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महाकुंभ 2025 : श्रद्धालुओं को कुंभ नगरी की भव्यता का दिव्य दर्शन करवाने सरकार ने भारी भरकम बजट का ऐलान किया

प्रयागराज  महाकुंभ-2025 को लेकर योगी सरकार प्रयागराज के तीर्थों का कायाकल्प करने में युद्धस्तर पर जुटी है। श्रद्धालुओं को कुंभ नगरी की भव्यता और नव्यता का दिव्य दर्शन करवाने के लिए प्रदेश सरकार ने भारी भरकम बजट का ऐलान किया है। अक्षयवट का बड़ा पौराणिक महत्व है। मान्यता के अनुसार, संगम स्नान के पश्चात 300 वर्ष पुराने इस वृक्ष के दर्शन करने के बाद ही स्नान का फल मिलता है। इसलिए तीर्थराज आने वाले श्रद्धालु एवं साधु संत संगम में स्नान करने के बाद इस अक्षयवट के दर्शन करने जाते हैं। जिसके बाद ही उनकी मान्यताएं पूरी होती हैं। सरकार की महत्वाकांक्षी अक्षयवट कॉरिडोर सौंदर्यीकरण योजना का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। महाकुंभ के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान आस्था का प्रमुख केंद्र होगा। प्रभु श्रीराम वन जाते समय संगम नगरी में भारद्वाज मुनि के आश्रम में जैसे ही पहुंचे उन्हें, मुनि ने वटवृक्ष का महत्व बताया था। मान्यता के अनुसार माता सीता ने वटवृक्ष को आशीर्वाद दिया था। तभी प्रलय के समय जब पृथ्वी डूब गई तो वट का एक वृक्ष बच गया, जिसे हम अक्षयवट के नाम से जानते हैं। महाकवि कालिदास के रघुवंश और चीनी यात्री ह्वेन त्सांग के यात्रा वृत्तांत में भी अक्षय वट का जिक्र किया गया है। कहा जाता है कि अक्षयवट के दर्शन मात्र से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। भारत में चार प्राचीन वट वृक्ष माने जाते हैं। अक्षयवट- प्रयागराज, गृद्धवट-सोरों ‘शूकरक्षेत्र’, सिद्धवट- उज्जैन एवं वंशीवट-वृंदावन शामिल हैं। यमुना तट पर अकबर के किले में अक्षयवट स्थित है। मुगलकाल में इसके दर्शन पर प्रतिबंध था। ब्रिटिश काल और आजाद भारत में भी किला सेना के आधिपत्य में रहने के कारण वृक्ष का दर्शन दुर्लभ था। योगी सरकार ने विगत 2018 में अक्षयवट का दर्शन व पूजन करने के लिए इसे आम लोगों के लिए खोल दिया था। पौराणिक महत्व के तीर्थों के लिए योगी सरकार की ओर से कई विकास परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। यहां कॉरिडोर का भी कार्य चल रहा है। अयोध्या से प्रयागराज पहुंचे प्रसिद्ध संत और श्रीराम जानकी महल के प्रमुख स्वामी दिलीप दास त्यागी ने बताया कि अक्षयवट का अस्तित्व समाप्त करने के लिए मुगल काल में तमाम तरीके अपनाए गए। उसे काटकर दर्जनों बार जलाया गया, लेकिन ऐसा करने वाले असफल रहे। काटने और जलाने के कुछ माह बाद अक्षयवट पुन: अपने स्वरूप में आ जाता था। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने अक्षय वट को लेकर जो सौंदर्यीकरण और विकास कार्य शुरू किए हैं वो स्वागत योग्य हैं। महाकुंभ में संगम स्नान के बाद इसके दर्शन से श्रद्धालुओं को पुण्य प्राप्त होगा। रामायण, रघुवंश और ह्वेनत्सांग के यात्रा वृत्तांत में भी अक्षय वट का जिक्र प्रभु श्रीराम वन जाते समय संगमनगरी में भरद्वाज मुनि के आश्रम में जैसे ही पहुंचे उन्हें, मुनि ने वटवृक्ष का महत्व बताया था। मान्यता के अनुसार माता सीता ने वटवृक्ष को आशीर्वाद दिया था। तभी प्रलय के समय जब पृथ्वी डूब गई तो वट का एक वृक्ष बच गया, जिसे हम अक्षयवट के नाम से जानते हैं। महाकवि कालिदास के रघुवंश और चीनी यात्री ह्वेनत्सांग के यात्रा वृत्तांत में भी अक्षय वट का जिक्र किया गया है। कहा जाता है कि अक्षयवट के दर्शन मात्र से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। भारत मेें चार प्राचीन वट वृक्ष माने जाते हैं। अक्षयवट- प्रयागराज, गृद्धवट-सोरों ‘शूकरक्षेत्र’, सिद्धवट- उज्जैन एवं वंशीवट- वृंदावन शामिल हैं। मुगलकाल में रहा प्रतिबंध यमुना तट पर अकबर के किले में अक्षयवट स्थित है। मुगलकाल में इसके दर्शन पर प्रतिबंध था। ब्रिटिश काल और आजाद भारत में भी किला सेना के आधिपत्य में रहने के कारण वृक्ष का दर्शन दुर्लभ था। योगी सरकार ने आम लोगों के लिए खोला था दर्शन का रास्ता योगी सरकार ने विगत 2018 में अक्षयवट का दर्शन व पूजन करने के लिए इसे आम लोगों के लिए खोल दिया था। पौराणिक महत्व के तीर्थों के लिए योगी सरकार की ओर से कई विकास परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। यहां कॉरिडोर का भी कार्य चल रहा है। काटने और जलाने के बाद भी पुन: अपने स्वरूप में आ जाता था वट वृक्ष अयोध्या से प्रयागराज पहुंचे प्रसिद्ध संत और श्री राम जानकी महल के प्रमुख स्वामी दिलीप दास त्यागी ने बताया कि अक्षय वट का अस्तित्व समाप्त करने के लिए मुगल काल में तमाम तरीके अपनाए गए। उसे काटकर दर्जनों बार जलाया गया, लेकिन ऐसा करने वाले असफल रहे। काटने व जलाने के कुछ माह बाद अक्षयवट पुन: अपने स्वरूप में आ जाता था। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने अक्षय वट को लेकर जो सौंदर्यीकरण और विकास कार्य शुरू किए हैं वो स्वागतयोग्य हैं। महाकुंभ में संगम स्नान के बाद इसके दर्शन से श्रद्धालुओं को पुण्य प्राप्त होगा।    

कोरियाई सैनिक रूसी उपकरण और गोला-बारूद का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ करेंगे, क्या किम जोंग उन कराएंगे तीसरा विश्वयुद्ध?

मॉस्को  रूस और यूक्रेन का युद्ध चल रहा है। इस बीच एक बड़ी खबर आई है। यूक्रेनी रक्षा खुफिया निदेशालय (GUR) के प्रमुख के मुताबिक लगभग 11,000 उत्तर कोरियाई पैदल सेना के सैनिक यूक्रेन में लड़ने के लिए पूर्वी रूस में प्रशिक्षण ले रहे हैं। द वार जोन की रिपोर्ट के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल किरिलो बुडानोव ने कहा, ‘वे 1 नवंबर को यूक्रेन में लड़ने को तैयार होंगे।’ बुडानोव ने कहा कि उत्तर कोरियाई सैनिक रूसी उपकरण और गोला-बारूद का इस्तेमाल करेंगे। 2600 सैनिकों का पहला कैडर कुर्स्क क्षेत्र में भेजा जाएगा, जहां यूक्रेन ने रूस की जमीन को कब्जाया हुआ है। उन्होंने कहा कि अभी नहीं पता कि बाकी उत्तर कोरियाई सैनिक कहां जाएंगे। बुडानोव की टिप्पणी से कुछ घंटे पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा था कि लगभग 10 हजार उत्तर कोरियाई सैनिक रूस की ओर से यूक्रेन में लड़ने को तैयार हैं। न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक जेलेंस्की ने चेतावनी दी कि जंग में तीसरे देश के शामिल होने से यह संघर्ष ‘विश्वयुद्ध’ में बदल जाएगा। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इसके आगे और जानकारी नहीं दी। मंगलवार को यूक्रेन की मीडिया ने बताया कि लगभग 3000 सैनिक यूक्रेन में लड़ने के लिए रूस की ‘स्पेशल ब्यूरैट बटालियन’ का हिस्सा बन रहे हैं। रूस और उत्तर कोरिया में बढ़ा सहयोग इस बात में संदेह नहीं है कि पिछले कुछ महीनों में रूस और उत्तर कोरिया ने अपने सहयोग के स्तर को बढ़ाया है। पिछले सप्ताह पुतिन के जन्मदिन की बधाई के लिए उत्तर कोरियाई सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने संदेश भेजा था। इस संदेश में उन्होंने पुतिन को अपना सबसे करीबी साथी बताया था। रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते संबंधों का एक और संकेत देखा गया। गुरुवार को आई एक रिपोर्ट में कहा गया कि रूसी सैनिक उत्तर कोरिया की सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टिलरी के इस्तेमाल का प्रशिक्षण ले रहे हैं। यूक्रेन को टैंक देगा इजरायल इस बीच खबर आई है कि ऑस्ट्रेलिया अपने 49 पुराने एम1ए1 अब्राम्स टैंक यूक्रेन को देगा। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। यूक्रेन ने ये टैंक उसे दिए जाने का कुछ महीने पहले अनुरोध किया था। मार्लेस ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया सरकार यूक्रेन को अपने अधिकतर अमेरिका निर्मित एम1ए1 टैंक दे रही है, जिनकी कीमत 24 करोड़ 50 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (16 करोड़ 30 लाख अमेरिकी डॉलर) है। ऑस्ट्रेलिया में इनका स्थान 75 अगली पीढ़ी के एम1एक2 टैंकों का बेड़ा लेगा। मार्लेस ने फरवरी में कहा था कि यूक्रेन को पुराने हो चुके टैंक देना उनकी सरकार के एजेंडे में नहीं है लेकिन बृहस्पतिवार को उन्होंने कहा कि वे इस मदद को अपनी सरकार के पिछले रुख से पीछे हटने के रूप में नहीं देखते। मार्लेस ने ‘ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन’ से कहा, ‘हम यूक्रेन सरकार से इस मामले में लगातार बात कर रहे हैं कि हम उन्हें किस तरह से सर्वश्रेष्ठ सहायता दे सकते हैं।’

ड्रैगन सरकार के कर्ज का रेश्यो 86% पहुंचा, ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा चीन का लोन

नई दिल्ली  चीन की सरकार ने अपनी इकॉनमी में जान फूंकने के लिए अरबों डॉलर के स्टीम्युलस पैकेज की घोषणा की है लेकिन इससे देश का कर्ज संकट हल होता नहीं दिख रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश चीन का डेट-टु-जीडीपी रेश्यो साल की पहली तिमाही में 366% के ऑल-टाइम हाई लेवल पर पहुंच चुका है। 2008 के वित्तीय संकट के बाद से यह रेश्यो डबल हो चुका है। नॉन-फाइनेंशियल कॉरपोरेट का रेश्यो सबसे ज्यादा 171% है। इसके बाद सरकार के कर्ज का रेश्यो 86% है। अमेरिका में सरकार का डेट-टु-जीडीपी रेश्यो 125% है। करीब तीन दशक से दुनिया की फैक्ट्री बना चीन अब कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है। देश की इकॉनमी डिफ्लेशन के दौर से गुजर रही है। यह वही स्थिति है जिसमें 1990 के दशक से जापान की इकॉनमी फंसी है। अमेरिका के साथ चल रहे तनाव ने चीन की बुरी हालत कर दी है। देश में बेरोजगारी चरम पर है, रियल एस्टेट सेक्टर गहरे संकट में है और लोग पैसा खर्च करने के बजाय बचत करने में लगे हैं। चीन की हालत का असर दूसरे देशों और विदेशी कंपनियों पर भी दिख रहा है। जापान का एक्सपोर्ट कई महीनों में पहली बार गिरा है। इसकी वजह यह है कि चीन में डिमांड में गिरावट आई है। दुनिया के लिए खतरे की घंटी चीन की इकॉनमी डूबी तो इससे पूरा दुनिया की ग्रोथ प्रभावित होगी। हाल में दुनिया की सबसे बड़ी फैशन कंपनी LMVH के शेयरों में बड़ी गिरावट आई है। इसकी वजह यह रही कि चीन में कंपनी की बिक्री में गिरावट आई है। इसी तरह दुनिया की कई कंपनियों की ग्रोथ में चीन का बड़ा हाथ है। दुनियाभर के बाजार चीन के माल से पटे हैं। लेकिन जानकारों की मानें तो चीन में 2008 जैसी मंदी के लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं। यही वजह है कि चीन में मंदी की आशंका ग्लोबल इकॉनमी के लिए खतरे की घंटी है। इस बीच तीसरी तिमाही में चीन की ग्रोथ डेढ़ साल में सबसे कम रही। नेशनल ब्यूरो को स्टैटिस्टिक्स के जारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर तिमाही में चीन की इकॉनमी 4.6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी जो पिछली तिमाही में 4.7 परसेंट थी। यह 2023 की शुरुआत से सबसे कम ग्रोथ है। हाल के दिनों में चीन की सरकार ने इकॉनमी में जान फूंकने के लिए कई तरह की घोषणाएं की हैं। इनमें ब्याज दरों में कटौती और घर खरीदने से जुड़े नियमों में ढील शामिल है। लेकिन निवेशकों में इसे लेकर ज्यादा उत्साह नहीं है।

हेलेन और मिल्टन तूफानों की लागत 50 बिलियन डॉलर होने की, US के इतिहास में सबसे ज्यादा तबाही मचाने वाले तूफानों में से एक

फ्लोरिडा अमेरिका में हाल में आए मिल्टन तूफान ने काफी तबाही मचाई है। यह अमेरिका के इतिहास में सबसे ज्यादा तबाही मचाने वाले तूफानों में से एक है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक तूफान के कारण आई बाढ़ और तेज हवाओं से करीब 34 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। इस तूफान के कारण फ्लोरिडा में कम से कम 24 लोगों की मौत हुई। साथ ही लोगों को घरों को काफी नुकसान पहुंचा है। समस्या यह है कि अधिकांश घर तेज हवाओं से होने वाले नुकसान के लिए इंश्योर्ड थे लेकिन उनके पास बाढ़ से हुए नुकसान के लिए कवर नहीं था। मिल्टन से दो हफ्ते पहले आए हरिकेन हेलेन से करीब $47.5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था। लेकिन मिल्टन अमेरिका में आए 10 सबसे विनाशक तूफानों में शामिल है। इसमें करीब 22 अरब डॉलर का नुकसान तेज हवाओं के कारण हुआ है जबकि बाढ़ के कारण छह अरब डॉलर के नुकसान की आशंका है। हेलेन ने भी फ्लोरिडा के तटीय इलाकों में तबाही मचाई थी। अभी लोग इससे उबर भी नहीं पाए थे कि मिल्टन ने दस्तक दे दी। इससे फ्लोरिडा का इंश्योरेंस मार्केट मुश्किल में आ गया है। फ्लोरिडा में प्रीमियम फ्लोरिडा में इंश्योरेंस प्रीमियम देश के बाकी राज्यों की तुलना में बहुत अधिक है। सरकार के समर्थन वाली नॉन-प्रॉफिट होम इंश्योरेंस कंपनी Citizens Property Insurance Corp के पास 13 लाख पॉलिसीज हैं। अगर यह प्राइवेट कंपनी होती तो डूब चुकी होती। लेकिन सरकारी कंपनी होने के नाते इसके पास प्रीमियम सरचार्ज लगाने का अधिकार है ताकि सभी दावों का भुगतान किया जा सके। लेकिन इससे इंश्योरर्ड लोगों पर बोझ बढ़ेगा। राक्षसी तूफान हेलेन और मिल्टन ने इतनी जटिल तबाही मचाई कि अभी भी नुकसान का आकलन किया जा रहा है, लेकिन सरकारी और निजी विशेषज्ञों का कहना है कि वे संभवतः 50 अरब डॉलर से अधिक की लागत वाले कुख्यात तूफान कैटरीना, सैंडी और हार्वे की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे। इससे भी अधिक पीड़ादायक बात यह है कि अधिकांश क्षति – हेलेन के मामले में 95% या उससे अधिक – का बीमा नहीं किया गया था, जिससे पीड़ितों को और अधिक वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। तूफान से होने वाली मौतें समय के साथ कम होती जा रही हैं, हालांकि हेलेन एक अपवाद था। लेकिन मुद्रास्फीति के लिए समायोजित करने पर भी, तीव्र तूफानों से होने वाली क्षति आसमान छू रही है क्योंकि लोग नुकसानदेह तरीके से निर्माण कर रहे हैं, पुनर्निर्माण की लागत मुद्रास्फीति की तुलना में तेज़ी से बढ़ रही है, और मानव-कारण जलवायु परिवर्तन तूफानों को अधिक शक्तिशाली और गीला बना रहा है, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने कहा। “आज के तूफान, आज की घटनाएँ कल की घटनाओं से बिलकुल अलग हैं। हम जो देख रहे हैं, उनमें से एक यह है कि ये सिस्टम जो ऊर्जा बनाए रख सकते हैं, वह पहले की तुलना में काफी अधिक है,” जॉन डिक्सन, एऑन एज इंश्योरेंस एजेंसी के अध्यक्ष, जो बाढ़ कवरेज में विशेषज्ञ हैं, ने कहा। “ऐसा लगता है कि कई मामलों में मौसम इतनी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है कि एक समाज के रूप में हम इसके साथ तालमेल नहीं रख पा रहे हैं।” पिछले 45 वर्षों में, मुद्रास्फीति के हिसाब से समायोजित, राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन ने 396 मौसमी आपदाओं की गणना की है, जिनसे कम से कम 1 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। इनमें से 63 तूफ़ान या उष्णकटिबंधीय तूफ़ान थे।

करवा चौथ: प्रकृति प्रेम का प्रतीक पर्व, परिवार और परंपराओं का मिलन

Karva Chauth: Festival symbolizing love of nature, union of family and traditions हम कोई भी व्रत-त्योहार मनाएं, वह किसी न किसी रूप में प्रकृति प्रेम का संदेश देता है. यह संदेश जल, जमीन और पेड़-पौधों को संरक्षित और सुरक्षित करने के प्रण से जुड़ा होता है. यह सच है कि हम प्रकृति को सुरक्षित रखेंगे, तभी हम दीघांयु होंगे, हम पीढ़ी- दर-पीढ़ी आगे बढ़ेंगे. दशहरा के बाद हम अंधकार पर प्रकाश के विजय का पर्व दीपावली मनाते हैं, लेकिन इससे पहले हम कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को करवा चौथ भी मनाते हैं. स्त्रियां पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं. स्त्रियां जानती हैं कि जिस धरा पर हमारा सुखमय दांपत्य जीवन बीत रहा है, उसके लिए पृथ्वी और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करना जरूरी है, इसलिए वह करवा चौथ के अवसर पर ऐसे अनुष्ठान संपन्न करती है, जो प्रकृति की सुरक्षा और संरक्षण का भी संदेश देता है. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन स्त्रियां सुख-शांति और समृद्धि से परिपूर्ण दांपत्य-जीवन की कामना लिये करवा चौथ का व्रत रखती हैं. वास्तव में यह वत न सिर्फ स्त्रियों, बल्कि पुरुषों के भी प्रेम, समर्पण और त्याग का महापर्व है. यदि हम इसे विस्तृत रूप में देखें, तो यह सृष्टि और प्रकृति प्रेम का भी संदेश देता है. पौराणिक पात्र से जुड़ा है करवा चौथ मान्यता है कि महाभारत काल में द्रौपदी ने यह व्रत रखा था. पांडवों पर आयी विपत्ति को दूर करने की कामना के लिये द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण से मदद मांगी और करवा चौथ का व्रत रखा. सावित्री और सत्यवान के अलौकिक प्रेम संबंध की कथा को भी इससे जोड़ कर देखा जाता है. व्रत के शुभ मुहूर्त में सबसे पहले श्री गणेश की पूजा की जाती है. इसके बाद शिव- पार्वती और कार्तिकेय की पूजा की जाती है. व्रत खोलने से पहले इस दिन छलनी करवा चौथ 20 अक्तूबर के माध्यम से चंद्रमा दर्शन का विधान है. यह इंगित करता है कि दांपत्य संबंधों में तभी शीतलता होगी, जब हम एक-दूसरे के अवगुणों को छलनी से छान कर देखेंगे. करवा चौथ मानवीय मनोभावों के साथ- साथ प्रकृति के प्रति भी प्रेम प्रकट करने का संदेश देता है. संपूर्ण ब्र‌ह्मांड के प्रति आभार यदि आपने कभी करवा चौथ करती हुई स्त्री को गौर से देखा होगा, तो पाया होगा कि इस दिन वह चंद्रमा को मिट्टी के पात्र में शीतल कलश में मौजूद पानी और अन्य तत्व वनस्पति और खनिजों सहित हमारी धरती की समृद्धि का प्रतीक हैं. हम कलश को पांच तत्वों- आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी से जोड़ सकते हैं. इसके आधार पर मिट्टी या किसी धातु का बर्तन पृथ्वी या धरती का प्रतीक है. जीवन का आधार गंगा जल कलश हिंदू अनुष्ठानों में गहरा प्रतीकात्मक महत्व रखता है, जो समृद्धि और आध्यात्मिक शुद्धता का प्रतिनिधित्व करता है. कलश या करवा को पवित्र गंगा नदी के जल से भरा जाता है. यहां गंगा जल जीवन को बनाये रखने वाली दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है. जल जीवन का आधार है. गंगा तभी हमें ऊर्जा पूरित करेगी, जब उसका जल स्वच्छ रहेगा. जल लेकर अर्घ्य देती है. इसका आशय है, जहां से शीतलता और रोशनी मिले, उसके प्रति संवेदना की आर्द्रता जरूर प्रदान करना चाहिए, साथ ही यह संदेश मिलता है कि जल, थल और नभ यानी संपूर्ण ब्रह्मांड के प्रति हम आभार प्रकट करें. हम उन्हें स्वच्छ व संरक्षित रखने की कोशिश करें, हम ऐसा कोई भी कार्य न करें, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचे. ईश्वर के करीब लाता है यह पर्व करवा चौथ में पति के स्वास्थ और लंबी आयु के लिए व्रत रखा जाता है. इसमें सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक उपवास किया जाता है. इस अनुष्ठान के अंतर्गत शिव-पार्वती पूजा की थाली तैयार करना, चंद्रमा की पूजा करना और चंद्र दर्शन के बाद पति के हाथों जल और मठरी से व्रत तोड़ने का विधान है. यह एक-दूसरे के प्रति प्रेम-सम्मान और भक्ति का प्रतीक है. मन अशांत होने पर न हम मनुष्य के प्रति प्रेम प्रकट कर पाते हैं और न ही ईश्वर- पृथ्वी का चित्रण है कलश करवा चौथ के नाम में ‘करवा’ शब्द मिट्टी के बर्तन को संदर्भित करता है. पूर्ण कलश पृथ्वी का चित्रण है. भक्ति में ध्यान लगा पाते हैं. यदि हम गौर करें, तो करवा चौथ उपवास का मुख्य उद्देश्य मन को शांत कर ईश्वर और गुरु के करीब आना है.

जम्मू-कश्मीर: सुरक्षाबलों ने ग्रेनेड के साथ दो आतंकियों को किया गिरफ्तार

Jammu and Kashmir: Security forces arrested two terrorists with grenade Jammu Kashmir: जम्मू कश्मीर के पुंछ में सुरक्षाबलों ने जिन आतंकियों को गिरफ्तार किया है वह लोकल ही है. जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिले पुंछ में सुरक्षाबल का तलाशी अभियान जारी है. Jammu Kashmir News: जम्मू कश्मीर के पुंछ में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को गिरफ्तार किया है. दोनों आतंकी स्थानीय बताई जा रहे हैं. सुरक्षाबलों ने आतंकियों के पास से दो ग्रेनेड बरामद किया है. ये दोनों हाइब्रिड आतंकवादी है. ये दिखने में तो सामान्य होते हैं, लेकिन आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होते हैं या उनकी सहायता करते हैं, जिससे उन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है. आतंकियों को पकड़ने के लिए सुरक्षाबल चला रहे अभियान जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिले पुंछ और राजौरी के विभिन्न स्थानों पर आतंकवादियों को पकड़ने के लिए बीते कुछ दिनों से सुरक्षाबल का तलाशी अभियान जारी है. इससे पहले बुधवार (16 अक्टूबर 2024) को आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद गुरसाई टॉप इलाके के मोहरी शाहस्तर में पुलिस और सेना ने देर रात संयुक्त रूप से तलाशी अभियान शुरू किया था. आतंकवादियों की तलाश के लिए अतिरिक्त बल भी भेजा गया था. इस दौरान जंगल की ओर बढ़ रहे आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच कुछ देर तक गोलीबारी भी हुई थी. सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों का पता लगाने के लिए ड्रोन और खोजी कुत्तों को भी तैनात किया है. वहीं जम्मू के व्हाइट नाइट कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा ने डोडा का दौरा कर सुरक्षा स्थिति और परिचालन तैयारियों की समीक्षा की. इस जिले में हाल के दिनों में कई आतंकवादी घटनाएं हुई हैं. पुंछ से आतंकियों का हेल्पर हुआ गिरफ्तार राजौरी जिले में तीन संदिग्ध आतंकवादियों की गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने शद्र शरीफ क्षेत्र के कुंदन और आसपास के गांवों में घेराबंदी कर गुरुवार (17 अक्टूबर 2024) तड़के तलाशी अभियान शुरू किया था. पिछले महीने जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में भारतीय सेना और सीआरपीएफ ने संयुक्त कार्रवाई में आतंकियों का साथ देने वाले एक शख्स को गिरफ्तार किया था. सुरक्षा बलों ने उसके पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए थे.

अखिलेश यादव का महाराष्ट्र प्लान: MVA में समाजवादी पार्टी की सीटों की मांग पर स्पष्टता

Akhilesh Yadav’s Maharashtra Plan: Clarity on Samajwadi Party’s demand for seats in MVA समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव मालेगांव और धुले में रैली करने वाले हैं. सपा विधानसभा चुनाव में दो से अधिक सीटें एमवीए से लेने की कोशिश में है. इस समय सपा के दो विधायक हैं. MVA Seat Sharing In Maharashtra: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इन दिनों मिशन महाराष्ट्र में जुटे हैं. उनकी कोशिश महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में रहकर अधिक से अधिक सीटें सपा के पाले में लाने की है. इसी के मद्देनजर अखिलेश यादव आज (शुक्रवार, 18 अक्टूबर) महाराष्ट्र पहुंचे. यहां उन्होंने कहा कि हरियाणा का हारा हुआ चुनाव बीजेपी ने जीत लिया, लेकिन झारखंड और महाराष्ट्र INDIA गठबंधन ही जीतेगा. महाराष्ट्र में हमें महासावधान रहना पड़ेगा. अखिलेश यादव ने महाराष्ट्र में सपा के प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी के साथ बैठक की. इसके बाद उन्होंने कहा, ”महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी से सपा की 12 सीटों की मांग बिलकुल सही है. महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी ज़्यादा से ज़्यादा सीटों पर जीतकर आएगी. हमें उम्मीद है कि जहां सपा जीतेगी, वहां एमवीए सीट देगा. सवाल संख्या का नहीं, जीत का है. अबू आजमी लगातार कोशिश कर रहे हैं. मालेगांव और धुले में भी हमारी दावेदारी है.” अखिलेश यादव दोनों जगह रैली करने वाले हैं. कौन-कौन सी सीटें चाहती है सपा? सपा ने अमरावती के रावेर से भी चुनाव लड़ने में रुचि दिखाई है. अन्य सीटें जो सपा चाहती है वे हैं मानखुर्द शिवाजी नगर, वर्सोवा, और अनुशक्ति नगर (मुंबई उपनगरीय जिला), भायखला (मुंबई शहर), भिवंडी पूर्व और भिवंडी पश्चिम (ठाणे), मालेगांव सेंट्रल (नासिक), औरंगाबाद पूर्व (छत्रपति संभाजी नगर), करंजा (वाशिम) और धुले शहर (धुले जिला). इस समय मानखुर्द शिवाजी नगर से अबू आजमी विधायक हैं. वहीं भिवंडी पूर्व से सपा के रईस शेख विधायक हैं. 2019 में कैसा रहा था सपा का हाल?288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में 20 नवंबर को एक ही चरण में मतदान होगा और परिणाम 23 नवंबर को आएंगे. 2019 में समाजवादी पार्टी ने महाराष्ट्र में सात सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें से दो पर जीत हासिल हुई थी. अन्य पांच सीटों पर सपा उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई. महाराष्ट्र में इंडिया गठबंधन (एमवीए) में कांग्रेस, शरद पवार की पार्टी एनसीपी (एसपी) और उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना-यूबीटी और अन्य छोटी पार्टियां शामिल है. अखिलेश यादव कहते रहे हैं कि पूरी ताकत से इंडिया ब्लॉक के साथ खड़े रहेंगे. एमवीए का मुकाबला यहां महायुति से है. महायुति (एनडीए) में बीजेपी के साथ एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी शामिल है. नाना पटोले ने क्या कहा? एमवीए में शामिल नेताओं का कहना है कि जल्द ही सभी सीटों पर बातचीत पूरी हो जाएगी.महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि एमवीए में 25 से 30 विधानसभा सीट को लेकर है गतिरोध, कांग्रेस आलाकमान फैसला लेगा. सीटों के बंटवारे पर पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह स्पष्ट है कि जब एक से अधिक दल गठबंधन के रूप में एक साथ आते हैं तो सीट बंटवारे को लेकर संघर्ष होगा, लेकिन यह समझना आवश्यक है कि इसे तब तक नहीं खींचा जा सकता जब तक कि यह टूट न जाए. हालांकि, मुझे लगता है कि अभी ऐसा कोई बड़ा मुद्दा नहीं है. हम एक या दो दिन में अपनी सीट बंटवारे की बातचीत पूरी कर लेंगे, ज्यादातर कल तक, क्योंकि यह अंतिम चरण में पहुंच गया है.

एमपी में खाद की कमी पर कांग्रेस का हल्ला, कृषि मंत्री ने यूक्रेन-रूस युद्ध को ठहराया जिम्मेदार

Congress protests over fertilizer shortage in MP, Agriculture Minister blames Ukraine-Russia war भोपाल ! किसानों को खाद उपलब्ध कराने का दावा खोखला साबित हो रहा है. घंटों कतार में लगने के बावजूद पर्याप्त खाद नहीं मिल रही है. बुआई के मौसम में खाद की किल्लत जी का जंजाल बन गयी है. सीहोर जिला मुख्यालय स्थित कृषि उपज मंडी में खाद के लिए किसानों की भीड़ देखी गई. आधार कार्ड की फोटोकॉपी लिये किसान कतारबद्ध नजर आए. किसानों का दर्द है कि सुबह से लाइन में लगने के बावजूद खाद नहीं मिली है. उन्होंने बताया कि खाद के लिए जद्दोजहद करने का अंदेशा था. इसलिए घर से रोटी बांधकर साथ लाए थे. भूख लगने पर पेड़ के नीचे बैठकर खाया है. नाराज किसानों ने सरकार के दावे पर सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि सरकार हर साल ऐलान करती है कि प्रदेश में खाद की समस्या नहीं होने दी जायेगी. लगता है कि अधिकारियों को मुख्यमंत्री के आदेश की परवाह नहीं है. धूप में भूखे प्यास खड़े रहने के बावजूद खाद नहीं मिल रही है. खाद बांटने वाले कर्मचारी-अधिकारियों की डांट भी खाने को किसान मजबूर हैं. खाद की किल्लत पर कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने सफाई दी है. उन्होंने माना कि यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण खाद आने में देरी हो रही है. कृषि मंत्री ने खाद की कमी के पीछे यूक्रेन-रूस युद्ध को कारण बताया. खाद की किल्लत पर कांग्रेस हमलावर प्रदेश में खाद संकट पर विपक्ष लगातार हमलावर है. राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खाद संकट का जिम्मेदार केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री मोहन यादव को ठहराया है. दिग्विजय सिंह ने कहा कि 1993 से लेकर 2003 तक कांग्रेस की सरकार थी. उस दौरान खाद के लिए किसानों को परेशान नहीं होना पड़ा. खाद की कालाबजारी नहीं होने का भी उन्होंने दावा किया. आज खाद की ब्लैकमार्केटिंग और नकली खाद मामले में बीजेपी से जुड़े नेताओं का नाम सामने आ रहा है.

डी-नोटिफिकेशन के बाद भी चम्बल अभयारण्य क्षेत्र में नहीं होगा रेत खनन

Sand mining will not happen in Chambal sanctuary area even after de-notification उदित नारायणभोपाल। राज्य सरकार द्वारा 31 जनवरी 2023 को मुरैना वनमंडल में स्थित राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य का 207.049 हेक्टेयर क्षेत्र स्थानीय निवासियों को उनकी आजीविका हेतु रेत आपूर्ति हेतु डिनोटिफाई किया गया था, परन्तु अब इस डिनोटिफिकेशन को निरस्त किया जायेगा। अब यह मामला राज्य शासन स्तर पर है जहां वन मंत्री रामनिवास रावत से डिनोटिफिकेशन की सूचना निरस्त करने का प्रशासकीय अनुमोदन मांगा गया है।दरअसल सुप्रीम कोर्ट एवं एनजीटी ने इस डिनोटिफिकेशन की प्रक्रिया कोरह रहे घड़ियालों, डाल्फिन एवं कछुओं के रहवास के प्रतिकूल माना है। मप्र के स्टेट वाईल्ड लाईफ बोर्ड की 11 जून 2024 को हुई बैठक में यह प्रकरण आया था जिसमें निर्णय लिया गया था कि राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य के अंतर्गत स्थानीय लोगों की रेत आपूर्ति हेतु किये गये डिनोटिफाई क्षेत्र के संबंध में सुप्रीम कोर्ट एवं एनजीटी द्वारा रेत आपूर्ति के संबंध में चम्बल अभयारण्य की नदी में दिये गये निर्णय के परिप्रेक्ष्य में प्रस्ताव का पुनः परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही की जाये। इस पर राज्य के वन मुख्यालय की वन्यप्राणी शाखा ने प्रस्ताव का परीक्षण कर अब रिपोर्ट दी है कि डिनोटिफिकेशन की सूचना निरस्त किया जाये। शुरु से ही हुई गड़बड़ी दरअसल स्थानीय लोगों को रेत की आपूर्ति हेतु हेतु 31 जनवरी 2023 को चम्बल नदी का 207.049 हेक्टेयर क्षेत्र डिनोटिफाई किया गया था। इसके बाद मुरैना डीएफओ ने आपत्ति ली कि डिनोटिफिकेशन क्षेत्र इको सेंसेटिव जोन में आता है जहां रेत की आपूर्ति नदी से नहीं हो सकती है। इस पर इको सेंसेटिव जोन को खत्म करने का प्रस्ताव लाया गया परन्तु सुप्रीम कोर्ट एवं एनजीटी ने इस प्रक्रिया को गलत माना। अब डिनोटिफिकेशन निरस्त करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचा है। साल भर पहले एनजीटी ने भी दिया निर्देश नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य (एनसीएस) में अवैध खनन को नियंत्रित करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने अधिकारियों से रेत खनन संबंधी दिशा-निर्देशों को भी लागू करने को कहा है। यह निर्देश न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी की पीठ ने दिया है। इस मामले में कोर्ट ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, एसपीसीबी के साथ भिंड, मुरैना, ग्वालियर, आगरा, इटावा, झांसी, धौलपुर और भरतपुर के पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट से अवैध खनन को नियंत्रित करने, उस पर निगरानी रखने और तीन महीनों के भीतर इस मामले में क्या कार्रवाई की गई, उस पर रिपोर्ट सबमिट करने को कहा था किन्तु आज तक उत्तर प्रदेश राजस्थान और मध्य प्रदेश के डीजीपी ने अपनी रिपोर्ट सबमिट नहीं की। पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने भी उठाया था मामला कांग्रेस के कद्दावर नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह ने भी चंबल अपहरण क्षेत्र में हो रहे रेट उत्खनन को लेकर एक अभियान चलाया था। डॉक्टर सिंह ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखा था पर उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि डॉ सिंह विधानसभा से लेकर सड़क तक जल जीवों की सुरक्षा को लेकर आवाज बुलंद किया था।

सरकारी स्कूल में शराबी हेडमास्टर की हरकत, कार्रवाई की तैयारी

Drunk headmaster’s actions in government school, preparation for action सिंगरौली ! सरकारी स्कूल में हेडमास्टर शराब के नशे में पहुंचा. इसका वीडियो ग्रामीणों ने बना लिया. अब इस मामले में शिक्षा अधिकारी ने कार्रवाई की बात कही है. मध्य प्रदेश के एक सरकारी स्कूल से शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है. सिंगरौली जिले के ग्रामीण क्षेत्र बिंदुल संकुल केंद्र, पुरा गांव के प्राथमिक स्कूल में एक टीचर शराब के नशे में धुत नजर आया. शराब पीकर स्कूल आने की वजह भी शिक्षक ने बताई. उसने कहा कि मेरा मोबाइल गुम हो गया, दिमाग डिस्टर्ब है, इसलिए थोड़ी बहुत शराब पीकर आया हूं. स्कूल में सिर्फ एक टीचरपुरा गांव में सरकारी स्कूल में तैनात इस टीचर का नाम अर्जुन सिंह है. इसी प्राथमिक विद्यालय में हेडमास्टर भी है, जो लंबे समय से इसी स्कूल में है और अक्सर स्कूल में शराब के नशे में ही आता है. इस प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ यही एक शिक्षक है. ग्रामीणों ने बनाया वीडियोरोजाना की तरह बुधवार (16 अक्टूबर) को जब शराबी हेडमास्टर स्कूल पहुंचा तो ग्रामीणों ने उसका वीडियो बनाया और पूछा कि आप शराब पीकर क्यों आये हो? तो जवाब भी ऐसा दिया जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. शराबी हेडमास्टर ने कहा कि मेरा मोबाइल गुम गया है, इसलिए शराब पीकर स्कूल आया हूं. शिक्षा अधिकारी ने क्या कहा?ग्रामीणों ने नशे में धुत्त शराबी हेडमास्टर का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया. वीडियो वायरल होने के बाद जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारी एसबी सिंह ने जांच कराकर कार्रवाई करने की बात कही.

भोपाल में माइनिंग कॉन्क्लेव का सफल समापन, 20 हजार करोड़ का निवेश प्रस्ताव

Successful completion of Mining Conclave in Bhopal, investment proposal of Rs 20 thousand crores Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश में दो दिवसीय माइनिंग कॉन्क्लेव का समापन हो चुका है. इसमें मध्य प्रदेश को 20 हजार करोड़ रुपये के निवेशन का प्रस्ताव मिला है. MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चल रहे दो दिवसीय माइनिंग कॉन्क्लेव का शुक्रवार को समापन हो गया. समापन समारोह में मुख्यमंत्री मोहन यादव भी शामिल हुए. इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 2 दिवसीय माइनिंग कॉन्क्लेव सफल रहा है. इसमें मध्य प्रदेश को 20 हजार करोड़ रुपये के निवेशन का प्रस्ताव मिला है. सीएम मोहन यादव ने उद्योगपतियों से अपील की कि आप सरकार के साथ खड़े हों, हम आपके साथ खड़े हैं. खनिज की दृष्टि से मध्य प्रदेश भाग्यशाली. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार चलाने वाला कैसा है, यह मायने रखता है, सीएम ने पीएम मोदी की नीति का दिया हवाला. उन्होंने कहा कि भारत पर ईश्वर और मां वसुधा की विशेष कृपा है, हम दोहन में विश्वास रखते हैं, शोषण में नहीं. मीनिंग सेक्टर रिर्फांम पुस्तिका का विमोचनसीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज भारत विश्व की 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था है. आयोजन के दौरान मप्र माइनिंग कॉन्क्लेव-2024 में मीनिंग सेक्टर रिर्फांम पुस्तिका का विमोचन भी किया गया. इस अवसर पर एमओआईएल (भारत सरकार के उपक्रम) और मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम लिमिटेड के बीच ब्लॉकों के व्यवसायिक दोहन के लिए संयुक्त उद्यम समझौता भी संपन्न हुआ. ‘मध्य प्रदेश की खदानों से निकले पत्थर उच्च कोटि के’सीएम ने कहा कि हमारे मध्य प्रदेश की खदानों से निकले पत्थर की गुणवत्ता उच्च कोटि की है. केन्द्र सरकार की ओर से माइनिंग नीलामी को लेकर प्रदेश को नंबर वन का पुरस्कार मिला है. खनिजों से भरपूर हमारा मध्य प्रदेश निरंतर खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है. वहीं उन्होंने कहा कि मनमोहन सरकार जहां घपलों-घोटालों की लिप्तता से बाहर नहीं निकल सकी थी, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में माइनिंग क्षेत्र में अभूतपूर्व कीर्तिमान रचे गए हैं, कहीं कोई घोटाला नहीं हुआ.

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