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हरियाणा में कांग्रेस विधायक दल की बैठक18 अक्टूबर को हो सकती है, इस दौरान नेता प्रतिपक्ष भी बदला जा सकता है

चंडीगढ़ हरियाणा में कांग्रेस विधायक दल की बैठक18 अक्टूबर को हो सकती है। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष भी बदला जा सकता है। इस रेस मे अशोक अरोड़ा,चंद्र मोहन,गीता भुक्कल में से किसी की भी लॉटरी निकल सकती है। एक दशक के लंबे अंतराल के बाद हरियाणा की सत्ता में वापसी का सपना टूट जाने के बाद कांग्रेस हाई कमान भी पार्टी की प्रदेश इकाई में जल्द ही बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में जुट गया है। जल्द होगा हरियाणा इकाई में फेरबदल ! कांग्रेस का 2005 का रिकॉर्ड तोड़ने का दवा करने वाले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष उदयभान और भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में हुए इस चुनाव में कांग्रेस को केवल  37 सीट ही मिलल पाई है। पार्टी हाई कमान की ओर से भी इस बार एक दशक के बाद हरियाणा की सत्ता में वापसी की पूरी उम्मीद जताई जा रही थी। यहीं कारण है कि टिकट वितरण में भी हाई कमान ने भूपेंद्र हुड्डा और उदयभान की पसंद का अधिक ध्यान रखा था। अब हरियाणा की सत्ता हाथ से जाने के बाद कांग्रेस में प्रदेश स्तर पर कईं प्रकार का बड़ा फेरबदल होने की अटकलें हैं। हुड्डा की बजाए किसी और को मिलेगा नेता प्रतिपक्ष का पद ! राजनीतिक जानकारों और कांग्रेस से जुड़े सूत्रों की माने तो इस बार कांग्रेस पार्टी की ओर से नेता प्रतिपक्ष का पद भूपेंद्र हुड्डा की बजाए किसी अन्य नेता को दिया जा सकता है। ऐसे में राहुल और प्रियंका गांधी की ओर से कांग्रेस के चुने गए विधायकों में उस नेता की पड़ताल भी शुरू कर दी गई है। चर्चा है कि थानेसर सीट से विधानसभा चुनाव जीते अशोक अरोड़ा को कांग्रेस आने वाले दिनों में नेता प्रतिपक्ष बना सकती है। अशोक अरोड़ा के नाम पर हुड्डा परिवार को भी आपत्ति नहीं होगी। बता दें कि अशोक अरोड़ा जब इनेलो छोड़कर कांग्रेस में आए तो उन्होंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नेतृत्व स्वीकार किया और आज तक वह कांग्रेस की गुटबाजी में हुड्डा के साथ हैं। पंजाबी चेहरा होने के कारण अशोक अरोड़ा को यह अहमियत दी जा सकती है। अशोक अरोड़ा अतीत में इनेलो के भी प्रदेशाध्यक्ष रहे है और पूरे हरियाणा मे इनकी पकड़ है। इसके अलावा हरियाणा में पूर्व मंत्री और विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

प्रहलाद पटेल ने भोपाल हाट में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कही, मातृ-शक्ति का योगदान महत्वपूर्ण

भोपाल मातृ-शक्ति का योगदान ही भारत को दुनिया की तीसरी अर्थव्यस्था बनने में सहयोग करेगा। यह बात पंचायत, ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने भोपाल हाट में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि वह स्वयं भी किसान परिवार से हैं और किसानी में आने वाली परेशानियों से परिचित हैं। महिला सशक्तिकरण के बिना समाज के सर्वांगीण विकास नहीं किया जा सकता। हमें आदिवासी क्षेत्रों से सीख लेते हुए महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम करना चाहिए। श्री पटेल ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को बधाई देता हूँ की उन्होंने श्रीअन्न को प्रचारित कर दुनिया भर में भारत की जनजातीय परंपरा से उत्पन्न कृषि उत्पाद को पहचान दिलाई। श्रीअन्न की फसलें कम से कम पानी में पैदा होती हैं तथा उनसे किसी प्रकार के रोग भी पैदा नहीं होते है। प्रदेश की मातृ-शक्ति उन्ही परम्पराओं को फिर से जीवित कर रही है। आजीविका समूह की महिलायें का योगदान हमें दुनिया की तीसरी अर्थव्यस्था बनने में सहयोग करेगी। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि सिर्फ उत्पादन ही नहीं, यदि हम उत्पाद की प्रोसेसिंग भी करेंगे तो उत्पाद की कीमत दुगनी हो जाएगी। उन्होंने मार्केटिंग और ब्रांडिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा की हमें अपनी महिलाओं को और उनके द्वारा बनाये गए उत्पादों को ट्राइफेड जैसे मार्केटिंग प्लेटफार्म पर ले जाने के लिए जागरूक करना चाहिए। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं से जागरूक करते हुए इनका ज्यादा से ज्यादा लाभ लेने के लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने हाट बाजार का अवलोकन भी किया। संचालक पंचायतराज संचालनालय श्री मनोज पुष्प उपस्थित रहे।  

प्रभारी मंत्री देवांगन बोले- पक्का मकान के सपनों को पूरा करने प्रधानमंत्री श्री मोदी दृढ़ संकल्पित

रायपुर, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत आज कोण्डागांव के ऑडिटोरियम में आयोजित एक दिवसीय आवास मेला में जिले के प्रभारी मंत्री तथा वाणिज्य और उद्योग एवं श्रम विभाग मंत्री लखनलाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों को आवास पूर्णता प्रमाण पत्र एवं आवास स्वीकृति प्रमाण पत्र वितरित किया। आवास मेला के शुभारंभ से पहले मंत्री देवांगन ने जिले में लगभग 04 करोड़ रूपए से अधिक के विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया।     कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री देवांगन ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की सोच है कि विकास के साथ हर गरीब का पक्का मकान हो, हर घर में शौचालय हो, हर घर में शुद्ध पेयजल हो और रसोई धुंआमुक्त हो, इसी सोच के साथ कार्य करते हुए उन्होंने कई जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू की है। प्रधानमंत्री श्री मोदी जरूरतमंदों के पक्का मकान के सपने को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उनके नेतृत्व में हमारा देश हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि आवास योजना के हितग्राहियों केे साथ धोखाधड़ी न हो, इसलिए प्रधानमंत्री द्वारा सीधे उनके खाते में किश्त की राशि भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी सबसे पहले राज्य के गरीबों के हित में निर्णय लेते हुए 18 लाख आवासों की स्वीकृति दी। मंत्री देवांगन ने आवास का सपना पूरा होने पर सभी हितग्राहियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को जिला पंचायत अध्यक्ष देवचंद मातलाम एवं नगर पालिका परिषद के उपाध्यक्ष जसकेतु उसेण्डी ने भी सम्बोधित किया।     कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत जिले की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2011 के सर्वे सूची के अनुसार 36 हजार 811 परिवारों का नाम प्रतीक्षा सूची में शामिल था, जिसमें वर्ष 2016-17 से वर्ष 2022-23 तक कुल 15 हजार 994 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के 320 हितग्राहियों को दिया गया प्रमाण पत्र     कार्यक्रम में मंत्री देवांगन एवं उपस्थित अतिथियों ने प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत जिले के 12 हितग्राहियों को आवास पूर्ण होने पर प्रतिकात्मक चाबी और 42 हितग्राहियों को आवास पूर्णता प्रमाण पत्र दिया गया। इसी प्रकार 266 हितग्राहियों को नवीन आवास स्वीकृति प्रमाण पत्र वितरित किया गया। साथ ही सभी हितग्राहियों को मिट्टी से बने दीये का भी वितरण किया गया।

मध्यप्रदेश बनेगा कैपिटल ऑफ माइंस, खनन उद्योग में निवेश और विकास की है असीमित संभावनाएँ

भोपाल मध्यप्रदेश में प्रचुर संसाधन, अनुकूल नीतियों और मजबूत बुनियादी ढाँचे के साथ खनन उद्योग में निवेश और विकास की असीमित संभावनाएँ हैं, जो देश की खनिज संपदा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मध्यप्रदेश भारत का एकमात्र हीरा उत्पादक राज्य है और कई अन्य खनिजों के उत्पादन में भी अग्रणी है। प्रदेश मैगनीज, कॉपर एवं अयस्क उत्पादन में देश में पहले स्थान पर, जबकि रॉक फॉस्फेट में दूसरे, चूना पत्थर में तीसरे और कोयला उत्पादन में चौथे स्थान पर है। ये खनिज उद्योग और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में इसकी महत्ता को रेखांकित करते हैं। भोपाल में इंटरनेशनल कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में 17 अक्टूबर को 2 दिवसीय कॉन्क्लेव होने जा रही है। यह कॉन्क्लेव इण्डस्ट्रियलिस्ट और शिक्षाविदों के दृष्टिकोण पर केन्द्रित होगी। इसमें तकनीकी सत्र भी होंगे, जिसमें डिजिटलाइजेशन और खनन प्रौद्योगिकी में प्रगति, विशेष रूप से ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) पर चर्चा होगी। प्रतिभागियों को खनन स्टार्ट-अप्स द्वारा आगामी तकनीकों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा। कॉन्क्लेव के विभिन्न सत्रों में कोयला और ऊर्जा, अन्वेषण में प्रगति, चूना पत्थर और सीमेंट, महत्वपूर्ण खनिजों के अवसर, खनिज संवर्धन और ऊर्जा तथा हाइड्रो-कार्बन शामिल है, जो नई ऊर्जा संभावनाओं को उजागर करेंगे। कॉन्क्लेव के दूसरे दिन 18 अक्टूबर को खनिज आधारित उद्योगों कोयला, ऊर्जा और हाइड्रो-कॉर्बन पर केन्द्रित राउण्ड टेबल बैठक होगी, जो हितधारकों के बीच सहयोग और चर्चा के लिये एक मंच प्रदान करेगी। पन्ना में है हीरे का भण्डार मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में देश का एकमात्र हीरे का भण्डार है। यहाँ की मझगाँन हीरा खदान का संचालन भी शुरू हो गया है। हीरा खदान से प्रतिवर्ष एक लाख कैरेट हीरे का उत्पादन होता है। साथ ही बुंदर हीरा ब्लॉक में 32.2 मिलियन कैरेट हीरे का भण्डार है। प्रदेश में मलाज़खण्ड कॉपर खदान भारत की सबसे बड़ी तांबा खदान है। यहाँ से प्रतिदिन 5 से 10 हजार टन तांबा निकाला जाता है। भारत के कुल तांबा भण्डार का 70 प्रतिशत तांबा मध्यप्रदेश में है। इसी प्रकार राज्य में स्थित सासन कोयला खदान भी अपने विशाल खनन उपकरणों के लिये प्रसिद्ध है। यहाँ पर चलने वाली ड्रेग लाइन का उपयोग होता है, जिसकी बाल्टी 61 घन मीटर की है, जो भारत में अब तक सबसे बड़ी है। यह देश का सबसे बड़ा निजी कोयला उत्पादक ब्लॉक है, जो मध्यप्रदेश को खनन क्षेत्र में एक मजबूत पहचान दिलाता है। मध्यप्रदेश में चूना पत्थर का 9 प्रतिशत भण्डार होने के बावजूद चूना पत्थर उत्पादन में देश में 15 प्रतिशत का योगदान देता है। यहाँ के प्रचुर मात्रा में कोयले एवं आवश्यक संसाधनों के कारण राज्य भारत की सीमेंट उत्पादन क्षमता का 7 प्रतिशत हिस्सा रखता है, जिसमें हर साल बढ़ोत्तरी हो रही है। प्रदेश में कोलबेड मिथेन (सीबीएम) के बड़े भण्डार हैं। देश में यह संसाधन में छठवें स्थान पर है, लेकिन उत्पादन में यह दूसरे स्थान पर है। यह दर्शाता है कि राज्य अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने के लिये न केवल खनिज सम्पदा, बल्कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का भी काफी बेहतर उपयोग कर रहा है, जिससे यह नेट जीरो मिशन में भी योगदान दे रहा है। मध्यप्रदेश के सोहागपुर ईस्ट और वेस्ट सीवीएम ब्लॉक रिलायंस इण्डस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा संचालित है। इससे निकाली गई गैस को बाजार तक पहुँचाने के लिये शहडोल से फूलपुर तक एक गैस पाइप-लाइन निर्माण की योजना बनाई गई है, जो हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर पाइप-लाइन नेटवर्क से जुड़ेगी। यह परियोजना राज्य को राष्ट्रीय गैस प्रणाली से जोड़कर ऊर्जा के क्षेत्र में उसकी भूमिका को और सशक्त बनायेगी। लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में प्रदेश बेहतरीन स्थिति में है। यहाँ 5.1 लाख किलोमीटर लम्बी सड़कें, 6 इनलेण्ड कंटेनर डिपो (आईसीडी) और 7 हवाई अड्डे हैं, जो राज्य को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ते हैं और व्यवसाय की सुगमता को बढ़ाते हैं। मध्यप्रदेश खनिज सम्पदा के साथ अन्य औद्योगिक आवश्यकताओं को भी पूरा करता है। बिजली की पर्याप्त व्यवस्था, जल-संसाधन और कुशल श्रमिक उपलब्ध हैं, जो औद्योगिक संचालन के लिये एक अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं। राज्य निवेशकों और खनन ऑपरेटर्स को व्यापक सहायता प्रदान करेगा। प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाने के लिये बीडर के साथ को-ऑर्डिनेशन किया जाता है, जिससे आवश्यक क्लियरेंस और अनुमोदन प्राप्त करने में आसानी होती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सोच को साकार करने के लिये वर्ष 2015 में खनिज कानून संशोधन के साथ जिला खनिज निधि (डीएमएफ) की स्थापना की गई है, जिसमें अब तक 7 हजार 531 से अधिक परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं, जो राज्य के खनन प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के जीवन को बेहतर बना रही हैं। मध्यप्रदेश का खनिज संसाधन विभाग (एमआरडी) खनिज ब्लॉक नीलामी में देश में अग्रणी रहा है। मध्यप्रदेश द्वारा 78 खनिज ब्लॉक सफलतापूर्वक नीलाम किये गये। प्रदेश को फरवरी 2022-23 में खनिज ब्लॉक नीलामी में देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। प्रदेश को जुलाई-2022 में भारत सरकार द्वारा मुख्य और गौण खनिज नीलामी के लिये भी प्रथम पुरस्कार मिला है, जो राज्य के खनिज संसाधन एवं प्रबंधन में उत्कृष्टता का प्रमाण है।  

भारत और कनाडा के संबंधों में पिछले कुछ समय से लगातार गिरावट देखने को मिल रही है, दे रहा आतंकियों को पनाह

कनाडा भारत और कनाडा के संबंधों में पिछले कुछ समय से लगातार गिरावट देखने को मिल रही है, लेकिन हाल के घटनाक्रम ने इस रिश्ते में एक नया मोड़ ला दिया है। एक तरफ जहां पाकिस्तान का जिक्र अक्सर आतंकवाद और भारत-विरोधी गतिविधियों के संदर्भ में होता है, वहीं अब कनाडा भी इसी श्रेणी में आ चुका है। “कनाडा अब भारत के लिए नया पाकिस्तान बन चुका है,” यह टिप्पणी वरिष्ठ शोधकर्ता सुशांत सरीन ने एक टेलीविजन चर्चा के दौरान की, क्या वाकई भारत के लिए कनाडा की स्थिति पाकिस्तान की तरह हो गई है? आइए जानते हैं। कैसे आने लगी भारत-कनाडा के रिश्ते में खाई भारत-कनाडा के बीच संबंधों में असली दरार तब आई जब जून 2023 में कनाडा के सरे शहर में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई। इसके बाद, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने भारत पर इस हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया। हालांकि, भारत ने बार-बार ठोस सबूतों की मांग की लेकिन कनाडा इस दिशा में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। इस घटना ने दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को और भी गंभीर बना दिया। हाल ही में, कनाडा ने भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा को पर्सन ऑफ इंटरेस्ट घोषित किया, जिससे भारत और अधिक नाराज हो गया। परिणामस्वरूप, भारत ने अपने राजनयिकों को वापस बुलाने और कनाडाई दूतावास के छह अधिकारियों को निष्कासित करने का कठोर कदम उठाया। इस प्रकार के उपाय भारत और पाकिस्तान के बीच पहले भी देखे गए हैं, जब पुलवामा हमले के बाद दोनों देशों ने अपने-अपने दूतावासों के कर्मियों को निष्कासित किया था। खालिस्तान मुद्दे पर ट्रूडो का ढुलमुल रवैया जस्टिन ट्रूडो की सरकार पर आरोप है कि वह खालिस्तानी तत्वों को शह देकर अपने देश में वोट-बैंक की राजनीति कर रहे हैं। यह वही रणनीति है जिसे पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे पर अपनाया था। पाकिस्तान ने कश्मीर को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया, जिससे उसकी घरेलू राजनीति में वोटों की फसल काटी जा सके। ट्रूडो भी इसी तरह कनाडा में सिखों के वोट के लिए खालिस्तानी गतिविधियों को समर्थन दे रहे हैं। खालिस्तानी संगठनों जैसे वर्ल्ड सिख ऑर्गनाइजेशन, खालिस्तान टाइगर फोर्स, और बब्बर खालसा इंटरनेशनल ने कनाडा में खुलेआम काम किया है। इन संगठनों पर भारत सरकार ने पहले ही कई बार प्रतिबंध लगाने की मांग की है, लेकिन कनाडा ने इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया। आतंकियों के लिए पनाहगार बना कनाडा जैसे पाकिस्तान आतंकवादियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बन गया था, वैसे ही कनाडा भी अब भारत-विरोधी तत्वों का गढ़ बनता जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि कनाडा सरकार न केवल खालिस्तानी तत्वों को संरक्षण दे रही है, बल्कि वह भारतीय कानून से फरार आतंकवादियों और अपराधियों को भी शरण दे रही है। इसमें से कई व्यक्ति पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ट्रूडो की वोट-बैंक की राजनीति भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बार-बार ट्रूडो की वोट-बैंक राजनीति को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया है। ट्रूडो की सरकार को जगमीत सिंह की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) का समर्थन प्राप्त है, जिनकी छवि खालिस्तानी समर्थक के रूप में जानी जाती है। इस गठबंधन ने कनाडा को खालिस्तानी तत्वों के प्रति नर्म रुख अपनाने के लिए मजबूर किया है।

27 करोड़ की लागत से बनेगा शुक्रवारी बाजार से स्टेशन तक फोरलेन

रायपुर रायपुर पश्चिम को फिर चमकाने में जुटे पूर्व मंत्री तथा दिग्गज भाजपा नेता राजेश मूणत के प्रयासों पर सीएम विष्णुदेव साय ने मुहर लगाते हुए गुढि?ारी को एक और फोरलेन सड़क प्रदान कर दी है। यह सड़क शुक्रवारी बाजार से शुरू होकर प्लेटफार्म-5 स्थित रेलवे फाटक को जोड़ेगी तथा पूरी तरह फोरलेन होगी। अभी यह सड़क कई जगह बेहद संकरी है। लगभग पौन किमी की इस सड़क के निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने 26.52 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति भी जारी कर दी है। सड़क निर्माण की मंजूरी और फंड मंजूर करने के लिए पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने सीएम विष्णुदेव साय, और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के प्रति आभार जताया है। उन्होंने कहा कि रायपुर पश्चिम क्षेत्र में सड़कों का इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ाने के लिए और बड़ी कोशिशें की जाएंगी। रायपुर पश्चिम के विधायक तथा तीन बार के मंत्री रहे राजेश मूणत को इस विधानसभा क्षेत्र में सड़कों के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं का बड़ा और मजबूत इंफ्रास्र्ट्क्चर विकसित करने के लिए माना जाता है। रायपुर पश्चिम से गुजरनेवाली अन्य सड़कों के चौड़ीकरण तथा फ्लाईओवर्स का निर्माण मूणत के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर हुआ है। जहां तक शुक्रवारी से स्टेशन तक करीब 0.78 किमी के नए फोरलेन का सवाल है, राज्य शासन ने शासन  राज्य शासन से जारी आदेश में कहा गया है कि इस सड़क के निर्माण का टेंडर जारी करने से पहले सक्षम अधिकारी से तकनीकी स्वीकृति ली जाए। इस सड़क पर पुल-पुलिया बनानी हो तो उसका ड्राइंग-डिजाइन भी फाइनल करवा लिया जाए। सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए भूअर्जन करना होगा। प्रस्ताव के अनुसार भूअर्जन की राशि भी स्वीकृत कर दी गई है।

डॉ. अंबेडकर की विरासत समाज को करती है प्रेरित: उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के भारतीय समाज में समानता, न्याय और सामाजिक समरसता के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर द्वारा स्थापित किये गये सिद्धांत विशेष रूप से वंचित वर्गों के अधिकारों और सम्मान की सुरक्षा, हमारे समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। श्री देवड़ा आज ऑल इण्डिया एससी-एसटी रेलवे कर्मचारी संघ के अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि रेलवे में कार्य करने वाले इन वर्गों के कर्मचारियों को डॉ. अंबेडकर के विचारों से प्रेरणा लेनी चाहिये। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बाबा साहेब के पंचतीर्थ के महत्व को समझकर उसका पुनर्निर्माण एवं विस्तार किया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम छोर तक खड़े दलित वर्ग के अधिकारों के लिये काम किया। इस अवसर पर महापौर श्रीमती मालती राय, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.एल. बरैया, सचिव श्री अशोक कुमार, शाक्य पुत्र सागरजी उपस्थित रहे।  

ओलंपिक पदक विजेता सुश्री मनु भाकर की मौजूदगी में होगा भव्य समापन कार्यक्रम

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव को राजधानी रायपुर में 16 से 20 अक्टूबर तक आयोजित 27वें अखिल भारतीय वन खेलकूद प्रतियोगिता में शामिल होने का आमंत्रण मिला है। श्री साय से आज यहाँ उनके निवास कार्यालय में वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में वन विभाग के अधिकारियों ने भेंटकर उन्हें शुभारंभ कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को सफल आयोजन  के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी करना छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। इस मौके पर अधिकारियों ने  उन्हें स्पोर्ट्स किट भी भेंट किया। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव,  एडिशनल पीसीसीएफ श्री सुनील मिश्रा, एडिशनल पीसीसीएफ श्री अरूण पाण्डेय, एडिशनल पीसीसीएफ श्रीमती संजीता गुप्ता, मुख्य वन संरक्षक श्रीमती शालिनी रैना, सीसीएफ श्री राजू अगासिमनी भी उपस्थित थे। प्रतियोगिता की नोडल अधिकारी श्रीमती शालिनी रैना (मुख्य वन संरक्षक मानव संसाधन व आईटी) ने बताया कि यह एक वृहद व प्रतिष्ठित आयोजन है जो वनों की सुरक्षा व वन्य प्राणियों के संरक्षण को लेकर समर्पित है, जिसमें देशभर के अनेक प्रतिभागी शामिल होने वाले हैं। उन्होंने बताया कि राजधानी के 27वें अखिल भारतीय वन खेलकूद प्रतियोगिता में देशभर से करीब 3 हजार से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी इस पांच दिवसीय प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए सतत प्रयासरत है। गौरतलब है कि राजधानी रायपुर में 16 से 20 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले अखिल भारतीय वन खेलकूद प्रतियोगिता का उद्घाटन राजधानी के कोटा स्थित स्टेडियम में होगा। कार्यक्रम में भारतीय टी-20 क्रिकेट टीम के कप्तान और युवाओं में स्काई के नाम मशहूर क्रिकेटर सूर्य कुमार यादव शामिल होंगे। साथ ही आयोजन के समापन समारोह में ओलंपिक पदक विजेता सुश्री मनु भाकर भी शामिल होंगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी वीडियो जारी कर प्रतियोगिता में भाग लेने वाले देशभर के वन सेवा के अधिकारी व कर्मचारियों को बधाई देते हुए आयोजक वन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को शुभकामनाएं प्रेषित की है।

हरियाणा में हार नसीब के बाद अब महारास्ट्र और झारखण्ड में अलर्ट मोड़ में कांग्रेस: राहुल गांधी

नई दिल्ली हरियाणा में जीत सामने देख रही कांग्रेस को अंत में हार नसीब हुई। इस करारी हार को अब तक कांग्रेस हजम नहीं कर पाई है। इस नतीजे की एक वजह ओवर कॉन्फिडेंस भी मानी जा रही है। यही वजह है कि पार्टी अब महाराष्ट्र में हर कदम फूंक-फूंक कर रखना चाहती है। सोमवार को महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं के साथ हुई मीटिंग में राहुल गांधी ने अलर्ट भी किया कि आप लोगों को ओवर कॉन्फिडेंस से बचना होगा। उन्होंने कहा कि आप लोग एकजुट होकर काम करें और किसी भी तरह के अति आत्मविश्वास से बचें। चुनाव आयोग आज ही महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का ऐलान करने वाला है। इसके साथ ही झारखंड के विधानसभा चुनावों का भी शेड्यूल जारी किया जाएगा। लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपने दम पर बहुमत से रोकने वाली कांग्रेस को उम्मीद थी कि वह हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में अच्छे नतीजे लाएगी। खासतौर पर हरियाणा में तो पार्टी को अपने दम पर सत्ता की उम्मीद थी, लेकिन नतीजे ने चौंका दिया। भाजपा लगातार तीसरी बार हरियाणा में जीत गई। अब भाजपा को महाराष्ट्र में जीत का भरोसा जग गया है, जबकि कांग्रेस वहां अब सावधानी के साथ ही चलना चाहती है। अब तक कांग्रेस महाराष्ट्र में इस भरोसे में रही है कि वह पहले नंबर पर रहेगी। बता दें कि महाराष्ट्र में सीट शेयरिंग भी INDIA अलायंस के लिए एक चैलेंज है। उद्धव ठाकरे गुट सबसे ज्यादा सीटें चाहता है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को देखते हुए वह सबसे ज्यादा सीटों पर लड़ेगी। हालांकि इस बात पर तीनों के बीच सहमति दिखती है कि वह किसी भी हाल में एक साथ ही चुनाव में उतरेंगे। बता दें कि महाविकास अघाड़ी को लोकसभा चुनाव में अच्छी सफलता मिली थी। राज्य की 48 में से 31 सीटों पर गठबंधन जीता था। वहीं भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को महज 17 पर ही जीत मिली थी। तभी से राज्य में INDIA अलायंस उत्साहित है, लेकिन हरियाणा के नतीजों ने राहुल गांधी से लेकर पूरी पार्टी को ही अलर्ट कर दिया है। इसी वजह से पूरी कोशिश है कि मतभेद वाले मुद्दों को फिलहाल दूर ही रखा जाए। सीएम फेस घोषित नहीं किया जाएगा। अब तक तीनों दलों के बीच जो बात हुई है, उसके अनुसार कांग्रेस 110 से 115 सीटें लड़ सकती है। वहीं 90 से 95 सीटें उद्धव सेना को मिलने की उम्मीद है। शरद पवार की एनसीपी के खाते में 80 से 85 सीटें जा सकती हैं।

मध्यक्षेत्र विद्युत कंपनी महा-अभियान चलाकर करेगी ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि

भोपाल मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के अंतर्गत आने वाले 16 जिलों के बिजली उपभोक्ताओं को घोषित अवधि में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि करने का महा-अभियान शुरू किया जा रहा है। इस महा-अभियान में ऐसे वितरण ट्रांसफार्मर जिन पर क्षमता से अधिक भार अधिरोपित होने से बार-बार फेल हो जाते हैं, उनकी क्षमता वृद्धि करके फेल ट्रांसफार्मरों की संख्या को नियंत्रित किया जाएगा। साथ ही बिजली उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। कंपनी ने इसके लिए वितरण ट्रांसफार्मरों के क्षमता वृद्धि की स्वीकृति क्षेत्रीय एवं वृत्त स्तर पर प्रदान करते हुए क्षमता वृद्धि के कार्य को महा-अभियान संचालित कर पूरा करने का निर्णय लियाहै। कंपनी द्वारा कुछ शर्तों के साथ वितरण ट्रांसफार्मरों के क्षमता वृद्धि की स्वीकृति दी है।इस अभियान में वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 में लगाए गए दो या उससे अधिक बार असफल हुए वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि के कार्य प्राथमिकता के आधार पर किये जाएंगे। कंपनी ने बताया है कि वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि 25 से 63 के. व्ही. ए. एवं 63 से 100 के व्ही ए. की जाएगी। क्षमता वृद्धि के बाद बेहतर स्थिति के 25 केव्हीए वितरण ट्रांसफार्मर को फेल ट्रांसफार्मर के स्थान पर एवं 63 के. व्ही. ए. के ट्रांसफार्मर को 25 से 63 के. व्ही. ए. क्षमता वृद्धि के कार्य में उपयोग में लाया जाएगा।  

निर्वाचन आयुक्त सिंह बोले-शुद्ध एवं त्रुटिरहित निर्वाचन नामावली तैयार करने व्यापक प्रचार-प्रसार करें

रायपुर त्रिस्तरीय पंचायतों एवं नगरीय निकायों के आम/उप निर्वाचन 2024-25 हेतु निर्वाचक नामावली तैयार एवं पुनरीक्षण किये जाने का कार्यक्रम प्रक्रियाधीन है। राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने सभी जिला के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्वाचक नामावली कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने कहा है, जिससे शुद्ध एवं त्रुटिरहित निर्वाचक नामावली तैयार की जा सके। उन्होंने बताया कि नगरीय निकायों हेतु प्रारंभिक निर्वाचक नामावली  का प्रकाशन 16 अक्टूबर 2024 एवं त्रिस्तरीय पंचायत हेतु प्रारंभिक निर्वाचक नामावली प्रकाशन 24 अक्टूबर 2024 निर्धारित है। निर्वाचन आयुक्त सिंह ने सभी कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्वाचक नामावली के प्रचार-प्रसार के साथ ही 16 अक्टूबर को अपने-अपने जिले में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर मीडिया के माध्यम से निर्वाचन से जुड़ी जानकारी देने कहा है। निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रारंभिक प्रकाशन हेतु चिन्हांकित विविध स्थानों की जानकारी, दावें एवं आपत्तियों को प्राप्त करने हेतु निर्धारित स्थलों की पंचायतवार, निकायवार एवं वार्डवार कुल संख्या की विस्तृत जानकारी देने कहा है। इसी तरह दावें एवं आपत्तियों को प्राप्त करने तथा उनका निराकरण करने हेतु निर्धारित तिथियां, निर्वाचक नामावली के अंतिम प्रकाशन के संबंध में जानकारी तथा पुनरीक्षण कार्यक्रम के संबंध में जिले द्वारा जाबो अंतर्गत किये गये जागरूकता संबंधी कार्य सहित  निर्वाचन संबंधी आवश्यक विषय पर जानकारी मीडिया को देने कहा है।  जिससे मीडिया के माध्यम से निर्वाचन संबंधी जानकारियां  लोगो तक पहुंच सके।

वन स्टाप सेंटर के प्रशासकों और काउंसलर्स की 2 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला 16 अक्टूबर से

भोपाल   किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर आपातकालीन एवं गैर आपातकालीन सहायता एवं परामर्श उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में 57 वन स्टाप सेंटर संचालित हैं। हिंसा पीड़ित महिलाओं की शिकायतों का निराकरण वन स्टाप सेंटर के प्रशासक द्वारा किया जाता है। इसके अतिरिक्त इन पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं की काउंसलिंग भी की जाती है। महिला बाल विकास विभाग द्वारा इन प्रशिक्षकों एवं काउंसलर्स के लिये 2 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला 16 एवं 17 अक्टूबर को होटल पलाश भोपाल में की जा रही है। आयुक्त, महिला बाल विकास श्रीमती सूफिया फारूखी प्रात: 11 बजे कार्यशाला का शुभारंभ करेंगी। प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रशासक संवेदीकरण, मनोवैज्ञानिक परामर्श, नये कानूनों में संशोधन, जेंडर संवेदीकरण, फेमिली काउंसलिंग एवं दस्तावेजीकरण आदि विषयों पर विस्तृत चर्चा की जायेगी।  

37 वर्ष पुराने बरगी जल विद्युत गृह ने पिछले वर्ष की तुलना में किया 21 मिलियन यूनिट अधिक विद्युत उत्पादन

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के विद्युत गृहों ने ताप व जल विद्युत उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है। पॉवर जनरेटिंग कंपनी के संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंहपुर की यूनिट नंबर 5 ने जहां 150 दिन लगातार विद्युत उत्पादन किया, वहीं 37 वर्ष पुराने रानी अवंती बाई सागर जल विद्युत गृह बरगी ने पिछले वर्ष की तुलना में 21 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया। बिरसिंगपुर की यूनिट नंबर 5 उत्पादन के साथ हासिल की अन्य उपलब्धियां- संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर की 500 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 ने इस वर्ष 17 मई से संचालित होते हुए गत दिवस 150 दिन लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। यूनिट नंबर 5 ने विभिन्न मापदंडों में भी उपलब्धि हासिल की। यूनिट ने 97.5 फीसदी प्लांट उपलब्धता फेक्टर (पीएएफ), 92.46 फीसदी प्लांट लोड फेक्टर (पीएलएफ) व यूनिट ने 5.89 प्रतिशत की ऑक्जलरी कंजम्पशन (एपीसी)की उपलब्धि हासिल की। यह यूनिट वर्तमान में भी सतत् विद्युत उत्पादन कर रही है। बरगी जल विद्युत गृह ने दिखाया दमखम- रानी अवंतीबाई सागर जल विद्युत गृह बरगी की 37 वर्ष पुरानी 45-45 मेगावाट की यूनिट ने पूर्ण क्षमता से संचालित होते हुए इस वित्तीय वर्ष में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में समान अवधि में 21 मिलियन यूनिट अधिक विद्युत उत्पादन किया बरगी जल विद्युत गृह ने इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से 13 अक्टूबर तक 300 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया, जबकि जल विद्युत गृह ने गर्मी में प्रथम तिमाही (अप्रैल से जून) में पिछले वित्तीय वर्ष की इस समान अवधि में 51.41 मिलियन यूनिट अधिक विद्युत उत्पादन किया है। जल विद्युत गृह ने इस वित्तीय वर्ष की प्रथम तिमाही में 123.55 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में इस समान अवधि में बरगी जल विद्युत गृह द्वारा 72.14 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया गया था। ऊर्जा मंत्री व अपर मुख्य सचिव ने दी बधाई- ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव व मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक श्री मनजीत सिंह ने संजय गांधी ताप विद्युत गृह के यूनिट नंबर 5 और बरगी जल विद्युत गृह के अभियंताओं व कार्मिकों को बधाई देते हुए उनकी सराहना करते हुए कहा कि समर्पण, कड़ी मेहनत व प्रतिबद्धता से लक्ष्य अर्जित करने का यह सर्वश्रेष्ठ व अनुकरणीय उदाहरण है।  

भारत के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा और पांच अन्य अधिकारी लौटेंगे कनाडा से, खालिस्तानी तत्वों से बताया खतरा

नई दिल्ली भारत ने कनाडा के छह राजनयिकों को निष्कासित कर दिया तथा कनाडा से अपने उच्चायुक्त और ‘‘निशाना बनाए जा रहे’’ अन्य राजनयिकों एवं अधिकारियों को वापस बुलाने की घोषणा की। भारत के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा और पांच अन्य अधिकारी इस सप्ताह के अंत में कनाडा से लौट आएंगे। भारत लौटने के बाद उनको संभावित खालिस्तानी खतरों के कारण बढ़ी हुई सुरक्षा दी जाएगी। खुफिया सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों पर खालिस्तानी समर्थक समूहों से गंभीर खतरे की आशंका है। इसके अलावा, कनाडा में हाल ही में तैनात अन्य भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों को भी विशेष सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। संजय कुमार वर्मा के अलावा, टोरंटो के वाणिज्य दूत सिद्धार्थ नाथ को सबसे अधिक “खतरे में” माना जा रहा है। उन्हें भी हाल ही में कनाडा छोड़ने को कहा गया था। नाथ ने पिछले साल अगस्त में टोरंटो कांसुलेट का कार्यभार संभाला था। ब्रिटिश कोलंबिया के प्रमुख खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के दो महीने बाद ही नाथ ने कार्यभार संभाला था। खालिस्तानी समर्थक समूह का $500,000 का इनाम खालिस्तान समर्थक समूह ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) ने उच्चायुक्त वर्मा की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 500,000 डॉलर का इनाम घोषित किया है। SFJ के जनरल काउंसल गुरपतवंत पन्नू ने एक बयान में कहा कि वे “संजय कुमार वर्मा की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे” और उन्हें “न्याय के कटघरे” में लाने के लिए प्रयास करेंगे। SFJ का आरोप है कि वर्मा का निज्जर की हत्या में कथित तौर पर हाथ था और यह संगठन लगातार कनाडा के प्रधानमंत्री को इस मामले की जांच के लिए पत्र लिखता रहा है। भारत की प्रतिक्रिया: OCI कार्ड पर सख्ती, वीजा पर नहीं सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार खालिस्तानी गतिविधियों से जुड़े भारतीय मूल के कनाडाई नागरिकों के ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड पर सख्त कार्रवाई करने की योजना बना रही है। हालांकि, वीजा जारी करने पर रोक लगाने की संभावना नहीं है, जैसा कि पिछले साल प्रधानमंत्री ट्रूडो के बयान के बाद हुआ था। ट्रूडो का बयान: “सार्वजनिक सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम” कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को कहा कि छह भारतीय अधिकारियों को निष्कासन नोटिस देना “आवश्यक” था ताकि उन आपराधिक गतिविधियों को रोका जा सके जो कनाडा की सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई हैं। फिलहाल भारत और कनाडा के बीच खालिस्तानी मुद्दे को लेकर बढ़ते तनाव के बीच, भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है।

इजरायली आयरन डोम ने हवा में ही नष्ट कर दिया, हिजबुल्लाह ने निकाल ली आयरन डोम की काट?

नई दिल्ली इजरायल इस वक्त एक साथ कई मोर्चों पर जंग लड़ रहा है। ऐसे में मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचने के लिए इजरायल ने अपनी सीमाओं पर सबसे बड़ा सुरक्षा तंत्र यानी आयरन डोम डिफेंस सिस्टम तैनात कर रखा है, जो दुश्मन देश की तरफ से आने वाली हर मिसाइल और ड्रोन को इंटरसेप्ट कर इजरायल के सुरक्षा दे रहा है। हाल ही में जब ईरान ने करीब 200 बैलस्टिक मिसाइलों से इजरायल पर हमला बोला तो उनमें से अधिकांश को इजरायली आयरन डोम ने हवा में ही नष्ट कर दिया लेकिन अब हिज्बुल्लाह ने उसकी काट निकाल ली है। दरअसल, लेबनान के हिज्बुल्लाह आतंकियों ने रविवार को उसकी सुरक्षा तंत्र में सेंधमारी करते हुए इजरायली सेना के ठिकानों पर ताबड़तोड़ कई ड्रोन दागे हैं, जिसमें चार सैनिकों की मौत हो गई है, जबकि 60 से ज्यादा घायल हुए हैं। हिजबुल्लाह आतंकियों ने मिरसाद-1 ड्रोन के जरिए रविवार शाम को बिनयामीना-गिवात अदा के पास इज़रायली सुरक्षा बल (IDF) बेस पर हमला किया, जिसमें चार सैनिक मारे गए और कई अन्य घायल हुए हैं। ये ड्रोन समुद्री क्षेत्र से होते हुए मध्य इजरायली क्षेत्र में जाकर लक्षित ठिकानों पर गिरे। IDF ने कहा है कि वह इस घटना की जांच कर रही है। IDF ने यह भी कहा है कि उसने हिज्बुल्लाह के एक ड्रोन को मार गिराया है। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि आखिर आयरन डोम के तैनात होते हुए हिज्बुल्लाह आतंकियों ने इजरायली भू-भाग में ड्रोन से हमले कैसे किए? क्या हिज्बुल्लाह ने आयरन डोम को चकमा देने और उसकी निगाहबानी की काट निकाल ली है? इस हमले ने यह भी साबित कर दिया है कि इजरायल हिज्बुल्लाह की ताकत को कमतर ना आंके। हिज्बुल्लाह को ईरान से हर तरह की मदद मिलती रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि आयरन डोम ने इन ड्रोन का पीछा तो किया था लेकिन अचानक वे उनके रडार से गायब हो गए। इस हमले में चौंकाने वाली बात ये है कि इजरायली सुरक्षा तंत्र में तैनात रडारों ने मिरसाद-1 के हमले के दौरान न तो खतरे की चेतावनी दी और न ही सायरन बजा सकी। हिज्बुल्लाह के इस ड्रोन हमले ने इजरायल की नींद उड़ा दी है। क्या है मिरसाद-1 ड्रोन, क्या है खासियत? मिरसाद-1 ड्रोन एक आत्मघाती ड्रोन है, जिसका इस्तेमाल हिज्बुल्लाह लड़ाके 20 वर्षों से कर रहे हैं। ईरान में इसे अबाबील-टी के नाम से जाना जाता है। इजरायली शोध संस्थान अल्मा सेंटर के मुताबिक, मिरसाद-1 ड्रोन की मारक क्षमता 120 किलोमीटर और अधिकतम गति 370 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह ड्रोन 40 किलोग्राम तक का पेलोड (विस्फोटक) ले जा सकता है और 3,000 मीटर तक ऊंची उड़ान भर सकता है। साल 2002 तक हिज्बुल्लाह इस ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी और जासूसी के लिए करता था लेकिन उसके बाद इसे इजरायली इलाके में आत्मघाती हमले के लिए इस्तेमाल करने लगा। जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मिरसाद-1 एक ऐसा ड्रोन है जिसे हिजबुल्लाह ने दो दशकों से अधिक समय से तैनात कर रखा है और यह ईरानी डिजाइन पर आधारित है। बता दें कि हिजबुल्लाह एक सशस्त्र शिया आतंकवादी समूह है जो ईरान द्वारा समर्थित है। इजरायली सुरक्षा तंत्र को चकमा देने के लिए हिज्बुल्लाह ने पहले रॉकेटों से हमला किया, फिर उसी के बीच ड्रोन हमले भी किए ताकि इजरायली सैनिक और उसका एयर डिफेंस सिस्टम को कन्फ्यूज हो जाय। हिज्बुल्लाह अपने इस अंजाम में आंसिक तौर पर सफल हुआ क्योंकि उसके कुछ ड्रोन एयर डिफेंस सिस्टम को धोखा देते हुए सैन्य अड्डे के पास जा गिरे। वैसे यह पहली बार नहीं है जब हिजबुल्लाह के ड्रोन चकमा देते हुए इजरायली हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए हैं। ये इस साल की दूसरी घटना है जब इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम ड्रोन हमले को रोक नहीं सका।

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