी जरूरी – उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएँ तभी बेहतर और पर्याप्त होंगी, जब सरकार के साथ प्राइवेट सेक्टर भी बराबरी के साथ खड़ा होगा । उन्होंने दिल्ली, नागपुर व मुम्बई का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी से ही ये महानगर मेडिकल हब के रूप में स्थापित हुए हैं। शुक्ल ने कहा खुशी की बात है कि ग्वालियर में 100 बैड के अत्याधुनिक अस्पताल की स्थापना हुई है और यह अस्पताल आगे चलकर एक हजार बैड और मेडिकल कॉलेज के साथ तैयार होगा। इससे प्रदेश सरकार भी उत्साहित है कि इस अस्पताल में सस्ती दर पर गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सेवाएँ मिलेंगीं। उन्होंने पीड़ित मानवता की सेवा के क्षेत्र में कदम बढ़ाने के लिये देवराज अस्पताल प्रबंधन को बधाई व शुभकामनाएं दीं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के इलाज के लिये रियायत सराहनीय पहल – सांसद शर्मा सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा ने कहा खुशी की बात है कि देवराज अस्पताल में मात्र 50 रूपए कंसलटेशन फीस पर इलाज की सुविधा मिलेगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मरीज भी एक अच्छे अस्पताल में अपना इलाज करा सकेंगे। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिये आयुष्मान भारत जैसी क्रांतिकारी योजना को मूर्तरूप दिया है। हमें आशा है कि प्रधानमंत्री मोदी की भावना के अनुरूप देवराज अस्पताल भी गरीब मरीजों के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। भगवान गणेश का पूजन एवं फीता काटकर किया अस्पताल का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं अन्य सभी अतिथियों ने भगवान गणेश का पूजन कर और फीता काटकर देवराज अस्पताल का उदघाटन किया। साथ ही अस्पताल परिसर में स्व. देवराज सिंह किरार की प्रतिमा का अनावरण भी किया। अस्पताल का जायजा भी लिया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उदघाटन करने के बाद देवराज अस्पताल का जायजा भी लिया। उन्होंने अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर, जनरल और प्राइवेट वार्ड, आईसीयू, ओपीडी और फॉर्मेसी सहित अस्पताल में उपलब्ध अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को देखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर उदघाटन समारोह का शुभारंभ किया। ज्ञात हो राष्ट्रीय राजमार्ग क्र.-44 पर ग्राम खुरैरी – बड़ागाँव के समीप देवराज मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल का निर्माण किया गया है। इस अस्पताल में 24 घंटे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हैं। साथ ही अत्याधुनिक तकनीक के साथ ऑपरेशन थियेटर बनाए गए हैं। इसके अलावा वातानुकूलित जनरल वार्ड, सेमी प्राइवेट एवं प्राइवेट वार्ड, अत्याधुनिक आईसीयू और सीसीयू, फूड कोर्ट, फॉर्मेसी (मेडिकल स्टोर), सीएससीडी रेडियो इमेजिंग सुविधाएँ (एक्सरे, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउण्ड) की सुविधा उपलब्ध है। हॉस्पिटल के उदघाटन कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, लोक स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, सांसद भारत सिंह कुशवाह, महापौर श्रीमती शोभा सिकरवार, विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह, श्रीमती सरला रावत एवं अस्पताल के संस्थापक प्रबंधन से जुड़े अधिकारी, चिकित्सक व … Read more

मोदी सरकार ड्रोन क्षेत्र में अगली पीएलआई योजना लाने का प्रयास कर रही है

नई दिल्ली  सरकार ड्रोन क्षेत्र के लिए एक नई उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना लाने की योजना बना रही है। यह योजना कार्यान्वयन, दस्तावेजीकरण और अन्य पहलुओं के संदर्भ में अधिक प्रभावी होगी। नागर विमानन सचिव वुमलुनमंग वुआलनाम ने कहा कि सरकार ड्रोन क्षेत्र में अगली पीएलआई योजना लाने का प्रयास कर रही है। ड्रोन क्षेत्र के लिए पहली पीएलआई योजना 120 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 2021 में लाई गई थी। तीन वित्त वर्षों (2021-24) के लिए लाई गई यह योजना अब बंद हो गई है। नागर विमानन सचिव ने स्वीकार किया कि पहली योजना के तहत कुछ प्रक्रियाएं ड्रोन क्षेत्र में स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के लिए बोझिल थीं, लेकिन सरकार कार्यान्वयन, दस्तावेजीकरण और अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं के संदर्भ में अधिक कुशल पीएलआई योजना पर विचार करेगी। वुआलनाम के अनुसार, ड्रोन क्षेत्र को तीन खंडों- नागरिक उपयोग, सुरक्षा/रक्षा बलों द्वारा उपयोग, तथा ड्रोन के अवैध या अनियमित उपयोग में विभाजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें इस बारे में बहुत स्पष्ट होना होगा कि हम इन तीनों क्षेत्रों में कैसे काम करते हैं।” उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि ड्रोन के गलत उपयोग की कुछ घटनाएं युवाओं, स्टार्टअप और महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) द्वारा ड्रोन का अधिक उपयोग किए जाने में बाधा बन सकती हैं। उद्योग मंडल फिक्की द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि… ड्रोन रोधी प्रौद्योगिकियां विकसित की जा रही हैं।” फिक्की ने एक परिचर्चा पत्र में सुझाव दिया है कि नई योजना के अंतर्गत परिव्यय को बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये किया जाना चाहिए, ताकि स्टार्टअप और नए उद्यमियों को अधिक स्वदेशी कलपुर्जों और उप-प्रणालियों के साथ ड्रोन विकसित करने में सहायता मिल सके। नागर विमानन सचिव ने कहा कि नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत 3,000 और ड्रोन खरीदने के लिए निविदाएं तैयार हैं। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को कृषि ड्रोन प्रदान करना है और 15,000 ड्रोन महिलाओं के नेतृत्व वाले एसएचजी को दिए जाएंगे। वुआलनाम ने कहा कि 1,000 ड्रोन की पहली खेप को हासिल कर लिया गया है और वितरित कर दिया गया है। योजना के तहत 3,000 ड्रोन के लिए निविदाएं तैयार हैं और संबंधित एजेंसियों द्वारा जल्द ही जारी की जाएंगी।    

मुंबई: रतन टाटा का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए NCPA परिसर लाया गया ,रतन टाटा का राजकीय अंतिम संस्कार आज होगा

मुंबई टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब नहीं रहे. उनका 86 साल की उम्र में निधन हो गया. रतन टाटा ने बुधवार रात मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. यहां उन्हें कुछ दिन पहले उम्र संबंधी दिक्कतों की वजह से भर्ती कराया गया था. बुधवार रात ही उनके पार्थिव शरीर को अस्पताल से घर लाया गया. अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स हॉल में रखा जाएगा. यहां गुरुवार सुबह 10 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे. भारत के बाहर भी प्रेरणादायक रहे हैं रतन टाटा: नेपाल के PM नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने रतन टाटा के निधन पर कहा कि उद्योग जगत के अनमोल रत्न रतन टाटा के निधन की खबर से दुखी हूं. बिजनेस और सामाजिक कार्यों में उनका दूरदर्शी नेतृत्व भारत के बाहर भी बहुत प्रभावकारी और प्रेरणादायक रहा है, इससे बहुत लोगों को प्रेरणा मिली. रतन टाटा के लिए भारत रत्न की मांग शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के लिए भारत रत्न की मांग की है. पार्टी नेता राहुल कनाल ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को चिट्ठी लिखकर भारत रत्न के लिए रतन टाटा का नाम केंद्र सरकार को भेजने का आग्रह किया है. नीतीश कुमार ने रतन टाटा के निधन पर जताया शोक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उद्योगपति एवं टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा जी का निधन दुखद है. उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, सहजता और सादगी भरे जीवन से सबको प्रेरित किया. उन्होंने अपने कार्यों से देश की अर्थव्यवस्था में अपना सराहनीय योगदान दिया. रतन टाटा जी के निधन से उद्योग जगत को अपूरणीय क्षति हुई है. दिवंगत आत्मा की चिर शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना है.     प्रख्यात उद्योगपति एवं टाटा संस के पूर्व चेयरमैन, पद्म विभूषण रतन टाटा जी का निधन दुःखद। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, सहजता और सादगी भरे जीवन से सबको प्रेरित किया। उन्होंने अपने कार्यों से देश की अर्थव्यवस्था में अपना सराहनीय योगदान दिया। रतन टाटा जी के निधन से उद्योग जगत को अपूरणीय…   रतन टाटा के जीवन की दिलचस्प बातें साल 1937 में जन्मे रतन टाटा का पालन-पोषण 1948 में उनके माता-पिता के अलग होने के बाद उनकी दादी नवाजबाई टाटा ने किया था. रतन टाटा साल 1962 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से बी.आर्क की डिग्री प्राप्त की थी. 1962 के अंत में भारत लौटने से पहले उन्होंने लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ कुछ समय काम किया. 2008 में भारत सरकार ने उन्हें देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म विभूषण, प्रदान किया था. वह 28 दिसंबर 2012 को टाटा संस के चेयरमैन के रूप में रिटायर हुए थे. रतन टाटा का सफ़र: रतन टाटा का सफर एक प्रेरणादायक कहानी है, जो उनकी दूरदर्शिता, मेहनत और नेतृत्व कौशल को दर्शाता है- जन्म      28 दिसंबर 1937 कॉलेज डिग्री      1962 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से बी.आर्क (Bachelor of Architecture) विदेश में कार्य अनुभव      1962 के अंत में भारत लौटने से पहले लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ काम किया मैनेजमेंट ट्रेनिंग      1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया टाटा संस के चेयरमैन बने      मार्च 1991 रिटायर      28 दिसंबर 2012 टाटा समूह की आय      1991 में ₹10,000 करोड़ से बढ़कर 2011-12 में USD 100.09 बिलियन टाटा के मुख्य अधिग्रहण      – 2000 में टाटा टी द्वारा 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर में टेटली का अधिग्रहण – 2007 में टाटा स्टील द्वारा 6.2 बिलियन पाउंड में कोरस का अधिग्रहण – 2008 में टाटा मोटर्स द्वारा 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर में जगुआर लैंड रोवर का अधिग्रहण सम्मान      2008 में पद्म विभूषण (भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) निधन      09 अक्टूबर 2024 …जब रतन टाटा ने संभाली कमान: रतन टाटा की उल्लेखनीय यात्रा तब शुरू हुई जब उन्होंने साल 1991 में ऑटोमोबाइल से लेकर स्टील तक के विभिन्न उद्योगों में फैले टाटा समूह की बागडोर संभाली. साल 1996 में उन्होंने टाटा टेली-सर्विसेज की स्थापना की और 2004 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध करवाया, जो कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ. रतन टाटा के नेतृत्व में ऐतिहासिक अधिग्रहण:     टेटली (2000): टाटा टी द्वारा 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर में ब्रिटिश चाय कंपनी टेटली का अधिग्रहण किया गया. यह भारतीय कंपनी का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण था.     कोरस (2007): टाटा स्टील ने 6.2 बिलियन पाउंड में यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी कोरस का अधिग्रहण किया. यह भारतीय स्टील उद्योग का अब तक का सबसे बड़ा सौदा था.     जगुआर लैंड रोवर (2008): टाटा मोटर्स ने 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर में प्रतिष्ठित ब्रिटिश कार ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर का अधिग्रहण किया। यह सौदा टाटा मोटर्स के लिए एक बड़ी सफलता साबित हुआ और कंपनी को वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में मजबूती दी. टाटा ग्रुप की कमान किसके हाथ? रतन टाटा की सेवानिवृत्ति के बाद, टाटा ग्रुप की कमान एन चंद्रशेखरन (Natarajan Chandrasekaran) के हाथों में है. उन्होंने 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पदभार संभाला था. एन चंद्रशेखरन इससे पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं.    

शेन वॉटसन का मानना है कि स्मिथ को अब भारत के खिलाफ ओपन ही करना चाहिए

मुंबई  बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफ़ी में ऑस्ट्रेलिया के लिए ओपन कौन करेगा? क्या स्टीव स्मिथ को ही ओपन करना चाहिए या उन्हें अपने ओरिजनल नंबर चार के पोज़िशन पर वापस जाना चाहिए? ये सवाल अभी भी बने हुए हैं। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर शेन वॉटसन का मानना है कि स्मिथ को अब ओपन ही करना चाहिए। मुंबई में इंटरनेशनल मास्टर्स लीग लॉन्च इवेंट कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, “स्मिथ ने ओपन करने का निर्णय ख़ुद लिया था और मुझे लगता है कि उन्हें अब अपने निर्णय पर खड़ा रहना चाहिए। नंबर चार पर जाना एक सुरक्षित फ़ैसला हो सकता है, लेकिन मैं उन्हें ओपन ही करते देखना पसंद करूंगा। उनके पास वह क्षमता है और वह कर सकते हैं।” डेविड वॉर्नर के संन्यास के बाद स्मिथ ने ख़ुद ओपनिंग करना चुना था, लेकिन तब वॉटसन ने कैमरून ग्रीन का सलामी बल्लेबाज़ी के लिए समर्थन किया था। अब वॉटसन का कहना है, “ग्रीन ने पिछले कुछ मैचों में नंबर चार पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ उनका शतक विशेष था और अब वह भविष्य के परफ़ेक्ट नंबर चार हैं।” स्मिथ ने ओपनर के रूप में अब तक चार टेस्ट मैचों में 28.5 की औसत से 171 रन बनाए हैं, लेकिन वॉटसन को यह चिंता की बात नहीं लगती है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि थोड़ा सा मामला तकनीकी है। पिछले दो टेस्ट मैचों में वह जिस तरह से आउट हुए, मैंने उन्हें कभी भी ऐसे आउट होते नहीं देखा। लेकिन अभी सीरीज़ होने में समय है और वह अपनी तकनीक में यह सुधार कर सकते हैं। अगर वह उस सुधार के साथ ओपन करते हैं, वह एक बेहतरीन सलामी बल्लेबाज़ साबित हो सकते हैं।”    

गरीबों को मुफ्त अनाज देने की योजना को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया, केंद्रीय कैबिनेट ने लिया निर्णय

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है जिसके अनुसार गरीबों को मुफ्त अनाज देने की योजना को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है। यह फैसला विशेष रूप से उन परिवारों के लिए राहत भरा है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से सामाजिक और आर्थिक विकास में मदद मिलेगी, खासकर उन परिवारों के लिए जो रोजमर्रा के भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। योजना का दायरा इस योजना के तहत, गरीब परिवारों को हर महीने अनाज प्रदान किया जाएगा। यह अनाज विभिन्न प्रकार के अनाज, जैसे गेहूं और चावल, शामिल होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी जरूरतमंद लोगों को उचित मात्रा में खाद्य सामग्री मिल सके। सीमावर्ती इलाकों में किया जाएगा सड़क निर्माण साथ ही इस बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया से बातचीत की और सरकार के नए कदमों के बारे में जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। उनका मानना है कि मजबूत बुनियादी ढांचा देश की सुरक्षा और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। निवेश का विवरण बैठक में निर्णय लिया गया कि सीमावर्ती इलाकों में 4,406 करोड़ रुपये के निवेश से 2,280 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना न केवल स्थानीय लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ाएगी, बल्कि देश की सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगी। विकास के लाभ इस सड़कों के निर्माण से सीमावर्ती क्षेत्रों में आवागमन में सुधार होगा, जिससे व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, यह सुरक्षा बलों की तैनाती और ऑपरेशन में भी मदद करेगा।केंद्रीय कैबिनेट के इस निर्णय से स्पष्ट होता है कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दे रही है। इससे न केवल स्थानीय लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

नहीं रहे रतन टाटा, मुंबई हॉस्पिटल में ली अंतिम सांसें, देश के लिए किए ये 5 बड़े काम

मुंबई दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा अब हमारे बीच नहीं रहे, 86 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. भारतीय इतिहास में रतन टाटा का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. भारत में जब भी उद्योगपतियों का जिक्र होगा. सबसे पहले रतन टाटा का नाम लिया जाएगा. उन्होंने अपने जीवन की सार्थक यात्रा में बहुत से ऐतिहासिक काम किए. दरअसल, रतन टाटा को भारतीय उद्योग का पितामह भी कहा जाता है. अपने व्यक्तित्व से उन्होंने लोगों को प्रभावित किया. रतन टाटा ने इस दुनिया को कई बहुमूल्य उपहार दिए. उनका योगदान आज भारत समेत पूरे विश्व के लिए एक नजीर है. यूं तो देश निर्माण में रतन टाटा के अनगिनत योगदान हैं, जिसे भुलाया नहीं जा सकता. लेकिन इनमें से कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने समय की परिधि पर अमिट छाप छोड़ दी है. जिस समय पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा था, उस समय भारत भी हेल्थ संकटों से लड़ रहा था. इस संकट के समय में  रतन टाटा सामने आए और उन्होंने 500 करोड़ रुपये की देश को सहायता दी. उन्होंने एक्स (x) पर लिखा था, कोविड-19 हमारे सामने आने वाली सबसे कठिन चुनौतियों में से एक है. टाटा ट्रस्ट और टाटा समूह की कंपनियां अतीत में भी देश की जरूरतों के लिए आगे आईं हैं. इस समय आवश्यकता किसी भी अन्य समय से अधिक है.   रतन टाटा अपने सौम्य स्वभाव और उदार दिल के लिए जाने जाते थे. उनको कुत्तों से बड़ा लगाव रहा. अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने कुत्तों के लिए एक हास्पिटॉल खोला. उन्होंने हॉस्पिटल खोलते समय कहा था कि मैं कुत्तों को अपने परिवार का हिस्सा मानता हूं. रतन टाटा ने आगे कहा था कि मैं जीवन कई पेट्स रखे हैं. इस वजह से मुझे हॉस्पिटल की अहमियत पता है. उनके द्वारा नवी मुम्बई बनाया गया अस्पताल 5 मंजिला है, जिसमें 200 पालतू जानवरों का एक साथ इलाज किया जा सकता है. इसको 165 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है. रतन टाटा को कुत्तों से कितना नेह है उसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि एक बार एक कुत्ते को वो यूनिवर्सिटी ऑफ मिनिसोटा लेकर गए थे. जहां कुत्ते का जॉइंट रिप्लेसमेंट किया गया था. टाटा ग्रुप पहले केवल बड़ी गाड़ियों के निर्माण के लिए जाना जाता था. लेकिन 1998 रतन टाटा ने छोटी गाड़ियों की दुनिया में भी उतरने का फैसला लिया और उन्होंने टाटा इंडिका (Tata Indica) को बाजार में लॉन्च किया. टाटा इंडिका पूरी तरह से एक स्वदेशी कार थी. जिसको लोगों ने खूब पसंद किया और इसने बिक्री के सारे रिकॉर्ड तोड़ कर बाजार में नया कीर्तिमान को स्थापित कर दिया. उसके लगभग एक दशक बाद टाटा ने एक और प्रयोग किया और वो 2008 में बाजार में नैनो कार लेकर आए, जिसकी कीमत एक लाख रुपये से भी कम थी. कहते हैं अगर मन में ठान लें तो कोई लक्ष्य बड़ा नहीं होता, टाटा इंडिका इतना ब्रेकडाउन हो रही थी कि साल 1999 में टाटा ने उसे बेचने का फैसला कर लिया. ये जज्बे से भरे रतन टाटा के लिए एक बहुत बड़ा झटका था. उसी समय वो बिल फोर्ड को अपनी कार की कंपनी बेचना चाहते थे. लेकिन बिल फोर्ड  ने तंज कसते हुए कहा कि जब पैसेंजर कार बनाने का कोई अनुभव नहीं था तो ये बचपना क्यों किया. ये बात उनको चुभ गई और उन्होंने कंपनी को बेचने से इनकार कर दिया. एक दशक बाद वक्त ने करवट ली और फोर्ड मोटर्स की हालत खराब हो गई. जिस वजह से फोर्ड को बेचना और उसे रतन टाटा ने खरीद लिया. भारत में जब भी सॉफ्टवेयर कंपनी का जिक्र करते ही लोगों की जुबान से सबसे पहले टीसीएस का ही नाम आता है. टीसीएस दुनिया की सबसे बड़ी सूचना तकनीकी और बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग सेवा देने वाली कंपनियों में से एक है. जिसने तकनीक के क्षेत्र में अहम योगदान के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन भी किया.

उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों में देश भर के एथलीट भाग लेंगे, जिसमें 38 खेलों में प्रतियोगिताएं होंगी

नई दिल्ली  भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने घोषणा की है कि राष्ट्रीय खेलों का 38वां संस्करण 28 जनवरी से 14 फरवरी, 2025 तक उत्तराखंड में आयोजित किया जाएगा (यह आईओए की आम सभा की मंजूरी पर निर्भर है, जो 25 अक्टूबर को निर्धारित है)। इन खेलों में देश भर के एथलीट भाग लेंगे, जिसमें 38 खेलों में प्रतियोगिताएं होंगी (आईओए की आम सभा की मंजूरी के अधीन), जिसमें 10,000 से अधिक एथलीट, अधिकारी और कोच के भाग लेने की उम्मीद है। एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि आईओए और उत्तराखंड सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए निकट समन्वय में काम कर रहे हैं कि 38वें राष्ट्रीय खेल एथलीटों, अधिकारियों और दर्शकों के लिए एक असाधारण अनुभव होंगे। आईओए प्रमुख पीटी उषा ने कहा, “हम उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों को लाने के लिए रोमांचित हैं, एक ऐसा राज्य जिसने इस प्रतिष्ठित आयोजन की मेजबानी के लिए उल्लेखनीय उत्साह और प्रतिबद्धता दिखाई है। राष्ट्रीय खेल पूरे देश के एथलीटों को अपनी प्रतिभा दिखाने और अंतरराष्ट्रीय खेल सफलता की ओर अपनी यात्रा जारी रखने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं। मुझे यह सुनकर खुशी हुई कि उत्तराखंड सरकार राष्ट्रीय शीतकालीन खेलों की मेजबानी करने के लिए उत्सुक है, और मैं एक ठोस प्रस्ताव प्राप्त करने के लिए उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रही हूं। “ उत्तराखंड का सुरम्य राज्य, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध संस्कृति के लिए जाना जाता है, पहली बार बहु-विषयक आयोजन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खेलों की मेजबानी की जिम्मेदारी राज्य को सौंपने के लिए आईओए के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “हम विश्व स्तरीय खेल अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राष्ट्रीय खेल न केवल खेलों का उत्सव होगा बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति और आतिथ्य का प्रदर्शन भी होगा”। राज्य सरकार ने आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाएं शुरू की हैं। इसमें कहा गया है कि आयोजन स्थलों का निर्माण किया जा रहा है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उन्नत किया जा रहा है तथा प्रतिभागियों और आगंतुकों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।    

हरियाणा-जम्मू में चला योगी का जादू, जहां-जहां किया प्रचार, खिल गया कमल

चंडीगढ़  हरियाणा विधानसभा चुनाव के कुछ महीनों पहले तक दुष्यंत डिप्टी सीएम पद पर काबिज थे, लेकिन भाजपा में हुई हलचल ने सारे समीकरण बदल दिए। जेजेपी और भाजपा का गठबंधन टूटा। इसके बाद उनकी पार्टी के कई विधायक भी टूट गए। उनकी वापसी की उम्मीद कहे जा रहे 2024 विधानसभा चुनाव भी बड़ा जेजेपी और दुष्यंत के लिए बड़े झटके की तरह रहे। हरियाणा की उचाना कलां सीट से मैदान में उतरे दुष्यंत 5वें स्थान पर रहे। उन्हें 5 फीसदी से भी कम वोट मिले। वह दल के उन नेताओं में शामिल थे, जिनकी जमानत जब्त हो गई थी। सीट पर भाजपा के देवेंद्र चतुर्भुज अत्तरी ने महज 32 वोट के अंतर से कांग्रेस के बृजेंद्र सिंह को हराया है। दुष्यंत इस सीट पर दो निर्दलीय उम्मीदवारों विकास और वीरेंद्र घोघारियां से भी पिछड़ गए। उन्होंने सीट 41 हजार से ज्यादा वोट से गंवाई।विधानसभा चुनाव में जेजेपी का एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका। यहां तक कि पार्टी का वोट शेयर भी 15 प्रतिशत से घटकर 1 फीसदी से भी कम पर आ गया था। दुष्यंत पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला के पोते और पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल के परपोता हैं। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री देवी लाल, बंसी लाल और भजन लाल के परिवार के सदस्य जीतने में कामयाब रहे। पूर्व सीएम भजन लाल के बेटे चंद्र मोहन पंचकूला से जीते, पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल के पोते आदित्य देवी लाल डबवाली से जीते, अर्जुन चौटाला रनिया से विजयी रहे। पूर्व सीएम बंसी लाल की परपोती श्रुति चौधरी तोषाम से जीतीं। हालांकि, भजन लाल के परिवार से भव्य बिश्नोई बड़ा झटका साबित हुआ। शुरुआती राउंड्स में आदमपुर सीट से आगे चल रहे भव्य को हार का सामना करना पड़ा। खास बात है कि आदमपुर सीट पर 50 सालों से ज्यादा समय तक भजन लाल परिवार का कब्जा रहा। हरियाणा-जम्मू में चला योगी का जादू, जहां-जहां किया प्रचार, खिल गया कमल  यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता ने हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में हालिया विधानसभा चुनावों में भी अपना प्रभाव दिखाया है। उनकी रैलियों की मांग हमेशा बनी रही और उम्मीदवारों के बीच उनकी उपस्थिति जीत की पक्की गारंटी मानी जाती है। योगी ने हरियाणा में 14 रैलियां और जम्मू में 4 रैलियां की थी। जम्मू में उन्होंने जिन विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किया, वहां बीजेपी ने जीत हासिल की। हरियाणा में भी एंटी-इन्कंबेंसी माहौल के बावजूद योगी की रैलियों ने बीजेपी को 14 में से 9 सीटें जीतने में मदद की। क्योंकि पार्टी को पिछले दस सालों में सत्ता के खिलाफ जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। योगी की रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ और उनका बोलने का अंदाज चुनावी नतीजों में सीधे तौर पर परिवर्तित होता है। उनकी लोकप्रियता के चलते बीजेपी ने दोनों राज्यों में उनकी रैलियों को एक प्रमुख रणनीति का हिस्सा बनाया था। इन चुनावों के परिणाम ने यह साबित कर दिया कि सीएम योगी, पीएम मोदी के बाद, बीजेपी के सबसे लोकप्रिय चेहरे हैं। उनके प्रभावी प्रचार से न केवल बीजेपी की स्थिति मजबूत हुई, बल्कि उन्होंने पार्टी की जीत तय करने में भी अहम भूमिका निभाई है। इस प्रकार योगी की रैलियों की सफलता ने साबित किया है कि उनकी रणनीतियां अन्य राज्यों के चुनावों में भी बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।    

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