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कार्यालय स्थल की पट्टा मांग के इस कैलेंडर वर्ष में आठ करोड़ वर्ग फुट को पार करने की संभावना

नई दिल्ली  देश के शीर्ष आठ शहरों में कार्यालय स्थल की पट्टा मांग के इस कैलेंडर वर्ष में आठ करोड़ वर्ग फुट को पार करने की संभावना है, जो 2023 में रिकॉर्ड 7.45 करोड़ वर्ग फुट को पार कर गई थी। रियल एस्टेट परामर्शदाता कुशमैन एंड वेकफील्ड ने  इस कैलेंडर वर्ष की तीसरी तिमाही के लिए कार्यालय बाजार पर अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में शीर्ष आठ शहरों में कार्यालय स्थान की पट्टा मांग 66 प्रतिशत बढ़कर 2.48 करोड़ वर्ग फुट हो गई, जो इस क्षेत्र की किसी भी तिमाही में अभी तक की दूसरी सबसे अधिक मांग है। जनवरी-सितंबर में सकल पट्टा मांग 6.67 करोड़ वर्ग फुट रही। कुशमैन एंड वेकफील्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (भारत, दक्षिण पूर्व एशिया तथा एपीएसी किरायेदार प्रतिनिधित्व) अंशुल जैन ने कहा, ‘‘मजबूत बाजार बुनियादी ढांचे ने भारतीय कार्यालय बाजार में असाधारण पट्टे की गति को बनाए रखा है, जैसा कि शीर्ष आठ बाजारों की स्थिति से स्पष्ट है..’’ कुशमैन एंड वेकफील्ड के प्रबंध निदेशक (किरायेदार प्रतिनिधित्व) वीरा बाबू ने कहा, ‘‘सकल पट्टा मांग पहले ही 6.6 करोड़ वर्ग फुट से अधिक हो चुकी है, हम 2023 में दर्ज कुल मांग के करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं।’’ रिपोर्ट के लिए जिन आठ शीर्ष शहरों के बाजारों पर गौर किया गया, वह दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद हैं।    

प्रयागराज कुंभ में नई पहल सुरक्षा, जिम्मेदारी और तकनीक का अद्भुत संगम, जो सुरक्षित और सुखद अनुभव बना देगी

प्रयागराज  भारतीय सिनेमा में कुंभ मेला का जिक्र होते ही हमारे दिमाग में सबसे पहले वही क्लासिक कहानियां आती हैं, जहां भाई-भाई, मां-बेटा या प्रेमी-प्रेमिका भीड़ में एक-दूसरे से बिछड़ जाते थे। यह बिछड़ने का दृश्य बॉलीवुड की कई पुरानी फिल्मों में बड़े भावनात्मक मोड़ के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। योगी सरकार ‘फिल्मी महाकुंभ’ में लोगों के खोने और फिर सालों बाद मिलने की इस धारणा को तोड़ने की पूरी तैयारी कर ली है। अब कुंभ मेले में हर व्यक्ति का ध्यान रखा जाएगा, कोई भी अब अपनों से नहीं बिछड़ेगा और ऐसा हुआ भी तो वह जल्द से जल्द अपने परिवार से मिल सकेगा। प्रयागराज मेला प्राधिकरण और पुलिस विभाग ने मिलकर इस बार के महाकुंभ मेले में एक उच्च तकनीक से युक्त खोया-पाया पंजीकरण प्रणाली से तीर्थयात्रियों को सुरक्षित करेगा। यह नई पहल सुरक्षा, जिम्मेदारी और तकनीक का अद्भुत संगम है, जो महाकुंभ मेला को सुरक्षित और सुखद अनुभव बना देगी। योगी सरकार की पहल अब उस ‘फिल्मी ड्रामे’ को हकीकत से दूर ले जाकर सुरक्षा और पुनर्मिलन की नई कहानी लिखने को तैयार है। कुंभ मेले में आने वाले करोड़ों तीर्थयात्रियों को अब भीड़ में खोने का डर नहीं रहेगा, क्योंकि सरकार की यह नई प्रणाली खोए हुए तीर्थयात्रियों को सुरक्षित और शीघ्र उनके परिजनों से मिलाने का भरोसा देगी। अब नहीं होंगे ‘कुंभ के मेले में बिछड़ने’ वाले दृश्य भारतीय सिनेमा में कुंभ मेले की भीड़ से अलग हुए लोगों की कहानियां एक स्थायी कथानक रही हैं। फिल्मों में गंभीर संवाद हो या हास्य, कहीं न कहीं कुंभ मेले में बिछड़ने वाले डायलॉग सुनने को मिल ही जाते हैं। चाहे वो 1943 में आई फिल्म ‘तकदीर’ हो या 70 के दशक में आई फिल्म ‘मेला’। इनमें भाइयों का मेले में बिछड़ने की कहानी सिनेमा के पर्दे पर वर्षों तक दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी। इन कहानियों का मुख्य आधार यही था कि भीड़ में खो जाने के बाद, अपने प्रियजनों को खोज पाना लगभग असंभव होता था। लेकिन अब इस हाई-टेक खोया-पाया केंद्र की बदौलत, महाकुंभ मेले में ऐसा ‘फिल्मी’ बिछड़ने वाला दृश्य शायद ही देखने को मिले। इन केंद्रों में खोए हुए व्यक्तियों का डिजिटल पंजीकरण होगा, जिससे उनके परिवार या मित्र आसानी से उन्हें खोज सकेंगे। साथ ही सभी लापता व्यक्तियों के लिए केंद्रों पर उद्घोषणा की जायेगी। पहले जहां एक मेला कई परिवारों के लिए बिछड़ने और असहाय खोज की दुखभरी गाथा लेकर आता था, अब वही मेला उनके पुनर्मिलन की एक नई कहानी लिखने जा रहा है। तकनीक के साथ नई कहानी महाकुंभ 2025 में शामिल होने वाले तीर्थयात्रियों के लिए सरकार ने ऐसे डिजिटल खोया-पाया केंद्रों की स्थापना करेगा जो खोए हुए व्यक्तियों को उनके परिजनों से मिलाने के लिए तकनीक का सहारा लेते हैं। इसमें हर खोए हुए व्यक्ति का पंजीकरण तुरंत किया जाएगा और उसकी जानकारी को अन्य केंद्रों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक और एक्स (पहले ट्वीटर) पर भी प्रसारित किया जाएगा। यह व्यवस्था महाकुंभ मेले को न केवल सुरक्षित बनाएगी, बल्कि परिवारों को जल्दी और आसानी से अपने प्रियजनों से जोड़ने का काम करेगी। जहां फिल्मी कहानियों में खोए हुए व्यक्तियों को ढूंढने में सालों लग जाते थे, वहीं अब 12 घंटे के भीतर अगर कोई अपने खोए हुए सदस्य का दावा नहीं करता है, तो पुलिस हस्तक्षेप करके उन्हें सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक खोया हुआ महसूस न करे, और वह जल्द से जल्द अपने परिवार से मिल सके। तीर्थयात्रियों के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था पुरानी फिल्मों में, कुंभ मेले में बिछड़ने के बाद अक्सर परिवारों का मिलन संयोग पर आधारित होता था—किसी चमत्कार या किस्मत के भरोसे। लेकिन अब योगी सरकार की इस नई पहल के तहत हर खोए हुए व्यक्ति की पहचान और सुरक्षा की जिम्मेदारी खोया-पाया केंद्र और पुलिस की होगी। खासतौर पर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। किसी भी वयस्क को बच्चे या महिला का दावा करने पर पहले उनकी पहचान की पुष्टि करनी होगी। अगर कोई संदेह होता है तो तत्काल पुलिस को सूचित किया जाएगा ताकि बच्चा या महिला सुरक्षित हाथों में जाए। यह व्यवस्था उन फिल्मी कहानियों को पूरी तरह बदल देती है, जहां खोए हुए बच्चे को गलत हाथों में सौंप दिया जाता था और उसके जीवन में नाटकीय बदलाव आते थे। पहचान प्रमाणित करने पर ही प्रशासन सौंपेगा खोया व्यक्ति अब, जब कोई व्यक्ति कुंभ मेले में खोता है तो उसे सुरक्षित, व्यवस्थित और जिम्मेदार प्रणाली के तहत उसका ख्याल रखा जाएगा। किसी भी वयस्क को बच्चे या महिला को ले जाने से पहले सुनिश्चित करना होगा कि वह उसे पहचानते हैं और उनकी पहचान प्रमाणित है। इससे पहले की कहानियों में जहां बिछड़ने का दर्द और फिर मिलने की खुशी का एक लंबा सफर होता था, अब सरकार की इस पहल ने इस प्रक्रिया को सरल, तेज और सुरक्षित बना दिया है।  

सुपरफास्ट एक्सप्रेस गया-एलटीटी-गया ट्रेन 23 से पटरी पर दौड़ेगी

रायपुर रेल यात्रियों की सुविधा एवं मांग को ध्यान में रखते हुए रेल प्रशासन के द्वारा गया एवं एलटीटी के बीच 22357/22358 गया-एलटीटी-गया सुपरफास्ट एक्सप्रेस नई ट्रेन की सुविधा प्रदान की जा रही है। यह सुपरफास्ट ट्रेन गया से 22358 गया-एलटीटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन के नंबर से एवं एलटीटी 22357 एलटीटी-गया सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन के नंबर से चलेगी। यह सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन गया से प्रत्येक बुधवार को 23 अक्टूबर से एवं इसी प्रकार विपरीत दिशा में भी एलटीटी से प्रत्येक शुक्रवार को 25 अक्टूबर,से चलेगी। इस गाड़ी में एसी प्रथम-01, 02 एसी/।।-2, एसी/।।।-3, स्लीपर-09, सेकंड सिटिंग कोच- 6 तथा एसएलआर-2 सहित कुल  22 कोच के संरचना के साथ चलेगी।

BCCI हरमनप्रीत कौर को हटाने की तैयारी में ? टीम इंडिया की हार समेत सामने आई 5 बड़ी वजह

मुंबई महिला टी20 वर्ल्ड कप 2024 में टीम इंडिया का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. इस टूर्नामेंट को जीतने का प्रबल दावेदार मानी जा रही थी. लेकिन भारतीय टीम नॉक स्टेज तक भी नहीं पहुंच पाई और ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई. अब हरमनप्रीत कौर की कप्तानी पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, बीसीसीआई जल्द ही हेड कोच अमोल मजूमदार के साथ मीटिंग करके हरमनप्रीत को कप्तानी से हटा सकती है. इसके अलावा टीम इंडिया की पूर्व कप्तान मिताली राज ने भी आलोचना करते हुए कहा है कि पिछले 2 से 3 साल में टीम में कोई ग्रोथ देखने नहीं मिला है. उन्होंने भी नए कप्तान की मांग की है. न्यूजीलैंड सीरीज से पहले तय होगी किस्मत भारतीय महिला टीम को 24 अक्टूबर से न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज खेलनी है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले बीसीसीआई टीम इंडिया के हेड कोच अमोल मजूमदार के साथ मीटिंग कर सकती है. इस दौरान हरमनप्रीत के भविष्य का फैसला किया जाएगा. 2025 के वनडे वर्ल्ड कप से पहले बीसीसीआई अब उन्हें हटाकर नया कप्तान लाना चाहती है. बता दें भारतीय महिला टीम 2016 में टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी थी. इसके बाद हरमनप्रीत कौर को टी20 टीम की कप्तानी सौंपी गई थी. उनकी कप्तानी में टीम इंडिया नॉक आउट स्टेज तक जाती रही. 2020 के एडिशन में तो फाइनल में पहुंच गई थी. हालांकि, कभी भी टूर्नामेंट को जीतने में कामयाब नहीं हो सकी. हरमनप्रीत को क्यों हटाना चाहती है BCCI? हरमनप्रीत कौर को कप्तानी से हटाने के पीछे कुछ वजहें सामने निकलकर आई है. सबसे बड़ी वजह तो यही है कि इस बार भारतीय टीम सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सकी, जबकि स्क्वॉड काफी मजबूत था. वहीं टीम को टी20 वर्ल्ड कप जीतने प्रबल दावेदार भी माना जा रहा था. लेकिन पहले न्यूजीलैंड और फिर ऑस्ट्रेलिया से हारकर सेमीफाइनल का सपना चकनाचूर हो गया. हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में टीम इंडिया का फिटनेस और फील्डिंग भी बहुत बड़ी समस्या रही है. टी20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3 कैच ड्रॉप किए थे. वहीं कुछ मौके ऐसे थे जिन्हें कैच में बदला जा सकता था. टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज ने भी टीम के फिटनेस को लेकर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा है कि 11 में से सिर्फ 2 फिट खिलाड़ियों के दम पर बड़े टूर्नामेंट्स नहीं जीते सकते हैं. उनके मुताबिक जेमिमा रोड्रिग्स और राधा यादव के अलावा दूसरी खिलाड़ी फील्ड पर तेज नहीं हैं. हरमनप्रीत के रहते हुए नए खिलाड़ियों को मौका नहीं देने पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं. मिताली के मुताबिक पिछले कुछ सालों से टीम में कोई ग्रोथ नहीं हुआ है. लगातार पुराने खिलाड़ी ही खेलते आ रहे हैं. मिताली ने मेंस टीम का उदाहरण देते हुए कहा कि हर बड़े टूर्नामेंट के बाद नए खिलाड़ियों मौका देने की वजह से वह ज्यादा सफल हैं. जबकि हरमनप्रीत की कप्तानी में नए खिलाड़ी नहीं तैयार हो सके हैं. वहीं बड़े टूर्नामेंट्स से पहले टीम मैनेजमेंट की प्लानिंग भी ठीक नहीं रही है. यूएई में जारी टी20 वर्ल्ड कप के लिए एशिया कप तैयारी एक बड़ा मौका था. लेकिन भारतीय टीम सिर्फ उसी टूर्नामेंट को जीतने के लिहाज से खेलती रही. जब यूएई में टूर्नामेंट शुरू हो तो नंबर 3 और नंबर 4 के पोजिशन पर बल्लेबाजी को लेकर कन्फ्यूजन देखने को मिला.  

समाज सेवा, सुरक्षा, वीरता एवं साहसिक कार्यों के लिये पुरस्कार के आवेदन आमंत्रित

भोपाल महिला, बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेश में महिलाओं एवं बच्चों के क्षेत्र में समाज सेवा, सुरक्षा, वीरता एवं साहसिक कार्यों के लिये व्यक्तिगत/संस्थागत श्रेणी में 6 राज्य एवं जिला स्तरीय पुरस्कार दिये जाते हैं। वर्ष 2024 के लिये आवेदन आमंत्रित किये गये हैं। आवेदन का प्रारूप विभागीय वेबसाइट https://mpwcdmis.gov.in/ पर उपलब्ध है। आवेदन जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला बाल विकास कार्यालय में निर्धारित अंतिम तिथि के पहले जमा किया जा सकता है। रानी अवंतीबाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार महिला और बच्चों को उत्पीड़न से बचाने, उनके पुनर्वास में योगदान, बाल विवाह, दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरितियों को रोकने का साहसिक कार्य करने वाली मध्यप्रदेश की महिला/बालिका को रानी अवंतीबाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। पुरस्कार के रूप में एक लाख रूपये की राशि प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है। इस पुरस्कार के लिये आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 नवम्बर 2024 निर्धारित है। इन पुरस्कारों के नाम की घोषणा फरवरी माह में की जाएगी, 8 मार्च महिला दिवस पर इन्हें पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। राजमाता विजयाराजे सिंधिया समाज सेवा पुरस्कार महिलाओं से संबंधित समाज सुधार (स्वास्थ्य, शिक्षा, साक्षरता, पर्यावरण स्थिति में सुधार, आर्थिक गतिविधियों के संचालन, अधिकारों के प्रति जागृति, सामाजिक उत्थान) के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं प्रमाणित कार्य करने वाली मध्यप्रदेश की महिलाओं को राजमाता विजयाराजे सिंधिया समाज सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा।पुरस्कार के रूप में एक लाख रूपये की राशि, प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है। विष्णु कुमार समाज सेवा पुरस्कार महिलाओं से संबंधित समाज सुधार (स्वास्थ्य, शिक्षा, साक्षरता, पर्यावरण स्थिति में सुधार, आर्थिक गतिविधियों के संचालन, अधिकारों के प्रति जागृति, सामाजिक उत्थान) के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं प्रमाणित कार्य किया हो, ऐसे व्यक्ति/संस्था को विष्णु कुमार समाज सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा।पुरस्कार के रूप में एक लाख रूपये की राशि, प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है। मुख्यमंत्री नारी सम्मान रक्षा पुरस्कार ऐसी घटना जिसमें किसी महिला द्वारा आपराधिक या असामाजिक तत्वों के विरूद्ध साहस का प्रदर्शन कर स्वयं का अथवा अन्य किसी महिला की सुरक्षा एवं बचाव के लिये अवर्णनीय साहसिक कार्य किया हो, को मुख्यमंत्री नारी सम्मान रक्षा पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। आवेदक द्वारा यह साहसिक कार्य एक जनवरी से 31 दिसम्बर 2024 के बीच किया गया हो। राज्य स्तर पर चयनित किन्ही 2 महिला व 2 पुरूषों को एक लाख रूपये से सम्मानित किया जायेगा। जिला स्तर पर 50 हजार रूपये की राशि, प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाता है। अरूणा शानबाग साहस पुरस्कार यह पुरूस्कार उस घटना के लिये जिसमें किसी महिला द्वारा किसी भी हिंसा में स्वयं या किसी अन्य के बचाव के लिये वीरतापूर्वक कार्य किया गया हो, को अरूणा शानबाग साहस पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। आवेदक द्वारा यह कार्यएक जनवरी से 31 दिसम्बर 2024 के बीच किया गया हो। यह पुरस्कार राज्य स्तर पर चयनित किसी एक महिला को दिया जायेगा, जिसमें एक लाख रूपये की राशि, प्रतीक चिन्ह और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जायेगा। राष्ट्रमाता पद्मावती पुरस्कार आपराधिक और असामाजिक तत्वों के विरूद्ध साहस का प्रदर्शन करते हुए स्वयं या किसी अन्य महिला का बचाव करने वाली महिला अथवा महिलाओं का बचाव करने वाले पुरूषों को भी सम्मानित किया जाता है। पुरस्कार में एक लाख रूपये की राशि, प्रतीक चिन्ह और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।  

शरद पूर्णिमा उत्सव पर आज श्री छत्तीसगढ़ सकल गुजराती समाज का विविध कार्यक्रम

रायपुर श्री छत्तीसगढ़ सकल गुजराती समाज का शरद पूर्णिमा उत्सव पर आज विविध कार्यक्रम बैरनबाजार स्थित आर्शिवाद भवन में रखा गया है। प्रदेश अध्यक्ष कौशिक कट्टा व महासचिव हितेश रायचुरा ने बताया कि विशेष तौर पर आरती मुख्य आकर्षण होगा जिसमें प्रत्येक समाज गु्रप से महिला सदस्यों के 10 नाम आमंत्रित किए गए हैं। जिसमें डे्रस कोड रखा गया है सफेद कलर के साथ मनपंसद पारिवारिक वेशभूषा। आरती के अलावा समाज के लिए रास गरबा में अलग से ग्रुप परफार्मेंस रखे गए हैं। इनके लिए अलग से नाम बुलाए गए हैं। जिसमें अपनी पसंद का डे्रस सिलेक्ट कर सकते हैं। बच्चों के लिए फैंसी डे्रस व बड़ों के लिए बेस्ट डे्रस के साथ बेस्ट कपल्स परफार्मेंस भी होगा। पहली बार ऐसा हो रहा है कि समाज के अलग-अलग घटक एक मंच पर एकत्रित  होकर शरद उत्सव का आयोजन कर रहे हैं। 

वंदे भारत ट्रेन की धुलाई के लिए हाई क्‍वालिटी प्रेशर पंप का उपयोग होगा, तकनीक से पानी की भी बचत होगी

भोपाल  भोपाल रेल मंडल की ओर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के पास में आरओएच शेड (रुटीन ओवर हालिंग) तैयार किया जा रहा है। इस शेड में वंदे भारत ट्रेन का मेंटेनेंस किया जा सकेंगे। इसके साथ अन्य ट्रेनों का भी मेंटेनेंस होगा। इसके लिए पिट लाइन भी लगभग तैयार है, जो कि फरवरी तक शुरू की जाएगी। साथ ही वाशिंग पिट से एलएचबी कोच सहित अन्य ट्रेनों के कोचों की धुलाई की जाएगी। इसे बनाने में लगभग ढाई करोड़ की लागत से यह पिट बनाई जा रही है, जिसमें सभी आधुनिक सुविधा मौजूद रहेंगी। एलएचबी कोच के अनुसार तैयार हो रही पिट लाइन ट्रेनों का मेंटेनेंस अलग पिट लाइनों पर होगा। अभी रानी कमलापति के पास यार्ड में तीन पिट लाइन हैं। इस पिट लाइन को जर्मन कंपनी लिंक हाफ मैन बुश के तकनीकी सहयोग से तैयार एलएचबी कोच का मेंटेनेंस करने के हिसाब से बनाया जा रहा है। एलएचबी कोच वाली ट्रेनों की ओवर हालिंग होगा। भोपाल मंडल के एससीएम व प्रवक्ता नवल अग्रवाल ने बताया कि रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के पास आरओएच शेड बनाया जा रहा है, जहां वंदे भारत ट्रेन का मेंटेनेंस किया जा जाएगा। साथ ही अन्य ट्रेनों का भी मेंटेनेंस होगा, जो कि फरवरी तक शुरू की जाएगी। हाई क्‍वालिटी के वाटर पंप होंगे मेंटेनेंस रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के पास बन रही ऑटोमेटिक वाशिंग पिट पर एलएचबी कोच वाली ट्रेनों की पीरियोडिक ओवर हालिंग (पीओएच) के साथ प्रारंभिक मेंटेनेंस भी हो सकेगा। वहीं ट्रेन की धुलाई के लिए उच्च क्षमता वाले वाटर प्रेशर पंप और स्वचालित ब्रश मशीन रहेगी। ऑटोमेटिक वाशिंग मशीनों से होगी धुलाई     रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के आउटर के पास रेलवे की ओर से यह पिट बनाई जा रही है। फरवरी से ट्रेनों की धुलाई आटोमेटिक वाशिंग मशीनों से होगी।     अभी ऑटोमेटिक वाशिंग पिट लाइन का काम लगभग 60 प्रतिशत पूरा हो चुका है। यह करीब 680 मीटर लंबी पिट बनाई जा रही है।     इस लाइन पर 24 कोच वाली एक ट्रेन 15 से 20 मिनट में बाहर से धूल जाएगी। अभी यह काम सफाईकर्मी करते हैं। इस तरह एक ट्रेन को चार सफाईकर्मी चार से पांच घंटे में धोते हैं।     सबसे बड़ी बचत पानी की होगी। अभी एक ट्रेन के धुलने में अधिकतम 15 हजार लीटर पानी लग जाता है।     जब यही ट्रेन मशीन से धुलेगी तो तीन से पांच हजार लीटर पानी लगेगा। इस तरह एक ट्रेन की धुलाई में लगभग 10 हजार लीटर पानी बचेगा।  

उत्तर प्रदेश में नये अध्यादेश में खाने पीने की चीजों में थूक मिलाना गैर-जमानती अपराध माना जाएगा

लखनऊ सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल है, जिसके बारे में सुन पाना भी मुश्किल हो रहा है. सड़क किनारे की दुकानों पर खाने की चीजों में थूक लगाने की खबरें तो अक्सर आती रही हैं, लेकिन इस बार घर में काम करने वाली एक मेड की करतूत सामने आई है. मेड आटा गूंथने के लिए पानी की जगह पेशाब का इस्तेमाल कर रही थी. और उसकी करतूत तब मालूम हो सकी जब घरवालों ने खाना बनाने के वक्त चुपके उसका वीडियो बना लिया. गाजियाबाद के इस मामले में आरोपी मेड को गिरफ्तार कर लिया गया है. बताते हैं कि वो मेड परिवार में पिछले 8 साल से काम कर रही थी. उन लोगों को शक तब हुआ जब परिवार के लोग कुछ महीनों से गंभीर रूप से बीमार होने लगे. परिवार के लोग पेट और लीवर की बीमारियों से जूझ रहे थे. पहले तो सामान्य इन्फेक्शन समझकर इलाज चला, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ तो शक गहराने लगा – और पीछे लगने पर पूरी कहानी सामने आई. जुलाई, 2024 की ही बात है, कांवड़ यात्रा के रास्ते में आने वाली दुकानों के बाहर स्थानीय पुलिस ने मालिकों को नाम लिखने को कहा तो बवाल मच गया. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, और उस पर रोक लगा दी गई – अब खबर आई है कि यूपी सरकार ऐसे मामलों को रोकने के लिए नया अध्यादेश लाने जा रही है. खाने पीने की चीजों में थूक मिलाना गैर-जमानती अपराध होगा खाने-पीने की चीजों में थूक मिलाने की घटना को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी काफी गंभीरता से लिया है – और ऐसे मामलों में डीजीपी को सख्ती से पेश आने का आदेश दिया है. पुष्कर सिंह धामी ने कहते हैं, ‘इस तरह के किसी दुष्कृत्य के लिए उत्तराखंड में कोई स्थान नहीं है… ऐसी घटनाओं से न सिर्फ खाद्य पदार्थ दूषित होते हैं, भावनाएं भी आहत होती हैं… इस तरह की घटनाओं पर हम कठोर कार्रवाई करेंगे.’ उत्तराखंड सरकार की तरफ से सभी जिलों में पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि होटल, ढाबा और बाकी संस्थानों में काम करने वालों का शत-प्रतिशत सत्यापन सुनिश्चित किया जाये, और सीसीटीवी लगाने के साथ ही खुफिया जानकारी इकट्ठा की जाये. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो थूक या कोई भी ह्यूमन वेस्ट मिलाये जाने को लेकर अध्यादेश लाने की तैयारी कर रहे हैं. इस सिलसिले में दो अध्यादेश – ‘छद्म एवं सौहार्द विरोधी क्रियाकलाप निवारण एवं थूक प्रतिषेध अध्यादेश 2024’ और ‘यूपी प्रिवेंशन ऑफ कॉन्टेमिनेशन इन फूड (कंज्यूमर राइट टू नो) अध्यादेश 2024’ लाये जाने हैं. अध्यादेशों के जरिये थूककर खाना खिलाना गैर-जमानती अपराध तो होगा ही, अपराध के लिए सजा के कड़े प्रावधान भी किये जाएंगे. साथ ही, अध्यादेश आ जाने के बाद सभी को अपने खाने के बारे में पूरी जानकारी लेने का अधिकार होगा. दोनो अध्यादेश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. खाना कहां बन रहा है? कौन बना रहा है? और खाना कैसा है? अध्यादेश में उपभोक्ता को खाद्य पदार्थों के बारे में ,सब कुछ जानने का करीब करीब वैसे ही अधिकार मिलेगा, जैसे RTI में सूचना को लेकर मिला हुआ है. खाने में थूक-पेशाब मिलाने वाले सायकोपैथ नहीं तो क्या हैं? जरा सोचिये, वो मेड उस परिवार में 8 साल से काम कर रही थी. पहले और भी घरों में काम कर चुकी होगी. मालूम नहीं पेशाब मिलाकर खाना बनाने का काम उसी परिवार में कर रही थी, जहां पकड़ी गई या बाकी जगह भी कर चुकी है, ये सब तो पुलिस की जांच-पड़ताल से ही सामने आएगा – और ये भी मालूम हो सकेगा कि ये काम वो कुछ ही दिनों से कर रही थी, या शुरू से ही ऐसा करती आ रही थी? आखिर कैसे होते हैं ये लोग. कैसी होती है इनके दिमाग की बनावट. ऐसे ख्याल इनके मन में आते क्यों हैं? कई मामलों में अपराधियों को सायकोपैथ माना जाता है, जो मजे लेने के लिए अपराध को अंजाम देते हैं. अपनी करतूत में उनको मजा आता है – खाने को लेकर ऐसी करतूत तो इसमें शामिल लोगों के भी सायकोपैथ होने की तरफ ही इशारा कर रही है. ये कितनी गंभीर बात है कि जहां लोग लहसुन प्याज के इस्तेमाल से परहेज करते हों, वहां खाने में थूक और पेशाब मिलाये जाने से रोकने के लिए सरकार को कानून बनाना पड़े – भला इससे बड़े शर्म की बात क्या होगी.  

मस्जिद में राम नाम के नारे लगाने वाले आरोपियों के खिलाफ केस खारिज, Karnataka HC ने की टिप्पणी

बेंगलुरु कर्नाटक हाईकोर्ट ने मस्जिद के अंदर ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने के आरोप में दो लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इससे किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंची है। आपको बता दें कि कोर्ट का यह यह आदेश पिछले महीने पारित किया गया था।  वेबसाइट पर अपलोड किया गया। शिकायत के अनुसार, दक्षिण कन्नड़ जिले के दो लोग पिछले साल सितंबर में एक रात एक स्थानीय मस्जिद में घुस गए और “जय श्री राम” के नारे लगाए। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने उन पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। दोनों के खिलाफ धारा 295 ए (धार्मिक विश्वासों को ठेस पहुंचाना), 447 (आपराधिक अतिक्रमण) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपियों ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनके वकील ने तर्क दिया कि मस्जिद एक सार्वजनिक स्थान है और इसलिए इसमें अपराध का कोई मामला नहीं बनता है। वकील ने यह भी तर्क दिया कि ‘जय श्री राम’ का नारा लगाना आईपीसी की धारा 295 ए के तहत परिभाषित अपराध की आवश्यकता को पूरा नहीं करता है। ‘बार एंड बेंच’ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा, “कोर्ट ने कहा कि यह समझ में आता है कि अगर कोई ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाता है तो इससे किसी वर्ग की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचेगी। जब शिकायतकर्ता खुद कहता है कि इलाके में हिंदू-मुस्लिम सौहार्द के साथ रह रहे हैं तो इस घटना का किसी भी तरह से कोई नतीजा नहीं निकल सकता।” क र्नाटक सरकार ने याचिकाकर्ताओं की याचिका का विरोध किया और उनकी हिरासत की मांग करते हुए कहा कि मामले में आगे की जांच की जरूरत है। हालांकि अदालत ने माना कि अपराध का सार्वजनिक व्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। कोर्ट ने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय का मानना ​​है कि कोई भी कार्य आईपीसी की धारा 295 ए के तहत तब तक अपराध नहीं माना जाएगा, जब तक कि उससे शांति स्थापित करने या सार्वजनिक व्यवस्था को नष्ट करने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। ऐसा नहीं होता है तो उन्हें आईपीसी की धारा 295 ए के तहत अपराध नहीं माना जाएगा।”

Diwali से पहले ठंड की दस्तक, Uttar Pradesh में सर्दियों की तैयारी शुरू

लखनऊ/ नईदिल्ली  उत्तर प्रदेश में धीरे-धीरे मौसम करवट बदल रहा है। दिवाली से पहले प्रदेश में करीब-करीब मौसम पूरी तरह से बदलने के आसार जताए गए हैं। हालांकि दिन की तुलना में रात के समय मौसम पूरी तरह से बदल चुका है। रात के समय तापमान में धीरे-धीरे कमी आने के चलते हल्की-हल्की ठंड पड़ने लगी है। आलम ये है कि अभी तक जो लोग एसी चलाकर काम चला रहे थे। वो अब पंखा चलाकर ही काम चला ले रहे हैं। दिन में धूप में निकलने से गर्मी हो रही है। प्रदेश में अभी कुछ दिन तक मौसम जस का तस बना रह सकता है। प्रदेश में अगले 24 घंटे के दौरान कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। क्योंकि मौसम विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 16 अक्टूबर को पश्चिमी व पूर्वी यूपी में मौसम शुष्क रह सकता है। जिसके कारण प्रदेश में कहीं भी बारिश होने की चेतावनी नहीं है। इसी तरह करीब एक हफ्ते तक प्रदेश में कहीं भी किसी तरह की चेतावनी नहीं जारी हुई है। प्रदेश के दोनों हिस्सों में मौसम साफ रहने वाला है। हालांकि तापमान में जरूर उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का भी मानना है कि जैसे जैसे दिन गुजरेंगे, वैसे वैसे तापमान में कमी देखने को मिल सकती है। आने वाले दिनों में रात के समय धीरे धीरे ठंड बढ़ सकती है। कई जिलों में तापमान 20 से नीचे प्रदेश में तापमान की बात करें तो कई जिलों में न्यूनतम तापमान में गिरावट देखने को मिली है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, नजीबाबाद, शाहजहांपुर और बरेली समेत कई जिलों में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री से नीचे आ गया है। नजीबाबाद में सबसे कम 18 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रिकार्ड किया गया है, जबकि मुजफ्फरनगर में 18.6 डिग्री, बरेली में 18.9 डिग्री, मेरठ में 19 डिग्री, शाहजहांपुर में 19.6 डिग्री और अलीगढ़ में 19.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया है। उधर हमीरपुर और बस्ती में अधिकतम तापमान 30 डिग्री के नीचे लुढ़क गया है। बस्ती में 29 डिग्री और हमीरपुर में 29.2 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया है। कुछ जिलों को छोड़कर बाकी सभी जिलों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री से नीचे है। लखनऊ में बुधवार को दिन में धूप निकलने के बाद गर्मी और उमस का असर दिखने की उम्मीद है।

सिंहस्थ के लिए शिप्रा नदी किनारे 29.21 किलोमीटर घाट बनेंगे, बांध निर्माण आदि को मिली मंजूरी

उज्जैन  महाकुंभ सिंहस्थ-2028 से पहले ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के नवविस्तारित क्षेत्र श्री महाकाल महालोक में स्थापित फाइबर-रिइंफोर्स्ड प्लास्टिक की मूर्तियां हटाकर पाषाण की मूर्तियां स्थापित की जाएंगी। सिंहस्थ के लिए गठित मंत्री मंडल समिति ने इस काम के लिए 75 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। साथ ही उज्जैन से इंदौर जाने के लिए एक और फोरलेन बनाने सहित चार हजार करोड़ रुपये के विभिन्न प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बनी समिति ने शिप्रा नदी किनारे 29.21 किलोमीटर घाट बनाने को 779 करोड़ की योजना, शिप्रा नदी को शिप्रा के ही जल से प्रवाहमान रखने को 614 करोड़ रुपये की सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी बांध निर्माण योजना, कान्ह नदी पर साढ़े 43 करोड़ रुपये की 11 बैराजों के निर्माण की योजना, उज्जैन शहर में 198 करोड़ रुपये से सीवरेज पाइपलाइन बिछाने की योजना, उच्चदाब विद्युत उपकेंद्र बनाने एवं भूमिगत केबल बिछाने को 345 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की है। सिंहस्थ क्षेत्र में दो नए फोरलेन का प्रस्ताव भी मंजूर इसके अलावा 36 करोड़ रुपये से सिंहस्थ क्षेत्र में दो नए फोरलेन बनाने का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया है। एक फोरलेन खाकचौक से वीरसावरकर चौराहा, गढ़कालिका होकर भर्तृहरि गुफा तक बनाया जाएगा और दूसरा फोरलेन कार्तिक मेला मैदान से दत्त अखाड़ा, भूखी माता मंदिर, उजड़खेड़ा हुनमान मंदिर से बड़नगर मार्ग तक बनाया जाएगा। समिति ने उज्जैन से इंदौर जाने को एक नया फोरलेन बनाने को 950 करोड़ की योजना भी स्वीकृत की है। ये मार्ग उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर मार्ग जुड़कर चंद्रावतीगंज, अजनोद, खजूरिया, हातोद, गांधी नगर के रास्ते इंदौर एयरपोर्ट तक बनेगा। लंबाई 65 किलोमीटर होगी। 25 करोड़ रुपये से कुंभ संग्रहालय सह कालगणना शोध केंद्र बनाया जाएगा। इसके लिए अभी जमीन चयनित की जाना है। इंतजार अब कैबिनेट से मंजूरी मिलने का है। मंजूरी मिलते ही ठेकेदार चयन के लिए निविदा प्रक्रिया की जाएगी। पाषण की मूर्तियों का निर्माण जारी महाकाल महालोक में स्थापित करने को विक्रम कीर्ति मंदिर परिसर में भगवान शिव की और जिला पंचायत के संभागीय हाट बाजार परिसर में सप्त ऋषि की मूर्तियों का निर्माण हो रहा है। दो मूर्तियां छह माह में आकार भी ले चुकी हैं। पिछले साल गिर गई थी मूर्तियां पिछले साल तेज हवा चलने पर महाकाल महालोक में स्थापित फाइबर-रिइंफोर्स्ड प्लास्टिक से बनी सप्त ऋषियों की छह मूर्तियां गिरकर खंडित हो गई थी। तब भाजपा ने कहा था कि फाइबर की मूर्तियां लगाने की योजना कांग्रेस की कमलनाथ सरकार की थी। भाजपा शास्त्र सम्मत पाषाण की मूर्तियां स्थापित करेगी। इस घटना के कुछ महीने बाद सरकार ने ताबड़तोड़ नई फाइबर की मूर्तियां स्थापित कराई थी। इसी साल गुड़ी पड़वा के बाद पत्थर की नई मूर्तियों का निर्माण भी शुरू कराया।

भारत खालिस्तान समर्थक भारतीय मूल केकानाडाई नागरिकों के OCI रद्द कर, संपत्ति के अधिकार को खत्म कर सकता है

नई दिल्ली भारत और कनाडा के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अब कनाडा ने भारत के खिलाफ संभावित प्रतिबंधों के संकेत दिए हैं। इधर, भारत ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। हाल ही में कनाडा ने एक मामले की जांच में कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त रहे संजय कुमार वर्मा को ‘पर्सन ऑफ इंटरेस्ट’ बनाया था। इसका मतलब ऐसे व्यक्ति से होता है, जो संदिग्ध है, लेकिन अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। दोनों ही देशों ने 6-6 राजनयिकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। दोनों देशों में तनाव बढ़ने के बीच कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली ने भारत के खिलाफ पाबंदी लगाने की संभावना को खारिज नहीं किया और कहा कि ‘सभी विकल्प विचाराधीन हैं’। भारत ऐसे दे सकता है जवाब  रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल, कनाडा में लाखों भारतीय छात्र हैं। अगर भारत ने छात्रों पर कनाडा में शिक्षा लेने पर रोक लगा दी, तो इसका गहरा असर हो सकता है। यह फैसला कनाडा के शिक्षा से जुड़ी आर्थिक व्यवस्था पर गहरी चोट दे सकता है। इसके अलावा भारत खालिस्तान समर्थक भारतीय मूल के सभी कानाडाई नागरिकों के OCI यानी ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया कार्ड रद्द कर सकता है। इनके साथ भारत खालिस्तान समर्थकों के संपत्ति के अधिकार को खत्म कर सकता है। साथ ही वह नए वीजा में देरी और गहनता से जांच करना बढ़ा सकता है। ऐसे में खालिस्तान समर्थकों पर दबाव पड़ सकता है। भारत भारतीय मूल के ऐसे कनाडाई नागरिकों के मल्टिपल एंट्री वीजा पर भी रोक लगा सकता है। अगर यह फैसला लिया जाता है, तो असर भारतीय कनाडाई समुदाय पर पड़ सकता है। इससे कनाडा की स्थानीय राजनीति पर भी असर हो सकता है। कनाडा को जवाब में भारत भी व्यापार स्तर पर प्रतिबंध लगा सकता है। टॉप 10 ट्रेडिंग पार्टनर होने के नाते भारत कनाडा की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। साथ ही भारत में निवेश वाले कनाडा के आर्थिक संस्थानों और पेंशन फंड को फ्रीज कर सकता है। कनाडा की पुलिस ने लगाए थे ये आरोप कनाडा की सार्वजनिक प्रसारणकर्ता कनाडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (सीबीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, देश के राष्ट्रीय पुलिस बल रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के प्रमुख ने भारत के संदर्भ में चौंकाने वाले आरोप लगाए कि भारत सरकार के एजेंट कनाडा में हत्याओं सहित ‘व्यापक हिंसा’ में भूमिका निभा रहे हैं और चेतावनी दी थी कि इससे ‘देश की सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर खतरा’ है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘इनमें गोपनीय सूचना जुटाने की तकनीक, दक्षिण एशियाई कनाडाई लोगों को निशाना बनाकर उनके साथ दंडात्मक व्यवहार करना और हत्या सहित एक दर्जन से अधिक धमकी भरे और हिंसक कृत्यों में संलिप्तता शामिल है।’ कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के साथ काम करने के उनकी सरकार के प्रयास के कोई परिणाम नहीं निकले। उन्होंने कहा, ‘इसलिए, इस सप्ताहांत, कनाडाई अधिकारियों ने एक असाधारण कदम उठाया। उन्होंने आरसीएमपी के उन साक्ष्यों को साझा करने के लिए भारतीय अधिकारियों से मुलाकात की, जिनके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि भारत सरकार के छह एजेंट आपराधिक गतिविधियों में शामिल व्यक्ति हैं।’ RCMP ने आरोप लगाया है कि बिश्नोई गिरोह के तार भारत सरकार के उन ‘एजेंटों’ से जुड़े हैं, जो देश में दक्षिण एशियाई समुदाय, विशेष रूप से ‘खालिस्तान समर्थक तत्वों’ को निशाना बना रहे हैं। भारत सरकार के सूत्रों ने कहा कि कनाडाई अधिकारियों का यह दावा सच नहीं है कि कनाडा ने निज्जर मामले में भारत को प्रामाणिक सबूत दिए हैं।

2521 करोड़ रुपए की लैब में चीन शुरू करेगा प्रयोग, ब्रह्मांड को चलाने वाले रहस्यमयी कण की होगी टेस्टिंग

बीजिंग ये शब्द दिमाग में आते ही सबसे पहले याद आती है साल 2009 में आई हॉलीवुड फिल्म 2012. एक साइंस फिक्शन जिसे रोलैंड एमरिच ने निर्देशित किया था. दुनिया न्यूट्रीनो की मात्रा बढ़ने की वजह से कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रही थी. लीड कैरेक्टर यानी हीरो जॉन क्यूसेक अपने परिवार को बचाने के लिए चीन पहुंचता है. अब असली कहानी … चीन अपने गुआंगडॉन्ग प्रांत के जियांगमेन शहर में जमीन से 700 मीटर नीचे यानी 2300 फीट नीचे नया प्रयोग करने जा रहा है. यह जियांगमेन अंडरग्राउंड न्यूट्रीनो ऑब्जरवेटरी (JUNO) बनाई गई है. जिसमें ब्रह्मांड में पाए जाने वाले सबसे रहस्यमयी कण न्यूट्रीनो की खोज की जाएगी. उनके व्यवहार और सक्रियता के असर की स्टडी की जाएगी. JUNO में जमीन के 2300 फीट नीचे एक बड़ा गोला बना है. जिसमें हजारों लाइट-डिटेक्टिंग ट्यूब्स हैं. इस गोले और ट्यूब्स को 12 मंजिला ऊंचे सिलेंडर जैसी जगह के अंदर रखा गया है. जिसमें पानी भरा है. इस ऑब्जरवेटरी को बनाने में 300 मिलियन डॉलर्स यानी 2521 करोड़ रुपए से ज्यादा लगे हैं. जल्द ही लैब में प्रयोग शुरू होंगे. पहले जानते हैं क्या होते हैं न्यूट्रीनो? हम आपको यहां पर पार्टिकल फिजिक्स नहीं बताएंगे. सामान्य भाषा में समझाते हैं. पिछले साल लार्ज हैड्रन कोलाइडर में वैज्ञानिकों को दुनिया का सबसे ताकतवर और भूतिया कण Neutrinos मिला था. जब किसी परमाणु का केंद्र टूटता या किसी अन्य से जुड़ता है, तब न्यूट्रिनो निकलते हैं. न्यूट्रीनों ही ब्रह्मांड को चलाते हैं. माना जाता है कि इनसे ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई है. यह एक सबएटॉमिक कण है, जो दिखता नहीं. फोटोन के बाद ब्रह्मांड में इनकी संख्या सबसे ज्यादा है. लेकिन इन कणों में कोई इलेक्ट्रिक चार्ज नहीं होता. जिस समय आप यह स्टोरी पढ़ रहे होंगे, आपके शरीर से अरबों-खरबों न्यूट्रिनो आरपार आ-जा रहे होंगे. न्यूट्रिनो का वजन लगभग कुछ नहीं होता. यानी एकदम जीरो. ये आमतौर पर न्यूक्लियर फ्यूजन के समय निकलते हैं. इनके पैदा होने के लिए तारे, ग्रह और सुपरनोवा विस्फोट भी जिम्मेदार हैं. इनसे ग्रहों की ग्रैविटी पर असर पड़ता है. जब न्यूट्रिनो आपस में टकराते हैं तो तेज रोशनी पैदा करते हैं. चीन इनके साथ क्या करने वाला है? चीन अपने JUNO लैब में सबसे हल्के और भारी न्यूट्रीनो की खोज करेगा. ब्रह्मांड कैसे बना ये पता करेगा. इस लैब में सिर्फ चीन के ही वैज्ञानिक नहीं बल्कि पूरी दुनिया के वैज्ञानिक काम करने आने वाले हैं. ये लैब दो गुआंगडॉन्ग न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के पास है. यहां यह लैब छह साल तक पावर प्लांट की वजह से निकलने वाले न्यूट्रीनो की स्टडी करेगा. इसके लिए वह यूरेनियम और थोरियम के रेडियोएक्टिव डिके की स्टडी भी कर सकता है. उम्मीद है कि अगले साल के दूसरे हिस्से में JUNO अपना काम करना शुरू कर देगा. यह अमेरिका में डीप अंडरग्राउंड न्यूट्रीनो एक्सपेरीमेंट (DUNE) से कई गुना बड़ा है. ड्यून को ऑनलाइन आने में अभी छह साल का समय लगेगा. ड्यून को फर्मीलैब और एलबीएनएफ मिलकर संचालित कर रहे हैं.

‘प्लानिंग’ में 20 साल पीछे है भोपाल, नए सिरे से बनेगा भोपाल का मास्टर प्लान …

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अलावा इंदौर और जबलपुर का मास्टर प्लान भी नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। इसमें ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट (टीडीआर) यानी हस्तांतरणीय विकास अधिकार, 24 मीटर की सड़कों की नीति, शहरों में हरियाली बढ़ाने और हाईराइज भवनों पर विशेष ध्यान दिया गया है। शहर के फैलाव को रोकने का प्रयास करने के साथ ही निकायों को सड़क, बिजली और पानी सहित कई सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ज्यादा धनराशि भी खर्च न करनी पड़े, इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। वर्षों से अटके हैं प्रस्ताव बता दें, जबलपुर और इंदौर का मास्टर प्लान वर्ष 2041 तक के लिए और भोपाल का वर्ष 2047 तक के लिए तैयार किया जा रहा है। यह भोपाल और इंदौर का तीसरा, जबकि जबलपुर का चौथा मास्टर प्लान होगा। इससे पहले कई संशोधनों के चलते भोपाल का मास्टर प्लान 19 वर्ष और जबलपुर व इंदौर का तीन वर्ष से अटका हुआ है। धारा 16 में कॉलोनी की अनुमति भोपाल, इंदौर और जबलपुर में जब तक मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ, तब तक धारा 16 के तहत कॉलोनी विकसित करने की अनुमति दी जा रही थी। जिला स्तर पर नगर और ग्राम निवेश के ज्वाइंट डायरेक्टर को धारा 16 के तहत अनुमति देने का अधिकार था, लेकिन सरकार ने सात माह पहले इसे बदल दिया। यह अधिकार नगर तथा ग्राम निवेश के आयुक्त को दे दिया गया है। प्रदेश में कालोनाइजरों के 40 से अधिक आवेदन लंबित हैं। सड़कों को जोड़ने पर विशेष फोकस भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान में मेट्रोपोलिटिन रीजन प्लान को भी शामिल किया जाएगा। इसके तहत भोपाल में सीहोर, मंडीदीप, औबेदुल्लागंज, बंगरसिया को मास्टर प्लान में शामिल किया जाएगा। जबकि इंदौर के मास्टर प्लान में पीथमपुर, देवास और उज्जैन को भी शामिल किया जाएगा। सड़कों को जोड़ने पर विशेष फोकस किया जाएगा। यह है नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट नए सिरे से तैयार हो रहे प्लान के तहत कॉलोनाइजर को कॉलोनी काटने पर करीब एक तिहाई हिस्से में हरियाली तैयार करनी होगी। इसके अलावा रोड के दोनों तरफ और कॉलोनी के बाउंड्रीवाल के चारों तरफ पौधारोपण करना होगा। कॉलोनी में अंडरग्राउंड वायरिंग का भी प्रविधान किया जाएगा, जिससे पेड़ों की कटाई न करना पड़े। आईटी पार्क के लिए तैयार किया जाएगा बाजार शहरों में मिश्रित भूमि उपयोग को शामिल किया जाएगा। मुख्य मार्गों के बीच में व्यवसायिक क्षेत्र के लिए जगह तय की जाएगी। इसके अलावा दो से तीन किमी के बीच में बिना प्रदूषण वाला औद्योगिक क्षेत्र तय होगा। इससे शहर के लोगों को रोजगार मिलेगा। आइटी पार्क के लिए अलग ही बाजार तैयार किया जाएगा, जहां इससे जुड़ी सुविधाएं देना कॉलोनाइजर की जिम्मेदारी होगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने बताया कि भोपाल, इंदौर और जबलपुर के मास्टर प्लान के नए सिरे से बनाए जा रहे ड्राफ्ट में सरकार द्वारा लागू नीतियों को शामिल किया जा रहा है। पर्यावरण, हरियाली और हाईराइज भवनों के प्रविधान के साथ ही मेट्रोपोलिटन रीजन प्लान को भी शामिल किया जाएगा।

कांग्रेस की कृषि यात्रा: जीतू पटवारी का बयान, दिग्विजय की चेतावनी

Congress’s Krishi Yatra: Jitu Patwari’s statement, Digvijay’s warning भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी, दिग्विजय सिंह और सज्जन वर्मा ने आज प्रेस कॉन्फ्रेस में संयुक्त रुप से सरकार पर हमला बोला है। जीतू पटवारी ने कहा कि बार-बार यह बात स्थापित होती जा रही है कि बीजेपी की सरकार शिवराज और मोहन यादव किसान विरोधी है। ऋण माफी योजना बंद की. कांग्रेस पार्टी जो योजना लेकर आई थी उन्हें बंद किया. जो वादा इन्होंने किया था समर्थन मूल्य का वह अब तक पूरा नहीं किया और किसानों को धोखा दिया है. गेहूं और धान का वादा के अनुरूप एमएसपी नहीं दिया। यात्रा में सभी बड़े नेता शामिल होंगे यह राजनीतिक नहीं बल्कि किसानों का विषय है। सबसे बड़े किसान विरोधी शिवराज सिंह चौहान देश में मध्यप्रदेश की दुहाई देकर झूठ बोल रहे हैं. पूरे प्रदेश से किसने की समस्याओं और दुर्गति की खबरें हैडलाइन बन रहीं. मैं हर मंगलवार को शिवराज से समय मानता हूं. अगला मंगलवार पांचवा होगा जब तक वह समय नहीं देंगे हम लगातार उनसे समय मांगेंगे. किसानों की समस्या को लेकर से मांग रहा हूं. कांग्रेस गांव, खेत यात्रा निकालेगी। आग्रह करेंगे सरकार से जो आपने बातें की है वह पूरी करो व्यवस्थाओं को दुरुस्त करो. जल्द तारीख का ऐलान करेंगे. यात्रा में सभी बड़े नेता शामिल होंगे.

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